कुरिन्थुस सहर के मसीही मन्डली के नाम लिखी पवलुस के दूसर चिट्ठी
इआ चिट्ठी के परिचय
कुरिन्थुस सहर माहीं रहँइ बाले मसीही लोगन के नाम लिखी पवलुस के दूसर चिट्ठी, उआ समय लिखी गे रही हय, जब पवलुस काहीं कुरिन्थुस सहर के कुछ बिसुआसी लोग गलत समझत रहे हँय, मसीही मन्डली के कुछ मनई पवलुस के ऊपर खुले आम कइयकठे गम्भीर अरोप लगाइन तय। पय पवलुस इआ चिट्ठी माहीं उनसे मेल-मिलाप करँइ के आपन बड़ी इच्छा प्रगट करत हें, अउर इआ चिट्ठी माहीं पवलुस कुरिन्थुस सहर के बिसुआसी लोगन के खातिर अपने गहरी भावनन काहीं प्रगट करत हें, अउर जब उनसे मेल-मिलाप होइ जात हय, त अपने बड़े आनन्द काहीं घलाय प्रगट करत हें।
इआ चिट्ठी के पहिल भाग माहीं पवलुस कुरिन्थ सहर के मसीही मन्डली के साथ अपने सम्बन्ध के बारे माहीं बिचार करत हें, अउर उनहीं समझाबत हें, कि हम काहे मसीही मन्डली से कठोर बेउहार किहेन हय, अउर एखे बाद अपने आनन्द काहीं घलाय प्रगट करत हें, कि हमरे कठोरता के परिनाम, पस्चाताप अउर मेल-मिलाप भ हय, अउर एखे बाद ऊँ मसीही मन्डली से, यहूदिया प्रदेस के गरीब बिसुआसी लोगन के खातिर उदारता से दान देंइ के निबेदन करत हें। अउर चिट्ठी के अन्त माहीं पवलुस कुरिन्थुस सहर के कुछ लोगन के बिरुद्ध बात कहत हें, जउन अपने-आप काहीं यीसु मसीह के खास चेला बताबत रहे हँय, जबकि रहे नहिं आहीं, अउर पवलुस के ऊपर अरोप लगाबत रहे हँय, कि पवलुस यीसु मसीह के खास चेला न होंहीं।
अपना पंचे आपस माहीं मिल जुलिके रही, अउर दुसरे भाई-बहिनिन के मदत करी, अउर परमातिमा अपने साथ मनइन के मेल-मिलाप करँइ के जउन सेबा हमहीं पंचन काहीं सँउपिन हीं, ओही पूर करी।
रूप-रेखा :
इआ चिट्ठी के परिचय 1:1-11
पवलुस अउर कुरिन्थुस सहर के मसीही मन्डली 1:12—7:16
यहूदिया प्रदेस के मसीही लोगन के खातिर दान 8:1—9:15
पवलुस खुद काहीं यीसु मसीह के खास चेला होंइ के अधिकार के समरथन करत हें 10:1—13:10
उपसंहार 13:11-14
1पवलुस के अभिबादन
1हम पवलुस इआ चिट्ठी काहीं लिख रहेन हय, जउन परमातिमा के मरजी से यीसु मसीह के खास चेला आहेन, अउर इआ चिट्ठी हमरे अउर हमरे बिसुआसी भाई तीमुथियुस के तरफ से परमातिमा के मसीही मन्डली काहीं मिलय, जउन कुरिन्थुस सहर माहीं ही, अउर अखाया प्रदेस के सगले पबित्र भाई-बहिनिन काहीं घलाय मिलय। 2अउर हमरे पंचन के पिता परमातिमा अउर प्रभू यीसु मसीह के तरफ से तोंहईं पंचन काहीं किरपा अउर सान्ती मिलत रहय।
परमातिमा काहीं पवलुस के धन्यबाद
3हम पंचे अपने प्रभू यीसु मसीह के पिता परमातिमा काहीं धन्यबाद देइत हएन, जउन दया करँइ बाले पिता अउर हरेकमेर के सान्ती देंइ बाले परमातिमा आहीं। 4अउर उँइन हमरे पंचन के हरेक बिपत्तिन माहीं सान्ती देत हें, जउने हमहूँ पंचे उआ सान्ती के कारन, जउन परमातिमा हमहीं पंचन काहीं देत हें, उनहीं घलाय सान्ती दइ सकी, जउन कउनव मेर के बिपत्तिन माहीं परे होंय। 5काहेकि हम पंचे जइसन मसीह के दुखन माहीं जेतनय जादा भागीदार बनत जइत हएन, ओतनय जादा हम पंचे सान्ती माहीं घलाय मसीह के द्वारा भागीदार बनित हएन। 6अगर हम पंचे खुब कस्ट पाइत हएन, त इआ तोंहरे पंचन के मुक्ती अउर सान्ती के खातिर आय, अउर अगर सान्ती पाइत हएन, त इहव तोंहरे सान्ती के खातिर आय; इहय सान्ती के असर से तुहूँ पंचे घलाय, धीरज के साथ उन दुखन काहीं सहि लेते हया, जिनहीं हमहूँ पंचे घलाय सहित हएन। 7अउर तोंहरे पंचन के बारे माहीं, हमहीं पंचन काहीं पूर आसा ही, काहेकि हम पंचे जानित हएन, कि जइसन तूँ पंचे हमरे दुखन माहीं भागीदार हया, उहयमेर सान्ती के घलाय भागीदार हया। 8हे भाई-बहिनिव, हम पंचे इआ चाहित हएन, कि तूँ पंचे हमरे पंचन के दुखन के बारे माहीं जाना, जउन आसिया प्रदेस माहीं हमरे पंचन के ऊपर परा रहा हय, हम पंचे अइसन बड़ी भारी बिपत्ती माहीं परि गएन तय, जउन हमरे पंचन के सहँय से बाहर रही हय, इहाँ तक कि हम पंचे जिन्दा रहँइ के आसा घलाय छोंड़ि दिहेन तय। 9बलकिन हम पंचे अपने-अपने मनन माहीं इआ समझ लिहेन तय, कि हमहीं पंचन काहीं मउत के सजा मिल चुकी हय। जउने हम पंचे अपने ऊपर भरोसा न करी, बलकिन परमातिमा के ऊपर पूरा भरोसा करी, जउन मरेन काहीं घलाय जिआबत हें। 10उँइन हमहीं पंचन काहीं उआ बड़े भारी मउत के संकट से बचाइन हीं, अउर बचउतय रइहँय, अउर हमार पंचन के उनहिन के ऊपर पूर आसा ही, कि उँइन हमहीं पंचन काहीं भबिस्य माहीं घलाय बचाबत रइहँय। 11अउर तुहूँ पंचे घलाय मिलिके हमरे पंचन के खातिर प्राथना कइके, हमार पंचन के मदत कइ रहे हया, काहेकि हमहीं पंचन काहीं जउन बरदान खुब मनइन के प्राथना के द्वारा मिला हय, ओहिन के कारन खुब मनई हमरे पंचन के तरफ से परमातिमा के धन्यबाद करिहँय।
पवलुस के यात्रा के योजना माहीं बदलाव
12हमहीं पंचन काहीं इआ बात के घमन्ड हय, कि हम इआ बात सच्चे मन से कहि सकित हएन, कि हम पंचे इआ संसार के मनइन के साथ, अउर खास करके तोंहरे पंचन के साथ, परमातिमा के किरपा के मुताबिक बेउहार किहेन हय। हम पंचे उआ बेउहार सरलता अउर सच्चाई के साथ किहेन हँय, जउन परमातिमा से मिलत हय, अउर उआ संसार के बुद्धी से नहीं मिलय। 13हम पंचे अइसन कउनव बात नहीं लिखे आहेन, कि जउने काहीं तूँ पंचे समझे न पाबा, बलकिन हम उहय लिखे हएन, जउने काहीं तूँ पंचे पढ़ते अउर मनते घलाय हया, अउर हमहीं पंचन काहीं इआ आसा ही, कि तूँ पंचे ओही पूरी तरह से मनतव रइहा। 14जइसन तोंहरे पंचन म से कुछ जने मानिव लिहिन ही, कि हम पंचे तोंहरे घमन्ड करँइ के कारन हएन; उहयमेर प्रभू यीसु के न्याय करँइ के दिन, तुहूँ पंचे घलाय हमरे पंचन के खातिर घमन्ड के कारन ठहरिहा। 15अउर इहय भरोसा से हम चाहत रहेन हय, कि पहिले तोंहरे पंचन के लघे अई; जउने तोंहईं दुसराय आसिरबाद के फायदा मिल सकय। 16अउर हम सोचित हएन, कि तोंहसे मिलिके मकिदुनिया प्रदेस काहीं जई, अउर पुनि मकिदुनिया से तोंहरे लघे अई, त फेर तूँ पंचे यहूदिया प्रदेस जाँइ के खातिर हमार प्रबन्ध करा। 17हम जब इआ योजना बनाएन तय, तब हमहीं कउनव संका नहीं रही आय, काहेकि जब हम योजना बनाएन तय, त उआ संसारिक मनइन कि नाईं नहीं बनाएन तय। जउन “हाँ” त बोलत हें, पय सही माहीं ओखर मतलब “न” होत हय। 18काहेकि परमातिमा बिसुआस के काबिल हें, अउर ऊँ एखर गबाही देइहँय, कि तोंहरे पंचन के खातिर हमार पंचन के जउन बात ही, ओमाहीं एक साथय “हाँ” अउर “न” दोनव नहीं होय। 19काहेकि परमातिमा के लड़िका यीसु मसीह जिनखर हमरे पंचन के द्वारा, अरथात हमरे अउर सिलवानुस अउर तीमुथियुस के द्वारा तोंहरे पंचन के बीच माहीं प्रचार कीन ग हय; ओमाहीं “हाँ” अउर “न” दोनव नहीं रहा आय; बलकिन ओमा केबल “हाँ” भर रहा हय। 20काहेकि परमातिमा जेतने वादा किहिन हीं, ऊँ सगले यीसु माहीं, सगले मनइन के खातिर “हाँ” बन जात हें, एसे हम पंचे यीसु मसीह के द्वारा “आमीन” घलाय कहित हएन, कि जउने हमरे पंचन के द्वारा परमातिमा के बड़ाई होय। 21अउर जउन हमहीं पंचन काहीं तोंहरे साथ मसीह माहीं मजबूत करत हें, अउर जउन हमार पंचन के अभिसेक किहिन हीं, उँइन परमातिमा आहीं। 22अउर उँइन हमरे पंचन के ऊपर आपन छाप लगाय दिहिन हीं, अउर बयाना माहीं पबित्र आत्मा काहीं हमरे पंचन के भीतर डार दिहिन हीं। 23हम परमातिमा काहीं गबाह मानिके, अउर अपने जीबन के कसम खाइके कहित हएन, कि हम अबय तक कुरिन्थुस सहर माहीं एसे नहीं आएन, कि हम तोंहईं पंचन काहीं दुख नहीं देंइ चाहत रहेन आय। 24तोंहरे पंचन के बिसुआस के बारे माहीं, हम तोंहरे ऊपर आपन अधिकार नहीं जतामँइ चाहित आहेन; बलकिन हम तोंहरे आनन्द माहीं सामिल हएन, काहेकि तूँ पंचे बिसुआस माहीं मजबूत बने रहते हया।
21हम अपने मन माहीं इहय ठान लिहेन तय, कि पुनि तोंहरे पंचन के लघे, तोंहईं दुख देंइ न अउब। 2काहेकि अगर हम तोंहइन पंचन काहीं दुखी करब, त हमहीं आनन्द को देई? काहेकि हमहीं आनन्द देंइ बाले त तुहिन पंचे आह्या। 3अउर हम इहय बात तोंहईं एसे लिखेन हय, कि कहँव अइसा न होय, कि जब हम तोंहरे पंचन के लघे अई, त जिनसे हमहीं आनन्द मिलँइ चाही, त हम उनहिन के कारन दुखी होई; काहेकि हमहीं तोंहरे सगले जनेन के ऊपर इआ बात के भरोसा हय, कि जउन आनन्द हमार हय, उआ तोंहरव पंचन के घलाय आनन्द हय। 4काहेकि हम तोंहईं पंचन काहीं बड़े दुखी मन से अउर बड़े कस्ट के साथ आँसू बहाय-बहाइके इआ लिखेन हय; पय तोहईं पंचन काहीं दुखी करँइ के खातिर नहीं, बलकिन एसे लिखेन हय, कि जउने तूँ पंचे हमरे प्रेम काहीं जानिल्या, कि हम तोंहसे केतना प्रेम करित हएन।
अपराधी काहीं माफ करब
5पय अगर कोऊ हमहीं दुखी किहिस ही, त उआ केबल हमहिन भर काहीं नहीं, बलकिन थोरी-बहुत तोंहईं सगलेन काहीं घलाय दुखी किहिस ही। 6अइसन मनई के खातिर इआ सजा काफी हय, जउन तोंहरे पंचन म से कुछ जने ओही दिहिन हीं। 7एसे नीक त इआ हय, कि ओखर अपराध माफ करा, अउर ओही उत्साहित करा, कहँव अइसन न होय कि उआ मनई बड़े भारी दुख माहीं बूड़ जाय। 8इआ कारन हम तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि ओसे अब पहिले से जादा प्रेम करा। 9काहेकि हम तोंहईं पंचन काहीं अजमामँइ के उद्देस्य से इआ लिखेन तय, अउर हम इआ जानँइ चाहत रहेन हय, कि तूँ पंचे हमरे सगली बातन काहीं मानँइ के खातिर तइआर हया, कि नहीं? 10अउर अगर तूँ पंचे कोहू काहीं कउनव बात के खातिर माफ करते हया, त ओही हमहूँ माफ करित हएन, अउर जउन कुछू हम माफ किहेन हय, त उआ तोंहरे पंचन के कारन मसीह काहीं हाजिर जानिके किहेन हय। 11कि जउने हम पंचे सइतान के चंगुल माहीं न फँसे पाई, काहेकि हम पंचे ओखे चाल काहीं निकहा से जानित हएन।
त्रोआस सहर माहीं पवलुस के ब्याकुल होब
12जब हम मसीह के खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर त्रोआस सहर माहीं आएन, त उहाँ खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर प्रभू निकहा मोका दिहिन तय। 13तऊ हमार मन ब्याकुल रहा हय, काहेकि हम उहाँ अपने मसीही भाई तीतुस काहीं नहीं पाएन तय; एसे हम उनसे बिदा लइके मकिदुनिया प्रदेस काहीं चल दिहेन।
मसीह माहीं बिजय-अभियान
14पय परमातिमा के धन्यबाद होय, जउन मसीह के द्वारा अपने बिजय-अभियान माहीं हमहीं पंचन काहीं हमेसा गइल देखाबत हें। अउर हमरे पंचन के द्वारा अपने ग्यान के महक हरेक जघन माहीं फइलाबत हें। 15काहेकि हम पंचे परमातिमा के नजर माहीं, मुक्ती पामँइ बालेन, अउर नास होंइ बालेन दोनव के खातिर मसीह के महक आहेन। 16पय उनखे खातिर जउन नास होंइ बाले हें, इआ मउत के अइसन बदबू आय, जउन मउत कइती लइ जात ही। पय उनखे खातिर जउन मुक्ती के गइल माहीं बढ़त जात हें, इआ जीबन के अइसन महक आय जउन अनन्त जीबन कइती लइ जात ही, अउर ईं कामन के काबिल को हय? 17काहेकि हम पंचे ऊँ खुब मनइन कि नाईं नहिं आहेन, जउन खुद के फायदा के खातिर परमातिमा के बचन माहीं मिलाबट कइके प्रचार करत हें, बलकिन हम पंचे अपने सच्चे मन से, परमातिमा के तरफ से, अउर परमातिमा काहीं हाजिर जानिके, मसीह के प्रचार करित हएन।
3नई करार के सेबक
1एसे का तोंहईं पंचन काहीं अइसन लागत हय, कि हम पंचे पुनि आपन बड़ाई खुदय करँइ लागेन हय? का हमहीं पंचन काहीं दुसरे मनइन कि नाईं इआ जरूरी हय, कि हम पंचे तोंहईं सिपारिस के चिट्ठी देखाई, इआ कि तोंहसे मागी? 2हमार पंचन के चिट्ठी त तुहिन पंचे आह्या, जउन हमरे पंचन के हिरदँय माहीं लिखी हय, अउर ओही सगले मनई जनतिव हें, अउर पढ़तिव हें। 3अउर तुहूँ पंचे घलाय त इहइमेर देखउते हया, कि तूँ पंचे मसीह के चिट्ठी आह्या। जउने काहीं हम पंचे सेबकन कि नाईं लिखेन हय; जउन स्याही से नहीं, बलकिन जिन्दा परमातिमा के आत्मा से, पथरा के पटिया माहीं नहीं, बलकिन हिरदँय रूपी पटिया माही लिखी हय। 4अउर हम पंचे मसीह के द्वारा परमातिमा के ऊपर इहइमेर भरोसा रक्खित हएन। 5अइसन नहिं आय, कि हम पंचे एतने काबिल हएन, कि सोचँइ लागी, कि हम पंचे खुद कुछू काम कइ सकित हएन। बलकिन हमहीं पंचन काहीं काबिल बनामँइ बाले परमातिमा आहीं। 6उँइन हमहीं पंचन काहीं नई करार के सेबक बनँइ के काबिल बनाइन हीं। मूसा के बिधान के सेबक नहीं, बलकिन पबित्र आत्मा के सेबक बनाइन हीं, काहेकि मूसा के बिधान मउत के सजा सुनाबत हय, पय पबित्र आत्मा जीबन देत हय।
7अगर मउत के सजा देंइ बाली उआ करार, जेखर अच्छर पथरा माहीं खोदिके लिखे गे रहे हँय, एतना तेजोमय रही हय, कि मूसा के मुँहे के तेज चमक के कारन, जउन कमव होत जात रहा हय। इजराइली लोग ओखे मुँहे कइती निहारे नहीं पाबत रहे आँय। 8त आत्मा के करार, ओहू से बढ़िके तेज चमकँइ बाली काहे न होई? अरथात जरूर होई। 9काहेकि जब दोसी ठहरामँइ बाली करार, तेज चमकँइ बाली रही हय, त परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहरामँइ बाली करार, ओहू से बढ़िके तेज चमकँइ बाली काहे न होई? 10अउर अगर तेज चमकँइ बाली नई करार, के तुलना चमकँइ बाली पुरान करार से कीन जाय, त चमकँइ बाली पुरान करार के चमक ओखे आँगे कुछू न होय। 11काहेकि पुरान करार के चमक जउन घटत जात रही हय, तऊ एतना चमकत रही हय। त उआ करार जउन हमेसा रहँइ बाली हय, ओसे बढ़िके चमकँइ बाली काहे न होई?
12इहय आसा के कारन हम पंचे निडर होइके बोलित हएन। 13हम पंचे मूसा नबी कि नाईं नहिं आहेन, जउन अपने मुँहे माहीं परदा डारे रहे हँय, कि जउने इजराइली लोग घटँय बाली उआ चमक के अन्त काहीं न देखे पामँय। 14पय उनखर बुद्धी कमजोर होइगे रही हय, काहेकि आजव तक पुरान नेम पढ़त समय, उनखे हिरदँय माहीं उहय परदा परा रहत हय। पय मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन उआ परदा हटि जात हय। 15अउर आजव जब-जब मूसा के लिखी किताब पढ़ी जात ही, त उनखे मन माहीं उआ परदा परा रहत हय। 16पय जब कबहूँ ऊँ पंचे प्रभू के ऊपर बिसुआस करिहँय, त उआ परदा परमातिमा के द्वारा हटाय दीन जई। 17काहेकि प्रभू त आत्मा आहीं: अउर जहाँ- जहाँ प्रभू के आत्मा रहत हय, उहाँ जरूर छुटकारा मिलत हय। 18पय हमरे पंचन के चेहरा माहीं परदा नहिं आय, प्रभू के महिमा के चमक हमरे पंचन के चेहरा के द्वारा दुसरेन काहीं देखाई देत ही। जइसन अइना माहीं, त प्रभू के द्वारा जउन आत्मा आहीं, हम पंचे उनखे तेज चमकँइ बाले रूप कि नाईं थोरी-थोरी कइके बदलत जइत हएन।
4माटी के बरतनन माहीं धरा खजाना
1परमातिमा हमरे पंचन के ऊपर दया कइके, इआ सेबा के काम सउँपिन हीं, एसे हम पंचे हिम्मत नहीं हारी। 2पय हम पंचे लज्जित करँइ बाले, अउर गुप्त कामन काहीं छोंड़ि दिहेन हय, अउर अपने चतुराई से नहीं चली, अउर न त परमातिमा के बचन माहीं मिलबटय करित आहेन, बलकिन परमातिमा के नजर माहीं, सत्य काहीं सरल रूप से बताइके, हरेक मनइन के सोच-बिचार माहीं आपन भलाई बइठाइत हएन। 3जउने खुसी के खबर के हम पंचे प्रचार करित हएन, ओमाहीं अगर कउनव परदा परा हय, त इआ केबल उनहिन के खातिर परा हय, जेतने बिनास होंइ के गइल माहीं चल रहे हँय। 4इआ संसार के मालिक सइतान, ईं अबिसुआसी मनइन के बुद्धी काहीं भ्रस्ट कइ दिहिस ही, कि जउने ऊँ पंचे परमातिमा के साछात रूप, मसीह के महिमामय खुसी के खबर के उँजिआर काहीं न देखे पामँय। 5हम पंचे आपन प्रचार नहीं करी, बलकिन यीसु मसीह के प्रचार करित हएन, कि उँइन प्रभू आहीं, अउर हम पंचे अपने बारे माहीं त इहय कहित हएन, कि हम पंचे यीसु मसीह के कारन तोंहार पंचन के सेबक आहेन। 6एसे कि उँइन परमातिमा आहीं, जउन कहिन रहा हय, कि “अँधिआर म से 4:6 उत्प 1:3उँजिआर होइ जाय।” अउर उँइन इआ उँजिआर काहीं हमरे पंचन के हिरदँय माहीं चमकाइन हीं, कि जउने हम पंचे यीसु मसीह के सुभाव माहीं, परमातिमा के महिमा के ग्यान के उँजिआर काहीं देख सकी।
7काहेकि परमातिमा अपने असीमित सामर्थ काहीं, हमरे पंचन के देंह के अंदर रक्खिन हीं, जउन टूटँइ बाले माटी के बरतनन कि नाईं हईं, कि जउने इआ साबित होइ जाय, कि इआ सामर्थ हमार पंचन के न होय, बलकिन परमातिमय के आय। 8हम पंचे चारिव कइती से दुख-मुसीबत त सहित हएन, पय संकट माहीं नहीं परी, कबहूँ-कबहूँ घबराय त जइत हएन, पय निरास नहीं होई। 9मनइन के द्वारा सताए त जइत हएन; पय परमातिमा के द्वारा छोंड़े नहीं जई; अउर गिराए त जइत हएन, पय नास नहीं होई। 10हम पंचे अपने देंह माही दुख-मुसीबत काहीं सहिके, यीसु के मउत माहीं भागीदार बन जइत हएन; कि जउने यीसु के जीबन हमरे पंचन के देंहन से साफ- साफ देखाई देय। 11काहेकि हम पंचे हमेसा यीसु के कारन जिन्दय, मउत के हबाले कीन जइत हएन, कि जउने यीसु के जीबन हमरे पंचन के मरनहार देंह से देखाई देय। 12इआमेर से हम पंचे मउत के सामना करत रहित हएन, पय तोंहईं पंचन काहीं अनन्त जीबन मिलत हय।
13पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “हम बिसुआस4:13 भज 116:10 किहेन रहा हय, एहिन से हम बोलित हएन।” हमरेव पंचन के भीतर उहय बिसुआस के आत्मा हय। अउर हमहूँ पंचे घलाय बिसुआस करित हएन, एहिन से हमहूँ पंचे घलाय बोलित हएन। 14काहेकि हम पंचे जानित हएन, कि जउन परमातिमा, प्रभू यीसु काहीं मरेन म से जिआइन हीं, उँइन हमहूँ पंचन काहीं घलाय उहयमेर जिअइहँय, जइसन यीसु काहीं जिआइन रहा हय। अउर ऊँ अपने आँगे हमहूँ पंचन काहीं घलाय, तोंहरे पंचन के साथय ठाढ़ करिहँय। 15अउर सब कुछ तोंहरे पंचन के भलाइन के खातिर आय। जइसन-जइसन परमातिमा के किरपा जादा मनइन के ऊपर होत जात ही, त परमातिमा काहीं धन्यबाद देंइ बाले घलाय बढ़त जात हें। इआमेर से परमातिमा के महिमा बढ़त जात ही। 16एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। 17काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें। 18अउर हम पंचे देखाई देंइ बाली चीजन माहीं मन नहीं लगाई, बलकिन जउन चीजँय नहीं देखाई देती आहीं, उनहिन माहीं मन लगाइत हएन, काहेकि देखाई देंइ बाली चीजँय थोरिन दिन के होती हईं, पय जउन चीजँय नहीं देखाई देती, ऊँ हमेसा बनी रहती हईं।
5स्वरग माहीं मिलँइ बाला हमार पंचन के घर
1काहेकि हम पंचे जानित हएन, कि हमार पंचन के तम्बू, अरथात इआ देंह जउने माहीं हम पंचे इआ धरती माहीं रहित हएन, गिराय दीन जई। त हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के द्वारा, स्वरग माहीं एकठे अइसन घर दीन जई, जउन हमेसा बना रही। काहेकि उआ मनइन के हाँथे से बनाबा न होई। 2अउर इआ देंह माहीं, हम पंचे कराहत रहित हएन। अउर बड़ी लालसा करित हएन, कि स्वरग माहीं मिलँइ बाले अपने घरन माहीं चले जई। 3हमहीं पंचन काहीं इआ पूर बिसुआस हय, कि उआ घर काहीं हम पंचे पाउब, अउर पुनि कबहूँ बेघर न रहब। 4अउर हम पंचे इआ तम्बू माही रहत समय, बोझ से दबे कराहत रहित हएन। एखर कारन इआ हय, कि हम पंचे इआ पुरान तम्बू काहीं छोंड़ँइ नहीं चाही, बलकिन एहिन के साथय स्वरग माहीं मिलँइ बाले उआ घर, अरथात नई देंह काहीं पामँइ चाहित हएन। जउने नास होंइ बाली इआ देंह काहीं अनन्त जीबन मिल जाय। 5अउर परमातिमय, हमहीं पंचन काहीं एहिन के खातिर तइआर किहिन हीं, अउर उँइन बयाना के रूप माहीं आपन पबित्र आत्मा घलाय दिहिन हीं।
6एसे हम पंचे हमेसा ढाढ़स बाँधे रहित हएन, अउर इआ जानित हएन, कि जब तक हम पंचे इआ देंह माहीं रहि रहेन हय, तब तक प्रभू से दूर हएन। 7काहेकि हम पंचे संसारिक बातन काहीं देखिके नहीं, बलकिन बिसुआस के सहारे चलित हएन। 8हमहीं पंचन काहीं इआ पूर बिसुआस हय। एहिन से हम पंचे इआ देंह काहीं छोंड़िके, प्रभू के लघे रहब जादा निकहा समझित हएन। 9इआ कारन से हम पंचे इहय चाहित हएन, कि चाह इआ देंह माहीं रही, चाह न रही, पय प्रभू काहीं निकहा लागत रही। 10अउर हम पंचे इआ देंह के द्वारा5:10 रोमि 14:10 जेतने निकहे अउर बुरे काम किहेन हय, उनखर बदला पामँइ के खातिर, एक दिना मसीह के न्याय सिंहासन के आँगे जरूर हाजिर होंइ परी।
परमातिमा से मेल-मिलाप करामँइ के सेबा
11एसे हम पंचे परमातिमा के भय मानिके लोगन काहीं समझाइत हएन। परमातिमा हमरे पंचन के बारे माहीं सब कुछ जानत हें। अउर हम पंचे इहय आसा करित हएन, कि तुहूँ पंचे घलाय हमरे पंचन के बारे माहीं जनते होइहा। 12हम पंचे तोंहरे पंचन के सामने पुनि आपन कउनव बड़ाई नहीं कइ रहे आहेन। बलकिन तोंहईं पंचन काहीं एकठे मोका दइ रहेन हय, कि हमरे पंचन के बारे माहीं, घमन्ड कइ सका, अउर उनहीं जबाब दइ सका जउन अपने हिरदँय के बातन माहीं नहीं, बलकिन देखावटी बातन के ऊपर घमन्ड करत हें। 13अगर हम पंचे पागल कि नाईं लागित हएन, त परमातिमा के खातिर; अउर अगर होस-हबास माहीं हएन, त तोंहरे पंचन के फायदा के खातिर हएन। 14काहेकि मसीह के प्रेम, हमहीं पंचन काहीं मजबूर कइ देत हय; एसे हम पंचे इआ समझित हएन, कि जब एक जने अरथात यीसु मसीह सगले मनइन के खातिर मरे हँय, त हमहूँ पंचे घलाय पुरान जीबन के खातिर मर गएन हँय। 15अउर यीसु मसीह इहय कारन से सगले मनइन के खातिर मरे हँय, कि जउने जेतने मनई जिअत हें, ऊँ पंचे अब से अपने खातिर न जिअँइ, बलकिन यीसु मसीह के खातिर जिअँइ, जउन मरिके पुनि जिन्दा होइगे हँय।
16एसे अब से हम पंचे कउनव मनई काहीं संसारिक नजर से न देखब, काहेकि एक समय हमहूँ पंचे मसीह काहीं संसारिक नजर से देखत रहे हएन। तऊ अब से हम पंचे मसीह काहीं संसारिक नजर से न देखब। 17एसे अगर कउनव मनई यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस कइ लेत हय, त उआ नई रचना बन जात हय। अउर ओखे जीबन से पुरान बातँय चली जाती हईं, अउर ओखर नबा जीबन सुरू होइ जात हय। 18अउर ईं सगली बातँय परमातिमा के तरफ से आहीं, अउर उँइन यीसु मसीह के द्वारा हमार पंचन के मेल-मिलाप अपने साथ कइ लिहिन हीं। अउर उँइन हमहीं पंचन काहीं इआ सेबा के काम सउँपिन हीं, कि हम पंचे दुसरे मनइन के मेल-मिलाप उनखे साथ कर बाई। 19अरथात परमातिमा मसीह के द्वारा संसार के मनइन के मेल-मिलाप अपने साथ कइ लिहिन हीं। अउर मनइन के अपराधन के दोस उनखे ऊपर नहीं लगाइन। बलकिन मनइन के साथ, आपन मेल-मिलाप करामँइ के सँदेस, सुनामँइ के सेबकाई हमहीं पंचन काहीं सउँपि दिहिन हीं।
20एसे हम पंचे मसीह के राजदूत आहेन, अउर इआ समझ ल्या, कि परमातिमा हमरे पंचन के द्वारा, तोंहईं पंचन काहीं समझाय रहे हँय। अउर हम पंचे, मसीह के तरफ से तोंहसे बिनती करित हएन, कि तूँ पंचे परमातिमा के साथ मेल-मिलाप कइल्या। 21यीसु मसीह, जिनखे जीबन माहीं कउनव पाप नहीं रहा आय, उनहिन के ऊपर परमातिमा, हमरे पंचन के सगले पापन के बोझ लाद दिहिन, कि जउने हम पंचे यीसु मसीह के द्वारा परमातिमा के नजर माहीं निरदोस ठहरी।
61अउर परमातिमा के काम हम पंचे मिल जुलिके करित हएन, एसे हम पंचे, तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि परमातिमा के जउन किरपा तोंहरे पंचन के ऊपर भे ही, ओही बेकार न जाँइ द्या। 2काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय। कि परमातिमा कहिन हीं,
“हम सही समय माहीं तोंहरे बिनती काहीं सुन लिहेन हय, अउर हम मुक्ती के दिन तोंहार मदत किहेन हय6:2 यसा 49:8।”
एसे देखा, तोंहरे पंचन के खातिर इहय सही समय हय, अउर मुक्ती पामँइ के दिनव हय। 3काहेकि हम पंचे हरेक बातन माही, इआ ध्यान रक्खित हएन, कि कोहू काहीं हमरे पंचन के ऊपर दोस लगामँइ के मोका न मिलय। जउने हमरे पंचन के सेबा माहीं कउनव कलंक न लागय। 4बलकिन हम पंचे परमातिमा के सेबक के रूप माहीं, खुद काहीं निकहा साबित करित हएन, बड़े धीरज के साथ दुख-मुसीबत माहीं, गरीबी माहीं, संकटन माहीं, 5मार सहँइ माहीं, जेल जाँइ माहीं, दंगन माहीं, मेहनत करँइ माहीं, जागत रहँइ माहीं, भूँखे रहँइ माहीं, 6पबित्र रहँइ माहीं, ग्यान माहीं, धीरज धरँइ माहीं, दुसरे के ऊपर किरपा करँइ माहीं, पबित्र आत्मा माहीं, सच्चे प्रेम माहीं, 7सत्य के बचन माहीं, परमातिमा के सक्ती माहीं; धारमिकता के अउजार माहीं जउन दहिने बाएँ हाँथ माहीं रहत हें। 8मान-सम्मान पामँइ माहीं, अपमान सहँइ माहीं, अउर निकहा नाम पामँइ माहीं, अउर बदनामी सहँय माहीं, हरेक बातन माहीं खुद काहीं सच्चा साबित करित हएन। जबकि हम पंचे भरमामँइ बालेन कि नाईं देखइत त हएन, तऊ हम पंचे सच्चे हएन। 9मनई हमही पंचन काहीं खास नहीं समझँय; तऊ हम पंचे मसहूर हएन; अउर हम पंचे मरँइ बाले मनइन कि नाईं हएन; तऊ जिन्दा हएन। अउर हम पंचे मार खाँइ बालेन कि नाईं समझे त जइत हएन, पय जान से मारे नहीं जई। 10अउर हमहीं पंचन काहीं सोक करँइ बालेन कि नाईं माना जात हय, पय हम पंचे हमेसा आनन्दित रहित हएन, अउर हम पंचे कंगालन कि नाईं देखइत हएन, पय खुब मनइन काहीं आत्मिक रूप से धनी बनाय देइत हएन। अउर मनई समझत हें, कि हमरे पंचन के लघे कुछू नहिं आय, तऊ हमरे पंचन के लघे सब कुछ रहत हय।
11हे कुरिन्थुस सहर माहीं रहँइ बाले भाई-बहिनिव, हम पंचे तोंहसे खुलिके सगली बातन काहीं बतायन हय। अउर तोंहरे खातिर अपने हिरदँय माहीं कउनव कपट नहीं रक्खेन आय। 12अउर हमार पंचन के प्रेम तोंहरे खातिर कम नहीं भ आय। पय तूँ पंचे हमसे पंचन से प्रेम करब कम कइ दिहा हय। 13पय तोंहईं पंचन काहीं अपने लड़िकन कि नाईं समझिके कहि रहेन हय, कि तुहूँ पंचे हमसे पंचन से दिल खोलिके प्रेम करा।
हम पंचे परमातिमा के मन्दिर आहेन
14अबिसुआसी मनइन के साथ मेल न खाँइ बाले जुआँ माहीं न जोतरा, परमातिमा के नजर माहीं निकहे काम करँइ बालेन, अउर बुरे काम करँइ बालेन के का कबहूँ मेल-जोल होइ सकत हय? इआ कि उँजिआर अउर अँधिआर के का कबहूँ मेल-जोल होइ सकत हय? 15इहइमेर मसीह के तालमेल का सइतान के साथ होइ सकत हय? इआ कि बिसुआसी मनई के तालमेल का अबिसुआसी मनई के साथ होइ सकत हय? 16अउर मूरतिन के साथ परमातिमा के मन्दिर के कउनव सम्बन्ध होइ सकत हय का? काहेकि हम पंचे त जिन्दा परमातिमा के मन्दिर आहेन; जइसन कि परमातिमा घलाय कहिन हीं, कि
“हम उन माहीं निबास करब; अउर उनखे बीच माहीं चला फिरा करब; अउर हम उनखर परमातिमा होब, अउर ऊँ पंचे हमार निज प्रजा होइहँय6:16 लैब्य 26:11,12।” 17एसे परमातिमा कहत हें, कि
“उनखे पंचन के बीच से निकर जा, अउर उनसे अलग रहा; अउर असुद्ध चीजन काहीं न छुआ, तबहिन हम तोंहईं पंचन काहीं सोइकार करब6:17 यसा 52:11।
18अउर हम तोंहार पंचन के बाप होब, अउर तूँ पंचे हमार लड़िका-बिटिया होइहा। इआ सर्बसक्तिमान परमातिमा के बचन आय6:18 2 समू 7:8,14।”
71एसे हे हमार पियार भाई-बहिनिव, जब परमातिमा हमसे पंचन से एतने कीमती वादा किहिन हीं, त आबा हम पंचे अपने देंह अउर आत्मा के सगली गंदगी काहीं दूर कइके, अपने-आप काहीं सुद्ध करी। अउर परमातिमा के भय मानत पूरी तरह से पबित्र बनी।
पवलुस के आनन्द
2काहेकि हम पंचे कोहू के कुछू नहीं बिगाड़ेन आय, अउर न कोहू के साथ अन्याय किहेन आय, अउर न कोहू के साथ छलय किहेन आय, एसे तूँ पंचे अपने पूरे हिरदँय से हमसे पंचन से प्रेम करा। 3अउर हम तोंहईं पंचन काहीं दोसी ठहरामँइ के खातिर इआ नहिं कहि रहेन आय: काहेकि हम पहिलेन तोंहईं पंचन काहीं इआ बताय चुके हएन, कि तूँ पंचे हमरे हिरदँय माहीं अइसन बसि गया हय, कि हम तोंहरे साथ मरँइ जिअँइ के खातिर घलाय तइआर हएन। 4अउर हम तोंहसे पूरे बिसुआस के साथ कहि रहेन हय, कि हमहीं तोंहरे पंचन के ऊपर बड़ा घमन्ड हय; अउर हमहीं तोंहरे कारन बड़ी सान्ती मिली हय; हम हरेकमेर के दुख-मुसीबतन काहीं सहत रहित हएन, तऊ हम खुब आनन्दित रहित हएन।
5अउर जब हम पंचे मकिदुनिया प्रदेस माहीं आएन, त उहँव हमहीं पंचन काहीं अराम नहीं मिला, काहेकि हमरे पंचन के ऊपर चारिव कइती से दुख-मुसीबत आमँइ लाग रहे हँय; अउर उहाँ लड़ाई-झगड़ा सुरू रहे हँय, अउर हमरे पंचन के मन माहीं डेरव समान रहा हय। 6पय दीन-दुखिअन काहीं ढाढ़स देंइ बाले परमातिमा, तीतुस काहीं हमरे पंचन के लघे पहुँचाइके, हमरव पंचन के ढाढ़स बढ़ाइन हीं। 7अउर हमार पंचन के, केबल तीतुस के आमँइ भर से ढाढ़स नहीं बँधा आय, बलकिन हमार पंचन के एसे अउर अधिक ढाढ़स बँधा हय, कि तूँ पंचे उनहीं केतना उत्साहित किहा तय। तीतुस हमहीं पंचन काहीं इआ बताइन, कि तूँ पंचे दुखी हया, अउर हमसे पंचन से मिलँइ के खातिर केतना ब्याकुल हया, अउर तोंहईं पंचन काहीं हमार पंचन के केतनी चिन्ता ही, इआ बात काहीं सुनिके हम पंचे अउर जादा खुसी भएन। 8जबकि हम तोंहईं पंचन काहीं अपने पहिल चिट्ठी से दुख त पहुँचाएन रहा हय। पहिले त हम खुब पचितानेन रहा हय, पय अब इआ बात से हमहीं कउनव पचिताबा नहिं आय, काहेकि तोंहईं पंचन काहीं उआ चिट्ठी से दुख त भ रहा हय, पय उआ थोरिन देर के खातिर रहा हय। 9अउर अब हम खुब खुसी हएन, एसे नहीं, कि तोंहईं पंचन काहीं दुख भ रहा हय, बलकिन एसे कि तूँ पंचे उआ दुख के कारन अपने गलतिन काहीं मानिके पस्चाताप किहा हय। काहेकि तोंहईं पंचन काहीं उआ दुख परमातिमा के मरजिन से मिला रहा हय, जउने हमरे पंचन के कारन तोंहईं पंचन काहीं कउनव मेर नुकसान न होय। 10काहेकि परमातिमा जउन दुख देत हें, ओसे मनइन काहीं अपने गलतिन काहीं मानिके, पस्चाताप करँइ के प्रेरना मिलत ही, अउर उआ दुख से पुनि पचिताँय नहीं परय। काहेकि ओसे मुक्ती मिलत ही, पय संसारिक दुख से केबल आत्मिक मउत मिलत ही। 11एसे देखा, जउन दुख तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा के तरफ से मिला हय, ओसे तोंहरे जीबन माहीं केतना बदलाव आइगा हय, अउर तूँ पंचे अपने-आप काहीं निरदोस साबित करँइ के खातिर इच्छुक होइ गया हय, अउर जउन कुछू भ रहा हय, ओखे कारन खुब दुखी हया, अउर परमातिमा के भय मानिके, भक्ती करँइ के धुन माहीं लगे रहते हया। अउर हमसे मिलँइ के इच्छा करत रहते हया। अउर पाप करँइ बालेन काहीं सजा देंइ के बिचार करँइ लागे हया, इआमेर से तूँ पंचे हरेकमेर से इआ साबित कइ दिहा हय, कि तूँ पंचे निरदोस हया। 12अउर हम तोंहरे खातिर जउन चिट्ठी लिखेन तय, त उआ अन्याय करँइ बाले के कारन नहीं, न ओखे कारन लिखेन तय, जेखे ऊपर अन्याय भ रहा हय। बलकिन एसे लिखेन तय, कि जउन उत्साह तोंहईं पंचन काहीं हमरे पंचन के खातिर हय, उआ परमातिमा के आँगे तोंहईं पंचन काहीं मालुम होइ जाय। 13एसे हमहीं पंचन काहीं ढाढ़स मिला हय। अउर हमरे पंचन के इआ ढाढ़स के साथ, जउन तूँ पंचे तीतुस काहीं खुसी दिहा हय, ओखे कारन हमार पंचन के खुसी अउर बढ़िगे ही, काहेकि तोंहरे पंचन के कारन तीतुस के हिरदँय खुसी से भरिगा तय। 14काहेकि तीतुस के आँगे हम तोंहरे पंचन के बारे माहीं, जउन घमन्ड देखायन तय, त हमहीं लज्जित नहीं होंय परा, बलकिन जइसन हम तोंहसे पंचन से सही-सही बात बतायन तय, उहयमेर हमार पंचन के घमन्ड देखाउब, तीतुस के आँगे सही निकरा हय। 15अउर तीतुस जब इआ सुध करत हें, कि तूँ पंचे कइसन उनखे बातन काहीं मानत रहे हया, अउर मारे डेरन के काँपत-काँपत, तूँ पंचे कइसन उनहीं सोइकार किहा तय, त तीतुस के प्रेम तोंहरे पंचन के खातिर अउरव बाढ़त जात हय। 16एसे हम खुब खुसी हएन, काहेकि हमहीं हरेक बातन माहीं, तोंहरे ऊपर पूर भरोसा हय।
8उदारता से दान देब
1अब हे भाई-बहिनिव, हम पंचे तोंहईं परमातिमा के उआ महान किरपा के बारे माहीं बताइत हएन, जउन मकिदुनिया प्रदेस के मसीही मन्डलिन माहीं भे रही हय। 2हम इआ बात काहीं एसे बताइत हएन, कि जब उनखे जीबन माहीं दुख-मुसीबत के कारन बड़ी परिच्छा आईं तय। तऊ ऊँ पंचे खुसी रहे हँय, अउर उनखे ऊपर भारी गरीबी आय गे रही हय। तऊ उनखर दान देंइ के उदारता कम नहीं भय, बलकिन बढ़िनगे रही हय। 3काहेकि हम उनखे बारे माहीं इआ गबाही देइत हएन, कि ऊँ पंचे अपने सामर्थ से जादा, पूरे मन से हमहीं पंचन काहीं दान दिहिन रहा हय, 4अउर इआ दान के द्वारा, पबित्र मनइन के सेबा माहीं सामिल होंइ के सवभाग्य उनहीं पंचन काहीं मिलय, एखे खातिर हमसे पंचन से कइअक बेरकी बिनती करत रहिगें। 5अउर हम पंचे उनसे जइसन आसा करत रहेन हय, उहयमेर नहीं बलकिन ओसे बढ़िके ऊँ पंचे पहिले खुद काहीं प्रभू के खातिर समरपित किहिन, ओखे बाद परमातिमा के मरजी से हमरेव पंचन के खातिर घलाय खुद काहीं समरपित कइ दिहिन। 6एसे हम पंचे तीतुस काहीं सलाह दिहेन, कि जइसन तूँ पहिले दान एकट्ठा करँइ के सुरुआत किहा तय, उहयमेर तोंहरे बीच माहीं जाइके दान एकट्ठा करँइ के काम काहीं पूर करँय। 7एसे जइसन तूँ पंचे हरेक बातन माहीं, अरथात बिसुआस माहीं, बात करँइ माहीं, ग्यान माहीं, अउर हरेकमेर के उपकार करँइ माहीं, अउर हमसे पंचन से प्रेम करँइ माहीं, बढ़त जाते हया। उहयमेर दान करँइ के काम माहीं घलाय बढ़त जा।
8अउर हम इआ बात काहीं, तोंहईं पंचन काहीं हुकुम के रूप माहीं नहीं कहि रहेन आय। बलकिन दुसरे मनइन के उत्साह के बारे माहीं कहिके, अउर तोंहरे पंचन के प्रेम काहीं जाँचँय-परखँइ के खातिर कहि रहेन हय। 9अउर तूँ पंचे हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के किरपा काहीं जनतेन हया, कि ऊँ केतना धनी रहे हँय, तऊ ऊँ तोंहरे पंचन के खातिर एसे कंगाल बनिगें, कि जउने तूँ पंचे उनखे कंगाल होंइ से धनी बन जा। 10अउर एखे बारे माहीं हम तोंहईं पंचन काहीं आपन सलाह देइत हएन, जउन तोंहरे खातिर निकही हय; तूँ पंचे पिछले साल जउन दान देंइ के काम सुरू किहा तय, अउर ओखर योजना तूँ पंचे खुदय बनाया तय, अब ओही पूर करइन माहीं तोंहार पंचन के कल्यान होई। 11एसे अब दान देंइ के इआ काम काहीं पूर करा; जइसन पहिले तूँ पंचे दान देंइ के खुब इच्छा करत रहे हया, उहयमेर अपने-अपने पूँजी के मुताबिक दान दइके ओही पूर करा। 12काहेकि अगर कउनव मनई जउन ओखे लघे होय, ओमा से पूरे मन से दान देत हय, त उआ दान काहीं परमातिमा सोइकार करत हें, इआ नहीं कि जउन ओखे लघे नहिं होय। 13अउर हम इआ नहीं कही, कि तूँ पंचे आपन सगला धन दान कइ द्या, कि ओसे त दुसरे मनइन काहीं राहत मिलय, अउर तोंहईं पंचन काहीं दुख मिलय, बलकिन बराबरी होइ जाय। 14बलकिन हम एसे इआ बात काहीं कहित हएन, कि इआ समय तोंहाँर पंचन के धन के बढ़ोत्तरी उनखे कमी-घटी माहीं काम आबय, जउने भबिस्य माहीं उनखे धन के बढ़ोत्तरी तोंहरे पंचन के कमी-घटी माहीं काम आबय, कि जउने बराबरी होइ जाय। 15अउर जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “जे कोऊ खुब बटोरिस रहा हय, ओखे लघे कुछू अधिकहा नहीं रहा; अउर जे कोऊ थोरिन काहीं बटोरिस रहा हय, ओहू के लघे कुछू कम नहीं रहा8:15 निरग 16:18।”
तीतुस अउर उनखे साथ माहीं काम करँइ बाले साथी
16हम परमातिमा काहीं धन्यबाद देइत हएन, कि तोंहार पंचन के मदत करँइ के खातिर, ऊँ तीतुस के मन माहीं उहयमेर के उत्साह भर दिहिन हीं, जइसन हमरे मन माहीं हय। 17काहेकि तीतुस हमरे बात काहीं खुसी से मान लिहिन हीं, बलकिन बड़े उत्साह के साथ अपने मरजिन से तोंहरे पंचन के लघे गे हँय। 18अउर हम पंचे तीतुस के साथ, ऊँ भाई काहीं घलाय पठयन हँय, जिनखर नाम खुसी के खबर सुनामँइ के बारे माहीं सगली मसीही मन्डलिन माहीं मसहूर हय। 19अउर केबल एतनय भर नहीं, बलकिन मसीही मन्डली के द्वारा उनहीं नियुक्त घलाय कीन ग हय, कि इआ दान काहीं एकट्ठा करँइ के काम के खातिर, हमरे पंचन के साथ माहीं जाँय। अउर हम पंचे इआ सेबा के काम एसे करित हएन, कि जउने प्रभू के बड़ाई होय। अउर हमार पंचन के इआ परोपकार के काम करँइ के केतनी इच्छा ही, इआ बात मनइन काहीं मालुम होइ जाय। 20अउर हम पंचे इआ बात से सतरक रहित हएन, कि जउन हम पंचे इआ दान एकट्ठा करँइ के काम करित हएन, त हमरे पंचन के ऊपर कोऊ दोस न लगाए पाबय। 21काहेकि हमहीं पंचन काहीं इआ बात के हमेसा चिन्ता रहत ही, कि हम पंचे उहय काम करी, जउन प्रभू के नजर भर माहीं निकहा नहीं, बलकिन जउन मनइन के नजर माहीं घलाय निकहा होत हय। 22अउर हम पंचे तीतुस के साथ अपने ऊँ भाई काहीं घलाय पठए हएन, जिनहीं हम पंचे बेर-बेर जाँचेन परखेन हय, त उनहीं खुब बातन माहीं उत्साही पाएन हय; अउर उनहीं अब तोंहरे पंचन के ऊपर बड़ा भरोसा हय, इहय कारन से उनखर उत्साह अउर जादा बढ़िगा हय। 23अउर अगर कोऊ तीतुस के बारे माहीं पूँछय, त ऊँ हमार साथी आहीं। अउर तोंहरे पंचन के खातिर, ऊँ हमरे पंचन के साथ माहीं सेबा के काम करँइ बाले आहीं, अउर अगर ऊँ भाइन के बारे माहीं कोऊ पूँछय, त ऊँ मसीही मन्डली के तरफ से पठए, अउर मसीह काहीं आदर देंइ बाले आहीं। 24एसे तूँ पंचे उनसे खुब प्रेम किहा, अउर तोंहरे पंचन के बारे माहीं, हम पंचे एतना घमन्ड काहे करित हएन, ओही सही साबित कइके देखाबा। जउने सगली मसीही मन्डली ओही देख सकँय।
9मसीही भाई-बहिनिन के खातिर मदत
1अब उआ दान देंइ के बारे माहीं जउन पबित्र मनइन काहीं दीन जात हय, हमहीं ओखे बारे माहीं तोंहईं पंचन काहीं लिखब जरूरी नहिं आय। 2काहेकि तूँ पंचे मदत करँइ के खातिर हमेसा उत्साहित रहते हया। इहय कारन से हम तोंहरे बारे माहीं, मकिदुनिया प्रदेस माहीं रहँइ बाले, बिसुआसी भाई-बहिनिन के आँगे घमन्ड के साथ बताइत हएन, कि अखाया प्रदेस के रहँइ बाले बिसुआसी भाई-बहिनी, एक साल से दान देंइ के खातिर तइआर हें। अउर तोंहरे पंचन के इआ उत्साह काहीं देखिके, खुब बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं दान देंइ के प्रेरना मिली हय। 3पय हम कुछ भाइन काहीं तोंहरे लघे एसे पठएन हय, कि हम जउन घमन्ड तोंहरे बारे माहीं देखायन हय, उआ दान देंइ के बारे माहीं बेकार न ठहरय, बलकिन हम जइसन तोंहरे बारे माहीं कहेन हय, उहयमेर तूँ पंचे दान देंइ के खातिर तइआर रहा। 4कहँव अइसा न होय, कि मकिदुनिया प्रदेस के कुछ मनई हमरे साथ आइके इआ देखँय, कि तूँ पंचे दान देंइ के खातिर तइआर नहिं आह्या, त हमहूँ काहीं अउर तोंहऊँ पंचन काहीं घलाय लज्जित होंइ परी, जबकि एखे बारे माहीं हम पंचे तोंहरे ऊपर बड़ा भरोसा रक्खित हएन। 5एसे हम भाइन से इआ कहब उचित समझेन, कि ऊँ पंचे हमसे पंचन से पहिलेन तोंहरे लघे जाँय, अउर जउन दान देंइ के खातिर तूँ पंचे अपने मन से कहे रहे हया, ओही पहिलेन से उदारता के साथ एकट्ठा कइके तइआर रक्खा। अउर इआ काम तूँ पंचे अपने पूरे मन से किहा, कउनव दबाव से नहीं।
दान देंइ के तरीका
6इआ बात काहीं सुध रख्या, कि जउन किसान थोरका बीज बोई, उआ थोरिन फसल काटी; अउर जउन किसान जादा बीज बोई, उआ जादा फसल काटी। 7एसे हरेक जन जइसन अपने मन माहीं ठान लेत हय, उहयमेर उआ बिना कुड़-कुड़ाए, बिना दबाव के दान करय, काहेकि परमातिमा खुसी से दान करँइ बाले मनई से प्रेम करत हे। 8अउर परमातिमा तोंहईं पंचन काहीं हरेकमेर के उत्तम बरदान जरूरत से जादा दइ सकत हें, जउने तोंहरे लघे हरेक समय जरूरत के सगली चीजँय रहँय, अउर हरेक निकहे कामन के खातिर तोंहरे पंचन के लघे देंइ के खातिर सब कुछ भरपूर रहय। 9जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि
“ऊँ उदारता से कंगालन काहीं दान दिहिन, अउर उनखर धरम हमेसा बना रही9:9 भज 112:9।”
10अउर परमातिमय बोमँइ बाले काहीं बीज, अउर खाँय के खातिर खाना देत हें, उँइन तोंहईं पंचन काहीं बीज देइहँय, अउर पइदाबार काहीं बढ़इहँय। अउर तोंहरे उदारता के निकही फसल पइदा करिहँय। 11इआमेर से तूँ पंचे परमातिमा के द्वारा हरेकमेर से भरपूर कीन जइहा, जउने हरेक मोका माहीं उदारता से दान दइ सका, अउर जब तोंहरे दान काहीं, जिनहीं एखर जरूरत ही उनखे लघे तक पहुँचाउब, त ऊँ पंचे परमातिमा काहीं धन्यबाद देइहँय। 12काहेकि दान के इआ पबित्र सेबा से, केबल पबित्र मनइन के जरुरतय भर पूर नहीं होय, बलकिन खुब मनई परमातिमा काहीं धन्यबाद घलाय देत हें। 13अउर इआ सेबा के काम के परिनाम इआ होई, कि मनई परमातिमा के बड़ाई करिहँय। एसे कि सगले बिसुआसी भाई-बहिनिन के खातिर, तोंहार पंचन के दान देंइ के उदारता इआ साबित करी, कि तूँ पंचे मसीह के खुसी के खबर काहीं सोइकार कइके ओखे आधीन रहते हया, अउर सगले बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं, उदारता से दान देते हया। 14अउर ऊँ पंचे तोंहसे प्रेम करत हें, अउर तोंहरे खातिर प्राथना करत रहत हें, काहेकि तोंहरे पंचन के ऊपर परमातिमा के बड़ी किरपा हय। 15परमातिमा काहीं उनखे उआ दान के खातिर जउन बखान से बाहर हय, हम पंचे धन्यबाद देइत हएन।
10पवलुस के अधिकार
1हम पवलुस यीसु मसीह कि नाईं नम्र अउर दीन होइके तोंहसे पंचन से बिनती करित हएन, जबकि हमरे पीठ पीछे कुछ मनई कहत हें, कि हम डरपोक हएन। पय हम इआ लिखी चिट्ठी माहीं खुब निडर देखइत हएन। 2अउर हम तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि जब हम तोंहरे साथ माहीं रहब। त तूँ पंचे अइसन कउनव काम न किहा, कि हमहीं निडर होइके कठोरता देखामँइ परय। काहेकि कुछ मनई कहत हें, कि हम पंचे संसारिक जीबन जीत हएन, त हम उनखे साथ कठोर बरताव करँइ के निरनय कइ लिहेन हय। 3काहेकि हमहूँ पंचे इआ संसारय माहीं रहित हएन, पय संसारिक जीबन जिअँइ बाले मनइन कि नाईं लड़ित नहिं आहेन। 4काहेकि हम पंचे जउने हँथिआरन से युद्ध लड़ित हएन, ऊँ इआ संसार के न होंहीं, बलकिन उन माहीं किलन काहीं तहस-नहस कइ देंइ के खातिर परमातिमा के सक्ती भरी हय। 5एसे हम पंचे परमातिमा के ग्यान के बिरोध माहीं उठँय बाले हरेक सोच-बिचारन, अउर हरेक ऊँची बातन के बिरोध करित हएन, अउर हरेक उआ बिचार काहीं जउन मनइन काहीं परमातिमा के ग्यान काहीं पामँइ से रोंकत हें, उनहीं बंदी बनाइके मनइन काहीं मसीह के हुकुमन काहीं मानँइ बाला बनाय देइत हएन। 6अउर जब तूँ पंचे पूरी तरह से हुकुम मानँइ के खातिर तइआर हया, त जउन हुकुम नहीं मानँइ, उनहीं हम पंचे सजा देंइ के खातिर तइआर रहित हएन।
7अउर तूँ पंचे उँइन बातन काहीं देखते हया, जउन तोंहईं पंचन काहीं देखाती हईं, अगर कोऊ अपने ऊपर इआ भरोसा करत हय, कि हम मसीह के भक्त आहेन, त उआ इहव जान लेय, कि जइसन उआ मसीह के भक्त आय, उहयमेर हमहूँ पंचे मसीह के भक्त आहेन। 8काहेकि अगर हम उआ अधिकार के बारे माहीं अउर जादा घमन्ड देखाई, जउने काहीं प्रभू हमहीं दिहिन हीं। त उआ तोंहईं पंचन काहीं आत्मिक रूप से मजबूत बनामँइ के खातिर आय, बिगाड़ँइ के खातिर न होय, एसे हम उआ अधिकार से लज्जित न होब। 9तूँ पंचे इआ न समझा, कि हम अपने चिट्ठिन के द्वारा तोंहईं पंचन काहीं डेरबामँइ चाहित हएन। 10काहेकि कुछ मनई कहत हें, कि “पवलुस के लिखी चिट्ठी त खुब गम्भीर अउर प्रभावसाली हईं; पय जब ऊँ मनइन के आँगे आबत हें, त ऊँ देंह से निबल देखात हें, अउर बोलऊँ माहीं हुसिआर नहिं आहीं।” 11एसे ऊँ पंचे जउन इआमेर कहत हें, इआ जान लेंय, कि जउन बातँय हम दूर रहिके, अपने चिट्ठिन माहीं लिखेन हय, त जब हम तोंहरे पंचन के लघे अउब, त उहयमेर हमार पंचन के काम घलाय होइहँय। 12काहेकि हमार पंचन के इआ हिम्मत नहीं परय, कि हम पंचे अपने-आप काहीं उनखे कि नाईं मानी, अउर आपन तुलना उनसे करी। जउन अपने-आप काहीं खुब खास मानत हें, पय जब ऊँ पंचे आपस माहीं एक दुसरे से तुलना करत हें, कि को खास हय, को खास नहिं आय, त ऊँ पंचे इआ देखाबत हें, कि ऊँ केतना मूरुख हें।
13हम पंचे सीमा से बाहर बेलकुल घमन्ड न करब, पय उहय सीमा तक घमन्ड करब, जहाँ तक परमातिमा हमरे पंचन के खातिर निस्चित किहिन हीं। अउर इआ सीमा के भितरय तुहूँ पंचे घलाय अउते हया, अउर ओहिन के मुताबिक घमन्ड घलाय करब। 14काहेकि हम पंचे अपने सीमा के उलंघन नहीं करँइ चाही, जइसन कि हम पंचे तोंहरे लघे न पहुँच पाइत त होइ जात। पय हम पंचे मसीह के खुसी के खबर लइके तोंहरे लघे पहुँच चुकेन हय। 15अउर हम पंचे अपने उचित सीमा से बहिरे जाइके, दुसरे मनइन के कीन काम माहीं घमन्ड नहीं करी, काहेकि हमहीं पंचन काहीं आसा ही, कि तोंहार पंचन के बिसुआस जइसय-जइसय बढ़त जई, ओइसय-ओइसय तोंहरे पंचन के कारन, हमरे पंचन के कामन के सीमा अउर बढ़त जई। 16अउर हम पंचे इआ चाहित हएन, कि तोंहरे इलाका से आँगे बढ़िके, दुसरे इलाकन माहीं खुसी के खबर सुनाई, पय इआ नहीं चाही, कि दुसरे मनइन के कीन कामन के ऊपर घमन्ड करी। 17अउर जइसन पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि “अगर कोऊ घमन्ड करँइ चाहय, त उआ प्रभू के काम के ऊपर घमन्ड करय10:17 यिर्म 9:24।” 18काहेकि जउन मनई आपन बड़ाई खुदय करत हय, उआ नहीं, बलकिन जेखर बड़ाई प्रभू करत हें, उहय परमातिमा के द्वारा सोइकार कीन जात हय।
11पवलुस अउर लबरे उपदेसक
1अगर तूँ पंचे हमार थोर-बहुत मुरखईं बरदास कइ लेत्या, त केतना निकहा होत; पय अब हम इआ कहित हएन, कि तूँ पंचे ओही बरदास कइल्या। 2काहेकि हम तोंहरे खातिर, परमातिमा कि नाईं चिन्ता करित हएन, एसे कि हम तोंहार पंचन के सगाई एकयठे मनई से अरथात मसीह यीसु से कराय दिहेन हय, कि जउने हम तोंहईं पंचन काहीं पबित्र कुमारी कन्या कि नाईं उनहिन काहीं सउँपि देई। 3पय हम डेरातव रहित हएन, कि जइसन साँप अपने चतुराई से हब्बा काहीं बहकाय दिहिस रहा हय, उहयमेर तोंहरेव पंचन के मन माहीं उआ निरमल भक्ती, अउर पबित्रता जउन मसीह के खातिर होंइ चाही, कहँव ओसे भटकाय न दीन जा। 4काहेकि अगर कोऊ तोंहरे लघे आइके, कउनव दुसरे यीसु के बारे माहीं प्रचार करत हय, जेखर प्रचार हम पंचे नहीं किहेन तय। इआ कि अउर कउनव दूसर आत्मा तोंहईं पंचन काहीं मिलय, जउन पहिले नहीं मिला रहा आय। इआ कि अउर कउनव दूसर खुसी के खबर सुनाबय, जउने काहीं तूँ पंचे पहिले नहीं माने रहे आह्या, त तूँ पंचे ओही सोइकार कइ लेते हया। 5अउर हम इआ समझित हएन, कि हमहूँ कउनव बात माहीं बड़े से बड़े यीसु के खास चेलन से कम नहिं आहेन। 6अगर हम बोलँइ माहीं कमजोर हएन, तऊ ग्यान माहीं कमजोर नहिं आहेन, अउर हम इआ ग्यान काहीं हरेक बातन माहीं, अउर हरेकमेर से तोंहईं पंचन काहीं बतायन हय। 7तोंहईं पंचन काहीं ऊँचा उठामँइ के खातिर अपने-आप काहीं नीच बनायन, अउर सेंत-मेंत माहीं तोंहईं पंचन काहीं खुसी के खबर सुनाइके, का कउनव गलती किहेन हय? 8अउर हम दुसरे मसीही मन्डलिन काहीं लूटेन हय, अरथात सेबा के बदले माहीं चंदा लिहेन, जउने तोंहरे बीच माहीं सेबा के काम कइ सकी। 9अउर जब हम तोंहरे साथ माहीं रहेन हय, तबहूँ हमहीं पइसा के जरूरत रही हय, पय हम कोहू से नहीं माँगेन, कि जउने ओखे ऊपर हमार बोझ न परय, काहेकि जउन भाई लोग मकिदुनिया प्रदेस से आए रहे हँय, उँइन पंचे हमरे जरूरत काहीं पूर कइ दिहिन तय। अउर हम हरेक बात माहीं तोंहरे पंचन के ऊपर बोझ नहीं बनेन आय, अउर न कबहूँ बनबय करब। 10अगर मसीह के सच्चाई हमरे अंदर हय। त अखाया प्रदेस माहीं हमहीं इआ घमन्ड करँइ से कोऊ रोंक नहीं सकय। 11हम तोंहसे पंचन से चंदा नहीं लिहेन तय, त तूँ पंचे इआ न समझा, कि हम तोंहसे प्रेम नहीं करी। बलकिन परमातिमा जानत हें, कि हम तोंहसे केतना प्रेम करित हएन।
12पय हम जउन करित हएन, उहय करत रहब; जउने हम हरेक ऊँ मोकन काहीं खतम कइ सकी, जउन ऊँ पंचे अपने घमन्ड के बातन माहीं, हमरे पंचन कि नाईं होंइ के दाबा करत हें। 13इआमेर के मनई लबरे उपदेसक अउर छल से काम करँइ बाले आहीं, जउन मसीह के खास चेला होंइ के ढोंग करत हें। 14अउर इआ कउनव अचरज के बात न होय, काहेकि सइतान घलाय उँजिआर माहीं रहँइ बाले स्वरगदूत कि नाईं आपन रूप बनाय लेत हय। 15एसे सइतान के सेबक घलाय अगर मसीह के सेबक कि नाईं रूप बनाय लेत हें, त इआ कउनव बड़ी बात न होय। पय अन्त माहीं ऊँ पंचे अपने-अपने कामन के मुताबिक प्रतिफल जरूर पइहँय।
अपने दुखन के बारे माहीं पवलुस के बखान
16हम पुनि तोंहसे पंचन से कहित हएन, कि कोऊ हमहीं मूरुख न समझय; अगर तूँ पंचे हमहीं मूरुख समझते हया, त मूरुखय समझिके हमरे बातन काहीं मानि ल्या, जउने हमहूँ थोर काहीं घमन्ड कइ सकी। 17अउर हम जउन इआ बात घमन्ड के साथ कहि रहेन हय, त इआ प्रभू के हुकुम के मुताबिक न होय, बलकिन हम इआ एक मूरुख कि नाईं कहि रहेन हय। 18काहेकि खुब मनई अपने संसारिक जीबन के ऊपर घमन्ड करत हें, त हमहूँ घमन्ड करब। 19पय तूँ पंचे बड़े समझदार होइके, मूरुखन के बातन काहीं बड़े खुसी से सहि लेते हया। 20अउर जब कउनव मनई, तोंहईं पंचन काहीं आपन गुलाम बनाइके, तोंहार धन-सम्पत लूट लेत हय। अउर अपने जाल माहीं फँसाइके, खुद काहीं तोंहसे बड़ा बनाबत हय। अउर तोंहरे मुँहे माहीं थापड़ घलाय मारत हय, तऊ तूँ पंचे सहि लेते हया। 21अउर इआ बात हम बड़े सरम के साथ कहि रहेन हय, मानि ल्या, कि हम खुब कमजोर रहेन हय। पय अगर कोऊ कउनव बात माहीं घमन्ड करँइ के हिम्मत करत हय, त हमहूँ घलाय हिम्मत कइ सकित हएन। (अउर इआ बात हम मूरुख कि नाईं कहित हएन।)
22अगर ऊँ पंचे अपने-आप काहीं इब्रानी समझत हें, त हमहूँ इब्रानी आहेन। अउर अगर ऊँ पंचे अपने-आप काहीं इजराइली समझत हें, त हमहूँ इजराइली आहेन, अउर अगर ऊँ पंचे समझत हें, कि हम पंचे अब्राहम के सन्तान आहेन, त हमहूँ अब्राहम के सन्तान आहेन। 23अगर ऊँ पंचे खुद काहीं मसीह के सेबक समझत हें, त हमहूँ पागल कि नाईं इआ कहित हएन, कि हम उनसे बढ़िके हएन। चाह उआ मेहनत करँइ माहीं होय, चाह उआ बेर-बेर जेल जाँइ माहीं होय, चाह उआ 11:23 खा.चे.काम 16:23चाबुक से मार खाँइ माहीं होय। चाह उआ बेर-बेर मउत के मुँहे म जाँइ माहीं होय। 24अउर हम पाँच बेरकी यहूदी लोगन के हाँथे से ओनतालिस-ओनतालिस चाबुक मार खायन हँय। 25तीन बेरकी हम लाठिन11:25 खा.चे.काम 16:22 से मार खायन हँय; अउर एक बेरकी हमरे ऊपर पथरहाव घलाय कीन ग रहा हय, अउर तीन बेरकी हम जउने-जउने जिहाज माहीं चढ़े रहेन हय, ऊँ टूट गें तय, अउर एक दिन अउर एक रात हम समुंद्र के गहिल पानी माहीं बितायन हय। 26अउर जब हम बेर-बेर यात्रा करत रहेन हय, त कइअक बेरकी हमहीं खतरन के सामना करँइ परा, जइसन- नदियन के खतरा, अउर डँकुअन के खतरा; अपने जाति बालेन के खतरा, अउर गैरयहूदी मनइन के खतरा; अउर सहरन के खतरा; अउर जंगल के खतरा; समुंद्र के खतरा; कपटी भाइन के खतरा। 27अउर हम कड़ी मेहनत करँइ माहीं, बेर-बेर रातभर जागत रहँइ माहीं; भूँख पिआस सहँइ माहीं; कइअक बेरकी बिना खाना खाए रहँइ माहीं, जाड़ सहँइ माहीं, उँघार रहँइ माहीं। 28अउर ईं बातन के अलाबा, हमहीं सगली मसीही मन्डलिन के चिन्ता हरेक दिन सताबत रहत ही। 29अउर जब कोऊ निबल होत हय, त का हमहूँ निबल नहीं होई? अउर जब कोऊ पाप माहीं फँसि जात हय, त का हमार जिव दुखी नहीं होय?
30अगर घमन्ड करब जरूरी हय, त हम अपने निबलता के बातन के ऊपर घमन्ड करब। 31अउर प्रभू यीसु के पिता परमातिमा जउन हमेसा बड़ाई के काबिल हें, ऊँ जानत हें, कि हम झूँठ नहीं बोली। 32अउर जब हम दमिस्क सहर माहीं रहेन हय, तब राजा अरितास के राजपाल के तरफ से, हमहीं बंदी बनामँइ के खातिर पहरा लगबाबा ग रहा हय। 33पय हमहीं कुछ जने टोपरा माहीं बइठाइके, सहर के चारिव कइती जउन भीती रही हय, ओखे खिड़की से बहिरे उतार दिहिन तय। अउर इआमेर से हम राजपाल के हाँथे से बचिके निकरि आएन तय।
12पवलुस काहीं दरसन मिलब
1जबकि घमन्ड करे से कउनव फायदा नहीं होय, तऊ हमहीं घमन्ड करँइ पर रहा हय, एसे जउन दरसन अउर प्रकासन प्रभू हमहीं दिहिन हीं, हम उनखर चरचा करब। 2अउर हम मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ बाले एकठे मनई काहीं निकहा से जानित हएन, जउने काहीं चउदा बरिस पहिले तिसरे स्वरग तक उठाय लीनगा रहा हय, हम इआ नहीं जानी, कि उआ देंह सहित उठाय लीनगा रहा हय, इआ कि बिना देंह के। इआ बात काहीं त केबल परमातिमय जानत हें। 3अउर हम उआ मनई काहीं निकहा से जानित हएन, पय इआ नहिं जानी, कि उआ देंह सहित उठाय लीनगा रहा हय, इआ कि बिना देंह के। इआ बात काहीं त केबल परमातिमय जानत हें। 4उआ मनई जउन स्वरग लोक माहीं उठाय लीनगा रहा हय, उआ अइसन बातन काहीं सुनिस, कि जिनहीं बताबा नहीं जाय सकय; अउर जिनहीं बतामँइ के अनुमति मनई काहीं नहिं आय। 5उआ मनई के ऊपर त हम घमन्ड करब, पय हम अपने निबलता काहीं छोंड़िके, अउर कउनव बात माहीं अपने ऊपर घमन्ड न करब। 6एसे अगर हम अपने ऊपर घमन्ड करँइ चाही, तऊ मूरुख न कहाउब। काहेकि हम सहिन सही बोलब; तऊ हम रुक जइत हएन, कि कहँव अइसा न होय, कि जइसन हमहीं कोऊ समझत हय, इआ कि हमसे सुनत हय, त ओसे बढ़िके हमहीं समझँय लागय। 7अउर इहव बात ही, कि जउन हमहीं एतने भारी प्रकासन मिले हँय, त हम उनखे कारन घमन्ड से फूल न जई। एसे हमरे देंह माहीं एकठे काँटा छेदा ग हय, अरथात सइतान के एकठे दूत हमहीं कस्ट देत रहत हय, जउने हम घमन्ड से फूल न जई। 8अउर इआ काँटा के बारे माहीं हम प्रभू से तीन बेरकी बिनती किहेन, कि इआ हमरे जीबन से दूर होइ जाय। 9पय प्रभू हमसे कहिन, कि “हमार किरपय तोंहरे खातिर खुब ही; काहेकि निबलता माहीं हमार सक्ती पूरी तरह से काम करत ही।” एसे हम अपने निबलता के ऊपर बड़े खुसी के साथ घमन्ड करित हएन, कि जउने मसीह के सक्ती हमरे भीतर रहय। 10इहय कारन से हम मसीह के खातिर अपने कमजोरिन माहीं, अपमान सहँइ माहीं, अउर गरीबी माहीं, अउर अपने ऊपर होंइ बाले अत्याचारन माहीं, अउर दुख-मुसीबतन माहीं, खुसी रहित हएन। काहेकि जब हम निबल होइत हएन, तबहिन हमहीं बल मिलत हय।
कुरिन्थुस सहर के बिसुआसी लोगन के खातिर पवलुस के चिन्ता
11हम मूरुख त बनेन, पय तुहिन पंचे हमहीं अइसन करँइ के खातिर मजबूर किहा तय, तोंहईं पंचन काहीं त हमार बड़ाई करँइ चाही, जबकि हम अपने-आप काहीं कुछू नहीं मानी, तऊ इआ जानिल्या, कि हम उन बड़े से बड़े यीसु मसीह के खास चेलन से कउनव बात माहीं कम नहिं आहेन। 12अउर जब हम तोंहरे पंचन के बीच माहीं रहेन हय, त यीसु मसीह के खास चेला होंइ के सबूत देखायन तय, जइसन कि हरेकमेर के धीरज के साथ चिन्हन काहीं देखाउब, अउर अचरज के कामन काहीं करब, अउर सामर्थ के कामन काहीं घलाय कइके देखाउब। 13अउर तूँ पंचे कउनव बात माहीं दुसरे मसीही मन्डलिन से कम नहीं रहे आह्या। केबल इआ बात माहीं, कि हम तोंहरे पंचन के ऊपर आपन बोझ नहीं डारेन, कि तूँ पंचे हमार खरचा उठाबा; हमरे इआ गलती काहीं माफ करा।
14देखा, अब हम तिसराय तोंहरे पंचन के लघे आमँइ के खातिर तइआर हएन। पय हम तोंहरे ऊपर कउनव मेर से बोझ न बनब। काहेकि हमहीं तोंहरे धन-सम्पत के कउनव जरूरत नहिं आय, बलकिन तोंहार जरूरत ही। एसे कि लड़िका-बच्चा अपने महतारी-बाप के खातिर धन नहीं जोरय, बलकिन महतारी-बाप लड़िकन-बच्चन के खातिर धन जोरत हें। 15हमरे लघे जउन कुछू हय, त ओही हम तोंहरे खातिर खुसी के साथ खरचा करब, इहाँ तक कि अपने-आप काहीं घलाय तोंहरे खातिर खरचा कइ डारब। जब हम तोंहसे एतना प्रेम करित हएन, त का तोंहऊँ काहीं हमसे ओतनय प्रेम न करँइ चाही? 16का तूँ पंचे अइसा सोचते हया? कि हम तोंहरे ऊपर कउनव बोझ नहीं डारेन। पय चलाँकी से धोखा दइके, तोंहईं पंचन काहीं फँसाय लिहेन हय। 17अउर तूँ पंचे इआ बताबा, कि जिनहीं हम तोंहरे लघे पठएन तय, त का उनमा से कउनव के द्वारा तोंहईं पंचन काहीं धोखा दइके कुछू लिहेन हय? 18अउर हम तीतुस काहीं समझाइके, तोंहरे लघे पठएन तय, अउर उनखे साथ एकठे भाई काहीं घलाय पठएन तय, त इआ बताबा, कि का तीतुस तोंहईं पंचन काहीं धोखा दइके तोंहसे कुछू लिहिन तय? का हम पंचे एकय आत्मा से नहीं चली? अउर का एकय गइल माहीं नहीं चली?
19तूँ पंचे अबय तक इहय सोचते होइहा, कि हम पंचे अपने बारे माहीं सफाई दइ रहेन हय। नहीं, पय हम पंचे त परमातिमा काहीं हाजिर जानिके, मसीह के सेबक के रूप माहीं बोलि रहेन हय। अउर हे पियार भाई-बहिनिव, ईं सगली बातँय, हम पंचे, तोंहईं आत्मिक रूप से मजबूत बनामँइ के खातिर कहि रहेन हय। 20काहेकि हमहीं इआ बात के डेर हय, कि कहँव अइसा न होय, कि जब हम तोंहरे लघे अई, त जइसन तोंहईं पंचन काहीं हम पामँइ चाहित हएन, त उआमेर न पाई, अउर तुहूँ पंचे घलाय हमहीं जइसन पामँइ चहते हया, त उआमेर न पाबा। अउर हम इआ नहीं चाही, कि तोंहरे बीच माहीं, लड़ाई-झगड़ा होय, डाह होय, क्रोध होय, बिरोध होय, जलन होय, चुगली करब होय, घमन्ड होय, कउनव बात के बखेड़ा होय। 21अउर हमहीं इहव बात के डेर हय, कि जब हम तोंहसे मिलँइ के खातिर अई। त तोंहरेन आँगे, हमार परमातिमा हमहीं लज्जित न करँइ; अउर हमहीं उनखे खातिर दुखी होंय परय, जउन पहिले पाप किहिन तय, अउर घिनहे-घिनहे काम किहिन तय, अउर ब्यभिचार किहिन तय, अउर भोग-बिलास के काम किहिन तय, पय उनखे खातिर पस्चाताप नहीं किहिन आय।
13इआ चिट्ठी माहीं पवलुस के आखिरी चेतउनी
1अब हम तिसराय तोंहरे पंचन के लघे आय रहेन हँय। अउर जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, उहयमेर “हरेक बात दुइ इआ कि तीन गबाहन के गबाही के द्वारा सही इआ कि गलत साबित कीन जई13:1 ब्यब 17:6; 19:15।” 2अउर जब हम दुसराय तोंहरे साथ माहीं रहेन हँय, त तोहँई पंचन काहीं चेतायन तय। उहयमेर अब जब हम तोंहसे दूर हएन, तऊ जे कोऊ पाप किहिन हीं, उनहीं अउर बाँकी सगले मनइन काहीं घलाय पहिलेन से चेताए देइत हएन, कि जब हम पुनि तोंहरे लघे अउब, त उनहीं कइसव न छोंड़ब। 3इआमेर हम एसे कहित हएन, कि तूँ पंचे इआ बात के सबूत चहते हया, कि मसीह हमरे द्वारा बोलत हें, कि नहीं, पय तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि मसीह तोंहरे खातिर निबल नहिं आहीं, बलकिन तोंहरे पंचन के बीच माहीं सामरथी हें। 4इआ बात सही आय, कि जब मसीह काहीं क्रूस माहीं चढ़ाबा ग रहा हय, त ऊँ निबल देखात रहे हँय, पय अब परमातिमा के सक्ती से जिन्दा हें। एसे हमहूँ पंचे घलाय मसीह माहीं निबल देखइत हएन, पय परमातिमा के सक्ती से हमहूँ पंचे मसीह के साथ जिअत रहब। जउने तोंहार पंचन के सेबा करत रही। 5अउर अपने-आप काहीं तूँ पंचे जाँचा-परखा, कि बिसुआस माहीं बने हया, कि नहीं, अउर इहव जाँच करा कि मसीह तोंहरे पंचन के जीबन माहीं हें, कि नहीं। नहीं त तूँ पंचे परमातिमा के नजर माहीं निकम्मा ठहरिहा। 6पय हम इहय आसा करित हएन, कि तूँ पंचे जान लेइहा, कि हम पंचे निकम्मा नहिं आहेन। 7अउर हम पंचे अपने परमातिमा से इहय प्राथना करित हएन, कि तूँ पंचे कउनव बुरे काम न करा; हम पंचे इआ प्राथना एसे नहीं करी, कि हम पंचे सही देखाई परी, पय एसे करित हएन, कि तूँ पंचे भलाई के काम करा, चाह हम पंचे भले इआ परिच्छा माहीं असफल ठहरी। 8काहेकि हम पंचे सत्य के बिरोध माहीं, कुछू नहीं कइ सकी, पय सत्य के खातिर सब कुछ कइ सकित हएन। 9अउर जब हम पंचे निबल हएन, अउर तूँ पंचे बलमान हया, त हम पंचे आनन्द से भर जइत हएन, अउर इआ प्राथना घलाय करित हएन, कि तूँ पंचे पूरी तरह से बिसुआस माहीं मजबूत बन जा। 10जबकि अबे हम तोंहसे दूरी हएन, तऊ ईं बातन काहीं तोंहरे खातिर लिख रहेन हय, कि जब हम तोंहरे बीच माहीं अउब त, जउन अधिकार हमहीं प्रभू दिहिन हीं, त उआ तोंहरे फायदय के खातिर दिहिन हीं, हानि के खातिर न होय, त तूँ पंचे इआ ध्यान रख्या, कि हमहीं ओखर उपयोग कड़ाई से न करँइ परय।
पवलुस के नबस्कार
11हे भाई-बहिनिव, हम अपने बातन काहीं खतम करित हएन, अउर आखिर माहीं हम तोंहईं पंचन काहीं इआ लिखित हएन, कि तूँ पंचे आनन्दित रहा, बिसुआस माहीं मजबूत बनत जा, ढाढ़स रक्खा; अउर आपस माहीं एक मन रहा; एक दुसरे से मिल जुलिके रहा, अउर प्रेम अउर सान्ती देंइ बाले परमातिमा हमेसा तोंहरे पंचन के साथ रइहँय। 12अउर बड़े खुसी के साथ एक दुसरे से गले मिलिके नबस्कार करा। 13अउर इहाँ के सगले बिसुआसी भाई-बहिनी, तोंहईं पंचन काहीं नबस्कार करत हें। 14अउर प्रभू यीसु मसीह के किरपा, परमातिमा के प्रेम अउर पबित्र आत्मा के सहभागिता तोंहरे पंचन के साथ हमेसा होत रहय।