यीसु मसीह के खास चेलन के कामन के बखान
इआ किताब के परिचय
यीसु मसीह के खास चेलन के कामन के बखान लूका के लिखी खुसी के खबर से आँगे के बखान आय। एखर खास उद्देस्य इआ बताउब हय, कि यीसु के पहिल अनुयायी पबित्र आत्मा के अँगुआई माहीं, यीसु के बारे माहीं खुसी के खबर काहीं “यरूसलेम सहर अउर सगले यहूदिया प्रदेस अउर सामरिया प्रदेस माहीं, अउर धरती के छोर तक (खा.चे.काम 1:8) कइसन फइलाइन”। इआ मसीही अन्दोलन के बिबरन आय जउन यहूदी लोगन के बीच माहीं सुरू भ तय, अउर फइलिके सगले संसार के मनइन के बिसुआस बनिगा। लिखँइ बाला इआ बात के घलाय ध्यान रक्खत हय, कि ओखे पढ़ँइ बालेन काहीं इआ निस्चित होइ जाय, कि मसीही लोग रोमी सम्राज के खातिर बिद्रोही राजनयतिक सक्ती नहीं रहे आहीं, अउर मसीही बिसुआस यहूदी धरम काहीं पूर करँइ बाला रहा हय।
यीसु मसीह के खास चेलन के काम के किताब काहीं तीन भागन माहीं बाँटा जाय सकत हय, जउन लगीतार बाढ़त छेत्र काहीं बताबत हय, जउने माहीं यीसु मसीह के खुसी के खबर के प्रचार कीन ग हय, अउर मसीही मन्डलिन के स्थापना कीन गे ही, 1. यीसु के स्वरग जाए के बाद यरूसलेम सहर माहीं मसीही अन्दोलन के सुरुआत; 2. पलस्तीन प्रदेस के अलग-अलग हिस्सन माहीं एखर प्रसार; 3. अउर भूमध्य सागर के देसन माहीं रोम देस तक एखर प्रसार।
यीसु मसीह के खास चेलन के काम के खास बिसेसता ही, पबित्र आत्मा के क्रियासीलता। उआ पिन्तेकुस्त के दिन यरूसलेम सहर माहीं एकट्ठा भे बिसुआसी लोगन के ऊपर बड़ी सामर्थ के साथ उतरत हय, अउर इआ किताब माहीं बखान कीन गे घटनन के दउरान मसीही मन्डली अउर ओखे अँगुअन के मार्ग दरसन करत हय, अउर उनहीं सामर्थ देत हय। यीसु मसीह के खास चेलन के काम माहीं दीनगे कइएकठे उपदेसन माहीं सुरुआत माहीं मसीही खबर के सार प्रस्तुत कीन ग हय, अउर एमा बखान कीन गे घटनन से बिसुआसी लोगन के जीबन माहीं अउर मसीही मन्डली के सहभागिता माहीं इआ सँदेस के सामर्थ काहीं प्रगट करत हय।
रूप-रेखा :
गबाही के खातिर तइआरी 1:1-26
क- यीसु के आखिरी हुकुम अउर वादा 1:1-14
ख- यहूदा के बारिसदार 1:15-26
यरूसलेम सहर माहीं गबाही 2:1—8:3
यहूदिया प्रदेस अउर सामरिया प्रदेस माहीं गबाही 8:4—12:25
पवलुस के सेबा के काम 13:1—28:31
क- पहिल प्रचार-यात्रा 13:1—14:28
ख- यरूसलेम सहर माहीं सम्मेलन 15:1-35
ग- दूसर प्रचार-यात्रा 15:36—18:22
घ- तीसर प्रचार-यात्रा 18:23—21:16
च- यरूसलेम सहर, कैसरिया अउर रोम देस माहीं बन्दी पवलुस 21:17—28:31
1पबित्र आत्मा मिलँइ के वादा
1हे थियुफिलुस, हम अपने पहिल किताब माहीं, ऊँ सगले कामन के बारे माहीं लिखेन हय, जिनहीं यीसु सुरुआत से करत अउर सिखाबत रहिगें। 2उआ दिन तक, जब तक ऊँ अपने चुने खास चेलन काहीं पबित्र आत्मा के द्वारा हुकुम दइके, ऊपर स्वरग माहीं उठाय नहीं लीन गें। 3अउर अपने मउत के बाद ऊँ बहुतन काहीं पक्के सबूत देखाइके, अपने-आप काहीं चेला लोगन के आँगे जिन्दा देखाइन, अउर चालिस दिन तक ऊँ उनहीं देखाई देत रहिगें, अउर परमातिमा के राज के बारे माहीं बताबत रहिगें। 4अउर उनसे मिलिके उनहीं हुकुम दिहिन, कि “यरूसलेम सहर काहीं न छोंड्या, बलकिन पिता के उआ वादा के पूर होंय के इन्तजार करत रह्या, जउने के चरचा तूँ पंचे हमसे सुन चुके हया। 5काहेकि यूहन्ना त तोंहईं पानी से बपतिस्मा दिहिन हीं, पय अब कुछ दिनन के बाद, तूँ पंचे पबित्र आत्मा से बपतिस्मा पइहा।”
यीसु के स्वरग जाब
6एसे जब चेला लोग एकट्ठा भें, तब यीसु से पूँछिन, कि “हे प्रभू, का अपना अबहिनय इहय समय इजराइल राज के स्थापना कइ देब?” 7यीसु उनसे कहिन, “ऊँ समयन, इआ तिथिअन काहीं जानब तोंहार काम न होय, जिनहीं परमपिता खुद अपने अधिकार माहीं रक्खिन हीं। 8पय जब पबित्र आत्मा तोंहरे ऊपर अई, तब तूँ पंचे सामर्थ पइहा; अउर यरूसलेम सहर अउर यहूदिया अउर सामरिया प्रदेसन माहीं, अउर धरती के छोर तक हमार गबाह होइहा।” 9इआ कहे के बाद उनखे देखतय-देखत, यीसु ऊपर स्वरग माहीं उठाय लीन गें; अउर बदरी उनहीं चेलन के आँखी से ओझल कइ दिहिस। 10अउर उनखे ऊपर जात समय चेला लोग अकास कइती देखत रहे हँय, त देखा, दुइठे मनई उजर ओन्हा पहिरे उनखे लघे आइके ठाढ़ होइगें। 11अउर कहँइ लागें, “हे गलील प्रदेस के रहँइ बाले मनइव, तूँ पंचे काहे ठाढ़े टकटकी लगाए स्वरग कइती देखते हया? ईंन यीसु, जउन तोंहरे लघे से स्वरग माहीं उठाय लीन गे हँय, जउनमेर से तूँ पंचे उनहीं स्वरग काहीं जात देखे हया, उहयमेर से ऊँ पुनि अइहँय।”
मत्तियाह काहीं यहूदा के पद मिलब
12तब ऊँ पंचे जैतून नाम के पहार से, जउन यरूसलेम सहर से एक किलोमीटर दूर रहा हय, यरूसलेम सहर लउटि आएँ। 13अउर उहाँ पहुँचिके ऊँ पंचे ऊपर के उआ अँटरिया माहीं गें, जहाँ ऊँ पंचे रहत रहे हँय। उनमा से ईं आहीं, पतरस, यूहन्ना, याकूब, अन्द्रियास, फिलिप्पुस, थोमा, बरतुलमय, अउर मत्ती, हलफई के लड़िका याकूब, उत्साही समौन अउर याकूब के लड़िका यहूदा। 14अउर इनखे साथ कुछ मेहेरिआ, अउर यीसु के महतारी मरियम, अउर यीसु के भाइव रहे हँय। ईं सगले जन एक चित्त होइके प्राथना माहीं लगे रहत रहे हँय।
15अउर उँइन दिनन माहीं पतरस बिसुआसी भाइन के बीच माहीं ठाढ़ होइके, जउन एक सव बीस जन के करीब रहे हँय, कहँइ लागें। 16“हे भाई-बहिनिव, इआ जरूरी रहा हय, कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखी उआ बात पूर होय, जउने काहीं पबित्र आत्मा राजा दाऊद के मुँहे से यहूदा के बारे माहीं, जउन यीसु के पकड़बामँइ बालेन के अँगुआ रहा हय, पहिलेन से कहिन रहा हय। 17काहेकि उआ हमरे पंचन माहीं गिना ग, अउर इआ सेबकाई माहीं भागीदार भ।” 18(उआ अधरम के कमाई से एकठे खेत मोल लिहिस; अउर मूँड़े के बल गिरा, अउर ओखर पेट फाटिगा1:18 मत्ती 27:5, अउर ओखर सगली आँती निकर परीं। 19अउर इआ बात काहीं यरूसलेम सहर माहीं रहँइ बाले सगले मनई जानिगें, इहाँ तक कि उआ खेत के नाम उनखे भाँसा माहीं “हकलदमा” मतलब “खून के खेत” परिगा।) 20काहेकि भजन संहिता माहीं इआ लिखा हय, कि
“ओखर घर उजरि जाय, अउर ओमाहीं कोऊ न बसय, अउर ओखर पद कोऊ दूसर लइ लेय1:20 भज 69:25।”
21एसे जेतने दिन तक प्रभू यीसु हमरे बीच माहीं रहे हँय, अरथात यूहन्ना के बपतिस्मा से लइके, हमरे बीच म से उनखे उठाय लीन जाँय तक, जउन मनई हमेसा हमरे पंचन के साथ रहे हँय। 22इआ उचित हय, कि उनमा से एक जने काहीं चुना जाय, जउन हमरे पंचन के साथ उनखे जिन्दा होंय के गबाह होइ जाय। 23तब ऊँ पंचे दुइ जने काहीं ठाढ़ किहिन, एकठे यूसुफ काहीं, जउने काहीं बरसबा कहा जात रहा हय, (अउर इआ यूसतुस नाम से घलाय जाना जात रहा हय।) अउर दूसर मत्तियाह काहीं। 24अउर सगले जने इआ कहिके प्राथना किहिन; कि “हे प्रभू, अपना सगलेन के मन काहीं जानित हएन, इआ प्रगट करी, कि ईं दोनव म से अपना केही चुने हएन। 25कि उआ, इआ सेबकाई अउर यीसु मसीह के खास चेला होंइ के पद लेय, जउने जघा काहीं यहूदा छोंड़िके चला ग हय।” 26तब ऊँ पंचे उनखे बारे माहीं परची डारिन, अउर परची मत्तियाह के नाम माहीं निकरी, इआमेर से मत्तियाह, यीसु मसीह के गेरहँव खास चेलन के दल माहीं सामिल कइ लीन गें।
2पबित्र आत्मा के उतरब
1जब पिन्तेकुस्त2:1 पिन्तेकुस्त नाम के तेउहार फसह नाम के तेउहार के बाद पचासमें दिन मनाबा जात रहा हय। तेउहार के दिन आबा, त ऊँ पंचे सगले जन एक जघा माहीं एकट्ठा रहे हँय। 2अउर एकाएक अकास से बड़ी आँधी कि नाईं सनसनाहट के बोल सुनान, अउर ओसे सगला घर जहाँ ऊँ पंचे बइठ रहे हँय, गूँजिगा। 3अउर उनहीं आगी कि नाईं जीभँय फटत देखाई दिहिन; अउर उनमा से हरेक जन के ऊपर आइके ठहर गईं। 4अउर ऊँ पंचे सगले जन पबित्र आत्मा से भरिगें, अउर आत्मा जउनमेर उनहीं बोलँइ के सामर्थ दिहिन, ऊँ पंचे अनजान भाँसा माहीं बोलँइ लागें।
5अउर अकास के नीचे के सगले देसन से आए यहूदी भक्त, यरूसलेम सहर माहीं रहत रहे हँय। 6जब उआ बोल सुनान त उहाँ भीड़ लगिगे, अउर सगले मनई घबराइगें, काहेकि हरेक जन काहीं इहय सुनाई देत रहा हय, कि ईं पंचे हमरेन भाँसा माहीं बोलि रहे हँय। 7अउर ऊँ पंचे सगले जन चउआइके अउर अचरज मानिके कहँइ लागें; देखा, “ईं पंचे जउन बोलि रहे हँय, का ईं सगले जन गलील प्रदेस के रहँइ बाले न होंहीं? 8त पुनि काहे हम पंचे हरेक जन अपने-अपने जनम भूमि के भाँसा सुनित हएन? 9हम पंचे जउन पारथी, अउर मेदी, अउर एलामी लोग, अउर मेसोपोटामिया, अउर यहूदिया, अउर कप्पदूकिया, अउर पुन्तुस, अउर आसिया। 10अउर फ्रूगिया, अउर पंफूलिया, अउर मिस्र, अउर लीबिया देस, जउन कुरेने सहर के लघे हय, ईं सगले देसन के रहँइ बाले, अउर रोम देस से आए मनई, का यहूदी, का यहूदी धरम धारन करँइ बाले, क्रेती अउर अरबी घलाय हें।” 11पय अपने-अपने भाँसा माहीं उनसे परमातिमा के बड़े-बड़े कामन के चरचा सुनित हएन। 12अउर ऊँ सगले सुनँइ बाले चउआइगें, अउर घबराइके एक दुसरे से कहँइ लागें, कि “इआ का होइ रहा हय?” 13पय कुछ जने यीसु मसीह के खास चेलन के हँसी उड़ाइके कहिन, “ईं सगने जन कुछ जादा नबा अंगूर के रस पी लिहिन हीं।”
पतरस के भाँसन
14तब पतरस उन गेरहँव के साथ ठाढ़ भें, अउर खुब चंडे से कहँइ लागें, “हे यहूदी लोगव, अउर यरूसलेम सहर के सगले रहँइ बाले मनइव! एखर मतलब हमहीं बतामँइ द्या, हमरे बातन काहीं बड़े ध्यान से सुना। 15ईं पंचे नसा माहीं नहिं आहीं, जइसा कि तूँ पंचे समझते हया, काहेकि अबे त सकार के नव बजा हय, काहेकि एतनीदार कोऊ नसा नहीं करय। 16बलकिन इआ उआ बात आय, जउने के बारे माहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले योएल नबी कहिन रहा हय;
17‘परमातिमा कहिन हीं, कि अन्त के दिनन माहीं अइसा होई, कि हम आपन आत्मा सगले मनइन के ऊपर उड़ेलब, अउर तोंहार लड़िका-बिटिया भबिस्सबानी करिहँय, अउर तोंहार नवजमान दरसन देखिहँय, अउर तोंहार बुढ़ान मनई सपन देखिहँय।
18बलकिन हम अपने सेबकन अउर सेबिकन के ऊपर घलाय आपन आत्मा उड़ेलब, अउर ऊँ पंचे भबिस्सबानी करिहँय।
19अउर हम ऊपर अकास माहीं अचरज के काम, अउर नीचे धरती माहीं चमत्कार देखाउब, अरथात खून, आगी अउर धुँआ के बदरी।
20प्रभू के महान अउर तेजोमय दिन के आमँइ से पहिले, सुरिज माहीं अँधिआर, अउर जोंधइआ खून कि नाईं होइ जई।’
21अउर जे कोऊ प्रभू के नाम लेई, उहय मुक्ती पाई।
22हे इजराइल देस के रहँइ बाले मनइव, ईं बातन काहीं सुना, कि यीसु नासरी एकठे मनई रहे हँय, जिनखर परमातिमा के तरफ से होंइ के सबूत, उन सामर्थ के कामन, अउर अचरज के कामन, अउर चमत्कारन से प्रगट हय, जउन परमातिमा तोंहरे बीच माहीं, यीसु द्वारा कइके देखाइन हीं, जिनहीं तूँ पंचे खुदय जनते हया। 23उनहिन काहीं, जब ऊँ परमातिमा के ठहराई योजना, अउर निस्चित पूर्ब ग्यान के मुताबिक, तोंहरे हबाले कइ दीनगें, त तूँ पंचे अधरमी मनइन के मदत से उनहीं क्रूस माहीं चढ़बाइके मारि डारे हया। 24पय उनहिन काहीं परमातिमा मउत के बन्धन से छोड़ाइके, पुनि जिआय दिहिन, काहेकि उनखे खातिर इआ सम्भव नहीं रहा, कि मउत उनहीं अपने काबू माहीं रख सकय। 25काहेकि राजा दाऊद उनखे बारे माहीं कहिन हीं, कि
‘हम प्रभू काहीं हमेसा2:25 भज 16:8-11 अपने आँगे देखत रहेन हँय, काहेकि ऊँ हमरे दहिनी कइती हें, जउने हम गिरे न पाई।
26एसे हमार हिरदँय आनन्दित हय, अउर हमार जीभ मगन भे ही; बलकिन हमार देंह आसा माहीं जिअत रही।
27काहेकि अपना हमरे प्रान काहीं अधोलोक माहीं न छोंड़ब; अउर न अपने पबित्र जन काहीं सड़इन देब!
28अपना हमहीं जीबन के गइल बतायन हय; अपना हमहीं अपने दरसन के द्वारा आनन्द से भर देब’।
29हे हमार भाई-बहिनिव, हम ऊँ कुलपति राजा दाऊद के बारे माहीं, तोंहसे हिम्मत के साथ कहि सकित हएन, कि ऊँ मरिगें अउर गाड़ दीनगें, अउर उनखर कब्र आज तक हमरे इहाँ मवजूद ही। 30काहेकि ऊँ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय, अउर जानत रहे हँय, कि परमातिमा कसम खाइके उनहीं बचन दिहिन हीं, कि उनखे बंस म से एक जने काहीं उनखे राजगद्दी माहीं बइठाउब। 31एसे आँगे होंइ बाली बातन काहीं, ऊँ पहिलेन से देखिके, मसीह के जिन्दा होंइ के बारे माहीं भबिस्सबानी किहिन, कि ‘न त उनखर प्रान अधोलोक माहीं छोंड़ा ग, अउर न उनखर देंह सड़ँय पाई’। 32ईंन यीसु काहीं परमातिमा पुनि जिन्दा कइ दिहिन, जेखर हम पंचे सगले जने गबाह हएन। 33इआमेर से परमातिमा के दहिने हाँथ से सगलेन से ऊँच पद पाइके, अउर पिता से उआ पबित्र आत्मा पाइके जेखर वादा कीन ग रहा हय, अउर ऊँ उहय पबित्र आत्मा उड़ेल दिहिन, जेही अब तूँ पंचे देखते अउर सुनते हया। 34काहेकि राजा दाऊद त स्वरग माहीं नहीं चढ़ें; पय ऊँ खुदय कहत हें, कि
‘प्रभू हमरे प्रभू’ से कहिन; ‘हमरे दहिने कइती बइठा,
35जब तक कि हम तोंहरे बइरिन काहीं तोंहरे गोड़े के नीचे रक्खँइ बाली चउकी कि नाईं न कइ देई।’
36एसे इजराइल के सगला घराना निस्चित जान लेय, कि परमातिमा उँइन यीसु काहीं, जिनहीं तूँ पंचे क्रूस माहीं चढ़ाया तय, प्रभू अउर मसीह दोनव ठहराइन हीं।”
37तब सगले सुनँय बाले ब्याकुल होइगें, अउर ऊँ पंचे पतरस अउर सगले खास चेलन से पूँछँइ लागें, “हे भाइव, हम पंचे का करी?” 38तब पतरस उनसे कहिन, “अपने-अपने मन काहीं बदला, अउर तोंहरे पंचन म से हरेक जन, अपने-अपने पापन के माफी के खातिर, यीसु मसीह के नाम से बपतिस्मा ल्या; त तूँ पंचे पबित्र आत्मा के दान पइहा। 39काहेकि इआ वादा तोंहरे, अउर तोंहरे सन्तानन, अउर ऊँ सगले दूरी-दूरी के लोगन के खातिर घलाय हय, जिनहीं हमार पंचन के प्रभू परमातिमा अपने लघे बोलइहँय।” 40ऊँ अउर खुब बातन से घलाय गबाही दइ-दइके समझाइन, कि अपने आप काहीं ईं कुटिल मनइन से बचाइके रक्खा। 41एसे जेतने जने उनखे बचन काहीं अपनाइन, ऊँ पंचे सगले जन बपतिस्मा लिहिन; अउर उहय दिन तीन हजार मनइन के करीब, यीसु मसीह के खास चेलन के दल माहीं सामिल होइगें। 42अउर ऊँ पंचे यीसु मसीह के खास चेलन से सिच्छा पामँइ, अउर संगति रक्खँइ माहीं, अउर रोटी टोरँइ माहीं, अउर प्राथना करँइ माहीं अपने-आप काहीं समरपित कइ दिहिन। 43अउर सगले लोगन के ऊपर भय छाइगा, काहेकि यीसु मसीह के खास चेलन के द्वारा, खुब अचरज के काम अउर अदभुत चिन्ह प्रगट होत रहे हँय। 44अउर ऊँ पंचे सगले बिसुआस करँइ बाले एकट्ठा रहत रहे हँय, अउर उनखर सगली चीजँय साझे माहीं रहत रही हँय। 45अउर ऊँ पंचे आपन-आपन धन-सम्पत, अउर समान बेंच-बेंचके जेखर जइसन जरूरत होत रही हय, बाँट देत रहे हँय। 46अउर ऊँ पंचे हरेक दिन एक मन होइके मन्दिर माहीं एकट्ठा होत रहे हँय, अउर घर-घर रोटी टोरत, सच्चे मन से आनन्द के साथ खाना खात रहे हँय। 47अउर परमातिमा के अराधना करत रहे हँय, अउर सगले जन उनसे खुसी रहे हँय, अउर जउन मनई मुक्ती पाबत रहे हँय, उनहीं प्रभू हरेक दिन उनखे दल माहीं मिलाय देत रहे हँय।
3लाँगड़ भिखारी के नीक होब
1पतरस अउर यूहन्ना, दुपहर के बाद तीन बजे प्राथना के समय मन्दिर माहीं जात रहे हँय। 2तबहिनय कुछ जने एकठे जनम से लाँगड़ मनई काहीं लए आबत रहे हँय, ओही रोज मन्दिर के उआ दुअरा माहीं जउन सुन्दर कहाबत रहा हय, बइठाय देत रहे हँय, कि उआ मन्दिर माहीं जाँइ बालेन से भीख माँगय। 3जब उआ लाँगड़ मनई पतरस अउर यूहन्ना काहीं, मन्दिर माहीं जात देखिस, त उनसे भीख माँगिस। 4तब पतरस यूहन्ना के साथ ओखी कइती ध्यान से देखिके कहिन, “हमरे कइती देखा।” 5एसे उआ उनसे कुछू पामँइ के आसा से उनखे कइती देखँइ लाग।
6तब पतरस कहिन, “सोन-चाँदी त हमरे लघे नहिं आय; पय जउन हमरे लघे हय, उआ तोंहईं देइत हएन, यीसु मसीह नासरी के नाम से चलँइ लागा।” 7अउर पतरस ओखर दहिना हाँथ पकड़िके ओही उठाइन, अउर तुरन्तय ओखे गोड़े अउर जाँघन माही ताकत आइगा। 8अउर उआ कूदिके ठाढ़ होइगा, अउर रेंगँइ लाग; अउर रेंगत, कूदत परमातिमा के स्तुति करत उनखे साथ मन्दिर माहीं ग। 9सगले मनई ओही रेंगत अउर परमातिमा के स्तुति करत देखिके, 10ओही पहिचान लिहिन, कि इआ उहय आय, जउन मन्दिर के उआ दुअरा माहीं जउन “सुन्दर” कहाबत रहा हय, बइठिके भीख मागत रहा हय; अउर उआ घटना से जउन ओखे साथ भे रही हय; ऊँ पंचे खुब अचरज मानिके चउआन रहे हँय।
मन्दिर माहीं पतरस के उपदेस
11जब उआ पतरस अउर यूहन्ना काहीं पकड़े रहा हय, त सगले मनई खुब अचरज मानत, उआ ओसरिआ माहीं, जउन सुलैमान के कहाबत रही हय, उनखे लघे दउड़ि आएँ। 12इआ देखिके पतरस ऊँ सगले मनइन से कहिन, “हे इजराइलिव, तूँ पंचे इआ मनई काहीं देखिके काहे अचरज मनते हया, अउर हमरे कइती काहे इआमेर से देखते हया, कि मानो हमहिन पंचे अपने सामर्थ इआ भक्ती से एही रेंगँइ के लाइक बनाय दिहेन हँय। 13अब्राहम, इसहाक अउर याकूब के परमातिमा, हमरे बाप-दादन के परमातिमा, अपने सेबक यीसु के महिमा किहिन हीं, जिनहीं तूँ पंचे पकड़बाय दिहा तय, अउर जब राजपाल पिलातुस उनहीं छोंड़ँइ के बिचार किहिन, तब तूँ पंचे उनखे आँगे उनखर तिरस्कार किहा। 14तूँ पंचे ऊँ पबित्र अउर धरमी के तिरस्कार किहा तय, अउर बिनती किहा तय, कि ‘एकठे कतली काहीं तोंहरे खातिर छोंड़ दीन जाय।’ 15अउर तूँ पंचे जीबन के रचइता काहीं मारि डारे रहे हया, जिनहीं परमातिमा मरेन म से पुनि जिन्दा कइ दिहिन; अउर इआ बात के हम पंचे गबाह हएन। 16अउर उनहिन के नाम से, उआ बिसुआस से जउन उनखे नाम माहीं हय, इआ मनई काहीं जेही तूँ पंचे देखते हया, अउर जनतेव हया, सामर्थ मिली हय; अउर निस्चित उहय बिसुआस, जउन उनखे द्वारा हय, एही तोंहरे सगलेन के आँगे बेलकुल नीक-सूख कइ दिहिस ही।
17अउर अब हे भाई-बहिनिव, हम जानित हएन, कि इआ काम तूँ पंचे अग्यानता के कारन किहा तय, अउर उहयमेर तोंहार मुखिअव घलाय किहिन तय। 18पय जउने बातन काहीं परमातिमा अपने सँदेस बतामँइ बालेन के मुँहे से पहिलेन बताइन रहा हय, कि उनखर मसीह दुख उठइहँय; उनहीं ऊँ इआमेर से पूर किहिन। 19एसे तूँ पंचे आपन मन फिराबा, अउर परमातिमा के तरफ लउटि आबा, जउने तोंहार पंचन के पाप धोबरि जाँय, अउर तोंहईं सान्ती अउर आनन्द मिलय। 20अउर परमातिमा ऊँ यीसु काहीं पठमँइ, जउन तोंहरे खातिर पहिलेन से मसीह ठहराए गे हँय। 21जरूरी हय, कि मसीह स्वरग माहीं उआ समय तक रहँय, जब तक कि परमातिमा सगली बातन के सुधार न कइ लेंय, जेखर चरचा परमातिमा अपने सँदेस बतामँइ बालेन के मुँहे से किहिन हीं, जउन संसार के सुरुआत से होत आए हँय। 22जइसन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले मूसा कहिन रहा हय, ‘प्रभू परमातिमा तोंहरे पंचन के खातिर, तोंहरे भाइन म से एकठे हमरे कि नाईं आपन सँदेस बतामँइ बाला तइआर करिहँय, ऊँ जउन कुछू तोंहसे कहँय उनखर सुन्या। 23पय जउन मनई उआ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले के बातन काहीं न सुनिहँय, उनहीं मनइन म से नास कइ दीन जई’। 24अउर समूएल से लइके उनखे बाद बालेन तक, जेतने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले बात किहिन हीं, ऊँ सगले जन ईंन दिनन के सँदेस दिहिन हीं। 25तूँ पंचे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के सन्तान, अउर उआ करार के भागीदार हया, जउने काहीं परमातिमा तोंहरे बाप-दादन से किहिन हीं, जब ऊँ अब्राहम से कहिन, कि ‘तोंहरे बंस के द्वारा धरती के सगले घराना आसीस पइहँय’। 26परमातिमा जब अपने सेबक काहीं पुनि जिन्दा किहिन, त सबसे पहिले तोंहरे लघे पठइन, कि तोंहरे पंचन म से हरेक जन काहीं, बुरे रास्तन से हटाइके आसिरबाद देंय।”
4महासभा के आँगे पतरस अउर यूहन्ना
1जब पतरस अउर यूहन्ना मनइन से बात करत रहे हँय, तबहिनय याजक अउर मन्दिर के सिपाहिन के मुखिया, अउर सदूकी लोग उनखे लघे आएँ। 2काहेकि ऊँ पंचे खुब गुस्सान रहे हँय, एसे कि पतरस अउर यूहन्ना, सगले मनइन काहीं उपदेस देत रहे हँय, कि यीसु मसीह मर के जिन्दा होइगे हँय, उहइमेर जेतने मनई मरिगे हँय, ऊँ सगले यीसु मसीह के द्वारा पुनि मरेन म से जिन्दा होंइ हँय, इआ कहिके प्रचार करत रहे हँय। 3अउर ऊँ पंचे उनहीं पकड़िके दुसरे दिन तक जेल माहीं रक्खिन, काहेकि साँझ होइगे रही हय। 4पय बचन के सुनँय बालेन म से खुब जने बिसुआस किहिन, अउर उनखर गिनती पाँच हजार के करीब होइगे रही हय।
5दुसरे दिन यहूदी लोगन के राजा, अउर धारमिक अँगुआ लोग, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले यरूसलेम सहर माहीं एकट्ठा भें। 6अउर महायाजक हन्ना, अउर कैफा, अउर यूहन्ना, अउर सिकन्दर, अउर जेतने महायाजक के घराना के रहे हँय, सगले यरूसलेम सहर माहीं एकट्ठा भें। 7अउर पतरस अउर यूहन्ना काहीं बीच म ठाढ़ कइके पूछँइ लागें, कि तूँ पंचे इआ काम कउने सामर्थ से, अउर कउने नाम से किहा हय? 8तब पतरस पबित्र आत्मा से भरिके उनसे कहँइ लागें, 9हे यहूदी समाज के मुखिअव, अउर धारमिक अँगुअव, इआ लाँगड़ मनई के साथ जउन भलाई कीन गे ही, अगर आज हमसे पंचन से ओखे बारे माहीं पूँछ-ताँछ कीन जात ही, कि उआ कइसन निकहा होइगा। 10त तूँ पंचे सगले जन अउर सगले इजराइली मनई जान लेंय, कि जिनहीं तूँ पंचे क्रूस माहीं चढ़ाया तय, अउर परमातिमा उनहीं मरेन म से जिन्दा कइ दिहिन, इआ लाँगड़ मनई यीसु मसीह नासरी के नाम से, तोंहरे आँगे नीक-सूख ठाढ़ हय। 11ईं यीसु उहय पथरा4:11 भज 118:22 आहीं जेही तूँ पंचे राजा के कारीगर लोग तुच्छ ठहराया तय, उहय कोनमा के खास पथरा बनिगा। 12अउर “यीसु के अलाबा कउनव दुसरे के द्वारा मुक्ती नहीं मिल सकय; काहेकि स्वरग के नीचे मनइन माहीं, अउर कउनव दूसर नाम नहीं दीनगा, जेखे द्वारा हम पंचे मुक्ती पाय सकी।”
13जब ऊँ पंचे पतरस अउर यूहन्ना के साहस देखिन, अउर इआ जानिन, कि ईं पंचे अनपढ़ अउर साधारन मनई आहीं, त अचरज मानिन; अउर पुनि उनहीं पहिचान लिहिन, कि “ईं पंचे त यीसु के साथ रहे हँय।” 14अउर उआ मनई काहीं जउन निकहा भ रहा हय, उनखे साथ ठाढ़ देखिके, ऊँ पंचे उनखे बिरोध माहीं कुछू नहीं कहि सकें। 15पय उनहीं सभा के बहिरे जाँइ के हुकुम दइके, ऊँ पंचे आपस माहीं बिचार करँइ लागें, 16कि “हम पंचे ईं मनइन के साथ का करी? काहेकि यरूसलेम सहर के रहँइ बालेन के ऊपर प्रगट हय, कि इनखे द्वारा एकठे मसहूर चमत्कार देखाबा ग हय; अउर हम पंचे ओखर इनकार नहीं कइ सकी। 17पय एसे कि इआ बात मनइन माहीं अउर जादा न फइल जाय, हम पंचे उनहीं डेरबाई धमकाई, कि ऊँ पंचे इआ नाम से पुनि कउनव मनई से बात न करँय।” 18तब उनहीं बोलाइन अउर चेतउनी दइके इआ कहिन, कि “यीसु के नाम से कुछू न बोल्या अउर न सिखाया।” 19पय पतरस अउर यूहन्ना उनहीं जबाब दिहिन, कि “तुहिन पंचे न्याय करा, कि का इआ परमातिमा के लघे भला हय, कि हम पंचे परमातिमा के बात से बढ़िके, तोंहार पंचन के बात मानी। 20काहेकि इआ त हमसे होइन नहीं सकय, कि जउन हम पंचे देखेन अउर सुनेन हय, उआ न कही।” 21तब ऊँ पंचे उनहीं अउर डेरबाय धमकायके छोंड़ दिहिन, काहेकि खुब मनइन के कारन उनहीं सजा देंइ के मोका नहीं मिला, एसे कि जउन घटना भे रही हय, ओखे कारन सगले मनई परमातिमा के बड़ाई करत रहे हँय। 22काहेकि उआ मनई जउने काहीं अदभुत रीति से नीक कीन ग रहा हय, उआ चालिस साल से जादा उमिर के रहा हय।
बिसुआसी लोगन के प्राथना
23ऊँ पंचे उहाँ से छूटि के अपने साथिन के लघे आएँ, अउर जउन कुछू प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी समाज के धारमिक अँगुआ लोग, उनसे कहिन रहा हय, उनहीं सुनाइन। 24इआ सुनिके ऊँ पंचे एक चित्त होइके, खुब चंडे परमातिमा से कहिन, “हे स्वामी, अपना उहय आहेन जउन स्वरग अउर धरती अउर समुद्र अउर जउन कुछू उनमा हय बनायन हय।
25अपना पबित्र आत्मा के द्वारा, अपने सेबक हमरे पंचन के पूरबज राजा दाऊद के मुँहे से कहेन तय, कि
‘ईं जातिअन4:25 भज 2:1-3 के मनई न जाने काहे आपन अहंकार देखाइन? अउर देस-देस के मनई काहे बेमतलब के बातँय सोचिन?’
26प्रभू अउर उनखे मसीह के बिरोध माहीं धरती के राजा ठाढ़ भें, अउर हाकिम एक साथ एकट्ठा होइगें।
27काहेकि बेलकुल सही अपना के सेबक यीसु के बिरोध माहीं, जिनखर अपना अभिसेक किहेन हँय, हेरोदेस राजा, अउर पुन्तियुस पिलातुस घलाय, गैरयहूदी अउर इजराइलिअन के साथ इआ सहर माहीं एकट्ठा भें। 28कि जउन कुछ पहिलेन से अपना के सामर्थ, अउर मरजी से ठहराबा ग रहा हय, उहय करँय। 29अब, हे प्रभू, उनखे धमकिन काहीं देखी; अउर अपने सेबकन काहीं इआ बरदान देई, कि अपना के बचन बड़े साहस से सुनामँय। 30अउर चंगा करँइ के खातिर अपना आपन हाँथ बढ़ाई; कि चिन्ह अउर अचरज के काम, अपना के पबित्र सेबक यीसु के नाम से कीन जाँय।” 31जब ऊँ पंचे प्राथना कइ चुके, त उआ जघा जहाँ ऊँ पंचे एकट्ठा रहे हँय, डोलिगे, अउर ऊँ पंचे सगले जन पबित्र आत्मा से भरिगें, अउर परमातिमा के बचन साहस के साथ सुनाबत रहिगें।
बिसुआसी लोगन के समूहिक जीबन
32बिसुआस करँइ बालेन के मंडली एक चित्त, अउर एक मन के रही हय, इहाँ तक कि कउनव अपने धन-सम्पत काहीं, आपन नहीं कहत रहा आय, पय सगला साझे के रहा हय। 33अउर खास चेला लोग बड़े सामर्थ से प्रभू यीसु के जिन्दा होंइ के गबाही देत रहिगें, अउर उन सगलेन के ऊपर असीम किरपा रही हय। 34अउर उनमा से कोऊ निरधन नहीं रहा, काहेकि जेखे लघे जमीन इआ कि घर रहे हँय, ऊँ पंचे उनहीं बेंच-बेंचके, बिकी चीजन के दाम लइ आबत रहे हँय, अउर ओही खास चेलन काहीं दइ देत रहे हँय। 35अउर जइसन जेही जरूरत होत रही हय, खास चेला लोग ओहिन के मुताबिक, हरेक जन काहीं बाँटि देत रहे हँय।
36अउर साइप्रस टापू माहीं पइदा भे, यूसुफ नाम के एक जने लेबी रहे हँय, जउने के नाम खास चेला लोग बरनबास अरथात (सान्ति के लड़िका) रक्खिन रहा हय। 37उनखर कुछ जमीन रही हय, जउने काहीं ऊँ बेंचिन, अउर कीमत के सगला पइसा-रुपिआ लइआइके खास चेलन काहीं दइ दिहिन।
5हनन्याह अउर सफीरा
1हनन्याह नाम के एकठे मनई, अउर ओखर मेहेरिआ सफीरा मिलिके आपन कुछ जमीन बेंचिन। 2अउर जउन दाम मिला ओमा से कुछ अपने लघे रख लिहिन, इआ बात काहीं उनखर मेहेरिअव जानत रही हय, अउर कुछ हिस्सा लइआइके यीसु के खास चेलन काहीं दइ दिहिन। 3इआ जानिके पतरस उनसे कहिन, “हे हनन्याह! सइतान काहीं अपने मन माहीं इआ बात काहे डारँय दिहा, कि तूँ पबित्र आत्मा से झूँठ बोला, अउर जमीन बेंचे से जउन दाम मिला हय, ओमा से कुछ हिस्सा बचाइके अपने लघे रख लिहा हय? 4ओही बेंचँइ से पहिले का उआ तोंहार नहीं रही? अउर जब तूँ ओही बेंच दिहा, त का उआ दाम तोंहरेन हाँथ माहीं नहीं रहा? तूँ इआ बात अपने मन माहीं काहे सोचे हया? तूँ मनइन से नहीं, पय परमातिमा से झूँठ बोले हया।” 5ईं बातँय सुनतय हनन्याह गिर परा, अउर प्रान छोंड़ दिहिस; इआ बात काहीं जेतने जने सुनिन सगले खुब डेराइगें। 6पुनि जमान मनई उठिके अरथी बनाइन, अउर उनहीं बहिरे लइ जाइके गाड़ दिहिन। 7करीब तीन घन्टा बाद उनखर मेहेरिआ, जउन कुछ भ रहा हय, नहीं जानत रही, उहव भीतर आई। 8तब पतरस ओसे कहिन; “हमहीं बताबा का तूँ पंचे उआ खेत एतनेन माहीं बेंचे रहे हया?” उआ कहिस, “हाँ, एतनेन माहीं।” 9तब पतरस ओसे कहिन, “इआ का बात ही, कि तूँ पंचे दोनव जने प्रभू के आत्मा के परिच्छा के खातिर साहुत किहा हय? देखा, तोंहरे मंसेरुआ काहीं गाड़ँइ बाले दुअरय माहीं ठाढ़ हें, अउर तोंहऊँ काहीं बहिरे लइ जइहँय।” 10तबहिनय उआ हरबिन उनखे गोड़े माहीं गिर परी, अउर प्रान छोंड़ दिहिस, अउर कुछ जमान भीतर आइके ओही मरा पाइन, अउर बहिरे लइ जाइके ओखे मंसेरुआ के लघे गाड़ दिहिन। 11अउर सगली मसीही मन्डली के मनइन के ऊपर, अउर ईं बातन के सगले सुनँय बालेन के ऊपर भारी भय छाइगा।
चमत्कार अउर अचरज के काम
12यीसु के खास चेलन के हाँथे से खुब चमत्कार अउर अचरज के काम, मनइन के बीच माहीं देखाए जात रहे हँय, (अउर ऊँ पंचे सगले जन एक चित्त होइके सुलैमान के ओसरिआ माहीं एकट्ठा होत रहे हँय। 13पय उनखे अलाबा अउर कोहू के हिम्मत नहीं परत रही, कि उनखे साथ मिल जाँय; तऊ खुब मनई उनखर बड़ाई करत रहे हँय। 14अउर बिसुआस करँइ बाले खुब मेहेरिआ अउर मंसेरुआ प्रभू के मसीही मन्डली माहीं अउर जादा आइके मिलत रहिगें।) 15इहाँ तक कि मनई बिमारन काहीं सड़कन माहीं लइआइ-लइआइके, खटिया अउर खटोलबन माहीं पराय देत रहे हँय, कि जब पतरस आमँय, त उनखर परछाँइव भर उनमा से कोहू के ऊपर परि जाय। 16अउर यरूसलेम सहर के आस-पास के सहरन से घलाय खुब मनई, बिमारन अउर बुरी आत्मन के सताव से परेसान मनइन काहीं, लइआइ-लइआइके एकट्ठा होत रहे हँय, अउर सगले नीक कइ दीन जात रहे हँय।
यीसु के खास चेलन काहीं जेल माहीं डारा जाब
17तब महायाजक अउर उनखर सगले साथी जउन सदूकी पंथ के रहे हँय, जलन से भरिगें। 18अउर यीसु के खास चेलन काहीं पकड़िके जेल माहीं बन्द कइ दिहिन। 19पय रात माहीं प्रभू के एकठे स्वरगदूत, जेल के दुअरा खोलिके उनहीं बहिरे लइआइके कहिन। 20कि “जा, मन्दिर माहीं ठाढ़ होइके, इआ नबा जीबन के सगली बातन काहीं मनइन काहीं सुनाबा।” 21ऊँ पंचे इआ सुनिके भिनसार होतय, मन्दिर माहीं जाइके उपदेस देंइ लागें, पय महायाजक अउर उनखर साथी आइके महासभा के सगले मनइन काहीं, अउर इजराइलिअन के सगले धारमिक अँगुअन काहीं, एकट्ठा किहिन, अउर जेल माहीं कहबाय पठइन, कि उनहीं लइ आमँय। 22पय सिपाही उहाँ पहुँचिके, उनहीं पंचन काहीं जेल माहीं नहीं पाइन, अउर लउटिके सँदेस दिहिन। 23कि “हम पंचे जेल काहीं बड़े सावधानी से बन्द कीन, अउर पहरेदारन काहीं बहिरे दुअरा माहीं ठाढ़ पाएन; पय जब खोलेन त भीतर कोऊ नहीं मिला।” 24जब मन्दिर के मुखिया अउर महायाजक इआ बात काहीं सुनिन, त उनखे बारे माहीं भारी चिन्ता माहीं परिगें, कि “उनहीं का भ?” 25एतने माहीं कोऊ आइके उनहीं बताइस, कि “देखा, जिनहीं तूँ पंचे जेल माहीं बन्द किहा तय, ऊँ पंचे मन्दिर माहीं ठाढ़े मनइन काहीं उपदेस दइ रहे हँय।” 26तब मन्दिर के मुखिया अधिकारिन के साथ उहाँ जाइके, “उनहीं लइ आएँ, पय जबरई नहीं, काहेकि ऊँ पंचे मनइन से डेरात रहे हँय, कि हमरे पंचन के ऊपर पथरहाव न करँय।”
27ऊँ पंचे उनहीं पुनि लइआइके महासभा के आँगे ठाढ़ कइ दिहिन, अउर महायाजक उनसे पूँछिन। 28“का हम पंचे तोंहईं चेतउनी दइके हुकुम नहीं दिहेन तय, कि तूँ पंचे इआ नाम से उपदेस न दिहा? तऊ देखा, तूँ पंचे सगले यरूसलेम सहर काहीं, अपने उपदेस से भर दिहा हय, अउर उआ मनई के हत्या के दोस हमरे पंचन के ऊपर लगामँइ चहते हया।” 29तब पतरस अउर दूसर खास चेला लोग जबाब दिहिन, कि “मनइन के हुकुम से बढ़िके परमातिमा के हुकुम के पालन करब, हमार पंचन के करतब्य आय। 30हमरे पंचन के बाप-दादन के परमातिमा, यीसु काहीं जिआइन, जिनहीं तूँ पंचे क्रूस माहीं लटकाइके मारि डारे रहे हया। 31उनहिन काहीं परमातिमा, प्रभू अउर मुक्ती देंइ बाला ठहराइके, अपने दहिने हाँथ से सगलेन से ऊँच कइ दिहिन हीं, कि ऊँ इजराइली लोगन काहीं मन फिरामँइ के सक्ती, अउर पापन के माफी देंइ। 32अउर हम पंचे ईं बातन के गबाह हएन, अउर पबित्र आत्मा घलाय गबाह हय, जउने पबित्र आत्मा काहीं परमातिमा उनहीं दिहिन हीं, जे उनखे हुकुम काहीं मानत हें।”
33इआ सुनिके ऊँ पंचे आगबबूला होइगें, अउर उनहीं मार डारँइ चाहिन। 34पय गमलीएल नाम के एकठे फरीसी, जउन पबित्र सास्त्र के सिच्छा देंइ बाले, अउर सगले मनइन माहीं सम्मानित रहे हँय, अदालत माहीं ठाढ़ होइके, यीसु मसीह के खास चेलन काहीं थोड़ी देर के खातिर बहिरे कइ देंइ के हुकुम दिहिन। 35तब ऊँ कहिन, “हे इजराइलिव, जउन कुछ ईं मनइन से करँय चहते हया, सोच समझिके किहा। 36काहेकि ईं दिनन से पहिले थियूदास इआ दाबा किहिस, कि हमहूँ कुछू आहेन; अउर करीब चार सव मनई ओखे पीछे होइ लिहिन, पय उआ मारा ग; अउर जेतने मनई ओही मानत रहे हँय, सगले तितिर-बितिर होइगें, अउर मर मिटिगें। 37ओखे बाद नाम लिखाई के दिनन माहीं, यहूदा गलीली उठा, अउर कुछ जनेन काहीं अपने पच्छ माहीं कइ लिहिस, उहव नास होइगा, अउर जेतने मनई ओही मानत रहे हँय, सगले तितिर-बितिर होइगें। 38एसे अब हम तोंहसे कहित हएन, कि ईं मनइन से दूरी रहा, अउर उनसे कउनव मतलब न रक्खा; काहेकि अगर इआ धरम इआ, कि काम मनइन के तरफ से होई, तब त मिट जई। 39पय अगर परमातिमा के तरफ से होई, त तूँ पंचे उनहीं कबहूँ मिटाए न पइहा; कहँव अइसा न होय, कि तूँ पंचे परमातिमा से घलाय लड़ँइबाले ठहरा।”
40तब ऊँ पंचे ओखर बात मान लिहिन; अउर यीसु के खास चेलन काहीं बोलबाइके पिटबाइन; अउर इआ हुकुम दइके छोंड़ दिहिन, कि “यीसु के नाम से पुनि बातँय न किहा।” 41ऊँ पंचे इआ बात से आनन्दित होइके महासभा के आँगे से चलेगें, कि हम पंचे उनखे नाम के खातिर निरादर होंइ के काबिल त ठहरेन। 42अउर रोज मन्दिर माहीं अउर घर-घर माहीं उपदेस करँइ से, अउर इआ बात के खुसी के खबर सुनामँइ से, कि यीसुअय मसीह आहीं, नहीं रुकें।
6सातठे सेबकन काहीं चुना जाब
1ऊँ दिनन माहीं जब चेलन के संख्या जादा बढ़ँय लाग, तब यूनानी भाँसा बोलँइ बाले, इब्रानी भाँसा बोलँइ बालेन के ऊपर कुड़कुड़ाँय लागें, कि रोज के जरूरत के चीजन काहीं बाँटत माहीं, हमरे बिधबन के ऊपर ध्यान नहीं दीन जाय। 2तब ऊँ बरहँव खास चेला लोग, चेलन के मंडली काहीं अपने लघे बोलाइके कहिन, “हमरे पंचन के खातिर इआ ठीक नहिं आय, कि हम पंचे परमातिमा के बचन के सेबा काहीं छोंड़िके, खबामँइ पिआमँइ के सेबा माहीं रही। 3एसे हे भाइव, अपने बीच म से सातठे नीक मनइन काहीं चुनि ल्या, जउन पबित्र आत्मा से भरपूर अउर बुद्धिमान होंय, कि जउने उनहीं हम पंचे इआ काम करँइ के जिम्मेबारी सउँपि देई। 4अउर हम पंचे त प्राथना करँइ माहीं, अउर बचन सुनामँइ के सेबा माहीं लगे रहब।” 5अउर इआ बात चेलन के मंडली काहीं नीक लाग, अउर ऊँ पंचे स्तिफनुस नाम के एकठे मनई काहीं जउन बिसुआस के काबिल अउर पबित्र आत्मा से भरपूर रहे हँय, अउर फिलिप्पुस, अउर प्रुखुरूस, अउर नीकानोर, अउर तीमोन, अउर परमिनास, अउर अन्ताकिया प्रदेस के रहँइ बाले नीकुलाउस काहीं जउन यहूदी मत काहीं अपनाय लिहिन तय, चुनि लिहिन। 6अउर इनहीं यीसु के खास चेलन के आँगे ठाढ़ किहिन, तब ऊँ पंचे प्राथना कइके उनखे ऊपर आपन हाँथ धरिन।
7अउर इआमेर से परमातिमा के बचन फइलत ग, अउर यरूसलेम सहर माहीं चेलन के संख्या खुब बढ़त गय; अउर याजकन के एकठे बड़ा समूह घलाय, यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ लाग।
स्तिफनुस काहीं गिरफतार करब
8स्तिफनुस किरपा अउर सामर्थ से भरपूर होइके, मनइन के बीच माहीं बड़े-बड़े अचरज के काम, अउर चमत्कार देखाबत रहे हँय। 9तब उआ यहूदी सभाघर म से जउन लिबिरतीनों के कहाबत रही हय, उहाँ कुरेनी सहर अउर सिकन्दरिया सहर, अउर किलिकिया प्रदेस, अउर आसिया प्रदेस से आए कइअक जने ठाढ़ होइके, स्तिफनुस से बाद-बिबाद करँइ लागें। 10पय उआ ग्यान अउर पबित्र आत्मा के, जउने के सामर्थ से ऊँ बातँय करत रहे हँय, ऊँ पंचे उनखे आँगे ठहर नहीं पाएँ। 11तब ऊँ पंचे कइअक जनेन काहीं उकसाइन, जउन कहँइ लागें, “हम पंचे इनहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले मूसा, अउर परमातिमा के बिरोध माहीं बुराई के बातँय कहत सुने हएन।” 12इआमेर से ऊँ पंचे खुब मनइन काहीं, अउर यहूदी समाज के धारमिक अँगुअन, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बालेन काहीं भड़काइके बोलाय लाएँ, अउर स्तिफनुस काहीं पकड़िके महासभा माहीं लइगें। 13अउर झूँठ गबाहन काहीं ठाढ़ किहिन, जउन कहँइ लागें, कि “इआ मनई इआ पबित्र जघा, अउर मूसा के बिधान के बिरोध माहीं बोलब नहीं छोंड़य। 14काहेकि हम पंचे एही इआ कहत सुने हएन, कि नासरत गाँव माहीं रहँइ बाले यीसु, इआ जघा काहीं नास कइ देइहँय, अउर उन रीति-रिबाजन काहीं बदल डरिहँय, जउन मूसा नबी हमहीं पंचन काहीं दिहिन हीं।” 15तब सगले जने जउन महासभा माहीं बइठ रहे हँय, स्तिफनुस कइती बड़े ध्यान से देखिन, त “उनखर मुँह स्वरगदूत कि नाईं देखान।”
7स्तिफनुस के भाँसन
1तब महायाजक कहिन, “का ईं बातँय सही आहीं?” 2स्तिफनुस कहिन, “हे भाइव अउर बुजुरगव सुना, हमार पंचन के पूरबज अब्राहम हारान प्रदेस माहीं बसँइ से पहिले, जब मेसोपोटामिया प्रदेस माहीं रहे हँय; तब तेजोमय परमातिमा उनहीं दरसन दिहिन। 3अउर उनसे कहिन, कि तूँ अपने देस अउर अपने कुटुम्ब परिबार से निकरिके, उआ देस माहीं चले जा, जउने काहीं हम तोंहईं देखाउब। 4तब ऊँ कसदिअन के देस से निकरिके, हारान प्रदेस माहीं जाइके बसिगें; अउर उनखे बाप के मउत के बाद, परमातिमा उनहीं उहाँ से इआ देस माहीं लइआइके बसाइन, जउने माहीं अब तूँ पंचे बसे हया। 5परमातिमा बारिसदारी माहीं गोड़ धरऊँ भर के जघा उहाँ उनहीं नहीं दिहिन, पय वादा किहिन, कि हम इआ देस तोंहईं अउर तोंहरे बाद तोंहरे बंस काहीं देब; पय उआ समय माहीं उनखे एक्कव लड़िका-बच्चा नहीं रहे आँय। 6अउर परमातिमा उनसे इआमेर कहिन; कि ‘तोंहरे बंस के लोग, पराए देस माहीं परदेसी होइके रइहँय, अउर उहाँ के मनई उनहीं आपन दास बनइहँय, अउर चार सव बरिस तक उनहीं दुख देइहँय।’ 7पुनि परमातिमा कहिन, ‘जउने जाति के ऊँ पंचे दास होइहँय, उआ जाति के मनइन काहीं हम सजा देब; अउर एखे बाद ऊँ पंचे उहाँ से निकरिके, इआ जघा माहीं आइके हमार सेबा करिहँय7:7 निरग 3:12।’ 8अउर परमातिमा अब्राहम से खतना करामँइ के करार किहिन; अउर उहय दसा माहीं उनसे इसहाक पइदा भें; अउर अठएँ दिन उनखर खतना कीन ग; अउर इसहाक से याकूब, अउर याकूब से बारा कुलपति पइदा भें।
9अउर ऊँ कुलपति लोग यूसुफ से डाह करत रहे हँय, एसे ऊँ पंचे यूसुफ काहीं मिस्र देस जाँइ बालेन काहीं बेंच दिहिन; पय परमातिमा यूसुफ के साथ रहे हँय। 10अउर परमातिमा उनहीं सगली बिपत्तिन से बचाइके, मिस्र के राजा फिरौन के आँगे किरपा अउर अकिल दिहिन, अउर राजा फिरौन उनहीं मिस्र देस, अउर अपने सगले घर-बार के अधिकारी बनाय दिहिन। 11तब सगले मिस्र, अउर कनान देस माहीं अकाल परा; जेसे भारी बिपत्ती आई, अउर हमरे पंचन के बाप-दादन काहीं अनाज नहीं मिलत रहा आय। 12पय याकूब इआ सुनिके, कि मिस्र देस माहीं अनाज हय, हमरे बाप-दादन काहीं पहिल बेरी पठइन। 13अउर दुसराय यूसुफ अपने भाइन काहीं आपन परिचय बताइन, तबहिन राजा फिरौन काहीं यूसुफ के परिबार के बारे माहीं जानकारी भय। 14तब यूसुफ अपने बाप याकूब अउर अपने सगले कुटुम्ब परिबार काहीं, जउन पचहत्तर मनई रहे हँय, बोलबाइन। 15तब याकूब मिस्र देस माही गें; अउर उहाँ ऊँ अउर हमार बाप-दादा मरिगें। 16अउर उनखर लोथँय उहाँ से सेकेम प्रदेस माहीं पहुँचाई गईं, अउर उहाँ उनहीं कब्र माहीं दफनाबा ग। जउने काहीं अब्राहम, हमोर के लड़िकन से कुछ दाम दइके खरीदिन रहा हय।
17पय जब उआ वादा के पूर होंइ के समय लघे आबा, जउने काहीं परमातिमा अब्राहम से किहिन रहा हय, तब तक उनखर संख्या मिस्र देस माहीं बढ़िके खुब होइगे रही हय। 18पय जब मिस्र देस माहीं दूसर राजा भ, जउन यूसुफ काहीं नहीं जानत रहा आय। 19उआ राजा हमरे जाति बालेन से चलाँकी कइके, हमरे बाप-दादन के साथ एतना कठोर बेउहार किहिस, कि उनहीं अपने लड़िकन काहीं फेंक देंइ परा, कि ऊँ पंचे जिन्दा न रहँय। 20उहय समय मूसा पइदा भें, जउन परमातिमा के नजर माहीं खुब सुन्दर रहे हँय; अउर ऊँ तीन महीना तक अपने बाप के घर माहीं पाले गें। 21पय जब फेंक दीनगें, तब राजा फिरौन के बिटिया उनहीं उठाय लिहिन, अउर आपन लड़िका मानिके पालिन-पोसिन। 22अउर मूसा काहीं मिस्रिअन के सगली बिद्या पढ़ाई गे, अउर ऊँ बातन अउर कामन माहीं सामरथी रहे हँय।
23जब ऊँ चालिस बरिस के भें, तब उनखे मन माहीं इआ बिचार आबा, कि हम अपने इजराइली भाइन से मिली। 24अउर ऊँ एकठे मनई के ऊपर अन्याय होत देखिके, ओही बचाइन, अउर मिस्री जाति के मनई काहीं मारिके, सताए मनई के बदला लिहिन। 25ऊँ सोचिन, कि हमार भाई-बन्धु समझिहँय, कि परमातिमा हमरे द्वारा उनहीं गुलामी से मुक्त करिहँय, पय ऊँ पंचे नहीं समझिन। 26दुसरे दिन जब ऊँ पंचे आपस माहीं लड़त रहे हँय, तब मूसा उहाँ आइगें; अउर इआ कहिके, उनहीं मेल करामँइ के खातिर समझाइन, कि ‘हे भाइव, तूँ पंचे त भाई-भाई आह्या, एक दुसरे के ऊपर अन्याय काहे करते हया?’ 27पय जउन अपने परोसी के ऊपर अन्याय करत रहा हय, उआ उनहीं इआ कहिके हटाय दिहिस, कि ‘तोंहईं को हमरे ऊपर सासन करँइ बाला, अउर न्यायी ठहराइस ही?’ 28का ‘काल्ह जउनमेर से मिस्री मनई काहीं मारि डारे हया, हमहूँ काहीं मारि डारँइ चहते हया?’ 29इआ बात काहीं सुनिके, मूसा उहाँ से भागिगें; अउर मिद्यान देस माहीं परदेसी होइके रहँइ लागें, अउर उहाँ उनखे दुइठे लड़िका पइदा भें।
30जब उहाँ रहत उनहीं पूर चालिस बरिस बीतिगें, तब एकठे स्वरगदूत सीनै नाम के पहार के जंगल माहीं, जलत जरबइला के लपट माहीं उनहीं दरसन दिहिन। 31मूसा उआ दरसन काहीं देखिके अचरज मानिन, अउर जब देखँइ के खातिर लघे गें, तब प्रभू के इआ बोल सुनान। 32कि ‘हम तोंहरे बाप-दादन, अब्राहम, इसहाक अउर याकूब के परमातिमा आहेन’, तब मूसा काँपय लागें, इहाँ तक कि उनखर देखँइ के हिम्मत नहीं परी। 33तब प्रभू उनसे कहिन; ‘अपने गोड़े के पनहीं उतार ल्या, काहेकि जउने जघा माहीं तूँ ठाढ़ हया, उआ पबित्र भुँइ आय। 34हम सही-सही अपने लोगन के दुरदसा काहीं देखेन हय, जउन मिस्र देस माहीं हें; अउर उनखर कराहब अउर रोउब हम सुनेन हय; एहिन से हम उनहीं छोड़ामँइ के खातिर उतरेन हय। अब आबा हम तोंहईं मिस्र देस माहीं पठउब।’
35जउने मूसा काहीं, ऊँ पंचे इआ कहिके नकारिन रहा हय, कि तोंहईं को हमरे ऊपर सासन करँइ बाला अउर न्यायी ठहराइस ही, उनहिन काहीं परमातिमा सासन करँइ बाला, अउर छोड़ामँइ बाला ठहराइके, उआ स्वरगदूत के द्वारा, जउन उनहीं जलत जरबइला माहीं दरसन दिहिन रहा हय, पठइन। 36उँइन मूसा उनहीं मिस्र देस के धरती, अउर लाल समुद्र अउर सुनसान जघा माहीं, चालिस साल तक अचरज के काम करत, अउर चमत्कार देखाबत, बहिरे निकार लाएँ। 37ईं उँइन मूसा आहीं, जउन इजराइलिअन से कहिन रहा हय, कि ‘परमातिमा तोंहरे भाइन म से तोंहरे पंचन के खातिर, एकठे हमरे कि नाईं आपन सँदेस बतामँइ बाला तइआर करिहँय।’ 38ईं उँइन आहीं, जउन सुनसान जघा माहीं मसीही मन्डली के बीच माहीं उआ स्वरगदूत के साथ सीनै पहार माहीं बातँइ किहिन, अउर हमरे पंचन के बाप-दादन के साथ रहे हँय, उनहिन काहीं जीबन देंइ बाले परमातिमा के बचन मिलें, कि हमरे पंचन के लघे तक पहुँचामँइ। 39पय हमार पंचन के बाप-दादा, उनखे बातन काहीं नहीं मानँइ चाहिन; बलकिन उनखे बात काहीं न मानिके, अपने मन काहीं मिस्र देस कइती लगाइन। 40अउर हारून से कहिन, ‘हमरे खातिर अइसन देउता बनाबा, जउन हमरे पंचन के आँगे-आँगे चलय; काहेकि ऊँ मूसा जउन हमहीं मिस्र देस से निकारिके लइ आएँ हँय’, हम पंचे नहिं जानी, कि उनखे साथ का भ हय? 41उँइन दिनन माहीं ऊँ पंचे एकठे बछबा के मूरत बनाइके, उहय मूरत के आँगे बली चढ़ाइन; अउर अपने हाँथे के कामन से मगन होंइ लागें।
42तब परमातिमा उनसे गुस्साइके उनहीं छोंड़ दिहिन, कि ऊँ पंचे अकास के ग्रह नछत्रन काहीं पूजँय; जइसन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताब माहीं लिखा हय; कि
‘हे इजराइल के घराना, का तूँ पंचे सुनसान जघा माहीं चालिस बरिस तक, पसुअन के बली अउर अन्नबली हमहिन काहीं चढ़ाबत रहे हया?
43अउर तूँ पंचे मोलेक7:43 आमो 5:25-27 के तम्बू, अउर रिफान देउता के तरइया काहीं लए फिरत रहे हया; अरथात ऊँ मूरतिन काहीं जिनहीं तूँ पंचे दन्डबत करँइ के खातिर बनाए रहे हया, एसे हम तोंहईं बेबीलोन प्रदेस के बाहर लइ जाइके बसाउब।’
44गबाह के तम्बू सुनसान जघा माहीं हमरे पंचन के बाप-दादन के बीच माहीं रहा हय, इआ तम्बू उहय नमूना के मुताबिक बनाबा ग रहा हय, जइसन अकार परमातिमा मूसा काहीं बताइन रहा हय, अउर मूसा से कहिन तय, ‘जउन अकार तूँ देखे हया, ओहिन के मुताबिक एही बनाया।’ 45उहय तम्बू काहीं हमार पंचन के बाप-दादा उहय समय से पाइके, यहोसू के अँगुआई माहीं इहाँ लइ आएँ; जउने समय ऊँ पंचे ऊँ गैरयहूदी लोगन से इआ धरती काहीं लइ लिहिन रहा हय, जिनहीं परमातिमा हमरे पंचन के बाप-दादन के आँगे से, इहाँ से निकार दिहिन रहा हय; अउर उआ तम्बू राजा दाऊद के समय तक रहा हय। 46राजा दाऊद के ऊपर परमातिमा किरपा किहिन, तब ऊँ बिनती किहिन, कि ‘हम याकूब के परमातिमा के रहँइ के खातिर जघा बनाय सकी’। 47पय उनखर लड़िका सुलैमान परमातिमा के खातिर घर बनबाइन। 48पय परमप्रधान परमातिमा हाँथ के बनाए घरन माहीं नहीं रहँय, जइसन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले कहिन हीं, 49कि
‘प्रभू कहत हें, कि स्वरग हमार सिंहासन, अउर धरती हमरे गोड़े के नीचे के चउकी आय, हमरे खातिर तूँ पंचे कउनमेर के घर बनइहा? अउर हमरे अराम करँइ के कउन जघा होई?
50का ईं सगली चीजँय हमरेन हाँथ के बनाई न होंहीं?’
51हे हठी, अउर हमरे बातन के ऊपर ध्यान न देंइ बाले बिना खतना के मनइव! तूँ पंचे हमेसा पबित्र आत्मा के बिरोध करते हया, जइसन तोंहार पंचन के बाप-दादा करत रहे हँय, उहयमेर तुहूँ पंचे घलाय करते हया। 52जेतने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय, सगलेन काहीं तोंहार पंचन के बाप-दादा सताइन हीं, अउर ऊँ पंचे त उनहूँ काहीं घलाय मार डारिन रहा हय, जउन पहिलेन से ऊँ धरमी के आमँइ के बारे माहीं घोसना किहिन रहा हय, जिनहीं अब तूँ पंचे धोखा दइके पकड़बाया, अउर मरबाय डारे हया। 53तूँ पंचे स्वरगदूतन के द्वारा ठहराबा बिधान त पाया, पय उनखर पालन नहीं किहा।”
स्तिफनुस के ऊपर पथरहाव
54ईं बातन काहीं सुनिके, ऊँ पंचे आगबबूला होइगें, अउर उनखे ऊपर दाँत पीसँय लागें। 55पय स्तिफनुस पबित्र आत्मा से भरिके स्वरग कइती निहारिन, तब परमातिमा के महिमा काहीं देखिन, अउर यीसु काहीं घलाय परमातिमा के दहिने कइती ठाढ़ देखिके कहिन, 56“देखा, हम देख रहेन हय, कि स्वरग खुला हय, अउर मनई के लड़िका परमातिमा के दहिने कइती ठाढ़ हें।” 57तब ऊँ पंचे खुब चिल्लाइके कान बन्द कइ लिहिन, अउर एक चित होइके उनखे ऊपर झपट परें। 58ऊँ पंचे स्तिफनुस काहीं खसेलत सहर से बहिरे लइ जाइके, उनखे ऊपर पथरा मारँइ लागें, अउर देखँइ बाले गबाह आपन ओन्हा, साऊल नाम के एकठे नवजमान के लघे उतारिके धइ दिहिन तय। 59अउर ऊँ पंचे स्तिफनुस के ऊपर पथरा मरतय रहिगें, अउर ऊँ इआ कहिके प्राथना करत रहिगें, कि “हे प्रभू यीसु, हमरे आत्मा काहीं सोइकार करी।” 60फेर घुटुआ के बल गिरिके खुब चन्डे से कहिन, “हे प्रभू, इआ पाप इनखे ऊपर न लगाई”, अउर एतना कहिके प्रान छोंड़ दिहिन, अउर साऊल उनखे कतल होंइ माहीं सहमत रहे हँय।
8मसीही मन्डली के ऊपर अत्याचार
1उहय दिना यरूसलेम के मसीही मन्डली के ऊपर बड़ा अत्याचार सुरू होइगा, अउर यीसु के खास चेलन के अलाबा, सगले जन यहूदिया प्रदेस अउर सामरिया प्रदेस माहीं तितिर-बितिर होइगें। 2(भक्त जन मिलिके स्तिफनुस काहीं कब्र माहीं धरिन, अउर उनखे खातिर बड़ा बिलाप किहिन।) 3साऊल मसीही मन्डली काहीं नास करँइ माहीं लगा रहा हय; अउर घरन-घरन माहीं घुसिके मंसेरुअन अउर मेहेरिअन काहीं, खसेल-खसेलके जेल माहीं डारत रहा हय। 4जउन तितिर-बितिर होइगे रहे हँय, ऊँ पंचे जहाँ-जहाँ जात रहे हँय, उहाँ-उहाँ खुसी के खबर सुनाबत रहे हँय।
सामरिया प्रदेस माहीं फिलिप्पुस के प्रचार
5अउर फिलिप्पुस सामरिया सहर माहीं जाइके उहाँ के मनइन के बीच माहीं मसीह के प्रचार करँइ लागें। 6अउर जउने बातन काहीं फिलिप्पुस कहिन, उनहीं उहाँ के मनई सुनिके अउर जउन चमत्कार ऊँ देखाबत रहे हँय, उनहीं देखिके, ऊँ पंचे एक चित होइके बड़े ध्यान से सुनिन। 7काहेकि खुब मनइन म से, जिन माहीं बुरी आत्मा सकान रही हँय, खुब चन्डे से चिल्लात उनमा से निकर गईं, अउर लोकबा के मारे खुब मनई अउर खुब लाँगड़ मनई घलाय नीक होइगें तय। 8अउर उआ सहर माहीं बड़ा आनन्द छाबा रहा हय।
जादूगर समौन
9एखे पहिले उआ सहर माहीं समौन नाम के एकठे मनई रहा हय, जउन जादू-टोना कइके सामरिया सहर के मनइन काहीं अचरज माहीं डार देत रहा हय, अउर अपने-आप काहीं बड़ा महान मनई बताबत रहा हय। 10अउर सगले मनई छोट से लइके बड़े तक, ओखे बातन के ऊपर ध्यान देत रहे हँय, अउर कहत रहे हँय, कि “ईं मनई परमातिमा के उआ सक्ती आहीं जउन महान कहाबत ही।” 11उआ खुब दिनन से उनहीं अपने जादू-टोना के कामन से अचम्भित कइ राखिस तय, एहिन से ऊँ पंचे ओही खुब मानत रहे हँय। 12पय जब फिलिप्पुस, परमातिमा के राज अउर मसीह यीसु के नाम के खुसी के खबर उनहीं सुनाइन, तब ऊँ पंचे उन बातन के ऊपर बिसुआस किहिन, अउर का मंसेरुआ का मेहेरिआ सगले जन बपतिस्मा लेंइ लागें। 13तब समौन खुदय उनखे ऊपर बिसुआस किहिस, अउर बपतिस्मा लइके फिलिप्पुस के साथ रहँइ लाग, अउर उनखे द्वारा चमत्कार अउर बड़े-बड़े सामर्थ के काम होत देखिके, चउआय जात रहा हय।
पतरस अउर यूहन्ना के जादूगर समौन से बातचीत
14जब यीसु के खास चेला लोग जउन यरूसलेम सहर माहीं रहे हँय, सुनिन, कि सामरिया प्रदेस के कुछ मनई परमातिमा के बचन काहीं सोइकार कइ लिहिन हीं, त ऊँ पंचे पतरस अउर यूहन्ना काहीं उनखे लघे पठइन। 15अउर ऊँ पंचे उहाँ जाइके उनखे खातिर प्राथना किहिन, कि उनहीं पंचन काहीं पबित्र आत्मा मिलय। 16काहेकि पबित्र आत्मा अबे तक उनमा से कोहू के ऊपर नहीं उतरा रहा आय, ऊँ पंचे त केबल प्रभू यीसु के नाम माहीं बपतिस्मा लिहिन रहा हय। 17तब पतरस अउर यूहन्ना उन सगलेन के ऊपर हाँथ धरिन, अउर ऊँ पंचे पबित्र आत्मा पाइन। 18जब समौन देखिस, कि यीसु के खास चेलन के हाँथ धरे से पबित्र आत्मा दीन जात हय, तब उनखे लघे पइसा लइआइके कहिस, 19कि “इआ अधिकार हमहूँ काहीं देई, कि हम जेखे ऊपर हाँथ धरी, त उआ पबित्र आत्मा पाबय।” 20तब पतरस ओसे कहिन; “तोर पइसा तोरे साथय नास होय, काहेकि तँय परमातिमा के दान काहीं, पइसा से मोल लेंइ के बिचार किहे हई। 21इआ बात माहीं न तोर कउनव हिस्सा आय, अउर न कउनव साझेदारी आय; काहेकि तोर मन परमातिमा के आँगे ठीक नहिं आय। 22एसे तँय अपने इआ बुराई से मन फिराइके प्रभू से प्राथना कर, होइ सकत हय तोरे मन माहीं जउन बिचार हय, उआ बिचार के खातिर परमातिमा तोही माफ कइ देंय। 23काहेकि हम देख रहेन हय, कि तँय पित्त कि नाईं करुआहट से भरे हए, अउर अधरम के बन्धन माहीं परे हए।” 24तब जादूगर समौन उनहीं जबाब दिहिस, कि “अपना पंचे हमरे खातिर प्रभू से प्राथना करी, कि जउन बात अपना पंचे कहे हएन, उनमा से कउनव हमरे ऊपर न आय परय।”
25ओखे बाद खास चेला लोग आपन गबाही दइके, अउर प्रभू के बचन सुनाइके, यरूसलेम सहर काहीं लउटिगें, अउर सामरिया प्रदेस के खुब गाँमन माहीं खुसी के खबर सुनाबत गें।
फिलिप्पुस अउर कूस देस के अधिकारी
26प्रभू के एकठे स्वरगदूत फिलिप्पुस से कहिन; इहाँ से उठिके दक्खिन कइती उआ गइल माहीं जा, जउन यरूसलेम सहर से गाजा सहर काहीं जात ही, अउर उआ गइल सुनसान जघा म से जात ही। 27फिलिप्पुस उहाँ से उठिके चल दिहिन, अउर देखिन, कि कूस देस के एकठे मनई आय रहे हँय, जउन खोजा अउर कूस देस के रानी कन्दाके के मन्त्री अउर खजान्ची रहे हँय, अउर ऊँ भजन करँइ के खातिर यरूसलेम सहर आए रहे हँय। 28अउर ऊँ अपने रथ माहीं बइठ रहे हँय, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के किताब पढ़त लउटे जात रहे हँय। 29तब पबित्र आत्मा फिलिप्पुस से कहिन, लघे जाइके इआ रथ के साथ होइ ल्या। 30तब फिलिप्पुस उहाँ कइती दउड़िके उनहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के किताब पढ़त सुनिन, तब उनसे पूँछिन, कि “तूँ जउन पढ़ रहे हया, का ओही समझतेव हया?” 31तब ऊँ फिलिप्पुस से कहिन, “जब तक कोऊ न समझाबय, तब तक हम कइसा समझे पाउब?” अउर ऊँ फिलिप्पुस से बिनती किहिन, कि “अपना रथ माहीं चढ़िके हमरे लघे बइठ जई।”
32पबित्र सास्त्र 8:32 यसा 53:7,8के जउन पाठ ऊँ पढ़त रहे हँय, ओमा इआ लिखा रहा हय; कि
“ऊँ गाड़र कि नाईं बध होंइ के खातिर पहुँचाए गें, अउर जइसन मेम्ना अपने बार काटँय बाले के आँगे चुपचाप रहत हय, उहयमेर ऊँ घलाय आपन मुँह नहीं खोलिन।
33उनखे दीनता के दसा माहीं उनखर न्याय नहीं होंइ पाबा, अउर उनखे समय के मनइन के बखान को करी? काहेकि धरती से उनखर प्रान उठाबा जात हय।”
34इआ सुनिके खोजा फिलिप्पुस से पूँछिन; “हम अपना से बिनती करित हएन, अपना इआ बताई कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले, इआ बात केखे बारे माहीं कहत हें, अपने बारे माहीं, इआ कि कउनव दुसरे के बारे माहीं।” 35तब फिलिप्पुस बताउब सुरू किहिन, अउर इहय सास्त्र से सुरू कइके, उनहीं यीसु के खुसी के खबर सुनाइन। 36गइल माहीं चलत-चलत ऊँ पंचे जहाँ पानी रहा हय, उआ जघा माहीं पहुँचिगें, तब खोजा उनसे कहिन, “देखी, इहाँ पानी हय, अब हमहीं बपतिस्मा लेंइ माहीं कउनव अरचन नहिं आय।” 37तब फिलिप्पुस उनसे कहिन, “अगर तूँ अपने पूरे मन से बिसुआस करते हया, त बपतिस्मा लइ सकते हया।” तब ऊँ जबाब दिहिन, “हम बिसुआस करित हएन, कि यीसु मसीह परमातिमा के लड़िका आहीं।” 38तब ऊँ रथ काहीं ठाढ़ करँइ के हुकुम दिहिन, अउर फिलिप्पुस अउर खोजा दोनव जने पानी माहीं हिलिगें, अउर फिलिप्पुस उनहीं बपतिस्मा दिहिन। 39जब ऊँ पंचे पानी से निकरिके बहिरे आएँ, तब प्रभू के आत्मा फिलिप्पुस काहीं उठाइके लइगा, एसे खोजा पुनि उनहीं देखँइ काहीं नहीं पाइन, अउर खोजा आनन्द मनाबत अपने गइल माहीं चलेगें। 40अउर फिलिप्पुस अपने-आप काहीं असदोद सहर माहीं पाइन, अउर जब तक कैसरिया सहर माहीं नहीं पहुँचे, तब तक ऊँ सहरन-सहरन खुसी के खबर सुनाबत गें।
9साऊल के हिरदँय माहीं बदलाव
1साऊल जउन अबे तक प्रभू के चेलन काहीं धमकी देंइ, अउर कतल करँइ के धुन माहीं रहे हँय, महायाजक के लघे गें। 2अउर उनसे दमिस्क सहर के सभाघरन के नाम से इआ उद्देस्य से चिट्ठी माँगिन, कि चाह मंसेरुआ होंय, चाह मेहेरिआ, जिनहीं ऊँ यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करत पामँय, उन सगलेन काहीं बाँधिके यरूसलेम सहर माहीं लइ आमँय। 3पय जब ऊँ चलत-चलत दमिस्क सहर के लघे पहुँचे, तब अचानक अकास से उनखे चारिव कइती जोति चमकी। 4अउर ऊँ भुँइ माहीं गिर परें, अउर इआ बोल सुनिन, कि “हे साऊल, हे साऊल, तूँ हमहीं काहे सतउते हया?” 5ऊँ पूँछिन; “हे प्रभू, अपना को आहेन?” तब ऊँ कहिन; “हम यीसु आहेन; जेही तूँ सतउते हया। 6पय अब उठिके सहर माहीं जा, अउर जउन कुछू करँइ काहीं हय, उआ तोंहसे बताबा जई।” 7जउन मनई उनखे साथ माहीं रहे हँय, ऊँ चुप्पय रहिगें; काहेकि ऊँ पंचे बोल त सुनत रहे हँय, पय कोऊ उनहीं देखात नहीं रहा आय। 8तब साऊल भुँइ से उठें, पय जब आँखी खोलिन त उनहीं कुछू देखात नहीं रहा आय, अउर उनखर साथी उनखर हाँथ पकड़िके दमिस्क सहर माहीं लइगें। 9अउर ऊँ तीन दिना तक नहीं देख सकें, अउर न कुछू खाबय पिअब भें।
10दमिस्क सहर माहीं हनन्याह नाम के एकठे चेला रहे हँय, उनसे प्रभू दरसन माहीं कहिन, “हे हनन्याह!” ऊँ कहिन; “हाँ प्रभू।” 11तब प्रभू उनसे कहिन, “उठिके उआ गली माहीं जा, जउन सीध गली कहाबत ही, अउर यहूदा के घर माहीं तरसुस सहर के रहँइ बाले साऊल नाम के एकठे मनई काहीं पूँछ लिहा; काहेकि देखा, ऊँ प्राथना कइ रहे हँय।” 12अउर ऊँ दरसन माहीं देखिन हीं, कि हनन्याह नाम के एकठे मनई घर माहीं आइके उनखे ऊपर हाँथ धरिन, जउने ऊँ पुनि देख सकँय। 13तब हनन्याह उनहीं जबाब दिहिन, कि “हे प्रभू, हम इआ मनई के बारे माहीं खुब जनेन से सुने हएन, कि ईं यरूसलेम सहर माहीं अपना के पबित्र मनइन के साथ बड़ी-बड़ी बुराई किहिन हीं। 14अउर इहाँ घलाय इनहीं प्रधान याजकन के तरफ से अधिकार मिला हय, कि जे-जे अपना के नाम लेत हें, उन सगलेन काहीं बन्दी बनाय लेंय।” 15पय प्रभू उनसे कहिन, कि “तूँ चले जा; काहेकि हम साऊल काहीं चुनि लिहेन हँय, कि ऊँ गैरयहूदी लोगन के आँगे अउर राजन के आँगे, अउर इजराइलिअन के आँगे हमरे नाम के प्रचार करँय। 16अउर हम उनहीं बताउब, कि हमरे नाम के खातिर उनहीं कइसा-कइसा दुख उठामँइ परी।” 17तब हनन्याह उठिके उआ घर माहीं गें, अउर उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके कहिन, “हे भाई साऊल, प्रभू यीसु जउन उआ गइल माहीं जउने से तूँ आए हया, तोंहईं देखाई दिहिन रहा हय, उँइन हमहीं पठइन हीं, कि तूँ पुनि देखँइ लागा, अउर पबित्र आत्मा से भर जा।” 18अउर हरबिन उनखे आँखी से छिलका कि नाईं कुछू गिरा, अउर ऊँ देखँइ लागें, अउर उठिके बपतिस्मा लिहिन; ओखे बाद खाना खाइन तब उनखे देंह माहीं बल आबा।
दमिस्क सहर माहीं साऊल के द्वारा प्रचार
19ऊँ कइअक दिना तक उन चेलन के साथय रहिगें, जउन दमिस्क सहर माहीं रहे हँय। 20अउर ऊँ हरबिन यहूदी सभाघरन माहीं जाइके प्रचार करँइ लागें, कि “यीसु परमातिमा के लड़िका आहीं।” 21अउर सगले सुनँय बाले चउआइके कहँइ लागें; का ईं उहय मनई न होंहीं, जउन यरूसलेम सहर माहीं यीसु के नाम लेत रहे हँय, उनहीं नास करत रहे हँय, अउर इहाँ घलाय एहिन से आएँ तय, कि उनहीं जउन यीसु के नाम लेत हें बाँधिके महायाजकन के आँगे लइ जाँय? 22पय साऊल अउर सामरथी होत गें, अउर इआ बात के सबूत दइ-दइके कि यीसुअय मसीह आहीं, दमिस्क सहर के यहूदी लोगन के मुँह बन्द कइ देत रहे हँय।
23खुब दिन बीत जाँइ के बाद, यहूदी लोग उनहीं मारि डारँय के योजना बनाइन। 24पय उनखर योजना साऊल काहीं मालुम होइगे, कि “ऊँ हमहीं मारि डारँइ के खातिर रात-दिना फाटकन के लघे पहरा देत रहत हें।” 25पय रात माहीं उनखर चेला लोग उनहीं टोपरा माहीं बइठाइके, सहर के चारिव कइती जउन भीती रही हय, ओसे झुलाइके नीचे उतार दिहिन।
यरूसलेम सहर माहीं साऊल के पहुँचब
26अउर ऊँ यरूसलेम सहर माहीं पहुँचिके चेलन के साथ मिल जाँइ के कोसिस किहिन, पय सगले जने उनसे डेरात रहे हँय, काहेकि उनहीं इआ बिसुआस नहीं होत रहा आय, कि इऊँ चेला आहीं। 27पय बरनबास उनहीं अपने साथ यीसु के खास चेलन के लघे लइ जाइके, उनसे बताइन, कि “ईं कउनमेर से गइल माहीं प्रभू काहीं देखिन, अउर प्रभू इनसे बात किहिन; अउर फेर ईं दमिस्क सहर माहीं, कउनमेर से बड़े साहस के साथ यीसु के नाम के प्रचार किहिन।” 28तब से साऊल उनखे साथ यरूसलेम सहर माहीं आमँइ-जाँइ लागें। 29अउर निधड़क होइके प्रभू के नाम के प्रचार करत रहे हँय; अउर यूनानी भाँसा बोलँइ बाले यहूदी लोगन के साथ, बातचीत अउर बाद-बिबाद करत रहे हँय; पय ऊँ पंचे उनहीं मार डारँइ के कोसिस करँइ लागें। 30इआ जानिके बिसुआसी भाई उनहीं कैसरिया सहर माहीं लइ आएँ, अउर उहाँ से उनहीं तरसुस सहर माहीं पठय दिहिन।
31इआमेर से सगले यहूदिया प्रदेस, अउर गलील प्रदेस, अउर सामरिया प्रदेस माहीं, मसीही मन्डलिन के सगले मनइन काहीं सान्ति मिली, अउर उनखर उन्नति होत चली गय; अउर मसीही मन्डली प्रभू के भय, अउर पबित्र आत्मा के सान्ति माहीं, चलत अउर बढ़त जात रही हँय।
लुद्दा सहर अउर याफा सहर माहीं पतरस
32अउर अइसन भ, कि पतरस हरेक जघन माहीं घूमत, उन पबित्र मनइन के लघे घलाय पहुँचे, जउन लुद्दा सहर माहीं रहत रहे हँय। 33उहाँ उनहीं एनियास नाम के लोकबा के मारा एकठे मनई मिला, जउन आठ बरिस से खटिया माहीं परा रहा हय। 34तब पतरस उनसे कहिन, “हे एनियास! यीसु मसीह तोंहईं नीक करत हें; उठा, आपन बिछउना उठाबा”; तब उआ तुरन्तय उठिके ठाढ़ होइगा। 35अउर लुद्दा सहर अउर सारोन प्रदेस के सगले रहँइ बाले उनखे इआ काम काहीं देखिके, प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन।
36अउर याफा सहर माहीं एकठे तबीता नाम के बिसुआसिन रहत रही हय, जउन दोरकास नाम से घलाय जानी जात रही हय, उआ खुब निकहे-निकहे काम करत रही हय, अउर गरीबन काहीं दान देत रही हय। 37उँइन दिनन माहीं उआ बिमार होइके मरिगे; अउर ऊँ पंचे ओही नहबाइके अँटरिया माहीं धरबाय दिहिन। 38अउर एसे कि लुद्दा सहर, याफा सहर के लघेन रहा हय, चेला लोग इआ सुनिके, कि पतरस उहाँ हें, त दुइठे मनइन काहीं पठइन, कि उनसे बिनती करँय, कि ऊँ हमरे पंचन के लघे खुब जल्दी आय जाँय। 39तब पतरस ठाढ़ होइके उनखे साथ चल दिहिन, अउर जब ऊँ उहाँ पहुँचे, तब ऊँ पंचे उनहीं अँटरिया माहीं लइगें; सगली बिधबा मेहेरिआ रोबत उनखे लघे आइके ठाढ़ होइ गईं, अउर जउन कुरथा अउर ओन्हा, दोरकास उनखे साथ माहीं रहत समय बनाइन तय, उनहीं देखामँइ लागीं। 40तब पतरस सगलेन काहीं अँटरिया से बहिरे निकार दिहिन, अउर घुटुआ के बल बइठिके प्राथना किहिन; अउर लहास कइती निहारिके कहिन; “हे तबीता उठ”: तब ऊँ आपन आँखी खोल दिहिन; अउर पतरस काहीं देखिके उठ बइठीं। 41तब पतरस आपन हाँथ पकड़ाइके उनहीं उठाइन, अउर पबित्र लोगन अउर बिधबन काहीं बोलाइके जिअत देखाय दिहिन। 42इआ बात सगले याफा सहर माहीं फइलिगे, अउर उहाँ के खुब मनई प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन। 43अउर पतरस याफा सहर माहीं, समौन नाम के कउनव चमड़ा के धन्धा करँइ बाले के इहाँ, खुब दिनन तक रहिगें।
10पतरस काहीं कुरनेलियुस के बोलबाउब
1कैसरिया सहर माहीं कुरनेलियुस नाम के एकठे मनई रहे हँय, जउन इतालियानी नाम के पलटन के सुबेदार रहे हँय। 2ऊँ भक्त रहे हँय, अउर अपने सगले घराना समेत परमातिमा के भय मानत रहे हँय, अउर यहूदी लोगन काहीं खुब दान देत रहे हँय, अउर हमेसा परमातिमा से प्राथना करत रहे हँय। 3ऊँ दिन के तीन बजे के करीब दरसन माहीं साफ-साफ देखिन, कि परमातिमा के एकठे स्वरगदूत हमरे लघे भीतर आइके कहत हें; कि “हे कुरनेलियुस।” 4ऊँ उनहीं ध्यान से देखिन; अउर डेराइके कहिन; “हे प्रभू, का हुकुम हय?” स्वरगदूत उनसे कहिन, “तोंहार प्राथना अउर दान यादगारी के खातिर परमातिमा के लघे पहुँचिगे हँय। 5अउर अब याफा सहर माहीं कुछ मनइन काहीं पठइके, समौन जउन पतरस काहबत हें उनहीं बोलबाय ल्या। 6ऊँ चमड़ा के धन्धा करँइ बाले समौन के इहाँ मेहमान हें, जिनखर घर समुद्र के किनारे हय।” 7जब ऊँ स्वरगदूत उनसे बात कइके चलेंगे, तब ऊँ दुइठे सेबकन काहीं अउर जउन उनखे लघे हाजिर रहा करत रहे हँय, उनमा से एकठे भक्त सिपाही काहीं बोलाइन। 8अउर उनहीं सगली बात बताइके याफा सहर माहीं पठइन।
पतरस के दरसन देखब
9दुसरे दिना जब ऊँ पंचे चलत-चलत सहर के लघे पहुँचिगें, तब दुपहर के करीब पतरस प्राथना करँइ के खातिर छत माहीं चढ़ें। 10तब उनहीं भूँख लाग, अउर कुछू खाँइ चाहत रहे हँय; पय जब ऊँ पंचे खाना तइआर करत रहे हँय, तब ऊँ बेसुध होइगें। 11अउर दरसन माहीं देखिन कि, “अकास खुलिगा; अउर एकठे बड़े चद्दरा कि नाईं कउनव चीज नीचे उतरि रही हय, ओही चारिव कोने से पकड़िके धरती माहीं उतारा जाय रहा हय। 12जउने माहीं धरती के हरेक मेर के चार गोड़े बाले, अउर रेगँइ बाले जीव-जन्तु, अउर अकास के पंछी रहे हँय।” 13अउर उनहीं अइसन बोल सुनान, “हे पतरस उठा, मारिके खा।” 14पय पतरस कहिन, “नहीं प्रभू, कदापि नहीं; काहेकि हम कबहूँ कउनव अपबित्र, इआ कि असुद्ध चीज नहीं खायन आय।” 15पुनि दुसराय उनहीं इआ बोल सुनान, कि “जउन कुछू परमातिमा सुद्ध ठहराइन हीं, ओही तूँ असुद्ध न कहा।” 16तीन बेरकी इहइमेर भ; तब हरबिन उआ चीज अकास माहीं ऊपर उठाय लीनगे।
17पतरस जउन दरसन देखिन रहा हय, ओखे बारे माहीं बड़ी दुबिधा माहीं परे रहे हँय, कि “एखर मतलब का होई”, तबहिनय देखा, उँइ मनई जिनहीं कुरनेलियुस पठइन रहा हय, समौन के घर के पता लगाइके दुअरा माहीं आइके ठाढ़ होइगें। 18अउर गोहराइके पूछँइ लागें, “का समौन जउन पतरस कहाबत हें, इहँय मेहमान बनिके रुके हँय?” 19पतरस जउन उआ दरसन के बारे माहीं सोचतय रहे हँय, कि पबित्र आत्मा उनसे कहिन, “देखा तीनठे मनई तोंहईं ढूँढ़ रहे हँय। 20एसे तूँ उतरिके नीचे जा, अउर निसोच होइके उनखे पीछे-पीछे चले जा, काहेकि हमहिन उनहीं पठएन हँय।” 21तब पतरस छत से नीचे उतरिके ऊँ मनइन से कहिन; “देखा, जिनहीं तूँ पंचे ढूँढ़ रहे हया, उआ हमहिन आहेन; तोंहरे पंचन के आमँइ के का कारन हय?” 22तब ऊँ पंचे कहिन, “कुरनेलियुस सुबेदार जउन धरमी मनई हें, अउर परमातिमा के भय मानँइ बाले, अउर यहूदी जाति माहीं उनखर खुब सम्मान हय, ऊँ स्वरगदूत से इआ हुकुम पाइन हीं, कि अपना काहीं अपने घर माहीं बोलाइके अपना से बचन सुनँय।”
कुरनेलियुस के घर माहीं पतरस
23तब पतरस उनहीं भीतर बोलाइके उनखर स्वागत-सतकार किहिन, अउर दुसरे दिना उनखे साथ गें; अउर याफा सहर के बिसुआसी भाइन म से कइअक जने उनखे साथ गें। 24दुसरे दिना उँइ पंचे कैसरिया सहर माहीं पहुँचे, अउर कुरनेलियुस अपने रिस्तेदारन अउर पियार साथिन काहीं एकट्ठा कइके उनखर इन्तजार कए रहे हँय। 25जब पतरस भीतर आबत रहे हँय, तब कुरनेलियुस उनसे भेंट किहिन, अउर उनखर गोड़ पकड़िके नबस्कार किहिन। 26पय पतरस उनहीं उठाइके कहिन, “ठाढ़ होइजा, हमहूँ त मनइन आहेन।” 27अउर उनसे बात करत भीतर गें, अउर खुब मनइन काहीं एकट्ठा देखिके। 28पतरस उनसे कहिन, “तूँ पंचे जनते हया, कि गैरयहूदी लोगन के संगति करब, इआ उनखे इहाँ जाब यहूदी लोगन के खातिर अधरम हय, पय परमातिमा हमहीं बताइन हीं, कि हम कउनव मनई काहीं अपबित्र इआ कि असुद्ध न कही। 29एसे जब हमहीं बोलबाबा ग; त हम बिना कुछू कहे चले आएन हय, पय अब हम तोंहसे पूँछित हएन, कि हमहीं कउने काम के खातिर बोलबाया हय?”
30तब कुरनेलियुस कहिन; कि “चार दिना पहिले इहय समय हम अपने घर माहीं तीन बजे प्राथना करत रहेन हँय; कि अचानक एकठे मनई चमकत ओन्हा पहिरे, हमरे आँगे आइके ठाढ़ होइगें। 31अउर कहँइ लागें, कि ‘हे कुरनेलियुस, तोंहार प्राथना सुन लीनगे ही, अउर तोंहार दान परमातिमा के आँगे याद कीन गे हँय। 32एसे कोहू काहीं याफा सहर माहीं पठइके, समौन काहीं जउन पतरस कहाबत हें बोलबाबा; ऊँ समुद्र के किनारे समौन जउन चमड़ा के धन्धा करत हें, उनखे घर माहीं मेहमान हें।’ 33तब हम हरबिन अपना के लघे कुछ मनइन काहीं पठयन, अउर अपना निकहा किहेन हय, जउन आय गएन हय, अब हम पंचे सगले जन इहाँ परमातिमा के आँगे हएन, जउने जउन कुछू परमातिमा अपना से कहिन हीं, ओही सुनी।”
पतरस के उपदेस
34तब पतरस कहिन, “अब हम समझ गएन हय, कि परमातिमा कोहू के साथ भेदभाव नहीं करँय, 35बलकिन हरेक जाति माहीं जउन उनसे डेरात हें, अउर धरम के काम करत हें, परमातिमा उनहीं सोइकार करत हें। 36जउन बचन परमातिमा इजराइलिअन के लघे पठइन, जबकि ऊँ यीसु मसीह के द्वारा (जउन सगले मनइन के प्रभू आहीं) सान्ति के खुसी के खबर सुनाइन। 37उआ बात काहीं तूँ पंचे जनते हया, जउन यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के बपतिस्मा के प्रचार के बाद, गलील प्रदेस से सुरू होइके सगले यहूदिया प्रदेस माहीं फइलिगे ही। 38अउर परमातिमा कउनमेर से नासरत सहर माहीं, रहँइ बाले यीसु काहीं पबित्र आत्मा अउर सामर्थ से अभिसेक किहिन तय, अउर ऊँ भलाई के काम करत, अउर सगलेन काहीं जउन सइतान के सताए रहे हँय, उनहीं नीक करत चारिव कइती घूमत फिरत रहिगें; काहेकि परमातिमा उनखे साथ रहे हँय। 39अउर हम उन सगले कामन के गबाह हएन, जउन यीसु यहूदिया प्रदेस अउर यरूसलेम सहर माहीं किहिन तय, अउर उनहिन काहीं ऊँ पंचे लकड़ी के क्रूस माहीं लटकाइके मारि डारिन। 40पय परमातिमा उनहीं तिसरे दिना जिन्दा कइ दिहिन, अउर उनहीं देखाय घलाय दिहिन। 41पय सगले मनइन काहीं नहीं, बलकिन उन गबाहन काहीं, जिनहीं परमातिमा पहिलेन से चुनि लिहिन तय, अरथात हमहीं पंचन काहीं, जउन उनखे मरेन म से जिन्दा होए के बाद उनखे साथ खाएन-पिएन। 42अउर ऊँ हमहीं हुकुम दिहिन हीं, कि सगले मनइन माहीं प्रचार करी, अउर गबाही देई, कि ईं उँइन आहीं; जिनहीं परमातिमा जिअत अउर मरे मनइन के न्याय करँइ के खातिर ठहराइन हीं। 43सगले परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले उनखे बारे माहीं गबाही दिहिन हीं, कि जे कोऊ उनखे ऊपर बिसुआस करी, ओही उनखे नाम के द्वारा पापन के माफी मिली।”
गैरयहूदी लोगन के ऊपर पबित्र आत्मा के उतरब
44पतरस ईं बातँय कहतय रहे हँय, तबहिनय पबित्र आत्मा बचन के सगले सुनइअन के ऊपर उतरि आबा। 45अउर जेतने खतना किहे बिसुआसी पतरस के साथ आए रहे हँय, ऊँ पंचे सगले जन चउआइगें, कि “गैरयहूदी लोगन के ऊपर घलाय पबित्र आत्मा के दान उड़ेला ग हय।” 46काहेकि ऊँ पंचे उनहीं अनेकव प्रकार के भाँसा बोलत, अउर परमातिमा के बड़ाई करत सुनिन। 47इआ सगला हाल देखिके, पतरस कहिन; “का कोऊ पानी काहीं रोकि सकत हय, कि ईं पंचे बपतिस्मा न पामँय, जउन ईं पंचे हमरे पंचन कि नाईं पबित्र आत्मा पाइन हीं?” 48अउर ऊँ हुकुम दिहिन कि उनहीं यीसु मसीह के नाम से बपतिस्मा दीन जाय, तब ऊँ पंचे पतरस से बिनती किहिन, कि कुछ दिना अपना हमरे पंचन के साथय रही।
11अपने काम के बारे माहीं पतरस के साफ-साफ बताउब
1अउर यीसु के खास चेला लोग, अउर बिसुआसी भाई-बहिनी जउन यहूदिया प्रदेस माहीं रहे हँय सुनिन, कि “गैरयहूदी लोग घलाय परमातिमा के बचन काहीं अपनाय लिहिन हीं।” 2अउर पतरस जब यरूसलेम सहर माहीं आएँ, तब जिनखर खतना होइगा रहा हय, ऊँ पंचे उनसे बाद-बिबाद करँइ लागें। 3कि “जिनखर खतना नहीं भ आय, तूँ उनखे इहाँ जाइके उनखे साथ खाए हया।” 4तब पतरस सुरू से एक तरफ से सगली बातँय उनसे बताइन, 5कि “हम याफा सहर माहीं प्राथना करत रहे हएन, अउर बेसुध होइके एकठे दरसन देखेन, कि एकठे बड़े चद्दरा कि नाईं कउनव चीज चारिव कोने से लटकत अकास से नीचे उतरिके हमरे लघे आई। 6अउर जब हम ओही बड़े ध्यान से देखेन, त ओमाहीं जंगल म रहँइ बाले जानबर अउर रेगँइ बाले जीव-जन्तु अउर अकास के पंछी देखाने। 7अउर इआ बोलव सुनेन, ‘हे पतरस उठा, मारा अउर खा।’ 8तब हम कहेन, ‘नहीं प्रभू, नहीं, काहेकि हम कउनव अपबित्र इआ कि असुद्ध चीज कबहूँ नहीं खायन।’ 9एखे जबाब माहीं अकास से दुसराय बोल सुनान, कि ‘जउन कुछू परमातिमा सुद्ध ठहराइन हीं, ओही तूँ असुद्ध न कहा।’ 10तीन बेर इहइमेर भ; एखे बाद सब कुछ पुनि अकास माहीं खींच लीनगा। 11अउर देखा, हरबिन जहाँ हम रुके रहेन हय, उआ घर माहीं तीनठे मनई, जउन कैसरिया सहर से हमरे लघे पठए गे रहे हँय, आइके ठाढ़ होइगें। 12तब पबित्र आत्मा हमहीं उनखे साथ बिना डेराने जाँइ के खातिर कहिन, अउर ईं छयठे बिसुआसी भाई घलाय हमरे साथ चल दिहिन; अउर हम पंचे उआ मनई के घर माहीं गएन। 13अउर ऊँ बताइन कि, ‘हम एकठे स्वरगदूत काहीं अपने घर माहीं ठाढ़ देखेन, जउन हमसे कहिन, कि याफा सहर माहीं मनई पठइके समौन काहीं जउन पतरस कहाबत हें, बोलबाय ल्या। 14ऊँ तोंहसे अइसन बात बतइहँय, जिनखे द्वारा तूँ, अउर तोंहार सगला घराना मुक्ती पाई।’ 15जब हम बात करब सुरू किहेन, तब पबित्र आत्मा उनखे ऊपर उहयमेर उतरा, जउनमेर से सुरुआत माहीं हमरे पंचन के ऊपर उतरा रहा हय। 16तब हमहीं प्रभू के कही उआ बात सुधि आइगे; जउन ऊँ कहिन तय, कि ‘यूहन्ना त पानी से बपतिस्मा देत रहे हँय, पय तूँ पंचे पबित्र आत्मा से बपतिस्मा पइहा।’ 17इआमेर से अगर परमातिमा उनहूँ पंचन काहीं उहय दान दिहिन हीं, जउन हमहीं पंचन काहीं प्रभू यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे से मिला रहा हय; त परमातिमा काहीं रोंकँइ बाले हम को होइत हएन?” 18इआ सुनिके, ऊँ पंचे चुप्पय होइगें, अउर परमातिमा के बड़ाई कइके कहँइ लागें, अब त परमातिमा, गैरयहूदी लोगन काहीं घलाय अनन्त जीबन पामँइ के खातिर, मन फिरामँइ के दान दिहिन हीं।
अन्ताकिया सहर माहीं खुसी के खबर के आउब
19जउन मनई उआ दुख के मारे जउन स्तिफनुस के कारन परा रहा हय, तितिर-बितिर होइगे रहे हँय, ऊँ पंचे घूमत फिरत फीनीके सहर, अउर साइप्रस टापू अउर ओखे बाद अन्ताकिया सहर माहीं पहुँचे; पय यहूदी लोगन काहीं छोंड़िके अउर कोहू काहीं बचन नहीं सुनाबत रहे आँय। 20पय ऊँ बिसुआसिअन म से कुछ जने, कुप्रुस सहर के अउर कुरेन सहर के रहँइ बाले रहे हँय, जउन अन्ताकिया सहर माहीं आइके यूनानी जाति के मनइन काहीं घलाय, प्रभू यीसु के खुसी के खबर काहीं सुनामँइ लागें। 21अउर प्रभू के सामर्थ उनखे साथ रही हय, अउर खुब जने खुसी के खबर के ऊपर बिसुआस कइके प्रभू कइती मुड़ि आएँ। 22जब उनखर चरचा यरूसलेम सहर के मसीही मन्डली के मनइन काहीं सुनँय काहीं मिली, तब ऊँ पंचे बरनबास काहीं अन्ताकिया सहर माहीं पठइन। 23अउर बरनबास उहाँ पहुँचिके, परमातिमा के किरपा काहीं देखिके आनन्दित भें; अउर सगले बिसुआसी मनइन काहीं उपदेस दिहिन, कि “पूरे मन से प्रभू के ऊपर बिसुआस करा।” 24काहेकि ऊँ नीक मनई रहे हँय; अउर पबित्र आत्मा से भरे रहे हँय, अउर उनखे उपदेस काहीं सुनिके, खुब मनई प्रभू के ऊपर बिसुआस कइके उनखे साथ आइके मिलिगें। 25ओखे बाद बरनबास साऊल काहीं ढूँढ़ँइ के खातिर तरसुस सहर माहीं चलेगें। 26अउर जब उनसे मिलें तब उनहीं अन्ताकिया सहर माहीं लइ आएँ, अउर अइसन भ कि ऊँ पंचे एक बरिस तक मसीही मन्डली के मनइन से मिलत-जुलत, अउर खुब मनइन काहीं उपदेस देत रहिगें, अउर अन्ताकिया सहर माहीं सगलेन से पहिले यीसु के चेला लोग मसीही कहाए।
27उहय समय यरूसलेम सहर से कुछ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले घलाय, अन्ताकिया सहर माहीं आए रहे हँय। 28उनमा से अगबुस नाम के एक जने ठाढ़ होइके, पबित्र आत्मा के प्रेरना से इआ बताइन, कि सगले संसार माहीं बड़ा अकाल परी, अउर उआ अकाल राजा क्लौदियुस के समय माहीं परा। 29तब चेला लोग इआ निरनय किहिन कि, हरेक जने अपने छमता के मुताबिक, यहूदिया प्रदेस माहीं रहँइ बाले बिसुआसी भाई-बहिनिन के सेबा के खातिर कुछ धन पठमँइ। 30अउर ऊँ पंचे इहइमेर किहिन; बरनबास अउर साऊल के हाँथे यहूदिया इलाका के मन्डली के अँगुअन के लघे कुछ धन पठय दिहिन।
12जेल से पतरस के छुटकारा
1उहय समय राजा हेरोदेस, मसीही मन्डली के कुछ मनइन काहीं सताउब सुरू कइ दिहिन। 2ऊँ यूहन्ना के भाई याकूब काहीं तलबार से मरबाय डारिन। 3अउर जब ऊँ देखिन, कि यहूदी जाति के सगले मनई एसे आनन्दित होथें, तब ऊँ पतरस काहीं घलाय पकड़ लिहिन, उआ समय बिना खमीर के रोटी खाँइ बाला तेउहार चलत रहा हय। 4अउर ऊँ पतरस काहीं पकड़िके जेल माहीं बन्द कराय दिहिन, अउर चउकीदारी करँइ के खातिर, चार-चार सिपाहिन के चार परत पहरा लगाय दिहिन, इआ बिचार से कि फसह नाम के तेउहार के बाद, उनहीं मनइन के आँगे हाजिर करब। 5एसे जेल माहीं पतरस के पहरेदारी होत रही हय; पय मसीही मन्डली के सगले मनई लव लगाइके परमातिमा से प्राथना करत रहे हँय।
6अउर जब राजा हेरोदेस पतरस काहीं सगले मनइन के आँगे हाजिर करँइ के तइआरी माहीं रहे हँय, त उहय रात माहीं पतरस दुइठे सँकरिन माहीं बाँधे, दुइठे सिपाहिन के बीच माहीं सोबत रहे हँय, अउर दुअरा माहीं पहरेदार जेल के रखबारी करत रहे हँय। 7त देखा, प्रभू के एकठे दूत जेल माहीं आइके ठाढ़ भें, अउर उआ कोठरिआ माहीं जोति चमकी, अउर ऊँ पतरस के पसुरी माहीं हाँथ मारिके उनहीं जगाइन, अउर कहिन; “उठा, जल्दी करा, अउर उनखे हाँथे से सँकरी खुलिके गिर गईं।” 8तब स्वरगदूत पुनि उनसे कहिन, “तइआर होइजा, अउर आपन पनहीं पहिर ल्या।” अउर पतरस उहयमेर किहिन, तब ऊँ पुनि कहिन; “आपन ऊपर के ओन्हा पहिरिके हमरे पीछे चले आबा।” 9पतरस जेल से निकरिके उनखे पीछे-पीछे चल दिहिन; पय इआ नहीं जानत रहे आँय, कि जउन कुछू स्वरगदूत कइ रहे हँय, उआ सही-सही आय, बलकिन इआ समझत रहे हँय, कि हम दरसन देख रहेन हय। 10तब ऊँ पंचे पहिल अउर दूसर पहरा से निकरिके लोहे के उआ फाटक के लघे पहुँचे, जउन सहर कइती रहा हय; उआ उनखे खातिर अपने आपय खुलिगा, अउर ऊँ पंचे निकरिके एकय गली होइके गें, तब अचानक स्वरगदूत उनहीं छोंड़िके चलेगें। 11तब पतरस के झक्का खुलिगा, अउर सचेत होइके कहँइ लागें; अब हम सच्चाई जान गएन हँय, कि प्रभू आपन दूत पठइके हमहीं, राजा हेरोदेस के हाँथे से छोड़ाय लिहिन हीं, अउर यहूदी लोगन के सगली आसा काहीं टोर दिहिन हीं।
12अउर इआ सोचिके, पतरस उआ यूहन्ना के महतारी मरियम के घर माहीं आएँ, जउन मरकुस कहाबत रहे हँय; उहाँ खुब जने एकट्ठा होइके प्राथना करत रहे हँय। 13जब पतरस केमरा के सँकरी खट खटाइन; तब रूदे नाम के एकठे दासी देखँइ के खातिर आईं। 14अउर पतरस के बोल पहिचानिके, मारे खुसी के केमरा नहीं खोलिन; बलकिन दउड़िके भीतर गईं, अउर सगले जनेन काहीं बताइन, कि पतरस दुअरा माहीं ठाढ़ हें। 15तब ऊँ पंचे उनहीं कहिन, “तूँ पागल होइ गया हय का?”, पय ऊँ बिसुआस के साथ कहिन, कि “उँइन आहीं।” तब ऊँ पंचे कहिन, “उनखर स्वरगदूत होइहँय।” 16पय पतरस सँकरी खट-खटउतय रहिगें, तब ऊँ पंचे केमरा खोलिन, अउर पतरस काहीं देखिके चउआइगें। 17तब पतरस हाँथे से इसारा कइके कहिन, कि “चुप्पय रहा”; अउर भीतर जाइके उनहीं बताइन, कि प्रभू कउनमेर से हमहीं जेल से निकार लाएँ हँय, अउर ऊँ पुनि कहिन, कि याकूब अउर सगले भाई-बहिनिन से इआ बताय दिहा; अउर ओखे बाद उहाँ से निकरिके दुसरे जघा माहीं चलेगें।
18अउर बड़े सकारे सिपाहिन माहीं बड़ी हलचल होंइ लाग, कि पतरस के का भ होई। 19जब राजा हेरोदेस पतरस काहीं ढूँढ़ँइ आएँ, अउर उनहीं नहीं पाइन; तब पहरा देंइ बालेन के जाँच करे के बाद हुकुम दिहिन, कि “उनहीं मारि डारा जाय”; अउर ऊँ यहूदिया प्रदेस काहीं छोंड़िके कैसरिया सहर माहीं जाइके रहँइ लागें।
राजा हेरोदेस के मउत
20अउर ऊँ सूर अउर सैदा प्रदेस के मनइन से खुसी नहीं रहत रहे आँय; एसे ऊँ पंचे एक चित्त होइके, उनखे लघे आएँ अउर बलास्तुस काहीं, जउन राजा के एकठे कर्मचारी रहा हय, ओही मनाइके मेल-मिलाप करँइ चाहिन, काहेकि राजा के प्रदेस से, उनखे प्रदेस के मनइन के पालन-पोसन होत रहा हय। 21अउर राजा के द्वारा ठहराए दिन काहीं राजा हेरोदेस राजा के ओन्हा पहिरिके राजगद्दी माहीं बइठें; अउर उनहीं उपदेस देंइ लागें। 22अउर सगले मनई चिल्लाय उठें, कि “इआ त मनई के नहीं परमातिमा के बचन आय।” 23उहय समय प्रभू के एकठे दूत हरबिन राजा हेरोदेस काहीं बिमार कइ दिहिन, काहेकि ऊँ परमातिमा के बड़ाई नहीं किहिन तय, अउर उनखे देंह माहीं किरबा परिगें, अउर ऊँ मरिगें।
24पय परमातिमा के बचन बढ़त अउर फइलत चला ग। 25जब बरनबास अउर साऊल आपन सेबा पूर कइ चुके, त यूहन्ना काहीं जउन मरकुस कहाबत रहे हँय, साथ माहीं लइके यरूसलेम सहर से लउटें।
13बरनबास अउर साऊल के पठबा जाब
1अन्ताकिया सहर के मसीही मन्डली माहीं, कुछ परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले, अउर कुछ उपदेस देंइ बाले रहे हँय; अरथात बरनबास अउर समौन जउन नीगर कहाबत रहे हँय; अउर लूकियुस कुरेन सहर के रहँइ बाले, अउर चउथाई भाग के राजा हेरोदेस के गोद लीन भाई मनाहेम अउर साऊल। 2जब ऊँ पंचे उपबास कइके प्रभू के अराधना करत रहे हँय, तब पबित्र आत्मा उनसे कहिन; “हमरे खातिर बरनबास अउर साऊल काहीं उआ काम के खातिर अलग करा, जउने खातिर हम उनहीं बोलायन हय।” 3तब ऊँ पंचे उपबास अउर प्राथना कइके, उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके बिदा किहिन।
पवलुस के पहिल प्रचार-यात्रा
4तब ऊँ पंचे पबित्र आत्मा के पठए से, सिलूकिया सहर माहीं गें; अउर उहाँ से जल जिहाज माहीं चढ़िके, साइप्रस टापू काहीं चल दिहिन। 5अउर सलमीस सहर माहीं पहुँचिके, परमातिमा के बचन यहूदी लोगन के सभाघरन माहीं सुनाइन; अउर यूहन्ना उनखर सेबा करँइ बाले रहे हँय। 6अउर उआ सगले टापू माहीं घूमत, पाफुस सहर तक पहुँचिगें, उहाँ उनहीं बार-यीसु नाम के एकठे यहूदी जाति के टोना मारँइ बाला, अउर परमातिमा के झूँठ सँदेस बतामँइ बाला मिला। 7उआ राजपाल सिरगियुस पवलुस के साथ माहीं रहत रहा हय, ऊँ खुब बुद्धिमान मनई रहे हँय, अउर ऊँ बरनबास अउर साऊल काहीं अपने लघे बोलाइके, परमातिमा के बचन सुनँय चाहत रहे हँय। 8पय बार-यीसु जउने के दूसर नाम इलीमास घलाय रहा हय, बरनबास अउर साऊल के बिरोध कइके, राजपाल काहीं बिसुआस करँइ से रोंकँइ चाहिस। 9तब साऊल जिनखर नाम पवलुस घलाय हय, पबित्र आत्मा से भरिके ओखे कइती एकटक निहारिके कहिन, 10“हे सगले कपट अउर सगले चतुराई से भरे सइतान के सन्तान, हरेक सच्चाई के बइरी, का तँय प्रभू के सीध गइलन काहीं टेंढ़ करब न छोंड़िहे? 11पय अब देख, प्रभू के हाँथ तोरे ऊपर आय परा हय; अउर तँय कुछ समय तक आँधर रइहे अउर सुरिज काहीं न देखे पइहे।” तबहिनय ओखे आँखी माहीं धुँधलापन अउर अँधिआर छाय ग, अउर उआ एँकई-ओंकई टटोहँय लाग, जउने कोऊ ओखर हाँथ पकड़िके लइ चलय। 12तब जउन कुछू भ रहा हय, राजपाल ओही देखिके, अउर प्रभू के उपदेस से अचम्भित होइके, प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन।
पिसिदिया प्रदेस के अन्ताकिया सहर माहीं पवलुस
13तब पवलुस अउर उनखर साथी पाफुस सहर से जिहाज काहीं छोरिके, पंफूलिया प्रदेस के पिरगा सहर माहीं आएँ; अउर यूहन्ना उनहीं उहाँ छोंड़िके यरूसलेम सहर माहीं लउटिगें। 14अउर ऊँ पंचे पिरगा सहर से आँगे बढ़िके, पिसिदिया प्रदेस के अन्ताकिया सहर माहीं पहुँचे; अउर पबित्र दिन काहीं यहूदी सभाघर माहीं जाइके बइठिगें। 15अउर मूसा के बिधान अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताबन काहीं पढ़े के बाद, सभा के कुछ अधिकारी उनखे लघे कहबाय पठइन, कि “हे भाइव, अगर सगले मनइन काहीं उपदेस देंइ के खातिर, तोंहरे मन माहीं कउनव बात होय, त बताबा।” 16तब पवलुस ठाढ़ होइके, अउर हाँथ से इसारा कइके कहिन; “हे इजराइलिव, अउर परमातिमा के भय मानँइ बाले मनइव, सुना। 17ईं इजराइली मनइन के परमातिमा हमरे बाप-दादन काहीं चुनि लिहिन, जब ऊँ पंचे मिस्र देस माहीं परदेसी होइके रहत रहे हँय, तब उनखर उन्नति किहिन; अउर आपन बलबन्त हाँथ बढ़ाइके उनहीं उहाँ से निकार लाएँ। 18अउर परमातिमा चालिस बरिस तक सुनसान जघा माहीं, उनखे गलतिन काहीं सहत रहिगें। 19अउर कनान देस माहीं रहँइ बाली सातव जाति के मनइन काहीं नास कइके, उनखर देस करीब साढ़े चार सव बरिस माहीं इनखे अधिकार माहीं कइ दिहिन। 20एखे बाद परमातिमा समूएल नबी तक, उनखे बीच माहीं न्याय करँइ बाले ठहराइन। 21एखे बादव ऊँ पंचे एकठे राजा माँगिन: तब परमातिमा चालिस बरिस के खातिर, बिन्यामीन के कुल म से, एकठे मनई अरथात कीस के लड़िका साऊल काहीं उनखे ऊपर राजा बनाइन। 22एखे बाद परमातिमा साऊल काहीं हटाइके दाऊद काहीं उनखर राजा बनाइन; जिनखे बारे माहीं परमातिमा गबाही दिहिन हीं, कि ‘यिसय के लड़िका दाऊद, हमरे मन के मुताबिक मिलगे हँय, उँइन हमरे सगली इच्छन काहीं पूर करिहँय।’ 23उनहिन के बंस म से परमातिमा अपने वादा के मुताबिक, इजराइल माहीं मुक्ती देंइ बाले के रूप माहीं, यीसु काहीं पठइन। 24जिनखे आमँइ से पहिले यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले इजराइलिअन काहीं, अपने मन काहीं बदलँइ के खातिर बपतिस्मा के प्रचार किहिन। 25अउर जब यूहन्ना आपन काम पूर करँइ बाले रहे हँय, तब ऊँ कहिन, ‘तूँ पंचे हमहीं का समझते हया? हम ऊँ मनई न होहेंन! बलकिन देखा हमरे बाद एक जने आमँइ बाले हें, जिनखे गोड़ेन के पनहीं के डोरव तक हम छोरँइ के काबिल नहिं आहेन।’ 26हे भाई-बहिनिव, तूँ पंचे जउन अब्राहम के सन्तान आह्या; अउर तूँ पंचे जउन परमातिमा से डेराते हया, तोंहरे लघे इआ मुक्ती के सँदेस पठबा ग हय। 27काहेकि यरूसलेम सहर के रहँइ बाले, अउर उनखर मुखिया लोग उनहीं नहीं पहिचानिन, अउर न परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के बातन काहीं समझिन; जउन हरेक पबित्र दिन काहीं पढ़ी जाती हँय, एसे उनहीं दोसी ठहराइके उन बातन काहीं पूर किहिन। 28ऊँ पंचे उनहीं मारि डारँइ के काबिल कउनव दोस उनखे ऊपर नहीं पाइन, तऊ राजपाल पिलातुस से बिनती किहिन, कि ‘उनहीं मारि डारा जाय।’ 29अउर जब ऊँ पंचे उनखे बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखी सगली बातन काहीं पूर किहिन, तब उनहीं क्रूस से नीचे उतारिके कब्र माहीं धरिन। 30पय परमातिमा उनहीं मरेन म से जिआय दिहिन। 31अउर यीसु अपने चेलन काहीं, जउन उनखे साथ गलील प्रदेस से यरूसलेम सहर माहीं आए रहे हँय, खुब दिनन तक देखाई देत रहिगें; अउर ऊँ पंचे अबहिनव गबाही देंइ के खातिर मनइन के आँगे मवजूद हें। 32अउर हम तोंहईं पंचन काहीं उआ करार के बारे माहीं, जउन हमरे पंचन के बाप-दादन से कीन गे रही हय, इआ खुसी के खबर सुनाइत हएन।
33कि परमातिमा यीसु काहीं जिआइके, उहय करार हमरे पंचन के सन्तानन के खातिर किहिन हीं, जइसन दुसरे भजन13:33 भज 2:7 माहीं घलाय लिखा हय, कि
‘तूँ हमार लड़िका आह्या; आजय हम तोंहईं पइदा किहेन हय।’
34अउर उनखे इआ रीत से मरेन म से जिआमँइ के बारे माहीं घलाय, कि ऊँ कबहूँ न सड़िहँय, ऊँ अइसन कहिन हीं; कि
हम दाऊद के ऊपर के पबित्र अउर अटल किरपा तोंहरे ऊपर करब।
35एसे ऊँ एकठे अउर भजन13:35 भज 16:10 माहीं घलाय कहिन हीं; कि
‘तूँ अपने पबित्र जन काहीं सड़ँय न देहा।’
36काहेकि दाऊद त परमातिमा के इच्छा के मुताबिक, अपने समय माहीं सेबा पूर कइके मरिगें; अउर अपने बाप-दादन माहीं जाइ मिलें; अउर सड़ घलाय गें। 37पय जिनहीं परमातिमा जिआइन, ‘ऊँ सड़ँय नहीं पाएँ।’ 38एसे हे भाई-बहिनिव, तूँ पंचे जानिल्या, कि यीसु के द्वारा पापन के माफी के खबर तोंहईं पंचन काहीं सुनाई जात ही। 39अउर जउने बातन से तूँ पंचे मूसा के बिधान के द्वारा, निरदोस नहीं ठहर सकत रहे आह्या, उँइन सगली बातन से, हरेक मनई उनखे ऊपर बिसुआस किहे के कारन निरदोस ठहरत हें। 40एसे चउकस रहा, अइसन न होय, कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताब माहीं, जउन लिखा हय, तोंहरेव पंचन के ऊपर आय परय।
41‘हे बुराई करँइ बाले मनइव, देखा, अउर अचरज माना, अउर मिट जा; काहेकि हम तोंहरे दिनन माहीं एकठे काम करब; अइसन काम, कि अगर कोऊ तोंहसे ओखर चरचा करय, त तूँ पंचे कबहूँ बिसुआस न करिहा’।”
42पवलुस अउर बरनबास जब उहाँ से जात रहे हँय, तब कुछ मनई उनसे बिनती करँइ लागें, कि आमँइ बाले अँगले पबित्र दिन काहीं ईं बातँय पुनि सुनाई जाँय। 43अउर जब सभा खतम होइगे, तब यहूदी लोग अउर यहूदी मत माहीं आए भक्तन म से, खुब जने पवलुस अउर बरनबास के पीछे-पीछे चल दिहिन; अउर ऊँ पंचे उनसे बात कइके समझाइन कि, परमातिमा के किरपा माहीं बने रहा।
गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं पवलुस के प्रचार के सुरुआत
44अँगले पबित्र दिन काहीं, सहर के सगले मनई परमातिमा के बचन सुनँय के खातिर एकट्ठा होइगें। 45पय यहूदी लोग भीड़ काहीं देखिके डाह से भरिगें, अउर पवलुस के बुराई कइके उनखे बातन के बिरोध माहीं बोलँइ लागें। 46तब पवलुस अउर बरनबास निडर होइके कहिन, “जरूरी रहा हय, कि परमातिमा के बचन पहिले तोंहईं पंचन काहीं सुनाबा जात, पय जब तूँ पंचे ओही सुनँय नहीं चहते आह्या, अउर अपने-आप काहीं अनन्त जीबन के काबिल नहीं ठहरउते आह्या, त देखा, हम गैरयहूदी लोगन के लघे जइत हएन। 47काहेकि प्रभू हमहीं इआ हुकुम दिहिन हीं; कि
‘हम तोहईं गैरयहूदी लोगन के खातिर जोति ठहराएन हँय’; जउने तूँ धरती के छोर तक मुक्ती के कारन बना।”
48इआ सुनिके गैरयहूदी लोग आनन्दित भें, अउर परमातिमा के बचन के बड़ाई करँइ लागें, अउर जेतने अनन्त जीबन पामँइ के खातिर ठहराए गे रहे हँय, ऊँ पंचे प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन। 49तब प्रभू के बचन उआ सगले देस माहीं फइलँय लाग। 50पय जउने मेहेरिअन के समाज माहीं आदर रहा हय अउर भक्त रही हँय, उनहीं अउर सहर के नेतन काहीं यहूदी लोग उकसाइन, अउर पवलुस अउर बरनबास के ऊपर बड़ा उपद्दरव कर बाइके, उनहीं अपने सीमा से बहिरे निकार दिहिन। 51तब पवलुस अउर बरनबास, उनखे अँगुअय अपने गोड़ेन के धूधुर झारिके, इकुनियुम सहर माहीं चलेगें। 52अउर चेला लोग आनन्द से अउर पबित्र आत्मा से भरपूर होत रहिगें।
14इकुनियुम सहर माहीं पवलुस अउर बरनबास
1इकुनियुम सहर माहीं अइसन भ, कि पवलुस अउर बरनबास यहूदी लोगन के सभाघर माहीं एक साथ गें, अउर अइसन बातँय किहिन, कि यहूदी लोगन अउर यूनानी जाति के मनइन म से खुब जने बिसुआस किहिन। 2पय बिसुआस न करँइ बाले कुछ यहूदी लोग, गैरयहूदी लोगन काहीं बिसुआसी भाइन के बिरोध माहीं उकसाइन, अउर उनखे बीच माहीं बिरोध कराय दिहिन। 3अउर पवलुस अउर बरनबास खुब दिनन तक उहाँ रहें, अउर प्रभू के बारे माहीं बड़े साहस के साथ बात करत रहे हँय, अउर उहाँ प्रभू उनखे हाँथन से चमत्कार, अउर अचरज के काम कर बाइके, अपने किरपा के बचन के गबाही देत रहे हँय। 4पय सहर के मनइन माहीं फूट परिगे रही हय; एसे कुछ मनई यहूदी लोगन कइती, अउर कुछ यीसु के खास चेलन कइती होइगें। 5पय जब गैरयहूदी अउर यहूदी लोग उनखर अनादर कइके, उनहीं पथरा मारँइ के खातिर अपने मुखिअन समेत उनखे ऊपर दउड़ि परें। 6तब ऊँ पंचे इआ बात काहीं जानिगें, अउर लुकाउनिया प्रदेस के लुस्त्रा अउर दिरबे सहरन माहीं, अउर आस-पास के प्रदेसन माहीं भागिगें। 7अउर उहाँ खुसी के खबर सुनामँइ लागें।
लुस्त्रा अउर दिरबे सहरन माहीं पवलुस अउर बरनबास
8लुस्त्रा सहर माहीं एकठे मनई बइठ रहा हय, जउन अपने गोड़ेन से अपंग रहा हय, उआ जन्मय से लाँगड़ रहा हय, अउर कबहूँ गोड़ेन से नहीं चला रहा आय। 9उआ पवलुस काहीं बात करत सुनत रहा हय, अउर पवलुस ओही बड़े ध्यान से देखत रहे हँय, कि ओखे मन माहीं नीक होइ जाँइ के बिसुआस हय। 10अउर ऊँ चन्डे से कहिन, कि “तूँ अपने गोड़ के बले सऊँ ठाढ़ होइजा।” तबहिनय उआ कूदिके चलँय-फिरँय लाग। 11जेतने मनई उहाँ रहे हँय, पवलुस के इआ काम काहीं देखिके लुकाउनिया भाँसा माहीं चन्डे से कहिन; “देउता मनइन के रूप माहीं हमरे पंचन के लघे उतरि आए हँय।” 12अउर ऊँ पंचे बरनबास काहीं ज्यूस, अउर पवलुस काहीं हिरमेस कहँइ लागें, काहेकि पवलुस बात करँइ माहीं मुख्ख रहे हँय। 13अउर ज्यूस के उआ मन्दिर के पुजारी, जउन उनखे सहर के सामने रहा हय, बरधा अउर फूलन के हार फाटक के लघे लइआइके, मनइन के साथ बलिदान करँइ चाहत रहा हय। 14पय जब बरनबास अउर यीसु के खास चेला पवलुस सुनिन, त गुस्साइके आपन ओन्हा फारिन, अउर भीड़ के मनइन के बीच माहीं गें, अउर गोहराइके कहँइ लागें; 15“हे मनइव तूँ पंचे इआ का करते हया? हमहूँ पंचे त तोंहरिन कि नाईं दुख-सुख भोगी मनई आहेन, अउर तोहईं खुसी के खबर सुनाइत हएन, कि तूँ पंचे ईं बेकार के चीजन से अलग होइके, जिन्दा परमातिमा के ऊपर बिसुआस करा, जउन स्वरग अउर धरती अउर समुंद्र अउर जउन कुछू उनमा हय बनाइन हीं। 16अउर ऊँ बीते समयन माहीं, सगले जाति के मनइन काहीं अपने-अपने गइल माहीं चलँइ दिहिन। 17तऊ ऊँ अपने-आप काहीं बिना गबाह नहीं छोंड़िन, काहेकि ऊँ तोंहरे साथ भलाई करत रहिगें, उँइन अकास से पानी बरसाबत हें, अउर रित के मुताबिक फसल देत हें, उँइन तोंहईं खाँइ काहीं देत हें, अउर तोंहरे पंचन के मन काहीं आनन्द से भर देत हें।” 18एतना कहे के बादव, ऊँ पंचे बड़े मुसकिल से उनहीं पंचन काहीं रोंकिन, कि उनखे खातिर बली न चढ़ामँय।
19पय कुछ यहूदी लोग, अन्ताकिया सहर अउर इकुनियुम सहर से आइके, खुब मनइन काहीं अपने पच्छ माहीं कइ लिहिन, अउर पवलुस के ऊपर पथरहाव किहिन, अउर उनहीं मरा समझिके सहर से बहिरे खसेलत लइगें। 20पय जब चेला उनखे चारिव कइती ठाढ़ होइगें, तब पवलुस उठिके सहर माहीं चलेगें, अउर दुसरे दिना बरनबास के साथ दिरबे सहर माहीं चलेगें।
सीरिया प्रदेस के अन्ताकिया सहर माहीं लउटब
21अउर ऊँ पंचे उआ सहर के मनइन काहीं बचन सुनाइके, अउर खुब चेला बनाइके, लुस्त्रा सहर अउर इकुनियुम सहर अउर अन्ताकिया सहर माहीं लउटि आएँ। 22अउर चेलन के मन काहीं स्थिर करत रहिगें, अउर उपदेस देत रहे हँय, कि हमहीं पंचन काहीं खुब कस्ट सहिके परमातिमा के राज माहीं प्रबेस करँइ परी। 23अउर ऊँ पंचे हरेक मसीही मन्डली माहीं उनखे खातिर अँगुआ चुनिन, अउर उपबास समेत प्राथना कइके, उनहीं प्रभू काहीं सउँपि दिहिन, जिनखे ऊपर ऊँ पंचे बिसुआस किहिन रहा हय।
24अउर ओखे बाद ऊँ पंचे पिसिदिया प्रदेस से होत, पंफूलिया प्रदेस माहीं पहुँचिगें; 25अउर पिरगा सहर माहीं बचन सुनाइके, अत्तलिया सहर माहीं आइगें। 26अउर उहाँ से जल जिहाज से अन्ताकिया सहर माहीं आइगें, जहाँ से ऊँ पंचे उआ काम के खातिर परमातिमा के किरपा माहीं सँउपे गे रहे हँय, जउने काहीं ऊँ पंचे पूर किहिन रहा हय। 27उहाँ पहुँचिके ऊँ पंचे मसीही मन्डली के मनइन काहीं एकट्ठा किहिन, अउर बताइन, कि परमातिमा हमरे साथ होइके कइसन बड़े-बड़े काम किहिन हीं, अउर गैरयहूदी लोगन के खातिर बिसुआस करँइ के दुअरा खोल दिहिन हीं। 28अउर ऊँ पंचे चेलन के साथ खुब दिना तक रहें।
15यरूसलेम सहर माहीं एकठे सभा
1ओखे बाद कुछ मनई यहूदिया प्रदेस से आइके, बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं सिखामँइ लागें, कि “अगर मूसा के नेम के मुताबिक तोंहार पंचन के खतना नहीं भ आय, त तूँ पंचे मुक्ती नहीं पाय सकते आह्या।” 2तब पवलुस अउर बरनबास के उनसे खुब बाद-बिबाद अउर झगड़ा भ, तब सभा माहीं इआ निस्चित कीन ग, कि पवलुस अउर बरनबास अउर हमरे पंचन म से कुछ जने, इआ बात के बारे माहीं यरूसलेम सहर माहीं, यीसु के खास चेलन अउर मुखिअन के लघे जाँय। 3एसे मसीही मन्डली के कुछ मनई उनहीं कुछ दूरी तक पहुँचाइन; अउर ऊँ पंचे फीनीके सहर अउर सामरिया प्रदेस से होत, गैरयहूदी लोगन काहीं मन बदलँइ के खातिर खुसी के खबर सुनाबत गें, अउर सगले भाइन काहीं खुब आनन्दित किहिन। 4जब ऊँ पंचे यरूसलेम सहर माहीं पहुँचे, तब मसीही मन्डली के मनई, अउर यीसु के खास चेला लोग, अउर मुखिया लोग, उनसे आनन्द के साथ मिलें, अउर ऊँ पंचे बताइन, कि “परमातिमा उनखे साथ माहीं रहिके कइसन-कइसन अचरज के काम किहिन रहा हय।” 5पय फरीसी लोगन के दल म से जे कोऊ बिसुआस किहिन तय, उनमा से कुछ जने ठाढ़ भें, अउर कहिन, “उनहीं खतना करामँय, अउर मूसा के बिधान काहीं मानँइ के हुकुम देंइ चाही।”
6तब यीसु के खास चेला लोग, अउर मुखिया इआ बात के बारे माहीं बिचार करँइ के खातिर एकट्ठा भें। 7तब पतरस खुब बाद-बिबाद होए के बाद ठाढ़ भें, अउर उनसे कहिन, “हे बिसुआसी भाइव, तूँ पंचे त जनतेन हया, कि खुब दिना होइगें परमातिमा तोंहरेन म से हमहीं चुनिन हीं, कि हमरे मुँहे के द्वारा गैरयहूदी लोग, खुसी के खबर सुनिके बिसुआस करँय। 8अउर मन काहीं जाँचय-परखँय बाले परमातिमा, उनहूँ काहीं घलाय हमरिन कि नाईं पबित्र आत्मा दइके उनखर गबाही दिहिन हीं। 9अउर बिसुआस के द्वारा उनखे मन काहीं सुद्ध कइके, हमरे पंचन माहीं अउर उनमा कुछू भेद नहीं रक्खिन। 10त अब तूँ पंचे काहे परमातिमा के परिच्छा लेते हया, कि चेलन के मूँड़े माहीं अइसन बोझा लदते हया? जउने बोझा काहीं न हमार पंचन के बाप दादय उठाए पाइन तय, अउर न हमहिन पंचे उठाय सकित आहेन? 11हाँ, हमार पंचन के इआ बिसुआस हय, कि जउन रीत से प्रभू यीसु के किरपा से हम पंचे मुक्ती पाएन हय; उहयमेर से ऊँ पंचे घलाय मुक्ती पइहँय।”
12तब सगले सभा के मनई चुप्पय होइके, बरनबास अउर पवलुस के बातन काहीं सुनँय लागें, कि परमातिमा उनखे द्वारा गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं, कइसन-कइसन चमत्कार अउर अचरज के काम देखाइन हीं। 13जब ऊँ पंचे चुप्पय होइगें, तब याकूब कहँइ लागें, कि “हे भाइव, हमरे बात काहीं सुना। 14समौन बताइन कि, परमातिमा पहिलय पहिल गैरयहूदी लोगन के ऊपर कउनमेर से किरपा किहिन हीं, कि उनमा से अपने नाम के खातिर सगलेन काहीं एक बनाय लेंय। 15अउर एसे परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के बातँय घलाय मिलती हईं, जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय।
16‘एखे बाद हम पुनि आइके राजा दाऊद के उआ घर काहीं जउन गिरिगा हय, ओही बनाउब, अउर उनखे खन्डहरन काहीं पुनि बनाउब, अउर ओही ठाढ़ करब।
17एसे कि बचे मनई, अरथात सगले गैरयहूदी लोग जउन अब हमरे नाम के कहाबत हें, प्रभू काहीं ढूँढ़ँय।
18इआ बात काहीं उँइन प्रभू कहत हें जउन संसार15:18 आमो 9:11-12 के उत्पन्न होतय से ईं बातन के खबर देत आए हँय।
19एसे हमार बिचार इआ हय, कि गैरयहूदी लोगन म से जउन मनई परमातिमा के ऊपर बिसुआस करत हें, हम पंचे उनहीं दुख न देई। 20बलकिन उनहीं लिखिके पठई, कि ऊँ पंचे मूरतिन माहीं चढ़ाबा खाना न लेंय, अउर ब्यभिचार से बचँय, अउर नेटई काटिके मारे गे पसुअन के माँस अउर उनखे खून काहीं न खाँय। 21काहेकि पुरान समय से सहरन-सहरन माहीं मूसा के बिधान के प्रचार करँइ बाले होत चले आएँ हँय, अउर मूसा के उआ बिधान हरेक पबित्र दिन काहीं यहूदी सभाघर माहीं पढ़ा जात हय।
गैरयहूदी बिसुआसी लोगन काहीं चिट्ठी
22तब सगले मसीही मन्डली के मनइन, अउर यीसु के खास चेलन, अउर धारमिक अँगुअन काहीं इआ नीक लाग, कि अपने बीच म से कुछ मनइन काहीं चुनिके, उनहीं बरनबास अउर पवलुस के साथ अन्ताकिया सहर माहीं पठमँइ, एसे ऊँ पंचे यहूदा काहीं जउन बरसब्बा कहाबत रहे हँय, अउर सीलास काहीं जउन बिसुआसी भाइन माहीं मुखिया रहे हँय चुनिन। 23अउर ऊँ पंचे इआ चिट्ठी लिखिके उनखे हाँथे पठइन, कि “अन्ताकिया अउर सीरिया अउर किलिकिया के रहँइ बाले गैरयहूदी भाइन काहीं, यीसु के खास चेलन अउर धारमिक अँगुअन के नबस्कार! 24हम पंचे सुनेन हय, कि हमरेन बीच म से कुछ जने उहाँ जाइके, तोंहईं पंचन काहीं अपने बातन से घबराय दिहिन हीं; अउर तोंहरे मनन काहीं दुखी कइ दिहिन हीं, पय हम पंचे उनहीं इआ हुकुम नहीं दिहेन तय। 25एसे हम पंचे एक मन होइके इआ सोच-बिचार किहेन, कि चुने मनइन काहीं अपने पियार भाई बरनबास अउर पवलुस के साथ तोंहरे पंचन के लघे पठई। 26ईं पंचे अइसन मनई आहीं, जउन हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के नाम के खातिर, अपने प्रान के बाजी लगाय दिहिन रहा हय। 27अउर हम पंचे यहूदा अउर सीलास काहीं एहिन से पठयन हँय, जउने ऊँ अपने मुँहे से घलाय ईं सगली बातन काहीं बतामँय। 28अउर पबित्र आत्मा काहीं अउर हमहीं पंचन काहीं इहय जान परा, कि ईं जरूरी बातन काहीं छोंड़; तोंहरे ऊपर अउर कुछू बोझ न डारी; 29कि तूँ पंचे मूरतिन माहीं चढ़ाए खाना से, अउर नेटई काटिके मारे गे पसुअन के माँस काहीं खाँय से, अउर ब्यभिचार से बचे रहा, त तोंहार पंचन के भला होई”। अउर तूँ पंचे नीके कुसल रहा।
30ओखे बाद ऊँ पंचे उनसे बिदा लइके अन्ताकिया सहर माहीं पहुँचे, अउर एकठे सभा लगबाइके उनहीं उआ चिट्ठी दइ दिहिन। 31अउर ऊँ पंचे उआ चिट्ठी के बात काहीं पढ़िके खुब खुसी भें। 32अउर यहूदा अउर सीलास जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले रहे हँय, अउर खुब बातन से बिसुआसी भाइन काहीं उपदेस दइके, उनखे बिसुआस काहीं मजबूत किहिन। 33ऊँ पंचे कुछ दिना रहे के बाद, उहाँ के भाई-बहिनिन से सान्ति के साथ बिदा लिहिन, कि अपने पठमँइ बालेन के लघे जाँय। 34(पय सीलास काहीं उहाँ रहब नीक लाग।) 35अउर पवलुस अउर बरनबास अन्ताकिया सहर माहीं रहिगें। अउर खुब मनइन काहीं प्रभू के बचन के उपदेस देत, अउर खुसी के खबर सुनाबत रहिगें।
पवलुस के दूसर प्रचार-यात्रा माहीं पवलुस अउर बरनबास माहीं मतभेद
36कुछ दिना बाद पवलुस, बरनबास से कहिन; कि “जउने-जउने सहरन माहीं, हम पंचे प्रभू के बचन सुनायन रहा हय, आबा, पुनि उन सहरन माहीं चलिके, अपने बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं देखी, कि ऊँ पंचे कइसन हें।” 37तब बरनबास यूहन्ना काहीं जउन मरकुस कहाबत रहे हँय, अपने साथ लइ जाँइ के बिचार किहिन। 38(पय पवलुस मरकुस15:38 खा.चे.काम 13:13 काहीं जउन पंफूलिया प्रदेस माहीं उनसे अलग होइगें तय, अउर काम माहीं उनखे साथ नहीं गें तय, अपने साथ लइ जाब उचित नहीं समझिन।) 39एसे उन दोनव जनेन के बीच माहीं अइसन बिरोध पइदा होइगा, कि ऊँ पंचे एक दुसरे से अलग होइगें। अउर बरनबास मरकुस काहीं लइके जल जिहाज से साइप्रस टापू माहीं चलेगें। 40पय पवलुस सीलास काहीं चुनि लिहिन, अउर बिसुआसी भाई लोग उनहीं परमातिमा के किरपा माहीं सउँपि दिहिन, अउर ऊँ पंचे उहाँ से चलेगें। 41अउर मसीही मन्डलिन काहीं बिसुआस माहीं मजबूत करत, सीरिया प्रदेस अउर किलिकिया प्रदेस से होत आँगे निकरिगें।
16तीमुथियुस काहीं पवलुस साथ म लिहिन
1ओखे बाद पवलुस दिरबे अउर लुस्त्रा सहरन माहीं घलाय गें, अउर उहाँ तीमुथियुस नाम के एकठे चेला रहे हँय, जिनखर महतारी यहूदी जाति के बिसुआसी रही हँय, पय उनखर बाप यूनानी जाति के रहे हँय। 2ऊँ लुस्त्रा सहर अउर इकुनियुम सहर के रहँइ बाले, बिसुआसी भाई-बहिनिन माहीं सम्मानित मनई रहे हँय। 3अउर पवलुस के इच्छा रही हय, कि ऊँ हमरे साथय चलय; पय जउन यहूदी लोग ऊँ जघन माहीं रहत रहे हँय, उनखे कारन पवलुस उनहीं लइ जाइके उनखर खतना किहिन; काहेकि ऊँ पंचे सगले जन इआ जानत रहे हँय, कि उनखर बाप यूनानी जाति के आहीं। 4अउर सहरन से यात्रा करत समय उहाँ के मनइन काहीं ऊँ पंचे उन बिधिअन काहीं, जउन यरूसलेम सहर के यीसु के खास चेला लोग, अउर धारमिक अँगुआ लोग ठहराइन रहा हय, उनहीं मानँइ के खातिर बताबत जात रहे हँय। 5इआमेर से मसीही मन्डलिन के मनई बिसुआस माहीं मजबूत होत गें, अउर मसीही मन्डली गिनती माहीं हरेक दिन बढ़त गईं।
त्रोआस सहर माहीं पवलुस के दरसन देखब
6अउर ऊँ पंचे फ्रूगिया अउर गलातिया प्रदेसन से होइके निकरें, अउर पबित्र आत्मा उनहीं आसिया प्रदेस माहीं बचन सुनामँइ से बरजिन। 7अउर ऊँ पंचे मूसिया प्रदेस के लघे पहुँचिके, बिथुनिया प्रदेस माहीं जाँइ चाहत रहे हँय; पय यीसु के आत्मा उनहीं उहाँ नहीं जाँइ दिहिस। 8एसे ऊँ पंचे मूसिया प्रदेस से होइके त्रोआस सहर माहीं आइगें। 9अउर पवलुस रात माहीं एकठे दरसन देखिन, कि मकिदुनिया प्रदेस के एकठे मनई ठाढ़ हय, अउर उनसे बिनती कइके कहत हय, कि, “दुसरे पार उतरिके मकिदुनिया प्रदेस माहीं आइके हमार पंचन के मदत करी।” 10इआ दरसन देखे के बाद हम पंचे हरबिन मकिदुनिया प्रदेस जाँइ चाहत रहेन हय, इआ जानिके कि, परमातिमा हमहीं पंचन काहीं, उनहीं खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर बोलाइन हीं।
फिलिप्पी सहर माहीं लुदिया के बिसुआस
11एसे त्रोआस सहर से जल जिहाज छोरिके, हम पंचे सीधे सुमात्राके टापू अउर दुसरे दिना नियापुलिस सहर माहीं पहुँचेन। 12अउर उहाँ से हम पंचे फिलिप्पी सहर माहीं पहुँचेन, जउन मकिदुनिया प्रदेस के मुख्ख सहर आय, अउर उहाँ रोमी लोग बसे हँय; अउर हम पंचे उआ सहर माहीं कुछ दिना तक रहेन। 13अउर पबित्र दिन काहीं हम पंचे सहर के फाटक के बहिरे, नदी के किनारे इआ समझिके गएन, कि उहाँ प्राथना करँइ के जघा होई; अउर उहाँ बइठिके उन मेहेरिअन से जउन उहाँ एकट्ठा भई रही हँय, बातँय करँइ लागेन। 14तब लुदिया नाम के थुआतीरा सहर के बैगनी ओन्हा बेचँय बाली एकठे भक्त मेहेरिआ, सुनत रही हय, तब प्रभू ओखे मन काहीं खोलिन, जउने उआ पवलुस के बातन काहीं बड़े ध्यान से सुनय। 15जब उआ अपने सगले परिबार समेत बपतिस्मा लिहिस, तब हमसे बिनती किहिस, कि “अगर अपना हमहीं प्रभू के ऊपर बिसुआस करँइ बाली मानित हएन, त चलिके हमरे घर माहीं रही;” अउर उआ हमहीं मनाइके अपने घर लइगे।
पवलुस अउर सीलास जेल माहीं
16पुनि अइसन भ, कि जब हम पंचे प्राथना करँइ बाली जघा माहीं जात रहेन हय, तब हमहीं पंचन काहीं एकठे दासी मिली, जउने माहीं भबिस्य के बात बतामँइ बाली आत्मा रही हय; अउर भबिस्य के बातँय बतामँइ के कारन, अपने मालिकन के खातिर खुब धन कमाय लाबत रही हय। 17उआ पवलुस के अउर हमरे पीछे आइके चिल्लाँय लाग, “ईं मनई परमप्रधान परमातिमा के दास आहीं, जउन हमहीं पंचन काहीं मुक्ती के गइल के कथा सुनाबत हें।” 18उआ खुब दिना तक इहइमेर करत रहिगे, तब पवलुस दुखी भें, अउर पीछे मुड़िके उआ आत्मा से कहिन, “हम तोही यीसु मसीह के नाम से इआ हुकुम देइत हएन, कि ओखे भीतर से निकरि जा” अउर उआ आत्मा उहय समय ओखे भीतर से निकरिगे।
19जब ओखर मालिक देखिन, कि “हमरे पंचन के कमाई के साधन खतम होइगा हय”, त पवलुस अउर सीलास काहीं पकड़िके चउराहा माहीं प्रधानन के लघे लइगें। 20अउर उनहीं सजा देंइ बाले हाकिमन के लघे लइ जाइके कहिन; “ईं पंचे जउन यहूदी जाति के आहीं, सहर माहीं बड़ी गड़बड़ी फइलाय रहे हँय। 21अउर अइसन रीति-रिबाजन काहीं बताबत हें, जिनहीं सोइकार करब अउर मानब हमहीं पंचन काहीं, जउन रोमी लोग आहेन ठीक नहिं आय।” 22तब भीड़ के मनई उनखे बिरोध माहीं एकट्ठा होइके चढ़ि आएँ, अउर हाकिम लोग उनखर ओन्हा फारिके उतार डारिन, अउर उनहीं बेंत मारँइ के हुकुम दिहिन। 23अउर खुब बेंत मरबाइके उनहीं जेल माहीं डरबाय दिहिन; अउर दरोगा काहीं हुकुम दिहिन, कि “उनखर रखबारी करँय।” 24अउर उआ दरोगा अइसन हुकुम पाइके उनहीं भीतर बाली कोठरिआ माहीं रक्खिन, अउर उनखे गोड़न काहीं कठबा माहीं कस दिहिन।
पवलुस अउर सीलास के जेल से छूटब
25आधी रात के करीब पवलुस अउर सीलास, प्राथना करत परमातिमा के भजन गाबत रहे हँय, अउर दूसर कइदी उनखर भजन सुनत रहे हँय। 26कि एतनेन माहीं अचानक बड़ा भुँइडोल भ, इहाँ तक कि जेल के नेव घलाय डोलि गईं, अउर हरबिन जेल के सगले दुअरा खुलिगें; अउर सगले कइदिन के हँथकड़ी खुल गईं। 27अउर दरोगा जाग उठें, अउर जेल के दुअरा खुला देखिके इआ जानिस, कि सगले कइदी भागिगें हँय, एसे उआ तलबार निकारिके अपने-आप काहीं मारि डारँइ चाहिन। 28तबहिनय पवलुस खुब चन्डे गोहराइके कहिन; “अपने-आप काहीं नुकसान न पहुँचाबा, काहेकि हम पंचे सगले जन इहँय हएन।” 29तब दरोगा दिया मगबाइके हरबिन भीतर गें, अउर काँपत-काँपत पवलुस अउर सीलास के गोड़न गिरें। 30अउर उनहीं बहिरे लइआइके कहिन, “हे सज्जन मनइव, मुक्ती पामँइ के खातिर हम का करी?” 31तब ऊँ पंचे उनसे कहिन, “प्रभू यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करा, त तूँ अउर तोंहार सगला परिबार मुक्ती पाई।” 32अउर ऊँ पंचे दरोगा, अउर उनखे सगले घर के मनइन काहीं प्रभू के बचन सुनाइन। 33अउर रातयके उहय समय दरोगा लइ जाइके उनखे घावन काहीं धोइन, अउर अपने सगले परिबार समेत हरबिन बपतिस्मा लिहिन। 34अउर ऊँ पवलुस अउर सीलास काहीं अपने घर लइ जाइके, उनहीं खाना खबाइन, अउर अपने सगले परिबार समेत परमातिमा के ऊपर बिसुआस कइके बड़ा आनन्द मनाइन।
35जब सकार भ, तब हाकिम लोग सिपाहिन से इआ कहबाय पठइन, कि ऊँ मनइन काहीं छोंड़ि द्या। 36तब दरोगा इआ सँदेस पवलुस काहीं बताइन, कि “हाकिम अपना पंचन काहीं छोंड़ि देंइ के हुकुम दिहिन हीं, एसे अब अपना पंचे इहाँ से निकरिके सान्ति के साथ चले जई।” 37पय पवलुस उनसे कहिन, “ऊँ पंचे हमहीं जउन रोमी नागरिक आहेन, दोसी ठहराए बिना, मनइन के आँगे मारिन अउर जेल माहीं डरबाय दिहिन, अउर अब चुप्पय से हमहीं भगाय देंइ चाहत हें? अइसन न होई, ऊँ पंचे खुदय आइके हमहीं पंचन काहीं बहिरे लइ जाँय।” 38तब सिपाही जाइके इआ बात हाकिमन काहीं बताइन, अउर ऊँ पंचे इआ सुनिके कि पवलुस अउर सीलास रोमी नागरिक आहीं, डेराइगें। 39अउर आइके उनसे माफी माँगिन, अउर बहिरे लइ जाइके बिनती करत रहिगें, कि अपना पंचे सहर से चले जई। 40तब पवलुस अउर सीलास जेल से निकरिके लुदिया के घर चलेगें, अउर भाई-बहिनिन से मिलिके उनहीं सान्ति दिहिन, अउर उहाँ से चलेगें।
17थिस्सलुनीके सहर माहीं पवलुस अउर सीलास
1ओखे बाद पवलुस अउर सीलास, अम्फिपुलिस सहर अउर अपुल्लोनिया सहर होइके थिस्सलुनीके सहर माहीं आएँ, जहाँ यहूदी लोगन के सभाघर रहा हय। 2तब पवलुस अपने रीति के मुताबिक उनखे लघे गें, अउर तीन पबित्र दिनन काहीं, पबित्र सास्त्र से उनखे साथ बातचीत किहिन। 3अउर बचनन के मतलब, पबित्र सास्त्र से ढूँढ़-ढूँढ़िके समझाबत रहे हँय, कि “मसीह काहीं दुख उठाउब, अउर मरेन म से जि उठब जरूरी रहा हय; अउर ईंन यीसु जिनखर हम तोंहईं पंचन काहीं कथा सुनाइत हएन, मसीह आहीं।” 4उनमा से कुछ जने, अउर भक्त यूनानी जाति म से खुब जने अउर जउने मेहेरिअन के समाज माहीं आदर रहा हय, ऊँ पंचे उनखे बात के बिसुआस किहिन, अउर पवलुस अउर सीलास के साथ मिल गईं। 5पय यहूदी लोग इरसा से भरिके, बजारन माहीं रहँइ बाले गुंडन काहीं अपने साथ एकट्ठा कइके, अउर भीड़ लगाइके सहर माहीं हुल्लड़ मचामँइ लागें, अउर यासोन नाम के मनई के घर माहीं चढ़ाई कइके, पवलुस अउर सीलास काहीं भीड़ के मनइन के लघे लइ आमँइ चाहत रहे हँय। 6अउर ऊँ पंचे पवलुस अउर सीलास काहीं उहाँ न पाइके, “इआ चिल्लात यासोन अउर कुछ बिसुआसी भाइन काहीं सहर के हाकिमन के लघे खसेलके लइ आएँ, अउर कहँइ लागें, कि ईं पंचे सगली दुनिया माहीं उथल-पुथल मचामँइ बाले इहँव आइगे हँय। 7अउर यासोन उनहीं अपने घर माहीं ठहराए रहा हय, अउर ‘ईं पंचे सगले जन इआ कहत हें, कि यीसु राजा आहीं’, अउर राजा कैसर के हुकुमन के बिरोध करत हें।” 8ऊँ पंचे मनइन काहीं अउर सहर के हाकिमन काहीं इआ बात सुनाइके घबराय दिहिन। 9अउर इआमेर से ऊँ पंचे यासोन अउर बाँकी सगले मनइन काहीं, जमानत के मुचलका लइके छोंड़ दिहिन।
बिरिया सहर माहीं पवलुस अउर सीलास
10बिसुआसी भाई लोग तुरन्तय रातय रात पवलुस अउर सीलास काहीं बिरिया सहर माहीं पठय दिहिन, अउर ऊँ पंचे उहाँ पहुँचिके यहूदी लोगन के सभाघर माहीं गें। 11पय उहाँ के सगले मनई थिस्सलुनीके सहर के मनइन से निकहे रहे हँय, अउर ऊँ पंचे पूरे मन से पवलुस के बताए बचन काहीं सुनिके अपनाइन, अउर हरेक दिन पबित्र सास्त्र माहीं ढूँढ़त रहे हँय, कि ईं बातँय इहइमेर लिखी हईं कि नहीं। 12इआमेर से उनमा से खुब जने, अउर जउने यूनानी मेहेरिअन के समाज माहीं आदर रहा हय, ऊँ पंचे, अउर मंसेरुअन म से खुब जने बिसुआस किहिन। 13पय जब थिस्सलुनीके सहर के यहूदी लोग जानिगें, कि पवलुस बिरिया सहर माहीं घलाय परमातिमा के बचन सुनाबत हें, त उहाँ घलाय आइके मनइन काहीं उकसाइके हुल्लड़ मचामँइ लागें। 14तब उहाँ के भाई-बहिनी पवलुस काहीं, उहाँ से बिदा कइ दिहिन, कि समुद्र के किनारे-किनारे चले जाँय; पय सीलास अउर तीमुथियुस उहँय रहिगें। 15पवलुस काहीं पहुँचामँइ बाले उनहीं एथेंस सहर तक पहुँचाइन, अउर सीलास अउर तीमुथियुस के खातिर इआ हुकुम दइके चलेगें, कि उनखे लघे खुब हरबी आमँइ।
एथेंस सहर माहीं पवलुस
16जब पवलुस एथेंस सहर माहीं उनखे आमँइ के इन्तजार कए रहे हँय, त सहर काहीं मूरतिन से भरा देखिके, उनखर जिव जरा जात रहा हय। 17एसे पवलुस उहाँ के यहूदी सभाघर माहीं जाइके, यहूदी लोगन अउर भक्तन से अउर चउराहा माहीं जेतने मनई मिलत रहे हँय, उनसे हरेक दिन चरचा करत रहे हँय। 18तब इपिकूरी अउर इसतोईकी पंडितन म से कुछ जने, पवलुस से “पबित्र सास्त्र के कुछ बचनन से पूँछ-ताँछ करँइ लागें”, अउर कुछ मनई कहँइ लागें, कि “इआ बकबास करँइ बाला मनई का कहँइ चाहत हय?” पय अउर दूसर मनई कहँइ लागें, “ऊँ दुसरे देउतन के प्रचार करँइ बाले लागत हें”, काहेकि ऊँ यीसु के अउर उनखे मरेन म से जि उठँय के खुसी के खबर के प्रचार करत रहे हँय। 19तब ऊँ पंचे पवलुस काहीं पकड़िके अरियुपगुस के सभा माहीं अपने साथ लइगें, अउर पूँछिन, “हमहीं पंचन काहीं बताबा, कि जउन इआ नबा मत मनइन काहीं सुनउते हया, उआ का आय? 20काहेकि तूँ अनोखी बातन काहीं हमहीं पंचन काहीं सुनउते हया, एसे हम पंचे जानँइ चाहित हएन, कि इनखर का मतलब हय?” 21(एसे कि सगले एथेंस सहर के अउर परदेसी जउन उहाँ रहत रहे हँय, नई-नई बात कहँय अउर सुनँय के अलाबा, अउर कउनव काम माहीं समय नहीं बिताबत रहे आँय।)
अरियुपगुस के सभा माहीं पवलुस के भाँसन
22तब पवलुस अरियुपगुस के सभा के बीच माहीं ठाढ़ होइके कहिन; “हे एथेंस सहर के रहँइ बाले मनइव, हम देखित हएन, कि तूँ पंचे हरेक बात माहीं देउतन काहीं खुब मानँइ बाले हया। 23काहेकि जब हम सहर माहीं घूमत रहेन हय, उआ समय तोंहरे पूजँय बाली चीजन काहीं देखत रहेन हँय, त एकठे अइसन बेदी घलाय पाएन, जउने माहीं लिखा रहा हय, कि ‘अनजान परमातिमा के खातिर बेदी।’ एसे जिनहीं तूँ पंचे बिना देखे पुजते हया, हम तोंहईं पंचन काहीं उनहिन के खबर सुनाइत हएन। 24जउन परमातिमा धरती, अउर धरती के सगली चीजन काहीं बनाइन हीं, ऊँ स्वरग अउर धरती के मालिक होइके, हाँथ के बनाए मन्दिर माहीं नहीं रहँय। 25उनहीं कउनव चीज के कमी नहिं आय, एसे ऊँ मनइन के हाँथ से सेबा नहीं करामँय, काहेकि ऊँ त खुदय सब काहीं जीबन अउर साँस अउर सब कुछ देत हें। 26परमातिमा एकयठे मनई से मनइन के सगली जातिअन काहीं सगली धरती माहीं रहँइ के खातिर बनाइन हीं; अउर उँइन मनइन के रहँइ के खातिर समय निस्चित कइ दिहिन हीं। 27कि ऊँ पंचे परमातिमा काहीं ढूढ़ँय, होइ सकत हय, कि ऊँ पंचे ढूँढ़िके पाय जाँय, तऊ ऊँ हमरे पंचन म से कोहू से दूरी नहिं आहीं! 28काहेकि हम पंचे उनहिन माहीं जिन्दा रहित हएन, अउर चलित फिरित, अउर मजबूत रहित हएन; जइसन तोंहार पंचन के कुछ कबी घलाय कहिन हीं, कि ‘हमहूँ पंचे उनहिन के बंस आहेन।’ 29काहेकि हम पंचे परमातिमा के सन्तान आहेन, एसे हमहीं इआ कबहूँ न सोचँइ चाही, कि परमातिमा सोने, इआ रूपे, इआ पथरा कि नाईं हें, जउन मनई के कारीगरी अउर कल्पना से गढ़े गे होंय। 30एसे परमातिमा हमरे पंचन के अग्यानता के समय माहीं आनाकानी कइके, अब हर जघन के सगले मनइन काहीं, अपने मन काहीं बदलँइ के हुकुम देत हें। 31काहेकि परमातिमा एकठे दिन निस्चित किहिन हीं, जउने माहीं ऊँ, उआ मनई के द्वारा धरम से संसार के मनइन के न्याय करिहँय, जिनहीं ऊँ ठहराइन हीं, अउर उनहीं मरेन म से जिन्दा कइके, ईं सगली बातन काहीं निस्चित कइ दिहिन हीं।”
32मरेन म से जिन्दा होंइ के बातन काहीं सुनिके, खुब मनई उनखर हँसी उड़ामँइ लागें, अउर कुछ जने कहँइ लागें, ईं बातन काहीं पुनि कबहूँ हम पंचे तोंहसे सुनब। 33इआ बात काहीं सुनिके, पवलुस उनखे बीच म से निकरिके चलेगें। 34पय कइअक जने उनखे बात के बिसुआस किहिन, अउर उनखे साथ मिलिगें, जउने माहीं दियुनुसियुस नाम के एकठे मनई रहे हँय, जउन अरियुपगुस के सभा के सदस्य रहे हँय, अउर दमरिस नाम के एकठे मेहेरिआ रही हँय, अउर उनखे साथ अउरव कुछ मनई रहे हँय।
18कुरिन्थुस सहर माहीं पवलुस
1एखे बाद पवलुस एथेंस सहर काहीं छोंड़िके, कुरिन्थुस सहर माहीं आएँ। 2अउर उहाँ अक्विला नाम के एकठे यहूदी मनई मिलें, जिनखर जनम पुन्तुस सहर माहीं भ रहा हय; ऊँ अपने मेहेरिआ प्रिस्किल्ला के साथ इटली सहर माहीं उहय समय अउबय भे रहे हँय, काहेकि राजा क्लौदियुस सगले यहूदी लोगन काहीं, रोम देस से निकर जाँइ के हुकुम दिहिन रहा हय, एहिन से ऊँ पंचे उहाँ गे रहे हँय। 3अउर पवलुस अउर उनखर काम धन्धा एकय रहा हय, एसे पवलुस उनहिन के लघे ठहरें, अउर ऊँ पंचे मिलिके काम करँइ लागें, अउर ऊँ पंचे तम्बू बनामँइ के काम करत रहे हँय। 4अउर पवलुस हरेक पबित्र दिन काहीं, यहूदी सभाघर माहीं जाइके चरचा कइके, यहूदी लोगन काहीं, अउर यूनानी जाति के मनइन काहीं घलाय समझाबत रहे हँय।
5जब सीलास अउर तीमुथियुस मकिदुनिया प्रदेस से आएँ, त पवलुस बचन सुनामँइ के धुन माहीं लगे रहे हँय, अउर यहूदी लोगन काहीं गबाही देत रहे हँय, कि “यीसुअय मसीह आहीं।” 6पय जब ऊँ पंचे उनखर बिरोध अउर बुराई करँइ लागें, त पवलुस आपन ओन्हा फारिके उनसे कहिन; “जउन तूँ पंचे इआ कइ रहे हया, ओखर सजा तुहिन पंचे पइहा, हम निरदोस हएन, अब से हम गैरयहूदी लोगन के लघे जाब।” 7अउर पवलुस उहाँ से चल दिहिन, अउर ऊँ तीतुस युस्तुस नाम के एकठे परमातिमा के भक्त के घर माहीं पहुँचे, अउर उनखर घर यहूदी लोगन के सभाघर के लघेन रहा हय। 8तब सभाघर के मुखिया क्रिस्पुस अपने सगले परिबार समेत प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन; अउर कुरिन्थ सहर माहीं रहँइ बाले खुब मनई सुनिके बिसुआस किहिन, अउर बपतिस्मा लिहिन। 9अउर प्रभू रात माहीं पवलुस से दरसन माहीं कहिन, “डेरा न, बलकिन कहे जा, अउर चुप्पय न रहा। 10काहेकि हम तोंहरे साथ हएन, अउर कोऊ तोंहरे ऊपर चढ़ाई कइके तोंहईं नुकसान न पहुँचाई; काहेकि इआ सहर माहीं हमार खुब भक्त हें।” 11एसे पवलुस उहाँ उनखे बीच माहीं परमातिमा के बचन सिखाबत डेढ़ बरिस तक रहिगें।
12जब गल्लियो अखाया प्रदेस के राजपाल रहे हँय, उहय समय यहूदी लोग साहुत बाँधिके, पवलुस के ऊपर चढ़ाई किहिन, अउर उनहीं पकड़िके न्याय सभा के सिंहासन के लघे लइ जाइके कहँइ लागें, 13“ईं, मनइन काहीं इआ समझाबत हें, कि परमातिमा के अराधना अइसन करँय, जउन मूसा के बिधान के बिपरीत हय।” 14जब पवलुस बोलँइ बाले रहे हँय, तब राजपाल गल्लियो यहूदी लोगन से कहिन; “हे यहूदी जाति के मनइव, अगर इआ कुछू अन्याय इआ कि दुस्टता के बात होत, त इआ उचित होत, कि हम तोंहरे बात काहीं सुनित। 15पय अगर इआ बाद-बिबाद सब्दन, अउर नामन, अउर तोंहरे इहाँ के बिधान के बारे माहीं हय, त तुहिन पंचे जाना; काहेकि हम ईं बातन के न्यायी नहीं बनँइ चाही।” 16अउर राजपाल उनहीं न्याय के सिंहासन के सामने से निकरबाय दिहिन। 17तब सगले मनई यहूदी सभाघर के मुखिया, सोस्थिनेस काहीं पकड़िके न्याय सिंहासन के आँगे मारिन, पय राजपाल गल्लियो, ईं बातन के कुछू चिन्ता नहीं किहिन।
अन्ताकिया सहर माहीं पवलुस के लउटब
18पवलुस खुब दिना तक उहाँ रहिगें, ओखे बाद भाई-बहिनिन से बिदा लइके, किंख्रिया सहर माहीं आपन मूँड़ मुड़ाइन, काहेकि ऊँ मन्नत मानिन रहा हय, अउर ओखे बाद जल जिहाज माहीं चढ़िके सीरिया प्रदेस काहीं चल दिहिन, अउर उनखे साथ प्रिस्किल्ला अउर अक्विला घलाय रहे हँय। 19अउर पवलुस इफिसुस सहर माहीं पहुँचिके, प्रिस्किल्ला अउर अक्विला काहीं उहँइ छोंडि दिहिन, अउर खुद यहूदी सभाघर माहीं जाइके, यहूदी लोगन से चरचा करँइ लागें। 20अउर जब उहाँ के मनई उनसे बिनती किहिन, कि कुछ दिना अउर अपना हमरे पंचन के साथ माहीं रही, तब पवलुस उनखर बात नहीं मानिन। 21अउर पवलुस उनसे इआ कहिके बिदा लिहिन, कि “अगर परमातिमा चहिहँय, त पुनि हम तोंहरे पंचन के लघे अउब।” तब इफिसुस सहर से जिहाज खोलिके चल दिहिन, 22अउर कैसरिया सहर माहीं उतरिके, यरूसलेम सहर माहीं गें, अउर मसीही मन्डली के मनइन से मिलिके अन्ताकिया सहर माहीं आइगें।
पवलुस के तीसर प्रचार-यात्रा
23अउर उहाँ कुछ दिना रहे के बाद पवलुस उहाँ से चलेगें, अउर एक तरफ से गलातिया अउर फ्रूगिया प्रदेसन माहीं, सगले चेलन काहीं बिसुआस माहीं मजबूत करत आँगे बढ़िगें।
इफिसुस सहर माहीं अपुल्लोस
24अउर उहँय अपुल्लोस नाम के एकठे यहूदी रहे हँय, जउन सिकन्दरिया सहर माहीं पइदा भे रहे हँय, ऊँ निकहे भाँसन देंइ बाले रहे हँय, अउर पबित्र सास्त्र के उनहीं बड़ा ग्यान रहा हय, ऊँ इफिसुस सहर माहीं आए रहे हँय। 25ऊँ प्रभू के सही गइल माहीं चलँइ के सिच्छा पाइन रहा हय, अउर पूरा मन लगाइके यीसु के बारे माहीं सही-सही बचन सुनाबत, अउर सिखाबत रहे हँय, पय ऊँ केबल यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बालेन के बातन काहीं भर जानत रहे हँय। 26ऊँ यहूदी सभाघर माहीं निडर होइके बोलँइ लागें, अउर प्रिस्किल्ला अउर अक्विला उनखे बातन काहीं सुनिके उनहीं अपने घर लइगें, अउर परमातिमा के बातन काहीं अउर निकहा से उनहीं बताइन। 27अउर अपुल्लोस जब अखाया सहर माहीं जाँइ के निस्चित किहिन। एसे उहाँ के भाई-बहिनी उनखर ढाढ़स बँधाइके चेलन काहीं लिखिन, कि “ऊँ पंचे उनसे निकहा से मिलँय”, अउर ऊँ उहाँ पहुँचिके उनखर बड़ी मदत किहिन, जउन परमातिमा के किरपा से यीसु के ऊपर बिसुआस किहिन रहा हय। 28काहेकि ऊँ पबित्र सास्त्र से सबूत दइ-दइके, कि “यीसुअय मसीह आहीं”; बड़े साहस के साथ यहूदी लोगन काहीं, सगलेन के अँगुअय पबित्र सास्त्र के बचन से उनहीं चुप करत रहिगें।
19इफिसुस सहर माहीं पवलुस
1अउर जब अपुल्लोस कुरिन्थुस सहर माहीं रहे हँय, तब पवलुस ऊपर के सगले प्रदेसन से होत, इफिसुस सहर माहीं आएँ, अउर उहाँ कइयकठे चेला मिलें, 2त उनसे कहिन; “का तूँ पंचे बिसुआस करत समय पबित्र आत्मा पाया तय?” तब ऊँ पंचे उनसे कहिन, “हम पंचे त पबित्र आत्मा के चरचव तक नहीं सुने आहेन।” 3तब पवलुस उनसे कहिन; “त पुनि तूँ पंचे केखर बपतिस्मा लिहे हया?” ऊँ पंचे कहिन, “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले के बपतिस्मा लिहेन हय।” 4तब पवलुस कहिन; “यूहन्ना बपतिस्मा देंइ बाले इआ कहिके मन काहीं बदलँइ के बपतिस्मा दिहिन रहा हय, कि जउन हमरे बाद आमँइ बाले हें, उनखे ऊपर अरथात यीसु के ऊपर बिसुआस किहा।” 5इआ सुनिके ऊँ पंचे प्रभू यीसु के नाम से बपतिस्मा लिहिन। 6अउर जब पवलुस उनखे ऊपर आपन हाँथ धरिन, त उनखे ऊपर पबित्र आत्मा उतरा, अउर ऊँ पंचे अलग-अलग भाँसा बोलँइ लागें, अउर भबिस्यबानी करँइ लागें। 7कुल मिलाइके ऊँ पंचे बारा जने के करीब रहे हँय।
8अउर पवलुस यहूदी सभाघर माहीं जाइ-जाइके, तीन महीना तक निडर होइके बोलत रहिगें, अउर परमातिमा के राज के बारे माहीं, यहूदी लोगन के साथ चरचा कइके समझाबत रहिगें। 9पय जब कुछ जने बड़े हठी रहे हँय, अउर उनखे बातन काहीं नहीं मानिन, बलकिन सगले मनइन के अँगुअय इआ पंथ काहीं भला-बुरा कहँइ लागें, तब पवलुस उनहीं छोंड़िके चेलन काहीं अलग कइ लिहिन, अउर हरेक दिन तुरन्नुस के पाठसाला माहीं तर्क-वितर्क करत रहे हँय। 10दुइ बरिस तक इहय होत रहिगा, इहाँ तक कि आसिया प्रदेस के रहँइ बाले का यहूदी लोग, का यूनानी जाति के मनई सगले जन प्रभू के बचन काहीं सुन लिहिन।
स्कीवा के सातठे लड़िका
11अउर परमातिमा पवलुस के हाँथेन से सामर्थ के अदभुत काम देखाबत रहे हँय। 12इहाँ तक कि कुछ मनई उरमाल अउर अँगउछन काहीं पवलुस के देंह माहीं छुआयके, बिमारन काहीं ओढ़ाबत रहे हँय, अउर उनखर बिमारी दूर होइ जात रही हय; अउर बुरी आत्मा घलाय उनमा से निकर जा करत रही हँय। 13पय कुछ यहूदी लोग जउन झारत-फूँकत घूमत रहे हँय, इआ करँइ लागें, कि जिन माहीं बुरी आत्मा होंय, त उनखे ऊपर प्रभू यीसु के नाम से इआ कहिके फूँकय लागें, कि जउने यीसु के प्रचार पवलुस करत हें, हम तोंहईं उनहिन के कसम देइत हएन। 14स्कीवा नाम के एकठे यहूदी जाति के महायाजक के सातठे लड़िका रहे हँय, जउन इहइमेर करत रहे हँय। 15पय बुरी आत्मा जबाब दिहिस, कि “हम यीसु काहीं जानित हएन, अउर पवलुस काहीं घलाय पहिचानित हएन; पय तूँ पंचे को आह्या?” 16अउर उआ मनई जउने माहीं बुरी आत्मा रही हय; उनखे ऊपर झपटिके, उनहीं अपने काबू माहीं कइके, उनखे ऊपर अइसन उपद्दरव किहिस, कि ऊँ पंचे नंगे अउर चोंटिल होइके, उआ घर से निकरिके भागिगें। 17अउर इआ बात काहीं इफिसुस सहर के रहँइ बाले यहूदी लोग, अउर यूनानी जाति के मनई घलाय जानिगें, अउर उन सगलेन के ऊपर भय छाइगा; अउर प्रभू यीसु के नाम के बड़ाई भय। 18अउर जेतने जन बिसुआस किहिन रहा हय, उनमा से खुब जने आइके अपने-अपने बुरे कामन काहीं सबके आँगे सोइकार कइ लिहिन। 19अउर जादू करँइ बालेन म से खुब जने अपने-अपने पोथी-पत्रिन काहीं, एकट्ठा कइके सबके अँगुअय जराय दिहिन; अउर जब उनखर कीमत जोड़ी गे, त पचास हजार चाँदी के सिक्कन के बराबर निकरी। 20इआमेर से प्रभू के बचन सामर्थ के साथ फइलत ग, अउर मजबूत होत ग।
21जब ईं बातँय होइ चुकीं, त पवलुस अपने मन माहीं ठान लिहिन, कि मकिदुनिया प्रदेस अउर अखाया प्रदेस से होइके, यरूसलेम सहर माहीं जाब, अउर कहिन, कि उहाँ जाए के बाद हमहीं रोम देस काहीं घलाय देखब जरूरी हय। 22एसे अपने सेबकन म से तीमुथियुस अउर इरास्तुस काहीं, मकिदुनिया प्रदेस माहीं पठइके, खुद आसिया प्रदेस माहीं कुछ दिना रहिगें।
इफिसुस सहर माहीं उपद्दरव
23उआ समय इआ पंथ के बारे माहीं बड़ा हुल्लड़ भ। 24काहेकि देमेत्रियुस नाम के एकठे सोनार अरतिमिस देबी के चाँदी के मन्दिर बनबाइके, कारीगरन काहीं खुब काम देबाबा करत रहा हय। 25उआ उनहिन पंचन काहीं अउर इआ काम से जुड़े दुसरे कारीगरन काहीं, एकट्ठा किहिस अउर कहिस, “हे कारीगरव, का तूँ पंचे जनते हया, कि इआ काम माहीं हमहीं पंचन काहीं केतना धन मिलत हय। 26अउर तूँ पंचे देखते अउर सुनते हया, कि केबल इफिसुस सहर भर माहीं नहीं, बलकिन सगले आसिया प्रदेस माहीं, पवलुस इआ कहि-कहिके खुब मनइन काहीं समझाइन अउर भरमाइन हीं, कि ‘जउन हाँथे के कारीगरी हईं, ऊँ परमातिमा न होंहीं।’ 27अउर अब केबल इआ बातय भर के डेर न होय ही, कि हमार पंचन के इआ रोजिगार के बदनामी होई; बलकिन इआ, कि महान देबी अरतिमिस के मन्दिर तुच्छ समझा जई, अउर उनखर मान-सम्मान घट जई, जिनहीं सगले आसिया प्रदेस के मनई, अउर संसार के मनई पूजत हें।”
28ऊँ पंचे इआ बात काहीं सुनिके, खुब चन्डे चिल्लाइके कहँइ लागें, “इफिसुस सहर के रहँइ बाले मनइन के अरतिमिस देबी महान हईं!” 29अउर सगले सहर माहीं खुब हलचल मचिगा, अउर कुछ जने पवलुस के साथ यात्रा माहीं रहँइ बाले, गयुस अउर अरिस्तरखुस काहीं जउन मकिदुनिया प्रदेस के रहँइ बाले रहे हँय, पकड़ लिहिन, अउर एक चित्त होइके महासभा घर माहीं दउड़त लइगें। 30पय जब पवलुस उनखे लघे भीतर जाँय लागें, तब चेला लोग उनहीं नहीं जाँय दिहिन। 31आसिया प्रदेस के हाकिमन म से घलाय जउन पवलुस के साथी रहे हँय, उनखे लघे कहबाय पठइन, अउर बिनती किहिन, कि ऊँ महासभा घर माहीं जाँइ के खतरा मोल न लेंय। 32काहेकि उआ सभा माहीं बड़ी गड़बड़ी मची रही हय, कोऊ कुछू चिल्लात रहे हँय, अउर कोऊ कुछू; अउर कुछ जने त इआ जनतय नहीं रहें, कि हम पंचे इहाँ काहे के खातिर एकट्ठा भएन हँय। 33तब ऊँ पंचे सिकन्दर नाम के एकठे यहूदी मनई काहीं जेही, ऊँ पंचे चुनिन रहा हय, भीड़ के मनइन म से ओही आँगे किहिन, अउर सिकन्दर अपने हाँथे से इसारा कइके, सगले मनइन के आँगे जबाब देंइ चाहत रहा हय। 34पय जब ऊँ पंचे इआ जानिगें, कि उआ यहूदी आय, तब सगले मनई एकय अबाज माहीं करीब दुइ घन्टा तक चिल्लात रहिगें, कि इफिसुस सहर के रहँइ बाले मनइन के अरतिमिस देबी महान हईं। 35तब सहर के मन्त्री सगले मनइन काहीं सान्त कइके कहिन; “हे इफिसुस सहर के रहँइ बाले मनइव, को नहीं जानँय, कि इफिसुस सहर, महान देबी अरतिमिस के मन्दिर, अउर ज्यूस के तरफ से गिरी मूरत के सेबइक आय। 36काहेकि ईं बातन से इनकार नहीं कीन जाय सकय, त उचित हय, कि तूँ पंचे चुप्पय रहा; अउर बिना सोचे-बिचारे कुछू न करा। 37काहेकि तूँ पंचे जउने मनइन काहीं लइ आए हया, ऊँ पंचे न त मन्दिर काहीं लुटइन बाले आहीं, अउर न हमरे पंचन के देबी के हँसी उड़ामँइ बाले आहीं। 38अगर देमेत्रियुस अउर उनखे साथी कारीगरन के कोहू से बिबाद होय, त कचेहरी खुली हय, अउर हाकिम घलाय हें; ऊँ पंचे एक दुसरे के ऊपर मुकदमा चलाय सकत हें। 39पय तूँ पंचे अगर अउर कउनव बात के बारे माहीं, कुछू पूँछय चहते हया, त निअत सभा माहीं फँइसला कीन जई। 40काहेकि आज के बलबा के कारन हमरे ऊपर दोस लगाए जाँइ के डेर हय, एसे कि इआ सभा लगामँइ के कउनव कारन नहिं आय, एसे हम इआ भीड़ के एकट्ठा होंय के कउनव जबाब न दइ सकब।” 41अउर इआ कहिके ऊँ सभा के मनइन काहीं बिदा किहिन।
20मकिदुनिया प्रदेस, यूनान प्रदेस अउर त्रोआस सहर माहीं पवलुस
1जब हुल्लड़ कम होइगा, तब पवलुस चेलन काहीं बोलाइके समझाइन, अउर उनसे बिदा लइके मकिदुनिया प्रदेस कइती चल दिहिन। 2अउर उआ सगले प्रदेस म से होइके उहाँ रहँइ बाले चेलन के उत्साह काहीं बढ़ाइके, ऊँ यूनान प्रदेस माहीं आइगें। 3अउर उहाँ तीन महीना रहे के बाद, जल जिहाज से सीरिया प्रदेस कइती जाँइ बाले रहे हँय, तब यहूदी लोग उनखे घात माहीं लगिगें, एसे ऊँ इआ निस्चय किहिन, कि हम मकिदुनिया प्रदेस होइके लउटि जाब। 4तब बिरिया सहर के पुरूर्स के लड़िका सोपत्रुस अउर थिस्लोनी सहर के रहँइ बालेन म से अरिस्तरखुस अउर सिकुन्दुस अउर दिरबे के गयुस, अउर तीमुथियुस अउर आसिया प्रदेस के तुखिकुस अउर त्रुफिमुस आसिया प्रदेस तक पवलुस के साथ माहीं आएँ। 5अउर ऊँ पंचे आँगे जाइके त्रोआस सहर माहीं हमार पंचन के इन्तजार करत रहिगें। 6अउर हम पंचे बिना खमीर के रोटी खाँइ बाले तेउहार के दिनन के बाद, फिलिप्पी सहर से जल जिहाज माहीं चढ़िके. पाँच दिन माहीं त्रोआस सहर माहीं उनखे लघे पहुँचेन, अउर सात दिना तक उहँय रहेन।
त्रोआस सहर माहीं यूतुखुस काहीं जिआउब
7हप्ता के पहिलय दिना जब हम पंचे रोटी टोरँइ के खातिर एकट्ठा भएन, त पवलुस जउन दुसरे दिना चले जाँय बाले रहे हँय, उनसे बात करँइ लागें, अउर आधी रात तक बात करत रहिगें। 8जउने अँटरिया माहीं हम पंचे एकट्ठा रहेन हँय, ओमाहीं खुब दिया बरत रहे हँय। 9अउर यूतुखुस नाम के एकठे नवजमान झँकिया माहीं बइठ रहा हय, अउर उआ मारे नींद के गिरत रहा हय, अउर जब पवलुस खुब देर तक बात करत रहिगें, त उआ मारे नींद के तिसरे अँटरिया से नीचे गिर परा, अउर जब ओही उठाइन त उआ मरिगा रहा हय। 10पय पवलुस अँटरिया से नीचे उतरिके ओसे लपिटिगें, अउर ओही अपने गले लगाइके कहिन; “सब कोऊ घबरा न; काहेकि ओखर प्रान नहीं निकरा आय।” 11अउर ऊपर अँटरिया माहीं जाइके रोटी टोरिन, अउर खाइके खुब देर तक उनसे बातँय करत रहिगें, अउर भिनसार होइगा, तब पवलुस उहाँ से चलेगें। 12अउर सगले जन उआ लड़िका काहीं जिन्दा लइ आएँ, अउर उनहीं बड़ी सान्ति मिली।
त्रोआस सहर से मितुलेने सहर तक के पवलुस के यात्रा
13हम पंचे पहिलेन से जल जिहाज माहीं चढ़िके, अस्सुस सहर तक इआ बिचार से आँगे गएन, कि उहाँ से हम पंचे पवलुस काहीं जिहाज माहीं चढ़ाय लेई, काहेकि पवलुस उहँय से जिहाज माहीं चढ़ँइ के खातिर कहिन रहा हय, एसे कि ऊँ उहाँ तक खुदय पइदल जाँइ बाले रहे हँय। 14जब ऊँ हमहीं पंचन काहीं अस्सुस माहीं मिलें, त हम पंचे उनहीं जिहाज माहीं चढ़ाइके मितुलेने सहर माहीं आएन। 15अउर उहाँ से जिहाज काहीं छोरिके हम पंचे दुसरे दिना खियुस टापू के सउहें पहुँचेन, अउर तिसरे दिना सामुस टापू माहीं पहुँचेन, अउर ओखे दुसरे दिना मिलेतुस सहर माहीं पहुँच गएन। 16काहेकि पवलुस इफिसुस के लघे से होइके जाँइ के निस्चित किहिन रहा हय, कि कहँव अइसा न होय, कि उनहीं आसिया प्रदेस माहीं देर होइ जाय; काहेकि ऊँ हरबिरी माहीं रहे हँय, कि अगर होइ सकय त ऊँ पिन्तेकुस्त के दिन यरूसलेम सहर माहीं रहँय।
इफिसुस के धारमिक अँगुअन काहीं उपदेस
17अउर ऊँ मिलेतुस सहर से इफिसुस सहर माहीं सँदेस पठबाइके, मसीही मन्डली के अँगुअन काहीं बोलबाइन। 18जब ऊँ पंचे उनखे लघे आएँ, तब उनसे कहिन, “का अपना पंचे जानित हएन, कि पहिलय दिना से जब हम आसिया प्रदेस माहीं पहुँचेन त, हम हर समय अपना पंचेन के साथ कउनमेर से रहेन हय। 19मतलब बड़ी दीनता से, अउर आँसू बहाय-बहाइके, अउर उन परिच्छन माहीं जउन यहूदी लोगन के खड़यन्त्र के कारन हमरे ऊपर आय परी रही हँय; हम प्रभू के सेबा करत रहि गएन। 20अउर जउन-जउन बातँय अपना पंचन के फायदा के रही हँय, उनहीं बतामँइ माहीं अउर घर-घर जाइके मनइन काहीं सिखामँइ माहीं कबहूँ अरचन नहीं मानेन। 21हम यहूदी लोगन अउर यूनानी लोगन के आँगे इआ गबाही देत रहि गएन, कि परमातिमा कइती अपने मन काहीं लगाबा, अउर हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करा। 22अउर अब देखी, हम पबित्र आत्मा के अधीन होइके, यरूसलेम सहर माहीं जइत हएन, अउर नहीं जानी, कि उहाँ हमरे ऊपर का-का बीती? 23केबल इआ कि पबित्र आत्मा हरेक सहरन माहीं गबाही दइ-दइके हमसे कहत हय, कि बन्धन अउर दुख तोंहरे खातिर तइआर हय। 24पय हम अपने प्रान काहीं कुछू नहीं समझी, कि ओही पियार जानी, बलकिन इआ, कि हम अपने दउड़ अउर उआ सेबकाई काहीं पूर करी, जउन हम परमातिमा के किरपा के खुसी के खबर के गबाही देंइ के खातिर प्रभू यीसु से पाएन हय। 25अउर अब देखी, हम जानित हएन कि, अपना पंचन म से कोऊ, जिनखे बीच माहीं हम परमातिमा के राज के प्रचार करत फिरेन हय, हमार मुँह पुनि कबहूँ न देखे पाउब। 26एसे हम अजुअय अपना पंचन से गबाही दइके कहित हएन, कि हम अपना पंचन म से कोहू के खून के दोसी नहिं आहेन। 27काहेकि परमातिमा के पूरी इच्छा काहीं हम अपना पंचन काहीं पूरी तरह से बतामँइ माहीं कबहूँ नहीं हिचकिचानेन। 28एसे अपना पंचे आपन अउर अपने पूरे झुन्ड के रखबारी करी; जउने खातिर पबित्र आत्मा अपना पंचन काहीं अँगुआ ठहराइन हीं; कि अपना पंचे परमातिमा के मसीही मन्डली के रखबारी करी, जेही ऊँ अपने खून से मोल लिहिन हीं। 29हम जानित हएन, कि हमरे बाद खतरनाक डगर अपना पंचन के बीच माहीं अइहँय, जउन इआ झुन्ड काहीं न छोंड़ि हँय। 30इहाँ तक कि अपना पंचन के बीचय म से अइसन मनई तइआर होइहँय, जउन चेलन काहीं अपने पीछे खींच लेंइ के खातिर, बातन काहीं टोर-मरोरिके कइहँय। 31एसे जागत रहा; अउर सुध करा; कि हम तीन बरिस तक रात-दिना आँसू बहाय-बहाइके, हरेक जन काहीं चेतउनी देब नहीं छोंड़ेन। 32अउर अब हम अपना पंचन काहीं परमातिमा काहीं, अउर उनखे किरपा के बचन काहीं सँउपे देइत हएन; जउन अपना पंचन के उन्नति कइ सकत हें, अउर सगले पबित्र कीन मनइन के साथ अपना पंचन काहीं बारिसदार बनाय सकत हें। 33हम कोहू के चाँदी, सोने के इआ कि ओन्हा के लालच नहीं किहेन। 34अपना पंचे खुदय जानित हएन, कि हम अपने ईंन हाँथन से, आपन अउर अपने साथिन के जरूरतन काहीं पूरी किहेन हय। 35अउर हम अपना पंचन काहीं सब कुछ कइके देखायन हय, कि कउनमेर से मेहनत कइके कमजोर मनइन के मदत करँइ चाही, अउर हमहीं पंचन काहीं प्रभू यीसु के कहे उआ बचन काहीं हमेसा सुध रक्खँइ चाही, जउने काहीं ऊँ खुदय कहिन तय, कि ‘लेंइ से देब भला होत हय’।”
36इआ कहिके पवलुस घुटुआ के बल बइठिके उन सगलेन के साथय प्राथना किहिन। 37तब ऊँ पंचे खुब रोइन अउर पवलुस के गले मिलिके उनहीं चूमँइ लागें। 38काहेकि ऊँ पंचे इआ बात से दुखी रहे हँय, जउन पवलुस उनसे कहिन तय, कि “अपना पंचे हमार मुँह पुनि कबहूँ न देखे पाउब”; अउर ऊँ पंचे उनहीं जिहाज के लघे तक पहुँचाइन।
21यरूसलेम सहर काहीं पवलुस के जाब
1जब हम पंचे उनसे अलग होइके जिहाज छोरेन, त सीधे गइल से कोस टापू माहीं आएन, अउर दुसरे दिना रूदुस सहर माहीं आएन, अउर उहाँ से पतरा नाम के जघा माहीं पहुँचेन। 2अउर उहाँ से फीनीके सहर काहीं जाँइ बाला एकठे जिहाज मिला, तब हम पंचे ओमाहीं चढ़िके, ओही छोर दिहेन। 3जब साइप्रस टापू देखान, जउने काहीं हम पंचे बाएँ हाँथ कइती छोंड़ेन, अउर सीरिया देस कइती चलिके सूर सहर माहीं उतरेन; काहेकि उहाँ जिहाज के समान उतारँय क रहा हय। 4अउर उहाँ के चेलन काहीं पाइके हम पंचे उहाँ सात दिना तक रहेन, तब ऊँ पंचे पबित्र आत्मा के प्रेरना से पवलुस से कहिन, कि यरूसलेम सहर माहीं न जया। 5जब उहाँ रहँइ के दिन पूर होइगें, तब हम पंचे उहाँ से चल दिहेन; अउर उहाँ के सगले मनई लड़िका मेहेरिअन समेत हमहीं सहर के बहिरे तक पहुँचाइन, अउर हम पंचे सगले जन समुद्र के किनारे घुटुअन के बल बइठिके प्राथना किहेन। 6ओखे बाद एक दुसरे से बिदा होइके, हम पंचे त जिहाज माहीं चढ़ि गएन, अउर ऊँ पंचे अपने-अपने घरय चलेगें।
7जब हम पंचे सूर सहर से जिहाज माहीं यात्रा पूर कइके, पतुलिमयिस सहर माहीं पहुँचेन, त उहाँ के बिसुआसी भाइन से मुलाखात कइके, हम पंचे उनखे साथ एक दिना रहेन। 8अउर दुसरे दिना हम पंचे उहाँ से चलिके कैसरिया सहर माहीं आएन, अउर फिलिप्पुस के घर माहीं जाइके उनखे इहाँ रहेन, जउन खुसी के खबर के प्रचार करँइ बाले सातठे सेबकन म से रहे हँय। 9उनखे चारठे कुमारी बिटिया रही हँय; जउन भबिस्यबानी करत रही हँय। 10जब हम पंचे उहाँ खुब दिना रहि चुकेन, तब परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले अगबुस नाम के एक जने यहूदिया प्रदेस से आएँ। 11अउर ऊँ हमरे लघे आइके पवलुस के अँगउछा लिहिन, अउर आपन हाँथ-गोड़ बाँधिके कहिन; पबित्र आत्मा इआ कहत हय, कि जउने मनई के इआ अँगउछा आय, उनहीं यरूसलेम सहर माहीं यहूदी लोग इहइमेर से बँधिहँय, अउर गैरयहूदी लोगन के हाँथ माहीं सउँपि देइहँय। 12जब हम पंचे ईं बातन काहीं सुनेन, तब हम पंचे अउर उहाँ के मनई पवलुस से बिनती किहिन, कि ऊँ यरूसलेम सहर माहीं न जाँय। 13पय पवलुस जबाब दिहिन, कि तूँ पंचे का करते हया, रोइ-रोइके हमरे मन काहीं कमजोर करते हया, हम त प्रभू यीसु के नाम के खातिर यरूसलेम सहर म न केबल बाँधे जाँइन भर काहीं नहीं, बलकिन मरऊँ के खातिर तइआर हएन। 14जब ऊँ कोहू के बात नहीं मानिन, तब हम पंचे इआ कहिके चुप्पय होइ गएन, कि “प्रभू के इच्छा पूर होय।”
15अउर कुछ दिन के बाद हम पंचे तइआरी कइके यरूसलेम सहर काहीं चल दिहेन। 16अउर कैसरिया सहर के घलाय खुब चेला हमरे पंचन के साथ चल दिहिन, अउर हमहीं मनासोन नाम के साइप्रस सहर के रहँइ बाले, एकठे पुरान चेला के घर माहीं लइ आएँ, कि हम पंचे उनखे इहाँ रुकी।
पवलुस के याकूब से भेंट
17जब हम पंचे यरूसलेम सहर माहीं पहुँचेन, तब उहाँ के बिसुआसी भाई बड़े आनन्द के साथ हमसे मिलें। 18अउर दुसरे दिना पवलुस हमहीं पंचन काहीं लइके याकूब के लघे गें, जहाँ मसीही मन्डली के सगले अँगुआ एकट्ठा रहे हँय। 19तब पवलुस उनहीं नबस्कार कइके, जउन-जउन काम परमातिमा उनखे सेबकाई के द्वारा, गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं किहिन रहा हय, एक-एक कइके सब बताइन। 20अउर ऊँ पंचे इआ सुनिके परमातिमा के महिमा किहिन, अउर ओखे बाद पवलुस से कहिन, “हे भाई, तूँ देखते हया, कि यहूदी लोगन म से कइअक हजार मनई प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन हीं; अउर सगले जने मूसा के बिधान काहीं मानँइ के खातिर धुन लगाए हें। 21अउर उनहीं तोंहरे बारे माहीं इआ बताबा ग हय, कि तूँ गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं रहँइ बाले यहूदी लोगन काहीं, मूसा नबी के सिच्छा काहीं न मानँइ काहीं सिखउते हया, अउर कहते हया, कि न अपने लड़िकन-बच्चन के खतना कराया, अउर न उनखे बताई रीत के मुताबिक चला। 22त बताबा का कीन जाय? काहेकि ऊँ पंचे जरूर सुनिहँय कि तूँ इहाँ आए हया। 23एसे जउन हम पंचे तोंहसे कहित हएन, उहयमेर करा, हमरे इहाँ चारठे मनई हें, ऊँ पंचे कउनव मन्नत मानिन हीं। 24एसे उनहीं लइ जाइके उनखे साथ अपने-आप काहीं सुद्ध करा; अउर उनहीं खरचा के खातिर पइसा द्या, जउने ऊँ पंचे मूँड़ मुड़ामँय, तब सगले जन जान लेइहँय, कि जउन बातँय उनहीं तोंहरे बारे माहीं सिखाई गई हँय, उनमा कउनव सच्चाई नहिं आय, बलकिन तूँ खुदय मूसा के बिधान काहीं मानिके ओखे मुताबिक चलते हया। 25पय गैरयहूदी लोगन के बारे माहीं जउन प्रभू के ऊपर बिसुआस किहिन हीं, हम पंचे इआ निरनय कइके उनहीं चिट्ठी लिखिके पठयन हय, कि ऊँ पंचे मूरतिन के आँगे बली कीन माँस खाँय से, अउर खून से, नेटई काटे पसुअन के माँस खाँय से, अउर ब्यभिचार से बचे रहँय।” 26तब पवलुस ऊँ मनइन के साथ जाइके खुद काहीं सुद्ध किहिन, अउर दुसरे दिना उनखे साथ मन्दिर माहीं गें, अउर सुद्ध होंइ के दिन, अरथात उनमा से हरेक के खातिर चढ़ाबा चढ़ाए जाँय के दिन पूर होंइ के बारे माहीं, उनहीं पंचन काहीं बताय दिहिन।
मन्दिर माहीं पवलुस के पकड़ा जाब
27जब ऊँ सात दिना पूरय होंइ बाले रहे हँय, तब आसिया प्रदेस के यहूदी जाति के कुछ मनई, पवलुस काहीं मन्दिर माहीं देखिके, उहाँ के सगले मनइन काहीं उकसाइन, अउर इआमेर से चिल्लाय-चिल्लाइके पवलुस काहीं पकड़ लिहिन। 28कि, “हे इजराइल के रहँइ बाले मनइव मदत करा; इआ उहय मनई आय, जउन सगले मनइन काहीं, मूसा के बिधान के अउर इआ जघा के बिरोध माहीं, हर जघा सिखाबत हय, इहाँ तक कि यूनानी जाति के मनइन काहीं, मन्दिर माहीं लइआइके इआ पबित्र जघा काहीं अपबित्र कइ दिहिस ही।” 29ऊँ पंचे त एसे पहिले इफिसुस सहर के रहँइ बाले त्रुफिमुस काहीं, उनखे साथ सहर माहीं देखिन रहा हय, अउर इआ समझत रहे हँय, कि पवलुस उनहीं मन्दिर माहीं लइ आएँ हँय। 30तब सगले सहर माहीं हलचल मचिगा, अउर उहाँ के सगले मनई दउड़िके एकट्ठा होइगें, अउर पवलुस काहीं पकड़िके मन्दिर के बहिरे खसेलि लाएँ, अउर हरबिन मन्दिर के दुअरा बंद कइ दीनगें। 31जब ऊँ पंचे उनहीं मारि डारँय चाहत रहे हँय, तब सिपाहिन के मुखिया के लघे इआ खबर पहुँची, कि सगले यरूसलेम सहर माहीं हलचल मचा हय। 32तब ऊँ हरबिन सिपाहिन अउर सुबेदारन काहीं लइके, उनखे लघे दउड़तय पहुँचिगें; अउर ऊँ पंचे सिपाहिन के मुखिया काहीं, अउर सिपाहिन काहीं देखिके, पवलुस काहीं मारब पीटब बंद कइ दिहिन। 33तब सिपाहिन के मुखिया उनखे लघे आइके उनहीं पकड़ लिहिन; अउर दुइठे जंजीरन से बाँधय के हुकुम दइके पूँछँइ लागें, “ईं को आहीं, अउर ईं का किहिन हीं?” 34पय भीड़ के मनइन म से कुछ जने कुछू, त कुछ जने कुछू चिल्लात रहे हँय, अउर जब हुल्लड़ के मारे असलिअत नहीं जाने पाइन, त उनहीं छावनी माहीं लइ जाँइ के हुकुम दिहिन। 35पवलुस जब सिढ़िया के लघे पहुँचे, त अइसन भ कि भीड़ के सगले मनई उनहीं दबाए डारत रहे हँय, एसे सिपाही लोग उनहीं उठाइके भीतर लइगें। 36काहेकि सगली भीड़ के मनई इआ चिल्लात उनखे पीछे परे रहे हँय, कि “ओही मार डारा।”
37जब ऊँ पंचे पवलुस काहीं छावनी माहीं लइ जाँइ बाले रहे हँय, तब पवलुस सिपाहिन के मुखिया से कहिन; “का हम अपना से कुछू कहि सकित हएन?” तब सिपाहिन के मुखिया उनसे कहिन, “का तूँ यूनानी भाँसा जनते हया? 38का तूँ मिस्र देस के उआ मनई न होह्या, जउन एखे पहिले बलबा कइके चार हजार कटार लए मनइन काहीं सुनसान जघा माहीं लइ गया तय?” 39तब पवलुस कहिन, “हम त किलिकिया प्रदेस के मसहूर सहर तरसुस के रहँइ बाले यहूदी आहेन, अउर हम अपना से बिनती करित हएन, कि हमहीं ईं मनइन से बात करँय देई।” 40जब ऊँ बात करँइ के हुकुम दइ दिहिन, तब पवलुस सिढ़िया माहीं ठाढ़ होइके अपने हाँथ से लोगन काहीं इसारा किहिन; जब ऊँ पंचे सगले जन चुप्पय होइगें, तब ऊँ इब्रानी भाँसा माहीं बोलँइ लागें।
22भीड़ के मनइन के आँगे पवलुस के भाँसन
1“हे भाई-बहिनिव, अउर बाप के समान बुजुरगव हमार जबाब सुना, जउन अब हम तोंहरे आँगे कहित हएन।” 2ऊँ पंचे इआ सुनिके कि ऊँ हमसे इब्रानी भाँसा माहीं बोलत हें, अउरव चुप्पय होइगें। तब ऊँ कहिन, 3“हम त यहूदी आहेन, जउन किलिकिया प्रदेस के तरसुस सहर माहीं पइदा भएन; पय इहय सहर माहीं गमलीएल के लघे बइठिके पढ़ाई किहेन हँय, अउर हमहीं बाप-दादन के बिधान काहीं सही रीति से सिखाबा ग; अउर परमातिमा के खातिर अइसन धुन लगाए रहेन हय, जइसन तूँ पंचे सगले जन आज लगाए हया। 4अउर हम मेहेरिआ-मंसेरुआ दोनव काहीं बाँधि बाँधिके, अउर जेल माहीं डार डारिके, यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं इहाँ तक सतायन, कि उनहीं मरबाय घलाय डारेन तय। 5इआ बात के खातिर महायाजक अउर यहूदी समाज के धारमिक अँगुआ लोग गबाह हें; कि हम उनसे भाई-बहिनिन के नाम पर चिट्ठी लइके दमिस्क सहर काहीं चले जात रहे हएन, कि उहाँ जेतने होंय उनहूँ काहीं सजा देबामँइ के खातिर, बाँधिके यरूसलेम सहर माहीं ले अई।
अपने हिरदँय के बदलँइ के बखान
6जब हम चलत-चलत दमिस्क सहर के लघे पहुँचेन, त अइसन भ, कि दुपहर के करीब एकाएक एकठे बड़ी जोति अकास से हमरे चारिव कइती चमकी। 7अउर हम भुँइ माहीं गिर परेन, अउर इआ बोल सुनान, कि ‘हे साऊल, हे साऊल, तूँ हमहीं काहे सतउते हया?’ हम जबाब दिहेन, ‘हे प्रभू, अपना को आहेन?’ 8ऊँ हमसे कहिन; ‘हम नासरत गाँव के यीसु आहेन, जेही तूँ सतउते हया?’ 9अउर हमार साथी लोग जोति त देखिन, पय जउन हमसे बात करत रहे हँय, उनखर बोल नहीं सुनिन। 10तब हम कहेन; ‘हे प्रभू हम का करी?’ तब प्रभू हमसे कहिन, ‘उठिके दमिस्क सहर माहीं जा, अउर जउन कुछू तोंहईं करँइ के खातिर ठहराबा ग हय, उहाँ तोंहसे सब बताय दीन जई।’ 11जब उआ जोति के तेज के मारे हमहीं कुछू देखाई नहीं दिहिस, तब हम अपने साथिन के हाँथ पकड़े-पकड़े दमिस्क सहर माहीं आएन।
12अउर हनन्याह नाम के मनई जउन मूसा के बिधान के मुताबिक भक्त, अउर जिनखर उहाँ के रहँइ बाले सगले यहूदी लोगन माहीं बड़ा नाम रहा हय, हमरे लघे आएँ। 13अउर ठाढ़ होइके हमसे कहिन; ‘हे भाई साऊल पुनि देखँइ लागा’ उहय समय हमार आँखी खुल गईं अउर हम उनहीं देखेन। 14तब ऊँ कहिन; ‘हमरे बाप-दादन के परमातिमा तोंहईं एसे चुनिन हीं, कि तूँ उनखे मरजी काहीं जाना, अउर ऊँ धरमी काहीं देखा, अउर उनखे मुँह से बातँय सुना। 15काहेकि, तूँ उनखे तरफ से सगले मनइन के आँगे उन बातन के गबाह होइहा, जउनेन काहीं तूँ देखे अउर सुने हया। 16अब काहे देरी करते हया? उठा, बपतिस्मा ल्या, अउर उनखर नाम लइके अपने पापन काहीं धोय डारा।’
गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं प्रचार करँइ के आहबान
17जब हम पुनि यरूसलेम सहर माहीं आइके मन्दिर माहीं प्राथना करत रहे हएन, त बेसुध होइ गएन। 18अउर उनहीं देखेन, कि ऊँ हमसे कहत हें; ‘हरबी करा यरूसलेम सहर से तुरन्तय निकर जा, काहेकि ऊँ पंचे हमरे बारे माहीं तोंहरे गबाही काहीं न मनि हँय।’ 19हम कहेन, ‘हे प्रभू, ऊँ पंचे त खुदय जानत हें, कि हम अपना के ऊपर बिसुआस करँइ बालेन काहीं जेल माहीं डारत रहेन हँय, अउर हरेक जघन के यहूदी सभाघर माहीं पिटबाबत रहेन हँय। 20अउर जब अपना के गबाही देंइ बाले स्तिफनुस के खून बहाबा जात रहा हय, तब हमहूँ घलाय उहाँ ठाढ़ रहेन हँय, अउर इआ काम माहीं सहमत रहेन हँय, अउर उनखर कतल करँइ बालेन के ओन्हन के रखबारी करत रहेन हँय।’ 21अउर ऊँ हमसे कहिन, चले जा, ‘काहेकि हम तोंहईं गैरयहूदी लोगन के लघे दूरी-दूरी तक पठउब।”
22ऊँ पंचे उनखर एतनी बात तक त सुनत रहिगें; ओखे बाद ऊँ पंचे खुब चन्डे चिल्लाने, कि “अइसन मनई काहीं मारि डारा; एखर जिन्दा रहब ठीक नहिं आय।” 23जब ऊँ पंचे चिल्लात रहे हँय, अउर आपन ओन्हा उतारिके फेंकत रहे हँय, अउर अकास माहीं धूधुर उड़ाबत रहे हँय; 24तब सिपाहिन के मुखिया कहिन; “उनहीं छावनी माहीं लइ जा; अउर चाबुक मारिके जाँच करा, कि हम जानी कि खुब मनई कउने कारन से उनखे बिरोध माहीं चिल्लाय रहे हँय।” 25पय जब ऊँ पंचे उनहीं चाबुक मारँइ के खातिर बाँधत रहे हँय, तब पवलुस सुबेदार से जउन उनखे लघे ठाढ़ रहे हँय कहिन, “का इआ उचित हय, कि तूँ पंचे एकठे रोमी नागरिक काहीं, उहव बिना दोसी ठहराए चाबुक मारा?” 26सुबेदार इआ सुनिके सिपाहिन के मुखिया के लघे जाइके कहिन; “अपना इआ का करित हएन? इआ मनई त रोमी नागरिक आय।” 27तब सिपाहिन के मुखिया उनखे लघे आइके कहिन; “हमहीं बताबा, का तूँ रोमी नागरिक आह्या? ऊँ कहिन, ‘हाँ।’ 28एतना सुनिके सिपाहिन के मुखिया कहिन; कि ‘हम रोमी नागरिक होंइ के पद, खुब रुपिआ दइके पाएन हय।’ तब पवलुस कहिन, ‘हम त पइदाइसी रोमी नागरिक आहेन।’ 29तब जउन मनई उनखर जाँच करँइ बाले रहे हँय, ऊँ पंचे तुरन्तय उनखे लघे से हटिगें; अउर सिपाहिन के मुखिया घलाय इआ जानिके कि ‘ईं रोमी नागरिक आहीं, अउर हम इनहीं बँध बायन हय’, डेराइगें।”
महासभा के आँगे पवलुस
30दुसरे दिना ऊँ सही-सही जानँइ के इच्छा से, कि यहूदी लोग उनखे ऊपर काहे दोस लगाबत हें, उनखर बन्धन खोलबाय दिहिन; अउर प्रधान याजकन अउर महासभा के सगले सदस्सन काहीं एकट्ठा होंइ के हुकुम दिहिन, अउर पवलुस काहीं नीचे लइ जाइके उनखे आँगे ठाढ़ कइ दिहिन।
231पवलुस महासभा के मनइन कइती टकटकी लगाए देखिन, अउर कहिन, “हे भाइव, हम आज तक परमातिमा के खातिर बेलकुल सच्चे बिबेक से जीबन बितायन हय।” 2तब हनन्याह जउन प्रधान याजक रहे हँय, उनहीं जउन उनखे लघे ठाढ़ रहे हँय, उनखे मुँहे माहीं थापड़ मारँइ काहीं हुकुम दिहिन। 3तब पवलुस उनसे कहिन, “हे चून से पोती भीती के समान मनई, तोंहरे ऊपर परमातिमा के मार परी, तूँ मूसा के बिधान के मुताबिक हमार न्याय करँइ के खातिर बइठ हया, त पुनि काहे मूसा के बिधान के खिलाफ हमहीं मारँइ के हुकुम देते हया?” 4जउन उनखे लघे ठाढ़ रहे हँय, ऊँ पंचे कहिन, “तूँ परमातिमा के महायाजक काहीं भला-बुरा काहे कहते हया?” 5पवलुस कहिन; “हे भाइव, हम नहीं जानत रहे आहेन, कि ईं महायाजक आहीं; काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि अपने लोगन के प्रधान काहीं बुरा न कहा।”
6तब पवलुस इआ जानिके, कि एकठे दल सदूकी लोगन के अउर दूसर दल फरीसी लोगन के आय, सभा माहीं खुब चन्डे कहिन, “हे भाइव, हम फरीसी आहेन काहेकि हम फरीसी लोगन के बंस माहीं पइदा भएन हँय, अउर मरे मनइन के आसा अउर मरेन म से जिन्दा होंइ के बारे माहीं, हमरे ऊपर मुकदमा चलाबा जाय रहा हय।” 7जब पवलुस इआ बात कहिन, “त फरीसी लोगन अउर सदूकी लोगन माहीं झगड़ा होंइ लाग; अउर सभा माहीं फूट परिगे।” 8काहेकि सदूकी दल बाले त इआ कहत हें, कि “न त मरे मनई दुबारा जिन्दा होंय, अउर न स्वरगदूत आहीं, अउर न आत्मा आय”; पय फरीसी दोनव माहीं बिसुआस करत हें। 9तब बड़ा हल्ला मचिगा, अउर मूसा के बिधान सिखामँइ बाले कुछ जने जउन फरीसी लोगन के दल के रहे हँय, ठाढ़ होइके इआमेर कहिके झगड़ा करँइ लागें, कि “हम पंचे इआ मनई माहीं कउनव बुराई नहीं पाई; अउर अगर कउनव आत्मा, इआ कि स्वरगदूत उनसे बात किहिन हीं, त एसे का भ?” 10जब खुब झगड़ा होइगा, तब सिपाहिन के मुखिया इआ डेर से, कि ऊँ पंचे पवलुस के टुकड़ा-टुकड़ा न कइ डारँय, सिपाहिन काहीं हुकुम दिहिन, कि “नीचे उतरिके पवलुस काहीं उनखे बीच म से जबरई निकारा, अउर छावनी माहीं लइ जा।”
11उहय रात माहीं प्रभू, पवलुस के लघे आइके ठाढ़ भें अउर कहिन; “हे पवलुस, ढाढ़स बाँधा; काहेकि जइसन तूँ यरूसलेम सहर माहीं हमार गबाही दिहा हय, उहयमेर तोंहईं रोम देस माहीं घलाय गबाही देंइ क हय।”
पवलुस के कतल के खड़यन्त्र
12जब दिन भ, तब कुछ यहूदी लोग खड़यन्त्र रचिन, अउर कसम खाइन, कि “जब तक हम पंचे पवलुस काहीं मारि न डारी, तब तक हम पंचे अगर कुछू खई-पी त हमहीं धिक्कार हय।” 13जेतने जने कसम खाइन रहा हय, ऊँ पंचे चालिस जने से जादा रहे हँय। 14ऊँ पंचे प्रधान याजकन अउर यहूदी समाज के धारमिक अँगुअन के लघे आइके कहिन, “हम पंचे इआ ठान लिहेन हय; कि जब तक पवलुस काहीं मारि न डारब, तब तक अगर कुछू खई, त हमहीं धिक्कार हय। 15एसे अब महासभा के सदस्सन समेत सिपाहिन के मुखिया काहीं समझाबा, कि पवलुस काहीं ऊँ पंचे अपना पंचन के लघे लइ आमँइ, जउने उनहीं लागय, कि अपना पंचे उनखे बारे माहीं अउर ठीक से जाँच करँइ चाहित हएन, अउर हम पंचे उनखे इहाँ पहुँचय से पहिलेन उनहीं मार डारँइ के खातिर तइआर रहब।” 16अउर पवलुस के भइने जानिन, कि ऊँ पंचे पवलुस काहीं मारि डारँइ के घात माहीं हें, त ऊँ छावनी माहीं जाइके पवलुस काहीं इआ सँदेस बताय दिहिन। 17तब पवलुस सुबेदारन म से एक जने काहीं, अपने लघे बोलाइके कहिन; “इआ नवजमान काहीं सिपाहिन के मुखिया के लघे लइ जा, इआ उनसे कुछू कहँय चाहत हय।” 18एसे ऊँ सुबेदार उनहीं सिपाहिन के मुखिया के लघे लइ जाइके कहिन; “पवलुस नाम के बंदी हमहीं बोलाइके बिनती किहिन हीं, कि इआ नवजमान सिपाहिन के मुखिया से कुछू बात करँय चाहत हय; ओही उनखे लघे लइ जा।” 19तब सिपाहिन के मुखिया उआ नवजमान के हाँथ पकड़िके, अउर अलग लइ जाइके पूँछिन; “तूँ हमसे का कहँइ चहते हया?” 20तब ऊँ कहँइ लागें; “कुछ यहूदी लोग खड़यन्त्र रचिन हीं, कि अपना से बिनती करँय, कि पवलुस काहीं काल्ह महासभा म लइ आबा जाय, काहेकि ऊँ पंचे अउर ठीक से पवलुस के जाँच करँइ चाहत हें। 21पय अपना उनखर बात न मानब, काहेकि उनमा से चालिस से जादा मनई उनखर कतल करँइ के घात माहीं हें, जउन इआ ठान लिहिन हीं, कि जब तक हम पंचे पवलुस काहीं मारि न डारब, तब तक कुछू खई-पी त हमहीं धिक्कार हय; अउर अबहिनय ऊँ तइआर हें अउर अपना के अनुमति के इन्तजार कइ रहे हँय।” 22तब सिपाहिन के मुखिया उआ नवजमान काहीं इआ हुकुम दइके बिदा किहिन, कि “कोऊ से न बताया, कि तूँ हमसे ईं बातन काहीं बताया हय।”
पवलुस काहीं फेलिक्स के लघे पठबा जाब
23अउर ऊँ दुइठे सुबेदारन काहीं बोलाइके कहिन; “दुइ सव सिपाही, सत्तर घोड़ सबार सिपाही, अउर दुइ सव भाला चलामँइ बालेन काहीं, एक पहर रात बीते कैसरिया सहर काहीं जाँइ के खातिर तइआर रक्खा। 24अउर पवलुस के सबारी के खातिर घोड़न काहीं तइआर रक्खा, कि जउने उनहीं हाकिम फेलिक्स के लघे कुसल से पहुँचाय देई।” 25अउर ऊँ इआमेर से चिट्ठी घलाय लिखिन।
26“महामहिम हाकिम फेलिक्स काहीं क्लौदियुस लूसियास के नबस्कार। 27इआ मनई काहीं यहूदी जाति के कुछ मनई पकड़िके मार डारँय चाहत रहे हँय, पय जब हम इआ जानेन कि ईं रोमी नागरिक आहीं, तब हम सिपाहिन काहीं लइके इनहीं छोड़ाय लिहेन। 28अउर हम जानँइ चाहत रहेन हँय, कि ऊँ पंचे इनखे ऊपर कउने कारन से दोस लगाबत हें, एसे इनहीं उनखे महासभा माहीं लइ गएन। 29तब हम इआ जान लिहेन, कि ऊँ पंचे अपने बिधान के बिबादन के बारे माहीं, इनखे ऊपर दोस लगाबत हें, पय मारि डारे जाँय, इआ कि जेल माहीं डारे जाँय के काबिल इन माहीं कउनव दोस नहीं पाबा ग। 30अउर जब हमहीं बताबा ग, कि ऊँ पंचे इनहीं मार डारँय माहीं लगे हँय, तब हम हरबिन इनहीं अपना के लघे पठयबाय दिहेन; अउर मुद्दइन काहीं घलाय, इआ हुकुम दिहेन, कि अपना के आँगे इनखे ऊपर दोस सिद्ध करँय।”
31एसे जइसन सिपाहिन काहीं हुकुम दीन ग रहा हय, उहयमेर पवलुस काहीं अपने साथ माहीं लइके, रातव रात अन्तिपत्रिस सहर माहीं पहुँचाय दिहिन। 32अउर दुसरे दिन घोड़ सबारन काहीं पवलुस के साथ जाँइ के खातिर छोंड़िके, सगले सिपाही खुद छावनी माहीं लउटि आएँ। 33अउर ऊँ पंचे कैसरिया सहर माहीं पहुँचिके, हाकिम काहीं चिट्ठी दिहिन; अउर पवलुस काहीं घलाय उनखे आँगे ठाढ़ किहिन। 34अउर ऊँ हाकिम उआ चिट्ठी काहीं पढ़िके उनसे पूँछिन, “ईं कउने प्रदेस के आहीं?” अउर जब जान लिहिन कि ईं किलिकिया प्रदेस के आहीं; 35तब पवलुस से कहिन; “जब तोंहरे ऊपर दोस लगामँइ बाले मुद्दई घलाय आय जइहँय, तब हम तोंहार मुकदमा सुरू करब।” अउर उनहीं राजा हेरोदेस के किला माहीं, पहरेदारी माहीं रक्खँइ के हुकुम दिहिन।
24हाकिम फेलिक्स के आँगे पवलुस
1पाँच दिना बाद, महायाजक हनन्याह, यहूदी समाज के कुछ धारमिक अँगुअन काहीं, अउर तिरतुल्लुस नाम के वकील काहीं साथ माहीं लइके, कैसरिया सहर माहीं आएँ, कि ऊँ पंचे हाकिम के आँगे पवलुस के ऊपर दोस सिद्ध करँय। 2जब हाकिम फेलिक्स के आँगे पवलुस काहीं बोलबाबा ग, त तिरतुल्लुस उनखे ऊपर दोस लगाइके कहँइ लागें, “हे महामहिम हाकिम फेलिक्स, अपना के द्वारा हमहीं पंचन काहीं बड़ी कुसलता मिलत ही; अउर अपना के प्रबन्ध से, इआ जाति के मनइन से खुब बुराई सुधरत जाती हईं। 3ईं बातन काहीं हम पंचे हरेक जघा, अउर हरेकमेर से धन्यबाद के साथ मानित हएन। 4पय एसे कि हम पंचे अपना काहीं अउर कस्ट नहीं देंइ चाहित आहेन, हम अपना से बिनती करित हएन कि, किरपा कइके हमरे कुछ बातन काहीं सुन लेई। 5काहेकि हम पंचे इआ मनई काहीं उपद्दरव मचामँइ बाला, अउर अपना के राज के सगले यहूदी लोगन माहीं बलबा करँइ बाला, अउर इनहीं नासरत प्रदेस माहीं रहँइ बालेन के पंथ के मुखिया पाएन हय। 6ईं मन्दिर काहीं असुद्ध करँइ चाहिन, तबहिनय हम पंचे इनहीं पकड़ लिहेन, (अउर हम पंचे अपने बिधान के मुताबिक इनहीं सजा देंइ चाहत रहे हएन; 7पय सिपाहिन के मुखिया लूसियास इनहीं हमरे हाँथन से जबरई छोड़ाय लिहिन, 8अउर मुद्दई काहीं अपना के आँगे आमँइ के हुकुम दिहिन।) ईं सगली बातन काहीं जउनेन के बारे माहीं हम पंचे इनखे ऊपर दोस लगाइत हएन, अपना खुदय इनखर जाँच कइके जान लेब।” 9अउर यहूदी लोग घलाय, उनखर साथ दइके कहिन, ईं जउने बातन काहीं बताइन हीं बेलकुल इहइमेर आहीं।
पवलुस के जबाब
10जब हाकिम पवलुस काहीं बोलँइ के इसारा किहिन, तब ऊँ जबाब दिहिन, “हम इआ जानिके, कि अपना खुब बरिसन से इआ जाति के मनइन के न्याय करत आहेन, हम आनन्द से अपना काहीं जबाब देइत हएन। 11अपना खुदय जानित हएन, कि जब से हम यरूसलेम सहर माहीं अराधना करँइ काहीं आएन हय, हमहीं आए बारा दिन से ऊपर नहीं भें। 12ईं पंचे न हमहीं मन्दिर माहीं, न यहूदी सभाघरन माहीं, अउर न सहर माहीं, कोहू से बिबादय करत, न भीड़य लगाबत पाइन। 13अउर न त ईं पंचे, ईं बातन काहीं, जिनखर ईं पंचे हमरे ऊपर दोस लगाबत हें, उनखर अपना के आँगे सही सबूत दइ सकँय। 14पय हम अपना के आँगे इआ माने लेइत हएन, कि जउने पंथ काहीं ईं पंचे कुपन्थ कहत हें, ओहिन के रीत से हम अपने बाप-दादन के परमातिमा के अराधना करित हएन; अउर जउन बातँय मूसा के बिधान, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताबन माहीं लिखी हईं, उन सगलेन के हम बिसुआस करित हएन। 15अउर परमातिमा से आसा रक्खित हएन, जउने माहीं ईं पंचे घलाय खुदय आसा रक्खत हें, कि धरमी अउर अधरमी दोनव जनेन के जिन्दा होब, होई। 16एसे हम खुदय इआ कोसिस करित हएन, कि परमातिमा के तरफ से, अउर मनइन के तरफ से, हमार बिबेक हमेसा निरदोस रहय। 17खुब बरिसन के बाद हम अपने समाज के मनइन काहीं दान पहुँचामँइ, अउर भेंट चढ़ामँइ आए रहेन हँय। 18त ईं पंचे हमहीं मन्दिर माहीं, सुद्ध अबस्था माहीं, बिना भीड़ के साथ अउर बिना दंगा किहे, भेंट चढ़ाबत पाइन, हाँ, उहाँ आसिया सहर के रहँइ बाले कुछ यहूदी लोग रहे हँय, उनहीं इआ उचित रहा हय; 19कि अगर हमरे बिरोध माहीं उनखे लघे कउनव बात होत, त आसिया म अपना के आँगे आइके हमरे ऊपर दोस जरूर लगउतें। 20इआ, कि ईं पंचे खुदय बतामँइ, कि जब हम महासभा के आँगे ठाढ़ रहेन हय, तब ईं पंचे हमरे ऊपर कउन अपराध पाइन रहा हय? 21केबल एकठे इआ बात काहीं छोंड़िके, कि जउन हम इनखे बीच माहीं ठाढ़ होइके गोहराइके कहेन रहा हय, कि मरेन म से जिन्दा होंइ के बारे माहीं, आज अपना के आँगे हमार मुकदमा चल रहा हय।” 22अउर हाकिम फेलिक्स जउन इआ पंथ के बारे माहीं ठीक-ठीक जानत रहे हँय, उनहीं इआ कहिके टार दिहिन, कि जब सिपाहिन के मुखिया लूसियास अइहँय, तब तोंहरे बात के निरनय करब। 23अउर सुबेदार काहीं हुकुम दिहिन, कि “पवलुस काहीं कुछ छूट दइके रखबारी किहा, अउर उनखे साथिन म से कोहू काहीं उनखर सेबा करँइ से मना न किहा।”
हाकिम फेलिक्स अउर द्रुसिल्ला के आँगे पवलुस
24कुछ दिना के बाद हाकिम फेलिक्स अपने मेहेरिआ द्रुसिल्ला काहीं, जउन यहूदी जाति के रही हँय, अपने साथ माहीं लइके आएँ; अउर पवलुस काहीं बोलबाइके उआ बिसुआस के बारे माहीं, जउन मसीह यीसु के ऊपर हय, उनसे सुनिन। 25अउर जब ऊँ धरम अउर संयम अउर आमँइ बाले न्याय के चरचा करत रहे हँय, तब हाकिम फेलिक्स भयभीत होइके जबाब दिहिन, कि “अबे त जा, पय मोका पाइके हम तोंहईं पुनि बोलाउब।” 26उनहीं पवलुस से कुछ घूँस घलाय मिलँइ के आसा रही हय; एसे अउरव ऊँ पवलुस काहीं बोलबाय-बोलबाइके उनसे बात करा-करत रहे हँय। 27पय जब दुइ बरिस बीतिगें, तब पुरकियुस फेस्तुस हाकिम फेलिक्स के जघा माहीं हाकिम बनिके आइगें, अउर हाकिम फेलिक्स यहूदी लोगन काहीं खुसी करँइ के मनसा से, पवलुस काहीं जेल माहीं छोंड़ि गे रहे हँय।
25पवलुस महाराजा के दोहाई दिहिन
1एखे बाद हाकिम फेस्तुस उआ प्रदेस माहीं पहुँचिके तीन दिना के बाद, कैसरिया प्रदेस से यरूसलेम सहर माहीं गें। 2तब प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी जाति के कुछ मुखिया लोग, उनखे आँगे पवलुस के ऊपर लगाए दोसन काहीं बताइन। 3अउर उनसे बिनती कइके पवलुस के बिरोध माहीं इआ हुकुम चाहत रहे हँय, कि पवलुस काहीं यरूसलेम सहर माहीं बोलबाबा जाय, काहेकि ऊँ पंचे पवलुस काहीं गइलय माहीं मार डारँइ के घात माहीं लगे रहे हँय। 4तब हाकिम फेस्तुस उनहीं जबाब दिहिन, कि “पवलुस कैसरिया सहर माहीं पहरेदारी माहीं हें, अउर हम खुदय उहाँ हरबिन जाब।” 5अउर पुनि कहिन, “तोंहरे पंचन म से जेतने मुखिया होंय, त हमरे साथ चलँय, अउर अगर उआ मनई कुछ अनुचित काम किहिस होय त, ओखे ऊपर दोस लगामँय।”
6अउर उनखे बीच माहीं आठ दस दिना रहे के बाद, ऊँ कैसरिया सहर माहीं लउटिगें, अउर दुसरे दिना न्याय आसन माहीं बइठिके हुकुम दिहिन, कि पवलुस काहीं हाजिर कीन जाय। 7जब ऊँ पेस कीन गें, तब जउन यहूदी लोग यरूसलेम सहर से आएँ तय, ऊँ पंचे पवलुस काहीं घेरिके ठाढ़ होइके, उनखे ऊपर खुब बड़े-बड़े अरोप लगाइन, जिनखर ऊँ पंचे सबूत नहीं दए पाइन। 8पय पवलुस उनहीं जबाब दिहिन, कि “हम न त यहूदी लोगन के बिधान के अउर न मन्दिर के, अउर न राजा कैसर के बिरोध माहीं कुछू अपराध किहेन आय।” 9तब हाकिम फेस्तुस यहूदी लोगन काहीं खुसी करँइ के इच्छा से पवलुस काहीं जबाब दिहिन, “का तूँ चहते हया, कि यरूसलेम सहर माहीं जई; अउर उहाँ हमरे आँगे तोंहरे इआ मुकदमा के फँइसला कीन जाय?” 10तब पवलुस कहिन; “हम महाराजा कैसर के न्याय आसन के आँगे ठाढ़ हएन, हमरे मुकदमा के इहँय फँइसला होंइ चाही; जइसन कि अपना निकहा से जानित हएन, कि हम यहूदी लोगन के कुछू अपराध नहीं किहेन। 11अगर हम अपराधी हएन, अउर मार डारँइ के काबिल कउनव काम किहेन हय; त हम मरँइ से नहीं डेरई; पय जउने बातन के हमरे ऊपर ईं पंचे दोस लगाबत हें, अगर उनमा से कउनव बात सही न ठहरय, त कोऊ हमहीं इनखे हाँथ माहीं नहीं सउँप सकय, हम महाराजा कैसर के दोहाई देइत हएन।” 12तब हाकिम मन्त्रिन के सभा माहीं सलाह लिहे के बाद जबाब दिहिन, “तूँ महाराजा कैसर के दोहाई दिहा हय, एसे तूँ महाराजा कैसर के लघे जइहा।”
राजा अग्रिप्पा के आँगे पवलुस
13कुछ दिना बीते के बाद राजा अग्रिप्पा, अउर बिरनीके कैसरिया प्रदेस माहीं आइके हाकिम फेस्तुस से भेंट किहिन। 14अउर उनखे उहाँ कुछ दिना रहे के बाद, फेस्तुस पवलुस के बारे माहीं राजा काहीं बताइन; कि “एकठे मनई हय, जउने काहीं हाकिम फेलिक्स जेल माहीं छोंड़ गे हँय।” 15जब हम यरूसलेम सहर माहीं रहेन हय, त प्रधान याजक लोग, अउर यहूदी समाज के धारमिक अँगुआ लोग, उनखे ऊपर दोस लगाइन; अउर चाहत रहे हँय, कि उनहीं सजा देंइ के हुकुम दीन जाय। 16पय हम उनहीं जबाब दिहेन कि, रोम देस माहीं रहँइ बालेन माहीं इआ रिबाज नहिं आय, कि कउनव मनई काहीं सजा देंइ के खातिर सउँप दीन जाय, जब तक कि जउने मनई के ऊपर दोस लगाबा ग होय, ओही अपने ऊपर दोस लगामँइ बालेन के आमने-सामने ठाढ़ होइके, लगाए दोस के जबाब देंइ काहीं मोका न मिलय। 17एसे जब ऊँ पंचे इहाँ एकट्ठा भे रहे हँय, तब हम बेलकुल देर नहीं किहेन, बलकिन दुसरेन दिना न्याय आसन माहीं बइठिके, उआ मनई काहीं लइ आमँइ के हुकुम दिहेन। 18जब ओखे ऊपर दोस लगामँइ बाले ठाढ़ भें, तब ऊँ पंचे अइसन कउनव बुरी बातन के दोस नहीं लगाइन, जइसन हम समझत रहे हएन। 19पय ऊँ पंचे अपने धरम के, अउर यीसु नाम के कउनव मनई के बारे माहीं जउन मरिगे रहे हँय, अउर पवलुस उनहीं जिन्दा बताबत रहे हँय, इहय बिबाद करत रहे हँय। 20अउर हम उलझन माहीं रहे हएन, कि ईं बातन के पता कइसन लगाई? एसे हम उनसे पूँछेन, “का तूँ यरूसलेम सहर जइहा, कि उहँय ईं बातन के फँइसला होय?” 21पय जब पवलुस दोहाई दिहिन, कि “हमरे मुकदमा के फँइसला महाराजाधिराज के इहाँ होय।” तब हम हुकुम दिहेन, कि जब तक उनहीं महाराजा कैसर के लघे न पठउब, तब तक उनखर रखबारी कीन जाय। 22तब राजा अग्रिप्पा हाकिम फेस्तुस से कहिन, “हमहूँ उआ मनई के बातन काहीं सुनँय चाहित हएन”, तब ऊँ कहिन, “अपना काल्हय सुन लेब।”
23ओखे बाद दुसरे दिना, जब राजा अग्रिप्पा अउर बिरनीके बड़ी धूम-धाम से आइके सिपाहिन के मुखिअन, अउर सहर के बड़े मनइन के साथ दरबार माहीं पहुँचे, तब हाकिम फेस्तुस हुकुम दिहिन, कि “पवलुस काहीं लइ आबा जाय।” 24ओखे बाद हाकिम फेस्तुस कहिन; “हे महाराजा अग्रिप्पा, अउर हे सगले मनइव, जउन इहाँ हमरे साथ हया, तूँ पंचे इआ मनई काहीं देखते हया, जिनखे बारे माहीं सगले यहूदी लोग यरूसलेम सहर माहीं, अउर इहाँ घलाय चिल्लाय-चिल्लाइके हमसे बिनती किहिन, कि इनखर जिन्दा रहब उचित नहिं आय।” 25पय जब हम जान लिहेन, कि “ईं अइसन कुछू काम नहीं किहिन, कि मार डारे जाँय; अउर जब ऊँ खुदय महाराजाधिराज के दोहाई दिहिन, त हम इनहीं पठमँइ के निरनय लिहेन। 26पय हम इनखे बारे माहीं कउनव ठीक बात नहीं पाएन, कि अपने मालिक काहीं लिखी, एहिन से हम तोंहरे आँगे अउर खास करके हे महाराजा अग्रिप्पा, अपना के आँगे लइ आएन हँय, कि जाँच किहे के बाद हमहीं कुछू लिखँइ काहीं मिलय। 27काहेकि कइदी काहीं पठउब, अउर जउन दोस ओखे ऊपर लगाए गे हँय, उनहीं न बताउब, हमहीं बेकार जान परत हय।”
26राजा अग्रिप्पा के आँगे पवलुस अपने बातन काहीं बताइन
1राजा अग्रिप्पा पवलुस से कहिन; “तोंहईं अपने बारे माहीं बोलँइ के छूट ही।” तब पवलुस आपन हाँथ उठाइके जबाब देंइ लागें। 2“हे राजा अग्रिप्पा, जेतनी बातन के दोस यहूदी लोग हमरे ऊपर लगाबत हें, आज अपना के आँगे उनखर जबाब देंइ माहीं हम अपने-आप काहीं धन्य मानित हएन। 3खास करके एसे कि अपना यहूदी लोगन के बेउहारन, अउर बिबादन काहीं जानित हएन, एसे हम बिनती करित हएन, कि अपना बड़े धीरज के साथ हमरे बातन काहीं सुनी।
4जइसन हमार चाल-चलन सुरुआतय से, अपने जाति के मनइन के बीच माहीं, अउर यरूसलेम सहर माहीं रहा हय, इआ सगले यहूदी लोग जानत हें। 5ऊँ पंचे हमहीं खुब समय से पहिचानत आहीं, अगर ऊँ पंचे इआ चाहँय, त इआ बात के गबाही दइ सकत हें, कि हम अपने धरम के सगलेन से जादा खर पंथ के मुताबिक, एक फरीसी के रूप माहीं जीबन बितायन हय। 6अउर अब उआ वादा के आसा के कारन, जउन परमातिमा हमरे पंचन के बाप-दादन से किहिन रहा हय, हमरे ऊपर ओहिन के मुकदमा चल रहा हय। 7उहय वादा के पूर होंइ के आसा लगाए, हमार पंचन के बरहँव कुलन के मनई अपने पूरे मन से रातव-दिन परमातिमा के सेबा करत आएँ हँय। हे राजा इहय आसा के बारे माहीं यहूदी लोग हमरे ऊपर दोस लगाबत हें। 8जबकि परमातिमा मरेन काहीं जिआबत हें, त अपना के इहाँ इआ बात काहीं बिसुआस के काबिल काहे नहीं समझा जाय? 9हमहूँ पहिले सोचेन तय, कि नासरत सहर के रहँइ बाले यीसु के नाम के बिरोध माहीं, हमसे जेतना होइ सकय ओतना काम करँइ चाही। 10अउर हम यरूसलेम सहर माहीं अइसनय किहेन; अउर प्रधान याजकन से अधिकार पाइके, परमातिमा के खुब भक्तन काहीं जेल माहीं डरबाय दिहेन, अउर जब ऊँ पंचे मारि डारे जात रहे हँय, तब हमहूँ उनखे बिरोध माहीं सहमत रहत रहे हएन। 11अउर हरेक यहूदी सभाघरन माहीं, हम उनहीं सजा देबाय-देबाइके यीसु के बुराई कराबत रहे हएन, अउर क्रोध के मारे इहाँ तक पागल होइ गएन तय, कि दुसरे प्रदेस के सहरन माहीं घलाय जाइके, उनहीं परेसान करत रहे हएन।
अपने हिरदँय के बदलाव के बखान
12इहय धुन माहीं जब हम प्रधान याजकन से अधिकार पत्र लइके, दमिस्क काहीं चले जात रहे हएन। 13तब हे राजा, गइल माहीं दुपहर के समय हम अकास से सुरिज के उँजिआर से घलाय बढ़िके, एकठे जोति अपने अउर अपने साथ माहीं चलँइ बाले साथिन के चारिव कइती चमकत देखेन। 14अउर जब हम पंचे सगले जन भुँइ माहीं गिर परेन, तब हम इब्रानी भाँसा माहीं इआ बोल सुनेन, जउन हमसे कहत रहे हँय, कि ‘हे साऊल, हे साऊल, तूँ हमहीं काहे सतउते हया? हमरे बिरोध माहीं काम करे से तोंहईं बड़ा नुकसान होई।’ 15तब हम कहेन, ‘हे प्रभू अपना को आहेन?’ तब प्रभू कहिन, ‘हम यीसु आहेन, जेही तूँ सतउते हया। 16पय तूँ अब उठा, अपने गोड़ेन के बल ठाढ़ होइजा; काहेकि हम तोंहईं एसे दरसन दिहेन हय, कि तोंहईं उन बातन के गबाह अउर सेबक ठहराई, जउन तूँ देखे हया, अउर उनखर घलाय जिनखे खातिर हम तोंहईं दरसन देब। 17अउर हम तोंहईं तोंहरे जाति के मनइन से, अउर गैरयहूदी लोगन से बचाबत रहब, जिनखे लघे अब हम तोंहईं एसे पठइत हएन। 18कि तूँ उनखर आँखी खोला, जउने ऊँ पंचे अँधिआर से जोति कइती, अउर सइतान के अधिकार से परमातिमा कइती फिरँय; एसे उनहीं पापन से माफी मिली, अउर उन मनइन के बीच माहीं जघा पइहँय, जउन हमरे ऊपर बिसुआस किहे के कारन पबित्र कीन गे हँय।’
अपने कामन के बखान
19एसे हे राजा अग्रिप्पा, हम स्वरग के उआ दरसन के बात काहीं नहीं टारेन। 20बलकिन पहिले दमिस्क सहर के, ओखे बाद यरूसलेम सहर के रहँइ बालेन काहीं, ओखे बाद सगले यहूदिया प्रदेस माहीं, अउर गैरयहूदी लोगन काहीं समझाबत रहि गएन, कि अपने मन काहीं बदला, अउर परमातिमा कइती फिरिके अइसन काम करा, कि जउने मनई जानँइ कि तोंहार पंचन के जीबन बास्तव माहीं बदलिगा हय। 21ईं बातन के कारन यहूदी लोग हमहीं मन्दिर माहीं पकड़िके मारि डारँइ के कोसिस करँइ लागें। 22पय परमातिमा के सहायता से हम आज तक जिन्दा हएन, अउर छोट-बड़े सगलेन के आँगे गबाही देइत हएन, अउर उन बातन काहीं छोंड़िके कुछू नहीं कही, जउन परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले अउर मूसा घलाय कहिन, कि ऊँ पूर होंइ बाली हईं। 23कि मसीह काहीं दुख उठामँइ परी, अउर उँइन सगलेन से पहिले मरेन म से जि उठिके, हमरे जाति के मनइन माहीं अउर गैरयहूदी लोगन के बीच माहीं, जोति के प्रचार करिहँय।”
24जब ऊँ इआमेर से जबाब देत रहे हँय, तब हाकिम फेस्तुस खुब चन्डे कहिन; “हे पवलुस, तूँ पागल होइ गया हय, खुब बिद्या तोंहईं पागल कइ दिहिस ही।” 25पय पवलुस कहिन; “हे महामहिम हाकिम फेस्तुस, हम पागल नहिं आहेन, बलकिन सच्चाई अउर बुद्धी के बातँय कहित हएन। 26राजा घलाय जिनखे आँगे हम निडर होइके बोलि रहेन हय, ईं बातन काहीं जानत हें, अउर हमहीं बिसुआस हय, कि ईं बातन म से कउनव उनसे छिपी नहिं आय, काहेकि इआ घटना कउनव कोने माहीं नहीं भे आय। 27हे राजा अग्रिप्पा, का अपना परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के बिसुआस करित हएन? हाँ, हम जानित हएन, कि अपना बिसुआस करित हएन।” 28तब राजा अग्रिप्पा पवलुस से कहिन, “तूँ थोरिन काहीं समझाए से, हमहीं मसीही बनामँइ चहते हया?” 29तब पवलुस कहिन, “परमातिमा से हमार प्राथना इआ हय, कि का थोर माहीं, का बहुत माहीं, केबल अपनय भर नहीं, बलकिन जेतने जने आज हमरे बातन काहीं सुनत हें, ईं बन्धनन से अजाद होइके, ऊँ पंचे हमरे कि नाईं होइ जाँय।” 30तब राजा अउर हाकिम अउर बिरनीके अउर उनखे साथ बइठँय बाले उठिके ठाढ़ होइगें। 31अउर अलग जाइके आपस माहीं कहँइ लागें, “इआ मनई अइसा त कुछू नहीं करय, जउन मउत के सजा अउर जेल माहीं बन्द करँइ के काबिल होय।” 32तब राजा अग्रिप्पा हाकिम फेस्तुस से कहिन, “अगर इआ मनई महाराजा कैसर के दोहाई न देत, त छूटि सकत रहा हय।”
27पवलुस के रोम देस के यात्रा क्रेते टापू तक
1जब इआ निस्चित होइगा, कि हम जल जिहाज से इटली देस माहीं जई, तब ऊँ पंचे पवलुस अउर उनखे साथ कुछ अउर कइदिन काहीं घलाय, महाराजा अवगुस्तुस के सेना के एकठे सुबेदार काहीं सउँप दिहिन, जेखर नाम यूलियुस रहा हय। 2अउर अद्रमुत्तियुम नाम के एकठे जघा से हम पंचे एकठे जिहाज माहीं चढ़ गएन, जउन आसिया प्रदेस के किनारे के जघन से जाँइ बाला रहा हय, हम पंचे सगले जन चढ़िके जिहाज काहीं छोर दिहेन, अउर मकिदुनिया प्रदेस के थिस्सलुनीके सहर के रहँइ बाला, एकठे मनई हमरे पंचन के साथय रहा हय, जेखर नाम अरिस्तरखुस रहा हय। 3दुसरे दिना हम पंचे सैदा सहर माहीं लंगर डारेन, अउर यूलियुस पवलुस के ऊपर किरपा कइके, उनहीं अपने साथिन के लघे चले जाँइ दिहिन, कि उनखर स्वागत-सत्कार कीन जाय। 4ओखे बाद उहाँ से जिहाज काहीं छोर दिहेन, पय हबा उलटा होंय के कारन, हम पंचे साइप्रस टापू के आड़ माहीं होइके चल दिहेन। 5अउर किलिकिया अउर पंफूलिया प्रदेसन के लघे के समुद्र से होइके, लूसिया प्रदेस के मूरा सहर माहीं हम पंचे उतरेन। 6उहाँ सुबेदार काहीं सिकन्दरिया सहर के एकठे जिहाज मिला, जउन इटली जाँइ बाला रहा हय, अउर ऊँ हमहीं पंचन काहीं ओहिन माहीं चढ़ाय दिहिन। 7अउर जब हम पंचे खुब दिनन तक धीरे-धीरे चलत, बड़े मुस्किल से कनिदुस सहर के आँगे पहुँचेन, त हबा जिहाज काहीं आँगे बढ़इन नहीं देत रही आय, एसे हम पंचे सलमोने सहर के आँगे से होइके क्रेते टापू के आड़ माहीं चलेन। 8अउर ओखे किनारे-किनारे बड़े मुस्किल से चलिके “सुभ लंगरबारी” नाम के जघा माहीं पहुँचेन, उहाँ से लसया सहर लघेन रहा हय।
9जब खुब दिना बीतिगें, अउर पानी के यात्रा माहीं खतरा एसे होत रहा हय, कि उपबास के दिन अब बीत चुके रहे हँय, तब पवलुस उनहीं पंचन काहीं इआ कहिके समझाइन। 10कि “हे सज्जनव, हमहीं अइसा जान परत हय, कि इआ यात्रा माहीं बिपत्ती अउर खुब हानि न केबल माल अउर जिहाज के, बलकिन हमरे पंचन के प्रानन के घलाय होंय बाली हय।” 11पय सुबेदार पवलुस के बातन से कप्तान अउर जिहाज के मालिक के बातन काहीं बढ़िके मानिन। 12उआ बन्दरगाह जाड़ काटँय के खातिर निकहा नहीं रहा आय, एसे खुब जनेन के इआ बिचार रहा हय, कि उहाँ से जिहाज काहीं छोरिके अगर कउनव मेर से होइ सकय, त फीनिक्स सहर माहीं पहुँचिके जाड़ काटँय, उआ क्रेते टापू के एकठे बन्दरगाह आय, जउन दक्खिन-पच्छिम अउर उत्तर-पच्छिम कइती खुला रहा हय।
समुद्र माहीं तुफान
13जब दक्खिन कइत से कुछ कुछ हबा चलँय लाग, त इआ समझिके कि हमार पंचन के उद्देस पूर होइगा, तब लंगर काहीं उठाइके किनारे-किनारे क्रेते टापू के लघे से जाँइ लागेन। 14पय थोरिन देर माहीं उहाँ भुँइ से एकठे बड़ी आँधी उठी, जउन “यूरकुलीन” कहाबत रही हय। 15जब आँधी जिहाज से टकरान, तब उआ तेज हबा के आँगे ठहर नहीं सका, एसे हम पंचे ओही बहँइ दिहेन, अउर इहइमेर से हम पंचे बहत चले गएन। 16तब कउदा नाम के एकठे छोट काहीं टापू के आड़ माहीं, बहत हम पंचे बड़े मुस्किल से जिहाज काहीं काबू माहीं कइ सकेन। 17तब मल्लाह लोग जिहाज काहीं पेंदी से उठाइके, अउर बड़ी कोसिस कइके जिहाज काहीं रस्सन से लपेटिके बाँध दिहिन, कि कहँव सुरतिस नाम के जघा के उथल पानी के बारू माहीं फँसि न जाय, इआ डेर से ऊँ पंचे पाल काहीं उतार दिहिन, अउर जिहाज काहीं बहँय दिहिन। 18अउर जब हम पंचे आँधी से खुब हिलकोरा अउर धक्का खायन, त दुसरे दिना ऊँ पंचे जिहाज के समान फेंकइँ लागें। 19अउर तिसरे दिन, ऊँ पंचे अपने हाँथेन से जिहाज के समान फेंक दिहिन। 20अउर जब खुब दिना तक सुरिज अउर तरइया नहीं देखाने, अउर खुब तेज आँधी चलत रहिगे, त अन्त माहीं हमरे पंचन के बचँइ के कउनव आसा नहीं रहिगे।
21जब ऊँ पंचे खुब दिनन तक भूँखे रहि चुके, तब पवलुस उनखे बीच माहीं ठाढ़ होइके कहिन, “हे भाइव, अगर तूँ पंचे हमरे बात काहीं मानिके, क्रेते टापू से जिहाज काहीं न छोर त्या, त इआ बिपत्ती अउर हानि न उठउत्या। 22पय अब हम तोंहईं पंचन काहीं समझाइत हएन, कि ढाढ़स बाँधा; काहेकि तोंहरे पंचन म से कोहू के प्रान के हानि न होई, केबल जिहाज के भर होई। 23काहेकि परमातिमा जिनखर हम सेबक आहेन, अउर जिनखर हम सेबा करित हएन, उनखर स्वरगदूत आज रात माहीं हमरे लघे आइके कहिन, 24‘हे पवलुस, न डेरा, तोंहईं महाराजा कैसर के आँगे ठाढ़ होब जरूरी हय, अउर देखा, परमातिमा सगलेन काहीं जउन तोंहरे साथ माहीं यात्रा करत हें, तोंहईं सउँप दिहिन हीं।’ 25एसे हे सज्जनव, ढाढ़स बाँधा; काहेकि हम परमातिमा के बिसुआस मानित हएन, कि जइसन हमसे बताबा ग हय, ठीक उहयमेर होई। 26पय हम पंचे कउनव टापू के उथल पानी माहीं जरूर जाय फँसब।”
जिहाज के टूटब
27जब चउदहमी रात भय, अउर हम पंचे आद्रिया नाम के समुद्र माहीं भटकत फिरत रहेन हँय, तब आधी रात के करीब मल्लाह अंदाज लगाइन, कि हम पंचे कउनव देस के लघे पहुँच रहेन हँय। 28अउर थाह लिहिन त ऊँ पंचे उहाँ पानी काहीं बीस पोरसा पाइन, अउर थोर काहीं आँगे बढ़िके पुनि थाह लिहिन, त पन्द्रा पोरसा पाइन। 29तब पथरही जघन से टकराय जाँइ के डेर से, ऊँ पंचे जिहाज के पीछे कइती चारठे लंगर डारिन, अउर भिनसार होंइ के इच्छा करत रहिगें। 30पय जब मल्लाह जिहाज से भागँय चाहत रहे हँय, अउर गलही से लंगर डारँइ के बहाना कइके रक्छा नावन काहीं समुद्र माहीं उतार दिहिन। 31तब पवलुस सुबेदार अउर सिपाहिन से कहिन; अगर ऊँ पंचे जिहाज माहीं न रइहँय, त तुहूँ पंचे न बचे पइहा। 32तब कुछ सिपाही रस्सी काटिके रक्छा नावन काहीं समुद्र माहीं गिराय दिहिन।
33जब भिनसार होंइ बाला रहा हय, तब पवलुस इआ कहिके, सब काहीं खाना खाँइ काहीं समझाइन, कि आज से चउदा दिन होइगें, अउर तूँ पंचे पहुँचँय के आसा कए भूँखे रहि गया, अउर कुछू नहीं खाया। 34एसे हम तोंहईं समझाइत हएन, कि कुछू खाय ल्या, जउने तूँ पंचे जिअत रहा; काहेकि तोंहरे पंचन म से कोहू के मूँड़े के एकठे बारव तक न गिरी। 35अउर एतना कहिके, ऊँ रोटी लइके सगलेन के आँगे परमातिमा के धन्यबाद किहिन; अउर टोरिके खाँइ लागें। 36इआ देखिके, ऊँ पंचे सगले जन ढाढ़स बाँधिके खाना खाँइ लागें। 37अउर हम पंचे सगले जन मिलिके जिहाज माहीं, दुइ सव छिहत्तर जने रहेन हँय। 38जब ऊँ पंचे खाना खाइके संतुस्ट होइगें, तब गोहूँ काहीं समुद्र माहीं फेंकिके जिहाज काहीं हलुक करँइ लागें।
39जब सकार भ, तब ऊँ पंचे नहीं जाने पाइन, कि उआ कउन देस आय, पय एकठे खाड़ी देखिन जेखर समथर किनारा रहा हय, अउर आपस माहीं बिचार किहिन, कि अगर होइ सकय, त एहिन माहीं जिहाज काहीं टिकाई। 40तब ऊँ पंचे लंगरन काहीं छोर दिहिन, अउर उहय समय पतबारन के बन्धन छोर दिहिन, अउर हबा के आँगे-आँगे के पाल चढ़ाइके किनारे कइती चल दिहिन। 41अउर उनखर जिहाज बारू माहीं टकराइगा, अउर जिहाज के आँगे के हिस्सा ओमाहीं फँसिके जाम होइगा, पय तेज लहरन के कारन जिहाज के पीछे के हिस्सा टूटँइ लाग 42तब सिपाहिन के इआ बिचार आबा कि, कइदिन काहीं मारि डारी; अइसन न होय, कि कउनव पइरके भाग जाय। 43पय सुबेदार पवलुस काहीं बचामँइ के इच्छा से उनहीं इआ बिचार से रोंकिन, अउर इआ कहिन, कि “जे पइर सकत हय, त पहिले कूदिके किनारे माहीं चला जाय। 44अउर बाँकी जे बचँइ त पटरन के ऊपर, अउर कोऊ जिहाज के अउर दुसरे चीजन के सहारे से निकर जाँय”, अउर इआमेर से सगले जन बचिके भुँइ माहीं निकरिगें।
28माल्टा नाम के टापू माहीं पवलुस
1जब हम पंचे बचिके निकर गएन, तब जाने पाएन, कि इआ टापू के नाम माल्टा हय। 2अउर उहाँ के रहँइ बाले हमरे पंचन के ऊपर बड़ी किरपा किहिन; काहेकि लगीतार बारिस के कारन, अउर जाड़े के कारन; ऊँ पंचे आगी बारिके हमहीं पंचन काहीं अपने इहाँ ठहराइन। 3जब पवलुस झुरान लकड़िन के एकठे बोझा आगी माहीं धरिन, त एकठे साँप आगी के आँच से निकरा, अउर उनखे हाँथ माहीं लपिटिगा। 4जब उहाँ के रहँइ बाले साँप काहीं पवलुस के हाँथे माहीं लपिटे देखिन, त आपस माहीं कहँइ लागें; “सही माहीं इआ मनई कतली हय, काहेकि इआ समुद्र से त बचिगा, तऊ न्याय एही जिन्दा नहीं रहँइ दिहिस।” 5पय पवलुस साँप काहीं आगी माहीं झिटिक दिहिन, अउर उनहीं कउनव हानि नहीं भय। 6पय ऊँ पंचे इआ इन्तजार माहीं रहे हँय, कि ऊँ फूल जइहँय, इआ कि अचानक गिरिके मर जइहँय, पय जब ऊँ पंचे खुब देर तक देखत रहिगें, अउर देखिन, कि उनहीं कुछू नहीं भ, त आपन बिचार बदलिके कहँइ लागें, “ईं त कउनव देउता आहीं।”
7अउर उआ जघा के लघेन उआ टापू के मुखिया पुबलियुस के भुँइ रही हय, ऊँ हमहीं पंचन काहीं अपने घर माहीं लइ जाइके, तीन दिना तक अपने साथी कि नाईं स्वागत-सत्कार किहिन। 8अउर पुबलियुस के बाप बोखार अउर खून बाली पेंचिस से परेसान परे रहे हँय, एसे पवलुस उनखे लघे घर माहीं जाइके प्राथना किहिन, अउर उनखे ऊपर आपन हाँथ धइके उनहीं नीक कइ दिहिन। 9इआ कारन से उआ टापू के खुब बिमार उनखे लघे आएँ, अउर नीक होइके गें। 10अउर ऊँ पंचे हमार पंचन के खुब आदर सत्कार किहिन, अउर जब हम पंचे उहाँ से चलँइ लागेन, तब जउन कुछू हमहीं पंचन काहीं जरूरत रही हय, उन सगली चीजन काहीं ऊँ पंचे जिहाज माहीं धरबाय दिहिन।
माल्टा दीप से रोम देस कइती जाब
11अउर तीन महीना के बाद, हम पंचे सिकन्दरिया सहर के एकठे जिहाज माहीं चढ़िके चल दिहेन, जउन उआ टापू माहीं जाड़े के कारन रुका रहा हय; जेखर चिन्हारी दियुसकूरी रही हय। 12सुरकूसा सहर माहीं हम पंचे लंगर डारिके तीन दिना तक रहे आएन। 13ओखे बाद उहाँ से जिहाज माहीं चढ़िके, हम पंचे रेगियुम सहर माहीं पहुँचेन: अउर दुसरे दिना पुतियुली सहर माहीं आएन। 14उहाँ हमहीं पंचन काहीं बिसुआसी भाई मिलें, अउर उनखे कहे से हम पंचे उनखे इहाँ सात दिना तक रुके रहेन; अउर इआमेर से उहाँ से रोम देस काहीं चल दिहेन। 15जब उहाँ के बिसुआसी भाइन काहीं हमरे चले जाँय के खबर मिली, त ऊँ पंचे अप्पियुस सहर के बजार अउर तीन सराय सहर तक, हम लोगन से मिलँइ के खातिर आएँ, अउर जब पवलुस उनहीं देखिन, त परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके खुब उत्साहित भें। 16अउर जब हम पंचे रोम देस माहीं पहुँचेन, त पवलुस काहीं एकठे सिपाही के साथ जउन उनखर रखबारी करत रहा हय, अकेले रहँइ के हुकुम मिला।
रोम देस माहीं पवलुस
17तीन दिना के बाद, पवलुस यहूदी जाति के मुख्य मनइन काहीं बोलबाइन, अउर जब ऊँ पंचे एकट्ठा भें, तब उनसे कहिन, “हे भाइव हम अपने जाति बालेन, इआ कि बाप-दादन के रीति-रिबाजन के खिलाफ कुछू काम नहीं किहेन, तऊ बन्दी बनाइके यरूसलेम सहर से रोम देस के रहँइ बालेन के हाँथे सँउपे गएन। 18ऊँ पंचे हमहीं जाँचे-परखे के बाद, छोंड़ देंइ चाहिन, काहेकि हमरे ऊपर मउत के सजा के काबिल कउनव दोस नहीं पाइन। 19पय जब यहूदी लोग, एखे बिरोध माहीं बोलँइ लागें, त हमहीं महाराजा कैसर के दोहाई देंइ परिगा, एसे नहीं कि हमहीं अपने जाति के मनइन के ऊपर दोस लगामँइ काहीं रहा हय। 20बलकिन एसे हम अपना पंचन काहीं बोलायन हय, कि अपना पंचन से मिली अउर बातचीत करी; काहेकि इजराइल के मनई जउने मसीहा के आमँइ के आसा कए रहे हँय, उहय मसीह के कारन हम इआ जंजीर माहीं बँधे हएन। 21तब ऊँ पंचे उनसे कहिन; हम पंचे तोंहरे बारे माहीं यहूदिया प्रदेस से न त कउनव चिट्ठी पाएन, अउर न त बिसुआसी भाइन म से, कोऊ आइके तोंहरे बारे माहीं बताइन, अउर न त कुछू गलतय कहिन। 22पय तोंहार बिचार का हय? उहय हम पंचे तोंहसे सुनँय चाहित हएन, काहेकि हम पंचे जानित हएन, कि हरेक जघा इआ मत के बिरोध माहीं खुब मनई बातँय करत हें।”
23ओखे बाद ऊँ पंचे उनखे खातिर एकठे दिन ठहराइन, अउर खुब मनई उनखे इहाँ एकट्ठा भें, अउर ऊँ परमातिमा के राज के गबाही देत, अउर मूसा के बिधान अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के किताबन से, यीसु के बारे माहीं समझाबत भिनसार से लइके, साँझ तक बखान करत रहिगें। 24तब कुछ जने उनखे कही बातन काहीं मान लिहिन, अउर कुछ जने उनखे बातन के बिसुआस नहीं मानिन। 25जब ऊँ पंचे आपस माहीं एक मत नहीं भें, तब पवलुस के एकठे इआ बात कहे के कारन, ऊँ पंचे उहाँ से चलेगें, कि “पबित्र आत्मा परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले यसायाह के द्वारा तोंहरे बाप-दादन से निकहा कहिन तय, कि जाइके ईं मनइन से कहा।
26‘कि सुनत 28:26 यसा 6:7-10त रइहा, पय समझे न पइहा’, अउर ‘देखत त रइहा, पय जाने न पइहा।’
27काहेकि ईं मनइन के मन मोट, अउर उनखर कान बहिर होइगे हँय, अउर ऊँ पंचे अपने आँखिन काहीं मूँद लिहिन हीं, अइसा न होय, कि ऊँ पंचे कबहूँ आँखिन से देखँय, अउर कानन से सुनँय, अउर मन से समझँय, अउर हमरे कइती फिरँय, अउर हम उनहीं पंचन काहीं चंगा करी।
28एसे तूँ पंचे जाना, कि परमातिमा के इआ मुक्ती के कथा, गैरयहूदी लोगन के लघे पठई गे ही, अउर ऊँ पंचे सुनिहँय।” 29जब ऊँ इआ बात कहिन, त यहूदी लोग आपस माहीं खुब बिबाद करँइ लागें, अउर उहाँ से चलेगें।
30अउर उहाँ पवलुस दुइ बरिस तक अपने किराया के घर माहीं रहें। 31अउर जे उनखे लघे आबत रहे हँय, उन सगलेन से ऊँ मिलत रहे हँय, अउर बिना रोंक-टोंक के खुब निडर होइके, परमातिमा के राज के प्रचार करत रहे हँय, अउर प्रभू यीसु मसीह के बातन काहीं सिखाबत रहे हँय।