कुरिन्थुस सहर के मसीही मन्डली के नाम लिखी पवलुस के पहिल चिट्ठी
इआ चिट्ठी के परिचय
पवलुस कुरिन्थुस सहर माहीं मसीही मन्डली स्थापित किहिन तय। ओमाहीं मसीही जीबन, अउर बिसुआस से सम्बन्धित खुब परेसानी पइदा होइ गईं तय। ऊँ परेसानिन काहीं दूर करँइ के खातिर इआ पहिल चिट्ठी, कुरिन्थुस सहर के मसीही लोगन के खातिर यीसु मसीह के खास चेला पवलुस के द्वारा लिखी गे रही हय। उआ समय कुरिन्थुस सहर यूनान देस के अन्तररास्टीय सहर रहा हय। जउन रोमी सम्राज माहीं, अखाया प्रदेस के राजधानी रहा हय। उआ अपने बइपार, सम्पन्नता, बयभवसाली संस्क्रति अउर अनेकव धरमन के खातिर मसहूर रहा हय। पय उआ अपने खुब अनैतिकता के खातिर बदनाम रहा हय।
पवलुस के खातिर खास चिन्ता के बात रही हय, मसीही मन्डली के बँटबारा, अनैतिक काम, सारीरिक सम्बन्ध, अउर काज-बिआह के बारे माहीं, अउर सोच-बिचार से सम्बन्धित सबाल, मसीही मन्डली के रख रखाव के बारे माहीं, पबित्र आत्मा के दान के बारे माहीं, अउर मरेन म से पुनि जिन्दा होंइ के बारे माहीं। पय पवलुस पबित्र आत्मा के अँगुआई से इआ बताबत हें, कि खुसी के खबर के द्वारा, ईं सबालन के हल कइसन होइ सकत हय।
पाठ 13 माहीं पवलुस इआ बताबत हें, कि परमातिमा के लोगन काहीं मिले बरदानन म से सबसे उत्तम बरदान प्रेम आय। हम अपना पंचन से इआ बिनती करित हएन, कि इआ चिट्ठी काहीं अपना पंचे जरूर पढ़ी, अउर अपने मसीही जीबन काहीं आत्मिक रूप से मजबूत बनाई।
रूप-रेखा :
भूमिका 1:1-9
मसीही मन्डली माहीं गुटबन्दी 1:10—4:21
नयतिकता अउर परिबारिक जीबन 5:1—7:40
मसीही, अउर मूरतिन के पुजारी 8:1—11:1
मसीही मन्डली के लोगन के जीबन अउर अराधना 11:2—14:40
यीसु मसीह अउर बिसुआसी लोगन के मरेन म से पुनि जिन्दा होब 15:1-58
यहूदिया प्रदेस के मसीही लोगन के खातिर दान 16:1-4
निजी बिसय अउर उपसंहार 16:5-24
1पवलुस के अभिबादन
1हम पवलुस इआ चिट्ठी काहीं लिख रहेन हय, अउर परमातिमा हमहीं अपने इच्छा के मुताबिक यीसु मसीह के खास चेला होंइ के खातिर नियुक्त किहिन हीं, इआ चिट्ठी हमरे तरफ से अउर भाई सोस्थिनेस के तरफ से, 2परमातिमा के लोगन के उआ मन्डली काहीं मिलय, जउन कुरिन्थुस सहर माहीं ही, अरथात जे कोऊ मसीह यीसु माहीं जुड़ँइ के द्वारा पबित्र कीन गे हँय, अउर उनखर भक्त होंइ के खातिर अलग कीन गे हँय; अउर ऊँ सगले बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं घलाय मिलय, जउन हमरे पंचन के अउर अपने प्रभू यीसु मसीह के नाम से हरेक जघा माहीं अराधना करत हें। 3हमरे पंचन के पिता परमातिमा अउर प्रभू यीसु मसीह के तरफ से तोहईं पंचन काहीं किरपा अउर सान्ती मिलत रहय।
यीसु मसीह के द्वारा आत्मिक असीसँय
4हम तोंहरे बारे माहीं, अपने परमातिमा काहीं हमेसा धन्यबाद देइत हएन, काहेकि उनखर इआ किरपा मसीह यीसु के द्वारा तोंहरे ऊपर कीन गे ही, 5अउर यीसु मसीह माहीं जुड़े रहँइ के कारन परमातिमा तोंहरे आत्मिक जीबन माहीं खुब मदत किहिन हीं, खास करके आपन बचन बतामँइ के खातिर हरेकमेर के सक्ती दिहिन हीं, अउर उनखे बातन काहीं समझँइ के खातिर हरेकमेर के ग्यान दिहिन हीं। 6अउर मसीह के बारे माहीं जउन गबाही, हम तोहईं पंचन काहीं बताए रहेन हय, उआ तोंहरे बीच माहीं सच्ची साबित भे ही। 7अउर हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के दुसराय आमँइ के गइल देखत रहँइ बाले, तोहईं पंचन काहीं कउनव आत्मिक बरदान के कमी न होई, 8अउर ऊँ तोहईं आखिरी समय तक बिसुआस माहीं मजबूत रखिहँय, कि जउने तूँ पंचे, हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के द्वारा न्याय करँइ के दिन माहीं बेकसूर निकरा। 9परमातिमा 1:9 बिसुआस के काबिलबिसुआस के काबिल हें, अउर ऊँ तोहईं पंचन काहीं अपने लड़िका अरथात हमरे पंचन के प्रभू यीसु मसीह के संगति माहीं बोलाइन हीं।
मसीही मन्डली माहीं फूट परब
10हे भाई-बहिनिव, हम अपने प्रभू यीसु मसीह के नाम से तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि तूँ पंचे सगले जने एकय बात कहा, अउर तोंहरे बीच माहीं फूट न परय, पय एक चित्त होइके अउर एकयमेर के उद्देस्य रखिके आपस माहीं मिले रहा। 11काहेकि हे हमार भाई-बहिनिव, खलोए बहिनी के घर के मनई तोंहरे बारे माहीं हमहीं बताइन हीं, कि तूँ पंचे आपस माहीं लड़ाई-झगड़ा करते हया। 12हमरे कहँइ के मतलब इआ आय, कि तोंहरे पंचन म से कोऊ त इआ कहत हय, कि “हम पवलुस के चेला आहेन”, त कोऊ कहत हय, “हम अपुल्लोस के चेला आहेन”, अउर कोऊ कहत हय, “हम 1:12 अरथात कैफापतरस के चेला आहेन”, त कोऊ इआ कहत हय, कि “हम मसीह के चेला आहेन।” 13त तूँ पंचे इआ बताबा, मसीह त अलग-अलग झुंडन माहीं नहीं बँटे आहीं? पवलुस त तोंहरे पंचन के खातिर क्रूस माहीं नहीं चढ़ाए गे आहीं? इआ कि तूँ पंचे पवलुस के नाम से बपतिस्मा त नहीं लिहा आय? 14हम परमातिमा काहीं धन्यबाद देइत हएन, कि भाई क्रिस्पुस अउर भाई गयुस के अलाबा, तोंहरे पंचन म से अउर कोहू काहीं हम बपतिस्मा नहीं दिहेन आय। 15कि जउने कोऊ इआ न कहय, कि तोहईं पंचन काहीं पवलुस के नाम से बपतिस्मा मिला हय। 16अउर हाँ, हम भाई स्तिफनुस के घर के मनइन काहीं घलाय बपतिस्मा दिहेन हँय; इनखे अलाबा त हमहीं सुध नहिं आय, कि हम अउर कोहू काहीं बपतिस्मा दिहेन हय। 17काहेकि मसीह हमहीं बपतिस्मा देंइ के खातिर नहीं, बलकिन आपन खुसी के खबर सुनामँइ के खातिर पठइन हीं, अउर अगर हम मनइन के ग्यान के मुताबिक चतुराई से, उआ खुसी के खबर सुनाउब, त कहँव अइसा न होय, कि मसीह के क्रूस माहीं बलिदान होंइ के खुसी के खबर बेकार होइ जाय।
क्रूस के सँदेस
18काहेकि मसीह के क्रूस माहीं बलिदान होंइ के खुसी के खबर, नास होंइ बाले मनइन के नजर माहीं मूर्खता आय, पय हमरे पंचन के खातिर जे कोऊ मुक्ती पाय रहेन हँय, उआ परमातिमा के सक्ती आय। 19काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि
“जे कोऊ खुद काहीं ग्यानी मानत हें, त उनखे ग्यान काहीं हम नास करब, अउर जे कोऊ खुद काहीं हुसिआर मानत हें, त उनखे हुसिआरी काहीं हम तुच्छ कइ देब1:19 यसा 29:14।”
20त कहाँ हय ग्यानी? कहाँ हय मूसा के बिधान सिखामँइ बाला? कहाँ हय इआ संसार के बिबादी? का परमातिमा इआ संसार के ग्यान काहीं मूर्खता नहीं ठहराइन? 21अउर परमातिमा के ग्यान के मुताबिक जइसन ऊँ चाहत रहे हँय, जब मनई अपने ग्यान से उनहीं नहीं पहिचानिन, त परमातिमा काहीं इआ निकहा लाग, कि मसीह के क्रूस माहीं बलिदान होंइ के खुसी के खबर के प्रचार के द्वारा, जउने काहीं मनई मूर्खता समझत हें, उहय खुसी के खबर के द्वारा बिसुआस करँइ बाले मनइन काहीं मुक्ती देंय। 22अउर यहूदी लोग त अचरज के काम देखँइ चाहत हें, अउर यूनानी लोग ग्यान के खोज माहीं हें। 23पय हम पंचे त क्रूस माहीं चढ़ाए मसीह के प्रचार करित हएन, अउर यहूदी लोग इआ बिसुआस नहीं करँय, कि मसीह मनइन के पापन के माफी के खातिर क्रूस माहीं मरे हें, एसे ऊँ पंचे इआ खुसी के खबर काहीं सुनिके क्रोधित होइ जात हें, अउर गैरयहूदी लोग, इआ बात काहीं मूर्खता समझत हें, कि मसीह मनइन के पापन के माफी के खातिर क्रूस माहीं मरे हें। 24पय जिनहीं परमातिमा चुनिन हीं, चाह ऊँ यहूदी लोग होंय, चाह गैरयहूदी लोग, ऊँ सगलेन काहीं मुक्ती पामँइ के खातिर मसीह, परमातिमा के सक्ती अउर ग्यान आहीं। 25अउर कुछ मनई इआ कहत हें, कि परमातिमा इआ काम कइके मुरखईं के काम किहिन हीं, पय परमातिमा जउन कुछू किहिन हीं, उआ मनइन के कामन से जादा बुद्धिमानी के काम हय; अउर कुछ मनई कहत हें, कि परमातिमा के निबलता, मनइन के सक्ती से खुब बढ़िके ही।
26हे भाई-बहिनिव परमातिमा तोहईं कउने दसा माहीं चुनिन हीं, एखे बारे माहीं सोचा, ऊँ न त संसारिक रूप से खुब ग्यानी मनइन काहीं, अउर न खुब सक्तिसाली मनइन काहीं, अउर न खुब धनी परिबार के मनइन काहीं बोलाइन आय। 27बलकिन संसार के लोगन के द्वारा मूरुख समझे जाँइ बाले मनइन काहीं, परमातिमा चुनि लिहिन हीं, कि जउने खुद काहीं ग्यानी समझँइ बाले मनइन काहीं, उनखे द्वारा लज्जित करँय, अउर परमातिमा संसार के लोगन के द्वारा निबल समझे जाँइ बाले मनइन काहीं चुनि लिहिन हीं, जउने खुद काहीं बलमान समझँय बाले मनइन काहीं लज्जित करँय। 28अउर परमातिमा संसार से उनहिन काहीं जउन नीच समझे जात रहे हँय, अउर जिनसे मनई नफरत करत रहे हँय, अउर जिनखर कउनव महत्व नहीं रहा आय, चुनि लिहिन हीं, जउने उनहीं पंचन काहीं बेकार साबित करँय, जे कोऊ खुद काहीं खास समझत हें 29जउने परमातिमा के आँगे कउनव मनई घमन्ड न कए पाबय। 30अउर उनहिन के द्वारा तूँ पंचे मसीह यीसु माहीं बने हया, जउन परमातिमा के तरफ से हमरे पंचन के खातिर ग्यान ठहरे हँय, अउर उनहिन के द्वारा हम पंचे परमातिमा के नजर माहीं निरदोस साबित भएन हँय, पबित्र बनाए गएन हँय, अउर हरेक बुराइन से छुटकारा घलाय पाए हएन। 31कि जउने उहयमेर होय जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “अगर कोऊ घमन्ड करँइ चाहय, त उआ प्रभू के काम के ऊपर घमन्ड करय।”
2क्रूस माहीं चढ़ाए गें मसीह के बारे माहीं सँदेस
1हे भाई-बहिनिव, जब हम तोंहरे लघे आए रहेन हँय, त परमातिमा के छिपी योजना काहीं बढ़ाय-चढ़ाइके अउर अपने चतुराई से तोहईं नहीं बतायन। 2काहेकि हम अपने मन माहीं इआ ठान लिहेन तय, कि तोंहरे पंचन के बीच माहीं रहत समय, हम यीसु मसीह, अउर क्रूस माहीं भे उनखर मउत के अलाबा अउर कउनव बात न करब। 3अउर हम निबल बनिके, डर-भय के साथ अउर खुब काँपत-काँपत तोंहरे पंचन के साथ माहीं रहेन हँय। 4अउर हमरे बात, अउर प्रचार माहीं मनइन के बुद्धी के मुताबिक लोभामँय बाली बातँय नहीं रही आहीं, बलकिन उनमा पबित्र आत्मा, अउर ओखे सक्ती के सबूत रहा हय। 5एसे कि जउने तोंहार पंचन के बिसुआस मनइन के ग्यान के ऊपर निरभर न रहय, बलकिन परमातिमा के सक्ती के ऊपर निरभर रहय।
परमातिमा के ग्यान
6त जे कोऊ समझदार हें, उनहिन काहीं हम पंचे बुद्धी के बातँय सिखाइत हएन, अउर इआ बुद्धी इआ संसार के मनइन के बुद्धी न होय, अउर न त इआ संसार के नास होंइ बाले अधिकारिन के ग्यान आय। 7पय परमातिमा के जउन योजना, हमसे पंचन से पहिले छिपी रही ही, अउर हमरे पंचन के महिमा के खातिर परमातिमा सनातन काल से निस्चित किहिन रहा हय, उहय ग्यान काहीं हम पंचे सुनाइत हएन 8अउर उआ योजना काहीं, इआ संसार के अधिकारिन म से कोऊ नहीं जाने पाइन, काहेकि अगर ऊँ पंचे जनतें, त महिमावान प्रभू काहीं क्रूस माहीं न चढ़उतें। 9पय पबित्र सास्त्र माहीं जइसन लिखा हय, कि
“जउने बातन काहीं कोहू कबहूँ नहीं देखिस, न सुनिस, अउर न अपने मनय माहीं सोचिस, उँइन बातन काहीं, परमातिमा अपने प्रेम करँइ बालेन के खातिर तइआर किहिन हीं।”
10पय परमातिमा अपने आत्मा के द्वारा, उँइन बातन काहीं हमरे पंचन के खातिर प्रगट किहिन हीं, काहेकि परमातिमा के आत्मा सगली बातन भर काहीं नहीं, बलकिन परमातिमा के छिपी बातन काहीं घलाय जानत हय। 11अउर मनइन म से कोऊ एक दुसरे के मन के बातन काहीं नहीं जानय, पय केबल मनइन के भीतर रहँइ बाली आत्मा भर जानत ही, उहयमेर परमातिमा के बातन काहीं कोऊ नहीं जानय, केबल परमातिमा के आत्मय भर जानत हय। 12अउर जइसन संसार के मनइन के सोच-बिचार हय, त उआमेर के सोच-बिचार बाली आत्मा हम पंचे नहीं पाए आहेन, बलकिन परमातिमा के आत्मा पाएन हँय, कि जउने ऊँ बातन काहीं समझी, जउने बातन काहीं परमातिमा हमहीं पंचन काहीं सेंत-मेंत माहीं दिहिन हीं। 13अउर उनहीं हम मनइन के ग्यान के द्वारा सिखाई बातन माहीं नहीं, बलकिन पबित्र आत्मा के द्वारा सिखाई आत्मिक बातन काहीं, आत्मिक सब्दन के उपयोग कइके सुनाइत हएन। 14अउर परमातिमा जउने सच्चाई काहीं प्रगट किहिन हीं, संसारिक मनई ओही सोइकार नहीं करय, काहेकि ऊँ ओखे खातिर निछला मुरखईं के बातँय आहीं, अउर उआ उनहीं जानिव नहीं सकय, काहेकि ऊँ बातन काहीं केबल पबित्र आत्मय के द्वारा जाना जाय सकत हय। 15अउर पबित्र आत्मा के मुताबिक चलय बाला मनई, सगली बातन के जाँच-परताल करत हय, पय ओखे बातन के जाँच-परताल कोऊ नहीं कए पाबय। 16काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि “प्रभू के मन काहीं को जानिस ही? कि उनहीं सलाह दइ सकय?” पय हमरे पंचन के भीतर मसीह के मन हय।
3मसीही मन्डली माहीं गुटबन्दी
1हे भाई-बहिनिव, हम तोंहसे उआमेर बात नहीं कए पाएन, जइसन पबित्र आत्मा के मुताबिक चलय बाले मनइन से कीन जात ही, पय हमहीं उआमेर से बात करँइ क परा, जइसन संसारिक मनइन से अरथात उनसे कीन जात ही, जउन मसीह के बारे माहीं छोट बच्चन कि नाईं अनजान होत हें। 2अउर जइसन छोट बच्चन काहीं दूध पिआबा जात हय, काहेकि ऊँ अनाज नहीं पचाय सकँय, उहयमेर हमहूँ तोहईं पंचन काहीं सरल बातन काहीं सिखायन हय, काहेकि तूँ पंचे कठिन आत्मिक बातन काहीं, नहीं समझ सकत रहे आह्या; अउर सचमुच अबहिनव तक तोंहार पंचन के हालत उहयमेर ही। 3काहेकि तूँ पंचे अबय तक अपने मन के बुरी इच्छन के मुताबिक जिअँइ बाले मनइन कि नाईं हया। अउर जब तूँ पंचे आपस माहीं डाह अउर लड़ाई-झगड़ा करते हया, त बताबा, का तूँ पंचे अबय तक अपने मन के बुरी इच्छन के मुताबिक जिअँइ बाले मनइन कि नाईं नहिं आह्या? अउर का तोंहार पंचन के चाल-चलन उनहिन कि नाईं नहिं आय? 4काहेकि जब तोंहरे पंचन म से कोऊ इआ कहत हय, कि “हम पवलुस के चेला आहेन” अउर कोऊ इआ कहत हय, कि “हम अपुल्लोस के चेला आहेन” त का तूँ पंचे अबिसुआसी मनइन कि नाईं बरताव नहीं करते आह्या?
5पय अपुल्लोस अउर पवलुस के कउनव खास महत्व नहिं आय, हम पंचे त केबल सेबक आहेन जिनखे द्वारा तूँ पंचे यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस किहे हया। हम पंचे त उहय काम किहेन हँय, जउने काम काहीं प्रभू हमरे पंचन म से हरेक जन काहीं सउँपिन हीं। 6हम बीज बोएन, अपुल्लोस सींचिन अउर परमातिमा ओही बढ़ाइन। 7एसे न त बोमँइ बाले के कउनव महत्व आय, अउर न सींचँइ बाले के, पय सगला महत्व परमातिमय के हय, काहेकि बढ़ामँय बाले उँइन आहीं। 8बोमँइ बाला अउर सींचँइ बाला दोनव जने एक समान हें; पय हरेक मनई अपने-अपने मेहनत के मुताबिक आपन मजूरी पाई। 9काहेकि हम पंचे परमातिमा के साथ काम करँइ माहीं साझीदार हएन; अउर तूँ पंचे परमातिमा के खेत अउर उनखे घर कि नाईं हया।
10अउर परमातिमा के जउन किरपा हमहीं मिली हय, ओहिन के द्वारा हम बुद्धिमान कारीगर कि नाईं खुसी के खबर के नेव डारेन हय, अउर दूसर कोऊ बचन सिखामँइ के द्वारा उआ नेव के ऊपर रद्दा रक्खँइ के काम करत हय, पय हरेक मनई सतरक रहय, कि उआ कइसन रद्दा रक्खत हय। 11काहेकि जउन नेव डारी गे ही, उआ नेव खुद यीसु मसीह आहीं, अउर ओखे अलाबा अउर दूसर मेर के नेव कोऊ नहीं डार सकय। 12पय अगर कोऊ इआ नेव के ऊपर, 3:12 सोन-चाँदी अउर खुब कीमती पथरा आगी से न जरँय बाली चीजँय आहीं, अउर ईं परमातिमा के बारे माहीं सही सिच्छा के इसारा करती हईंसोन-चाँदी के इआ कि खुब कीमती पथरन के इआ कि कठबा के इआ कि 3:12 कठबा, चारा-उजार अउर बूसी आगी माहीं जरँय बाली चीजँय आहीं, अउर ईं परमातिमा के बारे माहीं गलत सिच्छा के इसारा करती हईंचारा-उजार अउर बूसी के रद्दा रक्खी, 13त जब यीसु मसीह दुबारा अइहँय, उआ दिना हरेक जन के काम सगले जनेन के आँगे प्रगट होइ जई; अउर जब ऊँ अइहँय त उनखर तेज आगी के लपट कि नाईं होई, अउर उहय आगी के द्वारा हरेक जन के काम जाँचा-परखा जई, कि उआ कइसन हय। 14अउर जेखर काम उआ नेव माहीं टिका रही, त उआ मनई जरूर मजूरी पाई। 15अउर अगर कोहू के काम उआ आगी माहीं जर जई, त उआ मनई नुकसान उठाई; पय उआ खुद उआमेर से बँचि जई, जइसन कोऊ आगी के बीच से जाइके जरत-जरत बँचि जात हय।
16अउर का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि तूँ सगले जने परमातिमा के मन्दिर आह्या; अउर परमातिमा के आत्मा तोंहरे भीतर निबास करत हय। 17अउर अगर कोऊ परमातिमा के मन्दिर काहीं नास करी, त परमातिमा ओहू काहीं नास कइ देइहँय; काहेकि परमातिमा के मन्दिर पबित्र हय, अउर उआ मन्दिर तूँ पंचे खुद आह्या।
18अउर कउनव मनई खुद काहीं धोखा न देय, अगर तोंहरे पंचन म से कउनव मनई खुद काहीं इआ संसार के ग्यानी समझत हय, त उआ मूरुख बनय, कि जउने ग्यानी बन जाय। 19काहेकि इआ संसार के ग्यान परमातिमा के नजर माहीं मूर्खता हय, जइसन कि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि “परमातिमा ग्यानी मनइन काहीं उनहिन के हुसिआरी माहीं फँसाय देत हें।” 20अउर इहव लिखा हय, कि “खुद काहीं ग्यानी समझँय बाले मनइन के बिचारन काहीं, प्रभू जानत हें, कि ऊँ बेकार हें।” 21एसे नास होंइ बाले मनइन के ऊपर कोऊ घमन्ड न करय, काहेकि सब कुछ तोंहारय पंचन के आय, 22चाह पवलुस होय, चाह अपुल्लोस होय, चाह पतरस होय, चाह संसार के सगली चीजँय होंय, चाह तूँ पंचे जिन्दा रहा, चाह मरिजा, चाह इआ समय के बातँय होंय, अउर चाह भबिस्य के बातँय होंय, सब कुछू तोंहरे पंचन के भलाइन के खातिर आय। 23अउर तूँ पंचे मसीह के आह्या, अउर मसीह परमातिमा के आहीं।
4मसीह के सेबक
1परमातिमा के जउन बातँय मनइन से छिपी रही हँय, उँइन बातन के भन्डारी, अउर मसीह के सेबक हम पंचे आहेन, इआ बात मनइन काहीं समझँय चाही। 2पय जेही भन्डारी के काम सउँपा जात हय, त ओमाहीं इआ बात देखी जात ही, कि उआ इमानदार होय। 3हमहीं एखर एक्कव चिन्ता नहिं आय, कि तूँ पंचे हमार न्याय करा, इआ कि मनइन के कउनव अदालत। अउर वास्तव माहीं हम खुदव आपन न्याय नहीं करी। 4काहेकि हमार मन हमहीं कउनव बात माहीं दोसी नहीं ठहराबय, तऊ हम एसे निरदोस नहीं ठहरी, काहेकि हमार जाँच-परताल करँइ बाले केबल प्रभू आहीं। 5एसे जब तक प्रभू न आमँय, त समय से पहिले कउनव बात के न्याय न किहा, काहेकि जब प्रभू अइहँय त अँधिआर माहीं छिपी बातन काहीं उँजिआर माहीं देखइहँय, अउर मनइन के मन के उद्देसन काहीं घलाय प्रगट करिहँय। तब परमातिमा के तरफ से हरेक जन के उचित बड़ाई होई।
6हे भाई-बहिनिव, हम ईं बातन माहीं खुद के, अउर अपुल्लोस के उदाहरन दइके, तोंहसे जउन चरचा किहेन हय, त उआ उदाहरन के रूप माहीं आय किहेन हँय, कि जउने तूँ पंचे हमसे पंचन से सिखिके, पबित्र सास्त्र माहीं लिखी बातन से जादा आँगे न बढ़ा, अउर एक जने के पच्छ लइके, अउर दुसरे मनई के बिरोध कइके, अहंकार से फूल न जा। 7अउर को कहत हय, कि तूँ पंचे दुसरे मनई से बढ़िके हया? अउर तोंहरे लघे अइसन कउन चीज ही, जउने काहीं तूँ पंचे परमातिमा से नहीं पाए आह्या? अउर अगर सब कुछ, तोहईं परमातिमय से मिला हय, त पुनि तूँ अइसन घमन्ड काहे करते हया, कि हम पंचे खुदय पाएन हँय?
8अउर तूँ पंचे इआ सोचते हया, कि हमहीं कउनव चीज के कमी नहिं आय, अउर हम पंचे धनी होइ गएन हँय, बाह भाई बाह! तूँ पंचे त बिना हमरेन राजा बन गया हय। पय इआ केतनी निकही बात होत, जब तूँ पंचे सचमुच राजा बन जात्या, कि जउने हमहूँ पंचे घलाय तोंहरे साथ राज करित। 9हमहीं त अइसन लागत हय, कि हमहीं पंचन काहीं जउन यीसु मसीह के खास चेला आहेन, परमातिमा ऊँ मनइन कि नाईं आखिरी जघा माहीं रक्खिन हीं, जिनहीं मउत के सजा पामँइ के हुकुम होइ जात ही; काहेकि हम पंचे संसार के मनइन, अउर स्वरगदूतन के नजर माहीं, तमासा बन गएन हँय। 10हम पंचे मसीह के बारे माहीं प्रचार करित हएन, एसे मनई हमहीं पंचन काहीं निरबुद्धी मानत हें, पय हाँ, भाइव, तूँ पंचे त इआ घमन्ड करते हया, कि हम पंचे मसीह के बारे माहीं खुब जानित हएन, हमहीं पंचन काहीं मनई कमजोर मानत हें, पय तूँ पंचे खुद काहीं सक्तिसाली मनते हया, मनई तोंहार पंचन के मान-सम्मान करत हें, अउर हम पंचे अपमान सहित हएन। 11अउर हम पंचे अबय तक भूँख-पिआस सहित हएन, फटे-पुरान ओन्हा पहिरित हएन, मार सहित हएन, अउर इहाँ-उहाँ मारे-मारे फिरित हएन। 12अउर हम पंचे खुद मेहनत कइके काम करित हएन, मनई हमार पंचन के बुराई करत हें, पय हम पंचे उनहीं आसिरबाद देइत हएन; ऊँ पंचे हमहीं सताबत हें, अउर हम पंचे सहित हएन। 13ऊँ पंचे हमहीं पंचन काहीं बदनाम करत हें, अउर हम पंचे उनसे प्रेम से बातँय करित हएन। अउर हम पंचे आजव तक संसार के कूरा-कचड़ा कि नाईं माने जइत हएन।
पवलुस के चेतउनी
14ईं बातन काहीं हम तोहईं पंचन काहीं सरमिन्दा करँइ के खातिर न होय लिखित हएन, पय अपने पियार लड़िका कि नाईं जानिके, ईं बातन के द्वारा तोहईं समझाइत हएन। 15काहेकि अगर तोहईं, मसीह के बारे माहीं सिखामँइ बाले चाह हजारन मनई घलाय होतें, तऊ तोंहार पंचन के आत्मिक पिता खुब जने नहिं आहीं; पय मसीह यीसु के बारे माहीं खुसी के खबर सुनामँइ के कारन, हम तोंहार पंचन के आत्मिक पिता कहाएन। 16एसे हम तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि तोंहार चाल-चलन हमरे कि नाईं होय। 17एसे हम तीमुथियुस काहीं, तोंहरे लघे पठएन हँय, जउन प्रभू माहीं बिसुआस करँइ के कारन, हमार पियार अउर बिसुआस के काबिल लड़िका आहीं। अउर हम हरेक जघा माहीं, अउर हरेक मसीही मन्डली माहीं मसीह के बारे माहीं जउन उपदेस देइत हएन, ऊँ उनखे बारे माहीं तोहईं पंचन काहीं सुध देबइहँय। 18पय तोंहरे पंचन म से कुछ जने घमन्ड से अइसन फूलिगे हँय, कि जइसन हम तोंहरे लघे कबहूँ अउबय न करब। 19पय अगर प्रभू के मरजी होई, त हम तोंहरे लघे हरबिन अउब, अउर जउन घमन्ड से फूले हें, त उनखे बातन भर काहीं नहीं, पय उनखे सक्तिव काहीं देख लेब। 20काहेकि परमातिमा के राज माहीं रहँइ के खातिर केबल बातँय भर करब जरूरी नहीं आय, पय परमातिमा के सक्ती हमरे पंचन के जीबन माहीं काम करँइ चाही। 21अउर तूँ पंचे इआ बताबा, कि का चहते हया? का हम तोहईं डाँटँइ के खातिर डंडा लइके तोंहरे लघे अई, इआ कि प्रेम अउर नम्र सुभाव के साथ अई?
5मसीही मन्डली माहीं अनुचित काम
1हम पंचे इहाँ तक सुने हएन, कि तोंहरे बीच माहीं ब्यभिचार होत हय, अउर अइसन ब्यभिचार होत हय, कि उआमेर से अबिसुआसी लोगन के बीच माहीं घलाय नहीं होय, काहेकि कोऊ-कोऊ अइसन हें, कि ऊँ अपने मइभा महतारी के साथ ब्यभिचार करत हें, 2बाह भाई बाह, एखे बादव तूँ पंचे घमन्ड से फूले हया, पय का एखे बारे माहीं तोहईं पंचन काहीं पचिताँय क न चाही? अउर जे कोऊ अइसन अनुचित काम करत हय, त ओही अपने बीच से बहिरे न निकार देंइ चाही? 3जबकि हम सारीरिक रूप से त तोंहरे साथ नहिं आहेन, तऊ आत्मिक रूप से तोंहरे लघे हाजिर हएन, अउर मानि ल्या, कि हम उहाँ हाजिर रहिके, जे कोऊ अइसन काम किहिन हीं, उनखे बारे माहीं आपन निरनय सुनाय चुकेन हय। 4जब तूँ पंचे, अउर आत्मिक रूप से हमहूँ घलाय, प्रभू यीसु के सक्ती के साथ एकट्ठा होब, त अइसन मनई काहीं प्रभू यीसु के नाम से 5ओखे पापी सुभाव काहीं नास करँइ के खातिर 5:5 अरथात ओही मसीही मन्डली से बहिरे निकार दीन जायसइतान काहीं सउँप दीन जाय, कि जउने प्रभू यीसु मसीह के दुसराय आमँय के दिन ओखर आत्मा नास होंइ से बँचि जाय।
6अउर तूँ पंचे, जउन घमन्ड से फूले हया, त इआ उचित न होय; का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि पिसान माहीं थोरी क खमीर मिलाए से, सगला माड़ा पिसान खमीर कि नाईं आमिल होइ जात हय। 7त तूँ पंचे पुरान खमीर, अरथात उआ बुरे मनई काहीं निकारिके खुद काहीं पबित्र करा, कि जउने माड़े नबा पिसान कि नाईं बन जा; अउर तूँ पंचे फसह नाम के तेउहार माहीं खाई जाँय बाली, बिना खमीर मिलाई रोटी कि नाईं हया। काहेकि हमहीं पंचन काहीं पबित्र करँइ के खातिर मसीह, फसह के मेम्ना के रूप माहीं बलिदान होइगे हँय। 8एसे आबा, हम पंचे आपन फसह के तेउहार, बुराई अउर दुस्टता से भरे पुरान खमीर के रोटी से न मनाई, बलकिन सिधाई अउर सच्चाई से भरी, बिना खमीर के रोटी से मनाई।
9हम अपने चिट्ठी माहीं, तोहईं पंचन काहीं लिखेन हँय, कि ब्यभिचार करँइ बालेन के संगति न किहा। 10अउर हम इआ न होय लिखेन हँय, कि तूँ पंचे इआ संसार के ब्यभिचार करँइ बालेन, इआ कि लालच करँइ बालेन, इआ कि दुसरेन के साथ अत्याचार करँइ बालेन, इआ कि मूरतिन के पूजा करँइ बालेन, के बेलकुल संगति न किहा; काहेकि इआ हालत माहीं त तोहईं पंचन काहीं इआ संसार से निकर जाँइ क परी। 11पय हमरे कहँय के मतलब इआ आय, कि अगर कोऊ खुद काहीं बिसुआसी भाई कहिके, ब्यभिचार करँइ बाला, इआ कि लालच करँइ बाला, इआ कि मूरतिन के पूजा करँइ बाला, इआ कि गारी देंइ बाला, इआ कि दारू पिअँइ बाला, इआ कि दुसरे के साथ अत्याचार करँइ बाला होय, त ओखर संगति न किहा; बलकिन अइसन मनई के साथ माहीं बइठिके खानव तक न खया। 12अउर जे कोऊ मसीही मन्डली के बहिरे के आहीं, अरथात अबिसुआसी आहीं, त उनखर न्याय करँइ के हमार कउनव मतलब नहिं आय, पय तोहईं पंचन काहीं उनखर न्याय करँइ क चाही, जउन मसीही मन्डली के भीतर के अरथात बिसुआसी आहीं 13पय मसीही मन्डली के बहिरे बाले मनइन के न्याय परमातिमा करिहँय, एसे तूँ पंचे उआ कुकर्मी काहीं अपने बीच म से निकारि द्या5:13 ब्यब 13:5; 17:7।
6आपस के बिबादन के निपटारा
1अउर का तोंहरे पंचन म से कोहू के अइसन हिम्मत ही, कि जब तोंहार पंचन के आपस माहीं लड़ाई-झगड़ा होय, त फँइसला करामँय के खातिर पबित्र मनइन अरथात बिसुआसी मनइन के लघे न जाइके, अबिसुआसी लोगन के लघे जाय। 2का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि बिसुआसी लोग संसार के मनइन के न्याय करिहँय? अउर जब तोहईं पंचन काहीं संसार के मनइन के न्याय करँय क हय, त तूँ पंचे छोट-छोट झगड़न के निपटारा करँइ के काबिल नहिं आह्या का? 3अउर का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि हम पंचे स्वरगदूतन के घलाय न्याय करब? त अगर अइसन हय, त का संसारिक बातन के निपटारा न करी। 4अउर अगर तोहईं पंचन काहीं संसारिक बातन के निपटारा करँय क होय, त का निपटारा करामँइ के खातिर उनहिन काहीं बोलइहा, जिनखर मसीही मन्डली माहीं कउनव कीमतय नहिं आय। 5हम तोहईं पंचन काहीं लज्जित करँइ के खातिर इआ बात कहित हएन, कि का वास्तव माहीं तोंहरे बीच माहीं एक्कव जने बुद्धिमान नहिं आहीं, कि जउन अपने बिसुआसी भाई-बहिनिन के झगड़न के निपटारा कइ सकँय? 6अउर तोंहरे पंचन म से बिसुआसी भाई-बहिनी लोग आपस माहीं मुकदमा करत हें, अउर उहव अबिसुआसी मनइन के आँगे।
7पय वास्तव माहीं तोंहरे जीबन माहीं सबसे बड़ा दोस त इआ हय, कि तूँ पंचे आपस माहीं लड़ाई-झगड़ा कइके मुकदमा लड़ते हया। अन्याय काहे नहीं सहि लेते आह्या? अउर खुद के नुकसान काहे नहीं सहि लेते आह्या? 8पय तूँ पंचे खुदय अन्याय करते हया, अउर नुकसान पहुँचउते हया, उहव अपने मसीही भाई-बहिनिन के साथ। 9अउर का तूँ पंचे इआ नहिं जनते आह्या, कि अन्याय करँइ बाले मनई परमातिमा के राज के बारिसदार न होइहँय? तूँ पंचे धोखा न खया, काहेकि ब्यभिचार करँइ बाले, मूरतिन के पूजा करँइ बाले, अपने मेहेरिआ के अलाबा दुसरे मेहेरिअन के साथ सारीरिक सम्बन्ध बनामँइ बाले, लुच्चई करँइ बाले, मंसेरुअय-मंसेरुआ आपस माहीं सारीरिक सम्बन्ध बनामँइ बाले, 10चोरी करँइ बाले, लालची, दारू पिअँइ बाले, गारी देंइ बाले, अउर दुसरेन के साथ अत्याचार करँइ बाले, परमातिमा के राज के बारिसदार न होइहँय। 11अउर तोंहरे पंचन म से कुछ जने इहइमेर के पाप करँइ बाले रहे हँय, पय अब उन पापन से तोंहईं पंचन काहीं धोय दीन ग हय, अउर पबित्र कइ दीन ग हय, अउर तोंहईं पंचन काहीं परमातिमा के सेबा के खातिर सँउप दीन ग हय, अउर प्रभू यीसु मसीह के नाम अउर हमरे पंचन के परमातिमा के आत्मा के द्वारा, परमातिमा के नजर माहीं निरदोस साबित कइ दीन ग हय।
पाप से दूर रहा अउर अपने देंह के द्वारा परमातिमा के महिमा करा
12तूँ पंचे कहते हया, कि हमहीं पंचन काहीं सब कुछ करँइ के अनुमति हय, पय सगली बातन से तोंहईं फायदा न होई; अउर हाँ, हमहीं पंचन काहीं सब कुछ करँइ के अनुमति त हय, पय हम कउनव चीज के गुलाम न बनब। 13अउर तूँ पंचे इआ कहते हया, कि “खाना पेट के खातिर आय, अउर पेट खाना के खातिर आय” पय परमातिमा खाना अउर पेट दोनव काहीं नास कइ देइहँय। अउर हमार पंचन के देंह ब्यभिचार करँइ के खातिर नहीं, प्रभू के महिमा के खातिर बनाई गे ही, अउर प्रभू हमरे देंह के भलाई के खातिर हें। 14अउर परमातिमा अपने सक्ती से जइसन प्रभू काहीं, मरे के बाद जिन्दा कइ दिहिन हीं, उहयमेर हमहूँ पंचन काहीं घलाय मरे म से जिन्दा कइ देइहँय। 15अउर का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि तोंहार पंचन के देंह मसीह के देंह के अंग आहीं? त का हम पंचे मसीह के अंग लइके बेस्या के अंग बनाई? बेलकुल नहीं। 16का तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि जे कोऊ बेस्यन से सारीरिक सम्बन्ध बनाबत हय, त उआ ओखे साथ एकय देंह होइ जात हय? काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “ऊँ दोनव जने एकय देंह होइ जइहँय।” 17अउर जे कोऊ प्रभू के साथ जुड़ा रहत हय, त उआ उनखे साथ मिलिके एकय आत्मा होइ जात हय। 18पय तूँ पंचे ब्यभिचार करँइ से बचे रहा। काहेकि एखे अलाबा जेतने अउर पाप मनई करत हय, त देंह के बहिरे करत हय, पय ब्यभिचार करँइ बाला मनई अपने देंह के बिरोध माहीं पाप करत हय। 19का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि तोंहार पंचन के देंह पबित्र आत्मा के मन्दिर आय, अउर उआ तोंहरे देंह माहीं निबास करत हय, अउर उआ तोहईं पंचन काहीं परमातिमा के तरफ से मिला हय; अउर खुद के जीबन माहीं तोंहार पंचन के कउनव हक्क नहिं आय। 20काहेकि परमातिमा दाम चुकाइके तोहईं पंचन काहीं खरीद लिहिन हीं, एसे तूँ पंचे अपने देंह के द्वारा परमातिमा के बड़ाई करा।
7काजे के बारे माहीं सलाह
1अउर अपने चिट्ठी माहीं तूँ पंचे जउन लिखे रहे हया, कि का कउनव मनई काहीं मेहेरिआ से सारीरिक सम्बन्ध बनामँइ चाही, कि नहीं? त ऊँ बातन के बारे माहीं हमार कहब इआ हय, कि 2तोंहरे बीच माहीं ब्यभिचार न होय, इआ कारन से हरेक मंसेरुआ के एकठे मेहेरिआ होय, अउर हरेक मेहेरिआ के एकठे मंसेरुआ होय। 3मंसेरुआ अपने मेहेरिआ के हक्क पूर करय, अउर मेहेरिआ अपने मंसेरुआ के हक्क पूर करय। 4काहेकि अपने देंह माहीं मेहेरिआ के हक्क नहिं आय, पय ओखे मंसेरुआ के हक्क हय; उहयमेर अपने देंह माहीं मंसेरुआ के घलाय हक्क नहिं आय, पय ओखे मेहेरिआ के हक्क हय 5अउर तूँ पंचे एक दुसरे से अलग न रहा; पय एक दुसरे के सलाह-मसबिरा से कुछ समय के खातिर अलग रहि सकते हया, कि जउने प्राथना करँइ के खातिर तोंहईं पंचन काहीं जादा मोका मिलय, अउर पुनि एकय साथ माहीं रहा; एसे कि कहँव अलग रहँइ के समय माहीं सइतान तोहईं पंचन काहीं पाप माहीं न गिराय देय। 6पय हम जउन इआ बात कहित हएन, त हुकुम न होय दइ रहेन हय, बलकिन सलाह दइ रहेन हय। 7अउर हम इआ चाहित हएन, कि सगले मनई हमरे कि नाईं बिना काज किहे रहँय; पय हरेक मनई काहीं परमातिमा के तरफ से अलग-अलग खास बरदान मिले हँय; कोहू काहीं काज कइके अउर कोहू काहीं बिना काज किहे जीबन बितामँइ के बरदान मिला हय।
8जिनखर काज नहीं भ आय, अउर जउन बिधबा हईं, त उनखे बारे माहीं हम इआ कहित हएन, कि उनहीं पंचन काहीं हमरे कि नाईं बिना काज किहे रहब निकहा हय। 9पय अगर ऊँ पंचे अपने देंह के इच्छन काहीं अपने काबू माहीं नहीं कइ सकँय, त ऊँ पंचे काज कइ लेंय, काहेकि सारीरिक सम्बन्ध बनामँइ के बड़ी इच्छा रखिके जिए से, उनहीं पंचन काहीं काज कइ लेब नीक हय।
107:10मत्ती 5:32; 19:9; मर 10:11,12; लूका 16:18अउर जिनखर काज होइगा हय, त उनहीं हम नहीं, बलकिन प्रभू हुकुम देत हें, कि मेहेरिआ अपने मंसेरुआ काहीं न छोंड़य; 11पय अगर छोंड़िव देय, त दूसर काज न करय; बलकिन अपने मंसेरुआ से दुबारा मेल-मिलाप कइ लेय, अउर मंसेरुअव अपने मेहेरिआ काहीं न छोंड़य।
12अउर दुसरे मनइन से प्रभू नहीं, बलकिन हमहिन कहित हएन, कि अगर कउनव बिसुआसी भाई के मेहेरिआ, प्रभू यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस न करत होय, पय ओखे साथ माहीं रहँइ के खातिर राजी होय, त उआ ओही न छोंड़य। 13उहयमेर जउने मेहेरिआ के मंसेरुआ अगर बिसुआस न करत होय, पय ओखे साथ माहीं रहँइ के खातिर राजी होय; त उआ अपने मंसेरुआ काहीं न छोंड़य। 14काहेकि अबिसुआसी मंसेरुआ अपने मेहेरिआ के कारन पबित्र ठहरत हय, अउर इहइमेर अबिसुआसी मेहेरिआ अपने मंसेरुआ के कारन पबित्र ठहरत ही, नहीं त तोंहार पंचन के लड़िका-बच्चा असुद्ध होतें, पय अब त ऊँ पंचे पबित्र हें। 15एखे बादव अगर जउन मंसेरुआ बिसुआस नहीं करय, उआ अगर अपने बिसुआसी मेहेरिआ काहीं छोंड़ँइ चाहत हय, त छोंड़ँइ द्या, काहेकि इआ हालत माहीं कउनव भाई इआ कि बहिनी कउनव मेर के बन्धन माहीं नहिं आहीं, पय परमातिमा हमहीं पंचन काहीं मिल-जुलिके रहँइ के खातिर बोलाइन हीं। 16अउर हे मेहेरिअव, का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि होइ सकत हय तूँ पंचे अपने-अपने मंसेरुआ के मुक्ती पामँइ के कारन बन जा? अउर हे मंसेरुअव, का तुहूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि होइ सकत हय तुहूँ पंचे अपने-अपने मेहेरिआ के मुक्ती पामँइ के कारन बन जा?
परमातिमा के द्वारा बोलाए जाँइ के मुताबिक जीबन बिताबा
17अउर प्रभू जेही जइसन जीबन दिहिन हीं, अउर परमातिमा जेही जउने परिस्थित से चुनि लिहिन हीं, त ऊँ पंचे उहय परिस्थित माहीं रहिके जीबन बितामँइ; अउर हम सगली मसीही मन्डलिन के खातिर इहय हुकुम देइत हएन। 18अउर अगर परमातिमा कोहू काहीं उआ हालत से बोलाइन हीं, जब ओखर खतना होइगा रहा हय, त उआ बिना खतना बाला न बनय, अउर जे कोऊ बिना खतना के बोलाबा ग हय, त उआ खतना न करबाबय। 19काहेकि न त खतना करामँइ बालेन के कउनव महत्व आय, अउर न त बिना खतना बालेन के; पय परमातिमा के हुकुमन के पालन करब सगलेन से खास बात आय। 20अउर हरेक मनई काहीं जउने परिस्थित माहीं बोलाबा ग रहा हय, उआ उहय परिस्थित माहीं रहय। 21अउर अगर तोहईं 7:21 गुलामी के हालत माहींदास के परिस्थित माहीं बोलाबा ग होय, त फिकिर न किहा; पय अगर स्वतंत्र होइ सकते हया, त मोके के फायदा उठाबा। 22काहेकि जे कोऊ दास के परिस्थित माहीं प्रभू माहीं बोलाबा ग हय, त उआ प्रभू के द्वारा स्वतंत्र कीन आय; उहयमेर जउने काहीं स्वतंत्र परिस्थित से बोलाबा ग हय, त उआ मसीह के दास आय। 23अउर परमातिमा दाम चुकाइके, तोंहईं पंचन काहीं खरीद लिहिन हीं, एसे तूँ पंचे मनइन के 7:23 अरथात गुलामदास न बना। 24अउर हे भाई-बहिनिव, हरेक मनई जउने परिस्थित माहीं बोलाबा ग होय, उआ, उहय परिस्थित माहीं रहिके परमातिमा के महिमा करय।
काज करँइ के बारे माहीं सिच्छा
25अउर जिनखर काज नहीं भ आय, उनखे बारे माहीं हमहीं प्रभू से कउनव हुकुम नहीं मिला आय, पय प्रभू के जउन किरपा हमहीं मिली हय, ओहिन के द्वारा बिसुआस के काबिल होंइ के कारन, हम इआ सलाह देइत हएन। 26अउर इआ समय जउन दुख-मुसीबत मनइन काहीं सहँय क परत हय, त इनखे कारन हमरे समझ से त इआ निकहा हय, कि कउनव मनई जउने परिस्थित माहीं हय, उआ उहय परिस्थित माहीं रहय। 27अउर अगर तोंहरे मेहेरिआ हय, त ओही छोंड़ँइ के कोसिस न किहा; अउर अगर तोंहरे मेहेरिआ नहिं आय, त मेहेरिआ ढूँढ़ँइ के कोसिस न किहा। 28पय अगर तूँ पंचे काजव कइ लेते हया, त उआ पाप न होय; अउर अगर कउनव कुमारी बिटिया आपन काज करत ही, त उआ कउनव पाप न होय; पय अइसन मनइन काहीं दुख-मुसीबत सहँय क परी, पय हम उनहीं इनसे बचामँइ चाहित हएन। 29अउर हे भाई-बहिनिव, हम इआ कहित हएन, कि समय बेलकुल कम कीन ग हय, एसे हम इआ चाहित हएन, कि जिनखे मेहेरिआ होंय, त ऊँ पंचे अइसन रहँय, कि जइसन उनखे मेहेरिअय नहिं आय; 30अउर दुख-मुसीबत सहँइ बाले अइसन रहँय, कि जइसन उनहीं कउनव दुख-मुसीबत हइअय नहिं आय; अउर खुसी मनामँइ बाले अइसन रहँय, कि जइसन ऊँ पंचे कबहूँ खुसी मनउबय नहीं भें; अउर कउनव चीजन काहीं खरीदँय बाले अइसन रहँय, कि जइसन उनखे लघे कुछू हइअय नहिं आय। 31अउर इआ संसार के चीजन काहीं उपयोग करँइ बाले अइसन रहँय, कि जइसन उनखे जीबन माहीं ईं चीजन के कउनव महत्व हइअय नहिं आय, काहेकि इआ संसार अउर एखर सगली चीजँय नास होंइ बाली आहीं।
32एसे हम इआ चाहित हएन, कि तूँ पंचे संसारिक बातन माहीं जादा मन न लगाबा, काहेकि जउन मनई काज नहीं करत आय, उआ प्रभू के बातन के बारे माहीं सोचत रहत हय, कि हम प्रभू काहीं कइसन खुस रक्खी। 33पय जउन मनई काज कइ लेत हय, त उआ संसारिक बातन के बारे माहीं फिकिर करत रहत हय, कि हम अपने मेहेरिआ काहीं कइसन खुस रक्खी। 34अउर जउन मेहेरिआ आपन काज कइ लेत ही, अउर जउन आपन काज नहीं करय, ऊँ दोनव माहीं फरक हय। काहेकि जउन आपन काज नहीं करय, त उआ प्रभू के बातन के बारे माहीं फिकिर करत रहत ही, कि हम अपने देंह अउर आत्मा दोनव माहीं कइसन पबित्र रही, पय जउन आपन काज करत ही, त उआ संसारिक बातन के बारे माहीं फिकिर करत रहत ही, कि हम अपने मंसेरुआ काहीं कइसन खुस रक्खी। 35अउर इआ बात हम तोंहरे भलाइन के खातिर कहित हएन, पय तोहईं पंचन काहीं फसामँइ के खातिर न होय कहित हएन, एसे तोहईं जइसन उचित लागय उहयमेर करा, अउर तूँ पंचे एक मन होइके प्रभू के सेबा माहीं लगे रहा।
36अउर अगर कोहू के लघे जबान बिटिया होय, अउर ओखर उमिर जादा होइगे होय, अउर ओखर काज करब जरूरी होय, त अगर ओखे बाप काहीं अइसन लागत होय, कि हम ओखर काज न कइके अपने बिटिया के साथ उचित नहीं कइ रहेन आय, त ओखर काज कइ देय; अउर एमाहीं कउनव पाप नहिं आय। 37पय जे कोऊ मन के खुब पक्का हय, अउर जेखे ऊपर कोहू के दबाव नहिं आय, अउर अगर उआ अपने मन माहीं बेलकुल ठान लिहिस ही, कि अपने कुमारी बिटिआ के काज न करब, त उआ निकहा करत हय। 38एसे जे कोऊ अपने कुमारी बिटिया के काज कइ देत हय, त निकहा करत हय, अउर जे कोऊ काज नहीं करय, त उआ अउरव निकहा करत हय।
39जब तक कउनव मेहेरिआ के मंसेरुआ जिन्दा रहत हय, तब तक उआ काज के बन्धन माहीं ओसे बँधी रहत ही; पय अगर ओखर मंसेरुआ मरि जाय, त उआ जेसे चाहय ओसे काज कइ सकत ही, पय केबल बिसुआसी के साथ। 40पय जउने हालत माहीं उआ ही, अगर बिना काज किहे उहय हालत माहीं रहय, त हमरे बिचार से उआ अउर धन्य कहाई; अउर हम इआ जानित हएन, कि परमातिमा के आत्मा हमरे भीतर हय।
8मूरतिन माहीं चढ़ाबा जाँइ बाला खाना
1अउर मूरतिन के ऊपर चढ़ाई जाँय बाली चीजन के बारे माहीं, अब हम पंचे इआ मानित हएन, कि एखे बारे माहीं हमहीं पंचन काहीं ग्यान हय। अउर ग्यान घमन्ड उत्पन्न करत हय, पय प्रेम से मसीही मन्डली के उन्नति होत ही। 2पय अगर कोऊ इआ मानत हय, कि हम सब कुछ जानित हएन, त जइसन ओही जानँइ क चाही, उआमेर से उआ अबय तक नहीं जानय। 3पय अगर कोऊ परमातिमा से प्रेम रक्खत हय, त परमातिमा ओही चीन्हत हें।
4एसे मूरतिन के ऊपर चढ़ाई जाँय बाली चीजन काहीं, खाँय के बारे माहीं हम पंचे जानित हएन, कि मूरत इआ संसार माहीं बास्तबिक परमातिमा न होय, काहेकि एकठे परमातिमा के अलाबा कउनव दूसर परमातिमा नहिं आँय। 5जबकि अकास अउर धरती माहीं खुब परमातिमा माने जात हें, जइसन कि वास्तव माहीं कुछ मनई खुब परमातिमा अउर खुब प्रभुअन के अराधना करत हें; 6तऊ हमरे पंचन के खातिर एकयठे परमातिमा हें, जउन संसार के सगली चीजन काहीं बनाइन हीं, अउर हम पंचे उनहिन के महिमा के खातिर जिन्दा हएन, अउर हमरे पंचन के एकयठे प्रभू हें, अरथात यीसु मसीह जिनखे द्वारा सगली चीजँय बनाई गई हँय, अउर हमहूँ पंचे घलाय उनहिन के द्वारा जीबन पाएन हँय।
7पय सगले बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं इआ बात के ग्यान नहिं आय, अउर कुछ जने त अबय तक मूरतिन काहीं परमातिमा समझिके, अउर उनखे ऊपर चढ़ाई जाँइ बाली चीजन काहीं पबित्र मानिके उनहीं खात हें, अउर नीक-नागा के बारे माहीं सोचँइ के उनखर सक्ती कमजोर होइके, असुद्ध होइ जात ही। 8पय खाना हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के लघे नहीं पहुँचाबय, चाह हम पंचे खई, त ओसे हमहीं कउनव फायदा न होई, अउर चाह न खई, त हमहीं पंचन काहीं कुछू नुकसान न होई। 9पय तूँ पंचे सतरक रह्या, कहँव अइसन न होय, कि तोंहार पंचन के इआ अजादी, बिसुआस माहीं कमजोर मनइन काहीं पाप माहीं गिरामँइ के कारन बन जाय। 10काहेकि अगर बिसुआस माहीं कमजोर कउनव मनई, तोंहईं मूरत बाले मन्दिर माहीं खाना खात देखी, जबकि तोहईं एखे बारे माहीं ग्यान हय, त ओहू के मन माहीं घलाय मूरत के ऊपर चढ़ाई चीजन काहीं खाँय के हिम्मत होइ जई। 11इआमेर से तोंहरे ग्यान के कारन बिसुआस माहीं कमजोर उआ भाई, इआ कि बहिनी, नास होइ जई, जेखे खातिर मसीह आपन जान दिहिन हीं। 12अउर इआमेर से तूँ पंचे बिसुआसी भाई-बहिनिन के बिरोध माहीं अपराध कइके, अउर उनखे कमजोर सोच-बिचार काहीं चोंट पहुँचाइके, मसीह के बिरोध माहीं अपराध करते हया। 13इआ कारन से अगर हमार खाना दुसरे बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं पाप माहीं गिरामँइ के कारन बनत हय, त हम कबहूँ माँस न खाब, कहँव अइसन न होय, कि हम उनहीं पाप माहीं गिरामँइ के कारन बन जई।
9यीसु मसीह के खास चेला के अधिकार अउर जबाबदारी
1अउर हमहूँ दुसरे मनइन कि नाईं अजाद हएन, अउर हमहूँ यीसु मसीह के खास चेला आहेन, अउर हम यीसु काहीं जउन हमार प्रभू आहीं, देखे हएन, अउर खुसी के खबर सुनामँइ के द्वारा प्रभू यीसु मसीह के बिसुआस माहीं, हमहिन तोहईं पंचन काहीं लइ आएन हय। 2अउर चाह अगर हम दुसरे मनइन के खातिर, यीसु मसीह केर खास चेला नहिंव आहेन, तऊ तोंहरे पंचन के खातिर, हम यीसु मसीह के खास चेला आहेन; काहेकि प्रभू के खास चेला होंइ के बारे माहीं तूँ पंचे हमार सबूत आह्या।
3अउर जे कोऊ हमरे ऊपर अरोप लगाबत हें, त उनखे खातिर हमार जबाब इआ हय, कि 4का तोंहसे, हमहीं पंचन काहीं, खाँइ-पिअँइ के खातिर मदत लेंइ के अधिकार नहिं आय? 5अउर का हमार पंचन के इआ अधिकार नहिं आय, कि कउनव मसीही बहिनी के साथ आपन काज करी, अउर उनहीं अपने साथ माहीं लइके इहाँ-उहाँ जई, जइसन कि यीसु मसीह के दूसर खास चेला लोग, अउर प्रभू यीसु के भाई लोग, अउर 9:5 यूनानी भाँसा माहीं पतरस काहीं कैफा कहत हेंपतरस घलाय करत हें। 6अउर का केबल हमहीं अउर बरनबासय भर काहीं आपन जीबिका चलामँइ के खातिर, काम करँइ केर अधिकार हय? 7अउर कउन अइसन मनई हय, जउन अपनेन कमाई से खाइके सेना माहीं सिपाही के काम करत हय? अउर कउन अइसन किसान हय, जउन अंगूर के बगिया लगाइके ओखर फर नहीं खाय? अउर कउन अइसन मनई हय, जउन बोकरिन अउर गड़रन काहीं पाल-पोसिके उनखर दूध नहीं पिअय?
8अउर का हम ईं बातन काहीं केबल मनई के सोच-बिचार के मुताबिक कहित हएन, अउर का इहय बात मूसा के बिधान घलाय नहीं बताबय? 9काहेकि मूसा के बिधान माहीं इआ लिखा हय, कि “फसल के गहाई करत माहीं बरधा के मुसका न लगाया।” अउर का परमातिमा केबल बरधन भर के फिकिर करत हें? नहीं। 10अउर खास करके का इआ बात हमरे पंचन के खातिर न होय कहिन हीं? हाँ इआ बात हमरेन पंचन के खातिर आय कहिन हीं, काहेकि खेत जोतँय बाला, कउनव आसा रखिके जोतत हय, अउर फसल के गहाई करँइ बाला, कुछ अनाज पामँइ के आसा से गहाई करत हय। 11एसे जब हम पंचे, तोंहरे भलाई के खातिर आत्मिक बीज बोयन हँय, त अगर हम पंचे तोंहसे 9:11 खाँइ-पिअँइ बाली चीजन काहीं लेई संसारिक चीजन के फसल काटँय चाही, त का इआ कउनव अचरज के बात आय? 12अउर जब दुसरे सेबकन के, तोंहसे पंचन से संसारिक चीजन काहीं लेंइ के अधिकार हय, त का हमार पंचन के अउर जादा तोंहरे ऊपर अधिकार नहिं आय? हय। पय हम पंचे इआ अधिकार के उपयोग नहीं किहे आहेन; पय हम पंचे सगले दुख-मुसीबत काहीं सहित हएन, कि जउने हमरे द्वारा मसीह के खुसी के खबर माहीं कउनव बाधा न आबय। 13अउर का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि जे कोऊ मन्दिर माहीं सेबा करत हें, त ऊँ पंचे मन्दिरय से आपन खाना पाबत हें; अउर जे कोऊ बेदी के सेबा करत हें, त उनखर हींसा बेदी माहीं चढ़ाई जाँय बाली चीजन माहीं होत हय? 14इआमेर से प्रभू इआ हुकुम दिहिन हीं, कि जे कोऊ खुसी के खबर के प्रचार करत हें, त उनखे खाँइ-पिअँइ के प्रबन्ध खुसी के खबर सुनँय बालेन काहीं करँइ क चाही।
15पय हम ईं अधिकारन म से एकठइँअव के उपयोग कबहूँ नहीं किहेन, अउर ईं बातन काहीं हम एसे न होय लिखेन हँय, कि तोंहसे पंचन से खाँइ-पिअँइ के खातिर हमहीं कुछू मिलय, अउर अगर हम कोहू से कउनव चीज लेइत हएन, त हमार मर जाब नीक हय। पय कोहू से कउनव चीजन काहीं लिहे बिना, खुसी के खबर के प्रचार करब हमरे खातिर बड़ाई के बात आय; अउर हम इआ नहीं चाही, कि कोऊ हमरे बड़ाई काहीं हमसे छड़ाय लेय। 16अउर अगर हम खुसी के खबर के प्रचार करित हएन, त एमाहीं हमरे बड़ाई के कउनव बात नहिं आय, काहेकि प्रभू एखर जबाबदारी हमहीं सँउपिन हीं, एसे हमार इआ करतब्य आय, कि हम खुसी के खबर के प्रचार करी, अउर अगर न करी, त हमरे जीबन के खातिर धिक्कार हय! 17काहेकि अगर हम अपने मरजी से इआ काम करित हएन, त इनाम पामँइ के हकदार हएन, पय अगर अपने मरजी से नहीं करी, तऊ खुसी के खबर के प्रचार करँइ के जबाबदारी हमहीं सउँपी गे ही। 18त पुनि हमार इनाम का आय? हमार इनाम इआ आय, कि खुसी के खबर सुनामँइ माहीं हम मसीह के प्रचार सेंत-मेंत माहीं करी, अउर खुसी के खबर सुनामँइ के कारन जउन कुछू पामँइ के हमार अधिकार हय, त ओखर पूर-पूर उपयोग न करी।
19जबकि हम स्वतंत्र हएन, एखे बादव हम खुद काहीं सगले मनइन के दास बनाय दिहेन हँय, कि जउने जादा से जादा मनइन काहीं प्रभू यीसु मसीह के लघे खींच लई। 20हम यहूदी लोगन के खातिर यहूदी लोगन कि नाईं बन गएन, कि जउने यहूदी लोगन काहीं प्रभू यीसु मसीह के लघे खींच लई, अउर मूसा के बिधान के अधीनता माहीं हम नहिं आहेन, तऊ जे कोऊ मूसा के बिधान के अधीनता माहीं रहिके, ओहिन के मुताबिक चलत हें, त उनखे खातिर हमहूँ मूसा के बिधान के अधीनता माहीं होइ गएन, कि जउने मूसा के बिधान के अधीनता माहीं चलँइ बालेन काहीं, प्रभू यीसु मसीह के लघे खींच लई। 21अउर गैरयहूदी लोगन काहीं जिनखे लघे मूसा के बिधान नहिं आय, उनहीं प्रभू यीसु के लघे लइ आमँइ केर खातिर हम उनहिन कि नाईं बन गएन, हम मूसा के बिधान के बिरोधी नहिं आहेन, बलकिन हम मसीह के सिच्छा के अधीनता माहीं हएन। 22अउर हम निबल मनइन के खातिर निबल बन गएन, कि जउने निबल मनइन काहीं प्रभू यीसु मसीह के लघे खींच लई, अउर हम हरेक मनइन के खातिर उनहिन कि नाईं बन गएन, कि जउने कउनव मेर से कइअक जनेन काहीं मुक्ती देबाय देई। 23अउर हम इआ सब कुछ खुसी के खबर काहीं फइलामँइ के खातिर करित हएन, कि जउने अउर दुसरे मनइन के साथ आसिरबाद पामँइ माहीं हिंसदार होइ जई।
मसीही जीबन के दउड़-धूप
24अउर का तूँ पंचे इआ नहीं जनते आह्या, कि दउड़ के प्रतियोगिता माहीं हरेक जन दउड़त हें, पय इनाम त एकय जन पाबत हय; त तुहूँ पंचे अइसन दउड़ा कि जउने जीत जा। 25अउर कुस्ती लड़ँइबाले हरेक पहिलमान, अपने देंह काहीं तइआर करँइ के खातिर, हरेकमेर के कसरत करत हें; अउर ऊँ पंचे त नास होंइ बाले मुकुट काहीं पामँइ के खातिर इआ सगली मेहनत करत हें, पय हम पंचे त उआ मुकुट काहीं पामँइ के खातिर मेहनत करित हएन, जउन कबहूँ नहीं नास होय। 26अउर इहइमेर हमहूँ उआ मनई कि नाईं दउड़ित हएन, जउने के आँगे लच्छ हय, पय हम हबा माहीं मुक्का नहीं मारी। 27पय हम अपने देंह के बुरी इच्छन से लड़िके, उनहीं अपने कब्जे माहीं एसे लइ अइत हएन, कि कहँव अइसन न होय, कि दुसरे मनइन के खातिर प्रचार करी, अउर हम खुद कउनव बुरा काम कइके निकम्मा ठहर जई।
10इजराइली लोगन के इतिहास से चेतउनी
1हे भाई-बहिनिव, हम इआ चाहित हएन, कि तूँ पंचे इआ बात जानिल्या, कि हमार पंचन के बाप-दादा बदरी के नीचे सुरच्छित रहत रहे हें, अउर ऊँ सगले जने लाल समुंद्र के बीचय-बीच चलिके पार होइगें;10:1 निरग 13:21; 14:22-292अउर इआमेर से ऊँ पंचे सगले जने बदरी अउर समुंद्र के बपतिस्मा लइके मूसा नबी के सहभागी बनिगें। 3अउर सगले जने एकयमेर के आत्मिक खाना खाइन;10:3 निरग 16:354अउर सगले जने एकयमेर के आत्मिक पानी पीन, काहेकि ऊँ पंचे उआ आत्मिक चट्टान से पानी पिअत रहे हें, जउन उनखे साथय-साथ चलत रही हय, अउर उआ चट्टान खुदय मसीह रहे हँय। 5पय उनमा से खुब जनेन से परमातिमा खुस नहीं रहे आहीं, एसे परमातिमा उनहीं जंगल माहीं मार डारिन।10:5 गिन 14:29,30
6अउर ईं बातँय हमरे पंचन के खातिर उदाहरन साबित भई हँय, कि जइसन ऊँ पंचे लालच किहिन रहा हय, त हम पंचे उनखी कि नाईं बुरी चीजन के लालच न करी;10:6 गिन 11:47अउर तूँ पंचे मूरतिन के पूजा करँइ बाले न बना, जइसन उनमा से कइअक जने मूरतिन के पूजा करँइ बाले बनिगे रहे हँय, जइसन कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “ऊँ पंचे खाँइ-पिअँइ के खातिर बइठें, अउर उराव मनामँइ के खातिर उठें।”10:7 निरग 32:68अउर हम पंचे ब्यभिचार न करी; जइसन कि उनमा से कइअक जने किहिन रहा हय, अउर एकय दिन माहीं तेइस हजार मनई मरिगे रहे हँय।10:8 गिन 25:1-189अउर न हम पंचे प्रभू के परिच्छा करी, जइसन कि उनमा से कइअक जने किहिन रहा हय, अउर साँपन के चाबँय के द्वारा मरिगे रहे हँय।10:9 गिन 21:5,610अउर तूँ पंचे कुड़कुड़ाबव न करा, जइसन कि उनमा से कइअक जने कुड़कुड़ान रहे हँय, अउर नास करँइ बाले स्वरगदूत के द्वारा नास कइ दीनगे रहे हँय।10:10 गिन 16:41-4911पय ईं सगली बातँय जउन उनखे ऊपर बीती रही हँय; त ऊँ उदाहरन के रूप माहीं रही हँय, अउर ऊँ बातँय हमरे पंचन के चेतउनी के खातिर लिखी गई हँय, जउन इआ जुग के आखिरी समय माहीं रहित हएन। 12एसे जे कोऊ इआ समझत हय, कि हम बिसुआस माहीं मजबूत हएन, त उआ चउकस रहय, कि कहँव उआ बिसुआस से भटक न जाय। 13अउर तूँ पंचे कउनव अइसन परिच्छा माहीं नहीं परे आह्या, जउन कि मनई के सहँइ के सक्ती से जादा होत ही, काहेकि परमातिमा सच्चे हें, अउर ऊँ तोहईं पंचन काहीं सहँइ के सक्ती से जादा परिच्छा माहीं न परय देइहँय, पय अगर परिच्छा माहीं परिव जाते हया, त ओसे निकरँइ के घलाय उपाय करिहँय, जउने तूँ पंचे ओही सहि सका।
मूरतिन के पूजा करँइ से बँचे रहा
14इआ कारन से हे हमार पियार बिसुआसी भाई-बहिनिव, तूँ पंचे मूरतिन के पूजा करँइ से बँचे रहा 15हम तोहईं पंचन काहीं समझदार जानिके इआ कहित हएन, कि जउन बातँय हम तोंहसे कहित हएन, त उनहीं जाँचा-परखा, कि ऊँ सही हईं कि नहीं। 16अउर प्रभू-भोज माहीं भागीदार होंइ के समय अंगूर के जउने रस काहीं, हम पंचे परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके पीत हएन, त मसीह के बलिदान के द्वारा जउन असीसँय हमहीं पंचन काहीं मिली हँय, उनमा हम पंचे भागीदार बन जइत हएन, उहयमेर जब हम पंचे रोटी टोरिके खइत हएन, त मसीह के द्वारा अपने देंह माहीं दुख सहँइ के द्वारा जउन असीसँय हमहीं मिली हँय, उन माहीं घलाय हम पंचे भागीदार बन जइत हएन। 17अउर हम पंचे एकयठे रोटी काहीं टोरिके खइत हएन, एसे कइअक जने होंइ के बादव, एकय देंह बन जइत हएन। 18अउर इजराइली लोगन काहीं देखा, कि जउन कुछू बेदी माहीं बलिदान कीन जात हय, ओही ऊँ पंचे खात हें, अउर ओमाहीं भागीदार बन जात हें। 19त पुनि हम इआ कहित हएन, कि न त मूरत के ऊपर चढ़ाई जाँय बाली चीज के कउनव महत्व आय, अउर न त मूरत के कउनव महत्व आय। 20अउर गैरयहूदी लोग जउन बलिदान करत हें, त ऊँ पंचे परमातिमा के खातिर न होय करत हें, बलकिन बुरी आत्मन के खातिर करत हें, त हम इआ चाहित हएन, कि तूँ पंचे बुरी आत्मन के भागीदार न बना। 21अउर तूँ पंचे प्रभू-भोज माहीं, प्रभू के मउत काहीं सुध करँइ केर खातिर अंगूर के रस पीते हया, अउर रोटी खाते हया, त पुनि तूँ पंचे बुरी आत्मन के खातिर चढ़ाए जाँइ बाले खाना काहीं, कइसा खाय सकते हया? तूँ पंचे प्रभू-भोज, अउर बुरी आत्मन के भोज, दोनव माहीं भाग नहीं लइ सकते आह्या। 22का हम पंचे अइसन कइके प्रभू काहीं क्रोधित करित हएन? का हम पंचे प्रभू से सक्तिसाली हएन?
सगले कामन के द्वारा परमातिमा के बड़ाई करा
23सगली चीजँय उचित त हईं, पय सगली चीजँय लाभदायक नहिं आहीं, अउर सगली चीजँय उचित त हईं, पय सगली चीजन से आत्मिक उन्नति नहीं होय। 24अउर हरेक मनई काहीं खुद के भलाई के बारे माहीं भर नहीं, बलकिन दुसरे मनइन के भलाई के बारे माहीं घलाय सोचँइ क चाही। 25अउर बजार माहीं जउन माँस बिकत हय, त ओही बिना संकोच के खाय सकते हया, पय ग्यान होंइ के कारन अपने मन माहीं इआ संका न करा, कि कहँव इआ मूरतिन के चढ़ाबा त न होय। 26काहेकि पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि “इआ धरती, अउर जउन कुछू एमाहीं हय, इआ सगला प्रभू के आय।” 27अउर अगर कउनव अबिसुआसी मनई तोंहार पंचन के नेउता करय, त अगर तूँ पंचे उहाँ जाँइ चहते हया, त जा, अउर जउन कुछू तोंहरे आँगे परसा जाय, त ओही खा; पय मन के सोच-बिचार के कारन बिना संकोच किहे खाय ल्या, अउर कउनव प्रस्न न पूँछा। 28पय अगर तोहईं पंचन काहीं कोऊ बताय देय, कि “इआ त मूरत के ऊपर चढ़ाबा खाना आय।” त उआ मनई के बताए के कारन अउर ओखे मन के सोच-बिचार के कारन ओही न खया। 29अउर तोंहार पंचन के सोच-बिचार इआ हय, कि हम पंचे सब कुछू खाय सकित हएन, पय हम तोंहरे सोच-बिचार के बारे माहीं न होय कहित हएन, पय दुसरे मनई के सोच-बिचार के बारे माहीं आय कहेन हँय, कि दूसर मनई अपने सोच-बिचार के द्वारा हमहीं पंचन काहीं दोसी न ठहराए पाबय, कि जउने चीज काहीं हम खइत हएन, त एही खाब उचित नहिं आय। 30अउर जउन कुछू हम पंचे खइत हएन, त परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके खइत हएन, एसे जउने खाना काहीं हम परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके खइत हएन, त ओही खाँय के कारन हमरे ऊपर दोस काहे लगाबा जात हय।
31एसे चाह तूँ पंचे खा-पिआ, अउर चाह जउन कुछू करा, पय ऊँ सगलेन के द्वारा परमातिमा के बड़ाई होंइ क चाही। 32अउर तूँ पंचे न त यहूदी लोगन के खातिर, न त गैरयहूदी लोगन के खातिर, अउर न परमातिमा के मन्डली के बिसुआसी लोगन के खातिर, बिसुआस से भटकामँइ के कारन बना। 33अउर जइसन हमहूँ घलाय, सगली बातन माहीं हरेक मनइन काहीं खुस करँइ के कोसिस करित हएन, अउर हम खुद के फायदय भर के इच्छा नहीं करी, बलकिन दुसरे मनइन के फायदा के खातिर घलाय कोसिस करित हएन, कि जउने ऊँ सगले जनेन काहीं घलाय मुक्ती मिलय।
111अउर जइसन मसीह कि नाईं हमार चाल-चलन हय, उहयमेर तोंहार पंचन के चाल-चलन घलाय, हमरे कि नाईं होंइ क चाही।
अराधना के समय मेहेरिअन काहीं मूड़ ओढ़ब
2पय हम तोहईं पंचन काहीं सराहित हएन, काहेकि तूँ पंचे हरेक बातन माहीं हमार सुध हमेसा करत रहते हया; अउर जउन-जउन सिच्छा हम तोहईं दिहेन हँय, उनखर पालन हमेसा करत रहते हया। 3पय हम चाहित हएन, कि तूँ पंचे इआ जानिल्या, कि हरेक मंसेरुआ के 11:3 अरथात मूड़मुखिया मसीह आहीं, अउर मेहेरिआ के मुखिया मंसेरुआ आय, अउर मसीह के मुखिया परमातिमा आहीं। 4अउर जउन मंसेरुआ मूड़ ओढ़िके प्राथना करत हय, इआ कि भबिस्यबानी करत हय, त उआ अपने मुखिया अरथात मसीह के अपमान करत हय। 5उहयमेर से अगर जउन मेहेरिआ आपन मूड़ उँघारिके प्राथना करत ही, इआ कि भबिस्यबानी करत ही, त उआ अपने मुखिया अरथात अपने मंसेरुआ के अपमान करत ही, अउर उआ, उआ मेहेरिआ कि नाईं हय, जउन आपन मूड़ घोटाय लिहिस ही। 6अगर कउनव मेहेरिआ मूड़ नहीं ओढ़य, त उआ आपन मूड़व घोटबाय लेय; पय अगर मेहेरिआ के खातिर बार कटबाउब, इआ कि मूड़ घोटबाउब सरम के बात आय, त उआ आपन मूड़ ओढ़य। 7अउर मंसेरुआ काहीं आपन मूड़ ओढ़ब उचित नहिं आय, काहेकि परमातिमा ओही अपने स्वरूप माहीं बनाइन हीं, अउर ओखे द्वारा परमातिमा के बड़ाई होत ही; पय मेहेरिआ काहीं आपन मूड़ ओढ़ँय क चाही, काहेकि ओखे द्वारा ओखे मंसेरुआ के बड़ाई होत ही। 8काहेकि मंसेरुआ, मेहेरिआ से नहीं बनाबा ग आय, पय मेहेरिआ-मंसेरुआ से बनाई गे ही। 9अउर मंसेरुआ मेहेरिआ के खातिर नहीं बनाबा ग आय, पय मेहेरिआ-मंसेरुआ के खातिर बनाई गे ही। 10काहेकि स्वरगदूत घलाय हमहीं पंचन काहीं देखत हें; इआ कारन से मेहेरिअन काहीं मूड़ ओढ़ँइ क चाही, अउर मूड़ ओढ़ँइ के द्वारा मेहेरिआ इआ साबित करती हईं, कि ऊँ पंचे अपने-अपने मंसेरुआ के अधीन हईं। 11पय प्रभू के नजर माहीं, मंसेरुआ के बिना न त मेहेरिअय के कउनव महत्व आय, अउर न त मेहेरिआ के बिना मंसेरुअय के कउनव महत्व आय। अरथात प्रभू के नजर माहीं दोनव एक समान हें। 12काहेकि जइसन पहिल मेहेरिआ-मंसेरुआ से बनाई गे ही, उहयमेर हरेक मंसेरुआ मेहेरिआ से पइदा होत हें, पय ईं सगलेन काहीं परमातिमय बनाइन हीं। 13अउर तूँ पंचे खुदय सोचा, कि का मेहेरिअन काहीं, बिना मूड़ ओढ़े परमातिमा से प्राथना करब सोभा देत हय? 14अउर तूँ पंचे त जनतेन हया, कि अगर कउनव मंसेरुआ बड़े-बड़े बार राखत हय, त ओखे खातिर इआ सरम के बात आय। 15पय अगर मेहेरिआ बड़े-बड़े बार राखत ही, त ओखे खातिर इआ सोभा के बात आय, काहेकि परमातिमा मूड़ ओढ़ँइ के खातिर ओही बार दिहिन हीं। 16पय अगर कउनव मनई एखे बारे माहीं बाद-बिबाद करँइ चाहय, त उआ, इआ जान लेय, कि परमातिमा के मसीही मन्डलिन माहीं, न त हमरे पंचन के इहाँ, अउर न दुसरे जघन माहीं, एखे अलाबा कउनव दूसर तरीका नहिं आय।
प्रभू-भोज के बारे माहीं सिच्छा
(मत्ती 26:26-29; मरकुस 14:22-25; लूका 22:14-20)
17अउर जउन हुकुम हम तोहईं पंचन काहीं देंइ बाले हएन, त ओखे बारे माहीं हम तोहईं नहीं सराही, काहेकि तूँ पंचे जब एकट्ठा होते हया, त तोंहार पंचन के कउनव भलाई नहीं होय, बलकिन नुकसानय होत हय। 18अउर पहिल बात त हम इआ सुनेन हँय, कि जब तूँ पंचे मसीही मन्डली माहीं एकट्ठा होते हया, त तोंहरे पंचन के बीच माहीं गुटबन्दी रहत ही, अउर एखे बारे माहीं हम थोरी-थोरी बिसुआस घलाय करित हएन, कि इआ सही आय। 19अउर तोंहरे बीच माहीं जरूर गुटबन्दी होई, कि जउने इआ बात जाने मिल जाय, कि कउन बिसुआसी सच्चे हें, अउर कउन नहिं आँय। 20अउर जउनमेर से तूँ पंचे प्रभू-भोज खाँय के खातिर एकट्ठा होते हया, ओही प्रभू-भोज नहीं कहा जाय सकय। 21अउर प्रभू-भोज खाँय-पिअँइ के समय, तोंहरे पंचन म से कुछ जने दुसरे मनइन काहीं बिना बाँटेन, सगलेन से पहिले आपन खाना खाय-पी लेत हें, इआमेर से कुछ जने त भूँखेन रहि जात हें, अउर कुछ जने खाय-पी के मतबार होइ जात हें। 22त इआ बताबा, कि खाँइ-पिअँइ के खातिर का तोंहरे पंचन के लघे घर नहिं आय? अउर तूँ पंचे केबल खुद के हित के बारे माहीं भर चिन्ता कइके, का परमातिमा के मन्डली काहीं तुच्छ नहीं मनते आह्या? अउर जउने गरीब बिसुआसी भाई-बहिनिन के लघे कुछू नहीं रहय, त का तूँ पंचे उनहीं लज्जित नहीं करते आह्या? त एखे बारे माहीं हम का कही? का तोंहार पंचन के बड़ाई करी? नहीं, हम एखे बारे माहीं तोंहार बड़ाई कबहूँ न करब।
23काहेकि जउन सिच्छा हमहीं प्रभू से मिली हय, त ओही हम तोंहऊँ पंचन काहीं घलाय बताइत हएन, कि प्रभू यीसु काहीं जउने रात पकड़ाबा ग रहा हय, उहय रात ऊँ एकठे रोटी लिहिन, 24अउर परमातिमा काहीं धन्यबाद दइके ओही टोरिन, अउर चेलन काहीं इआ कहिके दिहिन, “इआ हमार देंह आय, जउन तोंहरे खातिर दीन जात ही, हमरे यादगारी माहीं इहइमेर करत रह्या।” 25इहइमेर से यीसु बिआरी के बाद, अंगूर के रस से भरा खोरबा लिहिन, अउर कहिन, “इआ अंगूर के रस, हमार खून आय, जउन तोंहरे खातिर बहाबा जात हय, इआ खून परमातिमा के नई करार के प्रतीक आय। अउर जब कबहूँ प्रभू-भोज के समय तूँ पंचे अंगूर के रस पिआ, त हमरे यादगारी के खातिर इहइमेर किहा।” 26अउर हम पवलुस इआ कहित हएन, कि जब-जब तूँ पंचे इआ रोटी खाते हया, अउर अंगूर के रस पीते हया, त जब तक प्रभू दुबारा नहीं आमँय, तब तक उनखे मउत के प्रचार करत रहते हया। 27एसे जे कोऊ अनुचित रूप से प्रभू-भोज के रोटी खात हय, अउर अंगूर के रस पिअत हय, त उआ प्रभू के देंह अउर खून के बिरोध माहीं अपराध करत हय। 28एसे हरेक मनई अपने-आप काहीं खुदय निकहा से जाँच-परख लेय, अउर एखे बाद इआ रोटी काहीं खाय, अउर इआ अंगूर के रस पिअय। 29काहेकि जे कोऊ खाँइ-पिअँइ के समय, प्रभू के देंह के महत्व नहीं रक्खय, त उआ खाँइ-पिअँइ के द्वारा खुद काहीं दन्ड पामँइ के लाइक बनाबत हय। 30इहय कारन से तोंहरे पंचन म से खुब जने निबल अउर रोगी हें, अउर खुब जने त मरिव घलाय गे हें। 31पय अगर हम पंचे खुदय आपन जाँच-परताल निकहा से कइ लेइत, त परमातिमा से दन्ड न पाइत। 32पय प्रभू हमहीं पंचन काहीं डाँड-फटकारके सुधारत हें, कि जउने हम पंचे संसार के अबिसुआसी मनइन कि नाईं सजा न पाई। 33एसे हे भाई-बहिनिव, जब तूँ पंचे प्रभू-भोज खाँय के खातिर एकट्ठा होते हया, त एक दुसरे के इन्तजार कइके खा करा। 34पय अगर सचमुच कोहू काहीं खुब भूँख लगी होय, त ओही अपने घरय माहीं खाय लेंइ चाही, कि जउने तोंहार पंचन के एकट्ठा होब, परमातिमा से सजा पामँइ के कारन न बनय, अउर जब हम तोंहरे पंचन के लघे अउब, त दुसरे बातन काहीं समझाय देब।
12पबित्र आत्मा के द्वारा मिलँइ बाले बरदान
1हे भाई-बहिनिव, हमार इच्छा इआ ही, कि पबित्र आत्मा के द्वारा मिलँइ बाले बरदानन के बारे माहीं, तूँ पंचे निकहा से जानिल्या। 2अउर इआ बात तूँ पंचे जनतेन हया, कि तूँ पंचे जब यीसु मसीह के ऊपर बिसुआस नहीं करत रहे आह्या, त जइसन सगले मनई गूँगी मूरतिन के पूजा-पाठ करत रहे हें; उहयमेर तुहूँ पंचे घलाय करत रहे हया। 3एसे हम तोहईं पंचन काहीं इआ चेतउनी देइत हएन, कि जे कोऊ पबित्र आत्मा के अँगुआई से बोलत हय, त उआ यीसु काहीं इआ नहीं कहय, कि ऊँ स्रापित हें, उहयमेर पबित्र आत्मा के अँगुआई बिना, कउनव मनई इआ नहीं कहि सकय, कि यीसु मसीह प्रभू आहीं।
4अउर पबित्र आत्मा के द्वारा हरेक मनई काहीं दूसर-दूसर मेर के बरदान मिलत हें; पय ऊँ सगले बरदानन काहीं देंइ बाला पबित्र आत्मा एकयठे हय। 5अउर हम पंचे दूसर-दूसर मेर के सेबा त करित हएन, पय ऊँ सगलेन के द्वारा एकय प्रभू के सेबा करित हएन, अरथात यीसु मसीह के। 6अउर सेबा के काम त कइअक मेर के हें, पय परमातिमा एकयठे हें, जउन मनइन काहीं दूसर-दूसर मेर के काम करँइ के सक्ती देत हें। 7पय एकयठे पबित्र आत्मा के द्वारा हरेक मनइन काहीं दूसर-दूसर मेर के बरदान दीन जात हें, कि जउने सगले मनइन के भलाई होय। 8काहेकि उहय आत्मा के द्वारा कोहू काहीं ग्यान से बातँय करँय के बरदान मिलत हय, अउर कोहू काहीं उहय आत्मा के द्वारा समझँय के बुद्धी मिलत ही। 9अउर कोहू काहीं उहय आत्मा के द्वारा, बिसुआस माहीं मजबूत होंइ के बरदान दीन जात हय, अउर कोहू काहीं उहय आत्मा के द्वारा, बिमारन काहीं नीक करँइ के बरदान दीन जात हय। 10अउर कोहू काहीं अचरज के काम करँइ के सक्ती, अउर कोहू काहीं परमातिमा के सँदेस बतामँइ के बरदान, अउर कोहू काहीं प्रचार करँइ बाले के सँदेस काहीं समझँइ के बरदान दीन जात हय, कि उआ परमातिमा के आत्मा के तरफ से आय, कि कउनव दूसर आत्मा के तरफ से; अउर कोहू काहीं कइअक मेर के भाँसा बोलँइ के बरदान दीन जात हय, अउर कोहू काहीं भाँसन के मतलब बतामँइ के बरदान, उहय आत्मा के द्वारा दीन जात हय। 11पय ईं सगले बरदानन काहीं उहय एकयठे पबित्र आत्मा देत हय, अउर जेही जउन बरदान देब उचित हय, त उआ अपने मरजी के मुताबिक सगलेन काहीं बाँटि देत हय।
देंह के उदाहरन
12अउर जइसन हमरे पंचन म से हरेक मनई के एकयठे देंह हय, पय ओमाहीं कइयकठे अंग हें, अउर देंह माहीं कइयकठे अंग होंइ के बादव, ऊँ सगलेन काहीं मिलाइके एकयठे देंह बनत ही, उहयमेर मसीह घलाय हें। 13काहेकि हम बिसुआसिअन म से चाह उआ यहूदी होय, चाह उआ गैरयहूदी होय, चाह उआ दास होय, अउर चाह स्वतंत्र होय, हम पंचे सगले जने एकयठे आत्मा के द्वारा अउर एकय देंह होंइ के खातिर बपतिस्मा लिहेन हँय; अउर हमहीं सगलेन काहीं एकयठे आत्मा दीन ग हय। 14अउर देखा, एकठे देंह माहीं केबल एकयठे अंग नहीं होय, बलकिन खुब अंग होत हें। 15त मानि ल्या, कि अगर गोड़ इआ कहय, कि “हम हाँथ न होहेंन, एसे हम देंह के हिस्सा न होहेंन”, त का उआ इआ कारन से देंह के हिस्सा न होय? 16अउर अगर कान कहय, कि “हम आँखी न होहेंन, एसे देंह के हिस्सा न होहेंन।” त का उआ इआ कारन से देंह के हिस्सा न होय? 17पय अगर हमार पंचन के सगली देंह आँखिन होत, त हम पंचे कइसन सुनित? उहयमेर अगर हमार पंचन के सगली देंह कानय होत, त हम पंचे कइसन सूँघित? 18पय सचमुच परमातिमा अपने मरजी के मुताबिक, हरेक अंगन काहीं हमरे पंचन के देंह माहीं जोड़िके रक्खिन हीं। 19अउर अगर सगले अंग एकय मेर के होतें, त का देंह होत? नहीं। 20अउर देंह माहीं अंग त खुब होत हें, पय देंह एकयठे होत ही। 21अउर आँखी हाँथ से इआ नहीं कहि सकय, कि “हमहीं तोर जरुरतय नहिं आय”, अउर न मूड़ गोड़ेन से कहि सकय, कि “हमहीं तोंहार जरूरत नहिं आय।” 22बलकिन हमरे देंह के जउन अंग, दुसरे अंगन से कमजोर समझे जात हें, ऊँ जादा जरूरी होत हें; 23अउर देंह के जउने अंगन काहीं हम पंचे जादा आदर के काबिल नहीं समझी, अरथात जिनहीं देखामँइ माहीं लाज लागत ही, उनहिन के आदर हम पंचे जादा करित हएन, अरथात उनहीं ओन्हन से मूदिके रक्खित हएन। 24पय जउने अंगन काहीं दुसरे मनइन काहीं देखामँइ माहीं कउनव परेसानी नहीं होय, उनहीं हम पंचे ओन्हन से मूदिके नहीं रक्खी; पय परमातिमा हमरे पंचन के देंह काहीं अइसन बनाइन हीं, कि जउने अंगन के कउनव महत्व नहीं रहा आय, उनहीं अउर जादा आदर मिलय। 25जउने देंह माहीं फूट न परय, पय अंग एक दुसरे के बराबर चिन्ता करँय। 26एसे अगर देंह के एकठे अंग दुख पाबत हय, त सगले अंग ओखे साथ दुखी होत हें; अउर अगर एकठे अंग के बड़ाई होत ही, त ओखे साथ मिलिके सगले अंग खुसी मनाबत हें।
27अउर इहइमेर से तुहूँ पंचे घलाय सगले बिसुआसी भाई-बहिनी मिलिके मसीह के देंह आह्या, अउर उनखे देंह के अंग आह्या। 28अउर परमातिमा मसीही मन्डली माहीं कइअक जनेन काहीं नियुक्त किहिन हीं, पहिल यीसु मसीह के खास चेला लोगन काहीं, दूसर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन काहीं, तीसर सिच्छा देंइ बालेन काहीं, अउर एखे बाद अचरज के काम करँइ बालेन काहीं, अउर बिमारन काहीं नीक करँइ बालेन काहीं, अउर दुसरे मनइन के मदत करँइ बालेन काहीं, अउर अँगुआई करँइ बालेन काहीं, अउर हरेक मेर के भाँसा बोलँइ बालेन काहीं, घलाय नियुक्त किहिन हीं। 29एसे सगले जने यीसु मसीह के खास चेला नहीं होंय, अउर सगले जने परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले नहीं होंय, अउर सगले जने परमातिमा के बचन सिखामँइ बाले नहीं होंय, अउर न त सगले जने अचरज के काम करँइ बाले होत आहीं। 30उहयमेर सगले जनेन काहीं, बिमारन काहीं नीक करँइ के बरदान नहीं मिलत आय, अउर सगले जनेन काहीं, हरेकमेर के भाँसा बोलँइ के बरदान नहीं मिलत आय, अउर न त सगले जनेन काहीं हरेक भाँसा के मतलब बतामँइ के बरदान मिलत आय। 31एसे तूँ पंचे पबित्र आत्मा के द्वारा, मिलँइ बाले बड़े से बड़े बरदानन काहीं पामँय के धुन माहीं लगे रहा, पय अब हम तोहईं सगलेन से खास बरदान के बारे माहीं बताइत हएन।
13प्रेम सगले बरदानन से बढ़िके हय
1मानि ल्या, कि अगर हमहीं इआ बरदान मिल जाय, कि हम मनइन के अउर स्वरगदूतन के सगली भाँसन काहीं बोल सकी, पय दुसरेन से प्रेम न रक्खी त हमहीं का फायदा होई? काहेकि हमार बोलब पीतल के खुब बड़ी घन्टी अउर झाँझ के बोल कि नाईं होई। 2अउर अगर हम परमातिमा केर सँदेस बताय सकी, अउर परमातिमा के छिपी सगली योजनन काहीं, अउर हरेक मेर के ग्यान काहीं समझी, अउर हमहीं इहाँ तक बिसुआस होय, कि अगर हम प्राथना करब, त पहार सरकि जई, पय अगर दुसरेन से प्रेम नहीं रक्खी, त हमार कउनव महत्व नहिं आय। 3अउर अगर हम आपन सगली धन-सम्पत गरीबन काहीं दान कइ देई, इआ कि अपने देंह काहीं दुसरे के भलाई के खातिर बलिदान कइ देई, अउर प्रेम न रक्खी, त हमहीं कउनव फायदा न होई। 4अउर प्रेम करँइ बाला मनई, अपने जीबन माहीं धीरज रक्खत हय, दुसरे के ऊपर किरपा करत हय; अउर दुसरे के ऊपर जलन नहीं रक्खय; अउर उआ खुद के बड़ाई नहीं करय; अउर उआ घमन्डिव नहीं होय, 5अउर उआ दुसरे के साथ अनुचित बेउहार नहीं करय, उआ केबल अपनय भर भलाई नहीं चाहय, अउर उआ हरबिन क्रोधित नहीं होय, अउर जे कोऊ ओखे साथ बुरा बेउहार करत हें, त उनसे उआ बदला नहीं लेय। 6अउर उआ बुरे कामन से कबहूँ खुस नहीं होय, पय सच्चाई से खुस होत हय। 7अउर उआ अपने जीबन माहीं सगली बातन काहीं सहि लेत हय, हरेक बातन माहीं परमातिमा के ऊपर बिसुआस रक्खत हय, अउर हरेक बातन माहीं परमातिमा के ऊपर आसा रक्खत हय, अउर उआ हमेसा सगली बातन माहीं धीरज रक्खत हय।
8अउर परमातिमा के सँदेस बताउब, दूसर-दूसर भाँसा बोलब, अउर हमार पंचन के खास ग्यान घलाय एक दिन खतम होइ जई, पय प्रेम करब कबहूँ न खतम होई। 9काहेकि समझँइ के जउन ग्यान, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ के जउन बरदान हमहीं पंचन काहीं मिले हँय, ऊँ अधूरे हें। 10अउर जब ऊँ अइहँय जउन परिपूर्न हें, त हमार पंचन के अधूरापन मिट जई। 11अउर एखे बारे माहीं हम एकठे उदाहरन बताइत हएन, “जब हम छोट बुदे लड़िका रहेन हँय, त छोट बुदे लड़िकन कि नाईं बोलत रहेन हँय, अउर हम उनहिन कि नाईं सोचत रहेन हँय, अउर हमार समझ उनहिन कि नाईं रही हय, पय जब हम बड़े होइ गएन हँय, त छोट बुदे लड़िकन कि नाईं बेउहार करब छोंड़ दिहेन हँय।” 12अउर जइसन हमहीं पंचन काहीं अइना माहीं धुँधुरुक देखात हय, इहइमेर से अबय हम पंचे परमातिमा काहीं साफ-साफ नहीं देखि सकी, पय एक दिना हम उनहीं आमने-सामने देखब, अउर अबय हमहीं उनखे बारे माहीं थोरिन क जानकारी ही, पय जब ऊँ अइहँय, त उनखे बारे माहीं हम निकहा से जान लेब, जइसन कि ऊँ हमरे बारे माहीं निकहा से जानत हें। 13एसे अब हमहीं पंचन काहीं परमातिमा के ऊपर हमेसा बिसुआस रक्खँइ चाही, अउर उनखे ऊपर आसा रक्खँइ चाही, अउर एक दुसरे से प्रेम रक्खँइ चाही, काहेकि ईं तीनव कबहूँ न नास होइहँय, पय इन माहीं सगलेन से बड़ा प्रेम हय।
14दूसर-दूसर भाँसा बोलब अउर परमातिमा के सँदेस बताउब
1अउर सगले मनइन से प्रेम करत आपन जीबन बिताबा, अउर पबित्र आत्मा के द्वारा मिलँइ बाले बरदानन काहीं पामँइ के धुन माहीं लगे रहा, बिसेस रूप से परमातिमा के सँदेस बतामँइ के बरदान काहीं पामँइ के धुन माहीं लगे रहा। 2काहेकि जब कउनव मनई अनजान भाँसा माहीं बात करत हय, त उआ मनइन से नहीं, बलकिन परमातिमा से बातँय करत हय। जउन उआ बोलत हय, ओही दूसर मनई नहीं समझे पामँय, काहेकि उआ भेद के बातन काहीं पबित्र आत्मा के अँगुआई से बोलत हय। 3पय जे कोऊ परमातिमा के सँदेस बताबत हय, त एसे मनइन के बिसुआस मजबूत होत हय, अउर उनखर साहस बाढ़त हय, अउर उनहीं सान्ती मिलत ही। 4अउर जे कोऊ अनजान भाँसा माहीं बात करत हय, त उआ केबल अपनेन भर काहीं आत्मिक रूप से मजबूत बनाबत हय; पय जे कोऊ परमातिमा के सँदेस बताबत हय, त उआ मसीही मन्डली के सगले मनइन काहीं आत्मिक रूप से मजबूत बनाबत हय। 5अउर हम त चाहित हएन, कि तूँ सगले जने अनजान भाँसन माहीं बात करा, पय हम एहू से जादा इआ चाहित हएन, कि तूँ पंचे परमातिमा के सँदेस बताबा, काहेकि अनजान भाँसा बोलँइ बाला, अगर मसीही मन्डली के मनइन काहीं, आत्मिक रूप से मजबूत करँइ के खातिर ओखर मतलब न समझाबय, त परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाला, मसीही मन्डली के मनइन काहीं आत्मिक रूप से मजबूत करँइ माहीं ओसे जादा मदतगार हय।
6एसे हे भाई-बहिनिव, अगर हम तोंहरे लघे आइके अइसन भाँसा माहीं बात करी, जउने काहीं तूँ पंचे नहीं समझते आह्या, अउर दरसन के द्वारा जउन बातँय परमातिमा हमहीं बताइन हीं, उनहीं न बताई, अउर जउन ग्यान हमहीं मिला हय, ओही न बताई, परमातिमा के सँदेस न बताई, अउर सिच्छा न देई, त तोहईं पंचन काहीं का फायदा होई? 7इहइमेर से अगर बसुरी अउर सारंगी के स्वर माहीं कउनव अन्तर न रही, त मनई कइसन पहिचनिहँय, कि बसुरी बाजत ही, कि सारंगी? 8अउर अगर बिगुल बाजँय के अबाज निकहा से सुनाई न देई, त युद्ध करँइ के खातिर को तइआर होई? 9इहइमेर से अगर तुहूँ पंचे घलाय, अगर जीभ से साफ-साफ न बोलिहा, त जउन कुछ बोला जात हय, त उआ कइसन समझे मिली? त तोंहार बोलब बेकार होइ जई। 10अउर इआ संसार माही कइअक मेर के भाँसा हईं, अउर हरेक भाँसन के कुछ न कुछ मतलब होत हय। 11एसे अगर हम कउनव भाँसा के मतलब नहीं जानी, त हम बोलँइ बाले के खातिर परदेसी ठहरब, अउर बोलँइ बाला हमरे खातिर परदेसी ठहरी। 12एसे जब तुहूँ पंचे घलाय, पबित्र आत्मा के द्वारा मिलँइ बाले बरदानन काहीं, पामँइ के धुन माहीं लगे रहते हया, त जादा से जादा अइसन बरदानन काहीं पामँइ के कोसिस करा, जउने से मसीही मन्डली आत्मिक रूप से मजबूत होय।
13एसे जे कोऊ अनजान भाँसा माहीं बात करत हय, त उआ प्राथना करय, जउने ओखर मतलब घलाय बताय सकय। 14एसे अगर हम अनजान भाँसा माहीं प्राथना करित हएन, त पबित्र आत्मा के अँगुआई से हमार आत्मा प्राथना करत ही, पय जउन हम कहित हएन, त ओही नहीं समझी। 15एसे हमहीं का करँइ चाही? हम अपने आत्मा से प्राथना करब अउर अपने बुद्धी से घलाय प्राथना करब, अउर हम अपने आत्मा से गाना गाउब, अउर अपने बुद्धी से घलाय गाना गाउब। 16अउर अगर कउनव मनई पबित्र आत्मा के अँगुआई से अनजान भाँसा माहीं धन्यबाद, इआ कि प्राथना करी, त जे कोऊ उआ भाँसा काहीं नहीं समझँय, त ओखे साथ कइसन आमीन करिहँय? काहेकि जउन धन्यबाद, इआ कि प्राथना उआ किहिस ही, ऊँ पंचे ओही नहीं समझँय। 17अउर तूँ त निकहा से धन्यबाद करते हया, पय एसे दुसरे मनइन काहीं कउनव फायदा न होई। 18अउर हम परमातिमा काहीं धन्यबाद देइत हएन, कि हम तोंहरे पंचन म से सगलेन से जादा अनजान भाँसन माहीं बोलित हएन। 19पय मसीही मन्डली माहीं अनजान भाँसा माहीं दस हजार बात बोलँइ से, हमहीं इआ जादा नीक जान परत हय, कि दुसरेन काहीं सिखामँइ के खातिर, जउने भाँसा काहीं ऊँ पंचे समझत हें, हम पाँचयठे बात कही। 20अउर हे भाई-बहिनिव, जइसन छोट बुदे लड़िकन के सोच-बिचार रहत हय, उआमेर तोंहार पंचन के सोच-बिचार न होंइ चाही; बुराई के खातिर छोट लड़िकन कि नाईं अनजान बना, पय तोंहार सोच-बिचार सयानन कि नाईं होय। 21अउर पबित्र सास्त्र माहीं इआ लिखा हय, कि प्रभू कहत हें, कि “अनजान भाँसा बोलँइ बाले मनइन के द्वारा हम ईं लोगन से बातँय करब, तऊ ऊँ पंचे हमरे बातन काहीं न सुनिहँय।”14:21 यसा 28:11,1222त एसे हमहीं इआ मालुम होत हय, कि अनजान भाँसन काहीं बोलँइ के बरदान बिसुआसिअन केर खातिर न होय, बलकिन अबिसुआसी लोगन के खातिर चिन्हारी आय, अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ के बरदान अबिसुआसी लोगन केर खातिर नहीं, बलकिन बिसुआसी लोगन केर खातिर चिन्हारी आय। 23पुनि अगर मसीही मन्डली के सगले जने एक जघा माहीं एकट्ठा होंय, अउर हरेक जन अनजान भाँसा माहीं बोलँइ लागँय, त ऊँ पंचे, जउन ईं बातन के बारे माहीं नहीं जानँय, अउर अबिसुआसी लोग उहाँ आइके देखिहँय, त का कइहँय? का ऊँ पंचे इआ न कइहँय, कि ईं पंचे पागल होइगे हँय। 24पय अगर सगले जने परमातिमा के सँदेस बतामँइ लागँय, अउर अगर उहाँ कउनव अबिसुआसी मनई, इआ कि जउन ईं बातन के बारे माहीं नहीं जानय, भीतर आय जाय, त सगले जने ओही परख के जान लेइहँय, अउर ओही दोसी ठहराय देइहँय। 25अउर ओखे मन के छिपी बातँय प्रगट होइ जइहँय, तब उआ गोड़न गिरिके परमातिमा काहीं प्रनाम करी, अउर इआ बिसुआस कइ लेई, कि वास्तव माहीं तोंहरे बीच माहीं परमातिमा हें।
अराधना माहीं अनुसासन
26हे भाई-बहिनिव, जब तूँ पंचे अराधना के खातिर एकट्ठा होते हया, त कोऊ स्तुति गान करत हय, कोऊ उपदेस देत हय, कोऊ अनजान भाँसा माहीं बात करत हय, कोऊ परमातिमा के उआ बचन काहीं प्रगट करत हय, जउन ओही दरसन माहीं मिला हय, अउर कोऊ त अनजान भाँसा के मतलब समझाबत हय, त हमार सलाह इआ ही, कि तूँ पंचे चाह कुछू करा, पय इनखे द्वारा मसीही मन्डली के सगले मनइन के आत्मिक बढ़ोत्तरी होंइ चाही। 27अउर तोहईं पंचन काहीं अगर अनजान भाँसा माहीं बात करँय क होय, त दुइ जने, इआ कि जादा से जादा तीन जने, ओसरी-पहरा बोलँय, अउर एक जने ओखर मतलब समझाबय। 28पय अगर मतलब समझामँइ बाला न होय, त अनजान भाँसा बोलँइ बाला चुप्पय मसीही मन्डली माहीं रहय, अउर अपने मनय-मन परमातिमा से बात करय। 29अउर परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन म से दुइ, इआ कि तीन जने परमातिमा के सँदेस बतामँइ, अउर उनखे अलाबा दूसर लोग उनखे बातन काहीं सुनँय, अउर ऊँ बातन काहीं जाँचय-परखँय। 30पय अगर कउनव मनई जब परमातिमा के सँदेस बताय रहा होय, त जउन दूसर मनई उहाँ बइठ हय, अगर ओही परमातिमा कउनव बात प्रगट किहिन हीं, त ओही बोलँइ चाही, अउर पहिल बाले काहीं चुप्पय होइ जाँइ चाही। 31अउर इआमेर से तूँ पंचे, सगले जने ओसरी-पहरा परमातिमा के सँदेस बताय सकते हया, कि जउने सगले जनेन काहीं सिच्छा अउर प्रोत्साहन मिलय। 32अउर इआ बात काहीं सुध रक्खा, कि परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के आत्मा, परमातिमा के सँदेस बतामँइ बालेन के काबू माहीं रहत ही। 33काहेकि परमातिमा गड़बड़ी डारँइ बाले नहीं, पय सान्ती देंइ बाले परमातिमा आहीं, अउर जइसन कि परमातिमा के पबित्र मनइन के सगली मसीही मन्डलिन माहीं होत हय।
34अउर सगली मेहेरिआ, मसीही मन्डली के सभा माहीं चुप्पय रहँय, काहेकि उनहीं बात करँइ के अनुमति नहिं आय, बलकिन अधीन रहँइ के अनुमति ही, अउर जइसन कि मूसा नबी के बिधान माहीं घलाय लिखा हय। 35अउर अगर ऊँ पंचे कुछू सिखँय चहती हँय, त घर माहीं अपने-अपने मंसेरुआ से सिखँय, काहेकि मसीही मन्डली माहीं बात करब, मेहेरिअन काहीं सोभा नहीं देय।
36हे कुरिन्थुस सहर के बिसुआसी मनइव, हम तोंहसे इआ पूँछित हएन, कि का परमातिमा के बचन तोंहरेन पंचन से सुरू भ हय? अउर का उआ केबल तोंहरेन लघे तक पहुँचा हय? 37अउर अगर कउनव इआ सोचत हय, कि हम परमातिमा के सँदेस बतामँइ बाले आहेन, इआ कि आत्मिक जन आहेन, त ओही इआ जान लेंइ क चाही, कि जउन कुछू हम लिख रहेन हँय, उआ प्रभू के हुकुम आय। 38त अगर कउनव मनई जउन कुछू हम लिखेन हँय, ओही नहीं मानय, त ओहू के बात न मानी जाय। 39एसे हे भाई-बहिनिव, परमातिमा के सँदेस बतामँइ के कोसिस माहीं लगे रहा, अउर अनजान भाँसा बोलँइ से कोहू काहीं न रोंका; 40पय ईं सगली बातँय, सभ्यता से, अउर नेम के मुताबिक कीन जाँय।
15मरेन म से जि उठँइ के बारे माहीं
1हे भाई-बहिनिव, हम तोहँई पंचन काहीं जउन खुसी के खबर पहिले सुनाए रहेन हँय, अउर जउने काहीं तूँ पंचे सोइकार घलाय किहा तय, अउर जउने के मुताबिक अबय तक चलतेव हया, त उहय खुसी के खबर हम पुनि सुनाइत हएन। 2ओहिन के द्वारा तोंहईं पंचन काहीं मुक्ती घलाय मिलत ही, उहय खुसी के खबर जउन हम तोहईं पंचन काहीं सुनायन तय, अगर ओहिन माहीं तूँ पंचे स्थिर रहते हया, नहीं त तोंहार बिसुआस करब बेकार होइ जई।
3इआ कारन से हम सगलेन से पहिले इआ खास बात, तोहईं पंचन काहीं बताय दिहेन हय, जउन हमहीं बताई गे रही हय, कि पबित्र सास्त्र माहीं लिखे बचन के मुताबिक, मसीह हमरे पंचन के पापन के माफी के खातिर मरिगें, 4अउर उनहीं गाड़ दीन ग, अउर पबित्र सास्त्र माहीं लिखे बचन के मुताबिक, ऊँ तिसरे दिना जिन्दा होइगे हँय। 5अउर ऊँ पतरस काहीं देखाई दिहिन, ओखे बाद अउर दुसरे खास चेलन काहीं घलाय देखाई दिहिन। 6पुनि ओखे बाद पाँच सव से जादा बिसुआसी भाई-बहिनिन काहीं एक साथय देखाई दिहिन, जिनमा से कुछ जने अबय तक जिन्दा हें, पय कुछ जने मरिगे हँय। 7ओखे बाद ऊँ याकूब काहीं देखाई दिहिन, ओखे बाद अउर सगले खास चेलन काहीं घलाय देखाई दिहिन। 8अउर सगलेन के बाद हमहूँ काहीं घलाय देखाई दिहिन, जउन कि समय से पहिले पइदा होंइ बाले सतमासा लड़िका कि नाईं हएन, काहेकि हम सही समय माहीं खास चेला नहीं बन पाएन। 9अउर हम यीसु मसीह के खास चेलन म से सगलेन से छोट हएन, बलकिन यीसु मसीह के खास चेला कहामँइ के काबिल तक नहिं आहेन, काहेकि पहिले हम परमातिमा के मन्डली काहीं सताबत रहेन हँय। 10पय हम अब जउन कुछू हएन, त परमातिमा के किरपा से हएन, अउर उनखर जउन किरपा हमरे ऊपर भे ही, उआ बेकार नहीं गय; काहेकि हम ऊँ सगले खास चेलन से जादा मेहनत किहेन हय, अउर सचमुच उआ मेहनत हम खुद न होय किहेन हय, पय हमरे ऊपर किरपा कइके ओही परमातिमा किहिन हीं। 11एसे चाह हम होई, अउर चाह दूसर यीसु मसीह के खास चेला होंय, हम पंचे सगले जने एकय मेर के खुसी के खबर के प्रचार करित हएन, अउर एहिन के ऊपर तूँ पंचे बिसुआस घलाय किहा तय।
मरेन म से पुनि जिन्दा होब
12एसे जब मसीह के बारे माहीं इआ प्रचार कीन जात हय, कि मरे के बाद ऊँ जिन्दा होइगें हँय, त तोंहरे पंचन म से कुछ जने इआ काहे कहत हें, कि मरे मनई जिन्दा होतय नहिं आहीं? 13अउर अगर मरे मनई जिन्दा होतय नहिं आहीं, त पुनि मसीह घलाय मरे के बाद जिन्दा नहीं भे आहीं। 14अउर अगर मसीह नहीं जि उठे आहीं, त हमार पंचन के प्रचार करब बेकार हय, अउर तोंहार पंचन के बिसुआसव करब बेकार हय। 15अउर अगर अइसन हय, त हमहूँ पंचे घलाय परमातिमा के बारे माहीं झूँठ गबाही देंइ बाले साबित होइ गएन, काहेकि हम पंचे परमातिमा के बारे माहीं इआ गबाही दिहेन हँय, कि ऊँ मसीह काहीं मरेन म से जिन्दा कइ दिहिन हीं, पय उनखे कहे के मुताबिक अगर मरे मनई जिन्दा नहीं कीन जाँय, त पुनि परमातिमा मसीह काहीं घलाय जिन्दा नहीं किहिन। 16अउर हम पुनि कहित हएन, कि अगर मरे मनई जिन्दा होतय नहिं आहीं, त पुनि मसीह घलाय मरेन म से जिन्दा नहीं भे आहीं; 17अउर अगर मसीह जिन्दा नहीं भे आहीं, त तोंहार पंचन के बिसुआसव करब बेकार हय, अउर तूँ पंचे अबय तक पाप के बन्धन माहीं हया। 18अउर हाँ, त पुनि ऊँ पंचे घलाय नास होइगें, जउन मसीह के ऊपर बिसुआस करत मरिगे हँय। 19अउर अगर हम पंचे मसीह से असीस पामँइ के आसा, केबल इहय संसारिक जीबन भर माहीं रक्खित हएन, त हमार पंचन के किस्मत सगले मनइन से जादा खराब ही।
20पय मसीह वास्तव माहीं मरे के बाद जिन्दा होइगे हें, अउर मरेन म से जिन्दा होंइ बालेन माहीं, ऊँ पहिल फल आहीं; अउर ऊँ इआ साबित कइ दिहिन हीं, कि जउन बिसुआसी लोग मरत हें, ऊँ पंचे घलाय जिन्दा कीन जइहँय। 21काहेकि जब पहिल मनई आदम पाप किहिस, एसे संसार माहीं मउत आइगे, उहयमेर से दूसर मनई मसीह के द्वारा मरेन म से दुबारा जिन्दा होब सुरू भ। 22अउर जइसन आदम के द्वारा पाप करँइ के कारन, सगले मनई मरत हें, उहयमेर जे कोऊ मसीह के ऊपर बिसुआस करत हें, ऊँ पंचे घलाय जिन्दा कीन जइहँय। 23पय हरेक जन के खातिर समय निस्चित कीन ग हय, सगलेन से पहिले मसीह काहीं पहिल फल के रूप माहीं जिन्दा कीन ग हय, अउर जब मसीह दुबारा अइहँय, त जे कोऊ उनखे ऊपर बिसुआस करत हें, ऊँ पंचे घलाय एक साथय जिन्दा कीन जइहँय। 24अउर एखे बाद इआ संसार के अन्त आय जई, तब इआ संसार माहीं सासन करँइ बाले सगले अधिकारिन काहीं, अउर बुरी सक्तिन काहीं यीसु मसीह नास कइ देइहँय, अउर अपने राज काहीं पिता परमातिमा के हाँथ माहीं सउँपि देइहँय। 25काहेकि जब तक ऊँ अपने सगले दुसमनन काहीं हराय न देइहँय, तब तक उनहीं राज करब जरूरी हय।15:25 भज 110:126अउर सगलेन से आखिरी दुसमन, मउत काहीं घलाय नास कीन जई। 27काहेकि बचन माहीं लिखा हय, कि “परमातिमा सब कुछ मसीह के अधीन कइ दिहिन हीं”, त एखर मतलब इआ हय, कि सब कुछ मसीह के अधीन कइ दीनगा हय; अउर जबकि परमातिमा सब कुछ उनखे अधीन कइ दिहिन हीं, त केबल उँइन भर उनखे अधीन नहिं आहीं।15:27 भज 8:628अउर जब परमातिमा सब कुछ अपने लड़िका यीसु मसीह के काबू माहीं कइ दिहिन हीं, त लड़िकव खुद, परमातिमा के काबू माहीं होइ जइहँय, कि जउने केबल परमातिमय सगलेन के ऊपर सासन करँइ बाले ठहरँय।
29अउर परमातिमा मरेन म से मनइन काहीं जरूर जिन्दा करिहँय, त अगर तूँ पंचे इआ बात माहीं बिसुआस नहीं करते आह्या, त तोंहरे पंचन म से जे कोऊ मरे मनइन के खातिर बपतिस्मा लेत हें; त कउने आसा से लेत हें? 30अउर हमहूँ पंचे घलाय काहे हरेक समय अपने जीबन काहीं खतरा माहीं डारित हएन? 31हे भाई-बहिनिव, हम अपने प्रभू यीसु मसीह माहीं तोंहरे खातिर जउन घमन्ड करित हएन, ओहिन के कसम खाइके कहित हएन, कि हम रोज मउत के खतरा के सामना करित हएन। 32अउर इफिसुस सहर के मनई हमार खुब बिरोध किहिन, अउर ऊँ पंचे जंगली जानबरन कि नाईं हमरे साथ लड़ाई किहिन, पय अगर मुरदा जिन्दा न कीन जइहँय, त हमार लड़ाई, केबल इआ संसारय के रहि जई; अउर एसे हमहीं कउनव फायदा न मिली? अउर अगर अइसन हय, त आबा हम पंचे खई-पी अउर मउज करी, काहेकि काल्ह त मरिन जाँइ क हय।15:32 यसा 22:1333अउर जे कोऊ अइसन कहत हें, त उनखे बातन माहीं परिके, धोखा न खया, काहेकि “बुरी संगति निकहे चरित्र काहीं बिगाड़ देत ही।” 34एसे तूँ पंचे होस माहीं आय जा, अउर निकहा जीबन जिआ, पाप करब बंद कइ द्या; अउर तोंहरे पंचन म से कुछ जने अइसन हें, कि ऊँ पंचे परमातिमा के सच्ची सिच्छन काहीं नहीं जानँय; अउर इआ बात हम तोहईं पंचन काहीं सरमिन्दा करँइ के खातिर कहित हएन।
बिसुआसी लोगन काहीं कबहूँ न नास होंइ बाली देंह मिली
35पय कुछ जने इआ पूँछ सकत हें, कि “मरे मनई कइसन जिन्दा कइ दीन जात हें, अउर ऊँ पंचे कउनमेर के देंह पाबत हें?” 36अउर जे कोऊ इआ कहत हें, त उनसे हम इआ कहित हएन, हे मूरखव, तूँ पंचे धरती माहीं जउन बीज बोउते हया, त जब तक उआ सड़ नहीं जाय, तब तक नबा बिरबा नहीं तइआर होय। 37अउर जउन तूँ बोउते हया, त उआ देंह न होय जउन तइआर होत ही, पय उआ निछला दाना आय, चाह उआ गोहूँ के दाना होय, अउर चाह अउर दुसरे अनाज के। 38पय परमातिमा अपने मरजी के मुताबिक ओही देंह देत हें; अउर हरेक बीज के खास देंह होत ही। 39अउर सगलेन के देंह एकयमेर के नहीं होय, मनइन के देंह दूसर मेर के होत ही, अउर पसुअन के दूसर मेर के होत ही, अउर पंछिन के देंह दूसर मेर के होत ही; अउर मछरिन के देंह दूसर मेर के होत ही। 40उहयमेर अकास माहीं रहँइ बाले सुरिज, जोंधइआ अउर तरइअन के अकार धरती माहीं रहँइ बालेन के देंहन से अलग हय; पय अकास माहीं रहँइ बालेन के तेज, दूसर मेर के हय, अउर इआ संसार माहीं रहँइ बालेन के तेज, दूसर मेर के हय। 41अउर अकास माहीं रहँइ बालेन के तेज घलाय, एक दुसरे से अलग हय, जइसन कि सुरिज के तेज दूसर मेर के हय, जोंधइआ के तेज दूसर मेर के हय, अउर तरइअन के तेज दूसर मेर के हय, (काहेकि एकठे तरइया के तेज से दुसरे तरइया के तेज माहीं अन्तर हय।)
42अउर इहइमेर से मरे मनई घलाय जिन्दा कीन जइहँय, जइसन कउनव बीज काहीं जब धरती माहीं बोबा जात हय, त उआ सड़िके नास होइ जात हय, उहयमेर जब कउनव मनई मर जात हय, त ओखे संसारिक देंह काहीं गाड़ दीन जात हय, अउर उआ नास होइ जात ही, पय जउन देंह जिन्दा होंइ के समय दुबारा मिलत ही, त उआ अमर रहत ही। 43अउर जब इआ संसारिक देंह काहीं धरती माहीं गाड़ा जात हय, त उआ निबलता के साथ गाड़ी जात ही, अउर ओमाहीं कउनव सक्ती नहीं रहय, पय जउन देंह जिन्दा होंइ के समय दुबारा मिलत ही, उआ सक्ती के साथ जिन्दा होइ जात ही, अउर तेजोमय होत ही। 44अउर जउने देंह काहीं गाड़ा जात हय, उआ संसारिक देंह आय, पय जउन देंह जिन्दा होंइ के समय दुबारा मिलत ही, उआ आत्मिक देंह आय; काहेकि अगर संसारिक देंह होत ही, त आत्मिक देंह घलाय होत ही। 45अउर पबित्र सास्त्र माहीं घलाय लिखा हय, कि “पहिल मनई, अरथात आदम जिन्दा प्रानी बना” अउर आखिरी आदम, अरथात मसीह जीबन देंइ बाले आत्मा बनिगें। 46अउर जउन देंह हमहीं पंचन काहीं पहिले दीन गे ही, उआ संसारिक आय, पय जउन देंह हमहीं बाद माहीं दीन जई, उआ आत्मिक होई। 47अउर पहिल मनई अरथात आदम काहीं माटी से बनाबा ग रहा हय; पय दूसर मनई अरथात यीसु मसीह स्वरग से आए हें। 48अउर जइसन पहिल मनई माटी से बनाबा ग तय, उहयमेर संसार के सगले मनई घलाय माटी से बने हँय; अउर जइसन दुसरे मनई के देंह स्वरग के हय, उहयमेर हमार पंचन के देंह घलाय स्वरग के होइ जई। 49अउर आदम काहीं जइसन माटी से बनाबा ग रहा हय, उहयमेर हमार पंचन के रूप घलाय उनहिन कि नाईं हय, पय दूसर मनई स्वरग के आहीं, एसे हमार पंचन के रूप घलाय उनहिन कि नाईं होई।
50हे हमार भाई-बहिनिव, हम तोहईं इआ बताइत हएन, कि हम पंचे खून अउर माँस से बने इआ देंह के साथ, परमातिमा के राज के हकदार नहीं बन सकी, काहेकि नास होंइ बाली इआ संसारिक देंह, कबहूँ न नास होंइ बाले स्वरग के हकदार नहीं होइ सकय। 51सुना, हम तोहईं पंचन काहीं भेद के बात बताइत हएन, कि हम पंचे सगले जने मरब न, पय हमार पंचन के रूप बदल जई। 52अउर जब आखिरी तुरही बजाई जई, तब एक पल माहीं मरे मनई, कबहूँ न नास होंइ बाली देंह काहीं पाइके जिन्दा होइ जइहँय; अउर जे कोऊ उआ समय जिन्दा रइहँय, त उनखर रूप बदल जई। 53काहेकि हम पंचे इआ नासवान देंह काहीं लइके स्वरग माहीं नहीं जाय सकी, एसे उहाँ जाँय के खातिर मरँइ बाली इआ देंह काहीं, अमर रहँइ बाली देंह माहीं बदला जाब जरूरी हय। 54अउर जब इआ नास होंइ बाली देंह, कबहूँ न नास होंइ बाली देंह माहीं बदल जई, अउर मरनहार देंह अमरता काहीं पहिर लेई, त पबित्र सास्त्र माहीं जउन लिखा हय, उआ पूर होइ जई: कि
“मउत काहीं नास कइ दीन ग हय, अउर जीत मिलिगे ही।”15:54 यसा 25:8
55“हे मउत, तोर जीतब कहाँ चला ग? अउर तोर डंक घलाय कहाँ चला ग?”
56अउर मूसा के बिधान से हमहीं पंचन काहीं इआ जाने मिलत हय, कि हम पंचे पाप करित हएन, अउर पाप के कारन मउत काहीं सक्ती मिलत ही, एसे हम पंचे मरित हएन। 57पय हम पंचे परमातिमा काहीं धन्यबाद देइत हएन, कि ऊँ हमरे प्रभू यीसु मसीह के द्वारा, हमहीं पंचन काहीं पाप अउर मउत से जीत देबाबत हें 58एसे हे हमार पियार भाई-बहिनिव, तूँ पंचे बिसुआस माहीं मजबूत होइके, प्रभू माहीं अटल रहा, अउर प्रभू के काम करँइ के खातिर, खुद काहीं पूरी तरह से समरपित कइ द्या, काहेकि तूँ पंचे इआ जनते हया, कि प्रभू के खातिर जउन मेहनत तूँ पंचे करते हया, उआ बेकार न होई।
16बिसुआसी लोगन के खातिर दान एकट्ठा करब
1अउर यरूसलेम सहर के बिसुआसी लोगन के खातिर, दान एकट्ठा करँइ के बारे माहीं, जइसन हुकुम हम गलातिया प्रदेस के मसीही मन्डलिन काहीं दिहेन हँय; उहयमेर तुहूँ पंचे घलाय करा। 2अउर हप्ता के पहिल दिन, तोंहरे पंचन म से हरेक जन अपने-अपने कमाई के मुताबिक, अपने लघे कुछ पइसा बचाइके रक्खा करय, कि जउने जब हम तोंहरे लघे अई, तब दान एकट्ठा न करँइ परय। 3अउर जब हम उहाँ अउब, त जिनहीं पठमँइ के तोंहार पंचन के इच्छा होई, हम उनहीं चिट्ठी दइके पठय देब, कि जउने ऊँ पंचे तोंहार दान, यरूसलेम सहर माहीं पहुँचाय देंय। 4अउर अगर तोहईं पंचन काहीं इआ लागत हय, कि हमरव जाब उहाँ उचित हय, त हमहूँ उनखे साथ जाब।
यात्रा करँइ के पवलुस के योजना
5अउर हम मकिदुनिया प्रदेस जाँइ के योजना बनाए हएन, एसे हम मकिदुनिया प्रदेस से होइके तोंहरे पंचन के लघे अउब। 6अउर होइ सकत हय, कि हम तोंहरेन लघे रुक जई, अउर जाड़े के रित उहँय काटी, अउर एखे बाद जहाँ हमहीं जाँइ क होई, त तूँ पंचे हमरे यात्रा माहीं मदत किहा। 7अउर अब तोंहसे केबल मुलाखात कइके चले जाँइ के हमार इच्छा नहिं आय; पय हम इआ आसा करित हएन, कि अगर प्रभू के मरजी होई, त कुछ समय तक हम तोंहरे पंचन के लघे रहब। 8पय पिन्तेकुस्त16:8 लैब्य 25:15-21; ब्यब 16:9-11 के तेउहार तक हम इफिसुस सहर माहीं रहब। 9जबकि बिरोध करँइ बाले मनई उहाँ खुब हें, तऊ सेबा करँइ के खातिर उहाँ खुब मोका हय।16:9 खा.चे.काम 19:8-10
10अउर जब तीमुथियुस आय जाँय, त उनखे साथ अइसन बेउहार किहा, कि जउने ऊँ तोंहरे पंचन के लघे निडर होइके रहँय; काहेकि ऊँ हमरी कि नाईं प्रभू के सेबा करत हें। 11एसे तोंहरे पंचन म से कोऊ उनहीं तुच्छ न जान्या, बलकिन उनखे यात्रा माहीं तूँ पंचे उनखर पूर मदत किहा, कि जउने ऊँ कुसल पूर्बक हमरे लघे आय जाँय, काहेकि हम उनखर इन्तजार कइ रहेन हँय, कि ऊँ दुसरे भाइन के साथ हमरे लघे आय जाँय। 12अउर भाई अपुल्लोस से हम खुब बिनती किहेन, कि ऊँ दुसरे बिसुआसी भाइन के साथ माहीं तोंहरे पंचन के लघे जाँय; पय इआ समय जाँइ के उनखर बेलकुल इच्छा नहीं रही आय, पय बाद माहीं जब उनहीं मोका मिली, त ऊँ जरूर आय जइहँय।
पवलुस के आखिरी हुकुम अउर नबस्कार
13हे भाई-बहिनिव, तूँ पंचे सतरक रहा, बिसुआस माहीं अटल रहा, साहसी बना, अउर प्रभू माहीं बलवन्त बना। 14अउर तूँ पंचे जउन कुछू करते हया, त ओही प्रेम से करा। 15हे भाई-बहिनिव, तूँ पंचे स्तिफनास के घर के मनइन काहीं त जनतेन हया, कि ऊँ पंचे अखाया प्रदेस के पहिल बिसुआसी आहीं, अउर ऊँ पंचे पबित्र लोगन के सेबा16:15 1 कुरि 1:16 करँइ के खातिर हमेसा तइआर रहत हें। 16एसे हम तोंहसे इआ बिनती करित हएन, कि तूँ पंचे अइसन लोगन के अधीनता माहीं रहा, अउर जे कोऊ उनखे साथ कठोर मेहनत करत हें, उनहूँ पंचन के अधीनता माहीं घलाय रहा। 17अउर तोंहरे पंचन के तरफ से, भाई स्तिफनास, भाई फूरतूनातुस अउर भाई अखइकुस हमसे मिलँय आएँ, त हम खुब खुस भएन; काहेकि तूँ पंचे हमरे साथ न होंइ के कारन, हमार जउन मदत नहिं कइ पाया, त ओही ऊँ पंचे पूर कइ दिहिन हीं। 18अउर ऊँ पंचे हमरेव मन काहीं खुस किहिन हीं, अउर तोंहरेव पंचन के मन काहीं घलाय खुस किहिन हीं; एसे अइसन लोगन के सम्मान करा।
19आसिया प्रदेस के मसीही मन्डली के बिसुआसी लोग तोहईं पंचन काहीं, प्रभू के नाम माहीं नबस्कार करत हें; अक्विला अउर प्रिस्किल्ला अउर उनखे घर माहीं एकट्ठा होंइ बाली मसीही मन्डली के बिसुआसी लोग घलाय, तोहईं पंचन काहीं पूर मन से नबस्कार करत हें।16:19 खा.चे.काम 18:220अउर सगले बिसुआसी भाई-बहिनी घलाय, तोहईं पंचन काहीं नबस्कार करत हें, अउर तुहूँ पंचे घलाय एक दुसरे काहीं पबित्र मन से, अउर प्रेम के साथ नबस्कार करा।
21अउर हम पवलुस खुद अपने हाँथे से तोहईं पंचन काहीं नबस्कार लिखित हएन। 22अउर अगर कउनव मनई, प्रभू से प्रेम नहीं रक्खय, त प्रभू ओही सराप देइहँय। हे हमार पंचन के प्रभू, अपना हरबी अई। 23प्रभू यीसु मसीह के किरपा तोंहरे पंचन के ऊपर हमेसा बनी रहय। 24मसीह यीसु के संगति माहीं रहँइ बाले, सगले जनेन के साथ हमार प्रेम बना रहय। आमीन।