मत्ती केर लिखी खुसी के खबर

इआ किताब के परिचय

मत्ती के लिखी खुसी के खबर माहीं इआ बताबा ग हय, कि केबल यीसु मसीहय, उआ मुक्ती देंइ बाले आहीं, जिनखे पइदा होंइ के बारे माहीं भबिस्यबानी कीन गे रही हय। अउर पबित्र सास्त्र माहीं जउन वादा परमातिमा, हजारन बरिस पहिले अपने चुने मनइन से किहिन रहा हय। ओही उँइन मुक्ती देंइ बाले अरथात यीसु मसीह के व्दारा पूर किहिन हीं। अउर इआ खुसी के खबर केबल यहूदी लोगन भर के खातिर न होय, जिनखे बीच माहीं यीसु मसीह पइदा भें तय, अउर पाले पोसे गें तय, बलकिन इआ खुसी के खबर संसार के सगले मनइन के खातिर आय।

मत्ती के लिखी खुसी के खबर बड़ी सावधानी पूर्बक लिखी गे ही। एखर सुरुआत यीसु मसीह के जनम के बारे माहीं जानकारी से होत ही, अउर ओखे बाद यीसु के बपतिस्मा, अउर परिच्छा के बारे माहीं बताबा ग हय, अउर ओखे बाद गलील प्रदेस माहीं प्रचार करब, सिच्छा देब, अउर बिमारन काहीं नीक करँइ के बारे माहीं बताबा ग हय। एखे बाद इआ खुसी के खबर माहीं, यीसु के गलील प्रदेस से लइके यरूसलेम सहर तक के यात्रा के बारे माहीं, अउर यीसु मसीह के जीबन के आखिरी दिनन के घटनन के बारे माहीं बताबा ग हय, इआ खुसी के खबर के अन्त माहीं, यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाए जाँइ, अउर मरेन म से दुसराय जिन्दा होंइ के बारे माहीं बताबा ग हय।

अपना पंचन से इआ बिनती हय, कि इआ खुसी के खबर काहीं बड़े ध्यान से पढ़ी, अउर एहिन के मुताबिक जीबन बिताई, त अपना पंचन काहीं परमातिमा से खुब आसीस मिली।

रूप-रेखा :

बंसाबली अउर यीसु मसीह के जनम 1:1—2:23

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के सेबा के काम 3:1-12

यीसु के बपतिस्मा अउर परिच्छा 3:13—4:11

गलील प्रदेस माहीं यीसु के सेबा के काम 4:12—18:25

गलील प्रदेस से यरूसलेम सहर तक यीसु के यात्रा 19:1—20:34

यरूसलेम सहर माहीं अन्तिम हप्ता 21:1—27:66

प्रभू यीसु के मरेन म से जिन्दा होब अउर चेलन काहीं देखाई देब 28:1-20

1

यीसु मसीह के बंसाबली

(लूका 3:23-38)

1अब्राहम अउर राजा दाऊद के सन्तान यीसु मसीह के बंसाबली इआमेर से हय, 2अब्राहम से इसहाक पइदा भें, अउर इसहाक से याकूब पइदा भें, अउर याकूब से यहूदा अउर उनखर भाई लोग पइदा भें। 3अउर यहूदा अउर तामार से फिरिस, अउर जोरह पइदा भें, अउर फिरिस से हिस्रोन पइदा भें, अउर हिस्रोन से एराम पइदा भें। 4अउर एराम से अम्मीनादाब पइदा भें, अउर अम्मीनादाब से नहसोन पइदा भें, अउर नहसोन से सलमोन पइदा भें। 5अउर सलमोन अउर राहाब से बोअज पइदा भें, अउर बोअज अउर रूत से ओबेद पइदा भें; अउर ओबेद से यिसय पइदा भें। 6अउर यिसय से राजा दाऊद पइदा भें, अउर राजा दाऊद उरिय्याह के मेहेरिआ काहीं राख लिहिन तय, ओहिन से सुलैमान पइदा भें। 7अउर सुलैमान से रहबाम पइदा भें; अउर रहबाम से अबिय्याह पइदा भें; अउर अबिय्याह से आसा पइदा भें। 8अउर आसा से यहोसाफात पइदा भें अउर यहोसाफात से योराम पइदा भें, अउर योराम से उज्जियाह पइदा भें। 9अउर उज्जियाह से योताम पइदा भें, अउर योताम से आहाज पइदा भें, अउर आहाज से हिजिकिय्याह पइदा भें। 10अउर हिजिकिय्याह से मनस्सिह पइदा भें, अउर मनस्सिह से आमोन पइदा भें, अउर आमोन से योसिय्याह पइदा भें। 11अउर इजराइल के मनइन काहीं बंदी बनाइके बेबीलोन देस माहीं लइ जाँइ के समय योसिय्याह से यकुन्याह अउर उनखर भाई पइदा भें।

12बन्दी बनाइके बेबीलोन माहीं पहुँचे के बाद यकुन्याह से सालतिएल पइदा भें; अउर सालतिएल से जरुब्बाबिल पइदा भें। 13अउर जरुब्बाबिल से अबीहूद पइदा भें, अउर अबीहूद से इलयाकीम पइदा भें; अउर इलयाकीम से अजोर पइदा भें। 14अउर अजोर से सदोक पइदा भें; अउर सदोक से अखीम पइदा भें; अउर अखीम से इलीहूद पइदा भें। 15अउर इलीहूद से इलियाजार पइदा भें; अउर इलियाजार से मत्तान पइदा भें; अउर मत्तान से याकूब पइदा भें। 16अउर याकूब से यूसुफ पइदा भें; जउन मरियम के मंसेरुआ आहीं, अउर मरियम से यीसु पइदा भें, जउन मसीह कहाबत हें। 17इआमेर से अब्राहम से राजा दाऊद तक चउदा पीढ़ी भय, अउर राजा दाऊद से बेबीलोन माहीं बंदी बनाइके पहुँचाए जाँय तक चउदा पीढ़ी भय, अउर बंदी होइके बेबीलोन माहीं पहुँचाए जाँय के समय से मसीह तक चउदा पीढ़ी भय।

यीसु मसीह के जनम

(लूका 1:26-38; 2:1-7)

18यीसु मसीह के जनम इआमेर से भ, कि उनखे महतारी मरियम के सगाई यूसुफ के साथ होइगे रही हय, पय उनखे साथ काज होंइ से पहिलेन ऊँ पबित्र आत्मा के सक्ती से लड़कहाई होइ गईं तय। 19अउर उनखर मंसेरुआ यूसुफ जउन 1:19 यहूदी नेम काहीं निकहा से मानँइ बाले मनई रहे हँयखुब नीक मनई रहे हँय, ऊँ मरियम काहीं बदनाम नहीं करँइ चाहत रहे आहीं, एसे ऊँ मन माहीं इआ बिचार करत रहे हँय, कि हम उनहीं चुप्पय से छोंड़ि देब। 20अउर जब ऊँ एखे बारे माहीं सोचतय रहे हँय, तबहिन प्रभू के दूत उनहीं सपन माहीं देखाई दिहिन, अउर उनसे कहँइ लागें, “हे यूसुफ राजा दाऊद के सन्तान, तूँ अपने मेहेरिआ मरियम काहीं अपने इहाँ लइ जाँइ से डेरा न; काहेकि जउन उनखे पेटे माहीं बच्चा हय, उआ पबित्र आत्मा के सक्ती से भ हय। 21अउर उनखे लड़िका पइदा होई, अउर तूँ उनखर नाम यीसु धराया; काहेकि ऊँ अपने लोगन काहीं उनखे पापन से मुक्ती देइहँय।”

22इआ सब एसे भ, कि जउन बचन प्रभू अपने सँदेस बतामँइ बाले के व्दारा कहिन रहा हय; उआ पूर होय। 23कि “देखा एकठे कुमारी लड़कहाई होई, अउर ओखे लड़िका पइदा होई अउर ओखर नाम ‘इम्मानुएल’ धराबा जई, जेखर मतलब हय ‘परमातिमा1:23 यसा 7:14 हमरे पंचन के साथ हें’।” 24जब यूसुफ के नींद खुली तब प्रभू के दूत के हुकुम के मुताबिक ऊँ मरियम से काज कइके उनहीं अपने घर लइ आएँ। 25अउर जब तक उनखे लड़िका पइदा नहीं होइगा, तब तक यूसुफ उनखे साथ नहीं सोइन, अउर जब उनखे लड़िका पइदा भ, तब उनखर नाम यीसु धराइन।

2

तरइअन के बारे माहीं जानँइ बालेन के यीसु काहीं देखँइ आउब

1जब यीसु के जनम यहूदिया प्रदेस के बैतलहम गाँव माहीं भ, उआ समय राजा हेरोदेस राज करत रहे हँय, त देखा, यीसु के जनम के कुछ समय के बाद पूरुब दिसा से तरइअन के बारे माहीं जानँइ बाले कइअक जने यरूसलेम सहर माहीं आइके पूँछँइ लागें, कि 2“यहूदी लोगन के राजा जिनखर अबहिनय जनम भ हय, ऊँ कहाँ हें?” काहेकि उनखे जनम के बारे माहीं बतामँइ बाली तरइया काहीं हम पंचे पूरुब दिसा माहीं देखेन हय, एहिन से उनहीं प्रनाम करँइ आए हएन। 3इआ सुनिके राजा हेरोदेस अउर उनखे साथ सगले यरूसलेम सहर के मनई घबराइगें। 4तब राजा हेरोदेस यहूदी समाज के प्रधान याजकन अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन काहीं एकट्ठा कइके उनसे पूँछिन, कि “मसीह के जनम कहाँ होंइ चाही?” 5तब ऊँ पंचे उनसे कहिन, कि “यहूदिया प्रदेस के बैतलहम गाँव माहीं।” काहेकि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले इआमेर से लिखिन हीं। 6कि, “हे बैतलहम गाँव, जउन तूँ यहूदा प्रदेस माहीं हया, तूँ कउनव मेर से यहूदिया प्रदेस के अधिकारिन माहीं सगलेन से छोट नहिं आह्या; काहेकि तोंहरे म से एकठे सासन करँइ बाला पइदा होई, जउन हमरे प्रजा इजराइल के रखबारी करी।” 7तब राजा हेरोदेस चुप्पय से तरइअन के बारे माहीं जानँइ बालेन काहीं बोलाइके उनसे पूँछिन, कि “बताबा तरइया ठीक केतने समय देखाई दिहिस रहा हय।” 8अउर ऊँ उनहीं पंचन काहीं इआ कहिके बैतलहम गाँव पठइन, कि “जाइके उआ लड़िका के बारे माहीं निकहा से पता लगाबा”, अउर जब उआ तोंहईं मिल जाय, त हमहीं खबर दिहा, जउने हमहूँ आइके उनहीं प्रनाम करी।

9तब तरइअन के बारे माहीं जानँइ बाले राजा के बात काहीं सुनिके उहाँ से चलेंगे, अउर देखा, जउने तरइया काहीं ऊँ पंचे पूरुब दिसा माहीं देखिन रहा हय, उआ उनखे आँगे-आँगे चलँइ लाग, अउर जहाँ उआ लड़िका रहा हय, उआ जघा के ऊपर पहुँचिके रुकिगे। 10उआ तरइया काहीं देखिके ऊँ पंचे खुब खुसी भें। 11अउर ऊँ पंचे उआ घर के भीतर गें, अउर उआ लड़िका काहीं अपने महतारी मरियम के साथ देखिन, अउर गोड़न गिरिके उनहीं प्रनाम किहिन; अउर कीमती चीजन से भरे आपन-आपन थइला खोलिके उनहीं सोन, अउर लोभान, अउर गन्धरस के भेंट चढ़ाइन। 12अउर तरइअन के बारे माहीं जानँइ बाले सपन माहीं परमातिमा से चेतउनी पाइन, कि “राजा हेरोदेस के लघे पुनि न जया”, एसे ऊँ पंचे दुसरे गइल से होइके अपने देस काहीं चलेगें।

यीसु अउर उनखे महतारी-बाप के मिस्र देस काहीं जाब

13अउर जब तरइअन के बारे माहीं जानँइ बाले चलेगें, तब प्रभू के एकठे दूत यूसुफ काहीं सपन माहीं देखाई दइके कहिन, कि “उठा, इआ लड़िका अउर एखे महतारी काहीं घलाय लइके मिस्र देस माहीं भागि जा; अउर जब तक हम तोंहसे न कही, तब तक तूँ उहँइ रह्या; काहेकि राजा हेरोदेस इआ लड़िका काहीं ढुँढ़बामँइ बाला हय, जउने एही मरबाय डारय।” 14एसे यूसुफ रातयके उठिके लड़िका अउर ओखे महतारी काहीं लइके मिस्र देस काहीं चल दिहिन। 15अउर जब तक राजा हेरोदेस मर नहीं ग, तब तक यूसुफ उहँइ रहें; एसे कि उआ बचन पूर होय, जउन प्रभू अपने सँदेस बतामँइ बाले के व्दारा कहिन रहा हय, कि “हम अपने लड़िका काहीं मिस्र देस से बोलायन।”

राजा हेरोदेस व्दारा बच्चन के कतल करबाउब

16जब राजा हेरोदेस काहीं इआ पता चला, कि तरइअन के बारे माहीं जानँइ बाले हमहीं धोखा दिहिन हीं, तब उआ खुब गुस्साइगा। अउर अपने सिपाहिन काहीं पठइके, तरइअन के बारे माहीं जानँइ बालेन के बताए सही समय के मुताबिक, बैतलहम गाँव अउर ओखे लघे-लघे के गाँमन के सगले लड़िकन काहीं, जउन दुइ बरिस के अउर ओसे कम उमिर के रहे हँय, उनहीं मरबाय डारिस। 17तब जउन बचन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यिर्मयाह के व्दारा कहा ग रहा हय, उआ पूर भ, 18कि

“रामाह गाँव माहीं बड़ा दुख के बोल सुनाई दिहिस, रोउब अउर बड़ा बिलाप करब, राहेल अपने लड़िकन के खातिर रोबत रहीं हँय, अउर चुप नहीं होंइ चाहत रही, काहेकि ऊँ पंचे मरिगे रहे हँय।”

यूसुफ के परिबार के मिस्र देस से लउटब

19राजा हेरोदेस के मरे के बाद, प्रभू के दूत मिस्र देस माहीं यूसुफ काहीं सपन माहीं देखाई दइके कहिन। 20कि “उठा, लड़िका अउर ओखे महतारी काहीं लइके इजराइल देस माहीं चले जा; काहेकि जउन इआ लड़िका के प्रान लेंइ चाहत रहे हँय, ऊँ पंचे मरिगे हँय।” 21तब यूसुफ उठिके, लड़िका अउर ओखे महतारी काहीं साथ माहीं लइके इजराइल देस माहीं आएँ। 22पय इआ सुनिके, कि अरखिलाउस अपने बाप हेरोदेस के जघा माहीं यहूदिया प्रदेस माहीं राज कइ रहा हय, यूसुफ उहाँ जाँइ से डेराइगें; अउर सपन माहीं चेतउनी पाइके गलील प्रदेस माहीं चलेगें। 23अउर नासरत नाम के गाँव माहीं जाइके बसिगें; जउने उआ बचन पूर होय, जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के व्दारा कहा ग रहा हय, कि, “उआ नासरी कहाई।”

3

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले

(मरकुस 1:1-8; लूका 3:1-18; यूहन्ना 1:6-8,15-34)

1जब यीसु नासरत गाँव माहीं रहत रहे हँय, तबहिनय यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले आइके, यहूदिया प्रदेस के सुनसान जघा माहीं इआ प्रचार करँइ लागें, कि 2“पाप करब छोंड़िके परमातिमा के लघे आबा, काहेकि 3:2 परमातिमा हरबिन मनइन के ऊपर राज करिहँयस्वरग के राज लघेन आइगा हय।” 3ईं उँइन यूहन्ना आहीं जेखर चरचा परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के व्दारा कीनगे ही, कि 3:3 यसा 40:3

“सुनसान जघा माहीं एक जने के गोहरामँइ के बोल सुनात हय कि, 3:3 प्रभू काहीं सोइकार करँय के खातिर खुद काहीं तइआर कराप्रभू के गइल तइआर करा, अउर उनखे खातिर सड़कँय सऊँ करा।” 4अउर यूहन्ना ऊँट के बार से बना ओन्हा पहिरे रहे हँय, अउर अपने करिहाँ माहीं चमड़ा के पट्टा बाँधे रहे हँय, अउर ऊँ चिड्डन काहीं अउर जंगल के महिपर खात रहे हँय।

5जब ऊँ प्रचार करत रहे हँय, तब यरूसलेम सहर, अउर सगले यहूदिया प्रदेस के मनई, अउर यरदन नदी के लघे-लघे के सगले मनई उनखे लघे आइके एकट्ठा होइगें। 6अउर अपने-अपने पापन काहीं सोइकार कइके यरदन नदी माहीं उनसे बपतिस्मा लिहिन। 7जब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले खुब फरीसी लोगन काहीं अउर सदूकी लोगन काहीं बपतिस्मा लेंइ के खातिर अपने लघे आबत देखिन, त उनसे कहिन, कि “हे साँप के बच्चन कि नाईं बुरे मनइव, तोंहईं को चेताय दिहिस, कि परमातिमा के आमँइ बाले सजा से बचा?” 8-9अउर तूँ पंचे अपने जीबन से इआ देखाय द्या, कि तूँ पंचे बास्तव माहीं पाप करब छोंड़ दिहा हय, अउर परमातिमा के बातन काहीं मनते हया। तूँ पंचे अपने-अपने मन माहीं इआ न सोचा, कि हम अब्राहम के सन्तान आहेन एसे परमातिमा हमहीं सजा न देइहँय; काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, कि परमातिमा ईं पथरन से अब्राहम के खातिर बंस पइदा कइ सकत हें। 10अउर अब परमातिमा के क्रोध रूपी कुल्हारा बिरबन के जर माहीं धरा हय, एसे जउन-जउन बिरबा निकहा फर न फरी, उआ काटिके आगी माहीं झोंक दीन जई। 11तूँ पंचे अपने-अपने पापन से पस्चाताप किहे हया, इआ देखामँइ के खातिर हम तोंहईं पंचन काहीं पानी से बपतिस्मा देइत हएन, पय जउन हमरे बाद आमँइ बाले हें, ऊँ हमसे एतना महान हें; कि हम त उनखर 3:11 हम उनखर नोकरव तक बनय के काबिल नहिं आहेनपनहीं तक उठामँइ के काबिल नहिं आहेन, ऊँ तोंहईं पबित्र आत्मा अउर आगी से बपतिस्मा देइहँय। 12उनखर न्याय रूपी सूपा उनखे हाँथेन माहीं हय; अउर ऊँ संसार रूपी राहा काहीं निकहा से साफ करिहँय; अउर गोहूँ काहीं अपने बखारी माहीं रखिहँय; पय बूसा काहीं कबहूँ न बुझाँय बाली आगी माहीं डार देइहँय।

यीसु के बपतिस्मा

13जब यूहन्ना बपतिस्मा देत रहे हँय, उहय समय यीसु गलील प्रदेस से यरदन नदी के किनारे यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के लघे बपतिस्मा लेंइ आएँ। 14पय यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले इआ कहिके उनहीं रोंकँइ लागें कि, “हमहीं त अपना के हाँथे से बपतिस्मा लेंइ के जरूरत ही, अउर अपना हमरे लघे आएन हय?” 15तब यीसु उनहीं इआ जबाब दिहिन, कि “अब त अइसय होंइ द्या, काहेकि हमहीं पंचन काहीं इहइमेर से सगली 3:15 परमातिमा के इच्छा इआ ही कि तूँ हमहीं बपतिस्मा दयाधारमिकता काहीं पूर करब उचित हय।” तब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले उनखर बात मान लिहिन। 16अउर यीसु बपतिस्मा लइके जइसय पानी से बहिरे निकरें, त देखा, उनखे खातिर अकास खुलिगा; अउर ऊँ परमातिमा के आत्मा काहीं परेबा के रूप म उतरत, अउर अपने ऊपर आबत देखिन। 17अउर देखा, इआ अकासबानी भय, “ईं हमार पियार लड़िका आहीं, जिनसे हम खुब प्रसन्न हएन।”

4

सइतान से यीसु के परिच्छा

(मरकुस 1:12-13; लूका 4:1-13)

1यीसु के बपतिस्मा के बाद पबित्र आत्मा उनहीं सुनसान जघा माहीं लइगा, जउने सइतान से उनखर परिच्छा होय। 2अउर यीसु, चालिस दिन अउर चालिस रात बिना खाए पिए रहे हँय, तब उनहीं भूँख लाग। 3तबहिन परिच्छा लेंइ बाला सइतान उहाँ आबा अउर कहिस, “अगर तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या, त ईं पथरन से कहि द्या, कि रोटी बन जाँय।” 4तब यीसु ओही जबाब दिहिन, “पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय:

‘मनई4:4 ब्यब 8:3 केबल रोटिन भर से जिन्दा न रही, बलकिन परमातिमा के मुँहे से निकरँइ बाले हरेक बचन से जिअत रही।”

5पुनि सइतान उनहीं पबित्र सहर यरूसलेम माहीं लइगा, अउर मन्दिर के गुम्मट माहीं ठाढ़ किहिस,

6अउर उनसे कहिस, “अगर तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या, त अपने-आप काहीं इहाँ से नीचे गिराय द्या, काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय: ‘परमातिमा4:6 भज 91:11-12 तोंहरे खातिर अपने स्वरगदूतन काहीं हुकुम देइहँय, अउर ऊँ पंचे तोंहईं तुरन्तय लोक लेइहँय; कहँव अइसा न होय कि तोंहरे गोड़ेन माहीं पथरा से चोंट लगि जाय’।” 7तब यीसु ओही जबाब दिहिन, कि “पबित्र सास्त्र माहीं इहव लिखा हय, कि: ‘तूँ अपने प्रभू4:7 ब्यब 6:16 परमातिमा के परिच्छा न किहा’।”

8पुनि सइतान यीसु काहीं एकठे खुब ऊँच पहार माहीं लइगा, अउर संसार के सगला राज अउर ओखर बैभव देखाइके, 9उनसे कहिस, “अगर तूँ हमरे गोड़न गिरिहा, त इआ सगला हम तोहईं दइ देब।” 10तब यीसु ओसे कहिन, “हे सइतान हमसे दूरी होइजा, काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा4:10 ब्यब 6:13 हय, कि

‘तूँ अपने प्रभू परमातिमा के गोड़न गिरा, अउर केबल उनहिन के अराधना करा’।” 11तब सइतान उनखे लघे से चला ग, अउर देखा, स्वरगदूत आइके यीसु के सेबा-सहाई करँइ लागें।

यीसु के प्रचार के सुरुआत

(मरकुस 1:14,15; लूका 4:14,15,31)

12जब यीसु सुनिन कि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले पकड़बाय दीनगे हँय, तब ऊँ गलील प्रदेस माहीं चलेगें। 13अउर नासरत गाँव काहीं छोंड़िके, यीसु कफरनहूम सहर माहीं जाइके रहँइ लागें, जउन झील के किनारे जबूलून अउर नपताली लोगन के इलाका माहीं हय। 14जउने उआ बचन पूर होय, जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह कहिन रहा हय।

15कि

4:15 यसा 9:1-2“जबूलून अउर नपताली लोगन के इलाका, झील के गइल से यरदन नदी के उआ पार गैरयहूदी लोगन के गलील प्रदेस।

16अउर जउन मनई अँधिआर4:16 यसा 9:1-2 माहीं जीबन जिअत रहे हँय ऊँ पंचे महान जोति देखिन; अउर जउन मउत के 4:16 जिनखर बिसुआस जिन्दा परमातिमा के ऊपर नहीं रहा आय, ऊँ पंचे मउत के डेर माहीं रहत रहे हँयछाया माहीं रहत रहे हँय, उनखे ऊपर जोति चमकी।”

17उहय समय से यीसु इआ प्रचार करब सुरू कइ दिहिन, कि “पाप करब छोंड़िके परमातिमा के लघे आबा, काहेकि स्वरग के राज लघेन आइगा हय।”

यीसु के पहिल चेला लोग

(मरकुस 1:16-20; लूका 5:1-11; यूहन्ना 1:35-42)

18जब यीसु गलील प्रदेस के झील के किनारे-किनारे जात रहे हँय तब ऊँ दुइठे भाइन काहीं देखिन अरथात समौन जेखर नाम पतरस घलाय रहा हय, अउर उनखे भाई अन्द्रियास काहीं झील म जाल डारत देखिन; काहेकि ऊँ पंचे मछुआरा रहे हँय। 19अउर यीसु उनसे कहिन, “हमरे पीछे चले आबा, त हम तोंहईं मनइन काहीं परमातिमा के लघे लइ आमँइ बाला बनाउब।” 20तब ऊँ पंचे तुरन्तय जालन क छोंड़िके यीसु के पीछे चल दिहिन।

21अउर उहाँ से कुछ दूरी चले के बाद, यीसु जब्दी के लड़िका याकूब अउर ओखे भाई यूहन्ना काहीं, अपने बाप के साथ नाव माहीं चढ़े जालन काहीं सुधारत देखिन; तब उनहूँ काहीं घलाय बोलाइन। 22अउर ऊँ पंचे तुरन्तय नाव अउर अपने बाप काहीं छोंड़िके यीसु के पीछे चल दिहिन।

23अउर यीसु सगले गलील प्रदेस माहीं जाइ-जाइके उनखे सभाघरन माहीं उपदेस देत अउर स्वरगराज के खुसी के खबर के प्रचार करत, अउर उहाँ के मनइन के हरेकमेर के बिमारिन अउर कमजोरिन काहीं दूर करत रहिगें। 24अउर सगले सीरिया देस माहीं उनखर नाम मसहूर होइगा; एसे खुब मनई बिमारन काहीं जउन अनेकव प्रकार के बिमारिन से दुख माहीं परे रहे हँय, अउर जउनेन माहीं बुरी आत्मा रही हँय, अउर जिनहीं मिरगी आबत रही हय, अउर जिनहीं लोकबा मारे रहा हय, उन सगलेन काहीं यीसु के लघे लइ आएँ, तब यीसु उनहीं पंचन काहीं नीक कइ दिहिन। 25अउर गलील प्रदेस से अउर दिकापुलिस4:25 दिकापुलिस गैरयहूदी लोगन के इलाका आय, जउन दसठे सहरन काहीं मिलाइके बना रहा हय। से अउर यरूसलेम सहर से अउर यहूदिया प्रदेस से अउर यरदन नदी के दुसरे पार से बड़ी भारी भीड़ उनखे पीछे चल दिहिस।

5

पहार के ऊपर से दीन यीसु के उपदेस

(लूका 6:20-23)

1यीसु इआ भीड़ काहीं देखिके, पहार माहीं चढ़िगें; अउर जब ऊँ पहार माहीं चढ़िके बइठिगें, तब उनखर चेला लोग उनखे लघे आएँ। 2तब यीसु उनहीं इआ उपदेस देंइ लागें, कि 3“ऊँ पंचे धन्य हें, जउन मन के दीन हें, काहेकि स्वरग के 5:3 परमातिमा उनखे जीबन माहीं राज करिहँयराज उनहिन के खातिर आय। 4ऊँ पंचे धन्य हें, जउन सोक करत हें, काहेकि उनहीं सान्ती मिली। 5ऊँ पंचे धन्य हें, जउन नम्र हें, काहेकि ऊँ पंचे धरती के अधिकारी होइहँय। 6ऊँ पंचे धन्य हें, जउन परमातिमा के नजर माहीं निकहा हय, उहय करँइ के बड़ी इच्छा रक्खत हें, काहेकि परमातिमा उनखे मन के इच्छा पूर करिहँय। 7ऊँ पंचे धन्य हें, जउन दुसरे के ऊपर दया करत हें, काहेकि परमातिमा उनखे ऊपर दया करिहँय। 8ऊँ पंचे धन्य हें, जिनखर मन सुद्ध हें, काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा काहीं देखिहँय। 9ऊँ पंचे धन्य हें, जउन मेल-मिलाप कराबत हें, काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा के लड़िका कहइहँय। 10ऊँ पंचे धन्य हें, जउन परमातिमा के बचन काहीं मानँइ के कारन सताए जात हें, काहेकि स्वरग के राज उनहिन के आय। 11तूँ पंचे धन्य हया, जब मनई हमरे कारन तोंहार पंचन के बुराई करँइ, अउर सतामँइ अउर झूँठ बोल बोलिके तोंहरे पंचन के बिरोध माहीं अनेकव प्रकार के बुरी बातँय कहँइ, 12तब तूँ पंचे खुब आनन्दित अउर मगन होया, काहेकि एखे खातिर तोंहईं पंचन काहीं स्वरग माहीं बड़ा प्रतिफल मिली। काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं घलाय, जउन तोंहसे पहिले रहे हँय, इहइमेर से सताइन रहा हय।”

तूँ पंचे धरती के नोन अउर जोति आह्या

(मरकुस 9:50; लूका 14:34,35)

13यीसु पुनि कहिन, कि “तूँ पंचे धरती के नोन आह्या, पय अगर ओखर सखरई खतम होइ जाय, त फेर उआ कउने चीज से सखार कीन जई? उआ पुनि कउनव काम के नहीं होय, केबल उआ बहिरेन फेंका जात हय, अउर मनइन के गोड़ेन से कचरा जात हय।

14अउर तूँ पंचे संसार के जोति आह्या; अउर जउन सहर पहार माहीं बसा रहत हय उआ लुक नहीं सकय। 15अउर मनई दिया जलाइके बरतन के नीचे नहीं धरँय, बलकिन ओही ऊँचे जघा माहीं धरत हें, तबहिन ओसे घर के सगले मनइन काहीं उँजिआर मिलत हय। 16उहयमेर से तोंहार पंचन के निकहे काम उँजिआर कि नाईं मनइन के आँगे चमकँइ, जउने ऊँ पंचे तोंहरे निकहे कामन काहीं देखिके स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहरे पिता परमातिमा के बड़ाई करँय।”

मूसा के बिधान के बारे माहीं सिच्छा

17यीसु पुनि कहिन, “तूँ पंचे इआ न समझा कि हम मूसा के बिधान इआ कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताबन माहीं लिखी बातन काहीं मिटामँइ आएन हय, हम उनहीं मिटामँइ नहीं, बलकिन उन माहीं लिखी बातन काहीं पूर करँइ आएन हय। 18काहेकि हम तोंहसे पंचन से सही कहित हएन, कि जब तक अकास अउर धरती टर न जइहँय, तब तक मूसा के बिधान के बातन से एकठे पाई अउर बिन्दी बिना पूर होए न रही। 19एसे जे कोऊ, ईं छोट से छोट हुकुमन म से एक्कवठे काहीं मानब छोंड़ी, अउर इहइमेर से दुसरे मनइन काहीं घलाय न मानँइ के खातिर सिखाई, त उआ स्वरगराज माहीं सगलेन से छोट कहाई; पय जे कोऊ उनखर पालन करी, अउर दुसरे मनइन काहीं पालन करब सिखाई, उहय स्वरगराज माहीं महान कहाई।” 20काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, “अगर तोंहार पंचन के धारमिकता मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन से अउर फरीसी लोगन से बढ़िके न होई, त तूँ पंचे स्वरगराज माहीं कबहूँ प्रबेस न कए पइहा।”

क्रोध अउर कतल के बारे माहीं

21“तूँ पंचे सुन चुके हया, कि मूसा के बिधान माहीं हमरे पूरबजन से कहा ग रहा हय, कि ‘कतल न किहा’ अउर जे कोऊ कतल करी, उआ कचेहरी माहीं सजा के काबिल होई। 22पय हम तोंहसे पंचन से इआ कहित हएन, कि जे कोऊ अपने भाई के ऊपर क्रोध करी, उआ कचेहरी माहीं सजा पामँइ के काबिल होई: अउर जे कोऊ अपने भाई काहीं निकम्मा कही उआ महासभा माहीं सजा के काबिल होई; अउर जे कोऊ अपने भाई काहीं, ‘हे मूरुख’ कही उआ नरक के आगी माहीं डारे जाँइ के सजा पामँइ के काबिल होई। 23एसे अगर तूँ आपन भेंट, बेदी माहीं चढ़ामँइ लइआए हया, अउर उहाँ तोंहईं सुधि आय जाय, कि तोंहरे भाई के मन माहीं तोंहरे खातिर कुछू बिरोध हय, 24त आपन भेंट उहँइ बेदी के लघे छोंड़ि द्या, अउर पहिले जाइके अपने भाई से मेल-मिलाप कइल्या; ओखे बाद आइके आपन भेंट चढ़ाबा। 25अउर जब तक तूँ अपने बिरोधी के साथ गइल माहीं हया, त ओसे हरबिन मेल-मिलाप कइल्या, कहँव अइसा न होय कि उआ बिरोधी तोंहईं राजपाल काहीं सउँपि देय, अउर राजपाल तोंहईं सिपाही काहीं सउँपि देय, अउर तूँ जेल माहीं डार दीन जा। 26हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जब तक तूँ पाई-पाई चुकाय न देहा, तब तक तूँ जेल से छूटे न पइहा।”

ब्यभिचार के बारे माहीं

27“तूँ पंचे सुन चुके हया, कि मूसा के बिधान माहीं कहा ग रहा हय, कि ‘ब्यभिचार न किहा’। 28पय हम तोंहसे पंचन से इआ कहित हएन, कि ‘जे कोऊ कउनव मेहेरिआ के ऊपर बुरी नजर डारत हय, त उआ अपने मन माहीं ओसे ब्यभिचार कइ चुका हय।’ 29अगर तोंहार दहिनी आँखी तोंहसे पाप करामँइ के कारन बनत ही, त ओही निकारिके फेंकि द्या; काहेकि तोंहरे खातिर इआ भलय होई, कि तोंहरे देंह म से एकठे अंग नास होइ जाय, अउर तोंहार सगली देंह नरक माहीं डारी जाँय से बँचि जाय। 30अउर अगर तोंहार दहिना हाँथ तोंहसे पाप कराबत हय, त ओही काटिके फेंकि द्या, काहेकि तोंहरे खातिर इआ भलय होई, कि तोंहरे देंह के अंगन म से एकठे अंग नास होइ जाय, अउर तोंहार सगली देंह नरक म डारे जाँइ से बँचि जाय।”

छोंड़-छुट्टी के बारे माहीं सिच्छा

(मत्ती 19:9; मरकुस 10:11,12; लूका 16:18)

31मूसा के बिधान माहीं इहव कहा ग रहा हय, कि “जे कोऊ अपने मेहेरिआ के छोंड़-छुट्टी करँइ चाहत हय, त उआ ओही छोंड़ँइ के लिखा-पढ़ी देय।” 32पय हम तोंहसे कहित हएन, कि जे कोऊ ब्यभिचार के अलाबा अउर दुसरे कारन से अपने मेहेरिआ के छोंड़-छुट्टी करत हय, त उआ अपने मेहेरिआ से ब्यभिचार कराबत हय; अउर जे कोऊ उआ छोंड़ी मेहेरिआ से काज करत हय, त उहव ओसे ब्यभिचार करत हय।

कसम खाँइ के बारे माहीं यीसु के सिच्छा

33“तूँ पंचे इहव सुन चुके हया, कि हमरे पंचन के पूरबजन से कहा ग रहा हय, कि ‘झूँठ कसम न खया, बलकिन प्रभू के खातिर अपने कसम काहीं पूर किहा।’ 34पय हम तोंहसे कहित हएन, कि ‘कबहूँ कसम न खया; न त स्वरग के’, काहेकि उआ परमातिमा के सिंहासन आय, 35अउर न धरतिन के, काहेकि उआ परमातिमा के गोड़ेन के चउकी आय; न यरूसलेम सहर के, काहेकि उआ महाराजा अरथात परमातिमा के सहर आय। 36अउर न अपने मूँड़ेन के कसम खया, काहेकि तूँ एकठइँअव बार काहीं न त उजर कइ सकते आह्या अउर न करिआ। 37एसे तोंहार पंचन के बात हाँ के हाँ, अउर नहीं के नहीं रहय; काहेकि जउन कुछू एसे जादा होत हय, उआ बुराई से होत हय।”

बदला न लेंइ के बारे माहीं यीसु के सिच्छा

(लूका 6:29,30)

38यीसु पुनि कहिन, “तूँ पंचे सुन चुके हया, कि मूसा के बिधान माहीं कहा ग रहा हय, कि ‘आँखी के बदले माहीं आँखी, अउर दाँत के बदले माहीं दाँत’। 39पय हम तोंहसे पंचन से इआ कहित हएन, कि जे कोऊ तोंहरे साथ बुरा बेउहार करत हें, त उनसे बदला न लिहा; बलकिन जे कोऊ तोंहरे दहिने गाल माहीं थापड़ मारय, त ओखी कइती दुसरव गाल फेर दिहा। 40अउर अगर कोऊ तोंहसे जबरई तोंहार कुरथा लेंइ चाहय, त ओही अँगउछी घलाय लइ लेंइ दिहा। 41अउर अगर कोऊ तोंहईं बेगार माहीं एक कोस लइ जाय, त ओखे साथ दुइ कोस चले जया। 42अउर अगर कोऊ तोंहसे कुछू माँगय, त ओही द्या, अगर कोऊ तोंहसे उधार लेंइ चाहय, त ओही नाहीं न किहा।”

दुसमनन से प्रेम करँइ के बारे माहीं सिच्छा

(लूका 6:27,28,32-36)

43“तूँ पंचे सुन चुके हया, कि कहा ग रहा हय, कि ‘अपने परोसी से अपने कि नाईं प्रेम किहा, अउर अपने दुसमन से दुसमनी।’ 44पय हम तोंहसे पंचन से इआ कहित हएन, कि ‘अपने दुसमनन से प्रेम करा, अउर अपने सतामँइ बालेन के खातिर प्राथना करा।’ 45अउर अगर तूँ पंचे इहइमेर करिहा, त स्वरग माहीं रहँइ बाले अपने पिता परमातिमा के सन्तान ठहरिहा, काहेकि परमातिमा भले मनई अउर बुरे मनई दोनव के ऊपर सुरिज के घाम करत हें, अउर धरमिन अउर अधरमिन दोनव के ऊपर पानी बरसाबत हें। 46काहेकि अगर तूँ पंचे अपने प्रेम करँइ बालेन भर से प्रेम करिहा, त तोंहरे खातिर का फायदा होई? का चुंगी लेंइ बाले घलाय इहइमेर नहीं करँइ? 47अउर अगर तूँ पंचे केबल अपने भाई-बन्धुअन काहीं भर नबस्कार करते हया, त कउन बड़ा काम करते हया? का इहइमेर गैरयहूदी लोग घलाय नहीं करँय? 48एसे तूँ पंचे परिपूर्न बना, जइसन स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहार पिता परमातिमा परिपूर्न हें।”

6

दान के बारे माहीं सिच्छा

1“सचेत रहा! तूँ पंचे धरम के काम मनइन काहीं देखामँइ के खातिर न करा, नहीं त स्वरग माहीं रहँइ बाले अपने पिता से कउनव प्रतिफल न पइहा।” 2एसे जब तूँ पंचे दीन-दुखिअन काहीं दान करा, त ओखर बड़ाई अपने मुँहे से न करा, जइसन कपटी मनई सभन अउर गइलन माहीं करत हें, जउने मनई उनखर बड़ाई करँइ, हम तोंहसे सही कहित हएन, कि ऊँ पंचे आपन प्रतिफल पाय चुके हँय। 3पय जब तूँ पंचे दीन-दुखिअन काहीं दान करा, त उआ दान के बारे माहीं कोऊ न जाने पाबय, इहाँ तक कि साथ माहीं रहँइ बाले घलाय। 4जउने तोंहार पंचन के दान गुप्त रहय; तब तोंहार पंचन के पिता परमातिमा जउन गुप्त रूप से देखत हें, तोंहईं पंचन काहीं प्रतिफल देइहँय।

प्राथना के बारे माहीं सिच्छा

(लूका 11:2-4)

5“जब तूँ पंचे प्राथना करा, त कपटी मनइन कि नाईं न करा, जिनहीं दुसरे मनइन काहीं देखामँइ के खातिर, सभन माहीं अउर सड़कन के मोड़न माहीं प्राथना करब नीक लागत हय; हम तोंहसे पंचन से सही कहित हएन, कि ऊँ पंचे आपन प्रतिफल पाय चुके हँय। 6पय जब तूँ पंचे प्राथना करा त, अपने कोठरिआ माहीं, जा, अउर ओखर दुअरा बन्द कइके गुप्त रूप माहीं पिता परमातिमा से प्राथना करा; तब तोंहार पंचन के पिता परमातिमा जउन गुप्त रूप से देखत हें, तोंहईं पंचन काहीं एखर प्रतिफल देइहँय। 7एसे जब तूँ पंचे प्राथना करा, त गैरयहूदी लोगन कि नाईं, अइसय बेकार के बातन काहीं बेर-बेर न दोहराबत रहा, काहेकि ऊँ पंचे सोचत हें, कि खुब देर तक प्राथना करे से, उनखर प्राथना परमातिमा व्दारा सुनी जई। 8एसे तूँ पंचे उनखी कि नाईं न बना, काहेकि तोंहार पंचन के पिता परमातिमा तोंहरे मागँइ से पहिलेन जानत हें, कि तोंहईं कउने-कउने चीजन के जरूरत ही।”

9एसे तूँ पंचे जब प्राथना किहा, त इआमेर से किहा; “हे हमार पिता, अपना जउन स्वरग माहीं रहित हएन; अपना के नाम पबित्र माना जाय। 10अपना के राज आबय; अपना के मरजी जइसन स्वरग माहीं पूर होत ही, उहयमेर धरती माहीं घलाय पूर होय। 11हमरे पंचन के दिन भर के खाँय के खातिर खाना आज हमहीं देई। 12अउर जइसन हम पंचे अपने गुनहगारन काहीं माफ किहेन हय, उहयमेर अपनव हमरे अपराधन काहीं माफ करी। 13अउर हमहीं पंचन काहीं परिच्छा माहीं न डारी, बलकिन बुराई करँइ बाले सइतान के हाँथ से बचाई; (काहेकि राज अउर पराक्रम अउर महिमा हमेसा अपनय के आय।” आमीन!)

14एसे जब तूँ पंचे दुसरे मनइन के अपराधन काहीं माफ करिहा, त स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहार पंचन के पिता घलाय तोंहईं माफ करिहँय। 15अउर अगर तूँ पंचे दुसरे मनइन के अपराध माफ न करिहा, त तोंहार पिता परमातिमा घलाय तोंहरे अपराध काहीं माफ न करिहँय।

उपासे रहँइ के बारे माहीं सिच्छा

16“जब तूँ पंचे उपासे रहा, त कपटी मनइन कि नाईं तोंहरे मुँहे माहीं उदासी न छाई रहय, काहेकि कपटी मनई इआ देखामँइ के खातिर आपन मुँह उदास कए रहत हें, कि जउने सगले मनई इआ जानँय कि ऊँ पंचे उपासे हँय, हम तोंहसे पंचन से सही-सही कहित हएन, कि ऊँ पंचे आपन प्रतिफल पाय चुके हँय। 17पय जब तूँ पंचे उपासे रहा, त अपने मूँड़े माहीं तेल लगाबा अउर आपन मुँह धोबा, 18जउने दूसर मनई न जानँइ कि तूँ पंचे उपासे हया, बलकिन तोंहार पंचन के पिता परमातिमा जउन गुप्त रूप माहीं हें, जानँइ कि तूँ पंचे उपासे हया, तब तोंहार पंचन के पिता परमातिमा जउन गुप्त रूप माहीं तोंहरे कीन कामन काहीं देखत हें, तोंहईं एखर प्रतिफल देइहँय।”

स्वरग के धन के बारे माहीं सिच्छा

(लूका 12:33,34)

19अपने खातिर धरती माहीं धन-सम्पत्ती एकट्ठा न करा; काहेकि ओही किरबा अउर काई नस्ट कइ देत हें, अउर चोर घलाय सेंध कइके ओही चोराय लेत हें। 20बलकिन अपने खातिर स्वरग माहीं धन-सम्पत्ती एकट्ठा करा, जहाँ न त किरबय ओही नास कए पामँय अउर न त काइन लागय, अउर न चोर सेंध कइके चोराय पामँय। 21काहेकि जहाँ तोंहार धन-सम्पत्ती हय, उहँय तोंहार मनव लगा रही।

देंह के जोति

(लूका 11:34-36)

22“देंह के दिया आँखी आय : एसे अगर तोंहार आँखी निरमल रही, त तोंहार सगली देंह घलाय उँजिआर पाई। 23पय अगर तोंहार आँखी बुरी होई, त तोंहरे सगली देंह माहीं अँधिआर रही; इआ कारन से जउन उँजिआर तोंहरे जीबन माहीं हय, अगर उआ अँधिआर होइ जाय, त उआ अँधिआर केतना भयानक न होई।”

परमातिमा अउर धन के बारे माहीं सिच्छा

(लूका 16:13; 12:22-31)

24“कउनव सेबक दुइठे मालिकन के सेबा नहीं कइ सकय, काहेकि उआ एकठे से प्रेम अउर दुसरे से दुसमनी रखी, इआ कि एकठे से मिला रही, अउर दुसरे काहीं तुच्छ जानी; एसे तूँ पंचे परमातिमा अउर धन दोनव के सेबा नहीं कइ सकते आह्या। 25एसे हम तोंहसे इआ कहित हएन, कि ‘अपने प्रान के खातिर इआ चिन्ता न किहा, कि हम पंचे का खाब, अउर का पिअब? अउर न अपने देंहेन के खातिर चिन्ता किहा, कि हम का पहिरब? का प्रान खाना से, अउर देंह ओन्हा से बढ़िके नहिं आय? 26अउर अकास माहीं उड़ँइ बाले पंछिन काहीं देखा! ऊँ न त बोउतय आहीं, अउर न त कटतय आहीं, अउर न कुठुली पेउलन माहीं कुछू धरतय आहीं; तऊ स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहार पंचन के पिता उनहीं खबाबत हें; त का तूँ पंचे पंछिन से जादा कीमती नहिं आह्या? 27तोंहरे पंचन म से अइसा को हय, जउन चिन्ता कइके अपने उमिर माहीं एक घरिव बढ़ाय सकत होय?

28अउर तूँ पंचे ओन्हा के खातिर काहे चिन्ता करते हया? जंगल के फूलन काहीं ध्यान से देखा, कि ऊँ कइसन बाढ़त हें, ऊँ न त मेहनत करँइ, अउर न कातके ओन्हय बनामँइ। 29त हम तोंहसे कहित हएन, कि राजा सुलैमान घलाय, जबकि ऊँ संसार माहीं सगलेन से धनी रहे हँय, तऊ उन फूलन म से एक्कवठे कि नाईं निकहा ओन्हा नहीं पहिरे पाइन। 30एसे जब परमातिमा मइदान के चारा काहीं, जउन आज हय, अउर काल्ह आगी माहीं झोंक दीन जई, उनहीं एतना सुन्दर ओन्हा पहिराबत हें, त हे अल्प बिसुआसिव, ऊँ तोंहईं पंचन काहीं निकहा ओन्हा काहे न पहिरइहँय? 31एसे तूँ पंचे चिन्ता कइके इआ न कह्या, कि हम का खाब-पिअब, इआ कि का पहिरब? 32काहेकि अबिसुआसी लोग ईं सगली चीजन काहीं ढूँढ़ँइ माहीं लगे रहत हें, पय स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहार पिता परमातिमा इआ जानत हें, कि तोंहईं पंचन काहीं ईं सगली चीजन के जरूरत ही। 33एसे पहिले तूँ पंचे परमातिमा के राज, अउर जउन उनखे नजर माहीं निकहा हय ओखर खोज करा, त ईं सगली चीजँय तोंहईं मिल जइहँय। 34एसे काल्ह के बारे माहीं चिन्ता न किहा, काहेकि काल्ह के दिन आपन चिन्ता खुदय कइ लेई; आज के खातिर आजय के दुख खुब हय।”

7

दुसरे के ऊपर दोस न लगामँइ के बारे माहीं सिच्छा

(लूका 6:37,38,41,42)

1“कोहू के ऊपर दोस न लगाबा, जउने तोंहरेव ऊपर दोस न लगाबा जाय। 2काहेकि जइसन तूँ पंचे दुसरेन के ऊपर दोस लगउते हया, उहयमेर तोंहरेव पंचन के ऊपर घलाय दोस लगाबा जई; अउर जउने नाप से तूँ पंचे दुसरेन काहीं नपते हया, उहय नाप से तोंहरेव खातिर नापा जई। 3तूँ अपने भाई के छोट गलती काहीं काहे देखते हया, जउन निन्च बुदी उजार कि नाईं हय, अउर अपने बड़ी गलती काहीं नहीं देखते आह्या, जउन खम्भा कि नाईं हय? 4जब तोंहईं अपने आँखी के खम्भा नहीं देखाय, त तूँ अपने भाई से कइसा कहि सकते हया, कि आबा हम तोंहरे आँखी के निन्च बुदी उजार निकार देई? 5हे कपटी, पहिले अपने आँखी के खम्भा निकार ले, तबहिनय तँय अपने भाई के आँखी के निन्च बुदी उजार निकहा से देखिके निकारे पइहे।

6‘पबित्र चीज कुकुरन काहीं न द्या, अउर आपन मोती सुमरन के आँगे न डारा।’ कहँव अइसा न होय कि ऊँ उनहीं अपने गोड़ेन से रउँदि डारँय, अउर पलटिके तोंहऊँ पंचन काहीं फारि डारँय।”

मगिहा त पइहा

(लूका 11:9-13)

7“तूँ पंचे मागत रइहा, त तोंहईं दीन जई; ढूँढ़त रइहा, त जरूर पइहा; खट-खटाबत रइहा, त तोंहरे खातिर दुअरा खोल दीन जई।” 8काहेकि जे कोऊ मागत रहत हय, त ओही जरूर मिलत हय; अउर जे कोऊ ढूँढ़त रहत हय, उआ जरूर पाबत हय; अउर जे कोऊ खट-खटाबत रहत हय, त ओखे खातिर दुअरा खोल दीन जई।

9तोंहरे पंचन म से अइसा कउन मनई हय, कि जब ओखर लड़िका रोटी माँगय, त उआ ओही पथरा देय। 10इआ कि मछरी माँगय, त उआ ओही साँप देय? 11एसे जब तूँ पंचे बुरे होइके, अपने लड़िकन काहीं नीक चीजँय देंइ जनते हया, त स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहार पिता परमातिमा, अपने मागँइ बालेन काहीं निकही चीजँय काहे न देइहँय? 12इआ कारन से जउन कुछू तूँ पंचे चहते हया, कि दूसर मनई तोंहरे साथ बेउहार करँय, तुहूँ पंचे उनखे साथ उहयमेर बेउहार करा, काहेकि मूसा के बिधान अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले इहय सिच्छा देत हें।

साँकर अउर चाकल गइल के बारे माहीं सिच्छा

(लूका 13:24)

13“साँकर दुअरा से परमातिमा के राज माहीं प्रबेस करा, काहेकि उआ दुअरा चाकल हय, अउर उआ गइल सरल ही, जउन बिनास कइती लइ जात ही, अउर खुब मनई अइसन हें, जउन ओहिन से प्रबेस करत हें। 14पय अनन्त जीबन तक पहुँचइ के दुअरा साँकर हय, अउर ओखर गइलव कठिन ही; अउर अइसन खुब कम मनई हें, जउन अनन्त जीबन पाबत हें।”

जइसन बिरबा उहयमेर ओखर फर

(लूका 6:43,44,46; 13:25-27)

15“परमातिमा के झूँठ सँदेस बतामँइ बालेन से सचेत रहा, काहेकि ऊँ पंचे गाड़र कि नाईं भेस बनाइके तोंहरे पंचन के लघे आबत हें, पय ऊँ पंचे भीतर से डगर कि नाईं खतरनाक होत हें। 16तूँ पंचे उनखे कामन के परिनाम से उनहीं पहिचान लेइहा, इआ बताबा, कि ‘का कउनव मनई जरबइलन से अंगूर, इआ कि उटकटार से अंजीर के फर टोर सकत हय? 17इहइमेर से हरेक निकहे बिरबन माहीं निकहे फर लागत हें, अउर खराब बिरबन माहीं खराब फर लागत हें। 18एसे निकहे बिरबा माहीं खराब फर नहीं लग सकय, अउर न खराब बिरबा माहीं निकहा फर लग सकय। 19एसे जउने-जउने बिरबन माहीं निकहे फर नहीं लागँय, ऊँ सगले बिरबा काटिके आगी माहीं डार दीन जात हें। 20एसे हम तोंहसे पुनि कहित हएन, कि इआमेर से तूँ पंचे उनखे कामन के परिनाम से उनहीं पहिचान लेइहा।

21जेतने हमसे, हे प्रभू, हे प्रभू, कहत हें, उनमा से हरेक जन स्वरगराज माहीं न जाए पइहँय, बलकिन उहय स्वरगराज माहीं जई, जउन स्वरग माहीं रहँइ बाले हमरे पिता के मरजी के मुताबिक चलत हय। 22उआ महान दिन काहीं खुब मनई हमसे पुँछिहँय, हे प्रभू, हे प्रभू, का हम अपना के नाम से परमातिमा के सँदेस नहीं सुनायन, अउर का हम अपना के नाम से बुरी आत्मन काहीं नहीं निकारेन, अउर अपना के नाम से खुब अचरज के कामन काहीं नहीं किहेन? 23तब हम उनसे साफ-साफ कहि देब, हम तोंहईं पंचन काहीं नहीं जानी। हे कुकर्म करँइ बाले मनइव, हमरे लघे से दूरी चले जा।

घर बनामँइ बाले दुइठे मनई: बुद्धिमान अउर मूरुख

(लूका 6:47-49)

24एसे जे कोऊ हमरे ईं बातन काहीं सुनिके, उनहिन के मुताबिक चलत हय, त उआ, उआ बुद्धिमान मनई कि नाईं ठहरी, जउन आपन घर चट्टान माहीं बनाइस। 25अउर जब बारिस भय अउर बाढ़ आई, अउर आँधी चली, अउर उआ घर से टकरानी, पय उआ नहीं गिरा, काहेकि ओखर नेव चट्टान माहीं डारी गे रही हय। 26पय जे कोऊ हमरे ईं बातन काहीं सुनत हय, अउर उनखे मुताबिक नहीं चलय त उआ, उआ मूरुख मनई कि नाईं ठहरी, जउन आपन घर बारू माहीं बनाइस। 27अउर जब बारिस भय अउर बाढ़ आई, अउर आँधी चली, अउर उआ घर से टकरानी, त उआ घर गिरिके पूरी तरह से नास होइगा।” 28जब यीसु ईं बातन काहीं कहि चुकें, तब भीड़ के सगले मनई उनखे उपदेस के बातन काहीं सुनिके चउआइगें। 29काहेकि यीसु उनखे मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन कि नाईं नहीं, बलकिन अधिकारी कि नाईं उनहीं उपदेस देत रहे हँय।

8

एकठे कोढ़ी काहीं नीक करब

(मरकुस 1:40-45; लूका 5:12-16)

1यीसु जब पहार से नीचे उतरें, त एकठे बड़ी भारी भीड़ उनहीं पछिआय लिहिस। 2तब उहाँ एकठे कोढ़ी यीसु के लघे आबा, अउर उनखे गोड़न गिरिके कहिस, कि “हे प्रभू, अगर अपना चाही त हमही सुद्ध कइ सकित हएन।” 3तब यीसु आपन हाँथ बढ़ाइके ओही छुइन, अउर कहिन, “हम चाहित हएन, कि तूँ सुद्ध होइजा।” अउर तुरन्तय ओखर कोढ़ के बिमारी नीक होइगे। 4तब यीसु ओसे कहिन, कि “देखा, कोहू से कुछू न बताया, पय जाइके अपने-आप काहीं याजक क देखाबा, अउर अपने सुद्ध होंइ के बारे माहीं जउन चढ़ाबा चढ़ामँइ काहीं मूसा नबी ठहराइन हीं, उहय भेंट चढ़ाबा, जउने तोंहरे समाज के लोगन के खातिर गबाही ठहरय।”

एकठे सुबेदार के यीसु के ऊपर बिसुआस करब

(लूका 7:1-10)

5जब यीसु कफरनहूम सहर माहीं आएँ, तबहिनय एकठे सुबेदार उनखे लघे आइके उनसे बिनती किहिन। 6कि “हे प्रभू, हमरे एकठे दास काहीं लोकबा मार दिहिस ही, अउर उआ बड़ा दुखी हमरे घरय माहीं परा हय।” 7तब यीसु उआ सुबेदार से कहिन, कि “हम आइके ओही नीक करब।” 8तब सुबेदार उनसे कहिन, कि “हे प्रभू हम एखे काबिल नहिं आहेन, कि अपना हमरे घर माहीं अई, पय अपना केबल अपने मुँहे से कहि देई, त हमार दास नीक होइ जई। 9काहेकि हमहूँ पराधीन मनई आहेन, अउर सिपाही हमरे अधीन हें; जब एकठे से कहित हएन, कि ‘जा’ तब उआ जात हय; अउर जब दुसरे से कहित हएन, कि ‘आव’ तब उआ आबत हय; अउर अपने दास से कहित हएन, कि ‘इआ कर’ त उआ उहय करत हय।”

10इआ बात सुनिके यीसु खुब अचरज मानिन, अउर जउन उनखे पीछे आबत रहे हँय उनसे कहिन; “हम तोंहसे कहित हएन, कि हम इजराइल माहीं घलाय अइसन बिसुआस नहीं पाएन। 11अउर हम इहव घलाय कहित हएन कि, खुब मनई पूरुब अउर पच्छिम से आइके अब्राहम अउर इसहाक अउर याकूब के साथ स्वरग के राज माहीं बइठि हँय। 12पय बहुत से यहूदी लोग जिनखे खातिर परमातिमा के राज तइआर कीन ग रहा हय, बहिरे अँधिआर माहीं डार दीन जइहँय: उहाँ रोउब अउर दाँतन के पीसब होई।” 13अउर यीसु उआ सुबेदार से कहिन, “जा, तोंहार जइसन बिसुआस हय, उहयमेर तोंहरे खातिर होय।” अउर उआ सुबेदार के दास उहय समय नीक होइगा।

यीसु खुब बिमारन काहीं नीक किहिन

(मरकुस 1:29-34; लूका 4:38-41)

14यीसु जब पतरस के घर माहीं पहुँचे, त देखिन कि उनखे सास काहीं बोखार चढ़ी ही, अउर ऊँ बिस्तर माहीं परी हईं। 15जइसय यीसु उनखर हाँथ छुँइन, तबहिनय उनखर बोखार उतरि गे; अउर ऊँ उठिके उनखर सेबा-सहाई करँइ लागीं। 16जब साँझ भय तब खुब मनई उनखे लघे खुब बिमारन काहीं लइ आएँ, जिन माहीं बुरी आत्मा रही हँय, यीसु ऊँ बुरी आत्मन काहीं अपने बचन से निकार दिहिन, अउर सगले बिमारन काहीं नीक कइ दिहिन। 17जउने उआ बचन जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के व्दारा कहा ग रहा हय, पूर होय, कि “ऊँ खुदय हमरे पंचन के निरबलतन काहीं लइ लिहिन, अउर हमरे बिमारिन काहीं उठाय लिहिन8:17 यसा 53:4।”

यीसु के चेला बनँइ के कीमत

(लूका 9:57-62)

18जब यीसु अपने चारिव कइती बड़ी भीड़ देखिन, तब चेलन काहीं झील के उआ पार जाँइ के हुकुम दिहिन। 19तब एक जने मूसा के बिधान सिखामँइ बाला उनखे लघे आइके उनसे कहिस, “हे गुरू, जहाँ कहँव अपना जाब, त हमहूँ अपना के पीछे-पीछे चलब।” 20तब यीसु ओसे कहिन, “लोखरी के रहँइ काहीं गुफा होत ही, अउर पंछिन के रहँइ के पाल होत हें, पय मनई के लड़िका के कउनव घर नहिं आय, बलकिन मूड़व तक धरँइ के जघा नहिं आय।” 21तब एकठे चेला आइके उनसे कहिस, “हे प्रभू, पहिले हमहीं जाँइ देई, कि हम अपने बाप काहीं जउन खतम होइगें हँय, गाड़े अई।” 22तब यीसु ओसे कहिन, “तूँ हमरे पीछे चले आबा, अउर जउन मनई आत्मिक रूप से मरे हँय, उनहीं मुरदन काहीं गाड़ँइ द्या।”

आँधी काहीं सान्त करब

(मरकुस 4:35-41; लूका 8:22-25)

23जब यीसु नाव माहीं चढ़ें, तब उनखर चेला लोग उनखे पीछे-पीछे चल दिहिन। 24अउर तबहिनय झील माहीं खुब तेज आँधी चलँइ लाग, अउर पानी के तेज हिलकोरन से नाव माहीं पानी भरँइ लाग, पय यीसु नाव माहीं सोबत रहे हँय। 25तब चेला लोग यीसु के लघे जाइके उनहीं जगाइन, अउर उनसे कहिन, “हे प्रभू, हमहीं बचाई, हम पंचे बूड़े जइत हएन।” 26तब यीसु उनसे कहिन, “हे अल्प बिसुआसिव, काहे डेराते हया?” अउर यीसु उठिके आँधी अउर पानी काहीं डाँटिन, तब चारिव कइती सान्ती छाइगे। 27तब ऊँ पंचे खुब अचरज मानिके कहँइ लागें, “ईं कइसन मनई हें, कि आँधी अउर पानी घलाय इनखर हुकुम मानत हें।”

बुरी आत्मन से परेसान मनइन काहीं नीक करब

(मरकुस 5:1-20; लूका 8:26-39)

28जब यीसु गदरेनी लोगन के देस माहीं पहुँचे, तबहिनय दुइठे मनई जउनेन माहीं बुरी आत्मा सकान रही हँय, कब्रन से निकरिके उनसे मिले, ऊँ पंचे एतना खतरनाक रहे हँय, कि उआ गइल से कोऊ नहीं निकर सकत रहा आय। 29ऊँ पंचे चिल्लाइके कहिन; “हे परमातिमा के लड़िका, हमार अपना से कउनव काम नहिं आय? का अपना समय से पहिलेन हमहीं दुख देंइ आए हएन?” 30उनखे लघे से कुछ दूरी सुमरन के एकठे बड़ा भारी झुन्ड चरत रहा हय। 31ऊँ बुरी आत्मा यीसु से चरउरी कइके कहिन, कि “अगर अपना हमहीं पंचन काहीं निकारँइ चाहित हएन, त सुमरन के उआ झुन्ड माहीं पठय देई।” 32तब यीसु उनसे कहिन, “जा।” अउर ऊँ बुरी आत्मा उन मनइन से निकरिके सुमरन माहीं सकाय गईं, अउर देखा, सुमरन के सगला झुन्ड पहार के उतारा से दउड़िके झील माहीं कूद परा, अउर सगले सुमर बूड़िके मरिगें। 33अउर इआ देखिके सुमरन काहीं चरामँइ बाले भागिके, सहर माहीं जाइके मनइन काहीं, सगली बातँय बताइन, अउर जउने मनइन माहीं बुरी आत्मा सकान रही हँय, उनखर सगला हाल घलाय बताइन। 34अउर सगले सहर के मनई, यीसु से मिलँइ के खातिर सहर से निकरिके आएँ, अउर यीसु काहीं देखिके उनसे बिनती किहिन, कि “अपना हमरे सरहद्दी से बहिरे चले जई।”

9

लोकबा के मरीज काहीं नीक करब

(मरकुस 2:1-12; लूका 5:17-26)

1यीसु नाव माहीं चढ़िके झील के दुसरे पार अपने सहर माहीं आएँ। 2अउर उहय समय कइयक जने मिलिके एकठे लोकबा के मरीज काहीं खटिया माहीं पराइके यीसु के लघे लइ आएँ। यीसु उनखे बिसुआस काहीं देखिके उआ लोकबा के मरीज से कहिन, “हे बेटबा, ढाढ़स बाँधा; तोंहार पाप माफ होइगें।” 3इआ सुनिके मूसा के बिधान सिखामँइ बाले सोचिन, कि “इआ त परमातिमा के बुराई करत हय।” 4तब यीसु उनखे मन के बातन काहीं जानिके उनसे कहिन, “तूँ पंचे अपने-अपने मन माहीं बुरे बिचार काहे सोचते हया? 5इआ बताबा जादा सरल का हय? इआ कहब कि ‘तोंहार पाप माफ होइगें’ इआ कि ‘उठा, आपन खटिया उठाइके चला फिरा’। 6पय जउने तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि मनई के लड़िका काहीं धरती माहीं पाप माफ करँइ के अधिकार हय।” यीसु उआ लोकबा के मरीज से कहिन, “उठा आपन खटिया उठाबा, अउर अपने घर चले जा।” 7तब उआ उठिके अपने घर चला ग। 8सगले मनई इआ देखिके डेराइगें, अउर परमातिमा के बड़ाई करँइ लागें, जउन मनइन काहीं अइसन अधिकार दिहिन हीं।

मत्ती काहीं बोलाबा जाब

(मरकुस 2:13-17; लूका 5:27-32)

9यीसु उहाँ से आँगे जात समय मत्ती नाम के एकठे मनई काहीं चुंगी नाका माहीं बइठे देखिन, अउर उनसे कहिन, “हमरे पीछे चले आबा”, ऊँ उहाँ से उठिके यीसु के पीछे चल दिहिन। 10अउर जब यीसु लेबी के घर माहीं खाना खाँइ बइठें, तब चुंगी लेंइ बाले खुब जने, अउर यहूदी लोग जिनहीं पापी कहत रहे हँय, ऊँ मनई यीसु अउर उनखे चेलन के साथ खाँइ बइठिगें। 11इआ देखिके फरीसी लोग, उनखे चेलन से कहिन, “तोंहार गुरू, चुंगी लेंइ बालेन, अउर यहूदी लोग जिनहीं पापी कहत हें, उनखे साथ काहे खाना खात हें?” 12यीसु इआ बात काहीं सुनिके उनसे कहिन, “बैद, नीक-सूख मनइन के खातिर नहीं, बलकिन बिमारन के खातिर जरूरी होत हें। 13एसे तूँ पंचे जाइके एखर मतलब का होत हय, इआ जानिल्या: हम बलिदान नहीं, दया चाहित हएन। काहेकि जे कोऊ इआ सोचत हें, कि हम पापी नहिं आहेन उनहीं नहीं, बलकिन पापी लोगन काहीं बोलामँइ आएन हँय।”

उपासे रहँइ के बारे माहीं प्रस्न

(मरकुस 2:18-22; लूका 5:33-39)

14तब यूहन्ना के चेला लोग यीसु के लघे आइके पूँछँइ लागें, “का कारन हय, कि हम पंचे अउर फरीसी लोग एतना उपासे रहित हएन, पय अपना के चेला लोग बेलकुल उपासे नहीं रहँय?” 15तब यीसु उनसे कहिन, “जब तक दुलहा उनखे साथ माहीं हय, त का बराती सोक कइ सकत हें? पय एक दिना उआ समय अई, जब दुलहा बरातिन से अलग कीन जई, उआ समय ऊँ पंचे उपासे रइहँय। 16यीसु उनसे पुनि कहिन, नबा ओन्हा के ठेगरी पुरान ओन्हा माहीं कोऊ नहीं लगाबय, काहेकि नबा धोए से सकिलके पुरान ओन्हा काहीं खींचिके फारि डारत हय। अउर उआ जादा फाट जात हय। 17काहेकि कउनव मनई नबा अंगूर के रस पुरान मसकन माहीं भरिके नहीं धरय, काहेकि अइसा करे से मसकँय फाट जाती हईं, अउर सगला अंगूर के रस बहि जात हय, अउर मसकँय बरबाध होइ जाती हँय; एहिन से मनई नबा अंगूर के रस नई मसकन माहीं भरत हें, इआमेर से नबा अंगूर के रस अउर मसक दोनव बचे रहत हें।”

मरी बिटिया अउर बिमार मेहेरिआ

(मरकुस 5:21-43; लूका 8:40-56)

18यीसु जब उनसे ईं बातँय कहतय रहे हँय, तबहिन एकठे यहूदी सभाघर के मुखिया आबा, अउर उनखे गोड़न गिरिके कहिस, “हमार बिटिया अबहिनय मरी हय, पय अपना हमरे साथय चलिके, आपन हाँथ ओखे ऊपर धइ देई, त उआ जिन्दा होइ जई।” 19यीसु उठिके अपने चेलन समेत उनखे पीछे-पीछे चल दिहिन।

20अउर गइलय माहीं एकठे मेहेरिआ जउने काहीं बारा बरिस से खून बहँइ के बिमारी रही हय, पीछे से आइके यीसु के ओन्हा के छोर काहीं छुइ लिहिस। 21काहेकि उआ अपने मन माहीं इआ कहत रही हय, कि “अगर हम यीसु के ओन्हा काहीं छुइ लेब त नीक होइ जाब।” 22तब यीसु पीछे फिरिके ओही देखिन अउर कहिन, “बिटिया ढाढ़स बाँधा, तूँ हमरे ऊपर बिसुआस किहा हय, एसे नीक होइ गया हय।” अउर उआ मेहेरिआ उहय समय नीक होइगे 23जब यीसु उआ यहूदी सभाघर के मुखिया के घर माहीं पहुँचे त दुख प्रगट करँइ के खातिर कुछ मनइन काहीं बसुरी बजाबत, अउर भीड़ के कुछ लोगन काहीं, रोबत-पीटत देखिन। 24तब यीसु कहिन, “हटि जा, बिटिया मरी नहिं आय, उआ सोबत आय ही।” इआ सुनिके ऊँ पंचे उनखर हँसी उड़ामँइ लागें। 25पय जब भीड़ उहाँ से निकार दीनगे, तब यीसु घर के भीतर जाइके, उआ बिटिया के हाँथ पकड़िन, अउर उआ उठिके ठाढ़ होइगे। 26अउर इआ बात के चरचा उआ सगले देस माहीं फइलिगे।

दुइठे अँधरन काहीं नीक करब

27यीसु जब उहाँ से आँगे जात रहे हँय, तबहिनय गइल माहीं दुइठे आँधर मनई इआ चिल्लात उनहीं पछिआय लिहिन, “हे राजा दाऊद के सन्तान, हमरे ऊपर दया करी!” 28जब यीसु एकठे घर माहीं पहुँचे, त ऊँ आँधर मनई उनखे लघे आएँ; तब यीसु उनसे कहिन, “का तोंहईं पंचन काहीं हमरे ऊपर बिसुआस हय, कि हम तोंहईं नीक कइ सकित हएन?” ऊँ पंचे कहिन, “हाँ, प्रभू।” 29तब यीसु उनखे आँखिन काहीं छुइन अउर कहिन, “तोंहरे बिसुआस के मुताबिक तोंहरे खातिर होय।” 30अउर उनखर आँखी उहय समय खुल गईं, अउर यीसु उनहीं चेतउनी दइके कहिन; “सचेत रहा, कोऊ इआ बात काहीं न जाने पाबय।” 31पय ऊँ पंचे उहाँ से निकरिके सगले देस माहीं यीसु के महिमा काहीं फइलाय दिहिन।

एकठे गूँगा मनई काहीं नीक करब

32जब यीसु उआ घर से बहिरे जात रहे हँय, तबहिनय कुछ लोग एकठे गूँगा मनई काहीं उनखे लघे लइ आएँ, जउने माहीं बुरी आत्मा सकान रही हय। 33अउर जब यीसु उआ मनई से बुरी आत्मा काहीं निकार दिहिन, त उआ गूँगा मनई बोलँइ लाग। इआ देखिके सगले भीड़ के मनई अचरज मानिके कहँइ लागें, “इजराइल देस माहीं अइसा कबहूँ नहीं भ।” 34पय फरीसी लोग कहँइ लागें, “यीसु त बुरी आत्मन के मुखिया अरथात सइतान के मदत से, बुरी आत्मन काहीं मनइन से निकारत हें।”

खुसी के खबर सुनँइ बाले त खुब हें, पय सुनामँइ बाले थोरिन हें

35यीसु सगले सहरन अउर गाँमन माहीं घूमत रहिगें, अउर उनखे सभाघरन माहीं उपदेस देत रहिगें, अउर परमातिमा के राज के खुसी के खबर के प्रचार करत अउर उहाँ के मनइन के हरेकमेर के बिमारिन अउर कमजोरिन काहीं दूर करत रहिगें। 36जब यीसु भीड़ के मनइन काहीं देखिन, त उनहीं, उनखे ऊपर बड़ी दया आइगे, काहेकि ऊँ पंचे, ऊँ गड़रन कि नाईं ब्याकुल अउर भटके रहे हँय, जिनहीं कोऊ चरामँइ बाला नहीं होय, 37तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “पके खेत त खुब हें, पय मजूर थोरिन हें। 38एसे खेत के मालिक परमातिमा से बिनती करा, कि ऊँ आपन खेत काटँय के खातिर मजूर पठय देंय।”

10

खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर यीसु अपने बारा खास चेलन काहीं पठइन

(मरकुस 3:13-19; लूका 6:12-16)

1यीसु अपने बरहँव चेलन काहीं अपने लघे बोलाइके, उनहीं बुरी आत्मन काहीं निकारँइ के अधिकार दिहिन, जउने ऊँ पंचे मनइन से उनहीं निकार सकँय, अउर हरेकमेर के बिमारिन काहीं, अउर मनइन के हरेकमेर के कमजोरिन काहीं दूर करँइ के घलाय अधिकार दिहिन। 2अउर यीसु मसीह के चुने खास बरहँव चेलन के नाम इआमेर से हँय: पहिल समौन जउन पतरस घलाय कहाबत हें, अउर उनखर भाई अन्द्रियास; जब्दी के लड़िका याकूब, अउर उनखर भाई यूहन्ना; 3फिलिप्पुस अउर बरतुल्मय, थोमा, अउर चुंगी लेंइ बाले मत्ती, हलफई के लड़िका याकूब अउर तद्दय, 4समौन जउन जेलोतेस कहाबत रहे हँय, अउर यहूदा इस्करियोती, जउन यीसु काहीं पकड़बाइस घलाय रहा हय।

बरहँव खास चेलन के सेबा के काम

(मरकुस 6:7-13; लूका 9:1-6; 10:4-12)

5यीसु, ईं बरहँव चेलन काहीं इआ हुकुम दइके पठइन, कि “गैरयहूदी लोगन के इलाका माहीं न जया, अउर न सामरी लोगन के कउनव सहर माहीं प्रबेस किहा। 6बलकिन इजराइल के घराना के हेरान गड़रन के लघे बस जया। 7अउर चलत-चलत प्रचार कइके कह्या कि ‘स्वरग के राज नेरेन आइगा हय।’ 8अउर बिमारन काहीं नीक किहा, मरेन काहीं जिआया, कोढ़िन काहीं सुद्ध किहा, अउर बुरी आत्मन काहीं निकाल्या, इआ अधिकार तोंहईं सेंत-मेंत मिला हय, अउर सेंत-मेंत माहीं दिहा। 9अउर अपने झोरा माहीं सोन-चाँदी, अउर तामे के सिक्का न लिहा। 10अउर गइल के खातिर न झोरिया लिहा, न दुइठे कुरथा लिहा, न पनहीं लिहा, अउर न लाठिन लिहा, काहेकि मजूर काहीं ओखे भरन-पोसन के खातिर सगली जरूरत के चीजँय मिलती हँय।

11जब कउनव सहर इआ कि गाँव माहीं जया, त उहाँ पता लगाया, कि काबिल कउन मनई हय? जब तक उहाँ से न जया, त ओहिन के घर माहीं रह्या। 12अउर ओखे घर माहीं जात समय ओही आसिरबाद दिहा। 13अगर उआ घर के मनई काबिल होइहँय, त तोंहार पंचन के आसिरबाद उनहीं मिल जई, पय अगर ऊँ पंचे आसिरबाद के काबिल न होइहँय, त तोंहार पंचन के दीन आसिरबाद तोंहरेन लघे लउटि अई। 14अउर जे कोऊ तोंहईं सोइकार न करय, अउर तोंहरे बातन काहीं न सुनय, त उआ घर इआ सहर से निकरत समय अपने गोड़ेन के धूधुर झार दिहा। 15हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जब परमातिमा न्याय करिहँय, उआ दिन, उआ सहर के दुरदसा, सदोम अउर अमोरा सहर से जादा होई।”

आमँइ बाला संकट

(मरकुस 13:9-13; लूका 21:17-22)

16“देखा, हम तोंहईं पंचन काहीं गड़रन कि नाईं डगरन के बीच माहीं पठइत हएन, एसे तूँ पंचे साँप कि नाईं चतुर अउर परेबा कि नाईं भोले-भाले बना। 17पय मनइन से सचेत रह्या, काहेकि ऊँ पंचे तोंहईं पंचन काहीं लइ जाइके महासभन माहीं सउँपिहँय, अउर तोंहईं अपने पंचइतन माहीं लइ जाइके चाबुक मरिहँय। 18अउर तोंहईं मनई सरकारी अधिकारिन अउर राजन के लघे लइ जइहँय, जउने तूँ पंचे उनखे आँगे, अउर गैरयहूदी लोगन के आँगे हमरे बारे माहीं गबाही द्या। 19जब ऊँ पंचे, तोंहईं पकड़बइहँय, त इआ चिन्ता न किहा कि, हम पंचे कउनमेर से इआ कि का कहब, काहेकि जउन कुछू तोंहईं कहँइ क होई, उआ तोंहईं उहय समय बताय दीन जई। 20काहेकि बोलँइ बाले तूँ पंचे न होइहा, बलकिन तोंहरे पिता परमातिमा के आत्मा तोंहरे अन्दर से बोली।”

21-22“अउर भाई, भाई काहीं अउर बाप लड़िका काहीं, मार डारँइ के खातिर सभन म सउँपिहँय, अउर लड़िका-बिटिया महतारी-बाप के बिरोधी होइके मरबाय डरिहँय। अउर हमरे बात काहीं मानँइ के कारन सगले मनई तोंहसे दुसमनी रखिहँय; पय जे कोऊ अन्त तक धीरज धरे रही, उहय मुक्ती पाई।” 23जब ऊँ पंचे तोंहईं पंचन काहीं एक सहर माहीं सतामँइ लागँय, त दुसरे सहर माहीं भाग जया। हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तूँ पंचे इजराइल देस के सगले सहरन माहीं न जाए पइहा, कि मनई के लड़िका दुबारा आय जई।

24कउनव चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं होय; अउर न दास अपने मालिक से। 25चेला के गुरू के बराबर अउर दास के मालिक के बराबर होब, इहय काफी हय; जब ऊँ पंचे घर के मालिक काहीं सइतान कहत हें, त उनखे घर बालेन के साथ अउरव बुरा बरताव करिहँय।

मनइन से नहीं परमातिमा से डेरा

(लूका 12:2-7)

26यीसु उनसे पुनि कहिन, कि “तूँ पंचे मनइन से न डेरा, जउन कुछू बिचार मनइन के मन माहीं हें, परमातिमा उनहीं प्रगट करिहँय, अउर हमरे जीबन के सगली छिपी बातन काहीं परमातिमा जानत हें। 27जउन कुछू हम तोंहसे अँधिआरे माहीं कहित हएन, ओही तूँ पंचे उँजिआरे माहीं बताया, अउर जउन कुछू तूँ पंचे अपने कानन माहीं धीरे-धीरे सुने हया, ओही घर के छतन से प्रचार किहा। 28अउर जे तोंहरे देंह काहीं नास कइ सकत हें, पय आत्मा काहीं नास नहीं कइ सकँय, उनसे न डेरा, बलकिन उनसे डेरा, जउन तोंहरे देंह अउर आत्मा दोनव काहीं नरक माहीं डारिके नास कइ सकत हें। 29का एक पइसा माहीं दुइठे गउरइआ नहीं बिकती आहीं? तऊ तोंहरे पंचन के पिता परमातिमा के मरजी के बिना, उनमा से एकठेरिव भुँइ माहीं नहीं गिर सकय। 30तोंहरे मूँड़े के सगले बार घलाय गिने हें। 31एसे तूँ पंचे न डेरा; काहेकि पिता परमातिमा के नजर माहीं तूँ पंचे ऊँ गउरइअन से जादा कीमती हया। 32जे कोऊ मनइन के आँगे इआ मान लेई, कि हम यीसु मसीह के चेला आहेन, ओही हमहूँ स्वरग माहीं रहँइ बाले पिता परमातिमा के आँगे इआ मान लेब, कि ईं हमार चेला आहीं। 33पय जे कोऊ मनइन के आँगे इआ कही, कि हम यीसु मसीह के चेला न होंहेन, त हमहूँ घलाय स्वरग माहीं रहँइ बाले अपने पिता परमातिमा के आँगे इआ कहि देब कि ईं हमार चेला न होंहीं।”

34इआ न समझ लिहा, कि हम धरती माहीं मेल-मिलाप करामँइ आएन हय; हम मेल-मिलाप करामँइ नहीं, बलकिन फूट डारँय आएन हँय। 35कि जउने हम बिसुआसी अउर अबिसुआसी माहीं फूट कराय देई अरथात लड़िका अउर बाप माहीं, महतारी अउर बिटिया माहीं, सास अउर पुतऊ माहीं। 36काहेकि मनइन के बइरी ओखे घरय के मनई होइहँय।

37एसे जे कोऊ अपने महतारी-बाप काहीं हमसे जादा पियार मानत हय, उआ हमरे काबिल नहिं आय, अउर जउन अपने लड़िका बिटिआ काहीं, हमसे जादा पियार मानत हय, उहव हमरे काबिल नहिं आय। 38अउर जे कोऊ आपन क्रूस उठाइके हमरे पीछे न चली अरथात दुख-तकलीफ सहिके, हमरे बातन काहीं न मानी, उआ हमार चेला बनँइ के काबिल नहिं आय। 39जे कोऊ अपने प्रान काहीं बचाबत हय, उआ ओही गमाई; पय जे कोऊ हमरे खातिर आपन प्रान तक देंइ काहीं तइआर रही, उआ ओही पुनि पाई।

प्रतिफल

(मरकुस 9:41)

40अउर जे कोऊ तोंहईं पंचन काहीं सोइकार करत हय, उआ हमहीं सोइकार करत हय, अउर जे कोऊ हमहीं सोइकार करत हय, उआ हमहीं पठमँइ बाले परमातिमा काहीं सोइकार करत हय। 41अउर जे कोऊ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले काहीं, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाला जानिके सोइकार करत हय, उआ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले के बदला पाई; अउर जे कोऊ धरमी काहीं धरमी जानिके सोइकार करत हय, उआ धरमी के बदला पाई। 42जे कोऊ ईं छोट से छोट मनइन काहीं हमार चेला जानिके एक गिलास ठंड पानी पिआई, त हम तोंहसे सही कहित हएन, कि उआ मनई एखर प्रतिफल जरूर पाई।

11

1जब यीसु अपने बरहँव चेलन काहीं हुकुम दइ चुके, त ऊँ उनखे सहरन माहीं उपदेस देंइ अउर प्रचार करँइ के खातिर उहाँ से चलेगें।

यीसु अउर यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले

2तब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले, जेल माहीं मसीह के कामन के चरचा सुनिके, अपने चेलन काहीं, उनखे लघे इआ पूँछँइ के खातिर पठइन। 3कि “का आमँइ बाले मसीह अपनय आहेन; कि हम पंचे दुसरे के इन्तजार करी?” 4तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि जउन कुछू तूँ पंचे देखते सुनते हया, जाइके इआ सब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से कहि दिहा, 5कि “आँधर देखत हें, लाँगड़ चलँइ लागत हें, कोढ़ी सुद्ध कीन जात हें, बहिर सुनँय लागत हें, मुरदा जिआए जात हें; अउर कंगालन काहीं खुसी के खबर सुनाई जात ही। 6पय धन्य हय उआ मनई, जउन हमरे ऊपर कीन बिसुआस से कबहूँ नहीं भटकय।”

7जब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के चेला लोग उहाँ से चल दिहिन, तब यीसु यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के बारे माहीं, उहाँ बइठ मनइन से कहँइ लागें; “तूँ पंचे गाँव से दूरी सुनसान जघा माहीं का देखँइ गया तय? का हबा से हालत सरकन्डा काहीं? 8पुनि तूँ पंचे का देखँइ गया तय? का कोमर ओन्हा पहिरे मनई काहीं? देखा, जे कोमर ओन्हा पहिरत हें, ऊँ पंचे राजमहलन माहीं रहत हें। 9त पुनि काहे गया तय? का कउनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले काहीं देखँय? हाँ, हम तोंहसे कहित हएन, बलकिन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले से बड़े काहीं।

10ईं उँइन आहीं, जिनखे बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि ‘देखा, हम अपने दूत काहीं तोंहसे पहिले पठइत हएन, जउन तोंहरे खातिर मनइन काहीं तइआर करिहँय।’

11हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जउन बरी-बिआही मेहेरिअन से पइदा भें हँय, उनमा से यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से बढ़िके, कोऊ नहिं भ आय, पय जउन स्वरग राज माहीं छोट से छोट हें, ऊँ यूहन्ना से बढ़िके हँय।” 12यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के समय से लइके आज तक स्वरग के राज माहीं जाँइ के खातिर मनई खुब कोसिस कइ रहे हँय, पय जउने मनइन माहीं उत्साह हय, उँइन ओखे ऊपर अधिकार पाबत हें। 13यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले तक परमातिमा के सगले सँदेस बतामँइ बाले अउर मूसा के बिधान घलाय इआ समय के बारे माहीं केबल भबिस्सबानी करत रहिगें। 14अउर चाहा त तूँ पंचे इआ मान सकते हया, कि एलिय्याह नबी जउन आमँइ बाले रहे हँय, ऊँ ईंन आहीं। 15जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।

16हम इआ समय के मनइन के तुलना केसे करी, कि ऊँ केखे कि नाईं हें? ऊँ पंचे ऊँ लड़िकन कि नाईं हें, जउन बजार माहीं बइठे एक दुसरे से गोहराइके कहत हें: 17“हम पंचे तोंहरे खातिर बसुरी बजाएन, अउर तूँ पंचे नहीं नाच्या। अउर हम पंचे तोंहरे खातिर सोक के गाना गाएन, अउर तूँ पंचे छाती पीटके नहीं रोया।” 18काहेकि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले न खातय आएँ, अउर न पीतय आएँ, पय ऊँ पंचे कहत हें कि “उनखे भीतर बुरी आत्मा ही।” 19अउर मनई के लड़िका, खात-पिअत आबा हय, अउर ऊँ पंचे कहत हें कि, “देखा, पेटू अउर पिआगी मनई काहीं, जउन चुंगी लेंइ बालेन, अउर पापी मनइन के साथी आय।” पय ग्यान अपने कामन से सच्चा ठहराबा ग हय।

बिसुआस न करँइ बाले सहरन के मनइन काहीं धिक्कार

(लूका 10:13-15)

20तब यीसु ऊँ सहरन काहीं धिक्कारँय लागें, जउने माहीं ऊँ खुब सामर्थ के काम किहिन रहा हय; काहेकि उहाँ के रहँइ बाले मनई अपने-अपने मनन काहीं नहीं बदलिन रहा आय। 21खुराजीन सहर, बैतसैदा सहर; तोंहईं धिक्कार हय; काहेकि जउन सामर्थ के काम तोंहरे बीच माहीं कीन गें तय, अगर ऊँ सूर अउर सैदा प्रदेसन माहीं कीन जातें, त उहाँ के मनई टाट ओढ़िके अउर राख माहीं बइठिके, पहिलेन अपने पापन काहीं मानिके पाप करब छोंड़ि देतें। 22पय जब परमातिमा न्याय करिहँय, उआ दिन तोंहार दुरदसा सूर अउर सैदा प्रदेसन से जादा होई। 23अउर हे कफरनहूम सहर के मनइव, तूँ पंचे जउन सोचते हया, कि हमहीं परमातिमा अकास तक ऊँच करिहँय? बेलकुल नहीं, परमातिमा तोंहईं पताल तक नीच करिहँय; जउन सामर्थ के काम तोंहरे बीच माहीं कीन गे हँय, अगर ऊँ सदोम सहर माहीं कीन जातें, त उआ आज तक बना रहत। 24पय हम तोंहसे कहित हएन, कि जब परमातिमा न्याय करिहँय, उआ दिन तोंहार दुरदसा सदोम सहर से जादा होई।

बोझ से दबे मनइन के खातिर आराम

(लूका 10:21,22)

25उहय समय यीसु कहिन, “हे पिता परमातिमा स्वरग अउर धरती के प्रभू, हम अपना काहीं धन्यबाद देइत हएन, कि अपना ईं बातन काहीं ग्यानिन अउर अपने काहीं समझदार मानँइ बालेन काहीं नहीं बताएन, बलकिन छोट लड़िकन कि नाईं अपना के बचन के ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं बतायन हय। 26हाँ, हे पिता परमातिमा, काहेकि अपना काहीं इहय नीक लाग हय। 27हमार पिता परमातिमा सब कुछ हमहीं सँउप दिहिन हीं; अउर कोऊ नहीं जानँय, कि लड़िका को आहीं, केबल पिता जानत हें, अउर पिता को आहीं इहव कोऊ नहीं जानँय, उनहीं केबल लड़िका जानत हें, अउर लड़िका जेही बतामँइ चाही उहय जानी।”

28“हे थके-मादे अउर बोझ से दबे सगले मनइव, हमरे लघे आबा; हम तोंहईं पंचन काहीं अराम देब। 29हमार जुँआ अपने ऊपर उठाय ल्या; अउर हमसे सिखा; काहेकि हम नम्र अउर मन माहीं दीन हएन: इआमेर से तूँ पंचे अपने-अपने मनन माहीं आराम पइहा। 30काहेकि उआ जुँआ जउन हम तोंहईं पंचन काहीं दइ रहेन हय, खुब सरल हय। अउर उआ बोझ जउन हम तोंहरे ऊपर डार रहेन हय, हलुक हय।”

12

यीसु पबित्र दिन के घलाय प्रभू आहीं

(मरकुस 2:23-28; लूका 6:1-5)

1यीसु पबित्र दिन काहीं अपने चेलन के साथ, खेतन के किनारे-किनारे जात रहे हँय, अउर उनखे चेलन काहीं भूँख लगी रही हय, एसे ऊँ पंचे गोहूँ के बाली टोरि-टोरिके खाँइ लागें। 2तब फरीसी लोग उनहीं देखिके, यीसु से कहँइ लागें, “देखी, अपना के चेला लोग उआ काम काहे करत हें, जउन मूसा के बिधान के मुताबिक पबित्र दिन काहीं करब उचित नहिं आय।” 3तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “काहे तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं इआ नहीं पढ़े आह्या, कि जब राजा दाऊद, अउर उनखर साथी भूँखे रहे हँय, त ऊँ का किहिन तय? 4ऊँ परमातिमा के घर माहीं घुसिके, परमातिमा काहीं भेंट चढ़ाई रोटिन काहीं कइसन खाइन तय? जबकि उनहीं अउर उनखे साथिन काहीं ऊँ रोटिन काहीं खाब मूसा के बिधान के खिलाफ रहा हय। काहेकि ऊँ भेंट के रोटिन काहीं केबल याजक लोग खाय सकत रहे हँय।” 5अउर काहे तूँ पंचे मूसा के बिधान माहीं नहीं पढ्या, कि “याजक पबित्र दिन काहीं मन्दिर म पबित्र दिन के बिधी काहीं टोरे के बादव, निरदोस ठहरत हय।” 6पय हम तोंहसे पंचन से बताइत हएन, कि “इहाँ ऊँ हें, जउन मन्दिर से बढ़िके हें।” 7अउर अगर तूँ पंचे इआ बात के मतलब जन त्या, कि “हम दया करँइ से प्रसन्न होइत हएन, बलिदान से नहीं12:7 होसे 6:6।” त तूँ पंचे निरदोस काहीं दोसी न ठहरउ त्या। 8इआ जानिल्या, कि “मनई के लड़िका पबित्र दिन के घलाय प्रभू आहीं।”

एकठे मनई के झुरान हाँथ काहीं नीक करब

(मरकुस 3:1-6; लूका 6:6-11)

9यीसु उहाँ से चलिके यहूदी लोगन के सभाघर माहीं गें। 10उहाँ एकठे मनई रहा हय, जउने के एकठे हाँथ झुरान रहा हय। एसे उहाँ बइठ मनई यीसु के ऊपर दोस लगामँइ के खातिर उनसे पूँछिन, “का पबित्र दिन काहीं कउनव बिमार मनई काहीं नीक करब उचित हय?” 11तब यीसु उनसे कहिन, “तोंहरे पंचन म से अइसन को होई, कि जेखे एकठेरिन गाड़र होय, अउर उआ पबित्र दिन काहीं गड्ढा माहीं गिर जाय, त का उआ ओही पकड़िके बहिरे न निकारी? 12मनई के कीमत त गाड़र से बढ़िके हय; एसे मूसा के बिधान के मुताबिक पबित्र दिन काहीं भलाई करब उचित हय।” 13तब यीसु उआ मनई से कहिन, “आपन हाँथ बढ़ाबा।” अउर उआ आपन हाँथ बढ़ाइस तबहिनय ओखर हाँथ दुसरे हाँथ कि नाईं निकहा होइगा। 14तब फरीसी लोग सभाघर से बहिरे जाइके, यीसु के बिरोध माहीं साहुत करँइ लागें, कि यीसु काहीं कउनमेर से मार डारा जाय?

परमातिमा के चुना सेबक

15यीसु इआ बात काहीं जानिके उहाँ से चल दिहिन; तब खुब मनई उनहीं पछिआय लिहिन, अउर यीसु सगले जनेन काहीं नीक किहिन। 16अउर यीसु उनहीं चेतउनी दइके कहिन, कि हमरे बारे माहीं न बताबा, कि “हम को आहेन।” 17इआ बात यीसु एसे कहिन, कि जउन बचन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के व्दारा कहा ग रहा हय, उआ पूर होय: 18कि “देखा, 12:18 यसा 42:1-4ईं हमार सेबक आहीं, जिनहीं हम चुनेन हय; इनसे हम खुब प्रेम करित हएन, अउर इनसे हमार मन खुस हय: हम आपन आत्मा इनखे ऊपर डारब; अउर ईं गैरयहूदी लोगन काहीं परमातिमा के न्याय के खुसी के खबर सुनइहँय।

19ईं न त कोहू से लड़ाई-झगड़ा करिहँय, अउर न चन्डे से चिल्लाबय करिहँय; अउर न कोऊ बजारन माहीं इनखर बोलय सुनी।

20ईं कुचरे सरकन्डा काहीं न टोरिहँय; अउर धुँआ देत बाती काहीं न बुझइहँय, जब तक न्याय के जीत न होइ जाय, डँटे रइहँय।

21अउर गैरयहूदी लोग उनखे नाम के ऊपर आसा रखिहँय।”

यीसु अउर बालजबूल

(मरकुस 3:20-30; लूका 11:14-23)

22जब यीसु ईं बातन काहीं कहतय रहे हँय, तबहिनय कुछ लोग एकठे आँधर अउर गूँगा मनई काहीं जउने माहीं बुरी आत्मा सकान रही हय, उनखे लघे लइ आएँ; अउर यीसु ओही नीक कइ दिहिन, तब उआ मनई देखँइ अउर बोलँइ लाग। 23इआ देखिके सगले मनई अचरज मानिके कहँइ लागें, “का ईं राजा दाऊद के सन्तान होइ सकत हें?” 24पय फरीसी लोग इआ बात काहीं सुनिके कहँइ लागें, कि “यीसु त बुरी आत्मन के मुखिया अरथात सइतान के मदत से, बुरी आत्मन काहीं मनइन से निकारत हें।” 25पय यीसु उनखे मन के बात काहीं जानिके कहिन, कि “जउने राज के मनई आपस माहीं लड़ाई-झगड़ा करँइ लागत हें, त उआ राज के नास होइ जात हय; अउर अगर कउनव सहर इआ कि घर माहीं फूट परि जात ही, त उआ बरबाध होइ जात हय। 26त अगर सइतानय, सइतान काहीं निकारी, त उआ अपनय बिरोधी होइ जई; पुनि सइतान के राज कइसा बना रही? ओखर त नासय होइ जई। 27अगर हम सइतान के मदत से बुरी आत्मन काहीं निकारित हएन, त तोंहार सन्तान केखे मदत से बुरी आत्मन काहीं निकारत हें? एसे उँइन तोंहार फँइसला करिहँय। 28पय अगर हम परमातिमा के आत्मा के मदत से, बुरी आत्मन काहीं निकारित हएन, त तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि परमातिमा के राज तोंहरे लघे पहुँचिगा हय। 29सोचा कउनव मनई, कउनव बलमान मनई के घर माहीं घुसिके ओखर धन-सम्पत्ती कइसन लूट सकत हय, जब तक कि उआ मनई, उआ बलमान मनई काहीं बाँधि न देय, ओही बाँधे के बादय, उआ मनई ओखे घर काहीं लूट सकत हय। 30जे हमार बात नहीं मानय, उआ हमरे बिरोध माहीं काम करत हय, उआ मनइन काहीं हमरे लघे नहीं ले आबय, बलकिन उनसे पाप कर बाइके हमसे दूर करत हय। 31एसे हम तोंहसे कहित हएन, कि मनइन के हरेकमेर के पाप अउर बुराई माफ कइ दीन जइहँय, पय जे कोऊ पबित्र आत्मा के बुराई करी ओखर इआ पाप कबहूँ माफ न कीन जई। 32अउर जे कोऊ मनई के लड़िका के बिरोध माहीं कउनव बात कही, ओखर इआ अपराध माफ कइ दीन जई, पय जे कोऊ पबित्र आत्मा के बिरोध माहीं कुछू कही, त ओखर इआ अपराध न त इआ संसार माही माफ कीन जई, अउर न त स्वरग माहीं माफ कीन जई।”

बिरबा अउर ओखर फर

(लूका 6:43-45)

33“अगर बिरबा काहीं निकहा कहा त ओखे फरव काहीं निकहा कहा, इआ कि बिरबा काहीं खराब कहा, त ओखे फरव काहीं खराब कहा, काहेकि बिरबा अपने फरय से पहिचाना जात हय। 34हे साँप के बच्चन कि नाईं बुरे मनइव, तूँ पंचे बुरे होइके कइसन निकही बात कहि सकते हया? काहेकि जउन मन माहीं भरा हय, उहय मुँहे से निकरत हय। 35निकहा मनई अपने मन के निकहे भन्डार से निकही बात निकारत हय; अउर बुरा मनई अपने मन के बुरे भन्डार से बुरी बात निकारत हय।” 36अउर हम तोंहसे पंचन से इहव कहित हएन, कि “जउन-जउन बुरी बातँय मनई कइहँय, उनहीं परमातिमा के न्याय करँइ के दिन हरेक निकम्मी बातन के लेखा देंइ परी। 37काहेकि तूँ पंचे अपनेन बातन के कारन निरदोस, अउर अपनेन बातन के कारन दोसी ठहराए जइहा।”

यीसु से स्वरग के अदभुत चिन्हारी देखामँइ के माँग

(मरकुस 8:11,12; लूका 11:29-32)

38इआ बात काहीं सुनिके मूसा के बिधान सिखामँइ बाले कुछ जने, अउर कुछ फरीसी लोग यीसु से कहिन, “हे गुरू, हम अपना से एकठे अदभुत चिन्हारी देखँइ चाहित हएन।” 39इआ सुनिके यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “इआ जुग के बुरे अउर ब्यभिचारी लोग अदभुत चिन्हारी ढूँढ़त हें, पय योना नबी के जीबन माहीं जउन अदभुत काम परमातिमा किहिन तय, ओखे अलाबा अउर कउनव अदभुत चिन्हारी उनहीं न देखाई जई। 40जइसन योना नबी तीन दिन अउर तीन रात तक मछरी के पेटे माहीं रहे हँय, उहयमेर मनई के लड़िका घलाय तीन दिना तक रातव-दिन धरती के भीतर रही। 41नीनवे सहर के मनई, परमातिमा के न्याय करँइ के दिन, इआ समय के मनइन काहीं दोसी ठहरइहँय, काहेकि नीनवे सहर के मनई योना के प्रचार सुनिके, पाप करब छोंड़ दिहिन तय, अउर देखा इहाँ ऊँ हें, जउन योना से घलाय बड़े हँय। 42इजराइल देस के दक्खिन दिसा के सीबा देस के रानी, परमातिमा के न्याय करँइ के दिन, इआ समय के मनइन के साथ ठाढ़ होइके, उनहीं दोसी ठहरइहँय, काहेकि ऊँ खुब दूरी से इजराइल के राजा सुलैमान के ग्यान के बातँय सुनँय के खातिर आई रही हँय, अउर देखा इहाँ ऊँ हें, जउन राजा सुलैमान से घलाय बड़े हँय।”

अधूरे सुधार से बिपत्ती के आउब

(लूका 11:24-26)

43“जब बुरी आत्मा मनई से बहिरे निकर जात ही, तब अराम करँइ के खातिर झुरान जघा ढूँढ़त फिरत ही, अउर उआ बुरी आत्मा जब झुरान जघा नहीं पाबय। 44त कहत ही, कि ‘हम अपने उहय घर माहीं लउटि जाब, जहाँ से निकरिके आएन तय।’ अउर उआ बुरी आत्मा लउटिके उआ घर काहीं खाली, झारा बटोरा, अउर सजा-सजाबा पाबत ही। 45तब उआ जाइके, अपने से अउर बुरी सातठे आत्मन काहीं अपने साथ लइ आबत ही, अउर उआ मनई के भीतर सगली सकाइके रहँय लगती हँय, अउर उआ मनई के हालत पहिले से अउर जादा खराब होइ जात ही। इआ समय के बुरे मनइन के दसा घलाय इहइमेर होई।”

यीसु के महतारी अउर भाई

(मरकुस 3:31-35; लूका 8:19-21)

46जब यीसु भीड़ के मनइन से ईं बातँय करतय रहे हँय, कि तबहिनय उनखर महतारी अउर भाई लोग बहिरे ठाढ़ भें, अउर ऊँ पंचे यीसु से बात करँइ चाहत रहे हँय। 47तब कोऊ आइके यीसु से बताइस; कि देखी, अपना के महतारी अउर भाई लोग बहिरे ठाढ़ हें, अउर अपना से बात करँइ चाहत हें। 48इआ सुनिके यीसु बोलामँइ बालेन से कहिन, “हमार महतारी अउर भाई को आहीं?” 49अउर अपने चेलन कइती अँगुरि आइके कहिन; “देखा हमार महतारी अउर भाई लोग ईं पंचे आहीं। 50काहेकि जे कोऊ स्वरग माहीं रहँइ बाले हमरे पिता परमातिमा के मरजी के मुताबिक चलत हय, उहय हमार भाई, बहिनी अउर महतारी आय।”

13

बीज बोमँइ बाले किसान के उदाहरन

(मरकुस 4:1-9; लूका 8:4-8)

1उहय दिन यीसु घर से बहिरे निकरें अउर जाइके झील के किनारे बइठिगें। 2तब उनखे लघे अइसन बड़ी भीड़ एकट्ठा होइगे, कि यीसु काहीं झील म एकठे नाव म चढ़िके बइठँय परिगा, अउर सगली भीड़ भुँइन माहीं झील के किनारे ठाढ़ रहिगे। 3अउर यीसु उदाहरन दइ-दइके उनहीं खुब बातँय सिखामँइ लागें, अउर कहिन, कि “देखा, एकठे बीज बोमँइ बाला बीज बोमँइ निकरा 4अउर बोबत समय कुछ बीज गइल के किनारे गिरिगें, अउर पच्छी आइके उनहीं खाय लिहिन। 5कुछ बीज पथरही भुँइ माहीं गिरें, जहाँ उनहीं खुब माटी नहीं मिली, अउर गहिल माटी न मिलँइ के कारन ऊँ हरबी जामि आएँ, 6अउर जब सुरिज उआ, तब ओखे तेज घाम के कारन ऊँ जरिगें, अउर जर मजबूत न होंइ के कारन झुराइगें। 7कुछ बीज जरबइलन म गिरें, अउर जामि आएँ, पय ऊँ जरबइला बाढ़िके उनहीं दबाय लिहिन। 8पय कुछ बीज निकही भुँइ माहीं गिरें, अउर जामि आएँ अउर बाढ़िके खुब फरें; कउनव बिरबा सव गुना, कउनव साठ गुना, कउनव तीस गुना। 9जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”

उदाहरनन के उद्देस्य

(मरकुस 4:10-12; लूका 8:9,10)

10चेला लोग यीसु के लघे आइके पूछँइ लागें, कि “अपना भीड़ के मनइन से काहे उदाहरनन माहीं बात करित हएन?” 11तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “परमातिमा के राज के जउने बातन काहीं दूसर लोग नहीं जानँय, ऊँ बातन काहीं परमातिमा तोहईं समझाइन हीं, पय उनहीं नहीं।” 12काहेकि “जे कोऊ परमातिमा के बचन काहीं अउर निकहा से जानँइ के कोसिस करत हय, परमातिमा ओही अउर आत्मिक ग्यान देत हें, पय जे कोऊ परमातिमा के बचन काहीं जानँइ के कोसिस नहीं करय, त ओखे लघे जउन ग्यान रहत हय, उहव बिसरि जात हय।” 13एसे हम उनसे उदाहरनन माहीं बात करित हएन, काहेकि “ऊँ पंचे परमातिमा के महिमा काहीं देखत हें”, पय देखेव से जाने नहीं पामँय, अउर “अपने कानन से सुनत हें, पय सुनेव से नहीं समझे पामँय।” 14जउने उनखे बारे माहीं यसायाह नबी के व्दारा बताबा, परमातिमा के सँदेस पूर होय: कि “तूँ पंचे अपने कान से त सुनिहा, पय समझे न पइहा; अउर अपने आँखिन से देखिहा, पय तोंहरे समझ माहीं न अई।

15काहेकि इनखर मन मोट होइगा हय, अउर इनहीं कम सुनाँय लाग हय, अउर ईं पंचे आपन आँखी मूँद लिहिन ही; कहँव अइसा न होय कि ईं पंचे अपने आँखिन से देखँइ, अउर कान से सुनँय अउर मन से समझँय, अउर पाप करब छोंड़ि देंय, अउर हम इनहीं नीक कइ देई13:15 यसा 6:9,10।”

16पय धन्य हईं तोंहार पंचन के आँखी, जउन परमातिमा के महिमा काहीं देखती हईं; अउर धन्य हें, तोंहार पंचन के कान जउन बचन सुनत हें। 17काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, कि बहुत से परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले, अउर धरमी लोग, इआ चाहत रहे हँय, कि जउन बातँय तूँ पंचे देखते हया, देखी, पय नहीं देखे पाइन, अउर जउन बातँय तूँ पंचे सुनते हया, सुनी, पय नहीं सुने पाइन।

बीज बोमँइ बाले किसान के उदाहरन के मतलब

(मरकुस 4:13-20; लूका 8:11-15)

18“अब तूँ पंचे बीज बोमँइ बाले के उदाहरन के मतलब का आय, सुना। 19जे कोऊ परमातिमा के राज के बचन काहीं सुनिके, नहीं समझे पाबय, त ओखे मन माहीं जउन कुछू बचन बोबा ग रहा हय, ओही उआ दुस्ट सइतान आइके बिसराय देत हय; ईं उँइन मनई आहीं, जउन गइल के किनारे बोए बीज कि नाईं होत हें। 20अउर उहयमेर कुछ लोग पथरही जमीन माहीं बोए बीज कि नाईं होत हें, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिके तुरन्तय मारे उराव के अपनाय लेत हें। 21पय अपने जीबन माहीं परमातिमा के बचन काहीं गहराई से लागू नहीं करँइ, एसे कुछ दिनन तक मानत हें, पय बाद माहीं जबहिन परमातिमा के बचन के कारन दुख अउर कस्ट मिलत हें, त ऊँ पंचे हरबिन परमातिमा के बचन काहीं मानब छोंड़ि देत हें। 22अउर जउन जरबइलन माहीं बोए बीज कि नाईं हें, ऊँ ईं आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिन, पय संसारिक चिन्ता, अउर धन के लालच माहीं फँसिके, परमातिमा के बचन काहीं दबाय देत हें, अउर ऊँ पंचे बिना फर के बिरबा कि नाईं होइ जात हें। 23पय जउन निकही भुँइ माहीं बोए बीज कि नाईं होत हें, ऊँ पंचे ईं आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिके पूरे बिसुआस के साथ अपनाबत हें, अउर कोऊ तीस गुना, कोऊ साठ गुना, अउर कोऊ सव गुना फर लइ आबत हें।”

जंगली बीज के उदाहरन

24यीसु उनहीं पंचन काहीं एकठे अउर उदाहरन बताइन: कि “स्वरग के राज उआ मनई कि नाईं हय, जउन अपने खेत माहीं निकहा बीज बोइस। 25पय जब सगले मनई सोबत रहे हँय, तब ओखर बइरी आइके गोहूँ के बीच माहीं जंगली बीज बोइके चला ग। 26जब गोहूँ जाम, अउर उनमा बाली निकरीं, तब खेत माहीं जंगली बीज के बिरबा घलाय देखाँइ लागें। 27तब खेत के मालिक के लघे, ओखर दास आइके कहँइ लागें, कि ‘हे मालिक, अपना त खेत माहीं निकहा बीज बोयन रहा हय, पय खेत माहीं जंगली बीज के बिरबा कहाँ से आइगें?’ 28तब उआ मालिक उनसे कहिस, कि ‘इआ काम हमरे कउनव बइरी के आय।’ इआ सुनिके ओखर दास कहिन, कि ‘अगर अपना के मरजी होय त हम पंचे जाइके ऊँ जंगली बीज के बिरबन काहीं उँखाड़ डारी।’ 29तब उआ मालिक कहिस, ‘अइसा न करा, कहँव अइसा न होय, कि तूँ पंचे जंगली बीज के बिरबन काहीं उखाड़त माहीं, उनखे साथ गोहूँ के बिरबन काहीं घलाय उँखाड़ ल्या। 30कटाई तक दोनव काहीं एक साथय बाढ़ँय द्या, अउर जब कटाई के समय अई, तब हम काटँय बालेन से कहि देब: कि पहिले जंगली बीज के बिरबन काहीं काटिके उनहीं जलामँइ के खातिर बोझा बाँधि ल्या, अउर गोहूँ काहीं हमरे भन्डार घर माहीं एकट्ठा करा।”

राई के बीज के उदाहरन

(मरकुस 4:30-32; लूका 13:18,19)

31यीसु पुनि उनहीं पंचन काहीं एकठे अउर उदाहरन बताइन, कि “स्वरग के राज एकठे राई के दाना कि नाईं हय, जउने काहीं लइके कउनव मनई अपने खेत माहीं बोय दिहिस। 32उआ राई के दाना सगले बीजन से छोट त होत हय, पय जब उआ जामिके बाढ़ जात हय, त उआ सगले साग-सब्जिन से बड़ा होइ जात हय, अउर अइसन बिरबा होइ जात हय, कि अकास माहीं उड़ँइ बाले पच्छी आइके ओखे डेरइअन माहीं बसेर डारत हें।”

खमीर के उदाहरन

(लूका 13:20,21)

33यीसु उनहीं पंचन काहीं एकठे अउर उदाहरन बताइन; कि “स्वरग के राज खमीर कि नाईं हय, जउने काहीं थोरी क लइके कउनव मेहेरिआ, तीन पसेरी पिसान माहीं मिलाय दिहिस, अउर उआ धीरे-धीरे सगले पिसान माहीं फइलिके ओही आमिल कइ दिहिस अउर बढ़ाय दिहिस।”

उदाहरनन के उपयोग के बारे माहीं यीसु के बताउब

(मरकुस 4:33,34)

34यीसु ईं सगली बातन काहीं उदाहरनन माहीं मनइन से बताइन, अउर बिना उदाहरन के कउनव बात उनसे नहीं बताबत रहे आहीं। 35अइसन यीसु एसे करत रहे हँय, जउने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के व्दारा जउन बचन कहा ग रहा हय, उआ पूर होय, कि

“हम हरेक बातन काहीं उदाहरन के व्दारा बताउब, अउर हम ऊँ बातन काहीं घलाय बताउब, जउन संसार के बनामँइ से पहिले गुप्त रही हँय।”

जंगली बीज के उदाहरन के बखान

36ओखे बाद यीसु सगली भीड़ काहीं उहँइ छोंड़िके, जहाँ रहत रहे हँय उआ घर माहीं आएँ, तब उनखर चेला लोग उनखे लघे आइके कहिन, “अपना खेत माहीं बोए जंगली बीज के उदाहरन के बारे माहीं हमहीं समझाई।” 37तब यीसु उनसे कहिन, कि “निकहा बीज काहीं बोमँइ बाला मनई के लड़िका आय। 38खेत संसार आय, अउर निकहा बीज परमातिमा के राज के सन्तान आहीं, अउर जंगली बीज दुस्ट के सन्तान आहीं। 39जउन बइरी आइके उनहीं बोइस ही, उआ सइतान आय; अउर कटाई करब संसार के अन्त आय: अउर काटँय बाले स्वरगदूत आहीं। 40एसे जइसन जंगली बीज के बिरबन काहीं काटिके जलाबा जात हय, उहइमेर संसार के अन्त माहीं होई। 41मनई के लड़िका अपने स्वरगदूतन काहीं पठइहँय, अउर ऊँ पंचे उनखे राज म से ऊँ सगलेन काहीं जउन दुसरे मनइन काहीं पाप करँइ के खातिर उकसाबत हें, अउर कुकर्मिन काहीं घलाय एकट्ठा करिहँय। 42अउर उनहीं आगी के कुंड माहीं डरिहँय, उहाँ रोउब अउर दाँत पीसब भर रहि जई। 43उआ समय परमातिमा के नजर माहीं निरदोस मनई, अपने पिता परमातिमा के राज माहीं, सुरिज कि नाईं चमकिहँय; जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”

भुँइ माहीं गाड़े धन के उदाहरन

44यीसु उनसे एकठे अउर उदाहरन कहिन, कि “स्वरग के राज खेत माहीं गाड़े धन कि नाईं हय, जउने काहीं कउनव मनई पाइस, अउर पुनि गाड़ दिहिस, अउर मारे खुसी के जाइके आपन सब कुछ बेंचिके उआ खेत काहीं खरीद लिहिस।”

अनमोल मोती के उदाहरन

45यीसु उनहीं एकठे अउर उदाहरन बताइन, कि “स्वरग के राज एकठे बइपारी कि नाईं हय, जउन निकहे मोती के खोज माहीं रहा हय। 46जब ओही एकठे अनमोल मोती मिला, त उआ जाइके आपन सब कुछ बेंच डारिस अउर उआ मोती काहीं खरीद लिहिस।”

एकठे बड़े जाल के उदाहरन

47यीसु उनहीं एकठे अउर उदाहरन बताइन, कि “स्वरग के राज एकठे बड़े जाल कि नाईं हय, जउन समुद्र माहीं डारा ग, अउर हरेकमेर के मछरिन काहीं समेटि लाबा। 48अउर जब जाल भरिगा, तब मछरी पकड़ँइ बाले ओही किनारे माहीं खींचि लाएँ, अउर बइठिके निकही-निकही मछरिन काहीं त टोपरिन माहीं भर लिहिन, पय खराब-खराब मछरिन काहीं फेंकि दिहिन। 49संसार के अन्त माहीं इहइमेर होई, स्वरगदूत आइके दुस्ट मनइन काहीं धरमिन से अलग करिहँय। 50अउर उनहीं आगी के कुंड माहीं डार देइहँय, उहाँ रोउब अउर दाँत पीसब भर रहि जई।”

पुरान अउर नई सिच्छा के महत्व

51यीसु उनसे पुनि कहिन, कि “का तूँ पंचे इआ बात काहीं समझ गया? ऊँ पंचे कहिन, कि हाँ।” 52तब यीसु उनसे कहिन, कि “एसे हरेक यहूदी बिधान सिखामँइ बाला, जउन स्वरगराज के चेला बना हय, उआ, घर के उआ मालिक कि नाईं हय, जउन अपने भन्डार से नई अउर पुरान चीजँय निकारत हय।”

नासरत गाँव माहीं यीसु के अपमान

(मरकुस 6:1-6; लूका 4:16-30)

53जब यीसु सगले उदाहरन बताय चुके, तब उहाँ से चलेगें। 54अउर अपने गाँव नासरत माहीं आइके, उनखे सभाघर माहीं अइसन उपदेस देंइ लागें; कि ऊँ पंचे उनखे उपदेस काहीं सुनिके चउआइगें, अउर कहँइ लागें; कि “इनहीं इआ ग्यान कहाँ से मिलिगा, अउर अचरज के काम करँइ के सामर्थ कहाँ से मिली हय? 55काहे ईं बढ़ई के लड़िका न होंहीं? अउर का इनखे महतारी के नाम मरियम, अउर इनखे भाइन के नाम याकूब, यूसुफ, समौन अउर यहूदा नहिं आय? 56अउर का इनखर सगली बहिनी हमरे पंचन के बीच माहीं नहीं रहतीं? त पुनि इनहीं इआ सब कहाँ से मिलिगा?” 57एसे ऊँ पंचे यीसु के ऊपर बिसुआस नहीं किहिन, पय यीसु उनसे कहिन, कि “कउनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले के, अपने गाँव अउर घर-परिबार काहीं छोंड़िके अउर कहँव अपमान नहीं होय।” 58अउर ऊँ पंचे यीसु के ऊपर बिसुआस नहीं किहिन, इआ कारन से यीसु उहाँ खुब अचरज के काम नहीं किहिन।

14

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के कतल

(मरकुस 6:14-29; लूका 9:7-9)

1हेरोदेस राजा अपने भाई फिलिप्पुस के मेहेरिआ हेरोदियास के कारन, यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले काहीं पकड़बाइके बँधबाइन, अउर ओखे बाद जेल माहीं डरबाय दिहिन तय। 2काहेकि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले कइअक बेरकी उनसे कहिन तय, कि “अपने भाई के जिन्दय ओखे मेहेरिआ काहीं राखब तोंहईं उचित नहिं आय।” 3इआ कारन से हेरोदेस राजा उनहीं मारि डारँय चाहत रहे हँय, पय मनइन से डेरात रहे हँय, काहेकि ऊँ पंचे यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले काहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले मानत रहे हँय। 4पय जब राजा हेरोदेस के जनम दिन आबा, तब हेरोदियास के बिटिया सभा माहीं नाच देखाइके, हेरोदेस राजा काहीं खुसी कइ दिहिस। 5एसे हेरोदेस राजा कसम खाइके बचन दिहिन, कि “तूँ जउन कुछू मगिहा, हम ओही तोहईं जरूर देब।” 6तब उआ बिटिया अपने महतारी हेरोदियास के उकसाए से कहिस, कि “अपना हमहीं यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के मूँड़ टठिआ माहीं धइके मगबाय देई।” 7इआ सुनिके राजा हेरोदेस खुब दुखी भें, पय अपने कसम खाँय के कारन, अउर साथ माहीं बइठँय बाले के कारन, सेबकन काहीं हुकुम दिहिन कि, “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के मूँड़ कटबाइके, उआ बिटिया काहीं दइ दीन जाय।” 8तब ऊँ सिपाहिन काहीं जेल माहीं पठइके, यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के मूँड़ कटबाय लिहिन। 9अउर उनखर मूँड़ टठिया माहीं धइके लइ आबा ग, अउर उआ बिटिया काहीं दइ दीनगा; तब उआ बिटिया ओही अपने महतारी के लघे लइगे। 10इआ बात काहीं जानिके यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के चेला लोग, आइके उनखे लहास काहीं लइ जाइके गाड़ दिहिन, अउर जाइके इआ बात यीसु काहीं बताइन।

11जब चउथाई देस के राजा हेरोदेस, यीसु के बारे माहीं सुनिन। 12तब अपने सेबकन से कहिन, “ईं यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले आहीं, जउन मरेन म से जिन्दा होइगे हँय, इहयकारन से ऊँ अचरज के काम कइके देखाबत हें।”

यीसु पाँच हजार मनइन काहीं खाना खबाइन

(मरकुस 6:30-44; लूका 9:10-17; यूहन्ना 6:1-14)

13जब यीसु इआ बात काहीं सुनिन, त नाव म चढ़िके सुनसान जघा माहीं एकान्त माहीं चलेगें; अउर इआ बात काहीं खुब मनई जानिगें, एसे ऊँ पंचे अपने-अपने सहरन से आइके, पइदलय यीसु के पीछे चल दिहिन। 14अउर जब यीसु उहाँ से बहिरे निकरें, त खुब बड़ी भीड़ देखिन, तब यीसु काहीं उनखे ऊपर बड़ी दया आइगे, अउर उनखे साथ माहीं आए बिमारन काहीं नीक कइ दिहिन। 15जब साँझ होइगे, त उनखर चेला लोग उनखे लघे आइके कहिन, कि “इआ सुनसान जघा ही, अउर साँझ होंइ लाग ही, एसे मनइन काहीं बिदा करी। जउने ऊँ पंचे आस-पास के मोहल्लन म जाइके अपने खातिर खाना खरीद लेंय।” 16पय यीसु उनसे कहिन, कि “उनखर जाब जरूरी नहिं आय, तुहिन पंचे इनहीं खाँइका द्या।” 17तब चेला लोग यीसु से कहिन, “इहाँ हमरे लघे पाँचठे रोटी अउर दुइठे मछरिन काहीं छोंड़िके, अउर कुछू नहिं आय।” 18तब यीसु उनसे कहिन, कि “उनहीं इहाँ हमरे लघे लइ आबा।” 19अउर भीड़ के मनइन से कहिन, कि “चारय माहीं बइठि जा।” अउर उन पाँचठे रोटी अउर दोनहूँ मछरिन काहीं लिहिन; अउर स्वरग कइती निहारिके धन्यबाद दिहिन, अउर रोटिन काहीं टोरि-टोरिके चेलन काहीं दिहिन, अउर चेला लोग, सगले मनइन काहीं परस दिहिन। 20अउर जब सगले जन खाइके संतुस्ट होइगें, तब चेला लोग खाए से बचे रोटिन के टुकड़न काहीं बारा टोपरी भरिके उठाय लाएँ। 21अउर खाँइ बइठ मनइन माहीं, मेहेरिआ अउर लड़िकन काहीं छोंड़े, पाँच हजार के करीब मंसेरुआ रहे हँय।

पानी माहीं यीसु के रेंगब

(मरकुस 6:45-52; यूहन्ना 6:15-21)

22ओखे बाद यीसु तुरन्तय अपने चेलन काहीं नाव माहीं चढ़ँइ के खातिर मजबूर किहिन, कि ऊँ पंचे उनसे पहिले झील के दुसरे पार चले जाँय, जब तक ऊँ भीड़ के मनइन काहीं बिदा करँय। 23अउर यीसु भीड़ के मनइन काहीं बिदा कइके, प्राथना करँइ के खातिर अकेलेन पहार माहीं चढ़िगें; अउर साँझिके ऊँ उहाँ अकेलेन रहे हँय। 24अउर तब तक नाव झील के बीच माहीं पहुँचिगे रही हय, अउर सँउहेन से तेज हबा चलत रही हय, एसे नाव लहरन से डगमगात रही हय। 25तबहिनय यीसु भिनसरहय करीब तीन से छय बजे के बीच, झील के पानी माहीं रेंगत उनखे लघे आएँ। 26तब चेला लोग उनहीं झील के पानी माहीं रेंगत देखिके घबराइगें! अउर कहँइ लागें, “उआ भूत आय।” अउर डेरन के मारे चिल्लाय उठें। 27तब यीसु तुरन्तय उनसे बात किहिन, अउर कहिन, “हिम्मत बाँधा; डेरा न; हम आहेन।” 28तब पतरस उनहीं जबाब दिहिन, “हे प्रभू, अगर अपनय आहेन, त हमहीं अपने लघे पानी माहीं रेंगिके आमँइ के हुकुम देई।” 29तब यीसु उनसे कहिन, “आबा” तब पतरस नाव से उतरिके यीसु के लघे जाँइ के खातिर, पानी माहीं रेंगँइ लागें। 30पय तेज आँधी काहीं देखिके डेराइगें, अउर जब पानी माहीं बूड़ँइ लागें, तब चिल्लाइके कहिन, “हे प्रभू, हमहीं बचाई।” 31तब यीसु तुरन्तय आपन हाँथ बढ़ाइके उनहीं पकड़ लिहिन, अउर उनसे कहिन, “हे अल्प बिसुआसी, तूँ काहे अपने मन माहीं संका किहा?” 32जब ऊँ दोनव जने नाव माहीं चढ़िगें, तब आँधी बन्द होइगे। 33इआ देखिके जेतने जने नाव माहीं चढ़े रहे हँय, सगले जने उनखे गोड़न गिरिके कहिन; “सचमुच अपना परमातिमा के लड़िका आहेन।” 34अउर ऊँ पंचे झील के दुसरे पार गन्नेसरत प्रदेस माहीं पहुँचे। 35अउर उहाँ के रहँइ बाले मनई उनहीं पहिचान लिहिन, अउर आस-पास के सगले गाँमन माहीं खबर पठबाय दिहिन, कि यीसु इहँय हें, एसे उहाँ के खुब मनई, बिमारन काहीं उनखे लघे लइ आएँ। 36अउर यीसु से बिनती करँइ लागें, कि अपना बिमारन काहीं, अपने ओन्हा के छोरव काहीं छुइ लेंइ देई: अउर जेतने जने उनहीं छुइन, ऊँ सगले जन नीक होइगें।

15

रीति-रिबाजन काहीं मानँइ के बारे माहीं प्रस्न

(मरकुस 7:1-13)

1तब यरूसलेम सहर से कुछ फरीसी लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले यीसु के लघे आइके पूँछँइ लागें, 2कि “अपना के चेला लोग बाप-दादन के रीति-रिबाजन काहीं काहे नहीं मानँय, बिना हाँथ धोए खाना खात हें?” 3तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “अपने रीति-रिबाजन काहीं मानँइ के कारन तुहूँ पंचे परमातिमा के हुकुम के उलंघन काहे करते हया? 4काहेकि परमातिमा कहिन हीं, कि ‘अपने महतारी-बाप के मान-सम्मान किहा’, अउर ‘जे कोऊ अपने महतारी-बाप के अपमान करय, त ओही जरूर मारि डारा जाय।’ 15:4 निरग 20:12; लैब्य 20:9; ब्यब 5:165पय तूँ पंचे कहते हया, कि अगर कोऊ अपने महतारी-बाप से कहय, कि ‘जउन कुछू फायदा तोहईं पंचन काहीं हमसे मिल सकत रहा हय, त ओही हम परमातिमा काहीं भेंट चढ़ाय दिहेन हय’, 6त पुनि उआ अपने महतारी-बाप काहीं कुछू नहीं दइ सकय। इआमेर से तूँ पंचे, अपने रीति-रिबाजन काहीं मानँइ के कारन, परमातिमा के बचन काहीं इनकार कइ देते हया। 7हे कपटिव, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह तोंहरे बारे माहीं इआ भबिस्सबानी ठीकय किहिन हीं:

8‘ईं पंचे मुँहे से त हमार मान-सम्मान करत हें, पय अपने मन से हमार मान-सम्मान नहीं करँय।

9अउर ईं पंचे बेकार माहीं हमार उपासना करत हें, काहेकि मनइन के नेमन काहीं, परमातिमा के नेम आय, इआ कहिके सिखाबत हें’15:9 यसा 29:13।”

मनइन काहीं असुद्ध करँइ बाली बातँय

10तब यीसु मनइन काहीं अपने लघे बोलाइके कहिन, “सुना, अउर समझा: 11जऊँ मनई के मुहें से पेटे के भीतर जात हय, उआ मनई काहीं असुद्ध नहीं करय, बलकिन जउन बातँय मनई के मुहें से (मन से) निकरती हईं, केबल उँइन बातँय मनई काहीं परमातिमा के नजर माहीं असुद्ध करती हईं।” 12तब चेला लोग आइके यीसु से कहिन, “का अपना जानित हएन, कि अपना के इआ बचन काहीं सुनिके फरीसी लोग बड़ा नागा मानिन हीं?” 13तब यीसु उनहीं इआ जबाब दिहिन, कि “हरेक बिरबा जउने काहीं स्वरग माहीं रहँइ बाले हमार पिता नहीं लगाइन आय, उआ उँखाड़ा जई। 14उनहीं जाँइ द्या; काहेकि ऊँ पंचे गइल बतामँइ बाले आँधर मनई कि नाईं हें, त इआ बताबा कि अगर एकठे आँधर मनई दुसरे आँधर मनई काहीं गइल बताई, त का ऊँ दोनव जने गड्ढा माहीं न गिर परिहँय?”

15इआ सुनिके पतरस यीसु से कहिन, “इआ उदाहरन हमहीं पंचन काहीं समझाय देई।” 16तब यीसु कहिन, “का तूँ पंचे अबय तक नदान बने हया? 17का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि जउन कुछू मुहें से पेट माहीं जात हय, त उआ टट्टी से बहिरे निकर जात हय? 18पय जउन कुछू मुहें से निकरत हय, उआ मन से निकरत हय, अउर उहय मनई काहीं परमातिमा के नजर माहीं असुद्ध करत हय। 19काहेकि घिनहे बिचार करब, कतल करब, दुसरे के मेहेरिआ से नजायज सम्बन्ध रक्खब, ब्यभिचार करब, चोरी करब, लबरी गबाही देब, अउर दुसरे के बुराई करब, ईं सगली बातँय करँइ के बिचार मनय से निकरत हय। 20ईंन सगली बातँय मनई काहीं असुद्ध करती हईं, पय अपने रीति-रिबाज के मुताबिक बिना हाँथ धोए खाना खाए से, कउनव मनई परमातिमा के नजर माहीं असुद्ध नहीं होय।”

गैरयहूदी मेहेरिआ के बिसुआस

(मरकुस 7:24-30)

21पुनि यीसु उहाँ से निकरिके, सूर अउर सैदा प्रदेसन कइती चलेगें। 22अउर उआ प्रदेस से कनानी समाज के एकठे मेहेरिआ आई, अउर चिल्लाइके कहँइ लाग, “हे प्रभू! राजा दाऊद के सन्तान, हमरे ऊपर दया करी! हमरे बिटिया काहीं बुरी आत्मा खुब सताय रही हय।” 23पय यीसु ओही कुछू जबाब नहीं दिहिन। तब यीसु के चेला लोग उनखे लघे आइके उनसे बिनती किहिन, कि “ओही बिदा करी, काहेकि उआ हमरे पीछे चिल्लात आय रही हय।” 24तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “इजराइल के मनइन काहीं छोंड़िके जउन भटकी गाड़र कि नाईं हें, हम अउर कोहू के लघे नहीं पठए गएन आय।” 25पय उआ मेहेरिआ आई, अउर यीसु के गोड़न गिरिके कहँइ लाग, “हे प्रभू हमार मदत करी।” 26तब यीसु ओही जबाब दिहिन, “लड़िकन15:26 यहूदी लोगन के तुलना लड़िकन से कीन गे ही, अउर गैरयहूदी लोगन के तुलना कुकुरन से कीन गे ही। के रोटी लइके कुकुरन के आँगे डारब उचित नहिं आय।” 27तब उआ मेहेरिआ कहिस, “इआ बात सही आय प्रभू, पय कुकुरव ऊँ चुरकुन काहीं खात हें, जउन उनखे मालिकन के खात माहीं गिर जात हें।” 28इआ बात काहीं सुनिके यीसु उआ मेहेरिआ काहीं जबाब दिहिन, “हे बहिनी, तोंहार बिसुआस बड़ा हय। जइसन तूँ चहते हया, उहयमेर तोंहरे खातिर होय।” अउर ओखर बिटिया ओतनिनदार नीक होइगे।

कइयकठे बिमारन काहीं नीक करब

29पुनि यीसु उहाँ से चलिके गलील प्रदेस के झील के लघे गें, अउर पहार के ऊपर चढ़िके बइठिगें। 30तब खुब मनई उनखे लघे आएँ। अउर ऊँ पंचे अपने साथ लँगड़न, अँधरन, गूँगन, अपहिजन काहीं, अउर दुसरेव मेर के बिमारन काहीं घलाय, यीसु के लघे लइ आएँ, अउर उनहीं उनखे गोड़ेन माहीं गिराय दिहिन, अउर यीसु ऊँ बिमारन काहीं नीक कइ दिहिन। 31जब मनई देखिन कि गूँगा मनई बोलँइ लागत हें, अउर अपाहिज निकहे होइ जात हें, लाँगड़ चलँइ लागत हें, अउर आँधर देखँइ लागत हें, त ऊँ पंचे अचरज मानिके, इजराइल के परमातिमा के बड़ाई करँइ लागें।

यीसु चार हजार मनइन काहीं खाना खबाइन

(मरकुस 8:1-10)

32यीसु अपने चेलन काहीं अपने लघे बोलाइके कहिन, “हमहीं इआ भीड़ के मनइन के ऊपर बड़ी दया आबत ही, काहेकि ईं पंचे तीन दिना से हमरे साथ हें, अउर इनखे लघे खाँय के खातिर कुछू हइअव नहिं आय। अउर हम इनहीं भूँखे बिदा नहीं करँइ चाही, कहँव अइसा न होय, कि ईं पंचे बिहोस होइके गइलय माहीं परे रहि जाँय।” 33तब चेला लोग यीसु से कहिन, “इआ सुनसान जघा माहीं हमहीं पंचन काहीं एतनी रोटी कहाँ से मिली, कि हम पंचे एतनी बड़ी भीड़ के मनइन काहीं खबाइके संतुस्ट करी?” 34तब यीसु चेलन से पूँछिन, “तोंहरे लघे केतनी रोटी हईं?” ऊँ पंचे कहिन, “सातठे रोटी, अउर कुछ छोट-छोट मछरी घलाय हईं।” 35तब यीसु सगले जनेन काहीं, भुँइ माहीं बइठँय के हुकुम दिहिन। 36अउर यीसु ऊँ सातठे रोटी, अउर मछरिन काहीं हाँथे म लइके, परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके टोरिन, अउर अपने चेलन काहीं देत गें, अउर चेला लोग मनइन काहीं परसत गें। 37इआमेर से सगले मनई खाइके संतुस्ट होइगें। अउर ओखे बाद चेला लोग, बँचे टुकड़न से सात टोपरी भरिके उठाइन। 38अउर खाना खाँइ बालेन म मेहेरिअन अउर लड़िकन काहीं छोंड़िके, चार हजार मंसेरुआ रहे हँय। 39ओखे बाद यीसु उआ भीड़ के मनइन काहीं बिदा कइके, नाव माहीं चढ़िके मगदन प्रदेस काहीं चलेगें।

16

स्वरग के अदभुत चिन्हारी देखँइ के माँग करब

(मरकुस 8:11-13; लूका 12:54-56)

1फरीसी लोग, अउर सदूकी लोग, यीसु के लघे आइके उनखर परिच्छा लेंइ के खातिर, उनसे कहिन, “हमहीं स्वरग के कउनव अदभुत चिन्हारी देखाइके, इआ साबित करा, कि परमातिमा तोंहईं पठइन हीं।” 2तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “साँझिके तूँ पंचे कहते हया, कि ‘मोसम निकहा रही, काहेकि अकास लाल हय’, 3अउर सकारे कहते हया, कि ‘आज आँधी अई, काहेकि अकास लाल अउर धूमिल हय।’ तूँ पंचे अकास के लच्छनन काहीं देखिके, ओखर भेद बताय सकते हया, पय समयन के चिन्हारिन के भेद काहे नहीं बताय सकते आह्या? 4इआ जुग के बुरे, अउर ब्यभिचारी लोग, अदभुत चिन्हारी ढूँढ़त हें, 16:4 योना नबी के किताब माहीं अपना पंचे पढ़ सकित हएन।पय योना नबी के जीबन माहीं जउन अदभुत काम परमातिमा किहिन तय, ओखे अलाबा अउर कउनव अदभुत चिन्हारी उनहीं न देखाई जई।” अउर एखे बाद यीसु उनहीं छोंड़िके उहाँ से चलेगें।

फरीसी लोगन अउर सदूकी लोगन के गलत सिच्छा

(मरकुस 8:14-21)

5अउर चेला लोग झील के उआ पार पहुँचिगे, पय ऊँ पंचे रोटी लेंइ क बिसरिगें तय। 6यीसु पुनि उनसे कहिन, “देखा, तूँ पंचे फरीसी लोगन अउर सदूकी लोगन के खमीर से सतरक रह्या।” 7इआ सुनिके चेला लोग आपस माहीं सोच-बिचार कइके कहँइ लागें, कि “हम पंचे रोटी नहीं लइआए आहेन, एसे यीसु अइसन कहत हें।” 8इआ जानिके यीसु उनसे कहिन, “हे अल्प बिसुआसिव, तूँ पंचे आपस माहीं काहे इआ सोच-बिचार करते हया, कि हमरे लघे रोटी नहिं आय? 9का तूँ पंचे अबय तक नहीं समझे पाया? का तोहईं पंचन काहीं ऊँ पाँच हजार मनइन के खातिर, पाँचठे रोटिन के सुध नहिं आय, अउर का तोहईं पंचन काहीं इहव सुध नहिं आय, कि केतनी टोपरी रोटी भरिके उठाया तय? 10अउर का तोंहईं पंचन काहीं ऊँ चार हजार मनइन के खातिर, सातठे रोटिन के सुधि नहिं आय, अउर न इहय सुध आय, कि तूँ पंचे केतनी टोपरी रोटी उठाए रहे हया?” 11“काहे तूँ पंचे अबहिनव तक नहीं समझे पाया, कि हम तोंहसे रोटी के बारे माहीं न होय कहेन हय, पय इआ कि तूँ पंचे फरीसी लोगन, अउर सदूकी लोगन के खमीर रूपी गलत सिच्छा से सतरक रह्या।” 12तब उनखे समझ माहीं आबा, कि यीसु रोटी के खमीर से नहीं, पय फरीसी लोगन अउर सदूकी लोगन के गलत सिच्छा से, सतरक रहँइ काहीं कहिन रहा हय।

पतरस सोइकार किहिन कि यीसुअय मसीह आहीं

(मरकुस 8:27-30; लूका 9:18-21)

13जब यीसु कैसरिया प्रदेस के फिलिप्पी सहर माहीं आएँ, त अपने चेलन से पूँछिन, कि “लोग, मनई के लड़िका काहीं का कहत हें?” 14तब ऊँ पंचे कहिन, कि “कुछ जने त यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाला, अउर कुछ जने त एलिय्याह नबी कहत हें, अउर कुछ जने त यिर्मयाह नबी, अउर कुछ जने त इआ कहत हें, कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन म से एक जने जि आबा हय।” 15तब यीसु उनसे कहिन, “पय तूँ पंचे हमहीं का कहते हया, कि हम को आहेन?” 16तब समौन जिनखर नाम पतरस घलाय रहा हय, यीसु से कहिन, “अपना जिन्दा परमातिमा के लड़िका मसीह आहेन।” 17इआ सुनिके यीसु पतरस से कहिन, “हे समौन, योना के लड़िका, तूँ धन्य हया; काहेकि तोहईं इआ बात कउनव मनई नहीं, बलकिन हमार पिता जउन स्वरग माहीं हें, बताइन हीं। 18अउर हमहूँ तोंहसे कहित हएन, कि तूँ पतरस16:18 पतरस अरथात पथरा आह्या, अउर हम इआ पथरा के ऊपर आपन मसीही मन्डली बनाउब, अउर ओही कउनव बइरी इहाँ तक कि अधोलोक घलाय हराय न पाई। 19हम तोहईं स्वरगराज के चाभिन काहीं देब, अउर जउने बात माहीं तूँ पंचे धरती माहीं हामी भरिहा, त उआ बात माहीं स्वरग माहीं रहँइ बाले परमातिमा घलाय हामी भरिहँय; अउर जउने बात माहीं तूँ धरती माहीं नाहीं करिहा, त उआ बात माहीं स्वरग माहीं रहँइ बाले परमातिमा घलाय नाहीं करिहँय।” 20तब यीसु अपने चेलन काहीं चेताइके कहिन, कि “इआ बात कोहू से न बताया, कि हम मसीह आहेन।”

अपने मउत के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी

(मरकुस 8:31-33; लूका 9:22-27)

21उआ समय से यीसु अपने चेलन काहीं बतामँइ लागें, कि “इआ जरूरी हय, कि हम यरूसलेम सहर काहीं जई, अउर यहूदी धारमिक अँगुअन अउर प्रधान याजकन, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन के व्दारा खुब दुख उठाई, अउर मारि डारे जई, अउर तिसरे दिना जिन्दा होइ जई।” 22इआ बात काहीं सुनिके पतरस यीसु काहीं अलग लइ जाइके डाँटँइ लाग, कि “हे प्रभू, परमातिमा अइसन कबहूँ न करँय! अउर अपना के साथ अइसन कबहूँ न होई।” 23तब यीसु मुड़िके पतरस से कहिन, “हे सइतान हमरे आँगे से दूरी होइजा, तँय हमरे खातिर ठोकर के कारन आहे, काहेकि तँय परमातिमा के बातन माहीं नहीं, बलकिन मनइन के बातन माहीं मन लगउते हए।” 24तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “जे कोऊ हमरे पीछे आमँइ चाहय, उआ अपने मन के मुताबिक जिअब छोंड़िके, हरेक दिन अपने सब दुख तकलीफन काहीं सहिके जऊँ क्रूस के बराबर हें, हमरे पीछे चलय। 25काहेकि जे कोऊ आपन प्रान बचामँइ चाही, उआ ओही गमाय देई; अउर जे कोऊ हमरे खातिर आपन प्रान तक देंइ काहीं तइआर रही, उआ ओही पुनि पाई। 26अगर कउनव मनई सगले संसार के मालिक होइ जाय, अउर आपन प्रान गमाय देय, त ओही का फायदा होई? अउर मनई आपन प्रान बचामँइ के बदले माहीं का दइ सकत हय? 27हम ईं सगली बातन काहीं एसे कहित हएन, कि जब मनई के लड़िका, अपने पिता परमातिमा के महिमा माहीं, स्वरगदूतन के साथ अइहँय, उआ समय, ‘ऊँ हरेक जन काहीं उनखे कामन के मुताबिक प्रतिफल देइहँय।’ 28हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जउन इहाँ ठाढ़ हें, उनमा से कुछ जने अइसन हें, कि जब तक मनई के लड़िका काहीं, राज करँइ के खातिर आबत न देख लेइहँय, तब तक बेलकुल न मरिहँय।”

17

यीसु के रूप बदलब

(मरकुस 9:2-13; लूका 9:28-36)

1छय दिना के बाद यीसु, पतरस अउर याकूब अउर याकूब के भाई यूहन्ना काहीं, अपने साथ माहीं लिहिन, अउर उनहीं एकठे ऊँच पहार माहीं एकान्त म लइगें। 2अउर उहाँ उनखे अँगुअय यीसु के रूप बदलिगा, अउर उनखर मुँह सुरिज कि नाईं चमकँइ लाग, अउर उनखर ओन्हा उँजिआर कि नाईं उजर होइगा। 3अउर तिनहूँ चेला मूसा नबी, अउर एलिय्याह नबी काहीं यीसु के साथ बातँय करत देखिन। 4इआ देखिके पतरस यीसु से कहिन, कि “हे प्रभू, हमार पंचन के इहाँ रहब निकहा हय। अगर अपना के मरजी होय, त हम पंचे इहाँ तीनठे मड़इआ बनाई, एकठे अपना के खातिर, एकठे मूसा नबी के खातिर, अउर एकठे एलिय्याह नबी के खातिर।” 5पतरस जब इआ कहतय रहे हँय, तबहिनय एकठे उजर बदरी आइके उनहीं पंचन काहीं लुकाय लिहिस, अउर उआ बदरी से इआ बोल सुनान: कि “ईं हमार पियार लड़िका आहीं, इनसे हम खुब प्रसन्न हएन: तूँ पंचे इनखे बातन काहीं मान्या।” 6इआ सुनिके चेला लोग एतना डेराइगें, कि भुँइ माहीं मुँहे के बल गिरिगें। 7तब यीसु उनखे लघे आइके उनहीं छुँइन, अउर कहिन, “उठा, डेरा न।” 8अउर जब ऊँ पंचे आपन आँखी खोलिन, त उनहीं यीसु के अलाबा अउर कोऊ नहीं देखान।

9पहार से नीचे उतरत समय, यीसु उनहीं हुकुम दिहिन, कि “जब तक मनई के लड़िका मरिके जिन्दा न होइ जाय, तब तक जऊँ कुछू तूँ पंचे देखे हया, उआ कोहू से न बताया।” 10अउर ऊँ पंचे यीसु से पूँछिन, कि “मूसा के बिधान सिखामँइ बाले इआ काहे कहत हें, कि मसीह से पहिले एलिय्याह नबी जरूर अइहँय?” 11तब यीसु उनहीं पंचन काहीं जबाब दिहिन, कि “एलिय्याह नबी जरूर अइहँय, अउर मसीह काहीं सोइकार करँइ के खातिर, मनइन काहीं तइआर करिहँय। 12पय हम तोंहसे कहित हएन, कि एलिय्याह त आय चुके हँय, अउर कउनव मनई उनहीं नहीं पहिचानिन; पय जइसन चाहिन उहयमेर उनखे साथ बरताव किहिन। इहइमेर से मनई के लड़िका घलाय उनखे व्दारा सताबा जई।” 13तब उनखर चेला लोग इआ समझिगें, कि यीसु, यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के बारे माहीं कहिन हीं।

मिरगी से परेसान लड़िका काहीं यीसु नीक किहिन

14जब यीसु अपने तिनहूँ चेलन के साथ भीड़ के मनइन के लघे पहुँचे, तबहिनय एकठे मनई यीसु के लघे आइके उनखे गोड़न गिरिके कहँइ लाग, 15“हे प्रभू, हमरे लड़िका काहीं मिरगी आबत ही, ओखे ऊपर दया करी! काहेकि ओही बड़ा कस्ट हय; उआ बेर-बेर आगी माहीं, अउर पानी माहीं गिर परत हय। 16अउर हम ओही अपना के चेलन के लघे लइ आएन तय, पय ऊँ पंचे ओही नहीं नीक कए पाइन।” 17तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हे परमातिमा के ऊपर बिसुआस न करँइ बाले हठी मनइव, हम कब तक तोंहरे साथ रहब, अउर कब तक तोंहार सहत रहब? उआ लड़िका काहीं हमरे लघे लइ आबा।” 18तब यीसु, बुरी आत्मा काहीं डाँटिन, तबहिनय उआ बुरी आत्मा उआ लड़िका से बहिरे निकरिगे, अउर उआ लड़िका ओतनिनदार नीक होइगा।

19तब चेला लोग एकान्त माहीं यीसु के लघे आइके उनसे पूँछिन; “हम पंचे उआ लड़िका से बुरी आत्मा काहीं, काहे नहीं निकारे पाएन?” 20तब यीसु उनसे कहिन, कि “अपने बिसुआस के कमी के कारन, तूँ पंचे ओही नहीं निकारे पाया। काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, कि अगर तोंहार बिसुआस राई के दानव के बराबर होई, त तूँ पंचे इआ पहार से कहि देहा, कि ‘इहाँ से सरकिके उहाँ चला जा, त उआ चला जई’, अउर कउनव बात तोंहरे खातिर असम्भव न होई।” 21(पय इआमेर के बुरी आत्मा बिना उपबास प्राथना के नहीं निकरय17:21 इआ बचन कुछ बाइबल माहीं नहिं आय।।)

अपने मउत के बारे माहीं यीसु के पुनि भबिस्सबानी

(मरकुस 9:30-32; लूका 9:43-45)

22जब यीसु अपने चेलन के साथ गलील प्रदेस माहीं रहे हँय, तब उनसे कहिन, कि “मनई के लड़िका बिरोध करँइ बाले मनइन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई, 23अउर ऊँ पंचे ओही मारि डरिहँय, अउर उआ तिसरे दिना जिन्दा होइ जई।” इआ बात काहीं सुनिके उनखर चेला लोग खुब दुखी होइगें।

मन्दिर के कर देब

24जब ऊँ पंचे कफरनहूम सहर माहीं पहुँचे, तब मन्दिर के कर लेंइ बाले, पतरस के लघे आइके पूँछिन, कि “का तोंहार पंचन के गुरू, मन्दिर के कर नहीं देंय?” 25तब पतरस उनहीं जबाब दिहिन, कि “हाँ, ऊँ देत हें।” जब पतरस घर माहीं आएँ, त यीसु पतरस के इआ बात पूँछँइ से पहिलेन उनसे कहिन, “हे समौन, तूँ का सोचते हया? धरती के राजा चुंगी, इआ कि कर केसे लेत हें? अपने संतानन17:25 संतानन से- उआ समय माहीं राजा लोग अपने संतानन से कर नहीं लेत रहे आहीं, पय बाहरी मनइन से कर लेत रहे हँय। से इआ कि दुसरे मनइन से?” 26तब पतरस यीसु से कहिन, कि “दुसरे मनइन से।” तब यीसु पतरस से कहिन, कि “त सन्तान बचिगें। 27तऊ, इआ कारन से कि हमरे व्दारा उनहीं ठोकर न लागय, तूँ झील के किनारे जाइके बंसी डारा, अउर जउन मछरी पहिले फँसय, ओही लइ लिहा, अउर जब तूँ ओखर मुँह खोलिहा त तोंहईं एकठे सिक्का मिली, ओही लइके, हमरे अउर अपने कर के खातिर उनहीं दइ दिहा।”

18

स्वरगराज माहीं सगलेन से बड़ा को कहाई?

(मरकुस 9:33-37; लूका 9:46-48)

1उहय समय चेला लोग यीसु के लघे आइके पूँछँइ लागें, कि “स्वरगराज माहीं सगलेन से बड़ा को कहाई?” 2इआ बात काहीं सुनिके यीसु एकठे छोट क लड़िका काहीं अपने लघे बोलाइके, उनखे बीच माहीं ठाढ़ किहिन, 3अउर कहिन, कि “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि अगर तूँ पंचे अपने सुभाव काहीं न बदलिहा, अउर छोट-छोट लड़िकन कि नाईं भोले-भाले न बनिहा, त तूँ पंचे स्वरगराज माहीं कबहूँ न जाए पइहा। 4अउर जे कोऊ खुद काहीं इआ लड़िका कि नाईं छोट बनाई, उआ स्वरगराज माहीं सगलेन से बड़ा होई। 5अउर जे कोऊ हमरे नाम से इआमेर के एकठे लड़िका काहीं सोइकार करत हय, त उआ हमहीं सोइकार करत हय।”

पाप किहे के परिनाम के बारे माहीं यीसु के सिच्छा

(मरकुस 9:42-48; लूका 17:1,2)

6जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं, चाह उआ छोट क लड़िकय होय, उनसे पाप कराबत हय, त उआ मनई के खातिर इआ ठीक कहाई, कि एकठे बड़ी काहीं चक्की के जेतबा ओखे गरे माहीं बाँधिके गहिल समुद्र माहीं बुड़ाय दीन जाय। काहेकि परमातिमा के सजा एहू से जादा मिली। 7“काहेकि मनइन के जीबन म पाप माहीं गिरँय के मोका त जरूर अइहँय, पय जउन मनई दुसरे मनइन काहीं पाप माहीं गिराबत हें, त उनहीं परमातिमा से खुब सजा मिली।

8अगर तोंहार हाँथ, गोड़ तोंहसे पाप करामँइ के कारन बनत हें, त उनहीं काटिके फेंकि द्या। नहीं त तूँ दोनव हाँथ-गोड़ लए नरक के आगी माहीं डार दीन जइहा, जउन कबहूँ बुझातिन नहिं आय। बिना हाँथ-गोड़ के स्वरगराज माहीं जाब एसे निकहा हय। 9अउर अगर तोंहार आँखी तोंहसे पाप करामँइ के कारन बनत ही, त ओही निकारिके फेंकि द्या; नहीं त दुइठे आँखी लए नरक के आगी माहीं डार दीन जइहा। कनमा होइके अनन्त जीबन पाउब तोंहरे खातिर एसे निकहा हय।”

हेरान गाड़र के उदाहरन

(लूका 15:3-7)

10यीसु उनसे पुनि कहिन, कि “देखा, तूँ पंचे ईं छोट से छोट मनइन म से जे हमरे ऊपर बिसुआस करत हें, कोहू काहीं तुच्छ न जान्या; काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, कि स्वरग माहीं उनखर दूत, स्वरग माहीं रहँइ बाले हमरे पिता के लघे हमेसा हाजिर रहत हें। 11(काहेकि मनई के लड़िका, भटके मनइन काहीं बचामँइ आबा हय।)

12तूँ पंचे का समझते हया? अगर कउनव मनई के लघे सवठे गाड़र होंय, अउर उनमा से एकठे हेराइ जाय, त का उआ मनई निन्यान्नबे गड़रन काहीं उहँय, छोंड़िके, पहार माहीं जाइके, उआ हेरान गाड़र काहीं न ढूँढ़ी? 13अउर अगर अइसन होय कि, उआ हेरान गाड़र मिल जाय। त हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि उआ मिली गाड़र के खातिर, उआ मनई खुब उराव मनाई। बलकिन ऊँ निन्यान्नबे गड़रन के खातिर, एतना उराव न मनाई, जउन भटकी नहीं रही आहीं। 14इहइमेर तोंहार पंचन के पिता जउन स्वरग माहीं रहत हें, उनखर मरजी इआ ही, कि हमरे ऊपर बिसुआस करँइ बालेन म से, साधारन से साधारन मनई घलाय अनन्त जीबन न गमाबय।”

अपराधिन के साथ कइसा बरताव करँइ चाही?

15“अउर अगर तोंहार भाई तोंहरे साथ कउनव बुरा बरताव करय, त ओखे लघे जा, अउर ओही अकेले माहीं समझाबा; अगर उआ तोंहरे बात काहीं मानय, त तूँ अपने भाई काहीं भाई के रूप माहीं पाय लिहा हय। 16पय अगर उआ तोंहरे बात काहीं न मानय, त एक इआ कि दुइ जने काहीं अपने साथ माहीं अउर लइ जा, कि ‘जउने हरेक बात दुइ इआ कि तीन गबाहन के आँगे पक्की होइ जाय।’ 17अउर अगर उआ उनहूँ पंचन के बात काहीं न मानय, त मसीही मन्डली से बताय द्या, पय अगर उआ मसीही मन्डली के बात काहीं घलाय न मानय, त तूँ ओही परमातिमा से न डेराँइ बाले, अउर चुंगी18:17 यहूदी लोग चुंगी लेंइ बालेन काहीं पापी मानत रहे हँय, काहेकि ऊँ पंचे रोमी लोगन के खातिर चुंगी लेत रहे हँय। लेंइ बाले बुरे मनइन कि नाईं समझा। 18हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, जउने बात माहीं तूँ पंचे धरती माहीं ‘हामी भरिहा’ त उआ बात माहीं स्वरग माहीं रहँइ बाले परमातिमा घलाय ‘हामी भरिहँय’; अउर जउने बात माहीं तूँ पंचे धरती माहीं ‘नाहीं करिहा’ त उआ बात माहीं स्वरग माहीं रहँइ बाले परमातिमा घलाय ‘नाहीं करिहँय’। 19अउर हम तोंहसे इहव कहित हएन, कि अगर तोंहरे पंचन म से दुइ जने, इआ धरती माहीं कउनव बात के खातिर एक मन होइके मगिहँय, त उआ स्वरग माहीं रहँइ बाले हमरे पिता परमातिमा के तरफ से, उनहीं जरूर मिल जई। 20काहेकि जहाँ दुइ इआ कि तीन जने हमरे नाम से एकट्ठा होत हें, हम उहाँ उनखे बीच माहीं हाजिर रहित हएन।”

दुसरे काहीं माफ करँइ के बारे माहीं यीसु के सिच्छा

21तब पतरस यीसु के लघे आइके उनसे कहिन, कि “हे प्रभू, अगर हमार भाई बेर-बेर अपराध करत रहय, त हम ओही कय बेरकी माफ करी? का सात बेरकी तक?” 22इआ बात काहीं सुनिके यीसु पतरस से कहिन, कि “हम तोंहसे इआ नहीं कही कि सात बेरकी तक माफ करा, बलकिन सात बेरकी के सत्तर गुना तक माफ करा।”

दया न करँइ बाले दास के उदाहरन

23यीसु उनसे पुनि कहिन, कि “एसे स्वरग के राज ऊँ राजा कि नाईं हय, जउन अपने सेबकन से हिंसाब-किताब लेंइ चाहिन। 24अउर जब ऊँ हिंसाब-किताब लेंइ लागें, तब एक जने काहीं उनखे लघे लइ आबा ग, जउन बीस किलो चाँदी के करजदार रहा हय। 25अउर करजा चुकामँइ के खातिर ओखे लघे कुछू नहीं रहा आय, त ओखर मालिक कहिन, कि ‘एही अउर एखे लड़िका-मेहेरिआ काहीं, अउर जउन कुछू एखर होय, उआ सगला बेंचिके हमार करजा पटाय दीन जाय।’ 26इआ बात काहीं सुनिके उआ दास उनखे गोड़न गिरिके कहिस, हे मालिक, अपना धीरज धरी, हम अपना के सगला करजा पटाय देब। 27तब उआ दास के मालिक ओखे ऊपर दया कइके ओही छोंड़ि दिहिन, अउर ओखर करजा घलाय माफ कइ दिहिन।”

28“पय जब उआ दास बहिरे निकरा, त ओखर साथी दासन म से एक जने ओही मिला, जउन ओसे करजा माहीं कुछ पइसा लए रहा हय; त उआ ओही पकड़िके ओखर घोंघा दबाइके कहिस, कि ‘तँय जउन कुछू हमार करजा लए हए त ओही दइ दे।’ 29तब ओखर साथी दास ओखे गोड़न गिरिके बिनती करँइ लाग, कि अपना धीरज धरी, हम अपना के सगला करजा पटाय देब। 30पय उआ दास ओखे बात काहीं नहीं मानिस, बलकिन ओही लइ जाइके जेल माहीं बन्द कइ दिहिस; कि जब तक उआ सगला करजा न पटाय देय, तब तक जेलय माहीं बन्द रहय। 31अउर इआ जउन भ रहा हय सगला देखिके, ओखर दूसर साथी दास लोग खुब दुखी भें, अउर जाइके अपने मालिक से सगला हाल बताय दिहिन। 32तब ओखर मालिक, उआ पहिल दास काहीं बोलाइके ओसे कहिन, हे दुस्ट दास, तँय जब हमसे बिनती किहे, त हम तोर उआ सगला करजा माफ कइ दिहेन। 33एसे जइसन हम तोरे ऊपर दया किहेन तय, त का उहयमेर तोहू काहीं घलाय अपने साथ माहीं रहँइ बाले दास के ऊपर दया न करँइ चाही? 34अउर ओखर मालिक खुब गुस्साइके, ओही सजा देंइ बालेन के हाँथ माहीं सउँपि दिहिन, कि जब तक उआ सगला करजा पटाय न देय, तब तक उआ उनखे कब्जे माहीं रहय।” 35इहइमेर अगर तोंहरे पंचन म से हरेक जन, अपने भाई काहीं पूरी तरह से माफ न करी, त स्वरग माहीं रहँइ बाले हमार पिता परमातिमा, तोंहसे उहयमेर बरताव करिहँय।

19

छोंड़-छुट्टी के बारे माहीं यीसु के सिच्छा

(मरकुस 10:1-12)

1यीसु ईं बातँय कहे के बाद, गलील प्रदेस से चलेगें; अउर यरदन नदी के दुसरे पार यहूदिया प्रदेस माहीं गें। 2अउर उनखे पीछे-पीछे बड़ी भीड़ चल दिहिस, अउर उनमा से जउन बिमार रहे हँय, यीसु उनहीं नीक कइ दिहिन।

3तब फरीसी लोग, यीसु के परिच्छा लेंइ के खातिर, उनखे लघे आइके कहँइ लागें, कि “का कउनव कारन से अपने मेहेरिआ के छोंड़-छुट्ठी करब उचित हय?” 4तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “का तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं नहीं पढ़े आह्या, कि जउन उनहीं बनाइन हीं, त ऊँ सुरुआतय से मेहेरिआ अउर मंसेरुआ के रूप माहीं बनाइन रहा हय? अउर कहिन तय, 5कि ‘इआ कारन से मनई अपने महतारी-बाप से अलग होइके अपने मेहेरिआ के साथ रही, अउर ऊँ पंचे दोनव जने एकय तन होइहँय19:5 उत्प 2:24।’ 6इआ कारन से अब ऊँ दोनव जन दुइ नहीं, बलकिन एकय तन आहीं। एसे जिनहीं परमातिमा जोड़िन हीं, उनहीं मनई अलग न करँइ।” 7तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “पय मूसा अपने बिधान माहीं इआ काहे लिखिन हीं, कि मनई अपने मेहेरिआ काहीं छोंड़-छुट्ठी के कागज दइके, ओखर छोंड़-छुट्टी कइ सकत हय?” 8तब यीसु उनसे कहिन, कि “मूसा तोंहरे मन के कठोरता के कारन, तोंहईं अपने मेहेरिआ के छोंड़-छुट्टी करँइ के हुकुम दिहिन तय, पय सुरुआत से अइसन नहीं रहा आय।” 9अउर हम तोंहसे इहव कहित हएन, कि “जे कोऊ अपने मेहेरिआ काहीं ब्यभिचार के अलाबा अउर कउनव दुसरे कारन से छोंड़िके, दुसरे मेहेरिआ से काज करत हय, त उआ ओखे साथ ब्यभिचार करत हय; अउर जे कोऊ उआ छोंड़ी मेहेरिआ से काज करत हय, त उहव ब्यभिचार करत हय।”

10इआ बात काहीं सुनिके चेला लोग यीसु से कहिन, कि अगर “कउनव मंसेरुआ के कउनव मेहेरिआ के साथ अइसन सम्बन्ध हय, त एसे निकहा इआ हय, कि काज न करय।” 11तब यीसु अपने चेलन से कहिन, कि “सब कोऊ इआ बचन काहीं सोइकार नहीं कइ सकँय, केबल उँइन पंचे सोइकार कइ सकत हें, जिनहीं परमातिमा के व्दारा काज न करँइ के बरदान दीन ग हय। 12काहेकि कुछ मनई अइसन हें जउन महतारी के पेटेन से नपुंसक पइदा भें हँय; अउर कुछ मनई अइसन हें, जिनहीं मनइन नपुंसक बनाय दिहिन हीं, अउर कुछ मनई अइसन हें, जे स्वरगराज के खातिर खुद काहीं नपुंसक बनाइन हीं। एसे जे कोऊ इआ बचन काहीं सोइकार कइ सकत हय, त उआ इआ बचन काहीं सोइकार कइ लेय।”

यीसु छोट-छोट लड़िकन काहीं आसिरबाद दिहिन

(मरकुस 10:13-16; लूका 18:15-17)

13तब खुब मनई अपने छोट-छोट लड़िकन काहीं यीसु के लघे लइ आमँइ लागें, कि यीसु उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके आसिरबाद देंय, अउर उनखे खातिर प्राथना करँइ, पय चेला लोग उनहीं डाँटँइ लागें। 14तब यीसु उनसे कहिन, कि “लड़िकन काहीं हमरे लघे आमँइ द्या, अउर उनहीं न बरजा: काहेकि जे कोऊ छोट लड़िकन कि नाईं अपने काहीं नम्र बनइहँय, उँइन परमातिमा के स्वरगराज के भागीदार बनिहँय।” 15अउर यीसु, ऊँ छोट-छोट लड़िकन के ऊपर आपन हाँथ धइके आसिरबाद दिहिन, अउर एखे बाद उहाँ से चलेगें।

धनी मनई अउर अनन्त जीबन

(मरकुस 10:17-31; लूका 18:18-30)

16एकठे मनई यीसु के लघे आबा, अउर उनसे कहिस, कि “हे गुरू, अपना हमहीं बताई कि हम अइसन कउन निकहा काम करी, कि जउने अनन्त जीबन पाई?” 17तब यीसु उआ मनई से कहिन, “तूँ हमसे निकहा काम के बारे माहीं काहे पुँछते हया? काहेकि केबल एकय हें, जउन निकहे हें, पय अगर तूँ अनन्त जीबन पामँइ चहते हया, त हुकुमन काहीं माना करा।” 18तब उआ मनई यीसु से कहिस, “कउने हुकुमन काहीं हम मानी?” तब यीसु ओसे कहिन, कि “कतल न करब, ब्यभिचार न करब, चोरी न करब, कोहू के बिरोध माहीं लबरी गबाही न देब, 19अउर अपने महतारी-बाप के मान-सम्मान करब, अउर अपने परोसी से अपनेन कि नाईं प्रेम रक्खब19:19 लैब्य 19:18।” 20तब उआ नवजमान यीसु से कहिस, कि “हे गुरू, ईं सगली बातन के त हम पालन करतय हएन, अउर अब अपना हमहीं इआ बताई, कि अबय हमरे जीबन माहीं कउने बात के कमी हय?” 21तब यीसु उआ मनई से कहिन, कि “अगर तूँ सिद्ध बनँइ चहते हया, त जा, जऊँ कुछ तोंहार धन-सम्पत्ती ही, ओही सब बेंचिके गरीबन माहीं बाँटि द्या, अउर तोहईं स्वरग माहीं एसे बढ़िके धन-सम्पत मिली, अउर आइके हमरे पीछे चला।” 22यीसु के इआ बात काहीं सुनिके उआ मनई उदास होइके, उहाँ से चला ग, काहेकि उआ खुब धनी रहा हय। अउर इआ करँइ के ओखर इच्छा नहीं रही।

23तब यीसु अपने चेलन से कहिन, कि “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि धनी मनई के परमातिमा के राज म प्रबेस करब कठिन हय।” 24अउर इहय बात हम तोंहसे पुनि कहित हएन, कि “परमातिमा के राज माहीं धनी मनई के पहुँचब खुब कठिन हय, बलकिन सूजी के छेंद से ऊँट के निकर जाब, एसे सरल हय।” 25यीसु के इआ बात काहीं सुनिके चेला लोग, खुब अचरज मानिके, आपस माहीं कहँइ लागें, “त पुनि केही मुक्ती मिल सकत ही?” 26यीसु अपने चेलन कइती देखिके कहिन, “मनइन से त इआ नहीं होइ सकय, पय परमातिमा से होइ सकत हय; काहेकि परमातिमा सब कुछ कइ सकत हें।” 27तब पतरस यीसु से कहँइ लागें, “देखी हम पंचे त आपन सब कुछ छोंड़िके, अपना के पीछे चले आएन हय, त हमहीं पंचन काहीं का मिली?” 28तब यीसु उनसे कहिन, कि “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि आमँइ बाले नए संसार माहीं जब सब कुछ परमातिमा नबा बनइहँय, तब मनई के लड़िका अपने महिमा के सिंहासन माहीं बइठिके राज करिहँय, अउर तुहूँ पंचे घलाय जउन हमार चेला बन गया हय, बरहँव सिंहासनन माहीं बइठिके, इजराइल के बरहँव गोत्रन के न्याय करिहा। 29अउर जे कोऊ अपने घर-दुआरन, भाई-बहिनिन, महतारी-बाप, लड़िकन-बच्चन, अउर खेत-पातन काहीं हमरे नाम के खातिर छोंड़ि दिहिस ही, त ओही इनखे बदले माहीं सव गुना मिली; अउर उआ अनन्त जीबन के बारिसदार होई। 30देखा, जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से बड़ा मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से छोट माने जइहँय, अउर जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से छोट मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से बड़े माने जइहँय।”

20

बगिया के मजूरन के उदाहरन

1यीसु उनसे पुनि एकठे उदाहरन बताइन, कि “स्वरग के राज एकठे जमींदार कि नाईं हय, जउन सकारे निकरें, कि अपने अंगूर के बगिया माहीं काम करँइ के खातिर मजूरन काहीं लगामँइ। 2अउर ऊँ मजूरन से उनखर एक रोज के मजूरी एकठे चाँदी के सिक्का तँय कइके, अपने अंगूर के बगिया माहीं काम करँइ के खातिर पठइन। 3अउर ओखे बाद ऊँ पुनि सकारे नव बजे के करीब निकरें, अउर बजार माहीं दुसरे मनइन काहीं बेफालतू माहीं ठाढ़ देखिन। 4अउर उनसे कहिन, कि ‘तुहूँ पंचे घलाय हमरे अंगूर के बगिया माहीं जाइके काम करा, अउर जउन कुछू उचित होई, उआ मजूरी हम तोंहईं पंचन काहीं देब।’ एसे ऊँ पंचे घलाय बगिया माहीं काम करँइ चलेगें। 5ओखे बाद ऊँ जमींदार पुनि बारा बजे के करीब निकरें अउर कुछ मजूरन काहीं काम माहीं लगाइन। ओखे बाद पुनि तीन बजे के करीब निकरिके उहयमेर किहिन। 6अउर ओखे बाद करीब पाँच बजे ऊँ पुनि निकरें अउर बजार माहीं अउरव मनइन काहीं इहाँ-उहाँ ठाढ़ पाइन, तब उनसे कहिन, कि ‘तूँ पंचे काहे दिन भर इहाँ बेफालतू माहीं ठाढ़ रहि गया?’ तब ऊँ पंचे उनसे कहिन, कि ‘हम पंचे एसे ठाढ़ रहि गएन, कि हमहीं पंचन काहीं कोऊ काम माहीं नहीं लगाइस।’ 7तब ऊँ उनसे कहिन, कि ‘तुहूँ पंचे घलाय हमरे अंगूर के बगिया माहीं जाइके काम करा’।”

8जब साँझ भय तब अंगूर के बगिया के मालिक अपने भन्डारी से कहिन, कि “सगले मजूरन काहीं बोलाइके उनखर मजूरी दइ द्या जउन काम माहीं आखिरी से लइके सुरू तक आएँ हँय। 9एसे जब ऊँ मजूर आएँ, जउन पाँच बजे के करीब काम माहीं लगाए गे रहे हँय, त उनहीं दिन भर के पूर मजूरी मिली। 10इआ कारन से जउन मजूर काम माहीं पहिले आए रहे हँय, ऊँ पंचे इआ सोचिन, कि हमहीं जादा मजूरी मिली; पय उनहूँ पंचन काहीं घलाय ओतनिन मजूरी मिली। 11अउर जब उनहीं मजूरी मिल चुकी, त ऊँ पंचे बगिया के मालिक के ऊपर गुस्साइके बरबराँय लागें। अउर उनसे कहँइ लागें, 12कि ‘ईं पंचे जउन हमसे पीछे आए हँय, अउर एकय घन्टा काम किहिन हीं, तऊ अपना उनहीं, हमरेन बराबर मजूरी दिहेन हय। पय हम पंचे जउन तेज घाम माहीं दिन भर मेहनत किहेन हय, ओखर ध्यान अपना नहीं दिहेन?’ 13तब मालिक ऊँ मजूरन म से एक जने काहीं जबाब दिहिन, कि ‘हे साथी, हम तोंहरे साथ कउनव अन्याय नहीं किहेन आय; इआ बताबा का तूँ हमसे एक दिन के मजूरी एकठे चाँदी के सिक्का नहीं तँय किहा तय?’ 14एसे जउन मजूरी तोंहार होत ही, ओही लइके चले जा; हमार मरजी इहय ही, कि हम जेतनी मजूरी तोंहईं दिहेन हय ओतनिन मजूरी काम माहीं पीछे आमँइ बालेन काहीं घलाय देई। 15का इआ उचित नहिं आय, कि हम अपने धन-सम्पत्ती से जउन चाही उआ करी? का तूँ हमरे भले होंइ के कारन हमसे जरते हया? 16देखा, जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से बड़ा मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से छोट माने जइहँय, अउर जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से छोट मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से बड़े माने जइहँय।”

अपने मउत के बारे माहीं यीसु के तिसराय भबिस्सबानी

(मरकुस 10:32-34; लूका 18:31-34)

17जब यीसु अपने चेलन के साथ यरूसलेम सहर काहीं जात रहे हँय, तब ऊँ बरहँव चेलन काहीं एकान्त माहीं लइगें, अउर गइल माहीं उनसे कहँइ लागें, 18कि “देखा, हम पंचे यरूसलेम सहर माहीं जइत हएन; अउर मनई के लड़िका प्रधान याजकन, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई, अउर ऊँ पंचे ओही मउत के सजा के काबिल ठहरइहँय। 19अउर ओही गैरयहूदी लोगन के हाँथे माहीं सउँपिहँय, कि ऊँ पंचे ओखर मजाक उड़ामँइ, अउर ओही चाबुक से मारँइ, अउर ओही क्रूस माहीं चढ़ामँइ। पय उआ तिसरे दिन जिन्दा होइ जई।”

एकठे महतारी के अपने लड़िकन के खातिर यीसु से बिनती करब

(मरकुस 10:35-45)

20अउर एक दिन जब्दी के मेहेरिआ, अपने लड़िकन के साथ यीसु के लघे आइके उनहीं प्रनाम किहिन, अउर उनसे कुछू मागँइ लागीं। 21तब यीसु उनसे कहिन, कि “तूँ का चहते हया?” तब ऊँ, यीसु से कहिन, “अपना हमहीं इआ बचन देई, कि जब अपना राजा बनिके राज करब, तब हमरे ईं दोनव लड़िकन म से एक जने अपना के दहिने कइती, अउर दूसर बाएँ कइती बइठय।” 22इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि हम पंचे का मागित हएन? जऊँ भारी कस्ट हम सहँइ बाले हएन, का तूँ पंचे उआ कस्ट सहि सकते हया?” ऊँ पंचे उनसे कहिन, कि “हाँ, हम पंचे सहि सकित हएन।” 23तब यीसु उनसे पुनि कहिन, “जऊँ कस्ट हम सहँइ बाले हएन, ओही त तूँ पंचे सहि लेइहा, पय अपने दहिने अउर अपने बाएँ कोहू काहीं बइठाउब हमार काम न होय, पय उआ जघा जिनखे खातिर स्वरग माहीं रहँइ बाले हमार पिता तइआर किहिन हीं, उआ जघा उनहिन काहीं मिली।” 24इआ सुनिके, दसहूँ चेला ऊँ दोनव भाइन के ऊपर गुस्सा होइगें। 25तब यीसु, चेलन काहीं अपने लघे बोलाइके उनसे कहिन, “तूँ पंचे जनते हया, कि गैरयहूदी लोगन के राजा, मनइन के ऊपर आपन हुकुम चलाबत हें, अउर उनखर अधिकारी लोग, मनइन के ऊपर आपन अधिकार जताबत हें। 26पय तोंहरे बीच माहीं अइसा न होंइ चाही, बलकिन जे कोऊ तोंहरे म से बड़ा बनँइ चाहत हय, त उआ तोंहार सगलेन के सेबा करँइ बाला बनय। 27अउर जे कोऊ तोंहरे म से मुखिया बनँइ चाहत हय, त उआ पहिले तोंहार पंचन के दास बनय; 28जइसन कि मनई के लड़िका एसे नहीं आबा, कि ओखर सेबा कीन जाय, बलकिन एसे आबा हय, कि खुदय दुसरेन के सेबा करय, अउर उआ खुब मनइन काहीं मुक्ती देंइ के खातिर आपन प्रान देय।”

दुइठे अँधरन काहीं नीक करब

(मरकुस 10:46-52; लूका 18:35-43)

29जब यीसु अउर उनखर चेला लोग यरीहो सहर से निकरिके जात रहे हँय, तब एकठे खुब बड़ी भीड़ उनखे पीछे-पीछे चल दिहिस। 30अउर दुइठे आँधर मनई जउन सड़क के किनारे बइठ रहे हँय। ऊँ इआ बात काहीं सुनिके कि यीसु जात हें, चिल्लाइके कहँइ लागें, “हे प्रभू, राजा दाऊद के सन्तान हमरे ऊपर दया करी।” 31तब कुछ जने उनहीं डाँटिन, कि चुप्पय रहा। पय ऊँ पंचे अउर जोर से चिल्लाइके कहिन, कि “हे प्रभू, राजा दाऊद के सन्तान हमरे ऊपर दया करी।” 32तब यीसु ठाढ़ होइके उनहीं अपने लघे बोलाइके कहिन, कि “तूँ पंचे का चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर करी?” 33तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, कि “हे प्रभू, हम पंचे इआ चाहित हएन, कि हमार पंचन के आँखी खुल जाँय अउर देखँइ लागी।” 34तब यीसु उनखे ऊपर दया कइके, उनखे आँखिन काहीं छुइन, अउर ऊँ पंचे तुरन्तय देखँइ लागे; अउर यीसु के पीछे-पीछे चल दिहिन।

21

यीसु राजा कि नाईं यरूसलेम माहीं प्रबेस किहिन

(मरकुस 11:1-11; लूका 19:28-40)

1जब यीसु अउर उनखर चेला लोग यरूसलेम सहर के लघे पहुँचे अउर जैतून पहार के ऊपर बैतफगे गाँव के लघे आएँ, तब ऊँ अपने दुइठे चेलन काहीं इआ कहिके पठइन, 2“सउहें बाले गाँव माहीं जा, अउर उहाँ पहुँचतय एकठे गदही अउर ओखे साथ माहीं ओखर बच्चा तोंहईं पंचन काहीं बाँधा मिली, उनहीं छोरिके हमरे लघे ले आबा। 3अउर अगर तोंहसे कोऊ कुछू कहय, त कहि दिहा कि ‘प्रभू काहीं इनखर जरूरत ही, त उआ तुरन्तय उनहीं पठय देई।’” 4इआ एसे भ कि जउन बचन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के व्दारा कहा ग रहा हय, उआ पूर होइ जाय: 5कि

“सिय्योन 21:5 सिय्योन के बिटिया के मतलब हय यरूसलेम सहर के मनई। के बिटिया से कहा, कि देखा, तोंहार राजा तोंहरे लघे आबत हें; ऊँ नम्र हें अउर गदहा के ऊपर बइठ हें; हाँ गदही के बच्चा के ऊपर21:5 जक 9:9।”

6तब चेला लोग जाइके जइसन यीसु उनसे कहिन तय, उहयमेर किहिन। 7अउर गदही अउर ओखे बच्चा काहीं ले आइके, उनखे ऊपर आपन ओन्हा डारिन, अउर यीसु ओखे ऊपर बइठिगें। 8तब उनखर सम्मान करँइ के खातिर, खुब मनई आपन-आपन ओन्हा गइल माहीं बिछाइन, अउर कुछ जने बिरबन से डेरइआ काटिके गइल माहीं बिछाय दिहिन। 9अउर जउन भीड़ यीसु के आँगे-आँगे जात रही हय, अउर जउन पीछे-पीछे आबत रही हय, चिल्लाय-चिल्लाय के कहत रही हय, “राजा दाऊद के सन्तान के होसन्ना, धन्य हय उआ, जउन प्रभू के नाम से आबत हय, स्वरग माहीं होसन्ना21:9 भज 118:25,26।” 10अउर जब यीसु यरूसलेम सहर माहीं प्रबेस किहिन, तब सगले सहर माहीं हलचल मचिगे, अउर मनई कहँइ लागें, कि “ईं को आहीं?” 11तब कुछ मनई उनहीं बताइन, कि “ईं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले, गलील प्रदेस के नासरत गाँव के रहँइ बाले यीसु आहीं।”

मन्दिर से बइपारिन काहीं निकारा जाब

(मरकुस 11:15-19; लूका 19:45-48; यूहन्ना 2:13-22)

12यीसु परमातिमा के मन्दिर माहीं जाइके, उन सगलेन काहीं, जउन मन्दिर माहीं बइपार करत रहे हँय बहिरे निकार दिहिन, अउर रुपिआ-पइसा के लेन-देन करँइ बालेन के पिढ़बन, अउर परेबा बेंचँइ बालेन के चउकिन काहीं उलटाय दिहिन; 13अउर उनसे कहिन, कि “पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि ‘हमार घर प्राथना21:13 यसा 56:7 के घर कहाई’, पय तूँ पंचे इआ मन्दिर काहीं ‘डँकुअन के21:13 यिर्म 7:11 अड्डा’ बनउते हया।”

14मन्दिर माहीं कुछ आँधर अउर लाँगड़ मनई यीसु के लघे आएँ, अउर ऊँ उनहीं नीक कइ दिहिन। 15पय जब प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, ईं अचरज के कामन काहीं देखिन, जउनेन काहीं यीसु किहिन तय, अउर मन्दिर माहीं लड़िकन काहीं जोर-जोर से स्तुति करत देखिन, कि “राजा दाऊद के सन्तान के होसन्ना।” त ऊँ पंचे खुब गुस्साइगें। 16अउर यीसु से कहँइ लागें, कि “का तूँ सुनते हया, कि ईं पंचे का कहत हें?” तब यीसु उनसे कहिन, कि “हाँ, हम सुनित हएन, का तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं इआ कबहूँ नहीं पढ़े आह्या: कि ‘लड़िकन-बच्चन से अउर दूध पिअँइ बाले छोट बच्चन से घलाय तूँ आपन स्तुति कराया हय21:16 भज 8:2?” 17एखे बाद यीसु उनहीं छोंड़िके यरूसलेम सहर से बैतनिय्याह गाँव माहीं चलेगें, अउर उहँय रात बिताइन।

बिना फर के अंजीर के बिरबा

(मरकुस 11:12-14,20-24)

18भिनसारे जब यीसु सहर काहीं लउटत रहे हँय, तब उनहीं भूँख लाग। 19अउर सड़क के किनारे एकठे अंजीर के बिरबा देखिके, ओखे लघे गें। अउर उआ बिरबा माहीं पत्तन के अलाबा कुछू नहीं पाइन। तब ओसे कहिन, कि “आज से तोरे माहीं पुनि कबहूँ फर न लागय।” अउर उआ अंजीर के बिरबा तुरन्तय झुराइगा। 20इआ देखिके चेला लोग खुब अचरज मानिके कहँइ लागें, कि “इआ अंजीर के बिरबा तुरन्तय कइसन झुराइगा?” 21तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, अगर तूँ पंचे बिसुआस रक्खा, अउर संका न करा, त तूँ पंचे केबल इहय काम भर न करिहा, जउन इआ अंजीर के बिरबा के साथ कीन ग हय, बलकिन तूँ पंचे अगर इआ पहारव से कहि देहा, कि उँखड़िके समुंद्र माहीं जाइके बूड़ जा, त उआ बूड़ जई। 22अउर जउन कुछू तूँ पंचे प्राथना माहीं बिसुआस से मगिहा, त उआ सब कुछ तोंहईं मिली।”

यीसु के अधिकार के बारे माहीं पूँछब

(मरकुस 11:27-33; लूका 20:1-8)

23जब यीसु मन्दिर माहीं जाइके उपदेस देत रहे हँय, तब प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, उनखे लघे आइके उनसे पूँछिन, कि “तूँ ईं कामन काहीं कउने अधिकार से करते हया? अउर तोंहईं इआ अधिकार को दिहिस ही?” 24तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “हमहूँ तोंहसे एकठे बात पूँछित हएन; अगर उआ हमहीं बतइहा, त हमहूँ तोंहईं बताउब, कि ईं कामन काहीं हम कउने अधिकार से करित हएन। 25बताबा, यूहन्ना काहीं बपतिस्मा देंइ के अधिकार को दिहिस तय? परमातिमा दिहिन तय, इआ कि मनई?” तब ऊँ पूँछँइ बाले आपस माहीं बताँइ लागें, कि अगर हम कहित हएन, कि “परमातिमा से मिला तय” त ऊँ कइहँय, कि “पुनि तूँ पंचे उनखर बिसुआस काहे नहीं किहा?” 26अउर अगर हम पंचे कहित हएन, कि “मनइन से मिला तय” त उहाँ ठाढ़ सगले मनई मारि डरिहँय, एहिन से डेरातव रहे हँय, काहेकि सगले मनई जानत रहे हँय, कि यूहन्ना परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले आहीं। 27एसे ऊँ पंचे यीसु काहीं जबाब दिहिन, “हम पंचे नहिं जानी।” तब यीसु उनसे कहिन, “हमहूँ तोंहईं नहीं बताई, कि ईं काम हम कउने अधिकार से करित हएन!”

दुइठे लड़िकन के उदाहरन

28यीसु उदाहरन दइके उनहीं एकठे कहानी सुनाइन, कि “एकठे गाँव माहीं एकठे मनई रहा हय, अउर ओखे दुइठे लड़िका रहे हँय; त उआ एक दिना बड़कबा लड़िका के लघे जाइके कहिस, कि ‘बेटा, आज अंगूर के बगिया म जाइके काम करा।’ 29त उआ लड़िका अपने बाप काहीं जबाब दिहिस, कि ‘हम न जाब’ पय बाद माहीं पचिताइके ग। 30एखे बाद उआ छोटकबा लड़िका के लघे जाइके इहइमेर कहिस, त उआ जबाब दिहिस, कि ‘हओ, हम जइत हएन’, पय नहीं ग। 31बताबा, एखे बारे माहीं तूँ पंचे का सोचते हया? ईं दोनव जनेन म से, कउन बाप के इच्छा पूर किहिस?” ऊँ पंचे कहिन, कि “बड़ा बाला लड़िका।” तब यीसु उनसे कहिन, कि “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि चुंगी लेंइ बाले अउर बेस्या लोग जिनसे तूँ पंचे नफरत करते हया, परमातिमा के राज माहीं तोंहसे पहिले जइहँय। 32इआ हम एसे कहित हएन, काहेकि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले तोहईं पंचन काहीं। परमातिमा के गइल बतामँइ आएँ तय, पय तूँ पंचे उनखे बातन काहीं नहीं मान्या; पय चुंगी लेंइ बाले अउर बेस्या लोग, उनखे बातन काहीं मानिन: अउर इआ देखे के बादव, तूँ पंचे अपने बुरे कामन काहीं छोंड़िके, उनखे बातन काहीं नहीं मान्या।”

दुस्ट किसानन के उदाहरन

(मरकुस 12:1-12; लूका 20:9-19)

33यीसु कहिन, कि एकठे अउर कहानी सुना, “एक जने जमीदार रहे हँय, ऊँ अंगूर के बगिया लगाइन अउर बगिया के चारिव कइती बारी रूँधिन, अउर ओमाहीं अंगूर के रस निकारँइ के खातिर कुन्ड खोदिन, अउर एकठे ऊँच काहीं मड़इचा बनाइन; अउर कुछ किसानन काहीं उआ बगिया के ठेका दइके परदेस चलेगें। 34अउर जब अंगूर के फरँइ के समय आबा, तब ऊँ जमीदार अपने हिस्सा के फर लेंइ के खातिर, अपने दासन काहीं किसानन के लघे पठइन। 35पय किसान लोग उनखे दासन काहीं पकड़िके, कउनव काहीं मारिन-पीटिन, अउर कउनव काहीं मारि डारिन, अउर कउनव काहीं पथरय-पथरय मारिन। 36ओखे बाद पुनि ऊँ जमींदार पहिले से अउर जादा दासन काहीं किसानन के लघे पठइन, त ऊँ पंचे उनहूँ के साथ उहयमेर बरताव किहिन। 37तब अन्त माहीं ऊँ जमींदार अपने लड़िका काहीं किसानन के लघे इआ सोचिके पठइन, कि ऊँ हमरे लड़िका के मान-सम्मान करिहँय। 38पय किसान लोग उनखे लड़िका काहीं देखिके आपस माहीं कहिन, कि ‘इहय त बगिया के बारिसदार आय, चला, हम पंचे एही मारि डारी, जउने एखर अधिकार हमहीं पंचन काहीं मिल जाय। 39एसे ऊँ पंचे ओही पकड़िन, अउर अंगूर के बगिया से बहिरे लइ जाइके मारि डारिन। 40त बताबा, जब अंगूर के बगिया के मालिक अइहँय, त ऊँ किसानन के साथ का करिहँय?” 41तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, कि “बगिया के मालिक ऊँ बुरे मनइन काहीं पूरी तरह से नास करिहँय; अउर अंगूर के बगिया के ठेका दुसरे किसानन काहीं दइ देइहँय, जउन समय-समय माहीं अंगूर के फर उनहीं द्या करिहँय।”

42यीसु उनसे कहिन, कि “का तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं इआ नहीं पढ़े आह्या: कि

‘जउने पथरा काहीं कारीगर लोग बेकार समझिन तय, उहय कोनमा के सबसे खास पथरा बनिगा? अउर इआ काम प्रभू किहिन हीं, जउन हमरे नजर माहीं अदभुत हय21:42 भज 118:22-23।”

43एसे हम तोंहसे पंचन से कहित हएन, कि “परमातिमा के राज तोंहसे लइ लीन जई, अउर अइसन मनइन काहीं दइ दीन जई, जउन उनखे राज के मुताबिक बरताव करिहँय। 44जे कोऊ इआ पथरा माहीं गिरी, उआ चकनाचूर21:44 जे कोऊ हमहीं छोंड़ी ओही खुब सजा मिली। होइ जई; अउर जेखे ऊपर उआ पथरा गिरी, ओही पीस डारी।” 45यीसु के ईं उदाहरनन काहीं सुनिके, प्रधान याजक लोग अउर फरीसी लोग समझिगें, कि ऊँ हमरेन बारे माहीं आय कहत हें। 46एसे ऊँ पंचे यीसु काहीं पकड़ँइ चाहिन, पय मनइन काहीं डेराइगें, काहेकि ऊँ मनई यीसु काहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले मानत रहे हँय।

22

बिआह-भोज के उदाहरन

(लूका 14:15-24)

1यीसु पुनि उदाहरन दइके उनसे कहँइ लागें, 2“स्वरग के राज, ऊँ राजा कि नाईं हय, जउन अपने लड़िका के काजे माहीं, खाँय-पिअँइ के प्रबन्ध किहिन। 3अउर ऊँ अपने दासन काहीं पठइन, कि जिनखर नेउता हय, उनहीं खाना खाँय के खातिर बोलाय लाबा; पय ऊँ पंचे नहीं आएँ। 4अउर पुनि ऊँ अपने दासन काहीं इआ कहिके पठइन, कि जिनखर नेउता हय, उनसे इआ कह्या, कि ‘देखा, हम खाना तइआर कइ चुके हएन, हमार बोकरा अउर पाले जानबर काटे जाइ चुके हँय, अउर पूरी तइआरी होइ चुकी हय; एसे तूँ पंचे खाना खाँय आबा।’ 5पय ऊँ पंचे उनखे बात के तिरस्कार कइके, अपने-अपने काम माहीं चल दिहिन, कोऊ अपने खेत माहीं, अउर कोऊ अपने बइपार माहीं। 6अउर जउन मनई बचे रहे हें, ऊँ पंचे राजा के दासन काहीं पकड़िके उनखर अपमान किहिन, अउर मारि डारिन। 7तब राजा आगबबूला होइगें। अउर अपने सिपाहिन काहीं पठइके, कतल करँइ बाले मनइन काहीं मरबाय डारिन, अउर उनखे सहर काहीं, आगी लगबाइके नास कइ दिहिन। 8अउर ऊँ अपने दासन से कहिन, कि ‘बिआह-भोज त तइआर हय, पय जिनहीं हम नेउता दिहे रहेन हय, ऊँ पंचे काबिल नहीं ठहरें।’ 9एसे चउराहन माहीं जा, अउर जेतने मनई तोहईं मिलँय, ऊँ सगलेन काहीं बिआह-भोज माहीं बोलाय लाबा। 10तब ऊँ दास सड़कन माहीं गें, अउर नीक-नागा जेतने मनई उनहीं मिलें, ऊँ सगलेन काहीं लइ आएँ; अउर बिआह के घर महिमानन से भरिगा।”

11“पय जब राजा महिमानन काहीं देखँइ भीतर गें, त ऊँ उहाँ एकठे मनई काहीं देखिन, जउन बिआह के ओन्हा नहीं पहिरे रहा आय। 12त राजा ओसे पूँछिन, कि ‘हे साथी; तूँ काजे के ओन्हा पहिरे बिना इहाँ भीतर कइसन आय गया?’ अउर उआ मनई कुछू जबाब नहीं दिहिस। 13तब राजा अपने दासन से कहिन, कि ‘एखर हाँथ-गोड़ बाँधिके एही बहिरे अँधिआरे माहीं फेंकि द्या, जहाँ मनइन के रोउब अउर दाँत पीसब होत हय।’ 14काहेकि बोलाए मनई त खुब हें, पय चुने मनई थोरिन काहीं हें।”

महाराजा कैसर काहीं कर, देब

(मरकुस 12:13-17; लूका 20:20-26)

15तब फरीसी लोग जाइके आपस माहीं इआ सलाह किहिन, कि यीसु के बातन माहीं कउनमेर से गलती पकड़ी। 16तब ऊँ पंचे अपने चेलन काहीं, राजा हेरोदेस के गुट बाले मनइन के साथ इआ कहिके, यीसु के लघे पठइन, कि “हे गुरू, हम पंचे जानित हएन, कि अपना सच्चे हएन, अउर परमातिमा के गइल सच्चाई से बताइत हएन, अउर कोहू के परबाह नहीं करी, काहेकि अपना मनइन के मुँह देखिके बातँय नहीं करी। 17एसे अपना हमहीं बताई, कि महाराजा कैसर काहीं कर देब उचित हय, कि नहीं?” 18तब यीसु उनखे मन के दुस्टता काहीं जानिके उनसे कहिन, “हे कपटिव, हमहीं काहे अजमउते हया? 19कर देंइ बाला सिक्का हमहीं देखाबा।” तब ऊँ पंचे उनखे लघे चाँदी के एकठे सिक्का लइ आएँ। 20अउर यीसु उनसे पूँछिन, कि “इआ सिक्का माहीं केखर चित्र अउर नाम हय?” 21तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, कि “महाराजा कैसर के।” तब यीसु उनसे कहिन, कि “जउन महाराजा कैसर के आय; उआ महाराजा कैसर काहीं द्या, अउर जउन परमातिमा के आय, उआ परमातिमा काहीं द्या।” 22इआ बात काहीं सुनिके ऊँ पंचे खुब अचरज मानिन, अउर यीसु काहीं छोंड़िके चलेगें।

मरिके जिन्दा होंइ अउर काजे के बारे माहीं प्रस्न

(मरकुस 12:27-28; लूका 20:27-40)

23उहय दिना सदूकी दल के मनई जउन इआ मानत रहे हँय, कि मरे के बाद कोऊ दुसराय जिन्दा नहीं होंय, ऊँ पंचे यीसु के लघे आइके उनसे पूँछिन, कि 24“हे गुरू, मूसा बिधान माहीं कहिन रहा हय, कि अगर कउनव मंसेरुआ बिना लड़िका-बच्चा पइदा किहे मर जाय, त ओखर भाई ओखे मेहेरिआ से काज कइके अपने भाई के खातिर बंस पइदा करय। 25अउर हमरे इहाँ सातठे भाई रहे हँय; त उनमा से पहिल भाई काज कइके मरिगा, अउर सन्तान न होंइ के कारन, अपने मेहेरिआ काहीं अपने भाई के खातिर छोंड़िगा। 26अउर इहइमेर से दूसर अउर तीसर भाई घलाय किहिन, अउर सातँव जनेन के साथ इहइमेर भ। 27अउर सातँव जनेन के मरे के बाद उआ मेहेरिअव मरिगे। 28एसे जब ऊँ पंचे मरेन म से पुनि जिन्दा होइहँय, त उआ सातँव जनेन म से केखर मेहेरिआ कहाई? काहेकि उआ सगलेन के मेहेरिआ होइ चुकी तय।” 29तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “तूँ पंचे पबित्र सास्त्र, अउर परमातिमा के सक्ती काहीं नहीं जनते आह्या; इहय कारन से धोखे माहीं परे हया। 30काहेकि मरेन म से पुनि जिन्दा होए के बाद कोहू के काज-बिआह न होई, बलकिन ऊँ पंचे स्वरग माहीं परमातिमा के दूतन कि नाईं होइ जइहँय। 31पय मरे के बाद दुबारा जिन्दा होंइ के बारे माहीं, पबित्र सास्त्र माहीं का तूँ पंचे इआ बचन नहीं पढ़े आह्या, जउने माहीं परमातिमा कहिन तय, कि 32‘हम अब्राहम, इसहाक अउर याकूब के परमातिमा आहेन’? अउर ऊँ मरे22:32 अब्राहम, इसहाक, अउर याकूब कुछ समय पहिले मरिगे रहे हँय, पय ऊँ पंचे स्वरग माहीं अबहिनव जिन्दा हें, एसे परमातिमा कहिन हीं कि हम इनखर परमातिमा आहेन। मनइन के नहीं, पय जिन्दा मनइन के परमातिमा आहीं।” 33इआ सुनिके मनई उनखे उपदेस से चउआइगें।

सगलेन से बड़ा हुकुम

(मरकुस 12:28-34; लूका 10:25-28)

34जब फरीसी लोग इआ सुनिन, कि यीसु अपने जबाब से सदूकी लोगन के मुँह बंद कइ दिहिन हीं, त ऊँ पंचे एकट्ठा भें। 35अउर उनमा से मूसा के बिधान काहीं निकहा से जानँइ बाला, यीसु के परिच्छा लेंइ के खातिर, उनसे पूँछिस, 36“हे गुरू, मूसा के बिधान माहीं सगलेन से बड़ा हुकुम कउन हय?” 37तब यीसु उनसे कहिन, कि “तूँ अपने परमातिमा प्रभू से अपने पूरे मन से, अपने पूरी सक्ती से, अउर अपने पूरी बुद्धी से, प्रेम करा22:37 ब्यब 6:538सगलेन से बड़ा अउर मुख्य हुकुम त इहय आय। 39अउर ओहिन कि नाईं इआ दुसरव हुकुम हय, कि तूँ अपने परोसी से अपनेन कि नाईं प्रेम करा। 40ईंन दोनव हुकुम, मूसा के बिधान अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के लिखी बातन के अधार आहीं।”

मसीह केखर लड़िका आहीं?

(मरकुस 12:35-37; लूका 20:41-44)

41जब फरीसी लोग एकट्ठा रहे हँय, तब यीसु उनसे पूँछिन, कि 42“मसीह के बारे माहीं तूँ पंचे का सोचते हया? ऊँ केखर सन्तान आहीं?” ऊँ पंचे उनसे कहिन, कि “राजा दाऊद के।” 43तब यीसु उनसे पूँछिन, “त फेर राजा दाऊद पबित्र आत्मा के अँगुआई से, उनहीं प्रभू कहिके, इआ काहे कहत हें, कि 44प्रभू, हमरे22:44 हमरे प्रभू मसीह काहीं दरसाबत हय। प्रभू से कहिन, कि हमरे दहिने कइती बइठा, जब तक कि हम तोंहरे बइरिन काहीं तोंहरे अधीन न कइ देई22:44 भज 110:145अउर जब राजा दाऊद उनहीं खुदय प्रभू कहत हें, त ऊँ उनखर सन्तान कइसन कहाए।” 22:45 इआ बतामँइ के खातिर कि मसीह, राजा दाऊद से बड़े हँय, इआ लिखा ग हय।46इआ बात सुनिके ऊँ पंचे, उनहीं कुछू जबाब नहीं दए पाइन; अउर उआ दिना से कोहू के यीसु से कुछू पूँछँइ के हिम्मत नहीं परी।

23

मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन अउर फरीसी लोगन से सतरक रह्या

(मरकुस 12:38,39; लूका 11:43,46; 20:45,46)

1एखे बाद यीसु भीड़ से अउर अपने चेलन से कहिन, कि 2“मूसा के बिधान सिखामँइ बाले अउर फरीसी लोग मूसा के बिधान बतामँइ बाले अधिकारी हें। 3एसे जउन कुछू ऊँ पंचे तोंहसे कहँय, त उहय किहा अउर मान्या, पय उनखे कि नाईं काम न किहा; काहेकि ऊँ पंचे कहत त हें, पय ओही करँय नहीं। 4अउर ऊँ पंचे मनइन के ऊपर नेमन के अइसन बोझा लाद देत हें, जिनखर पालन करब कठिन हय; अउर ऊँ पंचे, खुद मनइन काहीं नेमन के पालन करँइ माहीं एक्कव मदत नहीं करँय। 5अउर ऊँ पंचे अपने सगले कामन काहीं, मनइन क देखामँइ के खातिर करत हें: अउर ऊँ पंचे अपने तहबीजन23:5 ऊँ पंचे चमड़ा के तहबीज माहीं परमातिमा के बचन धइके, लिलारे, अउर हाँथेन माहीं बाँधत रहे हँय। अउर ओन्हन के झालरन काहीं, एसे बड़ी से बड़ी करत रहत हें, कि जउने मनई उनहीं धरमी समझँय। 6अउर ऊँ पंचे नेउतन माहीं खास-खास जघन माहीं बइठत हें, अउर सभाघरन माहीं खास जघा पामँइ चाहत हें। 7अउर चउराहन माहीं नबस्कार करबाउब, अउर मनइन माहीं गुरू कहाउब उनहीं नीक लागत हय। 8पय तूँ पंचे खुद काहीं मनइन से गुरू न कहबाया, काहेकि तोंहार पंचन के एकइठे गुरू हें; अउर तूँ पंचे सगले जन भाई-बहिनी आह्या। 9अउर तूँ पंचे धरती माहीं कोहू काहीं पिता न कह्या, काहेकि तोंहार पंचन के एकयठे पिता हें, जउन स्वरग माहीं रहत हें। 10अउर कोहू से मालिक न कहबाया, काहेकि तोंहार पंचन के एकयठे मालिक हें, ऊँ मसीह आहीं। 11अउर जे कोऊ तोंहरे बीच माहीं बड़ा बनय चाहय, उआ तोंहार पंचन के सेबक बनय। 12काहेकि जे कोऊ खुद काहीं बड़ा बनाई, उआ परमातिमा के व्दारा छोट कीन जई: अउर जे कोऊ खुद काहीं छोट बनाई, त उआ परमातिमा के व्दारा बड़ा कीन जई।”

मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन अउर फरीसी लोगन के पाखन्ड के बुराई

(मरकुस 12:40; लूका 11:39-42,44,52; 20:47)

13यीसु उनसे कहिन, कि “हे ढोंगिव, मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव, तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे मनइन काहीं गलत सिच्छा दइके, परमातिमा के राज माहीं आमँइ से रोंकते हया। तूँ पंचे न त खुदय परमातिमा के राज माहीं जाँइ चहते आह्या, अउर न उनहूँ काहीं जाँइ देते आह्या, जे कोऊ उनखे राज माहीं जाँइ चाहत हें। 14(हे ढोंगिव, मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे बिधबन के घरन काहीं लूट लेते हया, अउर मनइन के आँगे खुद काहीं धरमी देखामँइ के खातिर खुब देर तक प्राथना करते हया23:14 बचन 14 कुछ बाइबिलन माहीं नहिं आय।।)”

15“हे ढोंगिव, मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे एक जनेव काहीं आपन चेला बनामँइ के खातिर रातव-दिन एक कइ देते हया। अउर जब उआ तोंहार चेला बन जात हय, त ओही अपने से दुगुना अनन्तकाल के घोर सजा पामँइ के काबिल बनाय देते हया।”

16“हे आँधर अँगुअव, तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे जउन कहते हया, कि अगर कोऊ मन्दिर के कसम खात हय, त उआ कसम काहीं मानब जरूरी नहिं आय, पय अगर कोऊ मन्दिर माहीं धरी सोने के बनी चीजन के कसम खात हय, त ओही ओखर पालन करब जरूरी हय। 17हे मूरखव, अउर अँधरव, बताबा को बड़ा हय; सोने के बनी चीज, इआ कि उआ मन्दिर जउने से ऊँ चीजँय पबित्र होती हईं? 18अउर तूँ पंचे इहव कहते हया, कि अगर कोऊ बेदी के कसम खात हय, अउर ओखर पालन नहीं करय, त ओही कुछू न होई, पय अगर कोऊ बेदी के ऊपर जउन भेंट ही, ओखर कसम खात हय, त ओही ओखर पालन जरूर करँइ परी। 19हे अँधरव, बताबा को बड़ा हय; भेंट इआ कि बेदी? जउने से भेंट पबित्र होत ही? 20एसे जे कोऊ बेदी के कसम खात हय, त उआ बेदी के, अउर ओखे ऊपर धरी चीजन के घलाय कसम खात हय। 21अउर जे कोऊ मन्दिर के कसम खात हय, त उआ मन्दिर के, अउर ओमाहीं रहँइ बालेन के घलाय कसम खात हय। 22अउर जे कोऊ स्वरग के कसम खात हय, त उआ परमातिमा के सिंहासन के, अउर ओखे ऊपर बइठँय बाले के घलाय कसम खात हय।”

23“हे ढोंगिव, मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे पोदीना, सउँफ अउर जीरा के दसमा हिस्सा त देते हया, पय तूँ पंचे मूसा के बिधान के खास बातन काहीं, जइसन कि न्याय करब, दया करब, अउर परमातिमा के ऊपर बिसुआस करब, छोंड़ दिहा हय; तोहईं पंचन काहीं इआ जरूरी रहा हय, कि ईं बातन काहीं घलाय करत रहत्या, अउर उनहूँ काहीं न छोंड़त्या। 24हे आँधर अँगुअव, तूँ पंचे अपने पानी से मच्छर काहीं त छनते हया, पय ऊँट23:24 यहूदी लोगन माहीं ऊँट के माँस खाब मना रहा हय। काहीं लील लेते हया23:24 मूसा के बिधान के मुताबिक जउने कामन काहीं करब मना रहा हय, उनहीं ऊँ पंचे करत रहे हँय, अउर जउने बातन के कउनव महत्व नहीं रहा आय, उनहीं करँइ के खातिर जादा जोर देत रहे हँय।।”

25“हे कपटिव, मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे खोरबन अउर टठिअन काहीं उपरय-ऊपर त मजते हया, पय उनखे भीतर छल-कपट अउर असंयम भरे हँय। 26हे आँधर फरीसी लोगव, पहिले खोरबन अउर टठिअन काहीं भीतर से माजा, जउने ऊँ बहिरेव से घलाय साफ होइ जाँय।”

27“हे कपटी मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। तूँ पंचे चून पोती कब्रन कि नाईं हया, जउन ऊपर से त खुब निकही देखाती हईं, पय उनखे भीतर मरे मनइन के हाड़ा, अउर हरेक मेर के गंदगी भरी रहती हईं। 28इहइमेर तुहूँ पंचे, बहिरे से त धरमी देखाई देते हया, पय भीतर कपट अउर अधरम से भरे हया, अउर परमातिमा के नेमन काहीं नहीं मनते आह्या।”

मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन अउर फरीसी लोगन काहीं मिलँइ बाली सजा के बारे माहीं भबिस्सबानी

(लूका 11:47-51)

29“हे कपटिव, मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, अउर फरीसी लोगव, तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के कब्रन काहीं सजउते हया, जिनहीं तोंहार पंचन के बाप-दादा मारि डारिन तय, अउर परमातिमा के नजर माहीं निरदोस मनइन के कब्रँय बनउते हया, 30अउर तूँ पंचे कहते हया, कि ‘अगर हम पंचे अपने बाप-दादन के समय माहीं होइत, त परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं मारँय माहीं सामिल न होइत।’ 31एसे तूँ पंचे अपने बिरोध माहीं, खुदय गबाही देते हया, कि तूँ पंचे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के कतलिन के सन्तान आह्या। 32अउर तूँ पंचे अपने बाप-दादन के पाप के घड़ा निकहा से भर द्या। 33हे साँप, अउर करिआ साँप कि नाईं खतरनाक मनइव, तूँ पंचे नरक के सजा से कबहूँ न बचिहा। 34एसे देखा, हम तोंहरे पंचन के लघे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन, अउर ग्यानी मनइन काहीं अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन काहीं पठइत हएन; अउर तूँ पंचे उनमा से कुछ जनेन काहीं मारि डरिहा, अउर क्रूस माहीं चढ़इहा, अउर कुछ जनेन काहीं अपने सभाघर माहीं चाबुक मरिहा, अउर एक सहर से दुसरे सहर माहीं भगइहा। 35जउने परमातिमा के नजर माहीं निरदोस हाबिल से लइके बिरिक्याह के लड़िका जकरयाह तक, जेही तूँ पंचे मन्दिर अउर बेदी के बीच माहीं मारि डारे रहे हया, अउर जेतने परमातिमा के नजर माहीं निरदोस मनई रहे हँय, उनहीं तूँ पंचे इआ धरती माहीं मारि डारे हया, त ओखर सजा तोहईं जरूर मिली। 36अउर हम तोंहसे सही कहित हएन, कि ईं सगली बातन के खातिर, इआ समय के मनइन काहीं सजा भोगँइ परी।”

यरूसलेम सहर के मनइन के खातिर यीसु के दुखी होब

(लूका 13:34,35)

37“हे यरूसलेम सहर के मनइव, हे यरूसलेम सहर के मनइव! तूँ पंचे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं मारि डरते हया, अउर जेतने जने तोंहरे लघे पठए गे हें, उनहीं पथरा मरते हया। अउर हम कइअक बेरकी इआ चाहेन, कि जइसन मुरगी अपने बच्चन काहीं, अपने पखनन के नीचे एकट्ठा करत ही, उहयमेर हमहूँ तोंहरे लड़िकन काहीं एकट्ठा कइ लेई, पय तूँ पंचे इआ नहीं चाह्या। 38अउर देखा, अब तोंहार पंचन के मन्दिर पूरी तरह उजर जई। 39काहेकि हम तोंहसे कहित हएन, कि अब से जब तक तूँ पंचे इआ न कइहा कि, कि ‘धन्य हें ऊँ, जउन प्रभू के नाम से आबत हें’ तब तक तूँ पंचे हमहीं पुनि कबहूँ न देखिहा23:39 भज 118:26।”

24

मन्दिर के नास होंइ के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी

(मरकुस 13:1,2; लूका 21:5,6)

1जब यीसु मन्दिर से निकरिके बहिरे जात रहे हँय, त उनखर चेला लोग मन्दिर के बनाबट काहीं देखामँइ के खातिर उनखे लघे आएँ। 2तब यीसु उनसे कहिन, कि “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जउन इआ मन्दिर के बनाबट तूँ पंचे देख रहे हया, एक्कव पथरा एक दुसरे के ऊपर न देखइहँय, ऊँ सगले गिराय दीन जइहँय।”

संसार के अन्त होंइ से पहिले आमँइ बाले दुख अउर भयानक कस्ट

(मरकुस 13:3-13; लूका 21:7-19)

3जब यीसु जैतून नाम के पहार के ऊपर बइठ रहे हँय, त उनखर चेला लोग एकान्त माहीं उनखे लघे जाइके उनसे कहिन, कि “अपना हमहीं बताई, कि ईं बातँय कब होइहँय? अपना के दुबारा आमँइ के अउर इआ संसार के अन्त होंइ के, का चिन्हारी होई?” 4तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “तूँ पंचे सतरक रह्या, कोऊ तोंहईं बिसुआस से भटकाए न पाबय, 5काहेकि खुब मनई अइसन होइहँय जउन हमरे नाम से आइके कइहँय, कि ‘हम मसीह आहेन’ अउर खुब मनइन काहीं बिसुआस से भटकाय देइहँय। 6अउर तूँ पंचे जब युद्ध होत देख्या, अउर युद्धन के चरचा सुन्या, त घबराय न जया, काहेकि ईं सगली बातँय जरूर होइहँय, पय उआ समय संसार के अन्त न होई। 7काहेकि एक जाति के मनई, दुसरे जाति के मनइन के ऊपर चढ़ाई करिहँय, अउर एक देस, दुसरे देस के ऊपर चढ़ाई करी, अउर हरेक जघन माहीं अकाल परिहँय, अउर भुँइडोल होइहँय। 8अउर ईं सगली बातँय दुख-मुसीबतन के सुरुआत होइहँय। 9तब उआ समय मनई कस्ट देंइ के खातिर तोहईं पंचन काहीं पकड़बइहँय, अउर मारि डरिहँय, अउर हमरे ऊपर बिसुआस करँइ के कारन सगले जाति के मनई तोंहसे दुसमनी रखिहँय। 10अउर तब खुब मनई बिसुआस से भटक जइहँय, अउर एक दुसरे काहीं पकड़बइहँय, अउर एक दुसरे से दुसमनी रखिहँय। 11अउर खुब जने परमातिमा के लबरी सँदेस बतामँइ बाले तइआर होइहँय, अउर खुब जनेन काहीं बिसुआस से भटकइहँय। 12अउर अधरम के बढ़ँइ के कारन, खुब जनेन के प्रेम ठन्ड होइ जई, 13पय जे कोऊ अन्त तक धीरज धरे रही, उहय मुक्ती पाई। 14अउर परमातिमा के राज के इआ खुसी के खबर सगले संसार माहीं सुनाई जई, कि जउने सगले जाति के मनइन के खातिर गबाही होय, अउर तब संसार के अन्त आय जई।”

महासंकट के सुरुआत

(मरकुस 13:14-23; लूका 21:20-24)

15“एसे जब तूँ पंचे उआ भयानक अउर बिनास करँइ बाली चीज काहीं, मन्दिर के पबित्र जघा माहीं ठाढ़ देख्या, जेखे के बारे माहीं दानिय्येल नबी बखान किहिन रहा हय24:15 दानि 9:27।” (अउर पढ़ँइ बाला समझ लेय, कि एखर मतलब का हय) 16उआ समय जउन मनई यहूदिया प्रदेस माहीं होंय, त ऊँ पंचे पहारन माहीं भाग जाँय। 17अउर जे कोऊ छत के ऊपर होय, त उआ अपने घर माहीं समान लेंइ के खातिर नीचे न उतरय; 18अउर जे कोऊ खेत माहीं होय, त उआ आपन ओन्हा लेंइ के खातिर, पीछे न लउटय।

19अउर ऊँ दिनन माहीं जउन मेहेरिआ लड़कहाई होइहँय, अउर जे कोऊ अपने लड़िकन काहीं दूध पिआबत होइहँय, त उनहीं पंचन काहीं खुब कस्ट होई। 20एसे तूँ पंचे प्राथना करा, कि जाड़े के दिन माहीं, इआ कि पबित्र दिन काहीं, तोंहईं भागँय न परय। 21काहेकि ऊँ दिनन माहीं एतना भारी संकट अई, कि जब से परमातिमा इआ संसार काहीं बनाइन हीं, तब से लइके आज तक अइसन संकट कबहूँ नहीं आबा, अउर न कबहूँ अउबय करी। 22अउर अगर परमातिमा ऊँ दिनन काहीं कम न करते, त कउनव प्रानी न बचतें, पय अपने चुने मनइन के कारन परमातिमा ऊँ दिनन काहीं घटइहँय। 23अउर उआ समय अगर कोऊ तोंहसे कहय, कि “देखा, मसीह ‘इहाँ हें!’ इआ कि ‘उहाँ हें’, त उनखर बिसुआस बेलकुल न मान्या।”

24काहेकि लबरे मसीह, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले लबरे मनई तइआर होइहँय, अउर ऊँ पंचे बड़े-बड़े चिन्ह अउर अचरज के काम देखइहँय, कि होइ सकय त चुने मनइन काहीं घलाय भटकाय देंय, 25अउर देखा, हम पहिलेन से तोंहईं पंचन काहीं सब कुछ बताय दिहेन हय। 26एसे अगर ऊँ पंचे तोंहसे कहँय, कि “देखा, मसीह सुनसान जघा माहीं हें, त तूँ पंचे उहाँ न जया; अउर अगर इआ कहँय कि घरन माहीं लुके हँय, त उनखर बिसुआस न मान्या। 27काहेकि जइसन बिजुली पूरुब से निकरिके पच्छिम तक चमकत ही, उहयमेर मनई के लड़िका घलाय अइहँय। 28काहेकि जहाँ चील्ह एकट्ठा होती हँय, त इआ जाने मिलत हय, कि उहाँ लहास ही।”

मनई के लड़िका के दुसराय आउब

(मरकुस 13:24-27; लूका 21:25-28)

29“ऊँ दिनन के दुख अउर कस्ट के बाद तुरन्तय सुरिज म एक्कव उँजिआर न रहि जई, अउर जोंधइआ उँजिआर न देई, अउर तरइया अकास से नीचे गिर अइहँय, अउर अकास के सगली चीजँय हलाई जइहँय। 30तब मनई के लड़िका के आमँइ के चिन्हारी, अकास माहीं देखाई देई, अउर धरती माहीं रहँइ बाले सगले कुलन के मनई बड़ा बिलाप करिहँय, अउर मनई के लड़िका काहीं अपार सक्ती अउर महिमा के साथ, अकास के बदरिन माहीं आबत देखिहँय। 31अउर ऊँ तुरही के खुब तेज अबाज के साथ अपने स्वरगदूतन काहीं पठइहँय, अउर ऊँ पंचे अकास के एक छोर से दुसरे छोर तक, चारिव दिसन से उनखे चुने मनइन काहीं एकट्ठा करिहँय।”

अंजीर के बिरबा के उदाहरन

(मरकुस 13:28-31; लूका 21:29-33)

32अउर यीसु उनसे पुनि कहिन, कि “अंजीर के बिरबा से इआ सिच्छा ल्या, जब ओखर डेरइआ कोमर होइ जाती हईं, अउर उनमा पत्ता निकरँइ लागत हें, तब तूँ पंचे इआ जान लेते हया, कि गरमी के रित हरबिन आमँइ बाली हय। 33इहइमेर से जब तूँ पंचे ईं सगली बातन काहीं होत देख्या, त इआ जान लिहा कि ऊँ अमइन बाले हें, बलकिन आइन गे हँय। 34हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जब तक ईं सगली बातँय पूर न होइ जइहँय, तब तक इआ समय के मनइन के अन्त न होई। 35अकास अउर धरती टर जइहँय, पय हमार कही बातँय कबहूँ न टरिहँय।”

यीसु मसीह आमँइ बाले हें एसे तइआर रहा

(मरकुस 13:32-37; लूका 17:26-30,34-36)

36“उआ दिन अउर उआ समय के बारे माहीं कोऊ नहीं जानँय, न स्वरग के दूत, अउर न लड़िका, ओखे बारे माहीं केबल पिता परमातिमा भर जानत हें। 37अउर जइसन नूह के समय माहीं भ रहा हय, उहयमेर मनई के लड़िका के आउब घलाय होई24:37 उत्प 6:5-8,11-1338काहेकि जइसन इआ धरती माहीं जल-प्रलय के आमँइ से पहिले, जब तक नूह जिहाज माहीं चढ़ नहीं गें, तब तक सगले मनई खात-पिअत रहे हँय, अउर ऊँ पंचे काज-बिआह करत रहे हँय, अउर बिटिअन काहीं काज-बिआह के खातिर सउँपत रहे हँय। 39अरथात जब तक जल-प्रलय आइके सगले मनइन काहीं बहाय नहीं लइगा, तब तक ऊँ पंचे कुछू नहीं जाने पाइन तय; उहयमेर मनई के लड़िका के आउब घलाय होई। 40उआ समय दुइ जने खेत माहीं होइहँय, उनमा से एक जने ऊपर उठाय लीन जई, अउर दूसर छोंड़ दीन जई। 41उहयमेर एक साथ जेतबा पीसत दुइठे मेहेरिअन म से एकठे ऊपर उठाय लीन जई, अउर दूसर छोंड़ि दीन जई। 42एसे हर समय सतरक रहा, काहेकि तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि तोंहार प्रभू कउने दिन अइहँय। 43पय तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि अगर घर के मालिक जानत कि चोर केतनीदार अई, त उआ जागत रहत, अउर अपने घर माहीं चोरी न होंइ देत। 44एसे तुहूँ पंचे तइआर रहा, काहेकि जउने समय के बारे माहीं तूँ पंचे सोचेव न होइहा, कि मनई के लड़िका अई, उहय समय मनई के लड़िका आय जई।”

बिसुआस के काबिल दास अउर दुस्ट दास के उदाहरन

(लूका 12:41-48)

45एसे “उआ बिसुआस के काबिल अउर बुद्धिमान दास को कहाबत हय, उहय जेखर मालिक ओही अपने नोकर-चाकरन के ऊपर मुखिया बनाबत हें, कि उआ, समय माहीं सगलेन काहीं खाँय-पिअँइ क देय। 46धन्य हय, उआ दास, जेही ओखर मालिक आइके जउन कहिगे रहे हँय, उहयमेर करत पामँय। 47हम तोंहसे सही कहित हएन; ऊँ मालिक, ओही अपने सगले धन-सम्पत्ती के मालिक बनाय देइहँय। 48पय अगर उआ दुस्ट दास सोचँइ लागय, कि हमार मालिक देर से अइहँय, 49अउर उनखे दुसरे दास-दासिन काहीं मारँइ पीटँय लागय, अउर पियक्कड़न के साथ खाँय-पिअँइ माहीं परि जाय। 50तब ओखर मालिक अइसन दिन काहीं अइहँय, जब उआ दास सोचत होई, कि आज ऊँ न अइहँय। 51अउर अइसन समय माहीं आय जइहँय, जउने काहीं उआ न जानत होई, अउर ऊँ मालिक आइके ओही खुब सजा देइहँय, अउर ओही कपटी मनइन के बीच माहीं डार देइहँय, जहाँ रोउब अउर दाँत पीसब भर होई।”

25

दसठे कुमारिन के उदाहरन

1यीसु एकठे उदाहरन बताइन, कि “स्वरग के राज ऊँ दसठे कुमारिन कि नाईं होई, जउन आपन-आपन मसाल लइके दुलहा से मिलँइ के खातिर अपने घरन से निकरीं। 2अउर ऊँ कुमारिन म से पाँच जने मूरुख रही हँय, अउर पाँच जने समझदार रही हँय। 3अउर उनमा से जउन मूरुख रही हँय, ऊँ पंचे आपन-आपन मसालँय त लइ लिहिन, पय अपने साथ माहीं अलग से तेल नहीं लिहिन; 4पय जउन समझदार रही हँय, ऊँ पंचे आपन-आपन मसालँय लिहिन, अउर अपने साथ कुप्पिन माहीं तेल घलाय भर लिहिन। 5अउर जब दुलहा के आमँइ माहीं देरी होइगे, त ऊँ सगली जने अउँघाँय लागीं अउर सोय गईं।

6अउर जब आधी रात के धूम मची, कि ‘देखा, दुलहा आय रहे हँय! उनसे मिलँइ के खातिर चला।’ 7तब ऊँ सगली कुमारी उठिके, आपन-आपन मसालँय ठीक करँइ लागीं। 8अउर जउन मूरुख रही हँय, ऊँ पंचे समझदारन से कहिन, कि ‘अपने तेल म से थोरी क तेल हमहूँ पंचन काहीं घलाय दइ द्या; काहेकि हमार पंचन के मसालँय बुझाँय बाली हईं।’ 9पय जउन समझदार रही हँय उनहीं जबाब दिहिन, कि ‘हम न देब, काहेकि होइ सकत हय, कि इआ तेल हमरे अउर तोंहरे खातिर घलाय न पूजय; एसे उचित त इआ हय, कि तूँ पंचे बेंचँइ बालेन के लघे जाइके अपने खातिर तेल खरीद ल्या।’ 10अउर जब ऊँ पंचे तेल खरीदँय के खातिर जात रही हँय, तबहिनय दुलहा आइगें, अउर जउन कुमारी तइआर रही हँय, ऊँ पंचे सगली दुलहा के साथ बिआह-भोज माहीं चली गईं, तब दुअरा बंद कइ दीनगा। 11एखे बाद ऊँ दुसरव कुमारी घलाय आइके कहँइ लागीं, कि ‘हे मालिक, हे मालिक, हमरे खातिर दुअरा खोल देई!’ 12पय मालिक उनहीं जबाब दिहिन, कि ‘हम तोंहसे कहित हएन, कि हम तोंहईं पंचन काहीं नहीं जानी।’ 13एहिन से तूँ पंचे सतरक रहा, काहेकि तूँ पंचे उआ दिन अउर समय के बारे माहीं नहीं जनते आह्या, कि उआ समय कबय आय जई?”

तीनठे दासन के उदाहरन

(लूका 19:11-27)

14“स्वरग के राज उआ मनई कि नाईं होई, जउन प्रदेस जाँइ के समय, अपने दासन काहीं बोलाइके आपन धन-सम्पत्ती उनहीं सउँपि दिहिन। 15अउर ऊँ एक जने काहीं पइसन से भरी पाँचठे थइली दिहिन, अउर दुसरे जने काहीं दुइठे थइली, अउर तिसरे जने काहीं एकठे थइली दिहिन, अउर हरेक जन काहीं उनखे सामर्थ के मुताबिक दिहिन, अउर तब ऊँ परदेस चलेगें। 16अउर तब जेही पइसन से भरी पाँचठे थइली मिली रही हँय, त उआ हरबिन जाइके उनसे बइपार किहिस, अउर पाँच थइली पइसा अउर कमान। 17अउर इहइमेर से जेही दुइठे थइली मिली रही हँय, त उहव घलाय दुइ थइली पइसा अउर कमान। 18पय जउने काहीं एकठे थइली मिली रही हय, त उआ जाइके गड्ढा खोदिस, अउर ओहिन माहीं अपने मालिक के पइसा गाड़ दिहिस।

19अउर खुब दिना बीते के बाद, ऊँ दासन के मालिक परदेस से आइके उनसे हिंसाब-किताब लेंइ लागें। 20अउर जेही पइसा से भरी पाँचठे थइली मिली रही हँय, त उआ पाँच थइली पइसा अउर लइआइके कहिस, कि ‘हे मालिक, अपना हमहीं पाँचठे थइली सउँपेन तय, त अपना देखी, हम पाँच थइली पइसा अउर कमानेन हँय।’ 21तब उआ दास के मालिक ओसे कहिन, कि ‘साबास, तूँ बिसुआस के काबिल अउर निकहे दास हया, तूँ थोर काहीं धन माहीं बिसुआस के काबिल रहे हया; एसे हम तोंहईं खुब चीजन के अधिकारी बनाउब। अउर तूँ जाइके अपने मालिक के खुसी माहीं सामिल होइजा।’

22अउर जउने दास काहीं दुइठे थइली मिली रही हँय, त उहव आइके कहिस, ‘हे मालिक, अपना हमहीं दुइ थइली पइसा सउँपेन तय, त अपना देखी, हम दुइ थइली पइसा अउर कमानेन हय।’ 23तब मालिक, उआ दास से कहिन, कि ‘साबास, तूँ बिसुआस के काबिल अउर निकहे दास हया, तूँ थोरी क धन माहीं बिसुआस के काबिल रहे हया; एसे हम तोंहईं खुब चीजन के अधिकारी बनाउब। अउर तूँ अपने मालिक के खुसी माहीं सामिल होइजा।’

24अउर तब जेही पइसा से भरी एकठे थइली मिली रही हय, उआ अपने मालिक के लघे आइके कहिस, ‘हे मालिक, हम अपना काहीं जानत रहेन हँय, कि अपना खुब कठोर मनई हएन: अउर अपना जहाँ बीज नहीं बोई, उहाँ काटित हएन, अउर जहाँ नहीं छींटी, उहँव से बटोरित हएन। 25एसे हम डेराइ गएन तय, अउर जाइके पइसा से भरी अपना के थइली काहीं माटी माहीं गाड़ दिहेन तय। देखी, जउन अपना के पइसा रहे हँय, ऊँ ईंन आहीं।’ 26पय मालिक उआ दास काहीं जबाब दिहिन, कि ‘हे दुस्ट अउर आलसी दास, जब तँय इआ जानत रहे हए, कि हम जहाँ बीज नहीं बोई उहाँ से काटित हएन, अउर जहाँ नहीं छीटी उहँव से बटोरित हएन; 27त तोही इआ चाहँय क रहा हय, कि हमरे पइसा काहीं बइपारिन काहीं दइ देते, त हम आइके आपन धन उनसे ब्याज समेत लइ लेइत। 28तब ऊँ मालिक अपने दासन काहीं कहिन, कि पइसन से भरी उआ थइली ओसे लइ ल्या, अउर जेखे लघे दसठे थइली हईं, ओही दइ द्या। 29काहेकि जेही जउन दीन ग हय, अगर उआ ओही निकहा से उपयोग करत हय, त ओही अउर दीन जई, अउर ओखे लघे खुब होइ जई। पय जे कोऊ ओही जउन दीन ग हय, अगर ओखर निकहा से उपयोग नहीं करय त ओसे उहव लइ लीन जई, जउन ओही दीन ग रहा हय। 30अउर इआ निकम्मा दास काहीं, बहिरे लइ जाइके अँधिआरे माहीं डार द्या, जहाँ रोउब अउर दाँत पीसब भर होई।”

मनई के लड़िका सगले मनइन के न्याय करिहँय

31यीसु पुनि उनसे कहिन, कि “जब मनई के लड़िका अपने महिमा काहीं धारन कइके अइहँय, अउर सगले स्वरगदूत उनखे साथ अइहँय, त ऊँ अपने महिमामय सिंहासन माहीं बिराजमान होइहँय। 32अउर सगले जातिअन के मनई उनखे आँगे एकट्ठा कीन जइहँय; अउर जइसन गड़रिया, गड़रन काहीं बोकरिन से अलग कइ देत हय, उहयमेर ऊँ उनहीं पंचन काहीं एक दुसरे से अलग करिहँय। 33ऊँ गड़रन काहीं अपने दहिने कइती, अउर बोकरिन काहीं अपने बाएँ कइती ठाढ़ करिहँय। 34अउर तब ऊँ राजा अरथात मनई के लड़िका अपने दहिने कइती बालेन से कइहँय, कि ‘हे हमरे पिता परमातिमा के धन्य मनइव, तूँ पंचे आबा, अउर उआ राज के अधिकारी होइजा, जउन संसार के सुरुआतय से तोंहरे खातिर तइआर कीन ग हय। 35काहेकि जब हम भूँखे रहेन हय, तब तूँ पंचे हमहीं खाना दिहा तय; अउर जब हम पिआसे रहेन हय, त तूँ पंचे हमहीं पानी पिआया तय; अउर जब हम परदेसी रहेन हय, त तूँ पंचे हमहीं अपने घर माहीं रोंक्या तय; 36अउर जब हमरे लघे ओन्हा नहीं रहे आँय, तब तूँ पंचे पहिरँय के खातिर हमहीं ओन्हा दिहा तय; अउर जब हम बिमार रहेन हय, तब तूँ पंचे हमार ख्याल किहा तय, अउर जब हम जेल माहीं रहेन हय, तब तूँ पंचे हमसे मिलँइ के खातिर उहाँ आया तय’।”

37तब परमातिमा के नजर माहीं निरदोस मनई, उनहीं जबाब देइहँय, कि “हे प्रभू, हम पंचे कबय अपना काहीं ‘भूँखा देखेन तय, अउर खाना खबाइन तय?’ इआ कि ‘पिआसा देखेन तय, अउर अपना काहीं पानी पिआएन तय?’ 38अउर हम पंचे कबय अपना काहीं ‘परदेसी देखेन तय, अउर अपने घर माहीं रोंकेन तय?’ इआ कि अपना काहीं ‘बिना ओन्हा पहिरे देखेन तय, अउर ओन्हा पहिरायन तय?’ 39अउर हम पंचे कबय अपना काहीं ‘बिमार इआ कि जेल माहीं बंद देखेन तय, अउर अपना से मिलँइ गएन तय?’ 40तब राजा उनहीं जबाब देइहँय, कि ‘हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तूँ पंचे हमरे ईं छोट से छोट भाई-बहिनिन म से अगर कोहू के साथ अइसन किहा हय, त उआ हमरेन साथ किहा हय’।”

41अउर तब ऊँ राजा अपने बाएँ कइती बालेन से कइहँय, कि “हे स्रापित मनइव, तूँ पंचे हमरे आँगे से उआ नरक के आगी माहीं चले जा, जउन कबहूँ बुझातिन नहिं आय, जउन सइतान अउर ओखर सेबा करँइ बाले दूतन के खातिर तइआर कीनगे ही। 42काहेकि जब हम भूँखे रहेन हय, तब तूँ पंचे हमहीं खाना नहीं दिहा, अउर जब हम पिआसे रहेन हय, तब तूँ पंचे हमहीं पानी नहीं पिआया; 43जब हम परदेसी बनिके रहेन हय; तब तूँ पंचे हमहीं अपने घरन माहीं नहीं रोंक्या; जब हम नंगे रहेन हय, तब तूँ पंचे हमहीं ओन्हा नहीं पहिराया; अउर जब हम बिमार रहेन हय, अउर जेलव माहीं रहेन हय, तब तूँ पंचे हमहीं देखँइ नहीं आया।

44तब ऊँ पंचे इआ जबाब देइहँय, कि ‘हे प्रभू, हम पंचे कबय अपना काहीं भूँखा, पिआसा, परदेसी, बिना ओन्हा पहिरे, बिमार, इआ कि जेल माहीं देखेन, अउर अपना के सेबा-सहाई नहीं किहेन?’ 45अउर तब ऊँ उनहीं इआ जबाब देइहँय, कि ‘हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तूँ पंचे हमरे ईं छोट से छोट भाई-बहिनिन म से कोहू के साथ अइसन नहीं किहा, त उआ हमरे साथ घलाय नहीं किहा आय।’ 46अउर ईं पंचे अनन्त काल तक सजा भोगिहँय, पय निरदोस मनई अनन्त जीबन पाइके स्वरगराज माहीं जइहँय।”

26

यीसु के बिरोध माहीं सड़यन्त्र रचब

(मरकुस 14:1,2; लूका 22:1,2; यूहन्ना 11:45-53)

1जब यीसु ईं सगली बातन काहीं बताय चुकें, त पुनि अपने चेलन से कहिन, कि 2“तूँ पंचे इआ जनते हया, कि दुइ दिना के बाद फसह नाम के तेउहार आमँइ बाला हय, अउर मनई के लड़िका क्रूस माहीं चढ़ामँइ के खातिर पकड़ाबा जई।”

3तब प्रधान याजक लोग अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग काइफा नाम के महायाजक के अँगना माहीं एकट्ठा भें, 4अउर आपस माहीं इआ बात-चीत करँइ लागें, कि हम पंचे यीसु काहीं धोखे से पकड़िके मारि डारी। 5पय ऊँ पंचे इआ कहत रहे हँय, कि “तेउहार के समय माहीं नहीं, कहँव अइसा न होय, कि लोगन माहीं दंगा होइ जाय।”

बैतनिय्याह गाँव माहीं यीसु के ऊपर अँतर डारब

(मरकुस 14:3-9; यूहन्ना 12:1-8)

6जब यीसु बैतनिय्याह गाँव माहीं समौन कोढ़ी के घर माहीं रहे हँय, 7तबहिनय एकठे मेहेरिआ संगमरमर के बरतन माहीं खुब महग अँतर लइके यीसु के लघे आई, अउर जब यीसु खाना खाँइ बइठ रहे हँय, तबहिनय उनखे मूँड़े माहीं अँतर उड़ेल दिहिस। 8इआ देखिके, यीसु के चेला लोग उआ मेहेरिआ काहीं रिसिहाँइ लागें, अउर कहिन, कि “इआ अँतर काहीं काहे सत्यानास कइ दिहा? 9एही त खुब पइसन माहीं बेंचिके कंगालन काहीं बाँटा जाय सकत रहा हय।” 10इआ बात काहीं जानिके यीसु अपने चेलन से कहिन, कि “उआ मेहेरिआ काहीं काहे परेसान करते हया? उआ त हमरे साथ भलाइन किहिस ही। 11काहेकि गरीब त तोंहरे साथ हमेसा रइहँय, पय हम तोंहरे साथ हमेसा न रहब। 12उआ हमरे देंह माहीं जउन इआ अँतर उड़ेलिस ही, त हमरे गाड़े जाँइ के खातिर इआ काम किहिस ही। 13हम तोंहसे पंचन से सही कहित हएन, कि सगले संसार माहीं जहाँ कहँव इआ खुसी के खबर के प्रचार कीन जई, त ओखे इआ काम के बखान घलाय ओखे यादगारी माहीं कीन जई।”

यहूदा इस्करियोती के बिसुआस घात करब

(मरकुस 14:10,11; लूका 22:3-6)

14तब यहूदा इस्करियोती, जउन बरहँव चेलन म से रहा हय, उआ प्रधान याजकन के लघे जाइके कहिस, कि 15“अगर हम यीसु काहीं अपना पंचन के हाँथे माहीं पकड़बाय देई, त अपना पंचे हमहीं का देब?” अउर ऊँ पंचे तीसठे चाँदी के सिक्का तउलिके ओही दइ दिहिन। 16अउर यहूदा इस्करियोती उहय समय से यीसु काहीं पकड़ामँइ के मोका ढूँढ़ँइ लाग।

अपने चेलन के साथ फसह के तेउहार माहीं यीसु के आखिरी बेरकी खाना खाब

(मरकुस 14:12-21; लूका 22:7-13,21-23; यूहन्ना 13:21-30)

17बिना खमीर के रोटी खाँइ बाले तेउहार के पहिलय दिन, चेला लोग यीसु के लघे आइके पूँछँइ लागें, कि “अपना कहाँ चाहित हएन, कि हम पंचे अपना के खातिर फसह के खाना के तइआरी करी?” 18तब यीसु कहिन, कि “सहर माहीं एकठे मनई के लघे जाइके कह्या, कि ‘गुरू कहिन हीं कि हमार समय लघे हय। अउर हम अपने चेलन के साथ तोंहरे इहाँ तेउहार मनाउब’।” 19एसे चेला लोग यीसु के हुकुम काहीं मानिके, फसह के खाना तइआर किहिन।

20जब साँझ भय, तब यीसु बरहँव चेलन के साथ खाना खाँय के खातिर बइठें। 21अउर जब ऊँ पंचे खाना खात रहे हँय, तब यीसु उनसे कहिन, कि “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तोंहरे पंचन म से एक जने हमहीं बिरोधी लोगन के हाँथ माहीं पकड़बाई।” 22इआ बात काहीं सुनिके चेला लोग खुब उदास होइगें, अउर हरेक जन उनसे पूँछँइ लागें, कि “हे प्रभू, अपना बताई, कि का उआ हम आहेन?” 23तब यीसु जबाब दिहिन, कि “जे हमरे साथ एकय टठिया माहीं खात हय, उहय हमहीं पकड़बाई। 24मनई के लड़िका त जाबय करी, जइसन कि पबित्र सास्त्र माहीं ओखे बारे माहीं लिखा हय; पय जउन मनई धोखा दइके मनई के लड़िका काहीं पकड़बामँइ बाला हय, ओही परमातिमा से खुब सजा मिली: अउर अगर उआ मनई के जन्मय न होत, त ओखे खातिर इआ नीक होत।” 25तब यीसु काहीं पकड़ बामँइ बाला यहूदा इस्करियोती कहिस, कि “हे गुरू, का उआ हम आहेन?” तब यीसु ओसे कहिन, कि “हाँ, तूँ खुदय कहते हया।”

प्रभू-भोज

(मरकुस 14:22-26; लूका 22:14-20; 1 कुरिन्थियन 11:23-25)

26जब यीसु अउर उनखर चेला लोग खाना खात रहे हँय, तब यीसु रोटी लिहिन, अउर पिता परमातिमा से आसीस मागिके टोरिन, अउर चेलन काहीं दइके कहिन, कि “ल्या, तूँ पंचे एही खा; इआ हमार देंह आय।” 27अउर एखे बाद ऊँ अंगूर के रस से भरा खोरबा लइके, परमातिमा काहीं धन्यबाद दिहिन, अउर उनहीं खोरबा दइके कहिन, कि “तूँ पंचे सगले जन एमा से पिआ, 28काहेकि इआ करार के हमार उआ खून आय, जउन खुब मनइन के पापन के माफी के खातिर बहाबा जई। 29अउर हम तोंहसे पंचन से कहित हएन, कि अंगूर के इआ रस उआ दिना तक हम कबहूँ न पिअब, जब तक अपने पिता परमातिमा के राज माहीं तोंहरे साथ नबा अंगूर के रस न पी लेब।” 30अउर पुनि ऊँ पंचे भजन गाइके जैतून पहार माहीं चलेगें।

पतरस के इनकार के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी

(मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)

31तब यीसु उनसे कहिन, कि “तूँ पंचे सगले जने आजय रात माहीं, हमरे ऊपर किहे बिसुआस से भटक जइहा, काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय: कि ‘हम गड़रिया काहीं मार डारब, अउर झुन्ड के सगली गड़रँय तितर-बितर होइ जइहँय26:31 जक 13:7।’ 32पय हम मरेन म से जिन्दा होए के बाद, तोंहसे मिलँइ से पहिले गलील प्रदेस माहीं जाब।” 33तब इआ बात काहीं सुनिके पतरस यीसु से कहिन, कि “अगर सगले जने अपना के ऊपर किहे बिसुआस से भटक जाँय त भटक जाँय, पय हम कबहूँ न भटकब।” 34तब यीसु पतरस से कहिन, कि “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि आजय रात माहीं मुरगा के बोलँइ से पहिले तूँ तीन बेरकी इनकार करिहा, कि हम यीसु काहीं नहीं जानी।” 35तब पतरस यीसु से कहिन, कि “अगर हमहीं अपना के साथ मरऊँ क परय, तऊ हम अपना काहीं कबहूँ न इनकार करब।” अउर इहइमेर सगले चेला घलाय कहिन।

गतसमनी नाम के जघा माहीं यीसु के प्राथना करब

(मरकुस 14:32-42; लूका 22:39-46)

36तब यीसु अपने चेलन के साथ गतसमनी नाम के जघा माहीं आएँ, अउर अपने चेलन से कहँइ लागें, कि “जब तक हम उहाँ जाइके प्राथना करब, तब तक तूँ पंचे इहँय बइठ रह्या।” 37अउर यीसु, पतरस अउर जब्दी के दोनव लड़िकन काहीं अपने साथ माहीं लइगें, अउर यीसु उदास अउर ब्याकुल होंइ लागें। 38तब यीसु उनसे कहिन, कि “हमार जिव खुब उदास हय, अउर लागत हय, कि हमार प्रान निकर जई। तूँ पंचे इहँय रुके रहा, अउर हमरे साथ जागत रहा।” 39अउर पुनि यीसु थोरी क अउर आँगे जाइके अउर भुँइ माहीं मुँह झुकाइके, इआ प्राथना किहिन, कि “हे हमार पिता, अगर होइ सकय त इआ बड़ा भारी कस्ट हमसे दूर होइ जाय, तऊ जइसन हम चाहित हएन, उआमेर न होय, पय जइसन अपना चाहित हएन, उहयमेर होय।” 40अउर एखे बाद यीसु चेलन के लघे आएँ, त उनहीं सोबत पाइन, तब ऊँ पतरस से कहिन, “का तूँ पंचे हमरे साथ एक घरिव, नहीं जाग सकते आह्या? 41तूँ पंचे सतरक रहा, अउर प्राथना करत रहा, कि जउने परिच्छन माहीं न परा: आत्मा त वास्तव माहीं तइआर हय, पय देंह निबल ही।” 42अउर यीसु पुनि दुसराय जाइके इआ प्राथना किहिन, कि “हे हमार पिता, अगर इआ बड़ा भारी दुख के प्याला हमरे सहे बिना नहीं हटि सकय, त अपना के इच्छा पूर होय।” 43अउर यीसु जाइके देखिन त चेलन काहीं पुनि सोबत पाइन, काहेकि ऊँ पंचे गहरी नींद म रहे हँय। 44अउर चेलन काहीं छोंड़िके यीसु पुनि चलेगें, अउर उहय बात पुनि कहिके तिसरइआ प्राथना किहिन। 45तब यीसु अपने चेलन के लघे आइके, उनसे कहिन, कि “तूँ पंचे अब सोबत रहा, अउर अराम करा, काहेकि मनई के लड़िका के पकड़बाए जाँइ के समय लघे आइगा हय, अउर मनई के लड़िका, पापी मनइन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई। 46उठा, चली! देखा, हमार पकड़ामँइ बाला लघे आइगा हय।”

यीसु काहीं धोखे से पकड़ा जाब

(मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसु इआ बात कहतय रहे हँय, तबहिनय यहूदा इस्करियोती आबा, जउन बरहँव चेलन म से रहा हय, अउर ओखे साथ माहीं तलबार अउर लाठी लए प्रधान याजकन अउर यहूदी समाज के अँगुअन के तरफ से पठई खुब बड़ी भीड़ घलाय रही हय। 48अउर यीसु काहीं पकड़बामँइ बाला यहूदा इस्करियोती, उनहीं पंचन काहीं एकठे चिन्हारी बताइस तय, कि: जिनखर हम चूमा लेब, उँइन यीसु आहीं, अउर तूँ पंचे उनहीं पकड़ लिहा। 49अउर उआ हरबिन यीसु के लघे आइके कहिस, “हे गुरू, नबस्कार!” अउर उनहीं खुब चूमिस। 50तब यीसु ओसे कहिन, कि “हे साथी, जउने काम के खातिर तूँ आया हय, ओही कइल्या।” तब ऊँ पंचे यीसु के लघे जाइके उनहीं पकड़ लिहिन। 51तब यीसु के साथिन म से एक जने, हाँथ बढ़ाइके आपन तलबार निकार लिहिन, अउर महायाजक के दास के ऊपर चलाइके ओखर कान काट लिहिन। 52तब यीसु उनसे कहिन, कि “आपन तलबार म्यान माहीं रख ल्या, काहेकि जे कोऊ तलबार चलाबत हें, ऊँ सगले जन तलबार से मारे जइहँय। 53अउर का तूँ इआ नहीं जनते आह्या, कि हम अपने पिता से बिनती कइ सकित हएन, अउर ऊँ स्वरगदूतन के बारा पलटन से जादा सिपाहिन काहीं हमरे लघे अबहिनय पठय देइहँय? 54पय पबित्र सास्त्र माहीं लिखी ऊँ बातँय, कि अइसनय होब जरूरी हय, कइसन पूर होइहँय?” 55अउर उहय समय यीसु भीड़ के मनइन से कहिन, कि “का तूँ पंचे तलबारन अउर लाठिन काहीं लइके, डाँकू कि नाईं हमहीं पकड़ँइ आया हय? हम त रोजय मन्दिर माहीं बइठिके उपदेस देत रहे हएन, तब तूँ पंचे हमहीं गिरफतार नहीं किहा। 56पय इआ सब एसे भ हय, कि जउने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के बचन पूर होंय।” तब चेला लोग यीसु काहीं छोंड़िके भागिगें।

महासभा माहीं यीसु काहीं लइ जाब

(मरकुस 14:53-65; लूका 22:54-55,63-71; यूहन्ना 18:13-14,19-24)

57जउन मनई यीसु काहीं पकड़िन रहा हय, ऊँ पंचे उनहीं काइफा नाम के महायाजक के लघे लइगें, अउर उहाँ मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग घलाय एकट्ठा रहे हँय। 58अउर पतरस दूरिन-दूरी यीसु के पीछे-पीछे महायाजक के अँगने तक गें, अउर इआ देखँइ के खातिर, कि यीसु के साथ का होई, भीतर जाइके पहरेदारन के साथ माहीं बइठिगें। 59अउर प्रधान याजक अउर महासभा के सगले मनई यीसु काहीं मारि डारँइ के उद्देस्य से, उनखे खिलाफ लबरी गबाही देंइ बालेन काहीं ढूँढ़त रहे हँय, 60तब लबरी गबाही देंइ के खातिर खुब जने आएँ, पय कउनव दोस ढूँढ़े नहीं पाइन। अउर आखिरी माहीं दुइ जने अउर आएँ, 61अउर कहिन, कि “ईं कहिन हीं, कि हम परमातिमा के मन्दिर काहीं गिराय सकित हएन, अउर ओही तीन दिन माहीं पुनि बनाय सकित हएन।”

62तब महायाजक ठाढ़ होइके यीसु से कहिन, कि “का इनखे जबाब माहीं तोहईं कुछू नहीं कहँइ क आय? ईं पंचे तोंहरे बिरोध माहीं का गबाही देत हें?” 63पय यीसु कुछू जबाब नहीं दिहिन। तब महायाजक उनसे कहिन, कि “हम तोहईं जिन्दा परमातिमा के कसम खबाइत हएन, कि अगर तूँ परमातिमा के लड़िका मसीह आह्या, त हमहीं बताय द्या।” 64तब यीसु उनसे कहिन, कि “तूँ त खुदय कहते हया, पय हम तोहईं बताइत हएन, कि अब से तूँ मनई के लड़िका काहीं सर्बसक्तिमान परमातिमा के दहिने कइती बइठे, अउर अकास के बदरिन के ऊपर आबत देखिहा।” 65इआ बात काहीं सुनिके महायाजक आपन ओन्हा फारिन अउर कहिन, कि “ईं परमातिमा के बुराई किहिन हीं, अउर हमहीं पंचन काहीं अब अउर गबाहन के जरूरत नहिं आय, अउर देखा, तूँ पंचे अबहिनय इआ परमातिमा के बुराई काहीं सुने हया! 66त इनखे बारे माहीं तोंहार पंचन के का बिचार हय?” तब ऊँ पंचे जबाब दिहिन, कि “ईं अपराधी हें, अउर मारि डारँइ के काबिल हें।” 67तब ऊँ पंचे यीसु के मुहें माहीं थूँकिन, अउर उनहीं घूँसा मारिन, अउर दूसर जने उनखे गाल माहीं थापड़ मारिके कहिन, कि 68“हे मसीह, भबिस्यबानी कइके हमसे बताबा, कि तोहईं को मारिस ही?”

पतरस के व्दारा यीसु के इनकार

(मरकुस 14:66-72; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18,25-27)

69जब पतरस अँगना माहीं बहिरे बइठ रहे हँय, तबहिनय एकठे दासी उनखे लघे आइके कहिस, कि “तुहूँ घलाय गलील प्रदेस माहीं रहँइ बाले यीसु के साथ माहीं रहे हया।” 70पय पतरस सबके आँगे इआ कहिके इनकार कइ दिहिन, कि “हम नहीं जानी कि तूँ का कहते हया।” 71अउर जब पतरस बहिरे दुअरा माहीं गें, त दूसर दासी उनहीं देखिके, जउन मनई उहाँ रहे हँय उनसे कहिस, कि “इऊँ घलाय त यीसु नासरी के साथ माहीं रहे हें।” 72तब पतरस कसम खाइके पुनि इनकार कइ दिहिन, कि “हम उआ मनई काहीं नहीं जानी।” 73अउर थोरी देर बाद ऊँ मनई, जउन उहाँ ठाढ़ रहे हँय, पतरस के लघे आइके उनसे कहिन, कि “तोंहार बोली इआ साफ बताय रही हय, कि सचमुच तुहूँ घलाय उनमा से एक जन आह्या।” 74तब पतरस खुद काहीं धिक्कारँय लागें अउर कसम खाँइ लागें, कि “हम उआ मनई काहीं बेलकुल नहीं जानी।” अउर हरबिन मुरगा बोलिस। 75तब पतरस काहीं यीसु के कही बात याद आइगे: कि “मुरगा के बोलँइ से पहिले, तूँ तीन बेरकी हमहीं इनकार करिहा।” अउर पतरस बहिरे जाइके फूट-फूटिके रोमँइ लागें।

27

राजपाल पिलातुस के आँगे यीसु

(मरकुस 15:1; लूका 23:1,2; यूहन्ना 18:28-32)

1जब भिनसार भ, तब सगले प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, यीसु काहीं मारि डारँइ के खातिर खड़यन्त्र रचिन। 2अउर ऊँ पंचे यीसु काहीं बाँधिन, अउर लइ जाइके राजपाल पिलातुस के हाँथे माहीं सउँपि दिहिन।

यहूदा इस्करियोती के फाँसी लगाउब

(खास चेलन 1:18,19)

3यीसु काहीं पकड़बामँइ बाला यहूदा इस्करियोती, जब इआ देखिस, कि यीसु काहीं अपराधी ठहराबा ग हय, त उआ खुब पचितान अउर ऊँ तीसठे चाँदी के सिक्कन काहीं, प्रधान याजकन अउर यहूदी धारमिक अँगुअन के लघे लइ जाइके लउटाय दिहिस। 4अउर कहिस, कि “हम निरदोस मनई काहीं मार डारँइ के खातिर पकड़ाइके पाप किहेन हय!” तब ऊँ पंचे कहिन, कि “हमहीं एसे कउनव मतलब नहिं आय? तूँ खुदय जाना।” 5तब उआ ऊँ सिक्कन काहीं मन्दिर माहीं फेंकिके चला ग, अउर जाइके फाँसी लगाय लिहिस।

6प्रधान याजक लोग ऊँ सिक्कन काहीं लइके कहिन, कि “इनहीं भन्डार माहीं रक्खब उचित नहिं आय, काहेकि इआ खून के दाम आय।” 7एसे ऊँ पंचे साहुत कइके, ऊँ सिक्कन से परदेसी मनइन के अंतिम संस्कार के खातिर, कुम्हार के खेत खरीद लिहिन। 8इआ कारन से उआ खेत आज तक “खून के खेत” के नाम से जाना जात हय। 9तब उआ बचन पूर होइगा, जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यिर्मयाह के व्दारा कहा ग रहा हय: कि “ऊँ पंचे चाँदी के ऊँ तीस सिक्कन काहीं अरथात जउन कीमत तँय कीन गे रही हय। जउने काहीं इजराइल के सन्तानन म से कुछ जने ठहराइन रहा हय, ओही लइ लिहिन, 10अउर जइसन प्रभू हमहीं हुकुम दिहिन तय, उहयमेर ऊँ चाँदी के सिक्कन काहीं कुम्हार के खेत खरीदँय माहीं लगाय दिहेन27:10 यिर्म 18:2-6; जक 11:12,13।”

पिलातुस यीसु से प्रस्न पूँछिन

(मरकुस 15:2-5; लूका 23:3-5; यूहन्ना 18:33-38)

11जब यीसु राजपाल पिलातुस के आँगे ठाढ़ रहे हँय, तब ऊँ यीसु से पूँछिन, “का तूँ यहूदी लोगन के राजा आह्या?” तब यीसु कहिन, “तूँ खुदय कहते हया।” 12पय जब प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, यीसु के ऊपर दोस लगाबत रहे हँय, त यीसु कुछू जबाब नहीं दिहिन। 13तब राजपाल पिलातुस उनसे कहिन, “का तूँ नहीं सुनते आह्या, कि ईं पंचे तोंहरे बिरोध माहीं केतनी गबाही दइ रहे हें?” 14पय यीसु, राजपाल काहीं एक्कवठे बात के जबाब नहीं दिहिन, एसे राजपाल खुब अचरज मानिन।

यीसु काहीं मउत के सजा देंइ के हुकुम

(मरकुस 15:6-15; लूका 23:13-25; यूहन्ना 18:39—19:16)

15फसह नाम के तेउहार के मोके माहीं राजपाल के इआ नेम रहा हय, कि एकठे कइदी काहीं, जेही भीड़ के मनई चाहत रहे हँय, ओही ऊँ छोंड़ देत रहे हँय। 16अउर उआ समय उनखे इहाँ बरअब्बा नाम के एकठे घोर अपराधी जेल माहीं बंद रहा हय। 17त जब ऊँ पंचे एकट्ठा भें, तब राजपाल उनसे कहिन, कि “तूँ पंचे केही चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर ओही छोंड़ देई? बरअब्बा काहीं, इआ कि यीसु काहीं छोंड़ देई, जउन मसीह कहाबत हें?” 18काहेकि राजपाल इआ जानत रहे हँय, कि ऊँ पंचे यीसु काहीं जलन के कारन पकड़ाइन हीं। 19अउर जब ऊँ न्याय आसन माहीं बइठ रहे हँय, त उनखर मेहेरिआ उनहीं इआ खबर भेजबाइन, कि “अपना ऊँ धरमी मनई के मामला माहीं, सामिल न होब, काहेकि आज हम सपन माहीं उनखे कारन, खुब दुख उठाएन हँय।”

20पय प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, मनइन के कान भरिन, कि बरअब्बा काहीं छोंड़ँइ के खातिर, अउर यीसु काहीं मार डारँइ के खातिर माँग करँय। 21तब राजपाल उनसे पूँछिन, कि “ईं दोनव जनेन म से, तूँ पंचे केही चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर ओही छोंड़ देई?” तब ऊँ पंचे कहिन, कि “बरअब्बा काहीं छोंड़ देई।” 22तब राजपाल पिलातुस उनसे पूँछिन, कि “पुनि यीसु काहीं जउन मसीह कहाबत हें, हम का करी?” तब सगले जन उनसे कहिन, कि “ओही क्रूस माहीं चढ़ाबा जाय!” 23इआ सुनिके राजपाल कहिन, कि “काहे, ऊँ कउन अपराध किहिन हीं?” पय ऊँ पंचे अउर चंडे चिल्लाय-चिल्लाइके कहँइ लागें, कि “ओही क्रूस माहीं चढ़ाबा जाय।” 24अउर जब पिलातुस इआ देखिन, कि कुछू नीक नहीं होइ रहा आय, बलकिन दंगा होंइ बाला हय, त ऊँ पानी लइके भीड़ के मनइन के आँगे आपन हाँथ धोइन, अउर कहिन, कि “ईं मनई के मउत माहीं हम सामिल नहिं आहेन, अउर हम निरदोस हएन, इआ तोंहार पंचन के मामला आय त तुहिन पंचे जान्या।” 25तब सगले जने जबाब दिहिन, कि “इनखे मउत के सजा के गुनहगार हम पंचे, अउर हमार पंचन के सन्तान होइहँय!” 26इआ कारन से राजपाल बरअब्बा काहीं उनखे खातिर छोंड़ दिहिन, अउर यीसु काहीं चाबुक से मरबाइके, उनहीं पंचन काहीं सउँप दिहिन, कि उनहीं क्रूस माहीं चढ़ाबा जाय।

सिपाहिन के व्दारा यीसु के निरादर

(मरकुस 15:16-20; यूहन्ना 19:2,3)

27तब राजपाल के सिपाही लोग, यीसु काहीं किला के भीतर लइ जाइके, अपने सगली पलटन काहीं, यीसु के चारिव कइती एकट्ठा किहिन, 28अउर यीसु के ओन्हा उतारिके उनहीं बैगनी रंग के चमकीला ओन्हा पहिराइन। 29अउर काँटन काहीं गुँथिके अउर मुकुट बनाइके यीसु के मूँड़े माहीं धरिन, अउर उनखे दहिने हाँथे माहीं सरकन्डा के लाठी पकड़ाय दिहिन, अउर उनखे आँगे गोड़न गिरिके उनखर मजाक उड़ामँइ लागें, अउर कहँइ लागें, कि “हे यहूदी लोगन के राजा, नबस्कार!” 30अउर उनखे ऊपर थूँकिन; अउर उहय सरकन्डा के लाठी लइके, यीसु के मूँड़े माहीं मारय लागें। 31अउर जब ऊँ पंचे यीसु के मजाक उड़ाय चुकें, त उआ चमकीला ओन्हा उतरबाय लिहिन, अउर पुनि उनहिन के ओन्हा उनहीं पहिराय दिहिन, अउर क्रूस माहीं चढ़ामँइ के खातिर, उनहीं लइके चल दिहिन।

यीसु काहीं क्रूस म चढ़ाबा जाब

(मरकुस 15:21-32; लूका 23:26-43; यूहन्ना 19:17-27)

32अउर बहिरे जात समय, उनहीं पंचन काहीं कुरेन सहर के समौन नाम के एकठे मनई मिला, तब ऊँ पंचे ओही बेगार माहीं पकड़िन, कि उआ यीसु के क्रूस उठाइके लइ चलय। 33अउर जब ऊँ पंचे उआ जघा माहीं पहुँचिगें, जउन “गुलगुता” अरथात “खोपड़ी के जघा” कहाबत रही हय, 34तब ऊँ पंचे, अंगूर के रस माहीं, करू चीज मिलाइके यीसु काहीं, पिअँइ के खातिर दिहिन, पय ऊँ ओही चींखिन, त पिअँइ से इनकार कइ दिहिन। 35तब ऊँ पंचे यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाइन, अउर परची डारिके उनखे ओन्हन काहीं आपस माहीं बाँटि लिहिन। 36अउर उहाँ बइठिके यीसु के पहरा देंइ लागें। 37अउर उनखर अरोप-पत्र उनखे मूँड़े के ऊपर लगाइन, कि “ईं यहूदी लोगन के राजा यीसु आहीं।” 38अउर तब उनखे साथ दुइठे डँकुअन काहीं, एकठे क यीसु के दहिने कइती, अउर दुसरे क बाएँ कइती क्रूस माहीं चढ़ाइन। 39अउर आमँय-जाँय बाले मनई आपन मूड़ हलाय-हलाइके, यीसु के बुराई करत रहे हँय, 40अउर इआ कहत रहे हँय, कि “हे मन्दिर काहीं गिरामँइ बाले, अउर तीन दिना माहीं बनामँइ बाले, खुद काहीं त बचाव! अउर अगर तँय परमातिमा के लड़िका आहे, त क्रूस से नीचे उतरि आव।” 41अउर इहइमेर से प्रधान याजक लोग घलाय, मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन, अउर यहूदी धारमिक अँगुअन समेत, यीसु के मजाक उड़ाइके कहत रहे हँय, 42“इआ दुसरे मनइन काहीं त बचाइस ही, पय खुद काहीं नहीं बचाय सकय। अउर इआ त ‘इजराइल देस के राजा’ आय। पय अब अगर इआ क्रूस से नीचे उतरि आबय, त हम पंचे एखे ऊपर बिसुआस करी। 43अउर एखर भरोसा परमातिमा के ऊपर हय; अगर ऊँ एही चाहत हें, त एही बचाय लेंय, काहेकि इआ कहिस रहा हय, कि ‘हम परमातिमा के लड़िका आहेन’।” 44अउर इहइमेर डाँकू घलाय, जउन उनखे साथ क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय, उनखर बुराई करत रहे हँय।

यीसु के प्रान छोंड़ब

(मरकुस 15:33-41; लूका 23:44-49; यूहन्ना 19:28-30)

45अउर दुपहर बारा बजे से लइके तीन बजे तक, सगले देस माहीं अँधिआर छाबा रहिगा। 46अउर तीन बजे के करीब यीसु खुब चंडे चिल्लाइके कहिन, “एली, एली, लमा सबक्तनी?” अरथात जेखर मतलब हय, “हे हमार परमातिमा, हे हमार परमातिमा, अपना हमहीं काहे छोंड़ दिहेन27:46 भज 22:1?” 47तब जउन मनई उहाँ ठाढ़ रहे हँय, इआ बात काहीं सुनिके उनमा से कुछ जने कहिन, कि “ऊँ त एलिय्याह नबी काहीं गोहराबत हें।” 48तब उनमा से एक जने हरबिन दउड़िके आबा, अउर सोक्खा लइके सिरका माहीं बुड़ाइस, अउर सरकन्डा के लाठी माहीं धइके यीसु काहीं चुहकाइस। 49पय कुछ जने कहिन, “अबय रहि जा, हम पंचे देखी, एलिय्याह नबी एही बचामँइ आबत हें, कि नहीं।” 50तब यीसु पुनि खुब चन्डे चिल्लाइके प्रान छोंड़ दिहिन। 51अउर उहय समय मन्दिर के परदा ऊपर से नीचे तक, फाटिके दुइ टुकड़ा होइगा: अउर धरती डोलिगे, अउर चट्टानँय चटक गईं, 52अउर खुब कब्रँय खुल गईं, अउर जउन पबित्र मनई मरिगे रहे हँय, उनमा से खुब जने जिन्दा होइगें, 53अउर कब्रन से बहिरे निकरि आएँ, अउर यीसु के जिन्दा होए के बाद, ऊँ पंचे पबित्र सहर माहीं गें, अउर खुब मनइन काहीं देखाई दिहिन। 54तब सुबेदार, अउर जउन मनई उनखे साथ यीसु के पहरा देत रहे हँय, त ऊँ पंचे भुँइडोल अउर जउन कुछू भ रहा हय, ओही देखिके खुब डेराइगें, अउर कहँइ लागें, कि “वास्तव माहीं यीसु परमातिमा के लड़िका आहीं!” 55अउर उहाँ खुब मेहेरिआ रही हँय, जउन गलील प्रदेस से यीसु के सेबा करत, उनखे साथय आई रही हँय, ऊँ पंचे दूरिन से इआ सगला हाल देखत रही हँय। 56अउर उन माहीं मगदल गाँव के मरियम, अउर याकूब अउर योसेस के महतारी मरियम, अउर जब्दी के लड़िकन के महतारी घलाय रही हँय।

यीसु काहीं गाड़ा जाब

(मरकुस 15:42-47; लूका 23:50-56; यूहन्ना 19:38-42)

57जब साँझ भय, त अरमतिया गाँव के यूसुफ नाम के एकठे धनी मनई आएँ, जउन खुद यीसु के चेला रहे हँय। 58ऊँ राजपाल पिलातुस के लघे जाइके, यीसु के लहास काहीं माँगिन, तब पिलातुस उनहीं लहास दइ देंइ के हुकुम दइ दिहिन। 59अउर यूसुफ लहास लइके, उजर चद्दरा माहीं लपेटिन, 60अउर ऊँ यीसु के लहास काहीं अपने नई कब्र माहीं धरिन, जउने काहीं ऊँ चट्टान माहीं खोदबाइन रहा हय, अउर कब्र के दुअरा माहीं खुब बड़ा पथरा ढनगाइके बंद कइके चलेगें। 61अउर मगदल गाँव के मरियम, अउर दूसर मरियम, उहाँ कब्र के बगल माहीं बइठ रही हँय।

यीसु के कब्र माहीं पहरा देब

62जब सुक्रबार के दिन बीत ग, त दुसरे दिना, प्रधान याजक लोग अउर फरीसी लोग, पिलातुस के लघे एकट्ठा होइके उनसे कहिन, कि 63“हे हजूर, हमहीं पंचन काहीं सुध ही, कि उआ छल करँइ बाला, जब उआ जिन्दा रहा हय, त इआ कहिस रहा हय, कि ‘हम तीन दिना के बाद जिन्दा होइ जाब।’ 64एसे अपना इआ हुकुम देई, कि तीन दिना तक कब्र के रखबारी कीन जाय, कहँव अइसन न होय, कि ओखर चेला लोग आइके, ओही चोराय लइ जाँय, अउर मनइन से कहँइ लागँय, कि ‘उआ मरेन म से जिन्दा होइगा हय।’ त इआ दूसर धोखा पहिल धोखा से जादा बुरा होई।” 65तब पिलातुस उनसे कहिन, कि “तोंहरे पंचन के लघे पहरा देंइ बाले त हें। एसे जा, अपने समझ के मुताबिक रखबारी करा।” 66तब ऊँ पंचे, उहाँ से चलेगें, अउर पथरा माहीं सील लगाय दिहिन, अउर पहरा देंइ बालेन काहीं उहाँ बइठाइके कब्र काहीं, सुरच्छित कइ दिहिन।

28

मरेन म से यीसु के जिन्दा होब

(मरकुस 16:1-10; लूका 24:1-12; यूहन्ना 20:1-10)

1पबित्र दिन के बाद हप्ता के पहिलय दिना अइतबार काहीं, उँजिआर होतय मगदल गाँव के मरियम, अउर दूसर मरियम कब्र काहीं देखँइ गईं। 2तब उहाँ अचानक खुब तेज भुँइडोल भ, काहेकि प्रभू के एकठे दूत स्वरग से उतरें, अउर कब्र के लघे आइके उआ पथरा काहीं हटाय दिहिन, अउर ओहिन के ऊपर बइठिगें। 3अउर उनखर रूप बिजुली कि नाईं रहा हय, अउर उनखर ओन्हा बरफ कि नाईं उजर रहा हय। 4अउर स्वरगदूत के डेरन के मारे कब्र माहीं पहरा देंइ बाले सिपाही थर-थर काँपय लागें, अउर मरे कि नाईं होइगें। 5तब स्वरगदूत, ऊँ मेहेरिअन से कहिन, “डेरा न, काहेकि हम जानित हएन कि तूँ पंचे यीसु काहीं ढुँढ़ते हया, जउन क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय। 6ऊँ इहाँ नहिं आहीं, पय ऊँ अपने कहे के मुताबिक जिन्दा होइगें हँय। अउर आबा, इआ जघा काहीं देखा, जहाँ प्रभू परे रहे हें, 7अउर हरबिन जाइके उनखे चेलन काहीं बताबा, कि ऊँ मरेन म से जिन्दा होइगें हँय, अउर ऊँ तोंहसे पंचन से पहिले गलील प्रदेस माहीं जइहँय, अउर तूँ पंचे उहँय उनखर दरसन पइहा! अउर देखा, जउन बात हम तोंहसे कहेन हय, त ओही सुध रख्या।”

8तब ऊँ मेहेरिआ डेरन के मारे, अउर बड़ी खुसी के साथ कब्र से हरबिन लउटिके यीसु के चेलन काहीं खबर बतामँइ के खातिर दउड़त चल दिहिन। 9तब यीसु उनहीं मिलें अउर कहिन, कि “नबस्कार।” तब ऊँ पंचे यीसु के लघे आईं, अउर उनखर गोड़ पकड़िके, उनखे गोड़न गिरीं। 10तब यीसु उनसे कहिन, “डेरा न; तूँ पंचे जाइके हमरे भाइन से कहि द्या, कि ऊँ पंचे गलील प्रदेस माहीं चले जाँय, अउर उहँय हमहीं देखिहँय।”

पहरेदारन के व्दारा खबर देब

11जब ऊँ पंचे खबर देंइ जातय रही हँय, तबहिनय पहरेदारन म से कुछ जने, सहर माहीं जाइके प्रधान याजकन से सगला हाल बताइन। 12तब ऊँ पंचे यहूदी समाज के धारमिक अँगुअन के लघे एकट्ठा होइके एकठे योजना बनाइन, अउर सिपाहिन काहीं खुब चाँदी दइके कहिन, 13“तूँ पंचे इआ कह्या, कि रात माहीं जब हम पंचे सोबत रहेन हय, तब यीसु के चेला लोग आइके उनहीं चोराय लइगे हँय। 14अउर अगर इआ बात हाकिम के कान तक पहुँच जई, त हम पंचे उनहीं मनाय लेब, अउर तोंहईं पंचन काहीं खतरा माहीं परँइ से बचाय लेब।” 15एसे ऊँ पहरा देंइ बाले सिपाही, रुपिआ लइके जइसन सिखाए गे रहे हँय, उहयमेर किहिन; अउर इआ किस्सा आजव तक, यहूदी लोगन माहीं इहइमेर फइली हय।

16अउर यीसु के ग्यरहँव चेला गलील प्रदेस के उआ पहार माहीं गें, जउने पहार माहीं जाँइ के खातिर यीसु उनहीं बताइन रहा हय। 17अउर ऊँ पंचे यीसु के दरसन पाइके उनखे गोड़न गिरें, पय कुछ मनइन के मन माहीं संका रही हय, कि ईं यीसु आहीं कि न होंहीं। 18तब यीसु उनखे लघे आइके कहिन, “स्वरग अउर धरती के सगला अधिकार हमहिन काहीं दीनगा हय। 19एसे तूँ पंचे इहाँ से जाइके, सगले जातिअन के मनइन काहीं चेला बनाबा, अउर उनहीं पंचन काहीं पिता परमातिमा, अउर लड़िका यीसु, अउर पबित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा द्या। 20अउर जउने बातन काहीं, हम तोंहईं पंचन काहीं मानँइ के हुकुम दिहेन हय, उँइन बातन काहीं मानँइ के खातिर उनहूँ पंचन काहीं सिखाबा: अउर इआ बात काहीं सुध रख्या, कि संसार के अन्त तक हमेसा हम तोंहरे पंचन के साथ माहीं रहब।”