पतरस के लिखी पहिल चिट्ठी
इआ चिट्ठी के परिचय
पतरस के इआ पहिल चिट्ठी, यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ बाले भाई-बहिनिन के खातिर लिखी गे रही हय, जिनहीं इआ चिट्ठी माहीं “परमातिमा के चुने मनई” कहा ग हय। जउन एसिया माइनर प्रदेस के उत्तर के सगले छेत्र माहीं, तितर-बितर होइके रहत रहे हँय। इआ चिट्ठी के खास उद्देस पढ़ँइ बालेन काहीं मसीही जीबन माहीं आँगे बढ़ँइ के खातिर उत्साहित करब हय, जउन यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन दुख अउर सताव के सामना करत रहे हँय। लेखक इआ चिट्ठी पढ़ँइ बालेन काहीं, यीसु मसीह के खुसी के खबर के सुध देबाइके अइसा करत हें। काहेकि यीसु के मउत, अउर यीसु के मरेन म से जि उठब, अउर पुनि आमँइ के वादा उनहीं नई आसा देत हय। इआ कारन उनहीं अपने दुखन काहीं सोइकार कइके सहब जरूरी रहा हय, इआ बिसुआस के साथ, कि इआ उनखे बिसुआस के सच्चाई के परख होइ रही हय, अउर इआ कि “मसीह यीसु के दुसराय आमँइ के दिन” उनहीं पंचन काहीं एखर प्रतिफल जरूर मिली।
सताव के समय माहीं साहस बढ़ामँय के साथ-साथ लेखक इहव निबेदन करत हें, कि इआ चिट्ठी काहीं पढ़ँइ बाले मसीह के सेबकन कि नाईं जीबन जिअँइ।
हे भाई-बहिनिव हम अपना पंचन से बिनती करित हएन, कि जब अपना पंचे दुख अउर सताव के कारन निरास होइ जई, त इआ चिट्ठी काहीं जरूर पढ़ी। एसे अपना पंचन काहीं बड़ी हिम्मत मिली, अउर यीसु मसीह के ऊपर अपना पंचन के बिसुआस अउर मजबूत होइ जई।
रूप-रेखा:
किताब के परिचय 1:1,2
परमातिमा के मुक्ती काहीं सुधि देबाउब 1:3-12
पबित्र जीबन जिअँइ के खातिर उपदेस 1:13—2:10
दुखन के समय मसीही के जिम्मेबारी 2:11—4:19
मसीही के दीनता अउर सेबा 5:1-11
उपसंहार 5:12-14
1पतरस के अभिबादन
1हम पतरस आहेन, अउर इआ चिट्ठी काहीं लिख रहेन हय, जउन यीसु मसीह के खास चेला आहेन, हम इआ चिट्ठी परमातिमा के चुने उन मनइन काहीं लिख रहेन हय, जउन पुन्तुस, अउर गलातिया, अउर कप्पदूकिया, अउर आसिया, अउर बिथुनिया प्रदेसन माहीं तितर-बितर होइके रहत हें। 2तूँ पंचे पिता परमातिमा के भबिस्य ग्यान के मुताबिक, पबित्र आत्मा से पबित्र कीन जाँय के व्दारा, यीसु मसीह के हुकुम काहीं पालन करँइ के खातिर, अउर उनखे खून से छिनके जाँइ के खातिर चुने गए हया, तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा के किरपा, अउर सान्ति बहुतायत से मिलत रहय।
जिअत आसा के खातिर परमातिमा काहीं धन्यबाद
3हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के पिता परमातिमा के धन्यबाद होय, जउन यीसु मसीह काहीं मरेन म से जिआइके, अपने बड़ी दया से हमहीं पंचन काहीं अनन्त जीबन पामँइ के खातिर, जउन जिअत आसा ही, ओखे खातिर नबा जनम दिहिन हीं। 4कि जउने हम पंचे बारिसदार होंइ के उआ हक्क पाय जई, जउन हमरे खातिर स्वरग माहीं सुरच्छित हय, काहेकि उआ हक्क कबहूँ न नास होई, न कबहूँ खतमय होई, बलकिन उआ निरमल रही। 5अउर तोंहार पंचन के रक्छा परमातिमा के सक्ती के द्वारा, बिसुआस से उआ मुक्ती पामँइ के खातिर कीन जात ही, जउन अन्तिम न्याय के दिन माहीं प्रगट होंइ बाली हय। 6अउर इहय कारन से तूँ पंचे खुब आनन्दित होते हया। जबकि इआ बात जरूर हय, कि तूँ पंचे अबे कुछ दिना तक अनेकव प्रकार के परिच्छन माहीं परँइ के कारन, दुखी हया। 7अउर इआ एसे होत हय, कि तोंहार पंचन के बिसुआस, परिच्छा के द्वारा खरा निकरय, अउर तोंहार पंचन के जाँचा-परखा बिसुआस, आगी माहीं ताबा ग, नास होंइ बाले सोन से जादा कीमती हय, जब यीसु मसीह दुसराय अइहँय, त बिसुआस माहीं बने रहँइ के कारन, तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा से बड़ाई, महिमा, अउर मान-सम्मान मिली। 8काहेकि तूँ पंचे यीसु काहीं नहीं देखे आह्या, तऊ उनसे प्रेम करते हया, अउर अब त उनहीं बिना देखेन, उनखे ऊपर बिसुआस कइके अइसन आनन्दित अउर मगन होते हया, जउन बखान से बाहर अउर महिमा से भरा हय। 9अउर तूँ पंचे अपने बिसुआस के कारन अपने आत्मा काहीं मुक्ती देबाय रहे हया।
परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के गबाही
10अउर इहय मुक्ती के बारे माहीं, अउर तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा से मिलँइ बाली किरपा के बारे माहीं, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले, बड़ी सावधानी के साथ, इआ खोजबीन कइके भबिस्यबानी किहिन रहा हय। 11अउर उनखे भीतर जउन मसीह के आत्मा रहा हय, उआ पहिलेन से इआ बताबत रहा हय, कि मसीह के ऊपर कइसन दुख अइहँय, अउर ओखे बाद कइसन उनखर महिमा होई। अउर मसीह के आत्मा उनहीं पंचन काहीं इहव बताबत रहा हय, कि ईं बातँय कउने समय, अउर कउने दसा माहीं होइहँय, अउर ओखे बाद इआ संसार के का होई। 12अउर उनहीं पंचन काहीं इआ बताबा ग रहा हय, कि ऊँ पंचे ईं बातन काहीं बताइके आपन नहीं, बलकिन तोंहार पंचन के सेबा करत हें। अउर जउन खुसी के खबर अब तोंहईं पंचन काहीं, ऊँ मनइन के द्वारा मिली हय, जिनहीं स्वरग से पबित्र आत्मा मिला रहा हय, अउर ऊँ पंचे ओहिन के बताए से, तोंहईं पंचन काहीं खुसी के खबर सुनाइन रहा हय, अउर स्वरगदूत घलाय ईं बातन काहीं देखँइ के बड़ी लालसा करत हें।
पबित्र जीबन जिअँइ के खातिर बोलाहट
13एसे तूँ पंचे मानसिक रूप से सचेत रहा, अउर खुद काहीं काबू माही रखिके, उआ किरपा के खातिर पूरी आसा रक्खा, जउन तोंहईं पंचन काहीं यीसु मसीह के दुसराय आमँइ के समय मिलँइ बाली हय। 14एसे तूँ पंचे हुकुमन काहीं मानँइ बाले लड़िकन कि नाईं बना, इआ नहीं कि जइसन तूँ पंचे पहिले, जब मसीह के ऊपर बिसुआस नहीं करत रहे आह्या, त बुरी इच्छन के मुताबिक जीबन जिअत रहे हया, त अब पहिले कि नाईं पुनि न बना। 15बलकिन जइसन तोंहईं पंचन काहीं बोलामँइ बाले परमातिमा पबित्र हें, उहयमेर तुहूँ पंचे अपने सगले चाल-चलन माहीं पबित्र बना। 16काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं घलाय इआ लिखा हय, कि परमातिमा कहत हें, “पबित्र बना, काहेकि हम पबित्र हएन।” 17अउर परमातिमा जउन बिना पच्छपात किहे, सगले मनइन के उनखे कामन के मुताबिक न्याय करत हें, उनसे तूँ पंचे हे पिता, कहिके प्राथना करते हया, त अपने-आप काहीं परदेसी समझिके, परमातिमा काहीं सम्मान देत आपन जीबन बिताबा। 18काहेकि तूँ पंचे खुदय जनते हया, कि तोंहार पंचन के निकम्मा चाल-चलन, जउन तोंहरे बाप-दादन से चला आय रहा हय, ओसे, तोंहईं पंचन काहीं मुक्ती, नास होंइ बाले सोन-चाँदी से नहीं मिली आय। 19बलकिन उआ मुक्ती तोंहईं पंचन काहीं, निरदोस अउर निस्कलंक मेम्ना, अरथात मसीह के अनमोल खून के द्वारा मिली हय। 20अउर मुक्ती देंइ के खातिर यीसु मसीह काहीं, संसार काहीं बनामँइ से पहिलेन चुनि लीन ग रहा हय, पय अब इआ अन्तिम जुग माहीं तोंहरे खातिर उनहीं प्रगट कीन ग हय। 21अउर तूँ पंचे उँइन यीसु मसीह के कारन, परमातिमा के ऊपर बिसुआस करते हया, जउन यीसु मसीह काहीं मरेन म से पुनि जिआइके, उनहीं महिमा दिहिन, कि जउने तोंहार पंचन के आसा अउर बिसुआस परमातिमा के ऊपर होय।
22एसे जब तूँ पंचे, भाईचारा के प्रेम के खातिर, सत्य के पालन कइके, अपने-अपने आत्मन काहीं पबित्र किहा हय, त तन- मन लगाइके आपस माहीं एक दुसरे से प्रेम करा। 23काहेकि तूँ पंचे नास होंइ बाले बीज से नहीं, बलकिन कबहूँ न नास होंइ बाले बीज से, अरथात परमातिमा के जिन्दा अउर हमेसा ठहरँय बाले बचन से नबा जनम पाए हया। 24अउर पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि
“हरेक प्रानी चारा कि नाईं होत हय, अउर ओखर सगली सुन्दरता, चारा के फूल कि नाईं होत ही, अउर उआ चारा कि नाईं झुराय जात हय, अउर फूल कि नाईं झर जात हय।”
25“पय प्रभू के बचन जुगन-जुगन तक अटल बना रही।
अउर इहय खुसी के खबर के बचन आय, जउन तोंहईं पंचन काहीं सुनाबा ग रहा हय1:25 यसा 40:6-8।”
21एसे तूँ पंचे अपने जीबन से हरेकमेर के बैर-भाव, छल-कपट, इरसा अउर बदनामी काहीं दूर कइके, 2नबा पइदा भे बच्चन कि नाईं सुद्ध आत्मिक दूध पामँइ के लालसा करा, जउने ओखे द्वारा मुक्ती पामँइ के खातिर आँगे बढ़त जा। 3देखा, प्रभू केतना दयालू हें, अब तूँ पंचे इआ जान लिहे हया।
अनमोल जिअत पथरा अउर चुने प्रजा
4उनखे लघे आबा, जिनहीं संसारिक मनई त बिना काम के ठहराइन हीं, पय ऊँ परमातिमा के द्वारा चुने अउर अनमोल जिअत पथरा आहीं। 5अउर तुहूँ पंचे खुदय जिअत पथरा कि नाईं, आत्मिक घर बनाए जाय रहे हया, जउने याजकन के पबित्र समाज बनिके, अइसन आत्मिक बलिदान चढ़ाबा, जउन यीसु मसीह के द्वारा परमातिमा काहीं सोइकार होय। 6अउर पबित्र सास्त्र माहीं घलाय इआ लिखा हय, कि परमातिमा कहिन हीं,
“देखा, हम सिय्योन पहार माहीं एकठे कोनमा के पथरा धरित हएन, जउन हमार चुना आय, अउर उआ अनमोल हय, एसे जे कोऊ ओखे ऊपर बिसुआस करी, उआ कउनव मेर से लज्जित न होई।”
7एसे तूँ पंचे जउन उआ पथरा के ऊपर बिसुआस करते हया, उआ तोंहरे पंचन के खातिर अनमोल हय, पय जे कोऊ ओखे ऊपर बिसुआस नहीं करँय, उनखे खातिर
“जउने पथरा काहीं राजा के कारीगर लोग बिना काम के ठहराइन रहा हय, उहय कोने के खास पथरा बनिगा2:7 भज 118:22।” 8अउर
“उआ अइसन पथरा बनिगा जेसे मनइन काहीं ठेस लागत ही, अउर अइसन बड़ी चट्टान बनिगा जउने से मनइन काहीं ठोकर लागत ही2:8 यसा 8:14।”
काहेकि ऊँ पंचे परमातिमा के बचन काहीं न मानिके ठोकर खात हें, अउर ऊँ पंचे एहिन के खातिर ठहराए घलाय गे रहे हँय। 9पय तूँ पंचे परमातिमा के चुने बंस आह्या, अउर राज पदधारी याजकन के समाज आह्या, अउर पबित्र मनई, अउर परमातिमा के खास प्रजा आह्या, अउर उँइन तोहईं पंचन काहीं, अँधिआर से निकारिके, अपने अदभुत जोति माहीं बोलाइन हीं, कि उनखे महिमा काहीं अपने जीबन से देखाबा। 10एक समय अइसन रहा हय, जब तूँ पंचे परमातिमा के प्रजा नहीं रहे आह्या, पय अब तूँ पंचे परमातिमा के प्रजा बन गया हय, पहिले तोंहरे पंचन के ऊपर परमातिमा के दया नहीं भे रही आय, पय अब तोंहरे पंचन के ऊपर परमातिमा के दया भे ही।
मसीही जबाबदारी
11हे पियार भाई-बहिनिव, हम तोंहसे बिनती करित हएन, कि तूँ पंचे अपने-आप काहीं परदेसी, अउर यात्री जानिके, इआ संसार के उन बुरी अभिलासन से बचे रहा, जउन तोंहरे आत्मा से युद्ध करती हईं। 12गैर मसीही मनइन के बीच माहीं, तोंहार चाल-चलन निकहा होंइ चाही; एसे कि जउने-जउने बातन माहीं, ऊँ पंचे तोहईं कुकर्मी जानिके बदनाम करत हें, ऊँ पंचे तोंहरे निकहे कामन काहीं देखिके; ईंन निकहे कामन के कारन परमातिमा के न्याय करँइ बाले दिन काहीं, परमातिमा के बड़ाई करँय।
परमातिमा के लोगन के फर्ज
13अउर तूँ पंचे प्रभू के खातिर मनइन के ठहराए, हरेक अधिकारन के अधीन रहा, अउर राजा के अधीन एसे रहा, काहेकि ऊँ सगले मनइन के ऊपर प्रधान आहीं। 14अउर हाकिमन के अधीन एसे रहा, काहेकि उनहीं कुकर्मिन काहीं सजा देंइ के खातिर, अउर सही काम करँइ बाले मनइन के बड़ाई करँइ के खातिर पठबा ग हय। 15काहेकि परमातिमा के इहय मरजी ही, कि तूँ पंचे निकहे कामन काहीं करा, अउर निरबुद्धी मनइन के अग्यानता के बातन काहीं बन्द कइ द्या। 16अउर तूँ पंचे अजाद मनई कि नाईं जीबन जिआ, पय अपने अजादी काहीं बुराई करँइ के आड़ न बनाया, बलकिन परमातिमा के सेबकन कि नाईं जीबन जिआ। 17सगले मनइन के सम्मान करा, अपने बिसुआसी भाई-बहिनिन से प्रेम रक्खा, परमातिमा के भय माना, अउर राजा के सम्मान करा।
मसीह हमार पंचन के आदर्स आहीं
18हे दासव, हरेकमेर से भय के साथ, अपने मालिकन के अधीन रहा, निकहे अउर नम्र मालिकन भर के नहीं, बलकिन कठोर मालिकन के घलाय अधीन रहा। 19काहेकि अगर कोऊ परमातिमा के बचन के मुताबिक जीबन जिअत, अन्याय से दुख अउर कस्ट सहत हय, त परमातिमा द्वारा ओखर बड़ाई होई। 20पय अगर तूँ पंचे अपराध कइके मार खा, अउर धीरज धरा, त ओमा कउनव बड़ाई के बात नहिं आय, पय अगर तूँ पंचे निकहा काम कइके दुख सहते हया, अउर धीरज धरते हया, त परमातिमा तोंहार बड़ाई करिहँय। 21अउर तूँ पंचे एहिन के खातिर परमातिमा के द्वारा बोलाए गया हय, काहेकि मसीह घलाय तोंहरे खातिर दुख सहिके, तोंहईं नमूना देखाइगे हँय, कि जउने तुहूँ पंचे उनहिन के पद चिन्हन माहीं चला। 22अउर मसीह के बारे माहीं पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “न त ऊँ कउनव पापय किहिन, अउर न उनखे मुँहे से कउनव छल-कपट के बातँय निकरीं। 23अउर न त ऊँ गारी सुनिके कबहूँ गारिन दिहिन, अउर दुख काहीं सहिके ऊँ कोहू काहीं धमकी नहीं देत रहे आँय, बलकिन अपने-आप काहीं सही न्याय करँइ बाले परमातिमा के हाँथ माहीं सउँपि देत रहे हँय।” 24ऊँ खुदय हमरे पंचन के पापन काहीं अपने देंह के ऊपर लए क्रूस माहीं चढ़िगें, जउने हम पंचे पाप के सम्बन्ध से पूरी तरह से मुक्त होइके, परमातिमा के नजर माहीं जउन निकहा हय, उहय करी; अउर उनहिन के मार खाँइ से तूँ पंचे चंगे भया हय। 25काहेकि तूँ पंचे पहिले भटकी गड़रन कि नाईं रहे हया, पय अब अपने प्रान के रखबारी करँइ बाले, अउर मुखिया, अरथात परमातिमा के लघे पुनि आय गए हया।
3मेहेरिआ-मंसेरुआ के बारे माहीं पतरस के सिच्छा
1हे मेहेरिअव, तुहूँ पंचे अपने-अपने मंसेरुआ के अधीन रहा, एसे अगर उनमा से कउनव अइसन होंय, जउन परमातिमा के बचन काहीं न मानत होंय, 2तऊ ऊँ पंचे तोंहरे मान-सम्मान समेत, पबित्र चाल-चलन काहीं देखिके, अपने-अपने मेहेरिआ के चाल-चलन के द्वारा परमातिमा के तरफ खिंचे चले आमँय। उनहीं पंचन काहीं प्रभू के बारे माहीं बेर-बेर बतामँइ के जरूरत न परी। 3अउर तोंहार पंचन के सिंगार देखाला के खातिर न होय, जइसन कि बार गुहब, अउर सोन-चाँदी के गहना पहिरब, इआ कि मेर-मेर के ओन्हा पहिरब। 4बलकिन तोंहार पंचन के सिंगार त मन के भीतर छिपा निकहा सुभाव होंइ चाही, जइसन नम्रता, अउर मन के दीनता के कबहूँ न नास होंइ बाली सजाबट, से सजे रहब, काहेकि परमातिमा के नजर माहीं एखर बड़ी कीमत ही। 5अउर पुरान समय माहीं घलाय, जउन मेहेरिआ पबित्र रही हईं, ऊँ पंचे परमातिमा के ऊपर पूर आसा रक्खत रही हँय, अउर अपने-आप काहीं इहइमेर सजाबत रही हँय, अउर अपने-अपने मंसेरुआ के अधीन रहत रही हँय। 6जइसन सारा अपने मंसेरुआ अब्राहम के हुकुम मानत रही हँय, अउर उनहीं स्वामी कहत रही हँय। इहइमेर अगर तुहूँ पंचे घलाय, बिना डेराने भलाई के निकहे काम करिहा, त उनखर बिटिया कहइहा। 7उहयमेर हे मंसेरुअव, तुहूँ पंचे घलाय अपने-अपने मेहेरिआ के साथ समझदारी से जीबन निरबाह करा। अउर उनहीं कमजोर जानिके, उनखर सम्मान करा। इआ समझिके, कि हम पंचे दोनव जने अनन्त जीबन के बरदान के बारिसदार आहेन। जउने तोंहार पंचन के प्राथना परमातिमा के लघे तक पहुँचय से न रुकय।
भलाई करँइ के कारन सताव
8एसे सगले जन एक मन रहा, अउर एक दुसरे के ऊपर किरपा करत रहा, अउर आपस माहीं भाईचारा के प्रेम बनाए रहा, अउर दयालू, अउर नम्र बना। 9अउर बुराई के बदले माहीं बुराई न किहा, अउर गारी के बदले माहीं गारिव न दिहा, बलकिन गारी के बदले माहीं आसिरबाद दिहा। काहेकि तूँ पंचे एहिन खातिर बोलाए गए हया, जउने परमातिमा के आसिरबाद पामँइ के बारिसदार बन जा। 10काहेकि
“जे कोऊ अनन्त जीबन पामँइ चाहत हय, अउर परमातिमा के निकहे दिन देखँइ चाहत हय, त उआ अपने जीभ काहीं बुराई करँइ से, अउर अपने मुँहे काहीं छल-कपट के बातँय करँय से रोंके रहय।
11अउर उआ बुराई के साथ छोंड़िके, भलाई करय; अउर उआ मेल-मिलाप करँइ के कोसिस माहीं लगा रहय3:11 भज 34:12-16।”
12काहेकि “प्रभू के आँखी, परमातिमा के नजर माहीं निकहा काम करँइ बाले मनइन के ऊपर लगी रहती हईं, अउर उनखर कान, उनखे पंचन के बिनती काहीं बड़े ध्यान से सुनत हें। पय प्रभू, बुराई करँइ बाले मनइन के बिरोध माहीं रहत हें।”
13एसे अगर तूँ पंचे हमेसा भलाई करँइ माहीं लगे रइहा, त तोंहार पंचन के बुराई कोऊ नहीं कइ सकय। 14अउर अगर तूँ पंचे भलाई के काम करँइ के कारन दुखव उठउते हया, त धन्य हया। पय मनइन के डेरबाए से न डेरया, अउर न घबरया। 15बलकिन मसीह काहीं आपन प्रभू मानिके, अपने-अपने मन काहीं पबित्र रख्या, अउर जे कोऊ तोंहरे आसा के बारे माहीं पूँछँय, त तूँ पंचे नम्रता अउर परमातिमा के भय के साथ, जबाब देंइ के खातिर हमेसा तइआर रह्या। 16अउर तूँ पंचे अपने सोच-बिचार काहीं सुद्ध रख्या, एसे कि जउने बातन के बारे माहीं तोंहार बदनामी होत ही। ओखे बारे माहीं, जउन तोंहरे मसीही चाल-चलन के अपमान करत हें, ऊँ लज्जित होइ जाँय। 17काहेकि अगर परमातिमा के इहय मरजी हय, कि तूँ पंचे दुख उठाबा, त बुराई के कारन दुख उठामँइ से निकहा हय, कि तूँ पंचे भलाई करँइ के कारन दुख उठाबा। 18काहेकि मसीह घलाय हमरे पंचन के पापन के बदले माहीं, दुख उठाइन हीं, अरथात ऊँ निरदोस रहे हँय, तऊ हम पंचे जउन पापी रहेन हँय, हमरे खातिर एक बेरकी मरिगें, कि जउने हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के लघे लइ आमँय। मसीह सारीरिक रूप से त मारे गें, पय आत्मिक रूप से जिआय दीनगें। 19अउर आत्मय के रूप माहीं, यीसु जाइके ऊँ आत्मन काहीं घलाय प्रचार किहिन, जउन बन्धन माहीं परी रही हँय। 20अउर नूह के समय माहीं घलाय, जे कोऊ परमातिमा के हुकुम काहीं नहीं मानिन तय। त परमातिमा नूह के जिहाज बनत तक धीरज धरे, रुके रहे हँय। ओखे बाद जल-प्रलय के कारन, जिहाज माहीं चढ़िके केबल आठ जने, अरथात नूह के परिबार भर बचे रहे हँय, बाँकी पानी माहीं बूड़िके मरिगें तँय। 21अउर इआ पानी बपतिस्मा के निसानी आय, जउने से अब तोंहईं पंचन काहीं मुक्ती मिलत ही। बपतिस्मा के मतलब देंह के मइल धोउब न होय, बलकिन बपतिस्मा के द्वारा सुद्ध हिरदँय से, खुद काहीं परमातिमा के खातिर समरपित करब आय। इआ बपतिस्मा, यीसु मसीह के मरेन म से पुनि जि उठँय के द्वारा, हमहीं पंचन काहीं मुक्ती देत हय। 22अउर यीसु मसीह स्वरग माहीं ऊपर जाइके, परमातिमा के दहिने कइती बइठिगें हँय; अउर स्वरग के दूत, अउर सगले अधिकारी, अउर सगली सक्ती, सब उनखे अधीन कइ दीनगे हँय।
4बदले जीबन के बारे माहीं सिच्छा
1एसे जब मसीह अपने देंह माहीं दुख उठाइन हीं, त तुहूँ पंचे घलाय उनहिन कि नाईं सोच-बिचार काहीं अपनाय ल्या। काहेकि जे कोऊ अपने देंह माहीं दुख उठाबत हय, त उआ पाप के सम्बन्ध से मुक्ती पाय चुका हय। 2एसे तूँ पंचे संसार के बाँकी आपन जीबन, मनइन के बुरी अभिलासन के मुताबिक नहीं, बलकिन परमातिमा के मरजी के मुताबिक बिताबा। 3काहेकि तूँ पंचे, अबे तक जउन मनई परमातिमा काहीं नहीं जानँय, उनखे कि नाईं, आपन जीबन बिताबत रहे हया, जइसन लुचपन के बुरी अभिलासन माहीं, मतबालापन माहीं, भोग-बिलास माहीं, खुब दारू पिअँइ माहीं, मूरतिन के पूजा माहीं, जउने से परमातिमा नफरत करत हें। ईं कामन माहीं तूँ पंचे पहिलेन खुब समय गमाय चुके हया, उहय खुब होइगा। 4अउर अब तूँ पंचे उनखे लुचपन के भारी कामन माहीं, उनखर साथ नहीं देते आह्या, एसे ऊँ पंचे अचरज मानत हें, अउर तोहईं पंचन काहीं भला-बुरा कहत हें। 5पय उनहीं पंचन काहीं अपने ईं बुरे कामन के हिंसाब, परमातिमा काहीं देंइ परी, जउन जिन्दा अउर मरे दोनव के न्याय करँइ काहीं तइआर हें। 6एहिन से ऊँ बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं जउन मर चुके हँय, खुसी के खबर सुनाई गे रही हय, कि जउने देंह माहीं त उनखर न्याय मनइन के मुताबिक होय, पय आत्मिक रूप माहीं, ऊँ पंचे परमातिमा के मुताबिक जिअत रहँय।
परमातिमा के निकहा भन्डारी
7सगले संसार के अन्त लघेन आइगा हय, एसे तूँ पंचे संयमी अउर समझदार बना, कि जउने प्राथना कइ सका। 8अउर सबसे बड़ी बात त इआ हय, कि एक दुसरे से जादा से जादा प्रेम करा; काहेकि प्रेम अनगिनत पापन काहीं मूँद देत हय। 9अउर बिना कुड़-कुड़ाए, एक दुसरे के निकहा स्वागत-सत्कार करा। 10अउर परमातिमा से जेही जउन बरदान मिला हय, ओही परमातिमा के अनेकव प्रकार के किरपा माहीं, निकहे भन्डारिन कि नाईं एक दुसरे के सेबा माहीं लगामँइ चाही। 11अउर अगर कोऊ बोलत हय, त अइसन बोलय मानो परमातिमा के बचन आय; अगर कोऊ सेबा करय; त उआ सक्ती से करय जउन परमातिमा ओही देत हें; जउने हरेक बातन माहीं यीसु मसीह के द्वारा परमातिमा के बड़ाई होय, काहेकि बड़ाई अउर अधिकार जुग-जुग तक उनहिन के आय। आमीन।
मसीह के दुखन माहीं भागीदार होब
12हे पियार साथिव, तोंहईं पंचन काहीं जाँचय-परखँय के खातिर, जउन दुख रूपी आगी तोंहरे पंचन के बीच माहीं भड़क उठी हय, त इआ समझिके अचरज न माना, कि कउनव अनहोनी आय घट रही हय। 13पय जइसय-जइसय तूँ पंचे मसीह के दुखन माहीं भागीदार होते हया, त आनन्द मनाबा, जउने जब मसीह के महिमा प्रगट होय, त तुहूँ पंचे खुब आनन्दित अउर मगन होइ सका। 14अउर अगर मसीह के नाम के खातिर, मनई तोंहार पंचन के अपमान करत हें, त तूँ पंचे धन्य हया; काहेकि महिमा के आत्मा जउन परमातिमा के आत्मा आय, तोंहरे भीतर निबास करत हय। 15पय तूँ पंचे इआ ध्यान रख्या, कि तोंहरे पंचन के बीच म से कउनव मनई, मसीह के नाम के अलाबा, कतल करँइ के कारन, इआ कि चोरी करँइ के कारन, इआ कि कुकर्मी होंइ के कारन, इआ कि दुसरे के काम माहीं टाँग अड़ामँइ के कारन दुख न पाबय। 16पय अगर मसीह के ऊपर बिसुआस किहे के कारन, दुख पाबत हय, त उआ लज्जित न होय, बलकिन इआ बात के खातिर परमातिमा के बड़ाई करय। 17काहेकि उआ समय आइगा हय, कि पहिले परमातिमा के ऊपर बिसुआस करँइ बाले मनइन के न्याय कीन जाय। अउर जब न्याय के सुरुआत, हमहिन पंचन से होई। त उनखर अन्त माहीं का हाल होई, जउन परमातिमा के खुसी के खबर काहीं नहीं मानँय? 18अउर
“अगर धरमी4:18 नीति 11:31 मनई बड़े मुसकिल से मुक्ती पाई, त पापी अउर भक्तिहीन मनई के त कउनव ठिकानय न होई।”
19एसे जे कोऊ परमातिमा के मरजी के मुताबिक दुख उठाबत हें, ऊँ पंचे भलाई के काम करत, अपने-अपने प्रान काहीं बिसुआस के काबिल संसार के रचइता परमातिमा के हाँथे माहीं सउँपि देंय।
5मसीही मन्डली के अँगुअन अउर नए बिसुआसिअन काहीं पवलुस के सँदेस
1तोंहरे पंचन के बीच माहीं जउन मसीही मन्डली के अँगुआ हें, हमहूँ उनहिन कि नाईं अँगुआ हएन, अउर मसीह जउन दुख सहिन हीं, हम ओखर गबाह हएन, अउर प्रगट होंइ बाली महिमा माहीं भागीदार होइके, उनहीं पंचन काहीं इआ समझाइत हएन। 2कि परमातिमा के उआ झुन्ड के रखबारी करा, जउन तोंहईं पंचन काहीं सउँपा ग हय, अउर इआ काम कउनव दबाव से नहीं, बलकिन परमातिमा के मरजी के मुताबिक, बड़े खुसी के साथ पूरे मन से किहा। अउर इआ काम नीच कमाई के खातिर न किहा। 3अउर जउन झुन्ड तोंहईं पंचन काहीं रखबारी के खातिर सउँपा ग हय, उनखे ऊपर आपन अधिकार न जताबा, बलकिन झुन्ड के खातिर आदर्स बना। 4अउर जब संसार के रखबारी करँइ बाले परमप्रधान अइहँय, त तोंहईं पंचन काहीं महिमा के मुकुट दीन जई, जउन कबहूँ न मुरझई। 5इहइमेर से हे नवजमानव, तुहूँ पंचे घलाय अपने मसीही मन्डली के अँगुअन के अधीन रहा, अउर तूँ पंचे सगले जन नम्रता के साथ एक दुसरे के सेबा के खातिर, हमेसा तइआर रहा, काहेकि “परमातिमा5:5 नीति 3:34 घमन्ड करँइ बालेन के बिरोध करत हें, पय जे कउनव बात के घमन्ड नहीं करँय, उनखे ऊपर किरपा करत हें।” 6एसे तूँ पंचे परमातिमा के बलमान हाँथ के नीचे नम्रता के साथ रहा, जउने ऊँ तोंहईं उचित समय माहीं बढ़ामँय। 7अउर आपन सगली चिन्ता उनहिन के ऊपर डार द्या, काहेकि उनहीं हमेसा तोंहार पंचन के ख्याल रहत हय। 8अउर तूँ पंचे सचेत होइके, हमेसा परमातिमा के बचन माहीं बने रहा, काहेकि तोंहार बइरी सइतान, गरजँय बाले सेर कि नाईं, हमेसा इआ खोज माहीं रहत हय, कि केही परमातिमा के बचन से भटकाय देई। 9अउर तूँ पंचे बिसुआस माहीं मजबूत होइके, ओखर सामना करा, काहेकि तूँ पंचे जनते हया, कि सगले संसार के तोंहार मसीही भाई-बहिनी घलाय, इआमेर के दुख भोग रहे हँय। 10अउर अब परमातिमा जउन अनन्त किरपा के सोता आहीं। उँइन तोंहईं मसीह के द्वारा अपने अनन्त महिमा माहीं बोलाइन हीं, तोंहईं थोरी देर तक दुख भोगे के बाद, खुदय तोंहईं बिसुआस माहीं मजबूत, स्थिर, अउर बलमान कइ देइहँय। 11उनखर अधिकार जुग-जुग तक बना रहय। आमीन।
पतरस के आखिरी नबस्कार
12हम आपन इआ चिट्ठी सिलबानुस के हाँथे से पठइत हएन, जिनहीं हम बिसुआस के काबिल आपन भाई मानित हएन, अउर अपने इआ चिट्ठी माहीं संछेप माहीं लिखिके, तोंहईं पंचन काहीं इआ समझामँइ के कोसिस किहेन हय, अउर इआ गबाही दिहेन हय, कि परमातिमा के सच्ची किरपा इहय आय, कि तूँ पंचे उनखे ऊपर बिसुआस माहीं स्थिर रहा। 13अउर बेबीलोन प्रदेस माहीं जउन तोंहरेन पंचन कि नाईं परमातिमा के चुने बिसुआसी भाई-बहिनी हें, ऊँ पंचे, अउर मसीह के ऊपर बिसुआस करँइ के कारन, मरकुस जउन हमरे लड़िका कि नाईं हें, तोहँई नबस्कार करत हें। 14अउर तूँ पंचे बड़े प्रेम के साथ खुसी से एक दुसरे से गले मिलिके नबस्कार करा। अउर तूँ पंचे जेतने जन मसीह के ऊपर बिसुआस करते हया, मसीह के सान्ती तोंहईं पंचन काहीं मिलत रहय।