इफिसुस सहर के मसीही मन्डली के नाम लिखी पवलुस के चिट्ठी

इआ चिट्ठी के परिचय

इफिसुस सहर के मसीही मन्डली के बिसुआसी भाई-बहिनिन के नाम लिखी, यीसु मसीह के खास चेला पवलुस के चिट्ठी माहीं सबसे पहिले परमातिमा के योजना के बारे माहीं बताबा ग हय, कि “जउन कुछू स्वरग माहीं हय, अउर जउन कुछू धरती माहीं हय, उनहीं सगलेन काहीं एकट्ठा करँय, अउर मसीह उनखे ऊपर राज करँय।” (इफी 1:10) अउर इआ चिट्ठी माहीं परमातिमा के चुने पबित्र मनइन से इआ अनुरोध घलाय कीन ग हय, कि यीसु मसीह माहीं एक मन होइके, सगले मनइन के एकता के खातिर, ऊँ पंचे इआ महान योजना के मुताबिक जीबन बितामँइ।

इआ चिट्ठी के पहिल भाग माहीं पवलुस एकता के बारे माहीं बताबत हें, अउर उआ गइल के बारे माहीं बताबत, जउने के द्वारा पिता परमातिमा अपने लोगन काहीं चुनिन हीं, कि कइसन उनखे लड़िका यीसु मसीह के द्वारा ऊँ पंचे अपने पापन से माफी पाइन हीं, अउर कइसन पबित्र आत्मा के द्वारा परमातिमा के महान वादा पूर होई। इआ चिट्ठी के दुसरे भाग माहीं, पवलुस पढ़ँइ बालेन से अइसन जीबन जिअँइ के अनुरोध करत हें, कि मसीह माहीं उनखर एकता उनखे सामूहिक जीबन के सच्चाई बन जाय।

मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ बाले परमातिमा के मनइन के एकता काहीं देखामँइ के खातिर, इआ चिट्ठी माहीं पवलुस कइयकठे उदाहरन के उपयोग करत हें: जइसन- मसीही मन्डली एकठे देंह कि नाईं हय, जेखर सिर मसीह आहीं, अउर इआ एकठे घर कि नाईं हय, जेखे कोनमा के पथरा मसीह आहीं, अउर इआ एकठे दुलहिन कि नाईं हय, जेखर दुलहा मसीह आहीं। मसीह के ऊपर बिसुआस करे से परमातिमा के बड़ी दया मिलत ही, अउर पवलुस के इआ बात से प्रभाबित होंइ के कारन, इआ चिट्ठी बखान के महान उँचाइन काहीं छुइ लेत ही। हरेक बात काहीं एमाहीं मसीह के प्रेम, बलिदान, माफी, बड़ी दया अउर सिद्धता के रूप माहीं देखा ग हय।

रूप-रेखा :

भूमिका 1:1,2

मसीह अउर मसीही मन्डली 1:3—3:21

मसीह माहीं नबा जीबन 4:1—6:20

उपसंहार 6:21-24

1

पवलुस के अभिबादन

1हम पवलुस जउन परमातिमा के मरजी के मुताबिक यीसु मसीह के खास चेला आहेन, हम इआ चिट्ठी काहीं इफिसुस सहर माहीं रहँइ बाले, ऊँ पबित्र मनइन काहीं लिखित हएन, जउन मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस करत हें। 2हमरे पंचन के पिता परमातिमा अउर प्रभू यीसु मसीह के तरफ से, तोंहईं पंचन काहीं किरपा अउर सान्ति मिलत रहय।

मसीह के द्वारा आत्मिक असीसँय

3हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के पिता परमातिमा के धन्यबाद होय, कि ऊँ हमहीं पंचन काहीं मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ के कारन, स्वरग के हरेकमेर के आत्मिक आसिरबाद दिहिन हीं। 4संसार काहीं बनामँइ के पहिलेन से परमातिमा, यीसु मसीह के द्वारा हमहीं पंचन काहीं चुनि लिहिन तय, कि जउने हम पंचे उनखे नजर माहीं, उनखे प्रेम के कारन पबित्र अउर निरदोस ठहरी। 5अउर परमातिमा अपने मरजी अउर निकहे बिचार के मुताबिक हमहीं पंचन काहीं पहिलेन से ठहराइन रहा हय, कि यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ के द्वारा हम पंचे उनखर गोद लीन सन्तान कहाई। 6उनखे उआ किरपा के महिमा के बड़ाई होय, जउने काहीं ऊँ हमहीं पंचन काहीं, जेतने उनखे पियार लड़िका यीसु मसीह माहीं बिसुआस करित हएन, सेंत-मेंत माहीं दिहिन हीं। 7अउर हमहीं पंचन काहीं जेतने यीसु मसीह माहीं बिसुआस करित हएन, यीसु मसीह के खून के द्वारा अपने पापन से मुक्ती अरथात माफी मिली हय, काहेकि परमातिमा हमरे पंचन के ऊपर बड़ी दया किहिन। 8जउने काहीं परमातिमा अपने पूरे ग्यान अउर समझ सहित हमहीं पंचन काहीं बहुतायत से दिहिन हीं। 9अउर परमातिमा अपने इच्छा के भेद काहीं अपने निकहे बिचार के मुताबिक हमहीं पंचन काहीं बताइन हीं, जउने काहीं ऊँ मसीह के द्वारा हमहीं पंचन काहीं देखामँइ चाहत रहे हँय। 10अउर परमातिमा अइसन योजना बनाइन, कि अपने निस्चित समय माहीं जउन कुछू स्वरग माहीं हय, अउर जउन कुछू धरती माहीं हय, उनहीं सगलेन काहीं एकट्ठा करँय अउर मसीह उनखे ऊपर राज करँय।

11परमातिमा बहुत साल पहिले, अपने योजना के मुताबिक, मसीह के ऊपर बिसुआस कइके उनखर बारिसदार बनँइ के खातिर हमहीं पंचन काहीं चुनिन हीं। काहेकि परमातिमा अपने उद्देस्य अउर मरजी के मुताबिक सब कुछ करत हें। 12कि हम पंचे जेतने यहूदी लोग पहिलेन से मसीह के ऊपर आसा रक्खे रहेन हय, हम पंचे उनखे दया के कारन उनखर धन्यबाद करी। 13जब तूँ पंचे उआ सत्य के बचन काहीं सुने रह्या हय, जउन तोंहईं पंचन काहीं मुक्ती देंइ के खुसी के खबर रहा हय, अउर जउने मसीह के ऊपर तूँ पंचे बिसुआस किहा तय, त जउने पबित्र आत्मा काहीं देंइ के वादा परमातिमा किहिन तय, उँइन मसीह के द्वारा पबित्र आत्मा के अदभुत चिन्हारी तोंहरे पंचन के ऊपर घलाय लगाई गे ही। 14उआ पबित्र आत्मा हमरे पंचन के बारिसदार होंय के बयाना के रूप माहीं, उआ समय तक के खातिर हमहीं पंचन काहीं दीनगा हय, जब तक कि ऊँ हमहीं पंचन काहीं, जउन उनखर मोल लीन आहेन, पूरी तरह से छुटकारा नहीं दइ देंय, इआ कारन सगले मनई उनखे महानता के स्तुति करिहँय।

पवलुस के प्राथना

15एसे जब से हम सुनेन हय, कि तूँ पंचे प्रभू यीसु के ऊपर बिसुआस करते हया, अउर सगले पबित्र मनइन से प्रेम करते हया। 16तब से हम तोंहरे पंचन के खातिर परमातिमा काहीं हमेसा धन्यबाद देइत हएन, अउर अपने प्राथनन माहीं हमेसा तोंहईं सुध करित हएन। 17हम प्राथना करा करित हएन, कि हमार पंचन के प्रभू यीसु मसीह के परमातिमा, तोंहईं समझँय के अउर दिब्य दरसन के अइसन आत्मा के सक्ती देंय, कि जउने तूँ पंचे ऊँ महिमावान परमपिता काहीं पहिचान सका। 18अउर हमार बिनती इहव हय, कि तोंहरे पंचन के मन के आँखी खुल जाँय, अउर तूँ पंचे उआ प्रकास के दरसन कइ सका, जउने तोंहईं पंचन काहीं इआ मालुम होइ जाय, कि उआ आसा का आय, जउने के खातिर ऊँ तोंहईं पंचन काहीं बोलाइन हीं। अउर अपने चुने सगले मनइन काहीं जउन बारिसदार होंय के हक्क ऊँ देइहँय, उआ केतना अदभुत अउर महान हय। 19हम बिसुआसी लोगन के खातिर उनखर सक्ती एतनी महान ही, जउने के तुलना नहीं कीन जाय सकय, परमातिमा अपने महान सक्ती के प्रभाव के मुताबिक, हमरे पंचन के खातिर काम करत हें। 20जउन ऊँ मसीह के बारे माहीं किहिन हीं, कि उनहीं मरेन म से जिआइके स्वरग के जघन माहीं अपने दहिने कइती बइठाय लिहिन हीं, 21अउर सगलेन के ऊपर प्रधान, अउर अधिकारी, अउर सामर्थ दइके प्रभुता करँइ के अधिकार दिहिन हीं, अउर हरेक नाम के ऊपर अइसन नाम दिहिन हीं, जउन न केबल इआ लोक माहीं, बलकिन आमँइ बाले लोक माहीं घलाय लीन जई। 22अउर परमातिमा सब कुछ यीसु मसीह के गोड़े के नीचे कइ दिहिन हीं, अरथात सब कुछ उनखे बस माहीं कइ दिहिन हीं, अउर उँइन मसीह काहीं मसीही मन्डली के सिरोमनि बनाइन हीं। 23अउर मसीही मन्डली, मसीह के देंह आय, अउर उनहिन के भरपूरी आय, अउर उँइन सब माहीं सब कुछ पूर करत हें।

2

यीसु मसीह के द्वारा अनन्त जीबन

1एक समय रहा हय, जब तूँ पंचे यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस नहीं करत रहे आह्या, तब तूँ पंचे खुब पाप करत रहे हया, अउर मरे मनई कि नाईं रहे हया, पय अब परमातिमा तोंहईं पंचन काहीं जिआइन हीं। 2अउर तूँ पंचे उन दिनन माहीं, इआ संसार के गलत रास्तन माहीं चलत, अउर उआ आत्मा के मुताबिक जीबन बिताबत रहे हया, जउन इआ धरती के ऊपर के बुरी आत्मिक सक्तिन के स्वामी हय, उहय आत्मा अबहिनव उन मनइन के ऊपर काम करत हय, जउन परमातिमा के हुकुम काहीं नहीं मानँय। 3इहइमेर पहिले हमहूँ पंचे सगले जन अपने देंह के बुरी इच्छन के मुताबिक दिन बिताबत रहेन हय, अउर अपने देंह अउर मन के बुरी इच्छन काहीं पूर करत रहे हएन, अउर अपने सुभाबय के कारन दुसरे मनइन कि नाईं परमातिमा से दन्ड पामँइ के काबिल रहे हएन। 4पय परमातिमा जउन खुब दयालू हें; ऊँ अपने बड़े प्रेम के कारन, हमसे पंचन से प्रेम किहिन हीं। 5अउर जब हम पंचे अपने अपराधन के कारन मरे रहेन हँय, तब परमातिमा जइसन यीसु मसीह काहीं मरेन म से जिआइन, उहयमेर हमहूँ पंचन काहीं जिआइन हीं; (परमातिमा के किरपय से हमहीं पंचन काहीं मुक्ती मिली हय) 6काहेकि हम पंचे यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहेन हँय, एसे परमातिमा हमहीं पंचन काहीं मसीह के साथ पुनि जिआइन हीं, अरथात परमातिमा हमहीं पंचन काहीं नबा जीबन दिहिन हीं, अउर यीसु मसीह के साथ स्वरग के जघन माहीं बइठाइके, राज करँइ के अधिकार दिहिन हीं। 7जउने आमँइ बाले समयन माहीं परमातिमा अपने दया के असीमित धन देखामँइ, जउन यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ के द्वारा हमहीं पंचन काहीं मिला हय। 8काहेकि परमातिमा के बड़ी किरपा से हम पंचे यीसु मसीह के ऊपर जउन बिसुआस किहे हएन, ओखे द्वारा हमहीं पंचन काहीं मुक्ती मिली हय, अउर इआ हमहीं पंचन काहीं हमरे कइती से नहीं मिली, बलकिन इआ परमातिमा के दान आय। 9अउर इआ मुक्ती हमरे भले कामन के द्वारा नहीं मिली आय, कहँव अइसा न होय कि कोऊ घमन्ड करय। 10काहेकि हम पंचे परमातिमा के बनए आहेन; अउर ऊँ यीसु मसीह के द्वारा हमहीं पंचन काहीं एसे बनाइन हीं, कि हम पंचे निकहे कामन काहीं करी, जिनहीं परमातिमा पहिलेन से तइआर किहिन हीं, कि जउने हम पंचे उँइन कामन काहीं करत आपन जीबन बिताई।

यीसु मसीह सब काहीं एक किहिन हीं

11इआ कारन से सुध करा, कि तूँ पंचे जनम से यहूदी जाति के न होह्या, (अउर जउन मनई देंह माहीं अपने हाँथ के कीन खतना से खतना बाले कहाबत हें, ऊँ पंचे तोंहईं पंचन काहीं बिना खतना बाले कहत हें।) 12अउर तूँ पंचे उआ समय मसीह से अलग रहे हया, अउर इजराइल देस के प्रजा के पद से अलग रहे हया, अउर परमातिमा अपने भक्तन काहीं जउन बचन दिहिन रहा हय, उनखे ऊपर आधारित करार के भागीदार नहीं रहे आह्या, अउर इआ संसार माहीं बिना परमातिमा के रहे हया। 13पय अब यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन, तूँ पंचे जउन पहिले परमातिमा से दूरी रहे हया, मसीह के खून के द्वारा उनखे लघे आय गए हया। 14उँइन यहूदी लोगन अउर गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं मेल-मिलाप कराय दिहिन हीं, काहेकि यहूदी लोग अउर गैरयहूदी आपस माहीं एक दुसरे से नफरत करत रहे हँय, अउर अलग होइगे रहे हँय। ठीक अइसन जइसन उनखे बीच माहीं कउनव दिबाल ठाढ़ होइगे होय, पय मसीह खुद अपने देंह के बलिदान दइके, नफरत के उआ दिबाल काहीं गिराय दिहिन। 15अउर खुद काहीं क्रूस माहीं बलिदान करँइ के द्वारा जउन पहिले मुक्ती पामँइ के खातिर, यहूदी नेमन अउर मूसा के बिधान के पालन करँइ परत रहा हय, उन सगले नेमन अउर मूसा के बिधान के बिधिअन काहीं मिटाय दिहिन, कि ऊँ दोनव काहीं एक कइके उनमा नबा मनई के सुभाव पइदा कइके मेल कराय देंय। 16अउर क्रूस माहीं बलिदान के द्वारा उनखे बीच माहीं जउन दुसमनी रही हय, ओही नास कइ दिहिन हीं, जउने दोनव काहीं एकय देंह बनाइके परमातिमा से मिलामँय। 17अउर ऊँ आइके तोंहईं पंचन काहीं जउन परमातिमा से दूरी रहे हया, अउर जे कोऊ उनखर करीबी रहे हँय, दोनव काहीं मेल-मिलाप करँइ के खातिर खुसी के खबर सुनाइन। 18काहेकि उनहिन के द्वारा एकय आत्मा से, परमपिता के लघे तक हमार दोनव के पहुँच भे ही। 19एसे तूँ पंचे अब बिदेसी मुसाफिर नहीं रहि गया, बलकिन पबित्र लोगन के साथी अउर उनखे देस माहीं रहँइ बाले परमातिमा के घराना के होइ गया हय। 20अउर तूँ पंचे एकठे अइसा घर बन गया हय, जउन यीसु के खास चेलन अउर नबिअन के नेव के ऊपर खड़ा हय, अउर खुद यीसु मसीह जेखे कोनमा के पथरा हें। 21यीसु मसीह के ऊपर किहे बिसुआस के द्वारा, तूँ पंचे एकठे रचना के रूप माहीं एकय साथ मिलिके, प्रभू के खातिर एकठे पबित्र मन्दिर बनत जाते हया। 22जउने माहीं पबित्र आत्मा के द्वारा, परमातिमा के निबास करँइ के खातिर एक साथ बनाए जाय रहे हया।

3

गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं पवलुस के सेबा

1तूँ पंचे जउन गैरयहूदी आह्या, तोंहरे बीच माहीं हम मसीह यीसु के सेबा करित हएन, एसे हमहीं जेल माहीं डार दीन ग हय। 2परमातिमा हमरे ऊपर बड़ी दया कइके हमहीं नियुक्त किहिन हीं, कि तूँ पंचे जउन गैरयहूदी आह्या, हम आइके परमातिमा के खुसी के खबर सुनाई। एखे बारे माहीं तूँ पंचे जरूर सुने होइहा। 3अरथात इआ भेद हमहीं दरसन के द्वारा मिला हय, जइसन कि एखे बारे माहीं हम पहिलेन संछेप माहीं लिख चुके हएन। 4अगर तूँ पंचे एही पढ़िहा, त इआ जान सकते हया, कि मसीह के बारे माहीं जउन सँदेस पहिले कोऊ नहीं जानत रहा आय, ओखे बारे माहीं हम समझ गएन हय। 5इआ भेद पुरान पीढ़ी के मनइन काहीं इआमेर नहीं बताबा ग रहा आय, जइसन कि अब परमातिमा अपने पबित्र खास चेलन अउर नबिअन काहीं पबित्र आत्मा के द्वारा बताइन हीं। 6उआ भेद इआ आय, कि खुसी के खबर के द्वारा गैरयहूदी यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहिन हीं, इआ कारन से यहूदी लोगन के साथ एकय देंह कि नाईं एक होइगे हँय, अउर बारिसदार बनँइ माहीं साझीदार होइगे हँय, अउर परमातिमा के वादा के भागीदार घलाय होइगे हँय।

7अउर परमातिमा बड़ी दया कइके जउन बरदान हमहीं दिहिन हीं, ओहिन के सामर्थ के प्रभाव के मुताबिक, हम खुसी के खबर काहीं सुनामँइ के सेबक बने हएन। 8अउर हम जउन सगले पबित्र मनइन म से सगलेन से छोट आहेन, तऊ हमरे ऊपर बड़ी दया भे ही, कि गैरयहूदी लोगन काहीं मसीह के अपार दया के खुसी के खबर सुनाई, जउने ऊँ पंचे घलाय खुब आत्मिक आसीस पामँय। 9अउर सगले मनइन काहीं इआ बात बताई, कि उआ भेद के योजना का ही, जउने काहीं सगले संसार काहीं बनामँइ बाले परमातिमा, खुब बरिस पहिले से छिपाइके रक्खिन रहा हय। 10अउर परमातिमा के उद्देस्य अब इआ हय, कि मसीही मन्डली के द्वारा परमातिमा के अनेकव प्रकार के ग्यान, स्वरग के जघन माहीं रहँइ बाले प्रधानन अउर अधिकारिन काहीं बताबा जाय। 11परमातिमा अनन्तकाल से जउन इच्छा अपने मन माहीं कए रहे हँय, ओही ऊँ हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा पूर किहिन हीं। 12हम पंचे यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करित हएन, इआ कारन से हमहीं पंचन काहीं, पूरे बिसुआस के साथ निधड़क होइके परमातिमा के लघे आमँइ के अधिकार हय। 13एसे हम तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि जउन दुख-मुसीबत तोंहरे खातिर हम उठाय रहेन हय, उनखे कारन हिम्मत न हारा, काहेकि उनहिन माहीं तोंहार पंचन के भलाई हय।

इफिसुस के बिसुआसी लोगन के खातिर पवलुस के प्राथना

14इहय कारन से हम परमपिता के आँगे गोड़न गिरित हएन, 15काहेकि उनहिन के द्वारा स्वरग अउर धरती के ऊपर, हरेक घरानन के मनइन के नाम धराबा जात हय। 16हम प्राथना करित हएन, कि परमातिमा अपने महिमा के धन के मुताबिक, तोंहईं पंचन काहीं इआ बरदान देंय, कि तूँ पंचे उनखे पबित्र आत्मा से सामर्थ पाइके, अपने अन्दर के सुभाव माहीं मजबूत होत जा। 17अउर बिसुआस के द्वारा मसीह तोंहरे हिरदँय माहीं निबास करँय, जउने तूँ पंचे मसीह के प्रेम माहीं नेव के समान सुरुआत कइके, जड़ कि नाईं प्रेम माहीं मजबूत होइजा। 18जउने तूँ पंचे सगले पबित्र मनइन के साथ निकहा से इआ समझँइ के सक्ती पाबा; कि मसीह के प्रेम के लम्बाई, चउँड़ाई, उँचाई, अउर गहराई केतनी हय। 19अउर मसीह के उआ प्रेम काहीं जान सका, जउन मनइन के हरेकमेर के ग्यान से नहीं जाना जाय सकय, जउने तूँ पंचे परमातिमा के सगली भरपूरी से भरपूर होइजा।

20अब परमातिमा जउन सर्बसक्तिमान हें, उनसे जेतना हम पंचे माँग सकित हएन, इआ कि जहाँ तक सोच सकित हएन, ओहू से जादा ऊँ काम कइ सकत हें, अउर उहय सामर्थ से हमरे जीबन माहीं काम करत हें। 21परमातिमा के बड़ाई मसीही मन्डली माहीं, अउर मसीह यीसु माहीं, अनन्त पीढ़िन तक जुग-जुग होत रहय। आमीन।

4

मसीह के देंह माहीं एकता

1हम पवलुस प्रभू के सेबक होंइ के कारन जउन बन्दी बने हएन, तोंहसे बिनती करित हएन, कि जउने उद्देस्य से परमातिमा तोंहईं बोलाइन हीं, ओहिन के काबिल तोंहार चाल-चलन होय। 2अरथात हमेसा दीनता अउर नम्रता के साथ जीबन जिआ, अउर प्रेम के साथ धीरज धइके एक दुसरे के गलतिन काहीं सहि ल्या। 3पबित्र आत्मा के सहायता से एक दुसरे से मेल-मिलाप कइके एकता बनाए रहँय के कोसिस करत रहा। 4काहेकि मसीह के एकयठे देंह ही, अउर एकयठे पबित्र आत्मा हय; उहयमेर तुहूँ पंचे जेतने जने बोलाए गया तय, सगलेन के खातिर एकयठे आसा ही। 5अउर सगलेन के एकयठे प्रभू हें, अउर एकयठे बिसुआस हय, अउर एकयठे बपतिस्मा हय। 6अउर सगले मनइन के एकयठे परमातिमा हें, जउन सबके पिता आहीं, जउन सगलेन के ऊपर हें, अउर सगले मनइन के बीच माहीं रहत हें, अउर सगले मनइन के भीतर निबास करत हें। 7पय हमरे पंचन म से हरेक जन काहीं, मसीह अपने मरजी से उदारता के साथ आत्मिक बरदान दिहिन हीं। 8एसे पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय कि,

“मसीह 4:8 भज 68:18 ऊँचे माहीं चढ़ें, अउर बंदियन काहीं बाँधि लइगें, अउर मनइन काहीं दान दिहिन।”

9(ऊँ “ऊपर चढ़ें” अरथात स्वरग माहीं, एखर मतलब इआ हय, कि मसीह धरती के नीचे के जघन माहीं घलाय उतरे रहे हँय। 10अउर जउन मसीह स्वरग से उतरिके धरती माहीं आएँ, उँइन मसीह ऊपर स्वरग माहीं चढ़िगें, कि जउने ऊँ अपने सक्ती काहीं सगले संसार माहीं देखामँइ।) 11अउर उँइन मसीह, कुछ जनेन काहीं आपन खास चेला होंइ के बरदान दइके, अउर कुछ जनेन काहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ के बरदान दइके, अउर कुछ जनेन काहीं खुसी के खबर सुनामँइ के बरदान दइके, अउर कुछ जनेन काहीं रखबारी करँइ के बरदान दइके, अउर कुछ जनेन काहीं उपदेस देंइ के बरदान दइके, मसीही मन्डली माहीं दइ दिहिन। 12जउने सगले पबित्र मनई ग्यान माहीं सिद्ध होइ जाँय, अउर सेबा के काम निकहा से करँय, जउने मसीह के देंह अरथात मसीही मन्डली के उन्नति होय। 13अउर जब तक कि हम पंचे सगले जने बिसुआस माहीं, अउर परमातिमा के लड़िका के ग्यान माहीं एक न होइ जई, अउर मसीह के सगले गुनन काहीं अपने जीबन माहीं अपनाय के सिद्ध मनई न बन जई। 14जउने हम पंचे चुने बुदे लड़िका कि नाईं न रही, जउन ठग बिद्या अउर चतुराई के बातन माहीं, अउर दुसरेन के भ्रम माहीं डारँइ बाली बातन माहीं, अउर गलत उपदेसन माहीं परि जात हें, अउर जउनी कइती नहीं जाँय चाहँय ओहिन कइती भटक जात हें। 15बलकिन हम पंचे प्रेम के साथ सच्चाई माहीं चलत, सगली बातन माहीं मसीह कि नाईं बनँइ के खातिर बढ़त जई, जउन सगली बातन माहीं सिर अरथात मुखिया आहीं। 16जउने माहीं सगली देंह निरभर रहत ही, इआ देंह सिर से जुड़ी हरेक नसन से एकट्ठा होत ही, अउर जब एखर हरेक अंग जउन ओही काम करँइ चाही, उआ पूर करत हय, त प्रेम के साथ सगले देंह के उन्नति होत ही, अउर सगली देंह मजबूत होत ही।

मसीह माहीं नबा जीबन

17एसे हम प्रभू के तरफ से अधिकार पाइके तोंहईं पंचन काहीं जताए देइत हएन, कि जइसन संसारिक मनई जउन मुक्ती नहीं पाए आहीं, ऊँ पंचे अपने मन के बुरी इच्छन के मुताबिक आपन जीबन बिताबत हें, पय तूँ पंचे अब से पुनि कबहूँ उनखे कि नाईं चाल-चलन न अपनाया। 18काहेकि उनखर बुद्धी अँधिआर से भरी हय, अउर अपने अग्यानता के कारन, अउर अपने मन के कठोरता के कारन, परमातिमा से मिलँय बाले अनन्त जीबन से ऊँ पंचे दूर हें। 19अउर ऊँ पंचे नीक-नागा पहिचानँय के सक्ती काहीं गमाइके, लुचपन के कामन माहीं लगिगे हँय, कि हरेकमेर के बुरे काम अपने बुरी इच्छा से करा करँय। 20पय तूँ पंचे मसीह के बारे माहीं जउन जाने हया, ओमाहीं अइसन सिच्छा नहीं दीनगे आय। 21बलकिन तूँ पंचे सचमुच माहीं उनहिन के सुने हया, अउर जइसन यीसु माहीं सत्य हय, ओहिन के मुताबिक सिखाए घलाय गए हया। 22कि तूँ पंचे पिछले चाल-चलन के पुरान सुभाव काहीं छोंड़ि द्या, नहीं त उआ भरमामँइ बाली बुरी इच्छन माहीं फँसाइके जीबन काहीं भ्रस्ट कइ देत हय। 23अउर तूँ पंचे अपने मन के आत्मिक सुभाव माहीं नबा बनत जा। 24अउर तूँ पंचे उआ नबा सुभाव काहीं अपनाय ल्या, जउन परमातिमा कि नाईं सच्ची धारमिकता, अउर पबित्रता माहीं रचा ग हय।

25एसे तूँ पंचे सगले जन लबरी बोलब छोंड़ि द्या, अउर एक दुसरे से सही-सही बोला, काहेकि हम पंचे एकय देंह के अंग आहेन। 26एसे तूँ पंचे क्रोध माहीं आइके पाप न कर बइठा, अउर सुरिज बूड़ँइ से पहिले अपने क्रोध काहीं सान्त कइल्या। 27अउर सइतान काहीं मोका न द्या। 28अउर जे कोऊ चोरी करत आय रहा हय, उआ पुनि चोरी न करय; बलकिन अपने हाँथन से मेहनत मजूरी कइके, निकहे-निकहे काम करय; एसे कि तोंहरे पंचन म से जेही कुछू जरूरत होय, त ओही देंइ के खातिर ओखे लघे कुछू रहय। 29कउनव बुरी बात तोंहरे मुँहे से न निकरय, बलकिन जरूरत के मुताबिक उहय बात निकरय, जउन दुसरे के उन्नति के खातिर लाभदायक होय, जउने उआ बात काहीं सुनँय बालेन के भला होय। 30अउर परमातिमा के पबित्र आत्मा काहीं दुखी न करा, काहेकि परमातिमा पबित्र आत्मा काहीं, तोंहरे पंचन के ऊपर छुटकारा देंइ बाले दिन के खातिर चिन्हारी के रूप माहीं दिहिन हीं। 31एसे तूँ पंचे हरेकमेर के करुअई, अउर प्रकोप, अउर क्रोध, अउर लड़ाई-झगड़ा, अउर दुसरे के बुराई करब, अउर हरेकमेर के बैर-भाव समेत सगली बातन काहीं अपने जीबन से दूर कइ द्या। 32अउर एखे बदले माहीं एक दुसरे के ऊपर करुना अउर दया करा, अउर जइसन परमातिमा मसीह के व्दारा तोंहरे अपराधन काहीं माफ किहिन हीं, उहयमेर तुहूँ पंचे आपस माहीं एक दुसरे के अपराधन काहीं माफ करा।

5

हमहीं पंचन काहीं पबित्र जीबन जिअँइ चाही

1तूँ पंचे परमातिमा के पियार लड़िका आह्या, एसे उनहिन कि नाईं पबित्र जीबन बिताबा। 2अउर जइसन मसीह घलाय हमसे पंचन से प्रेम किहिन हीं, उहयमेर तुहूँ पंचे एक दुसरे से प्रेम करा। अउर प्रेमय के कारन हमहीं पंचन काहीं मुक्ती देंइ के खातिर, ऊँ परमातिमा काहीं प्रसन्न करँइ बाले सुगन्धित बलिदान के रूप माहीं, उनखे आँगे खुद काहीं बलिदान कइ दिहिन। 3अउर जइसन परमातिमा के पबित्र मनइन काहीं उचित हय, उनहिन कि नाईं तोंहरे बीच माहीं ब्यभिचार के बारे माहीं, अउर कउनव मेर के असुद्ध कामन के बारे माहीं, इआ कि लालच के बारे माहीं चरचव तक न होंइ चाही। 4अउर निरलज्जता के बातँय, मूरखँइ बाली बातँय, अउर हँसी मजाक के बातँय, तोंहरे बीच माहीं कबहूँ न होंइ चाही, काहेकि पबित्र मनइन काहीं इआ सोभा नहीं देय, बलकिन तोंहरे बीच माहीं हमेसा परमातिमा काहीं धन्यबाद देंइ बाली बातँय सुनाई देंइ चाही। 5काहेकि तूँ पंचे खुदय इआ जनते हया, कि ब्यभिचार करँइ बाला, इआ कि असुद्ध मनई, इआ कि लालच करँइ बाला मनई, (काहेकि लालच करब मूरत के पूजा करँइ के बराबर हय) इआ मेर के मनई मसीह अउर परमातिमा के राज के कबहूँ बारिसदार न बनिहँय। 6सचेत रहा, कि तोंहईं पंचन काहीं कउनव मनई बेफालतू के बातन से धोखा न देंइ पाबय; काहेकि ईंन बेफालतू के बातन के कारन परमातिमा के दन्ड उनहीं मिलत हय, जे उनखे हुकुम काहीं नहीं मानँय। 7एसे तूँ पंचे उनखे साथ सामिल न होया। 8काहेकि तूँ पंचे पहिले अँधिआर से भरे रहे हया, पय अब प्रभू के ऊपर बिसुआस कइके उँजिआर से भर गया हय, एसे तूँ पंचे अब उँजिआर अरथात जोति के सन्तान कि नाईं जीबन जिआ। 9(काहेकि जोति के फल हरेकमेर के भलाई, अउर धारमिकता अउर सत्य हय।) 10अउर तूँ पंचे हरेक समय इआ जानँय के कोसिस करा, कि “प्रभू कउने बात से प्रसन्न होत हें?” 11अउर तूँ पंचे अँधिआर के बुरे कामन माहीं सामिल न होया, बलकिन उनखे बारे माहीं मनइन काहीं उलउना द्या। 12काहेकि जउन काम ऊँ पंचे लुकिके किहिन हीं, उनखर चरचव तक करब बड़े सरम के बात ही। 13अउर जेतने अँधिआर माहीं कीन बुरे कामन के बिरोध कीन जात हय, ऊँ सगले उँजिआर माहीं प्रगट कीन जइहँय, काहेकि उँजिआर सगले कामन काहीं प्रगट कइ देत हय। 14एहिन से पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय,

“हे सोमँइ बाले अरथात पाप माहीं जीबन बितामँइ बाले मनई, मुरदन म से जि उठ, अरथात अपने बुरे कामन काहीं छोंड़िके सत्य काहीं अपनाव; तबहिन मसीह के उँजिआर तोरे ऊपर चमकी।”

15एसे तूँ पंचे सतरक रहिके अपने जीबन काहीं जाँचा, कि तोंहार पंचन के चाल-चलन कइसन हय; तोंहार पंचन के चाल-चलन निरबुद्धी मनइन कि नाईं न होय, बलकिन बुद्धिमान मनइन कि नाईं होंइ चाही। 16अउर तोंहईं पंचन काहीं अपने जीबन काहीं सुधारँय के खातिर, जउन खुब कीमती समय मिला हय, ओखर पूर-पूर उपयोग करा, काहेकि बहुत बुरा समय चल रहा हय। 17एसे निरबुद्धी मनई कि नाईं न बना, बलकिन प्रभू के इच्छा तोंहरे पंचन के जीबन माहीं का ही? ओही बड़े ध्यान से समझँय के कोसिस करा। 18अउर पबित्र आत्मा से भरपूर होत जा, इआ नहीं, कि तूँ पंचे मदिरा पिके मतबार बना, जउने से लुचपन के काम होत हय। 19बलकिन आपस माहीं परमातिमा के भजन, स्तुति के गाना, अउर आत्मिक गाना गाबत रहा, अउर अपने-अपने मनन माहीं प्रभू के हाजिरी माहीं स्तुति करत रहा। 20अउर हमेसा सगली बातन के खातिर, हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के नाम से पिता परमातिमा के धन्यबाद करत रहा। 21अपने जीबन माहीं मसीह के भय माना, अउर आपस माहीं एक दुसरे के सम्मान करा।

मंसेरुआ अउर मेहेरिआ काहीं कइसा जीबन जिअँइ चाही

22हे मेहेरिअव, अपने-अपने मंसेरुअन के अइसन अधीन रहा, जइसन तूँ पंचे प्रभू के अधीन रहते हया। 23काहेकि अपने मेहेरिआ के ऊपर ओखर मंसेरुअय सिर अरथात मुखिया होत हय, उहयमेर जइसन मसीही मन्डली के सिर अरथात मुखिया मसीह हें। काहेकि मसीही मन्डली, मसीह के देंह आय, अउर मसीहय ओखर मुक्तीदाता आहीं। 24एसे जइसन मसीही मन्डली, मसीह के अधीन ही, उहयमेर मेहेरिअव घलाय हरेक बात माहीं अपने-अपने मंसेरुअन के अधीन रहँय। 25अउर हे मंसेरुअव, अपने-अपने मेहेरिअन से प्रेम करा, जइसन मसीह घलाय मसीही मन्डली से प्रेम कइके, अपने-आप काहीं ओखे खातिर बलिदान कइ दिहिन हीं। 26कि ओही अपने बचन रूपी पानी से नहबाइके सुद्ध करँय, अउर ओही पबित्र बनाय देंय। 27अउर ओही अइसन महिमावान मसीही मन्डली बनाइके अपने आँगे ठाढ़ करँय, जउने माहीं कउनव कलंक न होय, न कउनव दाग धब्बा होय, अउर न ओमाहीं कउनव कमी होय, बलकिन उआ पबित्र अउर निरदोस होय। 28इहइमेर उचित हय, कि मंसेरुआ अपने-अपने मेहेरिअन से अपने देंह कि नाईं प्रेम करँय, अउर जे कोऊ अपने मेहेरिआ से प्रेम करत हय, उआ अपने-आप से प्रेम करत हय। 29काहेकि कोऊ अपने देंह से कबहूँ दुसमनी नहीं रक्खय, बलकिन निकहा से ओही पालत-पोसत हय, जइसन कि मसीह घलाय मसीही मन्डली के पालन-पोसन करत हें। 30एसे कि हम पंचे मसीह के देंह, अरथात मसीही मन्डली के अंग आहेन।

31अउर पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि

“मनई अपने महतारी-बाप काहीं छोंड़िके अपने मेहेरिआ के साथ माहीं रही, अउर ऊँ दोनव एक तन होइ जइहँय।”

32अउर हम पंचे जानित हएन, कि इआ भेद खुब बड़ा हय; पय हम मसीह, अउर मसीही मन्डली के बारे माहीं कहित हएन। 33पय तोंहरे पंचन म से हरेक जन अपने मेहेरिआ से अपने देंह कि नाईं प्रेम करय, अउर मेहेरिआ घलाय अपने मंसेरुआ के मान-सम्मान करँय।

6

महतारी-बाप अउर लड़िकन काहीं कइसा रहँइ चाही

1हे लड़िका बिटिअव, तूँ पंचे प्रभू के ऊपर बिसुआस करते हया, एसे अपने महतारी-बाप के हुकुमन काहीं पालन करँइ बाले बना, काहेकि इआ उचितव हय। 2अपने महतारी-6:2 निरग 20:12बाप के मान- सम्मान करा, इआ परमातिमा के पहिल हुकुम आय, जउने के साथ वादा घलाय हय, 3कि तोंहार भला होई, अउर तूँ पंचे धरती माहीं खुब दिन तक जिअत रइहा। 4अउर हे महतारी-बापव, अपने लड़िकन काहीं रिस न देबाबा, बलकिन प्रभू के सिच्छा द्या, अउर गलती करँय त चेतउनी द्या, अउर उनखर निकहा से पालन-पोसन करत रहा।

मालिक अउर सेबक काहीं कइसन रहँइ चाही

5हे दासव, जउन तोंहार संसारिक मालिक हें, अपने पूरे मन से डेरात अउर काँपत-काँपत उनखे हुकुमन काहीं माना, जइसन मसीह के हुकुमन काहीं मनते हया। 6अउर मनइन काहीं खुस करँइ बालेन कि नाईं देखाला के खातिर सेबा न करा, बलकिन मसीह के सेबकन कि नाईं, जउन पूरे मन से परमातिमा के इच्छा के मुताबिक चलत हें, उहयमेर तुहूँ पंचे अपने मालिकन के पूरे मन से सेबा करा। 7अउर अपने मालिकन के सेबा अपने पूर मन से करा, अउर उनखे सेबा काहीं मनइन के नहीं, बलकिन प्रभू के सेबा समझिके करा। 8काहेकि तूँ पंचे खुदय जनते हया, कि जे कोऊ जेतना निकहा काम करी, उआ ओतनय निकहा प्रभू से प्रतिफल पाई, चाह उआ मालिक होय, चाह सेबक। 9अउर हे मालिकव, तुहूँ पंचे घलाय धमकी देब छोंड़िके, उनखे साथ निकहा बेउहार करा, काहेकि तूँ पंचे खुदव जनते हया कि उनखर अउर तोंहार दोनव जनेन के मालिक एकय आहीं, जउन स्वरग माहीं हें, अउर ऊँ कोहू के साथ पच्छपात नहीं करँय।

आत्मिक लड़ाई के हँथिआर

10मतलब इआ, कि तूँ पंचे प्रभू के ऊपर पूरा भरोसा रक्खे रहा, जउने उनखर सक्ती पाइके मजबूत बन जा। 11परमातिमा के दीन सगले आत्मिक हँथिआरन काहीं अपने देंह माहीं बाँधि ल्या; जउने सइतान के बुरी योजनन के सामना कइ सका। 12काहेकि हमार पंचन के लड़ाई खून अउर माँस अरथात कउनव मनई से नहिं आय, बलकिन हमार पंचन के लड़ाई सइतान अउर ओखे बुरी आत्मन से हय, जउन इआ संसार माहीं राज करत हय, अउर हम पंचे अकास माहीं रहँइ बाली बुरी आत्मन के सक्तिन के साथ लड़ि रहेन हय। 13एसे परमातिमा के दीन सगले आत्मिक हँथिआरन काहीं बाँधि ल्या, कि जउने तूँ पंचे बुरे दिनन माहीं ओखर सामना कइ सका, अउर सगली लड़ाई पूर कइके, बिसुआस माहीं अटल रहि सका। 14एसे सत्य से आपन करिहा कस के, अउर धारमिकता के कबच अरथात झिलम पहिरिके, 15अउर गोड़ेन माहीं मेल-मिलाप के खुसी के खबर काहीं सुनामँइ के तइआरी के पनहीं पहिरिके, 16अउर उन सगलेन के साथय बिसुआस रूपी ढाल लइके अटल रहा, जउने उआ दुस्ट सइतान के सगले बरत तीरन काहीं बुझाय सका। 17अउर मुक्ती रूपी टोप, अउर आत्मा के तलबार जउन परमातिमा के बचन हय, ओही लइ ल्या। 18अउर तूँ पंचे हमेसा पूरे मन से पबित्र आत्मा के मदत से बिनती, प्राथना करत रहा, अउर एहिन से सचेत रहा, कि जउने सगले पबित्र मनइन के खातिर लगीतार परमातिमा से बिनती करत रहा। 19अउर तूँ पंचे हमरेव खातिर प्राथना करत रहा, कि हमहीं बोलत के समय परमातिमा अइसन सामरथी बचन देंय, कि हम बड़े साहस के साथ खुसी के खबर के भेद काहीं बताय सकी, जउने के खातिर हम जंजीर से बाँधे राजदूत कि नाईं हएन। 20अउर इहव प्राथना करा, कि हम खुसी के खबर के बारे माहीं जइसन हमहीं बोलँय चाही, उहयमेर साहस के साथ बोलि सकी।

पवलुस के अन्तिम अभिबादन

21अउर तुखिकुस जउन पियार भाई अउर प्रभू यीसु के बिसुआस के काबिल सेबक आहीं, तोंहईं पंचन काहीं हमरे बारे माहीं सगली बातँय बतइहँय, कि जउने तूँ पंचे इआ जाना, कि हम कउने हाल माहीं रहित हएन। 22अउर उनहीं हम तोंहरे लघे एहिन से पठएन हय, कि जउने तूँ पंचे हमरे हाल के बारे माहीं जाना, अउर एहू के खातिर कि ऊँ तोंहरे मनन काहीं सान्ति देंय।

23अउर हम प्राथना करित हएन, कि पिता परमातिमा अउर प्रभू यीसु मसीह के तरफ से भाई-बहिनिन काहीं सान्ति अउर बिसुआस समेत प्रेम मिलय। 24अउर जे कोऊ हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह से सच्चा प्रेम करत हें, उन सगलेन के ऊपर परमातिमा के किरपा होत रहय।