यूहन्ना के लिखी खुसी के खबर

इआ किताब के परिचय

यूहन्ना के लिखी खुसी के खबर माहीं यीसु काहीं परमातिमा के अनन्त बचन के रूप माहीं बताबा ग हय, जउन “मनई के रूप माहीं आइके हमरे पंचन के बीच माही निबास किहिन।” इआ किताब माहीं इआ स्पस्ट रूप से बताबा ग हय, कि इआ खुसी के खबर एसे लिखी गे ही, कि एही पढ़ँइ बाले बिसुआस करँइ, कि परमातिमा जउने मुक्ती देंइ बाले काहीं पठमँइ के वादा किहिन तय, ऊँ यीसु आहीं। अरथात उँइन परमातिमा के लड़िका आहीं, अउर ऊँ पंचे यीसु के ऊपर बिसुआस किहे के व्दारा अनन्त जीबन पाय सकँय (यूह 20:31)।

भूमिका माहीं यीसु काहीं परमातिमा के अनन्त बचन के रूप माहीं लिखा ग हय। ओखे बाद खुसी के खबर के पहिल भाग माहीं सातठे चमत्कार के कामन के बखान कीन ग हय, ऊँ कामन से इआ प्रगट होत हय, कि परमातिमा जउने मुक्ती देंइ बाले काहीं पठमँइ के वादा किहिन तय, ऊँ यीसु आहीं, अरथात उँइन परमातिमा के लड़िका आहीं। दुसरे भाग माहीं यीसु के उपदेस के बारे माहीं बताबा ग हय। ऊँ उपदेसन माहीं इआ समझाबा ग हय, कि ईं अचरज के कामन के मतलब का हय। इआ भाग माहीं इहव बताबा ग हय, कि कइसन कुछ मनई यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन, अउर उनखर चेला बनिगें, जबकि कुछ मनई उनखर बिरोध किहिन अउर उनखे ऊपर बिसुआस करँइ से इनकार कइ दिहिन। 13 पाठ से लइके 17 पाठ तक यीसु के पकड़बाए जाँय बाली रात काहीं यीसु के अपने चेलन के साथ घनिस्ट सहभागिता, अउर क्रूस माहीं चढ़ाए जाँइ से पहिले साँझिके चेलन काहीं तइआर करँइ, अउर उनहीं उत्साहित करँइ बाले यीसु के बचनन के बिस्तार से बखान कीन ग हय। अन्तिम पाठन माहीं यीसु के पकड़बाए जाँय अउर यहूदी महासभा माहीं सँउपे जाँइ के, उनहीं क्रूस माहीं चढ़ाए जाँइ के, गाड़े जाँइ के, मरे के बाद जिन्दा होंइ के, अउर मरेन म से जिन्दा होए के बाद चेलन काहीं देखाई देंइ के बखान हय।

यूहन्ना यीसु मसीह के व्दारा अनन्त जीबन के दान के ऊपर खुब जोर देत हें। इआ एकठे अइसन दान आय, जउन अब सुरू होत हय अउर उनहीं मिलत हय, जे कोऊ यीसु काहीं गइल, सत्य, अउर जीबन के रूप माहीं सोइकार करत हें। आत्मिक बातन काहीं बतामँइ के खातिर रोज जीबन माहीं जरूरत परँइ बाली साधारन चीजन काहीं प्रतीक के रूप माहीं उपयोग करब, यूहन्ना के मुख्य बिसेसता आय, जइसन- पानी, रोटी, जोति, चरबाहा अउर ओखे गड़रन, अउर दाखलता अउर ओखर फर आदि। अउर इआ किताब माहीं यीसु काहीं “मनई के लड़िका” अउर “परमातिमा के लड़िका” के रूप माहीं बताबा ग हय। अउर जउने मन्दिर के बखान हय, ओमाहीं कउनव मूरत नहीं रहत रही आय।

अपना पंचन से इआ बिनती हय, कि अपना पंचे इआ खुसी के खबर काहीं बड़े ध्यान से पढ़ी, अउर एहिन के मुताबिक जीबन बिताई, त अपना पंचन काहीं परमातिमा से खुब आसीस मिली।

रूप-रेखा :

भूमिका 1:1-18

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले अउर यीसु के पहिल चेला लोग 1:19-51

यीसु के जनसेबा 2:1—12:50

यरूसलेम सहर माहीं अन्त के कुछ दिन 13:1—19:42

मरेन म से प्रभू के जिन्दा होब अउर चेलन काहीं देखाई देब 20:1-31

उपसंहार : गलील प्रदेस माहीं पुनि: देखाई देब 21:1-25

1

बचन के मनई के रूप धारन करब

1सुरुआत1:1 उत्प 1:1 माहीं बचन रहा हय, अउर बचन परमातिमा के साथ रहा हय, अउर बचनय परमातिमा रहा हय। 2इहय बचन सुरुआत माहीं परमातिमा के साथ रहा हय। 3बचनय के व्दारा सगली चीजँय बनाई गई हँय, अउर जेतनी चीजँय बनाई गई हँय, उनमा से अइसा कउनव चीज नहिं आय जउन ओखे बिना बनाई गे होय। 4ओहिन माहीं जीबन रहा हय; अउर उहय जीबन संसार के मनइन के खातिर जोति रहा हय। 5अउर जोति अँधिआर माहीं चमकत ही; पय अँधिआर ओही सोइकार नहीं किहिस।

6परमातिमा के पठए एक जने मनई आएँ जिनखर नाम यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाला रहा हय। 7ऊँ इआ गबाही देंइ के खातिर आएँ, कि जोति के बारे माहीं गबाही देंय, जउने संसार के सगले मनई उनखे गबाही काहीं सुनिके जोति के ऊपर बिसुआस करँय। 8ऊँ खुद उआ जोति नहीं रहें आहीं, पय उआ जोति के बारे माहीं गबाही देंइ के खातिर आए रहे हँय।

9उआ सच्ची जोति जउन संसार के हरेक मनइन काहीं ग्यान रूपी उँजिआर देत ही, संसार माहीं आमँइ बाली रही हय। 10उआ बचन संसारय माहीं रहा हय, अउर सगला संसार ओहिन के व्दारा बनाबा ग हय, पय संसार के मनई ओही नहीं पहिचानिन। 11ऊँ अपने लोगन के लघे आएँ, अउर उनखर अपनय लोग उनहीं सोइकार नहीं किहिन। 12पय जेतने जने उनहीं सोइकार किहिन, ऊँ उनहीं पंचन काहीं परमातिमा के सन्तान होंइ के अधिकार दिहिन, अरथात उनहीं जेतने जन उनखे नाम के ऊपर बिसुआस करत हें। 13परमातिमा के सन्तान के रूप माहीं, ऊँ पंचे संसारिक रूप से, न त खून से पइदा भें, अउर न त मनइन के इच्छा से, अउर न महतारी-बाप के योजना से, बलकिन ऊँ पंचे परमातिमा से पइदा भे हँय।

14अउर बचन मनई के रूप लइके संसार माहीं आएँ, अउर ऊँ किरपा अउर सच्चाई से भरपूर होइके, हमरे पंचन के बीच माहीं निबास किहिन, अउर हम पंचे उनखे महिमा काहीं, पिता परमातिमा के एकलउते लड़िका कि नाईं देखे हएन। 15अउर यूहन्ना उनखे बारे माहीं गबाही दिहिन हीं, अउर खुब चन्डे कहिन हीं, कि “ईं उँइन आहीं, जिनखे बारे माहीं हम बतायन हय, कि ऊँ जउन हमरे बाद आमँइ बाले हें, हमसे खुब महान हें, काहेकि ऊँ हमरे पइदा होंय से पहिले रहे हँय।” 16काहेकि उनखर किरपा हमरे ऊपर भरपूर ही, एहिन से हमहीं पंचन काहीं भरपूर आसिरबाद मिलत हय। 17परमातिमा के बिधान मूसा नबी के व्दारा दीन ग हय; पय किरपा अउर सच्चाई यीसु मसीह के व्दारा पहुँची हय। 18परमातिमा काहीं कबहूँ कोऊ नहीं देखिस, पय केबल परमातिमा के एकलउते लड़िका, जउन हमेसा उनहिन के साथ रहत हें, उँइन उनखे बारे माहीं हमहीं पंचन काहीं बताइन हीं।

यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के गबाही

(मत्ती 3:1-12; मरकुस 1:1-8; लूका 3:1-18)

19जब यरूसलेम सहर के कुछ यहूदी समाज के धारमिक अँगुआ लोग इआ जानँइ के खातिर कि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले को आहीं, याजकन अउर मन्दिर माहीं सेबा करँइ बाले लेबी लोगन काहीं पठइन, तब ऊँ पंचे यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के लघे जाइके पूँछिन, कि तूँ को आह्या। 20तब यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले उनहीं सही जबाब दिहिन, अउर मान लिहिन, कि हम परमातिमा के पठए मसीह न होंहेन। 21तब ऊँ पंचे पुनि उनसे पूँछिन, “त तूँ को आह्या? का तूँ एलिय्याह आह्या?” त ऊँ कहिन, कि “हम न होंहेन”, त ऊँ पंचे पुनि पूँछिन कि, “परमातिमा जउन अपने सँदेस बतामँइ बाले काहीं पठमँइ के वादा किहिन तय, का तूँ उहय आह्या?” तब ऊँ कहिन, कि “हम उहव न होंहेन।” 22तब ऊँ पंचे पुनि उनसे पूँछिन, “आखिर तूँ को आह्या?” अपने बारे माहीं हमहीं बताबा, जउने हम पंचे अपने पठमँइ बालेन काहीं जबाब दइ सकी। 23यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले कहिन, “जइसन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह नबी कहिन हीं, कि ‘हम सुनसान जघा माहीं गोहरामँइ बाले के अबाज आहेन’ काहेकि प्रभू आमँइ बाले हें, तूँ पंचे अपने मन काहीं सऊँ गइल कि नाईं तइआर करा।”

24जिनहीं फरीसी पठइन रहा हय। 25ऊँ पंचे यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से पूँछिन, “तूँ न त मसीह आह्या, अउर न एलिय्याह आह्या, अउर न त उआ परमातिमा के सँदेसय बतामँइ बाले आह्या, त पुनि बपतिस्मा काहे देते हया?” 26यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले उनहीं जबाब दिहिन, कि “हम त पानी से बपतिस्मा देइत हएन; पय तोंहरे बीच माहीं एक जने ठाढ़ हें, जिनहीं तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि ईं को आहीं। 27ईं उँइन आहीं, जउन हमरे बाद आमँइ बाले हें, जिनखे पनहीं के डोरव तक छोरँइ के काबिल हम नहिं आहेन।” 28ईं बातँय यरदन नदी के दुसरे पार बैतनिय्याह गाँव माहीं भईं, जहाँ यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले, बपतिस्मा देत रहे हँय।

परमातिमा के मेम्ना

29दुसरे दिन यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले, यीसु काहीं अपनी कइती आबत देखिके कहिन, “देखा, ईं परमातिमा के मेम्ना आहीं, जउन संसार के मनइन के पाप उठाय लइ जइहँय। 30ईं उँइन आहीं, जिनखे बारे माहीं हम कहेन रहा हय, कि एकठे मनई जउन हमरे बाद आमँइ बाले हें, ऊँ हमसे खुब महान हें, काहेकि ऊँ हमरे पइदा होंइ से पहिले रहे हँय। 31अउर हम खुदय उनहीं नहीं पहिचानत रहेन आय, पय हम पानी से बपतिस्मा एसे देत आए हएन, कि जउने इजराइल देस के सगले मनई इआ जान लेंय, कि ऊँ को आहीं। 32अउर यूहन्ना इआ गबाही दिहिन, कि हम पबित्र आत्मा काहीं परेबा के रूप माहीं स्वरग से नीचे उतरत देखेन हय, अउर पबित्र आत्मा उनखे ऊपर आइके ठहरिगा। 33अउर हम त उनहीं पहिचानत नहीं रहेन, पय जउन हमहीं पानी से बपतिस्मा देंइ काहीं पठइन हीं, उँइन हमसे कहिन, कि जेखे ऊपर तूँ पबित्र आत्मा काहीं उतरत अउर ठहरत देख्या; उँइन मनइन काहीं पबित्र आत्मा से बपतिस्मा देंइ बाले आहीं। 34अउर हम देखेन हँय, अउर इआ गबाही देइत हएन, कि ईंन परमातिमा के लड़िका आहीं।”

यीसु के पहिल चेला लोग

35दुसरे दिन पुनि यूहन्ना अउर उनखे चेलन म से दुइ जने ठाढ़ रहे हँय। 36अउर यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले यीसु काहीं लघे से जात देखिके कहिन, “देखा, ईं परमातिमा के मेम्ना आहीं।” 37जब ऊँ दोनव चेला उनहीं इआ कहत सुनिन, त ऊँ पंचे यीसु के पीछे चलेगें। 38यीसु पीछे कइती मुड़िके, उनहीं अपने पीछे आबत देखिके उनसे कहिन, “तूँ पंचे केही ढुँढ़ते हया?” ऊँ पंचे उनसे कहिन, “हे गुरू अपना कहाँ रहित हएन?” यीसु उनसे कहिन, “चलिके खुदय देख ल्या।” 39तब ऊँ पंचे आइके उनखे रहँइ के जघा देखिन, अउर उआ दिना ऊँ पंचे उनहिन के साथ रहिगें; काहेकि साँझिके करीब चार बजिगा रहा हय।

40यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के बात काहीं सुनिके, जउन यीसु के पीछे चलेगे रहे हँय, ऊँ दोनव म से एकठे त समौन पतरस के भाई अन्द्रियास रहे हँय। 41ऊँ पहिले अपने सग भाई समौन से मिलिके उनसे कहिन, कि हमहीं ख्रिस्त अरथात मसीह मिलगे हँय। 42ऊँ समौन काहीं यीसु के लघे लइ आएँ: त यीसु उनहीं देखिके कहिन, “तूँ यूहन्ना के लड़िका समौन आह्या, तूँ कैफा अरथात पतरस कहइहा।”

फिलिप्पुस अउर नतनएल काहीं बोलाबा जाब

43दुसरे दिन यीसु गलील प्रदेस काहीं जाँइ के निस्चय किहिन; अउर फिलिप्पुस से मिलिके कहिन, “हमरे पीछे चले आबा।” 44फिलिप्पुस त अन्द्रियास अउर पतरस के गाँव बैतसैदा के रहँइ बाला रहा हय। 45ओखे बाद फिलिप्पुस जाइके नतनएल से मिलें, अउर उनसे कहिन, कि जेखर बखान मूसा नबी बिधान माहीं लिखिन हीं, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले घलाय अपने किताबन माहीं लिखिन हीं, ऊँ हमहीं मिलिगे हँय; ऊँ नासरत गाँव माहीं रहँइ बाले यूसुफ के लड़िका यीसु आहीं। 46तब नतनएल फिलिप्पुस से कहिन, “का नासरत गाँव से घलाय कउनव निकही चीज पइदा होइ सकत ही?” फिलिप्पुस उनसे कहिन, “चलिके खुदय देख ल्या।” 47अउर यीसु नतनएल काहीं अपने कइती आबत देखिके, उनखे बारे माहीं कहिन, “देखा, ईं आहीं, सच्चे इजराइली, इनखे जीबन माहीं कउनव कपट नहिं आय।” 48नतनएल यीसु से पूँछिन, “अपना हमहीं कइसा जानित हएन?” तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “फिलिप्पुस के तोहईं बोलामँइ से पहिले, जब तूँ अंजीर के बिरबा के नीचे बइठ रहे हया, तब हम तोंहईं देखेन तय।” 49तब नतनएल जबाब दिहिन, “हे गुरू, अपना त परमातिमा के लड़िका अउर इजराइल के महाराजा आहेन।” 50तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि हम तोंहसे जउन कहेन, कि हम तोंहईं अंजीर के बिरबा के नीचे देखेन हय, त का तूँ एहिन से बिसुआस करते हया, तूँ एहू से बड़े-बड़े काम करत हमहीं देखिहा। 51पुनि यीसु उनसे कहिन, कि “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि तूँ स्वरग काहीं खुला, अउर परमातिमा के स्वरगदूतन काहीं मनई के लड़िका1:51 उत्प 28:12 के लघे उतरत अउर ऊपर जात देखिहा।”

2

काना गाँव माहीं यीसु के पहिल चमत्कार

1एखे बाद तिसरे दिन गलील प्रदेस के काना गाँव माहीं कोहू के काज होत रहा हय, अउर यीसु के महतारी घलाय उहाँ नेउते माही रही हँय। 2यीसु अउर उनखे चेलन काहीं घलाय उआ बिआह माहीं नेउता दीन ग रहा हय। 3उहाँ जब अंगूर के रस चुकिगा, तब यीसु के महतारी यीसु से कहिन, कि उनखे लघे अंगूर के रस अब एक्कव नहिं आय। 4तब यीसु उनसे कहिन, “हे अम्मा,2:4 यूनानी भाँसा माहीं “हे नारी” लिखा हय अपना हमहीं इआ काहे बताइत हएन? हमरे काम करँइ के समय अबे नहीं आबा आय।” 5उनखर महतारी सेबा करँइ बालेन से कहिन, “यीसु जउन कुछू तोंहसे कहँय, उहय किहा।” 6यहूदी धरम के नेम के मुताबिक हाँथ-मुँह धोमँइ, अउर कुछ चीजन काहीं धोइके सुद्ध करँइ के खातिर, पानी भरँइ बाले पथरा के छयठे मटका धरे रहे हँय, जउनेन माहीं 80 से 120 लीटर तक पानी समात रहा हय। 7यीसु ऊँ सेबकन से कहिन, ईं मटकन माहीं पानी भर द्या: तब सगले सेबक ऊँ मटकन माहीं फुल्ल-फुल्ल पानी भर दिहिन। 8तब यीसु ऊँ सेबकन से कहिन, अब थोर काहीं निकारिके खाँय-पिअँइ के प्रबन्ध करँइ बाले मुखिया के लघे लइजा। 9तब ऊँ पंचे लइगें, जब खाँय-पिअँइ के प्रबन्ध करँइ बाले मुखिया उआ पानी काहीं पीन, जउन अंगूर के रस बनिगा रहा हय, अउर ऊँ नहीं जानत रहें, कि इआ अंगूर के रस कहाँ से आबा हय, (पय जउन सेबक पानी निकारिन रहा हय, ऊँ पंचे जानत रहे हँय) तब खाँय-पिअँइ के प्रबन्ध करँइ बाले मुखिया, दुलहा काहीं बोलाइके, उनसे कहिन। 10“हरेक मनई पहिले निकहा अंगूर के रस देत हय, अउर जब मनई पिके अघाय जात हें, तब उआ ओसे कम निकहा देत हय, पय तूँ अबय तक निकहा अंगूर के रस धरे हया।” 11यीसु गलील प्रदेस के काना गाँव माहीं, इआ पहिल चमत्कार देखाइके, अपने महिमा काहीं देखाइन, इआ देखिके उनखर चेला लोग उनखे ऊपर बिसुआस किहिन।2:11 कि ईंन मसीह आहीं12एखे बाद यीसु, अपने महतारी, भाई अउर चेला लोगन के साथ कफरनहूम सहर माहीं गें, अउर उहाँ कुछ दिना रहें।

मन्दिर से बइपारिन काहीं निकारब

(मत्ती 21:12,13; मरकुस 11:15-17; लूका 19:45,46)

13यहूदी लोगन के फसह नाम के तेउहार लघेन रहा हय, एसे यीसु यरूसलेम सहर माहीं गें। 14अउर यीसु मन्दिर माहीं बरधा, गाड़र अउर परेबा के बेंचँइ बालेन काहीं, अउर रुपिआ-पइसा के लेन-देन करँइ बालेन काहीं बइठे पाइन। 15तब यीसु रस्सिन के चाबुक बनाइन, अउर सगले गड़रन अउर बरधन काहीं बहिरे भगाय दिहिन, अउर रुपिआ-पइसा के लेन-देन करँइ बालेन के पइसा बिथराय दिहिन, अउर उनखे पिढ़बन काहीं उलटाय दिहिन। 16अउर परेबा बिकनँय बालेन से कहिन, “इनहीं इहाँ से लइजा: हमरे पिता के घर काहीं बइपार के घर न बनाबा।” 17तब उनखे चेलन काहीं सुधि आई, कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “अपना के घर2:17 भज 69:9 काहीं सुद्ध बनाए रहँइ के हमार लगन, एक दिन हमार जान लइ लेई।” 18इआ देखिके यहूदी धारमिक अँगुआ लोग यीसु से कहिन, तूँ जउन इआ काम करते हया, त हमहीं पंचन काहीं कउन अदभुत चिन्हारी देखउते हया? 19यीसु उनहीं जबाब दिहिन; कि “इआ मन्दिर काहीं गिराय द्या, अउर हम एही तीन दिना के माहीं बनाय देब।” 20इआ सुनिके यहूदी धारमिक अँगुआ लोग कहिन, “इआ मन्दिर काहीं बनामँइ माहीं छियालिस बरिस लाग हें, अउर का तूँ, एही तीन दिना माहीं बनाय देइहा?” 21पय यीसु त अपने देंह के मन्दिर के बारे माहीं कहिन रहा हय। 22एखे बाद जब यीसु मरे के बाद पुनि जिन्दा होइगें, तब उनखे चेलन काहीं सुधि आई, कि ऊँ इआ कहिन रहा हय, अउर ऊँ पंचे उनखे बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखे बचन, अउर उआ बचन के जउन यीसु कहिन तय, बिसुआस किहिन।

यीसु मनइन के मन काहीं जानत हें

23फसह के तेउहार के दिनन माहीं, जब यीसु यरूसलेम सहर माहीं रहे हँय, तब खुब मनई ऊँ अदभुत चिन्हारिन काहीं देखिके, जउन ऊँ देखाबत रहे हँय, उनखे ऊपर बिसुआस किहिन। 24पय यीसु अपने-आप काहीं उनखे भरोसे माहीं नहीं छोंड़िन, काहेकि ऊँ सगले मनइन काहीं जानत रहे हँय। 25यीसु काहीं इआ बात के जरूरत नहीं रही आय, कि कोऊ आइके मनई के बारे माहीं उनहीं बताबय, काहेकि ऊँ खुदय जानत रहे हँय, कि मनइन के मन माहीं का हय?

3

यीसु अउर नीकुदेमुस

1उहाँ फरीसी लोगन म से एकठे मनई रहे हँय, जिनखर नाम नीकुदेमुस रहा हय, ऊँ यहूदी समाज के मुखिया रहे हँय। 2ऊँ रात माहीं यीसु के लघे आइके उनसे कहिन, “हे गुरू, हम पंचे जानित हएन, कि अपना परमातिमा के तरफ से गुरू बनिके आएन हँय; काहेकि जउन चमत्कार अपना करित हएन, परमातिमा के मदत के बिना कोऊ नहीं कइ सकय।” 3यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, अगर कउनव मनई नबा जनम न लेई, त उआ परमातिमा के राज काहीं नहीं देख सकय।” 4तब नीकुदेमुस उनसे कहिन, “मनई जब बुढ़ाय जात हय, त उआ कइसन दुसराय जनम लइ सकत हय? का उआ अपने महतारी के पेटे माहीं जाइके दुसराय जनम लइ सकत हय?” 5तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन; कि जब तक कउनव मनई पानी अउर पबित्र आत्मा से जनम न लेई, त उआ परमातिमा के राज माहीं प्रबेस नहीं कइ सकय। 6काहेकि जऊँ मनई से पइदा होत हय, ओखे मनई के सुभाव रहत हय; अउर जउन पबित्र आत्मा से पइदा होत हय, ओखे पबित्र आत्मा के सुभाव रहत हय। 7चउ आ न, जउन हम तोंहसे कहेन हय: कि ‘तोंहईं नबा जनम लेब जरूरी हय।’ 8हम तोंहईं समझाइत हएन, हबा जउनी कइती चाहत ही, ओहिन कइती चलत ही, अउर तूँ ओखर अबाज भर सुनते हया, पय इआ नहीं जाने पउते आह्या, कि उआ कहाँ से आबत ही, अउर कउनी कइती जात ही? जे कोऊ पबित्र आत्मा से पइदा होत हय, उआ इहइमेर होत हय। जइसा हबा के बारे माहीं नहीं जाने पउते आह्या, उहयमेर पबित्र आत्मा से जन्मे मनइव के बारे माहीं न जाने पइहा।” 9तब नीकुदेमुस उनहीं जबाब दिहिन; कि “इआ कइसा होइ सकत हय?” 10इआ बात सुनिके यीसु उनसे कहिन, “तूँ इजराइली लोगन के गुरू होइके, का ईं बातन काहीं नहीं समझ त्या। 11हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि हम जउन जानित हएन, उहय कहित हएन, अउर जउने काहीं हम देखेन हय, ओहिन काहीं बताइत हएन, अउर तूँ पंचे हमरे बातन के बिसुआस नहीं मनते आह्या। 12जब हम तोंहसे धरती माहीं होंइ बाली बातन काहीं बताएन, अउर तूँ पंचे उनखे ऊपर बिसुआस नहीं करते आह्या, त अगर हम तोंहसे स्वरग माहीं होंइ बाली बातन काहीं बताई, त उनखे ऊपर कइसन बिसुआस करिहा? 13काहेकि ऊपर स्वरग माहीं कोऊ नहीं ग आय, केबल ऊँ जउन स्वरग से उतरिके आए हँय, अरथात मनई के लड़िका3:13 एचओबी माहीं लिखा हय मनई के लड़िका जउन स्वरग माहीं हय।14अउर जउनमेर से मूसा नबी सुनसान जघा माहीं पीतल के साँप3:14 गिन 21:8,9 काहीं ऊँच खम्भा माहीं लटकाइन रहा हय, उहयमेर से इआ जरूरी हय, कि मनई के लड़िकव ऊँचे माहीं अरथात क्रूस माहीं लटकाबा जाय। 15जउने जे कोऊ उनखे ऊपर बिसुआस करँय, ऊँ अनन्त जीबन पामँय। 16काहेकि परमातिमा संसार के मनइन से एतना प्रेम किहिन, कि ऊँ अपने एकलउता लड़िका काहीं दइ दिहिन, कि जउने उनखे ऊपर जे कोऊ बिसुआस करँय, ऊँ नास न होंय, पय अनन्त जीबन पामँय। 17परमातिमा अपने लड़िका काहीं संसार माहीं एसे नहीं पठइन, कि ऊँ संसार के मनइन काहीं सजा देंइ, बलकिन एसे पठइन हीं, कि संसार के मनई उनखे व्दारा मुक्ती पामँय। 18जे कोऊ उनखे ऊपर बिसुआस करत हय, उआ दोसी न ठहराबा जई, पय जे कोऊ उनखे ऊपर बिसुआस न करी, उआ दोसी ठहर चुका हय, काहेकि उआ परमातिमा के एकलउता लड़िका के ऊपर बिसुआस नहीं किहिस आय। 19अउर उनहीं सजा देंइ के कारन इआ हय, कि परमातिमा के लड़िका जोति के रूप माहीं संसार माहीं आएँ हँय, अउर संसार के मनई पाप रूपी अँधिआर काहीं, जोति से जादा पियार जानिन, काहेकि उनखर काम बुरे रहे हँय। 20काहेकि जे कोऊ बुरे काम करत हय, उआ जोति से दुसमनी रक्खत हय, अउर जोति के लघे नहीं आबय, कहँव अइसा न होय कि ओखे कामन के ऊपर दोस लगाबा जाय। 21पय जे कोऊ सत्य माहीं चलत हय, उआ जोति के लघे आबत हय, जउने ओखर काम देखाँय, कि ऊँ परमातिमा के तरफ से कीन गे हँय।”

यीसु के बारे माहीं यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के गबाही

22एखे बाद यीसु अपने चेलन के साथ यहूदिया प्रदेस माहीं यहूदी लोगन के लघे आएँ; अउर ऊँ उहाँ उनखे साथय माहीं रहिके बपतिस्मा देंइ लागें। 23अउर यूहन्ना घलाय सालेम गाँव के लघे एनोन नाम के जघा माहीं बपतिस्मा देत रहे हँय, अउर मनई आइके बपतिस्मा लेत रहे हँय, काहेकि उहाँ खुब पानी रहा हय। 24उआ समय तक यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले काहीं जेल माहीं नहीं बंद कीन ग रहा आय। 25उहाँ यूहन्ना के चेलन के कउनव यहूदी के साथ सुद्ध होंय के बिधी के बारे माहीं बाद-बिबाद होइगा। 26अउर ऊँ पंचे यूहन्ना के लघे आइके उनसे कहिन, “हे गुरू, जउन मनई यरदन नदी के उआ पार अपना के साथ रहे हँय, अउर जेखे बारे माहीं अपना बताए रहेन हय, देखी ऊँ बपतिस्मा देत हें, अउर खुब जने उनखे लघे आबत हें।” 27तब यूहन्ना उनहीं जबाब दिहिन कि, “कउनव मनई काहीं तब तक कुछू नहीं मिल सकय, जब तक ओही स्वरग से न दीन जाय।” 28तूँ पंचे त खुदय हमार गबाह हया, कि हम कहेन तय कि, “हम मसीह न होंहेन, बलकिन उनखे आँगे पठए गएन हय।” 29दुलहा उहय आय जेही दुलहिन मिलत ही। पय दुलहा के साथी जउन दुलहा के बोल काहीं सुनत हय, त खुब खुस होत हय; उहयमेर तोंहसे उनखे बारे माहीं सुनिके अब हमार इआ आनन्द पूर होइगा हय। 30अब जरूरी हय, कि उनखर महानता बढ़य, अउर हमार घटय। 31यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले पुनि कहिन, जे ऊपर से आबत हय, उआ महान हय, जउन धरती माहीं पइदा होत हय, उआ धरतिन के आय, एसे उआ धरतिन के बात करत हय: पय जउन स्वरग से आबत हय, उआ सगलेन से बढ़िके हय। 32ऊँ जउन कुछू देखिन, अउर सुनिन हीं, ओहिन काहीं बताबत हें; पय उनखे गबाही काहीं कोऊ सोइकार नहीं करय। 33जे कोऊ उनखे गबाही काहीं सोइकार कइ लिहिस ही, उआ इआ बात के गबाही देत हय, कि परमातिमा सच्चे हँय। 34काहेकि जेही परमातिमा पठइन हीं, उआ परमातिमा के बातन काहीं कहत हय: काहेकि परमातिमा ओही पबित्र आत्मा के अनन्त दान दिहिन हीं। 35परमपिता अपने लड़िका से पियार करत हें, अउर उनहिन के हाँथे माहीं सगली चीजन काहीं सँउप दिहिन हीं। 36एसे जे कोऊ उनखे लड़िका के ऊपर बिसुआस करत हय, उहय अनन्त जीबन पाबत हय, पय उआ जउन परमातिमा के लड़िका के बात नहीं मानय, ओही उआ अनन्त जीबन न मिली, बलकिन एखे जघा माहीं ओखे ऊपर परमातिमा के क्रोध बना रही।

4

सामरी जाति के मेहेरिआ से यीसु के बात

1एखे बाद जब यीसु काहीं पता चला, कि फरीसी लोग सुनिन हीं, कि यीसु यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले से जादा चेला बनाबत हें, अउर उनहीं बपतिस्मा देत हें। 2(जबकि यीसु खुद बपतिस्मा नहीं देत रहे आँय, बलकिन उनखर चेला बपतिस्मा देत रहे हँय।) 3इआ सुनिके यीसु यहूदिया प्रदेस काहीं छोंड़िके, पुनि गलील प्रदेस माहीं चलेगें। 4अउर उनहीं सामरिया प्रदेस होइके जाब जरूरी रहा हय। 5तब ऊँ सामरिया प्रदेस के सूखार नाम के सहर माहीं पहुँचे, जउन उआ भुँइ के लघे रहा हय, जउने काहीं याकूब अपने लड़िका यूसुफ काहीं दिहिन रहा हय। 6उहाँ याकूब के बनबाई कुँइआ घलाय रही हय। यीसु इआ यात्रा माहीं खुब थकिगे रहे हँय, एसे ऊँ कुँआ के लघे बइठिगें। उआ समय करीब दुपहर के बारा बजे रहे हँय। 7एतनेन माहीं उहाँ एकठे सामरिया प्रदेस के सामरी जाति के मेहेरिआ पानी भरँय आई: तब यीसु ओसे कहिन, हमहीं पानी पिआबा। 8उआ समय उनखर चेला लोग सहर माहीं खाना खरीदँय चलेगे रहे हँय। 9उआ सामरी जाति के मेहेरिआ उनसे कहिस, अपना यहूदी जाति के होइके हमसे जउन सामरी जाति के मेहेरिआ आहेन, त पानी काहे मागित हएन? (काहेकि यहूदी लोग सामरी जाति के मनइन काहीं छोट जाति मानत रहे हँय, एसे उनसे कउनव मेर के सम्बन्ध नहीं रक्खत रहे आँय।) 10यीसु ओही जबाब दिहिन, “अगर तूँ परमातिमा के बरदान काहीं जन त्या, अउर इहव जन त्या कि ऊँ को आहीं, जउन तोंहसे कहत हें, कि हमहीं पानी पिआबा; त तूँ उनसे मग त्या, अउर ऊँ तोंहईं जीबन देंइ बाला पानी देतें।” 11उआ मेहेरिआ उनसे कहिस, “हे प्रभू, अपना के लघे त पानी भरँइ के खातिर कुछू हइअव नहिं आय, अउर कुँआ गहिल ही: त फेर उआ जीबन देंइ बाला पानी अपना के लघे कहाँ से आबा? 12का अपना हमरे पूरबज याकूब से बड़े हएन, जे हमहीं पंचन काहीं इआ कुँआ दिहिन हीं; अउर खुदय अपने लड़िकन-बच्चन समेत एखर पानी पीन, अउर अपने मबेसिन काहीं घलाय पिआइन रहा हय।” 13यीसु ओही जबाब दिहिन, कि “जे कोऊ इआ कुँआ के पानी पी ओही पुनि पिआस लागी। 14पय जे कोऊ उआ पानी पी, जउन हम ओही देब, उआ पुनि अनन्तकाल तक पियासा न होई: बलकिन जउन पानी हम ओही देब, ओखे जीबन माहीं एकठे झिन्ना बन जई, अउर अनन्त जीबन देंइ के खातिर झिरिके बहतय रही।” 15तब उआ मेहेरिआ कहिस, “हे प्रभू, उआ पानी हमहीं दइ देई, जउने हम पिआसी न होई, अउर न पानी भरँइ एतनी दूरी अई।” 16यीसु ओसे कहिन, “जा, अपने मंसेरुआ काहीं इहाँ बोलाय लाबा।” 17उआ मेहेरिआ उनहीं जबाब दिहिस, कि “हम बिना मंसेरुआ के हएन।”: यीसु ओसे कहिन, “तूँ ठीक कहते हया, कि हम बिना मंसेरुआ के हएन। 18काहेकि तूँ पाँचठे मंसेरुआ कइ चुके हया, अउर जेखे लघे अबय तूँ रहते हया, उहव तोंहार मंसेरुआ न होय; इआ तूँ बेलकुल सही बताया हय।” 19इआ बात काहीं सुनिके उआ मेहेरिआ उनसे कहिस, “हे प्रभू, हमहीं त लागत हय, कि अपना परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले आहेन। 20हमार पंचन के पूरबज इहय पहार माहीं अराधना करत रहे हँय: अउर अपना पंचे यहूदी जाति बाले कहित हएन, कि उआ जघा यरूसलेम सहर माहीं हय, जहाँ अराधना करँइ चाही।” 21यीसु ओसे कहिन “हे बहिनी, हमरे बात के बिसुआस माना, उआ समय आमँइ बाला हय, कि तूँ पंचे न त इआ पहार माहीं पिता परमातिमा के अराधना करिहा, न यरूसलेम सहर माहीं। 22तूँ पंचे जेही नहीं जनते आह्या, ओखर अराधना करते हया: अउर हम पंचे जेही जानित हएन ओखर अराधना करित हएन; काहेकि मनइन काहीं मुक्ती यहूदी लोगन म से मिली। 23पय उआ समय आमँइ बाला हय, बलकिन अबहिनव हय, जउने माहीं सच्चे भक्त पिता परमातिमा के अराधना आत्मा अउर सच्चाई से करिहँय, काहेकि पिता परमातिमा अपने खातिर इहइमेर अराधना करँइ बालेन काहीं ढूँढ़त हें।”

परमातिमा आत्मा आहीं

24परमातिमा आत्मा आहीं, एसे जरूरी हय, कि उनखर अराधना करँइ बाले आत्मा अउर सच्चाई से अराधना करँय। 25उआ मेहेरिआ उनसे कहिस, “हम जानित हएन कि, ख्रिस्त जउन मसीह कहाबत हें, आमँइ बाले हें; ऊँ जब अइहँय, तब हमहीं पंचन काहीं सगली बातँय बताय देइहँय।” 26यीसु ओसे कहिन, “हम जउन तोंहसे बात कइ रहेन हँय, उहय आहेन।”

चेलन के लउटब

27एतनेन माहीं उनखर चेला लोग आइगें, अउर उनहीं इआ देखिके बड़ा अचरज भ, कि यीसु एकठे मेहेरिआ से बात कइ रहे हँय, तऊ इआ पूछँइ के कोहू के हिम्मत नहीं परी, कि अपना का चाहित हएन? इआ कि काहे के खातिर ओसे बात करित हएन। 28तब उआ मेहेरिआ आपन गघरा उहँइ छोंड़िके सहर माहीं चली गय, अउर मनइन से कहँइ लाग। 29“आबा, एकठे मनई काहीं देखा, ऊँ, जउन कुछू हम किहेन तय, ऊँ सगली बातँय हमहीं बताय दिहिन हीं: कहँव ईंन त मसीह न होंहीं?” 30एसे सहर के मनई, सहर से निकरिके यीसु के लघे आमँइ लागें। 31एतने माहीं यीसु के चेला लोग उनसे बिनती करँइ लागें, “हे गुरू अपना कुछ खाय लेई।” 32पय यीसु उनसे कहिन, “हमरे लघे खाँय के खातिर अइसन खाना हय, जेखे बारे माहीं तूँ पंचे नहीं जनते आह्या।” 33तब चेला लोग आपस माहीं कहँइ लागें, कोऊ उनखे खाँय के खातिर कुछू लइ आबा हय का? 34यीसु उनसे कहिन, “हमार खाना इआ आय, कि हम अपने पठमँइ बाले के मरजी के मुताबिक चली, अउर उनखर काम पूर करी। 35का तूँ पंचे इआ नहीं कहते आह्या, कि कटाई होंय माहीं अबे चार महीना बाँकी हय? पय देखा, हम तोंहसे कहित हएन, बड़े ध्यान से खेतन कइती निहारा, कि ऊँ सगले कटाई करँइ के खातिर पकि चुके हँय। 36अउर कटाई करँइ बाला मजूरी पाबत हय, अउर अनन्त जीबन के खातिर दाना एकट्ठा करत हय; जउने बोमँइ बाला, अउर काटँय बाला दोनव जने मिलिके आनन्द करँय। 37काहेकि एमाहीं इआ कहाबत ठीक बइठत ही; कि बोमँइ बाला अउर हय, अउर काटँय बाला अउर हय। 38हम तोंहईं पंचन काहीं खेत काटँय के खातिर पठयन हय, जउने माहीं तूँ पंचे मेहनत नहीं किहा: दूसर मेहनत किहिन: अउर उनखे मेहनत के फर तोंहईं पंचन काहीं मिला हय।” 39अउर उआ सहर के सामरी जाति के खुब मनई उआ मेहेरिआ के कहे से, जउन इआ बताइस रहा हय, कि ऊँ जउन कुछू हम किहेन तय, ऊँ सगली बातँय हमहीं बताय दिहिन हीं, अउर ऊँ पंचे बिसुआस किहिन। 40अउर जब सामरी जाति के खुब मनई यीसु के लघे आइके, उनसे बिनती करँइ लागें, कि “अपना हमरे पंचन के इहाँ रही”: एसे यीसु उहाँ दुइ दिन तक रुके रहिगें। 41अउर यीसु के बचन काहीं सुनिके, उनमा से खुब जने उनखे ऊपर बिसुआस किहिन। 42अउर ऊँ पंचे उआ मेहेरिआ से कहिन, “अब हम पंचे तोंहरे बताएन भर से बिसुआस नहीं करी; काहेकि हम पंचे खुदय उनखर बचन सुने हएन, अउर जान गएन हय, कि वास्तव माहीं संसार के मनइन काहीं मुक्ती देंइ बाले ईंन आहीं।”

राजा के कर्मचारी के लड़िका काहीं यीसु नीक किहिन

43उहाँ दुइ दिना रहे के बाद यीसु अपने चेलन के साथ गलील प्रदेस काहीं चल दिहिन। 44(काहेकि यीसु खुदय गबाही दिहिन हीं, कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाला, अपने गाँव माहीं मान-सम्मान नहीं पाबय।) 45जब यीसु गलील प्रदेस माहीं पहुँचे, तब गलील प्रदेस माहीं रहँइ बाले मनई बड़े आनन्द के साथ उनसे मिलें; काहेकि जेतने चमत्कार के काम यीसु यरूसलेम सहर माहीं, तेउहार के समय माहीं किहिन रहा हय, ऊँ पंचे उन सगले कामन काहीं देखिन तय, काहेकि ऊँ पंचे घलाय तेउहार मनामँइ के खातिर यरूसलेम सहर माहीं गें तय। 46यीसु ओखे बाद गलील प्रदेस के काना गाँव माहीं आएँ, जहाँ ऊँ पानी काहीं अंगूर के रस बनाइन रहा हय: उहाँ राजा के एकठे कर्मचारी रहा हय, जेखर लड़िका कफरनहूम सहर माहीं बिमार रहा हय। 47जब ऊँ इआ सुनिन कि यीसु यहूदिया प्रदेस से गलील प्रदेस माहीं आइगें हँय, तब उनखे लघे गें, अउर उनसे बिनती कइके कहँइ लागें, कि अपना चलिके हमरे लड़िका काहीं नीक कइ देई: काहेकि उआ खुब बिमार रहा हय, लागत रहा हय कि मर जई। 48यीसु उनसे कहिन, “जब तक तूँ पंचे चिन्हारी अउर अचरज के काम न देखिहा, तब तक कबहूँ बिसुआस न करिहा।” 49तब राजा के ऊँ कर्मचारी उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना हमरे लड़िका के मरँइ से पहिले चली।” 50यीसु उनसे कहिन, “जा तोंहार लड़िका जिअत रही” यीसु के कही बातन के बिसुआस मानिके, ऊँ राजा के कर्मचारी अपने घर काहीं चल दिहिन। 51जब ऊँ घर काहीं लउटत रहे हँय, तब गइलय माहीं उनखर दास लोग मिलें, अउर उनहीं बताइन, कि अपना के लड़िका नीक होइगा हय। 52तब ऊँ अपने दासन से पूँछिन, कि “बताबा उआ केतनीदार से नीक होंइ लाग रहा हय?” ऊँ पंचे उनसे कहिन, “काल्ह दुपहर एक बजे उनखर बोखार उतरि गे रही हय।” 53तब लड़िका के बाप जानि ग, कि उआ उहय समय माहीं नीक भ रहा हय, जेतनीदार यीसु उनसे कहिन रहा हय, कि “तोंहार लड़िका जिअत रही” तब ऊँ राजा के कर्मचारी अउर उनखे घर माहीं जेतने मनई रहे हँय, सगले जने यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन। 54इआ दूसर अचरज के काम आय जउने काहीं यीसु यहूदिया प्रदेस से आइके गलील प्रदेस माहीं किहिन रहा हय।

5

अरतिस बरिस से बिमार मनई काहीं नीक करब

1एखे बाद यहूदी लोगन के एकठे तेउहार आबा, अउर तेउहार मनामँइ के खातिर यीसु यरूसलेम सहर माहीं गें। 2यरूसलेम सहर माहीं भेंड़-फाटक के लघे एकठे तलाव हय, जउन इब्रानी भाँसा माहीं बेतहसदा कहाबत हय, अउर ओखे किनारे पाँचठे बरामदा बने हँय। 3ओमाहीं खुब बिमार, आँधर, लाँगड़, अउर लोकबा के मारे मनई (पानी के हालँइ के आसा माहीं) परे रहत रहे हँय। 4काहेकि समय-समय माहीं परमातिमा के स्वरगदूत तलाव माहीं उतरिके, पानी हलाबत रहे हँय: पानी के हलतय जे कोऊ पहिले पानी माहीं घुस जात रहा हय, उआ नीक होइ जात रहा हय, चाह ओखे कउनव बिमारी रही होय।

5उहाँ परे बिमारन म से एकठे मनई अइसा रहा हय, जउन अरतिस बरिस से बिमार रहा हय। 6यीसु उआ बिमार मनई काहीं परा देखिके, अउर इआ जानिके, कि उआ खुब दिना से इहय हालत माहीं परा हय, ओसे पूँछिन, “का तूँ नीक होंइ चहते हया?” 7उआ बिमार मनई उनहीं जबाब दिहिस, “हे प्रभू, हमरे लघे अइसा कउनव मनई नहिं आय, कि जब पानी हलाबा जात हय, त हमहीं तलाव के पानी माहीं लइ जाय; पय पानी के लघे हमरे पहुँचत-पहुँचत दूसर कोऊ हमसे पहिले पानी माहीं हिल परत हय।” 8तब यीसु ओसे कहिन, “उठा, आपन खटिया उठाबा, अउर चला फिरा।” 9उआ बिमार मनई हरबिन नीक होइगा, अउर आपन खटिया उठाइके चलँय-फिरँय लाग।

10उआ दिन पबित्र दिन रहा हय, एसे यहूदी लोग ओसे जउन निकहा भ रहा हय, कहँइ लागें, “आज त पबित्र दिन आय, तोहईं खटिया उठाइके न चलँय-फिरँय चाही, काहेकि इआ हमरे नेम के खिलाफ हय।” 11उआ उनहीं जबाब दिहिस, “जे हमहीं नीक किहिन हीं, उँइन हमसे कहिन हीं, कि आपन खटिया उठाइके चला फिरा।” 12पुनि ऊँ पंचे ओसे पूँछिन, “ऊँ कउन मनई आहीं जे तोंहसे कहिन हीं, कि आपन खटिया उठाइके चला फिरा?” 13पय जउन मनई नीक होइगा तय, उआ नहीं जानत रहा आय, कि ऊँ को आहीं, जे हमहीं नीक किहिन हीं; काहेकि उआ जघा माहीं खुब भीड़ होंइ के कारन यीसु उहाँ से चले गे रहे हँय। 14एखे बाद यीसु उआ मनई काहीं मन्दिर माहीं देखिन, तब ओसे कहिन, “देखा, अब तूँ नीक होइ गया हय; पुनि दुबारा पाप न किहा, कहँव अइसा न होय, कि इआ बिमारिव से भारी कउनव बिपत्ती तोंहरे ऊपर आय परय।” 15उआ मनई जाइके यहूदी लोगन से बताय दिहिस, कि जे हमहीं नीक किहिन हीं, ऊँ यीसु आहीं।

लड़िका के व्दारा जीबन

16काहेकि यीसु इआमेर के काम पबित्र दिन काहीं करत रहे हँय, इआ कारन से यहूदी जाति के कुछ मनई उनहीं सतामँइ लागें। 17तब यीसु उनसे कहिन, “हमार पिता परमातिमा कबहूँ काम करब बंद नहीं करँय, एसे हमहूँ लगीतार काम करित हएन।” 18इआ कारन से यहूदी जाति के कुछ मनई, यीसु काहीं मार डारँइ के अउर जादा कोसिस करँइ लागें, काहेकि ऊँ पबित्र दिन के नेमय भर काहीं नहीं टोरत रहें, बलकिन परमातिमा काहीं आपन पिता कहिके, खुद काहीं परमातिमा के बराबर ठहराबत रहे हँय। 19एसे यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, लड़िका खुद अपने से कुछू नहीं कइ सकय, बलकिन उआ केबल उहय काम करत हय, जउन पिता काहीं करत देखत हय। 20काहेकि पिता परमातिमा अपने लड़िका से प्रेम करत हें, अउर जउन-जउन काम ऊँ खुद करत हें, ऊँ सगले कामन काहीं लड़िका काहीं देखाबत हें; अउर ऊँ इनहूँ से बड़े-बड़े काम घलाय उनहीं देखइहँय, जउने तूँ पंचे अचरज माना। 21काहेकि जइसन पिता परमातिमा मरे मनइन काहीं जिन्दा कइके जीबन देत हें, उहयमेर लड़िका घलाय जिनहीं चाहत हें, उनहीं जिआबत हें। 22अउर पिता परमातिमा कोहू के न्याय नहीं करँय, काहेकि न्याय करँइ के सगला अधिकार लड़िका काहीं सउँप दिहिन हीं। 23एसे, कि जइसन सगले मनई पिता परमातिमा के मान-सम्मान करत हें, उहयमेर लड़िका के घलाय मान-सम्मान करँय। जे कोऊ लड़िका के मान-सम्मान नहीं करय, उआ पिता परमातिमव के जे लड़िका काहीं पठइन हीं, मान-सम्मान नहीं करय।” 24यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, जे कोऊ हमरे बात काहीं सुनिके हमहीं पठमँइ बाले के ऊपर बिसुआस करत हय, उहय अनन्त जीबन पाई, अउर ओखे ऊपर न्याय के दन्ड न परी, बलकिन उआ मउत से पार होइके अनन्त जीबन पामँइ के हकदार बन चुका हय। 25हम तोंहसे से सही-सही कहित हएन, कि उआ समय आमँय बाला हय, बलकिन आय चुका हय, जउने माहीं मरे मनई, परमातिमा के लड़िका के अबाज काहीं सुनिहँय, अउर जे कोऊ सुनिहँय, ऊँ जिन्दा होइ जइहँय। 26काहेकि जउनमेर से पिता परमातिमा अपने-आप माहीं जीबन देंइ के अधिकार रक्खत हें, उहयमेर से ऊँ लड़िका काहीं घलाय इआ अधिकार दिहिन, कि ऊँ अपने-आप माहीं जीबन देंइ के अधिकार रक्खँइ। 27बलकिन उनहीं न्याय करँइ के घलाय अधिकार दिहिन हीं, एसे कि ऊँ मनई के लड़िका आहीं। 28एसे अचरज न माना, काहेकि उआ समय आमँइ बाला हय, कि जेतने मनई कब्रन माहीं गाड़े हें, उनखर अबाज सुनिके बाहर निकरि अइहँय। 29जेतने जने भलाई किहिन हीं, ऊँ पंचे अनन्त जीबन पामँइ के खातिर, मरेन म से पुनि जिन्दा होइ जइहँय, अउर जेतने बुरे काम किहिन हीं, ऊँ पंचे दन्ड पामँइ के खातिर, पुनि जिन्दा होइ जइहँय। 30पुनि यीसु कहिन, हम अपने-आप से कुछू नहीं कइ सकी; जइसन पिता परमातिमा से सुनित हएन, उहयमेर न्याय करित हएन, अउर हमार न्याय सच्चा हय; काहेकि हम आपन मरजी नहीं, पय अपने पठमँइ बाले के मरजी पूर करँइ चाहित हएन। 31अगर हम खुदय आपन गबाही देई; त हमार गबाही सही न मानी जई। 32हमरे कइती से गबाही देंइ बाले एक जने अउर हें। अउर हम जानित हएन, कि ऊँ जउन हमार गबाही देत हें, उआ सच्ची हय। 33तूँ पंचे यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के लघे कुछ लोगन काहीं पठइके पुँछबाया तय, अउर ऊँ हमरे बारे माहीं सच्ची गबाही दिहिन हीं। 34पय हम अपने बारे माहीं मनई के गबाही नहीं चाही; तऊ यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के गबाही के बारे माहीं हम एसे कहित हएन, कि तोंहईं पंचन काहीं मुक्ती मिलय। 35यूहन्ना जलत अउर चमकत दिया कि नाईं रहे हँय, अउर उनखर बातँय उँजिआर कि नाईं रही हँय। अउर तूँ पंचे कुछ समय के खातिर उनखे बातन के आनन्द लेंइ चाहत रहे हया। 36पय हमार गबाही यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के गबाही से बड़ी हय: काहेकि पिता परमातिमा जउन काम पूर करँइ के खातिर हमहीं सउँपिन हीं, हम उँइन कामन काहीं कइ रहेन हय, अउर उँइन कामँय हमार गबाह हें, कि पिता परमातिमा हमहीं पठइन हीं। 37अउर पिता परमातिमा जे हमहीं पठइन हीं, उँइन हमरे बारे माहीं गबाही दिहिन हीं: अउर तूँ पंचे न उनखर रू पय देखे आह्या, अउर न उनखर बोलय सुने आह्या। 38अउर तूँ पंचे अपने जीबन माहीं पिता परमातिमा के बचन काहीं लागू नहीं करते आह्या, काहेकि जेही ऊँ पठइन हीं, ओहू के बिसुआस नहीं मनते आह्या। 39तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं ढुँढ़ते हया, काहेकि तूँ पंचे सोचते हया, कि ओहिन माहीं अनन्त जीबन मिलत हय, पय पबित्र सास्त्र हमरेन बारे माहीं गबाही देत हय। 40तऊ तूँ पंचे अनन्त जीबन पामँइ के खातिर, हमरे लघे आमँइ नहीं चहते आह्या। 41हम मनइन से मान-सम्मान नहीं चाही। 42पय हम जानित हएन, कि तोंहरे जीबन माहीं परमातिमा के प्रेम नहिं आय। 43हम अपने पिता के नाम से इआ धरती माहीं आएन हँय, अउर तूँ पंचे हमहीं सोइकार नहीं करते आह्या; अगर कोऊ अपनेन नाम से आबत हय, त ओही सोइकार कइ लेइहा। 44तूँ पंचे हमरे ऊपर बिसुआस कइसन कइ सकते हया, काहेकि तूँ पंचे त आपस माहीं एक दुसरे से मान-सम्मान चहते हया, अउर उआ मान-सम्मान पामँइ के कोसिस नहीं करते आह्या, जउन एकलउते परमातिमा के तरफ से मिलत हय। 45इआ न सोचा, कि हम पिता परमातिमा के आँगे तोंहरे ऊपर दोस लगाउब: काहेकि तोंहरे ऊपर दोस लगामँइ बाले एक जने हें, अरथात मूसा नबी जिनखे ऊपर तूँ पंचे बिसुआस रखते हया। 46काहेकि अगर तूँ पंचे मूसा नबी के ऊपर बिसुआस कर त्या, त हमरेव ऊपर बिसुआस कर त्या, एसे कि मूसा नबी हमरेन बारे माहीं लिखिन हीं। 47पय अगर तूँ पंचे पबित्र सास्त्र माहीं लिखी उनखे बातन के बिसुआस नहीं करते आह्या, त हमरे कही बातन के कइसा बिसुआस करिहा?”

6

पाँच हजार मनइन काहीं खाना खबाउब

(मत्ती 14:13-21; मरकुस 6:30-44; लूका 9:10-17)

1एखे बाद यीसु गलील प्रदेस के झील के दुसरे पार चलेगें, जउन तिबिरियास झील के नाम से घलाय जानी जात रही हय। 2अउर उनखे पीछे-पीछे मनइन के खुब बड़ी भीड़ चल दिहिस, काहेकि जउन अचरज के काम बिमारन काहीं नीक कइके देखाबत रहे हँय, ऊँ पंचे उनहीं देखत रहे हँय। 3तब यीसु पहार के ऊपर चढ़िके अपने चेलन के साथ उहाँ बइठिगें। 4अउर यहूदी लोगन के फसह नाम के तेउहार लघेन रहा हय। 5जब यीसु बड़े ध्यान से देखिन, कि एकठे खुब बड़ी भीड़ हमरे लघे आय रही हय, तब फिलिप्पुस से कहिन, कि हम पंचे इनखे खाँय के खातिर खाना कहाँ से खरीद लई? 6पय यीसु इआ बात उनसे एसे कहिन कि देखी कि ऊँ का कहत हें; काहेकि यीसु त खुदय जानत रहे हँय कि हम का करब। 7तब फिलिप्पुस उनहीं जबाब दिहिन, कि “अगर आठ महीना के मजूरी से खाना खरीदा जाय, तऊ सगली भीड़ के मनइन काहीं खबामँइ के खातिर थोरव-थोर न पूजी।” 8तब उनखे चेलन म से समौन पतरस के भाई अन्द्रियास यीसु से कहिन। 9“इहाँ एकठे लड़िका हय जउने के लघे जबा के पाँचठे रोटी अउर दुइठे भूँजी मछरी हईं, पय एतने मनइन के खातिर एतने माहीं का होई?” 10तब यीसु चेलन से कहिन, “सगले मनइन काहीं बइठाय द्या।” उआ जघा माहीं खुब चारा रहा हय: त ओहिन माहीं सगले मनई बइठिगें, जऊँ पाँच हजार के करीब रहे हँय। 11तब यीसु रोटी लिहिन, अउर परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके चेलन काहीं परसँय के खातिर दिहिन, अउर ऊँ पंचे सगले मनइन काहीं परस दिहिन: अउर उहयमेर मछरिन काहीं घलाय जेतना-जेतना ऊँ पंचे चाहत रहे हँय, परस दिहिन। 12जब ऊँ पंचे खाइके संतुस्ट होइगें, तब यीसु अपने चेलन से कहिन, “जउन टुकड़ा बचिगे हँय उनहीं उठाय ल्या, जउने कुछू बेकार न जाय।” 13तब चेला लोग जबा के पाँचठे रोटी अउर मछरिन के टुकड़न से जऊँ खाँइ बालेन से बचिगे तय, समेटिके बारा टोपरी भरिन। 14यीसु के इआ अचरज के काम काहीं देखिके सगले मनई कहँइ लागें; कि ऊँ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले जउन संसार माहीं आमँइ बाले रहे हँय, निस्चित ईंन आहीं। 15यीसु इआ जानिके कि ऊँ पंचे हमहीं राजा बनामँइ के खातिर आइके पकड़ँइ चाहत हें, एसे ऊँ पहार के ऊपर अकेलेन चलेगें।

पानी के ऊपर यीसु के चलब

(मत्ती 14:22-33; मरकुस 6:45-52)

16जब साँझ होइगे, तब उनखर चेला लोग झील के किनारे गें। 17अउर नाव माहीं चढ़िके झील के दुसरे पार कफरनहूम सहर काहीं जाँइ लागें: उआ समय अँधिआर होइगा रहा हय, अउर यीसु अबे तक उनखे लघे नहीं आएँ तय। 18अउर आँधी के कारन झील माहीं लहर उठँय लागीं। 19जब ऊँ पंचे नाव काहीं खेबत-खेबत पाँच-छय किलोमीटर के करीब निकरिगें, तब ऊँ पंचे यीसु काहीं झील के पानी के ऊपर रेंगत, अउर अपने नाव के लघे आबत देखिके डेराइगें। 20पय यीसु उनसे कहिन, कि “हम आहेन; डेरा न।” 21तब ऊँ पंचे उनहीं नाव माहीं चढ़ामँइ के खातिर राजी होइगें, अउर उआ नाव हरबिन उआ जघा माहीं पहुँचिगे, जहाँ ऊँ पंचे जाँइ चाहत रहे हँय।

यीसु काहीं मनइन के ढूँढ़ब

22दुसरे दिना उआ भीड़ के मनई जउन झील के उआ पार रहिगें तय, इआ देखिन, कि इहाँ एकठे नाव काहीं छोंड़िके अउर कउनव छोट नाव नहिं आहीं, अउर यीसु अपने चेलन के साथ नाव माहीं नहीं चढ़े रहे आँय, पय नाव माहीं केबल उनखर चेलय भर गे रहे हँय। 23(तऊ तिबिरियास सहर से कइएकठे छोट-छोट नाव उआ जघा माहीं आईं, जहाँ प्रभु यीसु, परमातिमा के धन्यबाद किहे के बाद उनहीं रोटी, मछरी खबाइन तय।) 24इआमेर से जब भीड़ के मनई देखिन, कि यीसु इहाँ नहिं आहीं अउर न उनखर चेलय आहीं, तब ऊँ पंचे छोट-छोट नावन माहीं चढ़िके यीसु काहीं ढूँढ़त-ढूँढ़त कफरनहूम सहर माहीं पहुँचिगें। 25अउर ऊँ पंचे झील के उआ पार यीसु से मिलिके उनसे कहिन, हे गुरू, अपना इहाँ केतनीदार आएन हँय?

यीसु जीबन के रोटी आहीं

26यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, तूँ पंचे हमहीं एसे नहीं ढुँढ़ते आह्या, कि तूँ पंचे अचरज के काम देखे हया, पय एसे ढुँढ़ते हया, कि तूँ पंचे रोटी मछरी खाइके संतुस्ट होइ गया तय। 27नास होंइ बाले खाना के खातिर मेहनत न करा, पय अनन्त जीबन देंइ बाले उआ खाना के खातिर मेहनत करा, जउने काहीं मनई के लड़िका तोंहईं देइहँय, काहेकि ओही देंइ के अधिकार पिता परमातिमा केबल उनहिन काहीं दिहिन हीं।” 28तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “जउने कामन काहीं परमातिमा चाहत हें, उनहीं करँइ के खातिर हम पंचे का करी?” 29तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “परमातिमा के काम इआ आय, कि तूँ पंचे जेही ऊँ पठइन हीं, उनखे ऊपर बिसुआस करा।” 30तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “अपना कउन अइसा अचरज के काम देखाइत हएन, कि हम पंचे बिसुआस करी, कि अपना काहीं परमातिमा पठइन हीं, अइसा कउनव काम देखाई, त हमहीं पंचन काहीं बिसुआस होय।” 31ऊँ पंचे पुनि कहिन, “हमार पंचन के बाप-दादा जंगल माहीं मन्ना नाम के खाना खाइन तय; जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि परमातिमा उनहीं खाँय के खातिर स्वरग से रोटी दिहिन।” 32तब यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि मूसा नबी तोंहईं पंचन काहीं उआ रोटी स्वरग से नहीं दिहिन तय, पय हमार पिता तोंहईं सच्ची रोटी स्वरग से देत हें। 33काहेकि परमातिमा के दीन रोटी उहय आय, जउन स्वरग से उतरिके संसार के मनइन काहीं जीबन देत ही।” 34तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “हे प्रभू, इआ रोटी हमहीं हमेसा द्या करी।”

35तब यीसु उनसे कहिन, “जीबन देंइ बाली रोटी हमहिन आहेन: जे कोऊ हमरे लघे अई उआ कबहूँ भूँखा न होई, अउर जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करी, उआ कबहूँ पियासा न होई। 36पय हम तोंहसे बताऊ दिहेन हँय, अउर तूँ पंचे हमहीं देखिव लिहा हय, तऊ बिसुआस नहीं करते आह्या। 37अउर पिता परमातिमा जिनहीं चुनिके हमहीं दिहिन हीं, ऊँ सगले जन हमरे लघे अइहँय, अउर हम उनहीं कबहूँ न लउटाउब। 38काहेकि हम स्वरग से अपने मरजी के मुताबिक काम करँइ नहीं आएन आय, बलकिन अपने पठमँइ बाले के मरजी पूर करँइ के खातिर आएन हँय। 39अउर हमहीं पठमँइ बाले के मरजी इआ हय, कि जउन कुछू ऊँ हमहीं दिहिन हीं, उनमा से हम कुछू न गमाई, पय उनहीं आखिरी दिन माहीं पुनि जिआई। 40काहेकि हमरे पिता के मरजी इआ हय, कि जे कोऊ लड़िका काहीं देखी, अउर उनखे ऊपर बिसुआस करी, उआ अनन्त जीबन पाई; अउर हम ओही आखिरी दिन पुनि जिआय देब।”

41इआ सुनिके यहूदी लोग यीसु काहीं बरबराँय लागें, काहेकि ऊँ कहिन तय, कि जउन रोटी स्वरग से उतरी हय, उआ हम आहेन। 42अउर ऊँ पंचे आपस माहीं कहँइ लागें; “काहे ईं यूसुफ के लड़िका यीसु न होंहीं, जिनखे बाप-महतारी काहीं हम पंचे जानित हएन? त पुनि ईं काहे कहत हें कि हम स्वरग से उतरेन हय।” 43यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “आपस माहीं काहे बरबराते हया। 44कोऊ हमरे लघे नहीं आय सकय, जब तक हमहीं पठमँइ बाले पिता परमातिमा ओही हमरे कइती आमँइ के मन न देंइ, अउर जे कोऊ हमरे लघे अई, ओही हम आखिरी दिन पुनि जिन्दा कइ देब। 45परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताबन माहीं लिखा हय, ‘ऊँ पंचे सगले जन परमातिमा के तरफ से सिखाए होइ हँय।’ जे कोऊ पिता परमातिमा से सुनिस अउर सिखिस ही, उआ हमरे लघे आबत हय। 46काहेकि वास्तव माहीं पिता परमातिमा काहीं कोऊ नहीं देखिस, केबल उँइन पिता परमातिमा काहीं देखिन हीं, जेही ऊँ पठइन हीं। 47हम सही-सही कहित हएन, कि जे कोऊ हमरे बात के बिसुआस करत हय, अनन्त जीबन उहय पाबत हय। 48अनन्त जीबन देंइ बाली रोटी हमहिंन आहेन। 49तोंहार पंचन के बाप-दादा सुनसान जघा माहीं ‘मन्ना’ नाम के खाना खाइन रहा हय, तऊ ऊँ पंचे मरिगें। 50इआ उआ रोटी आय जउन स्वरग से उतरिके आई हय, अगर कउनव मनई ओमा से खई, त उआ न मरी। 51अनन्त जीबन देंइ बाली जउन रोटी स्वरग से उतरिके आई हय, उआ हमहिन आहेन। अगर कोऊ इआ रोटी म से खई, त हमेसा जिअत रही, अउर जउन रोटी हम संसार के मनइन के अनन्त जीबन के खातिर देब, उआ हमार माँस आय।”

52इआ बात काहीं सुनिके यहूदी लोग, इआ कहिके आपस माहीं बहँस करँइ लागें, कि “इआ मनई कइसन हमहीं पंचन काहीं आपन माँस खाँय काहीं दइ सकत हय?” 53तब यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि जब तक मनई के लड़िका के माँस न खइहा, अउर ओखर खून न पीहा, तब तक अनन्त जीबन न पइहा। 54जे कोऊ हमार माँस खात हय, अउर खून पिअत हय, अनन्त जीबन ओहिन काहीं मिली, अउर हम आखिरी दिन ओही पुनि जिआय देब। 55काहेकि हमार माँस वास्तव माहीं खाँय के चीज आय, अउर हमार खून वास्तव माहीं पिअँइ के चीज आय। 56जे हमार माँस खात हय अउर हमार खून पिअत हय, उआ हमरे ऊपर बिसुआस माहीं मजबूत बना रहत हय, अउर हम ओखे जीबन माहीं बने रहित हएन। 57जइसन जिन्दा परमातिमा हमहीं पठइन हीं, अउर हम पिता परमातिमा के कारन जिन्दा हएन, उहयमेर उहव जे हमहीं खई, उआ हमरे कारन जिअत रही। 58इहय उआ रोटी आय जउन स्वरग से उतरी हय, इआ उआमेर नहिं आय, जइसन हमार पंचन के बाप-दादा खाइन तय, अउर बाद माहीं मरिगें तय। जे कोऊ इआ रोटी म से खई, उआ हमेसा जिअत रही।” 59ईं बातन काहीं यीसु कफरनहूम सहर के एकठे यहूदी सभाघर माहीं उपदेस देत समय कहिन तय।

अनन्त जीबन के बचन

60एसे यीसु के चेलन म से खुब जने इआ सुनिके कहिन, इआ बात खुब कठोर अउर समझ से बाहर ही; एही को मान सकत हय? 61यीसु अपने मन माहीं इआ बात जानिके, कि हमार चेला लोग आपस माहीं बरबरात हें, उनसे पूँछिन, “का इआ बात से तोंहईं पंचन काहीं ठेस पहुँचत ही? 62अउर अगर तूँ पंचे मनई के लड़िका काहीं, स्वरग माहीं जहाँ ऊँ पहिले रहे हँय, उहाँ ऊपर जात देखिहा त का होई? 63परमातिमा के आत्मय हय, जउन अनन्त जीबन देत हय, देंह से कुछू फायदा नहीं आय: जउने बातन काहीं हम तोंहसे कहेन हँय, उँइन आत्मा आहीं, अउर जीबन घलाय आहीं।” 64पय तोंहरे पंचन म से कइएक जने अइसन हें, जे हमरे बातन के ऊपर बिसुआस नहीं करँय: काहेकि यीसु त पहिलेन से जानत रहे हँय, कि जे हमरे बातन के बिसुआस नहीं करँय, ऊँ पंचे को आहीं? अउर इहव जानत रहे हँय, कि हमहीं को पकड़बाई। 65यीसु पुनि उनसे कहिन, “एहिन से हम तोंहसे कहेन तय, कि जब तक कोहू काहीं पिता परमातिमा के तरफ से इआ बरदान न दीन जाय, तब तक उआ हमरे लघे नहीं आय सकय।”

पतरस के बिसुआस

66इहय कारन से यीसु के चेलन म से खुब जने वापिस लउटिगें, अउर पुनि उनखे साथ कबहूँ नहीं चलें। 67तब यीसु ऊँ बरहँव चेलन से कहिन, “का तुहूँ पंचे चले जाँइ चहते हया।” 68तब समौन पतरस उनहीं जबाब दिहिन, कि “हे प्रभू हम पंचे केखे लघे जई? अनन्त जीबन देंइ बाली बातँय, त अपनय के लघे हईं।” 69अब हम पंचे इआ बिसुआस कइ लिहेन हय, अउर जानिव गएन हय, कि परमातिमा के पठए पबित्र जन अपनय आहेन। 70यीसु उनहीं जबाब दिहिन, का “तोंहईं बरहँव जनेन काहीं हमहिन नहीं चुने आहेन? तऊ तोंहरेन म से एक जने सइतान हय।” 71इआ बात यीसु समौन इस्करियोती के लड़िका यहूदा के बारे माहीं कहिन तय, काहेकि उआ यीसु के खिलाफ होइके उनहीं धोखा देंइ बाला रहा हय, अउर उहव उन बरहँव चेलन म से रहा हय।

7

यीसु अउर उनखर भाई

1एखे बाद यीसु गलील प्रदेस माहीं घूमत रहिगें, काहेकि यहूदी लोग यीसु काहीं मार डारँइ के कोसिस करत रहे हँय, एसे ऊँ यहूदिया प्रदेस माहीं नहीं घूमँइ चाहत रहें। 2अउर यहूदी लोगन के झोपड़िअन7:2 जउने माहीं यहूदी लोग आठ दिना तक झोपड़ी बनाइके रहत रहे हँय। नाम के तेउहार लघेन रहा हय। 3एसे यीसु के सगले भाई उनसे कहिन, अपना काहीं इआ जघा छोंड़िके यहूदिया प्रदेस माहीं चले जाँइ चाही, जउने अपना जउन काम करित हएन, उनहीं अपना के चेलव देखँइ। 4काहेकि अइसा कोऊ मनई न होई, जउन मसहूर होंइ चाहय, अउर लुकिके काम करय: अगर अपना अचरज के काम करित हएन, त संसार के मनइन के आँगे खुद काहीं प्रगट करी। 5काहेकि उनखर भाइव उनखे ऊपर बिसुआस नहीं करत रहे आहीं। 6तब यीसु अपने भाइन से कहिन, “हमरे खातिर अबे ठीक समय नहीं आबा आय, पय तोंहरे पंचन के खातिर हर समय ठीक हय। 7संसार के मनई तोंहसे दुसमनी नहीं कइ सकँय, पय हमसे दुसमनी करत हें, काहेकि हम उनखे बिरोध माहीं, इआ गबाही देइत हएन, कि उनखर काम बुरे हें। 8तूँ पंचे तेउहार मनामँइ जा: हम अबे इआ तेउहार माहीं न जाब; काहेकि अबे तक हमरे खातिर उचित समय नहीं आबा आय।” 9यीसु उनसे ईं बातन काहीं कहिके गलील प्रदेस माहीं रहिगें।

झोपड़िअन नाम के तेउहार माहीं यीसु

10पय जब उनखर भाई तेउहार मनामँइ चलेगें, तब ऊँ घलाय तेउहार मनामँइ गें, पय लुके-लुके गें, कोऊ जाने नहीं पाइस। 11तब उआ तेउहार माहीं यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, यीसु काहीं इआ कहिके ढूँढ़ँइ लागें, कि ऊँ कहाँ हें? 12अउर उहाँ आए सगले मनई आपस माहीं यीसु के बारे माहीं चुप्पय-चुप्पय बतात रहे हँय, कुछ जने कहँय, कि ऊँ निकहा मनई हें: अउर कुछ जने कहँय, कि नहीं, ऊँ मनइन काहीं गुमराह करत हें। 13तऊ यहूदी धारमिक अँगुआ लोगन के डेरन के मारे, कोऊ उनखे बारे माहीं खुले आम नहीं बोलत रहे आहीं।

तेउहार माहीं यीसु के उपदेस

14अउर जब उआ तेउहार आधा बीतिगा तय, तब यीसु मन्दिर माहीं जाइके उपदेस देंइ लागें। 15तब यहूदी धारमिक अँगुआ लोग अचरज मानिके कहँइ लागें, “इआ मनई हमरे पंचन के कउनव पाठसाला माहीं कबहूँ नहीं ग, फेरव एही एतना ग्यान कहाँ से मिलिगा?” 16तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “जउन उपदेस हम देइत हएन, उआ हमार न होय, इआ पिता परमातिमा के आय, जे हमहीं पठइन हीं। 17अगर कोऊ परमातिमा के मरजी के मुताबिक चलँइ चाहय, त उआ इआ उपदेस के बारे माहीं जान जई, कि उआ परमातिमा के तरफ से आय, कि हम अपने कइती से देइत हएन। 18जे कोऊ अपने तरफ से कुछू कहत हय, उआ अपनय बड़ाई चाहत हय; पय जे अपने पठमँइ बाले के बड़ाई चाहत हय, उआ सच्चा हय, अउर ओखे जीबन माहीं अधरम नहिं आय। 19काहेकि मूसा नबी तोंहईं परमातिमा के बिधान दिहिन हीं? तऊ तोंहरे पंचन म से कोऊ मूसा के बिधान के मुताबिक नहीं चलय, तूँ पंचे काहे हमहीं मारि डारँय चहते हया?” 20तब ऊँ पंचे जबाब दिहिन; कि “तोंहरे भीतर बुरी आत्मा हय; कोऊ तोंहईं नहीं मारि डारँय चाहय?” 21यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “हम पबित्र दिन काहीं एकयठे चमत्कार किहेन, अउर तूँ पंचे सगले जन अचरज मनते हया।” 22इहय कारन से मूसा तोंहईं खतना करँइ के हुकुम दिहिन हीं, (इआ नेम मूसा के न होय, बलकिन इआ तोंहरे बाप-दादन से चला आय रहा हय) अउर तूँ पंचे पबित्र दिन काहीं मनइन के खतना करते हया। 23पबित्र दिन काहीं एसे खतना कीन जात हय, कि कहँव मूसा के बिधान के नेम टूट न जाय। त तूँ पंचे हमरे ऊपर क्रोध काहे करते हया, एसे कि जउन हम पबित्र दिन काहीं एकठे मनई काहीं, पूरी तरह से नीक कइ दिहेन हय। 24कोहू के न्याय करँइ माहीं मुँह देखी न करा, बलकिन ठीक-ठीक न्याय करा।

का यीसुअय मसीह आहीं

25तब यरूसलेम सहर के रहँइ बाले खुब जने कहँइ लागें; का ईं उँइन मनई न होंहीं, जिनहीं मारि डारँय के कोसिस कीन जाय रही हय। 26पय देखा, ऊँ त सगले मनइन के बीच माहीं बोलि रहे हँय, अउर ऊँ पंचे उनहीं कुछू नहीं कहँय। का अइसन त न होय, कि यहूदी धारमिक अँगुआ लोग जानिगें हँय, कि वास्तव माहीं ईंन मसीह आहीं। 27पय ईं मसीह नहीं होइ सकँय, काहेकि इनहीं त हम पंचे जानित हएन, कि ईं कहाँ से आए हँय, पय जब मसीह अइहँय, त कोऊ न जाने पाई, कि ऊँ कहाँ से आए हँय। 28जब यीसु मन्दिर माहीं उपदेस देत रहे हँय, तब चन्डे से कहिन, “तूँ पंचे हमहीं जनते हया, अउर इहव जनते हया, कि हम कहाँ से आएन हय। पय हम अपने-आप नहीं आएन, जे हमहीं पठइन हीं, ऊँ सच्चे हँय, उनहीं तूँ पंचे नहीं जनते आह्या। 29हम उनहीं जानित हएन; काहेकि हम उनहिन के तरफ से आएन हँय, उँइन हमहीं पठइन हीं।” 30एसे ऊँ पंचे यीसु काहीं पकड़ँइ चाहत रहे हँय, तऊ कोऊ उनहीं नहीं पकड़ सकें, काहेकि अबे उनखे पकड़े जाँइ, अउर मारे जाँइ के समय नहीं आबा रहा आय। 31पय भीड़ के मनइन म से खुब जने यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन, अउर कहँइ लागें, कि “जब मसीह अइहँय त का इनहूँ से जादा अचरज के काम देखइहँय, जउन ईं देखाइन हीं?”

यीसु काहीं पकड़ँइ के कोसिस

32फरीसी लोग उहाँ मनइन काहीं यीसु के बारे माहीं चुप्पय-चुप्पय बात करत सुनिन; तब प्रधान याजक लोग, अउर फरीसी लोग, मन्दिर के सिपाहिन काहीं यीसु काहीं पकड़ँइ के खातिर पठइन। 33एखे बाद यीसु कहिन, “हम थोरी देर तक अउर तोंहरे साथ हएन; फेर हम अपने पठमँइ बाले के लघे चले जाब। 34तूँ पंचे हमहीं ढ़ुँढ़िहा, पय न पइहा, अउर जहाँ हम रहब, उहाँ तूँ पंचे नहीं आय सकते आह्या।” 35इआ सुनिके यहूदी धारमिक अँगुआ लोग आपस माहीं कहँइ लागें, “ईं कहाँ जइहँय, कि हम पंचे इनहीं न पाउब: का ईं उनखे लघे जइहँय, जउन हमरे समाज के मनई यूनानी भाँसा बोलँइ बालेन के लघे तितर-बितर होइके रहत हें, अउर ईं यूनानी भाँसा बोलँइ बालेन काहीं घलाय उपदेस देइहँय? 36इआ का बात आय जउन यीसु कहिन हीं, कि तूँ पंचे हमहीं ढ़ुँढ़िहा, पय न पइहा, अउर जहाँ हम रहब, उहाँ तूँ पंचे नहीं आय सकते आह्या?”

जीबन देंइ बाले पानी के नदी

37पुनि तेउहार के अन्तिम दिना, जउन मुख्य दिन आय, यीसु ठाढ़ भें अउर चन्डे से कहिन, “अगर कोऊ पियासा होय, त हमरे लघे आइके पिअय। 38जे हमरे ऊपर बिसुआस करी, जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय ‘ओखे हिरदँय म से जीबन देंइ बाली पानी के नदिया बहँइ लगिहँय’।” 39यीसु इआ बात पबित्र आत्मा के बारे माहीं कहिन रहा हय, जउने काहीं उनखे ऊपर बिसुआस करँइ बाले पामँइ बाले रहे हँय; काहेकि पबित्र आत्मा अबे तक नहीं उतरा रहा आय; काहेकि यीसु अबय तक अपने महिमा माहीं नहीं पहुँचे तय।

40तब भीड़ के मनइन म से कुछ जने ईं बातन काहीं सुनिके कहिन, “वास्तव माहीं जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले आमँइ बाले रहे हँय, ईंन आहीं।” 41अउर कुछ जने इहव कहिन, कि “ईं मसीह आहीं”, पय कुछ जने कहिन “ईं न होंहीं, का मसीह गलील प्रदेस अइहँय?” 42काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि “मसीह राजा दाऊद के बंस से, अउर बैतलहम गाँव माहीं पइदा होइके अइहँय, जहाँ राजा दाऊद रहत रहे हँय।” 43इआ कारन से भीड़ के मनइन माहीं फूट परिगे। 44उनमा से कइएक जने यीसु काहीं पकड़ँइ चाहत रहे हँय, पय कोऊ नहीं पकड़ सकें।

यहूदी समाज के अँगुअन के अबिसुआस

45तब मन्दिर के सिपाही प्रधान याजकन अउर फरीसी लोगन के लघे आएँ, अउर ऊँ पंचे, उनसे पूँछिन, “तूँ पंचे यीसु काहीं काहे नहीं पकड़ लाया?” 46तब सिपाही जबाब दिहिन, कि “आज तक कउनव मनई अइसन बातँय नहीं बोलिस, जइसन ऊँ बोलत रहे हँय।” 47तब फरीसी लोग कहिन, “हमहीं त लागत हय, ऊँ तोंहऊँ पंचन काहीं भरमाय दिहिन हीं। 48का यहूदी धारमिक अँगुआ लोग, अउर फरीसी लोगन म से कोऊ यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन हीं?” 49पय ईं पंचे जिनहीं मूसा के बिधान के नेमन के ग्यान नहिं आय, एसे इनहीं परमातिमा सराप देइहँय। 50नीकुदेमुस (जउन पहिले यीसु के लघे आए रहे हँय, जउन उन फरीसी लोगन म से रहे हँय) उनसे कहिन, 51“हमहीं पंचन काहीं मूसा के द्वारा दीन बिधान, कउनव मनई काहीं जब तक ओखर पहिले सुनिके जान न लेय, कि उआ का किहिस ही; ओही दोसी नहीं ठहराबय।” 52ऊँ पंचे उनहीं जबाब दिहिन, “का तुहूँ गलील प्रदेस के आह्या, पबित्र सास्त्र काहीं पढ़िके देखा, कि गलील प्रदेस से कउनव परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाला, कबहूँ पइदा न होई।” 53एखे बाद ऊँ पंचे सगले जन उहाँ से अपने-अपने घर चलेगें।

8

ब्यभिचार करँइ बाली मेहेरिआ काहीं माफी

1जब सगले मनई अपने-अपने घर चलेगें, तब यीसु जैतून नाम के पहार माहीं चलेगें। 2अउर यीसु बड़े सकारे पुनि मन्दिर माहीं आएँ, तब सगले मनई उनखे लघे आइगें; अउर यीसु बइठिके उनहीं उपदेस देंइ लागें। 3उहय समय मूसा के बिधान सिखामँइ बाले अउर फरीसी लोग एकठे मेहेरिआ काहीं, यीसु के लघे लइ आएँ, जउन ब्यभिचार करत पकड़ी गे रही हय, ओही बीच माहीं ठाढ़ कइके यीसु से कहिन। 4“हे गुरू, इआ मेहेरिआ ब्यभिचार करत पकड़ी गे ही। 5बिधान माहीं, मूसा नबी हमहीं इआ हुकुम दिहिन हीं, कि अइसन मेहेरिअन काहीं पथरा मारँइ चाही: पय अपना इआ मेहेरिआ के बारे माहीं का कहित हएन?” 6ऊँ पंचे यीसु काहीं फसामँइ के खातिर इआ बात कहिन तय, जउने उनखे ऊपर दोस लगामँइ के खातिर कउनव बात पामँय, पय यीसु नीचे काहीं मूँड़ कए भुँइ माहीं अँगुरी से लिखँइ लागें। 7काहेकि जब ऊँ पंचे यीसु से पुँछतय रहिगें, तब यीसु सीध ठाढ़ होइके, उनसे कहिन, “तोंहरे पंचन म से जे कोऊ कबहूँ पाप न किहिस होय, उहय पहिले इआ मेहेरिआ काहीं पथरा मारय।” 8अउर पुनि यीसु नीचे काहीं मूँड़ कए भुँइ माहीं अँगुरी से लिखँय लागें। 9पय ऊँ पंचे इआ बात काहीं सुनिके, बड़े से लइके छोट तक एक-एक कइके सगले जन चलेगें, अउर उहाँ यीसु अकेले बचे, अउर उआ मेहेरिआ उहँय बीच माहीं ठाढ़ रहिगे। 10तब यीसु सीध ठाढ़ होइके उआ मेहेरिआ से कहिन, “हे बहिनी, ऊँ पंचे सगले जन कहाँ चलेगें? का कोऊ तोंहईं सजा देंइ के हुकुम नहीं दिहिन?” 11उआ मेहेरिआ कहिस, “हे प्रभू, कोऊ नहीं”: तब यीसु कहिन, “हमहूँ तोंहरे ऊपर सजा के हुकुम नहीं देई; जा, चले जा, अउर पुनि पाप न किहा।”

यीसु संसार के जोति आहीं

12तब यीसु पुनि मनइन से कहिन, “संसार के जोति हमहिन आहेन; जे हमरे पीछे चली उआ अँधिआर माहीं न चली, पय जीबन देंइ बाली जोति पाई।” 13इआ सुनिके फरीसी लोग उनसे कहिन; “अपना आपन गबाही खुदय देइत हएन; अपना के गबाही ठीक नहिं आय।” 14यीसु उनहीं जबाब दिहिन; “अगर हम आपन गबाही खुदय देइत हएन, तऊ हमार गबाही ठीक ही, काहेकि हम जानित हएन, कि हम कहाँ से आएन हय, अउर कहाँ जाब? पय तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि हम कहाँ से आएन हय, अउर कहाँ जाब। 15तूँ पंचे त मनइन के बनाए नेम के मुताबिक न्याय करते हया; पय हम कोहू के न्याय नहीं करी। 16अउर अगर हम न्याय करबव करी, तऊ हमार न्याय सच्चा होई; काहेकि हम अकेले नहीं, बलकिन हम हएन, अउर हमरे साथ पिता परमातिमा हें, जे हमहीं पठइन हीं। 17अउर मूसा नबी व्दारा दीन तोंहरे बिधान माहीं घलाय लिखा हय, कि दुइ जनेन के गबाही8:17 ब्यब 19:15 मिलिके ठीक होत ही। 18एक त हम खुदय आपन गबाही देइत हएन, अउर दूसर पिता परमातिमा हमरे बारे माहीं गबाही देत हें, जे हमहीं पठइन हीं।” 19तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “तोंहार पिता कहाँ हें?” यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “न त तूँ पंचे हमहिन काहीं जनते आह्या, अउर न हमरे पिता काहीं, अगर तूँ पंचे हमहीं जन त्या, त हमरे पिता काहीं घलाय जन त्या।” 20ईं बातन काहीं यीसु मन्दिर माहीं उपदेस देत समय भन्डार घर माहीं कहिन तय, अउर कोऊ उनहीं पकड़ नहीं सकें; काहेकि पकड़े जाँइ, अउर मारे जाँइ के उनखर समय अबे नहीं आबा रहा आय।

अपने बारे माहीं यीसु के बताउब

21यीसु पुनि उनसे कहिन, कि “हम जइत हएन, अउर तूँ पंचे हमहीं ढ़ुँढ़िहा, अउर अपने पापन के माफी पाए बिना मरिहा: जहाँ हम जइत हएन, उहाँ तूँ पंचे नहीं आय सकते आह्या।” 22इआ सुनिके यहूदी धारमिक अँगुआ लोग कहिन, “का ऊँ अपने-आप काहीं खतम कइ लेइहँय, एसे इआमेर कहत हें; कि जहाँ हम जइत हएन, उहाँ तूँ पंचे नहीं आय सकते आह्या?” 23तब यीसु उनसे कहिन, “तूँ पंचे इआ धरती के आह्या, अउर हम स्वरग के आहेन, तूँ पंचे इआ संसार के आह्या, हम इआ संसार के न होंहेन। 24एसे हम तोंहसे इआ कहेन हय, कि तूँ पंचे अपने पापन के माफी पाए बिना मरिहा; काहेकि अगर तूँ पंचे बिसुआस न करिहा, कि हम उहय आहेन, त अपने पापन के माफी पाए बिना मरिहा।” 25तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “अपना को आहेन?” यीसु उनसे कहिन, “हम8:25 निरग 3:14; यूह 18:5,6 उहय आहेन जउन सुरुआतय से तोंहसे कहत आएन हँय। 26तोंहरे बारे माहीं हमहीं बहुत कुछ कहँय क हय, अउर निरनय करँइ क हय, पय हमहीं पठमँइ बाले सच्चे हँय; अउर जउन कुछू हम उनसे सुनेन हय, उहय संसार के मनइन से कहित हएन।” 27ऊँ पंचे इआ नहीं समझे पाइन, कि हमसे यीसु पिता परमातिमा के बारे माहीं कहत हें। 28तब यीसु उनसे कहिन, “जब तूँ पंचे मनई के लड़िका काहीं क्रूस के खम्भा माहीं चढ़इहा, तब जान जइहा, कि हम उहय आहेन, अउर हम अपने-आप से कुछू नहीं करी, पय जइसन हमार पिता परमातिमा हमहीं सिखाइन हीं, उहयमेर ईं बातन काहीं कहित हएन। 29अउर जे हमहीं पठइन हीं, ऊँ हमरे साथ हें; ऊँ हमहीं अकेले नहीं छोंड़िन; काहेकि हम हमेसा उहय काम करित हएन; जउने काम से ऊँ प्रसन्न होत हें।” 30यीसु जब ईं बातन काहीं कहतय रहे हँय, कि तबहिन खुब जने उनखे ऊपर बिसुआस किहिन।

सत्य तोहईं पंचन काहीं अजाद करी

31तब यीसु ऊँ यहूदी लोगन म से जउन उनखे ऊपर बिसुआस किहिन तय, उनसे कहिन, “अगर तूँ पंचे हमरे बचन के पालन करत रइहा, त वास्तव माहीं हमार चेला ठहरिहा। 32अउर तूँ पंचे सत्य काहीं जनिहा, अउर उहय सत्य तोंहईं अजाद करी।” 33ऊँ पंचे यीसु काहीं जबाब दिहिन; कि “हम पंचे त अब्राहम के बंस के आहेन, अउर कबहूँ कोहू के दास नहीं भएन; पुनि अपना काहे कहित हएन, कि तूँ पंचे अजाद होइ जइहा?” 34तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन; “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन; कि जे कोऊ पाप करत हय, उआ पाप के दास आय। 35अउर दास हमेसा घर माहीं नहीं रहय; पय लड़िका हमेसा घर माहीं रहत हय। 36एसे अगर लड़िका तोहईं अजाद करी, त वास्तव माहीं, तूँ पंचे अजाद होइ जइहा। 37हम जानित हएन, कि तूँ पंचे अब्राहम के बंस के आह्या; तऊ हमरे बचन काहीं हिरदँय से नहीं अपनउते आह्या, एहिन से तूँ पंचे हमहीं मारि डारँय चहते हया। 38हम उहय कहित हएन, जउन अपने पिता के इहाँ देखेन हँय; अउर तूँ पंचे उहय करते हया, जउन अपने पिता से सुने हया।” 39जब ऊँ पंचे यीसु काहीं जबाब दिहिन, “कि हमार पंचन के कुल पिता त अब्राहम आहीं”: तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन; “अगर तूँ पंचे अब्राहम के सन्तान होत्या, त अब्राहम कि नाईं काम कर त्या। 40जउन सत्य बचन हम परमातिमा से सुनेन हय, उहय तोंहसे बतायन हय, पय तूँ पंचे हमहीं मारि डारँइ चहते हया। अइसन त अब्राहम कबहूँ नहीं किहिन तय। 41तूँ पंचे अपने पिता कि नाईं काम करते हया”: तब ऊँ पंचे यीसु से कहिन, “हम पंचे ब्यभिचार से नहीं पइदा भएन; हमार पंचन के एकयठे पिता हें, अउर ऊँ आहीं परमातिमा।” 42इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “अगर वास्तव माहीं परमातिमा तोंहार पिता होतें, त तूँ पंचे हमसे प्रेम रख त्या; काहेकि हम परमातिमय से निकरिके आएन हँय; हम अपने से नहीं आएन, बलकिन उँइन हमहीं पठइन हीं। 43हम जउन कहित हएन, उआ बात काहीं तूँ पंचे काहे नहीं समझे पउते आह्या? एखर कारन इआ हय, कि तूँ पंचे हमरे बातन काहीं सुनते नहिं आह्या। 44काहेकि तूँ पंचे अपने पिता सइतान के सन्तान आह्या। अउर तूँ पंचे अपने पिता के मरजी काहीं पूर करँइ चहते हया। उआ त संसार के सुरुआतय से कतली आय, अउर उआ सत्य के पच्छ कबहूँ नहीं लिहिस। काहेकि ओखे जीबन माहीं सत्य हइअय नहिं आय: अउर झूँठ बोलब ओखर सुभाबय आय; काहेकि उआ हमेसा झूँठ बोलँइ बाला आय, बलकिन झूँठ बोलँइ के सुरुआतय करँइ बाला आय। 45तूँ पंचे हमरे बात के बिसुआस एसे नहीं मनते आह्या, काहेकि हम सही बोलित हएन। 46अउर तोंहरे पंचन म से को हमहीं पापी ठहराय सकत हय? अगर नहीं, त पुनि जब हम सही बात कहित हएन, त हमरे बात के बिसुआस काहे नहीं मनते आह्या? 47जे परमातिमा के जन होत हय, उआ परमातिमा के बातन काहीं सुनिके मानत हय; अउर तूँ पंचे परमातिमा के बचन काहीं एसे नहीं सुनते आह्या, काहेकि तूँ पंचे परमातिमा के जन न होह्या।”

यीसु अउर अब्राहम

48इआ सुनिके यहूदी लोग यीसु से कहिन; “एहिन से हम पंचे तोंहईं ठीकय आय कहित हएन, कि तूँ सामरी आह्या, अउर तोंहरे भीतर बुरी आत्मा हय।” 49तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “हमरे भीतर बुरी आत्मा नहिं आय; बलकिन हम त अपने पिता के आदर करित हएन, अउर तूँ पंचे हमार निरादर करते हया। 50हम आपन बड़ाई नहीं चाही, पय हाँ, एक जने अइसा हें, जे आपन बड़ाई चाहत हें, अउर उँइन न्याय करत हें। 51हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, अगर कउनव मनई हमरे बचन के मुताबिक चली, त उआ अनन्तकाल तक न मरी।” 52तब यहूदी लोग यीसु से कहिन, “अब हम पंचे जान लिहेन हँय, कि तोंहरे भीतर बुरी आत्मा हय: अब्राहम मरिगें अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले घलाय मरिगें, अउर तूँ कहते हया, कि अगर कोऊ हमरे बचन के मुताबिक चली, त उआ अनन्तकाल तक न मरी। 53हमार पंचन के कुल पिता अब्राहम त मरिगें, का तूँ उनसे बड़े हया? अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले घलाय मरिगें, तूँ खुद काहीं का ठहरामँइ चहते हया।” 54तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन; “अगर हम खुदय आपन बड़ाई करी, त हमार बड़ाई कुछू न होय, पय हमार बड़ाई करँइ बाले हमार पिता परमातिमा हें, जिनहीं तूँ पंचे कहते हया, कि ऊँ हमार परमातिमा आहीं। 55तूँ पंचे उनहीं नहीं जनते आह्या, पय हम उनहीं जानित हएन; अउर अगर हम कही, कि हम उनहीं नहीं जानी, त हम तोंहरे कि नाईं लबरी बोलँइ बाले ठहरब; काहेकि हम उनहीं जानित हएन, अउर उनखे बचन के मुताबिक चलित हएन। 56तोंहार पंचन के पूरबज अब्राहम, धरती माहीं हमरे आमँइ के दिन देखँइ के आसा माहीं खुब आनन्दित रहे हँय; अउर ऊँ देखिन, अउर आनन्दित भें।” 57यहूदी लोग यीसु से कहिन, “अबे तूँ पचासव बरिस के नहीं भया; तऊ तूँ कहते हया, कि हम अब्राहम काहीं देखेन हँय?” 58तब यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन; अब्राहम के पइदा होंइ से पहिलेव हम रहेन हँय।” 59तब ऊँ पंचे यीसु काहीं मारँइ के खातिर पथरा उठाइन, पय यीसु लुकिके मन्दिर से निकरिके चलेगें।

9

जनम से आँधर मनई काहीं नीक करब

1जब यीसु जात रहे हँय, तब ऊँ गइल माहीं एकठे मनई काहीं देखिन, जउन जनम से आँधर रहा हय। 2तब उनखर चेला लोग उनसे पूछँइ लागें, “हे गुरू, को पाप किहिस रहा हय, कि इआ मनई आँधर पइदा भ हय, इआ खुदय पाप किहिस तय, कि एखर बाप-महतारी?” 3यीसु जबाब दिहिन, “न त इआ मनई पाप किहिस, अउर न एखर बाप-महतारी: बलकिन इआ एसे आँधर पइदा भ, कि एही नीक कइके परमातिमा के सक्ती देखाई जाय सकय। 4जे हमहीं पठइन हीं, उनखे कामन काहीं निस्चित रूप से हमहीं दिनय दिन माहीं कइ लेंइ चाही, काहेकि जब रात होइ जात ही, त कोऊ काम नहीं कइ सकय। 5जब तक हम संसार माहीं हएन, तब तक हम संसार के जोति आहेन।” 6इआ कहिके ऊँ भुँइ माहीं थूँकिन, अउर ओसे माटी सानिन, अउर उआ आँधर के आँखी माहीं लगाइके, 7ओसे कहिन, “जा, सीलोह के कुन्ड माहीं धोय लिहा।” (सीलोह के मतलब हय पठउब) अउर उआ जाइके आँखी धोइस, अउर उआ देखत लउटि आबा। 8तब ओखर परोसी अउर जेतने ओही भीख मागत देखिन तय, कहँइ लागें; “का इआ उहय मनई न होय, जउन बइठे भीख मागा करत रहा हय?” 9कुछ जने कहिन, “इआ उहय आय” अउर कुछ जने कहिन, “नहीं, उआ न होय, बलकिन ओहिन कि नाईं लागत आय हय।” इआ सुनिके उआ मनई कहिस, “हम उहय आहेन।” 10तब ऊँ पंचे ओसे पूछँइ लागें, “तोंहार आँखी कइसन नीक भईं हँय?” 11उआ मनई उनहीं जबाब दिहिस, कि “यीसु नाम के एकठे मनई माटी सानिन, अउर हमरे आँखी माहीं लगाइके हमसे कहिन, जाइके सीलोह के कुन्ड माहीं धोय ल्या, तब हम जाइके आँखी धोयन त हमहीं देखाँइ लाग।” 12ऊँ पंचे ओसे पूँछिन; “ऊँ कहाँ हें?” उआ कहिस; “हम नहीं जानी।”

फरीसी लोगन के व्दारा आँधर मनई के नीक होंइ के बारे माहीं जाँच-परताल

13तब ऊँ पंचे उआ मनई काहीं जउन पहिले आँधर रहा हय, फरीसी लोगन के लघे लइगें। 14जउने दिना यीसु माटी सानिके उआ मनई के आँखी माहीं लगाइके नीक किहिन तय, उआ दिना पबित्र दिन रहा हय। 15तब फरीसी लोग घलाय ओसे पूँछिन; बताबा तोंहार आँखी कइसनके नीक भईं हँय? तब उआ मनई उनसे कहिस; “ऊँ हमरे आँखी माहीं माटी लगाइन, फेर हम धोय लिहेन, अउर अब देखित हएन।” 16इआ सुनिके कुछ फरीसी कहँइ लागें; “जउन मनई एही नीक किहिन हीं, ऊँ परमातिमा कइती से न होंहीं, काहेकि ऊँ पबित्र दिन काहीं नहीं मानँय।” तब कुछ जने कहँइ लागें, पापी मनई कइसन अचरज के काम देखाय सकत हय? एसे ऊँ पंचन माहीं फूट परिगे। 17ऊँ पंचे पुनि जउन पहिले आँधर रहा हय, उआ मनई से पूँछिन, “ऊँ मनई जउन तोंहार आँखी नीक किहिन हीं, उनखे बारे माहीं तूँ का कहते हया?” उआ कहिस, “ऊँ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले आहीं।”

18पय यहूदी धारमिक अँगुअन काहीं बिसुआस नहीं भ, कि इआ पहिले आँधर रहा हय, अउर अब देखत हय, जब तक ऊँ पंचे जउने के आँखी नीक होइ गईं तय, ओखे बाप-महतारी काहीं बोलबाइके, 19उनसे इआ पूँछ न लिहिन, “कि का इआ तोंहारय लड़िका आय, जउने काहीं तूँ पंचे कहते हया, कि इआ आँधर पइदा भ रहा हय? त पुनि इआ अब कइसन देखँइ लाग?” 20ओखर बाप-महतारी जबाब दिहिन; “हम त इआ जानित हएन, कि इआ हमारय लड़िका आय, अउर आँधर पइदा भ रहा हय। 21पय हम पंचे इआ नहीं जानित आय, कि अब एही कइसन देखाँइ लाग, अउर न इहय जानी, कि को एखर आँखी नीक किहिस ही; उआ खुदय बतामँइ लाइक हय; ओहिन से पूँछ लेई; त उआ खुदय अपने बारे माहीं बताय देई।” 22इआमेर ओखर बाप-महतारी एसे कहिन, काहेकि ऊँ पंचे यहूदी धारमिक अँगुअन से डेरात रहे हँय; काहेकि सगले यहूदी धारमिक अँगुआ लोग साहुत बाँध लिहिन तय, कि अगर कोऊ कही, कि ऊँ मसीह आहीं, त ओही सभाघर से निकार दीन जई। 23इहय कारन से ओखर बाप-महतारी कहिन तय, कि उआ खुदय बतामँइ लाइक हय; ओहिन से पूँछ लेई।

24तब ऊँ पंचे उआ मनई से जउन पहिले आँधर रहा हय, दुसराय बोलाइके कहिन, “परमातिमा के स्तुति करा; हम पंचे त जानित हएन, कि ऊँ मनई पापी हें।” 25उआ जबाब दिहिस: “हम नहिं जानी, कि ऊँ पापी हें, कि नहीं: हम त केबल एतना जानित हएन, कि हम आँधर रहेन हय, अउर अब देखित हएन।” 26ऊँ पंचे पुनि ओसे कहिन, कि “ऊँ तोंहरे साथ का किहिन हीं? कि तोंहार आँखी नीक होइ गईं?” 27उआ उनसे कहिस; “हम तोंहसे त पहिलेन कहि चुकेन हँय, पय तूँ पंचे हमार बिसुआस नहीं मनते आह्या; अब दुसराय काहे उहय बात काहीं सुनँय चहते हया? का तुहूँ पंचे घलाय उनखर चेला बनँइ चहते हया।” 28तब ऊँ पंचे ओही भला-बुरा कहिके बोलिन, “तहिन उनखर चेला आहे; हम पंचे त मूसा नबी के चेला आहेन। 29हम पंचे त जानित हएन, कि परमातिमा मूसा नबी से बातँय किहिन तय; पय इआ मनई काहीं नहीं जानी कि कहाँ के आय।” 30उआ उनहीं जबाब दिहिस, “इआ त अचरज के बात आय, कि तूँ पंचे उनहीं नहीं जनते आह्या, कि ऊँ कहा के आहीं, तऊ ऊँ हमरे आँखिन काहीं नीक कइ दिहिन हीं। 31हम पंचे त एतना जानित हएन, कि परमातिमा पापिन के नहीं सुनँय, पय अगर कोऊ परमातिमा के भक्त होय, अउर उनखे मरजी के मुताबिक चलत होय, त परमातिमा ओखर सुनत हें। 32संसार के सुरुआत से इआ कबहूँ नहीं सुनान, कि कोऊ जनम से आँधर मनई के आँखी नीक किहिस होय। 33अगर ऊँ मनई परमातिमा के तरफ से न आए होतें, त कुछू नहिं कइ सकत रहे आँय।” 34ऊँ पंचे ओही जबाब दिहिन, कि “तँय त जनमँय से पापी आहे, तँय हमहीं का सिखउते हए? अउर यहूदी धारमिक अँगुआ लोग ओही सभाघर से बहिरे निकार दिहिन।”

आत्मिक अंधापन

35जब यीसु सुनिन कि ऊँ पंचे ओही यहूदी सभाघर से बहिरे निकार दिहिन हीं; अउर जब ओसे भेंट भय, तब यीसु कहिन, कि “का तूँ परमातिमा के लड़िका के ऊपर बिसुआस करते हया?” 36उआ उनसे कहिस, “हे प्रभू, बताई ऊँ को आहीं, कि हम उनखे ऊपर बिसुआस करी?” 37यीसु ओसे कहिन, “तूँ उनहीं देख चुके हया; अउर ऊँ, उँइन आहीं जिनसे तूँ अबे बात कइ रहे हया।” 38उआ कहिस, “हे प्रभू, हम बिसुआस करित हएन: अउर उआ उनखे गोड़न गिरा।” 39तब यीसु कहिन, “हम इआ संसार माहीं न्याय करँइ आए हएन, जउने जे नहीं देखँइ, ऊँ देखँइ लागँय, अउर जे देखत हें, ऊँ आँधर होइ जाँय।” 40जउन फरीसी उनखे साथ माहीं रहे हँय, ऊँ पंचे यीसु के बात काहीं सुनिके उनसे कहिन, “का हमहूँ पंचे आँधर हएन?” 41तब यीसु उनसे कहिन, “अगर तूँ पंचे आँधर होत्या, त पापी न ठहर त्या, पय अब कहते हया, कि हम पंचे देखित हएन, एसे तूँ पंचे परमातिमा के आँगे पापी ठहरिहा।”

10

यीसु निकहा चरबाहा आहीं

1पुनि यीसु उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि जे कोऊ दुअरा से गाड़र के सार माहीं नहीं जाय, बलकिन कउनव दुसरी कइती से चढ़िके घुसत हय, त उआ चोर अउर डाँकू आय। 2पय जउन दुअरा से गाड़र के सार माहीं जात हय, उहय गड़रन के चरबाहा आय। 3अउर ओखे खातिर गाड़र के सार माहीं पहरा देंइ बाला चउकीदार, दुअरा खोल देत हय, अउर गाड़र ओखे बात काहीं मनती हईं, अउर उआ अपने गड़रन काहीं ‘नाम लइ-लइके बोलाबत हय, अउर बहिरे लइ जात हय। 4अउर जब उआ अपने गड़रन काहीं सार से बहिरे निकार चुकत हय, तब उआ आँगे-आँगे चलत हय, अउर गाड़र ओखे पीछे-पीछे चलती हईं; काहेकि ऊँ सगली ओखे बोल काहीं पहिचनती हईं। 5पय गाड़र कउनव अनजान मनई के पीछे कबहूँ न जइहँय, बलकिन ओसे दूरिन भगिहँय, काहेकि गाड़र अनजान मनई के बोल काहीं नहीं पहिचनतीं।” 6यीसु उनहीं इआ उदाहरन बताइन, पय ऊँ पंचे नहीं समझे पाइन, कि ईं कउन बात आहीं, जउन ऊँ हमसे कहत हें।

7तब यीसु उनसे पुनि कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि गड़रन के दुअरा हमहिन आहेन। 8जेतने हमसे पहिले आएँ; ऊँ सगले चोर अउर डाँकू आहीं, एसे गाड़र उनखर बात नहीं सुनिन। 9दुअरा हमहिन आहेन: अगर कोऊ हमरे व्दारा भीतर जई, त उआ मुक्ती पाई, अउर भीतर- बाहरअई जई अउर चारा पाई। 10चोर कउनव दुसरे काम से नहीं आबय, उआ केबल चोरी करँइ, अउर कतल करँइ, अउर नास करँइ आबत हय, पय हम एसे आएन हँय, कि ऊँ पंचे भरपूर जीबन पामँइ।

11निकहा चरबाहा हमहिन आहेन; निकहा चरबाहा अपने गड़रन के खातिर आपन प्रान दइ देत हय। 12मजूर जउन न त चरबाहय आय, अउर न गड़रन के मालिकय आय, उआ डगर काहीं आबत देखिके, गड़रन काहीं छोंड़िके भाग जात हय, अउर डगर उनखे ऊपर हमला कइके, उनहीं तितर-बितर कइ देत हय। 13उआ एसे भाग जात हय, काहेकि उआ मजूर आय, अउर ओही गड़रन के चिन्ता नहीं रहय। 14निकहा चरबाहा हमहिन आहेन; अउर हम अपने गड़रन काहीं जानित हएन, अउर हमार सगली गाड़र हमहीं जनती हईं।

15जउनमेर पिता हमहीं जानत हें, उहयमेर हमहूँ पिता काहीं जानित हएन। अउर हम अपने गड़रन के खातिर आपन प्रान देइत हएन। 16अउर हमार अउरव गाड़र हईं, जउन अबय तक गाड़र के इआ सार माहीं नहिं आहीं; हमहीं उनहूँ काहीं लइ आउब जरूरी हय, अउर ऊँ सगली हमार बात मनि हँय; तब एकयठे झुन्ड, अउर एकयठे चरबाहा होई। 17परमपिता एसे हमसे प्रेम करत हें, कि हम आपन प्रान देइत हएन, कि जउने पुनि जिन्दा होइ जई। 18कोऊ ओही हमसे छड़ाबय नहीं, बलकिन हम ओही अपने मरजी से देइत हएन: काहेकि हमहीं ओही देंइ के अधिकार हय, अउर ओही लेऊँ के अधिकार हय: इआ हुकुम हमहीं हमरे पिता से मिला हय।”

19ईं बातन के कारन यहूदी समाज के मनइन माहीं पुनि फूट परिगे। 20उनमा से खुब जने कहँइ लागें, कि “यीसु के भीतर बुरी आत्मा हय, अउर ऊँ पागल होइगे हँय; उनखर बात काहे मनते हया?” 21अउर कुछ जने कहिन, “ईं बातँय कउनव अइसा मनई के नहीं होइ सकँय, जेखे भीतर बुरी आत्मा होय, काहेकि बुरी आत्मा कउनव आँधर मनई के आँखी नहीं नीक कइ सकय।”

हमार पिता अउर हम एकय आहेन

22यरूसलेम सहर माहीं जाड़े के रित माहीं, स्थापन नाम के तेउहार आबा। 23अउर यीसु मन्दिर माहीं सुलैमान के बरामदा माहीं टहलत रहे हँय। 24तब यहूदी समाज के खुब मनई आइके उनहीं घेर लिहिन, अउर पूँछिन, कि “अपना हमरे मन काहीं कब तक दुबिधा माहीं डारे रहब? अगर अपना मसीह आहेन, त हमहीं साफ-साफ बताय देई।” 25तब यीसु जबाब दिहिन, कि “हम त तोंहईं पंचन काहीं पहिलेन बताय चुकेन हय, अउर तूँ पंचे हमरे बात के बिसुआसय नहीं मनते आह्या, जउन काम हम अपने पिता के नाम से करित हएन, उँइन काम हमार गबाह हें। 26पय तूँ पंचे एसे हमरे बात के बिसुआस नहीं मनते आह्या, काहेकि हमरे गड़रन म से न होह्या। 27हमार सगली गाड़र हमार बात मनती हँय, अउर हम उनहीं सगलेन काहीं जानित हएन, अउर ऊँ सगली हमरे पीछे-पीछे चलती हँय। 28अउर हम उनहीं अनन्त जीबन देइत हएन, अउर ऊँ सगली कबहूँ नास न होंइ हँय, अउर न कोऊ उनहीं हमसे छड़ाएन पाई। 29ऊँ सगलिन काहीं हमहीं देंइ बाले हमार पिता सगलेन से बड़े हें, अउर कोऊ उनहीं पिता के हाँथे से छड़ाय नहीं सकय। 30हम अउर पिता एकय आहेन।”

31यहूदी समाज के मनई यीसु काहीं पथरा मारँइ के खातिर, पथरा उठाय लिहिन। 32तब यीसु उनसे कहिन, कि “हम तोंहईं अपने पिता के तरफ से कइयकठे निकहे काम देखायन हय, उनमा से कउने काम के खातिर, तूँ पंचे हमहीं पथरा मारँइ चहते हया?” 33तब यहूदी समाज के मनई उनहीं जबाब दिहिन, “निकहे काम के खातिर हम पंचे तोंहईं पथरा न होय मारित हएन, बलकिन एसे कि जउन तूँ परमातिमा के बुराई करते हया, अउर तूँ मनई होइके अपने-आप काहीं परमातिमा बनउते हया।” 34यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “का तोंहरे पबित्र सास्त्र माहीं नहीं लिखा आय, कि ‘हम कहेन हय, कि तूँ पंचे परमातिमा10:34 भज 82:1-6 आह्या?’ 35अगर ऊँ उनहीं परमातिमा कहिन हीं, जिनखे लघे परमातिमा के बचन पहुँचा हय, (पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बात सत्य हईं) 36त जेही पिता पबित्र ठहराइके संसार माहीं पठइन हीं, तूँ पंचे उनसे कहते हया, कि तूँ परमातिमा के बुराई करते हया, एसे कि जउन हम कहेन, कि ‘हम परमातिमा के लड़िका आहेन।’ 37अगर हम अपने पिता के काम नहीं करी, त हमार बिसुआस न माना। 38पय अगर हम करित हएन, त चाह हमार बिसुआस नहिंव करा, पय ऊँ कामन के त बिसुआस करा, जउने तूँ पंचे जान जा, अउर समझा कि पिता हमरे भीतर हें, अउर हम पिता माहीं हएन।” 39तब ऊँ पंचे यीसु काहीं पकड़ँइ के कोसिस किहिन, पय उनहीं नहीं पकड़े पाइन, अउर ऊँ उहाँ से निकरिगें। 40एखे बाद यीसु उहाँ से यरदन नदी के दुसरे पार उआ जघा माहीं चलेगें, जहाँ यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले बपतिस्मा देत रहे हँय, अउर उहँइ रहँइ लागें। 41अउर खुब जने उनखे लघे आबत रहे हँय, अउर आपस माहीं बतात रहे हँय, कि यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले, त कउनव चमत्कार नहीं देखाइन, पय जउन कुछू यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले इनखे बारे माहीं कहिन रहा हय, उआ सगला बेलकुल सही निकरा। 42अउर उहाँ खुब जने यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन।

11

लाजर के मउत

1बैतनिय्याह नाम के गाँव माहीं लाजर नाम के एकठे मनई बिमार रहे हँय, उनखे साथ माहीं उनखर दुइठे बहिनी, मरियम अउर मारथा रहत रही हँय। 2ईं उँइन मरियम आहीं, जउन प्रभू के ऊपर अँतर डारिके उनखे गोड़ेन काहीं अपने बालन से पोंछिन रहा हय, इनहिन के भाई लाजर बिमार रहे हँय। 3एसे उनखर बहिनी यीसु के लघे सँदेस कहबाय पठइन, कि “हे प्रभू, देखी, जेसे अपना प्रेम करित हएन ऊँ बिमार हें।” 4यीसु सँदेस सुनिके कहिन, “इआ बिमारी मउत के न होय, बलकिन परमातिमा के बड़ाई होंय के खातिर आय, जउने एखे व्दारा परमातिमा के लड़िका के बड़ाई होय।” 5काहेकि यीसु मारथा, मरियम अउर उनखे भाई लाजर से प्रेम करत रहे हँय। 6एसे जब ऊँ सुनिन, कि लाजर बिमार हें, त जउने जघा माहीं रहे हँय, उहाँ दुइ दिना अउर रुकिगें। 7एखे बाद यीसु अपने चेलन से कहिन, “आबा हम पंचे पुनि यहूदिया प्रदेस माहीं चली।” 8तब चेला लोग यीसु से कहिन, “हे गुरू, कुछ दिना पहिलेन यहूदी लोग अपना काहीं पथरा मारँइ चाहत रहे हँय, तऊ अपना उहाँ जाँय चाहित हएन।” 9यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “काहे दिन माहीं बारा घन्टा नहीं होंय? अगर कोऊ दिन माहीं चलय, त ठोकर नहीं खाय, काहेकि उआ इआ संसार के उँजिआर काहीं देखत हय। 10पय अगर कोऊ रात माहीं चलय, त ठोकर खात हय, काहेकि ओमा उँजिआर नहीं होय।” 11ईं सगली बातन काहीं कहे के बाद, यीसु अपने चेलन से कहिन, कि “हमार साथी लाजर सोइगे हँय, पय हम उनहीं जगामँय जइत हएन।” 12तब चेला उनसे कहिन, “हे प्रभू, अगर ऊँ सोइगे हँय, त बच जइहँय।” 13यीसु त लाजर के मउत के बारे माहीं कहिन तय, पय चेला समझिन, कि ऊँ नींद माहीं सोय जाँइ के बारे माहीं कहिन हीं। 14तब यीसु चेलन से साफ-साफ बताय दिहिन, कि लाजर मरिगे हें। 15अउर हम तोंहरे कारन आनन्दित हएन, कि हम उहाँ नहीं रहेन आय, जउने तूँ पंचे हमरे ऊपर बिसुआस करा, पय अब आबा, हम पंचे उनखे लघे चली। 16तब थोमा जउन दिदुमुस के नाम से घलाय जाने जात रहे हँय, अपने साथ माहीं रहँइ बाले दुसरे चेलन से कहिन, “आबा, हमहूँ पंचे उनखे साथ मरँइ के खातिर चली।”

मरेन म से जि उठँइ बाले अउर जीबन देंइ बाले यीसु आहीं

17यीसु काहीं उहाँ आइके पता चला, कि लाजर काहीं कब्र माहीं धरे चार दिन होइ चुके हँय। 18बैतनिय्याह गाँव यरूसलेम सहर से करीब तीन किलोमीटर के दूरी माहीं रहा हय। 19अउर खुब यहूदी लोग मारथा अउर मरियम के लघे उनखे भाई के बारे माहीं सान्ति देंइ के खातिर आए रहे हँय। 20एसे मारथा यीसु के आमँइ के खबर सुनिके, उनखे लघे मिलँइ के खातिर गईं, पय मरियम घरय माहीं बइठ रहि गईं। 21अउर मारथा यीसु से कहिन, “हे प्रभू, अगर अपना इहाँ होइत, त हमार भाई कबहूँ न मरत। 22अउर अबहिनव हम जानित हएन, कि अपना जउन कुछू परमातिमा से मागब, त ऊँ अपना काहीं देइहँय।” 23यीसु उनसे कहिन, “तोंहार भाई जिन्दा होइ जई।” 24तब मारथा उनसे कहिन, “हम जानित हएन, कि अन्तिम न्याय के दिन जब जउन मनई मरिगे हँय पुनि जिन्दा होंइ हँय, उहय समय उहव जिन्दा होइ जई।” 25यीसु उनसे कहिन, “जउन मनई मरिगे हँय, उनहीं पुनि जिन्दा करँइ बाले, अउर जीबन देंइ बाले हमहिन आहेन, जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करत हय, अगर उआ मरिव जाय, तऊ जिन्दा होइ जई। 26अउर जे कोऊ जिन्दा हय, अउर हमरे ऊपर बिसुआस करत हय, त उआ अनन्तकाल तक न मरी, का तूँ इआ बात के ऊपर बिसुआस करते हया?” 27तब मारथा उनसे कहिन, “हाँ हे प्रभू, हम बिसुआस कइ चुके हएन, कि परमातिमा के लड़िका मसीह जउन संसार माहीं आमँइ बाले रहे हँय, ऊँ अपनय आहेन।”

यीसु रोइन

28इआ कहिके ऊँ चली गईं, अउर अपने बहिनी मरियम काहीं चुप्पय से बोलाइके कहिन, “गुरू इहँय हें, अउर तोहईं बोलाबत हें।” 29जब मरियम इआ सुनिन, त ऊँ हरबिन उठिके उनसे मिलँइ चल दिहिन। 30(यीसु अबे गाँव माहीं नहीं पहुँचे रहे आँय, बलकिन उहय जघा माहीं रुके रहे हँय, जहाँ मारथा यीसु से मिली रही हँय।) 31तब जउन यहूदी लोग उनखे साथ उनखे घर माहीं रहे हँय, अउर उनहीं सान्ति देत रहे हँय, इआ देखिके, कि मरियम हरबिन उठिके बहिरे चली गई हँय, त इआ समझिन कि ऊँ कब्र माहीं रोमँइ के खातिर जाती हईं, एसे उनखे पीछे-पीछे चल दिहिन। 32जब मरियम उहाँ पहुँची जहाँ यीसु रहे हँय, तब उनहीं देखतय उनखे गोड़े माहीं गिरिके कहिन, “हे प्रभू, अगर अपना इहाँ होइत त हमार भाई कबहूँ न मरत।” 33जब यीसु उनहीं अउर यहूदी लोगन काहीं जउन मरियम के साथ आए रहे हँय, रोबत देखिन, त आत्मा माहीं खुब उदास भें, अउर दुखी होइके कहिन, “तूँ पंचे लाजर के लहास काहीं कहाँ धरे हया?” 34ऊँ पंचे उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना खुदय चलिके देख लेई।” 35तब यीसु रोमँइ लागें। 36तब यहूदी लोग कहँइ लागें, “देखा, ऊँ लाजर से केतना प्रेम करत रहे हँय।” 37पय उनमा से कुछ जने कहिन, “का ईं जे आँधर के आँखी काहीं नीक किहिन तय, एतनव नहीं कइ सकें कि लाजर न मरत?”

लाजर काहीं जिन्दा करब

38तब यीसु मन माहीं पुनि खुब उदास होइके कब्र के लघे गें, उआ एकठे गुफा रही हय, अउर एकठे पथरा दुअरा माहीं धरा रहा हय। 39तब यीसु कहिन, “पथरा काहीं हटाबा”: तब उआ मरे मनई के बहिनी मारथा उनसे कहँइ लाग, “हे प्रभू, उनखर देंह त अब गंधाय लाग होई, काहेकि उनहीं मरे चार दिन होइगे हँय।” 40तब यीसु उनसे कहिन, “का हम तोंहसे नहीं कहेन तय, कि अगर तूँ बिसुआस करिहा, त परमातिमा के महिमा काहीं देखिहा।” 41एसे ऊँ पंचे उआ पथरा काहीं हटाइन, तब यीसु ऊपर कइती निहारिके कहिन, कि “हे पिता, हम अपना के धन्यबाद करित हएन, कि अपना हमार सुन लिहेन हय। 42अउर हम जानित हएन, कि अपना हमार हमेसा सुनित हएन, पय जउन भीड़ के मनई हमरे आस-पास ठाढ़ हें, इनखे कारन हम इआ कहेन हय, जउने ईं पंचे बिसुआस करँइ, कि अपनय हमहीं पठएन हँय।” 43इआ कहिके, यीसु चन्डे से गोहराइन, कि “हे लाजर, बहिरे निकरि आबा।” 44तबहिनय उआ जउन मरिगा रहा हय, हाँथे गोड़े माहीं कफन बाँधेन बाँधे निकरि आबा, अउर ओखे मुँहे माहीं घलाय कफन लपटा रहा हय, तब यीसु उनसे कहिन, “उनखर कफन छोरिके जाँइ द्या।”

यीसु के बिरोध माहीं खड़यन्त्र रचब

(मत्ती 26:1-5; मरकुस 14:1,2; लूका 22:1,2)

45तब जउन यहूदी लोग मरियम के साथ आए रहे हँय, यीसु के इआ काम काहीं देखिके, उनमा से खुब जने यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन। 46पय उनमा से कुछ जने फरीसी लोगन के लघे जाइके, यीसु जउन काम किहिन रहा हय, ओखर खबर उनसे बताइन। 47इआ सुनिके प्रधान याजक लोग, अउर फरीसी लोग महासभा के सदस्सन काहीं एकट्ठा कइके कहिन, “हमहीं पंचन काहीं का करँइ चाही? इआ मनई त खुब चमत्कार के काम देखाबत हय। 48अगर हम पंचे ओही अइसय छोंड़ि देब, त हरेक मनई ओखे ऊपर बिसुआस करँइ लगिहँय, अउर रोमी लोग आइके हमरे मन्दिर अउर देस माहीं कब्जा कइ लेइहँय।” 49तब उनमा से काइफा नाम के एकठे मनई, जउन उआ बरिस के महायाजक रहे हँय, उनसे कहिन, तूँ पंचे कुछू नहीं जनते आह्या। 50अउर न इहय सोचते आह्या, कि तोंहरे खातिर इआ भलय होई, कि हमरे समाज के मनइन के खातिर एकठे मनई मरय, इआ नहीं, कि हमरे समाज के सगले मनई नास होंय। 51इआ बात ऊँ अपने तरफ से नहीं कहिन तय, बलकिन उआ बरिस के महायाजक होंइ के कारन भबिस्यबानी किहिन, कि “यीसु यहूदी जाति के खातिर मरिहँय।” 52अउर केबल यहूदी लोगन भर खातिर नहीं, बलकिन एखे खातिर घलाय कि परमातिमा के सन्तानन काहीं, जउन संसार माहीं तितर-बितर रहत हें उनहीं एक कइ देंय। 53अउर ऊँ पंचे उहय दिना से यीसु काहीं मारि डारँइ के खातिर योजना बनामँइ लागें। 54एसे यीसु उहय समय से यहूदी लोगन के बीच माहीं खुले आम नहीं गें; बलकिन यरूसलेम सहर से निकरिके सुनसान जघा के लघेन इफ्राईम नाम के सहर माहीं चलेगें; अउर अपने चेलन के साथ उहँय रहँइ लागें। 55अउर यहूदी लोगन के फसह नाम के तेउहार अमइन बाला रहा हय, एसे खुब मनई अपने-अपने गाँमन से यरूसलेम सहर माहीं गें, जउने फसह तेउहार से पहिले अपने-आप काहीं पबित्र कइ लेंय। 56अउर ऊँ पंचे यीसु काहीं ढूँढ़त रहे हँय। एसे मन्दिर माहीं ठाढ़ होइके आपस माहीं कहँइ लागें, “तूँ पंचे का समझते हया?” 57का यीसु तेउहार माहीं न अइहँय? अउर प्रधान याजक लोग अउर फरीसी लोग घलाय, इआ हुकुम दए रहे हँय, कि “अगर कोऊ इआ जानत होय, कि यीसु कहाँ हें त बताबय, कि जउने उनहीं पकड़ लेंय।”

12

यीसु के गोड़ेन माहीं अँतर डारब

(मत्ती 26:6-13; मरकुस 14:3-9)

1पुनि यीसु फसह नाम के तेउहार से छय दिना पहिले, बैतनिय्याह गाँव माहीं आएँ, जहाँ लाजर रहत रहे हँय: जिनहीं यीसु मरे म से जिआइन तय। 2उहाँ ऊँ पंचे यीसु के खातिर खाना तइआर किहिन, अउर मारथा उनहीं खाना परसत रही हँय, अउर यीसु के साथ जेतने खाँइ बइठ रहे हँय उन माहीं लाजर घलाय रहे हँय। 3तब मरियम, जटामाँसी से तइआर कीन आधा लीटर के करीब खुब महग सुध्द अँतर, यीसु के गोड़ेन माहीं डारिन, अउर अपने मूँड़े के बार से उनखर गोड़ पोंछिन, अउर अँतर के महक से सगला घर महकँइ लाग। 4पय उनखे चेलन म से यहूदा इस्करियोती नाम के एकठे चेला, जउन यीसु काहीं पकड़ामँइ बाला रहा हय, उआ कहँइ लाग। 5इआ अँतर तीन सव चाँदी के सिक्कन माहीं बेंचिके, कंगालन काहीं काहे नहीं दइ दीनगा? 6उआ, इआ बात एसे नहीं कहिस रहा, कि ओही कंगालन के फिकर रही हय, बलकिन उआ एसे कहिस तय, काहेकि उआ चोर रहा हय, अउर ओखे लघे उनखे पइसा बाली थइली रहत रही हय, अउर ओमाहीं जउन पइसा डारा जात रहा हय, उआ निकार लेत रहा हय। 7तब यीसु कहिन, “रहँय द्या, उनहीं परेसान न करा, ऊँ हमरे गाड़े जाँइ के तइआरी माहीं इआ सब किहिन हीं। 8काहेकि कंगाल त तोंहरे लघे हमेसा रइहँय, पय हम हमेसा तोंहरे लघे न रहब।”

लाजर काहीं मारि डारँय के योजना

9यहूदी जाति के साधारन मनई जानिगें, कि यीसु बैतनिय्याह गाँव माहीं हें, एसे ऊँ पंचे केबल यीसु भर के कारन नहीं, बलकिन एसे आएँ कि लाजर काहीं घलाय देखँइ, जिनहीं यीसु मरे म से जिआइन रहा हय। 10एसे प्रधान याजक लोग लाजर काहीं घलाय मार डारँइ के योजना बनाइन। 11काहेकि लाजर के कारन खुब यहूदी लोग, अपने धारमिक अँगुअन काहीं छोंड़िके यीसु के लघे चलेगें, अउर उनखे ऊपर बिसुआस करँइ लागें।

यीसु राजा कि नाईं यरूसलेम माहीं प्रबेस किहिन

(मत्ती 21:1-11; मरकुस 11:1-11; लूका 19:28-40)

12दुसरे दिन खुब मनई जउन तेउहार माहीं आए रहे हँय, इआ सुनिके कि, यीसु यरूसलेम सहर माहीं आय रहे हँय। 13एसे ऊँ पंचे खजूर के डेरइआ लइके यीसु से मिलँइ के खातिर चल दिहिन, अउर खुब चन्डे चिल्लाइके कहँइ लागें, “होसन्ना, धन्य हय इजराइल के राजा, जउन प्रभू के नाम से आबत हय।” 14जब गइल माहीं यीसु काहीं एकठे गदहा के बच्चा मिला, तब यीसु ओखे ऊपर बइठिके चल दिहिन। 15जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय,

“हे सिय्योन के बिटिअव, डेरा न, देखा, तोंहार राजा गदहा के बच्चा के ऊपर बइठिके चले आय रहे हँय।”

16यीसु के चेला लोग पहिले ईं बातन काहीं नहीं समझे पाइन तय; पय जब यीसु के महिमा काहीं देखिन, तब उनहीं सुधि आई, कि “ईं बातँय यीसु के बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखी रही हँय”; अउर खुब मनई उनसे इआमेर के बरताव किहिन रहा हय। 17तब सगले भीड़ के मनई जउन उआ समय माहीं, उनखे साथ माहीं रहे हँय, इआ गबाही दिहिन, कि “यीसु लाजर काहीं कब्र से गोहराइके, मरे म से जिन्दा किहिन तय।” 18इहय कारन से खुब मनई यीसु से मिलँइ के खातिर आएँ रहे हँय, काहेकि ऊँ पंचे सुनिन तय, कि “यीसु इआ अचरज के काम देखाइन हीं।” 19तब फरीसी लोग आपस माहीं कहिन, “सोचा तूँ पंचे कुछू नहीं कए पउते आह्या, देखा, खुब मनई उनखर चेला बन रहे हँय।”

यूनानी जाति के मनइन के यीसु काहीं ढूँढ़ब

20जउन मनई उआ तेउहार माहीं भजन करँइ आए रहे हँय, उनमा से कुछ यूनानी जाति के मनई रहे हँय। 21ऊँ पंचे गलील प्रदेस के बैतसैदा गाँव के रहँइ बाले फिलिप्पुस के लघे आइके, उनसे बिनती किहिन, कि “साहब, हम पंचे यीसु से मिलँइ चाहित हएन।” 22अउर फिलिप्पुस आइके अन्द्रियास से कहिन; तब अन्द्रियास अउर फिलिप्पुस दोनव जने यीसु से कहिन। 23इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “मनई के लड़िका के महिमा होंइ के समय आइगा हय। 24हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि जब तक गोहूँ के दाना भुँइ माहीं गिरिके, मर नहीं जाय, तब तक उआ अकेले रहत हय, पय जब मर जात हय, तब अनगिनत दानन काहीं पइदा करत हय। 25जे कोऊ अपने प्रान काहीं पियार जानत हय, उआ ओही गमाय देई; अउर जे कोऊ इआ संसार माहीं अपने प्रान काहीं पियार नहीं जानय; उआ अनन्त जीबन के खातिर ओखर रच्छा करत रही। 26अगर कोऊ हमार सेबा करय, त हमरे पीछे-पीछे चलय; अउर जहाँ हम रहब, उहँय हमार सेबा करँइ बाला घलाय रही; अगर कोऊ हमार सेबा करी, त पिता ओखर आदर करिहँय।

क्रूस के मउत के इसारा

27अब हमार जिव ब्याकुल होइ रहा हय। एसे अब हम का कही? हे पिता, हमहीं इआ दुख के घरी से बचाई? पय इहय दुख के घरी के खातिर त हम आएन हँय। 28हे पिता, अपने महिमा काहीं देखाई, कि अपना केतना महान हएन: तबहिनय अकास से इआ बोल सुनान, कि ‘हम उनखर महिमा किहेन हय, अउर फेरव करब’।” 29तब जउन मनई उहाँ ठाढ़ सुनत रहे हँय, ऊँ पंचे कहिन, “बदरी गरजी हय”, अउर कुछ जने कहिन, “कउनव स्वरगदूत उनसे बात किहिन हीं।” 30इआ सुनिके यीसु कहिन, “इआ अबाज हमरे खातिर नहीं, बलकिन तोंहरे पंचन के खातिर आई हय। 31अब इआ संसार के मनइन के न्याय के समय आइगा हय, अब इआ संसार माहीं सासन करँइ बाले सइतान काहीं, परमातिमा हराय देइहँय। 32अउर हम अगर धरती से ऊपर क्रूस माहीं चढ़ाए जाब, त सगले मनइन काहीं अपने लघे खींच लेब।” 33यीसु इआ बतामँइ के खातिर अइसा कहिन तय, कि ऊँ कइसन मउत मरिहँय। 34इआ सुनिके खुब मनई उनसे कहिन, कि “हम पंचे पबित्र सास्त्र के इआ बात सुनेन हय, कि मसीह हमेसा रइहँय, त पुनि अपना काहे कहित हएन, कि मनई के लड़िका काहीं ऊपर क्रूस माहीं चढ़ाबा जाब जरूरी हय? इआ मनई के लड़िका को आय?” 35तब यीसु उनसे कहिन, “जोति अब थोरी देर तक तोंहरे बीच माहीं रही, जब तक जोति तोंहरे साथ ही, तब तक चले चला; अइसा न होय कि अँधिआर आइके तोंहईं पंचन काहीं आय घेरय; जे कोऊ अँधिआर माहीं चलत हय, उआ नहीं जानय कि कउने कइती जात हय। 36जब तक जोति तोंहरे साथ ही, जोति के ऊपर बिसुआस करा, कि जउने तूँ पंचे जोति के सन्तान बना।” ईं बातन काहीं कहिके यीसु उहाँ से चलेगें, अउर ऊँ पंचे उनहीं नहीं देखे पाइन।

यहूदी लोगन के अबिसुआस माहीं बने रहब

37अउर यीसु उनखे आँगे एतने चमत्कार देखाइन, तऊ ऊँ पंचे उनखे ऊपर बिसुआस नहीं किहिन। 38जउने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के बचन पूर होय, जउन ऊँ कहिन रहा हय, कि

“हे प्रभू, हमरे सँदेस के को बिसुआस मानिस ही? अउर प्रभू के सक्ती काहीं को देखिस ही?”

39इआ कारन से ऊँ पंचे बिसुआस नहीं कइ सकें, काहेकि यसायाह इहव कहिन हीं। 40कि

“परमातिमा उनखे आँखिन काहीं आँधर कइ दिहिन हीं, अउर उनखे मन काहीं कठोर कइ दिहिन हीं; कहँव अइसा न होय, कि ऊँ पंचे आँखिन से देखँय अउर मन से समझँय, अउर हमरे कइती फिरँय, अउर हम उनहीं चंगा करी।”

41यसायाह ईं बातन काहीं एसे कहिन हीं, कि ऊँ यीसु के महिमा काहीं देखिन तय; अउर ऊँ उनखे बारे माहीं बातँय घलाय किहिन तय। 42तऊ यहूदी धारमिक अँगुअन म से घलाय खुब जने यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन, पय फरीसी लोगन के कारन खुले आम नहीं मानत रहे आँय, कहँव अइसा न होय, कि ऊँ पंचे सभाघर से निकारे जाँय। 43काहेकि उनहीं मनइन के व्दारा दीन जाँय बाला सम्मान, परमातिमा के व्दारा दीन जाँय बाले सम्मान से जादा पियार लागत रहा हय।

यीसु के बचन न्याय के खातिर अधार

44एखे बाद यीसु खुब चन्डे कहिन, “जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करत हय, उआ हमरे ऊपर नहीं, बलकिन हमहीं पठमँइ बाले के ऊपर बिसुआस करत हय। 45अउर जे कोऊ हमहीं देखत हय, उआ हमहीं पठमँइ बाले काहीं देखत हय। 46इआ संसार माहीं हम जोति बनिके आएन हँय, जउने जे कोऊ हमरे ऊपर बिसुआस करय, त उआ अँधिआर माहीं न रहय। 47अगर कोऊ हमरे बातन काहीं सुनिके न मानी, त हम ओही दोसी नहीं ठहराई, काहेकि हम संसार के मनइन काहीं दोसी ठहरामँइ के खातिर नहीं, बलकिन संसार के मनइन काहीं मुक्ती देंइ के खातिर आएन हँय। 48जे कोऊ हमहीं तुच्छ जानत हय, अउर हमरे बातन काहीं सोइकार नहीं करय, त ओही दोसी ठहरामँइ बाला एकयठे हय: अरथात जउन बचन हम कहेन हय, उहय ओही अन्तिम दिन माहीं दोसी ठहराई। 49काहेकि हम जउन बातँय कहेन हँय, ऊँ अपने तरफ से नहीं, बलकिन पिता जे हमहीं पठइन हीं, उँइन इआ हुकुम दिहिन हीं, कि हम का-का कही? अउर का-का बोली? 50अउर हम जानित हएन, कि उनखर हुकुमय अनन्त जीबन आय, एसे हम उहय बोलित हएन, जइसा पिता हमसे कहिन हीं।”

13

यीसु अपने चेलन के गोड़ धोइन

1फसह नाम के तेउहार से पहिलेन जब यीसु जान लिहिन, कि इआ संसार काहीं छोंड़िके, पिता के लघे जाँइ के हमार समय आइगा हय, त ऊँ अपने प्रेम करँइ बालेन से जउन संसार माहीं रहे हँय, उनसे जइसन प्रेम करत रहे हँय, आखिरी समय तक उहयमेर प्रेम करत रहिगें। 2जब यीसु अउर उनखर चेला लोग साँझिके खाना खाँइ बइठ रहे हँय, उआ समय तक सइतान समौन इस्करियोती के लड़िका, यहूदा इस्करियोती के मन माहीं इआ बिचार डार चुका तय, कि उआ यीसु काहीं धोखे से पकड़ाबय। 3यीसु इआ जानिके, कि पिता परमातिमा सगली चीजन के ऊपर हमहीं अधिकार दइ दिहिन हीं, अउर हम परमातिमा के लघे से आएन हँय, अउर उनहिन के लघे जइत हएन। 4एसे ऊँ खाना खाँइ से उठिके, अपने ऊपर बाले ओन्हा उतार दिहिन, अउर अँगउछी लइके अपने करिहा माहीं बाँधिन। 5अउर बरतन माहीं पानी लइके, चेलन के गोड़ धोमँइ लागें, अउर उआ अँगउछी से जउन करिहाँ माहीं बाँधे रहे हँय, ओहिन से पोंछँइ लागें। 6जब यीसु समौन अरथात पतरस के लघे आएँ: तब पतरस उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना हमार गोड़ काहे धोइत हएन?” 7तब यीसु उनसे कहिन, “जउन हम करित हएन, तूँ अबे नहीं जनते आह्या, पय एखे बाद जनिहा।” 8पतरस उनसे कहिन, “अपना काहीं हम आपन गोड़ कबहूँ न धोमँइ देब”: इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “अगर हम तोंहईं न धोउब, त हमरे साथ तोंहार कउनव सम्बन्ध न रही।” 9तब समौन पतरस उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना हमार गोड़य भर नहीं, बलकिन मूँड़-हाँथ घलाय धोय देई।” 10तब यीसु उनसे कहिन, “जे नहाय चुका हय, ओही गोड़े के अलाबा अउर कुछू धोमँइ के जरूरत नहिं आय; काहेकि उआ बेलकुल सुद्ध हय: अउर तूँ पंचे सुद्ध हया; पय सबके सब नहीं।” 11यीसु अपने पकड़ामँइ बाले काहीं जानत रहे हँय, एहिन से ऊँ कहिन, कि “तूँ पंचे सबके सब सुद्ध नहिं आह्या।”

12जब यीसु उनखर गोड़ धोय चुके, तब आपन ओन्हा पहिरिके पुनि बइठिगें, अउर उनसे कहँइ लागें, “जउन हम तोंहरे साथ किहेन हय, का तूँ पंचे ओही समझ गया हय? 13तूँ पंचे हमहीं गुरू, अउर प्रभू कहते हया, त ठीकय कहते हया, काहेकि हम उहय आहेन। 14अगर हम गुरू अउर प्रभू होइके, तोंहार पंचन के गोड़ धोए हएन; त तोंहऊँ पंचन काहीं एक दुसरे के गोड़ धोमँइ चाही। 15काहेकि हम तोंहईं नमूना देखाय दिहेन हय, कि जइसा हम तोंहरे साथ किहेन हय, तुहूँ पंचे घलाय उहयमेर किहा करा। 16हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि दास अपने मालिक से बड़ा नहीं होय; अउर न पठबा, अपने पठमँइ बाले से। 17तूँ पंचे त ईं बातन काहीं जनते हया, अउर अगर तूँ पंचे इनहिन माहीं चला, त धन्य हया।

बिसुआस घात के बारे माहीं बताउब

(मत्ती 26:20-25; मरकुस 14:17-21; लूका 22:21-23)

18हम तोंहरे सगलेन के बारे माहीं नहीं कही: जिनहीं हम चुनि लिहेन हय, उनहीं हम जानित हएन: पय इआ एसे भ, कि जउने पबित्र सास्त्र के लिखा इआ बचन पूर होय, कि ‘जउन हमार रोटी खाइस, उहय हमरे ऊपर लात उठाइस।’ 19अब हम ओखे पूर होंय से पहिलेन तोंहईं जताए देइत हएन, कि जब उआ पूर होइ जाय, त तूँ पंचे बिसुआस करा, कि हम उहय आहेन। 20हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, जे कोऊ हमरे पठए मनइन काहीं सोइकार करत हय, उआ हमहीं सोइकार करत हय, अउर जे कोऊ हमहीं सोइकार करत हय, उआ हमहीं पठमँइ बाले काहीं सोइकार करत हय।”

21ईं बातन काहीं कहे के बाद, यीसु आत्मा माहीं ब्याकुल होइगें, अउर इआ बताइन, कि “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि तोंहरे पंचन म से एक जने हमहीं बिरोधी लोगन के हाँथ म पकड़बाई।” 22चेला लोग चिन्ता माहीं परिगें, अउर एक दुसरे कइती निहारँइ लागें, काहेकि ऊँ पंचे नहीं जाने पाइन तय, कि यीसु केखे बारे माहीं कहत हें। 23सगले चेलन म से एकठे अइसा चेला रहा हय, जउने से यीसु जादा प्रेम करत रहे हँय, उआ उनखे छाती कइती झुका बइठ रहा हय। 24तब समौन पतरस उहय चेला कइती इसारा कइके कहिन, कि “यीसु से पूँछा, ऊँ केखे बारे माहीं आय कहत हें?” 25तब ऊँ उहयमेर यीसु के छाती कइती झुके-झुके उनसे पूँछिन, “हे प्रभू, उआ को आय?” तब यीसु उनसे कहिन, “जेही हम इआ रोटी के टुकड़ा खोरबा माहीं बोरिके देब, उहय आय।” 26अउर यीसु रोटी के टुकड़ा खोरबा माहीं बोरिके समौन के लड़िका यहूदा इस्करियोती काहीं दिहिन। 27अउर रोटी के टुकड़ा लेतय सइतान ओही अपने काबू माहीं कइ लिहिस: तब यीसु ओसे कहिन, “जउन तोंहईं करँइ काहीं हय, उआ हरबी करा।” 28पय जेतने उहाँ बइठ रहे हँय, उनमा से कोऊ नहीं जाने पाइन, कि यीसु इआ बात ओसे काहे के खातिर कहिन हीं। 29काहेकि यहूदा के लघे पइसा बाली थइली रहत रही हय, एसे कुछ जने समझिन, कि यीसु ओसे इआ आय कहत हें, कि जउन कुछू तेउहार के खातिर चाही, उआ खरीद लेय, इआ कि कंगालन काहीं कुछ पइसा दइ देय। 30एसे यहूदा इस्करियोती रोटी के टुकड़ा लिहिस, अउर हरबिन बहिरे चला ग, उआ समय रात रही हय।

नबा हुकुम

31यहूदा इस्करियोती के चले जाँय के बाद, यीसु कहिन, “अब मनई के लड़िका के महिमा भय ही, अउर उनखे व्दारा परमातिमा के महिमा भय ही। 32अगर उनखे व्दारा परमातिमा के महिमा भय ही, त परमातिमा अपने व्दारा उनखर महिमा करिहँय, बलकिन हरबिन करिहँय। 33हे लड़िकव, अब हम थोरिन देर तक तोंहरे लघे रहब: एखे बाद तूँ पंचे हमहीं ढुँढ़िहा, अउर जइसन हम यहूदी लोगन से कहेन तय, कि जहाँ हम जइत हएन, उहाँ तूँ पंचे नहीं आय सकते आह्या, उहयमेर अब हम तोंहऊँ पंचन से कहित हएन। 34हम तोंहईं एकठे नबा हुकुम देइत हएन, कि ‘एक दुसरे से प्रेम करा: जइसन हम तोंहसे प्रेम किहेन हय, उहयमेर तुहूँ पंचे एक दुसरे से प्रेम करा।’ 35अगर आपस माहीं प्रेम करिहा, त एहिन से सगले मनई जनिहँय, कि तूँ पंचे हमार चेला आह्या।”

पतरस के इनकार के बारे माहीं यीसु के भबिस्सबानी

(मत्ती 26:31-35; मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34)

36समौन पतरस उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना कहाँ जइत हएन?” तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “जहाँ हम जइत हएन, उहाँ तूँ अबे हमरे पीछे नहीं आय सकते आह्या! पय हमरे जाँय के बाद तुहूँ हमरे पीछे अइहा।” 37तब पतरस यीसु से कहिन, “हे प्रभू, अबे हम अपना के पीछे काहे नहीं आय सकी? हम त अपना के खातिर जानव देंइ काहीं तइआर हएन।” 38यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “का तूँ हमरे खातिर आपन प्रान देइहा? हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि मुरगा के बोलँइ से पहिले तूँ तीन बेरकी इनकार करिहा, कि हम यीसु काहीं नहीं जानी।”

14

यीसु परमातिमा के लघे पहुँचय के गइल आहीं

1यीसु अपने चेलन से कहिन, “तोंहार मन ब्याकुल न होय, तूँ पंचे परमातिमा के ऊपर बिसुआस करते हया, हमरेव ऊपर बिसुआस करा। 2हमरे पिता के घर माहीं रहँइ के खुब जघा ही, अगर न होत, त हम तोंहसे बताय देइत, काहेकि हम तोंहरे पंचन के खातिर जघा तइआर करँइ जइत हएन। 3अउर अगर हम जाइके तोंहरे खातिर जघा तइआर करब, त पुनि आइके तोंहईं पंचन काहीं अपने इहाँ लइ जाब, कि जहाँ हम रही उहँय तुहूँ पंचे रहा। 4अउर जहाँ हम जइत हएन, तूँ पंचे उहाँ के गइल जनते हया।” 5इआ सुनिके थोमा उनसे कहिन, “हे प्रभू, जब हम पंचे इआ नहीं जानी, कि अपना कहाँ जइत हएन? त गइल कइसन जाने पाउब?” 6तब यीसु उनसे कहिन, “गइल, सत्य अउर जीबन हमहिन आहेन; हमरे ऊपर बिसुआस किहे बिना, कोऊ पिता के लघे नहीं पहुँच सकय। 7अगर तूँ पंचे हमहीं जान लिहे होत्या, त हमरे पिता काहीं घलाय जन त्या, अउर अब तूँ पंचे उनहीं जनतेव हया, अउर उनहीं देखिव लिहा हय।”

8इआ सुनिके फिलिप्पुस उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना हमहीं पंचन काहीं पिता क देखाय देई: इहय हमरे पंचन के खातिर काफी हय।” 9तब यीसु उनसे कहिन, “हे फिलिप्पुस, हम एतने दिना से तोंहरे पंचन के साथ हएन, अउर का तूँ हमहीं नहीं जनते आह्या? जे कोऊ हमहीं देखिस ही, उआ पिता काहीं देखिस ही, पुनि तूँ काहे कहते हया, कि हमहीं पिता काहीं देखाबा। 10का तूँ बिसुआस नहीं मनते आह्या, कि हम पिता माहीं हएन, अउर पिता हमरे भीतर हें? ईं बातँय जउन हम तोंहसे कहित हएन, अपने तरफ से नहीं कही, पय पिता हमरे भीतर रहिके आपन काम करत हें। 11हमरय बिसुआस माना, कि हम पिता माहीं हएन; अउर पिता हमरे भीतर हें; नहीं त हम जेतने कामन काहीं किहेन हँय, उनहिन के कारन हमार बिसुआस माना। 12हम तोंहसे पंचन से सही-सही कहित हएन, कि जे हमरे ऊपर बिसुआस करत हय, ईं काम जउन हम करित हएन, उहव करी, बलकिन इनहूँ से बड़े काम करी, काहेकि हम पिता के लघे जइत हएन। 13अउर तूँ पंचे जउन कुछू हमरे नाम से मगिहा, उहय हम करब, कि जउने लड़िका के व्दारा पिता के बड़ाई होय। 14अगर तूँ पंचे हमसे हमरे नाम से कुछू मगिहा, त हम ओही पूर करब।”

पबित्र आत्मा देंइ के वादा

15अउर यीसु पुनि कहिन, “अगर तूँ पंचे हमसे प्रेम करते हया, त हमरे हुकुमन काहीं मनिहा। 16अउर हम पिता से बिनती करब, अउर ऊँ तोंहईं पंचन काहीं एकठे सहायक देइहँय, कि ऊँ सहायक हमेसा तोंहरे पंचन के साथ रहँय। 17अरथात सत्य के आत्मा, जिनहीं संसार के मनई सोइकार नहीं कइ सकँय, काहेकि ऊँ पंचे न उनहीं देखिन आहीं, अउर न जनतय आहीं: पय तूँ पंचे उनहीं जनते हया, काहेकि ऊँ सहायक तोंहरे साथ रहत हें, अउर ऊँ हमेसा तोंहरे जीबन माहीं रइहँय।

18हम तोंहईं पंचन काहीं अनाथ न छोंड़ब, हम तोंहरे लघे दुबारा अउब। 19अउर कुछ देर बाद संसार के मनई हमहीं न देखिहँय, पय तूँ पंचे हमहीं देखिहा, एसे कि हम जिन्दा हएन, अउर तुहूँ पंचे घलाय जिन्दा रइहा। 20उआ दिना तूँ पंचे जनिहा, कि हम अपने पिता माहीं हएन, अउर तूँ पंचे हम माहीं हया, अउर हम तोंहरे पंचन माहीं हएन। 21उआ मनई जउन हमरे हुकुमन काहीं जानत हय, अउर उनखर पालन करत हय, उहय हमसे प्रेम करत हय, अउर जे कोऊ हमसे प्रेम करत हय, ओसे हमार पिता प्रेम करत हें, अउर हमहूँ ओसे प्रेम करब, अउर अपने-आप काहीं ओखे ऊपर प्रगट करब।” 22इआ सुनिके ऊँ यहूदा जउन यहूदा इस्करियोती न होंहीं उनसे कहिन, “हे प्रभू, अइसा का भ, कि अपना अपने-आप काहीं हमरे पंचन के ऊपर प्रगट करँइ चाहित हएन, अउर संसार के मनइन के ऊपर नहीं?” 23तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “अगर कोऊ हमसे प्रेम करी, त उआ हमरे बचन के पालन करी, अउर हमार पिता ओसे प्रेम करिहँय, अउर हम ओखे लघे अउब, अउर ओखे साथ हमेसा रहब। 24जे हमसे प्रेम नहीं करय, त उआ हमरे बचन काहीं नहीं मानय, पय जउन बचन तूँ पंचे सुनते हया, उआ हमार न होय, बलकिन हमहीं पठमँइ बाले पिता के आय। 25ईं बातन काहीं हम उआ समय कहेन तय, जब तोंहरे साथ माहीं रहेन हय। 26पय ऊँ सहायक अरथात पबित्र आत्मा, जिनहीं पिता हमरे नाम से पठइहँय, ऊँ तोंहईं पंचन काहीं सगली बातन काहीं सिखइ हँय, अउर जउन कुछू हम तोंहसे कहेन हय, उआ सगला ऊँ तोंहईं सुध देबइहँय। 27हम तोंहईं पंचन काहीं सान्ति दए जइत हएन, अउर आपन सान्ति तोंहईं पंचन काहीं देइत हएन; जइसन संसार के सगले मनई देत हें, हम तोंहईं उआमेर से नहीं देइत आहेन: तूँ पंचे अपने मन माहीं न घबरा अउर न डेरा। 28तूँ पंचे हमहीं इआ कहत सुने हया, कि हम जइत हएन, अउर तोंहरे लघे पुनि अउब: अगर तूँ पंचे हमसे प्रेम कर त्या, त हमरे इआ बात से आनन्दित होत्या, कि हम पिता के लघे जइत हएन, काहेकि पिता हमसे बड़े हें। 29अउर हम अब ईं बातन के होंय से पहिलेन तोंहईं पंचन काहीं बताय दिहेन हँय, कि जब ईं बातँय पूर होइ जाँय, त तूँ पंचे बिसुआस करा। 30अउर अब हम तोंहसे जादा समय तक बात न करब, काहेकि इआ संसार माहीं सासन करँइ बाला सइतान आमँइ बाला हय, अउर ओखर हमरे ऊपर कउनव अधिकार नहिं आय। 31पय इआ एसे होइ रहा हय, कि संसार के सगले मनई जान लेंय, कि हम पिता से प्रेम करित हएन, अउर जउनमेर पिता हमहीं हुकुम दिहिन हीं, हम उहयमेर करित हएन: उठा, इहाँ से हम पंचे चली।”

15

यीसु सच्ची दाखलता आहीं

1यीसु कहिन, “सच्ची दाखलता हमहिन आहेन; अउर हमार पिता किसान आहीं। 2हमरे हरेक उन डेरइअन काहीं, जउने माहीं फर नहीं लागँय, ऊँ काटि डारत हें, अउर हरेक उन डेरइअन काहीं जउन फरती हईं, ऊँ छाँटत हें, जउने उनमा अउर जादा फर लागँय। 3तूँ पंचे त उआ बचन के कारन जउन हम तोंहसे कहेन तय, ओखे ऊपर बिसुआस किहे के कारन सुद्ध हया। 4तूँ पंचे हमसे जुड़े रहा, अउर हम तोंहसे : जउनमेर डेरइआ अगर दाखलता माहीं जुड़ी न रहय, त अपने-आप से नहीं फर सकय, उहयमेर तुहूँ पंचे घलाय अगर हमसे जुड़े न रइहा, त फर नहीं सकते आह्या। 5हम दाखलता आहेन: तूँ पंचे डेरइआ आह्या; जे कोऊ हमसे जुड़ा रहत हय, अउर हम ओसे, त ओमाहीं खुब फर लागत हें, काहेकि तूँ पंचे हमसे अलग होइके कुछू नहीं कइ सकते आह्या। 6अगर कोऊ हमसे जुड़ा न रही, त उआ टूट डेरइआ कि नाईं फेंक दीन जात हय, अउर झुराय जात हय, अउर मनई उनहीं समेटिके आगी माहीं डार देत हें, अउर उँइ जरि जाती हईं। 7अगर तूँ पंचे हमसे जुड़े रहा, अउर हमार बातँय तोंहरे जीबन माहीं बनी रहँय, त जउन कुछू तूँ पंचे चहते हया त मागा, उआ तोंहईं पंचन काहीं मिल जई। 8हमरे पिता परमातिमा के बड़ाई एहिन माहीं होत ही, कि तूँ पंचे खुब फर लइ आबा, तबहिनय तूँ पंचे हमार सच्चे चेला कहइहा। 9जइसन पिता परमातिमा हमसे प्रेम किहिन हीं, उहयमेर हमहूँ तोंहसे प्रेम किहेन हय, हमरे प्रेम माहीं बने रहा। 10अगर तूँ पंचे हमरे हुकुमन काहीं पालन करिहा, त हमरे प्रेम माहीं बने रइहा: जइसा कि हम अपने पिता परमातिमा के हुकुमन काहीं पालन किहेन हय, अउर उनखे प्रेम माहीं बने रहित हएन। 11हम ईं बातँय तोंहसे एसे कहेन हय, कि हमार आनन्द तोंहरे जीबन माहीं बना रहय, अउर तोंहार पंचन के आनन्द पूर होइ जाय।

12हमार हुकुम इआ हय, कि जउनमेर हम तोंहसे प्रेम किहेन हय, उहयमेर तुहूँ पंचे आपस माहीं एक दुसरे से प्रेम करा। 13अगर कोऊ अपने साथिन के खातिर आपन प्रान देय, त ओसे बढ़िके कोहू के प्रेम नहिं आय। 14जउन हुकुम हम तोंहईं पंचन काहीं देइत हएन, अगर उनखर पालन करा, त तूँ पंचे हमार साथी आह्या। 15आज से हम तोंहईं दास न कहब, काहेकि दास नहीं जानय कि, ओखर मालिक का करत हय: पय हम तोंहईं साथी कहित हएन, काहेकि जउने बातन काहीं हम अपने पिता परमातिमा से सुनेन हय, ऊँ सगली बातँय तोंहईं पंचन काहीं बताय दिहेन हय। 16तूँ पंचे हमहीं नहीं चुने आह्या, बलकिन हम तोंहईं पंचन काहीं चुने हएन, अउर नियुक्त किहे हएन, जउने तूँ पंचे जाइके फर लइ आबा; अउर तोंहार फर बना रहय, कि तूँ पंचे जउन कुछू हमरे नाम से पिता परमातिमा से मागा, त ऊँ तोंहईं पंचन काहीं देंय। 17ईं बातन के हुकुम हम तोंहईं एसे देइत हएन, कि तूँ पंचे एक दुसरे से प्रेम करा।

संसार के इरखा

18अगर संसार के मनई तोंहसे दुसमनी करत हें, त तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि ऊँ पंचे पहिले हमहूँ से दुसमनी किहिन हीं। 19अगर तूँ पंचे संसार के मनइन कि नाईं होत्या, त संसार के मनई अपने कि नाईं मनइन से प्रेम करत हें, पय तूँ पंचे संसार के मनइन कि नाईं नहिं आह्या, काहेकि हम तोंहईं संसार के मनइन म से चुनि लिहेन हँय, एहिन से संसार के मनई तोंहसे दुसमनी करत हें। 20जउन बात हम तोंहसे कहेन तय, त ओही सुधि कए रह्या: कि दास अपने मालिक से बड़ा नहीं होय, अगर ऊँ पंचे हमहीं सताइन हीं, त तोंहऊँ पंचन काहीं सतइहँय; अगर ऊँ पंचे हमार बात मानिन हीं, त तोंहरव बात मनि हँय। 21पय इआ सब कुछ ऊँ पंचे हमार चेला होंइ के कारन तोंहरे साथ करिहँय, काहेकि ऊँ पंचे हमहीं पठमँइ बाले काहीं नहीं जानँय। 22अगर हम न अइत, अउर उनसे बातँय न करित, त ऊँ पंचे पापी न ठहरतें, पय अब अपने पाप के खातिर उनखे लघे कउनव बहाना नहिं आय। 23जे हमसे दुसमनी रक्खत हय, उआ हमरे पिता परमातिमा से दुसमनी रक्खत हय। 24अगर हम उनखे बीच माहीं ऊँ चमत्कार के काम न करित, जउन हमरे अलाबा कबहूँ कोऊ नहीं किहिस, त ऊँ पंचे पापी न ठहरतें, पय अब ऊँ पंचे हमरे चमत्कार के काम काहीं देख चुके हँय, अउर ऊँ पंचे हमसे अउर हमरे पिता परमातिमा, दोनव जनेन से दुसमनी करत हें। 25अउर इआ एसे भ, कि उआ बचन पूर होय, जउन उनखे पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि ‘ऊँ पंचे बेकार माहीं हमसे दुसमनी किहिन15:25 भज 35:19; 69:4।’ 26पय जब उआ सहायक अई, जउने काहीं हम तोंहरे पंचन के लघे पठउब, अरथात सत्य के आत्मा जउन पिता परमातिमा के तरफ से आबत हय, उहय हमार गबाही देई। 27अउर तुहूँ पंचे घलाय हमार गबाह हया, काहेकि तूँ पंचे हमरे सेबा के सुरुआतय से हमरे साथ रहे हया।”

16

1यीसु पुनि कहिन, “ईं बातन काहीं हम तोंहसे एसे कहेन हय, कि तूँ पंचे बिसुआस से भटक न जा। 2काहेकि ऊँ पंचे, तोंहईं अपने सभाघरन से बहिरे निकार देइहँय, अउर उआ समय आय रहा हय, कि जे कोऊ तोंहईं पंचन काहीं मारि डारी, उआ इआ समझी, कि हम परमातिमा के सेबा करित हएन। 3ऊँ पंचे अइसन एसे करिहँय, कि ऊँ पंचे न त पिता परमातिमा काहीं जानत आहीं, अउर न हमहिन काहीं जानत आहीं। 4पय हम तोंहसे ईं बातन काहीं एसे कहेन हय, कि जब उनखर होंय के समय आबय, तब तोंहईं सुध रहय, कि हम उनखे बारे माहीं तोंहसे पहिलेन बताय दिहेन तय, अउर हम सुरुआत माहीं तोंहसे, ईं बातन काहीं नहीं बतायन तय, काहेकि हम तोंहरे साथ माहीं रहे हएन। 5अब हम अपने पठमँइ बाले के लघे जइत हएन, अउर तोंहरे पंचन म से कोऊ हमसे नहीं पूँछय, कि अपना कहाँ जइत हएन? 6काहेकि हम तोंहईं ईं बातन काहीं बताय दिहेन हँय, एसे तूँ पंचे खुब दुखी होइ गया हय।

पबित्र आत्मा के काम

7तऊ हम तोंहसे सही कहित हएन, कि हमार जाब तोंहरे खातिर निकहा हय, काहेकि अगर हम न जाब, त उआ सहायक तोंहरे लघे न अई, पय अगर हम जाब, त ओही तोंहरे पंचन के लघे पठय देब। 8अउर उआ आइके पाप अउर धारमिकता अउर न्याय के बारे माहीं बताई, अउर संसार के मनई कउनव जबाब न दए पइहँय। 9पाप16:9 यूह 8:24 के बारे माहीं उआ उनहीं समझाई, काहेकि ऊँ पंचे हमरे ऊपर बिसुआस नहीं करँय। 10अउर धारमिकता के बारे माहीं हम समझाउब, काहेकि हम पिता परमातिमा के लघे जइत हएन, अउर तूँ पंचे हमहीं पुनि न देखिहा। 11अउर परमातिमा मनई के न्याय कइसा करिहँय, एहू के बारे माहीं घलाय हम समझाउब, काहेकि परमातिमा संसार माहीं सासन करँइ बाले सइतान16:11 यूह 12:31; इब्रा 2:14 के घलाय न्याय कइ चुके हँय।

12हमहीं तोंहसे खुब बातन काहीं बतामँइ क हय, पय अबे तूँ पंचे उनहीं समझे न पइहा। 13पय जब सत्य के आत्मा अई, त तोंहईं सत्य के गइल बताई, काहेकि उआ अपने तरफ से कुछू न कही, पय जउन कुछू सुनी, उहय बताई, अउर आमँइ बाली बातन काहीं तोंहईं पंचन काहीं बताई। 14उआ हमार बड़ाई करी, काहेकि उआ हमरे बातन म से लइके तोंहईं पंचन काहीं बताई। 15काहेकि जउन कुछू पिता परमातिमा के हय, उआ सगला हमार आय; एसे हम कहेन हय, कि उआ सहायक हमरे बातन म से लइके तोहईं पंचन काहीं बताई।”

दुख-सुख माहीं बदल जई

16एखे बाद यीसु उनसे पुनि कहिन, “थोरी देर माहीं तूँ पंचे हमहीं न देखिहा, अउर थोरी देर माहीं पुनि हमहीं देखिहा।” 17तब उनखे चेलन म से कुछ जने आपस माहीं कहँइ लागें, “इआ का आय, जउन यीसु हमसे कहत हें, थोरी देर माहीं तूँ पंचे हमहीं न देखिहा, अउर थोरी देर माहीं पुनि हमहीं देखिहा? एसे कि हम पिता परमातिमा के लघे जइत हएन?” 18अउर ऊँ पंचे पुनि कहँइ लागें, “इआ ‘थोरी देर बाद का आय?’ जेखे बारे माहीं यीसु बताय रहे हँय, अउर हम पंचे नहीं समझे पाई, कि ऊँ का आय कहत हें।” 19यीसु इआ जानिके, कि ऊँ पंचे हमसे कुछू पूछँइ चाहत हें, एसे उनसे कहिन, “का तूँ पंचे आपस माहीं इआ बात के बारे माहीं पुँछते हया, कि ‘थोरी देर माहीं तूँ पंचे हमहीं न देखिहा, अउर थोरी देर माहीं पुनि हमहीं देखिहा’। 20हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, कि ‘तूँ पंचे रोइहा अउर बिलाप करिहा’, पय संसार के सगले मनई आनन्द मनइहँय, तूँ पंचे सोक करिहा, पय तोंहार पंचन के सोक आनन्द माहीं बदल जई। 21जइसन कउनव मेहेरिआ के जब बच्चा पइदा होंय लागत हय, त ओखे खुब पीरा होत ही, काहेकि ओखे पीरा के समय आय पहुँचा हय, पय जब उआ बच्चा पइदा कइ चुकत ही, त इआ खुसी के मारे कि संसार माहीं एकठे मनई पइदा भ हय, उआ पीरा काहीं पुनि सुधि नहीं करय। 22अउर तोंहऊँ पंचन काहीं अबे त उहयमेर सोक हय, पय जब हम तोंहसे पुनि मिलब, त तूँ पंचे खुब आनन्दित होइहा; अउर तोंहरे आनन्द काहीं कोऊ छड़ाय नहिं सकय। 23उआ दिना तूँ पंचे हमसे कुछू न पुँछिहा, हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, ‘अगर तूँ पंचे पिता परमातिमा से जउन कुछू हमरे नाम से मगिहा, त ऊँ तोंहईं पंचन काहीं जरूर देइहँय।’ 24काहेकि तूँ पंचे अबे तक हमरे नाम से कुछू नहीं मागे आह्या; मगिहा त जरूर पइहा, जउने तोंहार आनन्द पूर होइ जाय।

संसार के ऊपर जीत

25हम ईं बातन काहीं उदाहरन दइके तोंहसे बतायन हय, पय उआ समय आय रहा हय, कि हम तोंहसे उदाहरन दइके पुनि न कहब, बलकिन पिता परमातिमा के बारे माहीं खुलिके बताउब। 26उआ दिना तूँ पंचे हमरे नाम से मगिहा, अउर हम तोंहसे इआ न कहब, कि हम तोंहरे खातिर पिता परमातिमा से बिनती करब। 27काहेकि पिता परमातिमा त खुदय तोंहसे प्रेम करत हें, एसे कि तूँ पंचे हमसे प्रेम करते हया, अउर इहव बिसुआस करते हया, कि हम पिता परमातिमा के तरफ से आएन हँय। 28हम पिता परमातिमा से निकरिके संसार माहीं आएन हँय, पुनि संसार काहीं छोंड़िके पिता परमातिमा के लघे जइत हएन।”

29उनखर चेला लोग कहिन, “देखी, अब त अपना खुलिके कहित हएन, अउर कउनव उदाहरन दइके नहीं कही। 30अब हम पंचे जान लिहेन हय, कि अपना सगली बातन काहीं जानित हएन, अउर अपना काहीं एखर जरूरत नहिं आय, कि कोऊ अपना से पूँछय, एसे हम पंचे बिसुआस करित हएन, कि अपना परमातिमा से निकरिके आएन हँय।” 31इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “‘का तोंहईं पंचन काहीं अबय बिसुआस भ हय?’ 32देखा, उआ समय आबत हय बलकिन आइन ग हय, कि तूँ पंचे सगले जने तितर-बितर होइके आपन-आपन गइल पकड़ लेइहा, अउर हमहीं अकेले छोंड़ि देइहा, तऊ हम अकेले न रहब, काहेकि पिता परमातिमा हमरे साथ हें। 33ईं बातन काहीं तोंहसे हम एसे कहेन हय, कि हमरे व्दारा तोंहईं सान्ती मिलय; संसार माहीं तोंहईं दुख मिलत हय, पय ढाढ़स बाँधा, हम संसार काहीं जीत लिहेन हय।”

17

महायाजक के रूप माहीं यीसु के प्राथना खुद के खातिर

1यीसु ईं बातन काहीं कहे के बाद, अकास कइती निहारिके कहिन, “हे पिता परमातिमा अपना के चुना समय आइगा हय, अब अपना मनइन काहीं देखाय देई, कि अपना के लड़िका केतना महान हय, जउने हमहूँ मनइन काहीं देखाय देई, कि अपना केतना महान हएन। 2काहेकि अपना उनहीं सगले जाति के मनइन के ऊपर अधिकार दिहेन हँय, कि जिनहीं अपना उनहीं चुनिके दिहेन हँय, ऊँ सगलेन काहीं अनन्त जीबन देंय। 3अउर अनन्त जीबन इआ आय, कि ऊँ पंचे अपना काहीं जउन एकलउते परमातिमा आहेन, अउर यीसु मसीह काहीं जिनहीं अपना पठयन हँय, जानँय। 4जउन काम अपना हमहीं करँइ के खातिर दिहेन रहा हय, उनहीं पूर कइके, हम धरती के ऊपर मनइन काहीं देखाय दिहेन हय, कि अपना केतना महान हएन। 5अउर अब, हे पिता परमातिमा, संसार के रचना होंइ से पहिले, जब हम अपना के साथ रहेन हय, तब हमहीं केतना सम्मान मिलत रहा हय, अब जब हम अपना के साथ रहब उहय सम्मान हमहीं पुनि देई।

अपने चेलन के खातिर प्राथना

6संसार के मनइन म से जउने मनइन काहीं अपना हमहीं दिहेन हय, हम उनहीं अपना के बारे माहीं बताय दिहेन हय: ऊँ पंचे अपना के साथ रहे हँय, पय अपना उनहीं हमहीं दिहेन हय, अउर ऊँ पंचे अपना के बचन काहीं अपनाय लिहिन हीं। 7अब ऊँ पंचे जानिगें हँय, कि जउन कुछू अपना हमहीं दिहेन हय, उआ सगला अपनय के तरफ से आय। 8काहेकि जउन सँदेस अपना हमहीं दिहेन तय, हम उनहीं उआ सँदेस बताय दिहेन हय, अउर ऊँ पंचे अपना के सँदेस के बातन काहीं अपनाय लिहिन हीं, अउर इआ सच्चाई जान लिहिन हीं, कि हम अपना के तरफ से आएन हय, अउर इआ बिसुआस मान लिहिन हीं, कि अपनय हमहीं पठयन हय। 9इआ समय हम केबल उनखे खातिर प्राथना करित हएन, संसार के मनइन के खातिर नहीं, पय केबल उनहिन के खातिर प्राथना करित हएन, जिनहीं अपना हमहीं दिहेन हय, काहेकि ऊँ पंचे अपनय के आहीं। 10अउर उआ सगला जउन हमार आय, उआ सगला अपनय के आय; अउर जउन अपना के आय, उआ सगला हमार आय, अउर हम उनहिन के व्दारा मान-सम्मान पाइत हएन। 11हम अउर जादा समय तक संसार माहीं न रहब, पय ईं पंचे संसार माहीं रइहँय, अउर हम अब अपना के लघे आय रहेन हय; हे पिता परमातिमा, जउन अपना पबित्र हएन, उआ नाम के सक्ती से उनखर रच्छा करी, जिनहीं अपना हमहीं दिहेन हय, अउर जइसन हम अउर अपना एक हएन, उहयमेर ऊँ पंचे एक होइ सकँय। 12जब हम उनखे साथ माहीं रहेन हय, त हम अपना के नाम के सक्ती से, जउन अपना हमहीं दिहेन हय, उनखर रच्छा किहेन हय, अउर उनमा से कोऊ नास नहीं भें, सिबाय ओखे जउने काहीं नास होंइ के खातिर ठहराबा ग रहा हय, इआ एसे भ कि जउने पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बात पूर होय। 13पय अब हम अपना के लघे अइत हएन, अउर ईं बातन काहीं हम संसार माहीं रहत समय कहि रहेन हय, कि ऊँ पंचे अपने हिरदँय माहीं हमार पूर आनन्द पाय सकँय। 14हम अपना के बचन काहीं उनहीं बताय दिहेन हय, अउर ऊँ पंचे अपना के बचन काहीं अपनाय लिहिन हीं, एसे संसार के मनई उनसे दुसमनी करत हें, काहेकि जइसन हम इआ संसार के न होंहेन, उहयमेर ऊँ पंचे इआ संसार के न होहीं। 15हम अपना से इआ प्राथना नहीं करी, कि अपना उनहीं संसार से उठाय लेई, पय इआ, कि अपना दुस्ट सइतान से उनखर रच्छा करी। 16जइसन हम इआ संसार के न होंहेन, उहयमेर ऊँ पंचे इआ संसार के न होहीं। 17अपना के बचन सत्य हय; एसे सत्य के व्दारा अपना उनहीं सेबा के खातिर तइआर करी। 18जइसन अपना हमहीं संसार माहीं पठयन हय, उहयमेर हमहूँ उनहीं संसार माहीं पठइत हएन। 19अउर हम अपने-आप काहीं अपना के सेबा माहीं समरपित करित हएन, जउने ऊँ पंचे, सत्य के व्दारा अपने-आप काहीं अपना के सेबा माहीं समरपित करँय।

सगले बिसुआसी लोगन के खातिर प्राथना

20हम केबल इनहिन भर के खातिर प्राथना नहीं करी, बलकिन उनहूँ के खातिर घलाय करित हएन, जे इनखे बचन काहीं सुनिके, हमरे ऊपर बिसुआस करिहँय, जउने ऊँ पंचे सगले जन एक होंय। 21हे पिता परमातिमा, जइसन अपना हमरे साथ हएन, अउर हम अपना के साथ हएन, उहयमेर ऊँ पंचे घलाय हमरे साथ होंय, एसे कि जउने संसार के सगले मनई बिसुआस करँय, कि अपनय हमहीं पठयन हय। 22अउर उआ महिमा जउन अपना हमहीं दिहेन हय, उहयमेर से हम उनहूँ पंचन काहीं महिमा दिहेन हय, कि जइसन हम अपना एक हएन, उहयमेर ऊँ पंचे एक होंय। 23हम उनमा अउर अपना हमरे साथ एक होइके रही, कि ऊँ पंचे पूरी तरह से एक होइ जाँय, जउने संसार के सगले मनई जानँय, कि अपनय हमहीं पठयन हय, अपना जइसन हमसे प्रेम करित हएन, उहयमेर उनहूँ से प्रेम करित हएन। 24हे पिता परमातिमा, हम चाहित हएन, कि जिनहीं अपना हमहीं दिहेन हय, जहाँ हम रहब, उहाँ ऊँ पंचे हमरे साथ रहँय, कि जउने ऊँ पंचे हमरे उआ महिमा काहीं देखँय, जउन अपना हमहीं दिहेन हय, काहेकि अपना संसार काहीं बनामँइ से पहिले हमसे प्रेम किहेन हय। 25हे पिता परमातिमा, अपना धरमी हएन, संसार के मनई अपना काहीं नहीं जानँय, पय हम अपना काहीं जानित हएन, अउर हमार चेला लोग जानिगें हँय, कि अपनय हमहीं पठएन हय। 26अउर हम अपना के बारे माहीं इनहीं पंचन काहीं बतायन हय, अउर बताबत रहब, कि जउन प्रेम अपना काहीं हमसे रहा हय, उहय प्रेम उन माहीं रहय, अउर हम उन माहीं रही।”

18

यीसु काहीं पकड़ाबा जाब

(मत्ती 26:47-56; मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53)

1यीसु ईं बातँय कहिके अपने चेलन के साथ किद्रोन नाम के नाला के दुसरे पार गें, उहाँ एकठे बगिया रही हय, जउने माहीं यीसु अउर उनखर चेला लोग चलेगें। 2अउर उनहीं पकड़बामँइ बाला यहूदा घलाय उआ जघा काहीं जानत रहा हय, काहेकि यीसु अपने चेलन के साथ उहाँ जा करत रहे हँय। 3एसे यहूदा इस्करियोती रोमी सिपाहिन के एकठे दल, अउर प्रधान याजकन के पठए मनइन, अउर मन्दिर के पहरेदारन के साथ जलत मसालँय, अउर दियन अउर हँथिआरन काहीं लए उहाँ पहुँचा। 4तब यीसु ऊँ सगली बातन काहीं जानिके, जउन उनखे ऊपर आमँइ बाली रही हँय, बहिरे निकरें, अउर उनसे कहँइ लागें, “तूँ पंचे केही ढुँढ़ते हया?” 5ऊँ पंचे उनहीं जबाब दिहिन, “नासरत गाँव के यीसु काहीं।” तब यीसु उनसे कहिन, “हमहिंन आहेन” अउर उनहीं पकड़बामँइ बाला यहूदा घलाय उनखे साथय ठाढ़ रहा हय। 6जब यीसु इआ कहिन कि, “हमहिंन आहेन” तबहिनय ऊँ पंचे पीछे पछिलके भुँइ माहीं गिर परें। 7तब यीसु पुनि उनसे पूँछिन, “तूँ पंचे केही ढुँढ़ते हया।” ऊँ पंचे कहिन, “नासरत गाँव के यीसु काहीं।” 8तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, “हम त तोंहसे कहि चुकेन हँय, कि ‘हमहिंन आहेन’, अगर हमहीं ढुँढ़ते हया, त इनहीं जाँय द्या।” 9इआ एसे भ, कि उआ बचन पूर होय, जउन यीसु कहिन तय, कि “जिनहीं अपना हमहीं दिहेन हँय, उनमा से हम एक्कव जनेन काहीं नहीं गमाँयन।” 10समौन पतरस के लघे जउन तलबार रही हय, ओही निकारिके महायाजक के दास के ऊपर चलाइके, ओखर दहिना कान काट दिहिन, उआ सेबक के नाम मलखुस रहा हय। 11तब यीसु पतरस से कहिन, “आपन तलबार म्यान माहीं रक्खा! जउन दुख-मुसीबत उठामँइ के खातिर परमपिता हमहीं पठइन हीं, का हम ओही न सही?”

हन्ना के आँगे यीसु

12तब रोमी सिपाही लोग, अउर उनखर सुबेदार, अउर यहूदी लोगन के मन्दिर माहीं पहरा देंइ बाले, यीसु काहीं पकड़िके बाँध लिहिन। 13अउर उनहीं बाँधिके सबसे पहिले उआ बरिस के महायाजक काइफा के ससुर हन्ना के लघे लइगें। 14ईं उँइन काइफा आहीं, जउन यहूदी धारमिक अँगुअन काहीं सलाह दिहिन रहा हय, कि “हमरे समाज के मनइन के खातिर एकठे मनई के मरब निकहा हय।”

पतरस के इनकार

(मत्ती 26:69-70; मरकुस 14:66-68; लूका 22:55-57)

15समौन पतरस अउर एकठे दूसर चेला घलाय, यीसु के पीछे-पीछे चल दिहिन: ईं चेला महायाजक के जान-पहिचान के रहे हँय, अउर ऊँ यीसु के साथय महायाजक के अँगना माहीं चलेगें। 16पय पतरस दुअरा के लघे ठाढ़ होइगें, कुछ देर बाद महायाजक के जान-पहिचान बाले चेला बहिरे आएँ, अउर पहरेदारिन से कहिके पतरस काहीं भीतर अँगना माहीं लइ आएँ। 17उआ दासी जउन पहरेदारिन रही हय, पतरस से कहिस, “का तुहूँ यीसु के चेलन म से आह्या?” पतरस कहिन, “हम उनखर चेला न होंहेन।” 18काहेकि जाड़ खुब रहा हय, एसे दास अउर मन्दिर माहीं पहरा देंइ बाले आगी जलाइके उहाँ ठाढ़ होइके तापत रहे हँय, अउर पतरस घलाय उनखे साथय ठाढ़े आगी तापत रहे हँय।

महायाजक के व्दारा यीसु से पूँछ-ताँछ

(मत्ती 26:59-66; मरकुस 14:55-64; लूका 22:66-71)

19तब महायाजक, यीसु से उनखे चेलन के बारे माहीं, अउर उनखे उपदेस के बारे माहीं पूँछिन। 20यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “हम हमेसा मनइन के बीच माहीं हरेक मनइन से खुलिके बात किहेन हँय, अउर हमेसा हम सभाघरन माहीं अउर मन्दिर माहीं जहाँ सगले यहूदी लोग एकट्ठा होत हें, उपदेस दिहेन हय। अउर हम कबहूँ छिपाइके कउनव बात नहीं कहेन आय। 21फेरव तूँ हमसे इआ ‘बात काहे पुँछते हया?’ हमरे बात काहीं सुनँय बालेन से पूँछा, कि ‘हम उनसे का कहेन हय?’ देखा, ऊँ पंचे जानत हें; कि हम उनसे का-का कहेन हय?” 22जब यीसु इआ बात कहिन, तब मन्दिर के पहरा देंइ बालेन म से एक जने, जउन उनखे लघे ठाढ़ रहा हय, यीसु काहीं थापड़ मारिके कहिस, “का तूँ महायाजक काहीं इआमेर से जबाब देते हया।” 23यीसु ओही जबाब दिहिन, “अगर हम बुरा कहेन हय, त उआ बुराई के बारे माहीं बताबा; पय अगर हम नीक कहेन हय, त हमहीं काहे मरते हया?” 24हन्ना यीसु काहीं बाँधेन बाँधे काइफा महायाजक के लघे पठय दिहिन।

पतरस के पुनि इनकार करब

(मत्ती 26:71-75; मरकुस 14:69-72; लूका 22:58-62)

25जब समौन पतरस ठाढ़े आगी तापत रहे हँय, तब आगी तापँय बाले पूँछिन, “का तुहूँ यीसु के चेलन म से आह्या?” पतरस पुनि इनकार कइके उनसे कहिन, “हम न होंहेन।” 26महायाजक के दासन म से जेखर पतरस कान काट डारिन तय, उहाँ ओखे परिबार के एक जने रहा हय, त उआ पतरस से कहिस, “का हम तोंहईं यीसु के साथय बगिया माहीं नहीं देखेन तय?” 27पतरस एक बेरकी पुनि इनकार कइ दिहिन, अउर हरबिन मुरगा बोलिस।

पिलातुस के आँगे यीसु

(मत्ती 27:1-2,11-14; मरकुस 15:1-5; लूका 23:1-5)

28अउर ऊँ पंचे यीसु काहीं काइफा महायाजक के लघे से राजपाल के किला माहीं लइगें, उआ समय भिनसार रहा हय, पय ऊँ पंचे किला के भीतर नहीं गें, जउने अपबित्र न होंय, पय फसह तेउहार के खाना खाय सकँय। 29तब राजपाल पिलातुस उनखे लघे बहिरे निकरि आएँ, अउर कहिन, “तूँ पंचे इआ मनई के ऊपर कउने बात के अरोप लगउते हया?” 30ऊँ पंचे उनहीं जबाब दिहिन, कि “अगर ईं अपराधी न होतें, त हम पंचे इनहीं अपना के हाँथे माहीं न सउँपित।” 31राजपाल पिलातुस उनसे कहिन, “तुहिन पंचे इनहीं लइ जाइके, अपने बिधान के नेम के मुताबिक न्याय करा।” तब यहूदी समाज के मनई उनसे कहिन, “हमहीं पंचन काहीं कोहू काहीं मउत के सजा देंइ के अधिकार नहिं आय।” 32इआ एसे भ, कि यीसु के कही उआ बात पूर होय, जउने काहीं ऊँ इआ बतामँइ के खातिर कहिन तय, कि हमार मउत18:32 लूका 18:32,33 कइसन होई।

33तब राजपाल पिलातुस पुनि किला के भीतर गें, अउर यीसु काहीं बोलाइके उनसे पूँछिन, “का तूँ यहूदी लोगन के राजा आह्या?” 34तब यीसु जबाब दिहिन, “का तूँ इआ बात अपने कइती से कहते हया, इआ कि हमरे बारे माहीं दूसर कोऊ तोंहईं बताइन हीं?” 35तब राजपाल पिलातुस उनहीं जबाब दिहिन, “का हमहूँ यहूदी आहेन? तोंहरेन जाति बाले अउर प्रधान याजक लोग, तोंहईं हमरे हाँथ माहीं सँउपिन हीं, ‘तूँ बताबा का किहा हय’?” 36यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “हमार राज इआ संसार के न होय, अगर हमार राज इआ संसार के होत, त हमार सगले सेबक लड़तें, अउर हम यहूदी लोगन के हाँथ माहीं न सँउपे जइत: पय अब हमार राज इहाँ के न होय।” 37तब पिलातुस उनसे कहिन, “का तूँ राजा आह्या?” तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “तुहिन हमहीं कहते हया, कि ‘हम राजा आहेन’; हम एसे जनम लिहेन हँय, अउर इआ संसार माहीं एसे आएन हँय, कि सत्य के बारे माहीं गबाही देई, अउर हरेक उआ मनई जउन सत्य के पच्छ माहीं हय, उआ हमरे बचन काहीं सुनत हय।” 38तब पिलातुस उनसे कहिन, “सत्य का आय?” अउर इआ कहिके ऊँ पुनि यहूदी लोगन के लघे चलेगें, अउर उनसे कहिन, “हम त उनखे ऊपर कउनव दोस नहीं पाई।”

39पय तोंहार पंचन के इआ रीत ही, कि हम फसह नाम के तेउहार माहीं तोंहरे खातिर एकठे कइदी काहीं छोंड़ देई, त का तूँ पंचे चहते हया, कि हम तोंहरे खातिर यहूदी लोगन के राजा काहीं छोंड़ि देई? 40तब ऊँ पंचे पुनि चिल्लाइके कहिन, “इनहीं नहीं, बलकिन हमरे खातिर बरअब्बा काहीं छोंड़ि देई;” अउर बरअब्बा डाँकू रहा हय।

19

मउत के सजा के हुकुम

(मत्ती 27:15-31; मरकुस 15:6-20; लूका 23:13-25)

1इआ सुनिके राजपाल पिलातुस यीसु काहीं चाबुक मरबाइन। 2अउर सिपाही लोग काँटन काहीं गुँथिके मुकुट बनाइके, यीसु के मूँड़े माहीं धरिन, अउर उनहीं बैगनी रंग के ओन्हा पहिराइन। 3अउर उनखे लघे आय-आइके कहँइ लागें, “हे यहूदी लोगन के राजा नबस्कार!” अउर थापड़ मारँइ लागें। 4तब राजपाल पिलातुस बहिरे निकरिके उनसे कहिन, “देखा, हम उनहीं पुनि तोंहरे लघे बहिरे लए अइत हएन; जउने तूँ पंचे जानिल्या, कि हम उनखे ऊपर कउनव दोस नहीं पाएन।” 5तब यीसु काँटन के मुकुट अउर बैगनी रंग के ओन्हा पहिरे बहिरे निकरें, अउर राजपाल पिलातुस कहिन, “देखा, ईंन आहीं ऊँ मनई।” 6जब प्रधान याजक लोग, अउर मन्दिर माहीं पहरा देंइ बाले सिपाही उनहीं देखिन, त चिल्लाइके कहँइ लागें, कि “ओही क्रूस माहीं चढ़ाबा, क्रूस माहीं”: तब राजपाल पिलातुस उनसे कहिन, “तुहिन पंचे उनहीं लइ जाइके क्रूस माहीं चढ़ाबा; काहेकि हम उनखे ऊपर कउनव दोस नहीं पाई।” 7तब यहूदी लोग उनहीं जबाब दिहिन, कि “हमरेव पंचन के बिधान हय, अउर उआ बिधान के मुताबिक ऊँ मारि डारँइ के काबिल हें, काहेकि ऊँ अपने-आप काहीं परमातिमा के लड़िका बनाबत हें।” 8जब राजपाल पिलातुस इआ बात काहीं सुनिन, त अउर जादा डेराइगें। 9अउर पुनि किला के भीतर गें, अउर यीसु से कहिन, “तूँ कहाँ से आया हय?” पय यीसु उनहीं कउनव जबाब नहीं दिहिन। 10तब पुनि पिलातुस उनसे कहिन, “तूँ हमसे काहे नहीं बोलते आह्या?” काहे तूँ नहीं जनते आह्या, कि “हमहीं तोंहईं छोंड़ि देंइ के अधिकार हय, अउर तोंहईं क्रूस माहीं चढ़ामँइ के घलाय अधिकार हय।” 11तब यीसु उनहीं जबाब दिहिन, कि “अगर तोंहईं परमपिता के तरफ से अधिकार न दीन जात, त तोंहार हमरे ऊपर कुछू अधिकार न होत; एसे जे हमहीं तोंहरे हाँथ माहीं पकड़ाइस ही, ओखर पाप जादा हय।”

12इआ सुनिके राजपाल पिलातुस यीसु काहीं छोंड़ देंइ के उपाय ढूँढ़ँइ लागें, पय यहूदी लोग चिल्लाय-चिल्लाइके कहिन, “अगर तूँ उनहीं छोंड़ि देहा, त तूँ राजा कैसर के साथी न कहइहा; अउर जे कोऊ अपने-आप काहीं राजा बनाबत हय, उआ राजा कैसर के बिरोधी आय।” 13ईं बातन काहीं सुनिके पिलातुस यीसु काहीं बहिरे, उआ जघा माहीं लइगें, जउन “पथरा के चबूतरा” कहाबत रहा हय, जउने काहीं इब्रानी भाँसा माहीं गब्बता कहत रहे हँय, अउर उहाँ राजपाल पिलातुस न्याय के सिंहासन माहीं बइठिगें। 14(काहेकि उआ दिना फसह नाम के तेउहार के तइआरी करँइ बाला दिन रहा हय, अउर दुपहर के करीब बारा बजे रहे हँय।) तब ऊँ यहूदी लोगन से कहिन, “देखा, ईंन आहीं तोंहार राजा!” 15पय ऊँ पंचे चिल्लाने कि “लइ जा! लइ जा! ओही क्रूस माहीं चढ़ाबा।” तब राजपाल पिलातुस उनसे कहिन, “का हम तोंहरे राजा काहीं क्रूस माही चढ़ाई?” तब प्रधान याजक लोग उनहीं जबाब दिहिन, कि “राजा कैसर काहीं छोंड़िके, हमार कोऊ दूसर राजा न होय।” 16तब पिलातुस यीसु काहीं उनखे हाँथ माहीं सँउप दिहिन, जउने ऊँ क्रूस माहीं चढ़ाए जाँय।

क्रूस माहीं चढ़ाबा जाब

(मत्ती 27:32-44; मरकुस 15:21-32; लूका 23:26-43)

17तब ऊँ पंचे यीसु काहीं लइगें, अउर यीसु आपन क्रूस उठाए यरूसलेम सहर से बहिरे उआ जघा तक गें, जउन “खोपड़ी के जघा” कहाबत रही हय, अउर ओही इब्रानी भाँसा माहीं “गुलगुता” कहत रहे हँय। 18उहाँ ऊँ पंचे यीसु के साथ दुइठे अउर मनइन काहीं, क्रूस माहीं चढ़ाइन, एकठे काहीं दहिने कइती, अउर दुसरे काहीं बाएँ कइती, अउर बीच म यीसु काहीं। 19अउर राजपाल पिलातुस एकठे अरोप-पत्र लिखिके, क्रूस माहीं लगाय दिहिन, अउर ओमाहीं इआ लिखा रहा हय, “यीसु नासरी यहूदी लोगन के राजा।” 20उआ दोस पत्र काहीं खुब यहूदी लोग पढ़िन, काहेकि जहाँ यीसु क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय, उआ जघा सहर के लघेन रही हय, अउर उआ पत्र इब्रानी, लतीनी अउर यूनानी भाँसा माहीं लिखा रहा हय। 21तब यहूदी लोगन के प्रधान याजक लोग, राजपाल पिलातुस से कहिन, “उआ पत्र माहीं यहूदी लोगन के राजा न लिखा।” पय इआ लिखा “जउन यीसु कहिन हीं, कि हम यहूदी लोगन के राजा आहेन।” 22तब पिलातुस उनहीं जबाब दिहिन, “जउन हम लिख दिहेन, त लिख दिहेन, ओही बदल नहीं सकी।”

23जब सिपाही यीसु काहीं क्रूस माहीं चढ़ाय चुके, तब यीसु के जेतने ओन्हा रहे हँय, उनहीं लइके चार हिस्सन माहीं बाँट दिहिन, हरेक सिपाही के खातिर एक हिस्सा, अउर ऊँ उनखे कुरथा काहीं घलाय लिहिन, पय कुरथा बिना सिए ऊपर से नीचे तक बिना रहा हय: एसे ऊँ पंचे आपस माहीं कहिन, “हम पंचे एही न फारी, बलकिन इआ केही मिली, एखे खातिर परची डारी।” 24इआ एसे भ, कि जउने पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बात पूर होय, कि

“ऊँ पंचे हमरे ओन्हन काहीं आपस माहीं बाँट लिहिन, अउर हमरे ओन्हा के खातिर परची19:24 भज 22:18 डारिन।”

अउर सगले सिपाही अइसनय किहिन।

25पय यीसु के क्रूस के लघे उनखर महतारी, अउर उनखे महतारी के बहिनी मरियम, जउन क्लोपास के मेहेरिआ आहीं, अउर मगदल गाँव के मरियम ठाढ़ रही हँय। 26तब यीसु अपने महतारी अउर उआ चेला काहीं जेसे ऊँ जादा प्रेम करत रहे हँय, लघे ठाढ़ देखिके, अपने महतारी से कहिन; “हे अम्मा, देखा, ईं तोंहार लड़िका आहीं।” 27पुनि यीसु अपने ऊँ चेला से कहिन, “ईं तोंहार महतारी आहीं”, अउर उहय समय ऊँ चेला उनखर देख-भाल करँइ के खातिर उनहीं अपने घरय लइगें।

यीसु के मउत

(मत्ती 27:45-56; मरकुस 15:33-41; लूका 23:44-49)

28एखे बाद यीसु इआ जानिके कि अब सब कुछ पूर होइ चुका हय; एसे कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बात पूर होय, कहिन, “हम पिआसे हएन।” 29उहाँ सिरका से भरा एकठे बरतन धरा रहा हय, एसे ऊँ पंचे एकठे सोक्खा काहीं, सिरका माहीं बुड़ाइके, जूफा नाम के बिरबा के लकड़ी माहीं धइके, उनखे मुँहे माहीं लगाइन। 30जब यीसु उआ सिरका पीन, तब कहिन, “पूर होइगा।” अउर ऊँ आपन मूँड़ नीचे काहीं झुकाइके, प्रान छोंड़ दिहिन।

भाला से छेदा जाब

31अउर एसे कि उआ फसह नाम के तेउहार के तइआरी के दिन रहा हय, पबित्र दिन काहीं उनखर लहासँय क्रूस माहीं न लटकी रहँय, काहेकि पबित्र दिन खुब महत्वपूर्न रहा हय। एखे खातिर यहूदी लोग पिलातुस से बिनती किहिन, कि ऊँ हुकुम देंय, कि उनखर टागँय, टोर दीन जाँय, अउर उनखे लहासन काहीं उहाँ से हटाय दीन जाय। 32तब कुछ सिपाही आइके पहिल मनई के टागँय टोरिन, एखे बाद दुसरे मनई के टोरिन, जउन यीसु के साथ क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय। 33पय जब ऊँ सिपाही यीसु के लघे आइके देखिन, कि ऊँ मर चुके हँय, त उनखर टागँय नहीं टोरिन। 34पय उन सिपाहिन म से एक जने भाला से उनखे पँजरे माहीं छेदिस, त हरबिन उनखे खून अउर पानी निकरा। 35जउन मनई इआ देखिस रहा हय, उहय इआ गबाही दिहिस ही, अउर ओखर गबाही सच्ची हय; अउर उआ जानत हय, कि हम इआ बेलकुल सही कहित हएन, जउने तुहूँ पंचे बिसुआस करा। 36ईं बातँय एसे भईं, कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बात पूर होय, कि “उनखर कउनव हड्डी न टोरी जई।” 37पबित्र सास्त्र म एकठे अउर जघा माहीं इआ लिखा हय, कि “जिनहीं ऊँ पंचे भाला से छेदिन हीं, ऊँ पंचे उनहिन काहीं देखिहँय19:37 दरसनन 1:7।”

यीसु काहीं गाड़ा जाब

(मत्ती 27:57-61; मरकुस 15:42-47; लूका 23:50-56)

38एखे बाद अरमतिया गाँव के रहँइ बाले यूसुफ, जउन यीसु के ऊपर बिसुआस करत रहे हँय, (पय यहूदी धारमिक अँगुअन के डेरन के मारे इआ बात काहीं बताबत नहीं रहें, कि ऊँ यीसु के ऊपर बिसुआस करत हें) ऊँ पिलातुस से बिनती किहिन, कि “हम यीसु के लहास काहीं लइ जाँइ चाहित हएन”, तब पिलातुस उनखे बिनती काहीं सुनिके, कहिन “लइ जा”, अउर ऊँ आइके उनखे लहास काहीं लइगें। 39अउर नीकुदेमुस घलाय जउन पहिले यीसु के लघे रात माहीं गे रहे हँय, गन्धरस अउर एलबा नाम के महकँइ बाली दोनव चीजन काहीं मिलाइके, तीस किलो के करीब लइ आएँ। 40तब ऊँ पंचे यीसु के लहास काहीं लइके यहूदी लोगन के गाड़ँइ के बिधी के मुताबिक, यीसु के लहास माहीं महकँइ बाली चीजन काहीं कफन के साथ लपेटिन। 41उआ जघा माहीं जहाँ यीसु क्रूस माहीं चढ़ाए गे रहे हँय, उहाँ एकठे बगइचा रहा हय, अउर उहय बगइचा माहीं, एकठे नई कब्र रही हय, जउने माहीं अबे तक कोहू काहीं नहीं धरा ग तय। 42एसे यहूदी लोगन के पबित्र दिन के तइआरी करँइ के दिन होंइ के कारन, ऊँ पंचे यीसु के लहास काहीं उहय कब्र माहीं धरिन, काहेकि उआ कब्र लघे रही हय।

20

यीसु के कब्र खाली

(मत्ती 28:1-10; मरकुस 16:1-8; लूका 24:1-12)

1हप्ता के पहिलय दिन अइतबार काहीं, मगदल गाँव के मरियम, भिनसरहय जब अँधिआर रहा हय, कब्र के लघे आईं, अउर पथरा काहीं कब्र से ढनगा देखिन। 2तब ऊँ दउड़त आइके समौन पतरस अउर ऊँ दुसरे चेला के लघे, जेसे यीसु जादा प्रेम रक्खत रहे हँय कहिन, “ऊँ पंचे यीसु के लहास काहीं कब्र से निकारिके लइगे हँय; हम पंचे नहीं जानी, कि उनहीं कहाँ धरिन हीं।” 3तब पतरस अउर ऊँ दूसर चेला उहाँ से निकरिके कब्र कइती चल दिहिन। 4अउर दोनव जने एक साथय दउड़त रहे हँय, पय दुसरकबा चेला पतरस से आँगे बढ़िके, कब्र माहीं पहिले पहुँचिगा। 5अउर उआ निहुरिके नीचे देखिस, कि उहाँ कफन के ओन्हा परे हँय, पय उआ भीतर नहीं ग। 6तब समौन पतरस उनखे पीछे-पीछे पहुँचे, अउर कब्र के भीतर गें, अउर कफन के ओन्हा परे देखिन। 7अउर उआ अँगउछा जउन उनखे मूँड़े माहीं बाँधा रहा हय, ओन्हन के साथ नहीं, पय अलग से एकठे जघा माहीं गुरमेटा धरा देखिन। 8तब दूसर चेला घलाय जउन कब्र माहीं पहिले पहुँच ग रहा हय, उआ भीतर ग, अउर देखिके बिसुआस किहिस। 9ऊँ पंचे अबय तक पबित्र सास्त्र माहीं लिखे, इआ बचन काहीं नहीं समझे पाइन तय, कि “ऊँ मरेन म से जरूर जिन्दा होइ जइहँय।” 10तब ऊँ दोनव चेला अपने घर लउटिगें।

मगदल गाँव के मरियम काहीं यीसु देखाई दिहिन

(मत्ती 28:9,10; मरकुस 16:9-11)

11पय मरियम रोबत कब्र के लघे बहिरे ठाढ़ रही हँय, अउर रोउतय-रोबत कब्र के भीतर कइती निहुरिके देखिन, 12त दुइठे स्वरगदूतन काहीं चमचमात उजर ओन्हा पहिरे, जहाँ यीसु के लहास धरी रही हय, उहाँ एकठे काहीं मूँड़े कइती, अउर दुसरे काहीं गोड़े कइती बइठ देखिन। 13तब ऊँ पंचे मरियम से कहिन, “हे बहिनी, तूँ काहे रोउते हया?” तब मरियम उनसे कहिन, “ऊँ पंचे हमरे प्रभू काहीं उठाय लइगे हँय, अउर हम नहीं जानित आहेन, कि उनहीं कहाँ धरिन हीं।” 14इआ बात कहिके मरियम पीछे कइती मुँड़िके देखिन, तब यीसु काहीं उहाँ ठाढ़ देखिन, अउर इआ नहीं जाने पाइन, कि ऊँ यीसु आहीं। 15तब यीसु उनसे कहिन, “हे बहिनी, तूँ काहे रोउते हया? केही ढुँढ़ते हया?” ऊँ उनहीं माली समझिके उनसे कहिन, “हे महाराज, अगर अपना उनहीं उठाय लइ गएन हय, त हमहीं बताय देई, कि उनहीं कहाँ धरे हएन, त हम उनहीं लइ जाब।” 16तब यीसु उनसे कहिन, “मरियम!” तब ऊँ पीछे मुड़िके, उनसे इब्रानी भाँसा माहीं कहिन, “रब्बूनी” जेखर मतलब हय “हे गुरू।” 17तब यीसु उनसे कहिन, “अबे हमहीं न छुआ, काहेकि हम अबय तक अपने पिता परमातिमा के लघे ऊपर नहीं गएन आय, बलकिन हमरे भाइन के लघे जाइके उनसे कहि दिहा, कि हम अपने पिता अउर तोंहरे पिता, अउर अपने परमातिमा अउर तोंहरे परमातिमा के लघे ऊपर जइत हएन।” 18तब मगदल गाँव के मरियम जाइके चेलन से बताइन, कि “हम प्रभू काहीं देखे हएन, अउर ऊँ, हमहीं ईं बातन काहीं बताइन हीं।”

चेलन काहीं यीसु देखाई दिहिन

(मत्ती 28:16-20; मरकुस 16:14-18; लूका 24:36-49)

19उहय दिना हप्ता के पहिल दिन अइतबार रहा हय, साँझिके चेला लोग यहूदी धारमिक अँगुअन के डेरन के मारे केमरा बंद कइके एकट्ठा बइठ रहे हँय, तब यीसु आएँ, अउर उनखे बीच माहीं ठाढ़ होइके कहिन, “तोंहईं पंचन काहीं सान्ती मिलय।” 20अउर इआ कहे के बाद यीसु आपन हाँथ अउर पाँजर उनहीं देखाइन: तब चेला लोग, प्रभू काहीं देखिके आनन्दित भें। 21अउर यीसु पुनि उनसे कहिन, “‘तोंहईं पंचन काहीं सान्ती मिलय।’ जइसन पिता परमातिमा हमहीं पठइन हीं, उहयमेर हमहूँ तोंहईं पठइत हएन।” 22इआ कहे के बाद यीसु उनखे ऊपर फूँकिन अउर उनसे कहिन, “‘पबित्र आत्मा ल्या’। 23जउने मनइन के पापन काहीं तूँ पंचे माफ करिहा, उनखर पाप माफ कीन जइहँय, अउर जिनखे पापन काहीं तूँ पंचे माफ न करिहा, उनखर पाप माफ न कीन जइहँय।”

थोमा काहीं यीसु देखाई दिहिन

24पय बरहँव चेलन म से एक जने, जिनखर नाम थोमा रहा हय, जउन दिदुमुस के नाम से घलाय जाने जात रहे हँय, जब यीसु चेलन के लघे आएँ तय, तब ऊँ नहीं रहे आँय। 25जब चेला लोग उनसे कहँइ लागें, कि “हम पंचे प्रभू काहीं देखे हएन”: तब थोमा उनसे कहिन, “जब तक हम उनखे हाँथेन माहीं खीलन के छेंदन काहीं न देख लेब, अउर उनमा आपन अँगुरी न डार लेब, अउर पाँजर माहीं आपन हाँथ न डार लेब, तब तक हम बिसुआस न मानब।” 26आठ दिना के बाद यीसु के चेला लोग, पुनि घर के भीतर रहे हँय, अउर थोमा घलाय उनखे साथ माहीं रहे हँय, अउर दुअरा के केमरा बंद रहे हँय, तब यीसु आएँ, अउर बीच माहीं ठाढ़ होइके कहिन, “तोंहईं पंचन काहीं सान्ति मिलय।” 27अउर यीसु थोमा से कहिन, “आपन अँगुरी हमरे हाँथे के छेंदन माहीं डारा, अउर आपन हाँथ हमरे पाँजर माहीं डारा, अउर संका करब छोंड़िके, बिसुआसी बना।” 28इआ सुनिके थोमा उनहीं जबाब दिहिन, “हे हमार प्रभू, हे हमार परमातिमा!” 29तब यीसु उनसे कहिन, “तूँ त हमहीं देखिके हमरे ऊपर बिसुआस किहा हय, पय धन्य हें, ऊँ पंचे जउन हमहीं बिना देखे बिसुआस करत हें।”

इआ किताब के उद्देस

30अउर यीसु अपने चेलन के आँगे अउरव खुब चमत्कार देखाइन तय, जउन इआ किताब माहीं नहीं लिखे गे आँय। 31पय ईं चमत्कार एसे लिखे गे हँय, कि तूँ पंचे बिसुआस करा, कि यीसुअय परमातिमा के लड़िका मसीह आहीं: अउर यीसु के ऊपर बिसुआस कइके, उनखे नाम से अनन्त जीबन पाबा।

21

तिबिरियास झील के किनारे चेलन काहीं यीसु देखाई दिहिन

1एखे बाद यीसु तिबिरियास नाम के झील के किनारे अपने-आप काहीं चेलन के आँगे प्रगट किहिन, अउर इआमेर से प्रगट किहिन। 2जब समौन पतरस अउर थोमा जउन दिदुमुस नाम से घलाय जाने जात रहे हँय, अउर गलील प्रदेस के काना गाँव के नतनएल अउर जब्दी के लड़िका, अउर उनखे चेलन म से दुइ जने अउर एकट्ठा रहे हँय। 3समौन पतरस उनसे कहिन, “हम मछरी पकड़ँइ जइत हएन”: तब ऊँ पंचे उनसे कहिन, “हमहूँ पंचे तोंहरे साथ चलब”: तब ऊँ पंचे उहाँ से निकरिके नाव माहीं चढ़िके गें, पय उआ रात माहीं एक्कवठे मछरी नहीं पकड़े पाइन।

4भिनसार होतय यीसु झील के किनारे आइके ठाढ़ भें; तऊ चेला लोग नहीं जाने पाइन, कि ऊँ यीसु आहीं। 5तब यीसु उनसे कहिन, “हे लड़िकव, का तोंहरे लघे कुछू खाँय क हय?” ऊँ पंचे जबाब दिहिन, “कुछू नहिं आय।” 6तब यीसु उनसे कहिन, “नाव के दहिने कइती जाल डारा, त मछरी पइहा”, तब ऊँ पंचे दहिने कइती जाल डारिन, अउर एतनी मछरी जाल माहीं आय गईं, कि ऊँ पंचे जाल काहीं खींच नहीं पाबत रहे आँय। 7एसे ऊँ चेला जिनसे यीसु जादा प्रेम करत रहे हँय, पतरस से कहिन, “ईं त प्रभू आहीं।” तब समौन पतरस इआ सुनिके, कि ऊँ प्रभू आहीं, करिहा माहीं अँगउछी काहीं बाँध लिहिन, काहेकि ऊँ निपरदा रहे हँय, अउर झील माहीं कूद परें। 8पय अउर चेला लोग नाव माहीं चढ़े मछरिन से भरी जाल काहीं खींचत-खींचत आएँ, काहेकि ऊँ पंचे किनारे से जादा दूरी नहीं, बलकिन दुइ सव हाँथ के करीब रहे हँय।

9जब ऊँ पंचे किनारे माहीं नाव से उतरें, त कोइला के आगी जलत देखिन, अउर ओहिन माहीं कुछ मछरी, अउर रोटी पकँइ के खातिर धरी देखिन। 10तब यीसु उनसे कहिन, “जउन मछरी तूँ पंचे अबे पकड़े हया, उनमा से कुछ लइ आबा।” 11तब समौन पतरस नाव माहीं चढ़िके एक सव तिरपन बड़ी-बड़ी मछरिन से भरा जाल, किनारे माहीं खींच लाएँ, अउर एतनी मछरी जाल माहीं रही, हईं तऊ जाल नहीं फाट। 12तब यीसु उनसे कहिन, “आबा खाना खा” अउर उन चेलन म से कोहू के हिम्मत नहीं परी कि उनसे पूँछय, कि “अपना को आहेन?” काहेकि ऊँ पंचे जानिगें तय, कि “ऊँ प्रभुअय आहीं।” 13तब यीसु उनखे लघे आएँ, अउर रोटी लइके उनहीं दिहिन, अउर उहयमेर मछरिव दिहिन। 14इआ तिसरइआ आय, जब यीसु मरेन म से जिन्दा होए के बाद, चेलन काहीं देखाई दिहिन।

यीसु अउर पतरस

15जब ऊँ पंचे खाना खाय चुके, तब यीसु समौन पतरस से कहिन, “हे समौन, यूहन्ना के लड़िका, का तूँ इनसे जादा हमसे प्रेम करते हया?” तब समौन उनसे कहिन, “हाँ प्रभू, अपना त जनतय हएन, कि हम अपना से प्रेम करित हएन”: इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “हमरे मेम्नन काहीं चराबा।” 16तब यीसु समौन पतरस से दुसराय कहिन, “हे समौन, यूहन्ना के लड़िका, का तूँ हमसे प्रेम करते हया?” तब समौन उनसे कहिन, “हाँ प्रभू, अपना त जनतय हएन, कि हम अपना से प्रेम करित हएन”: इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “हमरे गड़रन के रखबारी करा।” 17तब यीसु समौन पतरस से तिसराय कहिन, “हे समौन, यूहन्ना के लड़िका, का तूँ हमसे प्रेम करते हया?” तब पतरस उदास होइगें, कि यीसु तिसराय अइसन कहिन हीं; कि “का तूँ हमसे प्रेम करते हया?” तब समौन उनसे कहिन, “हे प्रभू, अपना त सबय जानित हएन, अउर इहव जानित हएन, कि हम अपना से प्रेम करित हएन”, इआ सुनिके यीसु उनसे कहिन, “हमरे गड़रन काहीं चराबा।” 18यीसु पुनि उनसे कहिन, “हम तोंहसे सही-सही कहित हएन, जब तूँ जमान रहे हया, त अपने से तइआर होइके जहाँ चाहत रहे हया, उहाँ चले जात रहे हया; पय जब तूँ बुढ़ाय जइहा, त अपने हाँथ काहीं फइलइहा, अउर दूसर तोंहईं तइआर कइके, जहाँ तूँ न जाँय चइहा, उहाँ तोंहईं लइ जई।” 19यीसु ईं बातन से बताय दिहिन, कि पतरस कइसन मउत से परमातिमा के बड़ाई करिहँय; अउर इआ कहे के बाद समौन से कहिन, “हमरे पीछे चलत रहा।”

यीसु अउर उनखर पियार चेला

20(तब पतरस मुड़िके उआ चेला काहीं पीछे आबत देखिके, जउने से यीसु जादा प्रेम करत रहे हँय, अउर जउन खाना खात माहीं यीसु के छाती कइती झुकिके पूँछिन रहा हय, कि “हे प्रभू अपना काहीं पकड़ामँइ बाला को आय?”) 21उनहीं देखिके पतरस यीसु से पूँछिन, “हे प्रभू, इनखर का हाल होई?” 22तब यीसु उनसे कहिन, “अगर हम चाही, कि ऊँ हमरे आमँइ तक इहाँ रुके रहँय, त तोंहईं एसे का लेन-देन हय? तूँ हमरे पीछे चलत रहा।” 23एसे भाइन माहीं इआ बात फइलगे, कि “ऊँ चेला न मरिहँय;” तऊ यीसु उनसे इआ नहीं कहिन तय, कि “ऊँ न मरिहँय, पय इआ, कि अगर हम चाही, कि ऊँ हमरे आमँइ तक रुके रहँय, त तोंहईं एसे का लेन-देन हय?”

उपसंहार

24ईं उँइन चेला आहीं, जउन ईं बातन के गबाही देत हें, अउर जउन ईं बातन काहीं लिखिन हीं, अउर हम पंचे जानित हएन, कि उनखर गबाही सच्ची हय। 25अउरव खुब काम हें, जउन यीसु किहिन रहा हय; अगर ऊँ सगले एक-एक कइके लिखे जातें, त हम समझित हएन, कि जउन किताबँय लिखी जातीं, ऊँ संसार माहीं न समातीं।