रोम सहर के मसीही मन्डली के नाम लिखी पवलुस के चिट्ठी
इआ चिट्ठी के परिचय
रोम देस माहीं रहँइ बाले मसीही लोगन के नाम लिखी यीसु मसीह के खास चेला पवलुस के चिट्ठी के इआ उद्देस्य रहा हय, कि रोम देस माहीं जउन मसीही मन्डली रही हय, उहाँ जाँइ के खातिर गइल तइआर करब, जेखर योजना पवलुस बनाइन रहा हय। उनखर इआ योजना रही हय, कि कुछ समय तक ऊँ उहाँ के मसीही लोगन के बीच माहीं रहिके काम करँय, अउर उनखे मदत से स्पेन देस तक जाँय। अउर मसीही बिसुआस के आपन ग्यान अउर मसीही लोगन के जीबनन माहीं जउन बेउहारिक रूप से जरूरी हईं, ऊँ बातन काहीं समझामँइ के खातिर पवलुस इआ चिट्ठी काहीं लिखिन हीं। इआ चिट्ठी माहीं हमहीं पंचन काहीं पवलुस के सँदेस के सगलेन से खास बखान मिलत हय।
रोम देस के मसीही मन्डली के मसीही लोगन काहीं नबस्कार करँय, अउर उनखे खातिर अपने प्राथनन के बारे माहीं बताए के बाद, पवलुस इआ चिट्ठी के खास बात बताबत हें जउन इआ आय: कि “यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन हम पंचे परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बन जइत हएन (रोमि 1:17)”।
पवलुस आँगे खास बातन के बारे माहीं बिस्तार से समझाबत हें। सगले मनई, यहूदी अउर गैरयहूदी दोनव, काहीं परमातिमा के साथ मेल-मिलाप करँइ के जरूरत ही, काहेकि सगले जन एक समान पाप के काबू माहीं हें। यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ के द्वारा मनइन के परमातिमा के साथ मेल-मिलाप होत हय। पुनि पवलुस मसीह के साथ नबा जीबन के बखान करत हें, जउन परमातिमा के साथ इआ नए सम्बन्ध के नतीजा होत हय। बिसुआसी के परमातिमा के साथ मेल-मिलाप होत हय। अउर यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे से पाप के सजा से मुक्ती मिलत ही, अउर परमातिमा से टूट सम्बन्ध पुनि जुड़ जात हय। पाठ 5-8 माहीं पवलुस बिसुआसी के जीबन माहीं परमातिमा के बिधान के उद्देस्य, अउर परमातिमा के आत्मा के सामर्थ के ऊपर घलाय बिचार करत हें। पुनि यीसु मसीह के खास चेला पवलुस इआ प्रस्न से परेसान होत हें, कि सगले मनइन के खातिर परमातिमा के योजना माहीं यहूदी अउर गैरयहूदी दोनव कइसन सही रूप माहीं सामिल होइहँय। ऊँ इआ निरनय माहीं पहुँचत हें, कि यहूदी लोगन के द्वारा यीसु काहीं सोइकार न करब घलाय, परमातिमा के उआ योजना के एकठे हिस्सा आय। जउन सगले मनइन काहीं यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन, परमातिमा के किरपा के सीमा माहीं लइ आमँइ के खातिर बनाई गे ही। अउर उनखर इआ बिसुआस हय, कि यहूदी लोग हमेसा यीसु काहीं इनकार करत, न रइहँय। अन्तिम माहीं पवलुस इआ लिखत हें, कि मसीही जीबन कइसन जिअँइ चाही, खास करके दुसरे मनइन के साथ प्रेम के सम्बन्ध रखिके। ऊँ ईं बिसयन काहीं परमातिमा के सेबा, राज अउर एक दुसरे के बारे माहीं मसीही लोगन के करतब्य, अउर सोच-बिचार के प्रस्नन के रूप माहीं लेत हें। ऊँ इआ चिट्ठी के अन्त निजी सँदेसन अउर परमातिमा के स्तुति के साथ करत हें।
रूप-रेखा :
इआ चिट्ठी के परिचय अउर खास बिसय 1:1-17
मनइन काहीं मुक्ती के जरूरत 1:18—3:20
मुक्ती के खातिर परमातिमा के गइल 3:21—4:25
मसीह के द्वारा नबा जीबन 5:1—8:39
इजराइली लोगन के खातिर परमातिमा के योजना 9:1—11:36
मसीही चाल-चलन 12:1—15:13
उपसंहार अउर निजी नबस्कार 15:14—16:27
1पवलुस के अभिबादन
1हम पवलुस जउन यीसु मसीह के दास आहेन, इआ चिट्ठी काहीं लिख रहेन हय, अउर परमातिमा हमहीं यीसु मसीह के खास चेला होंइ के खातिर बोलाइन हीं, कि जउने हम उनखे खुसी के खबर के प्रचार करी काहेकि परमातिमा हमहीं इहय काम के खातिर नियुक्त किहिन हीं। 2अउर इआ खुसी के खबर के बारे माहीं परमातिमा पहिलेन से अपने सँदेस बतामँइ बालेन के द्वारा पबित्र सास्त्र माहीं, 3अपने लड़िका अउर हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के बारे माहीं वादा किहिन रहा हय; जउन मनई के रूप माहीं त राजा दाऊद के कुल से पइदा भें। 4अउर पबित्रता के आत्मा के द्वारा मरेन म से जिआए जाँइ के कारन, ऊँ सामर्थ के साथ परमातिमा के लड़िका ठहरे हँय, ईंन यीसु मसीह हमार पंचन के प्रभू आहीं। 5अउर इनहिन के द्वारा हमहीं किरपा अउर यीसु के खास चेला होंइ के अधिकार मिला हय; कि जउने उनखे नाम के ऊपर गैरयहूदी लोग बिसुआस कइके उनखे बातन काहीं मानँय। 6उनहिन म से तुहूँ पंचे घलाय यीसु मसीह के जन होंय के खातिर चुने गया हय।
7अउर इआ चिट्ठी तोंहईं पंचन काहीं मिलय, जउन रोम देस माहीं परमातिमा के पियार हया, अउर परमातिमा के पबित्र जन होंइ के खातिर चुने गया हय, हमरे पंचन के पिता परमातिमा अउर प्रभू यीसु मसीह के तरफ से तोंहईं पंचन काहीं किरपा अउर सान्ती मिलत रहय।
रोम देस के मसीही लोगन से मिलँइ के पवलुस के इच्छा
8सबसे पहिले हम तोंहरे सगले जनेन के खातिर यीसु मसीह के द्वारा अपने परमातिमा काहीं धन्यबाद देइत हएन, काहेकि तोंहरे बिसुआस के चरचा हरेक जघन माहीं होइ रही हय। 9अउर परमातिमा के सेबा हम अपने पूरे मन से उनखे लड़िका के खुसी के खबर काहीं सुनामँइ के बारे माहीं करित हएन, अउर उँइन हमार गबाह हें; कि हम तोंहईं पंचन काहीं लगीतार याद करत रहित हएन। 10अउर हम हमेसा अपने प्राथनन माहीं बिनती करत रहित हएन, कि परमातिमा के मरजी से तोंहरे लघे आमँइ के हमार यात्रा कउनव मेर से सफल होय। 11काहेकि तोंहसे मिलँइ के हमार बड़ी लालसा ही, कि हम तोंहईं कउनव आत्मिक आसीस देई, जउने तूँ पंचे बिसुआस माहीं मजबूत होइजा। 12अरथात इआ, कि जब हम तोंहरे बीच माहीं होब, त एक दुसरे के बिसुआस से हम पंचे आपस माहीं उत्साहित होब। 13अउर हे भाई-बहिनिव, हम इआ चाहित हएन, कि तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि हम तोंहरे लघे कइअक बेरकी आमँइ चाहेन हय, कि जइसन हमहीं आत्मिक फर दुसरे गैरयहूदी लोगन माहीं मिला हय, उहयमेर तोंहरेव पंचन माहीं पाय सकी, पय अबय तक एक न एक बाधा अउतय रहिगे। 14हम जउन मनई बिकास माहीं आँगे हँय, अउर जउन मनई बिकास माहीं पीछे हँय, दोनव के अउर बुद्धिमानन अउर निरबुद्धियन के घलाय रिनिहा हएन। 15एहिन से हम तोंहईं पंचन काहीं घलाय जेतने रोम देस माहीं रहते हया, खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर उत्साहित हएन।
खुसी के खबर के सामर्थ
16काहेकि हम खुसी के खबर से नहीं लजई, एसे कि उआ हरेक बिसुआस करँइ बालेन के खातिर, पहिले त यहूदी लोगन के खातिर, ओखे बाद गैरयहूदी लोगन काहीं मुक्ती पामँइ के खातिर परमातिमा के सामर्थ आय। 17काहेकि खुसी के खबर माहीं इआ बताबा ग हय, कि परमातिमा मनई काहीं अपने नजर माहीं निरदोस कइसा बनाबत हें, इआ सुरुआत से अन्त तक बिसुआस माहीं टिका हय; जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि “परमातिमा के नजर माहीं निरदोस मनई बिसुआस के कारन जिअत रही।”
मनइन के पाप
18उन सगलेन काहीं जउन सत्य काहीं अधरम से दबाइके रक्खत हें, अउर बुरे कामन काहीं करत हें, अउर हरेकमेर के बुराई करत हें, स्वरग माहीं रहँइ बाले परमातिमा सजा देइहँय। 19अउर इआमेर एसे होइ रहा हय, काहेकि परमातिमा के बारे माहीं ऊँ पंचे निकहा से जानत हें, काहेकि परमातिमा अपने बारे माहीं खुदय उनहीं पंचन काहीं बताइन हीं। 20जब से संसार के रचना भे ही, परमातिमा के न देखाई देंइ बाली बिसेसता अरथात अनन्त सक्ती, अउर परमातिमा के दिब्य गुन साफ-साफ देखाई देत हें, काहेकि ऊँ चीजन से ऊँ पूरी तरह से जाने जाय सकत हें, जउने काहीं परमातिमा रचिन हीं। एसे अब मनइन के लघे कउनव बहाना नहिं आय। 21जबकि ऊँ पंचे परमातिमा काहीं जानत रहे हँय, तऊ ऊँ पंचे परमातिमा के रूप माहीं, उनहीं मान-सम्मान अउर धन्यबाद नहीं दिहिन, बलकिन बेफालतू के सोच-बिचार करँइ लागें, एसे उनखर निरबुद्धी मन कठोर होइके बुरे सोच-बिचारन से भरिगा। 22ऊँ पंचे अपने-आप काहीं बड़ा बुद्धिमान समझत हें, पय मूरुख बनिगें। 23अउर कबहूँ न नास होंइ बाले परमातिमा के महिमा काहीं, नास होंइ बाले मनइन, अउर पंछिन, अउर पसुअन, अउर रेंगँइ बाले जीव-जन्तुअन कि नाईं मूरत बनाइके, उनहीं मूरतिन माहीं बदल डारिन।
24एसे परमातिमा उनहीं पंचन काहीं उनखे मन के बुरी इच्छन के मुताबिक असुद्ध होंइ के खातिर छोंड़ दिहिन, कि ऊँ पंचे ब्यभिचार माहीं परिके आपस माहीं अपने देंहन के अपमान करँय। 25काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा के सच्चाई के ऊपर बिसुआस करँइ से इनकार कइके, लबरी माहीं बिसुआस करँइ लागें, अउर उनखे बनाई चीजन के अराधना अउर सेबा करँइ लागें, पय उनखर नहीं किहिन, जउन संसार काहीं बनामँइ बाले परमातिमा आहीं, अउर जउन हमेसा धन्य हें। आमीन!
26एसे परमातिमा उनहीं सरमिन्दा करँइ बाली नीच अभिलासन के काबू माहीं कइ दिहिन; इहाँ तक कि उनखर मेहेरिअव आपन सोभाबिक सम्बन्ध बनाउब छोंड़िके, ओखे बिरुद्ध असोभाबिक सम्बन्ध बनामँइ लागीं। 27इहइमेर मंसेरुअव घलाय, अपने मेहेरिअन से सम्बन्ध बनाउब छोंड़िके आपस माहीं कामातुर होइके रहँइ लागें, अउर मंसेरुअय-मंसेरुआ एक दुसरे से नजायज सम्बन्ध बनाइके अपने बुरे काम के ठीक सजा पाइन। 28काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा काहीं पहिचानँय से इनकार कइ दिहिन, एसे परमातिमव उनहीं पंचन काहीं उनखे बुरे मन के मुताबिक छोंड़ दिहिन; कि जउने ऊँ पंचे अनुचित काम करँय। 29एसे ऊँ पंचे हरेकमेर के अधरम करँइ बाले, अउर दुस्टता करँइ बाले, अउर लालच करँइ बाले बनिगें, अउर इरसा से भरिगें; अउर डाह करँइ बाले, अउर कतल करँइ बाले, अउर झगड़ा करँइ बाले, अउर छल-कपट करँइ बाले बनिगें अउर इरसा से भरिगें, अउर चुगली करँइ बाले, 30अउर दुसरे के बदनामी करँइ बाले, अउर परमातिमा से नफरत करँइ बाले, अउर दुसरेन के मान-सम्मान न करँइ बाले, अउर घमन्डी, अउर आपन बड़ाई करँइ बाले, बुरी-बुरी बातन काहीं बनाइके बोलँइ बाले, अउर महतारी-बाप के कहा-बतान न मानँइ बाले, 31बुद्धिहीन, अउर बिसुआस घात करँइ बाले, प्रेम न करँइ बाले अउर निरदयी होइगे हँय। 32ऊँ पंचे परमातिमा के न्यायपूर्न नेम काहीं निकहा से जानत हें, कि इआमेर के कामन काहीं करँइ बाले मउत के सजा के काबिल हें, तऊ ऊँ पंचे इआमेर के कामन काहीं करत हें, अउर इहइमेर के कामन काहीं करँइ बालेन से खुसी घलाय होथें।
2परमातिमा के निस्पच्छ न्याय
1हे न्याय करँइ बाले मनई तूँ चाह कोऊ होइहा, तोंहरे लघे कउनव बहाना नहिं आय, काहेकि जउने बातन के खातिर दुसरे काहीं दोसी ठहरउते हया, अउर खुदय उहय काम तूँ करते हया, त अपने-आप काहीं घलाय दोसी ठहरउते हया। 2अउर हम पंचे इआ जानित हएन, कि जउन मनई अइसन काम करत हें, उनहीं पंचन काहीं परमातिमा के तरफ से सत्य के मुताबिक सजा मिलत ही। 3अउर हे साथी, तूँ त केबल मनई आह्या, अउर तूँ जउन इआमेर के काम करँइ बालेन काहीं दोसी ठहरउते हया, त का तूँ सोचते हया, कि हम परमातिमा से मिलय बाले सजा से बँचि जाब? 4का तूँ परमातिमा के असीमित दया अउर सहनसीलता अउर धीरज काहीं तुच्छ जनते हया? तोंहईं इआ जानँइ चाही, कि परमातिमा के दया तोंहईं पस्चाताप करब सिखाबत ही। 5पय तूँ अपने हठी अउर कबहूँ न पचिताँय बाले मन के कारन, परमातिमा के क्रोधपूर्न सजा काहीं अपने खातिर उआ दिन के खातिर एकट्ठा कइ रहे हया, जब परमातिमा सच्चा न्याय करिहँय। 6“परमातिमा हरेक जन काहीं उनखे कामन के मुताबिक बदला देइहँय2:6 नीति 24:12।” 7जउन मनई धीरज के साथ लगीतार निकहा काम करत, परमातिमा के तरफ से बड़ाई अउर मान- सम्मान पामँइ अउर परमातिमा के साथ हमेसा रहँइ खातिर खोज माहीं लगे रहत हें, उनहीं परमातिमा अनन्त जीबन देइहँय। 8पय जउन मनई स्वार्थी हें, अउर सत्य के बिरोध करत अधरम माहीं चलत हें, उनहीं परमातिमा से कठोर सजा मिली। 9अउर हरेक मनइन के ऊपर दुख-मुसीबत अइहँय जउन बुरा काम करत हें, पहिले यहूदी लोगन के ऊपर ओखे बाद गैरयहूदी लोगन के ऊपर। 10अउर जे कोऊ भलाई करत हें, उनहीं बड़ाई, मान- सम्मान अउर सान्ती मिली, पहिले यहूदी लोगन काहीं, ओखे बाद गैरयहूदी लोगन काहीं। 11काहेकि परमातिमा कोहू के साथ पच्छपात नहीं करँय।
12एसे कि जेतने मनई बिना परमातिमा के बिधान पाए पाप किहिन हीं, ऊँ पंचे बिना बिधान के नासव होइहँय, पय जेतने मनई बिधान काहीं पाइके पाप किहिन हीं, उनखर न्याय परमातिमा, बिधान के मुताबिक करिहँय। 13(काहेकि जेतने मनई बिधान के बातन काहीं सुनत भर हें, अउर मानँइ नहीं, ऊँ परमातिमा के नजर माहीं निरदोस न ठहरिहँय, बलकिन जे कोऊ बिधान के बातन काहीं सुनिके, उनखे मुताबिक चलत हें, उँइन परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए जइहँय। 14एसे कि गैरयहूदी लोगन के लघे मूसा के द्वारा दीन बिधान नहिं आय, तऊ अपने सुभाबय से मूसा के बिधान के बातन कि नाईं चलत हें, त भले उनखे लघे मूसा के द्वारा दीन बिधान नहिं आय, तऊ ऊँ पंचे अपने खातिर खुदय बिधान हें। 15ऊँ पंचे बिधान के बातन काहीं अपने हिरदँय माहीं रक्खे, अपने कामन से देखाबत हें, अउर उनखर मन घलाय एखर गबाही देत हय, अउर उनखर सोच-बिचार उनहीं बताबत हय, कि इआ काम सही हय कि गलत।) 16इआ सब उआ दिना प्रगट कीन जई, जब परमातिमा, हमरे सुनाए खुसी के खबर के मुताबिक, यीसु मसीह के द्वारा मनइन के गुप्त बिचारन के न्याय करिहँय।
यहूदी लोग अउर मूसा के बिधान
17पय अगर तूँ अपने-आप काहीं यहूदी कहते हया, अउर मूसा के बिधान माहीं तोंहार बिसुआस हय, अउर अपने अउर परमातिमा के सम्बन्ध के बारे माहीं तोंहईं घमन्ड हय। 18अउर तूँ परमातिमा के मरजी काहीं जनते हया, अउर निकही-निकही बातन काहीं अपनउते हया, काहेकि इआ सब मूसा के बिधान से तोंहईं सिखाबा ग हय, 19अउर अगर तूँ अपने-आप काहीं जउन मनई परमातिमा काहीं नहीं जानँय, उनखर अँगुआ मनते हया, अउर जउन मनई परमातिमा काहीं न जानिके अँधिआर माहीं भटक रहे हँय, उनखे खातिर तूँ उँजिआर देंइ बाला समझते हया। 20अउर निरबुद्धियन काहीं सिखामँइ बाला, अउर जउन मनई परमातिमा के बातन माहीं बच्चन कि नाईं अनजान हें, उनहीं उपदेस देंइ बाला मनते हया, अउर इआ समझते हया कि ग्यान, अउर सत्य के नमूना, जउन मूसा के बिधान माहीं हय, हमहिन काहीं मिला हय। 21त तूँ जउने बातन काहीं दुसरेन काहीं सिखउते हया, त उनहीं खुद काहे नहीं सिखते आह्या? तूँ जउन दुसरेन काहीं चोरी न करँइ के उपदेस देते हया, त खुद चोरी काहे करते हया? 22तूँ जउन दुसरेन काहीं बरजते हया, कि “ब्यभिचार न करा।” अउर खुदय ब्यभिचार काहे करते हया? अउर तूँ जउन मूरतिन से नफरत त करते हया, पय खुदय मन्दिर के धन काहीं, काहे लुटते हया? 23तूँ जउन घमन्ड करते हया, कि मूसा के बिधान हमरे लघे हय, त मूसा के बिधान के बातन के उलंघन कइके, परमातिमा के अपमान काहे करते हया? 24“काहेकि तोंहरे पंचन के कारन गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं परमातिमा के नाम के बुराई होत ही2:24 यसा 52:5?” जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा घलाय हय।
25अउर खतना कराए से फायदा त हय, पय जब तूँ मूसा के बिधान के बातन के मुताबिक चला, पय अगर तूँ मूसा के बिधान के बातन के उलंघन करिहा, त तोंहार खतना करबाउब, बिना खतना कराए कि नाईं ठहरी। 26अगर कउनव मनई के खतना न भ होय, अउर उआ मूसा के बिधान के बातन काहीं मानत होय, त ओखर भले खतना न भ होय, तऊ खतना कराए के बराबर माना जई। 27अउर जउने मनई के देंह के खतना नहीं भ आय, अउर उआ बिधान के बातन काहीं निकहा से मानत हय, त उआ मनई तोंहईं जउन बिधान काहीं लए हया, अउर खतनव कराए हया, पय बिधान के बातन के उलंघन करते हया, त दोसी ठहराई। 28जउन मनई देखाबा करत हय, कि हम यहूदी आहेन, उआ वास्तव माहीं यहूदी न होय, अउर देंह के खतना करबाउब, वास्तव माहीं खतना न होय। 29पय यहूदी उहय कहाई, जउन भीतर से अरथात मन माहीं यहूदी हय, अउर सच्चा खतना उआ आय, जउन पबित्र आत्मा के द्वारा मन के होत हय, उआ नहीं कि जउन मूसा के बिधान माहीं लिखे के मुताबिक हय, इआमेर करँइ बाले मनई के बड़ाई, मनइन के तरफ से नहीं, बलकिन परमातिमा के तरफ से होत ही।
3परमातिमा के बफादारी
1एसे यहूदी होए से का फायदा हय, इआ खतना कराए से का फायदा हय? 2अगर देखा जाय त यहूदी होंइ के फायदा त हय, काहेकि सबसे पहिले त इआ हय, कि उनहीं पंचन काहीं परमातिमा के बचन सँउपा ग। 3पय अगर उनमा से कुछ जने बिसुआस घात करँइ बाले निकरिगें, त का भा? उनखे बिसुआस घात3:3 यहूदी लोगन म से कुछ जने मूसा के जउन बिधान उनहीं परमातिमा से मिला रहा हय, ओही न मानिके परमातिमा के नजर माहीं बिसुआस घात किहिन। करँइ के कारन परमातिमा के सच्चाई का झूँठ होइ सकत ही? 4बेलकुल नहीं, बलकिन सगले मनई झूँठ ठहरिहँय, अउर परमातिमा सच्चे ठहरिहँय, जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखव हय,
“जउने तूँ अपने हरेक बातन माहीं धरमी ठहरा, अउर न्याय करत समय तूँ बिजय पाबा।”
5एसे अगर हमार पंचन के अधारमिकता परमातिमा के धारमिकता सिद्ध करत ही, त हम पंचे का कही? का इआ कि परमातिमा जउन हमहीं पंचन काहीं सजा देत हें, त का ऊँ अन्याय करत हें? (इआ त हम एकठे साधारन मनई कि नाईं कहित हएन।) 6बेलकुल नहीं, नहीं त परमातिमा संसार के मनइन के न्याय कइसन करिहँय? 7पय तूँ पंचे कहि सकते हया, “जब हमरे लबरी बोलँइ के कारन परमातिमा के सच्चाई अउर जादा प्रगट होत ही, अउर एसे उनखर बड़ाइन होत ही, त पुनि हम काहे पापी कि नाईं सजा पामँइ के काबिल ठहराए जइत हएन? 8त पुनि हम पंचे काहे न कही, कि ‘आबा! हम पंचे बुरे काम करी जउने भलाई प्रगट होय’।” जइसन कि हमरे पंचन के बारे माहीं बुराई कइके कुछ मनई अरोप लगाबत हें, कि हम पंचे अइसन कहित हएन, अइसन बोलँइ बाले मनई दोसी ठहराए जाँइ के काबिल हें, काहेकि उँइ सगले दोसी हें।
कउनव मनई परमातिमा के नजर माहीं निरदोस नहिं आहीं
9त पुनि हम पंचे का कही? का हम यहूदी लोग गैरयहूदी लोगन से कउनव मेर से निकहे हएन? नहीं, बेलकुल नहीं, काहेकि हम पंचे इआ साबित कइ चुकेन हय, कि चाह यहूदी होंय, चाह गैरयहूदी सगले जन पाप के कब्जे माहीं हें। 10जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय; कि
“परमातिमा के नजर माहीं कोऊ निरदोस नहिं आय, एक जनेव नहिं आय!
11अउर न कोऊ समझदारय आय, अउर न कोऊ परमातिमा काहीं ढूँढ़ँइन बाला आय,
12सगले मनई परमातिमा के बताए गइल से भटकिगें हँय, अउर सगले मनई परमातिमा के नजर माहीं निकम्मा बनिगें हँय, कोऊ भलाई करँइ बाला नहिं आय, एक जनेव नहिं आय3:12 भज 14:1-3।”
13उनखे मुँहे से हमेसा बुराइन निकरत ही, जइसन खुली कब्र से दुर्गन्ध आबत ही, उनखे मुँह से हमेसा छल के बात निकरत ही, अउर उनखे मुँहे से साँप के बिस कि नाईं खतरनाक बातँय निकरती हईं।
14अउर उनखे मुँहे से हमेसा सराप अउर करुअई के बातँय निकरती हईं।
15अउर ऊँ पंचे हमेसा कतल करँइ के खातिर तइआर रहत हें।
16ऊँ पंचे जहाँ जात हें नास करत हें, अउर दुख देत हें।
17ऊँ पंचे सान्ती के गइल के बारे माहीं जनतय नहिं आहीं।
18उनखे जीबन माहीं परमातिमा के डेर हइअय नहिं आय।
19अउर हम पंचे इआ जानित हएन, कि जउन कुछू मूसा के बिधान माहीं कहा ग हय, उआ उनखे खातिर आय जउन मूसा के बिधान काहीं मानत हें, कि जउने हरेक जनेन के मुँह बंद कीन जाय, अउर सगले संसार के मनई परमातिमा से सजा पामँइ के काबिल ठहरँय। 20काहेकि मूसा के बिधान के पालन किहे से कउनव मनई परमातिमा के नजर माहीं निरदोस न ठहरी, एसे कि मूसा के बिधान के द्वारा केबल पाप के पहिचान होत ही।
बिसुआस के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराबा जाब
21पय अब सगले मनइन काहीं इआ बताबा ग हय, कि परमातिमा बिना मूसा के बिधान के उनहीं कइसन अपने नजर माहीं निरदोस बनाबत हें, जेखे बारे माहीं मूसा के बिधान माहीं लिखा हय, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले घलाय गबाही दिहिन हीं। 22जउन मनई यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करत हें, उनहीं परमातिमा अपने नजर माहीं निरदोस बनाबत हें, एमाहीं कुछू भेदभाव नहिं आय, इआ मुक्ती उन सगलेन के खातिर आय, जउन यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करत हें। 23काहेकि संसार के सगले मनई पाप किहिन हीं, अउर परमातिमा के महिमा से बंचित हें। 24पय परमातिमा के किरपा से जउन मुक्ती यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे से मिलत ही, ओखे द्वारा हम पंचे सेंत-मेंत माहीं, परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए जइत हएन। 25परमातिमा यीसु मसीह काहीं, उनखे ऊपर बिसुआस किहे के द्वारा पापन से मुक्ती देबामँइ के खातिर मनइन काहीं दिहिन हीं। परमातिमा इआ काम यीसु मसीह के बलिदान के रूप माहीं किहिन हीं। अइसा इआ देखामँइ के खातिर किहिन हीं कि परमातिमा सहनसील हें, काहेकि ऊँ पहिले मनइन काहीं उनखे पापन के सजा दिहे बिना छोंड़ि दिहिन तय। 26अउर परमातिमा के न्याय के इआ काम आजव के समय के खातिर घलाय हय, जउने ऊँ खुदय न्यायी कहामँय, काहेकि अबहिनव जे कोऊ यीसु के ऊपर बिसुआस करत हें, उनहूँ पंचन काहीं ऊँ निरदोस ठहराबत हें। 27त हम पंचे घमन्ड कइसा कइ सकित हएन? काहेकि घमन्ड करँइ के हमरे पंचन के जीबन माहीं कउनव जघय नहिं आय? काहेकि हम पंचे कउनव मूसा के बिधान के पालन किहे से नहीं, अउर न कउनव कामन के कारन, बलकिन बिसुआस के कारन परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहरेन हँय। 28एसे हम पंचे इआ कहि सकित हएन, कि कउनव मनई मूसा के बिधान के पालन किहे से नहीं, बलकिन बिसुआसय के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बन सकत हय। 29त बताबा का परमातिमा यहूदी लोगन के भर आहीं? काहे गैरयहूदी लोगन के परमातिमा न होंहीं? हाँ हम सही कहित हएन, कि गैरयहूदी लोगन के घलाय परमातिमा आहीं। 30काहेकि सगले मनइन के एकयठे परमातिमा हें, जउन खतना करामँइ बाले मनइन काहीं बिसुआस से अउर खतना न करामँइ बाले मनइन काहीं घलाय उहय बिसुआस के द्वारा परमातिमा अपने नजर माहीं निरदोस ठहरइहँय। 31त का हम पंचे बिसुआस के द्वारा मूसा के बिधान काहीं बेकार ठहराइत हएन? नहीं, बेलकुल नहीं; बलकिन मूसा के बिधान काहीं अउर मजबूत बनाइत हएन।
4अब्राहम के बिसुआस के बखान
1एसे अब हम पंचे अपने पूरबज अब्राहम के बारे माहीं का कही? 2काहेकि अगर अब्राहम अपने कामन के कारन परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहरतें, त इआ उनखे खातिर घमन्ड करँइ के बात होत, पय परमातिमा के आँगे ऊँ वास्तव माहीं घमन्ड नहीं कइ सकँय। 3पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि “अब्राहम परमातिमा के ऊपर बिसुआस किहिन रहा हय, एहिन से ऊँ परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए गे रहे हँय।” 4काहेकि काम करँइ बाले मनई काहीं मजूरी देब दान न होय, बलकिन उआ त ओखर हक्क आय। 5पय जउन मनई काम नहीं करय, बलकिन पापिन काहीं निरदोस बनामँइ बाले परमातिमा के ऊपर बिसुआस करत हय, त ओखर उआ बिसुआसय ओखे खातिर परमातिमा के नजर माहीं निरदोस होंइ के कारन बन जात हय। 6जउने मनई काहीं परमातिमा बिना काम किहे निरदोस ठहराबत हें, उआ मनई काहीं राजा दाऊद घलाय धन्य कहत हें। 7अउर ऊँ कहत हें, कि
ऊँ मनई धन्य हें, जिनखर अधरम माफ होइगे हँय, अउर जिनखर पाप मूँदे गे हँय।
8अउर जउने मनई काहीं प्रभू कबहूँ पापी नहीं ठहरामँइ उआ मनई धन्य हय।
9त का इआ धन्य कहब केबल उनहिन के खातिर भर आय, जिनखर खतना होइ चुका हय, इआ कि उनहूँ के खातिर आय जिनखर खतना नहीं भ आय। (हाँ इआ उनहूँ के खातिर आय जिनखर खतना नहीं भ आय) काहेकि हम पंचे इआ कहित हएन, कि “अब्राहम बिसुआसय के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए गें।” 10त इआ कबय भ? जब उनखर खतना होइ चुका रहा हय, तब इआ कि जब उनखर खतना नहीं भ रहा आय तब, नहीं उनखर खतना होए के बाद नहीं, बलकिन खतना होंइ के पहिले भ रहा हय। 11अब्राहम बिना खतना कराए बिसुआस के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए गें। अउर उनखे देंह माहीं एकठे निसानी4:11 उत्प 17:11 के रूप माहीं खतना के चिन्ह लगाबा ग, इआमेर से अब्राहम ऊँ सगलेन के घलाय पिता बनिगें, जउन बिना खतना कराए परमातिमा के ऊपर बिसुआस करत हें, जउने ऊँ पंचे घलाय बिसुआस के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए जाँय। 12अउर ऊँ उनहूँ पंचन के घलाय कुल पिता आहीं, जिनखर खतना भ हय, जउन केबल खतना भर नहीं कराए आहीं, बलकिन हमरे पंचन के कुल पिता अब्राहम के बिसुआस के जउने काहीं, ऊँ बिना खतना कराए किहिन रहा हय, अनुसरन करत हें।
बिसुआस के द्वारा परमातिमा के वादा के मिलब
13अउर अब्राहम, इआ कि उनखे बंसन काहीं इआ वादा, कि ऊँ पंचे संसार के बारिसदार होइहँय, मूसा के बिधान के पालन किहे से नहीं मिला रहा आय, बलकिन उआ बिसुआस के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस होंइ से मिला रहा हय। 14अगर जे कोऊ मूसा के बिधान काहीं पालन करत हें, उँइन पंचे भर संसार के बारिसदार आहीं, त बिसुआस के कउनव मतलब न रहत, अउर वादा घलाय बेकार ठहरत। 15जब मनई मूसा के बिधान के पालन नहीं करँइ, त परमातिमा क्रोधित होइके उनहीं सजा देत हें, पय जहाँ मूसा के बिधान हइअय नहिं आय, त उहाँ मूसा के बिधान के उलंघन होबय न करी।
16एसे इआ साबित होत हय, कि मनई परमातिमा के वादा केबल बिसुआस से पाबत हें, अउर इआ उनखे किरपा से सेंत-मेंत माहीं मिलत हय। इआमेर से परमातिमा के वादा अब्राहम के सगले सन्तानन के खातिर निस्चित हय, न केबल उनखे खातिर जउन मूसा के बिधान के पालन करत हें, बलकिन उनहूँ पंचन के खातिर घलाय आय, जउन अब्राहम कि नाईं बिसुआस रक्खत हें। अउर ईंन अब्राहम हमार पंचन के कुल पिता आहीं। 17जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “हम तोंहईं खुब जातिअन के आत्मिक पिता ठहराएन हय”, अउर परमातिमा के नजर माहीं अब्राहम हमार पंचन के कुल पिता आहीं, अउर जउने परमातिमा के ऊपर अब्राहम के बिसुआस हय, ऊँ मरेन मनइन काहीं जिआबत हें, जउन बातँय हइअय नहिं आहीं, उनहूँ के नाम अइसन लेत हें, कि मानो ऊँ अबहिनव हईं। 18अउर अब्राहम खुब निरासा माहीं घलाय, आसा कए परमातिमा के ऊपर बिसुआस किहिन, अउर जउन बचन ऊँ कहिन तय, कि “तोंहार बंस अइसन होई कि तूँ खुब जातिअन के आत्मिक पिता कहइहा।” 19अउर अब्राहम जउन सव बरिस के होइगें तय, अउर अपने देंह के निबल अबस्था माही घलाय, अउर अपने मेहेरिआ सारा जउन लड़िका-बच्चा पइदा नहिं कइ सकत रही आँय, उनहूँ के हाल जाने के बादव आपन बिसुआस कमजोर नहीं किहिन। 20अउर अपने बिसुआस माहीं बने रहिगें, अउर परमातिमा के दीन वादा के ऊपर संका नहीं किहिन, बलकिन बिसुआस माहीं अऊ मजबूत होइके परमातिमा के बड़ाई किहिन। 21अउर उनहीं पूर भरोसा रहा हय, कि परमातिमा जउन वादा किहिन हीं, ऊँ ओही पूर करँइ के खातिर पूरी तरह से समरथी हें। 22एसे अब्राहम इआ बिसुआस के कारन परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए गें। 23अउर पबित्र सास्त्र माहीं लिखा इआ बचन, कि “बिसुआस के द्वारा ऊँ परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए गें”, न केबल उनहिन के खातिर आय, 24बलकिन हमरे पंचन के खातिर घलाय आय, जउन परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए जइत हएन, अरथात हमरे पंचन के खातिर जउन उनखे ऊपर बिसुआस करित हएन, उँइन हमरे पंचन के प्रभू यीसु काहीं मरेन म से जिआइन रहा हय। 25उँइन यीसु हमरे पंचन के अपराधन के खातिर मार डारँइ के खातिर पकड़बाए गें, अउर हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनामँइ के खातिर मरेन म से पुनि जिआए गें।
5परमातिमा से मेल-मिलाप
1काहेकि हम पंचे, बिसुआस किहे के कारन परमातिमा के खातिर उनखे नजर माहीं निरदोस होइ गएन हँय, एसे हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा हमार पंचन के परमातिमा से मेल-मिलाप होइगा हय। 2अउर उँइन यीसु मसीह के द्वारा बिसुआस के कारन उआ किरपा माही हम पंचे बने हएन, अउर उनखे लघे तक हमार पंचन के पहुँच होइगे ही, अउर परमातिमा के जउन महिमा हमहीं पंचन काहीं मिलँइ के पूर आसा ही, ओमाहीं आनन्द मनाइत हएन। 3केबल एतनय भर नहीं, बलकिन हमहीं पंचन काहीं दुख-मुसीबत माहीं घलाय आनन्द मनामँइ चाही, इआ जानिके कि दुख-मुसीबत से धीरज पइदा होत हय। 4अउर धीरज धरे से निकहा चरित्र पइदा होत हय, अउर निकहा चरित्र से आसा पइदा होत ही। 5अउर उआ आसा हमहीं पंचन काहीं निरास नहीं होंय देय, काहेकि जउन पबित्र आत्मा हमहीं पंचन काहीं दीन ग हय, उहय पबित्र आत्मा के द्वारा परमातिमा के प्रेम हमरे पंचन के हिरदँय माहीं बहुतायत से डारा ग हय। 6काहेकि जब हम पंचे मुक्ती पामँइ माहीं असमर्थ रहेन हय, अउर परमातिमा के हुकुमन काहीं नहीं मानत रहे आहेन, तऊ हमरे पंचन के खातिर मसीह उचित समय म खुद काहीं बलिदान किहिन। 7अउर परमातिमा के बिधान काहीं निकहा से पालन करँइ बाले मनई के खातिर कोऊ मरय, इआ त बड़ा मुसकिल हय, पय होइ सकत हय, कि कोऊ भले मनई के खातिर मरऊँ काहीं तइआर होइ जाय। 8पय परमातिमा हमरे पंचन के ऊपर अपने प्रेम के भलाई इआमेर से देखाइन, कि जब हम पंचे पापी रहेन हय, तऊ हमरे पंचन के खातिर मसीह आपन जान दइ दिहिन। 9एसे अब हम पंचे उनखे खून के कारन परमातिमा के नजर माहीं निरदोस होइ गएन हँय, त यीसु मसीह के द्वारा परमातिमा के क्रोधपूर्न सजा से जरूर बचाए जाब। 10काहेकि जब हम पंचे परमातिमा के बिरोध माही काम कइके उनखर बइरी रहेन हय, तब उनखर लड़िका यीसु मसीह अपने मउत के द्वारा अपने पिता परमातिमा के साथ हमार पंचन के मेल-मिलाप कराय दिहिन हीं, पुनि जब हमार पंचन के मेल-मिलाप होइगा हय, त उनखे जीबन के द्वारा हम पंचे जरूर मुक्ती पाउब। 11अउर केबल एतनय भर नहीं, बलकिन जउन हमार पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा परमातिमा से मेल-मिलाप होइगा हय, एखे बारे माहीं हम पंचे आनन्द घलाय मनाइत हएन।
आदम के द्वारा मउत अउर मसीह के द्वारा अनन्त जीबन
12एसे जइसन एकठे मनई अरथात आदम के द्वारा संसार माही पाप आइगा, अउर पाप के कारन मउत आइगे, अउर इआमेर से मउत सगले मनइन माहीं फइलगे, काहेकि सगले मनई पाप किहिन हीं। 13काहेकि संसार माहीं मूसा के बिधान के आमँइ से पहिले, सगले संसार माहीं पाप रहा हय, पय जहाँ मूसा के बिधान नहीं रहय, त उहाँ कोहू के पाप नहीं गिना जाय। 14पय आदम से लइके मूसा नबी के समय तक, मउत ऊँ मनइन के ऊपर घलाय राज करत रहिगे, जउन आदम कि नाईं परमातिमा के हुकुम उलंघन करँइ के पाप नहीं किहिन रहा आय, अउर आदम त आमँइ बाले मुक्तीदाता के प्रतीक रहे हँय।
15पय जइसन अपराध के दसा ही, उआमेर किरपा के बरदान के नहिं आय, काहेकि जब एकठे मनई के अपराध के कारन, खुब मनइन के मउत होइगे, त परमातिमा के किरपा अउर उनखर जउन दान हय, एकठे मनई के अरथात यीसु मसीह के किरपा के द्वारा सगले मनइन काहीं बहुतायत से मिला हय। 16अउर जइसन एकठे मनई के पाप किहे के परिनाम भ, उआमेर दान के दसा नहिं आय, काहेकि एकयठे मनई के कारन सजा देंइ के हुकुम के फँइसला भ, पय खुब अपराधन के कारन अइसन बरदान पइदा भ, कि मनई परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहरँय। 17काहेकि जब एकठे मनई के अपराध के कारन मउत राज किहिस, त जउन मनई किरपा अउर परमातिमा के नजर माहीं निरदोस होंइ के बरदान बहुतायत से पाबत हें, ऊँ पंचे एकयठे मनई अरथात यीसु मसीह के द्वारा जरूर अनन्त जीबन माहीं राज करिहँय।
18एसे जइसन एकठे अपराध के कारन सगले मनइन काहीं दोसी ठहराबा ग, उहयमेर यीसु मसीह परमातिमा के हुकुम मानिके, हमरे पंचन के खातिर बलिदान भें, अउर ओहिन के द्वारा सगले मनई अनन्त जीबन पामँइ के खातिर, परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराए जात हें। 19जइसन एकठे मनई के हुकुम न मानँइ के कारन खुब मनई पापी ठहरें, उहयमेर एकठे मनई के हुकुम मानँइ के कारन खुब मनई परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहरिहँय। 20पय मूसा के बिधान बीच माहीं आइगा, कि खुब अपराध होंय, पय जहाँ पाप खुब भ, उहाँ परमातिमा के किरपा ओहू से घलाय जादा भय। 21अउर जइसन मउत के द्वारा पाप मनइन के ऊपर राज किहिस, ठीक उहयमेर परमातिमा के किरपा घलाय, हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा अनन्त जीबन के खातिर, मनइन काहीं परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहराबत राज करय।
6पाप के खातिर मरब अउर मसीह के खातिर जिअब
1त पुनि हम पंचे का कही? का हम पंचे अपने जीबन के द्वारा हमेसा पाप करतय रही, कि जउने परमातिमा के किरपा हमरे पंचन के ऊपर खुब होय? 2नहीं, बेलकुल नहीं, काहेकि जब हम पंचे पाप के सम्बन्ध से पूरी तरह से मुक्त होइ गएन हय, त हम पंचे पाप कइ-कइके कइसन जीबन जि सकित हएन। 3का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि हम पंचे जेतने जन मसीह यीसु के बपतिस्मा लिहेन हय, त उनखे मउत के बपतिस्मा लिहेन हय। 4एसे उनखे मउत के बपतिस्मा लिहे के कारन, हमहूँ पंचे घलाय उनखे साथ गाड़े गएन हय, कि जइसन पिता परमातिमा, अपने महिमामय सक्ती के द्वारा मसीह काहीं मरेन म से जिआइन रहा हय, उहयमेर हमरव पंचन के चाल-चलन नबा जीबन के मुताबिक होय।
5काहेकि जइसन यीसु मसीह, मनइन काहीं पाप के सजा से बचामँइ के खातिर मरिगें तय, उहयमेर हमहूँ पंचे पाप के खातिर मर गएन हय, अरथात पाप के सम्बन्ध से पूरी तरह से मुक्त होइ गएन हय, त जइसन यीसु मसीह मरेन म से जिन्दा होइगें तय, उहयमेर हमहूँ पंचे जरूर जिन्दा होइ जाब। 6अउर हम पंचे इआ जानित हएन, कि हमार पंचन के पुरान पापी सुभाव यीसु मसीह के साथ क्रूस माहीं चढ़ाय दीन ग हय, कि जउने हमार पंचन के पाप के इआ देंह नास होइ जाय, अउर आँगे हम पंचे पाप के दासता माहीं न रही। 7काहेकि जे कोऊ मरिगा, उआ पाप के बन्धन से मुक्त होइगा। 8एसे अगर हम पंचे मसीह के साथ मरि गए हएन, त हमार पंचन के इआ बिसुआस हय, कि हम पंचे उनखे साथ जिन्दव रहब। 9काहेकि हम पंचे इआ जानित हएन, कि मसीह मरेन म से जिन्दा होए के बाद कबहूँ न मरिहँय, अरथात ऊँ अमर हें; अउर उनखे ऊपर कबहूँ मउत के बस न चली। 10काहेकि जउन मउत ऊँ मरे हँय, ऊँ हमेसा के खातिर पाप के हिंसाब चुकामँइ के खातिर एक बेरकिन मरे हँय, पय जउन जीबन ऊँ जि रहे हँय, उआ जीबन परमातिमा के खातिर आय। 11एसे तुहूँ पंचे घलाय, पाप करँइ के खातिर अपने-आप काहीं मरे कि नाईं समझा, पय यीसु मसीह माहीं परमातिमा के खातिर जिन्दा समझा।
12अउर तूँ पंचे अपने नासवान देंह माहीं पाप काहीं सासन न करँइ द्या, जउने तूँ पंचे पाप के बुरी इच्छन काहीं पूर न कए पाबा। 13अउर अपने देंह के अंगन काहीं, अधरम के सेबा के खातिर अरथात बुरे कामन काहीं करँइ के खातिर पाप काहीं न सउँपा, बलकिन अपने-आप काहीं मरेन म से जिन्दा होइ जाँइ बाला समझिके परमातिमा काहीं सउँपि द्या, अउर अपने देंह के अंगन काहीं धारमिकता के कामन काहीं करँइ के साधन के रूप माहीं परमातिमा काहीं सउँपि द्या। 14जउने तोंहरे पंचन के जीबन माहीं पाप सासन न करय, काहेकि तूँ पंचे मूसा के बिधान के सहारे जीबन नहीं जीते आह्या, बलकिन परमातिमा के किरपा के सहारे जीते हया।
धारमिकता के दास
15त एसे क भ? का हम पंचे एसे पाप करत रही, कि हम पंचे मूसा के बिधान के अधीन नहिं आहेन, बलकिन किरपा के अधीनता माहीं जीबन बिताइत हएन? नहीं, बेलकुल नहीं, हम पंचे पाप न करी! 16अउर का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि जेखर हुकुम मानँइ के खातिर तूँ पंचे अपने-आप काहीं दास कि नाईं सउँपि देते हया, त ओहिन के दास होइ जाते हया; त पुनि तूँ पंचे चाह पाप के दास बना, जउन तोहईं पंचन काहीं मारि डारी, अउर चाह परमातिमा के हुकुमन के दास बना, जउन परमातिमा के नजर माहीं अच्छे काम हें उनहीं करँइ कइती लइ जात हें। 17पय हम परमातिमा के धन्यबाद करित हएन, कि तूँ पंचे जउन पहिले बुरे कामन काहीं करँइ के कारन पाप के दास बने रहे हया, त अब तूँ पंचे अपने पूरे मन से उआ उपदेस काहीं मानँइ बाले बन गया हय, जउन तोंहईं पंचन काहीं सँउपा ग रहा हय। 18अउर अब तूँ पंचे पाप के चंगुल से मुक्ती पाइके, परमातिमा के नजर माहीं जउन निकहे काम हें, उनखर दास बन गया हय। 19अउर हम तोंहरे पंचन के देंह के निबल दसा होंइ के कारन, मनइन के रीति के मुताबिक कहित हएन, कि जइसन तूँ पंचे अपने देंह के अंगन काहीं, कुकर्म करँइ के खातिर, अउर असुद्धता अउर कुकर्म के दास होंइ के खातिर घलाय सउँपि दिहा तय, उहयमेर अब अपने अंगन काहीं पबित्र होंइ के खातिर, परमातिमा के नजर माहीं जउन निकहे काम हें, उनखर दास के रूप माही सउँपि द्या। 20अउर जब तूँ पंचे पाप के दास अरथात पाप माहीं जीबन बिताबत रहे हया, तब परमातिमा के नजर माहीं जउन निकहे काम हें, उनखे तरफ से तूँ पंचे अजाद रहे हया। 21मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ से पहिले जउने कामन से तूँ पंचे आनन्दित होत रहे हया, अब तूँ पंचे उँइन कामन से सरमिन्दा होते हया, काहेकि ऊँ कामन के अन्त त मउत हय। 22पय अब तूँ पंचे पाप के बन्धन से अजाद होइके, परमातिमा के दास बन गया हय, अउर अपने जीबन माहीं पबित्रता के फर पइदा कइ रहे हया, जेखर परिनाम हय अनन्त जीबन। 23अउर जे कोऊ पाप करत हय, त ओखे बदले माहीं ओही अनन्तकाल के मउत मिली, पय परमातिमा के बरदान इआ हय, कि जे कोऊ हमरे पंचन के प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस करी, त ओही अनन्त जीबन मिली।
7बिबाहित जीबन के उदाहरन
1हे बिसुआसी भाई-बहिनिव, का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि हम मूसा के बिधान काहीं जानँइ बालेन से कहित हएन, कि जब तक कउनव मनई जिअत रहत हय, तब तक ओखे ऊपर मूसा के बिधान के अधिकार रहत हय? 2उदाहरन के खातिर जब कउनव मेहेरिआ के काज होइ जात हय, त ओखे बाद उआ अपने मंसेरुआ के साथ मूसा के बिधान के मुताबिक तब तक बन्धन माहीं रहत ही, जब तक उआ जिअत हय, पय जब ओखर मंसेरुआ मर जात हय, त उआ काजे के नेमन के बन्धन से मुक्त होइ जात ही। 3पय अगर उआ अपने मंसेरुआ के जिन्दय दुसरे मंसेरुआ के रहि जाय, त उआ दुसरे मंसेरुआ से ब्यभिचार करँइ बाली कहाई, पय अगर ओखर मंसेरुआ मर जात हय, त उआ काजे के नेमन के बन्धन से मुक्त होइ जात ही, इहाँ तक कि अगर उआ कउनव दुसरे मंसेरुआ के रहि जात ही, तऊ उआ दुसरे मंसेरुआ के साथ ब्यभिचार करँइ बाली न कहाई। 4एसे हे हमार भाई-बहिनिव, इहइमेर मसीह के देंह के द्वारा मूसा के बिधान काहीं पालन करँइ से तुहूँ पंचे घलाय मुक्त होइ चुके हया, जउने अब तुहूँ पंचे दुसरे से सम्बन्ध जोड़ सका, अरथात उनसे जउन मरेन म से जि उठे हँय, जउने हम पंचे परमातिमा के खातिर फर देंइ बाला जीबन जी सकी। 5काहेकि जब हम पंचे, मन के बुरी इच्छन के मुताबिक जिअत रहे हएन, त पाप करँइ के बुरी इच्छा, जउन मूसा के बिधान के कारन आई रही हँय, जिनखर अन्त मउत हय, ऊँ हमरे पंचन के देंह के अंगन काहीं अपने काबू माहीं कए रही हँय। 6पय अब हमहीं पंचन काहीं मूसा के बिधान के बन्धन से छुटकारा मिल ग हय, काहेकि जउने मूसा के बिधान के अधीनता माहीं हमही पंचन काहीं बंदी बनाबा ग रहा हय, हम पंचे ओखे सम्बन्ध से पूरी तरह से मुक्त होइ चुके हएन। जउने अब हम पंचे मूसा के लिखे पुरान बिधान से नहीं, बलकिन पबित्र आत्मा के नए बिधान के मुताबिक अपने परमातिमा के सेबा करी।
मूसा के बिधान के द्वारा पाप के पहिचान
7त पुनि हम पंचे का कही? का मूसा के बिधान पाप आय? नहीं, बेलकुल नहीं! अगर मूसा के बिधान न होत, त हम पाप काहीं न जाने पाइत, अगर मूसा के बिधान न बताबत कि लालच न करा, त हम लालच काहीं न जानित। 8पय पाप मोका पउतय हुकुम के द्वारा, हमरे जीबन माहीं हरेकमेर के लालच पइदा कइ दिहिस, काहेकि अगर मूसा के बिधान न होत त पाप मरे कि नाईं होत। 9एक समय हम बिना मूसा के बिधान के जिअत रहे हएन, पय जब मूसा के बिधान के हुकुम आइगा, त पाप जि आबा, अउर हम मर गएन। 10अउर उहय मूसा के बिधान के हुकुम जउन अनन्त जीबन देंइ के खातिर रहा हय, हमरे खातिर मउत लइ आबा। 11काहेकि पाप काहीं मोका मिलिगा, अउर उआ उहय मूसा के बिधान के हुकुम के द्वारा हमहीं बहकाय दिहिस, अउर उहय हुकुम के द्वारा हमहीं मारिव डारिस। 12इआमेर से मूसा के बिधान पबित्र हय, अउर उआ हुकुम घलाय पबित्र, सही, अउर परमातिमा के नजर माहीं निकहा हय। 13त पुनि का एखर मतलब इआ हय, कि उआ जउन निकहा हय, उहय हमरे मउत के कारन बनिगा? नहीं, बेलकुल नहीं, बलकिन पाप उआ निकहे के द्वारा हमरे खातिर मउत के कारन एसे बना, कि पाप काहीं पहिचाना जाय सकय, अउर मूसा के बिधान के हुकुम के द्वारा ओखे भयानक पापमय दसा काहीं देखाबा जाय सकय।
मनई के मन अउर आत्मा के लड़ाई
14काहेकि हम पंचे त जनतय हएन, कि मूसा के बिधान त आत्मिक हय, पय हम त हाड़ा अउर माँस के बने मनई आहेन, जउन बुरे कामन काहीं कइके पाप के हाँथ माहीं बिके हएन। 15अउर हम नहीं जानी कि हम का करित हएन, काहेकि हम जउन काम करँइ चाहित हएन, उआ काम नहीं करी, बलकिन हमहीं उहय काम करँइ परत हय, जउने काम से हम नफरत करित हएन। 16अउर अगर हम उहय काम करित हएन, जउन काम हम नहीं करँइ चाही, त हम माने लेइत हएन, कि मूसा के बिधान निकहा हय। 17पय वास्तव माहीं उआ हम न होहेंन, जउन इआ सगला काम कइ रहा हय, बलकिन इआ सगला काम करँइ बाला हमरे भीतर बइठ पाप आय। 18काहेकि, हम इआ जानित हएन, कि हमरे भीतर अरथात हमरे देंह माहीं कउनव निकही चीज निबास नहीं करय, एसे कि हम निकहा काम करँइ त चाहित हएन, पय करे नहीं पाई। 19काहेकि जउन निकहा काम हम करँइ चाहित हएन, उआ काम हम नहीं करी, बलकिन हम जउन काम नहीं करँइ चाही, उहय बुरा काम हम करा करित हएन। 20अउर अगर हम उहय काम करित हएन, जउने काहीं नहीं करँइ चाही, त इआ सगला काम करँइ बाले हम न होंहेन, बलकिन हमरे भीतर बइठ पाप आय। 21एसे हम अपने देंह माहीं इआ बिधान पाइत हएन, कि हम जब निकहा काम करँइ चाहित हएन, त हमसे बुरा काम होइ जात हय। 22काहेकि हम त परमातिमा के बिधान से अपने पूरे मन से खुसी रहित हएन। 23पय हम अपने अंगन माहीं, दूसर मेर के बिधान काहीं काम करत देखित हएन, जउन हमरे सोच-बिचार करँइ बाली बुद्धी से लड़ाई करत हय, अउर हमहीं पाप के बन्धन माहीं डारत हय, अउर इहय बिधान अबहिनव हमरे अंगन माहीं काम करत हय। 24हमार किस्मत केतनी खराब ही! हमहीं इआ नास होंइ बाली देंह से को मुक्ती देई? 25अउर हम परमातिमा के धन्यबाद करित हएन, जउन हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा हमरे भीतर बसे पाप के बन्धन से मुक्त किहिन हीं। एसे हम अपने मन से त परमातिमा के बिधान के पालन करित हएन, पय अपने सरीर से पाप के बिधान के पालन करित हएन।
8पबित्र आत्मा के द्वारा नबा जीबन
1एसे अब जेतने जन मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस करत हें, उनहीं कउनव सजा न मिली8:1 (काहेकि ऊँ पंचे अब मन के बुरी इच्छा के मुताबिक नहीं चलय, बलकिन पबित्र आत्मा के बताए मुताबिक चलत हें।)। 2काहेकि पबित्र आत्मा के बिधान जउन यीसु मसीह माहीं जीबन देत हय, हमहीं पाप के बिधान से जउन मउत के तरफ लइ जात हय, ओसे अजाद कइ दिहिस ही। 3काहेकि जउन काम मूसा नबी के उआ बिधान, जउन मन के बुरी इच्छा के कारन निबल बनाय दीन ग रहा हय, नहीं कए पाइस, ओही परमातिमा अपने लड़िका काहीं हमरे पंचन कि नाईं देंह माहीं पठइके, जउने से हम पंचे पाप करित हएन, इआमेर से परमातिमा मनई के देंह माहीं पाप काहीं सजा दिहिन हीं 4एसे कि हम पंचे जउन मन के बुरी इच्छन के मुताबिक नहीं, बलकिन पबित्र आत्मा के बताए मुताबिक चलित हएन, हमरे द्वारा मूसा के बिधान के नेम पूर कीन जाय। 5काहेकि मन के बुरी इच्छन के मुताबिक चलँइ बाले मनई, मन के बातन माहीं आपन मन लगाबत हें; पय ऊँ मनई जउन पबित्र आत्मा के बताए मुताबिक चलत हें, पबित्र आत्मा के बातन माहीं आपन मन लगाबत हें। 6अउर मन के बुरी इच्छन माहीं मन लगाउब त मउत8:6 आत्मिक मउत अरथात परमातिमा से हमेसा के खातिर अलगाव। आय, पय पबित्र आत्मा के बताए बातन माहीं मन लगाए से अनन्त जीबन अउर सान्ती मिलत ही। 7काहेकि जउन मनई मन के बुरी इच्छन माहीं मन लगाबत हय, उआ परमातिमा से दुसमनी रक्खत हय, काहेकि उआ मनई न त परमातिमा के बिधान के अधीन आय, अउर न होइन सकय। 8अउर ऊँ पंचे जउन मन के बुरी इच्छन के मुताबिक जिअत हें, परमातिमा काहीं खुसी नहीं कइ सकँय। 9पय परमातिमा के आत्मा तोंहरे जीबन माहीं निबास करत हय, एसे तूँ पंचे मन के बुरी इच्छा के मुताबिक जीबन नहीं जीते आह्या, अगर कोहू के जीबन माही मसीह के आत्मा के निबास नहिं आय, त उआ मसीह के जन न कहाई। 10अउर अगर मसीह तोंहरे जीबन माहीं हें, त तोंहार देंह पाप किहे के कारन मरी हय; पय परमातिमा तोंहईं पंचन काहीं अपने नजर माहीं निरदोस ठहराइन हीं, एसे तोंहार पंचन के आत्मा जिन्दा हय। 11अउर परमातिमा जउने आत्मा से यीसु काहीं मरेन म से जिआइन रहा हय, उहय आत्मा तोंहरे भीतर निबास करत हय, अउर परमातिमा जउने आत्मा से यीसु काहीं मरेन म से जिआइन रहा हय, उहय आत्मा से तोंहरे पंचन के नास होंइ बाली देंह काहीं जिअइहँय।
12एसे हे भाई-बहिनिव, हम पंचे पापी सुभाव के करजदार नहिं आहेन, कि मन के बुरी इच्छन के मुताबिक जीबन बिताई। 13काहेकि तूँ पंचे, अगर मन के बुरी इच्छन के मुताबिक जीबन बितइहा, त आत्मिक रूप से मर जइहा, पय अगर परमातिमा के आत्मा के बताए मुताबिक अपने मन के बुरी इच्छन काहीं छोंड़ि देइहा, त आत्मिक रूप से जिअत रइहा। 14एसे कि जेतने जन परमातिमा के आत्मा के बताए मुताबिक चलत हें, केबल उँइन परमातिमा के सन्तान कहइहँय। 15काहेकि जउने आत्मा काहीं तूँ पंचे पाया हय, उआ तोंहईं दास बनामँइ के खातिर न होय मिला हय, कि तूँ पंचे पुनि डेरा, बलकिन उआ आत्मा तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा के गोद लीन सन्तान बनामँइ के खातिर मिला हय, एहिन से हम पंचे परमातिमा काहीं हे अब्बा, हे पिता कहँइ लागित हएन। 16अउर उआ पबित्र आत्मा खुदय हमरे आत्मा के साथ गबाही देत हय, कि हम पंचे परमातिमा के सन्तान आहेन। 17अउर अगर हम पंचे परमातिमा के सन्तान आहेन, त उनखर बारिसदार घलाय आहेन, बलकिन परमातिमा के बारिसदार अउर मसीह के संगी बारिसदार घलाय आहेन, अउर अगर हम पंचे उनखे साथ दुख उठाइत हएन, त उनखे साथ महिमा माहीं भागीदार घलाय बनब।
भबिस्य माहीं मिलँइ बाली महिमा
18काहेकि हमरे बिचार से इआ समय के हमार पंचन के दुख-मुसीबत, भबिस्य माहीं हमहीं पंचन काहीं मिलँइ बाली महिमा के आँगे कुछू न होंहीं। 19काहेकि इआ सगला संसार बड़ी आसा लगाए, उआ समय के इन्तजार कइ रहा हय, जब परमातिमा के सन्तानन काहीं प्रगट कीन जई। 20काहेकि सगला संसार अपने मरजी से नहीं, बलकिन आधीन करँइ बाले परमातिमा के तरफ से सराप के अधीन इआ आसा से कीन ग हय, 21कि इआ सगला संसार घलाय खुदय बिनास के बन्धन से छुटकारा पाइके, परमातिमा के सन्तानन के महिमा समेत अजादी के आनन्द लेय। 22काहेकि हम पंचे इआ जानित हएन, कि आज तक सगला संसार जइसन लड़िका पइदा होत समय मेहेरिआ के पीरा होत ही, उहयमेर कराहत अउर पीरा माहीं परे तड़प रहा हय। 23अउर केबल इआ संसारय भर नहीं, बलकिन हमहूँ पंचे घलाय जिनहीं पबित्र आत्मा के पहिल फर मिला हय, खुदय हम पंचे अपने भीतर कराहित हएन, काहेकि हम पंचे परमातिमा के गोद लीन सन्तान होंइ के अरथात अपने पूरे देंह के मुक्ती पामँइ के इन्तजार करित हएन। 24इहय आसा के द्वारा हमहीं पंचन काहीं मुक्ती मिली हय; पय जउने चीज के आसा कीन जात ही, जब उआ देखँइ काहीं मिल जात ही, त उआ आसा पूर होइ जात ही, काहेकि जउने चीज काहीं कोऊ देख लेत हय, त उआ ओखर आसा नहीं करय। 25पय अगर हम पंचे जउने चीज काहीं नहीं देखी, ओखर आसा करित हएन, त ओखर धीरज के साथ इन्तजार घलाय करित हएन।
26इहइमेर से पबित्र आत्मा घलाय जब हम पंचे निबल होइत हएन, त हमार पंचन के मदत करत हय, काहेकि हम पंचे नहीं जानी, कि प्राथना कउनमेर से करँइ चाही; पय पबित्र आत्मा खुदय अइसन आँह भर भरिके हमरे खातिर प्राथना करत हय, जेखर बखान नहीं कीन जाय सकय। 27अउर सगले मनइन के मन के बातन काहीं जाँच करँइ बाले परमातिमा इआ जानत हें, कि पबित्र आत्मा के इच्छा का ही? काहेकि उआ उनखे पबित्र भक्तन के खातिर परमातिमा के मरजी के मुताबिक उनसे बिनती करत हय।
28अउर हम पंचे इआ जानित हएन, कि जेतने मनई परमातिमा से प्रेम करत हें, अउर परमातिमा के मरजी के मुताबिक बोलाए गे हँय, त परमातिमा उनखे जीबन माहीं जउन कुछू करत हें, त उनखे भलाइन के खातिर करत हें। 29अउर जिनहीं परमातिमा पहिलेन से चुनिन रहा हय, उनहीं पहिलेन से अपने लड़िका कि नाईं ठहराइन हीं, जउने ऊँ सगलेन भाई-बहिनिन माहीं, बड़े भाई कहामँय। 30अउर जिनहीं परमातिमा पहिलेन से चुनिन रहा हय, उनहीं अपने लघे बोलाइन घलाय, अउर जिनहीं अपने लघे बोलाइन हीं, उनहीं अपने नजर माहीं निरदोस घलाय ठहराइन हीं, अउर जिनहीं अपने नजर माहीं निरदोस ठहराइन हीं, उनहीं आपन महिमा घलाय दिहिन हीं।
परमातिमा के प्रेम
31एसे हम पंचे ईं बातन के बारे माहीं का कहि सकित हएन? अगर परमातिमा हमरे पच्छ माहीं हें, त हमार पंचन के बिरोध करँइ बाला को होइ सकत हय? अरथात कोऊ नहीं होइ सकय। 32जब हमहीं पंचन काहीं मुक्ती देंइ के खातिर परमातिमा अपने एकलउते लड़िका काहीं बलिदान होंइ के खातिर दइ दिहिन हीं, त इआ सब दिहे के बाद, ऊँ अपने लड़िका के साथ हमहीं सब कुछ काहे न देइहँय? अरथात जरूर देइहँय। 33अउर परमातिमा के चुने मनइन के ऊपर दोस कोऊ नहीं लगाय सकय, केबल परमातिमय लगाय सकत हें, काहेकि परमातिमा, ऊँ आहीं जउन उनहीं अपने नजर माहीं निरदोस ठहराइन हीं। 34पुनि अइसन कोऊ नहिं आय, जउन परमातिमा के चुने मनइन काहीं दोसी ठहराई? केबल यीसु मसीह हें, जउन बलिदान होइगें तय, अउर मरेन म से जि घलाय उठे हँय, अउर परमातिमा के दहिने कइती बइठ हें, अउर हमरे पंचन के खातिर परमातिमा से बिनती घलाय करत हें। 35अउर हमहीं पंचन काहीं मसीह के प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय, चाह उआ दुख-मुसीबत होय, चाह हमरे ऊपर अत्याचार होय, चाह अकाल होय, चाह पहिनँय के खातिर ओन्हव न होय, चाह उआ जोखिम होय, अउर चाह उआ तलबारय काहे न होय? 36जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि
“हम पंचे दिन भर कतल होंइ के खातिर सँउपे जइत हएन; अरथात हम पंचे बली होंइ बाली गड़रन कि नाईं समझे जइत हएन।”
37पय ईं सगली बातन माहीं हम पंचे मसीह के द्वारा जउन हमसे प्रेम करत हें, सानदार जीत पाय रहेन हँय। 38-39काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।
9परमातिमा अउर उनखर चुने मनई
1हम मसीह के ऊपर बिसुआस करित हएन, एसे हम झूँठ नहीं बोली, पय हम सही कहित हएन, कि हमरे मन के सोच-बिचार पबित्र आत्मा के अँगुआई से इआ गबाही देत हय, 2कि हमहीं बड़ा दुख लागत हय, अउर हमार मन हमेसा दुखी रहत हय। 3काहेकि हम इहाँ तक चाहित हएन, कि हमरे यहूदी जाति के भाई-बहिनी, जउन परमातिमा से दूरी होइगे हँय, अगर हम उनखे खातिर मसीह के सराप काहीं अपने ऊपर लइके मसीह से भले दूरी होइ जइत, पय ऊँ पंचे बच जातें। 4एसे कि ऊँ पंचे इजराइल के बंस के आहीं; अउर परमातिमा के गोद लीन सन्तान होंइ के हक्क उनहिन काहीं मिला हय। अउर ऊँ पंचे परमातिमा के सामर्थ के कामन काहीं देखि चुके हँय, अउर उनहिन के साथ परमातिमा करार घलाय किहिन तय, अउर मूसा नबी के द्वारा अपने बिधान काहीं दिहिन रहा हय, अउर उनहिन काहीं मन्दिर माहीं अराधना करँइ के खातिर कहिन तय। अउर उनहिन से वादा घलाय किहिन तय, 5अउर पुरखव9:5 पुरखव अरथात अब्राहम, इसहाक अउर याकूब उनहिन के बंस के आहीं उनहिन के बंस के आहीं, अउर मसीह घलाय मनई के रूप लइके उनहिन के कुल माहीं पइदा भें, जउन सगले मनइन के परमातिमा आहीं, अउर उँइन मसीह जुग-जुग तक धन्य कहइहँय। आमीन! 6पय अइसा नहिं आय कि परमातिमा आपन बचन पूर नहीं किहिन, काहेकि जेतने इजराइल के बंस के हें, उनमा से सगले जने परमातिमा के चुने न होंहीं। 7अउर जेतने अब्राहम के बंस माही पइदा भें हँय, उनमा से सगले अब्राहम के सच्चे सन्तान न कहइहँय, काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “इसहाक9:7 उत्प 21:12 से जेतने पइदा होइहँय, उँइन तोंहार सच्ची सन्तान कहइहँय।” 8अरथात इआ कि संसारिक रूप से पइदा होंइ बाले लड़िका- बच्चा परमातिमा के सन्तान न कहइहँय, बलकिन परमातिमा के वादा के मुताबिक पइदा भें सन्तानय अब्राहम के बंस माने जइहँय। 9काहेकि अब्राहम से परमातिमा अइसन वादा किहिन रहा हय, कि “अँगले साल9:9 उत्प 18:10,14 हम इहय समय माहीं जब दुसराय अउब, तब तोंहरे मेहेरिआ सारा के एकठे लड़िका पइदा होइ चुका होई।” 10अउर ऊँ लड़िका हमार पंचन के पुरखा इसहाक आहीं, अउर जब ऊँ रिबका से काज किहिन, अउर रिबका उनसे लड़कहाई भईं, अउर उनखे पेटे माहीं जोड़ीमा लड़िका रहे हँय। 11अउर ऊँ लड़िकन के पइदा होंइ से पहिलेन, अउर उनखे कुछू नीक-नागा करँइ से पहिलेन, परमातिमा कहिन, कि “बड़कबा9:11 उत्प 25:23 लड़िका छोटकबा लड़िका के दास होई।” 12अउर परमातिमा इआ बतामँइ के खातिर रिबका से कहिन कि, ऊँ कोहू काहीं ओखे निकहे कामन के कारन नहीं चुनँय, बलकिन अपने मरजी के मुताबिक ओही चुनत हें। 13जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि “परमातिमा कहिन, हम एसाव से जादा याकूब से प्रेम9:13 मला 1:2,3 किहेन हय।” 14एसे हम पंचे का कही? का परमातिमा अन्याय करत हें? नहीं, बेलकुल नहीं! 15काहेकि परमातिमा मूसा नबी से कहिन हीं, कि
“हम जेखे9:15 निरग 33:19 ऊपर दया करँइ चाहब, त ओखे ऊपर दया करब, अउर जेखे ऊपर किरपा करँइ चाहब, त ओहिन के ऊपर किरपा करब।”
16एसे कोहू के इच्छा के मुताबिक नहीं, अउर न कोहू के जादा कोसिस किहे के कारन, परमातिमा ओही चुनँय, बलकिन ऊँ केही चुनत हें, इआ दया करँइ बाले परमातिमा के हाँथे माहीं हय। 17काहेकि जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, “परमातिमा9:17 निरग 3:16 मिस्र देस के राजा फिरौन से कहिन रहा हय, कि ‘हम तोहईं एसे राजा बनायन हय, कि तोंहरे ऊपर हम अपने सामर्थ के कामन काहीं देखाई, जउने ऊँ कामन के द्वारा हमरे महिमा के प्रचार धरती माहीं रहँइ बाले सगले मनइन के बीच माहीं होय। 18एसे परमातिमा जउने मनई के ऊपर दया करँइ चाहत हें, त ओखे ऊपर दया करते हें; अउर जेखे मन काहीं कठोर करँइ चाहत हें, त ओखे मन काहीं कठोर कइ देत हें।
परमातिमा के क्रोध अउर उनखर दया
19एसे तोंहरे पंचन म से कोऊ हमसे इआ कहि सकत हय, कि अगर परमातिमा सब कुछ अपने मरजी से करत हें, त पुनि ऊँ काहे हमरे पंचन के ऊपर दोस लगाबत हें? काहेकि परमातिमा के मरजी के कोऊ बिरोध नहीं कइ सकय। 20अउर हे भाई, तूँ को आह्या? तूँ त केबल मनई आह्या, जउन परमातिमा काहीं उल्टहाव देते हया? त इआ बताबा, कि का कउनव बनी चीज अपने बनामँइ बाले से कहि सकत ही, कि तूँ हमही अइसा काहे बनए हया? 21का कुम्हार काहीं इआ हक्क नहीं रहय, कि उआ माटी के लोंदन से कुछ बरतन खास कामन के खातिर बनबय, जिनखर मनई आदर करत हें, अउर कुछ बरतनन काहीं साधारन कामन के खातिर बनबय जिनखर मनई आदर नहीं करँय। 22त एमा कउन अचरज के बात ही, अगर परमातिमा आपन सक्ती देखामँय के खातिर कुछ मनइन काहीं बनाइन, कि जउने उनखे ऊपर आपन क्रोध देखामँइ, जउन नास होइन के खातिर तइआर कीन गे रहे हँय, तऊ उनखर बड़े धीरज से सहत रहिगें। 23अउर जउने मनइन के ऊपर परमातिमा दया करत हें, उनहीं इआ देखामँइ के खातिर, कि ऊँ केतना महान हें, उनखर सहत रहिगें, अउर ऊँ मनइन काहीं अपने बड़े सम्मान माहीं भागीदार बनामँइ के खातिर पहिलेन से तइआर किहिन हीं। 24अरथात हमरे पंचन के ऊपर, जिनहीं परमातिमा केबल यहूदी लोगन भर से नहीं, बलकिन गैरयहूदी लोगन म से घलाय चुनिन हीं। 25अउर जइसन कि होसे नबी के लिखी किताब माहीं लिखा हय9:25 होसे 2:3, कि
“जउन मनई पहिले हमार प्रजा नहीं रहे आहीं, उनहीं हम आपन प्रजा बनाउब, अउर जउन मनई पहिले हमहीं पियार नहीं रहे आहीं, ऊँ अब हमहीं पियार होइगें हँय।”
26अउर ओमाहीं इहव घलाय लिखा हय9:26 होसे 1:10,
“अउर अइसन होई, कि जउने जघा माहीं हम उनसे कहेन तय, कि तूँ पंचे हमार प्रजा न होह्या, उहय जघा माहीं ऊँ पंचे जिन्दा परमातिमा के सन्तान कहइहँय।”
27अउर यसायाह नबी अपने लिखी किताब माहीं इजराइल के सन्तानन के बारे माहीं चिल्लाइके कहत हें, कि “चाह इजराइल9:27 यसा 10:22,23 के सन्तानन के गिनती समुद्र के बारू के बराबर होय, तऊ उनमा से थोरिन काहीं मनई बचे पइहँय।
28काहेकि प्रभू अपने न्याय काहीं धरती के ऊपर पूरी तरह से अउर हरबिन पूर करिहँय।”
29अउर जइसन यसायाह नबी भबिस्यबानी किहिन तय, कि “अगर सर्बसक्तिमान प्रभू, हमरे पंचन के खातिर बंस न छोंड़ते, त हम पंचे सदोम9:29 यसा 1:9 अउर अमोरा कि नाईं पूरी तरह से नास होइ जइत।”
इजराइली लोगन के अबिसुआस
30हमरे पंचन के कहँइ क मतलब इआ आय, कि गैरयहूदी लोग परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनँइ के खोज माहीं नहीं रहे आहीं, तऊ परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनिगें, काहेकि प्रभू यीसु मसीह के ऊपर किहे बिसुआसय के कारन ऊँ पंचे परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनिगें हँय। 31पय इजराइल देस के मनई, खुद काहीं परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनामँइ के खातिर, मूसा नबी के बिधान के पालन करत रहे हँय, तऊ ऊँ पंचे निरदोस नहीं बन पाएँ। 32काहे नहीं बन पाएँ? एसे कि ऊँ पंचे मसीह के ऊपर बिसुआस नहीं किहिन, बलकिन मूसा के बिधान के पालन कइके धरमी बनँइ के कोसिस करत रहे हँय, अउर मसीह जउन चट्टान कि नाईं हें, ऊँ पंचे उनखे ऊपर बिसुआस न कइके ठोकर खाइन। 33जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय; “परमातिमा कहिन हीं, कि
‘देखा हम सिय्योन माहीं ठेस लागँइ के एकठे पथरा, अउर ठोकर खाँय के चट्टान धरित हएन; अउर जे कोऊ ओखे ऊपर बिसुआस करी, उआ कबहूँ लज्जित न होई’।”
101हे भाई-बहिनिव, हमार बड़ी इच्छा हय, कि यहूदी जाति के सगले मनई मुक्ती पामँय, एसे हम उनखे खातिर परमातिमा से प्राथना करित हएन। 2काहेकि हम उनखे बारे माहीं गबाही दइ सकित हएन, कि उनमा परमातिमा के खातिर खुब उत्साह हय, पय इआ उत्साह बिबेक के साथ नहिं आय। 3अउर परमातिमा मनइन काहीं अपने नजर माहीं, कइसन निरदोस बनाबत हे, ऊँ पंचे नहीं जानत रहे आँय, एसे कि ऊँ पंचे अपने कामन से निरदोस बनँइ के कोसिस करत रहे हँय, इआ कारन से ऊँ पंचे परमातिमा के नजर माहीं निरदोस नहीं बन पाएँ। 4अउर जब से मसीह आइगें, तब से परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनँइ के खातिर, मनइन काहीं मूसा के बिधान के पालन करँइ के जरूरत नहीं रहिगे, काहेकि उनखे ऊपर बिसुआस कइके हरेक मनई परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बन सकत हय।
सगले मनइन के खातिर मुक्ती
5काहेकि मूसा नबी घलाय अपने किताब माहीं लिखिन हीं, कि “जउन मनई बिधान के बातन काहीं पालन कइके, परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनँइ चाहत हय, त अगर उआ बिधान के सगली बातन काहीं पूरी तरह से पालन करी, त उआ इनहिन के कारन जिअत रही।” 6पय जे कोऊ बिसुआस कइके परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनँय चाहत हय, ओखे बारे माहीं पबित्र सास्त्र माही लिखा हय, कि “तूँ अपने मन माहीं इआ न सोचा, कि हमरे पंचन के खातिर यीसु मसीह काहीं धरती माहीं उतारिके लइ आमँइ के खातिर, ऊपर स्वरग माहीं को जई?” 7अउर इहव न सोचा कि “मरेन म से जिआइके यीसु मसीह काहीं ऊपर लइ आमँइ के खातिर धरती के नीचे को जई?” 8अउर पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “परमातिमा के बचन तोंहरे लघेन हय, बलकिन उआ तोंहरे मुँहेन माहीं हय, अउर हिरदँय माहीं घलाय हय।” इआ उहय बिसुआस करँइ बाला बचन आय, जउने के हम पंचे प्रचार करित हएन, 9कि अगर तूँ अपने मुँहे से यीसु काहीं प्रभू जानिके सोइकार करिहा, अउर अपने पूरे मन से बिसुआस करिहा, कि परमातिमा उनहीं मरेन म से जिआइन हीं, त तूँ जरूर मुक्ती पइहा। 10काहेकि परमातिमा के नजर माहीं निरदोस बनँइ के खातिर, पूरे मन से बिसुआस कीन जात हय, अउर मुक्ती पामँइ के खातिर अपने मुँहे से सोइकार कीन जात हय। 11काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि “जे कोऊ यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करी, उआ कबहूँ लज्जित न होई10:11 यसा 28:16।” 12काहेकि यहूदी लोगन माहीं, अउर गैरयहूदी लोगन माहीं कउनव भेदभाव नहिं आय, एसे कि सगले मनइन के प्रभू एकय आहीं, अउर उनखर दया उन सगलेन के खातिर जेतने उनखर नाम लेत हें, उनहीं बड़ी उदारता से असीसित करत ही। 13“काहेकि जे कोऊ प्रभू के नाम लेई, उआ जरूर मुक्ती पाई10:13 योए 2:32।” 14पय जउने परमातिमा के ऊपर ऊँ पंचे बिसुआस नहीं करँय, त उनखर नाम ऊँ पंचे कइसन लइ सकत हें? अउर जउने परमातिमा के बारे माहीं ऊँ पंचे सुनबय नहीं भें, त उनखे ऊपर ऊँ पंचे कइसन बिसुआस कइ सकत हें? अउर अगर प्रचार करँइ बाले खुसी के खबर के प्रचार न करँय, त मनई कइसन सुन सकत हें? 15अउर अगर प्रचार करँइ बाले पठए न जाँय, त ऊँ पंचे कइसन प्रचार कइ सकत हें? जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि “जउन खुसी10:15 यसा 52:7 के खबर सुनाबत हें, उनखर मनइन के बीच माहीं आउब बड़ी खुसी के बात होत ही।” 16पय इजराइली लोगन म से सगले मनई उआ खुसी के खबर काहीं सोइकार नहीं किहिन, जइसन यसायाह नबी अपने किताब माहीं घलाय लिखिन हीं, कि “हे प्रभू, हमरे सुनाए खुसी के खबर के को बिसुआस किहिस ही10:16 यसा 53:1?” 17एसे कि बचन सुने से बिसुआस पइदा होत हय, अउर जब कोऊ जाइके मसीह के बारे माहीं प्रचार करत हय, तब मनइन काहीं सुनँय काहीं मिलत हय। 18पय हम पूँछित हएन कि, का इजराइल के सन्तान हमरे बताए खुसी के खबर काहीं नहीं सुनिन? वास्तव माहीं ऊँ पंचे सुनिन त हय, काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि
“परमातिमा के बचन के प्रचार करँइ बाले सगले धरती माहीं प्रचार किहिन हीं, अउर जउन बचन ऊँ पंचे सुनाइन हीं, उआ सगले संसार माहीं पहुँचिगा हय10:18 भज 19:4।”
19पुनि हम पूँछित हएन, कि का इजराइल के सन्तान बचन काहीं नहीं समझत रहे आहीं? वास्तव माहीं ऊँ पंचे समझत त रहे हँय, काहेकि मूसा नबी के लिखी किताब माहीं परमातिमा कहिन हीं, कि
“जउन हमार प्रजा10:19 ब्यब 32:21 न होंहीं, उनहीं हम अइसन आसीस देब, कि इआ देखिके तोंहईं पंचन काहीं जलन पइदा होई, अउर जउन मनई हमरे बारे माहीं कुछू नहीं जानत रहें, उआ मूढ़ जाति के द्वारा तोंहईं पंचन काहीं गुस्सा देबाउब।”
20पुनि यसायाह नबी बड़े साहस के साथ अपने लिखी किताब माहीं परमातिमा के बात काहीं कहत हें, कि
“जे कोऊ10:20 यसा 65:1 हमहीं नहीं ढूँढ़त रहे आहीं, ऊँ पंचे हमहीं पाइगे हँय; अउर जे कोऊ हमहीं पुँछतिव तक नहीं रहे आहीं, उनखे ऊपर हम प्रगट होइ गएन।”
21पय परमातिमा इजराइल के सन्तानन के बारे माहीं इआ कहत हें, कि
“हम हमेसा आपन हाँथ हुकुम न मानँइ बाली, अउर बाद-बिबाद करँइ बाली, प्रजा कइती उनहीं अपनामँइ के खातिर फइलाए रहि गएन।”
11इजराइली लोगन के ऊपर परमातिमा के दया
1त इआ बताबा, कि का परमातिमा अपने प्रजा इजराइली लोगन काहीं छोंड़ि दिहिन हीं? नहीं, बेलकुल नहीं, हमहूँ त इजराइली जाति के अब्राहम के बंस अउर बिन्यामीन के कुल के आहेन। 2अउर परमातिमा अपने उआ प्रजा इजराइली लोगन काहीं जिनहीं पहिलेन से चुनिन रहा हय, उनहीं अबहिनव नहीं छोंड़िन आहीं, का तूँ पंचे नहीं जनते आह्या? कि पबित्र सास्त्र माहीं एलिय्याह नबी के बारे माहीं लिखा हय; कि एलिय्याह इजराइली लोगन के बिरोध माहीं परमातिमा से बिनती करत हें, 3कि “हे प्रभू, ऊँ पंचे अपना के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं मारि डारिन हीं, अउर अपना के बेदिअन काहीं फोरिके नास कइ दिहिन हीं; अउर अपना के सँदेस बतामँइ बालेन म से केबल हमहिंन भर बचेन हय, अउर ऊँ पंचे हमहूँ काहीं मारि डारँइ के कोसिस माहीं लगे हँय।11:3 1 राजा 10:10-14” 4पय परमातिमा उनहीं का जबाब दिहिन? कि “हम अपने खातिर सात हजार मनइन काहीं बचाए हएन, जउन न बाल देउता के आँगे गोड़न गिरें, अउर न ओखर पूजय किहिन आय।” 5ठीक इहइमेर से इआ समय माहीं घलाय, परमातिमा के किरपा से चुने कुछ मनई बाँकी हँय। 6अउर अगर इआ चुना जाब, परमातिमा के किरपा से भ हय, त इआ चुना जाब उनखे कामन से नहीं भ आय, अउर अगर इआ उनखे कामन से होत, त परमातिमा के किरपा बेकार ठहरत। 7त एखर परिनाम का भ? इआ भ, कि इजराइली लोग परमातिमा के किरपा पामँइ के कोसिस माहीं लगे रहे हँय, पय उनहीं नहीं मिली, बलकिन जउन मनई परमातिमा के चुने रहे हँय, उनहीं उनखर किरपा मिलिगे, अउर उनखे अलाबा दुसरे मनइन काहीं परमातिमा कठोर बनाय दिहिन। 8जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि
“परमातिमा 11:8 यसा 29:10; ब्यब 29:4 उनहीं पंचन काहीं आजव के दिन तक भारी नींद माहीं डारे हें, अउर अइसन आँखी दिहिन हीं, कि ‘ऊँ पंचे परमातिमा के किरपा काहीं देखत हें, पय देखेव से जाने नहीं पामँय’, अउर अइसन ‘कान दिहिन हीं, कि ऊँ पंचे अपने कान माहीं सुनत हें, पय सुनेव से नहीं समझे पामँय’।”
9अउर राजा दाऊद घलाय कहत हें; कि “ऊँ पंचे11:9 भज 69:22,23 जउन खाँय-पिअँइ माहीं परे हँय, उआ उनखे खातिर जाल अउर फन्दा बन जाय, अउर ठोकर खाँइके अउर सजा पामँइ के कारन बन जाय।
10अउर उनखे आँखिन माहीं अँधिआर छाय जाय, जउने देखे न पामँय, अउर अपना उनखे ऊपर बिपत्ती डारे रही, जउने उनखर पिठाँह झुकी रहँय।”
11एसे हम पूँछित हएन, कि का ऊँ पंचे एसे ठोकर खाइन, कि गिरिके नास होइ जाँय? नहीं, बेलकुल नहीं, बलकिन उनखे अपराध किहे के कारन गैरयहूदी लोगन काहीं मुक्ती मिली हय, जउने यहूदी लोगन काहीं जलन पइदा होय। 12एसे अगर उनखे अपराध कइके भटक जाँइ के कारन सगले संसार के मनइन काहीं जउन गैरयहूदी हें, आसिरबाद अउर फायदा मिला हय, त अगर ऊँ पंचे अपने अपराध काहीं सोइकार कइके, परमातिमा से मुक्ती पाइके आसिरबाद से भरपूर होइ जइहँय, त केतना फायदा न होई।
गैरयहूदी लोगन काहीं मुक्ती मिलब
13हम तोंहसे पंचन से ईं बातन काहीं कहित हएन, जउन गैरयहूदी आह्या, काहेकि परमातिमा हमहीं तोंहरे बीच माहीं यीसु मसीह के खास चेला के रूप माहीं पठइन हीं, अउर हम अपने खुसी के खबर सुनामँइ के सेबा काहीं खुब खास मानित हएन। 14इआ आसा से कि हम अपने यहूदी लोगन माहीं घलाय जलन पइदा कराय सकी, अउर उनमा से कुछ जनेन काहीं मुक्ती देबाय सकी। 15काहेकि अगर परमातिमा के द्वारा उनहीं छोंड़ दीन जाब, संसार के गैरयहूदी लोगन के खातिर, परमातिमा के साथ उनखर मेल-मिलाप होइगा, त पुनि उनखर परमातिमा द्वारा सोइकार कइ लीन जाब, का मरेन म से जि उठँय के बराबर न होई? जरूर होई। 16अगर हमरे पंचन के भेंट के कुछ हिस्सा पबित्र हय, त का उआ सगलय पबित्र न होई? हाँ, जरूर होई, काहेकि अगर बिरबा के जर पबित्र ही, त ओखर सगली डेरइआ घलाय पबित्र होइहँय।
17हम इआ बात काहीं इआ उदाहरन से समझाइत हएन, अगर निकहे जैतून के बिरबा11:17 निकहा जैतून के बिरबा के जर अब्राहम आहीं अउर ओखर डेरइआ उनखर बंस आहीं, अउर जंगली जैतून के बिरबा के डेरइआ गैरयहूदी लोग आहीं से कुछ डेरइआ टोरिके फेंक दीन गई हँय, अउर तोंहईं पंचन काहीं जउन जंगली जैतून के बिरबा के डेरइआ आह्या, कलम बनाइके उनखे जघा माहीं उआ निकहे जैतून के बिरबा माहीं जोड़ दीन ग हय, जउने उआ बिरबा के जर से दुसरे डेरइअन कि नाईं तोंहऊँ काहीं ताकत मिलय। 18त तोंहईं पंचन काहीं, उन डेरइअन के आँगे जउन टोरिके फेंकि दीन गई हँय, घमन्ड न करँइ चाही, अउर अगर तूँ पंचे घमन्ड करते हया, त इआ सुधि रक्खा, कि तूँ जर के पालन-पोसन नहीं कइ रहे आह्या, बलकिन उआ जरय तोंहार पंचन के पालन-पोसन करत ही। 19अउर अब तूँ पंचे इआ कइहा, कि ऊँ डेरइआ एसे टोरी गईं, कि जउने हम पंचे कलम बनाइके उनखे जघा माहीं जोड़े जई। 20इआ बात सही आय, कि ऊँ पंचे मसीह के ऊपर बिसुआस नहीं किहिन, एसे उआ बिरबा से टोरिके फेंक दीनगें, पय तूँ पंचे मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन उआ बिरबा माहीं जुड़े हया एसे घमन्ड न किहा, बलकिन परमातिमा के भय मानत रहा। 21काहेकि जब परमातिमा उआ बिरबा के असली डेरइअन काहीं टोरिके फेंक दिहिन हीं, त अगर तुहूँ पंचे बिसुआस माहीं न बने रइहा, त टोरिके फेंक दीन जइहा। 22एसे तूँ पंचे परमातिमा के दया अउर कठोरता के ऊपर ध्यान रक्खा! इआ कठोरता उनखे खातिर आय जउन बिसुआस से भटकिगें हँय, पय परमातिमा के दया तोंहरे पंचन के खातिर आय, पय अगर तूँ पंचे मसीह के ऊपर किहे बिसुआस माहीं बने न रइहा, त तुहूँ पंचे उआ बिरबा से काटिके फेंक दीन जइहा। 23अउर अगर ऊँ पंचे मसीह के ऊपर बिसुआस कइ लेइहँय, त ऊँ कलम बनाइके उआ बिरबा माहीं जोड़ दीन जइहँय, काहेकि परमातिमा उनहीं पुनि जोड़ सकत हें। 24काहेकि तूँ पंचे, जंगली जैतून के बिरबा के डेरइआ आह्या, जउन सुभाबय से जंगली हय, ओमा से काटे गया हय, अउर निकहे जैतून के बिरबा माहीं ओखे सुभाव के बिरुद्ध तूँ पंचे कलम बनाइके ओमा जोड़े गया हय, त का उआ निकहे जैतून के बिरबा के जउन असली डेरइआ आहीं, अपनेन बिरबा माहीं न जोड़ी जइहँय? अरथात जरूर जोड़ी जइहँय।
इजराइली लोगन काहीं मुक्ती मिलब
25हे भाई-बहिनिव, कहँव अइसा न होय, कि तूँ पंचे अपने-आप काहीं बुद्धिमान समझ ल्या, एसे हम चाहित हएन, कि तूँ पंचे इआ भेद काहीं जानिल्या, कि परमातिमा के राज माहीं गैरयहूदी लोग जब तक पूरी तरह से प्रबेस न कइ लेइहँय, तब तक इजराइली लोगन म से कुछ जने अइसय कठोर बने रइहँय। 26अउर इआमेर से सगले इजराइली लोगन काहीं परमातिमा मुक्ती देइहँय; जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय; कि “मुक्ती देंइ बाले सिय्योन से अइहँय; अउर ऊँ याकूब के सन्तानन से सगले बुरे कामन काहीं दूर करिहँय।” 27अउर उनखे साथ हमार इहय करार होई, कि हम उनखे जीबन से उनखे पापन काहीं दूर कइ देब। 28अउर खुसी के खबर के ऊपर बिसुआस न किहे के कारन ऊँ पंचे परमातिमा के बइरी बनिगे हँय, एसे तोंहईं पंचन काहीं फायदा मिला हय, पय अगर ऊँ पंचे परमातिमा के द्वारा पहिलेन से चुनि लीनगे हँय, त परमातिमा द्वारा उनखे बाप-दादन काहीं दीन बचन के कारन ऊँ पंचे घलाय पियार होइहँय। 29काहेकि परमातिमा जेही चुनि लेत हें, ओही कबहूँ नहीं छोंड़य, अउर जउन बरदान देत हें, ओही पूरा करँइ से कबहूँ पीछे नहीं हटँय। 30काहेकि जइसन पहिले तुहूँ पंचे, परमातिमा के हुकुम काहीं नहीं मानत रहे आह्या, पय उनखे द्वारा परमातिमा के हुकुम काहीं न मानँइ के कारन, अब तोंहरे ऊपर दया भे ही। 31उहयमेर अब ऊँ पंचे परमातिमा के हुकुम नहीं मानँय, काहेकि परमातिमा के जउन दया तोंहरे ऊपर भे ही, इहइमेर उनहूँ पंचन के ऊपर घलाय एक दिन दया होई। 32काहेकि परमातिमा सगले मनइन काहीं उनखे हुकुम काहीं न मानँइ के कारन पाप के बन्धन माहीं डार दिहिन हीं, कि जउने एक दिन सगले मनइन के ऊपर दया करँय। 33बाह! परमातिमा केतने अदभुत हें, उनखर ग्यान अउर बुद्धी अउर दया रूपी धन अपरम्पार हय! उनखे निरनय अउर उपायन काहीं समझ पाउब असम्भव हय। 34अउर
प्रभू के बुद्धी काहीं कोऊ नहीं जान सकय, अउर न उनहीं कोऊ सलाह देंइ बाला होइ सकय।
35अउर न परमातिमा11:35 अय्यू 41:11 काहीं कोऊ कुछू देबय भ आय, कि परमातिमा ओही ओखर बदला देंय।
36काहेकि सब कुछ उनहिन के बनबा आय, अउर उनहिन के द्वारा सब स्थिर हय, अउर सब कुछ उनहिन के आय, उनखर बड़ाई जुग-जुग होत रहय। आमीन!
12परमातिमा के सेबा के खातिर आपन जीबन अरपन करा
1हे भाई-बहिनिव, परमातिमा तोंहरे ऊपर जउन दया किहिन हीं, ओही सुधि देबाइके तोंहसे पंचन से बिनती करित हएन, कि अपने-अपने जीबन काहीं जिन्दा, अउर पबित्र, अउर परमातिमा काहीं प्रसन्न करँइ बाले बलिदान के रूप माहीं समरपित कइ द्या, तोंहार पंचन के परमातिमा के सेबा करँइ के सही तरीका इहय आय। 2अउर तूँ पंचे इआ संसार के बुरे मनइन कि नाईं न बना; काहेकि परमातिमा तोंहरे मन काहीं नबा कइ दिहिन हीं, एसे तोंहार पंचन के चाल-चलन बदलत जाँइ चाही, जउने तूँ पंचे अपने अनुभव से इआ जान लेबा करा, कि परमातिमा तोंहरे जीबन से का चाहत हें, अउर उनहीं का नीक लागत हय, अउर उनखर पूरी इच्छा का ही। 3काहेकि परमातिमा के किरपा से जउन अधिकार हमहीं मिला हय, ओहिन के मुताबिक हम तोंहसे पंचन से अरथात हरेक जन से कहित हएन, कि जइसन अपने-आप काहीं समझँइ चाही, ओसे बढ़िके अपने-आप काहीं न समझा। जइसन परमातिमा तोंहरे पंचन के छमता के मुताबिक, जेतना बिसुआस दिहिन हीं, ओहिन के मुताबिक अपने-आप काहीं सही तरीके से समझा। 4काहेकि जइसन हमरे पंचन के देंह माहीं कइयकठे अंग हें, अउर उनखर काम एकमेरय नहिं आय। 5उहयमेर हमहूँ पंचे, जउन खुब जने हएन, मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन एकठे देंह कि नाईं हएन, जइसन ओखर अंग एक दुसरे से जुड़े रहत हें, उहयमेर हमहूँ पंचे आपस माहीं एक दुसरे से जुड़े हएन। 6काहेकि परमातिमा अपने किरपा के मुताबिक जउन हमहीं पंचन काहीं अलग-अलग बरदान दिहिन हीं, त जेही परमातिमा के सँदेस बतामँइ के बरदान मिला होय, त उआ ओखे लघे जेतना बिसुआस हय, ओहिन के मुताबिक परमातिमा के सँदेस बताबय। 7अगर जेही सेबा करँइ के बरदान मिला होय, त उआ सेबा करँइ माहीं लगा रहय, अगर जेही सिखामँइ के बरदान मिला होय, त उआ सिखामँइ माहीं लगा रहय। 8अउर जेही उत्साहित करँइ के बरदान मिला होय, त उआ उत्साहित करँइ माहीं लगा रहय; अउर जेही दान देंइ के बरदान मिला होय, त उआ उदारता से दान देंइ माहीं लगा रहय, अउर जेही अँगुआई करँइ के बरदान मिला होय, त उआ लगन के साथ अँगुआई करय, अउर जेही दया करँइ के बरदान मिला होय, त उआ बड़े खुसी के साथ दया करय।
9अउर तूँ पंचे एक दुसरे से निस्कपट प्रेम करा; अउर बुरे कामन से नफरत करा, अउर भलाई करँइ माहीं लगे रहा। 10अउर आपस माहीं भाईचारा बनाइके, एक दुसरे से प्रेम करा; अउर आपस माहीं एक दुसरे काहीं अपने से बढ़िके माना। 11अउर अपने काम माहीं कबहूँ आलसी न बना; बलकिन आत्मिक उत्साह के साथ प्रभू के सेबा माहीं लगे रहा। 12अउर अपने आसा माहीं आनन्दित रहा; दुख-मुसीबत माहीं धीरज रक्खा; अउर हमेसा प्राथना करँइ माहीं लगे रहा। 13अउर परमातिमा के पबित्र मनइन काहीं जउन जरूरत होय, त उनखर मदत करा; अउर महिमानन के स्वागत-सतकार करँइ माहीं लगे रहा। 14अउर अपने सतामँइ बालेन काहीं आसिरबाद द्या; उनहीं सराप न द्या, बलकिन उनखे खातिर परमातिमा से प्राथना करा, कि परमातिमा उनहीं आसिरबाद देंय। 15अउर जे आनन्द मनाबत हें, त तुहूँ पंचे उनखे साथ आनन्द मनाबा; अउर जे दुखी होंय, त उनखे साथ तुहूँ पंचे दुख मनाबा। 16अउर आपस माहीं मिल जुलिके रहा; घमन्ड न करा; बलकिन दीन मनइन के साथ संगति करा; अउर अपने-आप काहीं जादा बुद्धिमान न समझा। 17जे तोंहरे साथ बुराई करँय, त तुहूँ पंचे उनखे साथ बुराई न किहा, बलकिन भलाइन किहा; जउन बातँय सगले मनइन के भलाई के खातिर होंय, उनहिन काहीं करँइ के कोसिस करा। 18अउर जहाँ तक तोंहसे होइ सकय, त सगले मनइन के साथ मेल-मिलाप करँइ के पूरी कोसिस किहा। 19हे पियार भाई-बहिनिव, अगर कोऊ तोंहसे कुछू बुराई किहिस होय, त ओखर बदला तूँ पंचे खुद न लिहा, बलकिन परमातिमा काहीं ओखर बदला लेंइ के मोका दिहा, काहेकि जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “प्रभू कहिन हीं, कि बदला लेब हमार काम आय, अउर ओखर बदला हमहिन लेब12:19 ब्यब 32:35।” 20पय अगर तोंहार पंचन के बइरी भूँखा होय, त ओही खाना खबाया; अउर अगर पियासा होय त ओही पानी पिआया; काहेकि तूँ पंचे ओखे साथ अइसा करिहा, त उआ तोंहसे खुब लज्जित होइ जई12:20 नीति 25:21। 21अउर अगर कोऊ तोंहसे कुछू बुराई किहिस होय, त तुहूँ पंचे ओखे साथ बुराई न किहा, बलकिन ओखे साथ भलाइन किहा, इआमेर से तूँ पंचे भलाई के काम कइके बुराई के ऊपर बिजय पइहा।
13अधिकारिन के हुकुमन काहीं मानब
1हरेक मनइन काहीं सरकारी अधिकारिन के बातन काहीं मानँइ चाही; काहेकि परमातिमय उनहीं पंचन काहीं सासन करँइ के अधिकार दिहिन हीं, अउर जेतने अधिकार उनहीं पंचन काहीं मिले हँय, ऊँ सगले परमातिमय के द्वारा दीनगे हँय। 2एसे जे कोऊ अधिकारिन के बातन के बिरोध करत हें, ऊँ पंचे परमातिमा के हुकुम के बिरोध करत हें, अउर जेतने परमातिमा के हुकुम के बिरोध करत हें, ऊँ पंचे परमातिमा के तरफ से जरूर सजा पइहँय। 3काहेकि जेतने जने निकहे काम करत हें, उनहीं पंचन काहीं अधिकारिन से डेराँइ के जरूरत नहिं परय, पय जेतने जने बुरे काम करत हें, उँइन पंचे उनसे डेरात हें, एसे अगर तूँ पंचे चहते हया, कि हम अधिकारिन से न डेरई, त निकहे काम करा, अउर जब निकहे काम करिहा, त उनखे तरफ से तोंहार पंचन के बड़ाई होई; 4काहेकि तोंहरे पंचन के भलाइन के खातिर, परमातिमा उनहीं पंचन काहीं सेबक के रूप माहीं चुनिन हीं, पय अगर तूँ पंचे बुरे काम करते हया, त उनसे डेरा; काहेकि सजा देंइ के अधिकार परमातिमा उनहिन के हाँथे माहीं दिहिन हीं, कि जउने परमातिमा के क्रोध के मुताबिक बुरे काम करँइ बालेन काहीं ऊँ पंचे सजा देंय। 5एसे अधिकारिन के बातन काहीं मानब, केबल परमातिमा के क्रोध के डेरय भर से जरूरी नहिं आय, बलकिन तोंहार पंचन के सोच-बिचार घलाय गबाही देत हय, कि इआ बात सही आय। 6एसे तूँ पंचे अधिकारिन काहीं जमा घलाय देते हया, काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा के द्वारा सेबा करँइ के खातिर नियुक्त कीन गें हँय, जउन अपने करतब्य काहीं पूरा करँइ माहीं हमेसा लगे रहत हें। 7एसे हरेक जन के हक्क चुकाबा करा, जइसन जेही कर देंइ चाही ओही कर द्या, अउर जेही चुंगी नाका माहीं पइसा देंइ चाही, ओही पइसा द्या; अउर जेसे डेराँइ चाही त ओसे डेरा; अउर जेखर मान-सम्मान करँइ चाही, त ओखर मान-सम्मान करा।
एक दुसरे से प्रेम करत रहब
8अउर तूँ पंचे आपस माहीं एक दुसरे से प्रेम करँइ के अलाबा, अउर कउनव बात माहीं कोहू के रिनिहा न रहा; काहेकि जे कोऊ दुसरे से प्रेम रक्खत हय, उहय मूसा के बिधान काहीं पूर करत हय। 9हम इआ बात एसे कहि रहेन हय, कि तूँ पंचे ब्यभिचार न किहा; दुसरे के कतल न किहा, अउर चोरी न किहा; अउर न कउनव मेर के लालच किहा; अउर इनखे अलाबव अगर कउनव हुकुम हें, त ऊँ सगलेन के निचोड़ इआ बात माहीं आय जात हय, कि “तूँ अपने परोसी से अपनेन कि नाईं प्रेम रख्या।” 10काहेकि जे कोऊ अपने परोसी से प्रेम रक्खत हय, त उआ ओखर बुराई नहीं करय, एसे दुसरे से प्रेम करब मूसा के बिधान काहीं पूर करँइ कि नाईं हय। 11अउर तूँ पंचे कउनमेर के समय माहीं जि रहे हया, ओही पहिचान ल्या, अउर इआ जानिल्या, कि तोंहरे पंचन के खातिर, अपने नींद से जाग उठँय के समय आइगा हय, काहेकि जब हम पंचे बिसुआस किहेन तय, ओखे मुताबिक परमातिमा के द्वारा आखिरी मुक्ती पामँइ के समय नेरे आइगा हय। 12अउर रात बीतिन चुकी हय, अउर दिन निकरइन बाला हय; एसे हम पंचे अँधिआर के बुरे कामन काहीं छोंड़िके, जइसन एकठे सिपाही हँथिआर बाँधे तइआर रहत हय, उहयमेर हमहूँ पंचे उँजिआर के हँथिआर बाँधि लेई। 13अउर जइसन सगले मनई दिन के उँजिआर माहीं रहत हें, उहयमेर हमहूँ पंचन काहीं रहँइ चाही, अउर हमार पंचन के चाल-चलन निकहा होंइ चाही, इआ नहीं कि भोग-बिलास माहीं परि जई, अउर दारू पिके धुत्त रही, अउर ब्यभिचार करी, अउर लुच्चई माहीं परिके लड़ाई-झगड़ा करी, अउर कोहू से डाह करी। 14बलकिन हम पंचे प्रभू यीसु मसीह के सगले सुभाव काहीं अपनाय लेई, अउर अपने मन के बुरी इच्छन काहीं पूर करँइ के कोसिस न करी।
14अपने बिसुआसी भाई-बहिनिन के ऊपर दोस न लगाबा
1अउर हे बिसुआसी भाई-बहिनिव, जउन मनई बिसुआस माहीं कमजोर हें, उनहूँ काहीं अपने मंडली माहीं सामिल कइल्या, पय उनखे मतभेदन के बातन माहीं बाद-बिबाद करँइ के खातिर नहीं। 2काहेकि जउन मनई बिसुआस माहीं मजबूत हय, त उआ कहत हय कि हमहीं सब कुछ खाब उचित हय, पय जउन मनई बिसुआस माहीं कमजोर हय, त उआ केबल साकाहारी खाना खात हय। 3अउर उआ मनई जउन हरेकमेर के खाना खात हय, त ओही, उआ मनई काहीं तुच्छ न समझँइ चाही, जउन कुछ चीजन काहीं नहीं खाय। उहयमेर उहव मनई जउन कुछ चीजन काहीं नहीं खाय, उआ मनई काहीं जउन सगली चीजन काहीं खात हय, बुरा न कहँइ चाही; काहेकि परमातिमा दोनव जनेन काहीं अपनाइन हीं। 4तूँ कउनव दुसरे के घर के दास के ऊपर दोस लगामँइ बाले को होते हया? उआ सही काम करत हय, कि गलत काम करत हय, इआ बात के निरनय करब ओखे मालिक के काम आय, अउर उआ सहिन काम करँइ बाला बनाय दीन जई, काहेकि प्रभू ओही सही काम करँइ बाला बनाय सकत हें। 5अउर कउनव मनई एक दिन काहीं दुसरे दिन से बढ़िके मानत हय, अउर कउनव मनई सगले दिनन काहीं एक समान मानत हय, त हरेक जन काहीं अपने मन माहीं संका न करँइ चाही, बलकिन इआ निस्चित कइ लेंय चाही, कि हम पंचे जउन मानित हएन उआ ठीक हय। 6अउर जे कोऊ एक दिन काहीं दुसरे दिन से बढ़िके मानत हय, त उआ ओही प्रभू काहीं सम्मान देंइ के खातिर मानत हय। अउर जे कोऊ सब चीजन काहीं खात हय, उहव प्रभू काहीं सम्मान देंइ के खातिर खात हय, काहेकि उआ जउन कुछू खात हय, ओखे खातिर परमातिमा के धन्यबाद करत हय। अउर जे कोऊ कुछ चीजन काहीं नहीं खाय, उहव प्रभू काहीं सम्मान देंइ के खातिर नहीं खाय, अउर उहव परमातिमा के धन्यबाद करत हय। 7काहेकि हमरे पंचन म से कोऊ न त अपने खातिर जिअय, अउर न अपने खातिर मरतय आय। 8अउर अगर हम पंचे जिन्दा हएन, त प्रभू काहीं सम्मान देंइ के खातिर जिन्दा हएन; अउर अगर हम पंचे मरित हएन, त प्रभू काहीं सम्मान देंइ के खातिर मरित हएन; एसे हम पंचे चाह जिन्दा रही, चाह मर जई, तऊ हम पंचे प्रभुअय के आहेन। 9काहेकि मसीह एहिन खातिर मरे, अउर मरेन म से जि उठें, कि जउने, जउन मनई मरिगे हँय, अउर जउन जिन्दा हें, ऊँ दोनव के प्रभू कहामँइ। 10पय तूँ पंचे जउन केबल साकाहारी खाना खाते हया, त जउन भाई-बहिनी सब कुछ खात हें, उनखे ऊपर दोस काहे लगउते हया? अउर तूँ पंचे जउन सब कुछ खाते हया, त जउन भाई-बहिनी केबल साकाहारी खाना खात हें, उनखे ऊपर दोस काहे लगउते हया? काहेकि हमहीं पंचन काहीं अपने हरेक बातन के हिंसाब देंइ के खातिर, परमातिमा के न्याय के सिंहासन के आँगे ठाढ़ होंइ परी। 11काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं घलाय इआ लिखा हय, कि
“प्रभू कहत हें, कि हम अपने जीबन के कसम खाइके कहित हएन, कि हरेक मनइन काहीं हमरे आँगे गोड़न गिरँय क परी, अउर हरेक मनइन काहीं इआ सोइकार करँइ परी, कि हमहिन परमातिमा आहेन।”
12एसे हमरे पंचन म से हरेक जन काहीं, अपने-अपने कामन के हिंसाब परमातिमा काहीं देंइ परी।
अपने बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं पाप माहीं गिरामँइ के कारन न बना
13एसे हम पंचे आपस माहीं एक दुसरे के ऊपर दोस लगाउब छोंड़ि देई, अउर इआ ठान लेई, कि अपने बिसुआसी भाई-बहिनिन के गइल माहीं कउनव अरचन ठाढ़ न करब, अउर न ओही पाप करँइ के खातिर उकसउबय करब। 14अउर हम प्रभू यीसु के ऊपर बिसुआस करित हएन, अउर इआ निकहा से जानित हएन, कि कउनव खाँइ बाली चीज अपने-आप से असुद्ध नहीं होय, पय जे कोऊ कउनव खाँइ बाली चीज काहीं असुद्ध मानत हय, त उआ केबल ओहिन के खातिर भर असुद्ध होत ही। 15अउर अगर तोंहरे बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं तोंहरे खाना के कारन ठेस पहुँचत ही, त तूँ उनसे प्रेम नहीं करते आह्या, एसे तूँ अपने खाना के द्वारा उनखे बिसुआस से गिरँय के कारन न बना। काहेकि मसीह उनहूँ के खातिर आपन प्रान दिहिन हीं। 16एसे जउन तोंहरे खातिर निकहा हय, ओखर बुराई न होंइ पाबय। 17काहेकि परमातिमा के राज, खाँय-पिअँइ से सम्बन्धित नहिं आय, पय अगर हम पंचे परमातिमा के नजर माहीं निरदोस जीबन जी, अउर सगले मनइन से मेल-मिलाप से रही, अउर पबित्र आत्मा से मिलँइ बाले आनन्द माहीं जीबन बिताई, त परमातिमा हमरे पंचन के जीबन माहीं राज करिहँय। 18जे कोऊ अइसा जीबन जि के, मसीह के सेबा करत हय, त ओसे परमातिमा खुसी रहत हें, अउर सगले मनई ओखर मान-सम्मान करत हें। 19एसे हम पंचे ऊँ बातन काहीं करँइ माहीं लगे रही, जिनसे सगले मनइन के मेल-मिलाप होत हय, अउर एक दुसरे के आत्मिक उन्नति होंइ माहीं मदत मिलत ही। 20अउर तूँ पंचे अपने खाँय-पिअँइ के कारन, परमातिमा के काम काहीं न बिगाड़ा, काहेकि सगली खाँय-पिअँइ बाली चीजँय सुद्ध त हईं, पय उआ मनई के खातिर सगली चीजन काहीं खाब ठीक नहिं आय, जउन दुसरे भाई-बहिनिन काहीं पाप के गइल माहीं लइ जाती हँय। 21अउर अगर तोंहरे पंचन के माँस खाए से, अउर अंगूर के रस पिए से, अउर कुछू अइसन काम करे से, दुसरे भाई के आत्मिक जीबन नास होइ रहा हय, त तोंहईं पंचन काहीं अइसन कामन काहीं करब उचित नहिं आय। 22ईं बातन के बारे माहीं तोंहार पंचन के जउन बिसुआस होय, त ओही अपने अउर परमातिमा के बीच माहीं रक्खा; उआ मनई धन्य हय, जउने बात काहीं अपने नजर माहीं ठीक समझत हय, उहय करत हय, अउर ऊँ बातन माहीं अपने-आप काहीं दोसी नहीं पाबय। 23पय जे कोऊ कउनव चीज काहीं अपने मन माहीं संका कइके खात हय, त उआ परमातिमा के नजर माहीं दोसी ठहराबा जाय चुका हय, काहेकि उआ पूरा बिसुआस कइके नहीं खाय, अउर जउन कुछू बिना बिसुआस से कीन जात हय, उआ पापय आय।
15दुसरेन के आत्मिक उन्नति करा
1एसे हमहीं पंचन काहीं, जउन बिसुआस माहीं मजबूत हएन, इआ चाही, कि जउन हमार पंचन के बिसुआसी भाई-बहिनी बिसुआस माहीं कमजोर हें, त उनखे कमजोरिन काहीं सही; इआ नहीं, कि अपने-आप काहीं खुसी करँइ भर माहीं लगे रही। 2अउर हमरे पंचन म से हरेक जनेन काहीं इआ चाही, कि अपने परोसी के भलाई करँइ के इच्छा से उनहीं प्रसन्न करय, कि जउने उनखर आत्मिक उन्नति होय। 3काहेकि मसीह घलाय अपने-आप काहीं प्रसन्न नहीं किहिन, पय जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, “हे पिता अपना के बारे माहीं जउन बुरी बातँय सगले मनई कहत हें, ऊँ सगली बातँय हमरे ऊपर आय गई हँय15:3 भज 69:9।” 4अउर पबित्र सास्त्र माहीं जेतनी बातँय पहिले से लिखी गई हँय, ऊँ सगली हमहीं पंचन काहीं सिच्छा देंइ के खातिर लिखी गई हँय, कि हम पंचे धीरज अउर पबित्र सास्त्र के उत्साहित करँइ के द्वारा आसा रक्खी। 5हम इआ प्राथना करित हएन, कि धीरज अउर सान्ति देंइ बाले परमातिमा, तोंहईं पंचन काहीं इआ बरदान देंइ, कि तूँ पंचे मसीह यीसु के बताई बातन के मुताबिक आपस माहीं एक दुसरे से मिल जुलिके रहा। 6जउने तूँ पंचे एक मन होइके, एक अबाज माहीं हमरे प्रभू यीसु मसीह के पिता परमातिमा के बड़ाई करा।
खुसी के खबर सगले मनइन के खातिर आय
7एसे जइसन मसीह परमातिमा के बड़ाई करँइ के खातिर, तोंहईं पंचन काहीं अपनाइन हीं, उहयमेर तुहूँ पंचे घलाय एक दुसरे काहीं अपनाबा। 8अउर हम तोंहईं पंचन काहीं बताइत हएन, कि जउने वादन काहीं परमातिमा तोंहरे बाप-दादन से किहिन रहा हय, उनहीं पूर करँइ के खातिर, अउर परमातिमा के सच्चाई के सबूत देंइ के खातिर, मसीह यहूदी लोगन के सेबक बने। 9अउर गैरयहूदी लोग घलाय, परमातिमा के दया के कारन उनखर बड़ाई करँय, जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि
“हम गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं अपना के धन्यबाद करब, अउर अपना के नाम के भजन गाउब15:9 भज 18:49।”
10अउर पबित्र सास्त्र माहीं इहव लिखा हय, कि
“हे गैरयहूदी लोगव, उनखे प्रजा अरथात यहूदी लोगन के साथ मिलिके आनन्द करा15:10 ब्यब 32:43।”
11अउर पबित्र सास्त्र माहीं इहव लिखा हय, कि
“हे गैरयहूदी लोगव, प्रभू के स्तुति करा; अउर हरेक देस के सगले मनइव; प्रभू के बड़ाई करा।”
12अउर पबित्र सास्त्र माहीं यसायाह नबी के किताब माहीं लिखा हय, कि
“यिसय के बंस माहीं एक जन पइदा होई, अउर गैरयहूदी लोगन के ऊपर सासन करँइ के खातिर अई, अउर गैरयहूदी लोग उनखे ऊपर आसा रखिहँय।”
13हम प्राथना करित हएन, कि परमातिमा जउन तोंहईं पंचन काहीं आसा देत हें, अउर तूँ पंचे उनखे ऊपर बिसुआस करते हया, एसे ऊँ तोंहईं पंचन काहीं आनन्द अउर सान्ती से भर देंय, कि जउन आसा तूँ पंचे उनखे ऊपर रक्खे हया, उआ पबित्र आत्मा के सक्ती से अउर बाढ़त जाय।
14हे हमार भाई-बहिनिव, हम खुदय तोंहरे बारे माहीं निकहा से जानित हएन, कि तूँ पंचे भलाई करँइ माहीं आँगे हया, अउर परमातिमा तोंहईं पंचन काहीं भरपूर ग्यान दिहिन हीं, एसे तूँ पंचे एक दुसरे काहीं सिच्छा दइ सकते हया। 15तऊ हम तोंहईं पंचन काहीं, इआ चिट्ठी माहीं पुनि सुधि देबामँइ के खातिर, कुछ बातन के बारे माहीं कहँव-कहँव बड़ा साहस कइके लिखेन हय। अउर हम ईं बातन काहीं उआ किरपा के कारन लिखेन हय, जउन परमातिमा हमहीं दिहिन हीं। 16अउर उआ किरपा इआ आय, कि हम गैरयहूदी लोगन के खातिर, मसीह यीसु के सेबक बनिके, परमातिमा के खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर, एकठे याजक के रूप माहीं काम करी; जउने गैरयहूदी लोग, पबित्र आत्मा से पूरी तरह से पबित्र बनिके, एकठे भेंट के रूप माहीं परमातिमा के द्वारा सोइकार कीन जाँय। 17एसे हम मसीह यीसु के द्वारा परमातिमा के सेबा माहीं उनखे ऊपर घमन्ड कइ सकित हएन। 18काहेकि ऊँ बातन काहीं छोंड़िके, हमहीं अउर दुसरे बात के बारे माहीं कहँइ के साहस नहिं आय, जउन मसीह गैरयहूदी लोगन काहीं, परमातिमा के अधीनता माहीं लइ आमँइ के खातिर, बचन सुनामँइ के काम, 19अउर पबित्र आत्मा के सक्ती से चमत्कारन, अउर अचरज के कामन काहीं देखामँइ के काम हमरेन द्वारा किहिन हीं, इहाँ तक कि हमहिन यरूसलेम सहर से लइके, चारिव कइती इल्लुरिकुम प्रदेस तक मसीह के खुसी के खबर के पूर-पूर प्रचार किहेन हय। 20पय हमरे मन के इच्छा इआ ही, कि हम उहाँ खुसी के खबर सुनाई, जहाँ कउनव मनई मसीह के नाम तक नहीं जानँय, कहँव अइसा न होय, कि जहाँ दूसर मनई खुसी के खबर सुनाय चुके हँय, जउन एकठे घर के नेव कि नाईं हय, हम उहाँ खुसी के खबर सुनाई, जउन दुसरे के नेव माहीं घर बनामँइ के समान हय। 21पय जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, उहयमेर होय, “जिनहीं उनखे बारे माहीं नहीं बताबा ग, उँइन पंचे उनहीं देखिहँय, अउर जे कोऊ बचन नहीं सुनिन आय, उँइन पंचे समझिहँय।” 22अउर जहाँ-जहाँ खुसी के खबर नहीं सुनाई गे रही आय, उहाँ-उहाँ जाइके खुसी के खबर सुनामँइ माहीं लगे रहेन हय, इआ कारन से हम तोंहरे पंचन के लघे नहीं आय पाएन।
रोम देस माहीं जाँइ के पवलुस के योजना
23पय अब ईं प्रदेसन के हरेक जघन माहीं, हम खुसी के खबर सुनामँइ के काम पूर कइ चुकेन हय, अउर हमार कइअक बरिस से तोंहसे पंचन से मिलँइ के बड़ी इच्छा रही हय। 24एसे जब हम स्पेन देस काहीं जाब, त तोंहसे मिलिके जाब, काहेकि हम इआ आसा करित हएन, कि उआ यात्रा माहीं हम तोंहसे मिलब, अउर कुछ दिन संगति करब, तब हमार इच्छा पूर होइ जई, अउर तूँ पंचे उहाँ से आँगे के यात्रा माहीं हमार मदत किहा। 25पय अबे हम यरूसलेम सहर के बिसुआसी मनइन के मदत करँइ के खातिर उहाँ जइत हएन। 26काहेकि मकिदुनिया प्रदेस अउर अखाया प्रदेस के बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं इआ निकहा लाग, कि यरूसलेम सहर के गरीब बिसुआसी भाई-बहिनिन के खातिर चंदा एकट्ठा कइके देंय। 27अउर इआ करँइ के खातिर उनहीं निकहा त लाग, पय ऊँ पंचे उनखर रिनिहा घलाय हें, काहेकि ईं पंचे गैरयहूदी लोग, यरूसलेम सहर के यहूदी जाति के बिसुआसी भाई-बहिनिन से आत्मिक बातन के आसीस अरथात खुसी के खबर पाइन हीं, त इनहूँ पंचन काहीं उचित होत हय, कि उनखे सारीरिक जरूरतन के खातिर, उनहीं पंचन काहीं दान दइके उनखर सेबा करँय। 28एसे हम उनखर इआ काम पूर कइके अरथात यरूसलेम सहर के भाई-बहिनिन के हाँथे माहीं, इआ चंदा सउँपिके, तोंहसे पंचन से मिलत स्पेन देस काहीं चले जाब। 29अउर हम जानित हएन, कि जब हम तोंहरे पंचन के लघे अउब, त हमही पंचन काहीं मसीह के भरपूर आसीस मिली।
30अउर हे भाई-बहिनिव, हम पंचे यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करित हएन, अउर उँइन हमार पंचन के प्रभू आहीं, उनखर अउर पबित्र आत्मा के प्रेम जउन तोंहईं पंचन काहीं मिलत हय, उनखर सुध देबाइके, तोंहसे पंचन से बिनती करित हएन, कि हमरे साथ मिलिके हमरे खातिर परमातिमा से सच्चे मन से प्राथना करँइ माहीं लगे रहा। 31कि जउने यहूदिया प्रदेस के ऊँ मनइन से, जउन परमातिमा के ऊपर बिसुआस नहीं करँय, उनखे हाँथ से परमातिमा हमहीं बचामँइ, अउर यरूसलेम सहर के बिसुआसी भाई-बहिनिन के खातिर, जउन दान हम लए जइत हएन, ओही ऊँ पंचे बड़े आनन्द के साथ सोइकार करँय। 32अउर हम परमातिमा के इच्छा के मुताबिक आनन्द के साथ तोंहरे पंचन के लघे अई, अउर हम पंचे आपस माहीं एक दुसरे काहीं हिम्मत दइ सकी। 33अउर हम प्राथना करित हएन, कि सान्ती देंइ बाले परमातिमा तोंहरे पंचन के साथ रहँय। आमीन।
16पवलुस के अभिबादन
1हम तोंहसे पंचन से किंख्रिया सहर के मसीही मन्डली माहीं सेबा करँइ बाली फीबा बहिनी के खातिर बिनती करित हएन, 2काहेकि ऊँ प्रभू के ऊपर बिसुआस करँइ बाली बहिनी आहीं, एसे उनहीं प्रभू के दासी समझिके तूँ पंचे सोइकार करा; अउर अगर उनहीं कउनव चीज के तोंहसे पंचन से जरूरत परय, त उनखर मदत करा; काहेकि ऊँ खुब मनइन के मदत किहिन हीं, इहाँ तक कि हमार घलाय मदत किहिन रहा हय।
3अउर मसीह यीसु के सेबा माहीं हमरे साथ काम करँइ बाली प्रिस्का अउर उनखे मंसेरुआ अक्विला काहीं घलाय हमार नबस्कार कहि दिहा। 4ऊँ पंचे हमहीं बचामँइ के खातिर आपन प्रान घलाय देंइ के खातिर तइआर रहे हँय, हम उनखर धन्यबाद करित हएन, अउर केबल हमहिन भर नहीं, बलकिन गैरयहूदी लोगन के सगली मसीही मन्डली घलाय उनखर धन्यबाद करती हँय। 5अउर उनखे घर माहीं जउन मसीही मन्डली लागत ही, ओमा एकट्ठा होंइ बाले सगले भाई-बहिनिन काहीं नबस्कार कहि दिहा, अउर हमरे पियार साथी इपयनितुस काहीं, जउन आसिया प्रदेस के पहिल मसीह बिसुआसी आहीं, उनहूँ काहीं घलाय हमार नबस्कार कहि दिहा। 6अउर मरियम बहिनी काहीं, जउन तोंहरे पंचन के खातिर खुब मेहनत करती हईं, उनहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 7अउर अन्द्रुनीकुस अउर यूनियास काहीं जउन हमरे यहूदी जाति के बिसुआसी भाई आहीं, अउर हमरे साथ जेल माहीं घलाय गे रहे हँय, अउर यीसु मसीह के खास चेलन माहीं ऊँ पंचे मसहूर रहे हँय, अउर हमसे पहिले मसीह के ऊपर बिसुआस किहिन रहा हय, उनहूँ काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 8अउर भाई अम्पलियातुस काहीं, जउन प्रभू के ऊपर बिसुआस करत हें, एसे हम उनसे प्रेम करित हएन, उनहूँ से हमार नबस्कार कहि दिहा। 9अउर भाई उरबानुस काहीं, जउन हमरे साथ मसीह के सेबा किहिन हीं, उनहूँ काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा, अउर हमरे पियार साथी इस्तखुस काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 10अउर भाई अपिल्लेस काहीं जउन मसीह के सेबा माहीं खरे निकरे हँय, हमार नबस्कार कहि दिहा, अउर अरिस्तुबुलुस के घर माहीं रहँइ बाले बिसुआसी लोगन काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 11अउर हमरे यहूदी जाति के भाई हेरोदियोन काहीं नबस्कार कहि दिहा, अउर भाई नरकियुस के घर माहीं जेतने जन प्रभू के ऊपर बिसुआस करत हें, उनहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 12अउर बहिनी त्रूफेना अउर त्रूफोस काहीं, जउन प्रभू के सेबा माहीं मेहनत करती हईं, हमार नबस्कार कहि दिहा, अउर पियार बहिनी पिरसिस काहीं घलाय जउन प्रभू के सेबा माहीं खुब मेहनत करती हईं, उनहूँ काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 13अउर भाई रूफुस काहीं, जिनहीं प्रभू के सेबा के खातिर चुना ग हय, अउर उनखे महतारी काहीं जउन हमरे खातिर महतारी कि नाईं हईं, उनहीं दोनव जनेन काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 14अउर असुन्क्रितुस अउर फिलगोन अउर हिरमेस, अउर पत्रुबास, अउर हिर्मास अउर उनखे साथ माहीं रहँइ बाले सगले भाइन काहीं नबस्कार कहि दिहा। 15अउर भाई फिलुलुगुस, अउर बहिनी यूलिया अउर नेर्युस अउर उनखे बहिनी काहीं, अउर भाई उलुम्पास अउर उनखे साथ माहीं रहँइ बाले सगले बिसुआसी भाइन काहीं हमार नबस्कार कहि दिहा। 16अउर तूँ पंचे आपस माहीं बड़े प्रेम के साथ नबस्कार किहा, तोंहईं पंचन काहीं मसीह के सगली मन्डलिन के तरफ से नबस्कार।
पवलुस के आखिरी सलाह
17हे हमार भाई-बहिनिव, हम तोंहसे बिनती करित हएन, कि तूँ पंचे मसीह के जउन सिच्छा पाया हय, ओखे बिरोध माहीं सिच्छा दइके, जउन मनई फूट डारत हें, अउर बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं बिसुआस से भटकाय देत हें, उनहीं पहिचान ल्या करा, अउर उनसे दूरी रहा करा। 18काहेकि इआमेर के मनई हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के सेबा नहीं करँय, बलकिन अपने कमाई के खातिर सेबा करत हें; अउर मीठ-मीठ बातँय कइके भोले-भाले मनइन काहीं बिसुआस से भटकाय देत हें। 19पय सगले बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं मालुम हय, कि तूँ पंचे प्रभू के हुकुमन काहीं मनते हया, एसे हम तोंहरे पंचन के बारे माहीं खुब आनन्दित हएन, पय हमार इच्छा इआ हय, कि परमातिमा के नजर माहीं, जउने कामन काहीं तूँ पंचे निकहा समझते हया, उनहीं करँइ माहीं लगे रहा, अउर बुरे कामन से तूँ पंचे दूरी रहा। 20अउर सान्ती देंइ बाले परमातिमा सइतान काहीं तोंहरे गोड़ेन से हरबिन कुचरबाय देइहँय। अउर हम प्राथना करित हएन, कि हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के किरपा, तोंहरे पंचन के ऊपर होत रहय।
21अउर तीमुथियुस जउन हमरे साथ सेबा करत हें, अउर हमरे यहूदी जाति के साथी लोग लूकियुस अउर यासोन अउर सोसिपत्रुस के तरफ से तोंहईं पंचन काहीं नबस्कार पहुँचय। 22अउर हम तिरतियुस जउन पवलुस के साथ इआ चिट्ठी काहीं लिख रहेन हय, हमहूँ प्रभू के नाम से तोंहईं पंचन काहीं नबस्कार कहित हएन। 23भाई गयुस के तरफ से जउन हमार अउर मसीही मन्डली के सगले बिसुआसी भाई-बहिनिन के स्वागत-सत्कार करत हें, तोंहईं पंचन काहीं नबस्कार पहुँचय। अउर भाई इरास्तुस जउन सहर के भन्डारी हें, अउर भाई क्वारतुस के तोंहईं पंचन काहीं नबस्कार। 24अउर हम प्राथना करित हएन, कि हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के किरपा तोंहरे पंचन के ऊपर होत रहय। आमीन।
25अउर परमातिमा के बड़ाई होय, हम यीसु मसीह के बारे माहीं जउने खुसी के खबर काहीं तोंहईं पंचन काहीं बतायन हय, ओहिन के मुताबिक तोंहईं पंचन काहीं उँइन बिसुआस माहीं मजबूत कइ सकत हें, अउर परमातिमा के इआ रहस्यपूर्न सत्य जुगन-जुगन से छिपा रहा हय। 26पय अब ओही हमेसा रहँइ बाले परमातिमा के हुकुम से उनखे सँदेस बतामँइ बालेन के लिखी किताबन के द्वारा, सगले जातिअन के मनइन काहीं बताबा ग हय, कि जउने उनखे ऊपर बिसुआस कइके, ऊँ पंचे उनखर हुकुम मानँइ बाले होइ जाँय। 27उँइन एकलउते बुद्धिमान परमातिमा के बड़ाई, यीसु मसीह के कीन कामन के द्वारा, जुग-जुग होत रहय। आमीन!