यूहन्ना काहीं मिले दरसनन के बातँय
इआ किताब के परिचय
यूहन्ना काहीं मिले दरसनन के बातँय, अइसन समय माहीं लिखी गे रही हँय, जब मसीहियन काहीं उनखे बिसुआस के कारन सताबा जात रहा हय। काहेकि ऊँ पंचे यीसु मसीह के ऊपर प्रभू अउर मालिक के रूप माहीं बिसुआस करत रहे हँय। इआ कारन से लेखक के चिन्ता के खास बिसय, अपने पढ़ँइ बालेन माहीं आसा अउर उत्साह के संचार करब रहा हय। एसे ऊँ उनसे इआ निबेदन करत हें, कि ऊँ पंचे इआ दुख अउर सताव के समय माहीं बिसुआस के काबिल बने रहँय।
इआ किताब के अधिकतर हिस्सा प्रकासनन अउर दरसनन के कतारन के रूप माहीं हय। जिनहीं संकेतिक भाँसा के रूप माहीं लिखा ग हय। अइसा माना जात हय, कि उआ समय के मसीहियन काहीं इआ समझ म आइगा रहा हय। पय दुसरे मनइन के खातिर रहस्य बना रहिगा। जइसन संगीत माहीं एकठे धुन होत ही, उहयमेर इआ किताब के बिसय- बस्तु बेर-बेर अनेकव तरीकन से, अलग-अलग दर्सनन के कतारन के द्वारा दोहराई जात ही। पय इआ किताब के बिस्तार से ब्याख्या के सम्बन्ध माहीं मतभेद हय, फेरव खास बिसय साफ-साफ हय। परमातिमा प्रभू यीसु मसीह के द्वारा अपने सगले बइरिन काहीं, जउने माहीं सइतान घलाय सामिल हय, हमेसा के खातिर पूरी तरह से हराय देइहँय। अउर जब इआ जीत पूर होइ जई, तब परमातिमा अपने बिसुआस के काबिल मनइन काहीं, नबा अकास अउर नई धरती काहीं उनहीं आसीस के रूप माहीं देइहँय।
हे भाई-बहिनिव अपना पंचे दुख अउर सताव के समय माहीं, बिसुआस माहीं मजबूत बने रही, काहेकि प्रभू यीसु मसीह हरबिन आमँइ बाले हें, हम पंचे जउन उनखे नाम के खातिर दुख अउर सताव सहित हएन, त परमातिमा ओखर इनाम हमहीं पंचन काहीं जरूर देइहँय।
रूप-रेखा :
इआ किताब के परिचय 1:1-8
सुरुआत के दरसन अउर सातव मसीही मन्डलिन काहीं चिट्ठी 1:9—3:22
सात मुहरन से बन्द चरमपत्र 4:1—8:1
सातठे तुरही 8:2—11:19
अजिगर अउर दुइठे जानबर 12:1—13:18
इनखे अलाबा दूसर दरसन 14:1—15:8
परमातिमा के कोप के सातठे खोरबा 16:1-21
बेबीलोन के बिनास, जानबर, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले लबरे मनई, अउर सइतान के हार 17:1—20:10
अन्तिम न्याय 20:11-15
नबा अकास, नई धरती, अउर नबा यरूसलेम 21:1—22:5
उपसंहार 22:6-21
11परमातिमा आपन प्रकासन यीसु मसीह काहीं एसे दिहिन, कि ऊँ अपने दासन काहीं ऊँ बातँय देखामँय, जिनखर हरबिन होब जरूरी हय, अउर ऊँ अपने स्वरगदूत काहीं पठइके उनखे द्वारा अपने दास यूहन्ना काहीं बताइन, 2जउन परमातिमा के बचन अउर यीसु मसीह के गबाही, अरथात जउन कुछू ऊँ देखिन रहा हय, ओखर गबाही दिहिन। 3धन्य हय उआ मनई, जउन इआ भबिस्यबानी के बचन काहीं पढ़त हय, अउर धन्य हें ऊँ पंचे जउन सुनत हें, अउर एमाहीं लिखी बातन काहीं मानत हें, काहेकि समय नजदीक आइगा हय।
सातँव मसीही मन्डलिन काहीं नबस्कार
4यूहन्ना के तरफ से आसिया प्रदेस के सातव मसीही मन्डली के नाम। अउर उनखे तरफ से जउन हें, अउर जउन रहे हँय, अउर जउन आमँइ बाले हें; अउर उन सातँव आत्मन के तरफ से, जउन उनखे सिंहासन के आँगे हईं, 5अउर यीसु मसीह के तरफ से, जउन बिसुआस के काबिल गबाह, अउर मरेन म से जि उठँय बालेन माहीं पहिलउठा, अउर धरती के राजन के ऊपर घलाय सासन करँइ बाले आहीं, तोंहईं पंचन काहीं किरपा अउर सान्ती मिलत रहय। ऊँ हमसे पंचन से प्रेम करत हें, अउर उँइन अपने खून के द्वारा हमहीं पंचन काहीं पापन से छोड़ाइन हीं। 6अउर हमहीं पंचन काहीं एकठे राज, अउर अपने पिता परमातिमा के खातिर याजक घलाय बनाय दिहिन हीं; उनहिन के महिमा अउर सामर्थ जुगन-जुगन तक रहय। आमीन। 7देखा, ऊँ बदरिन के साथ आमँइ बाले हें; अउर हरेक आँखी उनहीं देखी, इहाँ तक कि जउन उनहीं बेधिन रहा हय, ऊँ पंचे घलाय उनहीं देखिहँय, अउर धरती के सगले कुल उनखे कारन छाती पिटिहँय। इआ जरूर होई। आमीन। 8प्रभू परमातिमा, जउन हें, अउर जउन रहे हँय, अउर जउन आमँइ बाले हें, जउन सबसे सक्तिसाली हें, इआ कहत हें, “हमहिन अल्फा अउर ओमेगा आहेन1:8 आदि अउर अन्त ।”
यूहन्ना काहीं मसीह के दरसन मिलब
9हम यूहन्ना, जउन तोंहार पंचन के भाई, अउर यीसु के कस्ट, अउर राज, अउर धीरज माहीं, तोंहार पंचन के सहभागी आहेन, परमातिमा के बचन, अउर यीसु के गबाही के कारन, पतमुस नाम के टापू माहीं रहेन हय। 10हम प्रभू के दिन आत्मा माहीं आय गएन, अउर अपने पीछे तुरही कि नाईं बड़ा बोल इआ कहत सुनेन, 11कि “जउन कुछू तूँ देखते हया, ओही किताब माहीं लिखिके, सातव मसीही मन्डलिन के लघे पठय द्या, अरथात इफिसुस अउर इसमुरना, अउर पिरगमुन, अउर थुआतीरा, अउर सरदीस, अउर फिलदिलफिया, अउर लौदीकिया काहीं।”
12तब हम उनहीं देखँइ के खातिर जउन हमसे बोलत रहे हँय; आपन मुँह फेरन; अउर पीछे फिरिके हम सोने के सातठे दीबटन1:12 दिया रक्खँइ के स्टैन्ड काहीं देखन। 13अउर उन दीबटन के बीच माहीं मनई के लड़िका कि नाईं एकठे मंसेरुआ काहीं देखेन, जउन गोड़ेन तक के ओन्हा पहिरे, अउर छाती माहीं सोने के पट्टा बाँधे रहे हँय। 14उनखर मूँड़ अउर बार उजर ऊन अउर पाला कि नाईं उजर रहे हँय; अउर उनखर आँखी आगी के लपट कि नाईं रही हँय। 15अउर उनखर गोड़ उत्तम पीतल कि नाईं रहे हँय, जउन मानो भट्ठी माहीं तपाए गे होंय; अउर उनखर बोल, खुब पानी के बोल कि नाईं रहा हय। 16अउर ऊँ अपने दहिने हाँथ माहीं सातठे तरइया लए रहे हँय, अउर उनखे मुँहे से दुइ धार बाली चोंख तलबार निकरत रही हय; अउर उनखर मुँह अइसन चमकत रहा हय, जइसन सुरिज तेज घाम के समय चमकत हय। 17जब हम उनहीं देखेन, त उनखे गोड़ेन माहीं लहास कि नाईं गिर परेन, अउर उँइ हमरे ऊपर आपन दहिना हाँथ धइके, इआ कहिन, कि “डेरा न; हम पहिल अउर अन्तिम अउर जिन्दा आहेन। 18हम मर गएन तय, अउर अब देखा; हम जुगन-जुगन तक जिन्दा रहब; अउर मउत अउर अधोलोक के उघन्नी हमरेन लघे हईं। 19एसे जउन बातँय तूँ देखे हया, अउर जउन बातँय होइ रही हँय; अउर जउन बाद माहीं होंइ बाली हईं, ऊँ सगलिन काहीं लिख ल्या। 20अउर ऊँ सातव तरइअन के भेद, जिनहीं तूँ हमरे दहिने हाँथ माहीं देख रहे हया, अउर ऊँ सातव सोने के दीबटन के भेद, ऊँ सातठे तरइया, सातव मसीही मन्डलिन के दूत आहीं, अउर ऊँ सातव दीबट, सातठे मसीही मन्डली आहीं।”
2इफिसुस सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
1इफिसुस के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, कि “जउन सातँव तरइया अपने दहिने हाँथ माहीं लए हें, अउर सोने के सातँव दीबटन के बीच माहीं चलत फिरत हें, ऊँ इआ कहत हें, कि 2हम तोंहरे काम, अउर मेहनत, अउर तोंहरे धीरज काहीं जानित हएन; अउर इहव घलाय, कि तूँ बुरे मनइन काहीं बरदास नहीं कइ सकते आह्या, अउर जउन अपने-आप काहीं यीसु मसीह के खास चेला कहत हें, अउर आहीं न, उनहीं पंचन काहीं घलाय तूँ जाँच परखिके लबरा पाया हय। 3अउर तूँ धीरज धरते हया, अउर हमरे नाम के खातिर दुख उठाबत-उठाबत थके नहिं आह्या। 4पय हमहीं तोंहरे बिरोध माहीं इआ कहँइ क हय, कि तूँ आपन पहिले कि नाईं प्रेम करब छोंड़ दिहा हय। 5तूँ हमसे पहिले केतना प्रेम करत रहे हया, अउर अब केतना प्रेम करते हया, ओही सुध कइके, पस्चाताप करा, अउर पहिले कि नाईं काम करा; अउर अगर तूँ पस्चाताप न करिहा, त हम तोंहरे लघे आइके, तोंहरे दीबट काहीं उआ जघा से हटाय देब। 6पय हाँ, तोंहरे माहीं इआ बात त हय, कि तूँ गलत सिच्छा देंइ बाले नीकुलाई दल के कामन से नफरत करते हया, जिनसे हमहूँ नफरत करित हएन। 7जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय, जउन बिजय पाई, ओही हम उआ जीबन के बिरबा म से, जउन परमातिमा के स्वरगराज माहीं हय, फर खाँइ काहीं देब।”
इसमुरना सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
8इसमुरना के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, कि “जउन पहिल अउर अन्तिम आहीं; जउन मरिगें तय अउर अब जिन्दा होइगे हँय, ऊँ इआ कहत हें, कि 9हम तोंहरे कस्ट अउर गरीबी काहीं जानित हएन; (पय तूँ धनी हया) अउर जउन मनई अपने-आप काहीं यहूदी कहत हें, अउर आहीं न, बलकिन सइतान के सभा आहीं, उनखे बुराई काहीं घलाय जानित हएन। 10जउन कस्ट तोंहईं उठामँइ परी उनसे डेरा न। काहेकि देखा, सइतान तोंहरे पंचन म से कइअक जनेन काहीं जेल माहीं डारँइ बाला हय, जउने तूँ पंचे जाँचे-परखे जा; अउर तोंहईं पंचन काहीं दस दिन तक कस्ट उठामँइ परी, प्रान देंइ तक बिसुआसी रहा; त हम तोंहईं जीबन के मुकुट देब। 11जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय, जउन बिजय पाई, ओही दूसर मउत से हानि न पहुँची।”
पिरगमुन सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
12पिरगमुन के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, कि “जिनखे लघे दुइ धार बाली निकही चोंख तलबार ही, ऊँ इआ कहत हें, कि 13हम इआ त जानित हएन, कि तूँ उहाँ रहते हया, जहाँ सइतान के सिंहासन हय; अउर तूँ हमरे नाम माहीं बने रहते हया; अउर हमरे ऊपर बिसुआस करँइ से, उन दिनन माहीं पीछे नहीं हट्या, जउने माहीं हमार बिसुआस के काबिल गबाह अन्तिपास, तोंहरे पंचन के बीच माहीं, उआ जघा माहीं मार डारा ग, जहाँ सइतान रहत हय। 14पय हमहीं तोंहरे बिरोध माहीं कुछ बातँय कहँइ क हय, काहेकि तोंहरे इहाँ कुछ अइसन हें, जउन बिलाम के सिच्छा काहीं मानत हें, जउन बालाक राजा काहीं, इजराइलिअन के आँगे ठोकर के कारन रक्खँय सिखाइस, कि ऊँ पंचे मूरतिन के ऊपर चढ़ाई चीजन काहीं खाँय, अउर ब्यभिचार करँय2:14 गिन 22:2-41; 31:16। 15उहयमेर तोंहरे इहाँ कुछ त अइसन हें, जउन गलत सिच्छा देंइ बाले नीकुलाई दल के सिच्छा काहीं मानत हें। 16एसे मन फिराबा, नहीं त हम तोंहरे लघे हरबिन आइके, अपने मुँहे के तलबार से उनखे साथ लड़ब। 17अउर जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय; जे बिजय पाई, ओही हम, न देखाँइ बाले मन्ना म से देब; अउर ओही एकठे उजर पथरा घलाय देब; अउर उआ पथरा माहीं एकठे नाम घलाय लिखा होई, जेही ओही पामँइ बाले के अलाबा, अउर कोऊ न जानी।”
थुआतीरा सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
18थुआतीरा के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, “परमातिमा के लड़िका जिनखर आँखी आगी के लपट कि नाईं हईं, अउर जिनखर गोड़ उत्तम पीतल कि नाईं हें, ऊँ इआ कहत हें, कि 19हम तोंहरे कामन, अउर प्रेम, अउर बिसुआस, अउर सेबा, अउर धीरज काहीं जानित हएन, अउर इहव जानित हएन, कि तोंहार पिछले काम, पहिल कामन से बढ़िके हें। 20पय हमहीं तोंहरे बिरोध माहीं इआ कहँइ क हय, कि तूँ उआ मेहेरिआ इजेबेल काहीं रहँइ देते हया, जउन अपने-आप काहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाली कहत ही, उआ अपने सिच्छा से, हमरे सेबकन काहीं ब्यभिचार करँय, अउर मूरतिन के आँगे चढ़ाई चीजन काहीं खाँय के खातिर बहकाबत ही। 21हम ओही मन फिरामँय के खातिर मोका दिहेन, पय उआ अपने ब्यभिचार से मन नहीं फिरामँय चाहय। 22देखा, हम ओही घोर कस्ट माहीं डारित हएन, अउर जे ओखे साथ ब्यभिचार करत हें, अगर ऊँ पंचे ओखी कि नाईं कामन से अपने मन काहीं न बदलिहँय, त हम उनहूँ काहीं घोर कस्ट माहीं डारब। 23हम ओखे लड़िका बिटिअन काहीं मारि डारब; अउर तब सगली मसीही मन्डली जान लेइहँय, कि हिरदँय अउर मन काहीं जाँचय-परखँय बाले हमहिन आहेन, अउर हम तोंहरे पंचन म से हरेक काहीं, उनखे कामन के मुताबिक बदला देब। 24पय तूँ पंचे थुआतीरा के बाँकी मनइन से, जेतने इआ सिच्छा काहीं नहीं मानँय, अउर ऊँ बातन काहीं जिनहीं सइतान के गहिल बातँय कहत हें, नहीं जनते आह्या, इआ कहित हएन, कि हम तोंहरे पंचन के ऊपर अउर बोझ न डारब। 25पय हाँ, जउन तोंहरे पंचन के लघे हय, ओही हमरे आमँय तक थाम्हें रहा। 26जे बिजय पाई, अउर हमरे कामन के मुताबिक अन्त तक करत रही, ओही हम जाति-जाति के मनइन के ऊपर अधिकार देब। 27अउर उआ लोहे के राजदन्ड लए, उनखे ऊपर राज करी, जउनमेर कुम्हार के माटी के बरतन चकनाचूर होइ जात हें। हमहूँ घलाय अइसय अधिकार अपने पिता से पाएन हँय। 28अउर हम ओही भिनसारे के तरइया देब। 29जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय।”
3सरदीस सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
1सरदीस के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, “जिनखे लघे परमातिमा के सातठे आत्मा, अउर सातठे तरइया हईं, ऊँ इआ कहत हें, कि हम तोंहरे कामन काहीं जानित हएन, कि तूँ जिन्दा त कहउते हया, पय हया मरे। 2जागत रहा, अउर उन चीजन काहीं जउन बाँकी रहि गई हँय, अउर जउन मिटँय बाली हईं, उनहीं मजबूत करा; काहेकि हम तोंहरे कउनव काम काहीं, अपने परमातिमा के नजर माहीं, पूर नहीं पाएन। 3एसे सुधि करा, कि तूँ कइसन सिच्छा पाया तय, अउर सुने रहे हया, ओहिन माहीं बने रहा, अउर पस्चाताप करा, अगर तूँ जागत न रइहा, त हम चोर कि नाईं आय जाब, अउर तूँ बेलकुल न जाने पइहा, कि हम कउने घरी, तोंहरे ऊपर आय परब। 4पय हाँ, सरदीस माहीं तोंहरे इहाँ कुछ अइसन मनई हें, जउन अपने-अपने ओन्हन काहीं असुद्ध नहीं किहिन, ऊँ पंचे उजर ओन्हा पहिरे हमरे साथ घुमिहँय, काहेकि ऊँ पंचे एखे काबिल हें। 5जे बिजय पाई, ओही इहइमेर उजर ओन्हा पहिराबा जई, अउर हम ओखर नाम जीबन के किताब म से कउनव मेर से न काटब, पय ओखर नाम अपने पिता, अउर उनखे स्वरगदूतन के आँगे मान लेब। 6जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय।”
फिलदिलफिया सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
7अउर फिलदिलफिया के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, कि “जउन पबित्र अउर सच्चे हें, अउर जेखे लघे राजा दाऊद के उघन्नी हय, जेखे खोले काहीं कोऊ बन्द नहीं कइ सकय, अउर बन्द कीन काहीं कोऊ खोल नहीं सकय, ऊँ इआ कहत हें, कि 8हम तोंहरे कामन काहीं जानित हएन; देखा, हम तोंहरे आँगे एकठे दुअरा खोलिके रखे हएन, जउने काहीं कोऊ बन्द नहीं कइ सकय; तोंहार सक्ती थोरिन काहीं त हय, तऊ तूँ हमरे बचन काहीं पालन किहे हया, अउर हमरे नाम काहीं इनकार नहीं किहे आह्या। 9देखा, हम उन सइतान के पीछे चलँइ बालेन काहीं, तोंहरे काबू माहीं कइ देब, जउन खुद काहीं यहूदी कहत हें, पय आहीं न, बलकिन ऊँ झूँठ बोलँइ बाले आहीं, देखा, हम अइसन करब, कि ऊँ तोंहरे गोड़न गिरि हँय, अउर इआ जान लेइहँय, कि हम तोंहसे प्रेम करित हएन। 10हम तोंहईं धीरज धरँय के खातिर कहेन तय, त तूँ धीरज धरे हया, एसे हमहूँ तोंहईं परिच्छा के उआ समय बचाइके रक्खब, जउन धरती माहीं रहँइ बालेन के जाँचय-परखँय के खातिर, सगले संसार माहीं आमँइ बाली हय। 11हम हरबिन आमँइ बाले हएन; जउन कुछू तोंहरे लघे हय, ओही थाम्हें रहा, कि जउने कोऊ तोंहार मुकुट छड़ाय न पाबय। 12जे बिजय पाई, ओही हम परमातिमा के मन्दिर माहीं एकठे खम्भा बनाउब; अउर उआ पुनि कबहूँ बहिरे न निकरी; अउर हम अपने परमातिमा के नाम, अउर अपने परमातिमा के सहर, अरथात नबा यरूसलेम सहर के नाम, जउन हमरे परमातिमा के लघे से, अरथात स्वरग से उतरँय बाला हय, अउर आपन नबा नाम ओखे ऊपर लिखब। 13जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय।”
लौदीकिया सहर के मसीही मन्डली काहीं मसीह के सँदेस
14अउर लौदीकिया के मसीही मन्डली के दूत काहीं इआ लिखा, कि “जउन आमीन, अउर बिसुआस के काबिल, अउर सच्चे गबाह हें, अउर परमातिमा के स्रस्टी के मूल कारन आहीं, ऊँ इआ कहत हें, कि 15हम तोंहरे कामन काहीं जानित हएन, कि तूँ न त ठंड हया, अउर न गरम, इआ भला होत, कि तूँ ठंड इआ कि गरम होत्या। 16एसे कि तूँ कुनकुन हया, अउर न ठंड आह्या, अउर न गरमय, हम तोहईं अपने मुँहे से उगिलँइ बाले हएन। 17तूँ जउन इआ कहते हया, कि हम धनी हएन, अउर धनमान होइ गएन हय, अउर हमहीं कउनव चीज के कमी नहिं आय, अउर इआ नहीं जनते आह्या, कि तूँ अभागा, अउर तुच्छ, अउर कंगाल, अउर आँधर, अउर नंगा हया। 18एहिन से हम तोंहईं इआ सलाह देइत हएन, कि आगी माहीं तपाबा सोन हमसे मोल लइ ल्या, कि धनी होइजा; अउर उजर ओन्हा लइ ल्या, कि ओही पहिरिके तोंहईं अपने नंगापन के लज्जा न होय, अउर अपने आँखिन माहीं लगामँइ के खातिर सुरमा लइ ल्या, कि तूँ देखँइ लागा। 19अउर हम जेसे-जेसे प्रेम करित हएन, ऊँ सगलेन काहीं डाँट-फटकार लगाइत हएन, एसे उत्साही बना, अउर मन फिराबा। 20देखा, हम दुअरा माहीं ठाढ़े खट-खटाइत हएन; अगर कोऊ हमार बोल सुनिके दुअरा खोली, त हम ओखे भीतर आइके ओखे साथ खाना खाब, अउर उआ हमरे साथ। 21जे बिजय पाई, ओही हम अपने साथ अपने सिंहासन माहीं बइठाउब, जइसन हमहूँ घलाय बिजय पाइके, अपने पिता के साथ उनखे सिंहासन माहीं बइठि गएन हय। 22‘जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय, कि पबित्र आत्मा मसीही मन्डलिन से का कहत हय’।”
4स्वरग माहीं अराधना
1ईं बातन के बाद, जब हम नजर उठाइके देखेन, त का देखित हएन, कि स्वरग माहीं एकठे दुअरा खुला हय; अउर जेही हम पहिले तुरही कि नाईं अबाज से, अपने साथ बातँय करत सुने रहेन हय, उँइन कहत हें, कि “इहाँ ऊपर आय जा, अउर हम ऊँ बातँय तोंहईं देखाउब, जिनखर ईं बातन के बाद पूर होब जरूरी हय।” 2अउर तुरन्तय हम पबित्र आत्मा से भर गएन; अउर का देखित हएन, कि एकठे सिंहासन स्वरग माहीं धरा हय, अउर उआ सिंहासन के ऊपर कोऊ बइठ हें। 3अउर जउन ओखे ऊपर बइठ हें, उनखर सोभा यसब अउर गोमेद रतन कि नाईं देखाई देत ही, अउर उआ सिंहासन के चारिव कइती मरकत रतन कि नाईं एकठे मेघधनुस देखाई देत हय। 4अउर उआ सिंहासन के चारिव कइती चउबिस सिंहासन हें; अउर ईं सिंहासनन के ऊपर चउबिस अँगुआ उजर ओन्हा पहिरे बइठ हें, अउर उनखे मूँड़ेन माहीं सोने के मुकुट हें। 5अउर उआ सिंहासन म से बिजुली अउर गरजब निकरत हें, अउर सिंहासन के आँगे आगी के सातठे दिया जल रहे हँय, ऊँ परमातिमा के सातठे आत्मा आहीं। 6अउर उआ सिंहासन के आस-पास सीसा कि नाईं चमकदार पारदर्सी समुद्र हय, अउर बीच माहीं सिंहासन के आस-पास चारठे जिन्दा प्रानी हें, जिनखे आँगे पीछे आँखिन-आँखी हईं। 7पहिल प्रानी सेर कि नाईं हय, अउर दूसर प्रानी बरधा कि नाईं हय, अउर तिसरे प्रानी के मुँह मनई कि नाईं हय, अउर चउथ प्रानी उड़त चील्ह कि नाईं हय। 8अउर चरहूँ प्रानिन के छय-छयठे पखना हें, अउर चारिव कइती, अउर भीतर आँखिन आँखी हईं; अउर ऊँ पंचे रातव दिना बिना अराम किहे, इआ कहत रहत हें, कि
“पबित्र, पबित्र, पबित्र प्रभू परमातिमा, सर्बसक्तिमान, जउन रहे हँय, अउर जउन हें, अउर जउन आमँइ बाले हें।”
9अउर जब ऊँ प्रानी उनखर जउन सिंहासन माहीं बइठ हें, अउर जउन जुगन-जुगन से जिन्दा हें, महिमा अउर मान-सम्मान अउर धन्यबाद करिहँय। 10तब चउबीसव अँगुआ सिंहासन माहीं बइठँय बाले के आँगे गिर परिहँय, अउर उनहीं, जउन जुगन-जुगन से जिन्दा हें, प्रनाम करिहँय; अउर आपन-आपन मुकुट सिंहासन के आँगे इआ कहत धइ देइहँय, कि
11“हे हमार पंचन के प्रभू, अउर परमातिमा, अपनय महिमा, अउर मान-सम्मान, अउर सामर्थ के काबिल हएन; काहेकि अपनय सगली चीजन काहीं बनाएन हय, अउर ऊँ अपनय के मरजी से बनाई गे रही हँय, अउर बनाई गई हँय।”
5मुहरबन्द किताब अउर मेम्ना
1अउर जउन सिंहासन माहीं बइठ रहे हँय, हम उनखे दहिने हाँथ माहीं एकठे किताब देखेन, जउन भीतर अउर बाहर लिखी रही हय, अउर उआ सात मुहर लगाइके बन्द कीन गे रही हय। 2फेर हम एकठे बलमान स्वरगदूत काहीं देखेन, जउन तेज अबाज से इआ प्रचार करत रहे हँय, कि “इआ किताब काहीं खोलँय अउर एखर मुहर टोरँइ के काबिल को हय?” 3अउर न स्वरग माहीं, न धरती माहीं, न धरती के नीचे, कोऊ उआ किताब काहीं खोलँय, अउर ओखे ऊपर नजर डारँय के काबिल निकरा। 4तब हम फूट-फूटिके रोमँइ लागेन, काहेकि उआ किताब काहीं खोलँय, इआ कि ओखे ऊपर नजर डारँय के काबिल कोहू नहीं मिला। 5तब ऊँ अँगुअन म से एक जने हमसे कहिन, “न रोबा; देखा, यहूदा के कुल के उआ सेर, जउन राजा दाऊद के बंसज आहीं, उआ किताब काहीं खोलँय, अउर ओखर सातँव मोहर टोरँइ के खातिर बिजयी भे हँय।” 6अउर हम उआ सिंहासन, अउर चारिव जिन्दा प्रानिन, अउर ऊँ अँगुअन के बीच माहीं, मानो एकठे बध कीन मेम्ना ठाढ़ देखेन; ओखे सातठे सींग अउर सातठे आँखी रही हँय; ईं परमातिमा के सातँव आत्मा आहीं, जिनहीं परमातिमा सगली धरती के ऊपर पठइन हीं। 7ऊँ आइके उनखे दहिने हाँथ से जउन सिंहासन के ऊपर बइठ रहे हँय, उआ किताब लइ लिहिन, 8अउर जब ऊँ किताब लइ लिहिन, त ऊँ चारिव जिन्दा प्रानी, अउर चउबीसव अँगुआ, उआ मेम्ना के आँगे गिर परें; अउर हरेक के हाँथ माहीं बीना अउर महकँइ बाली चीजन से भरे, सोने के खोरबा रहे हँय, ईं त पबित्र लोगन के प्राथना आहीं। 9अउर ऊँ पंचे इआ नबा गाना गामँइ लागें, कि
“अपनय इआ किताब काहीं लेंइ, अउर एखर मुहरँय खोलँय के काबिल हएन; काहेकि अपना बध होइके अपने खून से हरेक कुल, अउर भाँसा, अउर लोग, अउर जाति म से परमातिमा के खातिर लोगन काहीं मोल लिहेन हँय।
10अउर उनहीं, हमरे पंचन के परमातिमा के खातिर एकठे राज, अउर याजक बनाएन हय; अउर ऊँ पंचे धरती के ऊपर राज करत हें।”
11अउर जब हम देखेन, त उआ सिंहासन, अउर उन प्रानिन, अउर ऊँ अँगुअन के चारिव कइती खुब स्वरगदूतन के बोल सुनेन, जिनखर गिनती लाखन, करोड़न के रही हय। 12अउर ऊँ जोर-जोर से कहत रहे हँय, कि “बध कीन मेम्नय सामर्थ, अउर धन, अउर ग्यान, अउर सक्ती, अउर मान-सम्मान, अउर महिमा, अउर बड़ाई के काबिल हें।” 13तब हम स्वरग माहीं, अउर धरती के ऊपर, अउर धरती के नीचे, अउर समुंद्र के बनाई सगली चीजन काहीं, अउर सब कुछ काहीं जउन उन माहीं हँय, इआ कहत सुनेन, कि जउन सिंहासन के ऊपर बइठ हें, उनखर, अउर मेम्ना के धन्यबाद, अउर मान-सम्मान, अउर महिमा अउर राज, जुगन-जुगन तक रहय। 14अउर चारिव जिन्दा प्रानी आमीन कहिन, अउर अँगुआ लोग मुँह के बल गिरिके गोड़न गिरें।
6सातव मोहरन के खोला जाब
1पुनि हम देखेन, कि मेम्ना ऊँ सातव मुहरन म से एकठे काहीं खोलिन; अउर ऊँ चारिव प्रानिन म से एकठे के गरजँय कि नाईं बोल सुनान, कि “आबा!” 2अउर हमहीं एकठे उजर घोड़ा देखाई दिहिस, अउर ओखर सबार धनुस लए हय, अउर ओही एकठे मुकुट दीन ग, अउर उआ बिजई कि नाईं, बिजय यात्रा के खातिर निकर परा।
3अउर जब मेम्ना दूसर मुहर खोलिन, त हम दुसरे प्रानी काहीं इआ कहत सुनेन, कि “आबा!” 4ओखे बाद एकठे अउर घोड़ा निकरा, जउन लाल रंग के रहा हय; ओखे सबार काहीं इआ अधिकार दीन ग, कि धरती के ऊपर से मेल-जोल काहीं उठाय लेय, जउने मनई एक दुसरे के कतल करँय; अउर ओही एकठे बड़ी तलबार दीन गे। 5अउर जब मेम्ना तीसर मुहर खोलिन, त हम तिसरे प्रानी काहीं इआ कहत सुनेन, कि “आबा!” अउर हमहीं एकठे करिआ घोड़ा देखान, अउर ओखे सबार के हाँथे माहीं एकठे तउलना रहा हय; 6अउर हम उन चारिव प्रानिन के बीच म से एकठे बोल इआ कहत सुनेन, कि “एक दिनार के सेर भर गोहूँ, अउर एक दिनार के तीन सेर जबा, पय जयतून के तेल अउर अंगूर के रस के नुकसान न किहा।”
7अउर जब मेम्ना चउथ मोहर खोलिन, त हम चउथ प्रानी के बोल इआ कहत सुनेन, कि “आबा!” 8अउर हमहीं एकठे पिअर घोड़ा देखान; अउर ओखे सबार के नाम मउत हय, अउर अधोलोक ओखे पीछे-पीछे हय, अउर उनहीं धरती के एक चउथाई भाग के ऊपर इआ अधिकार दीन ग, कि तलबार, अउर अकाल, अउर महामारी, अउर धरती के बन पसुअन के द्वारा मनइन काहीं मारि डारँय। 9अउर जब मेम्ना पचमी मुहर खोलिन, त हम स्वरग के बेदी के नीचे उनखे प्रानन काहीं देखेन, जउन परमातिमा के बचन के कारन, अउर उआ गबाही के कारन, जउन ऊँ पंचे दिहिन रहा हय, बध कीन गे रहे हँय। 10ऊँ पंचे खुब चन्डे गोहराइके कहिन, “हे मालिक, हे पबित्र, अउर सत्य; अपना कब तक न्याय न करब? अउर धरती के रहँइ बालेन से, हमरे खून के बदला कब तक न लेब?” 11अउर उनमा से हरेक जन काहीं, उजर ओन्हा दीन ग, अउर उनसे कहा ग, कि अउर थोरी देर तक अराम करा, जब तक तोंहार पंचन के साथी सेबक लोग, अउर भाई लोग, जउन तोंहरिन कि नाईं बध होंइ बाले हें, उनहूँ के घलाय गिनती पूर न होइ जाय। 12अउर जब मेम्ना छठमी मुहर खोलिन, त हम देखेन, कि एकठे बड़ा भुँइडोल भ; अउर सुरिज कम्बल कि नाईं करिआ, अउर पूरी जोंधइआ खून कि नाईं होइगे। 13अउर अकास के तरइयाँ धरती के ऊपर अइसन गिर परीं, जइसन तेज आँधी से हालिके अंजीर के बिरबा म से कच्चे फर झरत हें। 14अउर अकास अइसन सरकि ग, जइसन चिट्ठी लपेटे से सरकि जात ही; अउर हरेक पहार, अउर टापू, अपने जघा से टरिगें। 15अउर धरती के राजा, अउर प्रधान, अउर मुखिया, अउर धनमान, अउर समरथी लोग, अउर हरेक दास, अउर हरेक अजाद, पहारन के खोहन माहीं, अउर चट्टानन माहीं जाइके लुकिगें। 16अउर पहारन, अउर चट्टानन से कहँइ लागें, “हमरे ऊपर गिर परा; अउर हमहीं पंचन काहीं उनखे मुँहे से जउन सिंहासन के ऊपर बइठ हें, अउर मेम्ना के कोप से लुकाय ल्या। 17काहेकि उनखे कोप के भयानक दिन आय पहुँचा हय, अब को ठहर सकत हय?”
7इजराइल के एक लाख चवालिस हजार लोग
1एखे बाद हम धरती के चरहूँ कोनमा माहीं, चारठे स्वरगदूतन काहीं ठाढ़ देखेन, ऊँ पंचे धरती के चरहूँ हबा काहीं रोंके रहे हँय, जउने धरती, इआ कि समुंद्र, इआ कि कउनव बिरबन के ऊपर हबा न चलय। 2फेर हम एकठे अउर स्वरगदूत काहीं, जिन्दा परमातिमा के मुहर लए पूरुब से ऊपर कइती आबत देखेन; ऊँ उन चरहूँ स्वरगदूतन से जिनहीं धरती अउर समुंद्र के नुकसान करँइ के अधिकार दीन ग तय, खुब चन्डे गोहराइके कहिन। 3“जब तक हम अपने परमातिमा के सेबकन के लिलारे माहीं, मुहर न लगाय देई, तब तक धरती, अउर समुंद्र, अउर बिरबन काहीं नुकसान न पहुँचाया।” 4अउर जिनखे ऊपर मुहर लगाई गे रही हय, हम उनखर गिनती सुनेन, अरथात इजराइल के सन्तानन के सगले कुलन म से, एक लाख चवालिस हजार मनइन के ऊपर मुहर लगाई गे। 5यहूदा के कुल म से बारा हजार के ऊपर मुहर लगाई गे, अउर रूबेन के कुल म से बारा हजार के ऊपर; अउर गाद के कुल म से बारा हजार के ऊपर। 6अउर आसेर के कुल म से बारा हजार के ऊपर; अउर नप्ताली के कुल म से बारा हजार के ऊपर; अउर मनस्सिह के कुल म से बारा हजार के ऊपर, 7समौन के कुल म से बारा हजार के ऊपर; लेबी के कुल म से बारा हजार के ऊपर; इस्साकार के कुल म से बारा हजार के ऊपर, 8जबूलून के कुल म से बारा हजार के ऊपर, यूसुफ के कुल म से बारा हजार के ऊपर, अउर बिन्यामीन के कुल म से बारा हजार के ऊपर मुहर लगाई गे।
बड़ी भारी भीड़
9एखे बाद हम देखेन, कि हरेक जाति, अउर कुल, अउर लोग अउर भाँसा म से एकठे अइसन बड़ी भीड़, जउने काहीं कोऊ गिन नहीं सकत रहा आय, उजर ओन्हा पहिरे, अउर अपने हाँथेन माहीं खजूर के डेरइअन काहीं लए, सिंहासन के आँगे, अउर मेम्ना के आँगे ठाढ़ रही ही। 10अउर खुब चन्डे चिल्लाइके कहत ही, कि मुक्ती के खातिर हमरे पंचन के परमातिमा के, जउन सिंहासन के ऊपर बइठ हें, अउर मेम्ना के जय-जयकार होय। 11अउर सगले स्वरगदूत, उआ सिंहासन अउर अँगुअन, अउर चरहूँ जिन्दा प्रानिन के चारिव कइती ठाढ़ हें, फेर ऊँ पंचे सिंहासन के आँगे मुँह के बल गिर परें; अउर परमातिमा के गोड़न गिरिके कहिन, 12“आमीन! हमरे पंचन के परमातिमा के बड़ाई, अउर महिमा, अउर ग्यान, अउर धन्यबाद, अउर मान-सम्मान, अउर सामर्थ, अउर सक्ती जुगन-जुगन तक बनी रहय। आमीन!”
13तब अँगुअन म से एक जने हमसे कहिन; “ईं उजर ओन्हा पहिरे को आहीं? अउर कहाँ से आए हँय?” 14हम उनसे कहेन; “हे, मालिक, अपनय जानित हएन।” तब ऊँ हमसे कहिन; “ईं ऊँ पंचे आहीं, जउन उआ महाकस्ट से निकरिके आए हँय; ईं पंचे अपने-अपने ओन्हन काहीं मेम्ना के खून से धोइके उजर किहिन हीं।
15इहय कारन से ऊँ पंचे परमातिमा के सिंहासन के आँगे हें, अउर उनखे मन्दिर माहीं दिन-रात उनखर सेबा करत हें, अउर जउन सिंहासन माहीं बइठ हें, ऊँ उनखे ऊपर आपन तम्बू ठाढ़ करिहँय।
16अउर पुनि ऊँ पंचे भूँखे पिआसे न होइहँय, अउर न उनखे ऊपर घाम, न कउनव तपन परी7:16 यसा 49:10।”
17काहेकि मेम्ना जउन सिंहासन के बीच माहीं हें, उनखर देखभाल करिहँय; अउर उनहीं पंचन काहीं जीबन रूपी पानी के झिन्नन के लघे लइ जाबा करिहँय, अउर परमातिमा उनखे आँखिन से सगले आँसू पोंछि डरिहँय7:17 भज 23:1,2; यसा 25:8; यहे 34:23।
8सतमी मुहर अउर सोने के धूपदान
1अउर जब मेम्ना सतमी मुहर खोलिन, त स्वरग माहीं आधा घन्टा तक सन्नाटा छाइगा। 2तब हम ऊँ सतहूँ स्वरगदूतन काहीं देखेन, जउन परमातिमा के आँगे ठाढ़ रहत हें, अउर उनहीं सातठे तुरही दीन गईं।
3ओखे बाद एकठे अउर स्वरगदूत सोने के धूपदानी लए आएँ, अउर बेदी के लघे ठाढ़ भें; अउर उनहीं खुब काहीं धूप दीन ग, कि सगले पबित्र मनइन के प्राथनन के साथ सोने के उआ बेदी माहीं, जउन सिंहासन के आँगे हय चढ़ामँय। 4अउर उआ धूप के धुँआ, पबित्र मनइन के प्राथनन समेत स्वरगदूत के हाँथ से परमातिमा के आँगे पहुँचिगा। 5तब स्वरगदूत धूपदानी लइके, ओमाहीं बेदी के आगी भरिन, अउर धरती माहीं डार दिहिन; एसे गरजब, अउर भारी बोल, अउर बिजुली चमकँइ लागीं, अउर भुँइडोल होंइ लागें।
सतहूँ स्वरगदूतन के तुरही फूँकब
6तब ऊँ सतहूँ स्वरगदूत जिनखे लघे सातठे तुरही रही हँय, उनहीं फूँकँइ के खातिर तइआर भें। 7पहिल स्वरगदूत तुरही फूँकिन, तब खून से मिले ओला अउर आगी उत्पन्न भे अउर धरती माहीं डारी गे; अउर धरती के एक तिहाई हिस्सा जरिगा, अउर एक तिहाई बिरबा जरिगें, अउर सगला हरिअर चारा घलाय जरिगा।
8दूसर स्वरगदूत तुरही फूँकिन, त मानो आगी कि नाईं जरत एकठे बड़ा भारी पहार समुंद्र माहीं डारा ग; अउर समुंद्र के एक तिहाई हिस्सा खून होइगा। 9अउर समुंद्र के एक तिहाई जीव-जन्तु मरिगें, अउर एक तिहाई जिहाज नास होइगें।
10तीसर स्वरगदूत तुरही फूँकिन, अउर एकठे बड़ी भारी तरइया, जउन मसाल कि नाईं जरत रही हय, स्वरग से टूट, अउर नदिअन के एक तिहाई हिस्सा माहीं, अउर पानी के झिन्नन माहीं आय गिरी। 11उआ तरइया के नाम नागदवना हय; अउर पानी के एक तिहाई हिस्सा नागदवना बिरबा कि नाईं करू होइगा, अउर खुब मनई पानी के करू होइ जाँइ से मरिगें।
12चउथ स्वरगदूत तुरही फूँकिन, अउर सुरिज के एक तिहाई हिस्सा, अउर जोंधइआ के एक तिहाई हिस्सा, अउर तरइअन के एक तिहाई हिस्सा माहीं बिपत्ती आइगे, इहाँ तक कि उनखर एक तिहाई हिस्सा माहीं अँधिआर होइगा, अउर दिन अउर रात के एक तिहाई हिस्सा माहीं घलाय अँधिआर होइगा। 13अउर जब हम पुनि देखेन, त अकास के बीच माहीं एकठे चील्ह काहीं उड़त, अउर खुब चन्डे इआ कहत सुनेन, “ऊँ तिनहूँ स्वरगदूतन के तुरहिन के बोल के कारन, जिनखर फूँकब अबे बाँकी हय, धरती माहीं रहँइ बालेन के ऊपर घोर बिपत्ती आमँइ बाली ही।”
91जब पचमाँ स्वरगदूत तुरही फूँकिन, त हम स्वरग से धरती के ऊपर एकठे तरइया गिरत देखेन, अउर उनहीं अथाह कुन्ड के उघन्नी दीन गे। 2अउर ऊँ अथाह कुन्ड काहीं खोलिन, अउर कुन्ड म से बड़ी भट्ठी कि नाईं धुँआ उठा, अउर कुन्ड के धुँआ से सुरिज अउर हबा माहीं भारी अँधिआर होइगा। 3अउर उआ धुँआ म से धरती माहीं टिड्डी निकरीं, अउर उनहीं बीछिन कि नाईं सक्ती दीन गय। 4अउर उनसे कहा ग, कि न धरती के चारा काहीं, न कउनव हरियरी काहीं, न कउनव बिरबा काहीं नुकसान पहुँचामय, केबल उन मनइन काहीं नुकसान पहुँचामय, जिनखे लिलारे माहीं परमातिमा के मुहर नहीं लगी आय। 5अउर ऊँ टिड्डिन काहीं मनइन काहीं मारि डारँइ के त नहीं, पय मनइन काहीं पाँच महीना तक पीरा देंइ के अनुमति दीन गय, अउर उनखर पीरा अइसन रही हय, जइसन बीछी के ऊरा मारे से मनइन काहीं होत ही। 6ऊँ दिनन माहीं मनई मउत काहीं ढुँढ़िहँय, अउर न पइहँय; अउर मरँय के इच्छा करिहँय, अउर मउत उनसे दूरी भागी।
7अउर ऊँ चिड्डन के अकार, लड़ाई के खातिर तइआर घोड़न कि नाईं रहा हय, अउर उनखे मूँड़े माहीं मानो सोने के मुकुट रहे हँय; अउर उनखर मुँह मनइन कि नाईं रहे हँय। 8अउर उनखर बार मेहेरिअन के बार कि नाईं, अउर दाँत सेरन कि नाईं रहे हँय। 9अउर ऊँ पंचे लोहे कि नाईं झिलम पहिरे रहे हँय, अउर उनखे पखनन के अबाज अइसन रही हय, जइसन रथन अउर खुब घोड़न के, जउन लड़ाई माहीं दउड़त होंय। 10अउर उनखर पूँछ बीछिन कि नाईं रही हँय, अउर उनमा ऊरा रहे हँय, अउर उनहीं पाँच महीना तक मनइन काहीं दुख पहुँचामँइ के जउन सक्ती मिली रही हय, उआ उनखे पूँछन माहीं रही हय। 11अथाह कुन्ड के दूत उनखे ऊपर राजा रहा हय, ओखर नाम इब्रानी भाँसा माहीं अबद्दोन, अउर यूनानी भाँसा माहीं अपुल्लयोन हय। 12पहिल बिपत्ती बीत चुकी, देखा, अब इनखे बाद दुइठे बिपत्ती अउर आमँइ बाली हईं।
13जब छठमाँ स्वरगदूत तुरही फूँकिन, त जउन सोने के बेदी परमातिमा के आँगे हय, ओखे सींगन म से हम अइसन बोल सुनेन। 14मानो छठएँ स्वरगदूत से, जिनखे लघे तुरही रही हय, कोऊ कहि रहे हँय, कि “ऊँ चारिव स्वरगदूतन काहीं, जउन बड़ी नदिया फरात के लघे बाँधे हँय, खोल देंय।” 15अउर ऊँ चारिव दूत खोल दीनगें, जउन उआ घरी, अउर दिन, अउर महीना, अउर बरिस के खातिर तइआर कीन गे रहे हँय, कि मनइन के एक तिहाई हिस्सा काहीं मारि डारँय। 16“उनखे फउज के सबारन के गिनती बीस करोड़ रही हय।” इआ बात काहीं हम सुनेन, 17अउर हमहीं इआ दरसन माहीं, घोड़ा, अउर उनखर अइसन सबार देखाई दिहिन, जिनखर झिलम आगी कि नाईं लाल, अउर धूम्रकान्त कि नाईं नीली, अउर गन्धक कि नाईं पिअर रही हँय, अउर ऊँ घोड़न के मूँड़, सेरन के मूड़न कि नाईं रहे हँय, अउर उनखे मुँहे से आगी, अउर धुँआ, अउर गन्धक निकरत रहे हँय। 18ईं तीनव महामारिन; अरथात आगी, अउर धुँआ, अउर गन्धक से, जउन उनखे मुँहे से निकरत रहे हँय, एक तिहाई मनई मारि डारे गें। 19काहेकि ऊँ घोड़न के सक्ती उनखे मुँहे, अउर उनखे पूँछन माहीं रही ही; एसे कि उनखर पूँछ साँपन कि नाईं रही हँय, अउर उनखे पूँछन माहीं मूँड़ घलाय रहे हँय, अउर उनहिन से ऊँ पंचे पीरा पहुँचाबत रहे हँय। 20अउर बाँकी मनई जउन ऊँ महामारिन से नहीं मरे रहे आहीं, अपने हाँथन के कामन से मन नहीं फिराइन, ऊँ पंचे बुरी आत्मन के पूजा करत रहिगें, अउर सोन-चाँदी, अउर पीतल अउर पथरा, अउर लकड़ी, के मूरतिन के पूजा करब घलाय नहीं छोंड़िन, जउन न देख सकती आहीं, न सुन सकती आहीं, न चल सकती आहीं। 21अउर जउन हत्या, अउर टोना, अउर ब्यभिचार, अउर चोरी, ऊँ पंचे किहिन रहा हय, उनसे मन नहीं फिराइन।
10स्वरगदूत अउर छोट किताब
1हम पुनि एकठे अउर सक्तिसाली स्वरगदूत काहीं बदरी ओढ़े, स्वरग से उतरत देखेन। अउर उनखे मूँड़े माहीं इन्द्रधनुस रहा हय, अउर उनखर मुँह सुरिज कि नाईं, अउर उनखर गोड़ आगी के खम्भा कि नाईं रहे हँय। 2उनखे हाँथ माहीं एकठे छोट क खुली किताब रही हय; ऊँ आपन दहिना गोड़ समुंद्र माहीं, अउर बामा धरती माहीं धरिन। 3अउर अइसन चन्डे चिल्लाने, जइसन सेर गरजत होय; अउर जब ऊँ चिल्लाने, त गरजँय के सातठे बोल सुनाई दिहिन। 4जब गरजँय के सतहूँ बोल सुनाई दइ चुकें, त हम लिखँइ बाले रहेन हय, अउर हम स्वरग से इआ बोल सुनेन, कि जउन बातँय गरजँय के ऊँ सातठे बोलन से सुने हया, उनहीं गुप्त रक्खा, अउर न लिखा। 5अउर जउने स्वरगदूत काहीं हम समुंद्र अउर धरती माहीं ठाढ़ देखन रहा हय; ऊँ आपन दहिना हाँथ स्वरग कइती उठाइन। 6अउर परमातिमा जउन जुगन-जुगन तक जिन्दा रहत हें, जउन स्वरग अउर जउन कुछू ओमाहीं हय, अउर धरती काहीं, अउर जउन कुछू ओखे ऊपर हय, अउर समुंद्र काहीं, अउर जउन कुछू ओमाहीं हय, बनाइन हीं, उनहिन के कसम खाइके कहिन, “अब त अउर देरी न होई। 7जउने दिन सतएँ स्वरगदूत के तुरही के बोल सुनाई देई, उहय दिन परमातिमा के गुप्त भेद पूर होइ जई, जइसन ऊँ अपने सेबकन, अउर सँदेस बतामँइ बालेन के द्वारा बताइन रहा हय।” 8अउर जउने बोल काहीं हम स्वरग से बोलत सुनेन तय, ऊँ पुनि हमसे बात करँइ लागें; कि “जा, जउन स्वरगदूत समुंद्र अउर धरती माहीं ठाढ़ हें, उनखे हाँथे के खुली किताब काहीं लइ ल्या।” 9अउर हम स्वरगदूत के लघे जाइके कहेन, “इआ छोट किताब काहीं हमहीं दइ द्या।” ऊँ हमसे कहिन, “ल्या एही खाय ल्या; इआ तोंहार पेट करू त करी, पय तोंहरे मुँहे माहीं महिपर कि नाईं मीठ लागी।” 10एसे हम उआ छोट किताब काहीं, ऊँ स्वरगदूत के हाँथे से लइके खाय लिहेन, उआ हमरे मुँहे माहीं महिपर कि नाईं मीठ त लाग, पय जब हम ओही खाय लिहेन, त हमार पेट करू होइगा10:10 यहे 2:8—3:3। 11तब हमसे इआ कहा ग, “तोहईं, खुब मनइन, अउर जातिअन, अउर भाँसन, अउर राजन के बारे माहीं पुनि भबिस्यबानी करँय परी।”
11दुइठे गबाह
1ओखे बाद हमहीं नापँय के खातिर एकठे सरकन्डा दीन ग, अउर कोऊ कहिस, “उठा, परमातिमा के मन्दिर, अउर बेदी काहीं नाप ल्या, अउर ओमाहीं अराधना करँइ बालेन के गिनती करा। 2पय मन्दिर के बहिरे के अँगना छोंड़ द्या; ओही न नापा, काहेकि उआ गैरयहूदी लोगन काहीं दीन ग हय, अउर ऊँ पंचे पबित्र सहर काहीं बयालिस महीना तक रउँदिहँय। 3अउर हम अपने दुइठे गबाहन काहीं इआ अधिकार देब, कि टाट ओढ़े, एक हजार दुइ सव साठ दिन तक भबिस्यबानी करँय।”
4ईं गबाह उँइन जयतून के दुइठे बिरबा, अउर दुइठे दीबट आहीं, जउन धरती काहीं बनामँइ बाले प्रभू के आँगे ठाढ़ रहत हें। 5अउर अगर कोऊ उनहीं नुकसान पहुँचामँइ चाहत हय, त उनखे मुँहे से आगी निकरिके उनखे बइरिन काहीं भसम कइ देत ही, अउर अगर कोऊ उनहीं नुकसान पहुँचामँइ चाही, त जरूर इहइमेर से मार डारा जई। 6उनहीं अधिकार हय, कि अकास काहीं बन्द करँय, कि जउने उनखे भबिस्सबानी के दिनन माहीं, बदरी न बरसय, अउर उनहीं सगले पानी के ऊपर अधिकार हय, कि ओही खून बनामँइ, अउर जब-जब चाहँय तब-तब धरती के ऊपर हरेकमेर के बिपत्ती लइ आमँय। 7अउर जब ऊँ पंचे आपन गबाही दइ चुकिहँय, तब उआ खतरनाक जानबर जउन अथाह कुन्ड म से निकरी, उनसे लड़िके उनहीं हराय देई, अउर उनहीं मारि डारी। 8उनखर लहासँय उआ बड़े सहर के चउराहा माहीं परी रइहँय, जउन आत्मिक रीति से सदोम अउर मिस्र कहाबत हय, जहाँ उनखर प्रभू घलाय क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय। 9अउर सगले मनइन, अउर कुलन, अउर भाँसन, अउर जातिअन म से मनई उनखे लहासन काहीं साढ़े तीन दिना तक देखत रइहँय, अउर उनखे लहासन काहीं कब्र माहीं धरँय न देइहँय। 10धरती के रहँइ बाले, उनखे मउत से आनन्दित अउर मगन होइहँय, अउर एक दुसरे के लघे भेंट पठबइहँय, काहेकि ईं दोनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले, धरती के रहँइ बालेन काहीं सताइन रहा हय। 11पय साढ़े तीन दिना के बाद, परमातिमा के तरफ से जीबन के साँस उन माहीं समाइगे, अउर ऊँ पंचे अपने गोड़े के बल ठाढ़ होइगें, अउर उनहीं देखँइ बालेन के ऊपर बड़ा भय छाइगा। 12तब उनहीं स्वरग से एकठे बड़ा बोल सुनाई दिहिस, “इहाँ ऊपर आबा!” इआ सुनिके ऊँ पंचे बदरी के ऊपर सबार होइके, अपने बइरिन के देखत-देखत स्वरग माहीं चढ़िगें। 13फेर उहय समय एकठे बड़ा भुँइडोल भ, अउर सहर के दसमा हिस्सा गिर परा; अउर उआ भुँइडोल से सात हजार मनई मरिगें, अउर बाँकी डेराइगें, अउर स्वरग के परमातिमा के बड़ाई किहिन।
14दूसर बिपत्ती बीत चुकी, देखा, तीसर बिपत्ती हरबिन आमँइ बाली ही।
सतमी तुरही के फूँका जाब
15अउर जब सतमा दूत तुरही फूँकिन, त स्वरग माहीं एखे बारे माहीं बड़े-बड़े बोल होंइ लागें, कि “संसार के राज हमरे पंचन के प्रभू के, अउर उनखे मसीह के होइ ग हय, अउर ऊँ जुगन-जुगन तक राज करिहँय।” 16तब चउबीसव अँगुआ जउन परमातिमा के आँगे अपने-अपने सिंहासन माहीं बइठ रहे हँय, मुँह के बल गिरिके परमातिमा के गोड़न गिरिके, 17इआ कहँइ लागें,
“हे सर्बसक्तिमान प्रभू परमातिमा, जउन हएन, अउर जउन रहे हएन, हम पंचे अपना के धन्यबाद करित हएन, कि अपना अपने बड़ी सामर्थ काहीं काम म लइआइके राज किहेन हय।
18अउर गैरयहूदी लोग क्रोध किहिन, अउर अपना के कोप आय पहुँचा हय, अउर उआ समय आइगा हय, कि मरे मनइन के न्याय कीन जाय, अउर अपना के सँदेस बतामँइ बाले सेबकन अउर पबित्र मनइन काहीं, अउर उन छोट-बड़ेन काहीं जउन अपना के नाम से डेरात हें, बदला दीन जाय, अउर धरती के बिगाड़ँइ बाले नास कीन जाँय।”
19तब परमातिमा के जउन मन्दिर स्वरग माहीं हय, उआ खोला ग, अउर उनखे मन्दिर माहीं, उनखे करार के सन्दूख देखाई दिहिस, अउर बिजुली अउर बोल अउर गरजब अउर भुँइडोल भें, अउर बड़े-बड़े ओला गिरें।
12मेहेरिआ अउर अजिगर
1ओखे बाद स्वरग माहीं एकठे बड़ा चिन्ह देखाई दिहिस, अरथात एकठे मेहेरिआ, जउन सुरिज ओढ़े रही हय, अउर जोंधइआ ओखे गोड़े के नीचे रही हय, अउर ओखे मूँड़े माहीं बारा तरइअन के मुकुट रहा हय। 2उआ लड़कहाई भे, अउर चिल्लात रही हय; काहेकि उआ लड़िका होंय के पीरा माहीं परे कराहत रही हय। 3एकठे अउर चिन्ह स्वरग माहीं देखाई दिहिस; अउर देखा, एकठे बड़ा भारी लाल अजिगर रहा हय, जेखे सातठे मूँड़ अउर दसठे सींग रहे हँय, अउर ओखे मूँड़ेन माहीं सातठे राजमुकुट रहे हँय। 4अउर ओखर पूँछ अकास के तरइअन के एक तिहाई हिस्सा काहीं, खींचिके धरती माहीं गिराय दिहिस। उआ अजिगर उआ मेहेरिआ के आँगे जउन लड़कहाई रही हय ठाढ़ भ, कि जब उआ लड़िका पइदा करय, त ओखे लड़िका काहीं लील लेय। 5अउर उआ मेहेरिआ के लड़िका भ, जउन लोहे के राजदन्ड लए, सगले जातिअन के ऊपर राज करँइ बाला रहा हय, अउर उआ लड़िका एकाएक परमातिमा के लघे, अउर उनखे सिंहासन के लघे उठाइके पहुँचाय दीन ग। 6अउर उआ मेहेरिआ उआ जंगल माहीं भागिगे, जहाँ परमातिमा के तरफ से, ओखे खातिर एकठे जघा तइआर कीन गे रही हय, कि उहाँ उआ एक हजार दुइ सव साठ दिना तक पाली पोसी जाय।
7ओखे बाद स्वरग माहीं लड़ाई भे, मीकाईल अउर उनखर स्वरगदूत अजिगर से लड़ँइ काहीं निकरें, अउर अजिगर अउर ओखर दूत उनसे लड़ें। 8पय जीत नहीं पाएँ, अउर स्वरग माहीं उनखे खातिर पुनि जघा नहीं रहिगे। 9तब उआ बड़ा भारी अजिगर, अरथात उहय पुरान साँप, जउन इबलीस अउर सइतान कहाबत हय, अउर सगले संसार काहीं भरमामँइ बाला, धरती माहीं गिराय दीन ग; अउर ओखर दूत घलाय ओखे साथ गिराय दीनगें। 10ओखे बाद हम स्वरग से इआ बड़ा बोल आबत सुनेन, कि अब हमरे पंचन के परमातिमा के मुक्ती, अउर सामर्थ, अउर राज, अउर उनखे मसीह के अधिकार प्रगट भ हय; काहेकि हमरे पंचन के भाई-बहिनिन के ऊपर दोस लगामँइ बाला, जउन रात-दिना हमरे पंचन के परमातिमा के आँगे, उनखे ऊपर दोस लगाबा करत रहा हय, गिराय दीन ग। 11अउर ऊँ पंचे मेम्ना के खून के कारन, अउर अपने गबाही के बचन के कारन, सइतान के ऊपर बिजयी भें हँय, अउर ऊँ पंचे अपने प्रानन काहीं पियार नहीं जानिन, इहाँ तक कि मउत घलाय सहि लिहिन। 12इआ कारन, हे स्वरगव, अउर उनमा रहँइ बाल्या, आनन्द मनाबा; पय हे धरती, अउर समुंद्र तोंहरे ऊपर बड़ी भारी बिपत्ती आमँइ बाली हय! काहेकि सइतान बड़े क्रोध के साथ तोंहरे लघे उतरि आबा हय; काहेकि उआ जानत हय, कि ओखर थोरिन काहीं समय अउर बचा हय।
13अउर जब अजिगर देखिस, कि हम धरती माहीं गिराय दीन गएन हय, त उआ मेहेरिआ काहीं जउन लड़िका पइदा किहिस तय, सतामँइ के खातिर पीछा करँइ लाग। 14पय उआ मेहेरिआ काहीं, बड़े चील्ह के दुइठे पखना दीनगें, कि उआ साँप के आँगे से उड़िके जंगल माहीं, उआ जघा माहीं पहुँच जाय, जहाँ साढ़े तीन बरिस तक पाली पोसी जाय। 15अउर साँप उआ मेहेरिआ के पीछे अपने मुँहे से नदी कि नाईं पानी बहाइस, कि ओही इआ नदी माहीं बहाय देय। 16पय धरती उआ मेहेरिआ के मदत किहिस, अउर आपन मुँह खोलिके उआ नदी काहीं जउन अजिगर अपने मुँहे से बहाइस रहा हय, पि लिहिस। 17तब अजिगर उआ मेहेरिआ के ऊपर क्रोधित भ, अउर ओखे बची सन्तान से, जउन परमातिमा के हुकुमन काहीं मानत रहे हँय, अउर यीसु के गबाही देंइ माहीं स्थिर रहे हँय, उनसे लड़ँय काहीं ग। 18अउर समुंद्र के बारू के ऊपर जाइके ठाढ़ भ।
13दुइठे खतरनाक जानबर
1तब हम एकठे खतरनाक जानबर काहीं समुंद्र से निकरत देखेन, ओखे दसठे सींग अउर सातठे मूँड़ रहे हँय; ओखे सींगन माहीं दसठे राजमुकुट अउर ओखे मूँड़ेन के ऊपर परमातिमा के निन्दा के नाम लिखे रहे हँय। 2जउन खतरनाक जानबर हम देखेन, उआ चीता कि नाईं रहा हय; अउर ओखर गोड़ भालू कि नाईं रहे हँय, अउर ओखर मुँह सेर कि नाईं रहा हय; अउर उआ अजिगर आपन सक्ती, अउर सिंहासन, अउर बड़ा अधिकार, ओही दइ दिहिस। 3अउर हम ओखे मूँड़ेन म से, एकठे के ऊपर अइसन भयानक घाव लगा देखेन, त अइसन लागत रहा हय, कि उआ मरइन बाला हय; ओखे बाद ओखर जानलेबा घाव निकहा होइगा, अउर सगले धरती के मनई उआ खतरनाक जानबर के पीछे-पीछे अचरज मानत चलें। 4अउर ऊँ पंचे अजिगर के अराधना किहिन, काहेकि उआ खतरनाक जानबर काहीं आपन अधिकार दइ दिहिस रहा हय, अउर इआ कहिके अराधना किहिन, कि “इआ खतरनाक जानबर के समान को हय? एसे को लड़ि सकत हय?”
5बड़े बोल बोलँइ अउर परमातिमा के बुराई करँइ के खातिर, ओही एकठे मुँह दीन ग, अउर ओही बयालिस महीना तक काम करँइ के अधिकार दीन ग। 6एसे उआ परमातिमा के बुराई करँइ के खातिर मुँह खोलिस, कि उनखे नाम अउर उनखे तम्बू, अरथात स्वरग माहीं रहँइ बालेन के बुराई करय। 7अउर उआ खतरनाक जानबर काहीं इआ अधिकार दीन ग, कि पबित्र मनइन से लड़य, अउर उनसे जीत जाय, अउर ओही हरेक कुल, अउर लोग, अउर भाँसा, अउर जाति के ऊपर अधिकार दीन ग। 8अउर धरती के सगले रहँइ बाले, उआ खतरनाक जानबर के अराधना करिहँय। जिनखर नाम बध कीन मेम्ना के जीबन के किताब माहीं, संसार के सुरुआत से लिखे नहिं आहीं। 9जेखर सुनँय के मन होय, उआ सुन लेय।
10जेही जेल माहीं बन्द होंइ क हय, उआ जेल माहीं बन्द होई; जे कोऊ तलबार से मारी, उआ जरूर तलबार से मारा जई, अब पबित्र मनइन काहीं धीरज धरँय, अउर सताव काहीं सहत बिसुआस माहीं बने रहँय के समय हय।
11ओखे बाद हम एकठे दूसर खतरनाक जानबर काहीं, धरती म से निकरत देखेन, ओखे मेम्ना कि नाईं दुइठे सींग रही हँय; अउर उआ अजिगर कि नाईं बोलत रहा हय। 12इआ दूसर खतरनाक जानबर, उआ पहिल खतरनाक जानबर के सगला अधिकार ओखे आँगे काम माहीं लाबत रहा हय, अउर धरती अउर ओमाहीं रहँइ बालेन से, उआ पहिल खतरनाक जानबर के जेखर जानलेबा घाव निकहा होइगा रहा हय, अराधना कराबत रहा हय। 13उआ दूसर खतरनाक जानबर बड़े-बड़े चमत्कार देखाबत रहा हय, इहाँ तक कि मनइन के आँगे, स्वरग से धरती माहीं आगी बरसाय देत रहा हय। 14ऊँ चमत्कार के कामन के कारन, जिनहीं पहिल खतरनाक जानबर के आँगे देखामँइ के अधिकार ओही दीन ग रहा हय; उआ धरती के रहँइ बालेन काहीं, इआमेर भरमाबत रहा हय, अउर उनसे इआ कहत रहा हय, कि जउने खतरनाक जानबर के तलबार लगी रही हय, उआ जिन्दा होइगा हय, ओखर मूरत बनाबा। 15अउर उआ दूसर खतरनाक जानबर काहीं, उआ खतरनाक जानबर के मूरत माहीं प्रान डारँइ के अधिकार दीन ग, कि खतरनाक जानबर के मूरत बोलँइ लागय; अउर जेतने मनई उआ खतरनाक जानबर के मूरत के अराधना न करिहँय, उनहीं मरबाय डारय। 16अउर उआ दूसर खतरनाक जानबर सगले मनइन काहीं, चाह उआ छोट होय, इआ बड़ा, धनी होय, इआ गरीब, अजाद होय, इआ दास, सगलेन काहीं दहिने हाँथ इआ कि, लिलारे माहीं छाप लगबामँइ के खातिर बिबस किहिस। 17जेखे ऊपर छाप अरथात उआ खतरनाक जानबर के नाम, इआ कि ओखे नाम के संख्या न होई, उआ लेन-देन नहीं कइ सकय। 18ग्यान एहिन माहीं हय, जेखे बुद्धी होय, उआ इआ खतरनाक जानबर के नाम के संख्या जोड़ लेय, काहेकि उआ संख्या मनई के नाम से सम्बन्धित ही, अउर ओखर संख्या छय सव छेंछठ ही।
14मेम्ना अउर उनखर चुने लोग
1एखे बाद हम देखेन, कि मेम्ना सिय्योन पहार के ऊपर ठाढ़ हें, अउर उनखे साथ एक लाख चवालिस हजार मनई हें, जिनखे लिलारे माहीं उनखर, अउर उनखे बाप के नाम लिखा हय। 2अउर स्वरग से हमहीं एकठे अइसन बोल सुनाई दिहिस, जउन पानी के खुब धारन कि नाईं, अउर बड़े गरजन कि नाईं रहा हय, अउर जउन बोल हम सुनेन, उआ अइसा रहा हय, जइसन बीना बजामँइ बाले बीना बजाय रहे होंय। 3अउर ऊँ पंचे सिंहासन के आँगे, अउर चारिव प्रानिन अउर अँगुअन के आँगे, एकठे नबा गाना गाबत रहे हँय। अउर ऊँ एक लाख चवालिस हजार मनइन के अलाबा, जउन धरती के ऊपर से मोल लीन गे रहे हँय, कोऊ उआ गाना काहीं नहीं सिख सकत रहे आहीं। 4ईं ऊँ पंचे आहीं, जउन मेहेरिअन के साथ असुद्ध नहीं भे रहे आहीं, बलकिन कुमार हें; ईं उँइन पंचे आहीं, जउन जहाँ कहँव मेम्ना जात रहे हँय, ईं पंचे उनखे पीछे-पीछे चल देत रहे हँय, ईं पंचे त परमातिमा अउर मेम्ना के खातिर, पहिल फल होंइ के खातिर, मनइन म से मोल लीन गे हँय। 5इनखे मुँह से कबहूँ लबरी बातँय नहीं निकरीं तय, ईं पंचे निरदोस हें।
तीनठे स्वरगदूत
6पुनि हम एकठे अउर स्वरगदूत काहीं, अकास के बीच माहीं उड़त देखेन, जिनखे लघे धरती के ऊपर रहँइ बालेन के हरेक जाति, अउर कुल, अउर भाँसा, अउर लोगन काहीं सुनामँइ के खातिर सनातन खुसी के खबर रही हय। 7अउर ऊँ खुब चन्डे कहिन, “परमातिमा से डेरा, अउर उनखर बड़ाई करा, काहेकि उनखर न्याय करँइ के समय आय पहुँचा हय; अउर उनखर भजन करा, उँइन स्वरग, अउर धरती अउर समुंद्र अउर पानी के झिन्नन काहीं बनाइन हीं।”
8एखे बाद पुनि एकठे अउर, दूसर स्वरगदूत इआ कहत आएँ, “गिर परा, उआ बड़ा बेबीलोन सहर गिर परा, जउन अपने ब्यभिचार के क्रोध भरी मदिरा, सगली जातिअन काहीं पिआइस ही।”
9पुनि इनखे बाद एकठे अउर, तीसर स्वरगदूत खुब चन्डे से इआ कहत आएँ, “जे कोऊ उआ खतरनाक जानबर अउर ओखे मूरत के अराधना करी, अउर अपने लिलारे माहीं, इआ कि अपने हाँथे माहीं ओखर छाप लगाई, 10त उआ परमातिमा के क्रोध के निछला मदिरा, जउन उनखे क्रोध के खोरबा माहीं डारी गे ही, ओही पी, अउर पबित्र स्वरगदूतन के आँगे, अउर मेम्ना के आँगे, आगी अउर गन्धक के पीरा माहीं परी। 11ओखे पीरा के धुँआ जुगन-जुगन तक उठत रही, पय जे उआ खतरनाक जानबर अउर ओखे मूरत के अराधना करत हें, अउर जउन ओखे नाम के छाप लगबाबत हें, उनहीं पंचन काहीं रातव-दिन चयन न मिली।”
12इआ पबित्र मनइन के धीरज धरँय के समय हय, जउन परमातिमा के हुकुमन काहीं मानत हें, अउर यीसु के ऊपर बिसुआस करत हें।
13पुनि हम स्वरग से इआ बोल सुनेन, “लिखा, जउन मनई प्रभू के ऊपर बिसुआस कइके मरत हें, ऊँ पंचे अब से धन्य हें।” अउर पबित्र आत्मा कहत हें, “हाँ, अब से ऊँ पंचे अपने सगले मेहनत से अराम पइहँय, काहेकि उनखर काम उनखे साथ होइ लेत हें।”
कटाई के समय आइगा हय
14हम नजर उठाइके देखेन, अउर देखा, एकठे उजर बदरी हय, अउर उआ बदरी के ऊपर मनई के लड़िका कि नाईं कोऊ बइठ हें, जिनखे मूँड़े माहीं सोने के मुकुट, अउर हाँथे माहीं खुब चोंख हँसिया ही। 15पुनि एकठे अउर स्वरगदूत मन्दिर म से निकरिके, उनसे जउन बदरी माहीं बइठ रहे हँय, खुब चन्डे गोहराइके कहिन, “आपन हँसिया लगाइके कटाई करा, काहेकि कटाई करँइ के समय आइगा हय, एसे कि धरती के खेती पकि चुकी हय।” 16एसे जउन बदरी माहीं बइठ रहे हँय, ऊँ धरती माहीं आपन हँसिया लगाइन, अउर धरती के खेती के कटाई कीन गे।
17एखे बाद एकठे अउर स्वरगदूत उआ मन्दिर म से निकरें, जउन स्वरग माहीं हय, अउर उनहूँ के लघे चोंख हँसिया रही हय। 18ओखे बाद एकठे अउर स्वरगदूत, जिनहीं आगी के ऊपर अधिकार रहा हय, बेदी म से निकरें, अउर जिनखे लघे चोंख हँसिया रही हय, उनसे खुब चन्डे कहिन, “आपन चोंख हँसिया लगाइके, धरती के अंगूर के गुच्छन काहीं काटि ल्या, काहेकि उनखर अंगूर पकि चुके हँय।” 19तब ऊँ स्वरगदूत धरती माहीं आपन हँसिया लगाइके, धरती के अंगूर के गुच्छन काहीं काटिके, अपने परमातिमा के क्रोध रूपी बड़े रसकुन्ड माहीं डार दिहिन; 20अउर सहर के बाहर उआ रसकुन्ड माहीं अंगूर रउँदे गें, अउर रसकुन्ड म से एतना खून निकरा, कि घोड़न के करिआरी तक पहुँचिगा, अउर तीन सव किलोमीटर तक बहिगा।
15सात बिपत्तिन के साथ सातठे स्वरगदूत
1पुनि हम स्वरग माहीं एकठे अउर बड़ी, अउर अदभुत चिन्हारी देखेन, अरथात सातठे स्वरगदूत, जिनखे लघे सतहूँ आखिरी बिपत्ती रही हँय, काहेकि उनखे खतम होइ जाँय के बादय, परमातिमा के कोप पूर होइ जई।
2अउर हम आगी से मिले सीसा कि नाईं, एकठे समुंद्र देखेन; अउर जउन मनई उआ खतरनाक जानबर के ऊपर, अउर ओखे मूरत के ऊपर, अउर ओखे संख्या के ऊपर बिजयी भे रहे हँय, उनहीं पंचन काहीं उआ सीसा के समुंद्र के लघे, परमातिमा के बीना काहीं लए ठाढ़ देखेन। 3ऊँ पंचे परमातिमा के दास मूसा के गीत, अउर मेम्ना के गीत गाय, गाइके कहत रहे हँय,
“हे सर्बसक्तिमान प्रभू परमातिमा, अपना के काम महान अउर अचरज के हें; हे जाति-जाति के राजा, अपना के चाल ठीक अउर सच्ची हय।”
4“हे प्रभू, अइसा कउन हय, जउन अपना से न डेरई, अउर अपना के नाम के बड़ाई न करी? काहेकि केबल अपनय पबित्र हएन। अउर सगले जातिअन के मनई आइके अपना के आँगे गोड़न गिरि हँय, काहेकि अपना के न्याय के काम प्रगट होइगे हँय।”
5एखे बाद हम देखेन, कि स्वरग माहीं करार के तम्बू के मन्दिर खोला ग। 6अउर ऊँ सतहूँ स्वरगदूत, जिनखे लघे ऊँ सतहूँ बिपत्ती रही हँय, मखमल के सुद्ध अउर चमकँइ बाले ओन्हा पहिरे, अउर छाती के ऊपर सोने के पट्टिन काहीं बाँधे मन्दिर से निकरें। 7तब ऊँ चारिव प्रानिन म से, एक जने, ऊँ सतहूँ स्वरगदूतन काहीं, परमातिमा, जउन जुगन-जुगन तक जिन्दा रइहँय, उनखे कोप से भरे सोने के सातठे खोरबा दिहिन। 8अउर परमातिमा के महिमा अउर सक्ती के कारन मन्दिर धुँआ से भरिगा, अउर जब तक ऊँ सतहूँ स्वरगदूतन के, सतहूँ बिपत्ती खतम नहीं होइ गईं, तब तक मन्दिर माहीं कोऊ नहीं जाय सका।
16परमातिमा के कोप के सातठे खोरबा
1पुनि हम मन्दिर माहीं कोहू काहीं खुब चन्डे, उन सतहूँ स्वरगदूतन से इआ कहत सुनेन, “जा, परमातिमा के कोप के सतहूँ खोरबन काहीं धरती माहीं उड़ेल द्या।”
2एसे पहिल स्वरगदूत जाइके, आपन खोरबा धरती माहीं उड़ेल दिहिन। तब ऊँ मनइन के, जिनखे ऊपर उआ खतरनाक जानबर के छाप रही हय, अउर जउन ओखे मूरत के अराधना करत रहे हँय, उनखे देंह माहीं बड़े घिनहे अउर दुखदाई फोड़ा निकरें।
3अउर दूसर स्वरगदूत आपन खोरबा समुंद्र के ऊपर उड़ेल दिहिन, अउर उआ मरेन के खून कि नाईं बनिगा, अउर समुंद्र के सगले जीव-जन्तु मरिगें।
4अउर तीसर स्वरगदूत आपन खोरबा नदिअन, अउर पानी के झिन्नन माहीं उड़ेल दिहिन, अउर ऊँ खून बनिगें। 5तब हम ऊँ स्वरगदूत काहीं जउन पानी के मालिक रहे हँय, इआ कहत सुनेन,
“हे पबित्र, जउन हएन, अउर जउन रहे हएन, अपना न्यायी हएन, अउर अपना इआ न्याय किहेन हय।
6काहेकि ऊँ पंचे पबित्र लोगन के, अउर अपना के सँदेस बतामँइ बालेन के खून बहाइन रहा हय, अउर अपना उनहीं खून पिआएन हय, काहेकि ऊँ पंचे एहिन के काबिल हें।”
7ओखे बाद हम बेदी से इआ बोल सुनेन, “हाँ, हे सर्बसक्तिमान प्रभू परमातिमा, अपना के निरनय ठीक अउर सच्चे हें।”
8अउर चउथ स्वरगदूत आपन खोरबा, सुरिज के ऊपर उड़ेल दिहिन, अउर सुरिज काहीं मनइन काहीं आगी कि नाईं घाम से जराय देंइ के अधिकार दीन ग। 9अउर मनई बड़ी लपट से जरिगें, अउर बिपत्तिन के ऊपर अधिकार रक्खँइ बाले परमातिमा के नाम के बुराई किहिन, पय उनखर बड़ाई करँइ के खातिर आपन मन नहीं फिराइन।
10ओखे बाद पचमाँ स्वरगदूत आपन खोरबा, उआ खतरनाक जानबर के सिंहासन माहीं उड़ेल दिहिन, अउर ओखे राज माहीं अँधिआर छाइगा। मनई पीरा के मारे आपन-आपन जीभ चबामँइ लागें, 11अउर अपने पीरन अउर फोड़न के कारन स्वरग माहीं रहँइ बाले परमातिमा के बुराई किहिन; पय अपने-अपने बुरे कामन से आपन मन नहीं फिराइन।
12ओखे बाद छठमाँ स्वरगदूत, अपने खोरबा काहीं फरात महानदी के ऊपर उड़ेल दिहिन, अउर ओखर पानी झुराइगा, कि जउने पूरुब दिसा के राजन के खातिर गइल तइआर होइ जाय। 13अउर हम उआ अजिगर के मुँहे से, अउर उआ खतरनाक जानबर के मुँहे से, अउर परमातिमा के लबरी सँदेस बतामँइ बाले के मुँहे से, तीनठे असुद्ध आत्मन काहीं गुलरन के रूप माहीं निकरत देखेन। 14ईं चमत्कार देखामँइ बाली बुरी आत्मा आहीं, जउन सगले संसार के राजन के लघे निकरिके एसे जाती हईं, कि उनहीं पंचन काहीं, सर्बसक्तिमान परमातिमा के, उआ बड़े दिन के लड़ाई के खातिर एकट्ठा करँय। 15“देखा, हम चोर कि नाईं अइत हएन; धन्य हय उआ मनई जउन जागत रहत हय, अउर अपने ओन्हन के रखबारी करत हय, कि जउने नंगा न फिरय, अउर मनई ओखे नंगापन काहीं देखे न पामँय।” 16अउर ऊँ पंचे उनहीं उआ जघा माहीं एकट्ठा किहिन, जउन इब्रानी भाँसा माहीं हर-मगिदोन कहाबत हय।
17ओखे बाद सतमा स्वरगदूत आपन खोरबा हबा के ऊपर उड़ेल दिहिन, अउर मन्दिर के सिंहासन से इआ बड़ा बोल सुनान, “होइ चुका!” 18ओखे बाद बिजुली चमकी, अउर बोल अउर गरजन भ, अउर एकठे अइसन भुँइडोल भ, कि जब से मनइन के पइदाइस धरती के ऊपर भे ही, तब से अइसन भुँइडोल कबहूँ नहीं भ तय। 19एसे उआ बड़े सहर के तीन भाग होइगें, अउर हरेक जातिअन के सहर गिर परें; अउर बड़े बेबीलोन के स्मरन परमातिमा के इहाँ भ, कि ऊँ अपने क्रोध के जलजलाहट के मदिरा ओही पिआमँइ। 20अउर हरेक टापू अपने-अपने जघा से टरिगें, अउर पहारन के पतय नहीं चला। 21अउर अकास से मनइन के ऊपर, चालिस-चालिस किलो के बड़े-बड़े ओला गिरें, अउर एसे कि इआ बिपत्ती खुब भारी रही हय, अउर सगले मनई ओलन के बिपत्ती के कारन परमातिमा के बुराई किहिन।
17बड़ी बेस्या
1अउर जउने सातठे स्वरगदूतन के लघे ऊँ सातठे खोरबा रहे हँय, उनमा से एक जने आइके हमसे इआ कहिन, “इहाँ आबा, हम तोंहईं उआ बड़ी बेस्या के सजा देखाई, जउन खुब पानी माहीं बइठ ही, 2जेखे साथ धरती के राजा लोग ब्यभिचार किहिन; अउर धरती के रहँइ बाले ओखे ब्यभिचार के मदिरा से मतबार होइगे रहे हँय।” 3त ऊँ हमहीं पबित्र आत्मा माहीं, सुनसान जघा माहीं लइगें, अउर हम लाल रंग के खतरनाक जानबर के ऊपर, जउन परमातिमा के बुराई के सब्दन से भरा रहा हय, अउर जेखे सातठे मूँड़ अउर दसठे सींग रही हँय, एकठे मेहेरिआ काहीं बइठे देखेन। 4उआ मेहेरिआ बैगनी अउर लाल रंग के ओन्हा पहिरे रही हय, अउर सोने अउर खुब कीमती रतनन, अउर मोतिअन से सजी रही हय, अउर ओखे हाँथे माहीं एकठे सोने के खोरबा रहा हय, जउन घिनही चीजन से, अउर ओखे ब्यभिचार के असुद्ध चीजन से भरा रहा हय। 5अउर ओखे लिलारे माहीं इआ नाम लिखा रहा हय, “भेद-बड़ा बेबीलोन, धरती के बेस्यन, अउर घिनही चीजन के महतारी।” 6अउर हम उआ मेहेरिआ काहीं, पबित्र लोगन के खून, अउर यीसु के गबाहन के खून पिए से मतबार देखेन; अउर ओही देखिके हम चउआय गएन।
7तब ऊँ स्वरगदूत हमसे कहिन, “तूँ काहे चउआन हया? हम इआ मेहेरिआ, अउर उआ खतरनाक जानबर के, जेखे ऊपर उआ बइठ ही, अउर जेखे सातठे मूँड़ अउर दसठे सींग हईं, तोंहईं ओखर भेद बताइत हएन। 8जउने खतरनाक जानबर काहीं तूँ देखे हया, उआ पहिले त रहा हय, पय अब नहिं आय, अउर उआ अथाह कुन्ड से निकरिके बिनास माहीं परी; अउर धरती के रहँइ बाले, जिनखर नाम, संसार के सुरुआत से जीबन के किताब माहीं नहीं लिखे गें, इआ खतरनाक जानबर के इआ दसा काहीं देखिके, कि पहिले रहा हय, अब नहिं आय, अउर पुनि आय जई, अचरज मनि हँय। 9इआ समझँइ के खातिर बड़ी बुद्धी के जरूरत ही, ऊँ सतहूँ मूँड़ सातठे पहार आहीं, जउनेन के ऊपर उआ मेहेरिआ बइठ ही। 10ऊँ सातठे राजा घलाय आहीं, उनमा से पाँच जनेन के बिनास होइ चुका हय, अउर एकठे अबे हय, अउर एकठे अबे तक आबा नहीं, अउर जब अई त कुछ समय तक ओखर रहब घलाय जरूरी हय। 11जउन खतरनाक जानबर पहिले रहा हय, अउर अब नहिं आय, उआ खुदय अठमाँ आय, अउर उआ ऊँ सतहूँ म से पइदा भ हय, अउर बिनास माहीं परी। 12अउर जउन दसठे सींग तूँ देखे हया, ऊँ दसठे राजा आहीं, जउन अबे तक राज नहीं पाइन, पय उआ खतरनाक जानबर के साथ, एक घन्टा के खातिर राजन कि नाईं अधिकार पइहँय। 13ईं पंचे सब एकय मन होइहँय, अउर ऊँ पंचे आपन-आपन सक्ती अउर अधिकार उआ खतरनाक जानबर काहीं देइहँय। 14अउर ऊँ पंचे मेम्ना से लड़िहँय, अउर मेम्ना उनखे ऊपर बिजय पइहँय, काहेकि ऊँ प्रभुअन के प्रभू, अउर राजन के राजा आहीं, अउर जउन बोलाए अउर चुने अउर बिसुआसी हें, ऊँ पंचे उनखे साथ रइहँय; अउर ऊँ पंचे घलाय बिजय पइहँय।”
15पुनि ऊँ स्वरगदूत हमसे कहिन, “जउन पानी तूँ देखे हया, जेखे ऊपर बेस्या बइठ ही, ऊँ पंचे त मनई, अउर भीड़, अउर सगली जाति, अउर सगली भाँसा आहीं। 16जउन दसठे सींग तूँ देखे हया, ऊँ पंचे, अउर खतरनाक जानबर, उआ बेस्या से दुसमनी रखिहँय, अउर ओही लाचार अउर नंगी कइ देइहँय, अउर ओखर माँस खाय जइहँय, अउर ओही आगी माहीं जराय देइहँय। 17काहेकि परमातिमा, उनखे मन माहीं इआ बिचार डरिहँय, कि ऊँ पंचे उनखे मरजी काहीं पूर करँय, अउर जब तक परमातिमा के बचन पूर न होइ जाय, तब तक एक मन होइके आपन-आपन राज, उआ खतरनाक जानबर काहीं दइ देंय। 18उआ मेहेरिआ, जउने काहीं तूँ देखे हया, उआ बड़ा सहर आय, जउन धरती के राजन के ऊपर राज करत हय।”
18बेबीलोन सहर के बिनास
1एखे बाद हम एकठे अउर स्वरगदूत काहीं, स्वरग से उतरत देखेन, जिनहीं बड़ा अधिकार मिला रहा हय; अउर धरती उनखे तेज से चमक उठी। 2ऊँ खुब चन्डे गोहराइके कहिन,
“गिरिगा, बड़ा बेबीलोन सहर गिरिगा हय, बुरी आत्मन के निबास, अउर हरेक असुद्ध आत्मन के अड्डा, अउर हरेक असुद्ध अउर घिनहे पंछिन के अड्डा होइगा हय।
3काहेकि ओखे ब्यभिचार के भयानक मदिरा के कारन, सगली जाति गिर गई हँय, अउर धरती के सगले राजा ओखे साथ ब्यभिचार किहिन हीं, अउर धरती के बइपारी ओखे सुख-बिलास के बहुतायत के कारन धनमान भे हँय।”
4एखे बाद हम स्वरग से एकठे अउर बोल सुनेन, “हे हमार चुने मनइव, ओमा से निकर आबा, कि जउने तूँ पंचे ओखे पापन माहीं भागीदार न बना, अउर ओखे बिपत्तिन म से, कउनव तोंहरे ऊपर न आय परय।
5काहेकि ओखे पापन के ढेर, स्वरग तक पहुँचिगा हय, अउर ओखर अधरम परमातिमा काहीं याद आइगे हँय।
6अउर जइसा उआ किहिस ही, तुहूँ पंचे ओखे साथ उहयमेर बरताव करा, अउर ओखे कुकर्मन के बदला चुकाबा; अउर जइसन खोरबा उआ दुसरेन के खातिर भरिस रहा हय, ओमाहीं ओखे खातिर दुगुना भर द्या।
7जेतनी उआ आपन बड़ाई किहिस ही, अउर सुख-बिलास किहिस ही, ओतनय ओही कस्ट अउर दुख द्या; काहेकि उआ अपने मन माहीं कहत ही, ‘हम रानी बनिके बइठ हएन, बिधबा नहीं, अउर हम सोक माहीं कबहूँ न परब।’
8इआ कारन से एकय दिन माहीं ओखे ऊपर खुब बिपत्ती आय परिहँय, अरथात मउत, अउर सोक, अउर अकाल; अउर उआ आगी माहीं भसम कइ दीन जई, काहेकि ओखर न्याय करँइ बाले प्रभू परमातिमा सर्बसक्तिमान हें।
9अउर धरती के राजा जउन ओखे साथ ब्यभिचार, अउर सुख-बिलास किहिन हीं, जब ओखे जरँय के धुँआ देखिहँय, त ओखे खातिर रोइहँय, अउर छाती पिटिहँय। 10ओखे पीरा के डेरन के मारे ऊँ पंचे खुब दूरी ठाढ़ होइके कइहँय,
‘हे बड़े सहर, बेबीलोन! हे सक्तिसाली सहर, हाय! हाय! घरी भर माहीं तोही सजा मिलिगे ही’।
11अउर धरती के बइपारी ओखे खातिर रोइहँय, अउर कल्पिहँय, काहेकि अब कोऊ उनखर माल न खरीदी; 12अरथात सोन-चाँदी, रतन, मोती, अउर मखमल, अउर बैगनी, रेसमी, अउर लाल रंग के ओन्हा, अउर हरेकमेर के महकँइ बाली लकड़ी, अउर हाँथी के दाँत से बनी हरेकमेर के चीजँय, अउर खुब कीमती लकड़ी, अउर पीतल, अउर लोहे, अउर संगमरमर के हरेकमेर के चीजँय, 13अउर दालचीनी, मसाला, धूप, अँतर, लोभान, मदिरा, जयतून के तेल, मइदा, गोहूँ, गइआ-बरधा, गाड़र-बोकरी, घोड़, रथ, अउर दास, अउर मनइन के प्रान। 14अब तोरे मन काहीं लोभामँय बाले फल, तोरे लघे से जाय रहे हँय, अउर स्वादिस्ट अउर भड़कीली चीजँय तोसे दूर होइ गई हँय, अउर ऊँ पुनि कबहूँ न मिलिहँय। 15ईं चीजन के बइपारी जउन बेबीलोन सहर के धन-सम्पत से धनी होइगें तय, ओखे पीरा के डेरन के मारे दूरी ठाढ़ होइहँय, अउर रोबत अउर कलपत कइहँय,
16हाय! हाय! इआ बड़ा सहर जउन मखमल अउर बैगनी अउर लाल रंग के ओन्हा पहिरे रहा हय, अउर सोन अउर रतनन अउर मोतिअन से सजा रहा हय;
17घरी भर माहीं ओखर अइसन भारी धन नास होइगा।
हरेक माझी अउर यात्री, अउर मल्लाह, अउर जेतने समुद्र से कमात रहे हँय, सगले दूरी ठाढ़े, 18ओखे जरँय के धुँआ देखत गोहराइके कइहँय,
‘कउन सहर इआ बड़े सहर कि नाईं हय?’
19अउर अपने-अपने मूँड़ेन के ऊपर धूधुर डरिहँय, अउर रोबत अउर कलपत, चिल्लाय-चिल्लाइके कइहँय, ‘हाय! हाय! इआ बड़ा सहर, जेखे धन-सम्पत्ती के द्वारा समुंद्र के सगले जिहाज बाले धनी होइगे रहे हँय, घरी भर माहीं उजरिगा।’
20हे स्वरग, अउर हे सगले पबित्र मनइव, अउर यीसु के खास चेलव, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेव, ओखे ऊपर आनन्द करा, काहेकि परमातिमा न्याय कइके, ओसे तोंहार पंचन के बदला लिहिन हीं।”
21ओखे बाद एकठे बलमान स्वरगदूत बड़ी चक्की के जतबा कि नाईं एकठे पथरा उठाइन, अउर इआ कहिके समुंद्र माहीं फेंक दिहिन,
“बड़ा सहर बेबीलोन इहइमेर बड़े बल से गिराबा जई, अउर पुनि ओखर कबहूँ पता न चली।
22अउर बीना बजामँइ बालेन, अउर गायकन, अउर बंसी बजामँइ बालेन, अउर तुरही फूँकँइ बालेन के बोल, पुनि कबहूँ तोरे भीतर सुनाई न देई; अउर कउनव चीजन के कारीगर घलाय पुनि कबहूँ तोरे भीतर न मिली; अउर चक्की के चलँइ के अबाज पुनि कबहूँ तोरे भीतर सुनाई न देई।
23अउर दिया के उँजिआर पुनि कबहूँ तोरे भीतर न चमकी, अउर दुलहा अउर दुलहिन के बोल पुनि कबहूँ तोरे भीतर सुनाई न देई; काहेकि तोर बइपारी धरती के प्रधान रहे हँय, अउर तोरे जादू से सगली जाति भरमाई गईं तय।
24अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन, अउर पबित्र मनइन, अउर धरती के ऊपर सगले कतल कीन गें, मनइन के खून बेबीलोन माहीं पाबा ग।”
191एखे बाद हम स्वरग माहीं एकठे बड़ी भीड़ कि नाईं खुब चन्डे बोल से, इआ कहत सुनेन,
“हालेलूय्याह! मुक्ती अउर महिमा अउर सामर्थ, हमरे पंचन के परमातिमय के आय।
2काहेकि उनखर निरनय सच्चे अउर न्यायपूर्न हें। अउर ऊँ उआ बड़ी बेस्या काहीं, जउन अपने ब्यभिचार से धरती काहीं भ्रस्ट करत रही हय, सजा दिहिन हीं, अउर ओसे अपने दासन के खून के बदला लिहिन हीं।”
3पुनि ऊँ पंचे दुसराय कहिन, “हालेलूय्याह! ओखे जरँय के धुँआ जुगन-जुगन तक उठत रही।”
4तब चउबीसव अँगुआ, अउर चरहूँ प्रानी, परमातिमा के गोड़न गिरें, जउन सिंहासन माहीं बइठ रहे हँय, अउर कहिन, “आमीन! हालेलूय्याह!”
मेम्ना के बिआह
5अउर सिंहासन म से एकठे अबाज निकरी, “हे हमरे पंचन के परमातिमा से, डेराँइ बाले छोट-बड़े; सगले दासव, तूँ पंचे उनखर स्तुति करा।”
6ओखे बाद हम बड़ी भीड़ कि नाईं, अउर खुब पानी कि नाईं, अउर गरजँय कि नाईं, बड़ी तेज अबाज सुनेन;
“हालेलूय्याह! काहेकि प्रभू हमार पंचन के परमातिमा सर्बसक्तिमान राज करत हें।
7आबा, हम पंचे आनन्दित अउर मगन होई, अउर उनखर स्तुति करी, काहेकि मेम्ना के बिआह के समय आय ग हय, अउर उनखर दुलहिन खुद काहीं तइआर कइ लिहिन हीं।”
8अउर ओही सुद्ध अउर चमकँइ बाला मखमल पहिरँय काहीं दीन ग, (उआ सुद्ध मखमल के मतलब पबित्र लोगन के धरम के काम आहीं।)
9तब स्वरगदूत हमसे कहिन, “इआ लिखा, कि ऊँ पंचे धन्य हें, जउन मेम्ना के बिआह-भोज माहीं बोलाए गे हँय।” पुनि ऊँ हमसे कहिन, “ईं बचन परमातिमा के सत्य बचन आहीं।” 10तब हम उनखे गोड़न गिरँय के खातिर, उनखे गोड़े माहीं गिर परेन। तब ऊँ हमसे कहिन, “देखा, अइसा न करा, हमहूँ तोंहरेन कि नाईं, अउर तोंहरे भाइन कि नाईं, जउन यीसु के गबाही देंइ के खातिर स्थिर हें, मसीह के दास आहेन, तूँ पंचे परमातिमय के गोड़न गिरा; काहेकि जे कोऊ यीसु के बारे माहीं गबाही देत हें, उनहीं पंचन काहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन कि नाईं, परमातिमा से प्रेरना मिलत ही।”
उजर घोड़ा के सबार
11ओखे बाद हम स्वरग काहीं खुला देखेन, अउर देखित हएन, कि एकठे उजर घोड़ा हय; अउर ओमाहीं एक जने सबार हें, जउन बिसुआस के काबिल अउर सत्य कहाबत हें; अउर ऊँ धरम के साथ न्याय, अउर युद्ध करत हें। 12अउर उनखर आँखी आगी कि नाईं धँधकती हईं, अउर उनखे मूँड़े माहीं खुब राजमुकुट हें। अउर उनखे ऊपर एकठे नाम लिखा हय, जउने काहीं उनहीं छोंड़, अउर कोऊ नहीं जानय। 13ऊँ खून छिनका ओन्हा पहिरे हें, अउर उनखर नाम परमातिमा के बचन हय। 14स्वरग के सेना, उजर घोड़न के ऊपर सबार होइके; अउर उजर अउर सुद्ध मखमल पहिरे, उनखे पीछे-पीछे हईं। 15अउर जाति-जाति काहीं मारँइ के खातिर उनखे मुँहे से एकठे चोंख तलबार निकरत ही, ऊँ लोहे के राजदन्ड लए, उनखे ऊपर राज करिहँय, अउर ऊँ सर्बसक्तिमान परमातिमा के, भयानक कोप के जलजलाहट के मदिरा के कुन्ड माहीं अंगूर रउँदिहँय। 16उनखे ओन्हा अउर जाँघ के ऊपर, इआ नाम लिखा हय, “राजन के राजा अउर प्रभुअन के प्रभू।”
17एखे बाद हम एकठे स्वरगदूत काहीं सुरिज के ऊपर ठाढ़ देखेन, ऊँ खुब चन्डे गोहराइके अकास के बीच माहीं उड़ँइ बाले पंछिन से कहिन, “आबा परमातिमा के बड़े भोज के खातिर एकट्ठा होइजा, 18जउने तूँ पंचे राजन के माँस, अउर मुखिअन के माँस, अउर सूरबीर मंसेरुअन के माँस, अउर घोड़न के अउर उनखे सबारन के माँस, अउर का अजाद, का दास, का छोट, का बड़े, सगले जनेन के माँस खा।”
19पुनि हम उआ खतरनाक जानबर, अउर धरती के राजन, अउर उनखे सेनन काहीं, उआ घोड़ा के सबार, अउर उनखे सेना से लड़ँइ के खातिर एकट्ठा देखेन। 20उआ खतरनाक जानबर, अउर ओखे साथ उआ लबरा नबी, पकड़ा ग, जउन उनखे आँगे अइसन चिन्ह देखाइस रहा हय, जिनखे द्वारा उआ उनहीं पंचन काहीं भरमाइस तय, जिनखे ऊपर उआ खतरनाक जानबर के छाप रही हय, अउर जउन ओखे मूरत के अराधना करत रहे हँय। ईं पंचे दोनव जने जिन्दय, उआ आगी के झील माहीं, जउन गन्धक से जरत रहत ही, डारे गें। 21अउर बाँकी मनई उआ घोड़ा के सबार के तलबार से, जउन ओखे मुँहे से निकरत रही हय, मार डारे गें, अउर सगले पंछी उनखे माँस से संतुस्ट होइगें।
20हजार बरिस के राज
1पुनि हम एकठे स्वरगदूत काहीं स्वरग से उतरत देखेन, जिनखे हाँथे माहीं अथाह कुन्ड के उघन्नी, अउर एकठे बड़ी जंजीर रही हय। 2अउर ऊँ उआ अजिगर, अरथात पुरान साँप काहीं, जउन इबलीस अउर सइतान आय, पकड़िके हजार बरिस के खातिर बाँध दिहिन, 3अउर ओही अथाह कुन्ड माहीं बन्द कइ दिहिन, अउर ओमाहीं मुहर लगाय दिहिन, कि उआ हजार बरिस के पूर होंइ तक, जाति-जाति के लोगन काहीं पुनि न भरमाबय। एखे बाद जरूरी हय, कि उआ थोरी देर के खातिर पुनि खोला जाय।
4ओखे बाद हम सिंहासनन काहीं देखेन, अउर उनमा लोग बइठिगें, अउर उनहीं न्याय करँइ के अधिकार दीनगा। हम उनखे आत्मन काहीं घलाय देखेन, जिनखर मूँड़ यीसु के गबाही देंइ, अउर परमातिमा के बचन के कारन काटे गे रहे हँय, अउर ऊँ पंचे न उआ खतरनाक जानबर के, अउर न ओखे मूरत के पूजा किहिन तय, अउर न ओखर छाप, अपने लिलारे अउर हाँथन के ऊपर लिहिन तय। ऊँ पंचे जिन्दा होइके मसीह के साथ हजार बरिस तक राज करत रहिगें। 5जब तक ईं हजार बरिस पूर नहीं होइगें, तब तक ऊँ पंचे जउन इनखे अलाबा मरे तय, जिन्दा नहीं भें। इआ त पहिल मरेन म से जि उठब आय। 6धन्य अउर पबित्र ऊँ हें, जउन इआ पहिल मरिके जि उठब माहीं सामिल भे हँय। अइसन मनइन के ऊपर दूसर मउत के कउनव अधिकार नहिं आय, बलकिन ऊँ पंचे परमातिमा अउर मसीह के याजक होइहँय, अउर हजार बरिस तक उनखे साथ राज करिहँय।
सइतान के बिनास
7जब हजार बरिस पूर होइ चुकिहँय, त सइतान कैद से छोंड़, दीन जई। 8अउर उआ, ऊँ जातिअन काहीं जउन धरती के चारिव कइती होंइ हँय, अरथात गोग अउर मागोग काहीं, जिनखर गिनती समुंद्र के बारू के बराबर होई, उनहीं भरमाइके लड़ाई के खातिर एकट्ठा करँइ काहीं निकरी। 9ऊँ पंचे सगली धरती माहीं फइलिके, पबित्र लोगन के छावनी अउर पियार सहर काहीं घेर लेइहँय; पय आगी स्वरग से उतरिके उनहीं पंचन काहीं भसम करी। 10अउर उनखर भरमामँइ बाला सइतान आगी अउर गन्धक के उआ झील माहीं, जउने माहीं उआ खतरनाक जानबर, अउर लबरा नबी घलाय होई, डार दीन जई। अउर ऊँ पंचे रात-दिना जुगन-जुगन तक पीरा माहीं तड़पत रइहँय।
एकठे बड़ा उजर सिंहासन अउर आखिरी न्याय
11ओखे बाद हम एकठे बड़ा उजर सिंहासन, अउर उनहीं, जउन ओखे ऊपर बइठ रहे हँय, देखेन; उनखे आँगे से धरती अउर अकास भागिगें, अउर उनखे खातिर जघा नहीं मिली। 12अउर हम छोट-बड़े सब मरे मनइन काहीं सिंहासन के आँगे ठाढ़ देखेन, अउर किताबँय खोली गईं; अउर पुनि एकठे अउर किताब खोली गे, अरथात जीबन के किताब; अउर जइसन ऊँ किताबन माहीं लिखा रहा हय, उहयमेर उनखे कामन के मुताबिक, मरे मनइन के न्याय कीन ग। 13ओखे बाद समुंद्र, ऊँ मरे मनइन काहीं जउन ओमा रहे हँय, दइ दिहिस, अउर मउत अउर अधोलोक, ऊँ मरे मनइन काहीं जउन उन माहीं रहे हँय, दइ दिहिन; अउर उनमा से हरेक के कामन के मुताबिक न्याय कीन ग। 14मउत अउर अधोलोक आगी के झील माहीं डारे गें। इआ आगी के झील दूसर मउत आय। 15अउर जेखर-जेखर नाम जीबन के किताब माहीं लिखा नहीं मिला, ऊँ सगले, आगी के झील माहीं डार दीनगें।
21नबा अकास अउर नई धरती
1ओखे बाद हम नबा अकास अउर नई धरती काहीं देखेन, काहेकि पहिल अकास अउर पहिल धरती खतम होइगे तँय, अउर समुंद्र घलाय नहीं रहिगा तय। 2ओखे बाद हम पबित्र सहर, नबा यरूसलेम काहीं स्वरग से परमातिमा के लघे से उतरत देखेन, जउन उआ दुलहिन कि नाईं रहा हय, जउन अपने मंसेरुआ के खातिर सिंगार कए होय। 3अउर हम सिंहासन म से, कोहू काहीं खुब चन्डे इआ कहत सुनेन, “देखा, परमातिमा के डेरा, मनइन के बीच माहीं हय, ऊँ उनखे साथ निबास करिहँय, अउर ऊँ पंचे उनखर लोग होइहँय, अउर परमातिमा खुद उनखे बीच माहीं रइहँय, अउर उनखर परमातिमा होइहँय। 4ऊँ उनखे आँखिन से सगले आँसू पोंछि डरिहँय; अउर एखे बाद मउत न रही, अउर न सोक, अउर न बिलाप, न पीरा रही; पहिल बातँय खतम होइ जइहँय।”
5जउन सिंहासन के ऊपर बइठ रहे हँय, ऊँ कहिन, “देखा, हम सब कुछ नबा कए देइत हएन।” ओखे बाद ऊँ पुनि कहिन, “लिख ल्या, काहेकि ईं बचन बिसुआस के काबिल अउर सत्य हें।” 6अउर पुनि ऊँ हमसे कहिन, “ईं बातँय पूर होइ गई हँय। हम अल्फा अउर ओमेगा, आदि अउर अन्त आहेन। हम पिआसे काहीं, जीबन के पानी के झिन्ना म से सेंत-मेंत माहीं पिआउब। 7जे बिजय पाई, उहय ईं चीजन के बारिसदार होई, अउर हम ओखर परमातिमा होब, अउर उआ हमार लड़िका होई। 8पय डरपोकन, अउर अबिसुआसी लोगन, अउर बुरे काम करँइ बालेन, अउर कतलिन, अउर ब्यभिचारिन, अउर टोना मारँइ बालेन, अउर मूरतिन के पूजा करँइ बालेन, अउर सब लबरन के भाग, उआ झील माहीं मिली, जउन आगी अउर गन्धक से जलत रहत ही, इआ दूसर मउत आय।”
नबा यरूसलेम
9ओखे बाद जिन सातठे स्वरगदूतन के लघे, सातठे अन्तिम बिपत्तिन से भरे खोरबा रहे हँय, उनमा से एक जने हमरे लघे आएँ, अउर हमसे बातँय कइके कहँइ लागें, “एँकई आबा, हम तोंहईं दुलहिन, अरथात मेम्ना के मेहेरिआ देखाउब।” 10तब ऊँ हमहीं पबित्र आत्मा माहीं, एकठे बड़े अउर ऊँच पहार के ऊपर लइगें, अउर पबित्र सहर यरूसलेम काहीं, स्वरग से परमातिमा के लघे से उतरत देखाइन। 11परमातिमा के महिमा ओमाहीं रही हय, अउर ओखर जोति, यसब नाम के खुब कीमती निरमल रतन कि नाईं चमकत रही हय। 12ओखर सहरपनाह खुब ऊँच रही हय, अउर ओमाहीं बारा फाटक रहे हँय, अउर हरेक फाटकन माहीं एक-एकठे स्वरगदूत रहे हँय; अउर ऊँ फाटकन के ऊपर इजराइलिअन के बरहूँ कुलन के नाम लिखे रहे हँय। 13पूरुब कइती तीनठे फाटक, उत्तर कइती तीनठे फाटक, दक्खिन कइती तीनठे फाटक, अउर पच्छिम कइती तीनठे फाटक रहे हँय। 14सहर के सहरपनाह के बाराठे नेव रही हँय, अउर उनखे ऊपर मेम्ना के बरहूँ खास चेलन के बरहूँ नाम लिखे रहे हँय। 15जउन हमसे बात करत रहे हँय, उनखे लघे सहर अउर ओखे फाटकन, अउर ओखे सहरपनाह काहीं नापँय के खातिर, एकठे सोने के गज रहा हय। 16उआ सहर बरगाकार बसा रहा हय, अउर ओखर लम्बाई- चउँड़ाई बराबर रही हय; अउर ऊँ, उआ गज से सहर काहीं नापिन, त उआ साढ़े सात सव कोस निकरा। ओखर लम्बाई, चउँड़ाई अउर उँचाई बराबर रही हय। 17अउर स्वरगदूत ओखे सहरपनाह काहीं नापिन, त मनइन माहीं जउन नापँय के तरीका रहा हय, ओहिन के मुताबिक नापिन, त एक सव चवालिस हाँथ निकरी। 18ओखर सहरपनाह यसब के बनी रही हय, अउर सहर अइसन सुद्ध सोने के रहा हय, जइसन स्वच्छ सीसा कि नाईं होय। 19उआ सहर के नेव हरेकमेर के खुब कीमती पथरन से बनी रही हय; पहिल नेव यसब के, दूसर नीलमनि के, तीसर लालड़ी के, चउथ मरकत के, 20पचमी गोमेदक के, छठमी मानिक्य के, सतमी पीतमनि के, अठमी पेरोज के, नवमी पुखराज के, दसमी लहसुनिया के, गेरहमी धूम्रकान्त के, अउर बरहमी याकूत के रही हय। 21अउर बरहूँ फाटक बारा मोतिन के रहे हँय; एक-एक फाटक एक-एक मोती के बना रहा हय। सहर के सड़क स्वच्छ सीसा कि नाईं सुद्ध सोने के रही हय।
22हम ओमाहीं कउनव मन्दिर नहीं देखेन, काहेकि सर्बसक्तिमान प्रभू परमातिमा, अउर मेम्ना ओखर मन्दिर आहीं। 23उआ सहर माहीं सुरिज अउर जोंधइआ के उँजिआर के जरूरत नहिं आय, काहेकि परमातिमा के तेज से, ओमाहीं उँजिआर होइ रहा हय, अउर मेम्ना ओखर दीपक आहीं। 24जाति-जाति के मनई उनखे जोति माहीं चलिहँय-फिरिहँय, अउर धरती के राजा आपन-आपन धन-सम्पत ओमाहीं लइ अइहँय। 25ओखर फाटक दिन माहीं कबहूँ बन्द न होइहँय, अउर रात उहाँ न होई। 26अउर जाति-जाति के मनई धन-सम्पत, अउर महिमा ओमाहीं लइ अइहँय। 27पय ओमाहीं कउनव अपबित्र चीजँय, इआ कि बुरे काम करँइ बाले, इआ कि लबरी बोलँइ बाले, कउनव मेर से न जाए पइहँय, पय केबल उँइन पंचे जइहँय, जिनखर नाम मेम्ना के जीबन के किताब माहीं लिखे हँय।
221ओखे बाद ऊँ हमहीं सीसा कि नाईं झलकत, जीबन के पानी के नदी देखाइन, जउन परमातिमा, अउर मेम्ना के सिंहासन से निकरिके, 2उआ सहर के सड़क के बीचव बीच बहत रही हय। नदी के इआ पार, अउर उआ पार, जीबन के बिरबा रहा हय; ओमाहीं बारा मेर के फर लागत रहे हँय, अउर उआ हरेक महीना फरत रहा हय; अउर उआ बिरबा के पत्तन से जाति-जाति के मनई नीक होइ जात रहे हँय। 3पुनि सराप न होई, अउर परमातिमा अउर मेम्ना के सिंहासन, उआ सहर माहीं होई, अउर उनखर दास उनखर अराधना करिहँय। 4ऊँ पंचे उनखर मुँह देखिहँय, अउर उनखर नाम उनखे लिलारे के ऊपर लिखा रही। 5पुनि रात न होई, अउर उनहीं पंचन काहीं, दिया अउर सुरिज के उँजिआर के जरूरत न होई, काहेकि प्रभू परमातिमा, उनहीं पंचन काहीं उँजिआर देइहँय, अउर ऊँ पंचे जुगन-जुगन तक राज करिहँय।
यीसु के दुसराय आउब
6पुनि स्वरगदूत हमसे कहिन, “ईं बातँय बिसुआस के काबिल, अउर सत्य हईं, प्रभू, जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के आत्मन के, परमातिमा आहीं, अपने स्वरगदूत काहीं एसे पठइन हीं, कि अपने दासन काहीं ऊँ बातँय, जिनखर हरबिन पूर होब जरूरी हय, देखामँय।”
7“देखा, हम हरबिन आमँइ बाले हएन! धन्य हय उआ, जउन इआ किताब के भबिस्यबानी के बातन काहीं मानत हय।”
8हम उहय यूहन्ना आहेन, जउन ईं बातँय सुनत अउर देखत रहे हएन। जब हम सुनेन अउर देखेन, त जउन स्वरगदूत हमहीं ईं बातँय देखाबत रहे हँय, हम उनखे गोड़ेन माहीं गोड़न गिरँय के खातिर गिर परेन। 9पय ऊँ हमसे कहिन, “देखा, अइसा न करा, काहेकि हम तोंहार, अउर तोंहरे भाई परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के, अउर इआ किताब के बातन काहीं मानँइ बालेन के संगी दास आहेन। तूँ केबल परमातिमय भर के गोड़न गिरा।”
10पुनि ऊँ हमसे कहिन, “इआ किताब के भबिस्यबानी के बातन काहीं बन्द न करा; काहेकि समय नेरेन हय। 11जे अन्याय करत हय, उआ अन्याय करत रहय; जे पापी हय, उआ पाप करत रहय; जे कोऊ परमातिमा के नजर माहीं निरदोस हय, उआ निरदोस बना रहय; अउर जे पबित्र हय, उआ पबित्र बना रहय।”
12“देखा, हम हरबिन आमँइ बाले हएन; अउर हरेक के कामन के मुताबिक बदला देंइ के खातिर प्रतिफल हमरे लघे हय। 13हम अल्फा, अउर ओमेगा, पहिल अउर आखिरी, आदि अउर अन्त आहेन।”
14“ऊँ पंचे धन्य हें, जउन आपन ओन्हा धोय लेत हें, काहेकि उनहीं जीबन के बिरबा के लघे, आमँइ के अधिकार मिली, अउर ऊँ पंचे फाटक से होइके सहर माहीं जइहँय। 15पय कुकुरन, अउर जादू-टोना करँइ बाले, अउर ब्यभिचारी, अउर कतली, अउर मूरतिन के पूजा करँइ बाले, अउर हरेक लबरी काम करँइ बाले, अउर लबरी बोलँइ के इच्छा रक्खँइ बाले, बहिरेन रइहँय।”
16“हम यीसु, अपने स्वरगदूत काहीं एसे पठएन हय, कि ऊँ तोंहरे पंचन के आँगे मसीही मन्डलिन के बारे माहीं, ईं बातन के गबाही देंय। हम दाऊद के मूल अउर बंस, अउर भिनसारे के चमकत तरइया आहेन।”
17पबित्र आत्मा अउर दुलहिन दोनव कहत हें, “आबा!” अउर सुनँय बाला घलाय कहय, “आबा!” जे पियासा होय उआ आबय, अउर जे कोऊ चाहय, उआ जीबन के पानी सेंत-मेंत लेय।
उपसंहार
18हम हरेक काहीं, जे इआ किताब के भबिस्यबानी के बातन काहीं सुनत हय, गबाही देइत हएन, अगर कउनव मनई, ईं बातन म कुछू बढ़ाई, त परमातिमा ऊँ बिपत्तिन काहीं, जउन इआ किताब माहीं लिखी हईं, ओखे ऊपर बढ़इहँय। 19अगर कोऊ इआ किताब के भबिस्यबानी के बातन म से कुछू निकार डारी, त परमातिमा, जीबन के बिरबा अउर पबित्र सहर म से, जेखर बखान इआ किताब माहीं हय, ओखर भाग निकार देइहँय।
20जे ईं बातन के गबाही देत हें, ऊँ इआ कहत हें, “हाँ, हम हरबिन आमँइ बाले हएन।” आमीन। हे प्रभू यीसु अई!
21प्रभू यीसु के किरपा, पबित्र लोगन22:21 कुछ बाइबल माहीं “सब लोगन” के ऊपर लिखा हय के ऊपर बनी रहय। आमीन।