यहूदा के लिखी चिट्ठी

इआ चिट्ठी के परिचय

यहूदा के इआ चिट्ठी गलत सिच्छा देंइ बालेन के बारे माहीं, अउर उनहीं मिलँइ बाले दन्ड के बारे माहीं, अउर बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं उनसे सचेत रहँइ के बारे माहीं लिखी गे ही। इआ छोट काहीं चिट्ठी के उद्देस्य पतरस के लिखी दूसर चिट्ठी कि नाईं हय। इआ चिट्ठी माहीं, इआ चिट्ठी काहीं लिखँइ बाला अपने पढ़ँइ बालेन के उत्साह काहीं बढ़ाबत हय, कि उआ बिसुआस काहीं बनाए रहँइ के खातिर पूरी कोसिस करत रहा, जउने काहीं परमातिमा अपने चुने पबित्र मनइन काहीं, एक बेरकिन माहीं हमेसा के खातिर सउँपि दिहिन हीं।

हम अपना पंचन से इआ बिनती करित हएन, कि इआ चिट्ठी काहीं बड़े ध्यान से पढ़ी, अउर मसीही मन्डलिन माहीं गलत सिच्छा देंइ बालेन से सतरक रही, अउर जउन मनई पाप माहीं जिअत नरक माहीं जाँइ बाले हें, त खुसी के खबर सुनाइके उनहीं पंचन काहीं बचाई। अउर परमातिमा अपना पंचन काहीं घलाय पाप माहीं गिरँय से बचइहँय।

रूप-रेखा :

इआ चिट्ठी के परिचय 1,2

गलत सिच्छा देंइ बालेन के चरित्र अउर सिच्छा अउर उनखर अन्त 3-16

बिसुआस माहीं बने रहँइ के बारे माहीं चेतउनी 17-23

आसिरबाद के बचन 24,25

1

यहूदा के अभिबादन

1हम यहूदा आहेन, अउर इआ चिट्ठी काहीं लिख रहेन हय, जउन यीसु मसीह के दास अउर याकूब के भाई आहेन, इआ चिट्ठी हम उनखे खातिर लिख रहेन हय, जिनहीं पिता परमातिमा बोलाइन हीं, अउर जिनसे प्रेम करत हें, अउर उनखर यीसु मसीह के खातिर रखबारी करत हें। 2तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा के दया, सान्ति अउर प्रेम बहुतायत से मिलत रहय।

गलत सिच्छा देंइ बालेन के पाप अउर उनहीं सजा के मिलब

3हे पियार साथिव, हम पंचे जउने मुक्ती माहीं भागीदार हएन, हम ओखे बारे माहीं बड़े मेहनत के साथ, तोंहईं पंचन काहीं लिखँइ के पूरी कोसिस करत रहे हएन, पय हमहीं अब इआ जान परा, कि इआ चिट्ठी के द्वारा तोंहसे पंचन से इआ बिनती करी, कि तूँ पंचे उआ बिसुआस के खातिर संघर्स करा, जउन हमेसा के खातिर संतन काहीं सउँपा ग हय। 4हम इआ बात तोंहईं पंचन काहीं एसे बताइत हएन, काहेकि तोंहरे बीच माहीं, चुप्पय से कुछ अइसन मनई घुसि आए हँय, जिनखे सजा के बारे माहीं, पहिलेन से पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “ईं पंचे परमातिमा के बचन काहीं मानँइ बाले न होंहीं, अउर हमरे पंचन के परमातिमा के दया काहीं, भोग-बिलास करँइ के बहाना बनाय डारिन हीं, अउर हमरे पंचन के एकलउते मालिक, अउर प्रभू यीसु मसीह काहीं अपनामँइ से इनकार करत हें।” 5अउर हम तोंहईं पंचन काहीं इआ सुध देबामँइ के खातिर लिख रहेन हय, (काहेकि तूँ पंचे ईं सगली बातन काहीं खुदय जनते हया) कि प्रभू पहिले कइसन अपने चुने मनइन काहीं मिस्र देस के धरती से निकार लाएँ तय, अउर बाद माहीं जेतने जन उनखे ऊपर बिसुआस नहीं किहिन, त उनहीं नास कइ दिहिन तय। 6अउर हम तोंहईं पंचन काहीं इहव सुध देबामँइ चाहित हएन, कि जउन स्वरगदूत, अपने पद काहीं निकहा से नहीं सम्हारे पाइन रहा आय, अउर अपने खुद के रहँइ के जघा काहीं छोंड़ि दिहिन रहा हय, प्रभू उनहूँ पंचन काहीं, उआ भयंकर न्याय के दिन के खातिर, सँकरिन माहीं बाँधिके, कबहूँ न खतम होंइ बाले अँधिआर माहीं रक्खे हें। 7अउर इहइमेर से हम तोंहईं पंचन काहीं इहव बतामँइ चाहित हएन, कि कउनमेर से सदोम अउर अमोरा सहरन के अउर उनखे आस-पास के सहरन के मनई, ईंन स्वरगदूतन कि नाईं ब्यभिचार करँइ बाले होइगे रहे हँय, अउर बुरी बासनन के पीछे भागत रहे हँय, त प्रभू उनहीं कबहूँ न बुझाँय बाली आगी माहीं डारिके नास कइ दिहिन रहा हय, जउन हमरे पंचन के खातिर उदाहरन बनिगें हँय। 8अउर ठीक इहइमेर से ईं पंचे, सपन देखँइ बाले घलाय, अपने-अपने देंहन काहीं असुद्ध करत हें, अउर प्रभू के सक्ती काहीं तुच्छ जानत हें। अउर ऊँचे पद बाले अधिकारिन काहीं भला-बुरा कहत हें। 9पय इहाँ तक, कि प्रधान स्वरगदूत मीकाईल घलाय, जब सइतान से मूसा नबी के लहास के बारे माहीं बहँस करत रहे हँय, तब ऊँ सइतान काहीं भला-बुरा कहिके, ओखे ऊपर दोस लगामँइ के हिम्मत नहीं किहिन; बलकिन एतनय कहिन, कि “प्रभू तोही डाँटँय।” 10पय ईं पंचे, जउने बातन काहीं समझतय नहिं आहीं, उनखे बारे माहीं भला-बुरा कहत हें; अउर निरबुद्धी पसुअन कि नाईं जउन बातँय उनखे मन माहीं अउती हईं, उनहिन के मुताबिक करत हें, एसे उँइन बातँय उनखे बिनास के कारन बन जाती हँय। 11अउर इनहीं पंचन काहीं परमातिमा से खुब सजा मिली, काहेकि ईं पंचे कैन कि नाईं बुरी चाल-चलन काहीं अपनाइन हीं, अउर मजूरी के खातिर बिलाम नबी कि नाईं, बिना सोच बिचार किहे गलती कर बइठे हँय: एसे ईं पंचे घलाय नास होइ जइहँय, जइसन कोरह के साथ मिलिके प्रभू के बिरोध करँइ बाले नास कइ दीनगे रहे हँय। 12ईं पंचे तोंहरे प्रेम-भोज के खातिर कलंक कि नाईं हें, जउन तोंहरे साथ खात-पिअत हें। ईं पंचे समुद्र माहीं छिपी पथरा के बड़ी चट्टान कि नाईं हें, जउन खतरनाक होती हईं, अउर ईं पंचे निडर होइके, तोंहरे पंचन के साथ माहीं खात-पिअत त हें, पय इनहीं केबल अपनय सोरथ पूर करँइ के चिन्ता रहत ही। ईं पंचे पानी न बरसँय बाली बदरी कि नाईं होत हें, जिनहीं हबा उड़ाय लइ जात ही। अउर ईं पंचे पतझड़ के अइसन बिरबन कि नाईं होत हें, जउनेन माहीं कबहूँ फर नहीं लागँय, अउर जउन दुइ बेरी मर चुके हँय, अउर जड़ समेत उँखड़गे हँय। 13ईं पंचे समुद्र माहीं उठँय बाली, अइसन भयंकर लहरन कि नाईं हें, जउन अपने निरलज्जता के कामन के फेन उछालत रहती हईं। अउर ईं पंचे एँकई-ओंकई भटकँइ बाली अइसन तरइअन कि नाईं हें, जिनखे खातिर अनन्तकाल के घोर अँधिआर रक्खा ग हय। 14अउर आदम के सतएँ पीढ़ी म पइदा भें, हनोक घलाय, इनखे बारे माहीं भबिस्यबानी किहिन रहा हय, 15कि “देखा, प्रभू अपने लाखन पबित्र स्वरगदूतन के साथ, सगले मनइन के न्याय करँइ के खातिर आए हँय, कि जउने, जउन मनई बुरे काम किहिन हीं, उनखे ईं कामन के खातिर, अउर जउन मनई परमातिमा के बिरोध माहीं बात कहिन हीं, उनहूँ पंचन काहीं घलाय, एखे खातिर सजा देंइ। 16काहेकि ईं पंचे कुड़कुड़ाँय बाले आहीं, अउर दुसरेन के दोस ढूँढ़ँइ माहीं लगे रहत हें। अउर ईं पंचे अपने मन मरजी के मुताबिक चलत हें; अउर अपने मुँहे से घमन्ड के बातँय बोलत हें; अउर अपने फायदा के खातिर दुसरे मनइन के मुँह देखी बड़ाई करत हें।”

चेतउनी अउर उपदेस

17पय हे पियार साथिव, तूँ पंचे ऊँ बातन काहीं हमेसा सुध रक्खा; जउने बातन काहीं हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के चुने, खास चेलन के द्वारा पहिलेन से बताबा जाय चुका हय। 18ऊँ पंचे, तोंहसे कहा करत रहे हँय, कि “अन्त के दिनन माहीं अइसन मनई अइहँय, जउन परमातिमा के बचन के हँसी उड़इहँय, अउर अपने बुरी इच्छन के मुताबिक चलिहँय। 19ईं पंचे मनइन के बीच माहीं फूट डरबामँइ बाले आहीं; काहेकि ईं पंचे पबित्र आत्मा के मुताबिक नहीं, बलकिन देंह के बुरी इच्छन के मुताबिक जीबन जिअत हें। 20पय हे पियार साथिव, तूँ पंचे अपने अति पबित्र बिसुआस माहीं अउर मजबूत होत जा, अउर पबित्र आत्मा के सक्ती से प्राथना करत रहा, 21अउर तूँ पंचे परमातिमा के प्रेम माहीं मजबूत बने रहा, अउर उआ दिन के इन्तजार करा, जब हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के दया, तोहईं पंचन काहीं अनन्त जीबन देई। 22अउर तोंहरे पंचन म से, जउन मनई बिसुआस माहीं कमजोर हें, उनखे ऊपर दया करा। 23अउर परमातिमा न्याय के समय मनइन काहीं, अनन्त आगी माहीं डारँइ के जउन सजा देंइ बाले हें, दउड़िके ओसे मनइन काहीं बचाबा, अउर परमातिमा के भय मानत दुसरे मनइन के ऊपर दया करा; पय दया करत समय उनखे पापन माहीं बेलकुल भागीदार न होया।”

आसिरबाद के बचन

24अब तोंहईं पंचन काहीं, जे पाप माहीं गिरँय से बचाय सकत हें, अउर अपने महिमा के भरपूरी के आँगे आनन्दित, अउर निरदोस कइके ठाढ़ कइ सकत हें। 25अउर हमहीं पंचन काहीं मुक्ती देंइ बाले, एकलउते परमातिमा के महिमा, अउर बैभव अउर सक्ती, अउर अधिकार, हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा, जइसन सनातन काल से हय, अबहिनव होय, अउर आमँइ बाले जुगन-जुगन तक होत रहय। आमीन!