यूहन्ना के लिखी पहिल चिट्ठी

इआ चिट्ठी के परिचय

यूहन्ना के लिखी पहिल चिट्ठी के मुख्य दुइठे उद्देस्य हें: (1) अपने पढ़ँइ बालेन काहीं परमातिमा अउर उनखे लड़िका, यीसु मसीह, के सहभागिता माहीं जीबन जिअँइ के खातिर उत्साहित करब, अउर (2) लबरी सिच्छा के पालन करँय, जउने से सहभागिता नास होइ जात ही, एखे बिरोध माहीं चेतउनी देब। इआ झूँठ सिच्छा इआ सोच माहीं चलत रही ही, कि बुराई भवतिक संसार के सम्परक माहीं आमँइ के कारन होत ही, अउर एसे यीसु, परमातिमा के लड़िका, असलिअत माहीं एकठे मनई होइन नहीं सकँय। ईं सिच्छा देंइ बालेन के दाबा रहा हय, कि मुक्ती पामँइ के खातिर मनई काहीं, इआ संसार के जीबन से सम्बन्धित बातन से मुक्त होंइ परी; अउर ऊँ पंचे इहव सिखाबत रहे हँय, कि नयतिकता इआ कि अपने भाई से प्रेम रक्खँय जइसन बातन के मुक्ती से कउनव सम्बन्ध नहिं आय।

इआ सिच्छा के बिरोध माहीं लेखक साफ-साफ इआ बताबत हें, कि यीसु मसीह बास्तव माहीं एकठे मनई रहे हँय, अउर ऊँ इआ बात माहीं जोर देत हें, कि ऊँ पंचे जउन यीसु मसीह माहीं बिसुआस करत हें, अउर परमातिमा से प्रेम रक्खत हें, ऊँ पंचे जरूर आपस माहीं घलाय एक दुसरे से प्रेम रक्खँय।

रूप-रेखा :

भूमिका 1:1-4

जोति अउर अँधिआर 1:5—2:29

परमातिमा के सन्तान अउर सइतान के सन्तान 3:1-24

सत्य अउर झूँठ 4:1-6

प्रेम के करतब्य 4:7-21

बिजई बिसुआस 5:1-21

1

मनइन काहीं जीबन देंइ बाला बचन

1इआ चिट्ठी माहीं हम, जीबन देंइ बाले उआ बचन के बारे माहीं लिखित हएन, जउन इआ संसार के बनामँइ से पहिलेव रहा हय, जउने काहीं हम पंचे सुनेन हय, अउर जिनहीं हम पंचे अपने आँखिन से देखेन हय, बलकिन जिनहीं हम पंचे बड़े ध्यान से देखेन, अउर हाँथन से छुएन हय। 2ऊँ अनन्त जीबन देंइ बाले आहीं, उनहीं परमातिमा सगले मनइन के खातिर प्रगट किहिन हीं। हम पंचे उनहीं देखेन हय, अउर उनखे बारे माहीं जउन खुसी के खबर ही, ओही हम पंचे तोंहईं बताइत हएन, कि ऊँ तोंहऊँ काहीं अनन्त जीबन देंइ बाले आहीं, ऊँ पिता परमातिमा के साथ माहीं रहे हँय, अउर पिता परमातिमा उनहीं हमरे ऊपर प्रगट किहिन हीं। 3जउन कुछू हम पंचे उनखे बारे माहीं देखेन, अउर सुनेन हय, ओहिन के खबर तोंहईं पंचन काहीं देइत हएन, कि जउने तुहूँ पंचे हमरे पंचन के साथ सहभागी होइजा; अउर हमार पंचन के इआ सहभागिता, पिता परमातिमा के साथ। अउर उनखे लड़िका यीसु मसीह के साथ ही। 4अउर ईं बातँय हम पंचे एसे लिखेन हय, कि हमार पंचन के आनन्द पूर होइ जाय।

उँजिआरे माहीं चलब

5जउन खुसी के खबर हम पंचे उनसे सुनेन हय, उहय तोंहईं सुनाइत हएन, उआ इआ आय, कि परमातिमा जोति आहीं; अउर उनमा एक्कव अँधिआर नहिं आय। 6अगर हम पंचे कही, कि हमार उनखे साथ सहभागिता ही, अउर पुनि पाप के अँधिआर माहीं जीबन जिअत रही, त हम पंचे झूँठ बोलित हएन, अउर सत्य के मुताबिक जीबन नहीं जी। 7पय जइसन ऊँ उँजिआर माहीं चलत हें, उहयमेर अगर हमहूँ पंचे उँजिआर माहीं चली, त एक दुसरे के साथ हमार पंचन के सहभागिता ही; अउर परमातिमा के लड़िका यीसु के खून, हमहीं पंचन काहीं सगले पापन से सुद्ध करत हय। 8अगर हम पंचे इआ कही, कि हमरे जीबन माहीं कउनव पाप नहिं आय, त खुद काहीं धोखा देइत हएन, अउर हमरे पंचन के जीबन माहीं सत्य नहिं आय। 9पय अगर हम पंचे अपने पापन काहीं सोइकार कइ लेई, त परमातिमा हमरे पापन काहीं माफ करँय, अउर सगले अधरमन से सुद्ध करँइ माहीं, बिसुआस के काबिल अउर धरमी हें। 10अगर कही, कि हम पंचे कउनव पाप नहीं किहेन आय, त हम पंचे परमातिमा काहीं झूँठ ठहराइत हएन, अउर उनखर बचन हमरे पंचन के जीबन माहीं नहिं आय।

2

यीसु हमार पंचन के सहायता करँइ बाले आहीं

1हे हमार पियार लड़िकव, हम ईं बातन काहीं एसे लिखित हएन, कि तूँ पंचे पाप न करा, अउर अगर कोऊ पाप करत हय, त पिता परमातिमा के आँगे हमरे पंचन के पापन के दन्ड से रक्छा करँइ बाले एक जने बिचबई हें, अउर ऊँ धरमी यीसु मसीह आहीं। 2ऊँ केबल हमरे पंचन के पापन के माफी के खातिर भर नहीं, बलकिन सगले संसार के पापन के माफी के खातिर घलाय बलिदान भें। 3अगर हम पंचे उनखे हुकुमन काहीं मानब, त ओसे हम पंचे जान लेब, कि हम पंचे उनहीं जान लिहेन हय। 4जे कोऊ इआ कहत हय, कि हम उनहीं जान गएन हय, अउर उनखे हुकुमन काहीं नहीं मानय, त उआ लबरा हय; अउर ओखे जीबन माहीं सत्य नहिं आय। 5पय जे कोऊ उनखे बचन के मुताबिक चलत हय, त ओखे जीबन माहीं सचमुच परमातिमा के प्रेम पूरी तरह से बना हय, एहिन से मालुम होत हय, कि हम पंचे उनखे बचन माहीं बने हएन। 6जे कोऊ इआ कहत हय, कि हम परमातिमा के बचन माहीं बने हएन, ओही यीसु कि नाईं जीबन जिअँइ चाही।

नबा हुकुम

7हे पियार साथिव, हम तोंहईं कउनव नबा हुकुम नहीं लिखी, बलकिन उहय पुरान हुकुम जउन सुरुआतय से तोंहईं मिला हय; इआ पुरान हुकुम उआ खुसी के खबर आय, जउने काहीं तूँ पंचे सुने हया। 8पुनि हम तोंहईं नबा हुकुम लिखित हएन; इआ आसा से कि सत्य, मसीह के अउर तोंहरे जीबन माहीं उजागर भ हय, काहेकि अँधिआर खतम होइ रहा हय, अउर सत्य के जोति चमकँइ लाग ही। 9जे कोऊ इआ कहत हय, कि हम जोति माहीं हएन; अउर अपने भाई से दुसमनी रक्खत हय, त उआ अबहिनव अँधिआर माहीं हय। 10जे कोऊ अपने भाई से प्रेम रक्खत हय, उआ जोति माहीं बना रहत हय, अउर कउनव अइसा कारन नहिं आय कि ओही ठोकर लागय। 11पय जे कोऊ अपने भाई से दुसमनी रक्खत हय, उआ अँधिआर माही हय, अउर अँधिआर माहीं चलत हय; अउर नहीं जानय, कि कहाँ जात हय, काहेकि अँधिआर ओखर आँखी बन्द कइ दिहिस ही।

12हे पियार लड़िकव, हम तोंहईं एसे लिखित हएन, कि यीसु मसीह के कारन तोंहार पंचन के पाप माफ कीन गें हँय। 13हे हमरे बाप कि नाईं मनइव, हम तोंहईं एसे लिखित हएन, कि जउन संसार के सुरुआत से हँय, तूँ पंचे उनहीं जनते हया, हे जमानव, हम तोहईं एसे लिखित हएन, कि तूँ पंचे उआ दुस्ट के ऊपर जीत पाय गया हय; हे पियार लड़िकव हम तोहईं एसे लिखित हएन, कि तूँ पंचे पिता परमातिमा काहीं जान गया हय। 14हे पितरव, हम तोंहईं एसे लिखेन हय, कि जउन संसार के सुरुआतय से हय, तूँ पंचे ओही जान गया हय; हे नवजमानव, हम तोंहईं एसे लिखेन हय, कि बलमान होइजा, अउर परमातिमा के बचन तोंहरे जीबन माहीं बना रहय, अउर तूँ पंचे उआ दुस्ट के ऊपर जीत पाय गया हय।

संसार से प्रेम न करा

15तूँ पंचे न त संसार से, अउर न संसार के चीजन से प्रेम रक्खा; अगर कोऊ संसार से प्रेम रक्खत हय, त ओखे जीबन माहीं पिता परमातिमा के प्रेम नहिं आय। 16काहेकि जउन कुछू संसार माहीं हय, मतलब देंह के अभिलासा, अउर आँखिन के अभिलासा, अउर अपने कमाई के घमन्ड, उआ पिता परमातिमा कइती से नहीं, बलकिन संसार के तरफ से हय। 17अउर इआ संसार, अउर संसार के सगली अभिलासा, दोनव मिट जात हें, पय जउन मनई परमातिमा के इच्छा के मुताबिक चलत हय, उआ हमेसा बना रहत हय।

मसीह के बिरोधी

18हे पियार लड़िकव, इआ अन्तिम समय हय, अउर जउनमेर तूँ पंचे सुने हया, कि मसीह के बिरोधी आमँइ बाला हय, ओखे मुताबिक अबहिनव खुब मसीह के बिरोधी तइआर होइगे हँय; एसे हम पंचे जानित हएन, कि इआ अन्तिम समय हय। 19मसीह के बिरोधी हमरे पंचन के बीचय म से निकरे हँय, पय सही माहीं ऊँ हमार पंचन के साथी न होंहीं; काहेकि अगर ऊँ पंचे हमरे पंचन म से होतें, त ऊँ पंचे हमरे साथय माहीं रहतें, पय ऊँ हमहीं पंचन काहीं छोंड़िके एसे चलेगें हें, कि ऊँ पंचे इआ देखाय सकँय, कि उन म से कोऊ सही माहीं हमार पंचन के कोऊ न होंहीं। 20पय तोंहार पंचन के त ऊँ परम पबित्र परमातिमा, आत्मा के व्दारा अभिसेक किहिन हीं। एसे तूँ पंचे सगले जन सत्य काहीं जनते हया। 21हम तोंहईं एसे नहीं लिखेन, कि तूँ पंचे सत्य काहीं नहीं जनते आह्या? बलकिन तूँ पंचे त ओही जनते हया, अउर एसे कि सत्य से कउनव झूँठ नहीं निकरय। 22पय जे इआ कहत हय, कि यीसु, मसीह न होंहीं, उआ लबरा हय, अइसन मनई मसीह के बिरोधी होत हय, उआ पिता परमातिमा अउर लड़िका यीसु मसीह दोनव काहीं सोइकार नहीं करय। 23जे कोऊ लड़िका यीसु काहीं सोइकार नहीं करय, ओखे लघे पिता परमातिमव नहिं आहीं; पय जे कोऊ लड़िका यीसु काहीं अपनाय लेत हय, ओखे लघे पिता परमातिमा घलाय हें। 24जउन कुछू तूँ पंचे सुरुआत से सुने हया, उहय तोंहरे जीबन माहीं बना रहय, जउन तूँ पंचे सुरुआत से सुने हया, अगर उआ तोंहरे जीबन माहीं बना रहय, त तुहूँ पंचे लड़िका यीसु माहीं, अउर पिता परमातिमा दोनव माहीं स्थिर बने रइहा। 25अउर परमातिमा हमहीं पंचन काहीं अनन्त जीबन देंइ के बचन दिहिन हीं।

26हम ईं बातन काहीं तोंहईं उनखे बारे माहीं लिखेन हय, जउन तोंहईं पंचन काहीं भरमाय देत हें। 27अउर तोंहार पंचन के उआ अभिसेक, जउन परमातिमा के तरफ से कीन ग हय, तोंहरे जीबन माहीं बना रहत हय; अउर तोंहईं एखर जरूरत नहीं आय, कि तोंहईं कोऊ सिखाबय, बलकिन तोंहईं, त उआ आत्मा, जेसे पबित्र पिता तोंहार अभिसेक किहिन हीं, तोंहईं सगली बात सिखाबत हय। उहय सच्चा हय, झूँठ नहिं आय, आत्मा जइसन तोंहईं सिखाबत हय, उहयमेर तूँ पंचे मसीह माहीं बने रहा।

परमातिमा के सन्तान

28एसे हे पियार लड़िकव, मसीह माहीं बने रहा; कि जब ऊँ प्रगट होंय, त हमहीं पंचन काहीं साहस होय, अउर जब यीसु मसीह दुसराय आमँय, त उनखे आँगे हमहीं पंचन काहीं सरमिन्दा न होंय परय। 29अगर तूँ पंचे जनते हया, कि ऊँ धरमी हें, त इहव जनते हया, कि जे कोऊ धरम के काम करत हय, उआ परमातिमा के सन्तान आय।

3

1देखा, पिता परमातिमा हमसे पंचन से केतना प्रेम किहिन हीं, कि हम पंचे परमातिमा के सन्तान कहाई, अउर हम पंचे हइअव आहेन; इआ कारन से संसार के मनई, हमहीं पंचन काहीं नहीं जानँय, काहेकि ऊँ पंचे पिता परमातिमव काहीं नहीं जाने पाइन। 2हे पियार साथिव, हम पंचे परमातिमा के सन्तान आहेन, अउर अबे तक इआ प्रगट नहीं भ, कि हम पंचे का कुछ होब! पय एतना जानित हएन, कि जब यीसु मसीह दुसराय अइहँय, त हमहूँ पंचे उनहिन कि नाईं होइ जाब, काहेकि उनहीं ओहिन मेर देखब, जइसन ऊँ हें। 3अउर जे कोऊ उनखे ऊपर इआ आसा रक्खत हय, उआ अपने काहीं उहयमेर पबित्र रक्खत हय, जइसन मसीह पबित्र हें।

4जे कोऊ पाप करत हय, उआ परमातिमा के नेम काहीं टोरत हय, काहेकि नेम काहीं टोरबय पाप आय। 5अउर तूँ पंचे त जनतय हया, कि यीसु मसीह हमरे पंचन के पापन काहीं हरँय के खातिर प्रगट भें, अउर इहव, कि उनखे जीबन माहीं कउनव पाप नहिं आय। 6जे कोऊ मसीह माहीं बना रहत हय, उआ पाप नहीं करत रहय, जे कोऊ पाप करत रहत हय, उआ न त उनखर दरसन किहिस आय, अउर न उनहीं कबहूँ जनबय भ आय। 7हे पियार लड़िकव, कोहू के भरमाए माहीं न अया; उआ जउन धरम के साथ आचरन करत रहत हय, उहय परमातिमा के नजर माहीं निरदोस हय, ठीक उहयमेर जइसन मसीह हें। 8जे कोऊ पाप करत रहत हय, उआ सइतान के सन्तान आय, काहेकि सइतान सुरुआतय से पाप करत चला आबा हय, एहिन से परमातिमा के लड़िका प्रगट भे हँय, कि सइतान के कामन काहीं नास कइ देंय। 9जे कोऊ परमातिमा के सन्तान बनिगा हय, उआ पाप नहीं करत रहय, काहेकि परमातिमा के बीज ओखे जीबन माहीं बना रहत हय, अउर उआ पाप नहीं करत रहय, काहेकि उआ परमातिमा के सन्तान बन चुका हय। 10परमातिमा के सन्तान को आय? अउर सइतान के सन्तान को आय? तूँ पंचे इआमेर से उनहीं जान सकते हया, हरेक उआ मनई जउन परमातिमा के नजर माहीं निकहा काम नहीं करय, अउर अपने भाई से प्रेम नहीं करय, उआ परमातिमा के सन्तान न होय।

एक दुसरे से प्रेम करा

11काहेकि जउन उपदेस तूँ पंचे सुरुआत से सुने हया, उआ इआ आय, कि हम पंचे एक दुसरे से प्रेम रखी। 12अउर हमहीं पंचन काहीं कैन कि नाईं न बनय क चाही, जउन दुस्टात्मा के काबू माहीं रहा हय, अउर अपने भाई के कतल किहिस रहा हय, उआ अपने भाई काहीं एसे मारि डारिस तय, कि ओखर काम बुरे रहे हँय। अउर ओखे भाई के काम धारमिकता के रहे हँय।

13हे भाई-बहिनिव, अगर संसार के मनई तोंहसे इरखा करत हें, त अचम्भा न किहा। 14हम पंचे जानित हएन, कि मउत के बन्धन से पार होइके अनन्त जीबन पाएन हय; काहेकि हम पंचे अपने भाई-बहिनिन से प्रेम रक्खित हएन, जे कोऊ प्रेम नहीं रक्खय, उआ मउत के दसा माहीं रहत हय। 15जे कोऊ अपने भाई-बहिनी से इरखा करत हय, उआ कतली हय, अउर तूँ पंचे जनतेन हया, कि कउनव कतली माहीं अनन्त जीबन नहीं रहय। 16यीसु मसीह हमरे पंचन के खातिर आपन प्रान दइ दिहिन हीं, एहिन से हम पंचे जानित हएन, कि प्रेम का आय? हमहीं पंचन काहीं घलाय अपने भाई-बहिनिन के खातिर, आपन प्रान नेउछाबर कइ देंइ चाही। 17पय जेखे लघे संसार के सम्पत होय, अउर अपने भाई-बहिनी काहीं कंगाल देखिके, ओखे ऊपर तरस खाइके ओखर मदत न करय, त ओखे जीबन म परमातिमा के प्रेम हय, इआ कइसा कहा जाय सकत हय? 18हे पियार लड़िकव, हमार पंचन के प्रेम बातन भर माहीं नहीं, बलकिन कामन के साथ अउर सच्चा होंइ चाही।

परमातिमा के आँगे साहस

19एहिन से हम पंचे जानब, कि हम पंचे सत्य के आहेन; अउर जउने बात माहीं हमार पंचन के मन हमहीं दोस देई, ओहिन के बारे माहीं हम पंचे परमातिमा के आँगे, अपने-अपने मन काहीं ढाढ़स दइ सकब। 20काहेकि परमातिमा हमरे पंचन के मन से बड़े हँय; अउर सब कुछ जानत हें। 21हे पियार साथिव, अगर हमार मन हमहीं दोसी न ठहराबय, त हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के आँगे साहस मिली। 22अउर जउन कुछू हम पंचे मागित हएन, उआ परमातिमा से मिल जात हय; काहेकि हम पंचे परमातिमा के हुकुमन काहीं मानित हएन; अउर जउन उनहीं निकहा लागत हय, उहय करित हएन। 23अउर उनखर हुकुम इआ हय, कि हम पंचे उनखे लड़िका यीसु मसीह के नाम के ऊपर बिसुआस करी, अउर जइसन ऊँ हमहीं पंचन काहीं हुकुम दिहिन हीं, ओहिन के मुताबिक आपस माहीं प्रेम रखी। 24अउर जउन उनखे हुकुमन काहीं मानत हय, उआ परमातिमा माहीं, अउर परमातिमा ओखे जीबन माहीं बने रहत हें। अउर एहिन से, अरथात पबित्र आत्मा से जउने काहीं ऊँ हमही पंचन काहीं दिहिन हीं, हम पंचे जानित हएन, कि परमातिमा हमरे जीबन माहीं बने रहत हें।

4

आत्मन काहीं जाँचा-परखा

1हे पियार साथिव, हरेक आत्मा के बिसुआस न माना, बलकिन हमेसा उनहीं जाँच परखिके देखा, कि का ऊँ परमातिमा के तरफ से आहीं कि नहीं? इआ बात हम तोंहसे एसे कहि रहेन हय, काहेकि झूँठ बोलँइ बाले खुब नबी संसार माहीं तइआर होइगे हँय। 2परमातिमा के आत्मा काहीं तूँ पंचे इआमेर से पहिचान सकते हया, हरेक उआ आत्मा, जउन इआ मानत ही, कि “यीसु मसीह मनई के रूप माहीं धरती माहीं आए हँय।” उआ परमातिमा के तरफ से हय। 3अउर जउन आत्मा यीसु काहीं नहीं मानय, उआ परमातिमा के तरफ से न होय; अउर उहय त मसीह के बिरोधी के आत्मा आय; जेखर चरचा तूँ पंचे सुन चुके हया, कि उआ आमँइ बाला हय, अउर उआ अबहिनव संसार माहीं हय। 4हे पियार लड़िकव, तूँ पंचे परमातिमा के आह्या, अउर तूँ पंचे ओखे ऊपर बिजय पाए हया; काहेकि ऊँ परमातिमा जउन तोंहरे जीबन माहीं बसे हँय, ऊँ संसार माहीं रहँइ बाले सइतान से बड़े हँय। 5ऊँ मसीह के बिरोधी मनई संसारिक जीबन जिअत हें, इआ कारन से ऊँ पंचे संसारिक बात बोलत हें, अउर संसार के मनई उनखर बात सुनत हें। 6हम पंचे परमातिमा के आहेन, जउन मनई परमातिमा काहीं जानत हय, उआ हमार पंचन के बात सुनत हय; जउन मनई परमातिमा काहीं नहीं जानय, उआ हमार पंचन के बात नहीं सुनय; इआ मेर से हम पंचे सत्य के आत्मा, अउर भटकामँइ बाली आत्मा, काहीं पहिचान सकित हएन।

परमातिमा प्रेम आहीं

7हे पियार साथिव, हम पंचे आपस माहीं एक दुसरे से प्रेम करी; काहेकि प्रेम परमातिमा से मिलत हय, अउर जउन मनई प्रेम करत हय, उआ परमातिमा के सन्तान बनिगा हय, अउर उआ परमातिमा काहीं जानत हय। 8अउर जउन मनई प्रेम नहीं करय, उआ परमातिमा काहीं नहीं जानय, काहेकि परमातिमा प्रेम आहीं। 9जउन प्रेम परमातिमा हमसे पंचन से करत हें, इआमेर से देखाइन हीं, कि ऊँ अपने एकलउता लड़िका काहीं इआ संसार माहीं पठइन हीं, कि जउने हम पंचे उनखे द्वारा अनन्त जीबन पाई। 10प्रेम एमाहीं नहीं आय, कि हम पंचे परमातिमा से प्रेम किहेन हय; बलकिन एमाहीं हय, कि परमातिमा हमसे पंचन से प्रेम किहिन हीं; अउर हमरे पापन के माफी के खातिर, अपने लड़िका काहीं पठइन हीं। 11हे पियार साथिव, जब परमातिमा हमरे पंचन के ऊपर एतना प्रेम देखाइन हीं, त हमहूँ पंचन काहीं आपस माहीं एक दुसरे से प्रेम करँय चाही। 12परमातिमा काहीं कबहूँ कोहू नहीं देखिस, अगर हम पंचे आपस माहीं प्रेम करित हएन, त परमातिमा हमरे पंचन के जीबन माहीं बास करत हें; अउर उनखर प्रेम हमरे जीबन माही सिद्ध होइगा हय।

13इआमेर से हम पंचे जान सकित हएन, कि हम पंचे परमातिमा माहीं बने रहित हएन, अउर परमातिमा हमरे भीतर निबास करत हें; काहेकि ऊँ अपने आत्मा काहीं हमहीं पंचन काहीं दिहिन हीं। 14अउर हम पंचे देखिव लिहेन हय, अउर गबाही देइत हएन, कि परमातिमा अपने लड़िका काहीं, संसार के मनइन काहीं मुक्ती देंइ के खातिर पठइन हीं। 15जे कोऊ इआ मान लेत हय, कि यीसु परमातिमा के लड़िका आहीं, परमातिमा ओखे जीबन माहीं बास करत हें, अउर उआ परमातिमा माहीं बना रहत हय। 16अउर जउन प्रेम परमातिमा हमसे पंचन से किहिन हीं, ओही हम पंचे जान गएन हय, अउर हमहीं पंचन काहीं बिसुआस हय, कि परमातिमा प्रेम आहीं। जउन मनई प्रेम माहीं बना रहत हय, उआ परमातिमा माहीं बना रहत हय; अउर परमातिमा ओखे जीबन माहीं बने रहत हें। 17हमरे पंचन के बारे माहीं प्रेम इहय रूप माहीं सिद्ध भ हय, जउने न्याय के दिन हमार पंचन के बिसुआस बना रहय, हमार पंचन के बिसुआस एसे बना हय, कि हम पंचे जउन जीबन संसार माहीं जीत हएन, उआ मसीह के जीबन कि नाईं हय। 18अउर प्रेम माहीं कउनव डेर नहीं होय, बलकिन सिद्ध प्रेम डेर काहीं भगाय देत हय, काहेकि डेर के सम्बन्ध दन्ड से होत हय, अउर जे कोऊ डेरात हय, ओखर प्रेम सिद्ध नहीं भ। 19हम पंचे एसे प्रेम करित हएन, काहेकि पहिले परमातिमा हमसे पंचन से प्रेम किहिन हीं। 20अगर कोऊ कहय, हम परमातिमा से प्रेम करित हएन; अउर अपने भाई-बहिनी से इरखा रक्खय; त उआ लबरा हय, काहेकि जउन मनई अपने भाई-बहिनी से, जउने काहीं उआ देखत हय, प्रेम नहीं करय, त परमातिमा से जिनहीं उआ देखबय नहीं भ, प्रेम नहीं कइ सकय। 21मसीह से हमहीं पंचन काहीं इआ हुकुम मिला हय, कि जे कोऊ अपने परमातिमा से प्रेम करत हय, ओही अपने भाइव से प्रेम करँय चाही।

5

परमातिमा के सन्तान संसार के ऊपर जीत पाबत हय

1जे कोऊ इआ बिसुआस करत हय, कि यीसुअय मसीह आहीं, त उआ परमातिमा के सन्तान बन जात हय, अउर जे कोऊ पिता परमातिमा से प्रेम करत हय, त उआ उनखे सन्तानन से घलाय प्रेम करत हय। 2इआमेर से जब हम पंचे परमातिमा से प्रेम करित हएन, अउर उनखे हुकुमन के पालन करित हएन, त एहिन से हम पंचे जान लेइत हएन, कि हम पंचे परमातिमा के सन्तानन से प्रेम करित हएन। 3उनखे हुकुमन काहीं पालन कइके, हम पंचे इआ देखाइत हएन, कि हम पंचे परमातिमा से प्रेम करित हएन, अउर उनखे हुकुमन के पालन करब जादा कठिन नहिं आय। 4काहेकि जे कोऊ परमातिमा के सन्तान बन जात हय, उआ संसार के ऊपर जीत पाय लेत हय, अउर संसार के ऊपर जउने से हमहीं पंचन काहीं जीत मिलत ही, उआ आय हमार पंचन के बिसुआस। 5जे कोऊ इआ बिसुआस करत हय, कि यीसु परमातिमा के लड़िका आहीं, उहय संसार के ऊपर जीत पाबत हय।

यीसु मसीह के बारे माहीं गबाही

6ऊँ यीसु मसीह आहीं जउन हमरे पंचन के लघे पानी अउर खून के व्दारा आए हँय, मतलब यीसु मसीह न केबल पानी के व्दारा, बलकिन पानी अउर खून दोनव के व्दारा आए रहे हँय। 7अउर एखर गबाही देंइ बाला पबित्र आत्मा हय, काहेकि पबित्र आत्मा सत्य हय। 8अउर गबाही देंइ बाले तीनठे हें; पबित्र आत्मा, अउर पानी, अउर खून; अउर तीनव एकय बात माहीं सहमत हें। 9जब हम पंचे मनइन के दीन गबाही काहीं मान लेइत हएन, त परमातिमा के गबाही, त उनसे बढ़िके ही, अउर परमातिमा के गबाही इआ ही, कि ऊँ अपने लड़िका के बारे माहीं गबाही दिहिन हीं। 10जे कोऊ परमातिमा के लड़िका के ऊपर बिसुआस करत हय, उआ अपने भीतर उनखर गबाही रक्खत हय; जे कोऊ परमातिमा के कही बात के बिसुआस नहीं करय, उआ परमातिमा काहीं झूँठ ठहराबत हय; काहेकि उआ उनखे दीन गबाही के बिसुआस नहीं किहिस, जउन गबाही परमातिमा अपने लड़िका के बारे माहीं दिहिन हीं। 11अउर उआ गबाही इआ आय, कि परमातिमा हमहीं पंचन काहीं अनन्त जीबन दिहिन हीं, अउर इआ जीबन उनखे लड़िका माहीं हय। 12जेखे लघे लड़िका हय, ओखे लघे अनन्त जीबन हय; अउर जेखे लघे परमातिमा के लड़िका नहिं आय, ओखे लघे अनन्त जिबनव नहिं आय।

अनन्त जीबन

13हम तोंहईं पंचन काहीं, जउन परमातिमा के लड़िका के नाम माहीं बिसुआस करते हया, एसे लिखेन हय; कि तूँ पंचे जाना, कि अनन्त जीबन तोंहार आय। 14अउर हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के आँगे जउन साहस होत हय, उआ इआ आय; कि अगर हम पंचे उनखे इच्छा के मुताबिक कुछू मागित हएन, त ऊँ हमरे बिनती काहीं सुनत हें। 15अउर जब हम पंचे इआ जानित हएन, कि जउन कुछू हम पंचे मागित हएन, ऊँ हमार पंचन के सुनत हें, त इहव जानित हएन, कि जउन कुछू हम पंचे उनसे माँगन हय, उआ पाएन हय।

16अगर कोऊ अपने भाई-बहिनिन काहीं अइसन पाप करत देखय, जेखर परिनाम परमातिमा से अलगाव न होय, त उआ अपने भाई-बहिनिन के खातिर प्राथना करय, त परमातिमा उनहीं अनन्त जीबन देइहँय। हम उनखे जीबन के बारे माहीं बात करित हएन, जे कोऊ अइसन पाप माहीं लगे हँय, जउन उनहीं परमातिमा के संगति से अलग नहीं करय। पय कुछ पाप अइसव होत हें, जेखर परिनाम परमातिमा से अलगाव होत हय; हम अइसन पापन के खातिर प्राथना करँइ काहीं नहीं कही। 17हरेकमेर के अधरम त पाप हय, पय कुछ पाप अइसव होत हें, जेखर परिनाम परमातिमा से अलगाव नहीं होय।

18हम पंचे जानित हएन, कि जे कोऊ परमातिमा के सन्तान बन जात हय, उआ पाप नहीं करत रहय; पय परमातिमा के लड़िका, ओही बचाइके रक्खत हें, अउर उआ दुस्ट ओही छुए नहीं पाबय।

19हम पंचे जानित हएन, कि हम पंचे परमातिमा के सन्तान आहेन, अउर सगला संसार दुस्ट सइतान के काबू माहीं हय।

20अउर हम पंचे इहव जानित हएन, कि परमातिमा के लड़िका आय चुके हँय, अउर ऊँ हमहीं पंचन काहीं समझ दिहिन हीं, कि हम पंचे ऊँ सच्चे परमातिमा काहीं पहिचानी, अउर हम पंचे जउन उनमा सत्य हय, मतलब उनखे लड़िका यीसु मसीह माहीं बने रहित हएन; सच्चे परमातिमा, अउर अनन्त जीबन ईंन आहीं। 21हे पियार लड़िकव, अपने-आप काहीं मूरतिन से बचाए रक्खा।