आमूस

1

इसराईल के पड़ोसियों की अदालत

1 ज़ैल में आमूस के पैग़ामात क़लमबंद हैं। आमूस तक़ुअ शहर का गल्लाबान था। ज़लज़ले से दो साल पहले उसने इसराईल के बारे में रोया में यह कुछ देखा। उस वक़्त उज़्ज़ियाह यहूदाह का और यरुबियाम बिन युआस इसराईल का बादशाह था।

2 आमूस बोला, “रब कोहे-सिय्यून पर से दहाड़ता है, उस की गरजती आवाज़ यरूशलम से सुनाई देती है। तब गल्लाबानों की चरागाहें सूख जाती हैं और करमिल की चोटी पर जंगल मुरझा जाता है।”

3 रब फ़रमाता है, “दमिश्क़ के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि उन्होंने जिलियाद को गाहने के आहनी औज़ार से ख़ूब कूटकर गाह लिया है। 4 चुनाँचे मैं हज़ाएल के घराने पर आग नाज़िल करूँगा, और बिन-हदद के महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे। 5 मैं दमिश्क़ के कुंडे को तोड़कर बिक़अत-आवन और बैत-अदन के हुक्मरानों को मौत के घाट उतारूँगा। अराम की क़ौम जिलावतन होकर क़ीर में जा बसेगी।” यह रब का फ़रमान है।

6 रब फ़रमाता है, “ग़ज़्ज़ा के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि उन्होंने पूरी आबादियों को जिलावतन करके अदोम के हवाले कर दिया है। 7 चुनाँचे मैं ग़ज़्ज़ा की फ़सील पर आग नाज़िल करूँगा, और उसके महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे। 8 अशदूद और अस्क़लून के हुक्मरानों को मैं मार डालूँगा, अक़रून पर भी हमला करूँगा। तब बचे-खुचे फ़िलिस्ती भी हलाक हो जाएंगे।” यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

9 रब फ़रमाता है, “सूर के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि उन्होंने बरादराना अहद का लिहाज़ न किया बल्कि पूरी आबादियों को जिलावतन करके अदोम के हवाले कर दिया। 10 चुनाँचे मैं सूर की फ़सील पर आग नाज़िल करूँगा, और उसके महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे।”

11 रब फ़रमाता है, “अदोम के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि उन्होंने अपने इसराईली भाइयों को तलवार से मार मारकर उनका ताक़्क़ुब किया और सख़्ती से उन पर रहम करने से इनकार किया। उनका क़हर भड़कता रहा, उनका तैश कभी ठंडा न हुआ। 12 चुनाँचे मैं तेमान पर आग नाज़िल करूँगा, और बुसरा के महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे।”

13 रब फ़रमाता है, “अम्मोन के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि अपनी सरहद्दों को बढ़ाने के लिए उन्होंने जिलियाद की हामिला औरतों के पेट चीर डाले। 14 चुनाँचे मैं रब्बा की फ़सील को आग लगा दूँगा, और उसके महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे। जंग के उस दिन हर तरफ़ फ़ौजियों के नारे बुलंद हो जाएंगे, तूफ़ान के उस दिन उन पर सख़्त आँधी टूट पड़ेगी। 15 उनका बादशाह अपने अफ़सरों समेत क़ैदी बनकर जिलावतन हो जाएगा।” यह रब का फ़रमान है।

2

1 रब फ़रमाता है, “मोआब के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि उन्होंने अदोम के बादशाह की हड्डियों को जलाकर राख कर दिया है। 2 चुनाँचे मैं मुल्के-मोआब पर आग नाज़िल करूँगा, और क़रियोत के महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे। जंग का शोर-शराबा मचेगा, फ़ौजियों के नारे बुलंद हो जाएंगे, नरसिंगा फूँका जाएगा। तब मोआब हलाक हो जाएगा। 3 मैं उसके हुक्मरान को उसके तमाम अफ़सरों समेत हलाक कर दूँगा।” यह रब का फ़रमान है।

यहूदाह की अदालत

4 रब फ़रमाता है, “यहूदाह के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि उन्होंने रब की शरीअत को रद्द करके उसके अहकाम पर अमल नहीं किया। उनके झूटे देवता उन्हें ग़लत राह पर ले गए हैं, वह देवता जिनकी पैरवी उनके बापदादा भी करते रहे। 5 चुनाँचे मैं यहूदाह पर आग नाज़िल करूँगा, और यरूशलम के महल नज़रे-आतिश हो जाएंगे।”

इसराईल की अदालत

6 रब फ़रमाता है, “इसराईल के बाशिंदों ने बार बार गुनाह किया है, इसलिए मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। क्योंकि वह शरीफ़ लोगों को पैसे के लिए बेचते और ज़रूरतमंदों को फ़रोख़्त करते हैं ताकि एक जोड़ी जूता मिल जाए। 7 वह ग़रीबों के सर को ज़मीन पर कुचल देते, मुसीबतज़दों को इनसाफ़ मिलने से रोकते हैं। बाप और बेटा दोनों एक ही कसबी के पास जाकर मेरे नाम की बेहुरमती करते हैं। 8 जब कभी किसी क़ुरबानगाह के पास पूजा करने जाते हैं तो ऐसे कपड़ों पर आराम करते हैं जो क़र्ज़दारों ने ज़मानत के तौर पर दिए थे। जब कभी अपने देवता के मंदिर में जाते तो ऐसे पैसों से मै ख़रीदकर पीते हैं जो जुरमाना के तौर पर ज़रूरतमंदों से मिल गए थे।

9 यह कैसी बात है? मैं ही ने अमोरियों को उनके आगे आगे नेस्त कर दिया था, हालाँकि वह देवदार के दरख़्तों जैसे लंबे और बलूत के दरख़्तों जैसे ताक़तवर थे। मैं ही ने अमोरियों को जड़ों और फल समेत मिटा दिया था। 10 इससे पहले मैं ही तुम्हें मिसर से निकाल लाया, मैं ही ने चालीस साल तक रेगिस्तान में तुम्हारी राहनुमाई करते करते तुम्हें अमोरियों के मुल्क तक पहुँचाया ताकि उस पर क़ब्ज़ा करो। 11 मैं ही ने तुम्हारे बेटों में से नबी बरपा किए, और मैं ही ने तुम्हारे नौजवानों में से कुछ चुन लिए ताकि अपनी ख़िदमत के लिए मख़सूस करूँ।” रब फ़रमाता है, “ऐ इसराईलियो, क्या ऐसा नहीं था? 12 लेकिन तुमने मेरे लिए मख़सूस आदमियों को मै पिलाई और नबियों को हुक्म दिया कि नबुव्वत मत करो।

13 अब मैं होने दूँगा कि तुम अनाज से ख़ूब लदी हुई बैलगाड़ी की तरह झूलने लगोगे। 14 न तेज़रौ शख़्स भागकर बचेगा, न ताक़तवर आदमी कुछ कर पाएगा। न सूरमा अपनी जान बचाएगा, 15 न तीर चलानेवाला क़ायम रहेगा। कोई नहीं बचेगा, ख़ाह पैदल दौड़नेवाला हो या घोड़े पर सवार। 16 उस दिन सबसे बहादुर सूरमा भी हथियार डालकर नंगी हालत में भाग जाएगा।” यह रब का फ़रमान है।

3

1 ऐ इसराईलियो, वह कलाम सुनो जो रब तुम्हारे ख़िलाफ़ फ़रमाता है, उस पूरी क़ौम के ख़िलाफ़ जिसे मैं मिसर से निकाल लाया था। 2 “दुनिया की तमाम क़ौमों में से मैंने सिर्फ़ तुम्हीं को जान लिया, इसलिए मैं तुम्हीं को तुम्हारे तमाम गुनाहों की सज़ा दूँगा।”

नबी की ज़िम्मादारी

3 क्या दो अफ़राद मिलकर सफ़र कर सकते हैं अगर वह मुत्तफ़िक़ न हों? 4 क्या शेरबबर दहाड़ता है अगर उसे शिकार न मिला हो? क्या जवान शेर अपनी माँद में गरजता है अगर उसने कुछ पकड़ा न हो? 5 क्या परिंदा फंदे में फँस जाता है अगर फंदे को लगाया न गया हो? या फंदा कुछ फँसा सकता है अगर शिकार न हो? 6 जब शहर में नरसिंगा फूँका जाता है ताकि लोगों को किसी ख़तरे से आगाह करे तो क्या वह नहीं घबराते? जब आफ़त शहर पर आती है तो क्या रब की तरफ़ से नहीं होती?

7 यक़ीनन जो भी मनसूबा रब क़ादिरे-मुतलक़ बाँधे उस पर अमल करने से पहले वह उसे अपने ख़ादिमों यानी नबियों पर ज़ाहिर करता है।

8 शेरबबर दहाड़ उठा है तो कौन है जो डर न जाए? रब क़ादिरे-मुतलक़ बोल उठा है तो कौन है जो नबुव्वत न करे?

सामरिया को रिहाई नहीं मिलेगी

9 अशदूद और मिसर के महलों को इत्तला दो, “सामरिया के पहाड़ों पर जमा होकर उस पर नज़र डालो जो कुछ शहर में हो रहा है। कितनी बड़ी हलचल मच गई है, कितना ज़ुल्म हो रहा है।” 10 रब फ़रमाता है, “यह लोग सहीह काम करना जानते ही नहीं बल्कि ज़ालिम और तबाहकुन तरीक़ों से अपने महलों में ख़ज़ाने जमा करते हैं।”

11 चुनाँचे रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, “दुश्मन मुल्क को घेरकर तेरी क़िलाबंदियों को ढा देगा और तेरे महलों को लूट लेगा।” 12 रब फ़रमाता है, “अगर चरवाहा अपनी भेड़ को शेरबबर के मुँह से निकालने की कोशिश करे तो शायद दो पिंडलियाँ या कान का टुकड़ा बच जाए। सामरिया के इसराईली भी इसी तरह ही बच जाएंगे, ख़ाह वह इस वक़्त अपने शानदार सोफ़ों और ख़ूबसूरत गद्दियों पर आराम क्यों न करें।”

13 रब क़ादिरे-मुतलक़ जो आसमानी लशकरों का ख़ुदा है फ़रमाता है, “सुनो, याक़ूब के घराने के ख़िलाफ़ गवाही दो! 14 जिस दिन मैं इसराईल को उसके गुनाहों की सज़ा दूँगा उस दिन मैं बैतेल की क़ुरबानगाहों को मिसमार करूँगा। तब क़ुरबानगाह के कोनों पर लगे सींग टूटकर ज़मीन पर गिर जाएंगे। 15 मैं सर्दियों और गरमियों के मौसम के लिए तामीर किए गए घरों को ढा दूँगा। हाथीदाँत से आरास्ता इमारतें ख़ाक में मिलाई जाएँगी, और जहाँ इस वक़्त मुतअद्दिद मकान नज़र आते हैं वहाँ कुछ नहीं रहेगा।” यह रब का फ़रमान है।

4

सामरिया की ज़ालिम औरतें

1 ऐ कोहे-सामरिया की मोटी-ताज़ी गायो, + 4:1 लफ़्ज़ी तरजुमा : ‘बसन की गायो।’ बसन एक पहाड़ी इलाक़ा था जिसके मवेशी मशहूर थे। सुनो मेरी बात! तुम ग़रीबों पर ज़ुल्म करती और ज़रूरतमंदों को कुचल देती, तुम अपने शौहरों को कहती हो, “जाकर मै ले आओ, हम और पीना चाहती हैं।” 2 रब ने अपनी क़ुद्दूसियत की क़सम खाकर फ़रमाया है, “वह दिन आनेवाला है जब दुश्मन तुम्हें काँटों के ज़रीए घसीटकर अपने साथ ले जाएगा। जो बचेगा उसे मछली के काँटे से पकड़ा जाएगा। 3 हर एक को फ़सील के रख़नों में से सीधा निकलना पड़ेगा, हर एक को हरमून पहाड़ की तरफ़ भगा दिया जाएगा।” यह रब का फ़रमान है।

इसराईल को समझाया नहीं जा सकता

4 “चलो, बैतेल जाकर गुनाह करो, जिलजाल जाकर अपने गुनाहों में इज़ाफ़ा करो! सुबह के वक़्त अपनी क़ुरबानियों को चढ़ाओ, तीसरे दिन आमदनी का दसवाँ हिस्सा पेश करो। 5 ख़मीरी रोटी जलाकर अपनी शुक्रगुज़ारी का इज़हार करो, बुलंद आवाज़ से उन क़ुरबानियों का एलान करो जो तुम अपनी ख़ुशी से अदा कर रहे हो। क्योंकि ऐसी हरकतें तुम इसराईलियों को बहुत पसंद हैं।” यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

6 रब फ़रमाता है, “मैंने काल पड़ने दिया। हर शहर और आबादी में रोटी ख़त्म हुई। तो भी तुम मेरे पास वापस नहीं आए! 7 अभी फ़सल के पकने तक तीन माह बाक़ी थे कि मैंने तुम्हारे मुल्क में बारिशों को रोक दिया। मैंने होने दिया कि एक शहर में बारिश हुई जबकि साथवाला शहर उससे महरूम रहा, एक खेत बारिश से सेराब हुआ जबकि दूसरा झुलस गया। 8 जिस शहर में थोड़ा-बहुत पानी बाक़ी था वहाँ दीगर कई शहरों के बाशिंदे लड़खड़ाते हुए पहुँचे, लेकिन उनके लिए काफ़ी नहीं था। तो भी तुम मेरे पास वापस न आए!” यह रब का फ़रमान है।

9 रब फ़रमाता है, “मैंने तुम्हारी फ़सलों को पतरोग और फफूँदी से तबाह कर दिया। जो भी तुम्हारे मुतअद्दिद अंगूर, अंजीर, ज़ैतून और बाक़ी फल के बाग़ों में उगता था उसे टिड्डियाँ खा गईं। तो भी तुम मेरे पास वापस न आए!”

10 रब फ़रमाता है, “मैंने तुम्हारे दरमियान ऐसी मोहलक बीमारी फैला दी जैसी क़दीम ज़माने में मिसर में फैल गई थी। तुम्हारे नौजवानों को मैंने तलवार से मार डाला, तुम्हारे घोड़े तुमसे छीन लिए गए। तुम्हारी लशकरगाहों में लाशों का ताफ़्फ़ुन इतना फैल गया कि तुम बहुत तंग हुए। तो भी तुम मेरे पास वापस न आए।”

11 रब फ़रमाता है, “मैंने तुम्हारे दरमियान ऐसी तबाही मचाई जैसी उस दिन हुई जब मैंने सदूम और अमूरा को तबाह किया।

तुम्हारी हालत बिलकुल उस लकड़ी की मानिंद थी जो आग से निकालकर बचाई तो गई लेकिन फिर भी काफ़ी झुलस गई थी। तो भी तुम वापस न आए। 12 चुनाँचे ऐ इसराईल, अब मैं आइंदा भी तेरे साथ ऐसा ही करूँगा। और चूँकि मैं तेरे साथ ऐसा करूँगा, इसलिए अपने ख़ुदा से मिलने के लिए तैयार हो जा, ऐ इसराईल!”

13 क्योंकि अल्लाह ही पहाड़ों को तश्कील देता, हवा को ख़लक़ करता और अपने ख़यालात को इनसान पर ज़ाहिर करता है। वही तड़का और अंधेरा पैदा करता और वही ज़मीन की बुलंदियों पर चलता है। उसका नाम ‘रब, लशकरों का ख़ुदा’ है।

5

मेरे पास लौट आओ!

1 ऐ इसराईली क़ौम, मेरी बात सुनो, तुम्हारे बारे में मेरे नोहा पर ध्यान दो!

2 “कुँवारी इसराईल गिर गई है और आइंदा कभी नहीं उठेगी। उसे उस की अपनी ज़मीन पर पटख़ दिया गया है, और कोई उसे दुबारा खड़ा नहीं करेगा।”

3 रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, “इसराईल के जिस शहर से 1,000 मर्द लड़ने के लिए निकलेंगे उसके सिर्फ़ 100 अफ़राद वापस आएँगे। और जिस शहर से 100 निकलेंगे, उसके सिर्फ़ 10 मर्द वापस आएँगे।” 4 क्योंकि रब इसराईली क़ौम से फ़रमाता है, “मुझे तलाश करो तो तुम जीते रहोगे। 5 न बैतेल के तालिब हो, न जिलजाल के पास जाओ, और न बैर-सबा के लिए रवाना हो जाओ! क्योंकि जिलजाल के बाशिंदे यक़ीनन जिलावतन हो जाएंगे, और बैतेल नेस्तो-नाबूद हो जाएगा।”

6 रब को तलाश करो तो तुम जीते रहोगे। वरना वह आग की तरह यूसुफ़ के घराने में से गुज़रकर बैतेल को भस्म करेगा, और उसे कोई नहीं बुझा सकेगा।

हर तरफ़ नाइनसाफ़ी

7 उन पर अफ़सोस जो इनसाफ़ को उलटकर ज़हर में बदल देते, जो रास्ती को ज़मीन पर पटख़ देते हैं!

8 अल्लाह सात सहेलियों के झुमके और जौज़े का ख़ालिक़ है। अंधेरे को वह सुबह की रौशनी में और दिन को रात में बदल देता है। जो समुंदर के पानी को बुलाकर रूए-ज़मीन पर उंडेल देता है उसका नाम रब है! 9 अचानक ही वह ज़ोरावरों पर आफ़त लाता है, और उसके कहने पर क़िलाबंद शहर तबाह हो जाता है।

10 तुम उससे नफ़रत करते हो जो अदालत में इनसाफ़ करे, तुम्हें उससे घिन आती है जो सच बोले। 11 तुम ग़रीबों को कुचलकर उनके अनाज पर हद से ज़्यादा टैक्स लगाते हो। इसलिए गो तुमने तराशे हुए पत्थरों से शानदार घर बनाए हैं तो भी उनमें नहीं रहोगे, गो तुमने अंगूर के फलते-फूलते बाग़ लगाए हैं तो भी उनकी मै से महज़ूज़ नहीं होगे। 12 मैं तो तुम्हारे मुतअद्दिद जरायम और संगीन गुनाहों से ख़ूब वाक़िफ़ हूँ। तुम रास्तबाज़ों पर ज़ुल्म करते और रिश्वत लेकर ग़रीबों को अदालत में इनसाफ़ से महरूम रखते हो। 13 इसलिए समझदार शख़्स इस वक़्त ख़ामोश रहता है, वक़्त इतना ही बुरा है।

14 बुराई को तलाश न करो बल्कि अच्छाई को, तब ही जीते रहोगे। तब ही तुम्हारा दावा दुरुस्त होगा कि रब जो लशकरों का ख़ुदा है हमारे साथ है। 15 बुराई से नफ़रत करो और जो कुछ अच्छा है उसे प्यार करो। अदालतों में इनसाफ़ क़ायम रखो, शायद रब जो लशकरों का ख़ुदा है यूसुफ़ के बचे-खुचे हिस्से पर रहम करे।

16 चुनाँचे रब जो लशकरों का ख़ुदा और हमारा आक़ा है फ़रमाता है, “तमाम चौकों में आहो-बुका होगी, तमाम गलियों में लोग ‘हाय, हाय’ करेंगे। खेतीबाड़ी करनेवालों को भी बुलाया जाएगा ताकि पेशावराना तौर पर सोग मनानेवालों के साथ गिर्याओ-ज़ारी करें। 17 अंगूर के तमाम बाग़ों में वावैला मचेगा, क्योंकि मैं ख़ुद तुम्हारे दरमियान से गुज़रूँगा।” यह रब का फ़रमान है।

रब का दिन हौलनाक है

18 उन पर अफ़सोस जो कहते हैं, “काश रब का दिन आ जाए!” तुम्हारे लिए रब के दिन का क्या फ़ायदा होगा? वह तो तुम्हारे लिए रौशनी का नहीं बल्कि तारीकी का बाइस होगा। 19 तब तुम उस आदमी की मानिंद होगे जो शेरबबर से भागकर रीछ से टकरा जाता है। जब घर में पनाह लेकर हाथ से दीवार का सहारा लेता है तो साँप उसे डस लेता है।

20 हाँ, रब का दिन तुम्हारे लिए रौशनी का नहीं बल्कि तारीकी का बाइस होगा। ऐसा अंधेरा होगा कि उम्मीद की किरण तक नज़र नहीं आएगी।

21 रब फ़रमाता है, “मुझे तुम्हारे मज़हबी तहवारों से नफ़रत है, मैं उन्हें हक़ीर जानता हूँ। तुम्हारे इजतिमाओं से मुझे घिन आती है। 22 जो भस्म होनेवाली और ग़ल्ला की क़ुरबानियाँ तुम मुझे पेश करते हो उन्हें मैं पसंद नहीं करता, जो मोटे-ताज़े बैल तुम मुझे सलामती की क़ुरबानी के तौर पर चढ़ाते हो उन पर मैं नज़र भी नहीं डालना चाहता। 23 दफ़ा करो अपने गीतों का शोर! मैं तुम्हारे सितारों की मौसीक़ी सुनना नहीं चाहता। 24 इन चीज़ों की बजाए इनसाफ़ का चश्मा फूट निकले और रास्ती की कभी बंद न होनेवाली नहर बह निकले।

25 ऐ इसराईल के घराने, जब तुम रेगिस्तान में घुमते-फिरते थे तो क्या तुमने उन 40 सालों के दौरान कभी मुझे ज़बह और ग़ल्ला की क़ुरबानियाँ पेश कीं? 26 नहीं, उस वक़्त भी तुम अपने बादशाह सक्कूत देवता और अपने सितारे कीवान देवता को उठाए फिरते थे, गो तुमने अपने हाथों से यह बुत अपने लिए बना लिए थे। 27 इसलिए रब जिसका नाम लशकरों का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं तुम्हें जिलावतन करके दमिश्क़ के पार बसा दूँगा।”

6

राहनुमाओं की ख़ुदएतमादी और ऐयाशी

1 कोहे-सिय्यून के बेपरवा बाशिंदों पर अफ़सोस! कोहे-सामरिया के बाशिंदों पर अफ़सोस जो अपने आपको महफ़ूज़ समझते हैं। हाँ, सबसे आला क़ौम के उन शुरफ़ा पर अफ़सोस जिनके पास इसराईली क़ौम मदद के लिए आती है। 2 कलना शहर के पास जाकर उस पर ग़ौर करो, वहाँ से अज़ीम शहर हमात के पास पहुँचो, फिर फ़िलिस्ती मुल्क के शहर जात के पास उतरो। क्या तुम इन ममालिक से बेहतर हो? क्या तुम्हारा इलाक़ा इनकी निसबत बड़ा है?

3 तुम अपने आपको आफ़त के दिन से दूर समझकर अपनी ज़ालिम हुकूमत दूसरों पर जताते हो। 4 तुम हाथीदाँत से आरास्ता पलंगों पर सोते और अपने शानदार सोफ़ों पर पाँव फैलाते हो। खाने के लिए तुम अपने रेवड़ों से अच्छे अच्छे भेड़ के बच्चे और मोटे-ताज़े बछड़े चुन लेते हो। 5 तुम अपने सितारों को बजा बजाकर दाऊद की तरह मुख़्तलिफ़ क़िस्म के गीत तैयार करते हो। 6 मै को तुम बड़े बड़े प्यालों से पी लेते, बेहतरीन क़िस्म के तेल अपने जिस्म पर मिलते हो। अफ़सोस, तुम परवा ही नहीं करते कि यूसुफ़ का घराना तबाह होनेवाला है।

7 इसलिए तुम उन लोगों में से होगे जो पहले क़ैदी बनकर जिलावतन हो जाएंगे। तब तुम्हारी रंगरलियाँ बंद हो जाएँगी, तुम्हारी आवारागर्द और काहिल ज़िंदगी ख़त्म हो जाएगी।

8 रब जो लशकरों का ख़ुदा है फ़रमाता है, “मुझे याक़ूब का ग़ुरूर देखकर घिन आती है, उसके महलों से मैं मुतनफ़्फ़िर हूँ। मैं शहर और जो कुछ उसमें है दुश्मन के हवाले कर दूँगा। मेरे नाम की क़सम, यह मेरा, रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।” 9 उस वक़्त अगर एक घर में दस आदमी रह जाएँ तो वह भी मर जाएंगे। 10 फिर जब कोई रिश्तेदार आए ताकि लाशों को उठाकर दफ़नाने जाए और देखे कि घर के किसी कोने में अभी कोई छुपकर बच गया है तो वह उससे पूछेगा, “क्या आपके अलावा कोई और भी बचा है?” तो वह जवाब देगा, “नहीं, एक भी नहीं।” तब रिश्तेदार कहेगा, “चुप! रब के नाम का ज़िक्र मत करना, ऐसा न हो कि वह तुझे भी मौत के घाट उतारे।” + 6:10 ‘ऐसा न हो कि वह . . . घाट उतारे’ इज़ाफ़ा है ताकि मतलब साफ़ हो।

11 क्योंकि रब ने हुक्म दिया है कि शानदार घरों को टुकड़े टुकड़े और छोटे घरों को रेज़ा रेज़ा किया जाए।

12 क्या घोड़े चटानों पर सरपट दौड़ते हैं? क्या इनसान बैल लेकर उन पर हल चलाता है? लेकिन तुम इतनी ही ग़ैरफ़ितरी हरकतें करते हो। क्योंकि तुम इनसाफ़ को ज़हर में और रास्ती का मीठा फल कड़वाहट में बदल देते हो। 13 तुम लो-दिबार की फ़तह पर शादियाना बजा बजाकर फ़ख़र करते हो, “हमने अपनी ही ताक़त से क़रनैम पर क़ब्ज़ा कर लिया!” 14 चुनाँचे रब जो लशकरों का ख़ुदा है फ़रमाता है, “ऐ इसराईली क़ौम, मैं तेरे ख़िलाफ़ एक क़ौम को तहरीक दूँगा जो तुझे शिमाल के शहर लबो-हमात से लेकर जुनूब की वादी अराबा तक अज़ियत पहुँचाएगी।”

7

टिड्डियों की रोया

1 रब क़ादिरे-मुतलक़ ने मुझे रोया दिखाई। मैंने देखा कि अल्लाह टिड्डियों के ग़ोल पैदा कर रहा है। उस वक़्त पहली घास की कटाई हो चुकी थी, वह घास जो बादशाह के लिए मुक़र्रर थी। अब घास दुबारा उगने लगी थी। 2 तब टिड्डियाँ मुल्क की पूरी हरियाली पर टूट पड़ीं और सब कुछ खा गईं। मैं चिल्ला उठा, “ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, मेहरबानी करके मुआफ़ कर, वरना याक़ूब किस तरह क़ायम रहेगा? वह पहले से इतनी छोटी क़ौम है।” 3 तब रब पछताया और फ़रमाया, “जो कुछ तूने देखा वह पेश नहीं आएगा।”

आग की रोया

4 फिर रब क़ादिरे-मुतलक़ ने मुझे एक और रोया दिखाई। मैंने देखा कि रब क़ादिरे-मुतलक़ आग की बारिश बुला रहा है ताकि मुल्क पर बरसे। आग ने समुंदर की गहराइयों को ख़ुश्क कर दिया, फिर मुल्क में फैलने लगी। 5 तब मैं चिल्ला उठा, “ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, मेहरबानी करके इससे बाज़ आ, वरना याक़ूब किस तरह क़ायम रहेगा? वह पहले से इतनी छोटी क़ौम है।” 6 तब रब दुबारा पछताया और फ़रमाया, “यह भी पेश नहीं आएगा।”

साहूल की रोया

7 इसके बाद रब ने मुझे एक तीसरी रोया दिखाई। मैंने देखा कि क़ादिरे-मुतलक़ एक ऐसी दीवार पर खड़ा है जो साहूल से नाप नापकर तामीर की गई है। उसके हाथ में साहूल था। 8 रब ने मुझसे पूछा, “ऐ आमूस, तुझे क्या नज़र आता है?” मैंने जवाब दिया, “साहूल।” तब रब ने फ़रमाया, “मैं अपनी क़ौम इसराईल के दरमियान साहूल लगानेवाला हूँ। आइंदा मैं उनके गुनाहों को नज़रंदाज़ नहीं करूँगा बल्कि नाप नापकर उनको सज़ा दूँगा। 9 उन बुलंदियों की क़ुरबानगाहें तबाह हो जाएँगी जहाँ इसहाक़ की औलाद अपनी क़ुरबानियाँ पेश करती है। इसराईल के मक़दिस ख़ाक में मिलाए जाएंगे, और मैं अपनी तलवार को पकड़कर यरुबियाम के ख़ानदान पर टूट पड़ूँगा।”

आमूस को इसराईल से निकलने का हुक्म दिया जाता है

10 यह सुनकर बैतेल के इमाम अमसियाह ने इसराईल के बादशाह यरुबियाम को इत्तला दी, “आमूस इसराईल के दरमियान ही आपके ख़िलाफ़ साज़िशें कर रहा है! मुल्क उसके पैग़ाम बरदाश्त नहीं कर सकता, 11 क्योंकि वह कहता है, ‘यरुबियाम तलवार की ज़द में आकर मर जाएगा, और इसराईली क़ौम यक़ीनन क़ैदी बनकर जिलावतन हो जाएगी’।”

12 अमसियाह ने आमूस से कहा, “ऐ रोया देखनेवाले, यहाँ से निकल जा! मुल्के-यहूदाह में भागकर वहीं रोज़ी कमा, वहीं नबुव्वत कर। 13 आइंदा बैतेल में नबुव्वत मत करना, क्योंकि यह बादशाह का मक़दिस और बादशाही की मरकज़ी इबादतगाह है।”

14 आमूस ने जवाब दिया, “पेशा के लिहाज़ से न मैं नबी हूँ, न किसी नबी का शागिर्द बल्कि गल्लाबान और अंजीर-तूत का बाग़बान। 15 तो भी रब ने मुझे भेड़-बकरियों की गल्लाबानी करने से हटाकर हुक्म दिया कि मेरी क़ौम इसराईल के पास जा और नबुव्वत करके उसे मेरा कलाम पेश कर। 16 अब रब का कलाम सुन! तू कहता है, ‘इसराईल के ख़िलाफ़ नबुव्वत मत करना, इसहाक़ की क़ौम के ख़िलाफ़ बात मत करना।’ 17 जवाब में रब फ़रमाता है, ‘तेरी बीवी शहर में कसबी बनेगी, तेरे बेटे-बेटियाँ सब तलवार से क़त्ल हो जाएंगे, तेरी ज़मीन नापकर दूसरों में तक़सीम की जाएगी, और तू ख़ुद एक नापाक मुल्क में वफ़ात पाएगा। यक़ीनन इसराईली क़ौम क़ैदी बनकर जिलावतन हो जाएगी’।”

8

पके फल से भरी टोकरी

1 एक बार फिर रब क़ादिरे-मुतलक़ ने मुझे रोया दिखाई। मैंने पके हुए फल से भरी हुई टोकरी देखी। 2 रब ने पूछा, “ऐ आमूस, तुझे क्या नज़र आता है?” मैंने जवाब दिया, “पके हुए फल से भरी हुई टोकरी।” तब रब ने मुझसे फ़रमाया, “मेरी क़ौम का अंजाम पक गया है। अब से मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा। 3 रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि उस दिन महल में गीत सुनाई नहीं देंगे बल्कि आहो-ज़ारी। चारों तरफ़ नाशें नज़र आएँगी, क्योंकि दुश्मन उन्हें हर जगह फेंकेगा। ख़ामोश!”

अवाम का इस्तेह्साल

4 ऐ ग़रीबों को कुचलनेवालो, ऐ ज़रूरतमंदों को तबाह करनेवालो, सुनो! 5 तुम कहते हो, “नए चाँद की ईद कब गुज़र जाएगी, सबत का दिन कब ख़त्म है ताकि हम अनाज के गोदाम खोलकर ग़ल्ला बेच सकें? तब हम पैमाइश के बरतन छोटे और तराज़ू के बाट हलके बनाएँगे, साथ साथ सौदे का भाव बढ़ाएँगे। हम फ़रोख़्त करते वक़्त अनाज के साथ उसका भूसा भी मिलाएँगे।” अपने नाजायज़ तरीक़ों से तुम थोड़े पैसों में बल्कि एक जोड़ी जूतों के एवज़ ग़रीबों को ख़रीदते हो।

7 रब ने याक़ूब के फ़ख़र की क़सम खाकर वादा किया है, “जो कुछ उनसे सरज़द हुआ है उसे मैं कभी नहीं भूलूँगा। 8 उन्हीं की वजह से ज़मीन लरज़ उठेगी और उसके तमाम बाशिंदे मातम करेंगे। जिस तरह मिसर में दरियाए-नील बरसात के मौसम में सैलाबी सूरत इख़्तियार कर लेता है उसी तरह पूरी ज़मीन उठेगी। वह नील की तरह जोश में आएगी, फिर दुबारा उतर जाएगी।”

9 रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, “उस दिन मैं होने दूँगा कि सूरज दोपहर के वक़्त ग़ुरूब हो जाए। दिन उरूज पर ही होगा तो ज़मीन पर अंधेरा छा जाएगा। 10 मैं तुम्हारे तहवारों को मातम में और तुम्हारे गीतों को आहो-बुका में बदल दूँगा। मैं सबको टाट के मातमी लिबास पहनाकर हर एक का सर मुँडवाऊँगा। लोग यों मातम करेंगे जैसा उनका वाहिद बेटा कूच कर गया हो। अंजाम का वह दिन कितना तलख़ होगा।”

अल्लाह आइंदा जवाब नहीं देगा

11 क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, “ऐसे दिन आनेवाले हैं जब मैं मुल्क में काल भेजूँगा। लेकिन लोग न रोटी और न पानी से बल्कि अल्लाह का कलाम सुनने से महरूम रहेंगे। 12 लोग लड़खड़ाते हुए एक समुंदर से दूसरे तक और शिमाल से मशरिक़ तक फिरेंगे ताकि रब का कलाम मिल जाए, लेकिन बेसूद।

13 उस दिन ख़ूबसूरत कुँवारियाँ और जवान मर्द प्यास के मारे बेहोश हो जाएंगे। 14 जो इस वक़्त सामरिया के मकरूह बुत की क़सम खाते और कहते हैं, ‘ऐ दान, तेरे देवता की हयात की क़सम’ या ‘ऐ बैर-सबा, तेरे देवता की क़सम!’ वह उस वक़्त गिर जाएंगे और दुबारा कभी नहीं उठेंगे।”

9

आख़िरी रोया : इसराईल की तबाही

1 मैंने रब को क़ुरबानगाह के पास खड़ा देखा। उसने फ़रमाया, “मक़दिस के सतूनों के बालाई हिस्सों को इतने ज़ोर से मार कि दहलीज़ें लरज़ उठें और उनके टुकड़े हाज़िरीन के सरों पर गिर जाएँ। उनमें से जितने ज़िंदा रहें उन्हें मैं तलवार से मार डालूँगा। एक भी भाग जाने में कामयाब नहीं होगा, एक भी नहीं बचेगा। 2 ख़ाह वह ज़मीन में खोद खोदकर पाताल तक क्यों न पहुँचें तो भी मेरा हाथ उन्हें पकड़कर वहाँ से वापस लाएगा। और ख़ाह वह आसमान तक क्यों न चढ़ जाएँ तो भी मैं उन्हें वहाँ से उतारूँगा। 3 ख़ाह वह करमिल की चोटी पर क्यों न छुप जाएँ तो भी मैं उनका खोज लगाकर उन्हें छीन लूँगा। गो वह समुंदर की तह तक उतरकर मुझसे पोशीदा होने की कोशिश क्यों न करें तो भी बेफ़ायदा होगा, क्योंकि मैं समुंदरी साँप को उन्हें डसने का हुक्म दूँगा। 4 अगर उनके दुश्मन उन्हें भगाकर जिलावतन करें तो मैं तलवार को उन्हें क़त्ल करने का हुक्म दूँगा। मैं ध्यान से उनको तकता रहूँगा, लेकिन बरकत देने के लिए नहीं बल्कि नुक़सान पहुँचाने के लिए।”

5 क़ादिरे-मुतलक़ रब्बुल-अफ़वाज है। जब वह ज़मीन को छू देता है तो वह लरज़ उठती और उसके तमाम बाशिंदे मातम करने लगते हैं। तब जिस तरह मिसर में दरियाए-नील बरसात के मौसम में सैलाब की सूरत इख़्तियार कर लेता है उसी तरह पूरी ज़मीन उठती, फिर दुबारा उतर जाती है।

6 वह आसमान पर अपना बालाखाना तामीर करता और ज़मीन पर अपने तहख़ाने की बुनियाद डालता है। वह समुंदर का पानी बुलाकर रूए-ज़मीन पर उंडेल देता है। उसी का नाम रब है!

तुम दूसरों से बेहतर नहीं

7 रब फ़रमाता है, “ऐ इसराईलियो, यह मत समझना कि मेरे नज़दीक तुम एथोपिया के बाशिंदों से बेहतर हो। बेशक मैं इसराईल को मिसर से निकाल लाया, लेकिन बिलकुल इसी तरह मैं फ़िलिस्तियों को क्रेते + 9:7 क्रेते : इबरानी कफ़तूर। से और अरामियों को क़ीर से निकाल लाया। 8 मैं, रब क़ादिरे-मुतलक़ ध्यान से इसराईल की गुनाहआलूदा बादशाही पर ग़ौर कर रहा हूँ। यक़ीनन मैं उसे रूए-ज़मीन पर से मिटा डालूँगा।”

ताहम रब फ़रमाता है, “मैं याक़ूब के घराने को सरासर तबाह नहीं करूँगा। 9 मेरे हुक्म पर इसराईली क़ौम को तमाम अक़वाम के दरमियान ही यों हिलाया जाएगा जिस तरह अनाज को छलनी में हिला हिलाकर पाक-साफ़ किया जाता है। आख़िर में एक भी पत्थर अनाज में बाक़ी नहीं रहेगा। 10 मेरी क़ौम के तमाम गुनाहगार तलवार की ज़द में आकर मर जाएंगे, गो वह इस वक़्त कहते हैं कि न हम पर आफ़त आएगी, न हम उस की ज़द में आएँगे।

इसराईल के लिए नई उम्मीद

11 उस दिन मैं दाऊद के गिरे हुए घर को नए सिरे से खड़ा करूँगा। मैं उसके रख़नों को बंद और उसके खंडरात को बहाल करूँगा। मैं सब कुछ यों तामीर करूँगा जिस तरह क़दीम ज़माने में था। 12 तब इसराईली अदोम के बचे-खुचे हिस्से और उन तमाम क़ौमों पर क़ब्ज़ा करेंगे जिन पर मेरे नाम का ठप्पा लगा है।” यह रब का फ़रमान है, और वह यह करेगा भी।

13 रब फ़रमाता है, “ऐसे दिन आनेवाले हैं जब फ़सलें बहुत ही ज़्यादा होंगी। फ़सल की कटाई के लिए इतना वक़्त दरकार होगा कि आख़िरकार हल चलानेवाला कटाई करनेवालों के पीछे पीछे खेत को अगली फ़सल के लिए तैयार करता जाएगा। अंगूर की फ़सल भी ऐसी ही होगी। अंगूर की कसरत के बाइस उनसे रस निकालने के लिए इतना वक़्त लगेगा कि आख़िरकार बीज बोनेवाला साथ साथ बीज बोने का काम शुरू करेगा। कसरत के बाइस नई मै पहाड़ों से टपकेगी और तमाम पहाड़ियों से बहेगी।

14 उस वक़्त मैं अपनी क़ौम इसराईल को बहाल करूँगा। तब वह तबाहशुदा शहरों को नए सिरे से तामीर करके उनमें आबाद हो जाएंगे। वह अंगूर के बाग़ लगाकर उनकी मै पिएँगे, दीगर फलों के बाग़ लगाकर उनका फल खाएँगे। 15 मैं उन्हें पनीरी की तरह उनके अपने मुल्क में लगा दूँगा। तब वह आइंदा उस मुल्क से कभी जड़ से नहीं उखाड़े जाएंगे जो मैंने उन्हें अता किया है।” यह रब तेरे ख़ुदा का फ़रमान है।