मरकुस के लिखी खुसी के खबर
इआ किताब के परिचय
मरकुस के लिखी खुसी के खबर के सुरुआत इआमेर से हय, “परमातिमा के लड़िका यीसु मसीह के खुसी के खबर।” इआ खुसी के खबर म यीसु काहीं सगले कामन म अधिकार रक्खँइ बाले, अउर सही काम करँइ बाले, मनई कि नाईं बताबा ग हय। यीसु के अधिकार उनखे सिच्छन माहीं, बुरी आत्मन क निकारँइ माहीं, अउर मनइन के पाप माफ करँइ माहीं देखाबा ग हय। इआ खुसी के खबर माहीं यीसु अपने काहीं “मनई के लड़िका” कहिन हीं। यीसु दुनिया माहीं एसे आएँ, कि मनइन काहीं पापन से छोड़ामँइ के खातिर आपन जान देंइ।
मरकुस यीसु के बातन अउर सिच्छन काहीं नहीं, बलकिन उनखे कामन काहीं जादा जोर दिहिन हीं। एसे मरकुस यीसु के कामन के बखान सहज अउर सही ढँग से किहिन हीं। यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले, अउर यीसु के बपतिस्मा, अउर यीसु के परिच्छा, के बारे माहीं थोरी काहीं बताए के बाद, लेखक हरबिन यीसु काहीं बिमारन काहीं नीक करब, अउर परमातिमा के सँदेस बताउब, अउर उनखे सेबा के कामन काहीं बतामँइ लागत हें। जेतना समय बीतत ग, ओतनइ यीसु के बात मानँइ बाले उनहीं निकहा से जानत गें, पय यीसु के बिरोधी खुब जादा होइगें। अन्तिम पाठन माहीं यीसु के अन्तिम जीबन के घटना के बारे माहीं बताबा ग हय। जउने म खास हय, यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाउब, मारा जाब, गाड़ा जाब, अउर दुसराय जिन्दा होइके स्वरग जाब।
अपना पंचे इआ खुसी के खबर काहीं जरूर पढ़ी। अउर यीसु मसीह के सिच्छन के बारे माहीं, अउर उनखे चमत्कारन के बारे माहीं, अउर मरेन म से पुनि जिन्दा होंइ के बारे माहीं, निकहा से जानी, अउर अपने मसीही जीबन काहीं आत्मिक रूप से मजबूत बनाई।
रूप-रेखा :
खुसी के खबर के सुरुआत- 1:1-13
गलील माहीं यीसु के सेबा के काम- 1:14; 9:50
गलील से यरूसलेम सहर तक के यात्रा- 10:1-52
यरूसलेम माहीं अन्तिम हप्ता- 11:1; 15:47
यीसु के दुबारा जिअब- 16:1-8
जिन्दा भए प्रभू यीसु के देखाई देब अउर स्वरग काहीं जाब- 16:9-20
1यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के प्रचार
1परमातिमा के लड़िका यीसु मसीह के खुसी के खबर के सुरुआत। 2जइसन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के किताब माहीं लिखा हय, कि
“देखा, हम अपने दूत काहीं तोंहसे पहिले पठइत हएन, जऊँ तोंहरे खातिर मनइन काहीं तइआर करिहँय।
3सुनसान जघा माहीं एकठे मनई खुब चन्डे गोहराबत रहे हँय, कि अपने मन काहीं तइआर कइके गइल सीध बनाय ल्या, काहेकि प्रभू आमँइ बाले हें1:3 यसा 40:3।”
4ऊँ गोहरामँइ बाले यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले आहीं, जऊँ सुनसान जघा माहीं बपतिस्मा देत रहे हँय, ऊँ ठाढ़ होइके कहँइ लागें, पाप करब छोंड़िके अपने मन काहीं बदला, अउर बपतिस्मा ल्या, जउने परमातिमा तोंहरे अपराधन काहीं माफ कइ देंय। 5सगले यहूदिया प्रदेस के यहूदी, अउर यरूसलेम सहर के रहँइ बाले सगले मनई अपने घरन से निकरिके यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के लघे गें, अउर अपने-अपने पापन काहीं सोइकार कइके यरदन नदी माहीं उनसे बपतिस्मा लिहिन।
6यूहन्ना ऊँट के बार से बना ओन्हा पहिरत रहे हँय, अउर करिहाँ माहीं चमड़ा के पट्टा बाँधे रहत रहे हँय, अउर ऊँ चिड्डन काहीं अउर जंगल के महिपर खात रहे हँय। 7अउर इआ कहिके प्रचार करत रहे हँय, कि “हमरे बाद जऊँ आमँइ बाले हें, ऊँ हमसे एतना महान हें; कि हम निहुरिके उनखे पनहिन के डोरव तक छोरँइ के काबिल नहिं आहेन। 8हम त तोहईं पंचन काहीं पानी से बपतिस्मा दिहेन हय, पय ऊँ तोहईं पबित्र आत्मा से बपतिस्मा देइहँय।”
यीसु के बपतिस्मा अउर परिच्छा
(मत्ती 3:13; 4:11; लूका 3:21-22; 4:1-13)
9एक दिना यीसु गलील प्रदेस के नासरत गाँव से आइके, यरदन नदी माहीं यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से बपतिस्मा लिहिन। 10यीसु जइसय पानी से बहिरे निकरिके ऊपर आएँ, तबहिनय ऊँ अकास काहीं खुलत अउर पबित्र आत्मा काहीं अपने ऊपर परेबा के रूप म उतरत देखिन। 11अउर इआ अकासबानी भय, “तूँ हमार पियार लड़िका आह्या, हम तोंहसे प्रसन्न हएन।”
12तब पबित्र आत्मा हरबिन यीसु काहीं सुनसान जघा कइती पठइस। 13अउर सुनसान जघा माहीं, सइतान उनखर चालिस दिना तक परिच्छा लिहिस; अउर उहाँ यीसु जंगल म रहँइ बाले जानबरन के बीच माहीं रहे हँय, अउर स्वरगदूत उनखर सेबा करत रहे हँय।
यीसु के सेबकाई के सुरुआत
14जब हेरोदेस राजा यूहन्ना काहीं जेल माहीं डरबाय दिहिन तय, ओखे बाद यीसु गलील प्रदेस माहीं आइके, परमातिमा के राज के खुसी के खबर सुनामँइ लागें। 15अउर ऊँ कहिन, “सही समय आइगा हय, अउर हरबिन परमातिमा राजा बनिके आमँइ बाले हें; पाप करब छोंड़िके परमातिमा के लघे आबा, अउर खुसी के खबर के बिसुआस करा।”
पहिल चेलन काहीं बोलाबा जाब
16एक दिना यीसु गलील प्रदेस के झील के किनारे-किनारे चलतय-चलत, समौन अउर उनखे भाई अन्द्रियास काहीं झील म जाल डारत देखिन; काहेकि ऊँ पंचे मछुआरा रहे हँय। 17यीसु उनसे कहिन, “हमरे पीछे चले आबा, हम तोंहईं मनइन काहीं परमातिमा के लघे लइ आमँइ बाला बनाउब।” 18अउर ऊँ पंचे तुरन्तय जालन क छोंड़िके यीसु के पीछे चल दिहिन।
19उहाँ से कुछ दूरी चले के बाद, यीसु जब्दी के लड़िका याकूब अउर ओखे भाई यूहन्ना काहीं नाव म चढ़े जालन काहीं सुधारत देखिन। 20यीसु उनहीं हरबिन बोलाइन; अउर ऊँ पंचे अपने बाप जब्दी काहीं मजूरन के साथ नाव माहीं छोंड़िके यीसु के पीछे चल दिहिन।
बुरी आत्मा से परेसान मनई काहीं नीक करब
21यीसु अपने चेलन के साथ कफरनहूम सहर माहीं गें, अउर ऊँ पबित्र दिन काहीं हरबिन यहूदी सभाघर माहीं जाइके उपदेस देंइ लागें। 22अउर मनई उनखे उपदेस काहीं सुनिके चउआइगें; काहेकि यीसु उनहीं मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन कि नाईं नहीं, बलकिन अधिकारी कि नाईं उपदेस देत रहे हँय। 23उहय समय उनखे सभाघर माहीं एकठे मनई बइठ रहा हय, जउने माहीं एकठे बुरी आत्मा रही हय। 24उआ एक दरकिन चिल्लाइके कहँइ लाग, “हे नासरत गाँव के रहँइ बाले यीसु हमार अपना से कउनव काम नहिं आय, का अपना हमहीं नास करँइ आएन हँय? हम अपना काहीं जानित हएन, कि अपना को आहेन? अपना परमातिमा के पबित्र जन आहेन।” 25यीसु ओही डाँटिके कहिन, “चुप्पय रव्ह; अउर उआ मनई से बहिरे निकर जा।” 26तबहिनय उआ बुरी आत्मा उआ मनई काहीं खुब अभुआइके, अउर खुब चंडे चिल्लाइके ओसे बहिरे निकरिगे। 27इआ देखिके सगले जन चउआइगें, अउर आपस माहीं कहँइ लागें, “इआ का बात ही? इआ त कउनव नबा उपदेस आय! यीसु अधिकार के साथ बुरी आत्मन काहीं हुकुम देत हें, अउर ऊँ उनखर हुकुम मनती हईं।” 28अउर यीसु के नाम हरबिन गलील प्रदेस के आस-पास के सगले गाँमन माहीं फइलिगा।
खुब बिमारन काहीं नीक करब
29यीसु हरबिन यहूदी सभाघर से निकरिके याकूब अउर यूहन्ना के साथ समौन अउर अन्द्रियास के घर माहीं गें। 30समौन के सास काहीं बोखार चढ़ी रही हय, अउर घरबाले हरबिन यीसु से उनखे बारे माहीं बताइन। 31तब यीसु समौन के सास के लघे जाइके उनखर हाँथ पकड़िके उठाइन; तबहिनय उनखर बोखार उतरि गे, अउर ऊँ उनखर सेबा-सहाई करँइ लागीं।
32साँझ के समय जब सुरिज बूड़िगा, तब खुब जने सगले बिमारन काहीं, अउर उनहीं जउनेन माहीं बुरी आत्मा रही हँय, यीसु के लघे लइ आएँ। 33अउर सहर के खुब मनई घर के सउहें एकट्ठा होइगें। 34यीसु खुब जनेन काहीं, जऊँ कइअक मेर के बिमारिन से परेसान रहे हँय, नीक कइ दिहिन, अउर खुब बुरी आत्मन काहीं निकारिन, अउर ऊँ, बुरी आत्मन काहीं बोलँइ नहीं देत रहे आहीं, काहेकि ऊँ यीसु काहीं जानत रही हँय।
अकेले माहीं यीसु के प्राथना
35भिनसरहय सुरिज निकरँइ से खुब पहिलेन, यीसु उठिके, घर से निकरिके सुनसान जघा माहीं गें, अउर उहँय प्राथना करँइ लागें। 36सकारे समौन अउर उनखर साथी उनहीं ढूँढ़ँइ गें। 37जब यीसु उनहीं मिलिगें, तब ऊँ पंचे उनसे कहिन, “सगले जन अपना काहीं ढूँढ़त लाग हें।” 38यीसु उनसे कहिन, “आबा हम पंचे अउर कहँव आस-पास के बस्तिन म चली, जउने हम उहँव प्रचार करी, काहेकि हम एहिन खातिर निकरेन हय।” 39यीसु सगले गलील प्रदेस माहीं उनखे सभाघरन माहीं जाइ-जाइके खुसी के खबर के प्रचार करत, अउर बुरी आत्मन काहीं मनइन से निकारत रहिगें।
कोढ़ के मरीज काहीं नीक करब
40एकठे कोढ़ी यीसु के लघे आबा, अउर उनसे चरउरी बिनती किहिस, अउर उनखे गोड़न गिरिके कहिस, “अगर अपना चाही त हमहीं सुद्ध कइ सकित हएन।” 41यीसु काहीं उआ मनई के ऊपर बड़ी दया आइगे, अउर आपन हाँथ बढ़ाइके ओही छुइन अउर कहिन, “हम चाहित हएन, तूँ सुद्ध होइजा।” 42अउर हरबिन ओखर कोढ़ के बिमारी नीक होंइ लाग, अउर उआ सुद्ध होइगा। 43तब यीसु ओही चेतउनी दइके तुरन्तय पठय दिहिन। 44अउर ओसे कहिन, “देखा कोहू से कुछू न कह्या, पय जाइके अपने-आप काहीं याजक क देखाबा, अउर अपने सुद्ध होंइ के बारे माहीं जउन चढ़ाबा चढ़ामँइ काहीं मूसा नबी ठहराइन हीं, उहय भेंट चढ़ाबा, कि जउने तोंहरे समाज के लोगन के खातिर गबाही ठहरय।” 45पय उआ बहिरे जाइके अपने निकहा होंइ के खुब प्रचार करँइ लाग, अउर सगले सहर म इआ खबर फइलाय दिहिस, इआ कारन से यीसु पुनि खुले आम सहर माहीं नहीं जाय सकें, पय सुनसान जघा माहीं रहत रहे हँय; अउर चारिव कइती से मनई उनखे लघे आबत रहिगें।
2लोकबा के मरीज काहीं नीक करब
1कइअक दिना के बाद यीसु पुनि कफरनहूम सहर म आएँ, अउर कुछ जने जानिगें कि यीसु घरय माहीं हें। 2उहाँ एतने मनई एकट्ठा होइगें कि दुअरा के लघे घलाय जघा नहीं रहिगे; अउर यीसु उनहीं परमातिमा के बचन सुनामँइ लागें। 3अउर कुछ जने एकठे लोकबा के मरीज काहीं, चार जने से खटिया समेत उठबाइके यीसु के लघे लइ आएँ। 4पय जब ऊँ पंचे भीड़ के कारन यीसु के लघे नहीं पहुँच पाएँ, तब उआ घर के खपरइल काहीं उतिनँइ लागें, जउने सउहें यीसु भीतर रहे हँय, अउर जब ऊँ पंचे ठाठ समेत उतिन चुकें, तब उआ मरीज काहीं खटिया समेत नीचे झुलाय दिहिन। 5यीसु, उनखे बिसुआस काहीं देखिके, उआ लोकबा के मरीज से कहिन, “हे बेटबा तोंहार पाप माफ होइगें।” 6तब मूसा के बिधान सिखामँइ बाले कइएक जने जउन उहाँ बइठ रहे हँय, ऊँ पंचे अपने-अपने मन म सोचँइ लागें, 7“इआ मनई काहे अइसा कहत हय? इआ त परमातिमा के बुराई करत हय! परमातिमा काहीं छोंड़िके अउर को पाप माफ कइ सकत हय?” 8यीसु हरबिन अपने आत्मा माहीं जान लिहिन, कि ऊँ पंचे अपने-अपने मन माहीं का सोचत हें, अउर उनसे कहिन, “तूँ पंचे अपने-अपने मन म इआ काहे सोचते हया? 9सरल का हय? का लोकबा के मरीज से इआ कहब तोंहार पाप माफ होइगें, इआ कि इआ कहब कि ‘उठा, आपन खटिया उठाइके चला फिरा’? 10पय जउने तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि मनई के लड़िका काहीं धरती माहीं पाप माफ करँइ के घलाय अधिकार हय।” यीसु उआ लोकबा के मरीज से कहिन, 11“हम तोंहसे कहित हएन, कि उठा, आपन खटिया उठाइके अपने घर चले जा।” 12उआ उठा, अउर हरबिन खटिया उठाइके सगले मनइन के आँगे से निकरिके चला ग; इआ देखिके सगले जन अचरज मानिन, अउर परमातिमा के बड़ाई कइके कहँइ लागें, “हम पंचे अइसन कबहूँ नहीं देखेन।”
लेबी काहीं बोलाउब
13यीसु घर से निकरिके पुनि झील के किनारे गें, तबहिनय एकठे बड़ी भीड़ उनखे लघे आइगे, अउर यीसु उनहीं उपदेस देंइ लागें। 14यीसु जात समय हलफई के लड़िका लेबी काहीं चुंगी नाका माहीं बइठे देखिन, अउर उनसे कहिन, “हमरे पीछे चले आबा।” अउर लेबी उठिके यीसु के पीछे चल दिहिन।
15जब यीसु लेबी के घर माहीं खाना खाँइ बइठें, तब खुब चुंगी लेंइ बाले, अउर यहूदी लोग जिनहीं पापी कहत रहे हँय, ऊँ मनई, यीसु अउर उनखे चेलन के साथ खाना खाँइ बइठिगें; काहेकि ऊँ खुब जने रहे हँय, अउर सगले जन यीसु के पीछे आइगें तय। 16मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर फरीसी लोग इआ देखिके, कि यीसु, यहूदी लोग जिनहीं पापी कहत हें, उनखे अउर चुंगी लेंइ बालेन के साथ खाना खात हें, त उनखे चेलन से कहँइ लागें, “यीसु चुंगी लेंइ बालेन अउर पापी मनइन के साथ काहे खात-पिअत हें?” 17यीसु इआ बात काहीं सुनिके उनसे कहिन, “नीक-सूख मनइन काहीं बैद के जरूरत नहीं परय, बलकिन बिमारन काहीं बैद के जरूरत परत ही: जे कोऊ इआ सोचत हें, कि हम पापी नहिं आहेन उनहीं नहीं, बलकिन हम पापी लोगन काहीं बोलामँइ आएन हँय।”
उपासे रहँइ के बारे माहीं पूँछब
18यूहन्ना के चेला लोग अउर फरीसी लोग उपासे रहत रहे हँय; एसे ऊँ पंचे आइके यीसु से इआ कहिन, “यूहन्ना के चेला लोग अउर फरीसी लोगन के चेला लोग काहे उपासे रहत हें, पय अपना के चेला लोग उपासे नहीं रहँय?” 19यीसु उनसे कहिन, “जब तक दुलहा बरातिन के साथ म रहत हय, त का कउनव बरतिहा उपासे रहि सकत हें? नहीं, काहेकि जब तक दुलहा साथ माहीं हय, तब तक ऊँ पंचे उपासे नहीं रहि सकँय। 20पय एक दिना उआ समय अई, जब दुलहा बरातिन से अलग कीन जई, उआ समय ऊँ पंचे उपासे रइहँय।
21नबा ओन्हा के ठेगरी पुरान ओन्हा माहीं कोऊ नहीं लगाबय, काहेकि नबा धोए से सकिलके पुरान ओन्हा काहीं खींचिके फारि डारत हय। 22अउर नबा अंगूर के रस काहीं पुरान मसकन माहीं भरिके कोऊ नहीं धरय, काहेकि नबा अंगूर के रस पुरान मसकन काहीं फारि डारी, अउर अंगूर के रस अउर मसक दोनव खराब होइ जइहँय; एहिन से नबा अंगूर के रस नई मसकन माहीं भरा जात हय।”
यीसु पबित्र दिन के घलाय मालिक आहीं
23अइसन भ, कि यीसु पबित्र दिन काहीं खेतन के किनारे-किनारे जात रहे हँय, अउर उनखर चेला लोग चलतय-चलत गोहूँ के बाली टोरँइ लागें। 24तब फरीसी लोग यीसु से कहिन, “देखी; पबित्र दिन काहीं अपना के चेला लोग उआ काम काहे करत हें, जउन मूसा के बिधान के मुताबिक उचित नहिं आय?” 25यीसु उनसे कहिन, “का तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं इआ कबहूँ नहीं पढ़े आह्या, कि जब राजा दाऊद काहीं जरूरत परी, अउर जब ऊँ, अउर उनखर साथी भूँखे रहे हँय, तब ऊँ का किहिन तय? 26राजा दाऊद कइसन अबियातार महायाजक के समय माहीं, परमातिमा के घर माहीं जाइके भेंट चढ़ाई रोटिन काहीं खाइन, अउर अपने साथिन काहीं घलाय खबाइन, जबकि ऊँ रोटिन काहीं खाँय के अधिकार याजकन के अलाबा दुसरेन काहीं खाब मूसा के बिधान के खिलाफ रहा हय?” 27तब यीसु, फरीसी लोगन से कहिन, “पबित्र दिन मनई के खातिर बनाबा ग हय, मनई पबित्र दिन के खातिर नहीं बनाबा ग। 28इआ जानिल्या, कि मनई के लड़िका पबित्र दिन के घलाय प्रभू आहीं।”
3झुरान हाँथ बाले मनई काहीं नीक करब
1यीसु पुनि यहूदी सभाघर माहीं गें; उहाँ एकठे मनई बइठ रहा हय, जउने के हाँथ झुरान रहा हय। 2अउर कुछ जने यीसु के ऊपर दोस लगामँइ के खातिर मोका ताके रहे हँय, कि देखी यीसु पबित्र दिन काहीं उआ मनई काहीं नीक करत हें, कि नहीं। 3यीसु झुरान हाँथ बाले मनई से कहिन, “बीच म ठाढ़ होइजा।” 4अउर यीसु उनसे कहिन, “मूसा के बिधान के मुताबिक का पबित्र दिन काहीं भलाई करब उचित हय, कि बुराई करब, कोहू के प्रान बचाउब उचित हय, कि मारि डारब?” पय ऊँ पंचे कुछू नहीं बोले। 5यीसु उनखे मन के कठोरता के कारन उदास होइके, उनखे ऊपर गुस्साइके चारिव कइती देखिन, अउर झुरान हाँथ बाले मनई से कहिन, “आपन हाँथ बढ़ाबा।” उआ आपन हाँथ बढ़ाइस, त ओखर झुरान हाँथ निकहा होइगा। 6तब फरीसी लोग सभाघर से बहिरे निकरिके हरबिन हेरोदेस के पच्छ बाले मनइन से मिलिके, यीसु के बिरोध माहीं साहुत करँइ लागें, कि यीसु काहीं कउनमेर से मार डारा जाय।
यीसु काहीं भीड़ के पछियाब
7यीसु अपने चेलन के साथ झील कइती चलेगें, अउर गलील प्रदेस से अउर यहूदिया प्रदेस से मनइन के एकठे बड़ी भीड़ उनहीं पछिआय लिहिस; 8उआ भीड़ माहीं यहूदिया प्रदेस, अउर यरूसलेम सहर, अउर इदूमिया प्रदेस, अउर यरदन नदी के दुसरे पार के, अउर सूर अउर सैदा प्रदेसन के आस-पास के गाँमन से खुब जने इआ सुनिके, कि यीसु कइसन अचरज के काम करत हें, देखँइ के खातिर उनखे लघे आएँ। 9तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “भीड़ खुब जादा ही, एसे एकठे छोट क नाव हमरे खातिर तइआर रक्खा, जउने ऊँ पंचे हमही दबाए न पामँइ।” 10काहेकि यीसु खुब बिमारन काहीं नीक किहिन तय, एसे जेतने बिमार रहे हँय, यीसु काहीं छुअँइ के खातिर उनखे उपरय गिरे परत रहे हँय। 11अउर जिनखे भीतर बुरी आत्मा रही हँय, जब ऊँ यीसु काहीं देखत रही हँय, त उनखे गोड़ेन म गिर परत रही हँय, अउर चिल्लाइके कहत रही हँय, कि तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या; 12अउर यीसु ऊँ बुरी आत्मन काहीं चेतउनी दइके कहिन, कि हमरे बारे माहीं न बताबा, कि हम को आहेन।
बारा खास चेलन काहीं बोलाउब
13यीसु पहार म चढ़िगें, अउर ऊँ जिनहीं चाहत रहे हँय, उनहीं अपने लघे बोलाइन; अउर ऊँ पंचे उनखे लघे गें। 14तब यीसु बारा जनेन काहीं आपन खास चेलन के रूप माहीं चुनिन, कि ऊँ पंचे उनखे साथ माहीं रहँय, अउर ऊँ उनहीं पठमँइ, कि जउने ऊँ पंचे परमातिमा के सँदेस के प्रचार करँय, 15अउर उनहीं बुरी आत्मन काहीं मनइन से निकारँइ के अधिकार दिहिन। 16अउर मसीह यीसु के द्वारा चुने खास बारा चेलन के नाम इआमेर से हँय: समौन जिनखर नाम यीसु पतरस धराइन, 17अउर जब्दी के लड़िका याकूब, अउर याकूब के भाई यूहन्ना जिनखर नाम यीसु बुअनरगिस धराइन, जेखर मतलब हय गरजन के लड़िका, 18अउर अन्द्रियास, अउर फिलिप्पुस, अउर बरतुल्मय, अउर मत्ती, अउर थोमा, अउर हलफई के लड़िका याकूब, अउर तद्दय, अउर समौन कनानी, 19अउर यहूदा इस्करियोती जउन यीसु काहीं पकड़बाइस घलाय रहा हय।
यीसु अउर बुरी आत्मन के मुखिया
(मत्ती 12:22-32; लूका 11:14-23; 12:10)
20जब यीसु घर माहीं आएँ; तब अइसन भीड़ एकट्ठा होइगे, कि उनहीं पंचन काहीं खाँइ तक क मोका नहीं मिला। 21जब उनखे परिबार बाले इआ सुनिन, तब ऊँ पंचे यीसु काहीं पकड़िके लइ आमँइ के खातिर निकर परें; काहेकि ऊँ पंचे कहत रहे हँय, कि यीसु के दिमाक ठीक नहिं आय।
22मूसा के बिधान सिखामँइ बाले घलाय जऊँ यरूसलेम सहर से आएँ तय, इआ कहत रहे हँय, कि “यीसु के भीतर सइतान हय” अउर “ऊँ बुरी आत्मन के मुखिया अरथात सइतान के मदत से बुरी आत्मन काहीं मनइन से निकारत हें।”
23एसे यीसु उनहीं अपने लघे बोलाइके उनसे उदाहरन दइके कहँइ लागें, “सइतान खुद कइसन सइतान काहीं निकार सकत हय?” 24अगर कउनव राज के मनई आपस माहीं लड़ाई-झगड़ा करँइ लागँय, त उआ राज कइसन स्थिर रहि सकत हय? 25अउर अगर कउनव घर माहीं फूट परि जात ही, त उआ घर बरबाध होइ जात हय। 26एसे अगर सइतान खुद अपनय बिरोधी बनिके अपने बीच म फूट डारी, त उआ कइसन टिकी? ओखर त नासय होइ जई।
27यीसु कहिन, हम तोहईं पंचन काहीं अउर निकहा से समझाइत हएन, “कोऊ मनई कउनव बलमान मनई के घर माहीं घुसिके ओखर धन-सम्पत्ती लूट नहीं सकय, जब तक कि उआ मनई, उआ बलमान मनई काहीं बाँधि न देय, ओही बाँधे के बादय ओखे घर काहीं लूट सकत हय।”
28यीसु पुनि कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि मनइन के द्वारा कीन सगले पाप अउर परमातिमा के बुराई, माफ कीन जई, 29पय जे कोऊ पबित्र आत्मा के खिलाफ बुराई करी, ओही कबहूँ माफ न कीन जई: बलकिन उआ परमातिमा के नजर माहीं हमेसा के खातिर अपराधी ठहरी।” 30यीसु अइसन एसे कहिन, काहेकि ऊँ पंचे इआ कहत रहे हँय, कि यीसु माहीं बुरी आत्मा हय।
यीसु के महतारी अउर भाई
(मत्ती 12:46-50; लूका 8:19-21)
31तब यीसु के महतारी अउर भाई लोग आएँ, अउर बहिरे ठाढ़ होइके कुछ जनेन काहीं पठइके यीसु काहीं बोलबाइन। 32यीसु के लघे खुब भीड़ बइठ रही हय, अउर ऊँ बोलामँइ बाले यीसु से कहिन, “देखी, अपना के महतारी अउर भाई लोग अपना काहीं ढूँढ़ँइ आए हँय, अउर ऊँ पंचे बहिरे ठाढ़ हें।” 33इआ सुनिके यीसु बोलामँइ बालेन से कहिन, “हमार महतारी अउर हमार भाई को आहीं, तूँ पंचे जनते हया?” 34जउन मनई यीसु के आस-पास बइठ रहे हँय, यीसु उनखे कइती निहारिके कहिन, “देखा हमार महतारी अउर हमार भाई ईं पंचे आहीं। 35काहेकि जे कोऊ परमातिमा के मरजी के मुताबिक चलत हय, उहय हमार भाई, बहिनी अउर महतारी आय।”
4बीज बोमँइ बाले किसान के उदाहरन
1यीसु एक दिना पुनि झील के किनारे परमातिमा के सँदेस सुनामँइ लागें: अउर उनखे लघे अइसन बड़ी भीड़ एकट्ठा होइगे, कि यीसु काहीं झील म एकठे नाव म चढ़िके बइठँय परिगा, अउर सगली भीड़ भुँइन माहीं झील के किनारे ठाढ़ रहिगे। 2अउर यीसु उदाहरन दइ-दइके उनहीं खुब बातन काहीं सिखामँइ लागें, अउर अपने उपदेस माहीं उनसे कहिन। 3“ध्यान से सुना! एकठे बीज बोमँइ बाला, बीज बोमँइ निकरा। 4बोबत समय कुछ बीज गइल के किनारे गिरिगें, अउर पच्छी आइके उनहीं खाय लिहिन। 5कुछ बीज पथरही भुँइ माहीं गिरें, जहाँ उनहीं खुब माटी नहीं मिली, अउर गहिल माटी न मिलँइ के कारन ऊँ हरबी जामि आएँ, 6अउर जब सुरिज उआ, त तेज घाम के कारन ऊँ जरिगें, अउर जर मजबूत न होंइ के कारन झुराइगें। 7कुछ बीज जरबइलन म गिरें, अउर जामि आएँ, पय ऊँ जरबइला बाढ़िके उनहीं दबाय लिहिन, एसे उन माहीं फर नहीं लग पाएँ। 8पय कुछ बीज निकही भुँइ माहीं गिरें, अउर जामि आएँ अउर बाढ़िके खुब फरें; कउनव बिरबा तीस गुना, कउनव साठ गुना, कउनव सव गुना फर लइ आएँ।” 9अउर यीसु कहिन, “जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”
उदाहरनन के उद्देस
10जब सगली भीड़ चली गय, अउर यीसु अकेले बचे, तब उनखर साथी लोग ऊँ बरहँव चेलन समेत यीसु से ईं उदाहरनन के बारे माहीं पूँछँइ लागें। 11यीसु उनसे कहिन, “परमातिमा के राज के जउने बातन काहीं दूसर लोग नहीं जानँय, ऊँ बातन काहीं परमातिमा तोहईं समझाइन हीं, पय दुसरे लोगन से सगली बातँय उदाहरनन माहीं कही गई हँय, एसे कि जउने पबित्र सास्त्र माहीं लिखी यसायाह नबी के बात पूर होय।”
12यसायाह अइसन लिखिन हीं, कि
“ईं पंचे परमातिमा के महिमा काहीं देखत हें, पय देखेव से जाने नहीं पामँय, अउर अपने कानन से सुनत हें, पय सुनेव से नहीं समझे पामँय; पय अगर ईं सगले जने परमातिमा के सँदेस के बिसुआस कइ लेतें, त उनखर पाप माफ कइ दीन जातें।”
बीज बोमँइ बाले किसान के उदाहरन के मतलब
(मत्ती 13:18-23; लूका 8:11-15)
13यीसु पुनि उनसे से कहिन, “काहे तूँ पंचे इआ उदाहरन काहीं नहीं समझे पाया? त पुनि अउर दुसरे उदाहरनन काहीं कइसा समझे पइहा? इआ उदाहरन के मतलब इआमेर से हय। 14परमातिमा के बचन बतामँइ बाला बीज बोमँइ बाले कि नाईं हय। 15कुछ जने गइल के किनारे गिरे बीज कि नाईं होत हें, जब ऊँ परमातिमा के बचन काहीं सुनत हें, त कुछ देर बाद सइतान आइके उनखे सुनी बात काहीं बिसराय देत हय। 16उहयमेर कुछ लोग पथरही जमीन माहीं बोए बीज कि नाईं होत हें, जउन परमातिमा के सँदेस काहीं सुनिके, तुरन्तय मारे उराव के अपनाय लेत हें। 17पय अपने जीबन माहीं परमातिमा के बचन काहीं गहराई से लागू नहीं करँइ, एसे कुछ दिनन तक मानत हें, पय बाद माहीं जबहिन परमातिमा के बचन के कारन दुख अउर कस्ट मिलत हें, त ऊँ पंचे हरबिन परमातिमा के बचन काहीं मानब छोंड़ि देत हें। 18अउर जउन जरबइलन माहीं बोए बीज कि नाईं हें, ऊँ पंचे ईं आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिन, 19पय घर-परिबार के चिन्ता, अउर धन के लालच, अउर इहइमेर के खुब चीजन काहीं पामँइ के लालच माहीं फँसिके, परमातिमा के बचन काहीं बिसराय देत हें, अउर परमातिमा के आसीस नहीं पामँइ, अउर बिना फर के बिरबा कि नाईं होइ जात हें। 20पय जउन निकही भुँइ माहीं बोए बीज कि नाईं होत हें, ऊँ पंचे ईं आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिके, पूरे बिसुआस के साथ अपनाबत हें, अउर कोऊ तीस गुना, कोऊ साठ गुना, अउर कोऊ सव गुना फर लइ आबत हें।”
दिया के उदाहरन
21यीसु उनसे कहिन, “कउनव मनई दिया जलाइके बरतन के नीचे, इआ कि खटिया के नीचे नहीं धरय, बलकिन ऊँच जघा माहीं धरत हय, कि जउने सगलेन काहीं उँजिआर मिलय। 22काहेकि जउन कुछू बिचार मनइन के मन माहीं हें, परमातिमा उनहीं प्रगट करिहँय, अउर हमरे जीबन के सगली छिपी बातन काहीं परमातिमा जानत हें। 23जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”
24यीसु पुनि उनसे कहिन, “बड़े ध्यान से हमरे बात काहीं सुना, जउने नाप से तूँ पंचे दुसरेन काहीं नपते हया, उहय नाप से तोंहरेव खातिर नापा जई। बलकिन तोंहईं अउर जादा दीन जई। 25जे कोऊ परमातिमा के बचन काहीं अउर निकहा से जानँइ के कोसिस करत हय, परमातिमा ओही अउर आत्मिक ग्यान देत हें, पय जे कोऊ परमातिमा के बचन काहीं जानँइ के कोसिस नहीं करय, त ओखे लघे जउन ग्यान रहत हय, उहव बिसरि जात हय।”
जामँय बाले बीज के उदाहरन
26यीसु पुनि उनसे कहिन, “परमातिमा के राज इआमेर से हय, जइसन कउनव मनई भुँइ माहीं बीज छींटय, 27अउर घर माहीं जाइके रातके सोय जाय, अउर दिन माहीं सकारे जागय, अउर उआ बीज जामिके अइसन बाढ़ि आबय, कि उआ किसान खुदय न जाने पाबय, कि उआ कइसन बाढ़ि आबा। 28धरती अपने-आप फसल तइआर करत ही, जइसन पहिले अँकुरब, अउर ओखे बाद बाली, अउर तब बाली माहीं दाना तइआर करत ही, 29पय जब बाली माहीं दाना पकि जात हय, तब उआ किसान हरबिन हँसिया से काटँय के तइआरी करत हय, काहेकि उआ जान लेत हय कि फसल काटँय के काबिल होइगे ही।”
राई के दाना के उदाहरन
(मत्ती 13:31-32,34; लूका 13:18-19)
30यीसु पुनि कहिन, “परमातिमा के राज के उपमा कउने चीज से देई, अउर कउने उदाहरन से तोहईं पंचन काहीं समझाई? 31परमातिमा के राज राई के दाना कि नाईं हय। जब भुँइ म बोबा जात हय, त सगले बीजन से छोट होत हय। 32पय जब बोबा जात हय, तब जामिके सगली साग-सब्जिन के बिरबन से बड़ा होइ जात हय, अउर ओमा से एतनी बड़ी डेरइआ निकरती हँय, कि अकास माहीं उड़ँइ बाले पच्छी ओखे छाया माहीं बसेर डार सकत हें।”
33अउर यीसु उनहीं इआमेर के खुब उदाहरन दइ-दइके जेतना ऊँ पंचे समझ सकत रहे हँय, ओतनय परमातिमा के सँदेस बताबत रहे हँय, 34अउर बिना उदाहरन के यीसु उनसे कउनव बात नहीं कहत रहे आहीं; पय एकान्त माहीं जाइके, ऊँ अपने खास चेलन काहीं सगली बातन के मतलब बताबत रहे हँय।
तेज आँधी काहीं रोंकब
35उहय दिन जब साँझ होइगे, तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “आबा, हम पंचे झील के उआ पार चली।” 36अउर ऊँ चेला लोग भीड़ काहीं उहँइ छोंड़िके, जइसन यीसु रहे हँय, उहयमेर उनहीं नाव माहीं लइके चल दिहिन; अउर उनखे साथ माहीं अउरव नाव रही हँय। 37तबहिनय खुब तेज आँधी चलँइ लाग, अउर पानी के तेज हिलकोरा नाव माहीं एतना लागँइ लाग, कि नाव माहीं पानी भरँइ लाग। 38पय यीसु नाव के पीछे के हिस्सा माहीं गद्दी म परे सोबत रहे हँय, तब ऊँ पंचे जाइके यीसु काहीं जगाइके उनसे कहिन, “हे गुरू, का अपना काहीं एक्कव चिन्ता नहिं आय, कि हम सगले जन बूड़े जइत हएन?” 39तब यीसु उठिके आँधी काहीं डाँटिन, अउर पानी काहीं कहिन, “सान्त रव्ह, रुकि जा!” अउर आँधी रुकिगें, अउर बड़ी सान्ती होइगे; 40अउर यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे काहे डेराते हया? काहे तोंहईं अबहिनव तक हमरे ऊपर बिसुआस नहिं आय?” 41ऊँ पंचे खुब डेराइगें, अउर आपस माहीं कहँइ लागें, “ईं को आहीं, कि आँधी अउर पानी तक इनखर हुकुम मानत हें?”
5बुरी आत्मा से परेसान मनई काहीं नीक करब
1यीसु अउर उनखर चेला लोग गलील प्रदेस के झील के दुसरे पार गिरसेनी लोगन के देस माहीं पहुँचिगें, 2जइसय यीसु नाव से उतरें, ओतनिनदार एकठे मनई जउने माहीं बुरी आत्मा सकान रही हय, कब्रन के जघा से चलिके यीसु के लघे आबा। 3उआ मनई कब्रन के लघे रहत रहा हय, अउर कउनव मनई ओही सँकरिव माहीं बाँधिके नहीं रख सकत रहा आय। 4काहेकि सगले जन मिलिके कइअक बेरकी ओखे हाँथ माहीं बेंड़िया डारिन अउर गोड़े माहीं सँकरिन से बाँधिन तय, पय उआ सँकरिन काहीं टोर डारत रहा हय। अउर बेंड़ियन के कइअक टुकड़ा कइ डारिस तय, ओही कउनव बलमान मनई काबू माहीं नहीं कए पाबत रहा आय। 5उआ मनई लगीतार रातव-दिन कब्रन के जघा माहीं अउर पहारन माहीं खुब चिल्लात रहा हय, अउर खुद काहीं पथरन से मारिके घायल कइ लेत रहा हय।
6उआ मनई यीसु काहीं दूरिन से देखिके दउड़त आबा, अउर उनखे लघे आइके गोड़न गिरा। 7तब यीसु उआ बुरी आत्मा से कहिन, “हे बुरी आत्मा, इआ मनई से बहिरे निकर आव!” 8अउर उआ खुब चंडे चिल्लाइके कहिस, “हे यीसु परमप्रधान परमातिमा के लड़िका, हमार अपना से कउनव काम नहिं आय, अपना काहीं परमातिमा के कसम खबाइत हएन, अपना हमहीं दुख न देई।” 9यीसु ओसे पूँछिन, “तोंहार का नाम हय?” उआ यीसु से कहिस, “हमार नाम सेना हय, काहेकि हम पंचे खुब जने हएन।” 10अउर बुरी आत्मा यीसु से खुब चरउरी किहिन, कि “हमहीं इआ देस से बहिरे न निकारी।”
11ओहिनठे पहार माहीं सुमरन के एकठे बड़ा भारी झुन्ड चरत रहा हय। 12ऊँ बुरी आत्मा यीसु से चरउरी कइके कहिन, “हमहीं ऊँ सुमरन के ऊपर पठय देई, जउने हम पंचे उनखे भीतर सकाय जई।” 13तब यीसु बुरी आत्मन काहीं हुकुम दइ दिहिन, अउर ऊँ बुरी आत्मा उआ मनई से निकरिके, ऊँ सुमरन के भीतर सकाय गईं, अउर सुमरन के सगला झुन्ड, जऊँ दुइ हजार के करीबन रहा हय, पहार के उतारा से दउड़िके झील माहीं कूद परा, अउर सगले सुमर बूड़िके मरिगें।
14सुमरन काहीं चरामँइ बाले सगले भागिके, सहर अउर लघे के गाँमन माहीं जाइके सगला हाल बताइन, अउर इआ जऊँ भ रहा हय, देखँइ के खातिर सहर अउर गाँमन के खुब जने आएँ। 15अउर ऊँ पंचे यीसु के लघे आइके उआ मनई क जउने माहीं बुरी आत्मा रही हँय, अरथात सेना समान रही हँय, ओन्हा पहिरे नीक-सूख बइठे देखिके डेराइगें। 16जउन मनई इआ घटना काहीं देखिन तय, ओखर जउने माहीं बुरी आत्मा रही हँय, अउर सुमरन के जऊँ भ तय, सगला हाल उँइ मनइन से जऊँ देखँइ आएँ तय बताइन। 17तब ऊँ सगले देखइआ यीसु से बिनती कइके कहँइ लागें, कि अपना हमरे सरहद्दी से चले जई।
18जब यीसु नाव माहीं चढ़ँइ लागें, त उआ मनई जउने म बुरी आत्मा रही हँय, यीसु से बिनती करँइ लाग, “हमहूँ काहीं अपने साथय रहँइ देई।” 19पय यीसु ओही अपने साथ माहीं चलँइ के हुकुम नहीं दिहिन, बलकिन ओसे कहिन, “अपने घर जाइके अपने परिबार बालेन से बताबा, कि प्रभू परमातिमा तोंहरे ऊपर बड़ी दया कइके केतना बड़ा काम किहिन हीं। 20उआ मनई जाइके दिकापुलिस प्रदेस के दसँव सहरन माहीं प्रचार करँइ लाग, कि यीसु हमरे खातिर केतना बड़ा काम किहिन हीं; इआ बात काहीं सुनँय बाले सगले जने चउआय जात रहे हँय।
याईर के मरी बिटिया काहीं जिआउब, अउर बिमार मेहेरिआ काहीं नीक करब
21जब यीसु पुनि नाव माहीं चढ़िके झील के दुसरे पार गें, त एकठे बड़ी भारी भीड़ उनखे लघे एकट्ठा होइगे। अउर यीसु झील के किनारेन माहीं रहे हँय। 22तब यहूदी सभाघर के मुखिअन म से एक जने आएँ, जिनखर नाम याईर रहा हय, ऊँ यीसु काहीं देखतय उनखे गोड़न गिरें, 23अउर इआ कहिके यीसु से खुब चरउरी करँइ लागें, कि हमार छोट बिटिया खुब बिमार ही, बँचब बड़ा मुसकिल हय; अपना चलिके ओखे ऊपर आपन हाँथ धइ देई, जउने उआ निकही होइके जिअत रहय।” 24तब यीसु उआ मुखिया के साथ चल दिहिन; अउर खुब भीड़ उनहीं पछिआय लिहिस, एतनी भीड़ होइगे, कि मनई यीसु के उपरय गिरे परत रहे हँय।
25भीड़ माहीं एकठे मेहेरिआ रही हय, जउने काहीं बारा बरिस से खून बहँइ के बिमारी रही हय। 26उआ मेहेरिआ खुब बैदन से आपन दबाई करबाइस; इहाँ तक कि आपन सगली धन-सम्पत्ती खरचा कइ डारिस, पय निकही नहीं भय, बलकिन अउर बिमार होइगे तय, एसे उआ खुब दुखी रहत रही हय। 27उआ यीसु के आमँइ के खबर सुनिके, भीड़ म यीसु के पीछे से आई, अउर उनखे ओन्हा काहीं छुइ लिहिस, 28काहेकि उआ मेहेरिआ काहीं इआ बिसुआस रहा हय, कि “अगर हम यीसु के ओन्हव काहीं छुइ लेब त नीक होइ जाब।” 29अउर छूतय ओखर खून बहब बन्द होइगा, अउर उआ अपने देंह माहीं जान लिहिस, कि हम उआ बिमारी से नीक होइ गएन हय। 30यीसु हरबिन अपने आत्मा म जानिगें, कि हमरे देंह से सक्ती निकरी हय, अउर पीछे फिरिके पूँछिन, “हमार ओन्हा को छुइस ही?” 31उनखर चेला लोग यीसु से कहिन, “अपना देखित हएन, कि सगली भीड़ अपना के उपरय गिरी परत ही, अउर अपना पूँछित हएन, कि हमहीं को छुइस ही?” 32पय यीसु ओही देखँइ के खातिर जउन उनहीं छुइस रहा हय, चारिव कइती देखँइ लागें। 33तब उआ मेहेरिआ इआ जानिके, कि हमार कइसन भलाई भे ही, डेरात अउर काँपत-काँपत यीसु के लघे आई, अउर उनखे गोड़न गिरिके उनसे सब सही-सही बताइस, कि हम कउने कारन से अपना काहीं छुएन, अउर छूतय नीक होइ गएन। 34यीसु उआ मेहेरिआ से कहिन, “बिटिआ, तोंहार बिसुआस तोहईं नीक किहिस ही, नीके कुसल अपने घर चले जा, अउर इआ बिमारी से बचे रहा।”
35जब यीसु इआ बात कहतय रहे हँय, तबहिनय सभाघर के मुखिया के घर से कुछ जने आइके कहिन, “तोंहार बिटिया मरिगे ही, अब गुरू काहीं जाँइ के तकलीफ काहे देते हया?” 36जऊँ बात ऊँ पंचे कहत रहे हँय, ओही यीसु बहटिआइके, यहूदी सभाघर के मुखिया याईर से कहिन, “डेरा न, केबल बिसुआस करा।” 37अउर यीसु पतरस अउर याकूब अउर याकूब के भाई यूहन्ना के अलाबा अउर कोहू काहीं अपने साथ नहीं लइगें। 38यीसु यहूदी सभाघर के मुखिया के घर माहीं पहुँचिके, मनइन काहीं हल्ला मचाबत अउर मारे दुख के खुब रोबत-पीटत अउर चिल्लात देखिन। 39तब यीसु घर के भीतर जाइके उनसे कहिन, “तूँ पंचे काहे हल्ला मचउते हया, अउर रोउते हया? बिटिया मरी नहिं आय, उआ सोय रही हय।” 40ऊँ पंचे यीसु के मजाक उड़ामँइ लागें, पय यीसु सगलेन काहीं घर से बहिरे निकार दिहिन; केबल बिटिया के महतारी-बाप अउर अपने तिनहूँ चेलन क साथ माहीं लइके भीतर गें, जहाँ उआ बिटिया परी रही हय। 41अउर यीसु बिटिया के हाँथ पकड़िके ओसे कहिन, “तलीता कूमी!” जेखर मतलब हय “हे बिटिया हम तोंहसे कहित हएन, उठा!” 42अउर उआ बिटिया हरबिन उठिके चलँय-फिरँय लाग; काहेकि उआ बारा साल के रही हय। उआ बिटिया काहीं चलत-फिरत देखिके सगले जन चउआइगें। 43पुनि यीसु उनहीं पंचन काहीं चेताइके हुकुम दिहिन, इआ बात काहीं कोऊ जाने न पाबय, अउर कहिन, “इआ बिटिया काहीं कुछू खाँइ क द्या।”
6नासरत गाँव माहीं यीसु के अपमान
(मत्ती 13:53-58; लूका 4:16-30)
1याईर के घर से निकरिके यीसु अपने गाँव नासरत माहीं आएँ, अउर उनखर चेला लोग घलाय उनखे साथ माहीं गें। 2पबित्र दिन काहीं यीसु सभाघर म जाइके परमातिमा के सँदेस सुनामँइ लागें, तब खुब जने सुनिके चउआइगें, अउर आपस माहीं कहँइ लागें, “इनहीं ईं ग्यान के बातँय कहाँ से मिली हँय? एतना कउन महान ग्यान आय जऊँ इनहीं दीनगा हय? कइसन सामर्थ के काम इनखे हाँथन से होत हें? 3का ईं उहय बढ़ई न होहीं, जऊँ मरियम के लड़िका? अउर याकूब, अउर योसेस, यहूदा अउर समौन के भाई आहीं? काहे इनखर बहिनी इहँय हमरे बीच माहीं नहीं रहतीं?” एसे ऊँ सगले गुस्साइके यीसु के ऊपर बिसुआस नहीं किहिन। 4यीसु सभाघर के सगले जनेन से कहिन, “परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले के, अपने गाँव अउर घर-परिबार काहीं छोंड़िके अउर कहँव अपमान नहीं होय।” 5यीसु उहाँ कउनव सामर्थ के काम नहीं किहिन, केबल कुछ बिमारन के ऊपर आपन हाँथ धइके उनहीं नीक किहिन।
6अउर ऊँ पंचे यीसु के ऊपर बिसुआस नहीं किहिन, इआ कारन से यीसु बड़ा अचरज मानिन, अउर ऊँ अपने गाँव से निकरिके चारिव कइती के गाँमन माहीं जाइ-जाइके उपदेस देत रहिगें।
बाराठे चेलन काहीं पठउब
7यीसु बरहँव चेलन काहीं अपने लघे बोलाइके, उनहीं दुइ-दुइ कइके पठमँइ लागें; अउर उनहीं बुरी आत्मन काहीं निकारँइ के अधिकार दिहिन। 8अउर यीसु उनहीं हुकुम दिहिन, कि “गइल के खातिर लाठी काहीं छोंड़िके अउर कुछू न लिहा: न त रोटी, न झोरा, न बसनी माहीं पइसा, 9पय पनहीं पहिर लिहा, अउर दुइ-दुइठे कुरथा न पहिन्या।” 10अउर यीसु चेलन से कहिन, “जहाँ-जहाँ तूँ पंचे कोहू के घर माँही जया, त जब तक उआ गाँव से बिदा न होया, तब तक उहय घर माहीं रहे अया। 11जउने गाँव के मनई तोंहईं पंचन काहीं सोइकार न करँय, अउर परमातिमा के सँदेस न सुनँय, तब उहाँ से चलत समय उनखे अँगुअय, अपने गोड़ेन के धूधुर झार दिहा, जउने परमातिमा के सँदेस माहीं बिसुआस न करँइ के सजा के भागीदार उँइन होइहँय, इआ गबाही होई।” 12तब ऊँ पंचे जाइके परमातिमा के सँदेस सुनामँइ लागें, अउर मनइन से कहिन, “पाप करब छोंड़िके अपने मन काहीं बदला।” 13अउर ऊँ पंचे मनइन से खुब बुरी आत्मन काहीं निकारिन, अउर खुब बिमारन के ऊपर तेल लगाइके उनहीं नीक किहिन।
यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के हत्या
14जब हेरोदेस राजा यीसु के कामन के चरचा सुनिन, काहेकि उनखे नाम के चरचा सगले राज माहीं फइलगे रही हय, तब हेरोदेस राजा कहिन, “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले मरिके जि आए हँय, एहिन से यीसु के हाँथ से सामर्थ के काम होत हें।” 15अउर कुछ जने कहँइ लागें, “यीसु एलिय्याह आहीं, जउन मरिके जि आए हँय।” पय अउर कुछ जने कहँइ लागें, “जऊँ पहिले परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय, उनहिन म से एक जने जि आए हँय, काहेकि यीसु उनहिन कि नाईं हें।” 16हेरोदेस राजा सगलेन के बात सुनिके कहिन, “जउने यूहन्ना के हम मूँड़ कटबाय लिहेन तय, उइँन जि आँए हँय!” 17कुछ समय पहिले हेरोदेस राजा अपने भाई फिलिप्पुस के मेहेरिआ हेरोदियास के बात मानिके यूहन्ना काहीं पकड़िके जेल माही बंद करँइ खातिर हुकुम दिहिन तय, काहेकि हेरोदेस राजा अपने भाई फिलिप्पुस के जिन्दय, ओखे मेहेरिआ हेरोदियास से काज कइके राख लिहिन तय। 18काहेकि यूहन्ना हेरोदेस राजा से कइयक बेरी कहिन तय, कि “अपने भाई के जिन्दय ओखे मेहेरिआ काहीं राखब तोहईं उचित नहिं आय।” 19इआ कारन से हेरोदियास यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से दुसमनी रक्खत रही हय, अउर इआ चाहत रही हय, कि उनहीं मरबाय डारी; पय अइसा कए नहीं पाबत रही, 20काहेकि हेरोदेस राजा यूहन्ना काहीं धरमी, अउर पबित्र मनई जानिके, उनसे डेरात रहे हँय, अउर उनहीं जिन्दा रक्खँइ चाहत रहे हँय, अउर उनखे बातन काहीं सुनिके हेरोदेस राजा खुब डेरातव रहे हँय, पय बड़े खुसी से सुनत रहे हँय।
21पय हेरोदियास काहीं यूहन्ना से बदला लेंइ क अच्छा मोका आइगा, जब हेरोदेस राजा अपने जनम दिन माहीं, सगले प्रधानन काहीं, अउर सेनापतिअन काहीं, अउर गलील प्रदेस के सगले बड़े मनइन काहीं बोलबाइके खाँय-पिअँइ के प्रबन्ध किहिन। 22तब हेरोदियास के बिटिया सभा के बीच माहीं भीतर आई, अउर नाचिके हेरोदेस राजा काहीं अउर उनखे साथ म बइठ सगले जनेन काहीं खुस कइ दिहिस। तब हेरोदेस राजा उआ बिटिया से कहिन, “तूँ जउन चाहा हमसे माँग ल्या, हम तोहईं उआ जरूर देब।” 23अउर सगलेन के आँगे हेरोदेस राजा कसम खाइन, “हम आपन आधा राज तक, जउन कुछू तूँ हमसे मगिहा, उआ हम तोहईं दइ देब।” 24उआ बिटिया बहिरे जाइके अपने महतारी हेरोदियास से पूँछिस, कि “हम का मागी?” तब हेरोदियास कहिस, “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के मूँड़ कटबाइके माँग ल्या।” 25उआ बिटिया तुरन्तय राजा हेरोदेस के लघे भीतर जाइके, उनसे बिनती कइके कहिस, “हम चाहित हएन, अपना अबहिनय यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के मूँड़ कटबाइके, एकठे टठिया माहीं धइके हमहीं दइ देई।”
26तब हेरोदेस राजा उआ बिटिया के बात सुनिके खुब दुखी भें, पय अपने कसम के कारन जउन सभा के आँगे खाइन तय, बिटिया के बात काहीं टार नहीं सकें। 27अउर हेरोदेस राजा हरबिन अपने एकठे सिपाही काहीं बोलाइके हुकुम दिहिन, कि “यूहन्ना के मूँड़ काटिके लइ आबा।” 28अउर तुरन्तय उआ सिपाही जेल म जाइके यूहन्ना के मूँड़ काटिके, एकठे टठिया माहीं धइके लइ आबा, अउर उआ बिटिया काहीं दइ दिहिस, अउर उआ बिटिया लइ जाइके, अपने महतारी हेरोदियास काहीं दइ दिहिस। 29इआ खबर सुनिके यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के चेला लोग उहाँ आएँ, अउर उनखे लहास काहीं लइ जाइके कब्र माहीं गाड़ दिहिन।
चेलन के लउटब अउर एकान्त माहीं जाब
30यीसु के खास चेला लोग यीसु के लघे आइके एकट्ठा भें, अउर जउन कुछू ऊँ पंचे जाइके किहिन तय, अउर सिखाइन तय, पूरा हाल उनसे बताइन। 31तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “चला सबसे अलग होइके कउनव सुनसान जघा माहीं चली, जहाँ तूँ पंचे थोरी अराम कइल्या।” काहेकि यीसु के लघे मनई अउतय जात रहत रहे हँय, एसे उनहीं खाँइ तक काहीं मोका नहीं मिलत रहा। 32एसे यीसु अपने चेलन काहीं साथय लइके नाव म चढ़िके सुनसान जघा माहीं, भीड़ से अलग होइके चलेगें।
पाँच हजार मनइन काहीं खाना खबाउब
(मत्ती 14:15-21; लूका 9:11-17; यूहन्ना 6:1-14)
33खुब जने उनहीं उआ सुनसान जघा माहीं जात देखिके पहिचान लिहिन, कि यीसु जात हें, अउर सगले गाँमन से निकरिके एकट्ठा होइके दउड़त उआ जघा माहीं यीसु के आमँइ से पहिलेन पहुँचिगें। 34जइसय यीसु नाव से उतरें, खुब बड़ी भीड़ देखिन, तब यीसु काहीं उनखे ऊपर बड़ी दया आइगे, काहेकि ऊँ पंचे, ऊँ गड़रन कि नाईं रहे हँय, जिनहीं कोऊ चरामँइ बाला नहीं होय; अउर यीसु उनहीं परमातिमा के खुब बातन काहीं सिखामँइ लागें।
35जब साँझ होंइ लाग, तब चेला लोग यीसु के लघे आइके कहँइ लागें, “इआ सुनसान जघा ही, अउर साँझ होंइ लाग ही। 36इआ भीड़ के मनइन काहीं बिदा करी, जउने ऊँ पंचे चारिव कइती के गाँमन अउर मोहल्लन म जाइके, अपने खातिर खाना खरीद लेंय।” 37यीसु अपने चेलन से कहिन, “तुहिन पंचे उनहीं खाँइका द्या।” तब चेला लोग यीसु से कहिन, “सगली भीड़ काहीं खबामँइ के खातिर आठ महीना के मजूरी से रोटी खरीदँय परी, का हम पंचे आठ महीना के मजूरी से रोटी खरीदी, अउर इनहीं खबाई?” 38यीसु उनसे कहिन, “जाइके देखा तोंहरे लघे केतनी रोटी हईं?” ऊँ पंचे देखिके आएँ, अउर यीसु से बताइन, कि “पाँचठे रोटी अउर दुइठे मछरी हईं।”
39तब यीसु अपने चेलन काहीं हुकुम दिहिन, “सगले मनइन काहीं हरिअर चारा म पाँति-पाँति माहीं बइठाय द्या।” 40तब सगले भीड़ के मनई सव-सव अउर पचास-पचास कइके पाँतिन माहीं बइठिगें। 41तब यीसु ऊँ पाँचठे रोटी अउर दोनहूँ मछरिन काहीं लइके स्वरग कइती निहारिके धन्यबाद दिहिन, अउर रोटिन काहीं टोरि-टोरिके चेलन काहीं देत गें, कि ऊँ पंचे सगले मनइन काहीं परसँय, अउर ऊँ चेला सगले मनइन काहीं परस दिहिन, अउर यीसु ऊँ दोनहूँ मछरिन काहीं घलाय चेलन से परसबाइन। 42जब सगली भीड़ के मनई खाइके संतुस्ट होइगें, 43ओखे बादव चेला लोग खाए से बचे रोटिन के टुकड़न काहीं बारा टोपरी भरिके लइ आएँ, अउर कुछ टोपरी मछरिन से भरी घलाय। 44जउन भीड़ के मनई रोटी अउर मछरी खाइन तय, उनमा लड़िका-मेहेरिअन काहीं छोंड़े, पाँच हजार मंसेरुआ रहे हँय।
पानी के ऊपर यीसु के रेंगब
(मत्ती 14:22-33; यूहन्ना 6:15-21)
45तब यीसु हरबिन अपने चेलन काहीं नाव म चढ़ँइ के खातिर मजबूर किहिन, कि ऊँ पंचे उनसे पहिले झील के दुसरे पार बैतसैदा गाँव माहीं चले जाँय, जब तक ऊँ भीड़ के मनइन काहीं बिदा करँय। 46अउर यीसु भीड़ के मनइन काहीं बिदा कइके, एकठे पहार माहीं प्राथना करँइ चलेगें। 47जब साँझ होइगे तब चेलन के नाव झील के बीच माहीं रही हय, अउर यीसु अकेले भुँइ म रहिगें तय। 48जब यीसु देखिन कि चेला लोग नाव काहीं खेबत-खेबत खुब घबराइगें हँय, काहेकि तेज हबा उनखे बिपरीत चलत रही हय, तबहिनय यीसु भिनसरहय करीब तीन से छय बजे के बीच झील के पानी माहीं रेंगत उनखे लघे आएँ, अउर उनसे आँगे निकर जाँइ चाहत रहे हँय। 49पय चेला लोग यीसु काहीं झील के पानी माहीं रेंगत देखिके समझिन, उआ भूत आय, अउर डेरन के मारे चिल्लाय उठें, 50काहेकि सगले जने यीसु काहीं अपनी कइती आबत देखिके खुब डेराइगें तय, पय यीसु तुरन्तय उनसे बात किहिन अउर कहिन, “हिम्मत बाँधा: हम आहेन; डेरा न!” 51तब यीसु उनखे लघे आइके नाव माहीं चढ़िगें, अउर हबा बन्द होइगे; इआ सगला देखिके चेला लोग चउआन रहिगें। 52ऊँ चेला लोग पाँचठे रोटी अउर दुइठे मछरी के बारे माहीं देखिव के नहीं समझे पाइन, कि यीसु माहीं केतनी सक्ती हय, काहेकि उनखर दिल कठोर होइगें तय।
गन्नेसरत प्रदेस माहीं रोगिन काहीं नीक करब
53ऊँ पंचे झील के दुसरे पार गन्नेसरत प्रदेस माहीं पहुँचे, अउर नाव घाट माहीं लगाइन। 54जब यीसु अउर उनखर चेला लोग नाव से उतरें, तब उहाँ के मनई तुरन्तय यीसु काहीं पहिचान लिहिन। 55अउर आस-पास के सगले गाँमन माहीं कुछ जने दउड़त गें, अउर बिमारन काहीं खटिया म पराइके जहाँ-जहाँ खबर पाइन कि यीसु हें, उहँइ लइ-लइके पहुँच जात रहे हँय। 56यीसु जहाँ-जहाँ गाँमन अउर सहरन अउर मोहल्लन माहीं जात रहे हँय, त खुब मनई बजारन तक माहीं बिमारन क खटिया समेत धइके, यीसु से चरउरी कइके कहँइ लागत रहे हँय, कि अपना आपन ओन्हा के एकठे छोरव काहीं बिमारन क छुइ लेंइ देई: अउर जेतने बिमार यीसु काहीं छुअत रहे हँय, ऊँ सगले नीक होइ जात रहे हँय।
7पूरबजन के बनाए नेमन के पालन
1तब फरीसी लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले कुछ जने, जउन यरूसलेम सहर से आए रहे हँय, यीसु के लघे एकट्ठा भें, 2अउर ऊँ पंचे यीसु के कुछ चेलन काहीं असुद्ध हाँथन से अरथात यहूदी बिधान के मुताबिक बिना हाँथ धोए खाना खात देखिन। 3काहेकि यहूदी लोग अउर खास करके फरीसी लोग, अपने पुरखन के बनाए रीति-रिबाजन के पालन करत हें, अउर जब तक यहूदी रीति के मुताबिक निकहा से हाँथ नहीं धोय लेंय, तब तक खाना नहीं खाँय; 4अउर बजार से आइके, जब तक नहाय नहीं लेंय, तब तक खाना नहीं खाँय, एखे अलाबव अउरव खुब बातँय हईं जिनहीं मानँइ काहीं बताबा ग हय, जइसन खोरबन अउर लोटबन अउर तामे के बरतनन काहीं धोमँइ माजँय चाही।
5एसे फरीसी लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले यीसु से पूँछिन, “अपना के चेला लोग बाप-दादन के रीति-रिबाजन काहीं काहे नहीं मानँय, बिना हाँथ धोए खाना खात हें?” 6यीसु उनसे कहिन, “यसायाह नबी तोंहरे कपटिन के बारे माहीं बेलकुल ठीक भबिस्सबानी किहिन हीं, जइसा पबित्र सास्त्र माहीं लिखव हय:
‘ईं पंचे मुँहे से त हमार मान-सम्मान करत हें, पय अपने मन से हमार मान-सम्मान नहीं करँय।
7ईं पंचे देखावटी हमार अराधना करत हें, काहेकि मनइन के बनाए नेमन काहीं पबित्र सास्त्र के नेम बताइके सिखाबत हें7:7 यसा 29:13।
8काहेकि तूँ पंचे परमातिमा के हुकुम काहीं छोंड़िके मनइन के बनए रीति-रिबाजन काहीं मनते हया।”
9यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे अपने रीति-रिबाजन काहीं मानँइ के खातिर, परमातिमा के हुकुम के कइसन पूरी तरह उलंघन कइ देते हया! 10काहेकि मूसा नबी तोंहसे कहिन हीं, कि ‘अपने महतारी-बाप के मान-सम्मान किहा’, अउर ‘जे कोऊ अपने महतारी-बाप के अपमान करय, त ओही जरूर मारि डारा जाय।’ 11पय तूँ पंचे कहते हया, कि अगर कोऊ अपने महतारी-बाप से कहय, कि ‘जउन कुछू फायदा तोहईं हमसे मिल सकत रहा हय, ओही हम परमातिमा काहीं भेंट चढ़ाय दिहेन हय’, 12तूँ पंचे उआ मनई से इआमेर कह बाइके, ओही अपने महतारी-बाप के कुछू सेबा नहीं करँइ देते आह्या। 13इआमेर से तूँ पंचे अपने रीति-रिबाजन काहीं मनते हया, अउर परमातिमा के बचन काहीं मानब छोंड़ि देते हया, अउर एहिनतर के अउरव खुब काम करते हया।”
मनई काहीं असुद्ध करँइ बाली बातँय
14तब यीसु सगले मनइन काहीं अपने लघे बोलाइके कहिन, “तूँ पंचे हमरे बातन काहीं सुना, अउर समझा: 15अइसन कउनव चीज नहिं आय, जऊँ मनई के मुहें से पेटे के भीतर जाइके, ओही असुद्ध कइ देय; पय जउन बातँय मनई के भीतर से निकरती हईं, केबल उँइन ओही परमातिमा के नजर माहीं असुद्ध करती हईं।” 16(“जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”) 17जब यीसु भीड़ से निकरिके एकठे घर माहीं चलेगें, तब चेला लोग यीसु के लघे आइके इआ उदाहरन के मतलब पूँछँइ लागें। 18तब यीसु चेलन से कहिन, “का तुहूँ पंचे नदान हया? काहे तूँ पंचे इआ नहीं जन त्या, कि जउन चीज बहिरे से मनई के भीतर जात ही, उआ मनई काहीं असुद्ध नहीं कइ सकय? 19काहेकि उआ चीज मनई के मन म नहीं, पेटे माहीं जात ही, अउर टट्टी से निकर जात ही।” इआ बात कहिके यीसु सगली खाँइ बाली चीजन काहीं सुद्ध ठहराइन। 20पुनि यीसु कहिन, “जउन मनई के भीतर से अरथात मन से निकरत हय, उहय मनई काहीं परमातिमा के नजर माहीं असुद्ध करत हय। 21काहेकि मनई के देंह के भीतर से अरथात मन से, घिनहे-घिनहे बिचार, ब्यभिचार करब, चोरी करब, कतल करब, दुसरे के मेहेरिआ से नजायज सम्बन्ध रक्खब, 22लालच करब, दुस्टता करब, छल करब, लुच्चई करब, बुरी नजर से देखब, दुसरे के बुराई करब, घमन्ड करब, अउर मुरखईं के बातँय निकरती हईं। 23ईं सगली बुरी बातँय मनई के भितरय से निकरती हईं, अउर मनई काहीं परमातिमा के नजर माहीं असुद्ध करती हईं।”
यूनानी जात के मेहेरिआ के बिसुआस
24पुनि यीसु उआ घर से उठिके सूर अउर सैदा प्रदेसन म आइके एकठे घर माहीं गें, अउर ऊँ चाहत रहे हँय, कि इहाँ के कउनव मनई न जाने पामँय। कि हम इहाँ हएन; पय कुछ जने जानिगें कि यीसु इआ घर माहीं हें। 25अउर हरबिन एकठे मेहेरिआ जउने के छोट बिटिया माहीं बुरी आत्मा सकान रही हय, उआ यीसु के चरचा सुनिके उनखे लघे आई, अउर उनखे गोड़ेन माहीं गिर परी, 26उआ मेहेरिआ यूनानी जात अउर सीरिया देस के फिनीकी प्रदेस के रही हय, उआ यीसु से बिनती कइके कहँइ लाग कि “अपना हमरे बिटिया से बुरी आत्मा काहीं निकार देई।” 27यीसु ओखे बिसुआस काहीं देखँइ के खातिर कहिन, “पहिले लड़िकन काहीं पेट भर खाय लेंइ द्या, काहेकि लड़िकन के रोटी लइके कुकुरन7:27 यहूदिन के तुलना लड़िकन से कीन गे ही अउर दुसरे जात के मनइन के तुलना कुकुरन से कीन गे ही। के आँगे डारब उचित नहिं आय।” 28तब उआ मेहेरिआ यीसु से कहँइ लाग, “हे प्रभू जऊँ अपना कहेन बेलकुल सही हय; तऊ लड़िकन के खाए से मेज के नीचे जऊँ चुरकुन गिरत हें, ओही कुकुरव खाय लेथें।” 29यीसु ओसे कहिन, “अपने बिसुआस के इआ बात के कारन तूँ अपने घरय चली जा, बुरी आत्मा तोंहरे बिटिया से निकरिगे ही।” 30उआ मेहेरिआ अपने घर माहीं पहुँचिके देखिस, कि बिटिया खटिया माहीं नीक-सूख परी हय, अउर बुरी आत्मा निकरिगे ही।
बहिर गूँगा मनई काहीं नीक करब
31पुनि यीसु सूर अउर सैदा देसन से निकरिके दिकापुलिस प्रदेस से होइके गलील प्रदेस के झील के लघे पहुँचिगें। 32तब कुछ जने यीसु काहीं देखिन, अउर एकठे मनई काहीं जऊँ बहिर अउर गूँगा रहा हय, यीसु के लघे लइआइके बिनती किहिन, कि अपना आपन हाँथ ओखे ऊपर धइ देई, जउने उआ नीक होइ जाय। 33तब यीसु उआ मनई काहीं भीड़ से अलग लइ जाइके, ओखे कान माहीं आपन अँगुरी डारिन, अउर थूँकिके ओखे जीभ क छुइन; 34अउर स्वरग कइती निहारिके आँह भरिन, अउर उआ मनई से ओखे भाँसा माहीं कहिन, “इप्फत्तह!” अरथात “खुलिजा!” 35तबहिनय उआ मनई काहीं सुनाँय लाग, अउर ओखे जीभ के गाँठ खुलिगे, अउर उआ निकहा से बोलँइ लाग। 36तब यीसु ऊँ मनइन काहीं चेताइके कहिन, कि इआ बात कोहू से न कह्या; पय जेतनय ऊँ उनहीं चेताइन तय, ओतनय ऊँ पंचे अउर प्रचार करँइ लागें। 37ऊँ पंचे अचरज मानिके कहँइ लागें, “यीसु जऊँ कुछू करत हें, सब निकहय करत हें; इहाँ तक कि यीसु बहिरन काहीं सुनँय के, अउर गूँगन काहीं बोलँइ के सक्ती देत हें।”
8चार हजार मनइन काहीं खबाउब
1उन दिनन माहीं जब पुनि खुब भीड़ एकट्ठा होइगे, अउर उनखे लघे कुछू खाँइ क नहीं रहा, तब यीसु अपने चेलन काहीं लघे बोलाइके उनसे कहिन, 2“हमहीं इआ भीड़ के मनइन के ऊपर बड़ी दया आबत ही, काहेकि ईं पंचे तीन दिना से हमरे साथ हें, अउर इनखे लघे खाँय के खातिर कुछू हइअव नहिं आय। 3अगर हम इनहीं भूँखेन घर पठय देई, त ईं पंचे बिहोस होइके गइलय माहीं परे रहि जइहँय, काहेकि इआ भीड़ म से कुछ मनई खुब दूरी से आए हँय।” 4तब चेला लोग यीसु काहीं जबाब दिहिन, “इहाँ सुनसान जघा माहीं एतनी रोटी हम पंचे कहाँ से लइ अई, कि इआ सगली भीड़ के मनई खाइके संतुस्ट होइ जाँय?” 5तब यीसु अपने चेलन से पूँछिन, “तोंहरे लघे केतनी रोटी हईं?” चेला लोग कहिन, कि “सातठे।”
6तब यीसु सगले जनेन काहीं भुँइ माहीं बइठँय के हुकुम दिहिन, अउर यीसु ऊँ सातव रोटिन काहीं हाँथे म लइके, परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके टोरिन, अउर अपने चेलन काहीं देत गें, कि सगले जनेन काहीं परसँय, अउर ऊँ पंचे सगले मनइन के आँगे परस दिहिन। 7अउर उनखे लघे कुछ छोट-छोट मछरिव रही हँय, यीसु ऊँ मछरिन काहीं लइके परमातिमा काहीं धन्यबाद दिहिन, अउर उनहूँ काहीं परसँय के खातिर चेलन काहीं हुकुम दिहिन, कि सगले मनइन के आँगे परस देंय। 8इआमेर से सगले मनई खाइके संतुस्ट होइगें। अउर ओखे बाद चेला लोग, बँचे टुकड़न से सात टोपरी भरिके उठाइन। 9अउर खाँइ बाले चार हजार के करीब रहे हँय; ओखे बाद यीसु भीड़ के सगले मनइन काहीं बिदा किहिन। 10अउर यीसु तुरन्तय अपने चेलन के साथ नाव माहीं चढ़िके, दलमनूता प्रदेस म चलेगें।
फरीसी लोगन के यीसु काहीं जाँचब
11पुनि फरीसी लोग आइके यीसु से बाद-बिबाद करँइ लागें, अउर यीसु के परिच्छा लेंइ के खातिर उनसे स्वरग के अदभुत चिन्हारी देखामँइ क कहँइ लागें। 12यीसु अपने आत्मा माहीं खुब दुखी होइके कहिन, “इआ समय के मनई काहे बिसुआस नहीं करँय, अदभुत चिन्हारी देखँइ चाहत हें? हम तोंहसे सही कहित हएन, कि इआ समय के मनइन काहीं कउनव अदभुत चिन्हारी न देखाई जई।” 13अउर यीसु उनहीं छोंड़िके पुनि नाव माहीं चढ़िके झील के दुसरे पार चलेगें।
चेलन काहीं समझाउब
14चलत समय चेला लोग रोटी लेंइ क बिसरिगें तय, अउर नाव माहीं उनखे लघे एकठेरिन रोटी रही हय। 15यीसु अपने चेलन काहीं चेताइन, कि “देखा, फरीसी लोगन के खमीर अउर हेरोदेस राजा के खमीर से सतरक रह्या।” 16इआ सुनिके चेला लोग आपस माहीं सोच-बिचार कइके कहँइ लागें, कि “हमरे लघे रोटी त नहिं आय।” 17इआ जानिके यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे आपस माहीं काहे इआ सोच-बिचार करते हया, कि हमरे लघे रोटी नहिं आय? का तूँ पंचे अबय तक नहीं जाने समझे पाया? का तोंहार पंचन के मन एतना कठोर होइगा हय? 18काहे तूँ पंचे अपने आँखिन से नहीं देख्या? अउर अपने कानन से नहीं सुन्या? काहे तोहईं सुध नहिं आय? 19कि जब हम पाँच हजार मनइन के खातिर पाँचठे रोटी टोरेन तय, त तूँ पंचे रोटी के टुकड़न से केतनी टोपरी भरिके उठाया तय?” तब चेला लोग उनसे कहिन, “बारा टोपरी।” 20अउर “जब चार हजार मनइन काहीं खबामँइ के खातिर सातठे रोटी रही हँय, तब तूँ पंचे रोटी के टुकड़न से केतनी टोपरी भरिके उठाया तय?” चेला लोग कहिन, “सात टोपरी।” 21यीसु अपने चेलन से कहिन, “काहे तूँ पंचे अबहिनव तक नहीं समझे पाया?”
बैतसैदा गाँव माहीं एकठे आँधर मनई काहीं नीक करब
22यीसु अपने चेलन के साथ बैतसैदा गाँव माहीं आएँ, तब कुछ जने एकठे आँधर मनई काहीं यीसु के लघे लइ आएँ अउर यीसु से चरउरी कइके कहिन, कि “अपना इआ आँधर मनई क छुइ देई त नीक होइ जाय।” 23यीसु उआ आँधर मनई के हाँथ पकड़िके गाँव से बहिरे लइगें, अउर ओखे आँखिन माहीं आपन थूँक लगाइके ओखे ऊपर आपन हाँथ धरिन अउर ओसे पूँछिन, “का तूँ कुछू देखते हया?” 24उआ मनई चारिव कइती निहारिके कहिस, “हम मनइन काहीं देखित हएन, जउन हमहीं रेंगत बिरबन कि नाईं देखात हें।” 25तब यीसु दुबारा ओखे आँखिन माहीं आपन हाँथ धरिन, अउर उआ आँधर मनई बड़े ध्यान से देखिस, काहेकि उआ नीक होइगा तय, अउर ओही सब कुछ साफ-साफ देखाँइ लाग। 26यीसु उआ आँधर मनई से इआ कहिके घर पठय दिहिन, “तूँ इआ गाँव के भीतर न जया।”
पतरस यीसु काहीं मसीह सोइकार किहिन
(मत्ती 16:13-20; लूका 9:18-21)
27यीसु अपने चेलन के साथ कैसरिया प्रदेस के फिलिप्पी सहर के लघे के गाँव माहीं चलेगें। गइल म यीसु अपने चेलन से पूँछिन, “लोग हमहीं का कहत हें?” 28तब चेला लोग कहिन, कि “कुछ मनई यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाला, त कुछ जने एलिय्याह नबी, त अउर कुछ जने इआ कहत हें, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन म से एक जने जि आबा हय।” 29इआ सुनिके यीसु अपने चेलन से पूँछिन, “पय तूँ पंचे हमहीं का कहते हया?” पतरस यीसु से कहिन, “अपना मसीह आहेन।” 30तब यीसु अपने चेलन काहीं चेताइके कहिन, कि “तूँ पंचे हमरे बारे माहीं, इआ बात कोहू से न बताया।”
अपने मउत के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी
31तब यीसु अपने चेलन काहीं बतामँइ लागें, कि “मनई के लड़िका के खातिर इआ जरूरी हय, कि उआ खुब दुख सही, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग अउर प्रधान याजक लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, ओही अपने बनाए नेम के बिरोधी मानिके मारि डरिहँय, अउर उआ तिसरे दिन जिन्दा होइ जई।” 32यीसु इआ बात काहीं अपने चेलन से बेलकुल साफ-साफ कहि दिहिन। इआ बात सुनिके पतरस यीसु काहीं अलग लइ जाइके डाँटँइ लाग। 33पय यीसु पीछे मुड़िके अपने चेलन कइती देखिके, पतरस काहीं दपटिके कहिन, “हे सइतान, हमरे आँगे से दूरी होइजा; काहेकि तँय परमातिमा के बातन माहीं नहीं, बलकिन मनइन के बातन माहीं मन लगउते हए।”
यीसु के पीछे चलँइ के मतलब
(मत्ती 16:24-28; लूका 9:23-27)
34यीसु भीड़ के मनइन अउर अपने चेलन काहीं लघे बोलाइके कहिन, “जे कोऊ हमरे पीछे आमँइ चाहय, उआ अपने मन के मुताबिक जिअब छोंड़िके, हरेक दिन अपने सब दुख तकलीफन काहीं सहिके जऊँ क्रूस के बराबर हें, हमरे पीछे चलय। 35काहेकि जे कोऊ आपन प्रान बचामँइ चाही, उआ ओही गमाय देई, अउर जे कोऊ आपन प्रान हमरे खातिर अउर खुसी के खबर के खातिर गमाय देई, उआ ओही बचाए पाई। 36अगर कउनव मनई सगले संसार के मालिक होइ जाय, अउर आपन प्रान गमाय देय, त ओही का फायदा होई? 37अउर मनई आपन प्रान बचामँइ के बदले माहीं का दइ सकत हय? 38जे कोऊ इआ ब्यभिचारी अउर पापी पीढ़ी के मनइन के आँगे, हमसे अउर हमरे बातन काहीं मानँइ से लजई, त मनई के लड़िका घलाय, जब उआ पबित्र दूतन के साथ अपने पिता परमातिमा के महिमा सहित अई, तब उहव ओही आपन मानँय से लजई।”
91यीसु, चेलन से कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जऊँ इहाँ ठाढ़ हें, उनमा से कुछ जने अइसन हें, कि जब तक परमातिमा के राज काहीं पूरी सामर्थ समेत आबत न देख लेइहँय, तब तक ऊँ पंचे बेलकुल न मरिहँय।”
यीसु के रूप बदलब
2छय दिना के बाद यीसु, पतरस अउर याकूब अउर यूहन्ना काहीं अपने साथ माहीं लइके, एकान्त माहीं कउनव ऊँच पहार माहीं गें। अउर उनखे अँगुअय यीसु के रूप बदलिगा। 3अउर यीसु के ओन्हा अइसन चमकँइ लाग, अउर एतना उजर होइगा, कि सगली धरती माहीं कउनव धोबी घलाय उआमेर उजर नहीं कइ सकय। 4अउर तिनहूँ चेलन काहीं मूसा नबी के साथ एलिय्याह देखाने, ऊँ दोनव जने यीसु के साथ बातँय करत रहे हँय। 5इआ देखिके पतरस यीसु से कहिन, “हे गुरू, हमार पंचन के इहाँ रहब निकहा हय; एसे हम पंचे इहाँ तीनठे मड़इआ बनाई; एकठे अपना के खातिर, एकठे मूसा नबी के खातिर, अउर एकठे एलिय्याह नबी के खातिर।” 6काहेकि पतरस इआ नहीं जाने पाबत रहे आँय, कि हम उनसे का कही, एसे कि ऊँ पंचे खुब डेराइगें रहे हँय। 7तबहिनय एकठे उजर बदरी आइके उनहीं पंचन काहीं लुकाय लिहिस, अउर उआ बदरी से इआ बोल सुनान: कि “ईं हमार पियार लड़िका आहीं, तूँ पंचे इनखे बातन काहीं मान्या।” 8तब ऊँ पंचे अचानक चारिव कइती निहारँइ लागें, अउर यीसु के अलाबा अउर कोहू काहीं अपने साथ नहीं देखिन।
9पहार से नीचे उतरत समय, यीसु उनहीं हुकुम दिहिन, कि जब तक मनई के लड़िका मरिके जिन्दा न होइ जाय, तब तक जऊँ कुछू तूँ पंचे देखे हया, उआ कोहू से न बताया। 10तिनहूँ चेला इआ बात काहीं याद रक्खिन; अउर कोहू से नहीं कहिन, पय आपस माहीं सोच-बिचार करँइ लागें, कि “मरेन म से जि उठँइ के का मतलब होइ सकत हय?” 11अउर ऊँ पंचे यीसु से पूँछिन, कि “मूसा के बिधान सिखामँइ बाले इआ काहे कहत हें, कि मसीह से पहिले एलिय्याह नबी जरूर अइहँय?” 12तब यीसु उनहीं पंचन काहीं जबाब दिहिन, कि “एलिय्याह नबी जरूर अइहँय, अउर मसीह काहीं सोइकार करँइ के खातिर, मनइन काहीं तइआर करिहँय, पय मनई के लड़िका के बारे माहीं, पबित्र सास्त्र म इआ काहे लिखा हय, कि उआ खुब दुख सही; अउर तुच्छ गिना जई? 13पय हम तोंहसे कहित हएन, कि वास्तव माहीं एलिय्याह त आय चुके हँय, अउर उनखे बारे माहीं पबित्र सास्त्र म लिखा हय, कि परमातिमा के सँदेस काहीं न मानँइ बाले लोग, जइसन चाहिन उनखे साथ उहइमेर बरताव किहिन।”
बुरी आत्मा से परेसान लड़िका काहीं नीक करब
(मत्ती 17:14-21; लूका 9:37-43)
14जब यीसु पहार से उतरिके चेलन के लघे आएँ, त देखिन कि उनखे चारिव कइती बड़ी भीड़ लगी हय, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले उनसे बहँस कइ रहे हँय। 15यीसु काहीं देखतय सगले जन चउआन रहिगें, कि यीसु कहाँ से आइगें, अउर उनखे कइती दउड़िके नबस्कार किहिन। 16यीसु मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन से पूँछिन, “तूँ पंचे हमरे चेलन से काहे बिबाद करते हया?” 17भीड़ म से एकठे मनई उनहीं जबाब दिहिस, “हे गुरू, हम अपने लड़िका काहीं, जउने म गूँगी आत्मा सकान ही, अपना के लघे लइ आएन तय। 18जहँइठे गूँगी आत्मा ओही पकड़त ही, ओहिनठे ओही पटक देत ही: अउर ओखे मुँहे म फेन भरि आबत हय, अउर खुब दाँत पीसत हय, अउर उआ झुरान जात हय, हम अपना के चेलन से कहेन कि उआ गूँगी आत्मा काहीं निकार देई, पय ऊँ पंचे नहीं निकारे पाइन।” 19इआ बात सुनिके यीसु उनहीं जबाब दइके कहिन, “हे परमातिमा के ऊपर बिसुआस न करँइ बाले हठी मनइव, हम कब तक तोंहरे साथ रहब, अउर कब तक तोंहार सहत रहब? उआ लड़िका काहीं हमरे लघे लइ आबा।” 20तब ऊँ पंचे उआ लड़िका काहीं यीसु के लघे लइ आएँ। अउर जइसय उआ गूँगी आत्मा यीसु काहीं देखिस, तुरन्तय उआ लड़िका काहीं मुरेर के भुँइ म पटक दिहिस, अउर उआ मुँहे माहीं फेन बहाए लोटँय लाग। 21यीसु उआ लड़िका के बाप से पूँछिन, “इआ लड़िका के इआ हालत कब से ही।” लड़िका के बाप कहिस, “बचपन से।” 22अउर लड़िका के बाप यीसु से कहँइ लाग, “इआ गूँगी आत्मा लड़िका काहीं मारँइ के खातिर, कबहूँ आगी म, त कबहूँ पानी म पटक देत ही; पय अगर अपना कुछू कइ सकी त हमरे ऊपर तरस खाइके हमार मदत करी।” 23इआ सुनिके यीसु उआ लड़िका के बाप से कहिन, “अगर अपना कुछू कइ सकी? इआ कउनव बात आय! जे कोऊ परमातिमा के ऊपर बिसुआस करत हय, ओखे खातिर सब कुछ होइ जात हय।” 24लड़िका के बाप हरबिन गिड़गिड़ाइके यीसु से कहिस, “हे प्रभू, हम अपना के ऊपर बिसुआस करित हएन, हमरे ऊपर किरपा करी, कि हम पूरे मन से बिसुआस कइ सकी।” 25जब यीसु देखिन कि खुब मनई दउड़-दउड़िके भीड़ लगाए लेथें, तब यीसु बुरी आत्मा काहीं इआ कहिके डाँटिन, “हे गूँगी-बहिरी आत्मा, हम तोही हुकुम देइत हएन, कि इआ लड़िका से निकर जा, अउर एखे भीतर पुनि कबहूँ न सकए।” 26तबहिन उआ बुरी आत्मा चिल्लाइके, उआ लड़िका काहीं खुब मुरेरिके निकरिगे; अउर उआ लड़िका मरा कि नाईं परा रहिगा। उहाँ ठाढ़ कुछ मनई कहँइ लागें, कि लागत हय लड़िका मरिगा। 27पय यीसु उआ लड़िका के हाँथ पकड़िके उठाइन त उआ ठाढ़ होइगा। 28जब यीसु उहाँ से लउटिके घर म आएँ, तब उनखर चेला लोग अकेले माहीं उनसे पूँछिन, “हम पंचे उआ बुरी आत्मा काहीं काहे नहीं निकारे पाएन?” 29यीसु अपने चेलन से कहिन, “इआमेर के गूँगी आत्मा परमातिमा से प्राथना करँइ के अलाबा, अउर कउनव उपाय से नहीं निकारी जाय सकय।”
अपने मउत के बारे माहीं यीसु के पुनि भबिस्सबानी
(मत्ती 17:22-23; लूका 9:43-45)
30यीसु अपने चेलन के साथ उआ घर से चल दिहिन, अउर गलील प्रदेस से होइके जात रहे हँय! यीसु इआ चाहत रहे हँय, कि कोऊ जाने न पामय कि ऊँ कहाँ जाथें। 31काहेकि यीसु अपने चेलन काहीं परमातिमा के सँदेस के बातन काहीं सिखाबत रहे हँय, अउर उनसे कहत रहे हँय, कि “मनई के लड़िका, बिरोध करँइ बाले मनइन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई, अउर ऊँ पंचे ओही मारि डरिहँय, अउर उआ मरिके तीन दिन बाद पुनि जिन्दा होइ जई।” 32पय यीसु के इआ बात चेलन के समझ माहीं नहीं आई, अउर ऊँ पंचे यीसु से पूछँइ माहीं डेरात रहे हँय।
सबसे बड़ा को हय?
33पुनि यीसु अपने चेलन के साथ कफरनहूम सहर म पहुँचिके; एकठे घर माहीं आइके अपने चेलन से पूँछिन, “गइल म तूँ पंचे कउने बात माहीं बहँस करत रहे हया?” 34ऊँ पंचे कुछू नहीं बोले, काहेकि गइल माहीं चेला लोग आपस माहीं इआ बहँस करत रहे हँय, कि हमरे पंचन म से सबसे बड़ा को हय? 35तब यीसु बइठिके बरहँव चेलन काहीं अपने लघे बोलाइन, अउर उनसे कहिन, “अगर कोऊ सगलेन से बड़ा होंइ चाहत हय, त उआ सगलेन से छोट अउर सगलेन के सेबा करँइ बाला बनय।” 36अउर यीसु एकठे छोट क लड़िका काहीं लइके सगलेन के बीच माहीं ठाढ़ किहिन, अउर पुनि उआ लड़िका काहीं अपने पलथी माहीं बइठाइके उनसे कहिन, 37“जे कोऊ हमरे नाम से इआमेर के लड़िकन म से कउनव एकठे काहीं सोइकार करत हय, त उआ हमहीं सोइकार करत हय, अउर जे कोऊ हमहीं सोइकार करत हय, उआ हमहिन भर क नहीं, बलकिन हमहीं पठमँइ बाले परमातिमा काहीं सोइकार करत हय।”
जउन बिरोध माहीं नहिं आय उआ अपने कइती हय
38तब यूहन्ना यीसु से कहिन, “हे गुरू, हम पंचे एकठे मनई काहीं अपना के नाम से बुरी आत्मन काहीं मनइन म से निकारत देखेन, त हम ओही बरजेन कि तूँ अइसा न करा, काहेकि उआ मनई हमरे पीछे नहीं आबत रहा आय।” 39यीसु यूहन्ना से कहिन, “उआ मनई काहीं न बरजा; काहेकि अइसा कउनव मनई नहिं आय, जऊँ हमरे नाम से सामर्थ के काम करय, अउर हरबिन हमहीं बुरा कहि सकय, 40काहेकि जे कोऊ हमरे बिरोध म नहिं आय, उआ हमरिन कइती हय। 41जे कोऊ एक गिलास पानी तोहईं इआ जानिके पिआई, कि तूँ पंचे मसीह के चेला आह्या, त हम तोंहसे सही कहित हएन, कि उआ मनई ओखर प्रतिफल जरूर पाई।”
जे कोऊ दुसरे से पाप कराबत हय
42यीसु अपने चेलन से कहिन, “जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं, चाह उआ छोट क लड़िकय होय, कउनव से पाप कराबत हय, त उआ मनई के खातिर इआ ठीक कहाई, कि एकठे बड़ी काहीं चक्की के जेतबा ओखे गरे माहीं बाँधिके, समुद्र माहीं फेंक दीन जाय, काहेकि परमातिमा के सजा एहू से जादा मिली। 43अगर तोंहार हाँथ तोंहसे पाप करामँइ के कारन बनत हय, त तूँ अपने हाँथ काहीं काटि डारा, बिना हाँथ के स्वरगराज माहीं जाब, दोनव हाँथन काहीं लए, नरक के आगी माहीं डारे जाँइ से निकहा हय, जउन कबहूँ बुझातिन नहिं आय। 44(जहाँ उनखर किरबा कबहूँ नहीं मरँय, अउर न कबहूँ ओखर आगिन बुझाय।) 45अगर तोंहार गोड़ तोंहसे पाप करामँइ के कारन बनत हय, त तूँ ओही काटि डारा, बिना गोड़ के स्वरगराज माहीं जाब, नरक के आगी माहीं डारे जाँइ से निकहा हय, 46(जहाँ उनखर किरबा कबहूँ नहीं मरँय, न कबहूँ ओखर आगिन बुझाय।) 47अउर अगर तोंहार आँखी तोंहसे पाप करामँइ के कारन बनत ही, त ओही निकारिके फेंकि द्या; नहीं त दुइठे आँखी लए नरक के आगी माहीं डार दीन जइहा। कनमा होइके परमातिमा के राज माहीं जाब तोंहरे खातिर एसे निकहा हय।” 48(जहाँ उनखर किरबा कबहूँ नहीं मरँय, न कबहूँ ओखर आगिन बुझाय।) 49काहेकि हरेक मनई आगी से नोन कि नाईं सुद्ध कीन जई9:49 जइसन यहूदी लोग बली माहीं नोन डारत रहे हँय, उहइमेर कस्टन के द्वारा परमातिमा हमहीं पंचन काहीं सुद्ध करत हें।।9:49 लैब्य 2:1350नोन त निकहा होत हय, पय अगर ओखर सखरई खतम होइ जाय, त दुबारा ओही कउनव चीज से सखार नहीं कीन जाय सकय। इहइमेर अपने भीतर नोन कि नाईं गुन रक्खा, अउर एक दुसरे के साथ मिल-जुलिके रहा।
10छोंड़-छुट्टी करँइ के बारे माहीं यीसु के सिच्छा
1पुनि यीसु कफरनहूम सहर से निकरिके, यहूदिया प्रदेस के सरहद्दी माहीं यरदन नदी के दुसरे पार आइगें, तबहिनय यीसु के लघे पुनि भीड़ एकट्ठा होइगे, अउर यीसु अपने रीत के मुताबिक पुनि भीड़ के मनइन काहीं उपदेस देंइ लागें।
2तब फरीसी लोग यीसु के लघे आइके उनखर परिच्छा लेंइ के खातिर उनसे पूँछिन, “का इआ उचित हय, कि मंसेरुआ अपने मेहेरिआ के छोंड़-छुट्ठी कइ देय?” 3यीसु उनसे कहिन, “मूसा नबी तोंहसे का कहिन तय?” 4ऊँ पंचे कहिन, “मूसा नबी कहिन तय, कि जे कोऊ अपने मेहेरिआ काहीं छोंड़ँइ चाहय, त उआ छोंड़-छुट्टी के कागज लिखिके देय, तबहिन ओही छोंड़ि सकत हय।” 5यीसु उनसे कहिन, “तोंहरे मन के कठोरता के कारन मूसा नबी तोंहरे खातिर इआ हुकुम लिखिन हीं। 6पय संसार के सुरुआत माहीं परमातिमा मनई काहीं मंसेरुआ अउर मेहेरिआ के रूप माहीं बनाइन तय। 7इआ कारन से मनई अपने महतारी-बाप से अलग होइके अपने मेहेरिआ के साथ माहीं रही, 8अउर ऊँ दोनव एकय तन होइहँय; इआ कारन से अब ऊँ दुइ नहीं, बलकिन एकय तन आहीं। 9एसे जिनहीं परमातिमा जोड़िन हीं, उनहीं मनई अलग न करँय।”
10यीसु उहाँ से जब एकठे घर म आइगें, तब चेला लोग मेहेरिआ काहीं छोंड़ँइ के बारे म पुनि पूँछँइ लागें। 11यीसु अपने चेलन से कहिन, “जे कोऊ अपने मेहेरिआ काहीं छोंड़िके दुसरे मेहेरिआ से काज करत हय, त उआ अपने पहिल मेहेरिआ के बिरोध माहीं ब्यभिचार करत हय। 12अउर अगर कउनव मेहेरिआ अपने मंसेरुआ काहीं छोंड़िके दुसरे मंसेरुआ के साथ काज करत ही, त उहव ब्यभिचार करत ही।”
छोट लड़िकन काहीं आसिरबाद
(मत्ती 19:13-15; लूका 18:15-17)
13पुनि खुब मनई अपने छोट-छोट लड़िकन काहीं यीसु के लघे लइ आमँइ लागें, कि यीसु उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके आसिरबाद देंय, पय चेला लोग उनहीं डाँटँइ लागें। 14यीसु इआ देखिके, गुस्साइके अपने चेलन से कहिन, “छोट लड़िकन काहीं हमरे लघे आमँइ द्या, अउर उनहीं न बरजा, काहेकि जे कोऊ छोट लड़िकन कि नाईं अपने काहीं नम्र बनइहँय, उँइन परमातिमा के राज के भागीदार बनिहँय। 15हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जे कोऊ परमातिमा के सँदेस के बात छोट क लड़िका कि नाईं, न अपनाई, त उआ परमातिमा के राज माहीं कबहूँ न जाए पाई।” 16अउर यीसु ऊँ छोट-छोट लड़िकन काहीं कनिआ लइ लिहिन, अउर उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके आसिरबाद दिहिन।
धनमान मनई अउर अनन्त जीबन
(मत्ती 19:16-30; लूका 18:18-30)
17यीसु जब उहाँ से निकरिके गइल माहीं जात रहे हँय, तब एकठे मनई यीसु के लघे दउड़त आबा, अउर उनखे आँगे गोड़न गिरिके पूँछँइ लाग, “हे उत्तम गुरू, अनन्त जीबन पामँइ के खातिर हम का करी?” 18यीसु ओसे कहिन, “तूँ हमहीं उत्तम काहे कहते हया? कोऊ उत्तम नहिं आय, केबल एकठे परमातिमय भर उत्तम हें, अउर उनखे अलाबा कोऊ नहिं आय। 19तूँ परमातिमा के हुकुमन काहीं त जनते हया: कतल न करब, ब्यभिचार न करब, चोरी न करब, लबरी गबाही न देब, कोहू के साथ छल न करब, अउर अपने महतारी-बाप के मान-सम्मान करब।” 20उआ मनई यीसु से कहिस, “हे गुरू, ईं सगली बातन काहीं, त हम लड़िकइन से मानत आएन हय।” 21यीसु उआ मनई कइती निहारिके ओसे प्रेम किहिन, अउर ओसे कहिन, “तोंहरे जीबन माहीं एकठे बात के कमी हय, जा, जऊँ कुछ तोंहार धन-सम्पत्ती ही, ओही सब बेंचिके गरीबन माहीं बाँटि द्या, अउर तोहईं स्वरग माहीं एसे बढ़िके धन-सम्पत्ती मिली, अउर आइके हमरे पीछे चला।” 22यीसु के इआ बात सुनिके उआ मनई के चेहरा माहीं उदासी छाइगे, अउर खुब दुखी होइके उहाँ से चला ग, काहेकि उआ खुब धनी रहा हय। अउर इआ करँइ के ओखर इच्छा नहीं रही।
23यीसु अपने चारिव कइती निहारिके अपने चेलन से कहिन, “धनी मनइन के परमातिमा के राज म प्रबेस करब केतना कठिन हय!” 24चेला लोग यीसु के बात काहीं सुनिके चउआइगें। इआ देखिके यीसु पुनि चेलन से कहिन, “हे लड़िकव, जउन मनई धन के ऊपर भरोसा रक्खत हें, उनखर परमातिमा के राज म प्रबेस करब केतना कठिन हय! 25परमातिमा के राज माहीं धनी मनई के पहुँचब खुब कठिन हय, बलकिन सूजी के छेंद से ऊँट के निकर जाब, एसे सरल हय!” 26यीसु के इआ बात काहीं सुनिके चेला लोग खुब अचरज मानिके आपस माहीं कहँइ लागें, “त पुनि केही मुक्ती मिल सकत ही?” 27यीसु अपने चेलन कइती देखिके कहिन, “मनइन से त इआ नहीं होइ सकय, पय परमातिमा से होइ सकत हय; काहेकि परमातिमा सब कुछ कइ सकत हें।” 28तब पतरस यीसु से कहँइ लागें, “देखी, हम पंचे त आपन सब कुछ छोंड़िके अपना के पीछे चले आएन हँय।” 29तब यीसु कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि अइसा कोऊ नहिं आय, जउन हमरे अउर परमातिमा के खुसी के खबर के खातिर आपन घर, अउर भाई-बहिनिन, अउर महतारी-बाप, अउर लड़िकन-बच्चन, अउर खेतन काहीं छोंड़ि दिहिस होय, 30अउर अब इआ समय माहीं सव गुना न पाइस होय, अपने घरन, अउर भाइन अउर बहिनिन, अउर महतारिन, अउर लड़िकन-बच्चन, अउर खेतन काहीं, पय परमातिमा के खातिर सताव काहीं सहिके स्वरग माहीं अनन्त जीबन पाई, 31देखा, जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से बड़ा मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से छोट माने जइहँय, अउर जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से छोट मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से बड़े माने जइहँय।”
अपने मउत के बारे माहीं यीसु के तिसराय भबिस्सबानी
(मत्ती 20:17-19; लूका 18:31-34)
32यीसु अपने चेलन के साथ यरूसलेम सहर जात रहे हँय, अउर उनखे पीछे अउरव मनई रहे हँय, अउर यीसु उन सगलेन के आँगे-आँगे जात रहे हँय। अउर चेला लोग चउआन रहे हँय, अउर जऊँ उनखे पीछे-पीछे आबत रहे हँय, ऊँ पंचे खुब डेरान रहे हँय। तब यीसु पुनि अपने बरहँव चेलन काहीं अपने लघे अलग बोलाइके, ऊँ बातन काहीं बतामँइ लागें, जउन यीसु के ऊपर आमँइ बाली रही हँय। 33“देखा, हम यरूसलेम सहर माहीं जइत हएन, अउर मनई के लड़िका प्रधान याजकन अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई, अउर ऊँ पंचे ओही मउत के सजा के काबिल ठहरइहँय, अउर गैरयहूदी लोगन के हाँथ माहीं सउँपिहँय। 34अउर ऊँ पंचे ओखर मजाक उड़इहँय, ओखे ऊपर थुँकिहँय, ओही चाबुक से मरिहँय, अउर ओही मारि डरिहँय, अउर उआ तिसरे दिन जिन्दा होइ जई।”
याकूब अउर यूहन्ना के यीसु से बिनती करब
35तब जब्दी के लड़िका याकूब अउर यूहन्ना यीसु के लघे आइके कहिन, “हे गुरू, हम पंचे चाहित हएन, कि जऊँ कुछू हम अपना से मागी, ओही अपना हमरे खातिर पूर करी।” 36यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे का चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर करी?” 37ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “अपना हमहीं इआ बचन देई, कि जब अपना परमातिमा के महिमा के साथ राज करब, त एक जने काहीं अपने दहिने कइती, अउर दुसरे काहीं बाएँ कइती बइठाउब।” 38यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि हम पंचे का मागित हएन? जऊँ भारी कस्ट हम सहँइ बाले हएन, का तूँ पंचे उआ कस्ट सहि सकते हया? अउर जउन खुब कस्ट सहिके हम मरँइ बाले हएन, का तूँ पंचे खुब कस्ट सहिके मर सकते हया?” 39ऊँ दोनव जने यीसु से कहिन, “इआ सब हम पंचे कइ सकित हएन।” यीसु उनसे पुनि कहिन, “जऊँ कस्ट हम सहँइ बाले हएन, तूँ पंचे सहि लेइहा, अउर जउन खुब कस्ट सहिके हम मरँइ बाले हएन, अइसा खुब कस्ट सहिके तूँ पंचे मरँइ के खातिर तइआर हया। 40पय उआ जघा जेखे खातिर परमातिमा तइआर किहिन हीं, ओही छोंड़िके, अउर कोहू काहीं अपने दहिने, अउर अपने बाएँ बइठाउब हमरे बस म नहिं आय।”
41इआ सुनिके दसहूँ चेला यूहन्ना अउर याकूब काहीं रिसिहाँइ लागें। 42तब यीसु चेलन काहीं अपने लघे बोलाइके उनसे कहिन, “तूँ पंचे जनते हया, कि जऊँ गैरयहूदी लोगन माहीं अधिकारी होत हें, उनखे ऊपर हुकुम चलाबत हें, अउर उन अधिकारिन माहीं बड़े अउर छोट होत हें, अउर जऊँ बड़े होत हें, ऊँ छोटन के ऊपर अधिकार जताबत हें। 43पय तोंहरे बीच माहीं अइसा न होंइ चाही, बलकिन जे कोऊ तोंहरे पंचन म से बड़ा बनँइ चाहत हय, त उआ तोंहार सगलेन के सेबा करँइ बाला बनय। 44अउर जे कोऊ तोंहरे पंचन म से मुखिया बनँइ चाहत हय, त उआ पहिले तोंहार पंचन के दास बनय; 45काहेकि मनई के लड़िका एसे नहीं आबा, कि ओखर सेबा-सहाई कीन जाय, बलकिन एसे आबा हय, कि खुदय दुसरेन के सेबा-सहाई करय, अउर उआ खुब मनइन काहीं मुक्ती देंइ के खातिर आपन प्रान देय।”
आँधर मनई काहीं नीक करब
(मत्ती 20:29-34; लूका 18:35-43)
46यीसु अपने चेलन के साथ यरीहो सहर माहीं पहुँचे, अउर जब यीसु अउर उनखर चेला लोग अउर खुब बड़ी भीड़, यरीहो सहर से होइके चली जात रही हय, तब तिमाई के लड़िका बरतिमाई जऊँ आँधर रहा हय, उआ भीख माँगय के खातिर सड़क के किनारे बइठ रहा हय। 47उआ इआ सुनिके कि नासरत गाँव के यीसु जात हें, चिल्लाय-चिल्लाइके कहँइ लाग, “हे राजा दाऊद के सन्तान यीसु, हमरे ऊपर दया करी!” 48खुब जने ओही डाँटिन, कि चुप्पय होइ जाय, पय उआ अउर चंडे चिल्लाँइ लाग, “हे राजा दाऊद के सन्तान यीसु, हमरे ऊपर दया करी!” 49तब यीसु रुकिके कहिन, “उआ आँधर मनई काहीं बोलाबा।” तब कुछ जने उआ आँधर मनई के लघे जाइके ओसे कहिन, “साहस करा! उठा! यीसु तोंहईं बोलाबत हें।” 50उआ आँधर मनई आपन ओन्हा फेंकिके तुरन्तय उठा, अउर यीसु के लघे आबा। 51तब यीसु ओसे कहिन, “तूँ का चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर करी?” उआ आँधर मनई यीसु से कहिस, “हे गुरू, हम इआ चाहित हएन, कि हम देखँइ लागी।” 52यीसु उआ आँधर मनई से कहिन, “चले जा, तोंहार बिसुआस तोंहईं नीक किहिस ही।” अउर उआ आँधर मनई हरबिन देखँइ लाग, अउर गइल माहीं यीसु के पीछे-पीछे चलँइ लाग।
11यीसु राजा कि नाईं यरूसलेम माहीं प्रबेस किहिन
(मत्ती 21:1-11; लूका 19:28-40; यूहन्ना 12:12-19)
1जब यीसु अउर उनखर चेला लोग यरूसलेम सहर के लघे, जैतून पहार के ऊपर बैतफगे अउर बैतनिय्याह गाँव के लघे आएँ, तब ऊँ अपने चेलन म से दुइ जनेन काहीं इआ कहिके पठइन, 2“सउहें बाले गाँव माहीं जा, अउर उहाँ पहुँचतय एकठे गदही के बच्चा, जउने म कबहूँ कोऊ नहीं चढ़िस, तोंहईं पंचन काहीं बाँधा मिली। ओही छोरिके ले आबा। 3अगर तोंहसे कोऊ पूँछय, ‘इआ का करते हया?’ त कहि दिहा, कि प्रभू काहीं एखर जरूरत ही, अउर उआ तुरन्तय ओही इहाँ पठय देई।” 4दोनव चेला गाँव माहीं जाइके उआ गदही के बच्चा काहीं, घर के बहिरे दुअरा के लघे चउराहा माहीं बाँधा पाइन, अउर ओही छोरँइ लागें। 5तब जऊँ मनई उहाँ ठाढ़ रहे हँय, उनमा से कुछ जने कहँइ लागें, “इआ का करते हया, गदही के बच्चा काहीं काहे छोरते हया?” 6तब चेला लोग, जइसन यीसु उनसे कहिन तय, उहयमेर उनसे कहि दिहिन; तब सगले मनई उनहीं चले जाँइ दिहिन। 7अउर ऊँ पंचे गदही के बच्चा काहीं यीसु के लघे लइ आएँ, अउर ओखे ऊपर आपन ओन्हा डारिन, अउर यीसु उआ गदही के बच्चा के ऊपर बइठिगें। 8तब उनखर सम्मान करँइ के खातिर खुब मनई आपन-आपन ओन्हा गइल माहीं बिछाइन, अउर कुछ जने खेतन के बिरबन से डेरइआ काट-काटिके गइल माहीं बिछाय दिहिन। 9जऊँ मनई यीसु के आँगे-आँगे जात रहे हँय, अउर जऊँ यीसु के पीछे-पीछे चलत रहे हँय, त ऊँ पंचे चिल्लाय-चिल्लाय कहत जात रहे हँय, “होसन्ना!11:9 होसाना मतलब हमही बचाया। धन्य हय उआ जउन प्रभू के नाम से आबत हय। 10हमरे कुल पिता राजा दाऊद के राज जउन आय रहा हय; धन्य हय! स्वरग माहीं होसन्ना।”
11अउर यीसु यरूसलेम सहर माहीं पहुँचिके मन्दिर माहीं गें, अउर चारिव कइती सगली चीजन काहीं देखिके, अपने बरहँव चेलन काहीं साथय लइके बैतनिय्याह गाँव माहीं चलेगें, काहेकि साँझ होइगे रही हय।
अंजीर के बिरबा काहीं सराप देब
12दुसरे दिना जब यीसु अपने चेलन के साथ बैतनिय्याह गाँव से निकरिके चल दिहिन, तब उनहीं भूँख लाग। 13अउर यीसु दूरिन से एकठे अंजीर के हरिअर बिरबा देखिके, ओखे लघे गें, कि साइद ओमाहीं कुछ फर पाय जाँय: पय उआ बिरबा माहीं पत्तन क छोंड़िके कुछू नहीं पाइन; काहेकि ओखर फरँय के समय नहीं रहा आय। 14इआ देखिके यीसु उआ बिरबा से कहिन, “अब से कोऊ तोर फर कबहूँ न खाय!” अउर उनखर चेला लोग सुनत रहे हँय।
मन्दिर से बइपारिन काहीं भगाउब
(मत्ती 21:12-17; लूका 19:45-48; यूहन्ना 2:13-22)
15पुनि यीसु अपने चेलन के साथ यरूसलेम सहर माहीं आएँ, अउर मन्दिर माहीं गें; अउर उहाँ जउन बइपार करत रहे हँय, उनहीं बहिरे निकार दिहिन, अउर रुपिआ-पइसा के लेन-देन करँइ बालेन के पिढ़बन, अउर परेबा बेंचँइ बालेन के चउकिन काहीं उलटाय दिहिन, 16अउर यीसु मन्दिर से होइके कोहू काहीं बरतन लइके आमँइ-जाँइ नहीं दिहिन। 17अउर उपदेस दइके उनसे कहिन, “का पबित्र सास्त्र माहीं इआ नहीं लिखा आय, कि हमार घर सगली जातिअन के खातिर प्राथना के घर कहाई? पय तूँ पंचे इआ मन्दिर काहीं डँकुअन के अड्डा बनाय दिहा हय।” 18यीसु के इआ बात क सुनिके प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, यीसु काहीं मारि डारँइ के मोका ढूढ़ँय लागें; काहेकि ऊँ सगले जने यीसु से डेरातव रहे हँय, एसे कि खुब मनई यीसु के सिच्छा काहीं सुनिके चउआय जात रहे हँय। 19साँझ होतय यीसु अपने चेलन के साथ सहर से बहिरे चलेगें।
झुरान अंजीर के बिरबा से सिच्छा
20जब यीसु पुनि दुसरे दिना सकारे, अपने चेलन के साथ यरूसलेम सहर जात रहे हँय, तब ऊँ पंचे गइल माहीं, उआ अंजीर के बिरबा काहीं जर तक झुरान देखिन। 21तब पतरस काहीं यीसु के कही उआ बात याद आइगे, अउर ऊँ यीसु से कहिन, “हे गुरू, देखी! इआ अंजीर के बिरबा जउने काहीं अपना सराप दिहेन तय, झुराइगा हय।” 22तब यीसु पतरस से कहिन, कि “परमातिमा के ऊपर बिसुआस रक्खा। 23हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जे कोऊ इआ पहार से कहय, कि ‘तूँ उखड़ि जा, अउर समुद्र माहीं जाइके बूड़ जा’, अउर अपने मन म संका न करय, बलकिन बिसुआस कइ लेय, कि हम जउन कहित हएन, उआ होइ जई, त ओखे खातिर उहय होई। 24एसे हम तोंहसे कहित हएन, कि जउन कुछू तूँ पंचे प्राथना कइके मागा, त बिसुआस कइल्या, कि तोंहईं मिलिगा, त उआ तोंहरे खातिर होइ जई। 25अउर जब केतनिव दार तूँ पंचे ठाढ़ होइके प्राथना करते हया, त अगर तोंहरे मन म कोहू के बारे माहीं बिरोध होय, त ओही माफ कइ द्या! जउने तोंहरव अपराध स्वरग म रहँइ बाले परमातिमा माफ कइ देंय। 26(अगर तूँ पंचे माफ न करिहा त तोंहार पिता जऊँ स्वरग माहीं रहत हें, तोंहरव अपराध माफ न करिहँय।”)
यीसु के अधिकार के बारे माहीं पूँछब
27पुनि यीसु अपने चेलन के साथ यरूसलेम सहर माहीं आएँ, अउर जब यीसु मन्दिर म जाइके घूमत रहे हँय, तबहिनय प्रधान याजक लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग यीसु के लघे आइके पूँछिन, 28“तूँ मन्दिर खाली करामँइ के काम कउने अधिकार से करते हया? अउर इआ अधिकार तोंहईं को दिहिस ही, कि तूँ इआ काम करा?” 29यीसु उनसे कहिन, “हमहूँ तोंहसे एकठे बात पूँछित हएन, अगर तूँ पंचे हमहीं बतइहा, त हमहूँ तोंहसे बताउब कि ईं काम हम कउने अधिकार से करित हएन। 30यूहन्ना काहीं बपतिस्मा देंइ के अधिकार, परमातिमा से मिला तय, इआ मनई उनहीं दिहिन तय? हमहीं बताबा।” 31तब ऊँ पूँछँइ बाले आपस माहीं बताँइ लागें, कि अगर हम कहित हएन, कि “परमातिमा से मिला तय” त ऊँ कइहँय, कि “पुनि तूँ पंचे उनखर बिसुआस काहे नहीं किहा?” 32अउर अगर हम पंचे कहित हएन, कि “मनइन से मिला तय” त उहाँ ठाढ़ सगले मनई मारि डरिहँय, एहिन से डेरातव रहे हँय, काहेकि सगले मनई जानत रहे हँय, कि इआ बात बेलकुल सही आय, यूहन्ना परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय। 33एसे ऊँ पंचे यीसु काहीं जबाब दिहिन, “हम पंचे नहिं जानी” तब यीसु उनसे कहिन, “हमहूँ तोंहईं नहीं बताई, कि ईं काम हम कउने अधिकार से करित हएन।”
12दुस्ट किसानन के उदाहरन
(मत्ती 21:33-46; लूका 20:9-19)
1पुनि यीसु उनसे उदाहरन माहीं बातँय करँइ लागें, “कउनव मनई अंगूर के बगिया लगाइस अउर बगिया के चारिव कइती बारी रूँधिस, अउर अंगूर के रस निकारँइ के खातिर कुन्ड खोदिस, अउर एकठे ऊँच काहीं मड़इचा बनाइस; अउर कुछ किसानन काहीं उआ बगिया के ठेका दइके परदेस चला ग। 2पुनि जब अंगूर के फरँइ के समय आबा, तब उआ मनई किसानन के लघे अपने एकठे दास काहीं पठइस, कि किसानन से अंगूर के बगिया से ओखे हिस्सा के अंगूर लइ आबय। 3पय ऊँ पंचे उआ दास काहीं पकड़िके मारिन-पीटिन अउर छूँछय हाँथ लउटाय दिहिन। 4पुनि उआ मनई एकठे अउर दास काहीं किसानन के लघे पठइस; पय ऊँ किसान ओहू के मूँड़ फोर डारिन, अउर ओखर अपमान किहिन। 5पुनि उआ मनई एकठे अउर दास काहीं किसानन के लघे पठइस; पय ऊँ किसान ओही मारि डारिन। तब उआ मनई अउर खुब दासन काहीं पठइस, पय ऊँ किसान कुछ दासन काहीं मारिन-पीटिन, अउर कुछन काहीं मारि डारिन। 6अउर ओखे लघे पठमँइ के खातिर अब केबल ओखर लड़िका बचा, जउने से उआ खुब प्रेम करत रहा हय: अन्तिम माहीं उआ अपने लड़िका क किसानन के लघे इआ सोचिके पठइस, कि ऊँ किसान हमरे लड़िका के मान-सम्मान करिहँय। 7पय ऊँ किसान ओखे लड़िका काहीं आबत देखिके, आपस माहीं कहँइ लागें; इहय त इआ बगिया के बारिसदार आय; आबा हम पंचे एही मारि डारी, तब सगली बगिया माहीं हमार पंचन के अधिकार होइ जई। 8अउर ऊँ पंचे उआ लड़िका काहीं पकड़िके मारि डारिन, अउर अंगूर के बगिया के बहिरे फेंकि दिहिन।”
9एसे उआ अंगूर के बगिया के मालिक आइके का करी, तूँ पंचे जनते हया? “उआ बगिया के मालिक आइके किसानन काहीं जान से मारि डारी, अउर अपने बगिया के ठेका दुसरे किसानन काहीं दइ देई। 10काहे तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं लिखी, इआ बात काहीं नहीं पढ़े आह्या:
‘जउने पथरा काहीं राजा के कारीगर इआ कहिके छोंड़ि दिहिन तय, कि इआ कउनव काम के नहिं आय, उहय कोनमा के खास पथरा होइगा।
11इआ काम प्रभू किहिन हीं, अउर इआ हमरे नजर माहीं खुब अचरज के काम हय।”
12तब फरीसी लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, यीसु काहीं पकड़िके लइ जाँइ चाहत रहे हँय, काहेकि ऊँ पंचे समझिगें तय, कि यीसु इआ उदाहरन हमरे खिलाफ कहिन हीं। पय ऊँ पंचे उहाँ ठाढ़ खुब मनइन से डेराने, अउर यीसु क मन्दिर माहीं छोंड़िके चलेगें।
राजा कैसर काहीं जमा देब
(मत्ती 22:15-22; लूका 20:20-26)
13तब फरीसी लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, यीसु काहीं कउनव बात माहीं फँसाइके पकड़ँइ के खातिर, कुछ फरीसी लोगन के अउर कुछ राजा हेरोदेस के गुट बाले मनइन काहीं यीसु के लघे पठइन। 14तब ऊँ पंचे यीसु के लघे आइके उनसे कहिन, “हे गुरू, हम पंचे जानित हएन, कि अपना सच्चे हएन, अउर परमातिमा के गइल सच्चाई से बताइत हएन, अउर कोहू के परबाह नहीं करी, काहेकि अपना मनइन के मुँह देखिके बातँय नहीं करी। पय परमातिमा के सँदेस के बात सच्चाई से बताइत हएन। त अपना बताई, कि का हमही महाराजा कैसर काहीं कर देब उचित हय कि नहीं? 15हम पंचे कर देई, कि न देई?” यीसु उनखे दिल के कपट क जानिके उनसे कहिन, “तूँ पंचे हमरे बात माहीं गलती पकड़ँइ आया हय? रोमी राज के एकठे सिक्का हमरे लघे लइ आबा, कि हम ओही देखी।” 16ऊँ पंचे लइ आएँ, तब यीसु उनसे कहिन, “इआ सिक्का माहीं केखर चित्र अउर नाम हय?” ऊँ सगले जन कहिन, “महाराजा कैसर के।” 17तब यीसु उनसे कहिन, “जऊँ महाराजा कैसर के आय, ओही महाराजा कैसर काहीं द्या, अउर जऊँ परमातिमा के आय, ओही परमातिमा काहीं द्या।” तब ऊँ पंचे यीसु के इआ बात क सुनिके खुब अचरज मानिन।
दुसराय जिन्दा होए के बाद काज-बिआह
(मत्ती 22:23-33; लूका 20:27-40)
18पुनि सदूकी दल बाले लोग, जऊँ इआ कहत रहे हँय, कि मरे के बाद दुसराय जिअब होतय नहिं आय, यीसु के लघे आइके पूँछँइ लागें, 19“हे गुरू, मूसा नबी हमरे पंचन के खातिर पबित्र सास्त्र माहीं लिखिन हीं, कि अगर कोहू के भाई बिना सन्तान पइदा किहे मर जाय, अउर ओखर मेहेरिआ जिन्दा रहि जाय, त ओखर भाई ओसे काज कइके अपने भाई के खातिर सन्तान पइदा करय। 20एकठे घर म सात भाई रहे हँय। पहिल भाई काज कइके बिना सन्तान पइदा किहे मरिगा। 21तब दूसर नम्बर के भाई उआ मेहेरिआ से काज कइ लिहिस, अउर उहव बिना सन्तान पइदा किहे मरिगा, अउर इहइमेर से तिसरव भाई किहिस। 22अउर इहइमेर से सातव भाई किहिन, अउर बिना सन्तान पइदा किहे मरिगें, अउर सगलेन के बाद उआ मेहेरिअव मरिगे। 23त अपना बताई, जब ऊँ पंचे मरेन म से पुनि जिन्दा होइहँय, त उआ मेहेरिआ केखर मेहेरिआ कहाई? काहेकि उआ सातँव जनेन के मेहेरिआ होइ चुकी तय।”
24यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे पबित्र सास्त्र, अउर परमातिमा के सक्ती काहीं नहीं जनते आह्या; इहय कारन से धोखे माहीं परे हया। 25काहेकि जब ऊँ पंचे मरेन म से पुनि जिन्दा होंइ हँय, त उन माहीं काज-बिआह न होई, बलकिन स्वरग माहीं स्वरगदूतन कि नाईं होइ जइहँय। 26मरिके दुसराय जिन्दा होंइ के बारे माहीं का तूँ पंचे मूसा नबी के लिखी किताब माहीं, झाड़ी के किस्सा माहीं नहीं पढ़े आह्या, कि परमातिमा मूसा नबी से कहिन तय, ‘हम अब्राहम के परमातिमा, अउर इसहाक के परमातिमा, अउर याकूब के परमातिमा आहेन?’ 27ऊँ मरे मनइन के नहीं, बलकिन जिन्दा मनइन के परमातिमा आहीं; एसे तूँ पंचे बड़ी भूल माहीं परे हया।”
परमातिमा के सबसे बड़ा हुकुम
(मत्ती 22:34-40; लूका 10:25-28)
28मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन म से एक जने आइके यीसु अउर सदूकी दल बालेन काहीं बाद-बिबाद करत देखिके, अउर इआ जानिके, कि यीसु उनहीं सही ढँग से जबाब दिहिन हीं, त यीसु से पूछँइ लाग, “सगलेन से खास हुकुम कउन हय?” 29तब यीसु ओही जबाब दिहिन, “सगले हुकुमन माहीं खास हुकुम हय: ‘हे इजराइल सुन! प्रभू हमार पंचन के परमातिमा एकयठे प्रभू हें। 30अउर तूँ प्रभू अपने परमातिमा से अपने पूरे मन से, अउर अपने पूरे प्रान से, अउर अपने पूरी बुद्धी से, अउर अपने पूरी सक्ती से प्रेम रख्या।’ 31अउर दूसर हुकुम इहव हय, ‘तूँ अपने परोसी से अपनेन कि नाईं प्रेम रख्या’ ईं दोनव से बड़ा अउर कउनव परमातिमा के हुकुम नहिं आय।” 32तब यहूदी नेम सिखामँइ बाला यीसु से कहिस, “हे गुरू, बेलकुल ठीक! अपना सही कहेन हय, कि परमातिमा एकइठे हँय, अउर उनहीं छोंड़ि कउनव दूसर नहिं आय। 33अउर परमातिमा से पूरे मन, अउर पूरी बुद्धी, अउर पूरे प्रान से, अउर पूरी सक्ती से प्रेम रक्खब, अउर परोसी से अपनेन कि नाईं प्रेम रक्खब सगले होमबलिअन अउर बलिदानन से बढ़िके हय।” 34जब यीसु देखिन कि उआ समझ के साथ जबाब दिहिस ही, तब ओसे कहिन, “तूँ परमातिमा के राज के लघेन हया।” अउर एखे बाद कोहू के यीसु से कुछू पूँछँइ के हिम्मत नहीं परी।
मसीह केखर लड़िका आहीं?
(मत्ती 22:41-46; लूका 20:41-44)
35पुनि यीसु मन्दिर म उपदेस देत माहीं इआ कहिन, “मूसा के बिधान सिखामँइ बाले कइसा कहत हें, कि मसीह राजा दाऊद के सन्तान आहीं? 36राजा दाऊद खुदय पबित्र आत्मा से भरिके कहिन हीं:
‘प्रभू हमरे प्रभू से कहिन, “हमरे दहिने बइठा, जब तक कि हम तोंहरे बइरिन काहीं तोंहरे गोड़े के नीचे न कइ देई।
37राजा दाऊद त खुदय उनहीं प्रभू कहत हें, त ऊँ उनखर सन्तान कइसन कहाएँ?” अउर भीड़ के मनई यीसु के बातन काहीं खुसी से सुनत रहे हँय।
मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन से बचिके रहब
(मत्ती 23:1-36; लूका 20:45-47)
38यीसु अपने उपदेस माहीं कहिन, “मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन से सतरक रह्या, जिनहीं लम्बे-लम्बे कुरथा पहिरे घूमब, अउर बजारन म नबस्कार करबाउब, 39अउर सभाघरन माहीं खास-खास आसन म बइठब, अउर जेउनारन माहीं खास-खास जघा म बइठब नीक लागत हय। 40ऊँ पंचे बिधबन के घरन क लूट लेथें, अउर खुद काहीं धरमी देखामँइ के खातिर खुब देर तक प्राथना करत हें। ईं पंचे सगलेन से जादा सजा पइहँय।”
गरीब बिधबा के दान
41यीसु मन्दिर म दान पेटी के आँगे बइठिके देखत रहे हँय, कि लोग मन्दिर के दान डारँइ बाली पेटी माहीं कउनमेर से पइसा डारत हें; अउर खुब धनी मनई आइके बहुत कुछ डारिके चलेगें। 42एतने माहीं एकठे गरीब बिधबा आइके जऊँ ओखे लघे पइसा दुइ पइसा रहय, सगला, दान पेटी माहीं डार दिहिस। 43तब यीसु अपने चेलन काहीं लघे बोलाइके उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि मन्दिर के दान पेटी म दान डारँइ बालेन माहीं, इआ गरीब बिधबा सगलेन से जादा दान डारिस ही; 44काहेकि सगले जन अपने धन के बढ़ती से कुछ लइके डारिन हीं, पय इआ गरीब बिधबा अपने गरीबी माहीं जऊँ कुछू ओखे लघे रहा, मतलब जऊँ ओखे खाँइ जिअँइ काहीं रहा हय, आपन सगला धन दान पेटी माहीं डार दिहिस ही।”
13मन्दिर के नास होंइ के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी
1जब यीसु मन्दिर से निकरिके जाँइ लागें, तबहिनय उनखे चेलन म से एक जने यीसु से कहिन, “हे गुरू, देखी, कइसन खुब बड़े-बड़े पथरा हें, अउर कइसन बड़े-बड़े घर बने हँय!” 2यीसु उनसे कहिन, “का तूँ पंचे ईं बड़े-बड़े घरन काहीं देखते हया: एक्कव पथरा एक दुसरे के ऊपर न देखइहँय, ऊँ सगले गिराय दीन जइहँय।”
आमँइ बाले समय माहीं कस्ट अउर पीरा
3जब यीसु जैतून के पहार माहीं मन्दिर के आँगे बइठ रहे हँय, तबहिनय पतरस अउर याकूब अउर यूहन्ना अउर अन्द्रियास अलग जाइके यीसु से पूँछिन, 4“हमहीं पंचन काहीं बताई कि ईं बातँय कबय होंइ हँय? अउर जब ईं बातँय होंइ हँय, उआ समय काहीं हम पंचे कइसन जाने पाउब, कउनव चिन्हारी बताई?” 5तब यीसु उनसे कहँइ लागें, “सतरक रह्या, कोऊ तोंहईं बिसुआस से भटकाए न पाबय। 6खुब जने हमरे नाम से आइके कइहँय, ‘हम मसीह आहेन!’ अउर खुब मनइन काहीं बिसुआस से भटकाय देइहँय। 7अउर तूँ पंचे जब युद्ध होत देख्या, अउर युद्धन के चरचा सुन्या, त घबराय न जया, काहेकि ईं सगली बातँय जरूर होइहँय, पय उआ समय संसार के अन्त न होई। 8काहेकि एक जाति के मनई, दुसरे जाति के मनइन के ऊपर चढ़ाई करिहँय, अउर एक देस, दुसरे देस के ऊपर चढ़ाई करी, अउर हरेक जघन माहीं अकाल परिहँय, अउर भुँइडोल होइहँय। अउर ईं सगली बातँय दुख-मुसीबतन के सुरुआत होइहँय।”
9पय तूँ पंचे अपने बारे म सचेत रह्या; काहेकि कुछ लोग तोंहईं लइ जाइके महासभन माहीं सउँपिहँय, अउर सभाघरन म मरिहँय-पिटिहँय, अउर तूँ पंचे हमरे बात काहीं मनते हया, एखे कारन अधिकारिन अउर राजन के आँगे ठाढ़ कीन जइहा, उआ समय हमरे बारे माहीं उनहीं बतामँइ क निकहा मोका रही। 10पय इआ जरूरी हय, कि पहिले परमातिमा के खुसी के खबर, सगली जातिअन के मनइन काहीं बताई जाय। 11जब ऊँ पंचे तोंहईं लइ जाइके उनखे आँगे ठाढ़ करँय, त पहिलेन से चिन्ता न किहा, कि हम कउनमेर से, इआ कि का कहब, पय जउन कुछू तोंहईं उआ समय बताबा जाय, उहय कह्या; काहेकि बोलँइ बाले तूँ पंचे न होइहा, बलकिन पबित्र आत्मा होई। 12अउर भाई काहीं भाई, अउर बाप काहीं लड़िका, मार डारँइ के खातिर सभन म सउँपिहँय, अउर लड़िका-बिटिया महतारी-बाप के बिरोधी होइके मरबाय डरिहँय। 13अउर हमरे बात काहीं मानँइ के कारन सगले मनई तोंहसे दुसमनी रखिहँय; पय जे कोऊ अन्त तक धीरज धरे रही, उहय मुक्ती पाई।
सबसे भयानक संकट के समय
(मत्ती 24:15-28; लूका 21:20-24)
14“एसे जब तूँ पंचे उआ भयानक अउर बिनास करँइ बाली चीज काहीं, जहाँ उचित नहिं आय उहाँ ठाढ़ देख्या, (अउर पढ़ँइ बाला समझ लेय, कि एखर मतलब का हय) उआ समय जउन मनई यहूदिया प्रदेस माहीं होंय, त ऊँ पंचे पहारन माहीं भाग जाँय। 13:14 दानि 9:27; 11:3115अउर जे कोऊ छत के ऊपर होय, उआ अपने घर से कुछू लेंइ के खातिर नीचे न उतरय, न भितरय जाय; 16अउर जऊँ मनई खेत माहीं होय, उआ आपन ओन्हा लेंइ के खातिर पीछे न लउटय। 17अउर ऊँ दिनन माहीं जउन मेहेरिआ लड़कहाई होइहँय, अउर जे कोऊ अपने लड़िकन काहीं दूध पिआबत होइहँय, त उनहीं पंचन काहीं खुब कस्ट होई। 18अउर तूँ पंचे प्राथना करत रहा, कि इआ जाड़े के रित माहीं न होय। 19काहेकि ऊँ दिन अइसन भारी दुख अउर कस्ट के होइहँय, कि जब से परमातिमा संसार काहीं बनाइन हीं, तब से लइके अबय तक न कबहूँ भे आहीं, अउर न कबहूँ पुनि होइहँय। 20अउर अगर प्रभू ऊँ दिनन काहीं कम न करते, त कउनव प्रानी न बँचि पउतें, पय ऊँ मनइन के कारन जिनहीं परमातिमा चुनिन हीं, ऊँ दिनन काहीं घटाइन हीं।” 21अउर उआ समय अगर कोऊ तोंहसे कहय, कि “देखा, मसीह ‘इहाँ हें!’ इआ कि ‘उहाँ हें’, त उनखर बिसुआस बेलकुल न मान्या।” 22काहेकि लबरे मसीह, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले लबरे मनई तइआर होइहँय, अउर ऊँ पंचे बड़े-बड़े चिन्ह अउर अचरज के काम देखइहँय, कि होइ सकय त चुने मनइन काहीं घलाय भटकाय देंय, 23पय तूँ पंचे सचेत रह्या; “देखा, हम तोंहईं पंचन काहीं सगली बातँय होंइ से पहिलेन बताय दिहेन हय।”
मनई के लड़िका के दुसराय आमँइ के समय
(मत्ती 24:29-31; लूका 21:25-28)
24“ऊँ दिनन माहीं उआ दुख अउर कस्ट के बाद सुरिज म एक्कव उँजिआर न रहि जई, अउर जोंधइआ एक्कव उँजिआर न देई; 25अउर अकास से तरइया गिरँय लगिहँय; अउर अकास के सगली चीजँय हलाई जइहँय। 26तब लोग मनई के लड़िका काहीं बड़ी सामर्थ अउर महिमा के साथ बदरी म आबत देखिहँय। 27उआ समय ऊँ अपने स्वरगदूतन काहीं पठइके, धरती के इआ छोर से लइके अकास के उआ छोर तक, चारिव दिसन से, अपने चुने मनइन काहीं एकट्ठा करिहँय।”
अंजीर के बिरबा के उदाहरन
(मत्ती 24:32-35; लूका 21:29-33)
28अउर यीसु उनसे पुनि कहिन, कि “अंजीर के बिरबा से इआ सिच्छा ल्या, जब ओखर डेरइआ कोमर होइ जाती हईं, अउर उनमा पत्ता निकरँइ लागत हें, तब तूँ पंचे इआ जान लेते हया, कि गरमी के रित हरबिन आमँइ बाली हय। 29इहइमेर से जब तूँ पंचे ईं सगली बातन काहीं होत देख्या, त इआ जान लिहा कि ऊँ अमइन बाले हें, बलकिन आइन गे हँय। 30हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जब तक ईं सगली बातँय न होइ जइहँय, तब तक इआ समय के मनइन के अन्त न होई। 31धरती अउर अकास टर जइहँय, पय हमार कही बातँय कबहूँ न टरिहँय।”
सतरक रहा
32“उआ दिन अउर उआ समय के बारे माहीं कोऊ नहीं जानँय, न स्वरग के दूत, अउर न लड़िका, ओखे बारे माहीं केबल पिता परमातिमा भर जानत हें। 33देखा, हमेसा सतरक रहा, अउर प्राथना करत रहा; काहेकि तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि उआ समय कबय आय जई? 34मनई के लड़िका के आमँइ के बारे माहीं एकठे उदाहरन हम तोहईं बताइत हएन, एकठे मनई परदेस जाँइ के पहिले, आपन सगला घर अपने सगले दासन काहीं देख-भाल करँइ के खातिर बताइके: अउर हरेक दासन क काम बताइके, अउर चउकीदार काहीं जागत रहँइ काहीं कहिके चला ग। 35एसे हर समय सतरक रहा, काहेकि तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि घर के मालिक कबय अई, साँझिके अई, इआ कि आधी रात अई, इआ कि मुरगा बोलँइ के समय अई, इआ कि भिनसरहय अई। 36अइसा न होय कि मालिक अचानक आइके तोंहईं सोबत पाबय। 37अउर जउन बात हम तोंहसे कहेन हय, उहय बात सबसे कहित हएन: सतरक रहा!”
14यीसु काहीं मारि डारँइ के खातिर उपाय
(मत्ती 26:1-5; लूका 22:1-2; यूहन्ना 11:45-53)
1दुइ दिना के बाद फसह अउर बिना खमीर के रोटी खाँइ बाला तेउहार होंइ बाला रहा हय। अउर प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, इआ मोका के तलास माहीं रहे हँय, कि यीसु काहीं कइसन धोखे से पकड़िके मारि डारी; 2पय ऊँ पंचे कहतव रहे हँय, कि “तेउहार के दिन अइसा करब ठीक नहिं आय, कहँव अइसा न होय कि लोगन माहीं दंगा होइ जाय।”
बैतनिय्याह गाँव माहीं यीसु के ऊपर अँतर डारब
(मत्ती 26:6-13; यूहन्ना 12:1-8)
3जब यीसु बैतनिय्याह गाँव माहीं समौन कोढ़ी के घर माहीं खाना खाँइ बइठ रहे हँय, तबहिनय एकठे मेहेरिआ संगमरमर के बरतन माहीं, जटामाँसी के खुब महग सुद्ध अँतर लइके आई; अउर बरतन के ढेक्कन खोलिके अँतर काहीं यीसु के मूँड़े माहीं उड़ेल दिहिस। 4पय जउन उहाँ खाँइ बइठ रहे हँय, उनमा से कोऊ-कोऊ अपने मन म गुस्साइके कहँइ लागें, “इआ अँतर काहीं काहे सत्यानास कइ दीनगा? 5काहेकि इआ अँतर काहीं तीन सव चाँदी के सिक्कन14:5 तीन सव दिनार, मतलब एकठे मनई के एक बरिस के मजूरी से जादा कीमत माहीं बेंचिके, कंगालन काहीं बाँटा जाइ सकत रहा हय।” अउर ऊँ पंचे उआ मेहेरिआ काहीं डाँटँइ लागें। 6तब यीसु कहिन, “ओही छोंड़ द्या, ओही काहे परेसान करते हया? उआ त हमरे साथ भलाइन किहिस ही। 7कंगाल त तोंहरे लघे हमेसा रइहँय, अउर जबहिन तूँ पंचे चइहा, तबहिन उनखे साथ भलाई कइ सकते हया; पय हम त तोंहरे साथ हमेसा न रहब। 8जऊँ कुछ उआ कइ सकत रही हय, उआ हमरे साथ किहिस; उआ हमरे मरे के बाद गाड़े जाँइ के तयारी म, पहिलेन से हमरे देंह माहीं अँतर लगाइस ही। 9हम तोंहसे सही कहित हएन, कि सगले संसार माहीं जहाँ कहँव इआ खुसी के खबर के प्रचार कीन जई, त ओखे इआ काम के चरचा घलाय ओखे यादगारी माहीं कीन जई।”
यहूदा इस्करियोती के बिसुआस घात
10तब यहूदा इस्करियोती जऊँ बारा चेलन म से रहा हय, उआ प्रधान याजकन के लघे जाइके कहिस, हम यीसु काहीं तोंहरे हाँथ माहीं पकड़बाय देब। 11ऊँ पंचे यहूदा इस्करियोती के इआ बात काहीं सुनिके खुसी होइगें, अउर यहूदा इस्करियोती काहीं इआ काम के बदले माहीं रुपिआ देंइ के करार कइ लिहिन; अउर यहूदा इस्करियोती मोका ढूँढ़ँइ लाग, कि यीसु काहीं कउनवमेर से उनखे हाँथ माहीं पकड़बाय देय।
फसह के तेउहार माहीं चेलन के साथ यीसु के आखिरी बिआरी
(मत्ती 26:17-25; लूका 22:7-14,21-23; यूहन्ना 13:21-30)
12बिना खमीर के रोटी खाँइ बाले तेउहार के पहिलय दिन, जउने माहीं यहूदी लोग फसह के बलिदान करत रहे हँय, चेला लोग यीसु से पूँछिन, “अपना कहाँ चाहित हएन, कि हम पंचे जाइके अपना के खातिर तेउहार के खाना तइआर करी?” 13यीसु अपने चेलन म से दुइ जनेन काहीं इआ कहिके पठइन, “सहर माहीं जा, एकठे मनई पानी से भरा गघरा लए तोहईं मिली, ओखे पीछे चले जया; 14अउर उआ जउने घर माहीं जाय, उआ घर के मालिक से कह्या ‘गुरू कहिन हीं कि हमरे खातिर उआ घर कहाँ हय, जउने माहीं हम अपने चेलन के साथ तेउहार के खाना खई?’ 15उआ तोहईं सजी-सजाई अउर तइआर कीन एकठे बड़ी काहीं अँटारी देखाय देई, उहँइ हमरे खातिर खाना तइआर किहा।” 16दोनव चेला उहाँ से निकरिके सहर म गें, अउर जइसा यीसु उनसे कहिन तय, उहयमेर पाइन; अउर फसह के खाना तइआर किहिन।
17जब साँझ भय, तब यीसु बरहँव चेलन के साथ उहाँ आएँ। 18जब सगले जने खाना खात रहे हँय, तब यीसु कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तोंहरेन बीच म से एक जने, जऊँ हमरे साथ माहीं खाना खात हय, हमहीं बिरोधी लोगन के हाँथ म पकड़बाई।” 19इआ सुनिके चेलन के ऊपर उदासी छाइगे, अउर सगले जने एक-एक कइके उनसे पूँछँइ लागें, “का उआ हम आहेन?” 20यीसु अपने चेलन से कहिन, “उआ बरहँव म से एक जने आय, जऊँ हमरे साथ एकय टठिया माहीं खात हय। 21मनई के लड़िका त जाबय करी, जइसन कि पबित्र सास्त्र माहीं ओखे बारे माहीं लिखा हय; पय जउन मनई धोखा दइके मनई के लड़िका काहीं पकड़ामँइ बाला हय, ओही परमातिमा से खुब सजा मिली: अउर अगर उआ मनई के जन्मय न होत, त ओखे खातिर इआ नीक होत।”
प्रभू-भोज
(मत्ती 26:26-30; लूका 22:14-20; 1 कुरिन्थियन 11:23-25)
22जब यीसु अउर उनखर चेला लोग खात रहे हँय, तब यीसु एकठे रोटी लिहिन, अउर परमातिमा से आसीस मागिके टोरिन, अउर उनहीं दिहिन, अउर कहिन, “ल्या, इआ हमार देंह आय।” 23पुनि यीसु अंगूर के रस से भरा खोरबा लइके परमातिमा काहीं धन्यबाद दिहिन, अउर उनहीं दिहिन; अउर ऊँ सगले जने ओमा से पीन। 24अउर यीसु उनसे कहिन, “इआ करार के हमार उआ खून आय, जऊँ खुब लोगन काहीं बचामँइ के खातिर बहाबा जई। 25अउर हम तोंहसे पंचन से सही कहित हएन, कि अंगूर के रस उआ दिना तक हम पुनि कबहूँ न पिअब, जब तक अपने पिता परमातिमा के राज माहीं, नबा अंगूर के रस न पी लेब।” 26अउर पुनि ऊँ पंचे भजन गाइके जैतून के पहार माहीं चलेगें।
पतरस के इनकार के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी
(मत्ती 26:31-35; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)
27तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “तूँ पंचे सगले जन हमहीं छोंड़िके भाग जइहा, काहेकि पबित्र सास्त्र म लिखा हय, ‘हम चरबाहा काहीं मारब, अउर गाड़र तितिर-बितिर होइ जइहँय।’ 28पय हम मरेन म से जिन्दा होए के बाद, तोंहसे मिलँइ से पहिले गलील प्रदेस माहीं जाब।” 29पतरस यीसु से कहिन, “अगर सगले जने बिसुआस से भटक जाँय त भटक जाँय, पय हम कबहूँ न भटकब।” 30यीसु पतरस से कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि आजय इहय रात माहीं मुरगा के दुइ बेर बोलँइ से पहिले, तूँ तीन बेरकी इनकार करिहा, कि हम यीसु काहीं नहीं जानी।” 31पय पतरस अउर जोर दइके, उहय बात काहीं दुसराय कहिन, “अगर हमहीं अपना के साथय मरऊँ क परय, तऊ हम अपना के इनकार न करब।” इहइमेर से अउर सगले चेला घलाय कहिन।
गतसमनी नाम के जघा माहीं यीसु के प्राथना
(मत्ती 26:36-46; लूका 22:39-46)
32पुनि यीसु अपने चेलन के साथ गतसमनी नाम के जघा माहीं गें, अउर ऊँ अपने चेलन से कहिन, “जब तक हम प्राथना करब, त इहँय बइठ रह्या।” 33अउर यीसु पतरस अउर याकूब अउर यूहन्ना काहीं अपने साथ लइगें; अउर यीसु खुब उदास अउर ब्याकुल होंइ लागें। 34अउर उनसे कहिन, “हमार मन खुब उदास हय, लागत हय कि हम मर जाब: तूँ पंचे इहँय रुका, अउर जागत रहा।” 35पुनि यीसु थोरी क अउर आँगे जाइके भुँइ माहीं मुँह झुकाइके प्राथना करँइ लागें, कि अगर होइ सकय, त इआ घरी हमरे ऊपर से टर जाय, 36अउर कहिन, “हे अब्बा, हे पिता, अपना से सब कुछ होइ सकत हय; इआ भारी कस्ट काहीं हमसे दूर कइ देई: तऊ जइसन हम चाहित हएन उआमेर नहीं, पय जइसन अपना चाहित हएन उहयमेर होय।” 37यीसु पुनि चेलन के लघे आएँ, अउर उनहीं सोबत पाइके पतरस से कहिन, “हे समौन, तूँ सोय रहे हया? काहे तूँ एक घरिव, नहीं जाग सकते आह्या? 38तूँ पंचे सतरक रहा, अउर प्राथना करत रहा, कि जउने परिच्छन माहीं न परा। आत्मा त वास्तव माहीं तइआर हय, पय देंह निबल ही।” 39अउर यीसु पुनि जाइके उहयमेर प्राथना किहिन। 40अउर यीसु आइके चेलन काहीं पुनि सोबत पाइन, काहेकि ऊँ पंचे गहरी नींद म रहे हँय; अउर नहीं जानत रहे आँय, कि यीसु काहीं का जबाब देई। 41पुनि यीसु तिसराय अपने चेलन के लघे आइके, उनसे कहिन, कि “तूँ पंचे अब सोबत रहा, अउर अराम करा, देखा, मनई के लड़िका के पकड़बाए जाँइ के समय लघे आइगा हय, अउर मनई के लड़िका, पापी मनइन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई। 42उठा, चली! देखा, हमार पकड़ामँइ बाला लघे आइगा हय।”
यीसु काहीं धोखा दइके पकड़ाउब
(मत्ती 26:47-56; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)
43यीसु जब इआ कहतय रहे हँय, कि तबहिनय यहूदा इस्करियोती जऊँ बरहँव चेलन म से रहा हय, अपने साथ प्रधान याजकन, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले लोगन, अउर यहूदी धारमिक अँगुअन के तरफ से एकठे बड़ी भीड़ लए तुरन्तय उहाँ पहुँचिगा, जऊँ तलबार अउर लाठी लए रहे हँय। 44अउर यीसु काहीं पकड़ामँइ बाला यहूदा इस्करियोती, उनहीं पंचन काहीं एकठे चिन्हारी बताइस तय, कि: जिनखर हम चूमा लेब, उँइन यीसु आहीं, अउर तूँ पंचे उनहीं पकड़िके सावधानी से लइ जया। 45अउर उआ हरबिन यीसु के लघे आइके कहिस, कि “हे रब्बी!” अउर उनहीं खुब चूमिस। 46तब ऊँ पंचे यीसु काहीं पकड़ लिहिन। 47तब यीसु के लघे जउन मनई ठाढ़ रहे हँय, उनमा से एक जने तलबार निकारिके महायाजक के दास के ऊपर चलाइके ओखर कान काट लिहिन, 48यीसु भीड़ के मनइन से कहिन, “का तूँ पंचे डाँकू जानिके, हमहीं पकड़ँइ के खातिर तलबार अउर लाठी लइके आया हय? 49हम त रोज मन्दिर माहीं तोंहरे साथय म रहिके, परमातिमा के सँदेस सुनाबत रहे हएन, तब तूँ पंचे हमहीं गिरफतार नहीं किहा, पय इआमेर एसे भ, कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बातँय पूर होंय।” 50यीसु काहीं पकड़तय चेला लोग उनहीं छोंड़िके भागिगें।
51एकठे नवजमान अपने नंगी देंह माहीं चद्दरा भर ओढ़े यीसु के पीछे चला ग; पय जब कुछ जने ओहू काहीं पकड़िन। 52त उआ चद्दरा छोंड़िके नंगय भागिगा।
महासभा के आँगे यीसु
(मत्ती 26:57-68; लूका 22:54-55,63-71; यूहन्ना 18:13-14,19-24)
53ओखे बाद ऊँ पंचे यीसु काहीं महायाजक के लघे लइगें; अउर उहाँ सगले प्रधान याजक, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले उनखे घर म एकट्ठा भें। 54अउर पतरस दूरिन-दूरी यीसु के पीछे-पीछे महायाजक के अँगने के भीतर तक गें, अउर सिपाहिन के साथ बइठिके आगी तापँय लागें। 55प्रधान याजक लोग अउर सगली सभा के मनई यीसु काहीं मारि डारँइ के खातिर, उनखे खिलाफ गबाही ढूँढ़ँइ माहीं लगे रहे हँय। पय नहीं पाइन। 56काहेकि खुब जने यीसु के खिलाफ गबाही देत रहे हँय, पय उनखर गबाही एकयमेर के नहीं रही। 57तब कइयक जने ठाढ़ होइके, यीसु के खिलाफ इआ लबरी गबाही दिहिन, 58कि “हम पंचे यीसु काहीं इआ कहत सुनेन हय, कि ‘हम मनइन के हाँथ के बनाए इआ मन्दिर काहीं गिराय देब, अउर तीन दिन माहीं दूसर बनाउब, जउन मनइन के हाँथ के बनाबा न होई।” 59इहव बात माहीं उनखर गबाही एकयमेर के नहीं निकरी।
60तब महायाजक बीच म ठाढ़ होइके यीसु से कहिन, “तूँ कउनव जबाब काहे नहीं देते आह्या? ईं पंचे तोंहरे खिलाफ माहीं, का गबाही देत हें?” 61पय यीसु चुप्पय रहें, अउर कुछू जबाब नहीं दिहिन। तब महायाजक उनसे पुनि पूँछिन, “का तूँ परमप्रधान परमातिमा के लड़िका मसीह आह्या?” 62यीसु कहिन, “हम आहेन: अउर तूँ पंचे मनई के लड़िका काहीं सर्बसक्तिमान परमातिमा के दहिने कइती बइठे, अउर अकास के बदरिन के साथ आबत देखिहा।” 63तब महायाजक आपन ओन्हा फारिन अउर कहिन, “अब हमहीं गबाही के कउनव जरूरत नहिं आय? 64तूँ पंचे परमातिमा के इआ बुराई सुने हया, तोंहार पंचन के का राय ही?” ऊँ सगले जने कहिन, यीसु मारि डारँइ के काबिल हें। 65तब कुछ जने यीसु के ऊपर थूँकइ लागें, अउर कुछ जने उनखर आँखी मूदिके उनहीं घूँसा मारिके कहँइ लागें, “भबिस्सबानी करा, तोंहईं को मारिस ही!” अउर सिपाही लोग यीसु काहीं पकड़िके थापड़ मारिन।
पतरस के इनकार करब
(मत्ती 26:69-75; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18,25-27)
66जब पतरस नीचे अँगना माहीं बइठ रहे हँय, तब महायाजक के दासिन म से एकठे उहाँ आई। 67अउर पतरस काहीं आगी तापत देखिके, एकटक निहारत रहिगे, अउर कहँइ लाग, “तुहूँ नासरत गाँव के रहँइ बाले यीसु के साथय म रहे हया।” 68पय पतरस इनकार कइके कहिन, “हम न जनतय आहेन अउर न समझतय आहेन, कि तूँ का कहते हया।” ओखे बाद पतरस बहिरे डेहरी म गें; अउर मुरगा बोल उठा। 69उआ दासी पतरस काहीं देखिके उनसे जऊँ उनखे लघे ठाढ़ रहे हँय पुनि कहँइ लाग, “ईं यीसु के लघे रहँइ बालेन म से एक जने आहीं।” 70पय पतरस पुनि इनकार कइ दिहिन, कुछ देर बाद ऊँ पंचे जउन पतरस के लघे ठाढ़ रहे हँय, पुनि पतरस से कहिन, “निस्चित तूँ यीसु के साथी लोगन म से एक जन आह्या; काहेकि तूँ गलील प्रदेस के रहँइ बाले आह्या।” 71तब पतरस खुद काहीं धिक्कारँय लागें, अउर कसम खाँइ लागें, हम सही कहित हएन, अगर झूँठ बोली त परमातिमा हमहीं दन्ड देंय, “हम उआ मनई काहीं जेखे बारे म तूँ पंचे कहते हया, नहिं जानी।” 72अउर हरबिन मुरगा दुसराय बोलिस, तब पतरस काहीं उआ बात, जऊँ यीसु कहिन तय याद आइगे: “मुरगा के दुइ बेर बोलँइ से पहिले तूँ तीन बेरकी हमहीं इनकार करिहा।” अउर पतरस उआ बात काहीं सुधि कइके रोमँइ लागें।
15राजपाल पिलातुस के आँगे यीसु
(मत्ती 27:1-2,11-14; लूका 23:1-5; यूहन्ना 18:28-38)
1भिनसार होतय तुरन्तय प्रधान याजक लोग, यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर महासभा के सगले मनई सलाह कइके यीसु काहीं बँधबाइन, अउर उनहीं लइ जाइके राजपाल पिलातुस के हाँथ म सउँप दिहिन। 2राजपाल पिलातुस यीसु से पूँछिन, “का तूँ यहूदी लोगन के राजा आह्या?” तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “तूँ खुदय कहते हया!” 3अउर प्रधान याजक लोग यीसु के ऊपर खुब बातन के दोस लगाबत रहे हँय। 4राजपाल पिलातुस यीसु से पुनि पूँछिन, “तूँ काहे कुछू जबाब नहीं देते आह्या, देखा, ईं पंचे तोंहरे ऊपर केतनी बातन के दोस लगाबत हें?” 5यीसु पुनि कुछू जबाब नहीं दिहिन; एसे राजपाल पिलातुस खुब अचरज मानिन।
यीसु काहीं मारि डारँइ के हुकुम
(मत्ती 27:15-26; लूका 23:13-25; यूहन्ना 18:39—19:16)
6राजपाल पिलातुस उआ तेउहार माहीं एकठे कइदी काहीं, जेही उनखे राज के लोग चाहत रहे हँय, उनखे खातिर छोंड़ि देत रहे हँय। 7बरअब्बा नाम के एकठे मनई भीड़ म दंगा फसाद करँइ बाले ऊँ मनइन के साथ जेल माहीं बंद रहा हय, जे कोऊ उआ दंगा माहीं कतल किहिन तय। 8अउर भीड़ के कुछ जने ऊपर जाइके राजपाल पिलातुस से बिनती कइके कहिन, कि जइसन हरेक तेउहार माहीं, अपना हमरे पंचन के खातिर करत रहे हएन, उहयमेर करी। 9राजपाल पिलातुस उनहीं जबाब दिहिन, “का तूँ पंचे चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर यहूदी लोगन के राजा काहीं छोंड़ि देई?” 10काहेकि राजपाल इआ जानत रहे हँय, कि प्रधान याजक लोग यीसु काहीं जलन के कारन पकड़ाइन हीं। 11पय प्रधान याजक लोग भीड़ के मनइन के कान भरिन, कि कहा राजपाल पिलातुस बरअब्बा काहीं हमरे पंचन के खातिर छोंड़ि देंय। 12इआ सुनिके राजपाल पिलातुस भीड़ के मनइन से पुनि पूँछिन, “त तूँ पंचे जेही यहूदी लोगन के राजा कहते हया, ओही हम का करी?” 13ऊँ पंचे पुनि चिल्लाने, “ओही क्रूस माहीं चढ़ाय द्या!” 14राजपाल पिलातुस उनसे पुनि कहिन, “काहे, ऊँ कउन अपराध किहिन हीं?” पय ऊँ पंचे अउर चिल्लाँइ लागें, “ओही क्रूस म चढ़ाबा!” 15तब राजपाल पिलातुस भीड़ के मनइन काहीं खुस करँइ के खातिर, बरअब्बा काहीं उनखे खातिर छोंड़ दिहिन, अउर यीसु काहीं चाबुक से मरबाइके, उनहीं पंचन काहीं सउँप दिहिन, कि उनहीं क्रूस माहीं चढ़ाबा जाय।
सिपाहिन के व्दारा यीसु के निरादर
(मत्ती 27:27-31; यूहन्ना 19:2-3)
16सिपाही यीसु काहीं किला के भीतर अँगना म लइगें, जऊँ प्रीटोरियुम कहाबत रहा हय, अउर सगली पलटन काहीं बोलाय लाएँ। 17तब सिपाही लोग यीसु काहीं बैगनी रंग के ओन्हा पहिराइन, अउर काँटन काहीं गुँथिके मुकुट बनाइके यीसु के मूँड़े माहीं धरिन, 18अउर इआ कहिके यीसु काहीं नबस्कार करँइ लागें, “हे यहूदी लोगन के राजा नबस्कार!” 19सिपाही लोग यीसु के मूँड़े माहीं सरकन्डा के लाठी मारत रहे हँय, अउर यीसु के ऊपर थूँकत रहे हँय, अउर गोड़न गिरिके यीसु काहीं नबस्कार करत रहिगें। 20अउर जब ऊँ पंचे यीसु के मजाक उड़ाय चुकें, तब उनखर बैगनी रंग के ओन्हा उतरबाइके उनहिन के ओन्हा पहिराय दिहिन; अउर उनहीं क्रूस माहीं चढ़ामँइ के खातिर बहिरे लइगें।
यीसु काहीं क्रूस म चढ़ाउब
(मत्ती 27:32-44; लूका 23:26-43; यूहन्ना 19:17-27)
21सिकन्दर अउर रूफुस के बाप समौन, जउन कुरेन सहर के रहँइ बाला आय, उआ गाँव कइती से चला आबत रहा हय, त ओहिनठे से निकरा; त ऊँ पंचे ओही बेगार माहीं पकड़िन, कि उआ यीसु के क्रूस उठाइके लइ चलय। 22अउर ऊँ पंचे यीसु काहीं गुलगुता नाम के जघा माहीं लइ आएँ, जेखर मतलब हय “खोपड़ी के जघा”। 23उहाँ यीसु काहीं पीरा कम करँइ बाली मुर्र दबाई अंगूर के रस माहीं मिलाइके देंइ लागें, पय यीसु नहीं लिहिन। 24तब ऊँ पंचे यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाइन, अउर उनखे ओन्हन के खातिर परची डारिके, कि केही का मिली, आपस माहीं बाँटि लिहिन। 25अउर सकारे नव बजे के करीब ऊँ पंचे यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाइन। 26अउर उनखर अरोप-पत्र लिखिके उनखे ऊपर लगाय दीनगा, कि “यहूदी लोगन के राजा।” 27अउर ऊँ पंचे यीसु के साथ दुइठे डँकुअन काहीं एकठे क यीसु के दहिने कइती, अउर दुसरे काहीं बाएँ कइती, क्रूस माहीं चढ़ाइन। 2815:28 यसा 53:12(तब पबित्र सास्त्र के उआ बचन कि यीसु अपराधिन के साथ गिने गें, पूर भा।) 29अउर उआ गइल से जाँइ बाले मूड़ हलाय-हलाइके, अउर इआ कहिके यीसु के बुराई करत रहे हँय, कि “बाह! मन्दिर काहीं गिरामँइ बाले, अउर तीन दिना माहीं बनामँइ बाले, 30क्रूस से उतरिके खुद काहीं बचाय ले।” 31इहइमेर से प्रधान याजक लोग घलाय, मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन समेत, आपस माहीं मजाक उड़ाइके कहत रहे हँय, “इआ त दुसरेन काहीं बचाइस, पय खुद काहीं नहीं बचाय सकय, 32इजराइल देस के राजा, मसीह, अब क्रूस से उतरि आबय, कि हम पंचे देखिके बिसुआस करी।” अउर जउन उनखे साथ क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय, ऊँ पंचे घलाय उनखर बुराई करत रहे हँय।
यीसु के प्रान छोंड़ब
(मत्ती 27:45-56; लूका 23:44-49; यूहन्ना 19:28-30)
33अउर दुपहर बारा बजे से लइके, तीन बजे तक सगले देस माहीं अँधिआर छाबा रहिगा। 34दिन के तीन बजे के करीब यीसु खुब चंडे चिल्लाइके कहिन, “इलोई, इलोई, लमा सबक्तनी?” जेखर मतलब हय “हे हमार परमातिमा, हे हमार परमातिमा अपना हमहीं काहे छोंड़ि दिहेन?” 35जउन मनई उनखे लघे ठाढ़ रहे हँय, उनमा से कुछ जने इआ सुनिके कहिन, “देखा, ईं एलिय्याह नबी काहीं गोहराबत हें।” 36अउर एक जने दउड़िके सोक्खा क लइके सिरका माहीं बोरिस, अउर सरकन्डा के लाठी माहीं धइके यीसु काहीं चुहकाइस, अउर कहिस, “रुकि जा, हम पंचे देखी, एलिय्याह नबी एही क्रूस से उतारँय के खातिर आबत हें, कि नहीं।” 37तब यीसु खुब चन्डे चिल्लाइके प्रान छोंड़ दिहिन। 38अउर मन्दिर के परदा ऊपर से नीचे तक, फाटिके दुइ टुकड़ा होइगा। 39जऊँ सुबेदार यीसु के आँगे ठाढ़ रहा हय, जब उआ यीसु काहीं इआमेर चिल्लाइके प्रान छोंड़त देखिस, त उआ कहिस, “वास्तव माहीं ईं मनई, परमातिमा के लड़िका आहीं!” 40कइयकठे मेहेरिआ घलाय दूरिन से देखत रही हँय: उनमा मगदल गाँव के मरियम, छोटे याकूब अउर योसेस के महतारी मरियम, अउर सलोमी रही हँय। 41जब यीसु गलील प्रदेस म रहे हँय, तबहिनव ईं मेहेरिआ यीसु के पीछे चलत रही हँय, अउर यीसु के सेबा-टहल करत रही हँय; अउर दुसरव खुब मेहेरिआ रही हँय, जउन यीसु के साथ यरूसलेम सहर माहीं आईं तय।
यीसु काहीं गाड़ा जाब
(मत्ती 27:57-61; लूका 23:50-56; यूहन्ना 19:38-42)
42जब साँझ भय, तब एसे कि तइआरी करँइ के दिन रहा हय, जउन पबित्र दिन के एक दिना पहिले होत रहा हय, 43अरमतिया गाँव के रहँइ बाले यूसुफ आएँ, जउन महासभा के सम्मानित सदस्सव रहे हँय, अउर खुदव परमातिमा के राज आमँइ के इन्तजार करत रहे हँय। ऊँ ढाढ़स कइके राजपाल पिलातुस के लघे जाइके यीसु के लहास माँगिन। 44राजपाल पिलातुस अचरज मानिन, कि यीसु एतनी जल्दी मरिगें; अउर अपने सुबेदार काहीं बोलाइके पूँछिन, “का यीसु काहीं मरे कुछ देर होइगे?” 45जब राजपाल पिलातुस अपने सुबेदार से सगला हाल जान लिहिन, तब यीसु के लहास यूसुफ काहीं देबाय दिहिन। 46तब यूसुफ मखमल के एकठे चद्दरा मोल खरीदिन, अउर यीसु के लहास क क्रूस से उतारिके उआ चद्दरा माहीं लपेटिन, अउर एकठे कब्र म, जऊँ पथरा के चट्टान माहीं खोदी गे रही हय, ओहिन म धरिन, अउर कब्र के दुअरा माहीं एकठे खुब बड़ा पथरा ढनगाइके बंद कइ दिहिन। 47अउर मगदल गाँव के मरियम, अउर योसेस के महतारी मरियम देखत रही हँय, कि यीसु काहीं कहाँ धरा ग हय।
16मरेन म से यीसु जिन्दा होइगें
(मत्ती 28:1-8; लूका 24:1-12; यूहन्ना 20:1-10)
1जब पबित्र दिन बीतिगा, तब मगदल गाँव के मरियम, अउर याकूब के महतारी मरियम, अउर सलोमी महकँइ बाली चीजन काहीं खरीदिन, कि जाइके यीसु के देंह माहीं मलँय। 2हप्ता के पहिलय दिन बड़े सकारे, जब सुरिज निकरबय भ रहा हय, ऊँ पंचे कब्र के लघे आईं। 3अउर आपस माहीं बतात रही हँय, कि “हमरे खातिर कब्र के दुअरा से उआ पथरा को ढनगाई?” 4जब ऊँ पंचे ध्यान से कबर कइती देखिन, त पथरा ढनगा रहा हय! जबकि उआ पथरा खुब बड़ा रहा हय। 5अउर कब्र के भीतर जाइके ऊँ पंचे एकठे नवजमान काहीं उजर ओन्हा पहिरे, दहिने कइती बइठे देखिन, त चउआय गईं। 6उआ नवजमान उनसे कहिस, “चउ आ न, तूँ पंचे नासरत गाँव के रहँइ बाले यीसु काहीं ढुँढ़ते हया, जउन क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय, ऊँ जिन्दा होइगे हें, इहाँ नहीं आहीं; देखा, इहय उआ जघा आय, जहाँ ऊँ पंचे यीसु काहीं धरिन तय। 7पय तूँ पंचे जा, अउर उनखे चेलन से अउर पतरस से बताबा, कि यीसु तोंहसे पहिले गलील प्रदेस माहीं जइहँय, जइसा ऊँ तोंहसे कहिन तय, तूँ पंचे उहँय उनहीं देखिहा।” 8अउर ऊँ सगली जने कब्र से निकरिके भाग गईं; काहेकि कँप कँपी अउर घबराहट उनखे ऊपर छाइगे रही हय; अउर ऊँ पंचे कोहू से कुछू नहीं कहिन, काहेकि डेरात रही हँय।
मगदल गाँव के मरियम काहीं यीसु देखाई दिहिन
(मत्ती 28:9-10; यूहन्ना 20:11-18)
9हप्ता के पहिल दिन भिनसार होतय, यीसु जिन्दा होइके, सबसे पहिले मगदल गाँव के मरियम काहीं, जउने से सातठे बुरी आत्मन काहीं निकारिन तय, देखाई दिहिन। 10ऊँ जाइके यीसु के साथ म रहँइ बालेन काहीं जऊँ खुब दुखी रहे हँय, अउर रोबत रहे हँय, यीसु के जिन्दा होंय के खबर दिहिन। 11पय ऊँ सगले जन इआ सुनिके कि यीसु जिन्दा हें, अउर मगदल गाँव के मरियम उनहीं देखिन हीं, बिसुआस नहीं किहिन।
दुइठे चेलन काहीं यीसु देखाई दिहिन
12ओखे बाद यीसु दुसरे रूप माहीं, चेलन म से दुइ जनेन काहीं, जब ऊँ पंचे गाँव कइती जात रहे हँय, देखाई दिहिन। 13उनहूँ पंचे जाइके दुसरे चेलन काहीं इआ खबर दिहिन, पय ऊँ पंचे उनहूँ के बिसुआस नहीं मानिन।
ग्यरहँव चेलन काहीं यीसु देखाई दिहिन
(मत्ती 28:16-20; लूका 24:36-49; यूहन्ना 20:19-23; खास चेलन 1:6-8)
14बाद म यीसु ऊँ ग्यरहँव चेलन काहीं घलाय, जब ऊँ पंचे खाँइ बइठ रहे हँय, तबहिनय देखाई दिहिन, अउर उनखे बिसुआस न करँइ, अउर दिल कठोर करँइ के कारन उलाहना दिहिन, काहेकि जेतने जने यीसु काहीं जिन्दा होए के बाद देखिन रहा हय, ईं पंचे, उनहूँ केर बिसुआस नहीं किहिन तय। 15अउर यीसु अपने चेलन से कहिन, “तूँ पंचे सगले संसार माहीं जाइके, सगले संसार के मनइन काहीं खुसी के खबर सुनाबा। 16जे कोऊ बिसुआस करी, अउर बपतिस्मा लेई ओहिन काहीं मुक्ती मिली, पय जे कोऊ बिसुआस न करी, उआ दोसी ठहराबा जई। 17बिसुआस करँइ बालेन म इआ अदभुत चिन्हारी होई, कि ऊँ पंचे हमरे नाम से बुरी आत्मन काहीं निकरिहँय, अउर नई-नई भाँसा बोलि हँय, 18साँपन काहीं उठाय लेइहँय, अउर अगर ऊँ पंचे जहर बाली चीजन काहीं खाय लेइहँय, तऊ उनहीं कुछू नुकसान न होई; ऊँ पंचे बिमारन के ऊपर हाँथ धइ देइहँय, त ऊँ नीक होइ जइहँय।”
यीसु के स्वरग जाब
(लूका 24:50-53; खास चेलन 1:9-11)
19प्रभू यीसु चेलन से बात करे के बाद स्वरग माहीं ऊपर उठाय लीन गें, अउर जाइके परमातिमा के दहिने कइती बइठिगें। 20अउर चेला लोग उहाँ से निकरिके हरेक जघन माहीं प्रचार किहिन, अउर प्रभू उनखे साथ माहीं काम करत रहिगें, अउर ऊँ चमत्कारन के कारन, जऊँ चेलन के साथ-साथ होत रहे हँय, बचन काहीं मजबूत करत रहिगें। आमीन।