लूका के लिखी खुसी के खबर

इआ किताब के परिचय

लूका के लिखी खुसी के खबर माहीं, यीसु काहीं परमातिमा के वादा के मुताबिक इजराइली लोगन काहीं मुक्ती देंइ बाले, अउर सगले मनइन काहीं घलाय मुक्ती देंइ बाले दोनव मेर से बखान कीन ग हय। लूका इहव लिखिन हीं, कि यीसु काहीं, “कंगालन क खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर” प्रभू के आत्मा बोलाइस रहा हय। इहय कारन से इआ खुसी के खबर हरेक मेर के परेसानिन माहीं परे लोगन के खातिर चिन्तन से भरा परा हय। लूका के लिखी खुसी के खबर माहीं आनन्द के भाव के घलाय प्रधानता हय, खास करके सुरुआत के पाठन माहीं, जउने माहीं यीसु के आमँइ के घोसना कीन गे ही, अउर आखिर माहीं घलाय जहाँ यीसु के स्वरग जाँय के बखान हय। यीसु के स्वरग जाँइ के बाद मसीही बिसुआस के बढ़ँइ के बखान, ईंन लेखक “खास चेलन के काम” नाम के किताब माहीं किहिन हीं।

कुछ बातँय केबल इहय खुसी के खबर माहीं पाई जाती हँय। उदाहरन के खातिर, यीसु के पइदा भए माहीं स्वरगदूतन के गीत गाउब, गड़रिअन के यीसु काहीं देखँइ जाब, यरूसलेम मन्दिर माहीं लड़िका यीसु, अउर दयालू सामरी, अउर उड़ाऊ लड़िका के उदाहरन आदि। सगले खुसी के खबर माहीं प्राथना, पबित्र आत्मा, यीसु के व्दारा लोगन के सेबा माहीं मेहेरिअन के सहयोग, अउर परमातिमा के व्दारा पापन के माफी के ऊपर खुब जादा जोर दीनगा हय।

अपना पंचन से इआ बिनती हय, कि अपना पंचे इआ खुसी के खबर काहीं बड़े ध्यान से पढ़ी, अउर एहिन के मुताबिक जीबन बिताई, त अपना पंचन काहीं परमातिमा से खुब आसीस मिली।

रूप-रेखा :

परिचय1:1-4

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले अउर यीसु के जनम अउर बचपन 1:5—2:52

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के लोगन के सेबा 3:1-20

यीसु के बपतिस्मा अउर परिच्छा 3:21—4:13

गलील प्रदेस माहीं यीसु के व्दारा लोगन के सेबा 4:14—9:50

गलील प्रदेस से यरूसलेम सहर तक यात्रा 9:51—19:27

यरूसलेम सहर माहीं अन्तिम हप्ता 19:28—23:56

प्रभू के दुसराय जिन्दा होब, देखाई देब, अउर स्वरग काहीं जाब 24:1-53

1

परिचय

1आदरनीय थियुफिलुस, यीसु मसीह के बारे माहीं जउन घटना हमरे बीच माहीं घटी हँय, उनखर बखान खुब जने लिखँइ के कोसिस किहिन हीं। 2उहय जानकारी हमहीं परमातिमा के ऊँ सेबकन के व्दारा मिली हय, जउन ईं बातन काहीं होत अपने आँखिन से देखिन तय। 3तब यीसु मसीह के बारे माहीं जउन घटना घटी हँय, सुरुआत से उनहीं निकहा से जाँचे-परखे के बाद हम इआ निरनय लिहेन हय, कि इनखे बारे माहीं बड़े ध्यान से अउर क्रम से तोंहईं लिखी। 4जउने तूँ इआ समझ ल्या, कि जउने बातन के सिच्छा तोहईं दीनगे ही; उहय कबहूँ न बदलँइ बाली अउर सत्य आय।

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के जनम के घोसना

5यहूदिया प्रदेस के राजा हेरोदेस के सासन करँइ के समय माहीं अबिय्याह के दल माहीं, जकरयाह नाम के एकठे याजक रहे हँय, अउर उनखर मेहेरिआ हारून के बंस के रही ही, जेखर नाम इलीसिबा रहा हय। 6ऊँ दोनव परमातिमा के नजर माहीं धरमी रहे हँय, अउर प्रभू के सगले हुकुमन अउर नेमन काहीं बिना गलती किहे निकहा से मानत रहे हँय। 7उनखे एक्कवठे लड़िका-बच्चा नहीं भें तय, काहेकि इलीसिबा के लड़िका-बच्चा नहीं होत रहे आँय, अउर ऊँ दोनव जन बुढ़ाय गें तय।

8जब जकरयाह अपने दल के ओसरी माहीं, परमातिमा के मन्दिर माहीं याजक के काम करत रहे हँय, 9तबहिनय याजकन के रीति के मुताबिक उनखे नाम चिट्ठी निकरी, कि ऊँ प्रभू के मन्दिर माहीं जाइके धूप जलामँइ। 10धूप जलामँइ के समय लोगन के सगली मन्डली बहिरे प्राथना करत रही हय। 11उहय समय प्रभू के एकठे स्वरगदूत धूप जलामँइ के बेदी के दहिने कइती जकरयाह काहीं ठाढ़ देखाने। 12तब जकरयाह स्वरगदूत काहीं देखिके घबराइगें, अउर ऊँ खुब डेराइगें। 13पय स्वरगदूत उनसे कहिन, “हे जकरयाह, डेरा न, काहेकि तोंहार प्राथना सुन लीनगे ही; अउर तोंहरे मेहेरिआ इलीसिबा से तोंहरे खातिर एकठे लड़िका पइदा होई, अउर तूँ ओखर नाम यूहन्ना धराया। 14तोहईं आनन्द अउर खुसी मिली: अउर खुब जने ओखे जनम के कारन आनन्दित होइहँय, 15काहेकि उआ प्रभू के नजर माहीं महान होई; अउर अंगूर के रस, अउर मदिरा कबहूँ न पी; अउर अपने महतारी के गरभय माहीं पबित्र आत्मा से भर जई; 16अउर इजराइलिअन म से खुब मनइन काहीं जउन भटक गे रहे हँय, उनहीं प्रभू परमातिमा कइती लउटाय लई। 17उआ एलिय्याह कि नाईं आत्मा माहीं मजबूत बनिके, अउर सामर्थ के साथ प्रभू के आँगे-आँगे चली, कि महतारी-बाप अउर लड़िकन-बच्चन माहीं मेल-जोल कराय देय; अउर परमातिमा के हुकुम न मानँइ बालेन काहीं धरमिन कि नाईं समझदार बनाय देय; अउर प्रभू के खातिर प्रभू के हुकुम मानँइ बाले लोग तइआर करय।”

18इआ सुनिके जकरयाह स्वरगदूत से पूँछिन, “इआ हम कइसा जानब? काहेकि हम त बुढ़ाय गएन हय; अउर हमार मेहेरिअव बुढ़ाइगे ही।” 19स्वरगदूत उनहीं जबाब दिहिन, “हम जिब्राईल आहेन, जउन परमातिमा के लघे हमेसा रहित हएन; अउर हम तोंहसे बात करँइ, अउर इआ खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर पठए गएन हँय। 20देखा, जउने दिन तक ईं बातँय पूर न होइ जइहँय, उआ दिन तक तूँ गूँगा रइहा, अउर बोले न पइहा, एसे कि तूँ हमरे बातन के बिसुआस नहीं किहा आय, जउन अपने समय माहीं पूर होइहँय।” 21सगले जने जकरयाह के लउटँय के इन्तजार करत रहे हँय, अउर अचरज मानिन, कि उनहीं मन्दिर माहीं एतनी देर काहे लगिगे। 22जब जकरयाह बहिरे आएँ, त उनसे कुछू बोल न सकें: तबहिनय ऊँ पंचे जानिगें, कि ऊँ मन्दिर माहीं कउनव दरसन पाइन हीं; अउर जकरयाह उनसे इसारा करत रहिगें, काहेकि ऊँ गूँगा होइगें तय। 23जब उनखे सेबा करँइ के दिन पूर होइगें, तब जकरयाह अपने घर चलेगें।

24कुछ दिनन के बाद उनखर मेहेरिआ इलीसिबा लड़कहाई भईं; अउर पाँच महीना तक अपने काहीं इआ सोचिके लुकाए रहि गईं, 25कि “मनइन माहीं हमार अपमान दूर करँइ के खातिर, प्रभू ईं दिनन माहीं किरपा कइके हमरे खातिर अइसा काम किहिन हीं।”

यीसु के जनम के घोसना

26छठएँ महीना माहीं परमातिमा अपने कइती से जिब्राईल स्वरगदूत काहीं, गलील प्रदेस के नासरत सहर माहीं, 27एकठे कुमारी के लघे पठइन, जिनखर सगाई यूसुफ से होइगे रही हय, जउन राजा दाऊद के कुल के रहे हँय: उआ कुमारी के नाम मरियम रहा हय। 28स्वरगदूत उनखे लघे भीतर आइके कहिन, “आनन्द अउर जय तोंहार होय, जेखे ऊपर परमातिमा के किरपा भे ही! प्रभू तोंहरे साथ हें!” 29मरियम इआ बात से खुब घबराय गईं, अउर सोचँइ लागीं, कि इआ कउनमेर के अभिबादन आय? 30स्वरगदूत उनसे कहिन, “हे मरियम, डेरा न, काहेकि परमातिमा के किरपा तोंहरे ऊपर भे ही। 31देखा, तूँ लड़कहाई होइहा, अउर तोंहरे एकठे लड़िका पइदा होई; तूँ ओखर नाम यीसु धराया। 32उआ लड़िका महान होई, अउर परमप्रधान परमातिमा के बेटबा कहाई; अउर प्रभू परमातिमा ओखे पूरबज राजा दाऊद के राजगद्दी ओही देइहँय, 33अउर उआ याकूब के घराना के ऊपर सब दिन राज करी; अउर ओखे राज के कबहूँ अन्त न होई।” 34मरियम स्वरगदूत से कहिन, “इआ कइसन होई, हम त अबय कुमारी हएन, अउर कउनव मंसेरुआ काहीं नहीं जानी।” 35स्वरगदूत मरियम काहीं जबाब दिहिन, “पबित्र आत्मा तोंहरे ऊपर उतरी, अउर परमप्रधान परमातिमा के सामर्थ तोंहरे ऊपर छाया करी; एसे उआ पबित्र जऊँ पइदा होंइ बाला हय, परमातिमा के लड़िका कहाई। 36अउर सुना, तोंहरे कुटुम्बिनी इलीसिबा के घलाय बुढ़ाईंदार लड़िका होंइ बाला हय, इआ ओखर, जऊँ बिना सन्तान के कहाबत रही हय, छठमाँ महीना आय। 37काहेकि परमातिमा के खातिर कुछू असम्भव नहिं आय।” 38मरियम कहिन, “देखा, हम त प्रभू के दासी आहेन, हमहीं तोंहरे बचन के मुताबिक होय।” तब स्वरगदूत मरियम के लघे से चलेगें।

मरियम के इलीसिबा से मिलँइ जाब

39कुछ दिनन के बाद मरियम यहूदा प्रदेस के पहारी इलाका के एकठे सहर माहीं गईं, 40अउर जकरयाह के घर माहीं पहुँचिके इलीसिबा काहीं नबस्कार किहिन। 41जइसय इलीसिबा मरियम के नबस्कार सुनिन, तइसय बच्चा उनखे पेटे माहीं कूद, अउर इलीसिबा पबित्र आत्मा से भर गईं। 42अउर उँइ खुब तेज से बोलिके कहिन, “तूँ सगली मेहेरिअन माहीं धन्य हया, अउर तोंहरे पेटे के बच्चा धन्य हय। 43अउर हमरे ऊपर एतनी बड़ी इआ किरपा कहाँ से होइगे, कि हमरे प्रभू के महतारी हमरे लघे आई हँय? 44देखा, जइसय तोंहरे नबस्कार के बोल हमरे कानन माहीं सुनान, तइसय बच्चा हमरे पेटे माहीं मारे खुसी के कूदँइ लाग। 45धन्य हय, उआ मनई जउन बिसुआस करत हय, कि जऊँ बातँय प्रभू के तरफ से ओसे कही गई हँय, ऊँ पूर होइहँय!”

मरियम के स्तुति गान

46तब मरियम कहिन, “हम पूरे मन से प्रभू के बड़ाई करित हएन।

47अउर हमार आत्मा हमहीं मुक्ती देंइ बाले परमातिमा से आनन्दित भे ही,

48काहेकि परमातिमा अपने दासी के

दीनता माहीं किरपा किहिन हीं; एसे देखा, अब से लइके जुगन-जुगन तक सगले मनई हमहीं धन्य कइहँय,

49काहेकि ऊँ सर्बसक्तिमान परमातिमा, हमरे खातिर बड़े-बड़े काम किहिन हीं। उनखर नाम पबित्र हय।

50अउर परमातिमा के दया उनखे ऊपर, जऊँ उनखे बातन काहीं मानत हें, पीढ़ी से पीढ़ी तक होत रहत ही।

51परमातिमा अपने सामर्थ से खुब बड़ा काम कइके, जऊँ अपने काहीं बड़ा मानत रहे हँय, उनहीं भगाय दिहिन।

52परमातिमा बलमानन के राज करँइ के अधिकार छड़ाय लिहिन; अउर दीन-दुखिअन काहीं बड़ा किहिन हीं।

53परमातिमा भूँखेन काहीं निकहे खाना से संतुस्ट किहिन, अउर धनमानन काहीं छूँछय हाँथे लउटाय दिहिन।

54परमातिमा अपने उआ दया काहीं सुधि कइके, अपने दास इजराइल काहीं बचाय लिहिन हीं।

55जउन दया अब्राहम अउर उनखे कुल माहीं हमेसा रही, जइसन परमातिमा हमरे बाप-दादन से कहिन रहा हय।”

56मरियम तीन महीना के करीब, इलीसिबा के साथ माहीं रहिके अपने घर लउटि आईं।

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के जनम

57तब इलीसिबा के बच्चा होंइ के समय पूर भ, अउर उनखे एकठे लड़िका भ। 58उनखर परोसी अउर कुटुम्बी लोग इआ सुनिके, कि प्रभू उनखे ऊपर बड़ी दया किहिन हीं, उनखे साथ खुसी मनाइन, 59अउर अइसन भ कि अठएँ दिन, उँइ लड़िका के खतना करँइ के खातिर आएँ, अउर ओखर नाम ओखे बाप के नाम के मुताबिक जकरयाह धरामँइ लागें। 60इआ सुनिके लड़िका के महतारी जबाब दिहिन, “नहीं; ओखर नाम यूहन्ना धराबा जाय।” 61ऊँ सगले जन कहँइ लागें, “तोंहरे परिबार माहीं कोहू के इआ नाम नहिं आय!” 62तब ऊँ पंचे लड़िका के बाप से इसारा कइके पूँछिन, कि तूँ अपने लड़िका के का नाम धरामँइ चहते हया? 63जकरयाह लिखँय के पट्टी मगबाइके लिख दिहिन, “ओखर नाम यूहन्ना हय”, अउर इआ देखिके सगले जन अचरज मानिगें। 64ओतनिनदार जकरयाह के मुँह अउर जीभ खुलिगे; अउर ऊँ बोलँइ लागें, अउर परमातिमा काहीं धन्यबाद देंइ लागें। 65जेतने जने उनखे आस-पास रहे हँय, ऊँ सगले जन डेराइगें; अउर उन सगली बातन के खबर सगले यहूदिया प्रदेस के पहारी इलाकन माहीं फइलिगे, 66अउर सगले सुनँय बाले अपने-अपने मन माहीं सोच-बिचारिके कहिन, “इआ लड़िका कउनमेर के होई?” काहेकि प्रभू के सामर्थ उआ लड़िका के ऊपर रही हय।

जकरयाह के स्तुति गान

67लड़िका के बाप जकरयाह पबित्र आत्मा से भरिगें, अउर भबिस्य माहीं होंइ बाली परमातिमा के बातन काहीं बतामँइ लागें:

68“प्रभू इजराइल के परमातिमा धन्य हें, काहेकि ऊँ अपने प्रजा के ऊपर किरपा किहिन हीं, अउर उनहीं मुक्ती दिहिन हीं।

69अउर अपने सेबक राजा दाऊद के कुल से हमरे पंचन के खातिर एकठे सक्तिसाली मुक्ती देंइ बाला पइदा किहिन हीं।

70(जइसन परमातिमा आपन सँदेस बतामँइ बाले पवित्र मनइन के व्दारा, जऊँ संसार के सुरुआतय से होत आए हँय, कहिन रहा हय।)

71अरथात हमरे दुसमनन से, अउर हमरे सगले बइरिन के हाँथ से हमहीं पंचन काहीं छोड़ाइन हीं।

72कि हमरे बाप-दादन के ऊपर दया कइके, अपने पबित्र करार काहीं सुध करँय।

73अउर उआ कसम जउन परमातिमा हमरे पूरबज अब्राहम से खाइन तय।

74कि ऊँ हमहीं इआ आसीस देइहँय, कि हम अपने दुसमनन के हाँथे से छूटि के।

75परमातिमा के नजर माहीं पबित्रता, अउर धारमिकता से जीबन भर निधड़क रहिके, उनखर गुन-गान करब।

76अउर हे बालक, तूँ परमप्रधान परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले कहइहा, काहेकि तूँ प्रभू के आमँइ से पहिले उनखे खातिर मनइन काहीं तइआर करिहा।

77अउर प्रभू के खातिर तइआर लोगन काहीं मुक्ती के ग्यान देइहा, जउन उनहीं अपने-अपने पापन काहीं मान लिहे से मिली।

78इआ हमरे पंचन के परमातिमा के उआ बड़ी दया से होई;

जउने कारन स्वरग से हमहीं बचामँइ के खातिर मुक्ती देंइ बाला पठइहँय।

79कि जउन मनई पाप अउर मउत के बन्धन माहीं फँसे हें, उनहीं छोड़ाइके मुक्ती के उँजिआर देंइ, अउर हमहीं पंचन काहीं नीक गली माहीं सीध चलामँइ।”

80अउर ऊँ लड़िका बड़े होत गें, अउर आत्मिक रूप से मजबूत होत गें, अउर इजराइली लोगन के लघे आमँइ से पहिले ऊँ सुनसान जघा माहीं रहत रहे हँय।

2

यीसु के जनम (मत्ती 1:18-25)

1उँइन दिनन माहीं रोम देस के महाराजा अवगुस्तुस इआ हुकुम दिहिन, कि सगले रोम राज के मनइन के गिनती कीन जाय। 2इआ पहिल गिनती उआ समय माहीं भे रही हय, जब क्विरिनियुस रोमी राज के सीरिया प्रदेस के राजपाल रहा हय। 3सगले जन आपन नाम लिखामँय के खातिर अपने-अपने सहरन माहीं गें। 4एसे कि यूसुफ राजा दाऊद के कुल के आहीं, गलील प्रदेस के नासरत गाँव से यहूदिया प्रदेस माहीं, राजा दाऊद के सहर बैतलहम माहीं गें, 5कि अपने मंगेतर मरियम क साथ लइके जिनखे पेटे माहीं बच्चा रहा हय, नाम लिखामँय। 6जब ऊँ पंचे उहँइ रहे हँय, तबहिनय मरियम के लड़िका पइदा होंइ के समय पूर होइगा। 7अउर मरियम के पहिलउठा लड़िका पइदा भ, अउर लड़िका काहीं ओन्हा माहीं लपेटिके अबाह माहीं पराय दिहिन; काहेकि सराय माहीं उनखे खातिर एक्कव जघा नहीं रही।

स्वरगदूतन के व्दारा चरबाहन काहीं सँदेस

8अउर उहाँ खुब गड़रिया रहे हँय, जउन रातके मइदान माहीं अपने गड़रन के पहरा देत रहे हँय। 9तबहिनय प्रभू के एकठे दूत उनखे लघे आइके ठाढ़ होइगा, अउर प्रभू के खुब तेज उँजिआर उनखे चारिव कइती चमकँइ लाग, अउर ऊँ सगले जने खुब डेराइगें। 10तब स्वरगदूत उनसे कहिन, “डेरा न; काहेकि देखा, हम तोंहईं बड़े आनन्द के खुसी के खबर बताइत हएन, जउन सगले मनइन के खातिर होई, 11काहेकि आज दाऊद के सहर माहीं तोंहरे खातिर मुक्ती देंइ बाले जनम लिहिन हीं, अउर ईंन मसीह प्रभू आहीं। 12अउर तोंहरे खातिर इआ चिन्हारी होई, कि तूँ पंचे एकठे लड़िका काहीं ओन्हा माहीं लपेटा अउर अबाह माहीं पराबा पइहा।” 13तब अचानक उआ स्वरगदूत के साथ स्वरगदूतन के झुन्ड परमातिमा के स्तुति करत अउर इआ कहत देखाई दिहिन।

14“स्वरग माहीं परमातिमा के महिमा, अउर धरती माहीं उँइ मनइन काहीं जउनेन से ऊँ प्रसन्न हें, सान्ती मिलय।”

15जब स्वरगदूत उनखे लघे से स्वरग माहीं चलेगें, तब गड़रिया आपस माहीं कहँइ लागें, “आबा हम पंचे बैतलहम माहीं जाइके इआ बात जऊँ भे ही, अउर प्रभू जउन बात स्वरगदूतन से हमहीं बताइन हीं, चला देखी।” 16अउर ऊँ पंचे हरबिन जाइके मरियम अउर यूसुफ काहीं, अउर अबाह माहीं उआ लड़िका काहीं पराबा देखिन। 17ऊँ गड़रिया उनहीं देखिके जउन बात लड़िका के बारे माहीं उनसे बताई गे तय, हरेक जघा बतामँइ लागें, 18अउर गड़रिअन के बातन काहीं सुनिके सगले सुनँइ बाले अचरज मानिन। 19अउर मरियम ईं सगली बातन काहीं अपने मन माहीं रखिके, इनखे बारे माहीं बिचार करत रहि गईं। 20अउर गड़रिअन काहीं जइसन कहा ग तय, उहयमेर सब देख सुनिके ऊँ पंचे परमातिमा के बड़ाई अउर स्तुति करत लउटिगें।

यीसु के नाम धराउब

21जब लड़िका काहीं पइदा भए आठ दिन पूर होइगें, तब खतना करँइ के दिन आबा, तब लड़िका के नाम यीसु धराइन, जउन नाम स्वरगदूत लड़िका के पेट माहीं आमँइ से पहिले मरियम से बताइन रहा हय।

मन्दिर म यीसु काहीं लइ जाब

22अउर जब मूसा के बिधान के मुताबिक उनखे सुद्ध होंइ के दिन पूर होइगें, तब यूसुफ अउर मरियम लड़िका यीसु काहीं यरूसलेम मन्दिर माहीं लइगें, कि उनहीं प्रभू के सामने लइ जाँय, 23(जइसा प्रभू के बिधान माहीं लिखा हय, “सगले मनइन के पहिलउठा लड़िका प्रभू के खातिर समरपित कीन जाय।”) 24अउर प्रभू के बिधान के बचन के मुताबिक, “पोंड़किन के जोड़ा, इआ कि परेबा के दुइठे बच्चा।” लइआइके बलिदान करँय।

समौन के स्तुति गान

25यरूसलेम सहर माहीं समौन नाम के एकठे मनई धरमी अउर भक्त रहे हँय; अउर इजराइली लोगन काहीं सान्ती देंइ बाले के इन्तजार करत रहे हँय, अउर पबित्र आत्मा उनखे साथ माहीं रहा हय। 26अउर पबित्र आत्मा के द्वारा उनहीं मालुम भ रहा हय, कि जब तक ऊँ प्रभू के पठए मसीह काहीं देख न लेइहँय, तब तक न मरिहँय। 27समौन पबित्र आत्मा के बताए के मुताबिक मन्दिर माहीं आएँ; अउर जब यूसुफ अउर मरियम लड़िका यीसु काहीं भीतर लइ आएँ, कि उनखे खातिर मूसा के बिधान के रीति के मुताबिक करँइ, 28तब समौन यीसु काहीं अपने कनिआ माहीं लइके परमातिमा के धन्यबाद कइके कहिन।

29“हे स्वामी, अब अपना अपने दास काहीं अपने बचन के मुताबिक सान्ती के साथ मरँइ देई।

30काहेकि हम अपने आँखिन से अपना के मुक्ती के योजना काहीं देख लिहेन हय।

31जेही अपना सगले देसन के मनइन के खातिर तइआर किहेन हय।

32अउर ऊँ सगली जातिअन के लोगन काहीं उँजिआर देंइ के खातिर जोति आहीं, कि अपना के चुने इजराइली लोगन के नाम के बड़ाई होय।”

33यीसु के महतारी-बाप ऊँ बातन से जउन यीसु के बारे माहीं कही जात रही हँय, सुनिके चउआय जात रहे हँय। 34तब समौन उनहीं आसिरबाद दइके यीसु के महतारी मरियम से कहिन, “देखा, इआ लड़िका इजराइल माहीं खुब मनइन के नास होंइ, अउर खुब मनइन के आसीस पामँइ के खातिर चुना ग हय। अउर इआ लड़िका के इआ पहिचान होई, कि खुब जने उनखे बिरोध माहीं बात करिहँय, इआमेर से खुब जनेन के जउन हिरदँय के बिचार हें, उँइ निकरिके अइहँय। 35अउर मरियम तोंहईं बहुत भारी दुख सहँइ क परी, जउन तलबार छेदरँइ के बराबर होई।”

हन्नाह के गबाही

36आसेर के कुल माहीं हन्नाह नाम के फनूएल के बिटिया, परमातिमा के सँदेस मनइन काहीं बतामँइ बाली रही हँय। ऊँ खुब बुढ़ान रही हँय, अउर ऊँ काज होए के बाद सात बरिस अपने मंसेरुआ के लघे रहि पाइन तय। 37ऊँ चउरासी बरिस से बिधबा रही हँय: अउर रोज मन्दिर जात रही हँय, अउर उपास अउर प्राथना कइके रातव-दिन परमातिमा के भक्ती करत रही हँय। 38जब मरियम अउर यूसुफ लड़िका यीसु के साथ मन्दिर माहीं रहे हँय, ओतनिनदार हन्नाह आइके प्रभू के धन्यबाद करँइ लागीं, अउर उन सगलेन से जउन यरूसलेम काहीं छोड़ामँइ बाले के इन्तजार करत रहे हँय, उनसे लड़िका यीसु के बारे माहीं बतामँइ लागीं।

नासरत गाँव काहीं लउटब

39जब यूसुफ अउर मरियम प्रभू के बिधान के मुताबिक सगली जरूरी बातन काहीं पूर कइ चुके, तब ऊँ पंचे गलील प्रदेस माहीं अपने गाँव नासरत लउटि आएँ। 40अउर लड़िका यीसु बाढ़त अउर बलमान होत गें, अउर बुद्धी से भरपूर होत गें; अउर परमातिमा के किरपा उनखे ऊपर रही हय।

लड़िका यीसु मन्दिर माहीं

41यीसु, के महतारी-बाप हरेक साल फसह के तेउहार माहीं यरूसलेम मन्दिर माहीं जात रहे हँय। 42जब यीसु बारा बरिस के भें, तब उँ तेउहार के रीति के मुताबिक अपने महतारी-बाप के साथ यरूसलेम सहर माहीं गें। 43जब तेउहार के दिन पूर होंइ के बाद, यूसुफ अउर मरियम अपने घर काहीं लउटँय लागें, तब लड़िका यीसु यरूसलेम माहीं रहिगें, अउर इआ बात उनखर महतारी-बाप नहीं जाने पाइन। 44ऊँ पंचे इआ समझिके, कि यीसु दुसरे के साथ चले गे होइहँय, एक दिन के दूरी चले के बाद लड़िका यीसु काहीं अपने परिबार बालेन, अउर जान-पहिचान बालेन माहीं ढूँढ़ँइ लागें। 45पय जब यीसु नहीं मिलें, तब ऊँ पंचे उनहीं ढूँढ़त-ढूँढ़त यरूसलेम मन्दिर माहीं पुनि लउटि गें, 46अउर तीन दिन के बाद ऊँ पंचे यीसु काहीं मन्दिर माहीं उपदेस देंइ बालेन के लघे बइठे, उनखर उपदेस सुनत अउर उनसे सबाल पूँछत पाइन। 47जेतने जन यीसु के बातन काहीं सुनत रहे हँय, ऊँ सगले जन यीसु के ग्यान अउर उनखे जबाब से चउआय जात रहे हँय। 48तब उनखर महतारी-बाप उनहीं देखिके चउआइगें, अउर उनखर महतारी उनसे कहिन, “हे बेटबा, तूँ हमरे साथ अइसा काहे किहा? देखा, तोंहार बाप अउर हम तोंहईं ढूँढ़त-ढूँढ़त परेसान अउर दुखी रहेन हय?” 49यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे हमहीं काहे ढूँढ़त रहे हया? काहे तूँ नहीं जानत रहे आह्या, कि हमहीं अपने पिता परमातिमा के मन्दिर माहीं रहब जरूरी हय?” 50पय जउन बात यीसु उनसे कहिन, ऊँ पंचे नहीं समझे पाइन। 51तब यीसु उनखे साथ नासरत गाँव माहीं चले आएँ, अउर ऊँ अपने महतारी-बाप के साथ माहीं रहँइ लागें; अउर उनखर महतारी ईं सगली बातन काहीं अपने हिरदँय माहीं रक्खिन। 52यीसु बुद्धी अउर डील-डउल माहीं अउर परमातिमा अउर मनई के किरपा माहीं बाढ़त गें।

3

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के सेबा

(मत्ती 3:1-12; मरकुस 1:1-8; यूहन्ना 1:19-28)

1तिबिरियुस कैसर के रोम सम्राज माहीं राज करँइ के पन्द्रहमे बरिस माहीं, जउने समय माहीं पुन्तियुस पिलातुस यहूदिया प्रदेस के राजपाल रहे हँय, अउर गलील प्रदेस माहीं हेरोदेस राजा, इतूरइया अउर त्रखोनीतिस प्रदेस माहीं ओखर भाई फिलिप्पुस, अउर अबिलेने माहीं लिसानियास, चउथ भाग के राजा रहे हँय, 2अउर जब हन्ना अउर कैफा महायाजक रहे हँय, उहय समय माहीं परमातिमा सुनसान जघा माहीं जकरयाह के लड़िका यूहन्ना से बात किहिन। 3यूहन्ना यरदन नदी के आस-पास के सगले प्रदेसन माहीं जाइके, मनइन से इआ कहिके प्रचार करँइ लागें, कि अपने-अपने पापन के माफी प्रभू से पामँइ के खातिर पाप करब छोंड़िके, अपने मन काहीं बदला, अउर बपतिस्मा ल्या। 4जइसन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के किताब माहीं लिखा हय:

“सुनसान जघा माहीं एक जने के गोहरामँइ के बोल सुनात हय, कि

अपने मन काहीं तइआर कइके गइल सऊँ बनाय ल्या, काहेकि ‘प्रभू आमँइ बाले हें।

5सगली घाटिन काहीं भर दीन जई, अउर सगले पहारन अउर टिकुरन काहीं बराबर कीन जई;

अउर जऊँ टेंढ़ हय ओही सऊँ, अउर जउन ऊँच नीच हय ओही समथर बनाबा जई।

6अउर हरेक मनई परमातिमा के मुक्ती के काम काहीं देखिहँय’।”

7जउन भीड़ के भीड़ मनई यूहन्ना के लघे बपतिस्मा लेंइ के खातिर आबत रहे हँय, उनसे ऊँ कहत रहे हँय, “हे साँप के बच्चन कि नाईं बुरे मनइव, तोंहईं को चेताय दिहिस, कि परमातिमा के आमँइ बाले सजा से बचा? 8अरथात तूँ पंचे अपने जीबन से इआ देखाय द्या, कि तूँ पंचे बास्तव माहीं पाप करब छोंड़ दिहा हय, अउर परमातिमा के बातन काहीं मनते हया। तूँ अपने-अपने मन माहीं इआ न सोचा, कि हम अब्राहम के सन्तान आहेन एसे परमातिमा हमहीं सजा न देइहँय; काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, कि परमातिमा ईं पथरन से अब्राहम के खातिर बंस पइदा कइ सकत हें। 9अब परमातिमा के क्रोध रूपी कुल्हारा बिरबन के जर माहीं धरा हय, एसे जउन-जउन बिरबा निकहा फर न फरी, उआ काटिके आगी माहीं झोंक दीन जई।” 10तब मनई यूहन्ना से पूछँइ लागें, “त हम पंचे का करी?” 11यूहन्ना उनहीं जबाब दिहिन, “जेखे लघे दुइठे कुरथा होंय, त उआ जेखे लघे एक्कवठे कुरथा नहिं आय ओही दइ देय, अउर जेखे लघे खाँइ बाली चीज होंय, उहव अइसय करय।” 12अउर चुंगी लेंइ बाले घलाय बपतिस्मा लेंइ आएँ, अउर यूहन्ना से पूँछिन, “हे गुरू, हम पंचे का करी?” 13यूहन्ना उनसे कहिन, “जेतनी चुंगी लेंइ के खातिर तोंहईं बताबा ग हय, ओसे जादा न लिहा।” 14अउर सिपाहिव यूहन्ना से पूँछिन, “हम पंचे का करी?” तब यूहन्ना उनसे कहिन, “जबरजस्ती कोहू से धन न लिहा, अउर न कउनव मनई के ऊपर झूँठ अरोप लगाया, बलकिन अपने तनखाह माहीं सन्तोस किहा।”

15जब इजराइली लोग इआ आसा करत रहे हँय, कि हमहीं मुक्ती देंइ बाले आमँइ बाले हें, तब सगले जन अपने-अपने मन माहीं यूहन्ना के बारे माहीं सोचत रहे हँय, कि कहँव ईंन परमातिमा के पठए मुक्ती देंइ बाले मसीह त न होंहीं, 16तब यूहन्ना ऊँ सगलेन से कहिन, “हम त तोंहईं पानी से बपतिस्मा देइत हएन, पय जउन आमँइ बाले हें, ऊँ हमसे एतना महान हें; कि हम त उनखे पनहिन के डोरव तक छोरँइ के काबिल नहिं आहेन; ऊँ तोंहईं पबित्र आत्मा अउर आगी से बपतिस्मा देइहँय। 17उनखर न्याय रूपी सूपा उनखे हाँथेन माहीं हय; अउर उँइ संसार रूपी राहा काहीं निकहा से साफ करिहँय; अउर गोहूँ काहीं अपने बखारी माहीं रखिहँय; पय बूसा काहीं कबहूँ न बुझाँय बाली आगी माहीं डार देइहँय।”

18अरथात यूहन्ना खुब सिच्छा दइ-दइके सगले जनेन काहीं खुसी के खबर सुनाबत रहिगें। 19पय जब यूहन्ना चउथाई देस के राजा हेरोदेस काहीं, अपने भाई फिलिप्पुस के मेहेरिआ हेरोदियास काहीं राख लिहे के बारे माहीं, अउर सगले कुकर्मन के बारे माहीं जउन ऊँ किहिन रहा हय, उलाहना दिहिन। 20तब हेरोदेस ऊँ सगले कुकर्मन से बढ़िके, इआ कुकर्म किहिन, कि यूहन्ना काहीं जेल माहीं डरबाय दिहिन।

यीसु के बपतिस्मा (मत्ती 3:13-17; मरकुस 1:9-11)

21जब सगले जने बपतिस्मा लइ चुकें, तब यीसु घलाय आइके यूहन्ना से बपतिस्मा लइके प्राथना करत रहे हँय, तबहिनय स्वरग खुलिगा, 22अउर पबित्र आत्मा सारीरिक रूप से परेबा के रूप माहीं उनखे ऊपर उतरा, अउर इआ अकासबानी भय: “तूँ हमार पियार लड़िका आह्या, हम तोंहसे प्रसन्न हएन।”

यीसु के बंसाबली

(मत्ती 1:1-17)

23जब यीसु सेबकाई सुरू किहिन, तब ऊँ तीस बरिस के करीब रहे हँय, अउर (जइसा माना जात हय) यीसु, यूसुफ के लड़िका आहीं; अउर यूसुफ, एली के, 24अउर एली, मत्तात के, अउर मत्तात, लेबी के, अउर लेबी, मलकी के, अउर मलकी, यन्ना के, अउर यन्ना, यूसुफ के, 25अउर यूसुफ, मत्तित्याह के, अउर मत्तित्याह, आमोस के, अउर आमोस, नहूम के, अउर नहूम, असल्याह के अउर असल्याह, नोगह के, 26अउर नोगह, मात के, अउर मात, मत्तित्याह के, अउर मत्तित्याह, सिमी के, अउर सिमी, योसेख के, अउर योसेख, योदाह के, 27अउर योदाह, यूहन्ना के अउर यूहन्ना, रेसा के अउर रेसा, जरुब्बाबिल के, अउर जरुब्बाबिल, सालतिएल के, अउर सालतिएल, नेरी के, 28अउर नेरी, मलकी के, अउर मलकी, अद्दी के, अउर अद्दी, कोसाम के, अउर कोसाम, इलमोदाम के, अउर इलमोदाम, एर के, 29अउर एर, एसू के, अउर एसू, इलाजार के, अउर इलाजार, योरीम के, अउर योरीम, मत्तात के, अउर मत्तात, लेबी के, 30अउर लेबी, समौन के, अउर समौन, यहूदाह के, अउर यहूदाह, यूसुफ के, अउर यूसुफ, योनान के, अउर योनान, इलयाकीम के, 31अउर इलयाकीम, मलेयाह के, अउर मलेयाह, मिन्नाह के अउर मिन्नाह, मत्तता के, अउर मत्तता, नातान के अउर नातान, दाऊद के, 32अउर दाऊद, यिसय के, अउर यिसय, ओबेद के, अउर ओबेद, बोअज के, अउर बोअज, सलमोन के, अउर सलमोन, नहसोन के, 33अउर नहसोन, अम्मीनादाब के, अउर अम्मीनादाब, अरनी के, अउर अरनी, हिस्रोन के, अउर हिस्रोन, फिरिस के, अउर फिरिस, यहूदाह के, 34अउर यहूदाह, याकूब के अउर याकूब, इसहाक के, अउर इसहाक, अब्राहम के, अउर अब्राहम, तिरह के, अउर तिरह, नाहोर के, 35अउर नाहोर, सरूग के, अउर सरूग, रऊ के, अउर रऊ, फिलिग के, अउर फिलिग, एबिर के, अउर एबिर, सिलह के 36अउर सिलह, केनान के, अउर केनान, अरफच्छद के, अउर अरफच्छद, सेम के, अउर सेम, नूह के अउर नूह, लिमिक के, 37अउर लिमिक, मथूसिलह के, अउर मथूसिलह, हनोक के, अउर हनोक, यिरिद के, अउर यिरिद, महललेल के, अउर महललेल, केनान के, 38अउर केनान, एनोस के, अउर एनोस, सेत के, अउर सेत, आदम के, अउर आदम परमातिमा के लड़िका आहीं।

4

यीसु के परिच्छा

(मत्ती 4:1-11; मरकुस 1:12,13)

1पुनि यीसु पबित्र आत्मा से भरे, यरदन नदी से लउटें; अउर पबित्र आत्मा के सिखाए से सुनसान जघा माहीं फिरत रहिगें; 2अउर सइतान चालिस दिन तक उनखर परिच्छा लेत रहिगा। उन दिनन माहीं यीसु कुछू नहीं खाइन पीन, अउर जब चालिस दिन पूर होइगें, तब उनहीं भूँख लाग। 3तब सइतान यीसु से कहिस, “अगर तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या, त इआ पथरा से कहा, कि रोटी बन जाय।” 4यीसु सइतान काहीं जबाब दिहिन, “पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, ‘मनई केबल रोटिन भर से जिन्दा न रही’।” 5तब सइतान यीसु काहीं खुब ऊँच जघा माहीं लइगा, अउर उनहीं छिन भरे माहीं संसार के सगले राज देखाइस, 6अउर सइतान यीसु से कहिस, “हम ईं सगले राज के अधिकार अउर उनखर धन-सम्पत्ती तोहईं दइ देब, काहेकि ईं सगलेन काहीं हमहीं सउँपा ग हय: अउर हम जेही चाही, ओही दइ सकित हएन। 7एसे अगर तूँ हमरे गोड़न गिरिहा, त इआ सगला हम तोहईं दइ देब।” 8यीसु सइतान काहीं जबाब दिहिन, “पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, ‘तूँ अपने प्रभू परमातिमा काहीं दन्डबत किहा; अउर केबल उनहिन के सेबा किहा’।” 9तब सइतान यीसु काहीं यरूसलेम मन्दिर माहीं लइ जाइके मन्दिर के गुम्मट माहीं ठाढ़ किहिस, अउर उनसे कहिस, “अगर तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या, त अपने-आप काहीं इहाँ से नीचे गिराय द्या। 10काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, ‘परमातिमा तोंहरे खातिर अपने स्वरगदूतन काहीं हुकुम देइहँय, कि ऊँ तोंहार रच्छा करँय’, 11अउर ‘ऊँ तोहईं उपरय लोक लेइहँय, कहँव अइसा न होय कि तोंहरे गोड़ेन माहीं पथरा से चोंट लगि जाय।” 12यीसु सइतान काहीं जबाब दिहिन, “पबित्र सास्त्र माहीं इहव लिखा हय, कि: ‘तूँ अपने प्रभू परमातिमा के परिच्छा न किहा’।” 13जब सइतान सगली परिच्छा कइ चुका, तब कुछ समय के खातिर यीसु के लघे से चला ग।

यीसु के सेबा के काम के सुरुआत

(मत्ती 4:12-17; मरकुस 1:14-15)

14पुनि यीसु पबित्र आत्मा के सामर्थ से भरे गलील प्रदेस माहीं लउटि आएँ, अउर यीसु के खबर लघे-लघे के सगले सहरन माहीं फइलिगे। 15यीसु सभाघरन माहीं उपदेस देत रहिगें, अउर सगले सुनँय बाले उनखर बड़ाई करत रहे हँय।

नासरत गाँव माहीं यीसु के निरादर

(मत्ती 13:53-58; मरकुस 6:1-6)

16ओखे बाद यीसु नासरत गाँव माहीं आएँ, जहाँ उनखर पालन-पोसन भ रहा हय; अउर अपने रीति के मुताबिक, पबित्र दिन काहीं सभाघर माहीं जाइके पबित्र सास्त्र पढ़ँइ के खातिर ठाढ़ भें। 17तब उनहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के लिखी किताब, यहूदी सभाघर के सेबक लइआइके दिहिस, अउर यीसु उआ किताब काहीं खोलिके, उआ जघा निकारिन जहाँ इआ लिखा रहा हय:

18“प्रभू के आत्मा हमरे भीतर हय, एसे कि परमातिमा कंगालन काहीं खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर हमार अभिसेक किहिन हीं, अउर हमहीं एसे पठइन हीं, कि बंदिन काहीं छोड़ामँइ के अउर अँधरन काहीं आँखी पामँइ के खुसी के खबर के प्रचार करी, अउर दबे-कुचले लोगन काहीं बन्धन से छोंड़ाई।

19अउर प्रभू के अपने लोगन के ऊपर दया करँइ बाले समय के प्रचार करी।”

20तब यीसु इआ पढ़िके किताब बंद कइके सेबक के हाँथे माहीं दइ दिहिन, अउर बइठिगें; तब यहूदी सभाघर माहीं बइठ सगले मनइन के ध्यान उनखे कइती लगा रहा हय। 21तब यीसु उनसे कहँइ लागें, “आजय तोंहरे सुनतय-सुनत पबित्र सास्त्र के इआ बचन पूर भ हय।”

22उहाँ बइठ सगले मनई उनहीं सराहँइ लागें, अउर यीसु के मुँह से जउन, किरपा के बातँय निकरत रही हँय, ऊँ बातन से सगले जन अचरज मानिन; अउर कहँइ लागें, “काहे ईं यूसुफ के लड़िका न होहीं?” 23यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे हमरे बारे माहीं इआ कहाबत जरूर कइहा, कि ‘हे बैद्य, अपने-आप काहीं नीक करा! जउन कुछू हम पंचे सुनेन हय, कि कफरनहूम माहीं जउन काम तूँ किहा हय, उहय काम इहाँ अपने गाँव माहीं घलाय करा’।” 24अउर यीसु इहव कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि कउनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाला, अपने गाँव माहीं मान-सम्मान नहीं पाबय। 25हम तोंहसे सही कहित हएन, कि एलिय्याह नबी के दिनन माहीं जब साढ़े तीन बरिस तक अकास से पानी नहीं बरसा, इहाँ तक कि सगले देस माहीं अकाल परा, तब इजराइल माहीं खुब बिधबा रही हँय। 26पय एलिय्याह नबी उन बिधबन म से कोहू के लघे नहीं पठए गें, केबल सैदा प्रदेस के सारफत गाँव माहीं एकठे बिधबा के लघे पठए गें तय। 27अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले एलीसा के समय माहीं इजराइल माहीं खुब कोढ़ी रहे हँय, पय सीरिया देस के रहँइ बाले नामान काहीं छोंड़िके उनमा से कउनव सुद्ध नहीं कीन गें।” 28ईं बातन काहीं सुनतय जेतने मनई यहूदी सभाघर माहीं रहे हँय, सगले आगबबूला होइगें। 29अउर उठिके यीसु काहीं सहर से बहिरे निकारिके, जउने पहार माहीं उनखर सहर बसा रहा हय, ओहिन के ऊपर चोंटी माहीं लइगें, कि यीसु काहीं उहाँ से नीचे गिराय देंय। 30पय यीसु, उनखे बीच से निकरिके चलेगें।

बुरी आत्मा से परेसान मनई काहीं नीक करब

(मरकुस 1:21-28)

31ओखे बाद यीसु गलील प्रदेस के कफरनहूम सहर माहीं आएँ, अउर पबित्र दिन काहीं लोगन काहीं उपदेस देत रहे हँय। 32ऊँ सगले जन उनखे उपदेस काहीं सुनिके चउआइगें, काहेकि यीसु बचन काहीं अधिकार के साथ बताबत रहे हँय। 33यहूदी सभाघर माहीं एकठे मनई बइठ रहा हय, जउने माहीं बुरी आत्मा रही हय। उआ खुब चंडे चिल्लाइके कहिस, 34“हे नासरत गाँव के यीसु, हमार अपना से कउनव काम नहिं आय। का अपना हमहीं नास करँइ आएन हँय? हम अपना काहीं जानित हएन, कि को आहेन? अपना परमातिमा के पबित्र जन आहेन!” 35यीसु ओही डाँटिके कहिन, “चुप्पय रव्ह, अउर उआ मनई से बहिरे निकर जा!” तब बुरी आत्मा उआ मनई काहीं सगलेन के बीच माहीं पटकिके बिना चोंट पहुँचाए ओसे निकरिगे। 36इआ सगला हाल देखिके सगले जन बड़ा अचरज मानिन, अउर ऊँ पंचे आपस माहीं कहँइ लागें, “इआ कइसन बचन हय? काहेकि यीसु अधिकार अउर सामर्थ के साथ बुरी आत्मन काहीं हुकुम देत हें, अउर ऊँ मनइन से निकर जाती हईं।” 37इआमेर से चारिव कइती हरेक जघा माहीं यीसु के चरचा होंइ लाग।

पतरस के सास अउर खुब बिमारन काहीं नीक करब

(मत्ती 8:14-17; मरकुस 1:29-34)

38यीसु यहूदी सभाघर से उठिके समौन के घर माहीं गें। उहाँ समौन के सास काहीं बोखार चढ़ी रही हय, अउर घरबाले उनहीं नीक करँइ के खातिर यीसु से बिनती किहिन। 39यीसु उनखे लघे ठाढ़ होइके बोखार काहीं डाँटिन, तबहिनय उनखर बोखार उतरि गे, अउर ऊँ तुरन्तय उठिके उनखर सेबा-सहाई करँइ लागीं।

40सुरिज बूड़ँइ के समय, जेखे-जेखे घर माहीं कइअक मेर के बिमारिन से मनई परे रहे हँय, ऊँ सगले जन उनहीं यीसु के लघे लइ आएँ, अउर यीसु सगलेन के ऊपर आपन हाँथ धइके नीक कइ दिहिन। 41अउर बुरी आत्मा घलाय चिल्लात अउर इआ कहत, कि “तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या”, खुब मनइन से निकर गईं। पय यीसु उनहीं डाँटिके बोलँइ नहीं देत रहे आहीं, काहेकि ऊँ बुरी आत्मा जानत रही हँय, कि ईं मसीह आहीं।

यहूदी सभाघरन माहीं प्रचार करब

(मरकुस 1:35-39)

42जब सकार भ, तब यीसु उहाँ से निकरिके सुनसान जघा माहीं गें, अउर भीड़ के भीड़ मनई उनहीं ढूँढ़त-ढूँढ़त उनखे लघे पहुँचिगें, अउर उनहीं रोंकँइ लागें, कि अपना हमरे लघे से न जई। 43पय यीसु उनसे कहिन, “हमहीं दुसरेव सहरन माहीं परमातिमा के राज के खुसी के खबर सुनाउब जरूरी हय, काहेकि हम एहिन खातिर पठए गएन हय।” 44अउर यीसु गलील प्रदेस के सभाघरन माहीं जाइ-जाइके प्रचार करत रहिगें।

5

पहिल चेलन के बोलाबा जाब

(मत्ती 4:18-22; मरकुस 1:16-20)

1जब भीड़ के मनई परमातिमा के बचन सुनँय के खातिर यीसु के उपरय गिरे परत रहे हँय, अउर ऊँ गन्नेसरत के झील के किनारे ठाढ़ रहे हँय, तब अइसन भ, 2कि यीसु झील के किनारे दुइठे नाव लगी देखिन, अउर मछुआरा लोग उनसे उतरिके जाल धोबत रहे हँय। 3उँइ नावन म से एकठे जउन समौन के रही हय, ओहिन माहीं यीसु चढ़िके, समौन से बिनती किहिन, कि नाव काहीं थोर क किनारे से हटाय लइ चला। तब यीसु नाव माहीं बइठिके सगले भीड़ के मनइन काहीं उपदेस देंइ लागें। 4जब यीसु उपदेस दइ चुकें, तब समौन से कहिन, “नाव काहीं गहिल पानी माहीं लइ चला, अउर मछरी पकड़ँइ के खातिर आपन जाल डारा।” 5समौन उनहीं जबाब दिहिन, “हे मालिक, हम पंचे सगली रात मेहनत किहेन, पय एक्कवठे मछरी नहीं पाएन, तऊ अपना के कहे से हम जाल डारब।” 6जब ऊँ पंचे जाल डारिन, तब खुब मछरी जाल माहीं आय गईं, अउर उनखर जाल फाटँय लाग। 7इआ देखिके, ऊँ पंचे अपने साथिन काहीं जऊँ दुसरे नाव माहीं रहे हँय, इसारा किहिन, कि आइके हमार मदत करा, अउर ऊँ पंचे आइके दोनव नावन माहीं एतनी मछरी भर लिहिन, कि नाव बूड़ँइ लागीं। 8इआ देखिके समौन पतरस यीसु के गोड़न गिरिके कहिन, “हे प्रभू, अपना हमरे लघे से चले जई, काहेकि हम खुब पापी मनई हएन!” 9काहेकि, एतनी मछरिन के पकड़ी जाँय के कारन, समौन अउर उनखे सगले साथिन काहीं बड़ा अचरज भ, 10अउर उहइमेर जब्दी के लड़िका याकूब अउर यूहन्ना काहीं घलाय बड़ा अचरज भ, जउन समौन के साथ मछरी मारँइ माहीं भागीदार रहे हँय। तब यीसु समौन से कहिन, “डेरा न, अब से तूँ परमातिमा के खातिर मनइन काहीं तइआर कइके लइ आमँइ बाले बनिहा।” 11अउर ऊँ पंचे नावन काहीं किनारे माहीं लइ आएँ, अउर सब कुछ उहँय छोंड़िके, यीसु के पीछे चल दिहिन।

कोढ़ी काहीं नीक करब

(मत्ती 8:1-4; मरकुस 1:40-45)

12जब यीसु एकठे सहर माहीं रहे हँय, त उहाँ कोढ़ रोग से भरा एकठे मनई आबा; अउर उआ यीसु काहीं देखतय, उनखे गोड़न गिरिके बिनती किहिस, “हे प्रभू, अगर अपना चाही त, हमही सुद्ध कइ सकित हएन।” 13यीसु आपन हाँथ बढ़ाइके ओही छुइन अउर कहिन, “हम चाहित हएन, कि तूँ सुद्ध होइजा।” अउर तुरन्तय ओखर कोढ़ के बिमारी नीक होइगे। 14तब यीसु ओही चेतउनी दइके कहिन, कि “देखा कोहू से कुछू न कह्या, पय जाइके अपने-आप काहीं याजक क देखाबा, अउर अपने सुद्ध होंइ के बारे माहीं जउन चढ़ाबा चढ़ामँइ काहीं मूसा नबी ठहराइन हीं, उहय भेंट चढ़ाबा, कि जउने तोंहरे समाज के लोगन के खातिर गबाही ठहरय।” 15पय यीसु के चरचा अउर फइलत गय, अउर भीड़ के भीड़ मनई उनखर उपदेस सुनँय, अउर अपने बिमारिन से नीक होंइ के खातिर एकट्ठा होइगें। 16पय यीसु गाँव से दूरी सुनसान जघा माहीं जाइके प्राथना करा-करत रहे हँय।

लोकबा के मरीज काहीं नीक करब

(मत्ती 9:1-8; मरकुस 2:1-12)

17एक दिन अइसन भ, कि यीसु उपदेस देत रहे हँय, अउर फरीसी अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले उहाँ बइठ रहे हँय, जउन गलील अउर यहूदिया प्रदेस के खुब गाँमन से, अउर यरूसलेम सहर से आएँ तय। अउर बिमारन काहीं नीक करँइ के प्रभू के सामर्थ यीसु के साथ रही हय। 18उहय समय कइअक जने एकठे लोकबा के मरीज काहीं खटिया माहीं पराइके लइ आएँ, अउर ऊँ पंचे उआ मरीज काहीं भीतर लइ जाइके यीसु के आँगे धरँइ के उपाय करँइ लागें। 19अउर जब ऊँ पंचे भीड़ के कारन यीसु के लघे नहीं पहुँच पाएँ, तब उँ पंचे घर के छान्ही माहीं चढ़िके, खपरइल काहीं ठाठ समेत उतिनके, उआ रोगी काहीं खटिया समेत भीड़ के बीच माहीं यीसु के आँगे उतार दिहिन। 20यीसु, उनखे बिसुआस काहीं देखिके, उआ लोकबा के मरीज से कहिन, “हे बेटबा, तोंहार पाप माफ होइगें।” 21तब मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर फरीसी लोग गुस्साइके आपस माहीं बातचीत करँइ लागें, “इआ को आय, जउन परमातिमा के बुराई करत हय? परमातिमा काहीं छोंड़िके, अउर को पाप माफ कइ सकत हय?” 22यीसु उनखे मन के बात काहीं जानिके, उनसे कहिन, “तूँ पंचे अपने-अपने मनन माहीं का बाद-बिबाद करते हया? 23सरल का हय? का लोकबा के मरीज से इआ कहब, ‘तोंहार पाप माफ होइगें’ इआ कि इआ कहब, कि ‘आपन खटिया उठाइके चला फिरा’? 24पय जउने तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि मनई के लड़िका काहीं धरती माहीं पाप माफ करँइ के घलाय अधिकार हय।” यीसु उआ लोकबा के मरीज से कहिन, “हम तोंहसे कहित हएन, कि उठा, आपन खटिया उठाइके अपने घर चले जा।” 25उआ हरबिन सगलेन के अँगुअय उठा, अउर जउने खटिया माहीं परा रहा हय, ओही उठाइके परमातिमा के बड़ाई करत अपने घरय चला ग। 26इआ सगला हाल देखिके, सगले जन अचरज मानिन, अउर परमातिमा के बड़ाई करँइ लागें, अउर मारे डेरन के कहँइ लागें, “आज हम पंचे अजीब बात देखेन हय!”

लेबी काहीं बोलाबा जाब

(मत्ती 9:9-13; मरकुस 2:13-17)

27एखे बाद यीसु घर से बहिरे चलेगें, अउर लेबी नाम के एकठे चुंगी लेंइ बाले मनई काहीं चुंगी नाका माहीं बइठे देखिन, अउर उनसे कहिन, “हमरे पीछे चले आबा।” 28तब लेबी उठिके सब कुछ उहँइ छोंड़िके, यीसु के पीछे चल दिहिन।

29अउर लेबी अपने घर माहीं यीसु के खातिर बड़ी जेउनार किहिन, जउने माहीं सगले चुंगी लेंइ बाले, अउर खुब मनइन के भीड़ यीसु के साथ खाना खाँइ बइठिगें। 30इआ सब देखिके, मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर फरीसी लोग, यीसु के चेलन से इआ कहिके बरबराँय लागें, “तूँ पंचे चुंगी लेंइ बालेन, अउर पापी लोगन के साथ काहे खाते-पीते हया?” 31यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “बैद, के जरूरत नीक-सूख मनइन के खातिर नहीं, बलकिन बिमारन के खातिर परत ही। 32अउर जे कोऊ इआ सोचत हें, कि हम पापी नहिं आहेन उनहीं नहीं, बलकिन पापी लोगन काहीं पाप करब छोंड़िके परमातिमा के गइल माहीं चलँइ के खातिर बोलामँइ आएन हँय।”

उपासे रहँइ के बारे माहीं प्रस्न

(मत्ती 9:14-17; मरकुस 2:18-22)

33ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “यूहन्ना के चेला लोग अउर फरीसी लोगन के चेला लोग हमेसा उपासे रहिके, प्राथना करत हें, पय अपना के चेला लोग काहे खात-पिअत हें; उपासे नहीं रहँय।” 34यीसु उनसे कहिन, “का तूँ पंचे बरातिन से, जब तक दुलहा उनखे साथ माहीं रहत हय, त उपास कराय सकते हया? नहीं। 35पय ऊँ दिन अइहँय, जउने माहीं दुलहा बरातिन से अलग कीन जई, तब ऊँ पंचे उपासे रइहँय।”

36यीसु अउर एकठे उदाहरन दइके कहिन, “कउनव मनई नबा ओन्हा म से फारिके पुरान ओन्हा माहीं पट्टी नहीं लगाबय, नहीं त नबा ओन्हव फाट जई अउर उआ पट्टी पुरान ओन्हा माहीं मेलव न खई। 37अउर कउनव मनई नबा अंगूर के रस काहीं, पुरान मसकन माहीं भरिके नहीं धरय, काहेकि नबा अंगूर के रस पुरान मसकन काहीं फारिके बहि जई, अउर मसकँय घलाय बरबाध होइ जइहँय। 38एसे नबा अंगूर के रस नई मसकन माहीं भरँइ चाही। 39कउनव मनई पुरान अंगूर के रस पिके, नबा अंगूर के रस नहीं पिअँइ चाहय, काहेकि उआ कहत हय, कि पुरानय अंगूर के रस निकहा हय।”

6

पबित्र दिन के प्रभू

(मत्ती 12:1-8; मरकुस 2:23-28)

1यीसु पबित्र दिन काहीं खेतन के किनारे-किनारे जात रहे हँय, अउर उनखर चेला लोग गोहूँ के बाली टोरि-टोरिके अउर हाँथे से मीज-मीजिके खात जात रहे हँय। 2तब फरीसी लोगन म से कुछ जने कहँइ लागें, “तूँ पंचे उआ काम काहे करते हया, जउन मूसा के बिधान के मुताबिक पबित्र दिन काहीं करब उचित नहिं आय?” 3तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “काहे तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं इआ नहीं पढ़े आह्या, कि जब राजा दाऊद अउर उनखर साथी भूँखे रहे हँय, त का किहिन तय? 4राजा दाऊद कइसन परमातिमा के घर माहीं गें, अउर भेंट चढ़ाई रोटिन काहीं खाइन, अउर अपने साथिन काहीं घलाय खबाइन, जिनहीं खाँइका याजक लोगन काहीं छोंड़िके अउर कोहू काहीं उचित नहीं रहा?” 5अउर यीसु उनसे कहिन, कि “मनई के लड़िका पबित्र दिन के घलाय प्रभू आहीं।”

झुरान हाँथ बाले मनई काहीं नीक करब

(मत्ती 12:9-12; मरकुस 3:1-6)

6एक दिन अइसन भ, कि यीसु पबित्र दिन काहीं यहूदी सभाघर माहीं जाइके उपदेस देंइ लागें; अउर उहाँ एकठे मनई बइठ रहा हय, जेखर दहिना हाँथ झुरान रहा हय। 7मूसा के बिधान सिखामँइ बाले अउर फरीसी लोग, यीसु के ऊपर दोस लगामँइ के खातिर मोका ताकेन रहँय, कि देखी यीसु पबित्र दिन काहीं ओही नीक करत हें, कि नहीं। 8पय यीसु उनखे मन के बात जानत रहे हँय; एसे ऊँ झुरान हाँथ बाले मनई से कहिन, “उठा, बीच माहीं ठाढ़ होइजा।” अउर उआ उठिके ठाढ़ होइगा। 9यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे इआ पूँछित हएन, कि मूसा के बिधान के मुताबिक, पबित्र दिन काहीं का उचित हय, नीक करब, कि नागा करब; कोहू के प्रान बचाउब, कि नास करब?” 10तब यीसु चारिव कइती यहूदी सभाघर माहीं बइठे मनइन कइती देखिके, उआ झुरान हाँथ बाले मनई से कहिन, “आपन हाँथ बढ़ाबा।” उआ उहयमेर किहिस, अउर ओखर हाँथ पुनि निकहा होइगा। 11पय ऊँ पंचे, आगबबूला होइके आपस माहीं बहँस करँइ लागें, कि हम पंचे यीसु के साथ का करी?

बाराठे खास चेलन काहीं नियुक्त करब

(मत्ती 10:1-4; मरकुस 3:13-19)

12ऊँ दिनन माहीं यीसु पहार माहीं प्राथना करँइ के खातिर गें, अउर परमातिमा से प्राथना करँय माहीं सगली रात बिताइन। 13जब दिन भ तब यीसु अपने सगले चेलन काहीं बोलाइन, अउर उनमा से बारा जनेन काहीं चुनि लिहिन, अउर उनहीं आपन खास चेला कहिन; 14अउर उनखर नाम इआमेर से हँय: समौन जिनखर नाम यीसु पतरस धराइन, अउर उनखर भाई अन्द्रियास, अउर याकूब, अउर यूहन्ना, अउर फिलिप्पुस, अउर बरतुलमय, 15अउर मत्ती, अउर थोमा, अउर हलफई के लड़िका याकूब, अउर समौन जउन जेलोतेस कहाबत रहा हय, 16अउर याकूब के लड़िका यहूदा, अउर यहूदा इस्करियोती जउन यीसु काहीं धोका दइके, उनखे बिरोधिन के हाँथ म पकड़ामँइ बाला बना।

सिच्छा देब अउर बिमारन काहीं नीक करब

(मत्ती 4:23-25)

17तब यीसु उनखे साथ पहार से उतरिके समथर जघा माहीं ठाढ़ भें, अउर उनखे चेलन के बड़ी भीड़, अउर सगले यहूदिया प्रदेस, अउर यरूसलेम सहर, अउर सूर अउर सैदा प्रदेस के समुंद्र के किनारे से खुब मनई, 18जउन यीसु के उपदेस सुनँय के खातिर, अउर अपने बिमारिन से नीक होंइ के खातिर उनखे लघे आएँ तय, उहाँ रहे हँय। अउर असुद्ध आत्मन से परेसान मनई घलाय नीक कइ दीन जात रहे हँय। 19भीड़ के सगले मनई यीसु काहीं छुअँय चाहत रहे हँय, काहेकि यीसु से सामर्थ निकरिके सगले बिमारन काहीं नीक करत रही हय।

आसीस अउर दुख के बचन

(मत्ती 5:1-12)

20तब यीसु अपने चेलन कइती देखिके कहिन, “धन्य हया तूँ पंचे जउन दीन हया, काहेकि परमातिमा के राज तोंहरय आय।”

21“धन्य हया तूँ पंचे जउन अबे भूँखे हया, काहेकि संतुस्ट कीन जइहा। धन्य हया तूँ पंचे जउन अबे रोउते हया, काहेकि हँसिहा।”

22“धन्य हया तूँ पंचे जब मनई के लड़िका के कारन, संसार के मनई तोंहसे दुसमनी रखिहँय, अउर तोंहईं अपने बीच से निकार देइहँय, अउर तोंहार बुराई करिहँय, अउर तोंहईं बुरा जानिके तोंहार नाम अपने बीच म से काटि देइहँय।”

23उआ दिन तूँ पंचे आनन्दित होइके कूद्या, काहेकि देखा, तोंहरे खातिर स्वरग माहीं बड़ा प्रतिफल मिली: उनखर बाप-दादा परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के साथव इहइमेर से करत रहे हँय।

24“पय हाय तोंहरे ऊपर जउन तूँ पंचे धनमान हया, काहेकि तूँ आपन सान्ती पाय चुके हया।”

25“हाय तोंहरे ऊपर जउन तूँ पंचे अबे संतुस्ट हया, काहेकि तूँ भूँखे होइहा। हाय तोंहरे ऊपर जउन अबे हँसते हया, काहेकि सोक करिहा अउर रोइहा।”

26“हाय तोंहरे ऊपर जब संसार के मनई तोंहईं भला कहँय, काहेकि उनखर बाप-दादा, परमातिमा के लबरी सँदेस बतामँइ बालेन के साथव, अइसय करत रहे हँय।”

दुसमनन से प्रेम करब

(मत्ती 5:38-48; 7:12)

27पय हम, तोंहसे सुनँय बालेन से कहित हएन, कि “अपने दुसमनन से प्रेम करा; जउन तोंहसे दुसमनी करँय, उनखर भलाई करा। 28जउन मनई तोंहईं सराप देंय, उनहीं आसिरबाद द्या; जउन तोंहार अपमान करँय, उनखे खातिर प्राथना करा। 29जउन तोंहरे एकठे गाल माहीं थापड़ मारय, ओखी कइती दुसरव गाल फेर दिहा; अउर जे तोंहार साल छड़ाय लेय, ओही कुरथव लइ लेंइ दिहा; 30अगर कोऊ तोंहसे कुछू माँगय, त ओही द्या, अउर जे कोऊ तोंहार कउनव चीज छड़ाय लेय, ओसे न माग्या। 31जइसन तूँ पंचे चहते हया, कि दूसर मनई तोंहरे साथ बेउहार करँय, तुहूँ पंचे उनखे साथ उहयमेर बेउहार करा। 32अगर तूँ पंचे अपने प्रेम करँइ बालेन भर से प्रेम करिहा, त तोंहार कउन बड़ाई? काहेकि पापिव मनई अपने प्रेम करँइ बालेन से प्रेम करत हें। 33अउर अगर तूँ पंचे अपने भलाई करँइ बालेन के साथ भर भलाई करते हया, त तोंहार कउन बड़ाई? काहेकि पापिव मनई इहइमेर करत हें? 34अउर अगर तूँ पंचे उनहिन काहीं उधार द्या, जिनसे पुनि पामँइ के आसा रखते हया, त तोंहार कउन बड़ाई? काहेकि पापिव मनई पापी मनइन काहीं उधार देत हें, कि पुनि ओतनँइ पामँइ। 35पय तूँ पंचे अपने दुसमनन से प्रेम करा; अउर भलाई करा, अउर दुबारा न पामँइ के आसा रखिके, उधार द्या, तब तोंहईं स्वरग माहीं बड़ा प्रतिफल मिली, अउर तूँ परमप्रधान परमातिमा के सन्तान ठहरिहा, काहेकि परमातिमा उनहूँ के ऊपर जउन धन्यबाद नहीं करँइ, अउर बुरे मनइन के उपरव किरपा करत हें। 36जइसन तोंहार पिता परमातिमा दयालू हें, उहयमेर तुहूँ पंचे दयालू बना।”

दोस न लगाबा

(मत्ती 7:1-4)

37“कोहू के ऊपर दोस न लगाबा, त परमातिमव तोंहरे ऊपर दोस न लगइहँय। कोहू काहीं दोसी न ठहराबा, त परमातिमव तोंहईं दोसी न ठहरइहँय। अउर तूँ पंचे दुसरेन के गलती माफ करिहा, त परमातिमव तोंहार गलती माफ करिहँय।” 38“तूँ पंचे अगर दुसरेन काहीं कुछू देइहा, त परमातिमा के द्वारा तोंहऊँ काहीं दीन जई। उहय नाप माहीं हलाय-हलाइके अउर दबाय-दबाइके पूर भरिके दीन जई, काहेकि जउने नाप से तूँ पंचे दुसरेन काहीं नपते हया, उहय नाप से परमातिमव तोंहरे खातिर नपिहँय।”

39यीसु पुनि उनहीं एकठे अउर उदाहरन दइके कहिन, “का एकठे आँधर मनई, दुसरे आँधर मनई काहीं गइल बताय सकत हय? का ऊँ दोनव जने गड्ढा माहीं न गिर परिहँय?” 40कउनव चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं होय, पय अगर चेला सिद्ध होइ जई, त अपने गुरू कि नाईं होइ सकत हय।

41तूँ अपने भाई के छोट गलती काहीं काहे देखते हया, जउन निन्च बुदी उजार कि नाईं हय, अउर अपने बड़ी गलती काहीं नहीं देखते आह्या, जउन खम्भा कि नाईं हय? 42जब तोंहईं अपने आँखी के खम्भा नहीं देखाय, त तूँ अपने भाई से कइसा कहि सकते हया, हे भाई, रुकि जा, तोंहरे आँखी के निन्च बुदी उजार निकार देई? हे कपटी, पहिले अपने आँखी के खम्भा निकार, तब जऊँ निन्च बुदी उजार तोरे भाई के आँखी माहीं ही, ओही निकहा से देखिके निकारे पइहे।

जइसन बिरबा ओइसन फर

(मत्ती 7:16-20; 12:33-35)

43“कउनव निकहा बिरबा अइसा नहीं होय, कि ओमा खराब फर लागँय, अउर कउनव खराब बिरबा अइसा नहीं होय, कि ओमा निकहा फर लागँय। 44हरेक बिरबा अपने फरय से पहिचाना जात हय; काहेकि मनई जरबइलन से अंजीर नहीं टोर सकँय, अउर न झरबेरी से अंगूर। 45इहइमेर निकहा मनई अपने मन के निकहे भन्डार से, निकही बात निकारत हय; अउर बुरा मनई अपने मन के बुरे भन्डार से, बुरी बात निकारत हय; काहेकि जउन मन म भरा रहत हय, उहय ओखे मुँहे से निकरत हय।”

घर बनामँइ बाले दुइठे मनई

(मत्ती 7:24-27)

46“जब तूँ पंचे हमार कहा नहीं मनते आह्या, त काहे हमहीं ‘हे प्रभू, हे प्रभू’, कहते हया? 47जे कोऊ हमरे लघे आबत हय, अउर हमरे बातन काहीं सुनिके उनहिन के मुताबिक चलत हय, हम तोहईं बताइत हएन, कि उआ केखी कि नाईं होत हय, 48उआ, उआ मनई कि नाईं होत हय, जउन घर बनाबत माहीं नेव गहिल खोदिस, अउर जब बड़ी काहीं चट्टान मिलगे, ओहिन माहीं नेव भरिके घर बनाइस, अउर जब बाढ़ आई तब पानी के तेज धार उआ घर से टकरानी, पय नहीं गिराए पाइन; काहेकि उआ पक्का घर बना रहा हय। 49पय जउन मनई हमरे बात काहीं सुनिके नहीं मानय उआ, उआ मनई कि नाईं होत हय, जउन बिना नेव खोदे घर बनाइस, अउर जब बाढ़ आई, अउर पानी के तेज धार के उआ घर से टकरातय, उआ घर गिरिके, पूरी तरह से नास होइगा।”

7

एकठे सुबेदार के बिसुआस

(मत्ती 8:5-13)

1जब यीसु मनइन से आपन सगली बातँय कहि चुकें, तब कफरनहूम सहर माहीं आएँ, 2उहाँ कउनव सुबेदार के एकठे पियार दास रहा हय, त उआ खुब बिमार रहा हय, लागत रहा हय कि उआ मर जई। 3सुबेदार यीसु के खबर सुनिके यहूदी लोगन के कइयकठे अँगुअन काहीं यीसु के लघे बिनती करँइ के खातिर पठइन, कि उँइ आइके हमरे दास काहीं नीक कइदेंय। 4ऊँ पंचे यीसु के लघे गें, अउर उनसे खुब बिनती कइके कहँइ लागें, “सुबेदार इआ काबिल हें, कि अपना उनखे खातिर इआ काम करी, 5काहेकि ऊँ हमरे यहूदी जाति से प्रेम करत हें, अउर उँइन हमरे सभाघर काहीं बनबाइन हीं।” 6तब यीसु उनखे साथ चल दिहिन, पय जब ऊँ घर के लघेन पहुँचिगें, तब सुबेदार अपने कइयकठे साथिन से कहबाय पठइन, “हे प्रभू, हमरे घर आमँइ के दुख न उठाई, काहेकि हम एखे काबिल नहिं आहेन, कि अपना हमरे घर माहीं अई। 7इहय कारन से, कि हम अपना के लघे आमँइ के काबिल नहिं आहेन, इआ समझिके अपना के लघे नहीं आएन, पय उहँइ से बचन कहि देई, त हमार दास नीक होइ जई। 8हमहूँ पराधीन मनई आहेन, अउर सिपाही हमरे अधीन हें; जब एकठे से कहित हएन, कि ‘जा’ तब उआ जात हय; अउर जब दुसरे से कहित हएन, कि ‘आव’ तब उआ आबत हय; अउर अपने कउनव दास से कहित हएन, कि ‘इआ कर’ त उआ उहय करत हय।” 9इआ बात सुनिके यीसु खुब अचरज मानिन, अउर पीछे फिरिके उआ भीड़ के मनइन से जउन उनखे पीछे आबत रहे हँय कहिन, “हम तोंहसे कहित हएन, कि हम इजराइल माहीं घलाय अइसन बिसुआस नहीं पाएन।” 10अउर सुबेदार के पठए साथी घर लउटिके उआ सेबक काहीं नीक-सूख पाइन।

बिधबा के लड़िका काहीं जिआउब

11कुछ दिन के बाद यीसु नाईन नाम के एकठे सहर माहीं जात रहे हँय, उनखे साथ माहीं उनखर चेला लोग, अउर खुब झुन्ड के झुन्ड मनई जात रहे हँय। 12जब यीसु सहर के प्रबेस द्वार के लघे पहुँचे, त खुब मनई एकठे लहास काहीं बहिरे लए जात रहे हँय; जउन अपने महतारी के एकलउता लड़िका रहा हय; अउर उआ मेहेरिआ बिधबा रही हय; अउर उआ सहर के खुब मनई उनखे साथ माहीं रहे हँय। 13उआ बिधबा मेहेरिआ काहीं देखिके, प्रभू काहीं दया आइगे, अउर यीसु कहिन, “न रोबा”, 14तब यीसु लघे जाइके अरथी काहीं छुइन, अउर जउन अरथी उठाए रहे हँय, रुकिगें। तब यीसु कहिन, “हे नवजमान, हम तोंहसे कहित हएन कि उठा!” 15तब उआ मुरदा उठ बइठ, अउर बोलँइ लाग। अउर यीसु ओही ओखे महतारी काहीं सउँप दिहिन। 16इआ देखिके सगले जन डेराइगें, अउर ऊँ पंचे परमातिमा के बड़ाई कइके कहँइ लागें, “हमरे बीच माहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले एक जने खुब महान मनई आए हँय, अउर परमातिमा अपने लोगन के ऊपर किरपा किहिन हीं।” 17अउर यीसु के बारे माहीं इआ बात सगले यहूदिया प्रदेस अउर लघे-लघे के प्रदेसन माहीं फइलिगे।

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के पूँछब

(मत्ती 11:2-19)

18यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले काहीं उनखर चेला लोग ईं सगली बातन के खबर बताइन। 19तब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले अपने चेलन म से दुइ जनेन काहीं बोलाइके, प्रभू के लघे इआ पूँछँइ के खातिर पठइन, कि “का आमँइ बाले मसीह अपनय आहेन, कि हम पंचे अउर दुसरे के इन्तजार करी?” 20उँइ दोनव जने यीसु के लघे आइके कहिन, “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले हमहीं अपना के लघे इआ पूँछँइ के खातिर पठइन हीं, कि का आमँइ बाले मसीह अपनय आहेन, इआ कि हम पंचे दुसरे के इन्तजार करी?” 21उहय समय यीसु खुब मनइन काहीं बिमारिन अउर दुखन, अउर बुरी आत्मन से छोड़ाइन, अउर खुब अँधरन काहीं नीक किहिन, अउर ऊँ देखँइ लागें; 22अउर यीसु उनसे कहिन, “जउन कुछू तूँ पंचे देखे सुने हया, जाइके यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से कहि दिहा; कि आँधर देखत हें; लाँगड़ चलँइ लागत हें; कोढ़ी सुद्ध कीन जात हें; बहिर सुनँय लागत हें, मुरदा जिआए जात हें। अउर कंगालन काहीं खुसी के खबर सुनाई जात ही। 23पय धन्य हय उआ मनई, जउन हमरे ऊपर कीन बिसुआस से कबहूँ नहीं भटकय।”

24जब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के चेला लोग उहाँ से चल दिहिन, तब यीसु यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के बारे माहीं, उहाँ बइठ मनइन से कहँइ लागें, “तूँ पंचे गाँव से दूरी सुनसान जघा माहीं का देखँइ गया तय? का हबा से हालत सरकन्डा काहीं? 25पुनि तूँ पंचे का देखँइ गया तय? का कोमर ओन्हा पहिरे मनई काहीं? देखा, जउन कीमती ओन्हा पहिरे सुख-बिलास से रहत हें, ऊँ राजमहलन माहीं रहत हें। 26त पुनि तूँ पंचे का देखँइ गया तय? का कउनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले काहीं? हाँ, हम तोंहसे कहित हएन, बलकिन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले से बड़े काहीं। 27ईं, उँइन आहीं, जिनखे बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय:

‘देखा, हम अपने दूत काहीं तोंहरे आँगे-आँगे पठइत हएन, जउन तोंहरे खातिर मनइन काहीं तइआर करिहँय।’

28हम तोंहसे कहित हएन, कि जउन बरी-बिआही मेहेरिअन से पइदा भें हँय, उनमा से यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से बढ़िके, कोऊ नहिं भ आय, पय जउन परमातिमा के राज माहीं छोट से छोट हें, ऊँ यूहन्ना से बढ़िके हँय।” 29अउर यीसु के इआ बात काहीं सुनिके, सगले साधारन मनई अउर चुंगी लेंइ बाले घलाय, यूहन्ना से बपतिस्मा लइके परमातिमा काहीं सच्चा मान लिहिन। 30पय फरीसी लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले यूहन्ना से बपतिस्मा न लइके, परमातिमा के इच्छा काहीं अपने बारे माहीं टार दिहिन।

31“हम इआ समय के मनइन के तुलना केसे करी, कि ऊँ केखे कि नाईं हें? 32ऊँ पंचे ऊँ लड़िकन कि नाईं हें, जउन बजार माहीं बइठे एक दुसरे से गोहराइके कहत हें, ‘हम तोंहरे खातिर बसुरी बजाएन, अउर तूँ पंचे नहीं नाच्या; अउर हम पंचे तोंहरे खातिर सोक के गाना गाएन, अउर तूँ पंचे नहीं रोया!’ 33काहेकि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले, न रोटी खात आएँ, अउर न अंगूर के रस पिअत आएँ, अउर तूँ पंचे कहते हया, ‘उनखे भीतर बुरी आत्मा हय’ 34मनई के लड़िका, खात-पिअत आबा हय, अउर तूँ पंचे कहते हया, ‘देखा, पेटू अउर पिआगी मनई काहीं, चुंगी लेंइ बालेन अउर पापिन के साथी आय।’ 35पय परमातिमा के ग्यान के मुताबिक चलँइ बाले इआ बात काहीं जाहिर करत हें, कि परमातिमा सच्चे हें।”

फरीसी के घर माहीं पापिन मेहेरिआ काहीं माफ करब

36पुनि कउनव फरीसी यीसु से बिनती किहिस, कि ऊँ उनखे घर माहीं उनखे साथ बियारी करँय चलँय, तब यीसु फरीसी के घर माहीं जाइके खाना खाँय बइठें। 37उआ सहर के एकठे पापिन मेहेरिआ, इआ जानिके, कि यीसु फरीसी के घर माहीं खाना खाँय बइठ हें, संगमरमर के बरतन माहीं अँतर लइके आई। 38अउर यीसु के गोड़े के लघे पीछे ठाढ़ होइके, रोबत-रोबत उनखे गोड़न काहीं आँसू से भिजाइके, अपने मूँड़े के बार से पोंछँइ लाग, अउर उनखे गोड़ेन काहीं बेर-बेर चूम के अँतर मलिस। 39इआ देखिके, उआ फरीसी जउन यीसु काहीं बियारी करँय क बोलाइस रहा हय, अपने मन माहीं सोचँइ लाग, “अगर ईं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले होतें त इआ जान जातें, कि इआ मेहेरिआ जऊँ उनहीं छुअत ही, त उआ को आय, अउर कइसन मेहेरिआ ही, काहेकि उआ त पापिन मेहेरिआ आय।” 40यीसु उनखे बात काहीं जानिके जबाब दिहिन, “हे समौन, हमहीं तोंहसे कुछू कहँइ क हय।” ऊँ कहिन, “हे गुरू, कही।” 41“कउनव साहूकार के दुइठे रिनिहा रहे हँय, एकठे पाँच सव, अउर दूसर पचास दिनार के रिनिहा रहा हय। 42जब उनखे लघे रिन पटामँइ के खातिर कुछू नहीं रहा, तब ऊँ साहूकार दोनव जनेन के रिन माफ कइ दिहिन। एसे उनमा से कउन उनसे जादा प्रेम करी?” 43समौन जबाब दिहिन, “हमरे समझ माहीं, उआ जउने के जादा रिन माफ कीन ग हय।” तब यीसु उनसे कहिन, “तूँ ठीक जबाब दिहा हय।” 44अउर उआ मेहेरिआ कइती फिरिके यीसु समौन से कहिन, “का तूँ इआ मेहेरिआ काहीं देखते हया? हम तोंहरे घर माहीं आएन, अउर तूँ हमरे गोड़ धोमँइ के खातिर पानिव तक नहीं दिहा, पय इआ मेहेरिआ हमरे गोड़न काहीं अपने अँसुअन से फुलाइके, अउर अपने मूँड़े के बालन से पोंछिस ही। 45तूँ अपने रीत के मुताबिक हमहीं चूमा नहीं दिहा, पय जब से हम आएन हय, तब से इआ मेहेरिआ हमरे गोड़न काहीं चूँमब नहीं छोंड़िस। 46तूँ हमरे मूँड़े माहीं तेल नहीं मल्या, पय इआ हमरे गोड़े माहीं अँतर मलिस ही। 47एसे हम तोंहसे कहित हएन, कि इआ मेहेरिआ के पाप जउन खुब रहे हँय, माफ होइगें, काहेकि इआ मेहेरिआ खुब प्रेम किहिस ही; पय जेखर थोरका पाप माफ होत हें, उआ थोरिन क प्रेम करत हय।” 48अउर यीसु उआ मेहेरिआ से कहिन, “तोंहार पाप माफ होइगें।” 49तब जउन मनई उनखे साथ खाना खाँइ बइठ रहे हँय, ऊँ पंचे अपने-अपने मन माहीं सोचँइ लागें, “ईं को आहीं, जउन पापन काहीं माफ करत हें?” 50पय यीसु उआ मेहेरिआ से कहिन, “तोंहार बिसुआस तोहँई बचाय लिहिस ही, नीके कुसल चले जा।”

8

यीसु के सेबिकाएँ

1एखे बाद यीसु सहरन-सहरन अउर गाँमन-गाँमन प्रचार करत, अउर परमातिमा के राज के खुसी के खबर सुनाबत घूमँइ लागें, अउर ऊँ बरहूँ चेलव उनखे साथ माहीं रहे हँय, 2अउर कुछ मेहेरिअव रही हँय, जउन बुरी आत्मन से छोंड़ाई अउर बिमारिन से नीक कीन गईं तय, अउर ऊँ पंचे ईं आहीं: मरियम जउन मगदलीनी कहाबत रही हँय, जउने म से सातठे बुरी आत्मा निकरीं तय, 3अउर हेरोदेस राजा के भन्डारी खुजा के मेहेरिआ योअन्ना, अउर सूसन्नाह, अउर खुब दुसरव मेहेरिआ रही हँय, ईं अपने धन सम्पत्ति से यीसु के सेबा करत रही हँय।

बीज बोमँइ बाले किसान के उदाहरन

(मत्ती 13:1-9; मरकुस 4:1-9)

4जब खुब भीड़ एकट्ठा होइगे, अउर हरेक सहर के मनई उनखे लघे चले आबत रहे हँय, तब यीसु एकठे उदाहरन दइके कहिन: 5“एकठे बीज बोमँइ बाला बीज बोमँइ निकरा। अउर बोबत समय कुछ बीज गइल के किनारे गिरें, अउर कचरिगें, अउर अकास म उड़ँइ बाले पच्छी आइके उनहीं खाय लिहिन। 6कुछ बीज पथरही भुँइ माहीं गिरें, अउर हरबी जामि आएँ, जहाँ उनहीं गहिल माटी नहीं मिली, इआ कारन से झुराइगें। 7कुछ बीज जरबइलन म गिरें, अउर जामि आएँ, पय ऊँ जरबइला साथय-साथ बाढ़िके उनहीं दबाय लिहिन। 8कुछ बीज निकही भुँइ माहीं गिरें, अउर जामिके, सव गुना फर लइ आएँ।” एतना कहिके यीसु खुब चंडे कहिन, “जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”

उदाहरनन के उद्देस्य

(मत्ती 13:10-17; मरकुस 4:10-12)

9अउर चेला लोग यीसु से पूँछिन, कि इआ उदाहरन के मतलब का हय? 10यीसु उनसे कहिन, “परमातिमा के राज के जउने बातन काहीं दूसर लोग नहीं जानँय, ऊँ बातन काहीं परमातिमा तोहईं समझाइन हीं, पय सगली बात दुसरे लोगन काहीं उदाहरन माहीं सुनाई जाती हँय, एसे कि

‘ऊँ पंचे परमातिमा के महिमा काहीं देखत हें, पय देखेव से जाने नहीं पामँय, अउर अपने कानन से सुनत हें, पय सुनेव से नहीं समझे पामँय’।”

बीज बोमँइ बाले उदाहरन के मतलब

(मत्ती 13:18-23; मरकुस 4:13-20)

11“इआ उदाहरन के मतलब इआमेर हय: बीज परमातिमा के बचन आय। 12गइल के किनारे गिरे बीज ऊँ आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिन; पय कुछ देर बाद सइतान आइके उनखर सुनी बात काहीं बिसराय देत हय, कि कहँव अइसा न होय, कि ऊँ पंचे परमातिमा के बचन के बिसुआस कइलेंय अउर पाप से छुटकारा पाय जाँय। 13कुछ जने पथरही जमीन माहीं बोए बीज कि नाईं होत हें, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिके, मारे उराव के अपनाय लेत हें। पय अपने जीबन माहीं परमातिमा के सँदेस काहीं गहराई से लागू नहीं करँइ, एसे कुछ दिनन तक मानत हें, पय बाद माहीं जबहिन परमातिमा के बचन के कारन दुख अउर कस्ट मिलत हें, त हरबिन परमातिमा के बचन काहीं मानब छोंड़ि देत हें। 14जउन बीज जरबइला माहीं गिरें, ऊँ ईं आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनिन, अउर आँगे चलिके घर-परिबार के चिन्ता, अउर धन के लालच, अउर जीबन के सुख-बिलास माहीं फँसिके परमातिमा के बचन काहीं बिसराय देत हें, अउर परमातिमा के आसीस नहीं पामँय। अउर बिना फर के बिरबा कि नाईं होइ जात हें। 15पय जउन निकही भुँइ म बोए बीज कि नाईं होत हें, ऊँ पंचे ईं आहीं, जऊँ परमातिमा के बचन काहीं सुनिके, पूरे बिसुआस के साथ अपनाबत हें, अउर अपने हिरदँय के भले भन्डार माहीं सम्हारे रहत हें, अउर धीरज धइके फर लइ आबत हें।”

दिया के उदाहरन

(मरकुस 4:21-25)

16“कउनव मनई दिया जलाइके बरतन के नीचे नहीं मूदय, अउर न खटिया के नीचे धरय, बलकिन ऊँचे जघा माहीं धरत हय, कि घर के भीतर आमँइ बाले उँजिआर पामँय। 17जउन कुछू बिचार मनइन के मन माहीं हें, परमातिमा उनहीं प्रगट करिहँय, अउर हमरे जीबन के सगली छिपी बातन काहीं परमातिमा जानत हें। 18एखे बारे माहीं तूँ पंचे सतरक रहा, कि तूँ पंचे कउनमेर सुनते हया? काहेकि जे कोऊ परमातिमा के बचन काहीं अउर निकहा से जानँइ के कोसिस करत हय, परमातिमा ओही अउर आत्मिक ग्यान देत हें, पय जे कोऊ परमातिमा के बचन काहीं जानँइ के कोसिस नहीं करय, त ओखे लघे जउन ग्यान रहत हय, उहव बिसरि जात हय, जेही उआ आपन समझत हय।”

यीसु के महतारी अउर भाई

(मत्ती 12:46-50; मरकुस 3:31-35)

19तब यीसु के महतारी अउर भाई लोग उनखे लघे आएँ, पय खुब भीड़ होंइ के कारन उनसे नहीं मिल पाएँ। 20तब कुछ जने यीसु से कहिन, “देखी, अपना के महतारी अउर भाई लोग बहिरे ठाढ़ हें, अउर अपना से मिलँइ चाहत हें।” 21इआ सुनिके यीसु बोलामँइ बालेन से कहिन, “देखा हमार महतारी अउर हमार भाई ईं पंचे आहीं, जउन परमातिमा के बचन काहीं सुनत हें, अउर मानत हें।”

तेज आँधी काहीं रोंकब

(मत्ती 8:23-27; मरकुस 4:35-41)

22एक दिन पुनि यीसु अउर उनखर चेला लोग नाव माहीं चढ़ें, तब यीसु उनसे कहिन, “आबा झील के उआ पार चली।” तब ऊँ पंचे नाव काहीं छोर दिहिन। 23पय जब नाव चलत रही हय, तब यीसु नाव माहीं सोइगें, तबहिनय खुब तेज आँधी चलँइ लाग, अउर पानी के तेज हिलकोरा से नाव माहीं पानी भरँय लाग, अउर ऊँ पंचे बड़ी मुसीबत माहीं परिगें। 24तब चेला लोग जाइके यीसु काहीं जगाइके उनसे कहिन, “हे स्वामी! हम पंचे बूड़े जइत हएन।” तब यीसु उठिके आँधी अउर पानी के लहरन काहीं डाँटिन, त ऊँ रुकि गईं, अउर सान्ती होइगे। 25तब यीसु चेलन से कहिन, “काहे तोंहईं अबहिनव तक हमरे ऊपर बिसुआस नहिं आय?” पय ऊँ पंचे खुब डेराइगें तय, अउर खुब अचरज मानिके आपस माहीं कहँइ लागें, “ईं को आहीं, कि आँधी, पानी तक काहीं हुकुम देत हें, अउर ऊँ घलाय उनखर कहा मानत हें?”

बुरी आत्मा से परेसान मनई काहीं नीक करब

(मत्ती 8:28-34; मरकुस 5:1-20)

26एक दिन यीसु, अउर उनखर चेला लोग गिरासेनी लोगन के देस माहीं पहुँचिगें, जउन गलील प्रदेस के सउहें दुसरे पार रहा हय। 27जइसय यीसु नाव से उतरें, ओतनिनदार उआ सहर के एकठे मनई उनहीं मिला, जउने माहीं बुरी आत्मा सकान रही हँय। उआ खुब दिनन से ओन्हा नहीं पहिरत रहा आय, अउर न घरय माहीं रहत रहा आय, बलकिन उआ कब्रन माहीं रहा करत रहा हय। 28उआ यीसु काहीं देखिके चिल्लान, अउर उनखे गोड़न गिरिके खुब चन्डे कहिस, “हे यीसु परमप्रधान परमातिमा के लड़िका! हमार अपना से कउनव काम नहिं आय। हम अपना से चरउरी करित हएन, कि हमहीं दुख न देई।”

29काहेकि यीसु, ऊँ बुरी आत्मन काहीं, उआ मनई से बहिरे निकर जाँइ के हुकुम देत रहे हँय, ऊँ बुरी आत्मा उआ मनई काहीं बेर-बेर परेसान करत रही हँय। जब कि सगले जन मिलिके ओही कइअक बेरी बेंड़ियन, अउर सँकरिन से बाँधिन तय, पय उआ उनहीं टोर डारत रहा हय। अउर ऊँ बुरी आत्मा उआ मनई काहीं गाँव से दूरी सुनसान जघन माहीं भगाए फिरत रही हँय। 30यीसु ओसे पूँछिन, “तोंहार का नाम हय?” उआ यीसु से कहिस, “हमार नाम सेना हय।” काहेकि ओखे भीतर खुब बुरी आत्मा सकान रही हँय। 31अउर ऊँ बुरी आत्मा यीसु से खुब चरउरी किहिन, कि हमहीं अथाह कुन्ड माहीं जाँइ के हुकुम न देई। 32ओहिनठे पहार माहीं सुमरन के एकठे बड़ा भारी झुन्ड चरत रहा हय, ऊँ बुरी आत्मा यीसु से चरउरी कइके कहिन, कि हमहीं ऊँ सुमरन के ऊपर पठय देई, जउने हम पंचे उनखे भीतर सकाय जई, तब यीसु, ऊँ बुरी आत्मन काहीं हुकुम दइ दिहिन। 33अउर ऊँ बुरी आत्मा उआ मनई से निकरिके, ऊँ सुमरन के भीतर सकाय गईं, अउर सुमरन के झुन्ड पहार के उतारा से दउड़िके झील माहीं कूद परा, अउर सगले सुमर बूड़िके मरिगें।

34अउर इआ जऊँ भ रहा हय, देखिके सुमरन काहीं चरामँइ बाले सगले भागिके, सहर अउर लघे के गाँमन माहीं जाइके सगला हाल बताइन। 35इआ जऊँ भ रहा हय, देखँइ के खातिर खुब जने आएँ। अउर यीसु के लघे आइके, उआ मनई काहीं जउने म से बुरी आत्मा निकरी रही हँय, ओन्हा पहिरे यीसु के गोड़े के लघे नीक-सूख बइठे देखिके डेराइगें; 36जउन मनई इआ घटना काहीं देखिन तय, ऊँ मनइन से जऊँ देखँइ आएँ तय बताइन, कि जउने माहीं बुरी आत्मा रही हँय, उआ कउनमेर से निकहा भ हय। 37तब उँइ सगले जउन गिरसेनी प्रदेस के लघे-लघे के सहरन अउर गाँमन से देखइआ आएँ तय, यीसु से बिनती कइके कहँइ लागें, कि अपना हमरे इहाँ से चले जई; काहेकि ऊँ पंचे खुब डेराइगें तय। तब यीसु नाव माहीं चढ़िके लउटिगें। 38तबहिनय उआ मनई जउने म से बुरी आत्मा निकरी रही हँय, यीसु से बिनती करँइ लाग, हमहूँ काहीं अपने साथय रहँइ देई, पय यीसु ओही बिदा कइके कहिन, 39“अपने घर जाइके अपने परिबार बालेन से बताबा, कि परमातिमा तोंहरे ऊपर बड़ी दया कइके, केतना बड़ा काम किहिन हीं।” उआ मनई जाइके सगले सहर माहीं प्रचार करँइ लाग, कि यीसु हमरे खातिर केतना बड़ा काम किहिन हीं।

याईर के मरी बिटिया अउर एकठे बिमार मेहेरिआ

(मत्ती 9:18-26; मरकुस 5:21-43)

40जब यीसु नाव माहीं चढ़िके झील के दुसरे पार आइगें, तब खुब मनई उनसे आनन्द के साथ मिलें, काहेकि ऊँ पंचे यीसु के इन्तजार करत रहे हँय। 41एतनेन माहीं याईर नाम के एकठे मनई, जउन यहूदी सभाघर के मुखिया रहे हँय आएँ, अउर ऊँ यीसु के गोड़न गिरिके, उनसे बिनती करँइ लागें, कि अपना हमरे घर चली, 42काहेकि उनखे बारा बरिस के एकलउती बिटिया रही हय, अउर उआ खुब बिमार रही हय, लागत रहा हय कि मर जई। जब यीसु उनखे साथ जात रहे हँय, तब एतनी भीड़ रहय, कि लोग उनखे उपरय गिरे परत रहे हँय।

43भीड़ माहीं एकठे मेहेरिअव रही हय, जउने काहीं बारा बरिस से खून बहँइ के बिमारी रही हय। उआ मेहेरिआ, खुब बैदन से आपन दबाई करबाइस रहा हय, इहाँ तक कि आपन सगली धन-सम्पत्ती खरचा कइ डारिस, पय कउनव बैदन से निकही नहीं भय, 44उआ मेहेरिआ भीड़ माहीं पीछे से आइके यीसु के ओन्हा के छोर काहीं छुइस, अउर छूतय ओखर खून बहब बन्द होइगा। 45तबहिनय यीसु कहिन, “हमहीं को छुइस ही?” जब सगले जन कहँइ लागें, हम नहीं छुएन, तब पतरस अउर उनखर चेला लोग यीसु से कहिन, “हे मालिक, अपना काहीं त सगले भीड़ के मनई दबाए डारत हें, अउर अपना के उपरय गिरे परत हें।” 46पय यीसु कहिन, “हमहीं कोऊ छुइस ही, काहेकि हम जान लिहेन हय, कि हमरे देंह से सामर्थ निकरी हय।” 47तब उआ मेहेरिआ इआ जानिके, कि हम लुक नहीं सकी, कँपतय-काँपत आई, अउर यीसु के गोड़ेन माहीं गिरिके, सगले मनइन के आँगे बताइस, कि हम कउने कारन से अपना काहीं छुएन, अउर छूतय नीक होइ गएन। 48यीसु उआ मेहेरिआ से कहिन, “बिटिआ, तूँ हमरे ऊपर बिसुआस किहा हय, एसे नीक होइ गया हय, नीके कुसल अपने घर चले जा।”

49यीसु इआ बात कहतय रहे हँय, कि यहूदी सभाघर के मुखिया के घर से कउनव आइके कहिस, “तोंहार बिटिया मरिगे ही, अब गुरू काहीं जाँइ के तकलीफ न द्या।” 50यीसु इआ सुनिके यहूदी सभाघर के मुखिया याईर से कहिन, “डेरा न, केबल बिसुआस करा, त तोंहार बिटिआ बच जई।” 51यीसु याईर के घर माहीं आइके पतरस, यूहन्ना, याकूब अउर बिटिआ के महतारी-बाप काहीं छोंड़िके, अउर कोहू काहीं अपने साथ भीतर नहीं आमँइ दिहिन। 52सगले घर के मनई उआ बिटिया के खातिर खुब रोबत-पीटत रहे हँय, तब यीसु उनसे कहिन, “रोबा न बिटिया मरी नहिं आय, उआ सोबत ही।” 53ऊँ पंचे इआ जानिके कि बिटिया मरिगे ही, यीसु के मजाक उड़ामँइ लागें। 54पय यीसु उआ बिटिया के हाँथ पकड़िके चंडे से कहिन, “हे बिटिया उठ!” 55तब ओखर प्रान लउटि आएँ, अउर उआ हरबिन उठ बइठ। तब यीसु ओखे महतारी-बाप काहीं हुकुम दिहिन, कि बिटिया काहीं कुछू खाँय-पिअँइ काहीं द्या। 56उआ बिटिया के महतारी-बाप अचरज मानिन, पय यीसु उनहीं चेताइन, कि इआ जउन भ हय, कोहू से न बताया।

9

बाराठे खास चेलन काहीं पठउब

(मत्ती 10:5-15; मरकुस 6:7-13)

1एक दिन यीसु बरहँव चेलन काहीं अपने लघे बोलाइके, उनहीं बुरी आत्मन काहीं निकारँइ के, अउर बिमारन काहीं नीक करँइ के सामर्थ अउर अधिकार दिहिन। 2अउर उनहीं परमातिमा के राज के प्रचार करँइ, अउर बिमारन काहीं नीक करँइ के खातिर पठइन। 3अउर यीसु उनसे कहिन, “गइल के खातिर कुछू न लिहा, न त लाठी, न त झोरिया, न त रोटी, न त पइसा, अउर न त दुइ-दुइठे कुरथा। 4अउर जेखे घर माहीं तूँ पंचे जया, त जब तक उहाँ से बिदा न होया, तब तक उहय घर माहीं रहे अया। 5जउने गाँव के मनई तोंहईं पंचन काहीं सोइकार न करँय, अउर परमातिमा के सँदेस न सुनँय, त उआ गाँव से चलत समय उनखे अँगुअय, अपने गोड़ेन के धूधुर झार दिहा, कि जउने परमातिमा के सँदेस माहीं बिसुआस न करँइ के सजा के भागीदार उँइन होइहँय, इआ गबाही होई।” 6तब चेला लोग उहाँ से निकरिके हरेक गाँमन माहीं परमातिमा के खुसी के खबर सुनाबत, अउर हरेक जघन माहीं बिमार मनइन काहीं नीक करत फिरत रहिगें।

हेरोदेस राजा के परेसानी

(मत्ती 14:1-12; मरकुस 6:14-29)

7एक दिन यहूदिया प्रदेस के चउथ हिस्सा के राजा हेरोदेस इआ सुनिके घबराइगें, कि यीसु के हाँथ से खुब सामर्थ के काम होत हें, काहेकि कइयक जने इआ कहत रहे हँय, कि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले मरिके जि आए हँय, 8अउर कुछ जने कहिन, कि एलिय्याह देखाई दिहिन हीं। पय अउर कुछ जने कहँइ लागें, जऊँ पहिले परमातिमा के सँदेस सुनामँइ बाले रहे हँय, उनहिन म से कोऊ जि आए हँय। 9पय हेरोदेस राजा कहिन, “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के त, हम मूँड़ कटबाय लिहेन तय, अब ईं को आहीं जेखे बारे माहीं हम अइसन बात सुनित हएन?” अउर उँइ यीसु काहीं देखँइ के इच्छा जाहिर किहिन।

पाँच हजार मनइन काहीं खाना खबाउब

(मत्ती 14:13-21; मरकुस 6:30-44; यूहन्ना 6:1-14)

10पुनि कुछ दिन बाद सगले खास चेला लोग लउटिके, जउन कुछू ऊँ पंचे किहिन रहा हय, यीसु काहीं बताइन; तब यीसु उनहीं अलग कइके बैतसैदा नाम के एकठे सहर माहीं लइगें। 11इआ बात काहीं भीड़ के खुब मनई जानिगें, अउर उनहीं पछिआय लिहिन, तब उनहीं देखिके यीसु बड़े आनन्द से उनसे मिलें, अउर उनहीं परमातिमा के राज के बात बतामँइ लागें, अउर जउन बिमार मनई नीक होंइ चाहत रहे हँय, उनहीं नीक कइ दिहिन।

12जब साँझ होंइ लाग, तब चेला लोग यीसु के लघे आइके कहँइ लागें, “इआ भीड़ के मनइन काहीं बिदा करी, जउने ऊँ पंचे चारिव कइती के गाँमन अउर मोहल्लन म जाइके, रहँय अउर खाँय के प्रबन्ध करँय, काहेकि हम पंचे इहाँ सुनसान जघा माहीं हएन।” 13यीसु अपने चेलन से कहिन, “तुहिन पंचे उनहीं खाँइका द्या।” तब चेला लोग यीसु से कहिन, “हमरे पंचन के लघे पाँचठे रोटी अउर दुइठे मछरिन काहीं छोंड़िके, अउर कुछू नहिं आय; पय अगर अपना कही, त हम पंचे जाइके ईं सगले जनेन के खातिर खाना खरीद लई, तब इआ होइ सकत हय।” उआ भीड़ माहीं पाँच हजार के करीबन मंसेरुआ रहे हँय। 14तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “उनहीं पचास-पचास कइके पाँतिन माहीं बइठाय द्या।” 15अउर ऊँ चेला लोग उहयमेर किहिन, अउर सगलेन काहीं बइठाय दिहिन। 16तब यीसु ऊँ पाँचठे रोटी अउर दोनहूँ मछरिन काहीं लइके स्वरग कइती निहारिके धन्यबाद दिहिन, अउर रोटिन काहीं टोरि-टोरिके चेलन काहीं देत गें, कि ऊँ सगले मनइन काहीं परसँय। अउर ऊँ चेला लोग सगले मनइन काहीं परस दिहिन। 17जब सगली भीड़ के मनई खाइके सन्तुस्ट होइगें, त सगलेन के खाए के बादव, चेला लोग रोटी अउर मछरी के बचे टुकड़न से बारा टोपरी भरिके लइ आएँ।

पतरस यीसु काहीं मसीह सोइकार किहिन

(मत्ती 16:13-20; मरकुस 8:27-30)

18जब यीसु एकान्त माहीं जाइके प्राथना करत रहे हँय, अउर उनखर चेला लोग साथय माहीं रहे हँय, तब यीसु उनसे पूँछिन, “लोग हमहीं का कहत हें?” 19चेला लोग कहिन, “कुछ मनई यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाला, त कुछ जने एलिय्याह नबी, त अउर कुछ जने त इआ कहत हें, कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन म से एक जने पुरान मनई जि आबा हय।” 20यीसु अपने चेलन से पूँछिन, “पय तूँ पंचे हमहीं का कहते हया?” पतरस यीसु से कहिन, “अपना परमातिमा के पठए मसीह आहेन।” 21तब यीसु अपने चेलन काहीं चेताइके कहिन, कि तूँ पंचे इआ बात कोहू से न बताया।

अपने मउत के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी

(मत्ती 16:21-23; मरकुस 8:31-33)

22तब यीसु अपने चेलन काहीं बतामँइ लागें, कि “मनई के लड़िका के खातिर इआ जरूरी हय, कि उआ खुब दुख सही, अउर यहूदी समाज के धारमिक अँगुआ अउर प्रधान याजक लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, ओही अपने बनाए नेम के बिरोधी मानिके मारि डरिहँय, अउर उआ तिसरे दिन जिन्दा होइ जई।”

यीसु के पीछे चलँइ के मतलब

(मत्ती 16:24-28; मरकुस 8:34—9:1)

23यीसु भीड़ के मनइन अउर अपने चेलन से कहिन, “जे कोऊ हमरे पीछे आमँइ चाहय, उआ अपने मन के मुताबिक जिअब छोंड़िके, हरेक दिन अपने सब दुख तकलीफन काहीं सहिके जऊँ क्रूस के बराबर हें, हमरे पीछे चलय। 24काहेकि जे कोऊ आपन प्रान बचामँइ चाही, उआ ओही गमाय देई, पय जे कोऊ हमरे खातिर आपन प्रान तक देंइ काहीं तइआर रही, उहय ओही बचाए पाई। 25अगर कउनव मनई सगले संसार के मालिक होइ जाय, अउर आपन प्रान गमाय देय, त ओही का फायदा होई। 26जउन मनई हमसे अउर हमरे बातन काहीं मानँइ माहीं लजई, त इहइमेर जब मनई के लड़िका, अपने अउर अपने पिता के, अउर पबित्र स्वरगदूतन के महिमा समेत अई, त उहव ओही आपन मानँय से लजई।” 27“हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जऊँ इहाँ ठाढ़ हें, उनमा से कुछ जने अइसन हें, कि जब तक परमातिमा के राज काहीं आबत न देख लेइहँय, तब तक ऊँ पंचे बेलकुल न मरिहँय।”

यीसु के रूप बदलब

(मत्ती 17:1-8; मरकुस 9:2-8)

28ईं बातन के करीबन आठ दिन के बाद यीसु, पतरस, यूहन्ना अउर याकूब काहीं साथ माहीं लइके प्राथना करँइ के खातिर एकठे पहार माहीं गें। 29जब ऊँ प्राथना करत रहे हँय, तबहिनय यीसु के रूप बदलिगा, अउर उनखर ओन्हा उजर होइके चमकँइ लाग, 30अउर तिनहूँ चेलन काहीं मूसा नबी के साथ एलिय्याह नबी देखाने, ऊँ दोनव जने यीसु के साथ बातँय करत रहे हँय। 31ऊँ पंचे, परमातिमा के महिमा सहित देखाई दिहिन, अउर यीसु के मरँइ के बारे माहीं चरचा करत रहे हँय, जउन यरूसलेम सहर माहीं होंइ बाली रही हय। 32पतरस अउर उनखर साथी मारे नींद के अउँघात रहे हँय, अउर जब निकहा से जागे, तब यीसु के महिमा अउर उन दोनव जनेन काहीं जउन यीसु के लघे ठाढ़ रहे हँय, देखिन। 33जब उँइ दोनव जने यीसु के लघे से जाँइ लागें, तबहिनय पतरस यीसु से कहिन, “हे प्रभू, हमार पंचन के इहाँ रहब निकहा हय; एसे हम पंचे इहाँ तीनठे मड़इआ बनाई; एकठे अपना के खातिर, एकठे मूसा नबी के खातिर, अउर एकठे एलिय्याह नबी के खातिर।” काहेकि पतरस डेरन के मारे इआ नहीं जाने पाबत रहे आँय, कि हम उनसे का कहि रहेन हँय। 34जब पतरस इआ कहतय रहे हँय, तबहिनय एकठे बदरी आइके उनहीं लुकाय लिहिस, अउर जब उआ बदरी उनहीं लुकामँइ लाग, तब ऊँ पंचे खुब डेराइगें। 35अउर उआ बदरी म से इआ बोल सुनान, “ईं हमार लड़िका आहीं, अउर हमहिन इनहीं चुनेन हय, तूँ पंचे इनखे बातन काहीं मान्या।” 36इआ बोल सुने के बाद यीसु अकेले रहिगें; अउर ऊँ तिनहूँ चेला चुप्पय रहिगें, अउर जउन कुछू ऊँ पंचे देखिन रहा हय, ओखर एक्कवठे बात, उन दिनन माहीं कोहू से नहीं बताइन।

बुरी आत्मा से परेसान लड़िका काहीं नीक करब

(मत्ती 17:14-18; मरकुस 9:14-27)

37जब दुसरे दिन यीसु अउर उनखर तिनहूँ चेला पहार से उतरें, तबहिनय एकठे बड़ी भीड़ उनखे लघे आइगे। 38अउर उआ भीड़ म से एकठे मनई चिल्लाइके कहिस, “हे गुरू, हम अपना से बिनती करित हएन, कि हमरे लड़िका के ऊपर किरपा करी; काहेकि उआ हमार एकलउता लड़िका आय। 39अउर जइसय उआ बुरी आत्मा लड़िका काहीं पकड़त ही, उआ एक दरकिन चिल्लाय उठत हय; अउर उआ ओही अइसन मुरेरत ही, कि ओखे मुँहे म फेन भर आबत हय; अउर लड़िका काहीं पटक-पटकिके बड़े मुसकिल से छोंड़त ही। 40हम अपना के चेलन से बिनती किहेन, कि उआ बुरी आत्मा काहीं लड़िका से निकार द्या, पय ऊँ पंचे नहीं निकारे पाइन।” 41तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हे परमातिमा के ऊपर बिसुआस न करँइ बाले हठी मनइव, हम कब तक तोंहरे साथ रहब, अउर कब तक तोंहार सहत रहब? अपने लड़िका काहीं हमरे लघे लइ आबा।” 42जब उआ लड़िका यीसु के लघे अउतय रहा हय, तबहिनय उआ बुरी आत्मा ओही पटकिके मुरेर दिहिस, तब यीसु उआ बुरी आत्मा काहीं डाँटिन, अउर उआ बुरी आत्मा काहीं लड़िका से निकार दिहिन, अउर उआ लड़िका काहीं नीक कइके ओखे बाप काहीं सउँप दिहिन। 43तब उहाँ ठाढ़ सगले मनई परमातिमा के महान सामर्थ काहीं देखिके, चउआन रहिगें। पय जब सगले जन ऊँ सगले कामन से जऊँ यीसु करत रहे हँय, चउआन रहे हँय। तब यीसु अपने चेलन से कहिन।

अपने मउत के बारे माहीं यीसु के दुसराय भबिस्सबानी

(मत्ती 17:22,23; मरकुस 9:30-32)

44“तूँ पंचे ईं बातन काहीं बड़े ध्यान से सुना, काहेकि मनई के लड़िका बिरोध करँइ बाले मनइन के हाँथे माहीं पकड़ाबा जाँय बाला हय।” 45पय ईं बातन काहीं यीसु के चेला लोग नहीं समझे पाइन, कि यीसु उनसे का कहिन हीं; इआ बात उनसे छिपी रहिगे, कि ऊँ ओही न जाने पामँय, अउर इआ बात काहीं ऊँ पंचे, यीसु से पूछँइ माहीं डेरात रहे हँय।

सबसे बड़ा को हय?

(मत्ती 18:1-5; मरकुस 9:33-37)

46पुनि गइल माहीं चेला लोग आपस माहीं इआ बहँस करँइ लागें, कि हमरे पंचन म से सबसे बड़ा को हय? 47पय यीसु उनखे मन के बिचार काहीं जान लिहिन, अउर एकठे छोट क लड़िका काहीं लइके अपने लघे ठाढ़ किहिन। 48अउर अपने चेलन से कहिन, “जे कोऊ हमरे नाम से इआमेर के लड़िकन म से कउनव एकठे काहीं सोइकार करत हय, उआ हमहीं सोइकार करत हय; अउर जे कोऊ हमहीं सोइकार करत हय, उआ हमहिन भर क नहीं, बलकिन हमहीं पठमँइ बाले परमातिमा काहीं सोइकार करत हय।” काहेकि जउन तोंहरे बीच माहीं सगलेन से छोट बनत हय, उहय सगलेन से बड़ा कहाई।

जउन बिरोधी नहिं आय उआ अपने पच्छ म हय

(मरकुस 9:38-40)

49तब यूहन्ना यीसु से कहिन, “हे गुरू, हम पंचे एकठे मनई काहीं अपना के नाम से बुरी आत्मन काहीं मनइन म से निकारत देखेन, त हम ओही बरजेन, कि तूँ अइसा न करा, काहेकि उआ मनई हमरे पंचन म से कोऊ न होय, जउन अपना के हुकुम मानत हें।” 50तब यीसु यूहन्ना से कहिन, “उआ मनई काहीं न बरजा; काहेकि जऊँ तोंहरे बिरोध म नहिं आय, उआ तोंहरिन कइती हय।”

सामरी लोगन के व्दारा यीसु के बिरोध

51जब यीसु के स्वरग जाँइ के समय नजदीक आइगा तय, तब ऊँ यरूसलेम सहर माहीं जाँइ के बिचार निस्चित किहिन। 52यीसु अपने चलँइ से पहिले दुइठे दूतन काहीं पठइन, कि सामरिया प्रदेस के एकठे गाँव माहीं जाइके उनखे खातिर जघा तइआर करँय। 53पय सामरिया प्रदेस के रहँइ बाले, यीसु काहीं अपने गाँव माहीं नहीं रुकँइ दिहिन, काहेकि यीसु यरूसलेम जात रहे हँय। 54इआ देखिके, कि ऊँ पंचे, उहाँ नहीं रुकँइ देंय, उनखर चेला याकूब, अउर यूहन्ना कहिन, “हे प्रभू, अगर अपना के इच्छा होय, त हम पंचे परमातिमा से प्राथना करी, कि स्वरग से आगी गिरिके ईं सगले गाँव बालेन काहीं भसम कइदेय।” 55पय यीसु पीछे फिरिके अपने चेलन काहीं डाँटिन, (अउर कहिन, “तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि तूँ कइसन आत्मा के हया। काहेकि मनई के लड़िका मनइन के प्रान लेंइ के खातिर नहीं आबा आय, बलकिन बचामँइ के खातिर आबा हय।”) 56अउर यीसु सगले चेलन के साथ दुसरे गाँव माहीं चलेगें।

यीसु के चेला बनँइ के कीमत

(मत्ती 8:19-22)

57जब यीसु अउर उनखर चेला लोग गइलय-गइल जात रहे हँय, तब कउनव मनई यीसु से कहिस, “जहाँ-जहाँ अपना जाब, त हमहूँ अपना के पीछे-पीछे चलब।” 58तब यीसु ओसे कहिन, “लोखरी के रहँइ क गुफा होत ही, अउर पंछिन के रहँइ के पाल होत हें, पय मनई के लड़िका के कउनव घर नहीं आय, बलकिन मूड़व तक धरँइ के जघा नहिं आय।” 59तबहिनय यीसु दुसरे मनई से कहिन, “हमार चेला बनिके हमरे साथ चला” उआ मनई कहिस, “हे प्रभू, पहिले हमहीं जाँइ देई, कि हम अपने बाप काहीं जउन खतम होइगें हँय, गाड़े अई।” 60यीसु ओसे कहिन, “जउन मनई आत्मिक रूप से मरे हँय, उनहीं मुरदन काहीं गाड़ँइ द्या, पय तूँ जाइके परमातिमा के राज के सँदेस के प्रचार करा।” 61इहइमेर एक जन अउर कहिस, “हे प्रभू, हम अपना के चेला बनिके साथय चलब; पय पहिले हमहीं जाँइ देई कि अपने घर बालेन से बिदा लए अई।” 62यीसु ओहू से कहिन, “जे कोऊ परमातिमा के बचन के मुताबिक चलब सुरू कइके, संसार के बातन कइती ध्यान लगाबत हय, उआ ओखी कि नाईं हय, जउन हर माहीं हाँथ धइके पीछे कइती निहारत हय, उआ परमातिमा के राज माहीं जाँइ के काबिल नहिं आय।”

10

सत्तर चेलन काहीं पठबा जाब

1ईं बातन के बाद प्रभू सत्तर मनइन काहीं अउर चुनिके नियुक्त किहिन, अउर यीसु जउने-जउने सहरन अउर जघन माहीं जाँइ बाले रहे हँय, उहाँ-उहाँ उनहीं दुइ-दुइ कइके अपने जाँइ से पहिले पठइन। 2अउर यीसु अपने चेलन से कहिन, “पके खेत त खुब हें, पय मजूर थोरिन हें। एसे खेत के मालिक परमातिमा से बिनती करा, कि ऊँ आपन खेत काटँय के खातिर मजूर पठय देंय।” 3जा; देखा, हम तोंहईं पंचन काहीं गड़रन कि नाईं डगरन के बीच माहीं पठइत हएन। 4एसे गइल के खातिर कुछू न लिहा, न त पइसा, न त झोरिया, न त पनहिन लिहा; अउर गइल माहीं कोहू से नबस्कार न किहा। 5जब कोहू के घर माहीं जया, त भीतर जाँइ से पहिले कह्या, “इआ घर माहीं रहँइ बालेन के कल्यान होय।” 6अगर उआ घर माहीं कोऊ कल्यान के काबिल होई, त तोंहार दीन कल्यान ओही मिल जई, अगर कल्यान के काबिल कोऊ न होई, त तोंहरे लघे लउटि अई। 7जउने घर माहीं जया, उहय घर माहीं रह्या, अउर जउन कुछू उआ घर के मनई खबामँय, उहय खया-पिया, काहेकि मजूर काहीं आपन मजूरी जरूर मिलँय चाही; खाँय के खातिर घर-घर न जया। 8जउने सहरन अउर गाँमन माहीं जया, अउर उहाँ के मनई अपने घर माहीं स्वागत-सत्कार करँइ, त जउन कुछू तोहईं खाँइ काहीं देंय उहय खया। 9अउर उहाँ के बिमारन काहीं नीक कइके उनसे कह्या, “परमातिमा के राज तोंहरे लघेन आइगा हय।” 10पय जउने सहर इआ कि गाँव माहीं जया, अउर अगर उहाँ के मनई तोंहईं पंचन काहीं सोइकार न करँय, त उनखे बजारन माहीं जाइके कह्या, 11“हम तोंहरे सहर के धूधुर तक जउन हमरे गोड़ेन माहीं लगी ही, तोंहरेन आँगे झारे देइत हएन; तऊ इआ जानिल्या, कि परमातिमा के राज तोंहरे लघेन आइगा हय।” 12हम तोंहसे कहित हएन, कि जब परमातिमा न्याय करिहँय, उआ दिन, उआ सहर के दुरदसा, सदोम सहर से जादा होई।

बिसुआस न करँइ बाले सहरन के मनइन काहीं धिक्कार

(मत्ती 11:20-24)

13“खुराजीन सहर, बैतसैदा सहर; तोंहईं धिक्कार हय; काहेकि जउन सामर्थ के काम तोंहरे बीच माहीं कीन गें तय, अगर ऊँ सूर अउर सैदा प्रदेसन माहीं कीन जातें, त उहाँ के मनई टाट ओढ़िके अउर राख माहीं बइठिके, पहिलेन अपने पापन काहीं मानिके, पाप करब छोंड़ि देतें। 14पय जब परमातिमा न्याय करिहँय, उआ दिन तोंहार दुरदसा, सूर अउर सैदा प्रदेसन से जादा होई। 15अउर हे कफरनहूम सहर के मनइव, तूँ पंचे जउन सोचते हया, कि हमहीं परमातिमा अकास तक ऊँच करिहँय? बेलकुल नहीं, परमातिमा तोंहईं पताल तक नीच करिहँय।”

16अउर यीसु पुनि चेलन से कहिन, “जउन मनई तोंहरे बात काहीं सुनिहँय, ऊँ हमरे बात के सुनँय के बराबर होइहँय; अउर जउन मनई तोंहईं तुच्छ मनि हँय; ऊँ पंचे हमहूँ काहीं तुच्छ मनि हँय; अउर जे हमहीं तुच्छ मानत हय, उआ हमहीं पठमँइ बाले परमातिमा काहीं तुच्छ मानत हय।”

सत्तर चेलन के लउटब

17यीसु जउने सत्तर चेलन काहीं पठइन तय, ऊँ पंचे आनन्द मनाबत लउटि आएँ, अउर कहँइ लागें, “हे प्रभू, अपना के नाम से बुरी आत्मा हमार कहा मनती हईं।” 18तब यीसु उनसे कहिन, “हम सइतान काहीं बिजुली कि नाईं अकास से गिरत देखेन हय। 19एहिन से देखा, हम तोंहईं साँप अउर बीछिन काहीं गोड़ेन से रउदँइ के अधिकार दिहेन हय, अउर तोंहरे बइरी सइतान के सगली सामर्थ काहीं हरामँइ के अधिकार दिहेन हय; अउर कउनव चीज से तोंहार कुछू हानि न होई। 20तऊ तूँ पंचे एसे आनन्दित न होया, कि आत्मा तोंहरे बस माहीं हईं, बलकिन एसे आनन्दित होया, कि स्वरग माहीं तोंहार नाम लिखे हँय।”

यीसु के आनन्दित होब

(मत्ती 11:25-27—13:16,17)

21उहय समय यीसु पबित्र आत्मा से भरिके खुब आनन्दित होइगें, अउर कहिन, “हे पिता परमातिमा स्वरग अउर धरती के प्रभू, हम अपना काहीं धन्यबाद देइत हएन, कि अपना ईं बातन काहीं ग्यानिन अउर अपने काहीं समझदार मानँइ बालेन काहीं नहीं बताएन, बलकिन छोट लड़िकन कि नाईं अपना के बचन के ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं बतायन हय। हाँ, हे पिता परमातिमा काहेकि अपना काहीं इहय नीक लाग हय। 22हमार पिता परमातिमा सब कुछ हमहीं सँउप दिहिन हीं; अउर कोऊ नहीं जानँय कि लड़िका को आहीं, केबल पिता जानत हें, अउर पिता को आहीं इहव कोऊ नहीं जानँय, केबल लड़िका जानत हय, अउर लड़िका जेही बतामँइ चाही उहय जानी।”

23यीसु एकान्त माहीं पहुँचिके चेलन कइती फिरिके कहिन, “धन्य हें, ऊँ पंचे, जउने बातन काहीं तूँ पंचे देखते हया, ऊँ पंचे देखत हें। 24काहेकि हम तोंहसे कहित हएन, कि बहुत से परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले अउर बहुत से राजा लोग, इआ चाहत रहे हँय, कि जउन बातँय तूँ पंचे देखते हया देखी, पय नहीं देखे पाइन, अउर जउन बातँय तूँ पंचे सुनते हया, सुनी, पय नहीं सुने पाइन।”

सामरी जाति के एकठे दयालू मनई के उदाहरन

25एक दिन मूसा के बिधान सिखामँइ बाला एक जने यीसु के लघे आबा, अउर इआ कहिके उनखर परिच्छा करँइ लाग, “हे गुरू, अनन्त जीबन के बारिसदार होंइ के खातिर हम का करी?” 26यीसु ओसे कहिन, “मूसा नबी के बिधान माहीं का लिखा हय? तूँ ध्यान से नहीं पढ्या?” 27उआ यीसु काहीं जबाब दिहिस, “पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, तूँ अपने प्रभू परमातिमा से अपने पूरे मन से, अउर अपने पूरे प्रान से, अउर अपनी पूरी सक्ती से, अउर अपनी पूरी बुद्धी से प्रेम रखा; अउर अपने परोसी से अपने के नाईं प्रेम करा।” 28तब यीसु ओसे कहिन, “तूँ बेलकुल सही जबाब दिहा हय, इहइमेर तुहूँ करा तबहिनय अनन्त जीबन मिली।” 29पय उआ यहूदी नेम सिखामँइ बाला अपने काहीं धरमी देखामँइ के खातिर, यीसु से पूँछिस, “त अपना बताई हमार परोसी को आय?” 30तब यीसु ओही जबाब दिहिन, “एकठे मनई यरूसलेम सहर से यरीहो सहर काहीं जात रहा हय, तबहिनय गइल माहीं कुछ डाँकू आइके, ओखर सगला रुपिआ-पइसा लूटि लिहिन, इहाँ तक कि ओखर ओन्हा तक उतार लिहिन, अउर ओही मार पीटके अधमरा कइके उहँइ छोंड़िके चलेगें। 31अउर संजोग से उहय गइल से एकठे याजक जात रहा हय, पय उआ, ओही देखिके कइतिआइके चला ग। 32अउर इहइमेर से उहय गइल से एकठे लेबी मनई निकरा, अउर उहव ओही देखिके कइतिआइके चला ग। 33पय उहय गली से एकठे सामरी जाति के मनई निकरा, अउर उआ मनई काहीं देखिके ओही दया आइगे। 34अउर उआ, ओखे लघे जाइके तेल अउर अंगूर के रस लगाइके पट्टी बाँधिस, अउर अपने गदहा माहीं चढ़ाइके सराय माहीं लइ जाइके सेबा किहिस, 35दुसरे दिन जब उआ सामरी मनई सराय से जाँइ लाग, तब उआ सराय के मालिक काहीं दुइठे चाँदी के सिक्का निकारिके दिहिस, अउर कहिस, ‘इआ मनई के निकहा से सेबा किहा, अउर जउन तोंहार खरचा लागी, उआ हम लउटिके तोंहईं दइ देब।’ 36तब यीसु मूसा के बिधान सिखामँइ बाले उआ मनई से पूँछिन, अब इआ बताबा कि तोंहरे समझ माहीं, उआ मनई के जउन डँकुअन से लुटरिगा रहा हय, ईं तीनव म से कउन परोसी कहाबा?” 37उआ यीसु से कहिस, “उहय जउन ओखे ऊपर दया किहिस।” यीसु ओसे कहिन, “जा, तुहूँ अइसय करा।”

मारथा अउर मरियम के घर माहीं यीसु

38जब यीसु अपने चेलन समेत जात रहे हँय, तब एकठे गाँव माहीं पहुँचिगें, उहाँ मारथा नाम के एकठे मेहेरिआ उनहीं अपने घर माहीं लइ जाइके रोंकिस। 39मारथा के मरियम नाम के एकठे बहिनी रही हय, उआ प्रभू के गोड़े के लघे बइठिके उनखर बचन सुनत रही हय। 40पय मारथा सेबा करत-करत थकिगे, अउर यीसु के लघे आइके कहँइ लाग। “हे प्रभू, का अपना काहीं हमरे ऊपर दया नहीं आबय, हमार बहिनी हमहीं काम करँइ के खातिर अकेले छोंड़ दिहिस ही? एसे ओही अपना कही, कि काम करँइ माही हमार मदत करय।” 41प्रभू मारथा काहीं जबाब दिहिन, “मारथा, हे मारथा; तूँ खुब बातन के खातिर चिन्ता करती अउर घबराती हया। 42पय एकठे बात खुब जरूरी हय, अउर उआ उत्तम भाग काहीं मरियम चुनि लिहिन हीं, जउन उनसे कोऊ छड़ाय नहीं सकय।”

11

यीसु चेलन काहीं प्राथना करँइ सिखाइन

(मत्ती 6:9-13)

1यीसु एकठे जघा माहीं प्राथना करत रहे हँय। अउर जब ऊँ प्राथना कइ चुकें, तबहिनय उनखे चेलन म से एक जने कहिन, “हे प्रभू, जइसन यूहन्ना अपने चेलन काहीं प्राथना करँइ सिखाइन तय, उहयमेर अपनव हमहीं पंचन काहीं सिखाई।”

2तब यीसु उनसे कहिन, “जब तूँ पंचे प्राथना किहा, तब इआमेर से किहा,

‘हे पिता परमातिमा, अपना के नाम पबित्र माना जाय, अपना के राज आबय।

3हमरे पंचन के दिन भर के खाँय के खातिर खाना हमहीं रोज देबा करी।

4हमरे पापन काहीं माफ करी, काहेकि हमहूँ अपने सगले गुनहगारन के गलतिन काहीं माफ करित हएन, अउर हमहीं परिच्छा माहीं न डारी’।”

प्राथना करँइ के बारे माहीं यीसु के सिच्छा

(मत्ती 7:7-11)

5यीसु उनसे कहिन, “तोंहरे बीच म से कोहू के एकठे साथी होय, त तूँ आधी रातके ओखे लघे जाइके कहा, ‘हे साथी; हमहीं तीनठे रोटी दइ द्या।’ 6काहेकि एकठे हमार साथी हमरे लघे यात्रा से आए हँय, अउर उनहीं खबामँइ के खातिर हमरे लघे कुछू नहिं आय। 7अउर उआ साथी भीतर से जबाब देय, ‘हमहीं दुख न द्या, अब त हम दुआर बन्द कइके अपने लड़िकन-बच्चन के साथय बिस्तर माहीं परे हएन, एसे हम उठिके तोंहईं कुछू नहीं दइ सकी’?” 8यीसु कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि अगर ओखर साथी होंइ के कारन ओही उठिके न देय, तऊ ओखे बिना लजाने मागँइ के कारन, उठिके ओही जेतनी जरूरत होई त ओही देई। 9अउर हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तूँ पंचे मागत रइहा, त तोंहईं दीन जई; ढूँढ़त रइहा, त जरूर पइहा; खट-खटाबत रइहा, त तोंहरे खातिर दुअरा खोल दीन जई।

10काहेकि जे कोऊ मागत रहत हय, त ओही जरूर मिलत हय; अउर जे कोऊ ढूँढ़त रहत हय, उआ जरूर पाबत हय; अउर जे कोऊ खट-खटाबत रहत हय, त ओखे खातिर दुअरा खोल दीन जई। 11तोंहरे म से अइसा केखर बाप होई, कि जब ओखर लड़िका रोटी माँगय, त ओही पथरा देय; इआ कि मछरी माँगय, त मछरी के बदले माहीं साँप देय? 12इआ कि अन्डा माँगय त बीछी देय? 13एसे जब तूँ पंचे बुरे होइके, अपने लड़िकन काहीं नीक चीजँय देंइ जनते हया, त स्वरग माहीं रहँइ बाले तोंहार पिता परमातिमा, अपने मागँइ बालेन काहीं पबित्र आत्मा जरूर देइहँय।”

यीसु अउर बालजबूल

(मत्ती 12:22-30; मरकुस 3:20-27)

14यीसु एक दिन गूँगी बुरी आत्मा काहीं एकठे मनई से निकारिन। जब बुरी आत्मा ओसे निकरिगे, तब उआ गूँगा बोलँइ लाग; अउर उहाँ ठाढ़ सगले मनई खुब अचरज मानिन। 15पय उनमा से कुछ मनई कहँइ लागें, “यीसु त बालजबूल नाम के बुरी आत्मन के मुखिया अरथात सइतान के मदत से बुरी आत्मन काहीं मनइन से निकारत हें।” 16अउर कुछ जने यीसु के परिच्छा लेंइ के खातिर कहिन, कि “तूँ अइसा कउनव अदभुत चिन्हारी देखाइके साबित करा, कि परमातिमा तोंहईं पठइन हीं।” 17पय यीसु उनखे मन के बात जानिके कहिन, “जउने-जउने राज माहीं फूट होत ही, त उआ राज नास होइ जात हय; अउर अगर कउनव घर माहीं फूट परि जात ही, त उआ घर बरबाध होइ जात हय। 18अउर अगर सइतान खुद अपनय बिरोधी बनिके, अपने बीच म फूट डारी, त ओखर राज कइसा बना रही, ओखर त नासय होइ जई। हम तोंहसे एसे पूँछित हएन, कि तूँ पंचे कहते हया, कि हम सइतान के मदत से बुरी आत्मन काहीं निकारित हएन। 19अगर हम सइतान के मदत से बुरी आत्मन काहीं निकारित हएन, त तोंहार सन्तान केखे मदत से बुरी आत्मन काहीं निकारत हें? एसे उँइन तोंहार फँइसला करिहँय। 20पय अगर हम परमातिमा के सामर्थ से, बुरी आत्मन काहीं निकारित हएन, त तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि परमातिमा के राज तोंहरे लघे पहुँचिगा हय। 21जब कउनव बलमान मनई, हरेक मेर के हँथिआर लए पूरी तरह से तइआर होइके अपने घर के देख-रेख करत हय, त ओखर धन-सम्पत बची रहत ही। 22पय जब ओसे अउर बलमान मनई चढ़ाई कइके, उआ बलमान मनई काहीं हराय देत हय, त ओखर सगले हँथिआर छड़ाय लेत हय, जउने माहीं ओखर भरोसा रहत हय, अउर ओखर सगली धन-सम्पत लूटिके दुसरे काहीं बाँट देत हय। 23जे हमार बात नहीं मानय, उआ हमरे बिरोध माहीं काम करत हय, उआ मनइन काहीं हमरे लघे नहीं ले आबय, बलकिन उनसे पाप कर बाइके हमसे दूर करत हय।”

आधे सुधार से परेसानी

(मत्ती 12:43-45)

24यीसु उनसे पुनि कहिन, “जब बुरी आत्मा मनई से बहिरे निकर जात ही, तब अराम करँइ के खातिर, झुरान जघा ढूँढ़त फिरत ही, अउर उआ बुरी आत्मा जब झुरान जघा नहीं पाबय, त कहत ही, कि ‘हम अपने उहय घर माहीं लउटि जाब, जहाँ से निकरिके आएन तय।’ 25अउर बुरी आत्मा लउटिके उआ घर काहीं, झारा बटोरा अउर सजा-सजाबा पाबत ही। 26तब उआ जाइके, अपने से अउर बुरी सातठे आत्मन काहीं, अपने साथ लइ आबत ही, अउर उआ मनई के भीतर सगली सकाइके रहँय लगती हँय, अउर उआ मनई के हालत पहिले से अउर जादा खराब होइ जात ही।”

27यीसु जब ईं बातन काहीं कहतय रहे हँय, कि भीड़ म से एकठे मेहेरिआ खुब चन्डे कहिस, “धन्य हय उआ महतारी जेखे पेटे माहीं तूँ रहे हया, अउर उनखर दूध पिआ हय।” 28तब यीसु कहिन, “ऊँ त धन्य हइअय हईं, पय धन्य ऊँ पंचे हें, जउन परमातिमा के बचन सुनत हें, अउर सुनिके मानत हें।”

स्वरग के चिन्हारी देखामँइ के माँग

(मत्ती 12:38-42)

29अउर जब खुब भीड़ एकट्ठा होंइ लाग, तब यीसु कहँइ लागें, “इआ समय के मनई बुरे हँय; ऊँ कहत हें, कि तूँ परमातिमा के पठए आह्या, एखे खातिर कउनव चिन्हारी देखाबा; पय योना नबी के जीबन माहीं जउन अदभुत काम परमातिमा किहिन तय, ओखे अलाबा अउर कउनव चिन्हारी उनहीं न देखाई जई। 30अउर जइसन योना नबी नीनवे सहर के मनइन काहीं मुक्ती पामँइ के खातिर अदभुत चिन्हारी ठहरें हँय, उहयमेर मनई के लड़िका इआ समय के लोगन के खातिर अदभुत चिन्हारी ठहरी। 31इजराइल देस के दक्खिन दिसा के सीबा देस के रानी, परमातिमा के न्याय करँइ के दिन, इआ समय के मनइन के साथ ठाढ़ होइके, उनहीं दोसी ठहरइहँय, काहेकि ऊँ खुब दूरी से इजराइल के राजा सुलैमान के ग्यान के बातँय सुनँय के खातिर आई रही हँय, अउर देखा इहाँ, ऊँ हें, जउन सुलैमान से घलाय बड़े हँय। 32नीनवे सहर के मनई परमातिमा के न्याय करँइ के दिन, इआ समय के मनइन काहीं दोसी ठहरइहँय, काहेकि नीनवे सहर के मनई योना के प्रचार सुनिके, पाप करब छोंड़ दिहिन तय, अउर देखा इहाँ, ऊँ हें, जउन योना से घलाय बड़े हँय।

देंह के दिया

(मत्ती 5:15; 6:22,23)

33कउनव मनई दिया जलाइके भुँइहरा माहीं, इआ कि बरतन के नीचे नहीं धरय, बलकिन ऊँचे जघा माहीं धरत हय, कि भीतर आमँइ बालेन काहीं उँजिआर मिलय। 34एहिनतर तोंहरे देंह के दिया आँखी आय, एसे अगर तोंहार आँखी निरमल रही, त तोंहार सगली देंह घलाय उँजिआर पाई। अगर तोंहार आँखी बुरी हय, त तोंहार सगली देंह अँधिआर कि नाईं होइ जई। 35एसे सतरक रह्या, कि जउन तोंहार उँजिआर कि नाईं निकहा जीबन हय, त कहँव पाप म फँसिके अँधिआर कि नाईं खराब न होइ जाय। 36एसे अगर तोंहार सगली देंह उँजिआर कि नाईं निकही होई, अउर ओखे कउनव हिस्सा माहीं पाप न होई, त सगली देंह उँजिआर कि नाईं होइ जई, जइसन उआ समय होइ जात हय, जब दिया के उँजिआर तोंहईं मिलत हय।”

मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन अउर फरीसी लोगन के बुराई

(मत्ती 23:1-36; मरकुस 12:38-40)

37जब यीसु बात करतय रहे हँय, तबहिनय कउनव फरीसी यीसु से बिनती किहिस, कि हमरे घर खाना खाँइ चली, तब यीसु उनखे घर माहीं जाइके खाना खाँइ बइठें। 38तब उआ फरीसी काहीं इआ देखिके बड़ा अचरज भ, कि यीसु खाना खाँइ से पहिले हाँथ नहीं धोइन। 39प्रभू उनखे मन के बात काहीं जानिके कहिन, “हे फरीसी लोगव, तूँ पंचे खोरबन अउर टठिअन काहीं उपरय-ऊपर मजते हया, पय तोंहरे भीतर छल-कपट अउर बुराई भरी हय। 40हे निरबुध्दिव, परमातिमा जउन देंह के बहिरे के हिस्सा काहीं बनाइन हीं, का उँइन देंह के भीतर के हिस्सा काहीं नहीं बनाइन? 41एसे जऊँ कुछू भीतर बाली चीज हईं उनहीं दान कइ द्या, त देखा, सब कुछू तोंहरे खातिर सुद्ध होइ जई।”

42यीसु पुनि इहव कहिन, “पय हे फरीसी लोगव तोंहईं परमातिमा से खुब सजा मिली! तूँ पंचे पोदीना अउर सुदाब के, अउर हरेकमेर के सब्जी-भाजिन के, दसमा भाग त देते हया। पय न्याय अउर परमातिमा के प्रेम काहीं नहीं मनते आह्या; तोंहईं चाहँय क रहा हय, कि सगलेन के दसमा भागव देत रहत्या। अउर न्याय अउर परमातिमा के हुकुमन काहीं मानब न छोंड़त्या। 43हे फरीसी लोगव, तोंहईं परमातिमा से खुब सजा मिली! तूँ पंचे सभाघरन माहीं खास-खास आसन माहीं बइठते हया, अउर मान-सम्मान पामँइ के खातिर चहते हया, कि मनई बजारन माहीं हमहीं नबस्कार करँय। 44तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। काहेकि तूँ पंचे छिपी ऊँ कब्रन कि नाईं हया, जेखे ऊपर मनई रेंगत हें, पय जाने नहीं पामँय।”

45तब एकठे यहूदी नेम सिखामँइ बाला यीसु काहीं जबाब दिहिस, “हे गुरू, ईं बातँय कहिके, अपना हमार पंचन के अपमान करित हएन।” 46तब यीसु कहिन, “हे मूसा के बिधान सिखामँइ बाल्या, तोंहईं परमातिमा से खुब सजा मिली! तूँ पंचे नेमन के अइसन बोझ, जिनखर पालन करब कठिन हय, दुसरे मनइन के ऊपर जबरई लदते हया, पय तूँ, ऊँ नेमन काहीं पालन करँइ के खातिर उनखर एकव मदत नहीं करते आह्या। 47तोंहईं परमातिमा से खुब सजा मिली! तूँ पंचे परमातिमा के ऊँ सँदेस बतामँइ बालेन के कब्रँय बनउते हया, जिनहीं तोंहरय बाप-दादा मार डारिन तय। 48अउर तूँ पंचे खुदय गबाह हया, अउर अपने बाप-दादन के कामन माहीं साझीदार हया; काहेकि ऊँ पंचे उनहीं मारि डारिन तय, अउर तूँ पंचे उनखर कब्रँय बनउते हया। 49एसे परमातिमा अपने बुद्धी से कहिन हीं, कि हम अपने सँदेस बतामँइ बालेन अउर यीसु मसीह के खास चेलन काहीं उनखे लघे पठउब, अउर ऊँ पंचे उनमा से कुछ जनेन काहीं मारि डरिहँय, अउर कुछ जनेन काहीं सतइहँय। 50कि जउने जेतने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के खून, संसार के सुरुआत से बहाबा ग हय, ऊँ सगलेन के हिंसाब, इआ समय के मनइन से लीन जाय: 51हाबिल के हत्या से लइके जकरयाह के हत्या तक, जउन बेदी अउर मन्दिर के बीच माहीं मारि डारे गें तय। हम तोंहसे सही कहित हएन, कि ईं सगलेन के हिंसाब इहय समय के मनइन से लीन जई। 52हे, यहूदी नेम सिखामँइ बाल्या तोहईं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिलँइ बाली हय। तूँ पंचे ग्यान के चाभी लइ त लिहा हय, पय खुदय ग्यान काहीं नहीं मान्या, अउर ग्यान के बात मानँइ बालेन काहीं मानँइ से रोंकते हया।”

53जब यीसु उहाँ से निकरें, तब मूसा के बिधान सिखामँइ बाले अउर फरीसी बुरी तरह से यीसु के पीछे परिगें, अउर उनहीं परेसान करँइ लागें, कि ऊँ अउर खुब बातन के चरचा करँय, 54जउने कउनव बातन माहीं गलती पाइके उनहीं पकड़ी, इआ मोका के ताक माही सगले लगे रहे हँय।

12

पाखन्ड के बिरुद्ध चेतउनी

(मत्ती 10:26,27)

1एतनेन माहीं जब हजारन मनइन के भीड़ लगिगे, अउर इहाँ तक कि ऊँ पंचे एक दुसरे के ऊपर गिरे परत रहे हँय, तब यीसु सबसे पहिले अपने चेला लोगन से कहँइ लागें, “फरीसी लोगन के कपटरूपी खमीर से सतरक रह्या। 2जउन कुछू बिचार मनइन के मन माहीं हें, परमातिमा उनहीं प्रगट करिहँय, अउर हमरे जीबन के सगली छिपी बातन काहीं परमातिमा जानत हें। 3एसे जउने बातन काहीं तूँ पंचे अँधिआरे माहीं कहे हया, ऊँ उँजिआरे माहीं सुनी जइहँय; अउर जउने बातन काहीं तूँ पंचे बंद कोठरिअन माहीं, एक दुसरे के कानन माहीं कहे हया, उनखर छत के ऊपर से प्रचार कीन जई।”

केसे डेरई?

(मत्ती 10:28-31)

4यीसु पुनि कहिन, हम तोंहसे जउन हमार साथी आह्या कहित हएन, कि जे कोऊ तोंहरे देंह काहीं नास कइ सकत हें, ओखे अलाबा अउर कुछू नहीं कइ सकँय, उनसे न डेरा। 5हम तोंहईं समझाइत हएन, कि केसे डेराँइ चाही, तोंहईं मार डारे के बाद, जिनहीं नरक माहीं डारँइ के हक्क हय, उनहिन से डेरा; हाँ, हम कहित हएन कि केबल उनहिन से डेरा। 6हम तोंहसे पूँछित हएन, कि का दुइ पइसा माहीं पाँचठे गउरइआ नहीं बिकती आहीं? तऊ परमातिमा उनमा से एकठेरिव काहीं नहीं बिसरामँय। 7बलकिन तोंहरे मूँड़े के सगले बार घलाय गिने हें, एसे तूँ पंचे न डेरा, पिता परमातिमा के नजर माहीं तूँ पंचे ऊँ गउरइअन से जादा कीमती हया।

यीसु काहीं सोइकार करब इआ कि ठोकराउब

(मत्ती 10:32,33; 12:32; 10:19,20)

8यीसु कहिन, “हम तोंहसे कहित हएन, कि जे कोऊ मनइन के आँगे इआ मान लेई, कि हम यीसु मसीह के चेला आहेन, त ओही मनई के लड़िकव परमातिमा के स्वरगदूतन के आँगे सोइकार कइ लेई, कि इआ हमार चेला आय। 9पय जे कोऊ मनइन के आँगे इआ कही, कि हम यीसु मसीह के चेला न होंहेन, त हमहूँ घलाय स्वरग माहीं रहँइ बाले अपने पिता परमातिमा के स्वरगदूतन के आँगे, इआ कहि देब, कि ईं हमार चेला न होंहीं।”

10“जे कोऊ मनई के लड़िका के बिरोध माहीं कउनव बात कही, त ओखर उआ अपराध माफ कइ दीन जई, पय जउन मनई पबित्र आत्मा के बुराई करी, ओखर उआ अपराध कबहूँ माफ न कीन जई।” 11यीसु पुनि कहिन, “जब मनई तोंहईं, महासभन माहीं, अउर सासन करँइ बालेन अउर अधिकारिन के आँगे लइ जाँय, त चिन्ता न किहा, कि हम उनहीं कउनमेर से, इआ कि का जबाब देब, इआ कि का कहब। 12काहेकि पबित्र आत्मा ओतनिनदार तोंहईं सिखाय देई, कि उनसे का कहँय चाही।”

एकठे धनी मूरुख के उदाहरन

13तब उआ भीड़ म से एक जने यीसु से कहिस, “हे गुरू, हमरे भाई से कहि देई, कि हमरे बाप के धन-सम्पत्ती म से हमार हिस्सा बाँटिके दइ देय।” 14यीसु उआ मनई से कहिन, “इआमेर के बातन के न्याय करँइ अउर बाँटँइ के खातिर हमहीं तोंहरे ऊपर को ठहराइसी?” 15अउर यीसु अपने चेलन से कहिन, “तूँ पंचे सतरक रहा, अउर हरेक मेर के लोभ से अपने काहीं बचाइके रखा; काहेकि कोहू के जीबन ओखे खुब धन-सम्पत्ती के कारन नहीं बचय।” 16यीसु अपने चेलन से एकठे उदाहरन कहिन: “कउनव धनी मनई के खेत माहीं फसल के खुब पइदाबार भय। 17तब उआ धनी मनई अपने मन माहीं इआ सोचँइ लाग, ‘हम का करी? काहेकि हमरे लघे एतनी जघा नहिं आय, कि सगली पइदाबार के अनाज रक्खी।’ 18अउर उआ कहिस, ‘हम अइसा करब: कि अपने बखारिन काहीं टोरिके उनसे बड़ी बखारी बनाउब; अउर ओहिन माहीं आपन सगला अनाज अउर सम्पत्ति धरब। 19अउर अपने प्रान से कहब, हे प्रान तोरे लघे कइअक बरिस के खाँय के खातिर, खुब सम्पत्ति धरी हय; अराम कर, खा, पि, अउर सुख से रव्ह।’ 20पय परमातिमा ओसे कहिन, ‘हे मूरुख! इहय रात माहीं तोर प्रान लइ लीन जई; त बताव जउन कुछू तँय जोरे हए, उआ केखर होई?’ 21अइसन उआ मनइव हय, जउन अपने खातिर धन-सम्पत्ति जोरत हय, पय परमातिमा के नजर माहीं धनी नहिं आय।”

परमातिमा के ऊपर बिसुआस रक्खा

(मत्ती 6:25-34)

22पुनि यीसु अपने चेलन से कहिन, “एसे हम तोंहसे कहित हएन, कि अपने प्रान के चिन्ता न किहा, कि हम का खाब; न अपने देंह के चिन्ता किहा, कि हम का पहिरब। 23काहेकि प्रान खाना से जादा, अउर देंह ओन्हन से जादा कीमती हय। 24कउअन काहीं देखा; ऊँ न त बोउतय आहीं, अउर न त कटतय आहीं, अउर न उनखे राहय गल्ला होय, अउर न बखारिन रहय, तऊ परमातिमा उनहीं पालत हें। तोंहार मोल त पंछिन से बढ़िके हय, तोंहईं काहे न खबइहँय? 25तोंहरे पंचन म से अइसा को हय, जउन चिन्ता कइके, अपने उमिर माहीं एक घरिव बढ़ाय सकत होय? 26एसे अगर तूँ पंचे सबसे छोट काम नहीं कइ सकते आह्या, त खुब बातन के चिन्ता काहे करते हया। 27जंगली फूलन के बिरबन काहीं ध्यान से देखा, कि ऊँ कइसन बाढ़त हें, ऊँ न त मेहनत करँय, अउर न कातके ओन्हय बनामँय, तऊ हम तोंहसे कहित हएन, कि राजा सुलैमान घलाय, जबकि ऊँ संसार माहीं सगलेन से धनी रहे हँय, तऊ उन फूलन म से एक्कवठे कि नाईं निकहा ओन्हा नहीं पहिरे पाइन। 28एसे अगर परमातिमा मइदान के चारा काहीं, जउन आज हय, अउर काल्ह आगी माहीं झोंक दीन जई, उनहीं एतना सुन्दर ओन्हा पहिराबत हें, त हे अल्प बिसुआसिव, ऊँ तोंहईं पंचन काहीं निकहा ओन्हा काहे न पहिरइहँय? 29अउर तूँ पंचे ईं सगली चीजन काहीं ढूँढ़ँइ माहीं न रहा, कि हम का खाब-पिअब, अउर मन माहीं संका न किहा, कि परमातिमा तोंहईं न देइहँय। 30काहेकि संसार के सगले जातिअन के मनई, ईं सगली चीजन काहीं ढूँढ़ँइ माहीं लगे रहत हें: पय तोंहार पिता परमातिमा इआ जानत हें, कि तोंहईं पंचन काहीं ईं सगली चीजन के जरूरत ही। 31पय तूँ पंचे परमातिमा के राज के बढ़ोत्तरी के काम माहीं लगे रहा, त तोंहईं ईं जरूरत के सगली चीजँय मिल जइहँय।”

स्वरग के धन

(मत्ती 6:19-22)

32हे छोट झुन्ड, डेरा न; काहेकि तोंहरे पिता परमातिमा काहीं इआ नीक लाग हय, कि तोंहईं राज देंय। 33आपन धन-सम्पत्ती बेंच के दान कइ द्या; अउर अपने खातिर अइसन आत्मिक बटुआ बनाबा, जउन पुरान नहीं होय, बलकिन स्वरग माहीं अइसन आत्मिक धन एकट्ठा करा, जउन घटय नहीं, जेही चोर नहीं चोरामँय, अउर न किरबा खाँय। 34काहेकि जहाँ तोंहार धन-सम्पत्ती हय, उहँय तोंहार मनव लगा रही।

तइआर रहा

35यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे हमेसा तइआर रहा, अउर तोंहार दिया जलत रहँय, 36अउर तूँ पंचे, ऊँ मनइन कि नाईं बना, जउन अपने मालिक के घर लउटँय के इन्तजार माहीं रहत हें, कि जब ऊँ बरात से लउटिके आमँय, अउर दुअरा के सँकरी खट खटामँय, त ऊँ हरबिन उनखे खातिर केमरा खोल देंय। 37धन्य हें, ऊँ दास लोग जिनखर मालिक आइके उनहीं जागत पामँय; हम तोंहसे सही कहित हएन, कि ऊँ मालिक, करिहाँ बाँधिके उनहीं खाना खाँइका बइठइहँय, अउर लघे आइके उनखर सेबा करिहँय। 38अगर मालिक रातके दुसरे पहर, इआ कि तिसरे पहर माहीं, आइके उनहीं जागत पामँय, त ऊँ दास धन्य हें। 39पय तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि अगर घर के मालिक जानत, कि चोर केतनीदार अई, त उआ जागत रहत, अउर अपने घर माहीं चोरी न होंइ देत। 40एसे तुहूँ पंचे तइआर रहा, काहेकि जउने समय के बारे माहीं तूँ पंचे सोचेव न होइहा, कि मनई के लड़िका अई, उहय समय मनई के लड़िका आय जई।”

बिसुआस के काबिल अउर अबिसुआसी दास

(मत्ती 24:45-51)

41तब पतरस यीसु से कहिन, “हे प्रभू, इआ उदाहरन हमहिन भर से कहित हएन, इआ कि सगले जनेन से।” 42तब प्रभू कहिन, “उआ बिसुआस के काबिल अउर बुद्धिमान सगले भन्डार के मालिक को कहाबत हय, उहय जेखर मालिक, ओही नोकर-चाकरन के ऊपर मुखिया बनामँय, कि उआ समय माहीं सगलेन काहीं खाँय बाली चीजन काहीं देय। 43धन्य हय, उआ दास, जेही ओखर मालिक आइके जउन कहिगे रहे हँय, उहयमेर करत पामँय। 44हम तोंहसे सही कहित हएन; ऊँ मालिक, ओही अपने सगले धन-सम्पत्ती के मालिक बनाय देइहँय। 45पय अगर उआ दास सोचँइ लागय, कि हमार मालिक देर से अइहँय, अउर उनखे दुसरे दास-दासिन काहीं मारँय-पीटँय लागय, अउर खाँय-पिअँइ माहीं परिजाय, अउर पियक्कड़ होंइ लागय। 46तब ओखर मालिक अइसन दिन अइहँय, कि जब उआ दास सोचत होई कि आज ऊँ न अइहँय, अउर अइसन समय माहीं आय जइहँय, जउने काहीं उआ न जानत होई, अउर ऊँ मालिक आइके ओही खुब सजा देइहँय, अउर ओखर गिनती अबिसुआसी लोगन माहीं करिहँय। 47अउर उआ दास जउन अपने मालिक के इच्छा जानत रहा हय, पय उनखे आमँइ के समय तइआर नहीं रहा, अउर अपने मालिक के इच्छा के मुताबिक नहीं चला, उआ अपने मालिक से खुब मार खई। 48पय जउन मनई बिना जाने मार खाँय के काबिल काम करत हय, उआ न जानँय के कारन थोरिन काहीं मार पाई। एसे जेही खुब काम दीनगा हय, ओसे खुब लेखा लीन जई; अउर जेही खुब जिम्मेबारी दीनगे ही, ओसे खुब लेखा लीन जई।”

यीसु के दुबारा आमँइ के परिनाम

(मत्ती 10:34-36)

49ओखे बाद यीसु पुनि कहिन, “हम धरती माहीं आगी लगामँइ आएन हँय; अउर इआ चाहित हएन, कि केबल इआ अबे सुलुगि जाय! 50हमहीं त एकठे बपतिस्मा लेंइ क हय, अउर जब तक उआ पूर न होइ जाय, तब तक हम खुब कस्ट माहीं रहब! 51का तूँ पंचे इआ समझते हया, कि हम धरती माहीं मेल-मिलाप करामँइ आएन हय? हम तोंहसे कहित हएन; कि नहीं, बलकिन अलग करामँइ आएन हय। 52काहेकि अब से, एकठे घर माहीं पाँच जने, एक दुसरे से बिरोध करिहँय, तीन जने दुइ जने से, अउर दुइ जने तीन जने से। 53बाप लड़िका से, अउर लड़िका बाप से बिरोध रक्खी; महतारी बिटिया से, अउर बिटिया महतारी से, अउर सास पुतऊ से, अउर पुतऊ सास से बिरोध रक्खी।”

समय के पहिचान

(मत्ती 16:2,3)

54यीसु भीड़ के मनइन से कहिन, “जब तूँ पंचे बदरी काहीं पच्छिम से उठत देखते हया, त हरबिन जान लेते हया, कि पानी बरसी, अउर अइसनय होत हय। 55अउर जब दक्खिन दिसा से हबा चलत देखते हया, तब कहते हया, कि लूक चली, अउर अइसनय होत हय। 56हे कपटिव, तूँ पंचे धरती अउर अकास के रूप-रंग माहीं भेद बताय सकते हया, पय इआ जुग के बारे माहीं, काहे भेद करँय नहीं जन त्या?

अपने मुद्दई से समझउता

(मत्ती 5:25,26)

57तूँ पंचे अपने आपय काहे निरनय नहीं कइ लेते आह्या, कि उचित का हय? 58जब तूँ अपने बिरोधी के साथ राजपाल के लघे जाते हया, त गइलय माहीं ओसे समझउता कइल्या, अइसा न होय, कि उआ बिरोधी तोंहईं राजपाल के लघे लइ जाय, अउर राजपाल तोंहईं सिपाही के हाँथ माहीं सउँपि देय, अउर सिपाही लइ जाइके जेल माहीं डार देय। 59हम तोंहसे कहित हएन, कि जब तक तूँ पाई-पाई चुकाय न देइहा, तब तक जेल से छूटे न पइहा।”

13

मन काहीं बदला इआ नास होइजा

1उहय समय कुछ जने आइगें, अउर उन गलीली लोगन के बारे माहीं बात करँइ लागें, जिनहीं रोम देस के राजपाल पिलातुस यरूसलेम मन्दिर माहीं बलिदान चढ़ाबत माहीं मरबाय डारिन तय। 2ईं बातन काहीं सुनिके यीसु उनसे कहिन, “का तूँ पंचे इआ समझते हया, कि ईं गलीली लोग सगले गलीली लोगन से जादा पापी रहे हँय, जउने से इआ बिपत्ती उनखे ऊपर परी? 3हम तोंहसे कहित हएन, कि नहीं; पय अगर तूँ पंचे पस्चाताप न करिहा, त तुहूँ पंचे सगले जने इहइमेर से नास होइ जइहा। 4तूँ पंचे का समझते हया, कि ऊँ अठारा जने जिनखे ऊपर सीलोह के गुम्मट गिरिगा हय, अउर ऊँ पंचे दबिके मरिगे हँय; यरूसलेम सहर के रहँइ बाले सगले मनइन से जादा अपराधी रहे हँय? 5हम तोंहसे कहित हएन, कि नहीं; पय अगर तूँ पंचे पाप करब न छोंड़िहा त तुहूँ सगले जने इहइमेर से नस्ट होइ जइहा।”

बिना फर के अंजीर के बिरबा के उदाहरन

6पुनि यीसु इहव उदाहरन कहिन, “कउनव मनई के अंगूर के बगिया माहीं एकठे अंजीर के बिरबा लगा रहा हय। उआ मनई अंजीर के बिरबा माहीं फर ढूँढ़ँइ आबा, पय एक्कवठे फर नहीं पाइस। 7तब उआ मनई बगिया के रखबारी करँइ बाले से कहिस, ‘देखा तीन बरिस से हम इआ अंजीर के बिरबा माहीं फर ढूँढ़ँइ अइत हएन, पय एक्कव फर नहीं पाई। इआ बिरबा काहीं काटि डारा, इआ काहे भुँइ काहीं छिंदाए रहय?’ 8बगिया के देखभाल करँइ बाला उनसे कहिस, ‘हे मालिक, इआ बिरबा काहीं इआ बरिस अऊ रहँइ देई; कि हम एखे चारिव कइती खोदिके खाद डारी। 9अगर आँगे साल फरी त ठीक हय, नहीं त काट डारब’।”

पबित्र दिन काहीं कुबरी मेहेरिआ काहीं नीक करब

10एक दिन यीसु पबित्र दिन काहीं यहूदी सभाघर माहीं उपदेस देत रहे हँय। 11उहाँ एकठे मेहेरिआ बइठ रही हय, जउने काहीं अठारा साल से एकठे कमजोर करँइ बाली बुरी आत्मा पकड़े रही हय, एसे उआ कुबरी होइगे रही हय, अउर कउनव मेर से सीध नहीं ठाढ़ होइ सकत रही आय। 12यीसु ओही देखिके बोलाइन, अउर कहिन, “हे बहिनी, तूँ अपने कमजोरी से छूटि गया हय।” 13तब यीसु ओखे ऊपर आपन हाँथ धरिन, अउर उआ तुरन्तय सीध होइगे, अउर परमातिमा के बड़ाई करँइ लाग। 14यीसु उआ मेहेरिआ काहीं पबित्र दिन काहीं नीक किहिन तय, एसे यहूदी सभाघर के मुखिया गुस्साइके, उहाँ बइठ सगले मनइन से कहँइ लाग, “छय दिन हें जउने माहीं काम करँइ चाही, अउर उँइन दिनन माहीं बिमारन काहीं नीक करामँइ लइ आबा करा; पय पबित्र दिन काहीं नहीं।” 15ईं बातन काहीं सुनिके प्रभू जबाब दिहिन, “हे कपटिव, का पबित्र दिन काहीं तोंहरे पंचन म से हरेक जन अपने सार से बरधा, अउर गदहन काहीं छोरिके पानी पिआमँइ नहीं लइ जाते आह्या? 16त का इआ उचित नहिं आय, कि इआ मेहेरिआ जउन अब्राहम के कुल के बिटिआ आय, अउर जउने काहीं सइतान अठारा बरिस से अपने काबू माहीं कए रहा हय। पबित्र दिन काहीं इआ ओखे बन्धन से छोंड़ाई जाय?” 17जब यीसु ईं बातँय कहिन, तब उनखर सगले बिरोधी लज्जित होइगें, अउर सगली भीड़ के मनई ऊँ चमत्कारन के कामन काहीं देखिके, जउन यीसु किहिन तय, आनन्दित होइगें।

राई के दाना के उदाहरन

(मत्ती 13:31,32; मरकुस 4:30-32)

18यीसु पुनि कहिन, “परमातिमा के राज केखी कि नाईं हय? अउर हम ओखर तुलना कउने चीज से करी? 19परमातिमा के राज राई के दाना कि नाईं हय: जउने काहीं कउनव मनई लइके अपने खेत माहीं बोइस, अउर उआ बाढ़िके बिरबा होइगा; अउर अकास माहीं उड़ँइ बाले पच्छी ओखे डेरइअन माहीं बसेर डारिन।”

खमीर के उदाहरन

(मत्ती 13:33)

20यीसु पुनि कहिन, “हम परमातिमा के राज के उपमा कउने चीज से देई? 21परमातिमा के राज खमीर कि नाईं हय, जउने काहीं थोरी क लइके कउनव मेहेरिआ, तीन पसेरी पिसान माहीं मिलाय दिहिस, अउर उआ धीरे-धीरे सगले पिसान माहीं फइलिके ओही आमिल कइ देत हय अउर बढ़ाय देत हय।”

साँकर दुअरा

(मत्ती 7:13,14,21-23)

22यीसु सहरन-सहरन अउर गाँमन-गाँमन होइके उपदेस देत यरूसलेम सहर कइ जात रहे हँय, 23तबहिनय कउनव पूँछिस, “हे प्रभू, का मुक्ती पामँइ बाले थोरिन काहीं हें?” यीसु उनसे कहिन, 24“साँकर दुअरा से परमातिमा के राज माहीं प्रबेस करँइ के कोसिस करा, काहेकि हम तोंहसे सही कहित हएन, कि खुब मनई उआ दुअरा से प्रबेस करँइ के कोसिस करिहँय, पय कर न पइहँय। 25जब कउनव घर के मालिक उठिके दुअरा बंद कइ चुका होय, अउर तूँ बहिरे ठाढ़ होइके दुअरा खट खटाइके कहँइ लागा, ‘हे मालिक, हमरे खातिर दुअरा खोल देई’, अउर ऊँ तोंहईं जबाब देंइ ‘हम तोंहईं नहीं जानी, तूँ पंचे कहाँ के आह्या?’ 26तब तूँ पंचे कहँइ लगिहा, ‘हम अपना के साथ माहीं खाएन-पिएन, अउर अपना हमरे बजारन माहीं उपदेस दिहेन हय।’ 27पय घर के मालिक कइहँय, ‘हम तोंहसे कहित हएन, कि हम तोंहईं नहीं जानी, कि कहाँ से आया हय। हे कुकर्मिव, तूँ सगले जन हमसे दूरी होइजा।’ 28उहाँ रोउब अउर दाँत पीसब होई; जब तूँ पंचे अब्राहम अउर इसहाक अउर याकूब अउर सगले परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं, परमातिमा के राज माहीं बइठे, अउर अपने काहीं बहिरे निकारे देखिहा; 29अउर पूरुब अउर पच्छिम; उत्तर अउर दक्खिन से खुब मनई आइके, परमातिमा के राज के जेउनार माहीं सामिल होंइ हँय। 30अउर देखा, जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से बड़ा मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से छोट माने जइहँय, अउर जे कोऊ इआ संसार माहीं खुद काहीं सगलेन से छोट मानत हें, ऊँ पंचे स्वरग माहीं सगलेन से बड़े माने जइहँय।”

राजा हेरोदेस के दुसमनी

31ओतनिनदार फरीसी लोग आइके यीसु से कहिन, “इहाँ से निकरिके चले जई, काहेकि राजा हेरोदेस अपना काहीं मारि डारँइ चाहत हें।” 32यीसु उनसे कहिन, “जाइके उआ लोखरी कि नाईं हुसिआर मनई से कहि द्या, कि देख, हम आज अउर काल्ह बुरी आत्मन काहीं निकारब, अउर बिमारन काहीं नीक करब, अउर तिसरे दिन आपन काम पूर करब। 33चाह कुछू होइ जाय, तऊ हमहीं आज अउर काल्ह अउर परसँव चलिके यरूसलेम पहुँचब जरूरी हय, काहेकि अइसन नहीं होइ सकय, कि कउनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाला यरूसलेम सहर के बहिरे मारा जाय।”

यरूसलेम के खातिर बिलाप

(मत्ती 23:37-39)

34“हे यरूसलेम सहर के मनइव, हे यरूसलेम सहर के मनइव! तूँ पंचे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं मारि डरते हया, अउर जेतने जने तोंहरे लघे पठए गे हें, उनहीं पथरा मरते हया। अउर हम कइअक बेरकी इआ चाहेन, कि जइसन मुरगी अपने बच्चन काहीं, अपने पखनन के नीचे एकट्ठा करत ही, उहयमेर हमहूँ, तोंहरे लड़िकन काहीं एकट्ठा कइ लेई, पय तूँ पंचे इआ नहीं चाह्या। 35अउर देखा, अब तोंहार पंचन के मन्दिर पूरी तरह उजर जई। अउर हम तोंहसे कहित हएन, कि जब तक तूँ पंचे इआ न कइहा, कि

‘धन्य हें ऊँ, जउन प्रभू के नाम से आबत हें’ तब तक तूँ पंचे हमहीं पुनि कबहूँ न देखिहा।”

14

फरीसी के घर माहीं यीसु

1तब यीसु पबित्र दिन काहीं फरीसी लोगन के मुखिअन म से कउनव के घर माहीं खाना खाँइ गें; अउर उहाँ कुछ जने यीसु के गलती पकड़ँइ के ताक माहीं लगे रहे हँय। 2उहाँ एकठे मनई रहा हय, जउने काहीं हाँथ-गोड़ फूलँइ के बिमारी रही हय। 3तब यीसु, मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन अउर फरीसी लोगन से पूँछिन, “का पबित्र दिन काहीं बिमारन काहीं नीक करब उचित हय कि नहीं?” 4पय ऊँ पंचे कुछू नहीं बोले। तब यीसु उआ बिमार काहीं छुइके नीक कइ दिहिन, अउर ओही चले जाँय दिहिन। 5अउर यीसु उनसे कहिन, “तोंहरे पंचन म से अइसा को हय, जेखर गदहा, इआ कि बरधा कुँइआ माहीं गिर जाय, अउर उआ पबित्र दिन काहीं हरबिन कुँइआ से बहिरे न निकारय?” 6ऊँ पंचे, यीसु के ईं बातन के जबाब नहीं दए पाइन।

नम्रता के साथ महिमानन के स्वागत

7जब यीसु देखिन, कि नेउतहरी आइके कइसन खास-खास जघन काहीं चुनिके बइठ जात हें, तब ऊँ उनसे एकठे उदाहरन कहिन, 8“जब कोऊ तोंहईं बिआह माहीं नेउता दइके बोलाबय, त खास जघा माहीं जाइके न बइठ्या, कहँव अइसा न होय, कि उआ मनई तोंहऊँ से बड़े महिमानन काहीं नेउता दइके बोलाए होय, 9अउर उआ मनई जउन तोंहईं अउर उनहीं दोनव जनेन काहीं नेउता दिहिस ही, आइके तोंहसे कहय, कि ‘इआ जघा माहीं इनहीं बइठँय देई’, तब तोंहईं लजाइके सगलेन से पीछे के जघा माहीं बइठँय परय। 10पय जब तोंहईं नेउते माहीं बोलाबा जाय त सगलेन से पीछे के जघा माहीं बइठा; कि जब ऊँ जे तोंहईं नेउता दिहिन हीं आइके तोंहसे कहँय, ‘हे साथी आँगे बढ़िके बइठा’, तब तोंहरे साथ माहीं बइठे मनइन के आँगे तोंहार बड़ाई होई। 11काहेकि जे कोऊ खुद काहीं बड़ा बनाई, उआ परमातिमा के व्दारा छोट कीन जई: अउर जे कोऊ खुद काहीं छोट बनाई, त उआ परमातिमा के व्दारा बड़ा कीन जई।”

12तब यीसु अपने नेउता देंइ बाले से घलाय कहिन, “जब तूँ दिन माहीं चाह रात माहीं भोज करा त, अपने साथिन इआ कि भाई पट्टिदारन काहीं, इआ कि धनी परोसिन काहीं न बोलाया, काहेकि ऊँ तोंहऊँ काहीं नेउता देइहँय, अउर तोंहईं बदला मिल जई। 13पय जब तूँ भोज करा, त कंगालन काहीं, लूलन-लँगड़न काहीं, अउर अँधरन काहीं बोलाबा। 14तब तूँ धन्य कहइहा, काहेकि उनखे लघे तोंहईं बदला देंइ के खातिर कुछू न रही, पय धरमिन के दुबारा जिए के बाद, स्वरग माहीं तोंहईं एखर प्रतिफल जरूर मिली।”

बड़ी जेउनार के उदाहरन

(मत्ती 22:1-10)

15यीसु के साथ खाना खाँइ बालेन म से एक जने ईं बातन काहीं सुनिके उनसे कहिन, “धन्य हय उआ, जउन परमातिमा के राज माहीं खाना खई।” 16यीसु ओसे कहिन, “कउनव मनई खुब बड़ी जेउनार किहिन, अउर खुब जनेन काहीं नेउता दइके बोलबाइन। 17जब खाना तइआर होइगा, तब ऊँ अपने दास से नेउतहरिन काहीं कहबाय पठइन, कि आबा, अब खाना तइआर हय। 18पय ऊँ सगले नेउतहरी उनसे आनाकानी करँइ लागें। उनमा से एक जने कहिस, ‘हम अबहिनय खेत खरीदेन हय, ओही देखब जरूरी हय; हम तोंहसे बिनती करित हएन, कि हमहीं माफ कइ द्या।’ 19दुसरव जन इहइमेर कहिन, ‘हम पाँच जोड़ी बरधा खरीदेन हँय, उनहिन काहीं दमँय जइत हएन; हम तोंहसे बिनती करित हएन, कि हमहीं माफ कइ द्या।’ 20एक जने अउर कहिस, हम ‘अबहिनय काज किहेन हय, हम नहीं आय सकी।’ 21उआ दास आइके अपने मालिक काहीं ईं सगली बातँय बताइस। तब घर के मालिक गुस्साइके अपने दास से कहिन, सहर के बजारन अउर गलिन माहीं हरबी जाइके, कंगालन, लूलन-लँगड़न अउर अँधरन काहीं इहाँ बोलाय लाबा। 22दास आइके कहिस, ‘हे मालिक, जइसन अपना कहेन तय उहयमेर किहेन हय; अउर ओखे बादव घर माहीं जघा खाली हय।’ 23ऊँ मालिक अपने दास से कहिन, सड़कन अउर बगिअन माहीं जाइके उहाँ से मनइन काहीं जबरई बोलाइके लइ आबा, जउने हमार घर भर जाय। 24काहेकि हम तोंहसे कहित हएन, कि ऊँ नेउतहरिन म से कउनव हमरे जेउनार माहीं खाना न खाँय पाई।”

चेला बनँइ के कीमत

(मत्ती 10:37,38)

25जब खुब भीड़ यीसु के साथ जात रही हय, तब यीसु मुड़िके उनसे कहिन, 26“अगर कोऊ हमरे लघे आबय, अउर अपने महतारी-बाप, अउर लड़िका-मेहेरिआ, अउर भाई-बहिनिन काहीं, अउर अपने प्रान काहीं पियार मानत हय, त उआ हमार चेला नहीं बन सकय; 27अउर जे कोऊ आपन क्रूस उठाइके हमरे पीछे न चली अरथात दुख-तकलीफ सहिके, हमरे बातन काहीं न मानी, उआ हमार चेला नहीं बन सकय।

28तोंहरे पंचन म से अइसन कउन हय, जउन बड़ा घर बनामँइ चाहत होय, अउर पहिले बइठिके खरचा न जोरय, कि सगला घर बनामँइ के हिम्मत हमरे हय कि नहीं? 29कहँव अइसन न होय, कि नेव भर देय अउर घर न बनाए पाबय, तब सगले देखइआ, इआ कहिके ओखर हँसी उड़ामँइ लागँय, 30इआ ‘मनई घर त बनामँइ लाग, पय बनए नहीं पाइस?’ 31इआ कि कउन अइसन राजा हय, जउन दुसरे राजा से लड़ाई करँइ जात होय, अउर पहिले सोचय बिचारय न कि जउन बीस हजार सिपाहिन काहीं लए हमरे ऊपर चढ़ाई करँइ आबत हय, त का हम दस हजार सिपाहिन काहीं लइके, ओखर सामना कइ सकित हएन, कि नहीं? 32नहीं त दस हजार सिपाहिन बाला राजा, दुसरे राजा से जब उआ दूरिन होई, तबहिनय उआ आपन दूत पठइके मेल-मिलाप करँइ के कोसिस करी। 33इहइमेर से तोंहरे पंचन म से, जे कोऊ आपन सब कुछ छोंड़ न देई, उआ हमार चेला नहीं होइ सकय।”

बिना स्वाद के नोन

(मत्ती 5:13; मरकुस 9:50)

34यीसु पुनि कहिन, “नोन त निकहा होत हय, पय अगर ओखर सखरई खतम होइ जाय, त फेर उआ कउने चीज से सखार कीन जई। 35अउर उआ न भुँइ के, अउर न त खादय के काम आबय, ओही सगले मनई बहिरे फेंकि देत हें। जेखर सुनँय के मन होय, उआ बड़े ध्यान से सुन लेय।”

15

हेरान गाड़र के उदाहरन

(मत्ती 18:12-14)

1यीसु के लघे सगले चुंगी लेंइ बाले अउर पापी मनई आबत रहे हँय, कि उनखे बचन काहीं सुनँय। 2पय फरीसी अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, कुड़कुड़ाइके कहँइ लागें, “ईं त पापी लोगन से मिलत हें, अउर उनखे साथ खाना घलाय खात हें।”

3तब यीसु उनसे एकठे उदाहरन कहिन: 4“मान ल्या, कि तोंहरे पंचन म से, कोहू के लघे सवठे गाड़र होंय, अउर उनमा से एकठे हेराइ जाय, त का उआ मनई निन्यान्नबे गड़रन काहीं जंगल माहीं छोंड़िके, उआ हेरान गाड़र काहीं, तब तक न ढूँढ़त रही, जब तक कि उआ मिल न जाय? 5अउर जब उआ मिल जात ही, तब उआ मारे उराव के ओही अपने काँधा माहीं उठाय लेत हय; 6अउर अपने घर माहीं आइके, अपने साथिन अउर परोसिन काहीं एकट्ठा कइके कहत हय, कि ‘हमरे साथ आनन्द करा, काहेकि हमार जऊँ गाड़र हेराइगे तय, उआ मिलगे ही।’ 7हम तोंहसे कहित हएन, कि इहइमेर से जब कउनव मनई पाप करब छोंड़िके परमातिमा के बचन माहीं चलत हय, तब ओखे बारे माहीं स्वरग माहीं इहइमेर आनन्द मनाबा जात हय, बलकिन निन्यान्नबे धरमिन के बारे माहीं, एतना आनन्द नहीं मनाबा जाय, काहेकि उनहीं पुनि मन फिरामँइ के जरूरत नहिं आय।”

हेरान सिक्का के उदाहरन

8यीसु इहव कहिन, “सोचा कउन अइसन मेहेरिआ हय, जउने के लघे दसठे चाँदी के सिक्का होंय। अउर उनमा से एकठे हेराइ जाय, त का उआ दिया जलाइके, सगले घर काहीं तब तक न बटोरत रही, अउर मन लगाइके ढूँढ़त न रही, जब तक कि उआ सिक्का मिल न जाय? 9अउर जब उआ सिक्का मिल जात हय, तब उआ अपने सखिन अउर परोसिन काहीं एकट्ठा कइके कहत ही, कि ‘हमरे साथ आनन्द मनाबा, काहेकि हमार सिक्का जउन हेराइगा तय, उआ मिलिगा हय।’ 10हम तोंहसे कहित हएन; कि इहइमेर से जब एकठे मनई पाप करब छोंड़िके परमातिमा के बचन माहीं चलत हय, तब ओखे बारे माहीं स्वरग माहीं परमातिमा के आँगे, स्वरगदूतन माहीं आनन्द मनाबा जात हय।”

बिगड़े लड़िका के उदाहरन

11पुनि यीसु कहिन, “एकठे मनई के दुइठे लड़िका रहे हँय। 12उनमा से छोटकबा लड़िका अपने बाप से कहिस, ‘हे पिताजी, धन-सम्पत्ती म से जउन हमार हिस्सा होय, त बाँटिके हमहीं दइ देई।’ उनखर बाप आपन धन-सम्पत्ती बाँटिके दोनव जनेन काहीं दइ दिहिन। 13कुछ दिना बाद छोटकबा लड़िका, आपन सगली धन-सम्पत्ती एकट्ठा किहिस अउर लइके खुब दूरी दुसरे देस माहीं चला ग, अउर उहाँ आपन सगली धन-सम्पत्ती कुकर्मन माहीं उड़ाय दिहिस। 14जब ओखर सगली धन-सम्पत्ती खरचा होइगे, तब उआ देस माहीं भारी अकाल परा, अउर उआ कंगाल होइगा। 15एसे उआ उहय देस माहीं रहँइ बाले एकठे मनई के लघे, काम माँगय ग, अउर उआ मनई ओही, अपने खेतन माहीं सुमर चरामँइ के खातिर लगाय लिहिस। 16अउर उआ चाहत रहा हय, कि उन फलिअन से जउने काहीं सुमर खात रहे हँय, आपन पेट भरय; अउर ओही कोऊ कुछू खाँइ काहीं नहीं देत रहा। 17जब ओही आपन गलती महसूस भय, तब कहँइ लाग, ‘हमरे बाप के घर माहीं मजूरन काहीं, उनखे जरूरत से जादा खाना मिलत हय; अउर हम इहाँ भूँखन मरित हएन।’ 18तब उआ कहिस हम अब अपने बाप के लघे जाब, अउर उनसे कहब कि पिताजी, हम परमातिमा के बिरोध माहीं, अउर अपना के बिरोध माहीं पाप किहेन हय। 19हम अब एखे लाइक नहिं आहेन, कि अपना के लड़िका कहाई, पय हमहीं अपना एकठे मजूर कि नाईं रख लेई।

20तब उआ उठिके अपने बाप के लघे चल दिहिस, जब उआ घर के थोरिन दूर रहय, तबहिनय ओखर बाप देखिके तरस खाइन, अउर दउड़िके ओही अपने गले लगाय लिहिन, अउर खुब चूँमिन। 21तब उआ लड़िका अपने बाप से कहिस, ‘पिताजी, हम परमातिमा के बिरोध माहीं, अउर अपना के बिरोध माहीं पाप किहेन हय; अउर हम अब एखे काबिल नहिं आहेन, कि अपना के लड़िका कहाई।’ 22पय बाप अपने सेबकन से कहिन, ‘हरबी निकहा से निकहा ओन्हा लइ आबा, अउर ओही पहिराबा, अउर ओखे हाँथे माहीं अँगूठी, अउर गोड़े माहीं पनहीं पहिराबा, 23अउर खाँय-पिअँइ के निकहा प्रबन्ध करा, जउने हम पंचे खई अउर आनन्द मनाई।’ 24काहेकि हमार इआ लड़िका पाप किहे के कारन मरे कि नाईं होइगा तय, पय गलती काहीं सोइकार कइ लेंइ के कारन जिन्दा कि नाईं होइगा हय: जउन हेराइगा रहा हय, अब उआ मिलिगा हय, अउर ऊँ सगले जने आनन्द मनामँइ लागें।

25पय उनखर जेठ लड़िका खेत माहीं रहा हय। अउर जब उआ आबत-आबत घर के लघे पहुँचा, तब ओही गामँइ-बजामँइ के बोल सुनान। 26तब उआ अपने एकठे दास काहीं बोलाइके पूँछिस, ‘घर माहीं इआ का होत हय?’ 27दास उनसे कहिस, ‘अपना के भाई आए हँय, अउर अपना के पिताजी, खाँय-पिअँइ के निकहा प्रबन्ध कराइन हीं, एसे कि ऊँ उनहीं नीक-सूख पाइन हीं।’ 28एतना सुनिके उआ खुब गुस्साइगा, अउर घर के भीतर नहीं जाँय चाहिस, पय ओखर बाप बहिरे आइके ओही मनामँइ लागें। 29उआ जेठ लड़िका अपने बाप काहीं जबाब दिहिस, ‘देखी हम त एतने बरिस से अपना के सेबा करत आहेन, अउर कबहूँ अपना के हुकुम काहीं नहीं टारेन, तऊ अपना हमरे खातिर एकठे बोकरी के बच्चव तक नहीं दिहेन, कि हम अपने साथिन के साथ आनन्द करित। 30पय जब अपना के इआ छोटकबा लड़िका, जउन अपना के धन सम्पत्ति बेस्यन माहीं उड़ाय दिहिस ही, तऊ जब उआ आबा, तब ओखे खातिर खाँय-पिअँइ के निकहा प्रबन्ध कर बायन हय।’ 31तब उआ बाप अपने जेठ लड़िका काहीं समझाइस, ‘बेटा, तूँ त हमेसा हमरे साथ हया; अउर जउन कुछू धन-सम्पत्ती हमरे लघे ही, उआ सगली तोंहारय आय।’ 32पय अब आनन्द मनामँइ चाही, काहेकि जउन तोंहार इआ भाई पाप किहे के कारन मरे कि नाईं होइगा तय, पय गलती काहीं सोइकार कइ लेंइ के कारन जिन्दा कि नाईं होइगा हय, जउन भटक ग रहा हय, अब उआ मिलिगा हय।”

16

हुसिआर भन्डारी

1पुनि यीसु चेलन से कहिन, “कउनव धनमान के एकठे भन्डारी रहा हय, अउर कुछ मनई धनमान मनई से इआ चुगली किहिन, कि तोंहार इआ भन्डारी तोंहार सगली धन सम्पत उड़ाए डारत हय। 2तब धनी मनई अपने भन्डारी काहीं बोलाइके कहिन, ‘इआ का आय जउन हम तोंहरे बारे माहीं सुनित हएन? अपने भन्डार के काम के हमहीं लेखा-जोखा द्या, काहेकि अब हम तोंहईं भन्डारी न बनाउब।’ 3तब उआ भन्डारी सोचँइ लाग, ‘अब हम का करी? काहेकि अब हमार मालिक हमहीं भन्डार के काम से निकार देइहँय। माटी त हमार खोदी न होई; अउर भीखव मागँइ माहीं हमहीं लाज लागी। 4अब हम जान गएन, कि हमहीं का करँइ चाही, जउने जब हम भन्डारी के काम से निकारे जई, त मनई हमहीं अपने घरन माहीं रख लेंय।’ 5तब उआ भन्डारी अपने मालिक के करजा लेंइ बालेन काहीं एक-एक कइके बोलाइस, अउर पहिल बाले से पूँछिस, ‘तोंहरे ऊपर हमरे मालिक के केतना करजा हय?’ 6उआ कहिस, ‘सव मन तेल’, तब उआ भन्डारी ओसे कहिस, ‘आपन बही-खाता निकारिके, अउर बइठिके हरबी पचास लिख दे।’ 7पुनि उआ भन्डारी दुसरे से पूँछिस, ‘तोंहरे ऊपर हमरे मालिक के केतना करजा हय?’ उआ कहिस, ‘सव मन गोहूँ’, तब उआ भन्डारी ओसे कहिस, ‘आपन बही-खाता लइके अस्सी लिख दे।’

8यीसु कहिन, ‘तब मालिक उआ अधरमी भन्डारी काहीं सराहिस, कि उआ बड़ी चलाँकी से काम किहिस ही।’ काहेकि इआ संसार के मनई अपने समय के मनइन के साथ, रीति-रिबाजन अउर बेउहार करँइ माहीं परमातिमा के बचन मानँइ बाले मनइन से जादा हुसिआर हें। 9अउर हम तोंहसे कहित हएन, कि इआ बुरी दुनिया के धन-सम्पत्ती से अपने खातिर साथी बनाय ल्या, जउने जब तोंहार सगली धन-सम्पत्ती खतम होइ जाय, त ऊँ पंचे तोंहईं अपने अनन्त घरन माहीं रख लेंय। 10जे कोऊ थोरिव काम माहीं बिसुआस के काबिल हय, त उआ खुब कामन माहीं बिसुआस के काबिल रही, अउर जे थोरी-थोरी कामन माहीं अधरमी हय, त उआ खुब कामन माहीं अधरमी रही। 11एसे जब तूँ पंचे इआ संसार के धन काहीं सम्हारँय माहीं, बिसुआस के काबिल नहीं आह्या, त परमातिमा के बचन रूपी सच्चा धन तोंहईं को सउँपी? 12अउर अगर तूँ पंचे दुसरे के धन माहीं बिसुआस के काबिल नहीं ठहर सके आह्या, त जउन तोंहार आय, ओही तोंहईं को देई?”

13यीसु पुनि कहिन, “कउनव सेबक दुइठे मालिकन के सेबा नहीं कइ सकय: काहेकि उआ एकठे से दुसमनी अउर दुसरे से प्रेम रखी; इआ कि एकठे से मिला रही, अउर दुसरे काहीं तुच्छ जानी। एसे तूँ पंचे परमातिमा अउर धन, दोनव के सेबा नहीं कइ सकते आह्या।”

यीसु के कुछ उपदेस

(मत्ती 11:12,13; 5:31,32; मरकुस 10:11,12)

14फरीसी लोग जउन लोभी रहे हँय, ईं सगली बातन काहीं सुनिके यीसु के हँसी उड़ामँइ लागें। 15तब यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे त मनइन के आँगे अपने-आप काहीं बड़ा धरमी ठहरउते हया, पय परमातिमा तोंहरे मन के बात काहीं जानत हें, काहेकि जउन चीज मनइन के निगाह माहीं महान ही, उआ परमातिमा के नजर माहीं तुच्छ ही।

16मूसा के बिधान अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले तक रहे हँय; उआ समय से परमातिमा के राज के खुसी के खबर सुनाई जाय रही हय, अउर जे कोऊ बिसुआस करत हें, ऊँ पंचे स्वरगराज माहीं सामर्थ के साथ प्रबेस करत हें। 17अकास अउर धरती टर सकत हें, पय जउन बात मूसा के बिधान माहीं दीन गई हँय, उँइ कबहूँ न टरिहँय।”

18यीसु इहव कहिन, “जउन मनई अपने पहिल मेहेरिआ काहीं छोंड़िके दुसरे मेहेरिआ से काज करत हय, त उआ अपने पहिल मेहेरिआ के बिरोध माहीं ब्यभिचार करत हय। अउर जे कोऊ उआ छोंड़ी मेहेरिआ से काज करत हय, त उहव ब्यभिचार करत हय।”

धनी मनई अउर गरीब लाजर

19पुनि यीसु कहिन, “एकठे धनी मनई रहा हय, जउन हमेसा कीमती अउर निकहे ओन्हा पहिरत रहा हय, अउर रोज सुख-बिलास अउर धूम-धाम के साथ रहत रहा हय। 20अउर उहँइ लाजर नाम के एकठे कंगाल मनई जउने के सगले देंह माहीं घाव रहे हँय, ओखे दुअरा माहीं छोंड़ दीन जात रहा हय, 21अउर उआ चाहत रहा हय, कि धनी मनई के टेबुल के जूँठन से आपन पेट भरय; इहाँ तक कि कुकुरव आइके ओखे घावन काहीं चाटत रहे हँय। 22अउर अइसन भ कि उआ कंगाल लाजर मरिगा, अउर स्वरगदूत आइके ओही लइगें, अउर स्वरग माहीं अब्राहम के लघे अराम के जघा माहीं पहुँचाइन। अउर उआ धनी मनइव मरिगा, अउर गाड़ दीनगा, 23अउर उआ अधोलोक माहीं पीरा माहीं परे, आँखी उठाइके दूरिन से अब्राहम के लघे लाजर काहीं बइठे देखिस। 24तब उआ धनी मनई चिल्लाइके कहिस, ‘हे पिता अब्राहम, हमरे ऊपर दया कइके लाजर काहीं हमरे लघे पठय देई, जउने उआ अपने अँगुरी काहीं पानी माहीं बोरिके हमरे जीभ काहीं ठंड कइदेय, काहेकि हम इआ ज्वाला माहीं छटपटाय रहेन हय।’ 25पय अब्राहम ओसे कहिन, ‘हे बेटबा सुधि करा, कि तूँ अपने जिन्दगी माहीं सगली निकही चीजँय: पाय चुके हया, अउर उहइमेर लाजर बुरी चीजन काहीं पाय चुका हय, पय अब लाजर इहाँ सान्ती पाय रहा हय, अउर तूँ तड़पते हया। 26अउर ईं बातन के अलाबा, हमरे अउर तोंहरे बीच माहीं एकठे बड़ा भारी गड्ढा हय, जउने इआ पार से उआ पार तोंहरे लघे कोऊ जाँइ चाहय, त उआ न जाय सकय, अउर उआ पार से इआ पार हमरे लघे न आय सकय।’ 27उआ धनी मनई कहिस, ‘त हे पिता, हम अपना से चरउरी करित हएन, कि अपना लाजर काहीं हमरे बाप के घर पठय देई, 28काहेकि हमरे पाँच भाई अउर हें; लाजर उनखे लघे जाइके ईं सगली बातन काहीं बतामँइ, अइसन न होय, कि ऊँ सगले जन इआ पीरा के जघा माहीं आमँय।’ 29अब्राहम ओसे कहिन, ‘उनखे लघे त मूसा नबी अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के लिखी किताबँय हईं, ऊँ पंचे उनखर सुनँय।’ 30धनी मनई कहँइ लाग, ‘नहीं, हे पिता अब्राहम; पय अगर कउनव मरे के बाद जिन्दा होइके उनखे लघे जाय, त ऊँ पंचे पाप करब छोंड़िके मन काहीं बदलिहँय, अउर परमातिमा के बचन काहीं मनि हँय।’ 31अब्राहम पिता ओसे कहिन, ‘जब ऊँ पंचे मूसा नबी, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के बातन काहीं नहीं सुनिन, त अगर कउनव मरे म से जिन्दा होइके उनखे लघे जई, तऊ ऊँ पंचे ओखर बिसुआस न मनि हँय’।”

17

ठोकर के कारन बनँइ बालेन काहीं दन्ड

(मत्ती 18:6,7,21,22; मरकुस 9:42)

1यीसु अपने चेलन से कहिन, मनइन काहीं पाप म गिरामँइ बाली चीज त रहतिन हईं, पय जउन मनई दुसरे मनइन काहीं पाप माहीं गिराबत हें, त उनहीं परमातिमा से खुब सजा मिली। 2जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं, चाह उआ छोट क लड़िकय होय, उनसे पाप कराबत हय, त उआ मनई के खातिर इआ ठीक कहाई, कि एकठे बड़ी काहीं चक्की के जेतबा ओखे गरे माहीं बाँधिके, समुद्र माहीं फेंक दीन जाय, काहेकि परमातिमा के सजा एहू से जादा मिली। 3सतरक रहा; अगर तोंहार भाई कउनव गलती करय, त ओही समझाबा, अउर अगर उआ अपने गलती काहीं सोइकार कइके पचिताय, त ओही माफ करा। 4अगर तोंहार भाई दिन भरे माहीं सात बेरकी तोंहसे गलती करय, अउर सातव बेरकी तोंहरे लघे आइके कहय, “हम पचितइत हएन” अउर माफी माँगय, त ओही माफ करा।

बिसुआस

5तब सगले खास चेला प्रभू से कहिन, “परमातिमा के ऊपर हमरे बिसुआस काहीं बढ़ाई।” 6प्रभू उनसे कहिन, “अगर परमातिमा के ऊपर राई के दानव के बराबर तोंहार सच्चा बिसुआस होत, त तूँ पंचे इआ सहतूत के बिरबा से कह त्या, कि जर से उँखड़िके समुद्र माहीं लगि जा, त उआ तोंहार बात मान लेत।”

दास के करतब्य

7“मानि ल्या, कि तोंहरे पंचन म से कोहू के लघे एकठे दास हय, जऊँ हर जोतत हय, इआ कि गाड़र चराबत हय, अउर जब उआ खेत से लउटिके आबय, त का ओखर स्वामी ओसे कही, कि ‘हरबी आइके हमरे साथ खाना खाँय बइठ’? 8अउर का उआ अपने सेबक से इआ न कही, कि ‘हमरे खातिर खाना तइआर कर, अउर जब तक हम खाय-पी न लेई, तब तक करिहा बाँधिके हमार सेबा कर; ओखे बाद तहूँ खाय-पी लिहे’? 9का उआ मालिक सेबक के एहसान मानी? काहेकि उआ उहय काम किहिस जउने काम काहीं करँइ के हुकुम दीन ग रहा हय? नहीं। 10इहइमेर से तुहूँ पंचे जब उन सगले कामन काहीं कइ चुका, जउने कामन काहीं करँइ के हुकुम तोंहईं दीनगा रहा हय, तब कह्या, ‘हम पंचे निकम्मे दास आहेन; जऊँ हमहीं करँइ चाही त केबल हम पंचे उहय किहेन हँय’।”

कोढ़ के दसठे रोगिन काहीं निकहा करब

11अइसन भ, कि जब यीसु यरूसलेम सहर जाँइ के समय सामरिया प्रदेस, अउर गलील प्रदेस के बीच से होइके जात रहे हँय। 12त कउनव गाँव माहीं घुसत समय उनहीं दसठे कोढ़ी मिलें। 13ऊँ पंचे दूरी ठाढ़ होइके खुब चन्डे से चिल्लाइके कहँइ लागें, “हे यीसु, हे मालिक, हमरे ऊपर दया करी!” 14यीसु उनहीं देखिके कहिन, “जा, अउर अपने काहीं याजकन काहीं देखाबा।” अउर जातय-जात ऊँ सगले सुद्ध होइगें। 15तब उनमा से एकठे, इआ देखिके कि हम नीक होइ गएन हय, खुब चंडे से परमातिमा के बड़ाई करत लउटि आबा, 16अउर उआ सामरिया प्रदेस के रहँइ बाला मनई जउन नीक होइगा रहा हय, यीसु के गोड़न गिरिके धन्यबाद देंइ लाग; 17तब यीसु ओसे कहिन, “का दसँव जने नहीं सुद्ध भें, त पुनि ऊँ नव जने कहाँ हें? 18का इआ गैरयहूदी जाति के अलाबा अउर कउनव नहीं निकरा, जउन परमातिमा के बड़ाई करत?” 19तब यीसु ओसे कहिन, “उठिके चले जा; तोंहार हमरे ऊपर बिसुआस होंइ के कारन तूँ निकहा होइ गया हय।”

परमातिमा के राज के आउब

(मत्ती 24:23-28,37-41)

20एक बेरकी फरीसी लोग यीसु से पूँछिन, कि परमातिमा के राज कबय अई, तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “परमातिमा के राज जाहिर रूप माहीं नहीं आबय। 21अउर मनई इआ न कइहँय कि, ‘देखा, इहाँ हय, इआ उहाँ हय।’ काहेकि देखा, परमातिमा के राज तोंहरे बीच माहीं हय।” 22पुनि यीसु अपने चेलन से कहिन, “ऊँ दिन अइहँय, जउने माहीं तूँ मनई के लड़िका के दिनन म से एक दिन काहीं देखँइ चइहा, पय देखँइ काहीं न पइहा। 23खुब मनई तोंहसे कइहँय, ‘देखा, मसीह उहाँ हें! इआ देखा इहाँ हें! पय तूँ पंचे उनखे बातन के बिसुआस मानिके, उनखे पीछे चले न जया। 24काहेकि जइसन बिजुली अकास के एक छोर से चमकिके, दुसरे छोर तक चमकत ही, उहइमेर मनई के लड़िका, अपने दिन माहीं अई। 25पय पहिले जरूरी हय, कि उआ खुब दुख उठाई, अउर इआ समय के मनई ओही तुच्छ जनिहँय। 26जइसन नूह के दिनन माहीं भ रहा हय, उहयमेर मनई के लड़िका के आमँइ के समय माहीं होई। 27जउने दिन तक नूह जिहाज माहीं चढ़ नहीं गें, तब तक सगले मनई खात-पिअत रहे हँय, अउर ऊँ पंचे काज-बिआह करत रहे हँय, अउर उनखे जिहाज माहीं चढ़तय, जल-प्रलय आइके सब काहीं नास कइ दिहिस। 28अउर इहइमेर लूत के दिनन माहीं भ रहा हय, सगले मनई खात-पिअत रहे हँय, एक दुसरे से लेन-देन करत रहे हँय, बिरबा लगाबत अउर घर बनाबत रहे हँय; 29पय जउने दिन लूत परिबार समेत सदोम सहर से निकरें, उहय दिन आगी अउर गन्धक अकास से बरसें, अउर सगलेन काहीं जलाइके राख कइ दिहिन। 30मनई के लड़िका के आमँइ के दिन घलाय अइसय होई।

31यीसु पुनि कहिन, “उआ दिन जे कोऊ छत माहीं होय, अउर ओखर समान घर के भीतर होय, त उआ ओही लेंइ के खातिर नीचे न उतरय; अउर उहयमेर जे कोऊ खेत माहीं होय, उआ पीछे न लउटय। 32लूत के मेहेरिआ काहीं सुध रक्खा! जइसन उआ परमातिमा के हुकुम नहीं मानिस अउर नोन के खम्भा बनिगे। 33जे कोऊ आपन प्रान बचामँइ चाही, उआ ओही गमाय देई, अउर जे कोऊ हमरे खातिर आपन प्रान तक देंइ काहीं तइआर रही, उआ ओही बचाए पाई। 34यीसु कहिन, हम तोंहसे कहित हएन, उआ दिन दुइठे मनई एकठे खटिया माहीं होइहँय; उनमा से एक जने उठाय लीन जई, अउर दूसर छोंड़ दीन जई। 35उहयमेर एक साथ जेतबा पीसत दुइठे मेहेरिअन म से, एकठे ऊपर उठाय लीन जई, अउर दूसर छोंड़ि दीन जई। 36(दुइ जने खेत माहीं होइहँय, एक जने उठाय लीन जई, अउर दूसर छोंड़ दीन जई।)” 37एतना सुनिके चेला लोग यीसु से पूँछिन, “हे प्रभू इआ कबय होई?” यीसु उनसे कहिन, “जहाँ चील्ह एकट्ठा होती हँय, त इआ जाने मिलत हय, कि उहाँ लहास ही, उहइमेर ईं चिन्हारिन काहीं देखिके, जान लिहा, कि मनई के लड़िका के दुसराय आमँइ के दिन लघेन आइगा हय।”

18

प्राथना करँइ माहीं हिम्मत न हारँइ चाही

1पुनि यीसु रोज प्राथना करँय, अउर हिम्मत न हारँइ चाही, एखे बारे माहीं उनहीं एकठे उदाहरन बताइन: 2“कउनव सहर माहीं एकठे न्यायधीस रहत रहा हय, जउन न परमातिमा से डेरात रहा आय, अउर न कउनव मनइन के परबाह करत रहा आय। 3उहय सहर माहीं एकठे बिधबा रहत रही हय, जउन ओखे लघे आय-आइके कहत रही हय, ‘हमार न्याय चुकाइके हमहीं मुद्दई से बचाबा।’ 4कुछ समय तक त उआ न्यायधीस न मानिस, पय अन्त माहीं अपने मन माहीं बिचार किहिस, हम न त परमातिमा काहीं डेरई, अउर न त मनइन के कउनव परबाह करी; 5तऊ इआ बिधबा हमहीं परेसान करत रहत ही, एसे हम ओखर न्याय चुकाउब, कहँव अइसा न होय कि उआ हर बेरकी आइके हमहीं परेसान करय।”

6प्रभू कहिन, “सुना इआ अधरमी न्यायधीस का कहत हय? 7त का परमातिमा अपने भक्तन के न्याय न चुकइहँय? हाँ, जउन दिन-रात उनहीं पुकारत रहत हें? का परमातिमा उनखे खातिर देरी करिहँय? नहीं। 8हम तोंहसे कहित हएन, परमातिमा हरबिन उनखर न्याय चुकइहँय। तऊ मनई के लड़िका जब अई, त का उआ धरती के मनइन माहीं बिसुआस पाई?”

फरीसी अउर चुंगी लेंइ बालेन के उदाहरन

9जउन अपने ऊपर इआ भरोसा रक्खत रहे हँय, कि हम धरमी हएन अउर दुसरे मनइन काहीं तुच्छ जानत रहे हँय, यीसु उनसे इआ उदाहरन कहिन: 10“एक बेरकी दुइठे मनई मन्दिर माहीं प्राथना करँइ के खातिर गें; एकठे फरीसी, अउर दूसर चुंगी लेंइ बाला रहा हय। 11उआ फरीसी मनई ठाढ़ होइके अपने मन माहीं इआमेर प्राथना करँइ लाग, ‘हे परमातिमा हम अपना के धन्यबाद करित हएन, कि हम दुसरे मनई कि नाईं अन्धेर करँइ बाला, अन्यायी अउर ब्यभिचार करँइ बाला नहिं आहेन, अउर इआ चुंगी लेंइ बाले कि नाईं घलाय नहिं आहेन। 12हम हप्ता माहीं दुइ बेरकी उपासे रहित हएन; अउर अपने सगले कमाई के दसमा भाग दान देइत हएन।’

13पय चुंगी लेंइ बाला दूरिन ठाढ़ होइके, अपने काहीं पापी समझिके स्वरग कइती निहरऊँ नहीं चाहिस, पय खुब दुखी होइके कहिस, ‘हे परमातिमा, हमरे जइसन पापी मनई के ऊपर दया कइके हमार पाप माफ करी!’ 14तब यीसु अपने चेलन से कहिन, हम तोंहसे कहित हएन, कि उआ फरीसी मनई नहीं, पय इआ चुंगी लेंइ बाला परमातिमा के नजर माहीं धरमी ठहराबा जाइके अपने घरय ग; काहेकि जे कोऊ खुद काहीं बड़ा बनाई, उआ परमातिमा के व्दारा छोट कीन जई: अउर जे कोऊ खुद काहीं छोट बनाई, त उआ परमातिमा के व्दारा बड़ा कीन जई।”

यीसु छोट-छोट लड़िकन काहीं आसिरबाद दिहिन

(मत्ती 19:13-15; मरकुस 10:13-16)

15पुनि खुब मनई अपने छोट-छोट लड़िकन काहीं यीसु के लघे लइ आमँइ लागें, कि यीसु उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके आसिरबाद देंय; पय चेला लोग देखिके उनहीं डाँटँइ लागें। 16यीसु छोट-छोट लड़िकन काहीं अपने लघे बोलाइके चेलन से कहिन, “छोट-छोट लड़िकन काहीं हमरे लघे आमँइ द्या, अउर उनहीं न बरजा: काहेकि जे कोऊ छोट-छोट लड़िकन कि नाईं अपने काहीं नम्र बनइहँय, उँइन परमातिमा के स्वरगराज के भागीदार बनिहँय। 17हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जे कोऊ परमातिमा के सँदेस के बात छोट क लड़िका कि नाईं न अपनाई, त उआ परमातिमा के राज माहीं कबहूँ न जाए पाई।”

अनन्त जीबन पामँइ के उपाय

(मत्ती 19:16-30; मरकुस 10:17-31)

18एक दिना कउनव मुखिया यीसु के लघे आइके उनसे पूँछिस, “हे उत्तम गुरू, अनन्त जीबन के हकदार होंइ के खातिर हम का करी?” 19यीसु ओसे कहिन, “तूँ हमहीं उत्तम काहे कहते हया? कोऊ उत्तम नहिं आय, केबल एकठे परमातिमय भर उत्तम हें, अउर उनखे अलाबा कोऊ नहिं आय। 20तूँ परमातिमा के हुकुमन काहीं त जनते हया: ‘ब्यभिचार न करब, कतल न करब, अउर चोरी न करब, लबरी गबाही न देब, अउर अपने महतारी-बाप के मान-सम्मान करब’।” 21उआ कहिस, “हम त ईं सगली बातन काहीं लड़िकइन से मानत आएन हय।” 22इआ सुनिके यीसु ओसे कहिन, “तोंहरे जीबन माहीं एकठे बात के कमी हय, जा, जऊँ कुछ तोंहार धन-सम्पत्ती ही, ओही सब बेंचिके गरीबन माहीं बाँटि द्या, अउर आइके हमरे पीछे चला, तब तोहईं स्वरग माहीं एसे बढ़िके धन-सम्पत्ती मिली।” 23इआ सुनिके उआ खुब उदास होइगा, काहेकि उआ खुब धनी रहा हय। अउर इआ करँइ के ओखर इच्छा नहीं रही। 24तब यीसु ओसे कहिन, “धनी मनइन के परमातिमा के राज म प्रबेस करब केतना कठिन हय! 25परमातिमा के राज माहीं धनी मनई के पहुँचब खुब कठिन हय, बलकिन सूजी के छेंद से ऊँट के निकर जाब, एसे सरल हय।” 26तब सुनँय बाले कहिन, “त पुनि केही मुक्ती मिल सकत ही?” 27यीसु कहिन, “जउन काम मनई से नहीं होइ सकय, उआ परमातिमा से होइ सकत हय, काहेकि परमातिमा सब कुछ कइ सकत हें।” 28तब पतरस यीसु से कहिन, “देखी, हम पंचे त आपन घर-दुआर छोंड़िके अपना के पीछे चले आएन हय।” 29यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जे कोऊ परमातिमा के राज के खातिर आपन घर-दुआर इआ मेहेरिआ, इआ भाई लोगन, इआ महतारी-बाप, इआ लड़िकन-बच्चन, काहीं छोंड़ि दिहिस होय; 30ओही इहय समय माहीं सब कुछ कइअक गुना मिली, अउर स्वरग माहीं अनन्त जीबन मिली।”

अपने मउत के बारे माहीं यीसु के तीसर भबिस्सबानी

(मत्ती 20:17-19; मरकुस 10:32-34)

31पुनि यीसु अपने बरहँव चेलन काहीं अपने साथ लइ जाइके उनसे कहिन, “देखा, हम यरूसलेम सहर काहीं जइत हएन, अउर जेतनी बातँय मनई के लड़िका के बारे माहीं, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के व्दारा लिखी गई हँय, ऊँ सगली पूर होइहँय। 32काहेकि उआ गैरयहूदी लोगन के हाँथे माहीं सउँपा जई, अउर ऊँ पंचे ओखर मजाक उड़इहँय; अउर ओखर अपमान करिहँय, अउर ओखे ऊपर थुँकिहँय, 33अउर ओही चाबुक से मरिहँय, अउर ओही मारि डरिहँय; अउर उआ तिसरे दिन जिन्दा होइ जई।” 34पय चेला लोग ईं बातन म से कउनव बातन काहीं नहीं जाने पाइन, अउर ईं बातँइ उनसे छिपी रहि गईं, काहेकि जउन कुछू उनसे कहा ग तय, उआ उनखे समझ माहीं नहीं आबा।

आँधर भिखारी काहीं नीक करब

(मत्ती 20:29-34; मरकुस 10:46-52)

35जब यीसु अपने चेलन के साथ यरीहो गाँव माहीं पहुँचे, त उहाँ एकठे आँधर मनई भीख मागत सड़क के किनारे बइठ रहा हय। 36उआ, भीड़ के चलँइ के आहट सुनिके पूछँइ लाग, “इआ का होइ रहा हय?” 37भीड़ के मनई ओही बताइन, “नासरत गाँव के यीसु जाय रहे हँय।” 38तब उआ आँधर मनई चिल्लाय-चिल्लाइके कहँइ लाग, “हे राजा दाऊद के सन्तान यीसु हमरे ऊपर दया करी!” 39खुब जने जउन यीसु के आँगे-आँगे जात रहे हँय, ओही डाँटिन, कि चुप्पय होइ जाय; पय उआ अउर चंडे चिल्लाँइ लाग, “हे राजा दाऊद के सन्तान यीसु, हमरे ऊपर दया करी!” 40तब यीसु रुकिगें, अउर चेलन काहीं हुकुम दिहिन, उआ आँधर मनई काहीं हमरे लघे लइ आबा, अउर जब उआ आँधर मनई लघे आइगा, तब यीसु ओसे पूँछिन, 41“तूँ का चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर करी?” उआ आँधर मनई यीसु से कहिस, “हे प्रभू, हम इआ चाहित हएन, कि देखँइ लागी।” 42यीसु उआ आँधर मनई से कहिन, “देखँइ लागा, तोंहार बिसुआस तोंहईं नीक किहिस ही।” 43अउर उआ आँधर मनई हरबिन देखँइ लाग, अउर परमातिमा के बड़ाई करत यीसु के पीछे-पीछे चलँइ लाग; अउर सगले मनई इआ सब देखिके परमातिमा के बड़ाई किहिन।

19

जक्कई काहीं मुक्ती मिलब

1एक दिना यीसु यरीहो सहर होइके जात रहे हँय। 2उहाँ जक्कई नाम के एकठे मनई रहा हय, जउन धनी अउर चुंगी लेंइ बालेन के मालिक रहा हय। 3उआ यीसु काहीं देखँइ चाहत रहा हय, कि यीसु को आहीं? पय एतनी भीड़ रही हय, कि उआ देखे नहीं पाबत रहा, काहेकि उआ छोट डील के रहा हय। 4तब यीसु काहीं देखँइ के खातिर उआ आँगे दउड़िके एकठे ऊमर के बिरबा माहीं चढ़िगा, काहेकि यीसु उहय गली से होइके जाँइ बाले रहे हँय। 5जब यीसु उआ जघा माहीं पहुँचे, त ऊपर कइती देखिके ओसे कहिन, “हे जक्कई हरबी उतरि आबा; काहेकि आज हमहीं तोंहरे घर माहीं रहब जरूरी हय।” 6उआ हरबिन उतरिके बड़े खुसी से यीसु काहीं अपने घरय लइगा। 7इआ देखिके सगले मनई बरबराँय लागें, “ऊँ त पापी मनई के घर माहीं गे हँय।”

8जक्कई ठाढ़ होइके प्रभू से कहिस, “हे प्रभू, देखी, हम आपन आधी धन-सम्पत्ती कंगालन काहीं दए देइत हएन, अउर अगर हम कोहू से अन्याय कइके कुछू लइ लिहेन हय, त ओही चउगुना जादा लउटाए देइत हएन।” 9तब यीसु ओसे कहिन, “आज इआ घर माहीं मुक्ती आई हय; काहेकि इआ मनई चुंगी लेंइ बाला आय, पय अपने कामन से इआ देखाय दिहिस ही, कि अब्राहम के बंस के लड़िका आय। 10काहेकि मनई के लड़िका जे कोऊ पाप के कारन परमातिमा से दूर होइगे हें, उनहीं ढूँढ़ँइ अउर उनहीं मुक्ती देंइ आबा हय।”

दसठे मोहरन के उदाहरन

(मत्ती 25:14-30)

11जब सगले जन ईं बातन काहीं सुनत रहे हँय, तब यीसु एकठे उदाहरन बताइन, काहेकि ऊँ यरूसलेम सहर के लघे रहे हँय, एसे ऊँ सगले जन इआ समझत रहे हँय कि यीसु हरबी राजा बनिके अपने राज के सुरुआत करँइ बाले हें। 12तब यीसु उनसे कहिन, “एकठे धनी मनई दूर देस जाँइ के तइआरी माहीं रहा हय, जउने उहाँ जाइके राज पद पाइके लउटि आबय। 13उआ अपने दासन म से दस जनेन काहीं बोलाइके उनहीं दसठे सोने के मोहर दिहिस, अउर उनसे कहिस, ‘जब तक हम न लउटी त लेन-देन किहा।’ 14पय उआ सहर माहीं रहँइ बाले ओसे दुसमनी रक्खत रहे हँय, अउर ओखे जाँइ के बाद दूतन से सँदेस देबाइन कि, ‘हम पंचे नहीं चाही, कि तूँ हमरे ऊपर राज करा।’

15जब उआ धनी मनई राज पद पाइके अपने सहर माहीं लउटा, तब अइसन भ कि उआ अपने सेबकन काहीं जिनहीं सोने के मोहर दिहिस रहा हय, अपने लघे बोलाइस, जउने मालुम करय कि ऊँ पंचे लेन-देन कइके केतना कमान हें। 16तब पहिल बाला आइके कहिस, ‘हे मालिक अपना के सोने के मोहरन म से दसठे मोहर अउर कमाने हएन।’ 17तब उआ ओसे कहिस, ‘हे धन्य, अउर उत्तम दास तूँ थोरे माहीं बिसुआस के काबिल ठहरे हया, एसे तूँ अब दसठे सहरन माहीं अधिकार रखा।’ 18दूसर दास आइके कहिस, ‘हे मालिक अपना के सोने के मोहर से पाँचठे मोहर अउर कमाने हएन।’ 19उआ धनी मनई ओहू से कहिस, ‘तुहूँ पाँचठे सहरन माहीं सासन करा।’ 20तीसर दास आइके कहिस, ‘हे मालिक, देखी, इआ अपना के उहय सोने के मोहर आय, जउने काहीं हम अँगउछी माहीं बाँधिके धर दिहेन तय। 21काहेकि हम अपना से डेरात रहेन हय, कि अपना खुब कठोर मनई हएन: जउन अपना के न होय ओहू काहीं जबरई लइ लेइत हएन, अउर जहाँ अपना नहीं बोई, उहँव दुसरेव के जमीन के फसल जबरई काटि लेइत हएन।’ 22मालिक ओसे कहिस, ‘हे दुस्ट दास, हम तोरेन मुँह के बात से तोही दोसी ठहराइत हएन। जब तोही मालुम रहा हय, कि हम कठोर मनई हएन, अउर हम जउन नहीं धरेन, ओहू काहीं उठाय लेइत हएन, अउर जऊँ हम नहीं बोयन, ओहू काहीं काटि लेइत हएन; 23त तँय हमार मोहर सोन-चाँदी के बइपार करँइ बालेन के लघे काहे नहीं रख दिहे, कि हम आइके ओसे ब्याज समेत लइ लेइत?’ 24अउर जउन मनई लघे ठाढ़ रहे हँय, मालिक उनसे कहिस, ‘उआ सोने के मोहर ओसे लइके, जेखे लघे दसठे मोहर हईं, ओही दइ द्या।’ 25ऊँ पंचे मालिक से कहिन, ‘हे मालिक, ओखे लघे त दसठे सोने के मोहरँय हईं।’ 26तब मालिक उनसे कहिस, ‘हम तोंहसे कहित हएन, कि जेही जउन दीन ग हय, अगर उआ ओही निकहा से उपयोग करत हय, त ओही अउर दीन जई, अउर ओखे लघे खुब होइ जई। पय जे कोऊ ओही जउन दीन ग हय, अगर ओखर निकहा से उपयोग नहीं करय, त ओसे उहव लइ लीन जई, जउन ओही दीन ग रहा हय। 27पय हमरे ऊँ बइरिन काहीं जउन नहीं चाहत रहें, कि हम उनखे ऊपर राज करी, उनहीं लइ आइके हमरे आँगे मारि डारा।”

यीसु राजा कि नाईं यरूसलेम माहीं प्रबेस किहिन

(मत्ती 21:1-11; मरकुस 11:1-11; यूहन्ना 12:12-19)

28तब यीसु ईं बातन काहीं कहिके चेलन के आँगे-आँगे यरूसलेम सहर कइती चल दिहिन। 29जब यीसु जैतून नाम के पहार के ऊपर बैतफगे अउर बैतनिय्याह गाँव के लघे पहुँचे, तब ऊँ अपने चेलन म से दुइ जनेन काहीं इआ कहिके पठइन, 30“उआ सउहें बाले गाँव माहीं जा; अउर उहाँ पहुँचतय एकठे गदही के बच्चा जउने माहीं कोऊ कबहूँ नहीं चढ़िस, तोंहईं पंचन काहीं बाँधा मिली, ओही छोरिके ले आबा। 31अगर तोंहसे कोऊ पूँछय, कि ओही काहे छोरते हया, त इआ कहि दिहा, कि प्रभू काहीं एखर जरूरत ही।”

32जउन चेला पठए गे रहे हँय, ऊँ पंचे जाइके जइसन यीसु उनसे कहिन तय, उहयमेर पाइन, 33अउर जब ऊँ पंचे गदही के बच्चा काहीं छोरँइ लागें, तबहिनय ओखर मालिक आइगें, अउर उनसे पूँछँइ लागें, “उआ बच्चा काहीं काहे छोरते हया?” 34तब चेला लोग कहिन, “प्रभू काहीं एखर जरूरत ही।” 35तब गदही के बच्चा के मालिक उनहीं लइ जाँय दिहिन, अउर ऊँ पंचे उआ गदही के बच्चा काहीं यीसु के लघे लइ आएँ, अउर आपन ओन्हा उआ गदही के बच्चा के ऊपर डारिके, यीसु काहीं ओखे ऊपर बइठाय दिहिन। 36जब यीसु जात रहे हँय, तब उनखर सम्मान करँइ के खातिर, कुछ जने आपन-आपन ओन्हा गली माहीं बिछाबत जात रहे हँय।

37जैतून पहार के लघे आइके जब यीसु अपने चेलन के साथ पहार के उतारा माहीं पहुँचे, तब चेलन के सगली मंडली ऊँ सगले सामर्थ के कामन काहीं सुध कइके जिनहीं ऊँ पंचे देखिन रहा हय, आनन्दित होइके खुब चंडे से परमातिमा के स्तुति करँइ लागें।

38“धन्य हय उआ राजा, जउन प्रभू के नाम से आबत हय! स्वरग माहीं सान्ती होय, अउर अकास मन्डल माहीं परमातिमा काहीं खुब मान-सम्मान मिलय!”

39तब भीड़ म से कुछ फरीसी लोग यीसु से कहँइ लागें, “हे गुरू, अपने चेलन काहीं डाँटी।” काहेकि इनहीं इआमेर न कहँइ चाही। 40तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हम तोंहसे कहित हएन कि, अगर ऊँ पंचे चुपव रइहँय, त ईं पथरव हमार स्तुति करँइ के खातिर चिल्लाय उठिहँय।”

यरूसलेम सहर के खातिर बिलाप

41जब यीसु यरूसलेम सहर के लघे पहुँचे, तब सहर के मनइन काहीं देखिके रोइन 42अउर कहिन, “केतना निकहा होत कि तूँ पंचे हाँ, तुहिन पंचे आजय, जउन बातँइ सान्ती के साथ जीबन बितामँइ के खातिर जरूरी हईं, उनहीं सुन लेत्या, पय अब उँइ तोंहसे लुकाय दीन गई हँय। 43काहेकि, ‘हे यरूसलेम सहर के मनइव तोंहरे ऊपर अइसन दिन अइहँय, कि तोंहार दुसमन चारिव कइती से यरूसलेम सहर काहीं घेर लेइहँय, अउर चारिव कइती से तोंहईं दबइहँय अउर परेसान करिहँय; 44अउर तोहईं अउर तोंहरे लड़िकन-बच्चन काहीं जउन इहाँ हँय, नास कइ देइहँय, अउर तोंहरे सहर के भीतर ऊँ पंचे एकठेरिव पथरा काहीं एक दुसरे के ऊपर न रहँय देइहँय; काहेकि जब परमातिमा तोंहरे लघे आएँ तय, तब तूँ पंचे उआ घरी काहीं नहीं पहिचान्या।”

मन्दिर से बइपारिन काहीं भगाउब

(मत्ती 21:12-17; मरकुस 11:15-19; यूहन्ना 2:12-22)

45तब यीसु मन्दिर माहीं जाइके, जउन उहाँ मन्दिर माहीं बलिदान चढ़ामँइ के खातिर मबेसी अउर दूसर चीजन काहीं बेंचत रहे हँय, उनहीं बहिरे निकारँइ लागें, 46अउर यीसु उनसे कहिन, “पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि ‘हमार घर प्राथना करँइ के घर होई’, पय तूँ पंचे ओही डँकुअन के अड्डा बनाय दिहा हय।”

47यीसु रोज मन्दिर माहीं उपदेस देत रहे हँय, अउर प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर यहूदी लोगन के मुखिया, उनहीं मारि डारँइ के खातिर मोका ढूँढ़त रहे हँय। 48पय ऊँ पंचे कउनव उपाय नहीं निकारे पाइन, कि यीसु काहीं कउनमेर से मार डारी, काहेकि उहाँ सगले जने यीसु के बातन काहीं खुब चाहत से सुनत रहे हँय।

20

यीसु के अधिकार के ऊपर प्रस्न

(मत्ती 21:23-27; मरकुस 11:27-33)

1एक दिन अइसन भ, कि जब यीसु मन्दिर माहीं मनइन काहीं उपदेस देत रहे हँय, अउर परमातिमा के खुसी के खबर सुनाबत रहे हँय, तबहिनय प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले यहूदी धारमिक अँगुअन काहीं साथ माहीं लइके यीसु के लघे ठाढ़ भें; 2अउर कहँइ लागें, “हमहीं बताबा कि, ईं कामन काहीं तूँ कउने अधिकार से करते हया, अउर उआ को आय, जउन तोंहईं इआ अधिकार दिहिस ही?” 3यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हमहूँ तोंहसे एकठे बात पूँछित हएन, हमहीं बताबा, 4यूहन्ना काहीं बपतिस्मा देंइ के अधिकार परमातिमा से मिला तय, कि मनई उनहीं दिहिन तय? हमहीं बताबा।” 5तब ऊँ पूँछँइ बाले आपस माहीं बताँइ लागें, कि “अगर हम पंचे कहित हएन कि, ‘परमातिमा से मिला तय’ त ऊँ कइहँय कि, ‘पुनि तूँ पंचे उनखर बिसुआस काहे नहीं किहा?’ 6अउर अगर हम पंचे कहित हएन कि, ‘मनइन से मिला तय’ त उहाँ ठाढ़ सगले मनई हमहीं पंचन काहीं पथरा मार-मारके मारि डरिहँय, एहिन से डेरातव रहे हँय, काहेकि सगले मनई जानत रहे हँय, कि इआ बात बेलकुल सही आय, यूहन्ना परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय।” 7एसे ऊँ पंचे जबाब दिहिन, “हम पंचे नहीं जानी, कि उआ अधिकार उनहीं केखे तरफ से मिला तय।” 8तब यीसु उनसे कहिन, “हमहूँ तोंहईं नहीं बताई, कि ईं काम हम कउने अधिकार से करित हएन।”

दुस्ट किसानन के उदाहरन

(मत्ती 21:33-46; मरकुस 12:1-12)

9तब यीसु उहाँ ठाढ़ मनइन काहीं इआ उदाहरन बतामँइ लागें, “कउनव मनई अंगूर के बगिया लगाइस, अउर कुछ किसानन काहीं उआ बगिया के ठेका दइके, खुब दिनन के खातिर परदेस चला ग। 10अउर जब अंगूर के फरँइ के समय आबा, तब उआ मनई किसानन के लघे अपने एकठे दास काहीं पठइस, कि ऊँ पंचे अंगूर के बगिया से ओखे हिस्सा के अंगूर देंय, पय ऊँ किसान, उआ दास काहीं मारिन-पीटिन अउर छूँछय हाँथ लउटाय दिहिन। 11पुनि उआ मनई एकठे अउर दास काहीं किसानन के लघे पठइस; पय ऊँ किसान ओहू काहीं मारिन-पीटिन अउर अपमान कइके छूँछय हाँथ लउटाय दिहिन। 12पुनि उआ मनई तिसरे दास काहीं किसानन के लघे पठइस, पय ऊँ किसान ओहू काहीं घायल कइके बगिया से निकार दिहिन। 13तब अंगूर के बगिया के मालिक कहिस, ‘हम का करी?’ अब हम अपने पियार लड़िका काहीं पठउब, साइद ऊँ किसान ओखर मान-सम्मान करँय, अउर बगिया के कुछ फर देंय। 14जब ऊँ किसान ओखे लड़िका काहीं आबत देखिन, त आपस माहीं कहँइ लागें, ‘इहय त इआ बगिया के बारिसदार आय; आबा हम पंचे मिलिके एही मारि डारी’, जउने एखर अधिकार हमहीं पंचन काहीं मिल जाय। 15अउर ऊँ पंचे उआ लड़िका काहीं पकड़िके अंगूर के बगिया के बहिरे लइ जाइके मारि डारिन। एसे उआ अंगूर के बगिया के मालिक आइके का करी, तूँ पंचे जनते हया? 16उआ बगिया के मालिक आइके किसानन काहीं जान से मारि डारी, अउर अपने बगिया के ठेका दुसरे किसानन काहीं दइ देई।” तब उहाँ ठाढ़ मनई कहँइ लागें “अइसा कबहूँ न होय।” 17यीसु उनखे कइती देखिके कहिन, “काहे तूँ सगले जन पबित्र सास्त्र माहीं लिखी, इआ बात के मतलब नहीं जनते आह्या?

‘जउने पथरा काहीं राजा के कारीगर इआ कहिके, छोंड़ि दिहिन तय, कि इआ कउनव काम के नहिं आय, उहय कोनमा के खास पथरा होइगा’।

18जे कोऊ इआ पथरा माहीं गिरी, उआ चकनाचूर होइ जई, अउर जेखे ऊपर उआ पथरा गिरी, ओही पीस डारी।”

यीसु के बातन माहीं गलती पकड़ँइ के कोसिस

(मत्ती 22:15-22; मरकुस 12:13-17)

19उहय समय मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, अउर प्रधान याजक लोग यीसु काहीं पकड़ँइ चाहिन, काहेकि ऊँ पंचे समझिगे रहे हँय, कि यीसु इआ उदाहरन हमरेन खातिर कहिन हीं, पय ऊँ पंचे उहाँ ठाढ़ सगले मनइन से डेराइगें। 20अउर ऊँ पंचे यीसु के ताक माहीं लगिगें, अउर भेद लेंइ बालेन काहीं पठइन, कि ऊँ धरमिन कि नाईं भेस बनाइके, यीसु के बातन माहीं गलती पकड़ँइ, जउने उनहीं राजपाल के हाँथे माहीं अउर अधिकार माहीं सउँपि देंय। 21ऊँ पंचे यीसु से पूँछिन, “हे गुरू, हम पंचे जानित हएन, कि अपना ठीक कहित हएन, अउर परमातिमा के गइल सच्चाई से बताइत हएन, अउर कोहू के साथ पच्छपात नहीं करी, काहेकि अपना मनइन के मुँह देखिके बातँय नहीं करी। 22ऊँ पंचे यीसु से कहिन, अपना हमहीं बताई, कि महाराजा कैसर काहीं कर देब उचित हय, कि नहीं?” 23यीसु उनखे चलाँकी काहीं जानिके उनसे कहिन, 24“रोमी राज के एकठे सिक्का हमहीं देखाबा। अउर बताबा इआ सिक्का माहीं केखर चित्र अउर नाम हय?” ऊँ पंचे कहिन, “महाराजा कैसर के।” 25तब यीसु उनसे कहिन, “जऊँ महाराजा कैसर के आय, ओही महाराजा कैसर काहीं द्या, अउर जउन परमातिमा के आय, ओही परमातिमा काहीं द्या।” 26ऊँ पंचे मनइन के आँगे इआ बात माहीं कउनव गलती नहीं पकड़े पाइन, तब ऊँ सगले जने यीसु के जबाब सुनिके, खुब अचरज मानिन अउर चुप्पय रहिगें।

दुसराय जिए के बाद काज-बिआह

(मत्ती 22:23-33; मरकुस 12:18-27)

27पुनि सदूकी दल बाले लोग, जऊँ कहत रहे हँय, कि मरे के बाद दुबारा जिन्दा होब, होतय नहिं आय, उनमा से कुछ जने यीसु के लघे आइके उनसे पूँछँइ लागें, 28“हे गुरू, मूसा नबी हमरे खातिर पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखिन हीं, कि ‘अगर कोहू के भाई अपने मेहेरिआ के बिना सन्तान पइदा किहे मर जाय, अउर ओखर मेहेरिआ जिन्दा रहि जाय, त ओखर भाई ओसे काज कइके अपने भाई के खातिर बंस पइदा करय।’ 29एकठे घर म सात भाई रहे हँय। पहिल भाई काज कइके बिना सन्तान पइदा किहे मरिगा। 30तब दूसर नम्बर के भाई उआ मेहेरिआ से काज कइ लिहिस, अउर उहव बिना सन्तान पइदा किहे मरिगा। 31अउर इहइमेर से तिसरव नम्बर के भाई किहिस। अउर इहइमेर से सातव भाई काज कइके बिना सन्तान पइदा किहे मरिगें। 32अउर सगलेन के बाद उआ मेहेरिअव मरिगे। 33त अपना बताई, जब ऊँ पंचे मरेन म से पुनि जिन्दा होइहँय, त उआ मेहेरिआ, केखर मेहेरिआ कहाई? काहेकि उआ सातँव जनेन के मेहेरिआ होइ चुकी तय।” 34तब यीसु उनसे कहिन, “इआ समय के मनइन माहीं त काज-बिआह होत हय, 35पय आमँइ बाले नबा जुग माहीं जाँइ के खातिर, अउर मरेन म से पुनि जिन्दा होंइ के खातिर, जेतने जन परमातिमा के नजर माहीं काबिल ठहरिहँय, उन माहीं काज-बिआह न होई। 36अउर ऊँ पंचे पुनि कबहूँ मरबव न करिहँय; काहेकि ऊँ पंचे स्वरगदूतन कि नाईं होइ जइहँय, अउर मरेन म से पुनि जिन्दा होए से, परमातिमा के सन्तान घलाय बन जइहँय। 37पय इआ बात काहीं बतामँइ के खातिर कि मनई मरिके दुसराय जिन्दा होइ जात हें, मूसा नबी, झाड़ी के किस्सा माहीं जाहिर किहिन हीं, अउर प्रभू काहीं ‘अब्राहम के परमातिमा, अउर इसहाक के परमातिमा, अउर याकूब के परमातिमा कहिन हीं।20:37 निरग 3:638ऊँ मरे मनइन के नहीं, बलकिन जिन्दा मनइन के परमातिमा आहीं: काहेकि परमातिमा के चुने सगले जन उनखे लघे जिन्दा हें।” 39तब इआ बात काहीं सुनिके, मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन म से कुछ जने कहिन, “हे गुरू, अपना ठीक कहेन हय।” 40अउर पुनि दुबारा यीसु से कुछू पूँछँइ के उनखर हिम्मत नहीं परी।

मसीह केखर लड़िका आहीं?

(मत्ती 22:41-46; मरकुस 12:35-37)

41यीसु पुनि उनसे पूँछिन, “मसीह काहीं राजा दाऊद के सन्तान काहे कहत हें?

42दाऊद खुदय भजन संहिता के किताब माहीं कहत हें कि:

‘प्रभू हमरे प्रभू से कहिन। 43हमरे दहिने कइती बइठा,

जब तक कि हम तोंहरे दुसमनन काहीं तोंहरे बस माहीं न कइ देई।’

44राजा दाऊद त खुदय उनहीं प्रभू कहत हें, त मसीह उनखर सन्तानव आहीं, अउर प्रभुअव आहीं?”

मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन से सतरक रहा

(मत्ती 23:1-36; मरकुस 12:38-40)

45जब सगले जन सुनत रहे हँय, तब यीसु अपने चेलन से कहिन, 46“मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन से सतरक रह्या, उनहीं लम्बे-लम्बे कुरथा पहिरे घूमब नीक लागत हय, अउर बजारन माहीं नबस्कार करबाउब, अउर सभाघरन माहीं खास-खास जघा माहीं बइठब, अउर जेउनारन माहीं खास-खास जघा माहीं बइठब नीक लागत हय। 47अउर ऊँ पंचे बिधबन के घरन काहीं लूट लेत हें, अउर खुद काहीं धरमी देखामँइ के खातिर, खुब देर तक प्राथना करत हें। ईं पंचे सगलेन से जादा सजा पइहँय।”

21

कंगाल बिधबा के दान

(मरकुस 12:41-44)

1यीसु ध्यान से देखिन, कि धनमान मनई दान पेटी माहीं आपन-आपन दान, डार रहे हँय। 2तब ऊँ एकठे गरीब बिधबा काहीं घलाय दान पेटी माहीं दुइठे सिक्का दान डारत देखिन। 3तब यीसु अपने सगले चेलन से कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि मन्दिर के दान पेटी म दान डारँइ बालेन माहीं, इआ गरीब बिधबा सगलेन से जादा दान डारिस ही। 4काहेकि सगले जन अपने धन के बढ़ती से कुछ लइके डारिन हीं, पय इआ गरीब बिधबा अपने गरीबी माहीं, जऊँ कुछू ओखे लघे रहा, मतलब जऊँ ओखे खाँइ जिअँइ काहीं रहा हय, आपन सगला धन दान पेटी माहीं डार दिहिस ही।”

मन्दिर के बिनास के भबिस्सबानी

(मत्ती 24:1,2; मरकुस 13:1,2)

5जब कइयक जने मन्दिर के बारे माहीं कहत रहे हँय, कि इआ मन्दिर केतने सुन्दर पथरन से, अउर भेंट के चीजन से सजाबा ग हय, तब यीसु कहिन, 6“इआ सुन्दर मन्दिर जउने काहीं तूँ पंचे देखते हया, एक दिन अइसन होई, कि एक्कव पथरा एक दुसरे के ऊपर न देखइहँय, ईं सगले गिराय दीन जइहँय।”

संकट अउर दुख

(मत्ती 24:3-14; मरकुस 13:3-13)

7ऊँ पंचे यीसु से पूँछिन, “हे गुरू, ईं सगली बातँय कबय होइहँय? अउर जब ईं बातँय होंइ हँय, उआ समय काहीं हम पंचे कइसन जाने पाउब, कउनव चिन्हारी बताई?” 8यीसु कहिन, “सतरक रह्या, कि तोंहईं कोऊ बिसुआस से भटकाए न पाबय, काहेकि खुब जने हमरे नाम से आइके कइहँय, ‘कि हम मसीह आहेन’ अउर इहव कइहँय, कि ‘संसार के अन्त के समय लघे आइगा हय।’ तूँ पंचे उनखे बातन के बिसुआस न किहा। 9अउर तूँ पंचे जब युद्ध होत देख्या, अउर युद्धन के चरचा सुन्या, त घबराय न जया, काहेकि इनखर पहिले होब जरूरी हय, पय उआ समय संसार के अन्त न होई।”

10तब यीसु उनसे कहिन, “एक जाति के मनई, दुसरे जाति के मनइन के ऊपर चढ़ाई करिहँय, अउर एक देस, दुसरे देस के ऊपर चढ़ाई करी, 11अउर बड़े-बड़े भुँइडोल होइहँय, अउर हरेक जघन माहीं अकाल परिहँय, अउर महामारी फइलिहँय, अउर अकास माहीं भयानक बातँय अउर बड़ी-बड़ी अदभुत चिन्हारी देखाई देइहँय। 12पय ईं सगली बातँय होंइ से पहिले, ऊँ पंचे तोंहईं हमार चेला होंइ के कारन पकड़िहँय, अउर मरिहँय, अउर सभाघरन माहीं सउँपिहँय, अउर जेल माहीं बेंड़बाय देइहँय, अउर राजा लोगन अउर अधिकारिन के लघे लइ जइहँय। 13पय उआ समय हमरे बारे माहीं उनहीं बतामँइ क निकहा मोका रही। 14एसे अपने-अपने मन माहीं ठान लिहा, कि हम पंचे पहिलेन से जबाब देंइ के खातिर चिन्ता न करब। 15काहेकि हम तोंहईं अइसन बोल अउर बुद्धी देब, कि तोंहार सगले बिरोधी तोंहार सामना न कए पइहँय, अउर तोंहरे बातन काहीं लबरी न ठहराए पइहँय। 16तोंहार महतारी-बाप, अउर भाई, अउर परिबार के मनई, अउर साथी घलाय तोंहईं पकड़बइहँय; इहाँ तक कि तोंहरे पंचन म से कुछ जनेन काहीं मरबाऊ डरिहँय। 17अउर हमरे ऊपर बिसुआस करँइ के कारन सगले मनई तोंहसे दुसमनी रखिहँय। 18पय तोंहरे मूँड़े के एक्कवठे बारव तक गिरँय न पाई। 19अउर अपने सहनसीलता के कारन तूँ पंचे अपने प्रानन काहीं बचाए रइहा।”

यरूसलेम सहर के नास होंइ के बारे माहीं भबिस्सबानी

(मत्ती 24:15-21; मरकुस 13:14-19)

20यीसु पुनि कहिन, “जब यरूसलेम सहर काहीं सेना से घिरा देख्या, त इआ जान लिहा, कि ओखे बिनास होंइ के समय आइगा हय। 21तब उआ समय जे कोऊ यहूदिया प्रदेस माहीं होंय, त ऊँ पंचे पहारन माहीं भाग जाँय; अउर जे कोऊ यरूसलेम सहर के भीतर होंय, त ऊँ पंचे सहर से बाहर भाग जाँय; अउर जे कोऊ गाँमन माहीं होंय, ऊँ पंचे सहर के भीतर न जाँय। 22काहेकि बदला लेंइ के ऊँ दिनन माहीं अइसय होई, काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखी सगली बातँय पूर कीन जइहँय। 23अउर ऊँ दिनन माहीं जउन मेहेरिआ लड़कहाई होइहँय, अउर जे कोऊ अपने लड़िकन काहीं दूध पिआबत होइहँय, त उनहीं पंचन काहीं खुब कस्ट होई। काहेकि यरूसलेम सहर के मनइन के ऊपर परमातिमा के भारी क्रोध होई। 24ऊँ सगले जन तलबार से मारे जइहँय, अउर उनमा से जऊँ बच जइहँय त उनहीं दुसरे देस के मनई बन्दी बनाइके लइ जइहँय, अउर जब तक गैरयहूदी लोगन के समय पूर न होइ जई, तब तक यरूसलेम सहर गैरयहूदी लोगन के व्दारा रउँदा जई।”

मनई के लड़िका के दुसराय आउब

(मत्ती 24:29-31; मरकुस 13:24-27)

25यीसु इहव कहिन “सुरिज, जोंधइआ, अउर तरइअन माहीं अदभुत चिन्ह देखाई देइहँय; अउर धरती म रहँइ बाले सगले जाति के मनइन काहीं कस्ट अउर मुसीबत होई, काहेकि समुद्र माहीं बाढ़ आमँइ से, अउर ओखे लहरन के अबाज से सगले मनई घबराय जइहँय। 26मारे डेरन के, अउर संसार माहीं आमँइ बाली घटनन काहीं देखत-देखत मनइन के जिव म जिव न रहि जई, काहेकि अकास के सगली चीजँय हलाई जइहँय। 27तब सगले जन मनई के लड़िका काहीं सामर्थ अउर बड़ी महिमा के साथ बदरिन माहीं आबत देखिहँय। 28जब ईं बातँय होंइ लागँय, तब सऊँ ठाढ़ होइके मूँड़ ऊपर काहीं उठाइके देख्या; काहेकि तोंहरे छुटकारा के समय लघे होई।”

अंजीर के बिरबा के उदाहरन

(मत्ती 24:32-35; मरकुस 13:28-31)

29यीसु अपने चेलन से एकठे उदाहरन कहिन: “अंजीर के बिरबा अउर दुसरे बिरबन काहीं देखा। 30जइसय उनमा नबा पत्ता निकरँइ लागत हें, तबहिनय तूँ पंचे अपनेन से जान लेते हया, कि गरमी के रित हरबिन आमँइ बाली हय। 31इहइमेर से जब तूँ पंचे ईं सगली बातन काहीं होत देख्या, त जान लिहा, कि परमातिमा हमरे ऊपर राज करँइ के खातिर हरबिन आमँइ बाले हें। 32हम तोंहसे सही कहित हएन, कि जब तक ईं सगली बातँय पूर न होइ जइहँय, तब तक इआ समय के मनइन के अन्त बेलकुल न होई। 33धरती अउर अकास टर जइहँय, पय हमार कही बातँय कबहूँ न टरिहँय।”

सतरक रहा

(मत्ती 26:36-44; मरकुस 13:32-37)

34यीसु उनसे कहिन, “एसे तूँ पंचे सतरक रहा, अइसन न होय कि तोंहार मन घमन्ड, अउर मतबार, अउर इआ जीबन के चिन्ता माहीं परिके सुस्त होइ जाय, अउर उआ दिन तोंहरे ऊपर फन्दा कि नाईं अचानक आय परय। 35काहेकि परमातिमा के राजा बनिके आमँइ बाला दिन, सगले धरती माहीं रहँइ बालेन के ऊपर इहइमेर से अचानक अई। 36एसे तूँ पंचे हर समय परमातिमा के बचन माहीं बने रहा, अउर प्राथना करत रहा, कि तूँ पंचे ईं आमँइ बाली घटनन से बचि जा, बलकिन जब मनई के लड़िका दुबारा अइहँय, तब तूँ पंचे उनखे आँगे ठाढ़ होंइ के काबिल बने रहा।”

37यीसु दिन माहीं यहूदी मन्दिर माहीं जाइके उपदेस देत रहे हँय, अउर रात माहीं सगलेन से अलग जाइके जैतून नाम के पहार माहीं रहत रहे हँय; 38अउर भिनसरहय यीसु मन्दिर माहीं आय जात रहे हँय, तब खुब मनई उनखे बातन काहीं सुनँय के खातिर मन्दिर के अँगना माहीं उनखे लघे आबत रहे हँय।

22

यीसु के बिरोध माहीं सड़यन्त्र

(मत्ती 26:1-5; मरकुस 14:1,2; यूहन्ना 11:45-53)

1बिना खमीर के रोटी खाँइ बाला तेउहार, जउन फसह कहाबत रहा हय, आमँइ बाला रहा हय; 2अउर प्रधान याजक लोग अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले, इआ बात के मोका माहीं रहे हँय, कि यीसु काहीं कउनवमेर से मारि डारी, पय ऊँ पंचे तेउहार माहीं आए मनइन से डेरात रहे हँय।

यहूदा इस्करियोती के बिसुआस घात

(मत्ती 26:14-16; मरकुस 14:10,11)

3तब सइतान यहूदा इस्करियोती काहीं अपने काबू माहीं कइ लिहिस, जउन बारा चेलन माहीं गिना जात रहा हय। 4उआ जाइके प्रधान याजकन अउर पहरा देंइ बाले सिपाहिन के मुखिअन से बात किहिस, कि यीसु काहीं कउनमेर से उनखे हाँथ माहीं पकड़बाई। 5ऊँ पंचे खुब खुसी भें, अउर ओही रुपिआ देंइ के करार कइ लिहिन। 6यहूदा इस्करियोती राजी होइगा, अउर इआ मोका ढूँढ़ँइ लाग, कि जब भीड़ न होई, तब यीसु काहीं उनखे हाँथ माहीं पकड़बाय देय।

चेलन के साथ फसह के अन्तिम भोज

(मत्ती 26:17-25; मरकुस 14:12-21; यूहन्ना 13:21-30)

7तब बिना खमीर के रोटी खाँय के तेउहार आबा, जउने माहीं बोकरी के बच्चा के बली चढ़ाउब जरूरी रहत रहा हय। 8तब यीसु पतरस अउर यूहन्ना काहीं इआ कहिके पठइन: “तूँ पंचे जाइके हमरे खाँय के खातिर फसह के खाना तइआर किहा।” 9ऊँ दोनव जने यीसु से पूँछिन, “अपना कहाँ चाहित हएन, कि हम पंचे जाइके खाना तइआर करी?” 10यीसु उनसे कहिन, “देखा, जइसय सहर माहीं पहुँचिहा, त तोंहईं एकठे मनई मूँड़े माहीं गघरा लए मिली; उआ जउने घर माहीं जाय; त तूँ पंचे ओखे पीछे-पीछे चले जया, 11अउर उआ घर के मालिक से कह्या: ‘गुरू तोंहसे पूँछिन हीं, कि उआ अँटरिया कहाँ ही, जउने माहीं हम अपने चेलन के साथ तेउहार के खाना खई?’ 12उआ घर के मालिक तोंहईं एकठे सजी-सजाई बड़ी काहीं अँटारी देखाय देई; उहँइ खाना तइआर किहा। 13अउर चेला लोग जाइके, जइसा यीसु कहिन तय, उहयमेर पाइन अउर फसह के खाना तइआर किहिन।

प्रभू-भोज

(मत्ती 26:26-30; मरकुस 14:22-26; 1 कुरिन्थियन 11:23-25)

14जब खाना खाँइके के जूना होइगे, तब यीसु बरहँव खास चेलन के साथ खाना खाँय बइठें। 15अउर यीसु उनसे कहिन, ‘हमार बड़ी इच्छा रही हय, कि दुख सहँइ से पहिले, इआ फसह के तेउहार के खाना तोंहरे साथ खई।’ 16काहेकि हम तोंहसे कहित हएन, कि जब तक परमातिमा के राज माहीं इआ फसह के तेउहार के उद्देस्य पूर न होई, तब तक हम इआमेर खाना कबहूँ न खाब। 17तब यीसु अंगूर के रस से भरा खोरबा लइके परमातिमा काहीं धन्यबाद दिहिन, अउर चेलन से कहिन, ‘एही ल्या, अउर आपस माहीं बाँटिके पि ल्या।’ 18काहेकि हम तोंहसे कहित हएन, कि जब तक परमातिमा के राज दुसराय न आय जई, तब तक हम अंगूर के रस अब से कबहूँ न पिअब। 19ओखे बाद यीसु एकठे रोटी लिहिन, अउर परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके टोरिन, अउर चेलन काहीं इआ कहिके दिहिन, ‘इआ हमार देंह आय, जउन तोंहरे खातिर दीन जात ही: हमरे यादगारी माहीं इहइमेर करत रह्या।’ 20इहइमेर से यीसु खाना खाए के बाद, अंगूर के रस से भरा खोरबा लइके, इआ कहिके चेलन काहीं दिहिन, ‘इआ हमार खून आय जउन तोंहरे खातिर बहाबा जात हय, इआ खून परमातिमा के नई करार के प्रतीक आय।’ 21पय देखा, हमहीं बिरोधिन के हाँथ माहीं पकड़ामँइ बाला हमरे साथय माहीं खाना खाँइ बइठ हय। 22काहेकि मनई के लड़िका त जइसा परमातिमा ओखे खातिर ठहराइन हीं, जातय हय, पय जउन मनई धोखा दइके मनई के लड़िका काहीं पकड़ामँइ बाला हय, ओही परमातिमा से खुब सजा मिली!” 23तबहिनय चेला लोग आपस माहीं पूँछँइ लागें, कि हमरे बीच म से इआ काम को करँइ बाला हय?

सबसे बड़ा को हय? एखे खातिर बिबाद

24चेलन माहीं इआ बिबाद होंइ लाग, कि हमरे पंचन म से सबसे बड़ा को हय? 25यीसु उनसे कहिन, “गैरयहूदी जातिअन माहीं उनखर राजा उनखे ऊपर हुकुम चलाबत हें; त जे उनखे ऊपर अधिकार जताबत हें; ऊँ पंचे मनइन के उपकार करँइ बाले माने जात हें। 26पय तूँ पंचे इआमेर न होया; बलकिन जउन तोंहरे बीच माहीं सगलेन से बड़ा हय, उआ सगलेन से छोट कि नाईं बनय, अउर जउन मुखिया हय, उआ सगलेन के सेबा करँइ बाले कि नाईं बनय। 27काहेकि बड़ा को हय, उआ जउन खाँय बइठ हय, इआ कि जउन सेबा करत हय? का उआ नहीं जउन खाँय बइठ हय? पय हम तोंहरे बीच माहीं सेबक कि नाईं हएन।

28ऊँ पंचे तुहिन आह्या, जउन हमरे परिच्छन माहीं हमेसा हमरे साथ रहे हया; 29एसे जइसन हमार पिता परमातिमा हमहीं राज करँइ के खातिर एकठे राज दिहिन हीं, उहयमेर हमहूँ तोंहईं राज चलामँइ के हक्क देब, 30जउने तूँ पंचे हमरे राज माहीं हमरे साथ खा-पिआ, अउर सिंहासनन माहीं बइठिके इजराइल के बरहँव गोत्रन के न्याय करा।”

पतरस के इनकार के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी

(मत्ती 26:31-35; मरकुस 14:27-31; यूहन्ना 13:36-38)

31यीसु कहिन, “समौन हे समौन! देखा, सइतान परमातिमा से तोंहईं माँग लिहिसी, कि गोहूँ कि नाईं फटकय मतलब जाँचय-परखय, 32पय हम तोंहरे खातिर परमातिमा से बिनती किहेन हय, कि तोंहार बिसुआस कमजोर न होय, पय जब तूँ पुनि बिसुआस माहीं मजबूत होइहा, तब अपने भाइन काहीं स्थिर किहा।” 33समौन यीसु से कहिन, “हे प्रभू हम अपना के साथ जेल माहीं जाँइ के खातिर, अउर मरऊँ खातिर तइआर हएन।” 34यीसु उनसे कहिन, “हे पतरस हम तोंहसे कहित हएन, कि आजय मुरगा के बोलँइ से पहिले, तूँ तीन बेरकी इनकार करिहा, कि हम यीसु काहीं नहीं जानी।”

बटुआ, झोरिया, अउर तलबार

35पुनि यीसु अपने चेलन से कहिन, “जब हम तोंहईं बिना बटुआ, झोरिया अउर पनहीं के पठयन तय, त तोंहईं कउनव चीज के कमी भे रही हय का?” ऊँ चेला लोग कहिन, “कउनव चीज के कमी नहीं भे तय।” 36पुनि यीसु चेलन से कहिन, “पय अब जेखे लघे बटुआ होय त ओही लइ लेय, अउर उहयमेर झोरिया लइ लेय, अउर जेखे लघे तलबार न होय, त उआ आपन ओन्हा बेंचिके एकठे तलबार खरीद लेय, 37काहेकि हम तोंहसे कहित हएन कि, इआ जउन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि ‘उआ अपराधिन के साथ गिना जई’, उआ बात के हमरे ऊपर पूर होब जरूरी हय; काहेकि हमरे बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बात पूर होंय बाली हईं।” 38ऊँ चेला लोग कहिन, “हे प्रभू, देखी इहाँ दुइठे तलबार हईं।” यीसु उनसे कहिन, “बस होइगा।”

जैतून पहार के ऊपर यीसु के प्राथना

(मत्ती 26:36-46; मरकुस 14:32-42)

39तब यीसु उहाँ से उठिके रोज कि नाईं जैतून पहार माहीं चलेगें, तब उनखर चेला लोग घलाय उनखे पीछे-पीछे चलेगें। 40यीसु उआ जघा माहीं पहुँचिके उनसे कहिन, “प्राथना करा, जउने तूँ पंचे परिच्छा माहीं न परा।” 41अउर यीसु उनसे थोर काहीं आँगे जाइके, टिहुनी के बल बइठिके प्राथना करँइ लागें, 42“हे पिता परमातिमा, अगर अपना चाही, त हमरे ऊपर आमँइ बाले इआ भारी कस्ट काहीं दूर कइ सकित हएन, तऊ हमार नहीं, पय अपना के इच्छा पूर होय।” 43तब स्वरग से एकठे दूत यीसु काहीं देखान, जउन उनहीं सामर्थ देत रहा हय। 44यीसु आमँइ बाले संकट से खुब ब्याकुल होइके, हिरदँय माहीं खुब दुखी होइके अउर जादा प्राथना करँइ लागें; अउर उनखे देंह से पसीना, खून कि नाईं अउर बड़े-बड़े बूँदन कि नाईं भुँइ माहीं गिरत रहे हँय। 45तबहिनय यीसु प्राथना कइके उठें, अउर अपने चेलन के लघे गें, अउर उनहीं उदासी के मारे सोबत पाइन। 46तब यीसु उनसे कहिन, “काहे सोउते हया? उठा, प्राथना करा, जउने तूँ पंचे परिच्छा माहीं न परा।”

यीसु काहीं धोखे से पकड़ा जाब

(मत्ती 26:47-56; मरकुस 14:43-50; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसु ईं बातन काहीं कहतय रहे हँय, तबहिनय एकठे भीड़ उनखे लघे आई, अउर ऊँ बारा चेलन म से एकठे जेखर नाम यहूदा इस्करियोती रहा हय, भीड़ के आँगे-आँगे आबत रहा हय। उआ यीसु के लघे आबा, कि उनखर चूमा लेय। 48यीसु ओसे कहिन, “हे यहूदा, का तूँ चूमा लइके मनई के लड़िका काहीं पकड़बउते हया?” 49उनखर चेला लोग जब देखिन, कि का होंइ बाला हय, तब कहिन “हे प्रभू का हम पंचे तलबार चलाई?” 50यीसु के कुछू बोलँइ से पहिलेन, चेलन म से एक जने महायाजक के दास के ऊपर तलबार चलाइके, ओखर दहिना कान काटि लिहिन। 51तब यीसु कहिन, “बस अब कुछू न करा।” अउर ओखे कान काहीं छुइके नीक कइ दिहिन। 52तब यीसु प्रधान याजकन अउर मन्दिर माहीं पहरा देंइ बालेन के अधिकारिन अउर, यहूदी धारमिक अँगुअन से, जउन उनहीं पकड़ँइ आए रहे हँय, कहिन, “का तूँ पंचे हमहीं डाँकू जानिके तलबारन अउर लाठिन काहीं लइके पकड़ँइ आए हया? 53जब हम मन्दिर माहीं रोज तोंहरे साथ रहत रहेन हय, तब तूँ पंचे हमहीं गिरफतार नहीं किहा, पय अब तोंहरे इच्छा के मुताबिक हमहीं पकड़ँइ के समय हय, काहेकि तूँ पंचे सब सइतान के काबू माहीं आय गया हय।”

पतरस के इनकार करब

(मत्ती 26:57,58,69-75; मरकुस 14:53,54,66-72; यूहन्ना 18:12-18,25-27)

54तब ऊँ पंचे यीसु काहीं पकड़िके चल दिहिन, अउर महायाजक के घर माहीं लइ आएँ। अउर पतरस दूरिन-दूरी यीसु के पीछे-पीछे जात रहे हँय। 55अउर जब ऊँ पंचे अँगना माहीं आगी बारिके एकट्ठा बइठिगें, तब पतरस घलाय उनखे बीच माहीं बइठिगें। 56तब एकठे दासी पतरस काहीं आगी के उँजिआरे माहीं बइठे देखिस, अउर ओखी कइती ध्यान से देखिके कहँइ लाग, “इहव घलाय यीसु के साथ रहा हय।” 57पय पतरस इआ कहिके इनकार किहिन, “हे महिला, हम उनहीं नहीं जानी।” 58थोरी देर बाद एक जने अउर पतरस काहीं देखिके कहिस, “तुहूँ घलाय उनहिन म से आह्या।” पतरस कहिन, “हे भाई हम उनमा से न होंहेन।” 59थोरी देर बाद एकठे अउर मनई जोर दइके कहँइ लाग, “निस्चित इहव घलाय यीसु के साथय रहा हय, काहेकि इहव गलील प्रदेस माहीं रहँइ बाला आय।” 60पतरस कहिन, “हे भाई, हम नहीं जानी कि तूँ का कहते हया!” जब पतरस इआ बात कहतय रहे हँय, ओतनिनदार मुरगा बोलिस। 61तब प्रभू मुड़िके पतरस कइती निहारिन, अउर पतरस काहीं प्रभू के कही बात याद आइगे, जउन ऊँ कहिन रहा हय: “आज मुरगा के बोलँइ से पहिले तूँ तीन बेरकी हमहीं इनकार करिहा।” 62तब पतरस बहिरे निकरिके फूट-फूटिके रोमँइ लागें।

यीसु के अपमान

(मत्ती 26:67,68; मरकुस 14:65)

63जउन मनई यीसु काहीं पकड़े रहे हँय, ऊँ पंचे यीसु के हँसी उड़ाइके मारँइ लागें; 64अउर उनखर आँखी मूदिके उनसे पूँछँइ लागें, “भबिस्यबानी कइके बताबा, कि तोंहईं को मारिस ही!” 65अउर ऊँ पंचे उनखर खुब अपमान करत अउर अपमानजनक बातँय कहत रहे हँय।

महासभा के आँगे यीसु

(मत्ती 26:59-66; मरकुस 14:55-64; यूहन्ना 18:19-24)

66जब सकार भ, तब यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, अउर प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले एकट्ठा भें, अउर यीसु काहीं अपने महासभा माहीं लइ जाइके पूँछिन, 67“अगर तूँ मसीह आह्या, त हमहीं बताय द्या!” यीसु उनसे कहिन, “अगर हम तोंहसे कही, त तूँ पंचे बिसुआस न मनिहा; 68अउर अगर हम मसीह के बारे माहीं पूँछी त तूँ पंचे बताए न पइहा। 69पय अब से मनई के लड़िका सर्बसक्तिमान परमातिमा के दहिने कइती बइठ रही।” 70ईं बातन काहीं सुनिके सगले जन कहिन, “का तूँ परमातिमा के लड़िका आह्या?” यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे खुदय कहते हया, काहेकि हम उहय आहेन।” 71तब ऊँ पंचे कहिन, “अब हमहीं कउनव गबाही के जरूरत नहिं आय, काहेकि हम पंचे खुदय ओखे मुँहे से सुन लिहेन हय; कि उआ अपने काहीं परमातिमा के लड़िका कहत हय।”

23

राजपाल पिलातुस के आँगे यीसु

(मत्ती 27:1,2,11-14; मरकुस 15:1-5; यूहन्ना 18:28-38)

1तब सभा के सगले जने यीसु काहीं राजपाल पिलातुस के लघे लइगें। 2ऊँ पंचे इआ कहिके यीसु के ऊपर दोस लगामँइ लागें: “हम पंचे एही खुब मनइन काहीं बहकाबत, अउर महाराजा कैसर काहीं कर देंइ से बरजत, अउर अपने काहीं मसीह अउर राजा कहत सुनेन हँय।” 3राजपाल पिलातुस यीसु से पूँछिन, “का तूँ यहूदी लोगन के राजा आह्या?” यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “तूँ खुदय कहते हया!” 4तब राजपाल पिलातुस प्रधान याजकन अउर मनइन से कहिन, “हम इआ मनई माहीं कउनव दोस नहीं पाई।” 5पय ऊँ पंचे अउर जोर दइके कहँइ लागें, “इआ सगले यहूदिया प्रदेस माहीं सब मनइन काहीं अपने उपदेसन से बहकाइस ही। इआ काम गलील प्रदेस से सुरू किहिस तय, अउर अब इहाँ तक आइगा हय।” 6इआ बात सुनिके राजपाल पिलातुस पूँछिन, “का इआ मनई गलील प्रदेस के रहँइ बाला आय?” 7अउर इआ जानिके कि यीसु, हेरोदेस राजा के राज के आहीं, उनहीं हेरोदेस राजा के लघे पठय दिहिन, काहेकि उन दिनन माहीं हेरोदेस राजा घलाय यरूसलेम सहर माहीं रहे हँय।

हेरोदेस राजा के आँगे यीसु

8हेरोदेस राजा यीसु काहीं देखिके खुब खुसी भें, काहेकि ऊँ यीसु काहीं खुब दिनन से देखँइ चाहत रहे हँय; अउर ऊँ सुनिन रहा हय, कि यीसु चमत्कार देखाबत हें, एसे ऊँ यीसु से कुछ चमत्कार देखँइ के आसा करत रहे हँय। 9राजा हेरोदेस यीसु से अउर खुब बातँय पूँछत रहिगें, पय यीसु उनहीं कुछू जबाब नहीं दिहिन। 10प्रधान याजक लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले ठाढ़े-ठाढ़े तन मन से यीसु के ऊपर दोस लगाबत रहिगें। 11तब हेरोदेस राजा अपने सिपाहिन के साथ यीसु के अपमान किहिन, अउर मजाक उड़ाइन, अउर चमकीला ओन्हा पहिरायके उनहीं राजपाल पिलातुस के लघे लउटाय दिहिन। 12उहय दिन से राजपाल पिलातुस, अउर हेरोदेस राजा एक दुसरे के साथी होइगें; काहेकि एखे पहिले ऊँ एक दुसरे के दुसमन रहे हँय।

राजपाल पिलातुस यीसु काहीं मउत के सजा सुनाइन

(मत्ती 27:15-26; मरकुस 15:6-15; यूहन्ना 18:39—19:16)

13राजपाल पिलातुस प्रधान याजकन अउर सेना के मुखिअन अउर सगले जनेन काहीं बोलाइके उनसे कहिन, 14तूँ पंचे इआ मनई काहीं, लोगन काहीं बहकामँइ बाला बताइके, हमरे लघे लइ आया हय। अउर देखा, हम तोंहरे आँगेन ओखर जाँच-परताल किहेन हय, पय जउने बातन के दोस तूँ पंचे ओखे ऊपर लगउते हया, ऊँ बातन के बारे माहीं हम कउनव दोस नहीं पाएन; 15अउर न हेरोदेस राजा ओही कउनव सजा देंइ के काबिल दोस पाइन, एसे ऊँ हमरे लघे लउटाय दिहिन हीं: अउर देखा, उआ अइसन कउनव काम नहीं किहिस, कि ओही मउत के सजा दीन जाय। 16एसे हम ओही चाबुक मरबाइके छोंड़े देइत हएन। 17(यहूदी लोगन के नेम के मुताबिक, फसह के तेउहार के दिन एकठे कइदी काहीं छोंड़ दीन जात रहा हय, एसे राजपाल पिलातुस तेउहार के दिन एकठे कइदी काहीं छोंड़ँइ के खातिर मजबूर रहा हय।) 18तब सगले जन एकसाथय चिल्लाय उठें, “एही मारि डारा, अउर हमरे खातिर बरअब्बा डाँकू काहीं छोंड़ि द्या!” 19बरअब्बा कउनव दंगा माहीं सामिल होंइ के कारन जउन सहर माहीं भ रहा हय, अउर कतल करँइ के दोसी होंइ के कारन जेल माहीं बंद कीन ग रहा हय। 20पय पिलातुस यीसु काहीं छोंड़ि देंइ के इच्छा से, मनइन काहीं दुसराय समझाइन, 21पय ऊँ पंचे चिल्लाइके कहिन, “ओही क्रूस माहीं चढ़ाबा, क्रूस माहीं!” 22राजपाल पिलातुस तिसराय उनसे कहिन, “काहे, ऊँ कउन अपराध किहिन हीं? हम मउत के सजा देंइ के काबिल उन माहीं कउनव गलती नहीं पाएन। एसे हम उनहीं चाबुक मरबाइके छोंड़े देइत हएन।” 23पय ऊँ पंचे खुब चिल्लाय-चिल्लाइके इआ दबाव डारिन, कि ओही क्रूस माहीं चढ़ाबा जाय, अउर उनखर चिल्लाब सफल भ, मतलब ऊँ पंचे जइसन कहत रहे हँय, उहयमेर भ। 24अरथात राजपाल पिलातुस हुकुम दिहिन, कि उनखे बिनती के मुताबिक कीन जाय। 25राजपाल पिलातुस उआ मनई काहीं जउन दंगा अउर कतल के अरोप के कारन जेल माहीं बंद रहा हय, अउर जउने काहीं ऊँ पंचे मागत रहे हँय, छोंड़ दिहिन, अउर यीसु काहीं उनखे इच्छा के मुताबिक सउँप दिहिन।

यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाबा जाब

(मत्ती 27:32-44; मरकुस 15:21-32; यूहन्ना 19:17-27)

26जब ऊँ पंचे यीसु काहीं लए जात रहे हँय, तब ऊँ पंचे, कुरेन सहर के रहँइ बाले समौन नाम के एकठे मनई काहीं, जउन गाँव कइत से चला आबत रहा हय, पकड़िके ओखे ऊपर क्रूस लाद दिहिन, कि ओही यीसु के पीछे-पीछे लइ चलय।

27अउर मनइन के खुब बड़ी भीड़ यीसु के पीछे-पीछे चल दिहिस, अउर भीड़ माहीं खुब मेहेरिआ घलाय रही हँय, जउन यीसु के खातिर खुब दुखी होइके छाती पीट-पीटिके रोबत रही हँय। 28यीसु उनखे कइती मुड़िके कहिन, “हे यरूसलेम सहर के बिटिअव, हमरे खातिर न रोबा; बलकिन अपने अउर अपने लड़िकन-बच्चन के खातिर रोबा। 29काहेकि देखा, ऊँ दिन अइहँय, जउने माहीं मनई कइहँय, ‘धन्य हईं ऊँ मेहेरिआ जिनखे लड़िका-बच्चा नहीं भें, अउर ऊँ जउन लड़िकन काहीं दूध नहीं पिआइन।’

30उआ समय माहीं ‘भयानक संकट से बचँइ के खातिर ऊँ पंचे पहारन से कइहँय, कि हमरे ऊपर गिरा, अउर टीलन से कइहँय, कि हमहीं मूँद ल्या।’

31काहेकि जब ऊँ पंचे हमरे साथ जउन हम हरिअर बिरबा कि नाईं हएन अइसन करत हें, त उनहीं जउन झुरान बिरबा कि नाईं दोसी हँय, खुब सजा देइहँय?” 32अउर ऊँ पंचे दुइठे अउर मनइन काहीं जउन कुकर्मी रहे हँय, यीसु के साथय मारँइ के खातिर लइके चल दिहिन। 33जब ऊँ पंचे उआ जघा माहीं पहुँचे, जउने काहीं खोपड़ी कहत हें, तब ऊँ पंचे यीसु काहीं अउर ऊँ कुकर्मिन काहीं घलाय, एकठे क दहिने कइती, अउर दुसरे काहीं बाएँ कइती क्रूस माहीं चढ़ाइन। 34तब यीसु कहिन, “हे पिता, इनहीं माफ करी, काहेकि ईं पंचे नहीं जानँय, कि हम का कइ रहेन हँय।” अउर ऊँ पंचे परची डारिके उनखे ओन्हन काहीं बाँटि लिहिन।

35खुब मनई ठाढ़े-ठाढ़े देखत रहे हँय, अउर सभाघर के मुखिया लोग घलाय उनखर मजाक उड़ाइके कहत रहे हँय: “इआ दुसरेन काहीं बचाइस, अगर इआ परमातिमा के मसीह आय, अउर उनखर चुना आय, त खुद काहीं बचाय लेय।” 36सिपाही घलाय लघे आइके अउर पिअँइ के खातिर सिरका दइके उनखर हँसी उड़ाइके, कहत रहे हँय, 37“अगर तँय यहूदी लोगन के राजा आहे, त खुद काहीं बचाव!” 38अउर उनखे ऊपर एकठे अरोप-पत्र घलाय लगा रहा हय, कि “ईं यहूदी लोगन के राजा आहीं।”

मन बदलँइ बाला कुकर्मी

39जउन कुकर्मी उहाँ क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय, उनमा से एक जने उनखर बुराई कइके कहिस, “का तूँ मसीह न होह्या? त पुनि खुद काहीं अउर हमहीं बचाबा!” 40तब दूसर बाला ओही डाँटिके कहिस, “का तँय परमातिमा से घलाय नहीं डेराते आहे? तहूँ त उहय सजा पउते हय, 41हम पंचे त जउन गलत काम किहेन हय, ओहिन के मुताबिक सजा पाय रहेन हँय; काहेकि हम पंचे अपने गलत कामन के उचित फल पाय रहेन हँय; पय ईं त कउनव गलत काम नहीं किहिन, तऊ सजा पाय रहे हँय।” 42तब पहिल बाला कहिस, “हे यीसु, जब अपना राजा बनिके राज करब, तब हमार सुधि लेब।” 43यीसु ओसे कहिन, “हम तोंहसे सही कहित हएन, कि तूँ आजय हमरे साथ स्वरगराज माहीं होइहा।”

यीसु के प्रान छोंड़ब

(मत्ती 27:45-56; मरकुस 15:33-41; यूहन्ना 19:28-30)

44अउर करीब दुपहर बारा बजे से लइके, तीन बजे तक सगले देस माहीं अँधिआर छाबा रहिगा, 45अउर सुरिज के उँजिआर देब बंद होइगा, अउर मन्दिर के परदा बीच से फाटिगा, 46अउर यीसु खुब चंडे से चिल्लाइके कहिन, “हे पिता, हम आपन आत्मा अपना के हाँथे माहीं देइत हएन।” अउर एतना कहिके प्रान छोंड़ दिहिन। 47जउन कुछू इआ भा रहा हय, सुबेदार देखिके परमातिमा के बड़ाई करँइ लाग, अउर कहिस, “जरूर ईं धरमी मनई रहे हँय।” 48अउर भीड़ के सगले मनई जे इआ सगला हाल देखँइ के खातिर एकट्ठा भे रहे हँय, इआ घटना काहीं देखिके खुब दुखी होइके लउटिगें। 49अउर यीसु के सगले जान-पहिचान बाले, अउर जउन मेहेरिआ गलील प्रदेस से उनखे साथ आई रही हँय, दूरी ठाढ़ होइके इआ सगला हाल देखत रही हँय।

यीसु काहीं गाड़ा जाब

(मत्ती 27:57-61; मरकुस 15:42-47; यूहन्ना 19:38-42)

50उहाँ यूसुफ नाम के एकठे मनई रहे हँय, जउन महासभा के सदस्य रहे हँय, अउर ऊँ सज्जन अउर धरमी रहे हँय। 51अउर ऊँ यहूदी लोगन के योजना, अउर यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ामँइ के काम से प्रसन्न नहीं रहे आँय। ऊँ यहूदी लोगन के गाँव अरमतिया के रहँइ बाले, अउर परमातिमा के सुख सान्ति के राज आमँइ के इन्तजार करत रहे हँय। 52ऊँ राजपाल पिलातुस के लघे जाइके, यीसु के लहास माँगिन; 53अउर जब राजपाल पिलातुस मंजूरी दइ दिहिन, तब ऊँ यीसु काहीं क्रूस से उतरबाइके मखमल के चद्दरा माहीं लपेट लिहिन, अउर एकठे कब्र माहीं धरिन, जउन चट्टान माहीं खोदी गे रही हय; अउर ओमा कबहूँ कउनव लहास नहीं धरी गे रही आय। 54सुरिज बूड़ँइ के बाद, पबित्र दिन सुरू होंइ बाला रहा हय, एसे उआ तइआरी के दिन रहा हय। 55ऊँ मेहेरिआ जउन गलील प्रदेस से आई रही हँय, पीछे-पीछे जाइके उआ कब्र काहीं देखिन, अउर इआ घलाय देखिन कि यीसु के लहास कउनमेर से रखी गे ही। 56तब ऊँ पंचे लउटिके महकँइ बाली चीज अउर अँतर बनाइके तइआर किहिन, अउर पबित्र दिन काहीं, ऊँ पंचे परमातिमा के हुकुम के मुताबिक अराम किहिन।

24

मरेन म से यीसु के जिन्दा होब

(मत्ती 28:1-10; मरकुस 16:1-8; यूहन्ना 20:1-10)

1पय हप्ता के पहिलय दिन अइतबार काहीं भिनसरहय सगली मेहेरिआ महकँइ बाली चीजन काहीं लइके जउनेन काहीं तइआर किहिन तय, कब्र माहीं आईं। 2ऊँ पंचे उआ पथरा काहीं कब्र के दुअरा से ढनगा पाइन, 3पय ऊँ पंचे कब्र के भीतर जाइके यीसु के लहास नहीं पाइन। 4जब ऊँ पंचे इआ बात काहीं देखिके घबरान जात रही हँय, तबहिनय देखिन, कि दुइठे मंसेरुआ खुब चमकत ओन्हा पहिरे उनखे लघे आइके ठाढ़ होइगें। 5जब ऊँ पंचे मारे डेरन के नीचे काहीं मूड़ कए रहि गईं, तब ऊँ दोनव जने उनसे कहिन, “तूँ पंचे जिन्दा काहीं, मरेन माहीं काहे ढुँढ़ते हया? 6ऊँ इहाँ नहिं आहीं, बलकिन जिन्दा होइगे हँय। सुधि करा, कि ऊँ जब गलील माहीं रहे हँय, त तोंहसे का कहिन तय। 7ऊँ इआ कहिन तय, कि ‘जरूरी हय, कि मनई के लड़िका पापिन के हाँथ माहीं पकड़ाबा जई, अउर क्रूस माहीं चढ़ाबा जई, अउर मरिके तिसरे दिन जिन्दा होइ जई’।” 8तब उनहीं यीसु के कही बात सुधि आई, 9अउर कब्र से लउटिके ऊँ पंचे, यीसु के ग्यरहँव चेलन से, अउर उहाँ ठाढ़ सगले मनइन से सगली बातन काहीं बताइन। 10जउन ईं बातन काहीं खास चेलन से बताइन रहा हय, ऊँ पंचे ईं आहीं, मगदल गाँव के मरियम, अउर योअन्ना अउर याकूब के महतारी मरियम अउर उनखे साथ अउरव मेहेरिआ रही हँय। 11पय उनखर बातँय उनहीं कहानी कि नाईं लागीं, एसे ऊँ पंचे बिसुआस नहीं किहिन। 12तब पतरस उठिके कब्र माहीं दउड़त गें, अउर कब्र के भीतर निहुरिके देखिन, त यीसु के ओन्हा भर देखाने, अउर जउन भ रहा हय, ओसे अचम्भित होइके जहाँ रहत रहे हँय, उहय घर माहीं लउटिगें।

इम्माऊस के गइल माहीं चेलन के साथ यीसु

(मरकुस 16:12,13)

13उहय दिन चेलन म से दुइ जने इम्माऊस नाम के गाँव काहीं जात रहे हँय, जउन यरूसलेम सहर से करीबन 11 किलोमीटर के दूरी माहीं रहा हय। 14जउन बातँय यरूसलेम सहर माहीं भे रही हँय, उनहिन के चरचा ऊँ पंचे आपस माहीं करत जात रहे हँय, 15अउर जब ऊँ दोनव जने आपस माहीं बात करत अउर एक दुसरे से पूँछत जात रहे हँय, तबहिनय यीसु आइके उनखे साथय रेंगँइ लागें। 16पय परमातिमा उनखे आँखिन काहीं अइसन बंद कइ दिहिन तय, कि जउने ऊँ पंचे यीसु काहीं चीन्हे न पामँय। 17तब यीसु उनसे पूँछिन, “ईं कउन बातँय आहीं, जउन तूँ पंचे चलतय-चलत आपस माहीं करत जाते हया?” ऊँ पंचे एतना सुनिके अनमन ठाढ़ रहिगें। 18तब यीसु के बात काहीं सुनिके, उनहिन म से एक जने जेखर नाम क्लियुपास रहा हय कहिस, “का तूँ यरूसलेम सहर माहीं अकेले परदेसी रहइआ हया, जउन नहीं जनते आह्या, कि ईं दिनन माहीं यरूसलेम सहर माहीं का-का भ हय?” 19यीसु उनसे पूँछिन, “कउन बातँय?” ऊँ दोनव जने उनसे कहिन, “नासरत गाँव माहीं रहँइ बाले यीसु के बारे माहीं, जउन परमातिमा के निगाह माहीं, अउर लोगन के बीच माहीं काम करँइ माहीं, अउर बचन माहीं सामरथी अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय। 20उनहीं प्रधान याजक लोग अउर हमरे समाज के मुखिया पकड़बाइन, कि उनहीं मउत के सजा के हुकुम दीन जाय, जब राजपाल हुकुम दइ दिहिन, तब उनहीं लइ जाइके क्रूस माहीं चढ़बाय दिहिन। 21पय हमहीं पंचन काहीं बड़ी आसा रही हय, कि यीसु सगले इजराइल के मनइन काहीं रोम सम्राज के गुलामी से मुक्ती देइहँय। इआ घटना काहीं भए आज तीसर दिन आय। 22अउर हमरेन बीच म से कइअकठे मेहेरिआ हमहीं अचरज माहीं डार दिहिन हीं, जउन बड़े सकन्ने कब्र माहीं गई रही हँय; 23जब ऊँ पंचे उनखर लहास नहीं पाइन, त इआ कहत आईं कि हम पंचे स्वरगदूतन के दरसन पाएन हय, जउन कहिन हीं, कि ऊँ जिन्दा होइगे हें। 24तब हमरे साथिन म से कइअक जने कब्र माहीं गें, अउर जइसन ऊँ मेहेरिआ कहिन तय, उहयमेर पाइन; पय उनखर लहास नहीं पाइन।” 25तब यीसु उनसे कहिन, “हे निरबुध्दिव, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के सगली बातन के बिसुआस न करँइ बाले मन्द मति के मनइव! 26का इआ जरूरी नहीं रहा, कि मसीह दुख उठाइके अपने महिमा माहीं प्रबेस करँय?” 27तब यीसु मूसा से अउर सगले परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन से सुरू कइके पूरे पबित्र सास्त्र म से अपने बारे माहीं लिखी बातन के मतलब, उनहीं समझाय दिहिन।

28बात करत-करत ऊँ पंचे गाँव के लघे पहुँचिगे, जहाँ ऊँ जात रहे हँय, अउर यीसु के बरताव से अइसन जान परा, कि ऊँ आँगे जाँइ चाहत हें। 29पय ऊँ पंचे इआ कहिके यीसु काहीं रोंकिन, “अपना हमरे साथय रही, काहेकि साँझ होंइ बाली हय, अउर सुरिज बूड़ँइ बाला हय।” तब यीसु उनखे साथ रहँइ के खातिर घर के भीतर गें। 30जब यीसु उनखे साथ खाना खाँइ बइठें, तबहिनय ऊँ रोटी लइके परमातिमा काहीं धन्यबाद दिहिन, अउर रोटी टोरिके उनहीं देंइ लागें। 31तब उनखर आँखी खुल गईं; अउर ऊँ पंचे यीसु काहीं पहिचान लिहिन, तबहिनय यीसु उनखे आँखी से ओझल होइगें। 32तब ऊँ पंचे आपस माहीं कहिन, “जब ऊँ गइल माहीं हमसे बात करत रहे हँय, अउर पबित्र सास्त्र के मतलब समझाबत रहे हँय, तब का हमरे हिरदँय माहीं उत्तेजना नहीं पइदा भय तय?” 33तब ऊँ पंचे उहय समय उठिके यरूसलेम सहर लउटिगें, अउर उन ग्यरहँव चेलन अउर उनखे साथिन काहीं एकट्ठा पाइन। 34ऊँ सगले जन कहत रहे हँय, कि “प्रभू फुरिन जिन्दा होइगें हँय, अउर समौन काहीं देखाई दिहिन हीं।” 35तब ऊँ पंचे गइल के सगली बात उनसे बताय दिहिन, अउर इहव घलाय बताइन, कि हम पंचे रोटी टोरत समय कइसन यीसु काहीं पहिचान लिहेन तय।

सगले चेलन काहीं यीसु देखाई दिहिन

(मत्ती 28:16-20; मरकुस 16:14-18; यूहन्ना 20:19-23; खास चेलन 1:6-8)

36जब ऊँ पंचे ईं बातँय कहतय रहे हँय, तबहिन यीसु उनखे बीच माहीं आइके ठाढ़ होइगें, अउर उनसे कहिन, “तोहईं सान्ती मिलय।” 37पय ऊँ सगले जने घबराइगें, अउर डेराऊ गें, अउर इआ सोचिन, कि हम पंचे कउनव भूत काहीं देख रहेन हँय। 38यीसु उनसे कहिन, “काहे घबराते हया? अउर अपने मन माहीं संका काहे करते हया? 39हमरे हाँथे अउर गोड़ेन काहीं देखा, कि हम उहय आहेन। हमहीं छुइके देखा, काहेकि भूत के हड्डी अउर माँस नहीं होय; जइसन हमरे देखते हया।”

40इआ कहिके यीसु उनहीं आपन हाँथ-गोड़ देखाइन। 41जब मारे खुसी के कारन उनहीं बिसुआस न भ, अउर ऊँ पंचे अचरज मानत रहे हँय, तब यीसु उनसे पूँछिन, “का इहाँ तोंहरे लघे कुछू खाँइका हय?” 42ऊँ पंचे यीसु काहीं भूँजी मछरी के टुकड़ा दिहिन। 43यीसु उआ मछरी के टुकड़ा लइके उनखे आँगेन खाइन। 44फेर यीसु उनसे कहिन, “ईं हमार ऊँ बातँय आहीं, जउन हम तोंहरे साथ रहत समय तोंहसे कहेन तय, कि इआ जरूरी हय, कि जेतनी बातँय मूसा के बिधान माहीं अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन अउर भजन के किताबन माहीं हमरे बारे माहीं लिखी हईं, ऊँ सगली पूर होंय।”

45तब यीसु पबित्र सास्त्र के बातन काहीं समझँइ के खातिर उनहीं समझ दिहिन, 46अउर यीसु कहिन, “पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि मसीह दुख उठइहँय, अउर मरिके तिसरे दिन जिन्दा होइ जइहँय, 47अउर यरूसलेम सहर से लइके सगले जातिअन माहीं पाप से मन फिरामँइ के, अउर पापन से माफी पामँइ के प्रचार, उनहिन के नाम से कीन जई। 48अउर तूँ पंचे ईं सगली बातन के गबाह हया। 49अउर देखा, जेखर वादा हमार पिता किहिन हीं, हम ओही तोंहरे ऊपर हरबिन पठउब, अउर जब तक तूँ पंचे स्वरग से परमातिमा के तरफ से सामर्थ न पाया, तब तक तूँ पंचे इहय सहर माहीं रुके रह्या।”

यीसु के स्वरग जाब

(मरकुस 16:19,20; खास चेलन 1:9-11)

50तब यीसु उनहीं यरूसलेम सहर से बहिरे बैतनिय्याह गाँव तक लइगें, अउर आपन हाँथ उठाइके उनहीं आसिरबाद दिहिन; 51अउर उनहीं आसिरबाद देत समय यीसु उनसे अलग होइगें, अउर स्वरग माहीं उठाय लीन गें। 52तब ऊँ पंचे यीसु काहीं दन्डबत कइके बड़े आनन्द के साथ यरूसलेम सहर काहीं लउटिगें; 53अउर ऊँ पंचे लगीतार मन्दिर माहीं जाइके परमातिमा के अराधना करा-करत रहे हँय।